<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://dainiknavajyoti.com/festival-season/tag-32883" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Dainik Navajyoti Rising Rajasthan RSS Feed Generator</generator>
                <title>festival season - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
                <link>https://dainiknavajyoti.com/tag/32883/rss</link>
                <description>festival season RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>धनतेरस पर सर्राफा बाजार में बंपर खरीदारी, बर्तन बाजार में 10% से अधिक वृद्धि</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[धनतेरस पर ज्वैलरी और बर्तन खरीद की परंपरा रही आकर्षक]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/bumper-purchase-in-bullion-market-on-dhanteras-more-than-10/article-94159"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/630400-sizee-(2)19.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। दिनभर खरीदारी की रौनक से सरोबार रहा जयपुर का बाजार। धनतेरस के दिन बाजार में सभी की मंगल कामना के साथ खरीदारी का नया इतिहास रचा। परकोटे सहित बाहर के सभी बाजारों में  अलसुबह से देररात तक खरीदारों का तांता लगा रहा।</p>
<p>सर्राफा ट्रेडर्स कमेटी के अध्यक्ष कैलाश मित्तल और महामंत्री मातादीन सोनी ने बताया कि इस वर्ष धनतेरस को ‘धन वृद्धि कारक’ और ‘आरोग्य दिवस’ के रूप में मनाया गया। इस दिन किया गया निवेश शुभ और लाभकारी माना जाता है। सर्राफा बाजार में इस बार ज्वैलरी, सिक्के और पूजा के सामान की खरीदारी पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर रही है। सोने और चांदी के भावों में लगभग 30% की वृद्धि रही, जिससे पिछले वर्ष धनतेरस पर किए गए निवेशकों को इस वर्ष अच्छा लाभ प्राप्त हुआ।</p>
<p><strong>वजन में कमी, पर निवेशकों की रुचि बरकरार</strong><br />बिक्री के वजन के लिहाज से पिछले वर्ष की तुलना में कमी रही, लेकिन सभी वर्गों ने अपनी क्षमता के अनुसार निवेश किया। भावों में वृद्धि ने निवेशकों के लिए खरीदारी को और आकर्षक बना दिया है और बाजार में तेजी का रुख बना हुआ है।</p>
<p><strong>बर्तन बाजार में भी आई तेजी</strong><br />धनतेरस पर बर्तन खरीदने की परंपरा को भी इस वर्ष लोगों ने बनाए रखा। अग्रवाल बर्तन भंडार के संचालक अर्पित गोयल ने बताया कि कोरोना के बाद लोगों की पसंद में बदलाव आया है। पहले स्टील के बर्तनों की मांग थी, लेकिन अब कांसा, पीतल और तांबे के बर्तनों के प्रति लोगों का रुझान बढ़ा है। इस वर्ष बर्तन बाजार में कांसे के बर्तन 1700 रु. प्रति किलो, तांबा 1200 रु. प्रति किलो, पीतल 900 रु. प्रति किलो, और स्टील के बर्तन 200 से 250 रु. प्रति किलो में बिके।</p>
<p>बर्तन विक्रेता ऋषभ गोयल के अनुसार पिछले साल की तुलना में 10%  अधिक कारोबार हुआ। नॉनस्टीक कुकवेयर की मांग अब कम होने लगी है। पारम्परिक कांसा, तांबा और पीतल के बर्तनों की मांग अधिक रही। </p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/bumper-purchase-in-bullion-market-on-dhanteras-more-than-10/article-94159</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/bumper-purchase-in-bullion-market-on-dhanteras-more-than-10/article-94159</guid>
                <pubDate>Wed, 30 Oct 2024 10:23:28 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2024-10/630400-sizee-%282%2919.png"                         length="603586"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Jaipur]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Jaipur Gold &amp; Silver Price: चांदी 1300 रुपए और शुद्ध सोना 800 रुपए महंगा</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[ हाजिर बाजार में खरीदारी की रफ्तार सामान्य रूप से चल रही है।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-gold-silver-price-silver-costlier-by-rs-1300-and/article-93379"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/gold-silver.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। फेस्टिव सीजन में सोना और चांदी रोजाना नई ऊंचाई पर पहुंच रहे हैं। जयपुर सर्राफा बाजार में चांदी 1300 रुपए उछलकर 94,900 रुपए प्रति किलो रही। शुद्ध सोना 800 रुपए बढ़कर 79,500 रुपए प्रति दस ग्राम रहा। जेवराती सोना 700 रुपए उछलकर 73,900 रुपए प्रति दस ग्राम रहा। हाजिर बाजार में खरीदारी की रफ्तार सामान्य रूप से चल रही है।</p>
<p><strong>जयपुर सर्राफा बाजार में अनुमानित भाव </strong><br />चांदी 94,900<br />शुद्ध सोना 79,500<br />जेवराती सोना 73,900<br />18 कैरेट 60,700<br />14 कैरेट 47,800</p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-gold-silver-price-silver-costlier-by-rs-1300-and/article-93379</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-gold-silver-price-silver-costlier-by-rs-1300-and/article-93379</guid>
                <pubDate>Fri, 18 Oct 2024 16:45:46 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-05/gold-silver.jpg"                         length="64216"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Jaipur]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इंद्रधनुषी रंगों से लगाव के कारण महिलाओं को लुभाता है लहरिया</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[प्रिंटिंग के लिए सांगानेर, आकोला, बाड़मेर, बालोतरा, बगरू आदि स्थानों पर छीपा जाति के लोग प्रसिद्ध हैं। नवविवाहिताओं की पहली तीज पर भी लहरिया की साड़ी भेजी जाती है। ]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/lahariya-attracts-women-due-to-its-love-for-rainbow-colours/article-83460"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/photo-size-(5)1.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। लहरिया परिधान सभी तरह के इंडियन वियर में इस्तेमाल होने वाला आम फैशन बन गया है। तीज त्यौहार के वक्त महिलाएं लहरिया साड़ी पहनना पसंद करती हैं। लहरिया में जोधपुर का मोठड़ा प्रसिद्ध है, जिसमें आड़ी रेखाएं एक दूसरे को काटती हैं। लहरिया का इस्तेमाल राजाओं की पगड़ी पर होता था। अब लहरिया का नया मॉर्डन अवतार भी निराला है। जिसमें साड़ी, सलवार सूट, लहंगों के साथ रजवाड़ी पगड़ी, स्कार्फ और स्टॉल में लहरिया पसंद किया जाता है। पुरुष लहरिया शर्ट के साथ कुर्ते आजमा रहे हैं। विदेशों में इनकी अत्यधिक डिमांड है। लहरिया टाई एंड डाई का ही रूप है। इसकी प्रिंटिंग के लिए सांगानेर, आकोला, बाड़मेर, बालोतरा, बगरू आदि स्थानों पर छीपा जाति के लोग प्रसिद्ध हैं। नवविवाहिताओं की पहली तीज पर भी लहरिया की साड़ी भेजी जाती है। </p>
<p>वेद वेदांग अनुशीलन संस्थान के अधिष्ठाता ज्योतिषाचार्य पंडित दुर्गादत्त शिवदत्त शास्त्री ने बताया कि ऐसा माना जाता है कि सावन के महीने में इंद्रधनुषी रंगों से उनको लगाव हो जाता है और वही रंग उन्हें अत्यधिक लुभाते हैं। इसलिए सावन में विशेष रूप से महिलाएं लहरिया की साड़ी, चुनरी दुपट्टा पहनती हैं।   </p>
<p><strong>साड़ियों में जरदोजी, कुंदन पोलकी का फैंसी वर्क खास</strong><br />बड़ी चौपड़ पर लहरिया विक्रेता विष्णु टांक ने बताया कि ये टाई और डाई का एक रूप है। पिछले कुछ सालों में बहुरंगी लहरिया बहुतायत में बन रही है। पहले फीरोजी, रानी, पिंक, पीले कलर थे, अब नई पीढ़ी के हिसाब से करीब पन्द्रह रंगों में लहरिया तैयार किया जाएगा। जौहरी बाजार के लहरिया विक्रेता रामेश्वर लाल गोयल ने बताया कि लहरिए में गोटा पत्ती वर्क के साथ फैन्सी वर्क का इस्तेमाल किया जा रहा है। लहरिया में साड़ी 8 हजार रुपए से लेकर 35 हजार तक है।  </p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/lahariya-attracts-women-due-to-its-love-for-rainbow-colours/article-83460</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/lahariya-attracts-women-due-to-its-love-for-rainbow-colours/article-83460</guid>
                <pubDate>Wed, 03 Jul 2024 09:49:58 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2024-07/photo-size-%285%291.png"                         length="649489"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Jaipur]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>फूलों की खुशबू को ले उड़ा फेस्टिवल सीजन, दिन भर मारते मख्खियां</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[दिनभर में इन दिनों 400 से 500 रुपए की कमाई भी बड़ी मुश्किल से कर पा रहे हैं।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/festival-season-has-taken-away-the-fragrance-of-flowers--flies-are-swatted-all-day/article-81923"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/uu11rer-(6)4.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। फूलों का कारोबार करने वाले फुटकर विक्रेताओं की इन दिनों हालत बहुत खस्ता है। हालांकि ऐसा नहीं है कि बिक्री नहीं होती है। मगर जो व्यापार त्यौहारी व शादी-ब्याह की सीजन में होता है, उसका तो अभी 10 प्रतिशत भी नहीं हो रहा है। ऐसे में मंडी से ही खरीद कम ही करते हैं और उसमें भी बिक्री नहीं होने पर नहर में बहाने की मजबूरी हो जाती है। क्योंकि फूलों को सुबह से शाम तक ही संभालकर रख सकते हैं, इसके बाद तो यह खराब हो जाते हैं। इन दिनों मुनाफा तो बहुत दूर की बात है। दिनभर में मजदूरी जितने रुपए आ जाए वही अच्छा। कुछ ऐसी स्थिति ही शहर के फूलों का फुटकर व्यापार करने वालों की। जानकारी के अनुसार शहर में गुमानपुरा, स्टेशन क्षेत्र, विज्ञान नगर चौराहा, एरोड्रम पेट्रोल पंप के पास, चौपाटी सहित अनेक स्थानों पर फूल माला व फूलों का व्यापार करने वाले अपनी-अपनी दुकानें लगाकर बैठे हुए हैं। जो दिनभर में इन दिनों 400 से 500 रुपए की कमाई भी बड़ी मुश्किल से कर पा रहे हैं। जबकि सीजन में इनको काम से फुर्सत तक नहीं होती है। एक तो भीषण गर्मी में वैसे ही फूलों को संभाल कर रखना बड़ी टेढ़ी खीर है। उस पर से धंधा नहीं होने पर नुकसान उठाना पड़ रहा है। इन दिनों वैसे भी ना तो शादी-ब्याह का सीजन है और ना ही पर्व-त्यौहार। ऐसे में फूलों की खरीदारी भी कम ही हो रही है। यहां तक कि रोजाना मालाएं भी कम ही बिक रही है। सुबह-सुबह थोड़ा बहुत व्यापार हो जाए तो ठीक है, वरना दोपहर के समय तो मक्खियां ही उड़ाते रहते हैं। हालांकि ज्यादा माल नहीं लाते हैं, मगर जो लाते हैं वो भी इन दिनों बेचना भारी पड़ रहा है।</p>
<p><strong>आसपास के गांवों से आते हैं फूल</strong><br />कोटा की मंडी में बिकने के लिए आसपास के गांवों से सुबह-सुबह लोग अपनी गाड़ियों में फूलों को भरकर लाते हैं। यहां कोटा मंडी में जालीपुरा, नोताड़ा भोपत सहित कोटा संभाग में करीब 112 हैक्टेयर से ज्यादा में गंगानगरी गुलाब, कलकती गैंदा, रजनीगंधा, गुलदाऊदी, गैलार्डिया व हजारे के फूलों की खेती होती है। पिछले छह सालों में संभाग में फूलों की खेती कई गुना तक बढ़ गई है।</p>
<p><strong>मैं तो बहुत कम गुलाब लाती हूं</strong><br />इन दिनों फूलों की बिक्री ज्यादा नहीं हो रही है। मंडी से 5-10 किलो ही गुलाब के फूल लाती हूं। इनको बेचने में भी अभी तो बहुत मुश्किल हो रही है। <br /><strong>- सुशीला, फूल विक्रेता</strong></p>
<p><strong>कभी-कभी तो फेंकने पड़ते हैं</strong><br />अभी तो बहुत ही मंदी चल रही है। शादी-ब्याह का सीजन में तो अच्छी कमाई हो जाती है। मगर इन दिनों बहुत ही मंदा धंधा चल रहा है। कभी-कभी तो फूल नहर में फेंकने पड़ते हैं।<br /><strong>- मदन,फूल विक्रेता</strong></p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/festival-season-has-taken-away-the-fragrance-of-flowers--flies-are-swatted-all-day/article-81923</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/festival-season-has-taken-away-the-fragrance-of-flowers--flies-are-swatted-all-day/article-81923</guid>
                <pubDate>Tue, 18 Jun 2024 15:43:44 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2024-06/uu11rer-%286%294.png"                         length="563240"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[kota]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पांच हजार कुंभकारों के लिए फिर जलेंगे उम्मीदों के दीपक</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[दो साल से कोरोना के कारण कुंभकारों का व्यवसाय पूरी तरह चौपट हो गया था। नवरात्र के बाद से बाजारों में रौनक लौटी तो लघु उद्योग से जुड़े लोगों को फिर से रोजगार मिलने की आस बनी है। इसी के चलते पांच माह से धूल खा रहे कुंभकारों के चाक इन दिनों तेजी से घूम रहे हैं। ]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-lamp-of-hope-will-burn-again-for-five-thousand-potter/article-26193"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-10/5-hazar-kumbhkaaro-ke-liye-fir-jalengei-ummedo-ke-deepak...kota-news-11.10.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। इलेक्ट्रॉनिक दीपक और रोशनी की लड़ियों के आगे परंपरागत मिट्टी का दीपक बाजार की प्रतिस्पर्धा में पिछड़ रहा है। बाजार में इस बार चाइनीज दीपक के  साथ सादे दीपक कड़ी टक्कर देने को तैयार है। हालांकिस्थानीय व्यापारियों द्वारा तैयार किए रोशनी के आइटम परंपरागत मिट्टी के दीपक की रोशनी कम करने पर तुले हैं।  हाड़ौती संभाग के तीन माह से खाली बैठे कुंभकारों को अब दीपावली से आस बनी है।  पिछले एक दशक से दीपक से घर रोशन करने का चलन कम हुआ है, उसकी जगह इलेक्ट्रॉनिक बिजली के बल्ब की लड़ियों ने ले लिया  है। ऐसे में कुंभकारों की हालत पहले से पतली हो गई है।  इस बार चाइनीज के बल्व की झालर और लाइटों की मांग कम होने से दीपक की डिमांड बढ़ने की उम्मीद कुंभकार लगा रहे हैं। </p>
<p><strong>देशी दीपक और टेराकोटा दीपक में हर साल होती है प्रतिस्पर्धा</strong><br />कुंभकार कैलाश प्रजापत ने बताया कि पिछले कुछ सालों से मिट्टी के साधरण दीपकों की डिमांड कम हुई है। अब लोग कलात्मक और स्टाइलिश दीपक की मांग करते हैं। हालांकि पूजन के लिए साधा दीपक की अभी डिमांड है। लेकिन लोग घरों में अब रोशनी के लिए लोग 10 से 20 दीपक ही लेकर जाते है। पहले एक व्यक्ति 50 से 100 दीपक लेकर जाता था। वर्तमान में मिट्टी के दाम बढ़ने से लागत भी नहीं निकलती, लेकिन पुस्तैनी कार्य है इसलिए कर रहे हैं। साधारण दीपक 1 रुपए में बिक रहा है वहीं टेराकोटा और डिजायन वाला दीपक 5 रुपए का एक बिक रहा है। 10 हजार दीपक तैयार किए अभी तक 1500 दीपक ही बिके हंै। </p>
<p><strong>आर्थिक पैकेज दे सरकार</strong><br />अखिल भारतीय प्रजापति कुंभकार महासंघ नई दिल्ली के राष्टÑीय उपाध्यक्ष नंदलाल प्रजापति ने बताया कि पिछले दो साल से मिट्टी के बर्तन बनाने वाले, लुहार और लघु उद्योगों से जुड़े लोग कोविड के चलते बेरोजगार हो गए थे।  संक्रमण कम होने के बाद फिर से काम पर लेगे तो मिट्टी के दाम आसमान छू रहे है। इस बार लगातार बारिश के कारण कुंभकारों मिट्टी बर्तन तैयार नहीं हो सके। प्रधानमंत्री ने लोकल के लिए वोकल करने का आह्वान किया लेकिन छोटे कामगारों के लिए किसी भी आर्थिक पैकेज की घोषणा नहीं करने से इनकी हालत खराब है। कई परिवार अपने इस पुस्तैनी धंधे को बंद कर मजदूरी कर रहे हैं। </p>
<p><strong> हाड़ौती में 5 हजार कुंभकार परिवार बना रहे दीपक</strong><br /> दो साल से कोरोना के कारण कुंभकारों का व्यवसाय पूरी तरह चौपट हो गया था। नवरात्र के बाद से बाजारों में रौनक लौटी तो लघु उद्योग से जुड़े लोगों को फिर से रोजगार मिलने की आस बनी है। इसी के चलते पांच माह से धूल खा रहे कुंभकारों के चाक इन दिनों तेजी से घूम रहे हैं। हाड़ौती में 5 हजार कुंभकार परिवार है, जो मिट्टी के बर्तन, दीपक, मुर्तियां बनाने का कार्य करते हैं। कोटा में करीब एक हजार परिवार हैं जो इस व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। अभी एक-एक कुंभकार 10 हजार से लेकर 20 हजार मिट्टी के दीपक तैयार करने जुटा है। करीब सवा करोड़ दीपक तैयार हो चुके हैं।</p>
<p><strong>मिट्टी के दीपक जलाने से वातावरण में आती है शुद्धता</strong><br />ज्योतिषाचार्य पंडित अरुण श्रृंगी ने बताया कि पुरातन समय से ही घी के दीपक जलाकर पूजा अर्चना की जाती है। इसके पीछे का लॉजिक यह है कि घी के दीपक जलाने से वातावरण में शुद्धता आती है। पुराने समय से ही हवन यज्ञ धूप दीप जलाकर वातावरण को शुद्ध बनाते आ रहे हैं। जिससे नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है। इससे लोगों को स्वास्थ्य लाभ मिलता है । पिछले तीन दशक से महंगाई और आधुनिक शैली के चलते  घी के दीपक की जगह तेल के दीपक ने ले ली और  अब तो इसका चलन भी कम होने लगा है। लोग घरों में दीपावली पर इलेक्ट्रानिक लड़िया और मोमबत्ती जलाने लगे हैं। इससे तो वातावरण शुद्ध होने के बजाए प्रदूषित हो रहा है। </p>
<p><strong>पत्थर के चाक पर काम करने से मिलती है संतुष्टि</strong><br />धनराज प्रजापति ने बताया कि पुराने पारंपरिक पत्थर के चाक की जगह अब इलेक्ट्रॉनिक चाक ने ले ली है। उससे काम जल्दी हो जाता है। लेकिन जो आत्मीय जुड़ाव डंडे से मिट्टी के चाक चलाने में मिलता है वह मोटर चलित चाक पर  नहीं मिलता है। मिट्टी के चाक में फिजिकल वर्क ज्यादा होने से स्वास्थ्य ठीक रहता है और आइटम में फिनिशिंग अच्छी आती है। </p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-lamp-of-hope-will-burn-again-for-five-thousand-potter/article-26193</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-lamp-of-hope-will-burn-again-for-five-thousand-potter/article-26193</guid>
                <pubDate>Tue, 11 Oct 2022 15:06:20 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-10/5-hazar-kumbhkaaro-ke-liye-fir-jalengei-ummedo-ke-deepak...kota-news-11.10.2022.jpg"                         length="61814"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[kota]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दिवाली से पहले कहीं हो न जाए ब्लैक आउट !</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[कोटा थर्मल पावर प्लांट में सात यूनिट हैं। इनमें से यूनिट एक, दो और तीन बंद पड़ी हुई है। यूनिट तीन तो लम्बे समय से बंद है। तकनीकी रखरखाव के लिए यूनिट को बंद किया गया था। जिसे अभी तक चालू नहीं किया गया है। यूनिट चार, पांच, छह व सात से बिजली उत्पादन जारी है। वहीं कोटा थर्मल में केवल तीन दिन का ही कोयला स्टॉक बचा हुआ है। ]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/there-should-be-no-black-out-before-diwali/article-25476"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-10/diwali-se-pehle-kahi-na-ho-jaaye-black-out..kota-news-5.10.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। दीपावली से पहले राजस्थान में बिजली गुल होने का संकट छाने लगा है। प्रदेश के कई हिस्सों में लगातार हो रही बिजली कटौती और कई पॉवर प्लांट  बंद होने के बाद दिवाली के मौके पर गंभीर बिजली संकट के आसार जताए जा रहे हैं। इस बिजली संकट के पीछे कोयले की किल्लत सबसे बड़ा कारण है। राजस्थान सभी पॉवर प्लांटों में केवल तीन दिन का ही कोयला बचा है। ऐसे में आगामी दिनों में राजस्थान में कहीं ब्लैक आउट की नौबत नहीं आ जाए।  जानकारी के अनुसार राजस्थान के चार पॉवर प्लांट की 11 यूनिट्स फिलहाल बंद हो गई है, जिसमें सूरतगढ़ थर्मल पावर प्लांट की 4, कोटा थर्मल पावर प्लांट की 3, राजवेस्ट की 2, छबड़ा थर्मल पावर प्लांट की 1 और रामगढ़ की 1 यूनिट शामिल है। इन यूनिटों से बिजली उत्पादन नहीं हो रहा है। बताया जा रहा है कि बंद हुए प्लांटों से 2400 मेगावाट कैपिसिटी बिजली प्रोडक्शन होता था, जो अब ठप पड़ गया है। ऐसे में कोयले की कमी और बिजली यूनिटों के बंद होने से त्योहार से पहले प्रदेश में गहरा बिजली संकट आ सकता है। माना जा रहा है कि दिवाली से पहले राज्य को बड़े पावर कट का भी सामना करना पड़ सकता है।</p>
<p><strong>कोटा पॉवर प्लांट में यह है स्थिति</strong><br />कोटा थर्मल पावर प्लांट में सात यूनिट हैं। इनमें से यूनिट एक, दो और तीन बंद पड़ी हुई है। यूनिट तीन तो लम्बे समय से बंद है। तकनीकी रखरखाव के लिए यूनिट को बंद किया गया था। जिसे अभी तक चालू नहीं किया गया है। यूनिट चार, पांच, छह व सात से बिजली उत्पादन जारी है। वहीं कोटा थर्मल में केवल तीन दिन का ही कोयला स्टॉक बचा हुआ है। यहां पर रोजाना कोयले की 4 से 5 रैक आ रही है। यदि किसी भी दिन रैक उपलब्ध नहीं हो पाए तो अन्य यूनिट के भी बंद होने की संभावना है। </p>
<p><strong>26 दिन का कोयला स्टॉक होना जरूरी</strong><br />केंद्र की गाइड लाइंस के मुताबिक थर्मल पॉवर प्लांटों में 26 दिन का कोयला स्टॉक होना जरूरी है, लेकिन कोयले की किल्लत की चलते राजस्थान के एक भी पॉवर प्लांट में गाइडलाइन की पालना नहीं हो पा रही है। प्रदेश के पॉवर प्लांटों में कोयले की कमी पिछले एक साल से बरकरार है। राजस्थान के सभी पॉवर प्लांट्स को पूरी क्षमता पर चलाने के लिए हर दिन 37 रैक कोयले की जरूरत होती है।</p>
<p><strong>छत्तीसगढ़ से बंद है कोयला सप्लाई</strong><br />जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ में राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड को आवंटित की गई कोयला खान पारसा ईस्ट एंड कैंट बासन कोल ब्लॉक में कोयला खत्म हो गया है जिसके चलते 36000 मीट्रिक टन कोयले की सप्लाई बंद हो चुकी है। इससे करीब 2000 मेगावाट बिजली उत्पादन बंद हो गया है। इसके अलावा छत्तीसगढ़ के सरगुजा में 841 हैक्टेयर के एक्सटेंशन ब्लॉक में खनन पर छत्तीसगढ़ सरकार ने रोक लगा रखी है जिसके चलते वहां खनन शुरू नहीं हुआ है।</p>
<p> कोटा थर्मल पॉवर प्लांट में कई दिनों से कोयले की कमी बनी हुई है। यहां पर रोजाना कोयले की 4 से 5 रैक आ रही है जो काफी कम हैं। कोयले का स्टॉक भी तीन दिन का ही बचा है। इससे आगामी समय में परेशानी आ सकती है।<br /><strong>-राम सिंह शेखावत, अध्यक्ष राजस्थान विद्युत उत्पादन कर्मचारी संघ</strong></p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/there-should-be-no-black-out-before-diwali/article-25476</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/there-should-be-no-black-out-before-diwali/article-25476</guid>
                <pubDate>Wed, 05 Oct 2022 13:02:44 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-10/diwali-se-pehle-kahi-na-ho-jaaye-black-out..kota-news-5.10.2022.jpg"                         length="34131"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[kota]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मिठाइयों पर दुकानदार नहीं लिख रहे एक्सपायरी डेट</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[बासी और पुरानी मिठाइयां बेचने की लगातार आ रही शिकायतों के बाद  भारतीय  खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने मिठाई की दुकानों के लिए यह नियम अनिवार्य कर दिया कि वे मिठाइयों पर एक्सपायरी डेट को लिखें।  पिछले साल एक अक्टूबर से देश में लागू इस नियम की कोटा जिले में पालना होती नहीं दिखाई दे रही है। ]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/shopkeepers-are-not-writing-expiry-date-on-sweets/article-25342"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-10/mithaiyo-par-dukandaar-nahi-likh-rahe-expiry-date...kota-news-4.10.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। नवरात्र के साथ ही त्यौहारी सीजन शुरू हो चुका है। शहर में मिठाइयों की दुकानें सजने लगी हैं। लेकिन इन मिठाइयों की शुद्धता की जांच के लिए एफएसएसएआई द्वारा  एक साल पहले 1 अक्टूबर को बनाए नियम लागू होते दिखाई नहीं दे रहे रहा है।  लोगों को बासी मिठाई खाने से बचाने के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने एक अक्टूबर 2021 से बाजार में बिकने वाली खुली मिठाइयों पर एक्सपायरी डेट लिखने के आदेश जारी किए थे। इसमें  छोटी  बड़ी सभी दुकानों  पर मिठाई बनाने, उसकी एक्सपायरी डेट, कब तक खाना है कि पूरी जानकारी मिठाई की ट्रे के उपर लिखना जरूरी किया था। इससे ग्राहक को पता चल सके कि मिठाई ताजा है या बासी है। अब तक यह सुविधा पैकिंग वस्तुओं पर ही लागू थी । इसे एक अक्टूबर 2021 से देश में खुली वस्तुओं की बिक्री पर भी लागू कर दिया है। लेकिन एक साल बीतने आया फिर भी शहर में अभी नये नियम का पालन  मिठाइयों की दुकानों पर होता दिखाई नही दे रहा है। अभी मिठाई दुकानदार पुराने ढ़र्रे पर ही बिना एक्सपायरी डेट लिखे फ्रीजर में रखी मिठाइयां बेच रहे हैं। खाद्य सुरक्षा अधिकारी भी  एक साल होने के बावजूद इस नये नियमों को लागू कराने  में गंभीरता नहीं दिखा रहे हंै। एक साल बाद भी अभी कई दुकानदारों  को तो नये नियम की पूरी जानकारी ही नहीं है। दूसरी तरफ मिठाई कारोबारियों को का कहना है कि  इस नियम से खाद्य सुरक्षा अधिकारी जानबूझकर दुकानदारों को परेशान कर सकते हैं।  वो मिठाई का सैंपल लेने के बाद उसी दिन लैब में भेज देंगे इस बात की क्या गारंटी है इससे इंस्पेक्टर राज को ही बढ़ावा मिलेगा। हालांकि शहर की कुछ बड़ी मिठाई की दुकानों ने तो एक्सपायरी डेट लिखना शुरू किया लेकिन वो भी रोज डेट बदल कर ग्राहकों चुना ही लगा रहे है। </p>
<p><strong>बासी और खराब पर रोक के लिए बनाया है नियम</strong><br />बासी और पुरानी मिठाइयां बेचने की लगातार आ रही शिकायतों के बाद  भारतीय  खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने मिठाई की दुकानों के लिए यह नियम अनिवार्य कर दिया कि वे मिठाइयों पर एक्सपायरी डेट को लिखें। पहले यह निर्णय जून 2021 से  लागू होना था, लेकिन कोरोना संक्रमण के चलते इसे 1 अक्टूबर 2021 से लागू किया। पिछले साल एक अक्टूबर से देश में लागू इस नियम की कोटा जिले में पालना होती नहीं दिखाई दे रही है। जबकि सरकार ने प्रदेश में भी सभी खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को इस नियम की पालना कराने के निर्देश चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग जयपुर की ओर से जारी किए हैं। लेकिन पालना अभी भी नहीं हुई है। शहर में करीब डेढ सौ से अधिक मिठाई की दुकानें हैं। </p>
<p><strong>दुकानदार बोले नया नियम अप्रासंगिक </strong><br />देश में 80 फीसदी मिठाई का काम असंगठित क्षेत्र से होता है।  ऐसे में इस तरह के नियम दुकानदारों को परेशान करने के लिए हैं। एक साल पहले बनाया ये नियम अप्रासंगिक है। जिससे लोग पालना नहीं कर रहे है। एफएसएसआई को र्टनओवर और एक से अधिक दुकान जैसी कई श्रेणी बनाकर इस प्रकार के नियम लगाने चाहिए थे। इससे इंस्पेक्टर राज को बढ़ावा देने काम किया है। <br /><strong>- राजकुमार नागर, मिठाई व्यापारी</strong></p>
<p><strong>खपत से दस फीसदी कम तैयार करेंगे माल</strong><br /> नये नियम के वजूद में आने के बाद से मिठाई की खपत से दस फीसदी मिठाई कम तैयार कर रहे है। जिससे नुकसान से बचा जा सके। इसका असर बिक्री पर ज्यादा पड़ेगा। मिठाई के डिब्बे तैयार कराएं जिस पर मिठाई तैयार करने की डेट, एक्सपायरी डेट, कब तक खा सकते हैं आदि जानकारी अंकित की हुई है। <br /><strong>- दिनेश सैनी, मिठाई व्यापारी</strong></p>
<p><strong>अभियान के दौरान करेंगे पाबंद</strong><br />पिछले साल एक अक्टूबर से खुली मिठाइयों पर एक्सपायरी डेट लिखने का नियम लागू हो चुका है। शुद्ध के लिए युद्ध अभियान के दौरान मिठाई दुकानदारों को इसके लिए पाबंद किया जाता है। विभाग की ओर से अनवरत जांच का अभियान जारी है। दुकानों की जांच कर सैंपल लेने का कार्य जारी है।  शुद्ध के लिए युद्ध अभियान में बिना एक्सपायरी लिखी मिठाई की दुकानों पर कार्रवाई की जाएगी। <br /><strong>- डॉ. जगदीश कुमार सोनी, सीएमएचओ</strong></p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/shopkeepers-are-not-writing-expiry-date-on-sweets/article-25342</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/shopkeepers-are-not-writing-expiry-date-on-sweets/article-25342</guid>
                <pubDate>Tue, 04 Oct 2022 15:46:02 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-10/mithaiyo-par-dukandaar-nahi-likh-rahe-expiry-date...kota-news-4.10.2022.jpg"                         length="38178"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[kota]]>
                    </dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        