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                <title>rabi crops - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>rabi crops RSS Feed</description>
                
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                <title>रबी फसल के दौरान रहेगा जल संकट, किसानों को कम पानी वाली फसलों की बुआई की सलाह</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान में रबी सीजन के दौरान किसानों को जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। पौंग और भाखड़ा बांधों में पिछले वर्ष की तुलना में जल स्तर कम। पौंग में करीब 19 फीट और भाखड़ा में 34 फीट कमी दर्ज। किसानों को कम पानी वाली फसलों की बुआई की सलाह।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/there-will-be-water-crisis-during-rabi-crop-farmers-are/article-165084"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/jal-sansadhan-vibhag1.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान में इस बार रबी फसल के दौरान किसानों को जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। जल संसाधन विभाग ने किसानों को कम पानी की जरूरत वाली फसलों की बुआई करने की सलाह देना शुरू कर दिया है। विभाग की ओर से पौंग और भाखड़ा बांधों में पिछले वर्ष की तुलना में कम जल भराव को इसकी प्रमुख वजह बताया जा रहा है। पौंग बांध का वर्तमान जल स्तर 1372 फीट है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में जल स्तर 1391.33 फीट था। यानी इस बार बांध में करीब 19 फीट कम पानी है। इसी तरह भाखड़ा बांध का वर्तमान जल स्तर 1643 फीट दर्ज किया गया है, जबकि 8 सितंबर 2025 को यह 1677 फीट था। दोनों प्रमुख बांधों में जल स्तर की यह कमी रबी सीजन में सिंचाई व्यवस्था पर असर डाल सकती है।</p>
<p>जल उपलब्धता कम रहने की आशंका को देखते हुए विभाग किसानों को ऐसी फसलों का चयन करने के लिए जागरूक कर रहा है, जिनमें सिंचाई की जरूरत कम होती है। इससे पानी की उपलब्धता के अनुरूप फसल क्षेत्र को संतुलित रखने में मदद मिल सकेगी। फर्स्ट इंडिया ने पहले ही आशंका जताई थी कि इस बार पौंग और भाखड़ा में कम पानी के चलते रबी सीजन किसानों के लिए भारी पड़ सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 09 Sep 2026 13:00:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>किसानों के लिए खुशखबरी : रबी फसल सिंचाई के लिए 15 अक्टूबर से खुलेंगी नहरें, किसानों में उत्साह</title>
                                    <description><![CDATA[रबी फसल की सिंचाई के लिए 15 अक्टूबर से नहरें खोलने की तैयारी शुरू। कलेक्टर की अध्यक्षता में नहरों के संचालन की तारीख तय। किसानों में उत्साह का माहौल। राज्य के प्रमुख बांधों में पानी की पर्याप्त आवक। रबी सीजन में सिंचाई की स्थिति बेहतर रहने की उम्मीद। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/good-news-for-farmers-canals-will-open-from-october-15/article-129632"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/jal-sansadhan-department.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जल संसाधन विभाग ने रबी फसल की सिंचाई के लिए 15 अक्टूबर से नहरें खोलने की तैयारी शुरू कर दी है। जिला स्तर पर जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में नहरों के संचालन की तारीख तय की जा रही है। इस निर्णय से किसानों में उत्साह का माहौल है। इस वर्ष राज्य के प्रमुख बांधों में पानी की पर्याप्त आवक हुई है, जिससे रबी सीजन में सिंचाई की स्थिति बेहतर रहने की उम्मीद है। जवाई बांध से जुड़े क्षेत्रों में 26 अक्टूबर को पहली बार पानी छोड़ा जाएगा, जबकि बीसलपुर बांध से जुड़े किसानों को नवंबर में सिंचाई के लिए पानी देने का प्रस्ताव है।</p>
<p>पानी की उपलब्धता के चलते इस बार गेहूं के रकबे में करीब 4 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी का अनुमान है। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पर्याप्त जल भंडारण से रबी फसलों—विशेषकर गेहूं, चना और सरसों—की पैदावार में बढ़ोतरी की संभावना है। विभाग ने नहरों की सफाई और मरम्मत कार्यों को अंतिम चरण में बताया है, ताकि निर्धारित समय पर किसानों को सिंचाई जल उपलब्ध कराया जा सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Oct 2025 15:00:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बरसात से कटाई के बाद रखी फसल खराब होने पर मिलेगा बीमा क्लेम, 72 घंटे में देनी होगी सूचना</title>
                                    <description><![CDATA[रखी फसल खराब होने पर किसानों को पीएम फसल बीमा योजना के तहत मुआवजा। 72 घंटे के भीतर पोर्टल, हेल्पलाइन 14447, ऐप या कृषि कार्यालय में सूचना देना जरूरी। विभाग ने शिविर लगाकर किसानों से सूचना लेकर बीमा कंपनी को तुरंत भेजने के दिए निर्देश।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/insurance-claim-will-be-given-if-the-crop-stored-after/article-129163"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/copy-of-news-(3)21.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में मानूसन के चलते खेतों में काटकर रखी गई फसल के खराब होने पर किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अन्तर्गत मुआवजा दिया जाएगा। इसके लिए किसानों को 72 घंटे में पोर्टल पर इसकी जानकारी देनी होगी। कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के शासन सचिव राजन विशाल ने बताया कि राज्य में वर्तमान में हो रही बेमौसम बरसात, ओलावृष्टि, चक्रवर्ती वर्षा एवं चक्रवात से कटाई के बाद 14 दिन तक की अवधि तक खेत में सुखाने के लिए रखी फसल खराब होने पर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजनान्तर्गत नुकसान की भरपाई हो सकेगी।</p>
<p>इसके लिए प्रभावित बीमित फसल के काश्तकार को 72 घंटे के भीतर खराबे की सूचना कृषि रक्षक पोर्टल, हेल्पलाइन नंबर 14447 अथवा क्रोप इन्श्योरेंस एप, नजदीकी बैंक या कृषि कार्यालय में पर देनी होगी। उन्होंने तकनीकी कारणों से टोल फ्री नम्बर पर  बीमित कृषकों की ओर से नियत अवधि में शिविर लगाकर पात्र बीमित कृषकों से इन्टीमेशन प्राप्त कर संबंधित बीमा कंपनी को उसी दिन सुपुर्द करने के निर्देश दिए। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Oct 2025 11:59:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>असर खबर का- मूण्डली माइनर में पहुंचा नहरी पानी, किसानों को अब मिली राहत </title>
                                    <description><![CDATA[दैनिक नवज्योति की शुक्रवार को प्रकाशित समाचार के लिए सराहना भी की है, जो समय रहते उनकी समस्या का जल्द निराकरण हुआ है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/impact-of-the-news---canal-water-reached-mundli-minor--farmers-now-got-relief/article-105133"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/257rtrer89.png" alt=""></a><br /><p>भण्डेड़ा। क्षेत्र में गोठड़ा केनाल की टेल क्षेत्र की मूण्डली माइनर में नहरी पानी टेल तक नहीं पहुंच रहा था। जिस पर क्षेत्रीय किसानों की समस्या को दैनिक नवज्योति ने गंभीरता से लेते हुए। किसानों की इस समस्या को दैनिक नवज्योति ने 21 फरवरी के अंक में टेल क्षेत्र में नहीं पहुंच रहा नहरी पानी... इस शीर्षक द्वारा प्रमुखता से खबर प्रकाशित किया था। इस समस्या को जलदाय विभाग के अधिकारियों ने सुध ली। जिस पर शुक्रवार को माइनर के टेल क्षेत्र में पानी पहुंचा तो क्षेत्रीय किसानों ने रबी फसलों की पिलाई करना शुरू कर दिया गया है। जिससे किसानों की राहत की सांस ली। जानकारी के अनुसार इस समय क्षेत्र में गोठड़ा बांध से मुख्य मूण्डली माइनर में नहरी पानी का प्रवाह हो रहा है। अब क्षेत्रीय किसान अपनी फसलों में नहरी पानी पहुंचाने में जूट गए है।</p>
<p>माइनर में पहले रात्रिकाल में ऊपर के किसान नहरी पानी लेना बंद कर देते थे, जो रात के समय माइनर में पानी आना शुरू हो जाता था। सुबह फिर ऊपरी किसान पानी लेने के कारण दिन के समय नहरी पानी कम हो जाता था। जिससे क्षेत्र में जरुरतमंद किसानों को पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा था। नहरी पानी पर निर्भर क्षेत्रीय किसानों का कहना था कि टेल क्षेत्र में नहरी पानी पहुंचने से राहत मिलने लगी है। उन्होंने दैनिक नवज्योति की शुक्रवार को प्रकाशित समाचार के लिए सराहना भी की है, जो समय रहते उनकी समस्या का जल्द निराकरण हुआ है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 22 Feb 2025 15:31:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नहरी पानी नहीं मिलने से मुरझा रही फसलें, किसानों ने जताया आक्रोश</title>
                                    <description><![CDATA[दिन में निकलने वाली तेज धूप से फसलें धीरे-धीरे बर्बाद होने की कगार पर चल रही है। जल्द नहर द्वारा खेतों में नहरी पानी नही पहुंचा तो मजबूरन सड़क पर उतरना पड़ेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/crops-wilting-due-to-lack-of-canal-water/article-102782"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/257rtrer-(1)2.png" alt=""></a><br /><p>भण्डेड़ा। गोठड़ा बांध की मुख्य केनाल में पानी का प्रवाह हुए एक पखवाड़ा बीत गया है। पर इस केनाल के टेल क्षेत्र में दो माइनरों में अभी तक नहरी पानी नही पहुंचा है। ऐसे में फसलें मुरझा रही है। यहां तक की खेतों में फसलें सुखने के कगार पर पहुंच गई है। शुक्रवार को क्षेत्रीय किसानों का सब्र टूट गया। टेल क्षेत्र की मूण्डली माइनर के किसानों ने सुखी माइनर पर पहुंचकर एक घंटे तक संबंधित विभागीय अधिकारियों के खिलाफ आक्रोश जताया गया है। संबंधित विभाग के प्रति धरतीपुत्रों में नाराजगी है। जानकारी के अनुसार क्षेत्र में गोठड़ा बांध की मुख्य केनाल गुजर रही है। इस मुख्य केनाल में नहरी पानी का प्रवाह गत पन्द्रह जनवरी को हो चूका था। मगर टेल क्षेत्र में बांसी माइनर व मूण्डली माइनर है। जिसमें पानी नही पहुंच पाया है। नहरी पानी नही पहुंचने से नहर के पानी पर निर्भर फसलें सुखने की कगार पर चल रही है। इस समस्या को लेकर मूण्डली माइनरों के एक दर्जन से अधिक महिला किसान सहित पुरूष किसान सुखी माइनर पर पहुंचे। मौके पर जल संसाधन विभाग के खिलाफ एक घंटे तक आक्रोश जताया गया है। क्षेत्रीय किसान सुखलाल बैरवा, घासीलाल, नरेश, बृजमोहन, आशाराम, अणदी लाल, मीरा बाई, मोर बाई आदि का कहना है कि इस समय रबी सीजन की गेहूं व जौ की फसले दो माह से अधिक समय की हो गई। इन फसलों को नहर द्वारा पहले पानी के प्रवाह के समय सिंचाई हुई थी। अभी तक दूसरी बार नहरी पानी नही आने से फसलें इस समय मुरझाने लगी है। इस समय दोपहर के समय में कड़ाके की धुप से मुरझाने से उनको देखा नही जा रहा है। सुबह व शाम की सर्दी से कुछ राहत मिलती है। दिन में निकलने वाली तेज धूप से फसलें धीरे-धीरे बर्बाद होने की कगार पर चल रही है। जल्द नहर द्वारा खेतों में नहरी पानी नही पहुंचा तो मजबूरन सड़क पर उतरना पड़ेगा। इस दौरान कोई जनहानि होती है, तो संबंधित विभाग जिम्मेदार होगा।</p>
<p><strong>समय पर मिलें नहरी पानी </strong><br />क्षेत्रीय किसानों ने बताया कि खरीफ फसल अतिवृष्टि की भेंट चढ़ने के बाद आर्थिक तंगी से वैसे ही जुझ रहे है। समय पर दूसरा नहरी पानी मिल जाए, तो पैदावार में इसका फायदे पहुंचे। क्षेत्र में बांसी, भण्डेड़ा, माधोराजपुरा, कल्याणपुरा, रामगंज, मुण्डली सहित अन्य जो किसान नहरी पानी पर ही निर्भर है। उनको फसलों को बचाने की चिंताएं सता रही है। टेल क्षेत्र में अब दूसरा पानी जल्द पहुंचे, तो क्षेत्रीय किसानों को भी राहत मिलें। </p>
<p><strong>सुखती फसलें क्षेत्रीय किसानों की पीड़ा</strong><br /> फसलों को पानी मिले एक माह बीत गया है। रबी फसलें दिन की धुप से मुरझाने लगी है। माइनर में पानी नही आने से अब चिंताए बढती नजर आ रही है। संबंधित विभाग समय पर नहरी पानी उपलब्ध करवाए तो बर्बाद होती फसलों को बचाया जा सके। उनके लिए जीवनदान साबित हो सके।<br /><strong>- मोर बाई बैरवा, महिला किसान माधोराजपुरा</strong></p>
<p> फसलें दो महिने से अधिक समय की हो गई। इस समय पानी की जोरदार आवश्यकता हो रही है। मगर नहर में नहरी पानी नही पहुंचने से फसलें मुरझाने लगी है। दोपहर के समय फसलों को देखा नही जा रहा है। संबंधित विभागीय अधिकारी हमारी इस समस्या को गंभीरतापूर्वक देखें, तो हमारी बर्बाद होती फसलों को बचाया जा सके। <br /><strong>- मीरा बाई बैरवा, महिला किसान माधोराजपुरा </strong></p>
<p>वर्ष-2024 में गोठड़ा बांध में पानी की पर्याप्त भराव क्षमता होकर चादर चलने से नहरी पानी अच्छे से उपलब्ध होने की उम्मीद जगी थी, कि फसलों को पानी समय पर मिल जाएगा। मगर फसलों को पहला पानी पिलाएं एक माह हो गया। अब वापस नहरी पानी जल्द मिलें, तो फसलों को संजीवनी मिले। <br /><strong>- सुख लाल बैरवा, किसान माधोराजपुरा</strong></p>
<p> इस बार क्षेत्र में अधिक बारिश होने से पहले खरीफ की फसलें बर्बाद हो गई है। बांध में पर्याप्त पानी का भराव होने से नहरी पानी अच्छे से मिलने की उम्मीद लेकर गेहूं की फसल की बुवाई कर दी। फसल को पहला पानी मिलने के बाद अब दूसरे पानी में हो रही देरी से फसलें मुरझाने लगी है। इन दिनों मुरझाती फसलें देखी नही जा रही है। संबंधित विभाग द्वारा नहरी पानी जल्द उपलब्ध नहीं करवाया गया, तो सड़क पर उतरने को मजबूर होना पडेगा। जिम्मेदार जल्द सुध लेकर राहत दिलावें।<br /><strong>-अणदी लाल बैरवा, किसान माधोराजपुरा </strong></p>
<p>लगभग पांच बीघा में अच्छी उपज की सोचकर गेहूं की फसल की बुवाई की है। रबी फसलों को पहली बार प्रवाह के दौरान नहरी पानी के समय पर पानी मिला था। अब इस समय फसलों को पानी की बहुत ज्यादा जरूरत हो चूकी है। मगर माइनरों के ऊपर की केनाल में भी पानी नही है। हैड से ऊपर ही इस तरह से पानी पहुंचेगा तो हमारी फसलें बर्बाद हो जाएगी। जल्द संबंधित विभाग द्वारा इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो मजबूरन हमें सड़क पर उतरने को मजबूर होना पडेगा। जिम्मेदार जल्द सुध लेकर दूसरा नहरी पानी खेतों तक पहुंचाएं।<br /><strong>- धुली लाल बैरवा, किसान माधोराजपुरा</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />केनाल में पानी का प्रवाह बढ़ा दिया जाएगा। टेल क्षेत्र से ऊपरी माइनरों में भी पानी कंट्रोल किया जाएगा। टेल क्षेत्र की माइनरों में जल्द पानी पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।<br /><strong>- पीसी मीणा, एईएन, जलसंसाधन विभाग नैनवां</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Feb 2025 16:59:28 +0530</pubDate>
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                <title>बिजली उत्पादन से खेतों में हो रही सिंचाई </title>
                                    <description><![CDATA[ कोटा, बारां, बूंदी व मध्यप्रदेश के किसानों की मांग आने के बाद दायीं व बायीं नहर में लगातार जलप्रवाह किया जा रहा है। इसके लिए राणाप्रताप सागर और जवाहर सागर बांध से विद्युत उत्पादन कर नहरों के लिए पानी छोड़ा जा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/irrigation-in-fields-due-to-power-generation/article-36663"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-02/bijli-utpadan-se-kheto-mei-ho-rahi-sinchaii..kota-news..6.2.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। रबी फसलों में सिंचाई के लिए चंबल नदी की दायीं व बायीं नहर में जलप्रवाह जारी है। इस बार चंबल के बांध लबालब होने के कारण किसानों को सिंचाई के लिए मार्च माह तक पानी उपलब्ध कराया जाएगा। पिछले दिनों हुई तेज बारिश के कारण वर्तमान में फसलों में सिंचाई के लिए पानी की मांग कम हो गई है। इस कारण दोनों नहरों में जलप्रवाह घटा दिया गया है। वर्तमान में दायीं नहर में 4500 और बायीं नहर में 600 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। कोटा, बारां, बूंदी व मध्यप्रदेश के किसानों की मांग आने के बाद दायीं व बायीं नहर में लगातार जलप्रवाह किया जा रहा है। इसके लिए राणाप्रताप सागर और जवाहर सागर बांध से विद्युत उत्पादन कर नहरों के लिए पानी छोड़ा जा रहा है। दायीं नहर से कोटा, बारां जिले के अलावा मध्यप्रदेश के कई गांवों के खेतों में सिंचाई होती है, जबकि बायीं नहर से बूंदी जिले के गांवों को सिंचाई सुविधा मिलती है। दायीं नहर से कोटा जिला व बारां जिला सहित मध्यप्रदेश के सैंकड़ों गांवों के खेत सिंचित होते हैं। इस कारण नहर की जलप्रवाह क्षमता बायीं नहर से ज्यादा है।   </p>
<p><strong>दायीं नहर में 4500 और बायीं नहर में 600 क्यूसेक</strong><br />दायीं नहर की पूरी क्षमता 6300 और बायीं नहर की क्षमता 1500 क्यूसेक है। करीब एक पखवाडेÞे पहले फसलों में सिंचाई का कार्य तेज गति से चल रहा था। इस कारण एक पखवाड़े पहले दायीं नहर में 6225 और बायीं नहर में 1050 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था। गत दिनों कोटा जिले सहित  विभिन्न क्षेत्रों में जोरदार बारिश हुई थी। इससे कई जगहों पर खेतों में जलभराव हो गया था। ऐसे में सिंचाई के लिए पानी की मांग में कमी आ गई है। इस कारण दोनों नहरों में जलप्रवाह घटा दिया गया है। वर्तमान में दायीं नहर में 4500 और बायीं नहर में केवल 600 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। </p>
<p><strong>बांधों का लेवल बरकरार</strong><br />गत वर्ष मानसून की सक्रियता के कारण लगातार बारिश का दौर चला था। इस कारण चंबल नदी के चारों बांध लबालब भरे हुए हैं। बांधों का लेवल बरकरार रखने के कारण राणाप्रताप सागर और जवाहर सागर पन बिजलीघर से बिजली उत्पादन कर नहरों में पानी छोड़ा जा रहा है। राणाप्रताप सागर से 4400 क्यूसेक और जवाहरसागर बांध से 3700 क्यूसेक पानी बिजली उत्पादन कर छोड़ा जा रहा है। नहरों में जलप्रवाह करने की वजह से  दोनों बांधों से लगातार बिजली उत्पादन किया जा रहा है।  </p>
<p><strong>एमपी के लिए 2200 क्यूसेक पानी</strong><br />इटावा क्षेत्र में स्थित पार्वती हेड के माध्यम से मध्यप्रदेश के किसानों के लिए पानी छोड़ा जाता है। पार्वती हेड से जुडेÞ इटावा, अयाना सहित विभिन्न क्षेत्रों के खेतों में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जाता है। दायीं नहर से मध्यप्रदेश के किसानों को भी पानी उपलब्ध कराया जाता है। मौसम में बदलाव के बाद वहां से भी पानी की डिमांड कम हो गई है। इस कारण पार्वती हेड से मध्यप्रदेश के लिए 2200 क्यूसेक पानी छोडा जा रहा है।</p>
<p><strong>नजर आने लगी रंगत</strong><br />सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध होने के बाद फसलों में भी रंगत आने लगी है। ऐसे में कुछ दिनों से फसल बेहतर रूप से विकसित होने लगी है। कोटा जिले में सबसे ज्यादा बुवाई गेहूं की होती है। इसके बाद किसानों का रुझान सरसों की फसल को लेकर हैं। वर्तमान में जिले के कुछ क्षेत्रों में सरसों फसल की कटाई शुरू हो चुकी है। गेहूं के लिए नहरी पानी उपलब्ध कराया जा रहा है।  </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />रबी फसलों की सिंचाई के लिए दायीं व बायीं नहर में जलप्रवाह किया जा रहा है। चंबल के बांधों का लेवल बरकरार रखा गया है। राणाप्रताप सागर व जवाहर सागर बांध से बिजली उत्पादन कर दोनों नहरों में सिंचाई के लिए पानी छोड़ा जा रहा है। फिलहाल नहरी पानी की मात्रा घटा दी गई है। <br /><strong>- लखनलाल गुप्ता, अधीक्षण अभियंता, सीएडी कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Feb 2023 15:38:39 +0530</pubDate>
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                <title>धनिये से मोहभंग, गेहूं व सरसों पर भरोसा कायम</title>
                                    <description><![CDATA[जिले सहित पूरे हाड़ौती क्षेत्र में कुछ सालों पहले धनिया फसल की प्रमुखता से बुवाई होती थी। इसका रकबा हाड़ौती में लाखों हैक्टेयर में होता था। पर्याप्त पानी और उपजाऊ जमीन होने के कारण धनिया का उत्पादन भी बम्पर होता था। पिछले कुछ सालों से इसका रकबा लगातार घटता ही जा रहा है। इस साल  कोटा जिले में धनिया का रकबा 8 हजार हैक्टेयर ही रह गया है, जो काफी कम है।   ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/disillusioned-with-coriander--trust-in-wheat-and-mustard-remains/article-25346"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-10/dhaniye-se-mohbhang,-gehu-va-sarso-par-bharosa-kaayam...kota-news-4.10.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती क्षेत्र की प्रमुख फसल माने जाने वाली धनिया का दायरा अब लगातार सिमटता जा रहा है। भावों में कमी और रोग संकट के चलते अब धनिया का रकबा कोटा जिले में दस हजार हैक्टेयर से कम हो गया है। वहीं इस बार जिले के किसानों ने गेहूं व सरसों पर फिर से भरोसा जताया है।  दोनों फसलों का रकबा पिछले साल की तुलना में बढ़Þा है। कृषि विभाग ने रबी फसल की बुवाई का लक्ष्य निर्धारित कर दिया है। इस बार जिले में गेहूंं के बम्पर उत्पादन की उम्मीद जताई जा रही है। </p>
<p><strong>बारिश से हुआ था नुकसान</strong><br />मानसून के अन्तिम दौर में जिले में झमाझम बारिश ने किसानों को खासा आहत किया। इस कारण जिले में सोयाबीन और उड़द फसल में काफी खराबा हुआ था। इससे किसानों ने खासा नुकसान झेला है। खरीफ में खराबा हुआ तो किसान जल्दी से फसल समेटकर खेतों को तैयार करने में जुट गए हैं, जिससे गेहूं व सरसों की समय पर बुवाई हो सके। यह समय सरसों की बुवाई के लिए उपयुक्त बताया जा रहा है। पिछले सालों में सरसों के बढ़ते भावों ने भी किसानों को इस ओर लुभाया है। </p>
<p><strong>इसलिए धनिया का छोड़ा साथ</strong><br />जिले सहित पूरे हाड़ौती क्षेत्र में कुछ सालों पहले धनिया फसल की प्रमुखता से बुवाई होती थी। इसका रकबा हाड़ौती में लाखों हैक्टेयर में होता था। पर्याप्त पानी और उपजाऊ जमीन होने के कारण धनिया का उत्पादन भी बम्पर होता था। बम्पर उत्पादन होने के कारण लगातार धनिया के भावों में गिरावट आने लगी। वहीं लोंगिया रोग ने भी इस फसल को काफी नुकसान पहुंचाया। कीटनाशक का उपयोग करने के बावजूद किसान इस रोग पर काबू नहीं कर पाए। इससे धनिया की खेती किसानों के लिए नुकसान का सौदा साबित होने लगी और धीरे-धीरे इसके प्रति रुझान कम होता चला गया। पिछले कुछ सालों से इसका रकबा लगातार घटता ही जा रहा है। इस साल  कोटा जिले में धनिया का रकबा 8 हजार हैक्टेयर ही रह गया है, जो काफी कम है।   </p>
<p><strong>इस बार भी गेहूं से सरसब्ज होंगे खेत </strong><br />कोटा जिले में गेहूं के रकबे की बात करें तो पिछले कुछ सालों से गेहूं का रकबा लगातार बढ़ता ही जा रहा है। रबी सीजन में सबसे ज्यादा फसल गेहूं की ही बोई जाती है। हर साल इसका बम्पर उत्पादन होता है। किसान इस  फसल पर सबसे ज्यादा भरोसा करते हैं। कोटा जिले में वर्ष 2021 में 1 लाख 10 हजार हैक्टेयर में गेहूं में बुवाई हुई थी। इस साल गेहूं का रकबा 30 हजार हैक्टेयर बढ़ गया है। इस सीजन में गेहंू बुवाई का रकबा 1 लाख 40 हजार हैक्टेयर निर्धारित किया गया है।  </p>
<p><strong>सरसों भी ज्यादा खिलेगी</strong><br />कृषि विभाग के अनुसार सरसों का रकबा भी इस साल बढ़ा है। जिले में गेहूं के बाद सबसे बुवाई सरसों की होगी। इस साल सरसों की बुवाई 85 हजार हैक्टेयर में होगी। गत वर्ष इसका रकबा 83 हजार हैक्टेयर था। इस साल सरसों की बुवाई दो हजार हैक्टेयर में ज्यादा होगी। कृषि अधिकारियों का कहना है कि गेहूं की तुलना में सरसों में सिंचाई के लिए पानी की आवश्यकता कम होती है। ऐसे में जिले में गेहूं के बाद सबसे ज्यादा सरसों की ही बुवाई होती है। वहीं किसानों को भाव भी अच्छे मिल जाते हैं। इस कारण किसानों का सरसों के प्रति रुझान बना हुआ है।  </p>
<p><strong>फैक्ट फाइल</strong><br />गेहंू : 1लाख 40 हजार हैक्टेयर    <br />सरसों : 85 हजार हैक्टेयर<br />चना : 40 हजार हैक्टेयर<br />धनिया : 8 हजार हैक्टेयर<br />अलसी : 1 हजार हैक्टेयर<br />अन्य : 35 हजार हैक्टेयर<br />[स्त्रोत कृषि विभाग]</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />कुछ सालों पहले कोटा जिले में धनिया का रकबा काफी था। ज्यादा उत्पादन होने के कारण भाव कम मिलने से बुवाई का आंकड़ा कम होता गया। वहीं लोंगिया रोग से भी धनिया की उत्पादन क्षमता में गिरावट आती गई। इससे अब धनिया की बुवाई कम होने लगी है। इस बार भी गेहूं व सरसों का रकबा बढ़ा है।  हर साल इन दोेनों फसलों का रकबा लगातार बढ़ता ही जा रहा है।<br /><strong>- खेमराज शर्मा, उपनिदेशक, कृषि विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Oct 2022 15:46:37 +0530</pubDate>
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