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                <title>waste management - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>होली के त्यौहार पर सफाई व्यवस्था को लेकर दिये अधिकारियों को निर्देष</title>
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                        <![CDATA[नगर निगम जयपुर ने 2 और 3 मार्च को होली के लिए विशेष सफाई अभियान और सुरक्षा इंतजाम किए हैं। आयुक्त डॉ. गौरव सैनी के अनुसार, राख और कचरे के त्वरित निस्तारण हेतु अतिरिक्त कर्मी तैनात रहेंगे। आगजनी रोकने के लिए शहर के प्रमुख पुलिस स्टेशनों पर अग्निशमन वाहन सुबह 7 से रात 10 बजे तक मुस्तैद रहेंगे।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/instructions-given-to-officials-regarding-cleanliness-during-holi-festival/article-144884"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/1200-x-600-px)-(1)20.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। आगामी होली एवं धुलंडी पर्व (2 एवं 3 मार्च) के अवसर पर नगर निगम जयपुर द्वारा शहर में विशेष साफ-सफाई व्यवस्थाएँ सुनिश्चित की गई हैं। नगर निगम आयुक्त डाॅ. गौरव सैनी के निर्देषानुसार नगर निगम क्षेत्र में होलिका दहन एवं धुलंडी के दौरान उत्पन्न होने वाली राख, कोयला, लकड़ी अवशेष, रंग-गुलाल एवं अन्य कचरे की त्वरित सफाई हेतु विशेष अभियान चलाया जाएगा। मुख्य सड़कों, चैराहों एवं सार्वजनिक स्थलों पर अतिरिक्त सफाई कर्मियों की तैनाती की जाएगी ताकि आमजन को किसी प्रकार की असुविधा न हो तथा दुर्घटनाओं की संभावना को रोका जा सके।</p>
<p>नगर निगम आयुक्त डाॅ. गौरव सैनी ने आमजन से अपील की कि होली पर्व सौहार्द एवं सुरक्षित वातावरण में मनाएं तथा सार्वजनिक स्थलों पर स्वच्छता बनाए रखने में नगर निगम प्रषासन का सहयोग करें। इसके अतिरिक्त, सुरक्षा की दृष्टि से दिनांक 2 व 3 मार्च  को अग्निशमन वाहन मय आवश्यक उपकरण एवं स्टाफ की तैनाती शहर के विभिन्न स्थानों पर की जायेगी। 2 व 3 मार्च को थाना रामगंज, माणक चैक, ब्रह्मपुरी, शास्त्रीनगर, कोतवाली, लालकोठी, मालवीय नगर, आदर्शनगर, सांगानेर, मानसरोवर, वैशाली नगर तथा पुलिस कंट्रोल रूम, यादगार जयपुर पर की जाएगी। यह व्यवस्था प्रातः 7 बजे से रात्रि 10 बजे तक प्रभावी रहेगी।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Feb 2026 18:20:07 +0530</pubDate>
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                <title>'ग्लोबल कॉन्क्लेव फॉर सर्कुलर इकोनॉमी एंड सस्टेनेबिलिटी' विषय पर चार दिवसीय कॉन्क्लेव की हुई शुरुआत</title>
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                        <![CDATA[प्रथम दिन 'लैंडफिल मैनेजमेंट एंड क्लोजर टू डम्प साइट्स' विषय पर वर्कशॉप का आयोजन भी किया गया, जिसके तहत कॉन्क्लेव के विशेषज्ञों ने जयपुर के नजदीक स्थित सेवापुरा लैंडफिल साइट की विजिट भी की। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/a-four-day-conclave-on-the-theme-global-conclave-for-circular/article-39795"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-03/whatsapp-image-2023-03-14-at-11.45.45.jpeg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। दुनियाभर में सॉलिड वेस्ट एक बड़ी समस्या बना हुआ है, जिसके समाधान के विभिन्न तरीकों पर चर्चा के लिए जयपुर की पूर्णिमा यूनिवर्सिटी में आज चार दिवसीय ग्लोबल कॉन्क्लेव की शुरुआत हुई। 'ग्लोबल कॉन्क्लेव फॉर सर्कुलर इकोनॉमी एंड सस्टेनेबिलिटी' विषय पर यह कॉन्क्लेव इंटरनेशनल सॉलिड वेस्ट एसोसिएशन (आईएसडब्ल्यूए) तथा इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड वेस्ट मैनेजर्स (आईसीडब्लूएम) की ओर से आयोजित किया जा रहा है। आगामी तीन दिनों में यह कॉन्क्लेव शहर के अलग—अलग शैक्षणिक संस्थानों में आयोजित किया जाएगा। इसमें विभिन्न देशों के सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट विशेष, साइंटिस्ट व पर्यावरणविद शामिल हुए हैं। प्रथम दिन 'लैंडफिल मैनेजमेंट एंड क्लोजर टू डम्प साइट्स' विषय पर वर्कशॉप का आयोजन भी किया गया, जिसके तहत कॉन्क्लेव के विशेषज्ञों ने जयपुर के नजदीक स्थित सेवापुरा लैंडफिल साइट की विजिट भी की। </p>
<p>कॉन्क्लेव के उद्घाटन समारोह में आईसीडब्लूएम के चेयरमेन डॉ. विवेक अग्रवाल ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। इसके बाद 'डब्ल्यूजी लैंडफिल एंड टास्क फोर्स ऑन क्लोजिंग डम्प साइट्स' विषय पर एससीएस इंजीनियर्स के जेम्स लॉ का सैशन हुआ। इसमें उन्होंने कहा कि दुनियाभर के डंपिंग यार्ड्स को ठीक करने के लिए हमें टास्क फोर्स की जरूरत पड़ंगी। उन्होंने बताया कि भारत सरकार ने अपने बजट में पर्यावरण व सस्टेनेबिलिटी पर काफी फंड तय किया है, जो एक अच्छी पहल है। अब इस दिशा में साथ मिलकर काम करने की जरूरत है।</p>
<p>मेजबान पूर्णिमा यूनिवर्सिटी के प्रो प्रेसीडेंट डॉ. मनोज गुप्ता ने दुनियाभर में डंपिंग यार्ड्स को एक बड़ी पर्यावरणीय समस्या बताते हुए इसके तुरंत समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया। 'डम्प साइट रिमीडीएशन एंड बायो माइनिंग प्रोजेक्ट्स इन इंडिया' विषय पर आयोजित सैशन में जिग्मा ग्लोबल एनवायर्न सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर नागेश प्रभु ने भारत देश के डंपिंग यार्ड्स को ठीक करने के अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि कूड़े—कचरे को किस प्रकार प्रॉपर डिस्पोज करके फिर से उसका वास्तविक स्वरूप लौटाया जाता है।</p>
<p>यूनाइटेड नेशंस एनवायरनमेंट प्रोग्राम के क्लाइमेट एंड क्लीन एयर कंडीशन के सीनियर साइंस व प्रोग्राम मैनेजमेंट ऑफिसर डॉ. वैलेंटाइन फोल्तेस्कु ने अपने 'मीथेन रीडक्शन पोटेंशियल आॅफ द वेस्ट सेक्टर' विषयक सैशन में बताया कि कचरे के ढेरों से निकलने वाली मीथेन गैस पर्यावरण के लिए काफी नुकसानदायक है। यह कार्बन डाइऑक्साइड से भी खतरनाक गैस है, जिसे बिजली बनाने में और घरेलू गैस के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। </p>
<p>'पॉसिबल इम्प्लीमेंटेशन मॉडल्स फॉर यूएलबीज' विषय पर वर्ल्ड बैंक की सीनियर म्यूनिसिपल इंजीनियर पूनम अहलूवालिया का सैशन हुआ। इसमें उन्होंने कहा कि भारत देश के अधिकांश नगरीय निकायों को कचरे के प्रोपर डिस्पोज करने के बारे में उचित जानकारी नहीं है। उन्हें इसे बारे में जागरूक किया जाता वर्तमान समय की आवश्यकता है, ताकि कचरे के ढेरों को और अधिक विशाल होने से रोका जा सके। कचरे के निस्तारण के लिए हमें सिर्फ सरकारों पर ही निर्भर नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसके लिए लोगों को आगे आने की जरूरत है। </p>
<p>इसके बाद 'रीयूज ऑफ रिसायकल्ड मैटेरियल्स फॉर सर्कुलर इकोनॉमी' विषय पर यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास के सिविल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के प्रोफेसर डॉ. सहादत हुसैन का ऑनलाइन सैशन हुआ। इसमें उन्होंने प्लास्टिक वेस्ट से होने वाले दुष्प्रभावों पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने बताया कि सिविल इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स में प्लास्टिक वेस्ट का इस्तेमाल किया जा सकता है। इस मामले में भारत अन्य देशों से काफी आगे है, क्योंकि यहां रोड़ बनाने में इसका काफी समय से इस्तेमाल किया जा रहा है। </p>
<p>इन सत्रों के बाद 'क्लोजिंग ओपन डम्प साइट्स, स्टोपिंग ओपन बर्निंग एंड मूविंग अप द बेस्ट हाइरार्की' विषय पर पैनल डिस्कशन आयोजित किया गया। इसमें कॉन्क्लेव के सभी वक्ताओं ने डंपिंग साइट्स को ठीक करने के बारे में चर्चा की। पूर्णिमा यूनिवर्सिटी के सिविल इंजीनियरिंग के एचओडी डॉ. अंकुश जैन ने पैनल डिस्कशन का संचालन किया। अंत में आईएसडब्ल्यूए की टेक्निकल डायरेक्टर अदिति रमोला ने धन्यवाद ज्ञापित किया।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Mar 2023 11:52:38 +0530</pubDate>
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                <title>बड़ी चुनौती है दिल्ली में कचरे का पहाड़</title>
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                        <![CDATA[ प्रदूषण हो या दूसरी समस्याएं इसके लिए वित्तीय जरूरतों को पूरा करना आम आदमी पार्टी के दिल्ली कार्पोरेशन के लिए अग्नि परीक्षा से कम नहीं है। ]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/big-challenge-is-the-mountain-of-garbage-in-delhi/article-31928"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-12/p-6.jpg" alt=""></a><br /><p>चुनाव बाद हुए एक्जिट पोल में जैसी की संभावना व्यक्त की जा रही थी, उसके मुताबिक दिल्ली नगर निगम के चुनाव में आम आदमी पार्टी आसानी से बहुमत का आंकड़ा पाने में सफल रही। आप ने 134 वार्डों में जीत दर्ज कर बोर्ड पर अपना परचम फहरा दिया। भाजपा की भ्रष्टाचार सहित दूसरे मुद्दों पर आप को घेरे में लेने की कोशिश विफल रही। भाजपा 104 वार्डों में चुनाव जीतने के साथ दूसरे स्थान पर रही। कांग्रेस इस चुनाव में भी फिसड्डी साबित हुई। कांग्रेस दहाई का आंकड़ा भी हासिल नहीं कर सकी और 9 वार्डों में जीत कर तीसरे स्थान पर सीमिट गई।<br />कार्पोरेशन के चुनाव को लोकसभा चुनाव का लिटमस टेस्ट भी कह सकते हैं। इस चुनाव ने साबित कर दिया है कि अब वो दिन लद गए जब सिर्फ नारों और पुरातन विचारधारा के दम पर मतदाताओं को बरगलाया जा सकता है। एमसीडी के चुनाव ने जन अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरने पर भाजपा का 15 साल पुराना मजबूत राजनीतिक किला ढहा दिया। इसका व्यापक संदेश है कि मतदाताओं की परवाह नहीं करने वाले राजनीतिक दलों की खैर नहीं है। मतदाताओं को फिजूल के मुद्दों की चर्चा कर गुमराह नहीं किया जा सकता। महंगाई और बेरोजगारी जैसी राष्टÑीय समस्याओं को छोड़ दें तो, स्थानीय स्तर पर हर रोज होने वाली समस्याओं के समाधान का ठोस आश्वसान और कार्रवाई के बगैर किसी भी राजनीतिक दल चुनावी मैदान में टिकना आसान नहीं है।<br /><br />इतना ही नहीं विशेषकर शहरी मतदाताओं और आम नागरिकों को सुविधाओं के साथ गुणवत्ता की भी दरकार है। सिर्फ बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराकर ही मतदाताओं का भरोसा नहीं जीता जा सकता है, बल्कि सुविधाओं के साथ गुणवत्ता भी होना जरूरी है। मुख्यमंत्री केजरीवाल न सिर्फ  बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करने में बल्कि उन्हें गुणवत्तायुक्त बनाने में भी कामयाब रहें हैं। मौहल्ला क्लीनिक और स्कूलों में अंग्रेजी के माध्यम से स्तरीय शिक्षा इसका उदाहरण हैं। इन चुनावों से यह भी साफ  हो गया कि भ्रष्टाचार मतदाताओं के लिए तभी बड़ा मुद्दा बन सकता है, जब बुनियादी सुविधाओं के विस्तार का अभाव हो। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और स्वास्थ्य मंत्री सत्येन्द्र जैन के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों में की गई कार्रवाई और भाजपा द्वारा उन्हें प्रचारित किए जाना चुनावी दृष्टि से फायदेमंद साबित नहीं हुआ।<br /><br />दिल्ली में नगर निगम में भाजपा का बोर्ड होने के बावजूद भाजपा बोर्ड के कामकाज को उपलब्धि के तौर पर भुनाने में नाकामयाब रही। इसके विपरीत मुख्यमंत्री केजरीवाल के पुराने कामकाज के मद्देनजर मतदाताओं ने उनके वादों पर भरोसा जताया। भाजपा ने बोर्ड पर लगातार 15 साल तक राज किया। इसके बावजूद दिल्ली में भारी प्रदूषण, यमुना नदी का प्रदूषण, यातायात की सुगम व्यवस्था जैसी समस्याओं का ठोस निराकरण नहीं कर सकी। जबकि केजरीवाल ने लगभग सभी जनसभाओं में दिल्ली को कचरे से मुक्त कराने की बात कही। केंद्र में और दिल्ली नगर निगम में भाजपा का बोर्ड प्रदूषण की समस्या से निपटने में विफल रहा। हालांकि भाजपा ने इसका ठीकरा आप पर फोड़ने की कोशिश की, किन्तु मतदाताओं ने इसे नकार दिया।<br /><br />चुनाव जीत कर कार्पोरेशन पर काबिज होने के बाद आम आदमी पार्टी के लिए दिल्ली में प्रदूषण और कचरे की समस्या से निपटना आसान नहीं है। दिल्ली गैस चैम्बर में तब्दील हो चुकी है। गाजीपुर लैंडफिल स्टेशन पर कचरे के पहाड़ की ऊंचाई कुतुब मीनार से ऊंची हो चुकी है। दिल्ली वायु प्रदूषण के साथ स्थायी कचरे की दोहरी समस्या से जूझ रही है। देश की राजधानी विश्व के सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में शुमार है। इस समस्या के ठोस और स्थायी दीर्घकालिन समाधान की जरूरत है। दिल्ली का वायुमंडल विषैला हो चुका है। श्वास संबंधी और प्रदूषण से होने वाली दूसरी बीमारियों से दिल्लीवासी त्रस्त हैं। दिल्ली से बहने वाली यमुना नदी भी विश्व की चुनिंदा प्रदूषित नदियों की सूची में मौजूद है। इसके भी स्थायी हल की जरूरत है।<br /><br />प्रदूषण हो या दूसरी समस्याएं इसके लिए वित्तीय जरूरतों को पूरा करना आम आदमी पार्टी के दिल्ली कार्पोरेशन के लिए अग्नि परीक्षा से कम नहीं है। राजधानी के तीनों नगर निगम (उत्तरी, पूर्वी और दक्षिणी) का विलय होने के बाद सबसे बड़ी चुनौती खराब आर्थिक स्थिति से उबारना है। तीनों निगमों में राजस्व के मुकाबले खर्च अधिक हैं। सालाना नौ हजार करोड़ रुपये तो निगम कर्मियों के वेतन पर ही खर्च हो जाते हैं, जबकि निगम का पूरा राजस्व महज नौ हजार करोड़ है। इतना ही नहीं, ठेकेदारों की भी 1,600 करोड़ की देनदारी है। डेढ़ लाख कर्मचारियों को समय पर वेतन देना और विकास कार्यों को फिर से शुरू करना अपने आप में बहुत बड़ी चुनौती होगी। यह भी निश्चित है कि केंद्र भाजपा की सरकार से मुख्यमंत्री केजरीवाल का पहले से ही छत्तीस का आंकड़ा है। ऐसे में आप के दिल्ली कार्पोरेशन बोर्ड को अपने बूते ही वित्तीय मुश्किलों का हल ढूंढना होगा।<br /><br /><strong>-योगेन्द्र योगी</strong><br /><strong>(ये लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>]]>
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                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 10 Dec 2022 11:55:31 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur]]>
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                <title>कचरा निस्तारण को लेकर बने ठोस कार्य योजना: कलेक्टर</title>
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                        <![CDATA[जिला पर्यावरण समिति सदस्य सचिव मोहित गुप्ता ने बताया कि जिले में 22 लाख 10 हजार पौधों के सशुल्क वितरण का लक्ष्य रखा गया है, जिस पर कलेक्टर ने ग्राम पंचायतों एवं नगर निकायों को 20-20 प्रतिशत पौधे वितरण का लक्ष्य दिया जाए, वही वन विभाग रोड एजेंसीज, खनन विभाग, उद्योग विभाग के जरिए शेष 60 प्रतिशत पौधों को जन-साधारण में वितरित किया जाए।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/concrete-action-plan-made-for-garbage-disposal-collector/article-30466"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/q-48.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जिला कलेक्टर प्रकाश राजपुरोहित ने कहा कि शहर एवं गांवों में साफ-सफाई के लिए आमजन को जागरुक करने के साथ ही कचरे के निस्तारण के लिए कार्य-योजना तैयार की जाए, जिससे दुबारा कचरा नहीं आ सके। उन्होंने सिंगल यूज प्लास्टिक के उत्पादन और उपयोग के खिलाफ  प्रभावी कार्रवाई करने के भी अधिकारियों को निर्देश दिए। इसके लिए सिंगल यूज प्लास्टिक के उत्पादन एवं उपयोग करने वालों पर अभियान के रूप में कार्रवाई की जाए। जिला कलेक्ट्रेट सभागार में जिला पर्यावरण समिति, जिला मोर संरक्षण समिति एवं सांभर झील जिला स्तरीय निगरानी समिति की मंगलवार को हुई बैठक में जिला कलेक्टर राजपुरोहित ने एनजीटी के फैसलों की अनुपालना सुनिश्चित करने के साथ ही पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा दिया जाए। आमजन को जागरूक करने के लिए इसका व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार भी होना चाहिए। उन्होंने सांभर झील की वर्तमान स्थिति अतिक्रमणों, रख-रखाव आदि के बारे संबंधित उपखण्ड अधिकारी से चर्चा की।  राजपुरोहित ने जिले के लिए बनाए गए नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (एनसीएपी) पर अभी तक की प्रगति के बारे में संबंधित अधिकारियों से विस्तृत चर्चा कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण द्वारा पर्यावरण विभाग से संबंधित पारित निर्णयों की अनुपालना तथा किए गए कार्यों की जानकारी लेकर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। जिला कलेक्टर ने कहा कि राष्टÑीय पक्षी मोर के संरक्षण के लिए हर संभव उपाय किए जाएं। उन्होंने मोर के शिकार के प्रकरणों के निस्तारण, मोर गणना कार्य के बारे में कहा कि मोर संरक्षण के लिए गैर सरकारी संगठनों को भी आगे आने के लिए प्रेरित किया जाए।<br /><br /><strong>22 लाख 10 हजार पौधों के सशुल्क वितरण का लक्ष्य</strong><br />जिला पर्यावरण समिति सदस्य सचिव मोहित गुप्ता ने बताया कि जिले में 22 लाख 10 हजार पौधों के सशुल्क वितरण का लक्ष्य रखा गया है, जिस पर कलेक्टर ने ग्राम पंचायतों एवं नगर निकायों को 20-20 प्रतिशत पौधे वितरण का लक्ष्य दिया जाए, वही वन विभाग रोड एजेंसीज, खनन विभाग, उद्योग विभाग के जरिए शेष 60 प्रतिशत पौधों को जन-साधारण में वितरित किया जाए।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/concrete-action-plan-made-for-garbage-disposal-collector/article-30466</link>
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                <pubDate>Wed, 23 Nov 2022 10:10:26 +0530</pubDate>
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                <title>नाकारा तंत्र से कचरे का घर बनता जा रहा भारत</title>
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                        <![CDATA[देश के नीति निर्माता देश को कचरा घर बनाने से रोकने में पूरी तरह विफल रहे हैं। नीति निर्माताओं की दूरदृष्टि का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सुरसा के मुंह की तरह बढ़ती जा रही इस समस्या के समाधान का कोई स्थायी नहीं ढूंढा जा सका है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/india-is-becoming-a-home-of-garbage-due-to-inefficient/article-28894"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/q-32.jpg" alt=""></a><br /><p>नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने कर्नाटक पर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने को लेकर 2,900 करोड़ रुपये का पर्यावरणीय जुर्माना लगाया है। इससे पहले भी एनजीटी ने कर्नाटक सरकार पर 500 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था। एनजीटी ने तेलंगाना सरकार को 3800 करोड़ रुपए का पर्यावरणीय जुर्माना लगाया है। दिल्ली सरकार को पर्यावरणीय मुआवजे के रूप में 900 करोड़ रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया है। इसी तरह राजस्थान पर भी पर्यावरणीय मुआवजा लगाया है। यह जुर्माना मौजूदा अक्टूबर और सितंबर माह में लगाया गया है। इस भारी भरकम जुर्माने की वजह रही है, पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले ठोस और तरल कचरे का प्रबंधन नहीं कर सकना। ये चंद उदाहरण हैं जो देश की सीरत और सेहत को दर्शाते हैं। कचरे से होती दुर्दशा की यह हालत उस देश की है जिसे देवों की पवित्र भूमि कहा जाता रहा है।<br /><br />इससे पता चलता है कि देश के नीति निर्माता देश को कचरा घर बनाने से रोकने में पूरी तरह विफल रहे हैं। नीति निर्माताओं की दूरदृष्टि का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सुरसा के मुंह की तरह बढ़ती जा रही इस समस्या के समाधान का कोई स्थायी नहीं ढूंढा जा सका है। यह समस्या अब देश में कैंसर की तरह फैलती जा रही है। इसकी कीमत देश की आम अवाम को अपनी सेहत और प्राकृतिक स्त्रोतों के प्रदूषित होने से चुकानी पड़ रही है। जिनकी भरपाई करना लगभग नामुमिकन हो गया है। निहित क्षुद्र स्वार्थों में उलझे नेताओं के लिए देश में फैलता कचरे का भंडार कोई प्रमुख समस्या नहीं रहा है। शहरीकरण और आर्थिक विकास के लिए औद्योगिकीकरण से निकलने वाले कूड़ा-कचरा दिन प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं। जिस देश की राजधानी ही कचरे के लिए कुख्यात हो चुकी है, ऐसे में दूसरे राज्यों में कचरे की समस्या की विकरालता का अंदाजा लगाया जा सकता है। देश का दिल कहे जाने वाले दिल्ली में कुतुब मीनार जितना ऊंचा करीब 73 मीटर ऊंचा कचरे का पहाड़ खड़ा हो चुका है। दिल्ली-उत्तर प्रदेश सीमा के पास गाजीपुर लैंडफिल साइट गैस चेम्बर में तब्दील हो गई है। संयुक्त राष्टÑ पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) ने दोहराया है कि खुले और अस्वच्छ लैंडफिल पीने के पानी के दूषित होने में योगदान करते हैं और संक्रमण का कारण बन सकते हैं और बीमारियों को फैला सकते हैं। मलबे का फैलाव पारिस्थितिक तंत्र को प्रदूषित करता है और इलेक्ट्रॉनिक कचरे या औद्योगिक कचरे से खतरनाक पदार्थ शहरी निवासियों और पर्यावरण के स्वास्थ्य पर दबाव डालता है। एक अनुमान के मुताबिक, शहरी भारत में रोजाना 1,40,000 मीट्रिक टन कचरा पैदा हो रहा है। विश्व बैंक के एक अध्ययन के मुताबिक, वर्तमान समय में प्रति व्यक्ति के हिसाब से हर दिन 450 ग्राम कूड़ा पैदा होता है, जिसके अगले 15-20 साल में बढ़कर हर दिन 800 ग्राम प्रति व्यक्ति होने का अनुमान है।देशभर की नगरपालिकाएं और नगर निगम मिलकर सिर्फ  चार करोड़ टन कूड़ा जमा कर पाते हैं। 2 करोड़ टन से भी ज्यादा कूड़ा ऐसे ही पड़ा रहता है, जिसका बड़ा हिस्सा बारिश के जरिए नालियों में चला जाता है। अगर हमारे पास 20 लाख (एक अनौपचारिक आंकड़ा) कचरा बीनने वालों या कबाड़ी वालों का कुशल कार्य बल नहीं होता तो हम अपने कचरे के नीचे डूब जाते। लेकिन दुर्भाग्य से हम उन्हें कोई दर्जा नहीं दे पाए हैं।<br /><br />कूड़े-कचरे के बढ़ते ढेरों के साथ-साथ नगरों एवं महानगरों में कूड़े-कचरे के सड़ने से निकली विषैली गैसों की समस्या भी फैलती जा रही है। कचरे के सड़ने से पैदा इन विषैली एवं बदबूदार गैसों को वैज्ञानिक लैंडफिल गैस्य कहते हैं। मुम्बई के मलाड में विपटा मांइड स्पेस में व्यावसायिक क्षेत्र में कई कम्पनियों के एक हजार से ज्यादा कम्प्यूटर तथा सैकड़ों सर्वर लैंडफिल गैसों से प्रभावित होते देखे गए हैं। नेशनल सॉलिड वेस्ट एसोसिएशन ऑफ  इण्डिया के रसायनविदों ने भी अध्ययन कर इसी बात की पुष्टि की है। मनुष्यों में भी इन गैसों के सम्पर्क में आने पर दमा, श्वसन, त्वचा व एलर्जी रोग बढ़े हैं। महिलाओं में मूत्राशय के कैंसर की सम्भावना भी बताई गई है। भूजल में नाइट्रेट की मात्रा बढ़ने का एक कारण ये गैसें भी बताई गई हैं।<br /><br />देश के ज्यादातर शहरों में एकत्र कचरे का उचित निपटान आधुनिक एवं वैज्ञानिक विधियों से नहीं हो रहा है। शहर का मास्टर प्लान बनाते समय अक्सर डंपिंग ग्राउंड या लैंडफिल साइट बनाने पर ध्यान ही नहीं दिया जाता, फिर बिना किसी ठोस नजरिए के कोई भी जगह इनके लिए तय कर दी जाती है। देश के कई नगरों एवं महानगरों में कचरा मैदान पर आलीशान इमारतें एवं रहवासी क्षेत्र बन गए हैं। यह निश्चित है कि यदि एनजीटी के भारी-भरकम जुर्माने के बाद भी सरकारों की नींद नहीं खुली तो वे दिन दूर नहीं जब देश की आबादी के एक बड़े हिस्से और पर्यावरण को अपूर्णीय कीमत चुकानी पड़ेगी। पानी सिर से गुजरे इससे पहले देश को कचरे से निपटने के लिए कठोर राष्टÑीय नीति बनानी होगी। न्यायपालिका को भी इसमें अधिक सक्रियता दिखानी होगी। इसके उल्लंघन करने वाले निजी प्रबंधन और सरकारी तंत्र को जेल की हवा खिलानी होगी, तभी देश की सेहत से खिलवाड़ करने वाले बाज आएंगे।<br /><br />-योगेन्द्र योगी<br />(ये लेखक के अपने विचार हैं)</p>]]>
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                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 08 Nov 2022 10:42:36 +0530</pubDate>
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                <title>97 शहरों में सीवरेज निस्तारण की व्यवस्था नहीं, अब बनी 793 करोड़ की योजना</title>
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                        <![CDATA[रिपोर्ट में 100 से अधिक शहरों में फीकल स्लज के निर्धारित स्थान पर निस्तारण की व्यवस्था नहीं होने से इसे खाली भूमि, नदी, तालाब और नालों में डाला जा रहा है। इसमें से तीन प्लांट्स लालसोठ, सांभर फुलेरा, खंडेला (सीकर) में आरयूआईडीपी की तरफ  से पहले ही लगाए जा चुके हैं।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/there-is-no-sewerage-disposal-system-in-97-cities-now/article-25284"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-10/q-91.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>अगस्त 2023 तक काम पूरा करने का लक्ष्य</strong></p>
<p>जयपुर। प्रदेश के 97 से अधिक शहरों में घरों के शौचालयों से निकले फीकल स्लज के निस्तारण की कोई व्यवस्था नहीं हैं। फीकल स्लज खुले में फेंकने से पर्यावरण तो प्रदूषित हो ही रहा है, साथ ही भूजल और संक्रमण भी बढ़ रहा है। इसे रोकने के लिए राज्य सरकार ने अब 793 करोड़ की योजना तैयार की है, जिस पर जल्द काम शुरू किया जाएगा। दरअसल, स्वायत्त शासन विभाग ने चार साल पहले नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर अर्बन अफेयर्स और सीडीडी सोसायटी की ओर से एक रिपोर्ट तैयार कराई थी, ताकि इन शहरों की मौके की वास्तविक स्थिति पता करने के साथ ही समस्या का भी समाधान निकाला जा सके। रिपोर्ट में 100 से अधिक शहरों में फीकल स्लज के निर्धारित स्थान पर निस्तारण की व्यवस्था नहीं होने से इसे खाली भूमि, नदी, तालाब और नालों में डाला जा रहा है। इसमें से तीन प्लांट्स लालसोठ, सांभर फुलेरा, खंडेला (सीकर) में आरयूआईडीपी की तरफ  से पहले ही लगाए जा चुके हैं। बाकी बचे 97 प्लांट्स लगाने के लिए मुख्यमंत्री ने बजट में घोषणा की थी। इसको अमलीजामा पहनाने के लिए विभाग ने योजना तैयार की है। </p>
<p><strong>इन शहरों की योजना</strong></p>
<p>सादड़ी, रानी, शिवगंज, भीनमाल, सांचौर, पीपाड़ सिटी, बिलारा, सोजत, मेड़ता सिटी, डेगाना, परबतसर, सागवाड़ा, सलूंबर, नोहर, संगरिया, रावतसर, अनूपगढ़, केसरीसिंहपुर, श्रीडूंगरपुर, राजगढ़, राजलदेसर, तारानगर, बिदासर, छबड़ा, अंता, रामगंज मंडी, लाखेरी, इटावा, सुल्तानपुर, केकड़ी, विजयनगर, निवाई, गुलाबपुरा, मांडलगढ़, आसींद, बयाना, रूपवास, राजाखेड़ा, कोटपूतली, चाकसू, किशनगढ़ रेनवाल, खैरथल, थानागाजी, बहरोड, उदयपुरवाटी, पिलानी-विद्याविहार, बग्गड़, श्रीमाधोपुर और लोसल सरवाड़, खेरली, राजगढ़, किशनगढ़बास, मंगरोल, देशनोक, भुसावर, कुम्हेर, श्रीविजयनगर, विराटनगर, फलौदी, मुकुंदगढ़, सूरजगढ़, इटावा, सांगोद, कुचरो, मुंडवा, नांवा, बाली, फालना, तख्तगढ़, पिंडवाड़ा, रींगस, खाटूश्यामजी, देवली, मालपुरा, टोडारायसिंह, परतापुरगढ़ी, महुवा, पोकरण, अकलेरा, टोडाभीम, छोटी सादड़ी, आमेट और देवगढ़ शामिल हैं।</p>
<p><strong>सीवरेज सिस्टम के नियम</strong></p>
<p>आमतौर पर घरों से निकलने वाले स्लज को ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचाने के लिए सीवर लाइन डाली जाती है, लेकिन निर्धारित मानकों के अनुसार यह सिस्टम उन्हीं शहरों में लागू किया जा सकता है, जहां पेयजल की आपूर्ति 135 लीटर प्रतिदिन प्रति व्यक्ति से अधिक हो। सीवर लाइन में स्लज के ट्रीटमेंट प्लांट तक जाने के लिए इतने पानी की जरूरत है। ऐसे शहर जिनमें इस मानक से कम पानी की आपूर्ति होती है, वहां सीवर लाइन सिस्टम संभव नहीं हैं। इसी कारण ऐसे शहरों के लिए फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट का सिस्टम विकसित किया जाता है। इस सिस्टम की लागत सीवरेज सिस्टम से करीब दस गुना कम होती है। </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Oct 2022 10:49:22 +0530</pubDate>
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