<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://dainiknavajyoti.com/satellite-launch/tag-33006" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Dainik Navajyoti Rising Rajasthan RSS Feed Generator</generator>
                <title>satellite launch - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
                <link>https://dainiknavajyoti.com/tag/33006/rss</link>
                <description>satellite launch RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>खरगे-जयराम ने दी जीएसएलवी-एफ17/ईओएस-05 मिशन की सफलता पर ISRO टीम को बधाई, कहा- देश की रणनीतिक क्षमताओं में होगी बढ़ोतरी</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने GSLV-F17/EOS-05 मिशन के सफल प्रक्षेपण पर इसरो की टीम को बधाई दी। उन्होंने इसे भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया और कहा कि जियोसिंक्रोनस कक्षा में स्थापित पहला इमेजिंग उपग्रह देश की पृथ्वी अवलोकन क्षमताओं को और मजबूत करेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/kharge-jayaram-congratulated-isro-team-on-the-success-of-gslv-f17eos-05-mission/article-164678"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/111200-x-600-px)-(2)13.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने शुक्रवार को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की टीम को जीएसएलवी-एफ17/ईओएस-05 मिशन के सफल प्रक्षेपण पर बधाई दी और इसे भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। खरगे ने 'एक्स' पर कहा, "सफल जीएसएलवी-एफ17/ईओएस-05 मिशन पर पूरी इसरो टीम को बधाई।" उन्होंने कहा कि भूतुल्यकालिक कक्षा में स्थापित भारत का पहला इमेजिंग उपग्रह ईओएस-05 देश की पृथ्वी अवलोकन क्षमताओं को और मजबूत करेगा। उन्होंने कहा, "जियोसिंक्रोनस कक्षा में स्थापित भारत का पहला इमेजिंग उपग्रह ईओएस-05 हमारी पृथ्वी अवलोकन क्षमताओं को और मजबूत करेगा, जिन्हें हम वर्षों से विकसित कर रहे हैं।"</p>
<p>उन्होंने भारतीय वैज्ञानिकों, अंतरिक्ष इंजीनियरों और शोधकर्ताओं के योगदान की भी सराहना करते हुए कहा कि उनके समर्पण और सरलता ने देश के अंतरिक्ष प्रयासों को लगातार आगे बढ़ाया है। खरगे ने कहा, "हमें अपने वैज्ञानिकों, अंतरिक्ष इंजीनियरों और शोधकर्ताओं पर बहुत गर्व है, जिनका समर्पण और सरलता भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को लगातार नयी ऊंचाइयों पर ले जा रही है।" आधुनिक भारत के निर्माताओं के विजन को याद करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि उनकी पार्टी ने हमेशा वैज्ञानिक दृष्टिकोण और अंतरिक्ष अनुसंधान का पुरजोर समर्थन किया है।</p>
<p>उन्होंने कहा, "कांग्रेस पार्टी हमेशा से वैज्ञानिक दृष्टिकोण और अंतरिक्ष अनुसंधान के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध रही है। आधुनिक भारत के निर्माताओं ने दूरदर्शिता के साथ हमारे अंतरिक्ष कार्यक्रम की नींव रखी थी, और हमारे वैज्ञानिकों की पीढ़ियों ने उल्लेखनीय उपलब्धियों के साथ उस विरासत को आगे बढ़ाया है।" खरगे का यह बयान मिशन की सफलता के बाद आया, जो उन्नत उपग्रहों के प्रक्षेपण और भारत के अंतरिक्ष-आधारित बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में इसरो की बढ़ती क्षमताओं का जिक्र करता है। यह उपलब्धि विकास, सार्वजनिक सेवाओं और वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का उपयोग करने पर देश के व्यापक ध्यान को भी दर्शाती है।</p>
<p>कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने श्रीहरिकोटा से जीएसएलवी-एफ17 राकेट से ईओएस-05 उपग्रह के सफल प्रक्षेपण और उसे कक्षा में स्थापित किए जाने पर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) को बधाई दी है। उन्होंने इसे देश के लिए एक और ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि इससे भारत की रणनीतिक क्षमताओं को और मजबूती मिलेगी। </p>
<p>रमेश ने कहा कि 2367 किलोग्राम वजन वाले ईओएस-05 उपग्रह का सफल प्रक्षेपण इसरो के लिए मनोबल बढ़ाने वाला साबित होगा। उन्होंने कहा कि हाल के समय में इसरो को कई तरफ से हमलों का सामना करना पड़ा है, ऐसे में यह उपलब्धि उसकी असाधारण दृढ़ता और मुश्किलों से उबरने की क्षमता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि पूरे देश को इसरो की उपलब्धियों और उसकी क्षमता को सलाम करना चाहिए तथा संगठन के आगामी सभी अभियानों की सफलता की कामना करनी चाहिए।</p>
<p>रमेश ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि ऐसे समय में, जब प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के निर्देश पर इसरो की भूमिका में आमूलचूल बदलाव किया जा रहा है, इस पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित बदलाव इस प्रेरणादायक सार्वजनिक संस्थान के मूल चरित्र को प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इसरो ने दशकों तक तमाम कठिनाइयों के बावजूद देश को गौरवान्वित किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/kharge-jayaram-congratulated-isro-team-on-the-success-of-gslv-f17eos-05-mission/article-164678</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/bharat/kharge-jayaram-congratulated-isro-team-on-the-success-of-gslv-f17eos-05-mission/article-164678</guid>
                <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 16:29:35 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-09/111200-x-600-px%29-%282%2913.png"                         length="949101"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इसरो ने 22-टन थ्रस्ट क्षमता के साथ क्रायोजेनिक इंजन सीई—20 का सफल परीक्षण किया, भविष्य के मिशनों में 22-टन थ्रस्ट क्षमता के साथ सीई20 इंजनों को इस्तेमाल करने की योजना</title>
                                    <description><![CDATA[इसरो ने 22-टन थ्रस्ट क्षमता वाले सीई20 क्रायोजेनिक इंजन का सफलतापूर्वक परीक्षण कर अंतरिक्ष विज्ञान में नया इतिहास रचा है। नोजल प्रोटेक्शन सिस्टम से लैस यह इंजन एलवीएम3 रॉकेट की पेलोड ले जाने की क्षमता को बढ़ाएगा। 165 सेकंड के इस परीक्षण ने भविष्य के भारी उपग्रह मिशनों के लिए भारत की शक्ति को और सुदृढ़ कर दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/isro-successfully-tests-cryogenic-engine-ce-20-with-22-ton-thrust-capacity/article-146420"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/isro.png" alt=""></a><br /><p>चेन्नई। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अपने क्रायोजेनिक इंजन सीई20 का 22-टन थ्रस्ट क्षमता के साथ सफल परीक्षण किया है। इसरो ने एक बयान में बताया कि क्रायोजेनिक इंजन सीई20 में नोजल प्रोटेक्शन सिस्टमÓ(एनपीएस) और एक मल्टी-एलिमेंट इग्नाइटर का उपयोग करके 10 मार्च को समुद्र तल के स्तर पर सफल परीक्षण किया गया।</p>
<p>इससे पहले, एनपीएस का उपयोग करते हुए समुद्र-स्तर पर 19-टन थ्रस्ट क्षमता वाले परीक्षण किए जा रहे थे। सीई20 क्रायोजेनिक इंजन एलवीएम3 प्रक्षेपण वाहन के ऊपरी क्रायोजेनिक चरण को शक्ति प्रदान करता है। इसरो एलवीएम3 की पेलोड ले जाने की क्षमता बढ़ाने के लिए भविष्य के मिशनों में 22-टन थ्रस्ट क्षमता के साथ सीई20 इंजनों को इस्तेमाल करने की योजना बना रहा है।</p>
<p>इसरो ने बताया कि 165 सेकेंड के पूरे परीक्षण के दौरान इंजन और परीक्षण सुविधा दोनों का प्रदर्शन उम्मीदों के अनुरूप रहा।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/isro-successfully-tests-cryogenic-engine-ce-20-with-22-ton-thrust-capacity/article-146420</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/bharat/isro-successfully-tests-cryogenic-engine-ce-20-with-22-ton-thrust-capacity/article-146420</guid>
                <pubDate>Fri, 13 Mar 2026 18:03:57 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-12/isro.png"                         length="658699"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ब्लूबर्ड-6 सफलता की कहानी में भारतीय मूल के दो लोगों का खास योगदान, इसरो का चौकाने वाला खुलासा</title>
                                    <description><![CDATA[इसरो (ISRO) ने बुधवार को अपने शक्तिशाली रॉकेट LVM3-M6 के जरिए अमेरिकी कंपनी AST SpaceMobile के उपग्रह ब्लूबर्ड 6 को सफलतापूर्वक उसकी कक्षा में स्थापित किया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/special-contribution-of-two-people-of-indian-origin-in-the/article-137014"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/lvm-6.png" alt=""></a><br /><p>चेन्नई। इसरो ने भारतीय रॉकेट एलवीएम 3 की मदद से बुधवार को  जिस उपग्रह ब्लूबर्ड 6 को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित किया है,  उसकी निर्माता अमेरिकी कंपनी एएसटी स्पेसमोबाइल में भारतीय मूल के दो लोग बड़े ओहदे पर काम कर रहे हैं। ये हैं दिल्ली विश्वविद्यालय के शांति गुप्ता जो इस कंपनी में मुख्य परिचालन अधिकारी के पद पर हैं और दूसरे हैं आईआईटी मद्रास के छात्र रहे श्रीराम जयसिम्हा जो कंपनी के वाणिज्यिक अनुप्रयोगों के मुख्य वैज्ञानिक के पद पर हैं। </p>
<p>गुप्ता दिल्ली विश्वविद्यालय के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से बैचलर ऑफ कॉमर्स (ऑनर्स) के छात्र रहे थे और बाद में उन्होंने  इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया से चार्टर्ड अकाउंटेंट का कोर्स भी किया। वह अमेरिका में एक लाइसेंस प्राप्त 'सर्टिफाइड पब्लिक अकाउंटेंट' भी हैं।</p>
<p>एएसटी स्पेसमोबाइल के सीओओ के रूप में गुप्ता आपूर्ति श्रृंखला, योजना, लागत प्रबंधन, सूचना प्रौद्योगिकी और मानव संसाधन संचालन सहित कंपनी के वैश्विक कार्यों की देखरेख करते हैं। वे कंपनी के परिचालन को विस्तार देने के लिए रणनीतियों को विकसित और कार्यान्वित करने के लिए जिम्मेदार हैं। </p>
<p>एएसटी स्पेसमोबाइल के अनुसार गुप्ता के पास विकास रणनीतियों को लागू करने, संचालन के विस्तार, व्यावसायिक परिवर्तन, वित्त और लेखा, जोखिम प्रबंधन और उच्च प्रदर्शन करने वाली टीमों के निर्माण का 25 वर्षों का वैश्विक अनुभव है। वे सितंबर 2021 में मुख्य लेखा अधिकारी के रूप में कंपनी में शामिल हुए थे। एएसटी स्पेसमोबाइल से जुडऩे से पहले गुप्ता 2014 से न्यूयॉर्क में अन्सर्ट एंड यंग के साथ बतौर पार्टनर कार्यरत थे।</p>
<p>दूसरी ओर, श्रीराम ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मद्रास से इलेक्ट्रिकल इंजीनियङ्क्षरग में बी.टेक और और रेंसलेयर पॉलिटेक्निक इंस्टीट्यूट, यूएसए से एम.एस. की डिग्री प्राप्त की है। उनके पास वैश्विक दूरसंचार बाजारों के लिए आईपी निर्माण और उत्पाद डिजाइन का 30 वर्षों का सफल ट्रैक रिकॉर्ड है। एएसटी स्पेसमोबाइल के अनुसार, श्रीराम ने डिजिटल सिग्नल प्रोसेङ्क्षसग अनुप्रयोगों (जैसे मोबिलिटी, उपग्रह संचार, मोडेम और वीएलएसआई) के क्षेत्र में 42 शोध पत्र और सम्मेलन प्रकाशन लिखे हैं। वे 21 अमेरिकी और यूरोपीय पेटेंटों के नामित आविष्कारक हैं और मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में सेंटर ऑफ एडवांस्ड इंजीनियरिंग स्टडी के फेलो रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/special-contribution-of-two-people-of-indian-origin-in-the/article-137014</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/bharat/special-contribution-of-two-people-of-indian-origin-in-the/article-137014</guid>
                <pubDate>Wed, 24 Dec 2025 12:53:03 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-12/lvm-6.png"                         length="709138"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दक्षिण कोरिया का पहला निजी अंतरिक्ष रॉकेट ब्राजील में दुर्घटनाग्रस्त, जान माल की कोई हानि नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[निजी कंपनी इननोस्पेस द्वारा विकसित दक्षिण कोरिया का पहला वाणिज्यिक ऑर्बिटल रॉकेट हानबिट-नैनो ब्राजील के अल्कांतारा स्पेस सेंटर से प्रक्षेपण के तुरंत बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया। योनहाप समाचार एजेंसी के अनुसार, प्रक्षेपण के शुरुआती चरण सफल रहे और रॉकेट ने कुछ समय तक फ्लाइट फुटेज भी भेजीं, लेकिन बाद में उसका संपर्क टूट गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/south-koreas-first-private-space-rocket-crashes-in-brazil-no/article-136960"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/south-korea.png" alt=""></a><br /><p>दक्षिण कोरिया। इननोस्पेस कंपनी द्वारा बनाया गया दक्षिण कोरिया का पहला वाणिज्यिक ऑर्बिटल रॉकेट हानबिट-नैनो ब्राजील के एक प्रक्षेपण स्थल से प्रक्षेपित किये जाने के तुरंत बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया। योनहाप समाचार एजेंसी ने मंगलवार को कंपनी के हवाले से यह जानकारी दी। रिपोर्ट के अनुसार, हानबिट-नैनो को ब्राजील के अल्कांतारा स्पेस सेंटर से लगभग 10:13 बजे प्रक्षेपित किया गया था।  प्रक्षेपण प्रक्रिया सफलतापूर्वक शुरू हुई और उड़ान के बाद लगभग कुछ देर तक रॉकेट ने फ्लाइट फुटेज भी भेजीं लेकिन बाद में यह साफ हो गया कि रॉकेट योजना के अनुसार नहीं चल रहा था। योनहाप ने बताया कि रॉकेट से फुटेज स्क्रीन पर दिखना बंद हो गया </p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, रॉकेट कुछ देर बाद सुरक्षा क्षेत्र के अंदर गिर गया। इसमें कोई हताहत नहीं हुआ और न ही कोई अतिरिक्त नुकसान हुआ। इननोस्पेस ने योनहाप को बताया कि रॉकेट में पांच सैटेलाइट सहित एक पेलोड था, जिन्हें 300 किलोमीटर की ऊंचाई पर लो अर्थ ऑर्बिट में तैनात किया जाना था। रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर यह सफल होता तो इननोस्पेस किसी अन्य देश के उपग्रह को निचली कक्षा में स्थापित करने वाली पहली प्राइवेट दक्षिण कोरियाई कंपनी बन जाती। </p>
<p>एजेंसी ने कहा कि इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि रॉकेट में विस्फोट हुआ है। हानबिट-नैनो का प्रक्षेपण पहले भी  तकनीकी दिक्कतों के कारण तीन बार टाला जा चुका था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/world/south-koreas-first-private-space-rocket-crashes-in-brazil-no/article-136960</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/world/south-koreas-first-private-space-rocket-crashes-in-brazil-no/article-136960</guid>
                <pubDate>Tue, 23 Dec 2025 19:06:54 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-12/south-korea.png"                         length="622660"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>श्रीहरिकोटा से लॉन्च होगा ISRO का 6.5 टन वजनी ब्लू-बर्ड-6, भारत और अमेरिका के बीच अंतरिक्ष सहयोग को बढ़ावा</title>
                                    <description><![CDATA[15 दिसंबर सोमवार को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो श्रीहरिकोटा से अपना सबसे भारी अमेरिकी कॉमर्शियल कम्युनिकेशन सैटेलाइट, 6.5 टन वजनी ब्लू-बर्ड-6 लॉन्च करने वाला है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/isros-65-tonne-blue-bird-6-to-be-launched-from-sriharikota/article-135633"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/sri-harikota.png" alt=""></a><br /><p>श्रीहरिकोटा। 15 दिसंबर सोमवार को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो श्रीहरिकोटा से अपना सबसे भारी अमेरिकी कॉमर्शियल कम्युनिकेशन सैटेलाइट, 6.5 टन वजनी ब्लू-बर्ड-6 लॉन्च करने वाला है और इसके साथ ही शुरूआत होगी अतंरिक्ष सहयोग के नए अध्याय की। इस कमर्शियल सैटेलाइट के लॉन्च होने से भारत और अमेरिका के बीच अंतरिक्ष सहयोग को भी बढ़ावा मिलेगा। यह मिशन भारत और अमेरिका के बीच अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी साझेदारी को और मजबूत करेगा।</p>
<p>रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने इस मिशन के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि LVM3—जिसे इसकी क्षमता के कारण ‘बाहुबली’ रॉकेट भी कहा जाता है, अमेरिका की टेक्सास-आधारित कंपनी AST SpaceMobile द्वारा निर्मित किया गया है और इस उपग्रह को कक्षा में पहुंचाएगा। AST का लक्ष्य अंतरिक्ष आधारित मोबाइल ब्रॉडबैंड नेटवर्क तैयार करना है, जिससे दुनिया के दूरदराज इलाकों में भी सीधे मोबाइल डिवाइस तक हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंच सकेगा।</p>
<p>इसरो के चेयरमैन डॉ. वी. नारायणन ने इस मिशन के बारे में बताया कि यह सैटेलाइट अब तक का सबसे बड़ा कमर्शियल एंटीना लेकर जाएगा, जो वैश्विक संचार प्रणाली में क्रांति ला सकता है। उन्होंने कहा कि सफल प्रक्षेपण के बाद वहां भी नेटवर्क कवरेज मिलना शुरू हो जाएगा, जहां फिलहाल नेटवर्क कवरेज लगभग न के बराबर है। इसी बीच खबर समाने आ रही है कि अमेरिका द्वारा भारत पर कई उत्पादों पर उच्च टैरिफ लगाए जाने के बावजूद दोनों देशों का अंतरिक्ष सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। यह मिशन न केवल भारत की लॉन्चिंग क्षमताओं का प्रदर्शन करेगा, बल्कि वैश्विक सैटेलाइट बाजार में इसरो की पकड़ को भी और सशक्त करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/isros-65-tonne-blue-bird-6-to-be-launched-from-sriharikota/article-135633</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/leads/isros-65-tonne-blue-bird-6-to-be-launched-from-sriharikota/article-135633</guid>
                <pubDate>Thu, 11 Dec 2025 16:25:18 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-12/sri-harikota.png"                         length="678531"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सूर्य के रहस्यों को जानने के लिए चीन ने किया सैटेलाइट लांच</title>
                                    <description><![CDATA[उत्तर पश्चिमी चीन के जिउक्वान सैटेलाइट केन्द्र से एक सौर अन्वेषण उपग्रह को अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/china-launched-satellite-to-know-the-secrets-of-the-sun/article-25946"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-10/4_8423.jpg" alt=""></a><br /><p>जिउक्वान। चीन ने सूर्य के रहस्यों को जानने  के लिए उत्तर पश्चिमी चीन के जिउक्वान सैटेलाइट केन्द्र से एक सौर अन्वेषण उपग्रह को अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया। उन्नत अंतरिक्ष-आधारित सौर वेधशाला (एएसओ-एस) को लॉन्ग मार्च-2डी रॉकेट से सुबह 7 बजकर 43 मिनट (बीजिंग के समयानुसार) पर लॉन्च किया गया। प्रक्षेपण के बाद एएसओ-एस ने सफलतापूर्वक अपनी निर्धारित कक्षा में प्रवेश किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/world/china-launched-satellite-to-know-the-secrets-of-the-sun/article-25946</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/world/china-launched-satellite-to-know-the-secrets-of-the-sun/article-25946</guid>
                <pubDate>Sun, 09 Oct 2022 12:53:37 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-10/4_8423.jpg"                         length="97767"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        