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                <title>gandhi jayanti - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>आयकर विभाग की गांधी जयंती पर प्रभात फेरी, स्वच्छ और हरित भारत के प्रति दोहराई प्रतिबद्धता </title>
                                    <description><![CDATA[प्रभात फेरी सुबह 7:00 बजे ऐतिहासिक सांगानेरी गेट से शुरू हुई और सुबह 8:30 बजे पूज्य गोविंद देव जी मंदिर पर समाप्त हुई। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/income-tax-department-prabhat-pheri-on-gandhi-jayanti/article-128532"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/1117.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। आयकर विभाग, राजस्थान, जयपुर ने आज गांधी जयंती और स्वच्छ भारत दिवस के उपलक्ष्य में 'प्रभात फेरी' का आयोजन किया। यह आयोजन देशव्यापी "स्वच्छोत्सव" अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था, जिसने स्वच्छ और हरित भारत के लिए विभाग की दृढ़ प्रतिबद्धता को प्रदर्शित किया। इस पदयात्रा का उद्घाटन सांसद मंजू शर्मा ने किया। सभा को संबोधित करते हुए शर्मा ने राष्ट्रीय लक्ष्यों को प्राप्त करने में सामूहिक कार्रवाई के महत्वपूर्ण योगदान पर जोर दिया।</p>
<p>उन्होंने कहा स्वच्छ भारत केवल एक सरकारी मिशन नहीं है, यह एक सामूहिक जिम्मेदारी है। यह आयोजन दर्शाता है कि एक स्वच्छ राष्ट्र के निर्माण में प्रत्येक नागरिक की महत्वपूर्ण भूमिका है। इस कार्यक्रम में विभाग के अधिकारियों और उनके परिवारों, रोटरी क्लब के सदस्यों और सीए प्रोफेशनल्स सहित 500 से अधिक प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सभी प्रतिभागियों ने स्वच्छता और पर्यावरण जिम्मेदारी को बढ़ावा देने वाले बैनर लिए, एक साझा उद्देश्य के साथ मार्च किया। प्रभात फेरी सुबह 7:00 बजे ऐतिहासिक सांगानेरी गेट से शुरू हुई और सुबह 8:30 बजे पूज्य गोविंद देव जी मंदिर पर समाप्त हुई। सुमीत कुमार, प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त, राजस्थान, जयपुर, ने पदयात्रा का नेतृत्व किया। उनके साथ  रेनू अमिताभ, डीजीआईटी (जांच), जयपुर, और शैलेंद्र शर्मा, आयकर आयुक्त, जयपुर, समेत विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Oct 2025 17:42:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> प्रधानमंत्री मोदी ने गांधी जयंती पर बापू को अर्पित की श्रद्धांजलि : इनके आदर्शों ने बदली मानव इतिहास की दिशा, कहा- विकसित भारत के निर्माण में उनके बताए मार्ग पर चलते रहेंगे</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के मौके पर उनके समाधि स्थल राजघाट जाकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/modi-said-tribute-to-bapu-on-gandhi-jayanti-his-ideals/article-128525"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/111-(1)4.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के मौके पर उनके समाधि स्थल राजघाट जाकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने भी महात्मा गांधी की जयंती पर राजघाट पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।</p>
<p>इससे पहले मोदी ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा- गाँधी जयंती, प्रिय बापू के असाधारण जीवन को श्रद्धांजलि देने का दिन है, जिनके आदर्शों ने मानव इतिहास की दिशा बदल दी। उन्होंने दिखाया कि कैसे साहस और सादगी महान परिवर्तन के साधन बन सकते हैं। वे सेवा और करुणा की शक्ति को लोगों को सशक्त बनाने के अनिवार्य साधन मानते थे। हम एक विकसित भारत के निर्माण के अपने अभियान में उनके बताए मार्ग पर चलते रहेंगे।</p>
<p>वहीं, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा- आज 2 अक्टूबर है, राष्ट्रपति महात्मा गांधी की जयंती है। यह पूरी दुनिया के लिए शोध और जिज्ञासा का विषय रहा है कि क्या केवल सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलकर ही स्वतंत्रता प्राप्त की जा सकती है, लेकिन भारत ने यह कर दिखाया। इतना ही नहीं, स्वदेशी का भी आजादी की लड़ाई में बहुत बड़ा योगदान रहा। भारत की आजादी की लड़ाई ने दिखाया कि सत्य, अहिंसा और स्वदेशी के सहारे भी सदियों की गुलामी से आजादी मिल सकती है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Oct 2025 14:37:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दिया कुमारी ने गांधी वाटिका का किया दौरा : महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के चित्र पर श्रद्धा सुमन किए अर्पित, गांधी की जीवन यात्रा पर आधारित प्रदर्शनी का भी किया अवलोकन </title>
                                    <description><![CDATA[गांधी जयंती और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर दिया कुमारी ने जयपुर स्थित गांधी वाटिका का दौरा किया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/diya-kumari-visited-gandhi-vatika-and-also-visited-the-exhibition/article-128512"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/copy-of-news8.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। गांधी जयंती और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने जयपुर स्थित गांधी वाटिका का दौरा किया। उन्होंने महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के चित्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित कर उन्हें नमन किया।</p>
<p>दिया कुमारी ने इस अवसर पर गांधी जी की जीवन यात्रा पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन किया, जिसे गांधी जयंती पर विशेष रूप से लगाया गया था। इसके साथ ही उन्होंने कला, साहित्य, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग द्वारा आयोजित “संस्कृतिक सृजन पखवाड़ा” के तहत आयोजित “गांधी ड्रीम, मोदी विजन: आत्मनिर्भर भारत” कार्यक्रम में भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान उपमुख्यमंत्री ने “विकसित भारत 2047” विषय पर आधारित चित्र प्रदर्शनी में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Oct 2025 13:11:47 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>‘महात्मा गांधी’ के नाम से राजस्थान में चल रहे इंग्लिश माध्यम के सरकारी स्कूल</title>
                                    <description><![CDATA[प्रदेश के 33 जिला में राज्य सरकार चला रही 3730 राजकीय विद्यालय]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/english-medium-government-schools-running-in-the-name-of-mahatma/article-92114"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/mahatma-gandhi-english-medium.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में अंग्रेजी माध्यम स्कूलों के प्रति बढ़ती रुचि को देखते हुए शिक्षा विभाग ने प्रदेशभर में राजकीय ‘महात्मा गांधी’ अंग्रेजी माध्यम स्कूल चल रहे हैं। इन स्कूलों के प्रतिदिन दिन रुझान बढ़ता जा रहा है। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने कांग्रेस सरकार ने पिछले छह साल पहले शुरुआत में इन स्कूलों को 33 जिलों में शुरू किया था। इसके एक साल बाद में इनकी संख्या 345 हो गई। इसके बाद 1200 अंग्रेजी माध्यम स्कूल खोले। प्रदेश में अभी अंग्रेजी माध्यम की सरकारी स्कूलों की संख्या 3730 से ज्यादा है। </p>
<p><strong>लाखों बच्चे कर रहे फ्री में पढ़ाई</strong><br />अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में लाखों छात्र-छात्राएं वर्तमान में नि:शुल्क शिक्षा ले रहे हैं। प्रदेश में शिक्षा विभाग में कई प्रकार के नवाचार किए गए हैं। महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूल राजस्थान का एक मॉडल हो गया है। एक गरीब व्यक्ति एक लाख रुपए तक की फीस देकर अपने बच्चों को निजी स्कूल में पढ़ाता था। अब सरकारी विद्यालयों में नि:शुल्क पढ़ाई हो रही है। माहत्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूल में लॉटरी सिस्टम से प्रवेश होते हैं</p>
<p><strong>शिक्षकों को किया परिवर्तन</strong><br />इन सभी स्कूलों में विभाग ने सिर्फ माध्यम नहीं बदला बल्कि शिक्षकों को भी बदला दिया है। यहां वो ही शिक्षक पढ़ा रहे है, जिनका अंग्रेजी भाषा पर कंट्रोल है। बातचीत अंग्रेजी में कर सकते हैं। अंग्रेजी में ही अन्य विषय पढ़ा सकते हैं। यहां जो शिक्षकों पहले से कार्यरत थे और अंग्रेजी नहीं पढ़ा सकते थे, उन्हें अन्य स्कूलों में भेज दिया गया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Oct 2024 15:45:47 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>महात्मा गांधी और शास्त्री जयंती पर खड़गे-राहुल-प्रियंका ने पुष्पांजलि अर्पित कर दी भावभीनी श्रद्धांजलि</title>
                                    <description><![CDATA[राहुल गांधी ने कहा कि बापू ने ही मुझे सिखाया है, जीना है तो डरे बिना जीना है - सत्य, प्रेम, करुणा और सौहार्द के रास्ते पर सबको जोड़ते हुए चलना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/kharge-rahul-priyanka-paid-floral-tributes-on-the-birth-anniversary-of-mahatma/article-92132"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/4427rtrer-(12).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी तथा पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को उनकी जयंती पर आज नमन कर श्रद्धांजलि अर्पित की। गांधी पार्टी के अन्य नेताओं के साथ सुबह बापू की समाधि स्थल राजघाट गए और उनकी समाधि पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।</p>
<p>खड़गे ने कहा सत्य, अहिंसा व सत्याग्रह जैसे उच्चतम मूल्य से संपूर्ण विश्व को शांति का मार्ग दिखाने वाले, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सूत्रधार, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी के विचार व उनके आदर्श हमारे लिए सदैव प्रेरणादायी हैं। आज उनके विचारों को जो चुनौती मिल रही है, इसका मुकाबला हम बापू के सिद्धांतों पर चलकर कर रहें हैं। सभी देशवासियों को गांधी जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं।</p>
<p>राहुल गांधी ने कहा कि बापू ने ही मुझे सिखाया है, जीना है तो डरे बिना जीना है - सत्य, प्रेम, करुणा और सौहार्द के रास्ते पर सबको जोड़ते हुए चलना है। गांधी जी एक व्यक्ति नहीं, जीने और सोचने का तरीका हैं। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की जयंती पर उन्हें शत-शत नमन।</p>
<p>वाड्रा ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी ने दुनिया को सत्य, अहिंसा, सत्याग्रह जैसे अनमोल विचारों के साथ यात्राओं का महत्व समझाया था। वे मानते थे कि अपनी जनता का दुख दर्द समझने के लिए उनके बीच जाना और उन्हें समझना अत्यंत आवश्यक है। कहते हैं कि पूरी जिंदगी में बापू हर दिन औसतन 18 किलोमीटर पैदल चले। इतनी यात्रा में वे दो बार धरती का चक्कर लगा सकते थे।</p>
<p>उन्होने कहा कि गांधी जी हर यात्रा या कहें उनकी संपूर्ण जीवन यात्रा का संदेश था- प्रेम, शांति, सद्भाव, स्वतंत्रता, समानता, स्वावलंबन और स्वाभिमान। आज जब हर दिन समाज को बांटने के लिए तरह-तरह के प्रयास किए जा रहे हैं, तब इन विचारों को साकार करना ही देश के प्रति सच्चा कर्तव्य है और यही बापू को सच्ची श्रद्धांजलि है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Oct 2024 13:04:44 +0530</pubDate>
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                <title>गांधी दर्शन एक अमर विचारधारा</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय समाज और विश्व समुदाय में गांधी का वजूद अनमोल है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/gandhi-philosophy-is-an-immortal-ideology/article-92115"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/gandhai-ji1.png" alt=""></a><br /><p>आजादी के पुरोधा व पथ-प्रदर्शक महान व्यक्तित्व के धनी, सरलता, सौजन्यता और उदारता की मूर्ति व अहिंसा के पक्षधर राष्टÑपिता महात्मा गांधी एक व्यक्ति नहीं, एक विचार थे। और विचार मरा नहीं करते। विचार अमर हैं, उनकी अवधारणाएं शाश्वत हैं। विचार न जन्म लेते हैं ,न ही नष्ट होते हैं। प्रत्येक विचार हमारे अंतर्मन में गहरे बैठे होते हैं। काल के अजेय प्रवाह में कोई मनीषि पैदा होता है और उस विचार को शब्द दे देता है।</p>
<p>शनै: शनै: वह विचार वृहद सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक परिवर्तनों का कारण बनता है। वह विचार जिसने बुद्ध की अहिंसा को, या कहें तो बुद्ध के आविर्भाव से भी पूर्व सनातन संस्कृति में गहरे व्याप्त अहिंसा को केंद्र में ला दिया। समाजवाद का मूल सिद्धांत उनके विचारों में है। हो सकता है कि उन्होंने समाजवाद शब्द का प्रयोग न किया हो, लेकिन यह सच है कि उनसे बड़ा कोई समाजवादी नहीं है। उनका अछूतोद्धार आंदोलन शोषितों, दलितों, पिछड़ों को मुख्यधारा में शामिल करने का बेजोड़ उदाहरण है। शायद उनसे बड़ा दलित हितैषी पैदा ही नहीं हुआ। इस बात को स्वयंभू दलित हितैषियों को समझने की जरूरत है। गांधी के होने का अर्थ है मनसा वाचा कर्मणा एकरूपता का होना। कथनी और करनी में अंतर रखने वाले उनकी प्रासंगिकता पर सवाल खड़े कर रहे हैं। नमो बुद्धाय की आवाज बुलंद करने वाले याद रखें कि बुद्ध अहिंसा एवं करुणा के सबसे बड़े प्रतीक हैं।</p>
<p>भारतीय समाज और विश्व समुदाय में गांधी का वजूद अनमोल है। यथार्थ और आदर्श का सतत तालमेल, सत्याग्रह, सुराज और उनका सविनय अवज्ञा आंदोलन चिर प्रासंगिक है। गांधी ने दुनियाभर के चिंतकों को अपने विचारों से प्रभावित किया। उनका स्वभाव, रुचि, आदत जीवन दर्शन सत्यापित है। वो गांधी ही थे, जो अकेले अहिंसा के दम पर बंगाल की आग शांत कर आए और 55,000 सैनिकों के बाद भी पंजाब की आग जलती रही। हमें शोषित के साथ खड़ा होना, शोषित तबके का पक्षधर होना, क्रिया की प्रतिक्रिया का विरोध करना, लाख असहमतियों और चौतरफा विरोध के बावजूद अपनी बात पर मजबूती से स्टैंड लेना गांधी ने सिखाया। उनका जीवन अपने आप में महज एक प्रयोग ही था, जिसमें असफलताएं भी आईं और आलोचनाएं भी, हर किसी की जिंदगी में आती हैं और इन्हीं सबने गांधी को बड़ा बना दिया। गांधी कहते थे कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है। उन्होंने अपने सपनों के भारत में गांव के विकास को प्रमुखता प्रदान करके उससे देश की उन्नति निर्धारित होने की बात कही थी। गांधी ने अपने सपनों के भारत में अपनी व्यापक दृष्टि का परिचय देते हुए ग्रामीण विकास की तमाम आवश्यकताओं की पूर्ति करके ग्राम स्वराज्य, पंचायतराज,  ग्रामोद्योग, महिलाओं की शिक्षा, गांव की सफाई व गांव का आरोग्य व समग्र विकास के माध्यम से सशक्त देश के निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया था।</p>
<p>गांवों में ग्रामोद्योग की दयनीय स्थिति से चिंतित गांधी ने स्वदेशी अपनाओ,  विदेशी भगाओ के जरिए गांवों को खादी निर्माण से जोड़कर अनेकों बेरोजगार लोगों को रोजगार देकर स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी भूमिका को रेखांकित किया। वे स्वतंत्रता के पश्चात एक ऐसे भारत का निर्माण करना चाहते थे, जहां ऊंच-नीच और महिला-पुरुष का भेद समाप्त हो और सभी अपने मताधिकार का विवेकपूर्ण प्रयोग करके अपने प्रतिनिधि का चयन कर लोकतंत्र की नींव को मजबूत करें। उन्होंने स्वराज्य की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए कहा था कि स्वराज्य का मतलब बहुसंख्यक हिंदुओं का प्रभुत्व न होकर धर्म-जाति के भेदभावों से अछूते रहकर एक समतामूलक समाज का लोक सम्मति से शासन करना है। इसको लेकर उन्होंने समय-समय पर यंग इंडिया, हरिजन, हरिजन सेवक जैसी पत्र-पत्रिकाओं में अपने विचारों को उजागर भी किया। उन्होंने स्वराज्य को पवित्र शब्द के रूप में इंगित करते हुए उसे आत्म-शासन व आत्म-संयम से परिभाषित किया। गांधी भारतीय महिलाओं के पुनरुत्थान व उनको सामाजिक कुरीतियों व रूढ़ियों से मुक्त कराने के लिए प्रतिबद्ध थे। वे महिलाओं के सम्मान के लिए उनके समान अधिकार व देश के सामाजिक,  राजनीतिक, आर्थिक विकास में उनकी महत्वपूर्ण सहभागिता के पुरजोर समर्थक थे।</p>
<p>उन्होंने महिला शिक्षा, विधवाओं के पुनर्विवाह व महिलाओं के लिए दहेज मुक्त समाज का निर्माण करके उन पर जबरदस्ती लादे जाने वाले दबावों के विष से उन्हें स्वतंत्र कराना चाहते थे। निजी महत्वाकांक्षा से मुक्त उनका समूचा जीवन प्रदर्शन नहीं, बल्कि दर्शन साबित हुआ। गांधी दर्शन के चार आधारभूत सिद्धांत  सत्य, अहिंसा, प्रेम और सद्भाव न केवल एक सशक्त समाज व राष्टÑ निर्माण के घटक हैं, बल्कि एक सच्चे व नेक दिल इंसान की व्यक्तिगत एवं चारित्रिक विशेषताएं भी हैं। अभी गांधी के सपनों के भारत को साकार करने के लिए हमें लंबा सफर तय करना है। एक ऐसा माहौल कायम करने की आवश्यकता है, जहां लोगों में गांधीवाद और गांधी मूल्यों के प्रति आस्था व विश्वास बना रहे।  </p>
<p><strong>-देवेन्द्रराज सुथार</strong><br /><strong>यह लेखक के अपने विचार हैं।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Oct 2024 11:19:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>2 अक्टूबर विशेष - जिनकी आवाज पर पूरा देश एकजुट हो जाता था ऐसे थे राष्ट्रपिता गांधी और शास्त्री</title>
                                    <description><![CDATA[आज भी ऐसे देशभक्तों की जरूरत है जो अपने देश और उसकी भलाई के लिए प्रतिबद्ध हो। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/october-2-special---father-of-the-nation-gandhi-and-shastri-were-such-on-whose-voice-the-whole-country-would-unite/article-58522"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/गांधी-और-शास्त्री.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। आज दो अक्टूबर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती है। दोनों का पूरा जीवन देश व दुनिया के लिए एक मिसाल है। गांधीजी ने अहिंसा के रास्ते पर चलकर अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर मजबूर कर दिया और ये साबित किया कि कठिन से कठिन लड़ाई अहिंसा से जीती जा सकती है। तो वहीं, शास्त्री जी ने अपनी सादगी और विनम्रता से दुनिया में पहचान बनाई। दोनों का पूरा जीवन देश के लिए समर्पित रहा। इन दोनों महान हस्तियों ने अपने कार्यों और विचारों से देश और दुनियाभर के जनमानस पर अपनी एक अमिट छाप छोड़ी। गांधी जी के अंग्रेजो को भारत से खदेड़ने के लिए सत्याग्रह, जन आंदोलनों, अनशन की बड़ी भूमिका रही।  गांधीजी का विशेष गुण था अनशन करना उसका इतना प्रभाव होता था कि बड़े से बड़ा आंदोलन भी शांत हो जाता था। आजादी की लड़ाई कोई मामूली लड़ाई नहीं थी उस समय देश में अनेक दंगे हुए आंदोलन हुए जो आज के समय से कई गुना ज्यादा थे वो सब  बिना हिंसात्मक रूख अपनाएं गांधी जी के सत्याग्रह, अहिंसा उपवास के आगे शांत हो गए। गांधी जी के आंदोलन ही थे जिनसे लोगों को एहसास होने लगा था कि ये आंदोलन उन्हें अंग्रेजों की दासता से आजादी दिला सकते है। गांधी जी ने कई आमरण अनशन आजादी की लड़ाई के दौरान किए थे। सितंबर 1924 में भी उन्होंने सांप्रदायिकता को खत्म करने और कौमी एकता को मजबूत करने के लिए 21 दिन का आमरण अनशन किया था। उनके इस उपवास का आम जनमानस पर इतना गहरा प्रभाव पड़ा था कि दंगे रूक गए थे और अमन बहाली कायम हो सकी थी। उनके उपवास असरदार साबित होते थे उनके आमरण अनशन का नाम सुनते ही अंग्रेजी हुकूमत के हाथ-पांव फूल जाते थे। ऐसा व्यक्तित्व था गांधी जी का। वर्तमान में देश में 140 करोड़ की जनसंख्या में किसी का भी इतना विराट व्यक्तित्व नहीं है जो अनशन करें और विरोध प्रदर्शन, दंगे रूक जाए। आखिर ऐसा क्यों नहीं है? अहिंसा गांधी जी का विशेष गुण था। यह उन्होंने खोजा और उसके आधार पर आजादी दिलाई। गांधी जी इसीलिए राष्टÑपिता कहलाएं। गांधी जी की आलोचना करने से पहले यह मनन करना चाहिए यह सोचना चाहिए कि हम कहां है? क्या उनके जैसा विराट व्यक्तित्व है क्या कि एक आवाज पर पूरा देश एक जुट हो जाए। देश में हिंसात्मक आंदोलन शांत हो जाए। गांधी जी में अनेक गुण थे क्या उनके किसी भी एक गुण को अपने जीवन में उतार पाएं? अंग्रेजों ने भी गांधी जी के लिए कहा था कि गांधी जो कर पाए हम बंदूक से नहीं कर पाएं। आज हर तरह से एडवांस होने के बावजूद भी क्या कारण है कि 140 करोड़ की आबादी में उनके जैसा व्यक्तित्व किसी का नहीं है। आखिर क्यों? महात्मा गांधी ने भारत को दिया आजादी की लड़ाई का सबसे बड़ा हथियार और संघर्ष करने का सबसे अनूठा तरीका। गांधी जी ने देश को शांति पूर्ण  आंदोलन की ऐसी विरासत दी है जिसके नैतिक बल के आगे बंदूकें तक कमजोर साबित हो गई थी।</p>
<p><strong>एक आवाज पर लाखों भारतीयों ने छोड़ दिया था एक वक़्त का खाना</strong><br />वहीं लाल बहादुर शास्त्री जिनकी एक आवाज पर लाखों भारतीयों ने एक वक्त का खाना छोड़ दिया था। यह वाकया 26 सितंबर 1965 का है। 1965 भारत-पाक की लड़ाई के दौरान अमरीकी राष्ट्रपति लिंडन जॉन्सन ने शास्त्री जी को धमकी दी थी कि अगर आपने पाकिस्तान के खिलाफ लड़ाई बंद नहीं की तो हम आपको पीएल 480 के तहत जो लाल गेहूं भेजते हैं उसे बंद कर देंगे। उस समय भारत गेहूं के उत्पादन में आत्मनिर्भर नहीं था। शास्त्री जी को ये बात बहुत चुभी क्योंकि वह स्वाभिमानी व्यक्ति थे। उन्होंने अपनी पत्नी ललिता शास्त्री से कहा कि क्या आप ऐसा कर सकती हैं कि आज शाम हमारे यहां खाना ना बने। मैं कल देशवासियों से एक वक्त का खाना न खाने की अपील करने जा रहा हूं। मैं देखना चाहता हूं कि मेरे बच्चे भूखे रह सकते हैं या नहीं। जब उन्होंने देखा कि उनके बच्चे एक वक्त बिना खाने के रह सकते हैं तो उन्होंने देशवासियों से भी ऐसा करने को कहा। उनके आह्वान का देशवासियों पर गहरा असर पड़ा। लोगों ने बिना किसी हिचक के अपने प्रधानमंत्री के आह्वान पर भरोसा किया और देश का स्वाभिमान बचाने के लिए सप्ताह में एक दिन एक वक्त का खाना छोड़ दिया।  किसी ने कोई शिकायत नहीं की, किसी ने कोई सवाल नहीं उठाया। उनके इस आग्रह का देश पर जबरदस्त प्रभाव पड़ा। आज हमारे देश में लाल बहादुर शास्त्री जैसा कोई नहीं है।  वह एक ईमानदार व्यक्ति थे जिन्होंने व्यक्तिगत लाभ के लिए अपने पद का इस्तेमाल कभी नहीं किया। क्या आज के समय में भी उनके जैसे व्यक्तित्व का इंसान करोड़ों देशवासियो के बीच होना  संभव है... जिसके एक आह्वान पर बिना सवाल किये देश की जनता उनके साथ हो जाये..? गांधी जी और शास्त्री जी ऐसे सच्चे देश भक्त थे जिनके लिए देश सर्वोपरि था। आज भी ऐसे देशभक्तों की जरूरत है जो अपने देश और उसकी भलाई के लिए प्रतिबद्ध हो। जो देश की भलाई के लिए अपने हितों को एक तरफ रखने को तैयार रहें। गांधी जी और शास्त्री जी सभी लोगों के लिए मिसाल हैं। <br />आज 140 करोड़ की आबादी के बीच में गांधी जी और शास्त्री जी जैसा विराट व्यक्तित्व  किसी का क्यों नहीं है... दैनिक नवज्योति ने शहर के लोगों के सामने यही बात रखी इस पर लोगों की क्या राय रही जानिए।</p>
<p>आज का समय भौतिकवाद का आ गया है। वर्तमान में त्याग करने वाले, निस्वार्थ भाव से काम करने वाले लोग नहीं है। उस समय भेदभाव नहीं था। ईमानदार नेतृत्वों को, खेत-खलिहान और गरीब की बात करने वालों को मौका मिलेगा तो देश में गांधी जी, शास्त्री जी जैसे तो नहीं लेकिन उनके पदचिहनों पर चलने वाले व्यक्तित्व को आगे बढ़ने का मौका अवश्य मिलेगा।<br /><strong>- रामनारायण मीणा, विधायक पीपल्दा</strong></p>
<p>आज देश में इतने परिवर्तन हुए है यह भी किसी गांधी की बदौलत ही  हुए होंगे। देश सुरक्षित हुआ है, प्रत्येक नागारिक अपने कर्तव्य का बोध करता नजर आ रहा है। सरकार भी लोगो के लिए इस तरह के काम करने का प्रयास कर रही है कि लोगों का आर्थिक स्तर ऊंचा उठे। आज हर आदमी स्वयं को गौरवान्वित महसूस करता है कि मैं गांधीवादी हूं। देश में शांति रखने के लिए हर व्यक्ति प्रयास कर रहा है।  बहुत सारे लोग हैं जो आज गांधी जी की अहिंसा की बात को लेकर आगे बढ़ रहे है। निश्चित तौर पर जहां कहीं देश को बचाने की बात आती है तो कठोर निर्णय भी लेने पड़ते है।<br /><strong>- चन्द्रकांता मेघवाल, विधायक केशवरायपाटन</strong></p>
<p>उस समय के महापुरूषों ने जनता का दिल और विश्वास जीता था। वैसा आज के दौर में कोई जनता का विश्वास नहीं जीत पाया है। विश्वास हो तो एक आवाज पर सब खड़े हो जाते हैं। वोट के लिए  कई तरह के प्रलोभन देते हैं ये सामाजिकता के लिए हानिकारक होते है। जातिवाद को बढ़ावा दिया जाता है। भेदभाव पैदा करते हैं इससे लोगों का मन टूट जाता है। मानव को मानव से बांट दिया। राष्टÑ के प्रति जो भावनाएं होनी चाहिए उनमें कमी है। स्वयं का व्यक्तिव लोक नायक जैसा जनता के सामने स्थापित नहीं कर पाए। वर्तमान में नेताओं का गांधी जी और शास्त्री जी जैसा व्यक्तित्व नहींं बन पाया है क्योंकि वह स्वयं का व्यक्तित्व जनता के सामने लोकनायक जैसा साबित नहीं कर पाए हैं, प्रेरणा के स्त्रोत नहीं बन पाए हैं। इसलिए जनता में वह भावनाएं नहीं आ पाती जो पहले के राष्टÑनायकों के प्रति थी।<br /><strong>- योगेन्द्र शर्मा, डायरेक्टर, शिशु भारती स्कूल</strong></p>
<p>वर्तमान नेता है उन्होंने आम जनता को अलग-अलग भागों में अपनी सुविधा के अनुसार विभाजित किया हुआ है। अपनी-अपनी सुविधा के अनुसार जनता का इस्तेमाल करते हैं। उस जमाने में सभी व्यक्ति एक नेता की बात सुनते थे, बात करते थे उस समय भेदभाव नहीं होता था। जातिवाद उस समय भी था। आज लोगो का वर्गीकरण  नेताओं ने अलग-अलग हिस्सों में कर दिया है इस मुद्दे पर ये बात करनी है उस मुद्दे पर ये बात करनी है। ये मुद्दा यदि कोई उठा रहा है सही है तो उसे गलत साबित करना है। गलत को गलत नहीं बोलने की आदत डलवा दी गई है। सही को भी गलत साबित करने की कोशिश करते है। जिस तरह का माहौल बना दिया है उस की वजह से कोई व्यक्तित्व उभर नहीं सकता।<br /><strong>- धीरेन्द्र चौधरी, कॉन्ट्रेक्टर</strong></p>
<p>व्यक्तिगत स्वार्थ और दलगत राजनीति की वजह से बातें तो सभी करते हैं पर उनके पीछे के मंतव्य को जनता काफी कुछ समझ चुकी है।  कथनी और करनी में काफी अंतर दिखता है। महात्मा गांधी और शास्त्री जी किसी भी बात को कहने से पहले स्वयं अनुसरण करते थे फिर लोगों से कहते थे। आचार-व्यवहार में जनता आज जैसा चाहती है वैसा दृष्टिगत नहीं होता है। जैसा आश्वासन देने है या कहते है उसमें कथनी करनी का अंतर व्यवहार में दिखाई देता है। इसलिए लोग फॉलो नहीं कर पाते।<br /><strong>- डॉ. सुषमा आहूजा, पूर्व प्राचार्य, राजकीय वाणिज्य कन्या महाविद्यालय,कोटा</strong></p>
<p>पहले लोगों में भावनाएं थी बड़ों का सम्मान करते थे। बड़ों की कहीं बातों का अनुसरण करते थे यह सोचते थे कि किसी बड़े ने कोई बात कहीं है तो अच्छी बात कहीं होगी। आज बड़ों की बातों को नकार दिया जाता है। आबादी भी पहले की तुलना में बहुत ज्यादा हो गई है। सबके विचार अलग- अलग हो गए हैं। भौतिकवादी लोग हो गए है। दिखावे की दुनिया बहुत हो गई है। लोग यह सोचते है कि जो हो रहा है उससे हमें क्या मतलब। लोगों की अब सोच बदल गई है। समय के साथ संस्कार गुण खत्म होते जा रहे है। देश के प्रति भावनाएं, निष्ठा, ईमानदारी अब पहले जैसी लोगों में नहीं रही। जिधर प्रलोभन आ जाता है जनता उधर का रूख कर लेती है।<br /><strong>- सुषमा बंसल, अध्यक्ष, रोटरी क्लब पद्मिनी कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 Oct 2023 13:21:31 +0530</pubDate>
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                <title>युवा वर्ग खादी को अपनाकर राज्य और राष्ट्र हित में कर सकता है सुखद परिवर्तन : खादी एवं ग्रामोद्योग मंत्री </title>
                                    <description><![CDATA[खादी एवं ग्रामोद्योग मंत्री शकुंतला रावत ने कहा कि खादी हानिकारक रसायन रहित और पर्यावरण हितैषी वस्त्र है साथ ही खादी आत्मनिर्भर भारत की और एक बढ़ता कदम भी है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/by-adopting-khadi-youth-can-make-a-pleasant-change-in/article-25176"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-10/capture1.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। खादी एवं ग्रामोद्योग मंत्री शकुंतला रावत ने कहा कि आमजन खासकर युवावर्ग खादी को अपनाकर राज्य और देश हित में एक सुखद परिवर्तन ला सकता है। उन्होंने कहा कि खादी हानिकारक रसायन रहित और पर्यावरण हितैषी वस्त्र है साथ ही खादी आत्मनिर्भर भारत की और एक बढ़ता कदम भी है। रावत गांधी जयंती एवं आजादी के 75वें अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में गोकुल भाई भट्ट स्मृति भवन में आयोजित खादी ग्रामोद्योग प्रदर्शनी का उद्घाटन करते समय यह बात कही। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का कतिन, बुनकर व खादी से जुड़े हर हाथ को सुदृढ़ बनाने का हर संभव प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की मंशा खादी की लोकप्रियता बढ़ाने व आमजन तक इसकी पहुंच सुलभ करने की है।</p>
<p>रावत ने कहा कि खादी को बढ़ावा देने के साथ खादी संस्थानों के कंप्यूटरीकरण व  डिजिटाइजेशन के लिए भी व्यापक स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि खादी से जुड़े कारीगरों को उचित प्रशिक्षण व स्टाइपेंड भी सरकार द्वारा दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा गांधी जयंती के अवसर पर राज्य द्वारा उत्पादित खादी वस्त्रों पर 50 प्रतिशत की विशेष छूट दी जा रही है। यह छूट 2 अक्टूबर, 2022 से 30 जनवरी, 2023 तक लागू रहेगी। इस दौरान उन्होंने कतिनो और बुनकरों के साथ बुनाई की प्रक्रिया समझी और चरखा भी चलाया।</p>
<p>खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड अध्यक्ष बृजकिशोर शर्मा ने खादी के उत्थान के लिए बोर्ड द्वारा किए जा रहे नवाचारों भी साझा किया। उन्होंने कहा कि कतिनो और बुनकरों को अत्याधुनिक तरीके के चरखे उपलब्ध करवाए जा रहे हैं, साथ ही उन्हें प्रशिक्षित लोगों से प्रशिक्षण भी दिलाया जा रहा है।उद्योग एवं वाणिज्य विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव  वीनू गुप्ता ने भी इस अवसर पर अपने विचार रखे। इस अवसर पर खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के सचिव  मूलचंद, उपाध्यक्ष  पंकज मेहता सहित भारी संख्या में आमजन व अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 02 Oct 2022 19:35:04 +0530</pubDate>
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