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                <title>gyanvapi case - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>Gyanvapi में जारी रहेगी व्यासजी तहखाने में पूजा, अंजुमन इंतिजामिया मसाजिद की अपील खारिज </title>
                                    <description><![CDATA[इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने ज्ञानवापी के व्यासजी तहखाने में काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास को पूजा का अधिकार देने के वाराणसी जिला न्यायाधीश के 17 जनवरी के आदेश को चुनौती देने वाली अंजुमन इंतिजामिया मसाजिद की अपील खारिज कर दी है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/gyanvapi-puja-will-continue-in-vyasji-basement-anjuman-intijamia-mosques/article-71172"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/gyanvapi.png" alt=""></a><br /><p>प्रयागराज। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने ज्ञानवापी के व्यासजी तहखाने में काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास को पूजा का अधिकार देने के वाराणसी जिला न्यायाधीश के 17 जनवरी के आदेश को चुनौती देने वाली अंजुमन इंतिजामिया मसाजिद की अपील खारिज कर दी है। </p>
<p>यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने सोमवार को दिया है। जिला जज ने वाराणसी के जिलाधिकारी को संपत्ति का रिसीवर(देखभाल करने वाला) नियुक्त किया था और 31 जनवरी के आदेश द्वारा उन्होंने ज्ञानवापी के व्यासजी तहखाने में पूजा की अनुमति दी थी। </p>
<p> न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने इन आदेशों के खिलाफ मुस्लिम पक्ष की दोनों अपीलों को खारिज करते हुए कहा कि मामले से जुड़े सभी दस्तावेज को देखने और संबंधित पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद न्यायालय को जिला जज वाराणसी के 17 जनवरी के डीएम वाराणसी को संपत्ति के रिसीवर के रूप में नियुक्त करने के साथ व्यासजी तहखाने में पूजा की अनुमति देने वाले 31 जनवरी के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं मिला।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 26 Feb 2024 11:42:13 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>Gyanvapi Case: ज्ञानवापी मामले में सुनवाई पूरी, उच्च न्यायालय ने सुरक्षित रखा फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[मस्जिद पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता एस एफ ए नकवी व पुनीत गुप्ता ने  तर्क दिया कि पूजा के अधिकार की मांग में दाखिल सिविल वाद में अधिकार तय किए बगैर अंतरिम आदेश से फाइनल रिलीफ देना कानूनी प्रक्रिया का उल्लघंन है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/gyanwapi-case-hearing-completed-in-gyanwapi-case-high-court-reserves/article-70213"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-12/gyanvapi.png" alt=""></a><br /><p>प्रयागराज। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने वाराणसी स्थित ज्ञानवापी गृहतल में काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट को पूजा की अनुमति देने की जिला जज के आदेश की वैधता की चुनौती देने वाली अपीलों की सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित कर लिया। न्यायधीश रोहित रंजन अग्रवाल मसाजिद कमेटी की तरफ से दाखिल जिला जज के दो आदेशों की चुनौती अपीलों की सुनवाई कर रहे थे।</p>
<p>मस्जिद पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता एस एफ ए नकवी व पुनीत गुप्ता ने  तर्क दिया कि पूजा के अधिकार की मांग में दाखिल सिविल वाद में अधिकार तय किए बगैर अंतरिम आदेश से फाइनल रिलीफ देना कानूनी प्रक्रिया का उल्लघंन है। तहखाने में पूजा की अनुमति देकर वस्तुत: सिविल वाद स्वीकार कर लिया गया है। साथ ही जिला जज ने स्वयं ही दो विरोधाभाषी आदेश दिए हैं।</p>
<p>यह भी कहा गया कि सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 152 के अंतर्निहित अधिकार का प्रयोग करते हुए अदालत मूल आदेश  की प्रकृति में बदलाव का आदेश नहीं दे सकती।  मूल आदेश में केवल एक मांग मानी गई। जिलाधिकारी को रिसीवर नियुक्त कर दिया गया। बिना किसी अर्जी के केवल मौखिक अनुरोध पर पूजा का अधिकार दे दिया गया है। अदालत ने अपनी अंतर्निहित शक्ति का इस्तेमाल करने का आदेश में उल्लेख नहीं किया है। जिला अदालत ने 17 जनवरी को अर्जी स्वीकार कर केवल एक रिलीफ ही दी। दूसरी मांग पर आदेश नहीं देना ही अनुतोष से इंकार माना जाएगा।</p>
<p>कहा गया कि 17 जनवरी 24 के मूल आदेश से जिला जज ने विवादित भवन की सुरक्षा व देखरेख  करने व किसी प्रकार का बदलाव न होने देने का भी निर्देश दिया है और 31 जनवरी 24 के  आदेश से बैरिकेङ्क्षडग काट कर तहखाने में पूजा के लिए दरवाजा बनाने तथा ट्रस्ट को पुजारी के जरिए तहखाने में स्थित देवी देवताओं की पूजा करने की अनुमति देकर अपने ही आदेश का विरोधाभासी आदेश दिया है।</p>
<p>यह भी कहा गया कि तहखाने पर किसका अधिकार है, यह साक्ष्यों के बाद सिविल वाद के निर्णय से तय होगा। जिला जज ने अंतरिम आदेश से फाइनल रिलीफ देकर गलती की है। इसलिए जिला जज के आदेश रद किए जाये। <br /><br />मंदिर पक्ष के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन, हरिशंकर जैन, वरिष्ठ अधिवक्ता सी एस वैद्यनाथन ने पक्ष रखा। इनका कहना था कि अदालत को धारा 151व 152 के अंतर्गत न्याय हित में आदेश देने का अंतर्निहित अधिकार है।वादी अधिवक्ता के संज्ञान में लाने के बाद अदालत ने छूटी  हुई प्रार्थना स्वीकार की है।वादी के बजाय अदालत ने ट्रस्ट को पुजारी के जरिए पूजा का अधिकार बहाल किया है। </p>
<p>वादी व्यास जी के तहखाने में वर्षों से पूजा अर्चना करता आ रहा है। वर्ष 1993 मे श्रीराम जन्मभूमि विवादित ढांचा गिराए जाने के बाद ज्ञानवापी की लोहे की बाड़ से बैरिकेङ्क्षडग करने के कारण तहखाने में पूजा करने से बिना किसी आदेश के रोक लगा दी गई थी। अदालत ने कोई नया अधिकार नहीं दिया है।  कहा कि जिला जज ने अर्जी की तीन बार सुनवाई की तिथि तय की ङ्क्षकतु मस्जिद पक्ष की तरफ से कोई आपत्ति नहीं की गई। दोनों पक्षों को सुनकर जिला जज ने 31 जनवरी का दूसरा आदेश जारी किया है जो 17 जनवरी के मूल आदेश का ही हिस्सा है। अदालत को गलती  दुरूस्त करने व छूटे आदेश को पारित करने का पूरा अधिकार है। आदेश कानूनी प्रक्रिया के तहत पारित किया गया है।</p>
<p>बहस की गई कि दीन मोहम्मद केस में कोर्ट ने व्यास जी के तहखाने का जिक्र किया है। जितेंद्र व्यास के पूजा करने को स्वीकार किया गया है। इसलिए अपीलें बलहीन होने के नाते खारिज की जाए।</p>
<p>प्रदेश सरकार की तरफ से महाधिवक्ता अजय कुमार मिश्र, मुख्य स्थाई अधिवक्ता कुणाल रवि व हरे राम त्रिपाठी ने पक्ष रखा। महाधिवक्ता का कहना था कि कानून व्यवस्था कायम रखने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है। अदालत के आदेश पर अमल कराना सरकार का दायित्व है।</p>
<p>उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता सीएस वैद्यनाथन ने लगभग 40 मिनट तक तर्क प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि ज्ञानवापी के दाहिने हिस्से में तहखाना स्थित है, जहां ङ्क्षहदू वर्ष 1993 तक पूजा कर रहे थे। सीपीसी के आदेश 40 नियम एक के तहत वाराणसी कोर्ट ने डीएम को रिसीवर नियुक्त किया है। पूजा का आदेश किसी तरह से मुस्लिमों के अधिकारों को प्रभावित नहीं करता है, क्योंकि मुसलमान कभी तहखाने में नमाज नहीं पढ़ता था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Thu, 15 Feb 2024 17:19:18 +0530</pubDate>
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                <title>Gyanvapi Case: कोर्ट ने हिंदू पक्ष को व्यास तहखाने में पूजा करने की इजाजत दी</title>
                                    <description><![CDATA[हिंदू व्यास तहखाने में पूजा कर सकेंगे। कोर्ट ने प्रशासन को 7 दिन के अंदर व्यवस्था करने का भी आदेश दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/gyanvapi-case-varanasi-court-allowed-hindu-side-to-worship-in-vyas-tehkhana/article-68761"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-12/gyanvapi1.png" alt=""></a><br /><p>ज्ञानवापी केस में वाराणसी कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने हिंदू पक्ष को पूजा करने का अधिकार दे दिया है। हिंदू व्यास तहखाने में पूजा कर सकेंगे। कोर्ट ने प्रशासन को 7 दिन के अंदर व्यवस्था करने का भी आदेश दिया है। बता दें कि साल 1993 से यहां पूजा बंद थी। इसलिए इस फैसले को हिंदूू पक्ष की एक बड़ी जीत के तौर पर देखा जा रहा है। ये तहखाना मस्जिद के नीचे मौजूद है। पूजा-पाठ काशी विश्वनाथ ट्रस्ट बोर्ड की ओर से कराई जाएगी।<br /><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Wed, 31 Jan 2024 15:21:53 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>ज्ञानवापी मामला: पांच याचिकाएं खारिज</title>
                                    <description><![CDATA[ उच्च न्यायालय के फैसले के बाद हिंदू पक्ष के अधिवक्ता विजय शंकर रस्तोगी ने कहा कि मुस्लिम पक्ष ने उच्च न्यायालय में पांच याचिकाएं दायर की थी। कोर्ट ने उन सभी को निरस्त कर दिया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/gyanvapi-case-five-petitions-rejected/article-64603"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/gyanvapi.png" alt=""></a><br /><p>एजेंसी/प्रयागराज। काशी विश्वनाथ-ज्ञानवापी भूमि स्वामित्व विवाद मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मंगलवार को मुस्लिम पक्ष द्वारा मूल याचिका की पोषणियता पर प्रशन उठाने वाली और विवादित स्थल के भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा सर्वे के विरोध में दाखिल पांच याचिकाएं खारिज कर दी। उच्च न्यायालय ने जिन पांच याचिकाओं को खारिज किया है उनमें से तीन ज्ञानवापी मस्जिद कमेटी और दो उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने दायर की थी। इनमें से तीन याचिकाओं में 1991 में वाराणसी कोर्ट में दायर एक केस की मेरिट को चुनौती दी गई थी।<br /><br /><strong>एक मामले में सुनवाई छह महीने में पूरी करने का निर्देश </strong><br />न्यायालय ने वाराणसी कोर्ट को इस मामले में 1991 में दायर मामले में से एक की सुनवाई छह महीने में पूरी करने का निर्देश दिया। न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की सिंगल बेंच ने सभी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। अंजुमन इंतजामिया कमेटी और उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में 1991 में वाराणसी की अदालत में दायर मूल वाद के मेरिट को चुनौती दी थी। यह केस वाराणसी कोर्ट में दायर है।<br /><br /><strong>फैसले के बाद हिंदू पक्ष ने कहा</strong><br />उच्च न्यायालय के फैसले के बाद हिंदू पक्ष के अधिवक्ता विजय शंकर रस्तोगी ने कहा कि मुस्लिम पक्ष ने उच्च न्यायालय में पांच याचिकाएं दायर की थी। कोर्ट ने उन सभी को निरस्त कर दिया है। साथ ही उच्च न्यायालय ने वाराणसी कोर्ट को आदेश दिया कि हिंदू पक्ष ने 1991 में जो वाराणसी कोर्ट में याचिका है वह प्लेसेज आॅफ वर्शिप एक्ट से प्रभावित नहीं है। प्लेसेज आॅफ वर्शिप एक्ट के तहत कानून है कि 15 अगस्त 1947 में जिस धार्मिक स्थल की जो स्थिति है उसमें बदलाव नहीं किया जाए। ज्ञानवापी मामले में 15 अगस्त 1947 को परिसर की धार्मिक स्थिति मंदिर की थी या मस्जिद की थी। उच्च न्यायालय ने कहा है कि किसी भी धार्मिक स्थल के दो स्वरूप नहीं हो सकते हैं। या तो वह मंदिर होगा या मस्जिद, लेकिन इसे निर्धारित करने के लिए साक्ष्य की जरूरत होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 Dec 2023 09:37:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>ज्ञानवापी केस में मुस्लिम पक्ष को झटका, याचिका खारिज</title>
                                    <description><![CDATA[इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा ज्ञानवापी केस का फैसला सुनवाई के बाद 8 दिसंबर को सुरक्षित रखा था।  ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/shock-to-muslim-side-in-gyanvapi-case-petition-rejected/article-64507"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-12/gyanvapi1.png" alt=""></a><br /><p>इलाहाबाद। ज्ञानवापी केस में मुस्लिम पक्ष को बड़ा झटका लगा है। स्वामित्व को चुनौती देने वाली याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया हैं। मुस्लिम पक्ष द्वारा दायर सभी याचिकाएं खारिज कर दी गई हैें। </p>
<p><strong>8 दिसंबर को रखा था फैसला सुरक्षित</strong></p>
<p>इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा ज्ञानवापी केस का फैसला सुनवाई के बाद 8 दिसंबर को सुरक्षित रखा था।  </p>
<p><strong>एएसआई की सर्वे के खिलाफ थी 5 याचिकाएं</strong></p>
<p>ज्ञानवापी केस में एएसआई द्वारा सर्वे किया गया था जिसके खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में 5 याचिकाएं दायर की गई थी। हाईकोर्ट ने इन पांचों याचिकाओं को खारिज कर दिया। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 Dec 2023 10:29:10 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>Gyanvapi Case: सुप्रीम कोर्ट पहुंची मस्जिद कमेटी, इलाहाबाद हाईकोर्ट के सर्वे कराने वाले फैसले को दी चुनौती</title>
                                    <description><![CDATA[कमेटी के वकील ने कहा है कि एएसआई को सर्वे करने की अनुमति न दी जाए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/gyanvapi-case-mosque-committee-reaches-supreme-court-challenges-allahabad-high-court-decision-to-conduct-survey/article-53598"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/gyanvapi-sc.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। ज्ञानवापी परिसर में ASI के सर्वे को रोकने की याचिका खारिज हो जाने के बाद अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद कमेटी अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। कमेटी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी है। कमेटी के वकील ने कहा है कि एएसआई को सर्वे करने की अनुमति न दी जाए।<br /><br /><strong>हिंदू पक्ष की ओर से दायर की गई कैविएट</strong><br />मस्जिद कमेटी के सुप्रीम कोर्ट पहुंचने से पहले हिंदू पक्ष की ओर से सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल की गई थी। इसका पीछे उनका मकसद है कि यदि मुस्लिम पक्ष इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाता है तो इस स्थिति में कोई भी फैसला सुनाने से पहले हिंदू पक्ष को भी सुना जाए। <br /><br />गुरुवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट से मुस्लिम पक्ष को बड़ा झटका लगा। अदालत ने ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के एएसआई सर्वे पर अपना फैसला सुनाया। अदालत ने मस्जिद कमेटी की याचिका को खारिज करते हुए ASI सर्वे की इजाजत दे दी। बता दें कि मामले की सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश प्रीतिंकर दिवाकर की एकल पीठ ने की। शुक्रवार से ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का सर्वे किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Thu, 03 Aug 2023 17:28:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Gyanvapi Case: ASI सर्वे रोकने वाली याचिका को हाई कोर्ट ने किया खारिज</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्य न्यायाधीश दिवाकर ने गुरूवार को अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमेटी की याचिका को खारिज करते हुए अपने महत्वपूर्ण आदेश में कहा कि सर्वे पर लगी रोक समाप्त की जाती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/allahabad-high-court-dismisses-petition-to-stop-gyanvapi-asi-survey-and-allows-asi-to-condut-survey-in-gyanvapi-mosque/article-53512"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/gyanvapi.jpg" alt=""></a><br /><p>प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने वाराणसी में ज्ञानवापी परिसर में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) रोकने संबंधी मुस्लिम पक्ष की याचिका को खारिज कर दिया है।</p>
<p>मुख्य न्यायाधीश प्रीङ्क्षतकर दिवाकर ने गुरूवार को अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमेटी की याचिका को खारिज करते हुए अपने महत्वपूर्ण आदेश में कहा कि सर्वे पर लगी रोक समाप्त की जाती है। कोर्ट ने एएसआई सर्वे को लेकर एएसआई की तरफ से दिए हलफनामे को लेकर कहा कि उस हलफनामा पर अविश्वास करने का कोई आधार नहीं है। </p>
<p>हलफनामा में एएसआई ने कहा था कि उनके सर्वे से ज्ञानवापी परिसर में किसी भी प्रकार का इंच भर भी नुकसान नहीं होगा। उच्च न्यायालय ने वाराणसी की निचली अदालत के सर्वे कराने के आदेश को भी सही माना है। उच्च न्यायालय के आदेश के बाद एएसआई सर्वे का रास्ता साफ हो गया है। एएसआई ने अपने बयान में कहा था कि परिसर में खुदाई करने का उसका कोई इरादा नहीं है। </p>
<p>गौरतलब है कि पिछली 21 जुलाई को वाराणसी जिला जज ने ज्ञानवापी परिसर में एएसआई सर्वे को मंजूरी प्रदान की थी  जिसके बाद मुस्लिम पक्ष ने जिला जज के फैसले को चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट से रोक लगाने की मांग करते हुए याचिका दाखिल की थी। दोनो पक्षों की दलील सुनने के बाद उच्च न्यायालय ने 27 जुलाई को अपना फैसला सुरक्षित कर लिया था।</p>
<p>मुस्लिम पक्ष ने सर्वे से ढांचे को नुकसान होने की बात कही थी। जिसके बाद एएसआई की ओर से एक हलफनामा दाखिल कर कहा गया था कि सर्वे से कोई नुकसान नहीं होगा जिसके बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह फैसला सुनाया। कोर्ट के फैसले के बाद अब कभी भी ज्ञानवापी परिसर का एएसआई सर्वे शुरू किया जा सकता है। हिन्दू पक्ष के अधिवक्ता के मुताबिक कोर्ट ने इस बात को स्वीकार किया कि सर्वे को किसी भी स्टेज पर शुरू किया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Thu, 03 Aug 2023 12:02:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ज्ञानवापी में तीन घंटे चला वैज्ञानिक सर्वेक्षण फिर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई दो दिन के लिए रोक</title>
                                    <description><![CDATA[ भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने सोमवार सुबह ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण किया मगर इस बीच उच्चतम न्यायालय के निर्देश के बाद सर्वेक्षण बुधवार शाम तक रोक दिया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/the-scientific-survey-in-gyanvapi-went-on-for-three-hours/article-52618"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/gyanvapi.png" alt=""></a><br /><p>वाराणसी। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने सोमवार सुबह ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण किया मगर इस बीच उच्चतम न्यायालय के निर्देश के बाद सर्वेक्षण बुधवार शाम तक रोक दिया गया।</p>
<p>सूत्रों ने कहा कि एएसआई टीम के लगभग 30 सदस्यों ने सुबह 7:15 बजे हिंदू पक्ष के वकीलों और चार महिला वादी के साथ काशी विश्वनाथ मंदिर से सटे मस्जिद परिसर में प्रवेश किया। उधर, मुस्लिम पक्ष के वकीलों और ज्ञानवापी मस्जिद के रोजमर्रा के मामलों का प्रबंधन करने वाली अंजुमन इंतजामिया समिति के सदस्यों ने सर्वेक्षण के जिला अदालत के आदेश के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराने के लिए एएसआई सर्वेक्षण का बहिष्कार किया।</p>
<p>पुलिस आयुक्त (सीपी) अशोक मुथा जैन बड़ी संख्या में पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। एएसआई सर्वेक्षण के मद्देनजर मस्जिद परिसर और उसके आसपास केंद्रीय बलों के साथ पीएसी कर्मियों को तैनात किया गया था। हिंदू पक्ष के वकील मदन मोहन यादव ने कहा कि सर्वे सुबह 7:15 बजे शुरू हुआ और 11:15 बजे तक चला। उन्होंने कहा कि सर्वेक्षण के दौरान हिंदू पक्ष के वकील और चार हिंदू महिला वादी मौजूद थीं।</p>
<p>एएसआई सर्वेक्षण को लेकर रविवार रात जिलाधिकारी एस राजलिंगम ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ एक बैठक की। एएसआई सर्वेक्षण के मद्देनजर शहर में हाई अलर्ट जारी किया गया था। उच्चतम न्यायालय के आदेश पर एएसआई सर्वेक्षण को बुधवार शाम पांच बजे तक रोक दिया गया है। अदालती आदेश में मुस्लिम पक्ष को इलाहाबाद उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के लिए कहा गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 24 Jul 2023 14:21:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कथित शिवलिंग की कार्बन डेटिंग की मांग खारिज</title>
                                    <description><![CDATA[इस मामले में हिंदू पक्ष की याचिका खारिज कर दी गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/demand-for-carbon-dating-of-alleged-shivling-rejected/article-26567"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-10/gyanvapi1.jpg" alt=""></a><br /><p>वाराणसी। उत्तर प्रदेश में वाराणसी स्थित ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में शिवलिंग के आकार जैसे ढांचे की प्राचीनता का पता करने के लिए इसकी कार्बन डेटिंग या अन्य वैज्ञानिक परीक्षण कराने की मांग संबंधी अर्जी को जिला अदालत ने शुक्रवार को खारिज कर दिया। <br /><br />जिला न्यायाधीश अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत ने हिंदू पक्ष की इस अर्जी पर दोनों पक्षों की सुनवाई पूरी करने के बाद इसे खारिज कर दिया। न्यायाधीश ने अपने फैसले में कहा कि उच्चतम न्यायालय ने इस मामले पर सुनवाई के दौरान गत 17 मई को वजूखाना क्षेत्र को सुरक्षित बनाए रखने का आदेश दिया था। ऐसी स्थिति में अगर कार्बन डेटिेंग और भूमिगत परीक्षण संबंधी ग्राउंड पेनिट्रेटिंग राडार तकनीकी के प्रयोग से कथित शिवलिंग को अगर कोई क्षति पहुंचती है तो यह उच्चतम न्यायालय के आदेश का उल्लंघन होगा। न्यायाधीश ने यह भी कहा कि ऐसा होने पर आम जनता की धार्मिक भावनाओं को भी चोट पहुंच सकती है।</p>
<p>फैसले में अदालत ने कहा कि इस स्तर पर कथित शिवलिंग की आयु, प्रकृति और संरचना का निर्धारण करने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वे को निर्देश दिया जाना उचित नहीं होगा। ऐसे आदेश से इस वाद में अंतर्निहत प्रश्नों के न्यायपूर्ण समाधान की कोई संभावना प्रतीत नहीं होती है। इसलिए वादी पक्ष का प्रार्थना पत्र निरस्त होने योग्य है।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि इस साल मई में वाराणसी स्थित सिविल जज सीनियर डिवीजन रवि कुमार दिवाकर ने ज्ञानवापी परिसर का वीडियोग्राफी सर्वे कराने का आदेश दिया था। सर्वे के दौरान मस्जिद के वजूखाने में पत्थर का एक शिवलिंग जैसा ढांचा मिला था। हिंदू पक्ष इसे शिवलिंग और मुस्लिम पक्ष इसे वजूखाने का फव्वारा बता रहा था। मुस्लिम पक्ष स्थानीय अदालत के फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय गया था। उच्चतम न्यायालय की पीठ ने वजूखाना क्षेत्र को संरक्षित करने का आदेश देते हुए मुसलमानों के नमाज और अन्य मजहबी क्रियाकलापों को निर्बाध रूप से जारी रखने आदेश दिया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 14 Oct 2022 16:53:42 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>ज्ञानवापी मामला : अदालत का फैसला टला</title>
                                    <description><![CDATA[मस्जिद परिसर में मिले हिंदू प्रतीक चिह्नों की प्राचीनता का पता लगाने के लिए इनकी कार्बन डेंटिंग कराए जाने की माँग को लेकर दायर अर्जी पर जिला अदालत ने सुनाए जाने वाले फ़ैसले को 11 अक्टूबर तक के लिए टाल दिया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/gyanvapi-case-courts-decision-postponed/article-25767"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-10/gyanvapi.jpg" alt=""></a><br /><p>वाराणसी। उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में मिले हिंदू प्रतीक चिह्नों की प्राचीनता का पता लगाने के लिए इनकी कार्बन डेंटिंग कराए जाने की मांग को लेकर दायर अर्जी पर जिला अदालत ने सुनाए जाने वाले फ़ैसले को 11 अक्टूबर तक के लिए टाल दिया है। जिला न्यायाधीश अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत ने इस मामले में कुछ स्पष्टीकरण की जरूरत बताते हुए अगली तारीख 11 अक्टूबर तय की है। वादी पक्ष ने कार्बन डेंटिंग सहित अन्य वैज्ञानिक तकनीक की मदद से हिंदू प्रतीकों की प्राचीनता का पता लगाने की अदालत से माँग की है। इस मामले में अदालत द्वारा माँगे गए स्पष्टीकरण पर अगली सुनवाई को मुस्लिम पक्ष अपनी दलीलें अदालत में पेश करेगा। </p>
<p>हिंदू पक्ष के वक़ील विष्णु शंकर जैन ने बताया कि अदालत ने फ़ैसला सुनाने से पहले 2 बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा है। अदालत ने पक्षकारों से पूछा है कि मस्जिद परिसर के सर्वेक्षण के समय 16 मई को वजूखाने में मिला  'शिवलिंग क्या इस मुक़दमे की संपत्ति के रूप में दर्ज है? दूसरे बिंदु पर अदालत ने पूछा कि क्या यह अदालत कार्बन डेंटिंग के मुद्दे पर कोर्ट कमीशन नियुक्त कर सकती है? </p>
<p>अधिवक्ता जैन ने कहा कि उन्होंने अदालत को बताया कि अर्जी में मस्जिद परिसर में मौजूद दृश्य एवं अदृश्य हिंदू देवी देवताओं की पूजा अर्चना का अधिकार देने की मांग की गई थी। इसलिए सर्वेक्षण में मिले हिंदू प्रतीकों को वाद की संपदा में शामिल माना जाएगा। उन्होंने कहा कि कथित 'शिवलिंग वजूखाने में पानी के अंदर था, इसलिए अदृश्य था, लेकिन  सर्वेक्षण के बाद यह अब यह दृश्य संपदा में शामिल हो गया है। अदालत ने इस बिंदु पर मुस्लिम पक्ष को अगली सुनवाई पर अपना प्रतिवादन पेश करने को कहा है। अदालत द्वारा आज इस अर्जी पर फ़ैसला सुनाये जाने की उम्मीद थी। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 07 Oct 2022 16:32:14 +0530</pubDate>
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