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                <title>monkeys - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>विद्युत डीपी बनी बंदरों के लिए काल, करंट की चपेट में आने से हो रहे हादसे</title>
                                    <description><![CDATA[पेड़ों की टहनियां छू रही विद्युत लाइनें , ग्रामीणों ने उठाई सुरक्षा की मांग]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/electricity-transformers-turn-deadly-for-monkeys--accidents-caused-by-electric-shocks/article-162618"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(1)44.png" alt=""></a><br /><p>बपावरकलां। कस्बे के ब्रजराज स्टेडियम छबड़ा रोड पर लगी बिजली की डीपी (डिस्ट्रीब्यूशन प्वाइंट) बंदरों के लिए जानलेवा साबित हो रही हैं। डीपी के आसपास लगे पेड़ों की टहनियां विद्युत तारों के संपर्क में आने से आए दिन चपेट में आकर झुलस रहे हैं। कस्बे में विद्युत विभाग की लापरवाही के चलते बंदरों के साथ हादसों का सिलसिला थम नहीं रहा है। ब्रजराज स्टेडियम छपरा रोड पर लगी दोनों डीपी के आसपास बड़े-बड़े पेड़ होने के कारण उनकी टहनियां विद्युत तारों को छू रही हैं। बंदरों के पेड़ों से होकर डीपी के आसपास पहुंचने पर वे करंट की चपेट में आ जाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार बंदर करंट लगने से झुलस जाते हैं और घटनास्थल पर ही पड़े रहते हैं। हादसे के बाद उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं होता। जिससे ग्रामीणों में नाराजगी है।</p>
<p><strong>पेड़ों की छंटाई जल्द कराने की मांग</strong><br />ग्रामीणों ने बताया कि पुलिस चौकी बपावर के पास लगी डीपी पर भी इसी तरह की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। बरसात के मौसम में पेड़ों क्री टहनियों और अधिक बढ़ने से खतरा बढ़ गया है। लोगों ने मांग की है कि डीपी के आसपास लगे पेड़ों की छंटाई जल्द कराई जाए और विद्युत उपकरणों को सुरक्षित किया जाए।<br /> <br />बरसात से पहले ही पेड़ों की कटाई कर दी जानी चाहिए थी, लेकिन विभाग की लापरवाही के कारण बंदरों के साथ लगातार हादसे हो रहे हैं।<br /><strong>- लोकेश मीणा, ब्लॉक कांग्रेस,सचिव, बपावरकलां</strong><br /> <br />बंदरों की आए दिन हो रही दुर्घटनाएं चिंता का विषय हैं। विद्युत विभाग को जल्द से जल्द पेड़ों की छंटाई करवानी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समस्या का समाधान नहीं किया गया तो धरना प्रदर्शन किया जाएगा।<br /><strong>-मनीष कुमार गौड़, नगर कांग्रेस अध्यक्ष, बपावरकलां</strong><br /> <br />पीपल के पेड़ होने के कारण यहां बार-बार दुर्घटनाएं त हो रही हैं। जल्द ही पेड़ों की टहनियों की कटाई करवाकर स समस्या का समाधान किया जाएगा, ताकि भविष्य में हादसों ए कोरोका जा सके।<br /><strong>- पवन मेहरा, जेईएन, विद्युत विभाग,बपावरकलां</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 11 Aug 2026 14:52:07 +0530</pubDate>
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                <title>बिजली के तार बन रहे वानरों के लिए काल, तीन विभागों के बीच पिस रहे घायल बंदर</title>
                                    <description><![CDATA[पशु प्रेमी भुवन मलिक कर रहे घायल बंदरों की सेवा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/electric-wires-are-becoming-a-death-trap-for-monkeys--and-injured-monkeys-are-being-crushed-between-three-departments/article-134632"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px)-(4)4.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। निराश्रित गायों व आवारा श्वानों को पकड़कर निगम की गौशाला तक पहुंचाने की व्यवस्था है। लेकिन शहर में रोजाना घायल हो रहे कई बंदरों को समय पर उपचार दिलाने की कोई व्यवस्था नहीं है। नगर निगम, वन विभाग व पशु चिकित्सालय के बीच पिस रहे घायल बंदरों को समय पर उपचार नहीं मिल रहा। ऐसे में पशु प्रेमी भुवन मलिक स्वयं के खर्च पर घायल बंदरों की सेवा कर रहे हैं। पशुप्रेमी व योगाचार्य भुवन मलिक ने बताया कि उनके पास कुछ दिनों से घायल बंदरों के संबंध में कई फोन आ रहे हैं। वे उन्हें रेस्क्यू करके उनके इलाज के लिए नगर निगम में संपर्क करते हैं तो वहां से जिम्मेदारों द्वारा व्यस्त होने की सूचना मिलती है। वहीं पशु चिकित्सालय में इनके इलाज के लिए कोई उचित व्यवस्था नहीं होती है। जंतुआलय लेकर जाने पर वहां से जवाब मिलता है कि उनके यहां काले मुंह के बंदरों की ही व्यवस्था है। लाल मुंह का बंदर जंगली जीवों में आता है इनकी व्यवस्था नगर निगम करता है वहीं लेकर जाओ।</p>
<p>उन्होंने बताया कि घायल बंदरों के लिए न तो कोई अलग से बजट है न ही कोई विभाग। नगर निगम में व्यवस्था बताई जाती है तो वह भी न के बराबर कार्य करती है। उन्होंने बताया कि एक वृद्ध दंपत्ति व एक घर में कुछ महिलाएं और बच्चियां थी जो खुद घायल वानर के लिए कुछ कर सकने के सक्षम नहीं थी। उन्हें सूचना मिली तो वे अपने खर्चे से उसे पशु चिकित्सालय लेकर गए। वे लगातार इन घायल पशुओं की सेवा कर पा रहे हैं। लेकिन हर किसी के लिए यह सेवा कर पाना संभव नहीं है । जिससे लोग घायल वानरों की सेवा करने से पीछे हट रहे है।</p>
<p>पशुप्रेमी व योगाचार्य भुवन मलिक ने बताया कि वन भूमि खत्म होती जा रही है और कोटा सिमटता जा रहा है। विशाल वृक्ष अब बढ़ते शहरीकरण में खत्म होते जा रहे हैं और इसी के कारण वानर शहर में इधर उधर अपना पेट भरने और पनाह के लिए भटक रहे हैं। शहर में कहीं न कहीं जब तब बंदर दुर्घटनाओं के शिकार हो रहे हैं। कोई वाहन की चपेट में आ कर जान गंवा रहा है तो कोई बिजली के खंभों पर करंट की चपेट में आकर घायल हो रहे है। घायल इंसान के लिए रुकने वाले बहुत लोग हैं, इंसानों के लिए एंबुलेंस हैं, गाय के लिए भी हैं, कुत्तों के लिए भी कई पशु कल्याण संगठन काम कर रहे हैं। जबकि कोटा शहर में बंदरों के लिए कौन सेवा कार्य कर रहा है किसी को कोई खबर नहीं है। कुछ समाजसेवी प्रेमी बंदरों के लिए भी कार्य कर रहे हैं किंतु प्रशासन द्वारा उन्हें किसी भी प्रकार की सहायता न दिए जाने से वे भी लाचार हो गए हैं। शहर में लगभग हर दिन कोई वानर दुर्घटना का शिकार होता है। ज्यादातर घटनाएं बिजली के तारों पर झुलसने से हो रही हैं। इधर नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि वे शहर से उत्पाती बंदरों को पकड़वाते हैं। इसके लिए टेंडर किया हुआ है। संवेदक फर्म के माध्यम से शिकायत पर बंदरों को पकड़कर शहर से दूर जंगल में छोड़ा जाता है।</p>
<p>इधर पशु चिकित्सालय के संयुक्त निदेशक गणेश नारायण दाधीच ने बताया कि घायल पशुओं के लिए 1962 पर कॉल कर वाहन मंगवाया जा सकता है। साथ ही पशु चिकित्सालय में किसी भी तरह के घायल पशुओं का उपचार किया जाता है। फिर चाहे वह गाय हो या कुत्ता या फिर बंदर। यहां बंदरों के आने पर उनका भी उपचार किया जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Dec 2025 14:38:55 +0530</pubDate>
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                <title>बांसी में लाल मुंह के बन्दरों का आतंक</title>
                                    <description><![CDATA[मकानों में पहुंचकर महिलाओं सहित बच्चों को कर रहे जख्मी।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/terror-of-red-faced-monkeys-in-bansi/article-85522"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/bansi-me-lal-muh-k-bandaro-ka-atank...bhandeda,-bundi-news-22-07-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>भण्डेड़ा। भण्डेड़ा क्षेत्र के बांसी कस्बे में दस रोज से लाल मुंह के एक दर्जन से अधिक बन्दरों ने आतंक मचा रखा है। यह बन्दर मकानों में पहुंचकर महिलाओं सहित बच्चों को जख्मी कर रहे है। शुक्रवार देर शाम को खुद के मकान में महिलाएं अपना काम कर रही थी। तभी अचानक लाल मुंह का बन्दर महिलाओं के पास पहुंचकर एक ही मोहल्ले में दो महिलाओं को जख्मी कर दिया है। आए दिन हो रही घटनाओं से परेशान ग्रामीणों ने नाराजगी जताई है। बन्दरों के आतंक से परेशान मोहल्लेवासियों ने शनिवार को बालाजी धर्मशाला के सामने एकत्रित होकर जिम्मेदारों के खिलाफ आक्रोश जताया है। जानकारी अनुसार बांसी कस्बे में लगभग दस रोज से लाल मुंह के एक दर्जन से अधिक बन्दर आए हुए है। जिन्होंने उत्पात मचाकर दहशत का माहौल बना रखा है। जो अधिकतर बस स्टैंड के आसपास वाले मोहल्ले में घूमते रहते है। अचानक महिलाएं व बच्चे नजर आते ही उन पर हमला कर देते है। रात्रि के समय ग्रामीण गहरी नींद में सोए हुए रहते है। मकानों में पहुंचकर कमरों के गेट खोल लेते है। रसोई में रखे फ्रीज को खोलकर उसमें रखे फल व सब्जियों को निकालकर ले जाते है। बन्दर के आने का पता चलने पर महिलाएं उनको भगाने की कोशिश करती है, तो उन पर हमला कर जख्मी कर देते है। उनके द्वारा शोर मचाने पर परिवार के सदस्य मिलकर बंदरों को भगाते है, तब जाकर थोड़ी राहत मिलती है। शुक्रवार देर शाम को बालाजी धर्मशाला वाले मोहल्ले के एक मकान में एक लाल मुंह का बन्दर पहुंच गया। उसने राजू चौहान के घर पर महिला अपने काम में व्यस्त थी। अचानक बन्दर महिला के पीछे से पैर को पकड़ लिया। जिससे महिला राजेश चौहान जख्मी हो गई। महिला के चिल्लाने पर परिवार के सदस्य दौड़कर मौके पर पहुंचे व मौके से बन्दर को भगाया। कुछ समय बाद ही फिर इसी मोहल्ले में कुछ दूरी पर एक मकान पर पहुंच गया। वहां पर भी एक महिला को निशाना बनाया। उस महिला को भी जख्मी कर दिया गया है। बन्दर द्वारा काटने पर जख्मी महिलाओं द्वारा बांसी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचकर प्राथमिक उपचार लिया गया है।  मोहल्ले में हो रहे लाल मुंह के बन्दरों के आतंक से परेशान मोहल्लेवासियों ने बालाजी धर्मशाला के सामने एकत्रित होकर जिम्मेदारों के प्रति आक्रोश जताया है।   ग्रामीण बलराम उदयवाल, राजू चौहान, अनिल चौहान, शुभम चौहान, बुद्धिप्रकाश सैन, कन्हैयालाल चौहान, संजय चौहान, महिलाओं में ममता चौहान, मंजू चौहान, राजेश चौहान, नूर बानो, नजमा बानो, बुटा बानो, किशकंदा सैन आदि मोहल्ले में एकत्रित हुए व बन्दरों के आतंक से परेशान लोगों ने संबंधित विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए आक्रोश जताया है। मोके पर बन्दरों को कस्बे से जल्द बाहर निकलवाने की मांग की है। ताकि मोहल्ले सहित आमजन को भी राहत मिले। </p>
<p>बन्दर से जख्मी महिला ने बताया कि मैं मकान पर थी। शुक्रवार शाम को अचानक लाल मुंह का बन्दर आया। पीछे से पैर पकड़ लिया। गनीमत रही कि उस समय मकान में अन्य सदस्य होने से मेरे को बचाया गया है। घर पर अन्य सदस्य नहीं होते तो इस स्थिति बदतर हो जाती।<br /><strong>- राजेश चौहान, स्थानीय महिला</strong></p>
<p>मेरे घर पर बन्दर आकर बच्चों सहित महिलाओं की तरफ दौड़ा तो सतर्कता बरतते हुए कमरे में पहुंचकर वहां कुन्दी लगानी पडी है। तब जाकर बन्दर से बचे है। इनके उत्पात से परेशान हो गए है।<br /><strong>- नूर बानो, स्थानीय महिला</strong></p>
<p>कस्बे में पन्द्रह से बीस लाल मुंह के बन्दर आए हुए है। जो महिलाएं समेत बच्चों को निशाना बनाकर उनके ऊपर हमला करके उनको जख्मी कर रहे है। इस मोहल्ले के सभी लोग बंदरों के आतंक से परेशान हो गए है।<br /><strong>- अनिल चौहान, स्थानीय युवा</strong></p>
<p>आतंकी बन्दरों को यहां से जल्द निकाला जाए, नही तो किसी दिन महिला व बच्चों को अधिक जख्मी कर सकते हैं। <br /><strong>- बलराम उदयवाल, स्थानीय ग्रामीण</strong></p>
<p>बन्दर कमरो के गेट खोलकर रसोई में पहुंच जाते है। व उसको अस्तव्यस्त करके रसोई में रखे फ्रीज को भी खोलकर फल फ्रूट सहित खाद्य सामग्री को भी ले जाते है। मौके पर आसपास अकेली महिला या बच्चा हो तो उस पर हमला कर देते है।<br /><strong>- मंजू चौहान, स्थानीय महिला</strong></p>
<p>मोहल्ले में एक दर्जन से अधिक लाल मुंह के बंदरों ने दहशत बना रखी है। जो आए दिन महिला व बच्चों को निशाना बनाकर जख्मी करते रहते है। गनीमत रही कि बाशिंदों की सतर्कता के चलते अभी तक इन्होंने बड़े हादसे को अंजाम नहीं दिया है। अब तो यह पैदल चलते राहगीरों को भी परेशान करने लगे है। इनके उत्पात से मोहल्लेवासी भी काफी परेशान है। जिम्मेदारों से जल्द समाधान की मांग की है। <br /><strong>- शुभम चौहान, स्थानीय युवा</strong></p>
<p>बन्दर का इतना आतंक है कि घर पर बच्चों को अकेला नही छोड़ सकते है। बच्चों व महिलाओं को देखकर उन पर हमला कर देते है। <br /><strong>- ममता चौहान, स्थानीय महिला</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jul 2024 17:54:46 +0530</pubDate>
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                <title>श्वान और बंदरों से जनता त्रस्त, निगम अधिकारी कार्यालय में मस्त </title>
                                    <description><![CDATA[जनहित के मुद्दों पर भी आचार संहिता का रोड़ा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/public-troubled-by-dogs-and-monkeys--corporation-officials-are-busy-in-their-offices/article-79310"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/shvan-or-bndaro-s-janta-trast,-nigam-adhikari-kryalaye-me-mst...kota-news-25-05-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में आए दिन श्वान लोगों को विशेष रूप से बच्चों और महिलाओं को शिकार बना रहे हैं। बंदरों का भी आतंक बना हुआ है। जनता इन सबसे त्रस्त हो रही है लेकिन निगम अधिकारियों को जनता की परवाह नहीं होने से वे मस्त हो रहे हैं। जनहित के मुद्दों पर भी आचार संहिता का रोड़ा आड़े आ रहा है।  कोटा दक्षिण निगम क्षेत्र में श्वानों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। एक दिन हले भी श्वान ने दस साल के बच्चे को बुरी तरह से नोच दिया। जिससे उसकी हालत गम्भीर बनी हुई है। उसी तरह से विज्ञान नगर में कुछ दिन पहले एक बुजुर्ग को राह चलते काट लिया था। श्वान राह चलते लोगों पर आए दिन हमले कर रहे हैं। किसी के पैर में तो किसी के चेहरे पर काट रहे हैं। जिससे लोगों में श्वानों के प्रति दहशत बढ़ती ही जा रही है। शहर मे सड़कों पर और गली मोहल्लों में श्वानों के झुंड दिखते ही लोग डरने लगे हैं। श्वानों के पास से निकलने में डर लगने लगा है। लेकिन निगम अधिकारियों द्वारा श्वानों की समस्या का कोई स्थायी समाधान तक नहीं किया जा रहा। वहीं निगम अधिकारी चुनाव की आचार संहिता का बहाना बनाकर नए टेंडर भी नहीं कर रहे हैं।  </p>
<p><strong>बंदर पकड़ने का ठेका खत्म, नया हुआ नहीं</strong><br />इसी तरह से नगर निगम कोटा दक्षिण क्षेत्र में बंदरों की संख्या भी काफी अधिक हो गई है। आए दिन उनके द्वारा लोगों के घरों में घुसने, खाने की सामग्री ले जाने और लोगों पर हमले करने के मामले हो रहे हैं। पार्षदों का कहना है कि बंदर पकड़ने का ठेका मथुरा की फर्म को दिया हुआ था। वह ठेका भी समाप्त हो गया। लेकिन अधिकारियों ने समय रहते नया ठेका नहीं किया। अब अधिकारियों के पास चुनाव आचार संहिता का बहाना है। जिससे नए टेंडर भी नहीं किए जा रहे हैं। </p>
<p><strong>फर्म को किया डीबार, अब जनता परेशान</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण में पुणे की निजी फर्म द्वारा श्वानों का बधियाकरण व टीकाकरण किया जा रहा था। लेकिन कोटा दक्षिण निगम में आयुक्त द्वारा उसे फरवरी-मार्च में डीबार कर दिया था। उसके बाद से फर्म ने काम बंद कर दिया। जिससे क्षेत्र की जनता परेशान हो रही है। जानकारों के अनुसार जबकि वही फर्म कोटा उत्तर निगम क्षेत्र में काम कर रही है।  कोटा दक्षिण के पार्षदों का कहना है कि   तलवंडी, जवाहर नगर, छावनी, बल्लभबाड़ी और बोरखेड़ा क्षेत्र में श्वानों का आतंक अधिक है। समाचार पत्रों में व प्रशासन के सामने तो बहुत कम मामले आ रहे हैं जबकि घटनाएं काफी अधिक हो रही है। लेकिन निगम अधिकारियों का जनता की समस्याओं पर कोई ध्यान ही नहीं है।  लोगों का कहना है कि श्वानों का बधियाकरण व टीकाकरण करने के बाद ये अधिक खूंखार हो रह हैं। जिससे ये लोगों पर हमले कर रहे हैं। </p>
<p><strong>लावारिस मवेशी तक नहीं पकड़े जा रहे</strong><br />शहर की सड़कों पर लावारिस मवेशियों का जमघट इतना अधिक हो गया है कि जगह-जगह पर ये झुंड में खड़े देखे जा सकते हैं। जिससे हादसों का तो खतरा बना हुआ है साथ ही लोगों पर हमले की घटनाएं भी हो रही है। विशेष रूप से सब्जीमंडी में और मेन रोड पर इनकी समस्या अधिक है।  लोगों का कहना है कि शहर में आवारा मवेशी अधिक होने के बाद भी उन्हें नहीं पकड़ा जा रहा है। निगम अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से बच रहे हैं। जिसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>श्वानशाला में सिर्फ बधियाकरण व टीकाकरण</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण की ओर से बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला परिसर में श्वानशाला बनाई गई है। यहां पुणे की निजी फर्म द्वारा श्वानों को लाकर उनका बधियाकरण व टीकाकरण किया जा रहा है। कुछ दिन रखने के बाद उन्हें वापस उसी स्थान पर छोड़ा जा रहा है जहां से पकड़कर लाए। जिससे श्वानों का खतरा कम नहीं हो रहा है। गली मोहल्लों में इनकी संख्या कम भी नहीं हो रही है। जबकि निगम अधिकारियों का कहना है कि बधियाकरण से इनकी संख्या नहीं बढ़ रही है और टीकाकरण से इनके काटने पर भी रैबीज फेलने का खतरा नहीं रहता। </p>
<p><strong>श्वानों की समस्या का हो समाधान</strong><br />नए कोटा क्षेत्र के जवाहर नगर व तलवंडी समेत सभी जगह पर श्वानों का इतना अधिक आतंक है कि लोग डर के कारण रात के समय तो घर से बाहर ही नहीं निकल पा रहे हैं। बच्चे आस-पास पार्क में खेल नहीं पा रहे हैं। लेकिन निगम अधिकारी चुनाव आचार संहिता का बहाना बनाकर बच रहे हैं।<br /><strong>- सुरेन्द्र सिंह, जवाहर नगर</strong></p>
<p>श्वानों की समस्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है। जहां भी श्वान नजर आ जाते हैं वहां से रास्ता ही बदलना पड़ता है। आए दिन लोगों को काटने की घटनाएं होने पर बच्चों को घर से बाहर अकेले भेजने तक में डर लगने लगा है। निगम अधिकारियों को चाहिए कि इनका समाधान करे।<br /><strong>- गरिमा सोनी, तलवंडी</strong></p>
<p>सड़कों पर जहां देखो वहां श्वान ही श्वान दिखते हैं। सुबह के समय मंदिर जाते समय कई बार श्वान पीछे पड़ गए उस समय बड़ी मुश्किल से जान बचाई। महिलाओं व बच्चों के लिए तो इनसे बचना मुश्किल हो रहा है। निगम अधिकारियों को जनता के मुद्दों में तो आचार संहिता की आड़ नहीं लेनी चाहिए। समय रहते टेंडर करते तो ऐसी समस्या नहीं होती।<br /><strong>- महेन्द्र जैन, दादाबाड़ी</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />निजी फर्म द्वारा सही ढंग से काम नहीं करने पर उसके खिलाफ शिकायतें आ रही थी। जांच में दोषी मानते हुए उसे डीबार कर दिया था। उसके बाद टेंडर किए लेकिन कोई फर्म नहीं आई। फिर लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लागू हो गई। इस दौरान नया टेंडर नहीं कर सकते। ऐसे में अब अगले महीने आचार संहिता हटने के बाद ही नए टेंडर होंगे। जिससे श्वान, बंदर व अन्य सभी समस्याओं का समाधान हो जाएगा। <br /><strong>- सरिता सिंह, आयुक्त नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 May 2024 14:22:35 +0530</pubDate>
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                <title>लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा उत्पाती बंदरों का खौफ</title>
                                    <description><![CDATA[बंदरों के सितम से आमजन को राहत पहुचाने के लिए  नगर पालिका प्रशासन एक दशक मे करीब दस  लाख रुपए से अधिक की राशि कागजों में  खर्च कर चुकी है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/dausa/fear-of-riotous-monkeys-speaking-on-peoples-heads/article-25143"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-10/1-ban-1.jpg" alt=""></a><br /><p>बांदीकुई।  शहर में चोरों के साथ साथ उत्पाती बंदरों का सितम बढ़ता ही जा रहा है। लेकिन बंदरों के सितम से आमजन को राहत पहुचाने के लिए  नगर पालिका प्रशासन एक दशक मे करीब दस  लाख रुपए से अधिक की राशि कागजों में  खर्च कर चुकी है। जिसका परिणाम है कि एक दशक में उत्पाती बंदर सैकड़ों महिला, पुरुष व बच्चों पर कहर ढाह चुके हैं। मजे की बात तो यह है कि बंदर झुंड के रूप में आए दिन किसी ना किसी के घर में घुसकर या फिर मंदिर, सब्जी मंडी परिसर या अन्य सार्वजनिक स्थानों पर आमजन को चोटिल  कर रहे हैं।  नगर पालिका प्रशासन के उदासीन रवैए की आए दिन आमजन द्वारा भर्त्सना की जा रही है। हाल ही में बंदरों ने शहर के वार्ड 27 में वृद्धा बसंती देवी के शरीर को जगह जगह से नोंच डाला। महिला का अस्पताल में उपचार चल रहा है। नगर पालिका क्षेत्र में उत्पाती बंदरों की समस्या आजकल की नहीं बल्कि वर्षो पुरानी है। इस सतस्या से आमजन को राहत पहुंचाने के लिए अब कई नगर पालिकाध्यक्ष अपने स्तर पर प्रयास कर चुके हैं लेकिन उनके प्रयास नौकरीशाही के आगे अब तक टॉय-टॉय फिस्स रहे हैं।</p>
<p>बंदरों के उत्पात से आमजन को राहत पहुंचाने के लिए लाखों की राशि व्यय कर ठेके भी दिए जाते रहे हैं, लेकिन कमीशन खोरी और मॉनेटिरिंग के अभाव में सही मायने में बंदर पकडेÞ नहीं गए। ठेके की शर्तों के तहत पकड़े गए बंदरों को शहर से करीब पचास किलोमीटर दूर सरिस्का के जंगलों में छोड़ने का प्रावधान होता है लेकिन  ठेकेदार शहर के आस पास इन्हें छोड़कर इतिश्री करते आए हैं। ऐसे में शाम को छोड़े गए बंदर देर रात तक वापस अपने आश्रय स्थल पर आ धमकते हैं और  पुन: आमजन को सिरदर्द पैदा करते रहे हैं। बंदर घरों में घुसकर फ्रीज से सब्जी, फल ,दूध व अन्य खाद वस्तु उठाकर ले जाते है ,किचिन में घुसकर  खाना  ले जाते हैं। विरोध करने वालों को जख्मी कर देते है। समस्या से आमजन को राहत पहुंचाने के लिए नगर  पालिका बोर्ड की बैठक में कई बार जागरूक पार्षद हंगामा कर चुके हैं लेकिन परिणाम ढाक के तीन पात रहा है। </p>
<p> <strong>नगर पालिका को दिया जाएगा नोटिस</strong><br />बंदरों के आंतक से आमजन को मुक्त रखने के लिए पूर्व में नगर पालिका प्रशासन को धारा 133 के तहत नोटिस जारी कर बंदरों को पकड़वा कर दूर भेजने के निर्देश दिए थे लेकिन नगर पालिका ने प्रशासन ने निर्देशों की पालना नहीं है। नगर पालिका प्रशासन को एक बार फिर से नोटिस जारी कर बंदरों को पकड़वाने का  काम शुरू कराया जाएगा, जिससे आमजन को इनके आंतक से मुक्ति मिल सके। <br />-<strong>नीरज कुमार मीना, एसडीएम</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>दौसा</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 02 Oct 2022 13:30:16 +0530</pubDate>
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