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                <title>national voluntary blood donation day - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>national voluntary blood donation day RSS Feed</description>
                
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                <title>राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस : रक्त की एक यूनिट से बचाई जा सकती है तीन जिंदगियां, पिछले एक साल में प्रदेश में हुआ 7 लाख 95 हजार 990 रक्त यूनिट रक्तदान</title>
                                    <description><![CDATA[ज्यादा से ज्यादा लोगों को रक्तदान केन्द्रों पर जाकर रक्तदान करना चाहिए और दूसरों को भी इस पुण्य कार्य के लिए प्रेरित करना चाहिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/national-voluntary-blood-donation-day-can-be-saved-from-a/article-128381"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/copy-of-news-(5).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। एक व्यक्ति के द्वारा एक बार में दिया गया एक यूनिट रक्त तीन लोगों की जिंदगी बचा सकता है। कोई भी व्यक्ति एक बार में एक यूनिट यानि करीब 450 मिलीग्राम रक्तदान करता है। एक स्वस्थ व्यक्ति साल में छह बार तक रक्तदान कर सकता है। एक यूनिट रक्तदान आपके शरीर की कुल रक्त आपूर्ति का एक छोटा सा हिस्सा होता है क्योंकि आमतौर पर एक व्यक्ति के शरीर में लगभग 10 से 12 यूनिट रक्त होता है और दान किए गए एक यूनिट रक्त को स्वस्थ शरीर लगभग चार से छह हफ्तों में फिर से बना लेता है। यह भी सत्य है कि रक्त दान करने से शरीर में कोई कमजोरी नहीं आती। रक्त के चार अलग-अलग घटकों का उपयोग व्यक्ति की जिंदगी बचाने के लिए किया जाता है। इसमें लाल रक्त कोशिकाएं, प्लाज्मा, प्लेटलेट्स और क्रायोप्रेसिपिटेटेड एंटीहेमोफिलिक फैक्टर यानी एएचएफ जो कि मरीज की स्थिति के अनुसार अलग-अलग प्रयोग किए जा सकते हैं। 18 से 65 वर्ष का वह व्यक्ति जिसका न्यूनतम वजन 45 किलोग्राम है, कोई गंभीर बीमारी से ग्रस्त नहीं है, रक्तदान कर सकता है।</p>
<p><strong>रक्तदान में प्रदेश की स्थिति</strong><br />आंकड़ों के अनुसार पिछले एक साल में प्रदेश में कुल लगभग 7 लाख 95 हजार 990 रक्त यूनिट रक्तदान से प्राप्त हुई है। इसमें स्वैच्छिक रक्तदान का प्रतिशत 65.83 प्रतिशत रहा। इसका 25.40 फीसदी सरकारी ब्लड बैंकों में और 74.59 प्रतिशत स्वैच्छिक रक्तदान निजी ब्लड बैंकों में हुआ। इसी प्रकार जयपुर में कुल 2 लाख 37 हजार यूनिट रक्तदान हुआ। इसमें से 13.43 प्रतिशत सरकारी क्षेत्र की ब्लड बैंकों में और 86.56 प्रतिशत स्वैच्छिक रक्तदान निजी ब्लड बैंकों में हुआ है। ब्लड बैंकों के द्वारा प्रदेश में वर्ष 2024-25 के दौरान 6583 रक्तदान शिविर आयोजित किए गए जिसमें 6,92,092 यूनिट रक्तदान किया गया है एवं 9,90,574 यूनिट मरीजों को दी गई है।</p>
<p><strong>रक्तदान के फायदे</strong><br />रक्तदान करने से हृदय स्वास्थ्य बेहतर होता है क्योंकि यह रक्त में आयरन की अधिक मात्रा को कम करता है, जिससे रक्त का गाढ़ापन कम होता है और ह्दय रोग, दिल के दौरे और स्ट्रोक का खतरा कम हो जाता है। रक्तदान करने से लिपिड प्रोफाइल में सुधार हो सकता है। रक्तदान ट्राइग्लिसराइड्स को साफ  करने में मदद करता है, इससे भी हृदय संबंधी जोखिमों में कमी आती है। यह शरीर को नई रक्त कोशिकाओं का उत्पादन करने के लिए उत्तेजित करता है और रक्त के संचार को बढ़ावा देता है।</p>
<p>ज्यादा से ज्यादा लोगों को रक्तदान केन्द्रों पर जाकर रक्तदान करना चाहिए और दूसरों को भी इस पुण्य कार्य के लिए प्रेरित करना चाहिए। राजस्थान प्रदेश जो कि अभी भी स्वैच्छिक रक्तदान के राष्ट्रीय मानकों से काफी दूर है, ऐसे में रक्तदाताओं को इस संबंध में जागरूकता लाने की आवश्यकता है। <br />-डॉ. एसएस अग्रवाल, मैनेजिंग <br />ट्रस्टी, स्वास्थ्य कल्याण ब्लड बैंक। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Oct 2025 12:34:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
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                <title>आधी आबादी दे रही जीवन रक्षा में पूरा सहयोग </title>
                                    <description><![CDATA[शहर में एक दो नहीं हजारों की संख्या में महिलाएं हैं जो समय-समय पर रक्तदान व एसडीपी डोनेट कर लोगों का जीवन बचाने का महत्वपूर्ण काम कर रही हैं। राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस पर महिलाओं के इस योगदान को समर्पित विशेष समाचार दिया जा रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/giving-half-the-population-full-cooperation-in-saving-lives/article-25061"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-10/aadhe-aabadi-de-rahe-jeevan-raksha-mei-pura-sahayog...kota-news-01-10-2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । एक नारी सब पर भारी। महिलाओं ने इस कहावत को सही साबित भी करके दिखाया है। महिलाएं अब न केवल घर गृहस्थी संभाल रही हैं वरन् नौकरी पेशा भी हो गई है। अब तो उससे भी आगे बढ़कर देश की आधा आबादी कहलाने वाली महिलाएं लोगों का जीवन बचाने में भी आगे आने लगी है। यह जीवन अपने शरीर का रक्त देकर बचा रही हैं। कोटा में होने वाले रक्तदान में करीब 20 फीसदी महिलाएं रक्तदान कर रही हैं। पहले जहां पुरुष ही रक्तदान करते थे। महिलाओं में रक्तदान के प्रति जागरूकता की कमी थी। महिलाएं रक्तदान करने से बचती थी। रक्तदान करने से कमजोरी आने समेत कई तरह की भ्रांतियों की शिकार होने के कारण महिलाएं रक्तदान न के बराबर करती थी। लेकिन कुछ महिलाओं ने पहल की और उसमें कामजाब भी हुई। उसके बाद उन्होंने दूसरी महिलाओं को जागरूक किया। शुरुआत में यह संख्या कम थी। लेकिन धीरे-धीरे जागरूकता बढ़ने के साथ ही महिलाओं में रक्तदान के प्रति उत्साह व जोश भी बढ़ने लगा। उसी का परिणाम है कि कोटा में जहां हर साल 80 से 90 हजार यूनिट रक्तदान हो रहा है। उसमें करीब 20 फीसदी रक्तदान महिलाएं कर रही हैं। महिलाओं को रक्तदान की प्रेरणा किसी बाहरी व्यक्ति से मिलीे हो ऐसा नहीं है। अधिकतर महिलाओं को अपने घर और परिवार से ही रक्तदान की प्रेरणा मिली। किसी को पति से तो किसी को पिता से ऐसी प्रेरणा मिली कि एक बार रक्तदान करने के बाद महिलाओं को लगा कि उनके द्वारा दिए गए रक्त से लोगों का जीवन बच रहा है तो उनका उत्साह बढ़ता गया। उसी का परिणाम है कि कोटा स्वैच्छिक रक्तदान में प्रदेश में अग्रणी भूमिका में है। शहर में एक दो नहीं हजारों की संख्या में महिलाएं हैं जो समय-समय पर रक्तदान व एसडीपी डोनेट कर लोगों का जीवन बचाने का महत्वपूर्ण काम कर रही हैं। राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस पर महिलाओं के इस योगदान को समर्पित विशेष समाचार दिया जा रहा है। </p>
<p><strong>नोएड़ा की कोचिंग छात्रा ने की एसडीपी डोनेट</strong><br />नोएड़ा निवासी 18 वर्षीय मोना चौधरी यहां रहकर नीट की तैयारी कर रही है। उसने परिवार में माता पिता को रक्तदान करते हुए देखा था। लेकिन उस समय उसकी उम्र नहीं होने से वह रक्तदान नहीं कर सकती थी। लेकिन कोटा में पढ़ाई के दौरान जब उसने रक्तदान की उम्र को पार किया तो उसने इसी साल जनवरी में पहली बार रक्तदान  किया। मोना ने बताया कि उसकी इच्छा थी कि वह भी लोगों का जीवन बचाने के लिए रक्तदान करे। एक बार रक्तदान करने के बाद जब उसे अच्छा लगा और कोई परेशानी नहीं हुई तो उसने दूसरी बार में एसडीपी डोनेट किया। </p>
<p><strong>जीवन बचाने में मिलता है आनंद</strong><br />सीमलिया निवासी कमलजीत कौर ने शादी के बाद अपने पति गुरप्रीत कौर को रक्तदान करते हुए देखा। उनसे प्रेरित होकर उन्होंने पहली बार रक्तदान किया तो उस समझ थोड़ी झिझक हुई थी। लेकिन रक्तदान के बाद जब कोई परेशानी नहीं हुई तो घर परिवार को संभालने के साथ ही  समय-समय पर रक्तदान करती रही। वे अब तक 12 बार रक्तदान कर चुकी हैं। कमलजीत कौर ने बताया कि उन्हें रक्तदान करने से अधिक लोगों का जीवन बचाने में आनंद आ रहा है। </p>
<p><strong>पिता को दिया था पहली बार रक्त</strong><br />अनंतपुरा निवासी सुमन साहू ने सबसे पहले अपने पिता को रक्त दिया था। उन्होंने बताया कि उनके पिता का रक्त ग्रुप एबी नेगेटिव है। उनकी तबीयत खराब होने पर जब उन्हें इस ग्रुप के रक्त की जरूरत पड़ी तो वह नहीं मिला। उस समय उन्होंने अपने रक्त की जांच करवाई तो उनका ग्रुप भी   एबी नेगेटिव निकला। इस पर उन्होंने पहली बार अपने पिता को रक्त  दिया था। उसके बाद जब भी इस ग्रुप की जरूरत लोगों को पड़ी उस समय उन्होंने रक्तदान किया। वे अब तक 7 बार रक्तदान कर चुकी हैं। </p>
<p><strong>पति से मिली प्रेरणा</strong><br />शास्त्री नगर दादाबाड़ी निवासी भूमिका गुप्ता ने बताया कि उन्होंने पहली बार प्रथम वर्ष में अध्ययन के दौरान कॉलेज में आयोजित शिविर में रक्तदान किया था।  उसके बाद पति दीपक गुप्ता से प्रेरित होकर लगातार जरूरतमंदों का जीवन बचाने के लिए रक्तदान कर रही हैं। यहां तक कि अपने ससुर की स्मृति में हर साल नियमित रक्तदान कर रही हैं। साथ ही अन्य महिलाओं को भी इसके लिए प्रेरित कर रही हैं। भूमिका ने बताया कि रक्तदान के प्रति महिलाओं में जागरूकता बढ़ने से अब वे भी रक्तदान करने आगे आने लगी हैं। वे स्वयं अब तक 16 बार रक्तदान कर चुकी हैं। </p>
<p><strong>पहले और अब में आया काफी अंतर</strong><br />तलवंडी निवासी पुष्पांजलि विजय ने बताया कि 1990 के आसपास प्रोफेशनल डोनर्स होते थे, कोई भी रक्त देने से पहले कई बार सोचता था। सुविधाओं के साथ जागरुकता का अभाव था।   लेकिन अब लोगों के मन से डर निकल गया है। ग्रामीण क्षेत्र में भले ही जागरुकता की कमी है, लेकिन शहरी क्षेत्र में युवाओं व महिलाओं में जागकता बढ़ी है। यही कारण है कि राजस्थान में स्वैच्छिक रक्तदान के क्षेत्र में कोटा अपनी अलग पहचान रखता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Oct 2022 14:40:09 +0530</pubDate>
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