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                <title>heart patients - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>दिल के मरीजों का सर्दियों में बढ़ जाता है हार्ट अटैक का खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[सर्दियों में हमें अपनी सेहत के प्रति जागरूक रहने की आवश्यकता है, क्योंकि ठंडे मौसम में हमारे शरीर में कई महत्वपूर्ण बदलाव होते हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/the-risk-of-heart-attack-increases-in-winter-for-heart/article-64117"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-12/heart-attack.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। सर्दियों में हमें अपनी सेहत के प्रति जागरूक रहने की आवश्यकता है, क्योंकि ठंडे मौसम में हमारे शरीर में कई महत्वपूर्ण बदलाव होते हैं। गिरते तापमान में हमारे हाथों एवं पैरों की नसें सिकुड़ जाती हैं, जिससे हमारा रक्तचाप (बीपी) बढ़ता है। ऐसे में अक्सर बीपी के मरीजों को दवा की डोज बढ़ानी पड़ती है, लेकिन आमतौर पर मरीज डॉक्टर को नहीं दिखाकर उन्हीं दवाओं को लेते रहते हैं जो गलत है। सिकुड़ी हुई नसों में खून का संचार बनाए रखने के लिए हृदय को अतिरिक्त काम करना पड़ता है। ऐसे में हार्ट अटैक के मामले बढ़ जाते हैं। जिन मरीजों का दिल कमजोर है, उनको हार्ट फेलियर का खतरा बढ़ जाता है। सर्दी, खांसी, बुखार एवं अन्य संक्रमण भी हार्ट की समस्याओं को बढ़ाते हैं। सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अंशुल कुमार गुप्ता ने बताया कि ठंड के इस मौसम में हृदय रोगियों के साथ-साथ आमजन को भी हार्ट की बीमारियों से बचने के लिए विशेष सावधानियां बरतने की जरूरत है।</p>
<p><strong>तनाव ना लें, योगा और ध्यान को अपनाएं<br /></strong>डॉ. गुप्ता ने बताया कि तनाव हार्ट का सबसे बड़ा दुश्मन है। जीवन शैली में तनाव कम रखने के लिए योगा और ध्यान करें। संगीत, नृत्य, चित्रकारी, लेखन आदि शौक बनाए रखें। रोजमर्रा का काम करते समय तनाव नहीं लें। अपने बीपी व शुगर की जांच नियमित करवाएं। यदि आपको बीपी, शुगर, हार्ट अटैक आदि की दवाएं चल रही है तो उनको नियमित रूप से लें। कोलेस्ट्रोल की मात्रा अक्सर सर्दियों में बढ़ जाती है, इसलिए अपनी खून की जांच अवश्य कराएं व डॉक्टर से सलाह लें। सीने में दर्द, जलन, भारीपन, सांस फूलना, चक्कर या बेहोशी आना, धड़कन बढ़ना आदि हृदय रोग के लक्षण हो सकते हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।</p>
<p><strong>दिल के रोगों से ऐसे बचें</strong><br />खाने में घी, तेल एवं नमक की मात्रा कम रखें। फल, सब्जी और सलाद का सेवन ज्यादा करें। नियमित रूप से कम से कम 30 मिनट व्यायाम करें और शराब व सिगरेट, बीड़ी और तम्बाकू का सेवन नहीं करें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 Dec 2023 10:04:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>युवाओं का खून हो रहा गाढ़ा, 70 फीसदी तक आ रहा ब्लॉकेज</title>
                                    <description><![CDATA[युवा कुछ आदतों को सुधारे तो उन्हें डॉक्टर और किसी स्पेशलिस्ट पास जान की जरुरत नहीं पड़ेगी। बस कुछ लाइफ स्टाइल चेंज कर सकते है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-blood-of-youth-is-getting-thick--blockage-coming-up-to-70-percent/article-24810"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-09/yuvaon-ka-khoon-ho-raha-gaadha,-70-pheesadee-tak-aa-raha-blockage...kota-news-29-09-2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । पिछले दो सालों में कोरोना संक्रमण के बाद से ही हार्ट के मरीजों के बीमारी का उम्र के पेंटर्न  बदल गया है। अब 40 और 50 उम्र की जगह 20 से 30 उम्र में ही हार्ट संबंधी बीमारियां होने लगी है। कोराना में जिन युवाओं को दो बार कोराना हो चुका उन में हार्ट अटैक के चांस बढ़ गए हैं। अस्पताल में पिछले दो सालों में हार्ट के मरीजों संख्या दोगुनी हो चुकी है। पिछले दो सालों में 30 से 40 साल के बीच के युवाओं की एंजोग्राफी, एजोप्लास्टि ज्यादा हुई है। डॉक्टर इसकी वजह पोस्ट कोविड हेल्थ कॉम्प्लीकेशंस और खराब लाइफ स्टाइल बता रहे है। जिससे युवाओं में हॉर्ट से जुड़ी समस्याएं बढ़ रही है। अटैक से युवाओं की मृत्युदर भी बुजुगों से ज्यादा है। ऐसे में युवाओं को हार्ट का खास ख्याल रखने की आवश्यकता है। डॉक्टरों का कहना है कि  अब हार्ट अटैक की कोई उम्र का फिक्स नहीं है। पहले भारत में पुरुष 40 और महिला में 50 के बाद हार्ट संबंधी बीमारियां होती थी। लेकिन अब पेंर्टन बदल गया है। अब 25 से 35 के युवा हार्ट अटैक के ज्यादा शिकार हो रहे है। अब 25 की उम्र के बाद ही किसी अच्छे हृदय रोग विशेषज्ञ से जांच कराकर सारी जांच करानी चाहिए। पिछले एक साल में कई युवा एक्सससाइज करते हुए, गाना गाते हुए और कॉमेडी करते हुए हार्ट अटैक के शिकार हो गए है। ऐसे में अब बुजुर्गो के साथ युवाओं को भी अपने हृदय की ज्यादा केयर करने जरुरत है। युवा कुछ आदतों को सुधारे तो उन्हें डॉक्टर और किसी स्पेशलिस्ट  पास जान की जरुरत नहीं पड़ेगी। बस कुछ लाइफ स्टाइल चेंज कर सकते है।  यह कहना है हृदय रोग विशेष डॉ. भंवर रणवा का। दरअसल 29 सितम्बर वर्ड हॉर्ट डे मनाया जाएगा। </p>
<p><strong>ब्लॉकेज के लक्षण नजर नहीं आते</strong><br />हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. भंवर रणवा ने बताया कि कोविड के बाद युवाओं में खून गाढ़ा होने की समस्या ज्यादा बढ़ी है। यूथ के खराब लाइफ स्टाइल के कारण कई बार 70 फीसदी तक ब्लॉकेज हो जाती है, लेकिन लक्षण नहीं दिखते। ऐसे में कुछ फिजिकल स्ट्रेस जैसे हैवी एक्सरसाइज या इमोशन स्ट्रेस ट्रिगर की तरह काम करता है जिससे हार्ट अटैक आता है।</p>
<p><strong>80 का रुल अपनाएं</strong><br />डॉ. सुधीर उपाध्याय ने बताया कि  युवा 80 का रूल फॉलो करें। वेस्टलाइन 80 सेमी से अधिक नहीं होनी चाहिए। ब्लड प्रेशर 120/80 रहना चाहिए। इसके अलावा हर तीन दिन में कम से कम 80 मिनट पैदल चलना चाहिए। जिससे हार्ट की सेहत अच्छी रहती है। सामान्य जनसंख्या में 40 साल की आयु के बाद या हाई रिस्क वाली आबादी में 30 साल की आयु के बाद साल में एक बार या 2 साल में एक बार हृदय जांच की सलाह दी जाती है। </p>
<p><strong>6 गलतियां बनती हैं हार्ट फेलियर का कारण</strong><br /><strong>-  जीवनशैली और खान-पान</strong><br />जीवनशैली  और खानपान यह हार्ट फेल्योर के जोखिम को मैनेज करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।  पिछले कुछ सालों में भोजन और लाइफस्टाइल आॅप्शन में एक महत्वपूर्ण बदलाव आया है।  महामारी के बीच, अधिकांश लोग सीमित शारीरिक गतिविधि के साथ एक गतिहीन जीवन शैली का पालन कर रहे है।  अस्वास्थ्यकर खाने की आदते मोटापे का कारण बन सकता है, जो दिल की विफलता के प्राथमिक जोखिम कारकों में से एक है। धूम्रपान और शराब से बचना चाहिए और रोजाना कम से कम 20 मिनट व्यायाम करना चाहिए। डाइट में पौष्टिक अनाज, हरी सब्जियां और ओमेगा 3 से भरपूर फूड्स को शामिल करना चाहिए।  अगर बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) इससे अधिक होना चाहिए, तो हृदय को सबसे अधिक नुकसान होने की संभावना है। </p>
<p><strong>-  तनाव</strong><br />मानसिक तनाव अक्सर दिल की विफलता के लक्षणों को ट्रिगर कर सकता है।  लंबे, तनावपूर्ण काम के घंटे और उचित नींद की कमी बढ़ रही है और अक्सर शरीर को तनाव हार्मोन के हाई लेवल के संपर्क में लाते हैं।  यह हृदय पर दबाव भी डाल सकता है जिससे रक्त के थक्कों की समस्या हो सकती है जिससे हृदय गति रुकने का खतरा बढ़ जाता है। उच्च मानसिक तनाव के कारण होने वाले अवसाद का सीधा संबंध हृदय गति रुकने से भी होता है।  ध्यान, योग और उचित नींद के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य सुनिश्चित करने से हृदय गति रुकने की संभावना कम हो सकती है।  कोई भी काउंसलर की मदद ले सकता है या तनाव कम करने के लिए दवा ले सकता है। </p>
<p><strong>-  हाई ब्लड प्रेशर</strong><br />हाई ब्लड प्रेशर सबसे अधिक दिल की विफलता से जुड़ा हुआ है।  इसे हाई ब्लड प्रेशर के रूप में भी जाना जाता है जो धमनियों को नुकसान पहुंचा सकता है और हृदय को रक्त पंप करने के लिए अधिक मेहनत करने के लिए मजबूर कर सकता है।  इससे बाएं वेंट्रिकल में सूजन आ जाती है, जिससे हार्ट फेल होने का खतरा बढ़ जाता है। रक्तचाप की नियमित जांच करते रहना चाहिए और ऐसे आहार का सेवन करना चाहिए जो हाई ब्लड प्रेशर को कम करने में मदद करें।  नियमित रूप से व्यायाम करने से भी इस स्थिति को मैनेज करने में मदद मिलती है।  यहां तककि सोडियम और कैफीन की मात्रा में थोड़ी सी भी कमी ब्लड प्रेशर को कम कर सकती है और हृदय स्वास्थ्य में सुधार कर सकती है। </p>
<p><strong>- डायबिटीज</strong><br />डायबिटीज के रोगियों में दिल की विफलता बहुत आम है। डायबिटीज कोरोनरी धमनियों या एथेरोस्क्लेरोसिस के सख्त होने का कारण बनता है । जिससे दिल की विफलता का खतरा बढ़ जाता है।  कोरोनरी धमनियां हृदय को आॅक्सीजन और पोषण की आपूर्ति के लिए जिम्मेदार होती है। एक बार जब वे बंद हो जाते हैं, तो हृदय की मांसपेशी क्षतिग्रस्त हो जाती है। डायबिटीज को कंट्रोल करने के लिए शरीर के वजन के साथ-साथ ब्लड शुगर लेवल की निगरानी और मैनेज करना महत्वपूर्ण है।  शुगर लेवल को सामान्य स्तर पर नियंत्रित करने के लिए निर्धारित दवाओं का सेवन करना महत्वपूर्ण है।<br /> <br /><strong>-  हृदय की मांसपेशियों की बीमारी (फैला हुआ कार्डियोमायोपैथी, हाइपरट्रॉफिक कार्डियोमायोपैथी)</strong><br />नशीली दवाओं या शराब के उपयोग, वायरल संक्रमण या अन्य कारणों से हृदय की मांसपेशियों को कोई भी नुकसान दिल की विफलता के जोखिम को बढ़ा सकता है। हेल्दी डाइट लेने, नियमित शारीरिक गतिविधि में शामिल होने, तनाव से बचने और पर्याप्त नींद लेने से दिल को हेल्दी लाइफस्टाइल बनाए रखें। शराब के सेवन और धूम्रपान जैसी आदतों से बचें। </p>
<p><strong>- कोरोनरी धमनी रोग</strong><br />यह तब होता है जब हृदय की धमनियों में कोलेस्ट्रॉल और वसा जमा हो जाते हैं, जिससे हृदय की मांसपेशियों में ब्लड फ्लो कम हो जाता है। धमनियां पूरी तरह से अवरुद्ध होने की स्थिति में इससे सीने में दर्द (एनजाइना) या दिल का दौरा पड़ सकता है। </p>
<p><strong>युवाओं में हार्ट  फेलियर का जोखिम बन रहा चिंता का कारण</strong><br />डॉ. ओपी मीणा ने बताया कि  दिल की विफलता हार्ट फेरियर एक पुरानी स्थिति है जो तब होती है जब हृदय शरीर में ऊतकों की चयापचय मांगों को पूरा करने के लिए पर्याप्त रूप से रक्त पंप करने में असमर्थ होता है।  कोरोनरी हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा, डायबिटीज और कोरोनरी हृदय रोग में वृद्धि के कारण इस स्थिति की व्यापकता बढ़ रही है।  उम्र, लिंग और आनुवंशिकी जैसे गैर-परिवर्तनीय कारकों के अलावा, हाई ब्लड प्रेशर और गतिहीन जीवन शैली जैसे कारक भी जोखिम बढ़ा रहे है। हालांकि बुजुर्गों में दिल की विफलता आम है, इन जोखिम कारकों के कारण युवा वयस्कों में भी वृद्धि हुई है। दिल की विफलता समय के साथ विकसित होती है क्योंकि हृदय की पंपिंग क्रिया कमजोर हो जाती है, शरीर इसके लिए हार्मोनल और अन्य तंत्रों के साथ क्षतिपूर्ति करने की कोशिश करता है।  अमेरिकन कॉलेज आॅफ कार्डियोलॉजी और अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन इसे 4 चरणों में वर्गीकृत किया है। ऐसा इसलिए है क्योंकि एक बार जब कोई मरीज अगले चरण में चला जाता है, तो उसे उलट नहीं किया जा सकता है, यानी एक बार जब वे स्टेज सी में पहुंच जाते हैं, तो वे स्टेज बी या ए में वापस नहीं जा सकते हैं। इसलिए हार्ट फेलियर को अपरिवर्तनीय बीमारी के रूप में जाना जाता है। </p>
<p>युवाओं में पिछले दो सालों में हृदय रोग संबंधित बीमारियों में दोगुनी वृद्धि हुई है। दिल की विफलता को बीमारी के चरण के आधार पर मैनेज या इलाज किया जा सकता है क्योंकि हर चरण के साथ गंभीरता बढ़ जाती है।  पहले के चरणों में, उपचार में दवा और जीवनशैली में बदलाव होते हैं जबकि अधिक उन्नत चरणों में सर्जरी, प्रत्यारोपण या उपकरण प्रत्यारोपण प्रभावी ढंग से काम कर सकता है।  दिल की विफलता से परे जीवन जीने के लिए दिल को स्वस्थ जीवनशैली बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। 30 से 45 मिनट के लिए डेली एक्सरसाइज शरीर को फिट और कई बीमारियों और डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, मोटापा आदि जैसी स्वास्थ्य स्थितियों से मुक्त रख सकता है।  यह बदले में हृदय रोग को रोकने में मदद करता है। <br /><strong>- डॉ. भंवर रणवा, एचओडी हृदय रोग विभाग मेडिकल कॉलेज कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 29 Sep 2022 14:33:58 +0530</pubDate>
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