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                <title>DMK - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>पुडुचेरी चुनाव: कांग्रेस और द्रमुक के बीच सीट बंटवारे पर फंसा पेंच, किन​-किन ने दाखिल किया नामांकन  </title>
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                        <![CDATA[पुडुचेरी विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन की अंतिम तिथि करीब है, लेकिन कांग्रेस और द्रमुक (DMK) के बीच सीट शेयरिंग पर सहमति नहीं बन पाई है। कांग्रेस 17 सीटों पर अड़ी है, जबकि द्रमुक पिछले प्रदर्शन के आधार पर अधिक हिस्सेदारी मांग रही है। गठबंधन में खींचतान के बीच कुछ उम्मीदवारों ने पर्चा दाखिल कर दिया है, जिससे राजनीतिक पारा गरमा गया है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/puducherry-elections-stuck-on-seat-sharing-between-congress-and-dmk/article-147149"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/poducherry.png" alt=""></a><br /><p>पुडुचेरी। पुडुचेरी में नौ अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 23 मार्च में अब केवल कुछ ही दिन बचे हैं, लेकिन इंडिया गठबंधन के दो प्रमुख घटक दलों कांग्रेस और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के बीच सीट बंटवारे को लेकर अभी तक कोई समझौता नहीं हो सका है। दोनों पार्टियां अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने की अपनी मांग पर अड़ी हुई हैं। कांग्रेस का कहना है कि केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में पार्टी को कुल 30 सीटों में से कम से कम 17 पर चुनाव लड़ना चाहिए। उसका बाकी 13 सीटें द्रमुक और अन्य सहयोगियों के लिए छोड़ने का प्रस्ताव है। द्रमुक 2021 के चुनावों में कांग्रेस से बेहतर प्रदर्शन और हालिया राजनीतिक समीकरणों के आधार पर अधिक सीटों की मांग कर रही है। द्रमुक की एक टीम राज्य संयोजक आर. शिवा के नेतृत्व में बातचीत के लिए चेन्नई रवाना हो गई है।</p>
<p><strong>कुछ नामांकन पत्र दाखिल हुए:</strong> सीट बंटवारा फाइनल न होने के बावजूद, बुधवार को द्रमुक उम्मीदवार अनिबल केनेडी, संपत और डॉ. नीतीश के साथ-साथ कांग्रेस के पूर्व विधायक अनंत रमन ने अपने नामांकन पत्र दाखिल कर दिए हैं। हालांकि, उन्होंने अभी तक आधिकारिक पार्टी फॉर्म (ए और बी) जमा नहीं किए हैं। अगर द्रमुक कांग्रेस को 17 सीटें देने पर सहमत हो जाती है, तो गठबंधन फौरन ही उम्मीदवारों की घोषणा कर सकता है। समझौता न होने की स्थिति में दोनों दल अकेले चुनाव लड़ने पर भी विचार कर रहे हैं। दूसरी ओर, सत्ताधारी  एनडीए ने अपना फॉर्मूला तय कर लिया है, जिसके तहत सत्तारूढ़ ऑल इंडिया एन आर कांग्रेस (एआईएनआरसी) 16 और भारतीय जनता पार्टी 14 सीटों पर चुनाव लड़ेगी।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Mar 2026 10:39:23 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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                <title>चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के एक दिन बाद पुडुचेरी में नामांकन प्रक्रिया शुरू, जानिए कब होगा मतदान और कब आएगा रिजल्ट</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[पुडुचेरी की 30 सीटों पर 9 अप्रैल को होने वाले चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू हो गई है। चुनाव आयोग द्वारा त्वरित कार्यक्रम घोषित करने से गठबंधन और टिकट बंटवारे के लिए दलों के पास मात्र एक सप्ताह का समय है। इस बार एनआर कांग्रेस-भाजपा गठबंधन, कांग्रेस-द्रमुक, और विजय की टीवीके के बीच कड़ा मुकाबला होने की उम्मीद है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/nomination-process-starts-in-puducherry-a-day-after-the-announcement/article-146774"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/pondichary.png" alt=""></a><br /><p>पुडुचेरी। चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के एक दिन बाद पुडुचेरी विधानसभा की 30 सीटों पर नौ अप्रैल को होने वाले एकल चरण के चुनावों के लिए नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया सोमवार से शुरू हो गयी। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 23 मार्च है और अगले दिन दस्तावेजों की जांच की जायेगी। नाम वापसी की अंतिम तिथि 26 मार्च है और मतदान 9 अप्रैल को होगा। मतगणना 4 मई को होगी और पूरी चुनाव प्रक्रिया 6 मई को संपन्न हो जाएगी। यह शायद राजनीतिक दलों को दिया गया अब तक का सबसे कम समय वाला कार्यक्रम है। गठबंधन को अंतिम रूप देने और उम्मीदवारों की घोषणा करने के लिए प्रत्येक पक्ष के पास महज एक हफ्ते का समय है।</p>
<p>चुनाव आयोग ने निगरानी बढ़ाई केंद्र शासित प्रदेश में चुनाव के लिए आदर्श आचार संहिता तत्काल प्रभाव से लागू होने के साथ ही चुनाव आयोग ने निगरानी बढ़ा दी है और धन की आवाजाही पर नजर रख रहा है। अधिकारियों ने कहा कि संबंधित वैध दस्तावेजों के साथ कितनी भी राशि ले जाने पर कोई रोक नहीं है। यदि पैसे के स्रोत की पहचान करने के लिए कोई वैध दस्तावेज नहीं मिलता है, तो उसे जब्त कर लिया जाएगा। पुडुचेरी विधानसभा चुनावों के इतिहास में यह पहली बार है कि चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के ठीक एक दिन बाद नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू हुई है। </p>
<p>आम तौर पर राजनीतिक दलों को अपनी गठबंधन रणनीति और सीट बंटवारे को अंतिम रूप देने, चुनाव क्षेत्रों की पहचान करने और उम्मीदवारों की घोषणा करने के लिए कम से कम एक सप्ताह या 10 दिन का समय दिया जाता है। लेकिन इस बार कोई अतिरिक्त समय नहीं दिया गया और पहली बार नामांकन प्रक्रिया तुरंत शुरू हो गयी, जिससे राजनीतिक दलों को तेजी से काम करने और कमर कसने को मजबूर होना पड़ा है।</p>
<p>मुख्य रूप से चार पक्ष आमने-सामने पुडुचेरी के इस चुनावी रण में मुख्य रूप से चार पक्ष आमने-सामने हैं। एक तरफ मुख्यमंत्री एन रंगासामी के नेतृत्व वाली ऑल इंडिया एनआर कांग्रेस (एआईएनआरसी), भारतीय जनता पार्टीऔर एआईएडीएमके(अन्नाद्रमुक) का राजग गठबंधन है, जिसमें इस बार जोस चार्ल्स मार्टिन की नयी पार्टी लक्ष्य जननायक कच्छी (एलजेके) भी शामिल हुई है।</p>
<p>दूसरी ओर कांग्रेस और द्रमुक का गठबंधन है, जहां दोनों दल नेतृत्व और सीटों के बंटवारे को लेकर आपस में उलझे हुए हैं। इन पारंपरिक गठबंधनों के अलावा, अभिनेता से नेता बने विजय की नयी पार्टी तमिझगा वेत्री कड़गम (टीवीके) पहली बार चुनावी मैदान में उतरकर चर्चा का केंद्र बनी हुई है, जबकि अभिनेता-निर्देशक सीमन की नाम तमिझर कच्छी (एनटीके) हमेशा की तरह अकेले चुनाव लड़ रही है। इनके साथ ही मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी भी तीन सीटों पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही है। इससे राज्य का चुनावी मुकाबला काफी दिलचस्प और कड़ा हो गया है।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Mar 2026 12:14:15 +0530</pubDate>
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                <title>संसद की कार्रवाई से पहले विपक्षी दलों के नेताओं ने की संसद भवन परिसर में महत्वपूर्ण बैठक, इन मुद्दों पर सरकार को घेरने की तेयारी, जानें कौन कौन रहा मौजूद?</title>
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                        <![CDATA[संसद सत्र से पहले इंडिया गठबंधन नेताओं की खड़गे के कार्यालय में बैठक हुई। राहुल गांधी समेत नेताओं ने सदन की रणनीति पर चर्चा की।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/before-the-proceedings-of-parliament-leaders-of-opposition-parties-held/article-142411"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(4)7.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। संसद की कार्यवाही शुरू होने से पहले विपक्षी इंडिया गठबंधन के नेताओं की सोमवार को यहां संसद भवन परिसर में राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के ऑफिस में बैठक हुई।</p>
<p>खड़गे की अध्यक्षता में हुई बैठक में इंडिया गठबंधन की विभिन्न पार्टियों के संसदीय दल के नेताओं ने हिस्सा लिया और संसद में अपनी रणनीति को लेकर विचार विमर्श किया। </p>
<p>बैठक में खड़गे के अलावा लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, द्रमुक के टीआर बालू, समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव तथा रामगोपाल यादव, आरएसपी के एन के प्रेमचंद्रन, शिवसेना उद्धव गुट के संजय राउत सहित कई दलों के नेता उपस्थित थे।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Mon, 09 Feb 2026 13:03:52 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>करुर भगदड़ मामला: कड़ी सुरक्षा के बीच टीवीके प्रमुख विजय पहुंचे सीबीआई मुख्यालय, पूछताछ जारी</title>
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                        <![CDATA[करूर भगदड़ जांच में टीवीके प्रमुख अभिनेता विजय कड़ी सुरक्षा के बीच सीबीआई के सामने पेश हुए। एजेंसी रैली में सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण और लापरवाही की भूमिका की जांच कर रही है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/karur-stampede-case-tvk-lead-actor-vijay-reaches-cbi-headquarters/article-139292"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/actor-vijay-on-karur-stampede.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। तमिलनाडु के राजनीतिक दल तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) के प्रमुख और प्रसिद्ध तमिल अभिनेता विजय, कड़ी सुरक्षा के बीच सोमवार को 'करूर भगदड़' मामले में पूछताछ के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के समक्ष पेश हुए जहाँ जांच टीम ने उनसे पिछले साल हुई उस दुखद घटना के बारे में विस्तार से पूछताछ की। सीबीआई ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 179 के तहत नोटिस जारी कर अभिनेता विजय को जांच में शामिल होने के लिए राष्ट्रीय राजधानी बुलाया था। जांच एजेंसी इस बात की पड़ताल कर रही है कि रैली के दौरान सुरक्षा मानकों और भीड़ नियंत्रण के उपायों का पालन किया गया था अथवा नहीं।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि, पिछले साल 27 सितंबर को तमिलनाडु के करूर में अभिनेता विजय की एक बड़ी राजनीतिक रैली के दौरान अचानक भगदड़ मच गई थी। इस हादसे में 41 लोगों की मौत हो गई थी और 60 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसकी जांच सीबीआई को सौंपी गई थी।</p>
<p>तमिलनाडु पुलिस ने दावा किया कि अभिनेता विजय के करूर रैली में देरी से पहुंचने की वजह से भगदड़ मची। बहुत ज्यादा देरी के कारण भीड़ बेकाबू हो गई। पुलिस ने भगदड़ की वजह भीड़, अपर्याप्त व्यवस्थाओं जैसे भोजन, पीने के पानी और सैनिटरी सुविधाओं की कमी को भी बताया। लेकिन अभिनेता विजय ने इन आरोपों का जोरदार खंडन करते हुए इन्हें राजनीति से प्रेरित बताया और सत्ताधारी द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) पर बदनामी का अभियान चलाने का आरोप लगाया। </p>
<p>अभिनेता विजय ने उल्टे पुलिस पर अव्यवस्था का आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस ने प्रवेश वाली जगहों पर भीड़ प्रबंधन में गंभीर गलतियाँ की, जिससे भगदड़ मची और लोगों की जान चली गयी। शुरुआत में, मद्रास उच्च न्यायालय ने त्रासदी से पहले की घटनाओं की जांच के लिए एक विशेष जांच दल का गठन किया था। बाद में उच्चतम न्यायालय ने इस मामले को अपने हाथ में ले लिया, और सीबीआई को एक सेवानिवृत्त उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली समिति की देखरेख में जांच करने का निर्देश दिया। </p>
<p>तमिलनाडु सरकार के पहले नियुक्त किए गए एकल-सदस्यीय जांच आयोग को भी शीर्ष अदालत ने पलट दिया, जिसने तय किया कि इस मामले में अधिक निष्पक्ष और विश्वसनीय जांच की आवश्यकता है। खास बात यह है कि विजय की पार्टी टीवीके ने भी इस घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की थी।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Mon, 12 Jan 2026 13:24:08 +0530</pubDate>
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                <title>करुणानिधि पर स्मारक सिक्का जारी करने पर स्टालिन ने केंद्र को दिया धन्यवाद </title>
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                        <![CDATA[स्टालिन ने कहा कि करुणानिधि ने अपने 95 साल लंबे करियर और 81 साल के सार्वजनिक जीवन में राजनीतिक, प्रशासनिक, कला, साहित्य, फिल्म उद्योग और पत्रकारिता के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर प्रभाव डाला है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/stalin-thanks-center-for-releasing-commemorative-coin-on-karunanidhi/article-87863"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/photo-size-(3)15.png" alt=""></a><br /><p>चेन्नई। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एवं सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कडग़म (द्रमुक) के अध्यक्ष एम के स्टालिन ने पांच बार राज्य के मुख्यमंत्री रहे द्रमुक संरक्षक एम करुणानिधि की जयंती के उपलक्ष्य में सिक्का जारी करने की घोषणा के लिए केंद्र को धन्यवाद दिया।</p>
<p>स्टालिन ने यहां एक बयान में कहा कि करुणानिधि के पुत्र के रूप में और आप लोगों में से एक मैं उनकी छवि वाला सिक्का जारी करने के लिए भारत की केंद्र सरकार के प्रति अपना आभार व्यक्त करता हूं। यह सिक्का भावी पीढ़ियों के लिए प्रकाश स्तंभ, हमारे अमर कलाकार के प्रसिद्धि रूपी ताज में एक और हीरा है।</p>
<p>स्टालिन ने कहा कि करुणानिधि की जन्म शताब्दी के उपलक्ष्य में जारी किये गये 100 रुपये के सिक्का पर मुथामिझारिंगर (इस नाम से करुणानिधि को प्यार से बुलाया जाता था) का चित्र और उनकी लिखावट में 'तमिल वेल्लम' (तमिल जीतेगा) अंकित है।</p>
<p>गौरतलब है कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शहर में आयोजित एक कार्यक्रम में 100 रुपये का सिक्का जारी करेंगे। स्टालिन ने कहा कि यह सभी के लिए खुशी और गर्व का क्षण होगा।</p>
<p>उन्होंने कहा कि पांच बार मुख्यमंत्री रहने के दौरान आधुनिक तमिलनाडु का निर्माण करने वाले वास्तुकार की जन्म शताब्दी पर तमिलनाडु सरकार की ओर से हर जिले में कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने मदुरै में मल्टी-स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, सेंटेनरी लाइब्रेरी, चेन्नई के पास किलांबक्कम बस टर्मिनल के निर्माण की ओर भी इशारा किया, जिसका नाम करुणानिधि के नाम पर रखा गया है।</p>
<p>स्टालिन ने बताया कि केंद्र सरकार की ओर से करुणानिधि  के सम्मान में शहर के कलैवनार आरंगम में एक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि संसद में किसी नेता की मृत्यु पर शोक प्रस्ताव केवल करुणानिधि के लिए पारित किया गया था, जबकि वह संसद के किसी भी सदन के सदस्य नहीं थे।</p>
<p>स्टालिन ने कहा कि करुणानिधि ने अपने 95 साल लंबे करियर और 81 साल के सार्वजनिक जीवन में राजनीतिक, प्रशासनिक, कला, साहित्य, फिल्म उद्योग और पत्रकारिता के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर प्रभाव डाला है।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 16 Aug 2024 14:13:16 +0530</pubDate>
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                <title>सतरंगी सियासत</title>
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                        <![CDATA[ जब यह तय हो गया कि कांग्रेसनीत आईएनडीआइए के घटक दल केन्द्र में सत्ता की दावेदारी फिलहाल नहीं करेंगे। और सही समय का इंतजार करेंगे। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/india-gate/colorful-politics/article-81018"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/india-gate031.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>असर...</strong><br />आम चुनाव- 2024 के परिणाम का असर एक अलग तरीके का भी। जिन क्षेत्रीय दलों की कभी अपने प्रदेशों में कभी तूती बोलती थी। इस बार उनका एक भी सांसद लोकसभा में नहीं होगा। इसमें ओडिशा की बीजद, तेलंगाना की बीआरएस, तमिलनाडु की एआईएडीएमके और जम्मू-कश्मीर की पीडीपी इस बार गायब हो गई। कभी पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने कहा था। अनुच्छेद- 370 खत्म किया। तो घाटी में कोई तिरंगा उठाने वाला नहीं मिलेगा। लेकिन आज उनकी पार्टी को ढोने वाला कोई नहीं बचा। हां, इस बार खालिस्तानी अमृतपाल सिंह पंजाब की खडूर साहिब से सांसद चुना गया। तो फरीदकोट से सरबजीत सिंह भी जीत गया। जो पूर्व पीएम इंदिरा गांधी की हत्या करने वाले बेअंत सिंह का बेटा। और एक अलगाववादी नेता राशिद इंजीनियर भी। जो जम्मू-कश्मीर की बारामूला सीट से सफल रहा। राशिद पर टेरर फंडिंग का आरोप और आजकल तिहाड़ जेल में।</p>
<p><strong>दक्षिण में एंट्री...</strong><br />केन्द्र में लगातार तीसरी बार सत्तारूढ़ हुई भाजपा केरल में एक, आंध्रप्रदेश में तीन, तेलंगाना में आठ और कर्नाटक में 17 सीटें जीतकर दक्षिण में प्रभावशानी मौजूदगी दर्ज करवागी। हां, तमिलनाडु में कोई सीट नहीं जीत सकी। लेकिन अपना मत 16 फीसदी तक बढ़ा लिया। जो सत्ताधारी डीएमके लिए के लिए 2026 में होने वाले विधानसभा चुनाव में परेशानी का सबब होगा। अब कहा जा रहा। भाजपा ने यदि एआईएडीएमके के ओपीएस गुट के साथ ही ईपीएस गुट से मिलकर चुनाव लड़ा होता। तो शायद तस्वीर आंध्रप्रदेश जैसी बन सकती थी। खैर, अब जो होना था। वह हो गया। लेकिन भाजपा की दक्षिण में मानी जानी वाली कमजोर कड़ी अब लगातार मजबूत हो रही। क्योंकि तेलंगाना में वह प्रमुख विपक्षी दल बनने की राह पर। तो आंध्रप्रदेश में अब सत्ता में भागीदार भी। वहीं, केरल में अब भाजपा के तीसरी ताकत होकर उभरने की उम्मीद।  </p>
<p><strong>गतिरोध का इंतजाम</strong><br />जब यह तय हो गया कि कांग्रेसनीत आईएनडीआइए के घटक दल केन्द्र में सत्ता की दावेदारी फिलहाल नहीं करेंगे। और सही समय का इंतजार करेंगे। तो राहुल गांधी एवं उनके रणनीतिकार मुंबई शेयर बाजार में हुए उतार-चढाव का मामले ले आए। मतलब जैसे ही 18 वीं लेकसभा की कार्यवाही शुरू होगी। विपक्ष का हंगामे के लिए मुद्दा तैयार। यानी कांग्रेस ने शेयर बाजार के बहाने संसद में गतिरोध का इंतजाम कर लिया। सो, 18वीं लोकसभा का पहला ही सत्र हंगामेदार होने के आसार। इससे पहले पेगासस, हिंडनबर्ग रिपोर्ट और मणिपुर हिंसा जैसे मामलों में विपक्ष जेपीसी की मांग कर चुका। सो, इस मामले में भी जेपीसी से जांच की मांग। वैसे सरकार मानेगी नहीं। लेकिन पीएम मोदी को यह अहसास करवाने की तरकीब कि इस बार विपक्ष मजबूत। और उन्हें पूरे समय घेरे रहेगा। हालांकि इसके लिए पीएम मोदी और उनके साथी तैयार होंगे ही।</p>
<p><strong>पेंच बाकी</strong><br />भले ही आइएनडीआए में सब कुछ सामान्य लग रहा। लेकिन पेंच अभी बाकी। नेता प्रतिपक्ष और संयोजक की जिम्मेदारियां कांग्रेस के पास रहने वाली। लेकिन शरद पवार जैसे नेता इतनी आसानी से कहां मानने वाले? सपा, टीएमसी, डीएमके, शिवसेना-यूबीटी गठबंधन में आखिर कुछ तो चाहेंगी। इस बार गैर भाजपा और गैर कांग्रेस दलों के करीब 200 सांसद। और इनमें से कई सांसद ऐसे। जो कभी भाजपा और कांग्रेस के साथ गठबंधन में रह चुके। सो, वह इनकी कार्यप्रणाली से परिचित। यह भी सही कि ज्यादातर दल या नेता वहीं जाते। जहां ज्यादा राजनीतिक लाभ हो। ऐसे में आशंका। क्या भाजपा और कांग्रेस इनको पांच साल बांधीे रख पाएंगी? इसीलिए मल्लिकार्जुन खडगे सही समय पर सही कदम उठाने की बात कह गए। वहीं, भाजपा ने भी एनडीए की क्षमता 293 से 300 से ज्यादा संख्या यूं ही नहीं कर ली। मतलब घर को भी साधना होगा।</p>
<p><strong>उलझन बाकी...</strong><br />उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र एवं पश्चिम बंगाल ऐसे राज्य। जहां क्षेत्रीय दल मजबूत। सो, आइएनडीआइए में अब एक नई उलझन! कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों को एक दूसरे का साथ तो चाहिए। लेकिन इतना भी नहीं कि कांग्रेस क्षेत्रीय दलों से हक मांगने लगे। क्योंकि महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव। जबकि पश्चिम बंगाल में दो साल बाद। ऐसे में क्षत्रप कतई नहीं चाहेंगे कि कांग्रेस उनसे अधिक सीटों की मांग करे। सो, फिलहाल आइएनडीआइए गठबंधन के घटक दल खुश हों। लेकिन कांग्रेस की बढती राजनीतिक जमीन। उनके लिए भी खतरा पैदा कर रही। सत्ता चलाना और उसमें बने रहना। कांग्रेस को खूब आता। महाराष्ट्र में अब कांग्रेस ज्यादा हिस्सा मांगेगी। जो शरद पवार और उद्धव ठाकरे के लिए मुश्किल का सबब। जबकि यूपी में तो मानो घमासान की संभावना रहेगी। कांग्रेस, सपा से ज्यादा सीटें चाहेगी। जबकि सपा इससे बचेगी। तो कैसे बात आगे बढे़गी? यह देखना दिलचस्प!</p>
<p><strong>नई सरकार...</strong><br />नरेन्द्र मोदी की अगुवाई में एनडीए गठबंधन सरकार का शपथग्रहण समारोह हो चुका। अब बारी काम करने की। इस बार पीएम मोदी क्षत्रपों पर निर्भर। उन पर दबाव होने का अंदेशा जताया जा रहा। क्योंकि मोदीजी ने कभी गठबंधन सरकार नहीं चलाई। जबकि भाजपा की ओर से लगातार कहा जा रहा। गठबंधन सरकार भी आसानी से चलेगी और मोदीजी भी उसी गति एवं दिशा से काम करेंगे। जैसा पिछले दस साल से करते आ रहे। लेकिन जानकार विश्वास नहीं कर पा रहे। तो सबसे पहली परीक्षा मंत्रिपरिषद का गठन। जिसमें जो नाम शामिल हुए। वह अपने आप में संकेत और संदेश। हां, सरकार की विदेश नीति में बहुत बदलाव नहीं आएगा। ऐसे ही रक्षा क्षेत्र एवं आंतरिक सुरक्षा की नीति भी वैसे ही चलेगी। फिर यह भी कोई नहीं चाहेगा कि देश के ढांचागत विस्तार ने जो गति पकड़ी हुई। उसमें कोई बाधा उत्पन्न हो।</p>
<p><strong>अब आगे...</strong><br />अगले छह माह नरेन्द्र मोदी की अगुवाई वाली एनडीए सरकार के लिए महत्वपूर्ण। जिसमें खुद मोदीजी सहज रहेंगे या उनकी चुनौतियां बढ़ेंगी। यह तय हो जाएगा। असल में, इसी साल अक्टूबर-नवंबर में महाराष्ट्र, झारखंड एवं हरियाणा जैसे राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले। इसी के साथ केन्द्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में भी विधानसभा चुनाव की संभावनाएं। चुनाव आयोग ने इसकी तैयारियां भी शुरू कर दीं। ऐसे में, खासकर महाराष्ट्र एवं हरियाणा में भाजपा सफल रही। तो पीएम मोदी मजबूत होंगे। नहीं तो माना जा रहा। सहयोगी दलों के उन पर हावी होने की संभावना। फिर तो केन्द्र की सरकार भी पूरे रूआब से चला पाना मुश्किल होगा। वहीं, एक बार निचले सदन में बहुमत साबित कर देने के बाद अविश्वास प्रस्ताव लाने की मियाद भी पूरी हो जाती। ऐसे में, इस साल के अंत तक मोदी सरकार की मजबूती कितनी? यह भी तय हो जाएगा!    </p>
<p><strong>दिल्ली डेस्क</strong><br /><strong>(ये लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>]]>
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                                                            <category>इंडिया गेट</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Jun 2024 12:20:15 +0530</pubDate>
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                <title>सतरंगी  सियासत</title>
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                        <![CDATA[देश का सबसे बड़ा सूबा उत्तर प्रदेश। उसमें भी प्रमुख विपक्षी सपा और उसके अध्यक्ष अखिलेश यादव का मानो सब कुछ दांव पर।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/india-gate/colorful-politics/article-78641"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/india-gate.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>सब कुछ दांव पर</strong><br />आम चुनाव- 2024 का परिणाम बहत कुछ संकेत और संदेश छोड़कर जाएगा। देश का सबसे बड़ा सूबा उत्तर प्रदेश। उसमें भी प्रमुख विपक्षी सपा और उसके अध्यक्ष अखिलेश यादव का मानो सब कुछ दांव पर। देश के दिग्गज समाजवादी नेता रहे मुलायम सिंह यादव के पुत्र अखिलेश यूपी का सीएम पद संभालने के बाद से लगातार चार बार चुनाव हार चुके। विधानसभा चुनाव 2017 और 2022 एवं लोकसभा चुनाव 2014 और 2019 में भी पिछड़ चुके। इनमें अखिलेश प्रभावशाली प्रदर्शन नहीं कर पाए। अब पांचवें चुनाव में भी कोई बहुत अवसर नजर नहीं आ रहा। कांग्रेस से गठजोड़ इसकी बानगी। फिर उनकी चाचा शिवपाल यादव से पटरी बैठती नहीं। जबकि वह सपा की मुलायम सिंह के जाने के बाद मानो रीढ़। लेकिन अखिलेश ने उन्हें पूरे समय साइड में रखा। ऐसे में यदि अखिलेश यादव लगातार पांचवां चुनाव हारे। तो क्या होगा? यह समय बताएगा।</p>
<p><strong>किस किसकी बारी?</strong><br />आम चुनाव- 2024 कई क्षेत्रीय दलों या क्षत्रपों के लिए अवसान का अवसर भी संभव। कई दल लगातार निचले पायदान पर जाते जा रहे। सो, इनकी वंशवादी, परिवारवादी एवं व्यक्तिवादी राजनीति पर खतरा। हां, राजद के तेजस्वी यादव ऐसे नेता। जिन्होंने लालू यादव की राजनीतिक विरासत को ठीक से संभाला हुआ। बाकी कई नए राजनीतिक माहौल में संघर्ष कर रहे। बात चाहे बीआरएस के केसीआर की हो या बीजेडी के नवीन पटनायक। जदयू के नीतीश कुमार, एनसीपी के शरद पवार और शिवसेना (यूबीटी) के उद्धव ठाकरे इसी संभावना से जूझ रहे। फिर जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद- 370 हटने के बाद एनसी के उमर अब्दुल्ला और पीडीपी की महबूबा मुफ्ती महबूबा के राजनीतिक भविष्य का क्या होगा? वहीं, दक्षिण के तमिलनाडु में राजनीति तेजी से करवट ले रही। जयललिता की एआईडीएमके आंतरिक झगड़े से जूझ रही। तो डीएमके को नंबर एक राजनीतिक दुश्मन भाजपा नजर आ रही।</p>
<p><strong>अपनी राह</strong><br />बसपा की अपनी राजनीति और गति। मायावती से आगे दूर तक देख रहीं। भले ही आज राजनीतिक जानकार उनका घाटा बता रहे हों। लेकिन मायावती की नजर भविष्य पर। इसीलिए भतीजे आकाश आनंद को आगे भी किया। लेकिन कुछ मामला गड़बड़ा गया। इसीलिए उन्हें फिलहाल फ्री भी कर दिया। बसपा प्रमुख मायावती की राजनीति टर्निंग पाइंट पर। यूपी में उनकी नजर कांग्रेस के दलित और सपा का मुस्लिम वोट पर। यानी त्रिकोणिय मुकाबले में भाजपा की जीत की संभावना ज्यादा। इसीलिए सपा और कांग्रेस, मायावती की बसपा पर हमलावर भी। लेकिन उनकी अपनी रणनीति और राजनीतिक गुणा भाग। जब यूपी में सपा और कांग्रेस कमजोर होंगी। तो भाजपा के सामने बसपा ही होगी। और इसी में मायावती अगली पीढ़ी के लिए अवसर देख रहीं। आकाश आनंद को उसी के लिए तैयार किया जा रहा। लेकिन प्रदेश की जनता का मूड इस चुनाव में मालूम पड़ेगा।</p>
<p><strong>संकेत और संदेश</strong><br />श्रीनगर संसदीय क्षेत्र में इस बार मतदान का 28 साल पुराना रिकार्ड टूट गया। साल 1996 में 41 तो इस बार 38 फीसदी मतदान हुआ। भाजपा इसे अनुच्छेद- 370 खत्म होने का असर बता रही। जिसे शांतिपूर्ण माहौल और अच्छी कानून व्यवस्था से भी जोड़कर देखा जा रहा। लेकिन सीमा पार गुलाम कश्मीर में हालात इसके एकदम उलट। वहां पाक फौज के खिलाफ बगावत जैसे हालात। धरना-प्रदर्शन एवं नारेबाजी भी ठीक उसी दिन। जिस दिन श्रीनगर में मतदान हो रहा था। इसकी जानकारी पूरी दुनियां तक पहंच रही। याद रहे, भारत के रक्षा और विदेश मंत्री कश्मीर को भारत में मिलाए जाने की बात एकदम स्पष्ट कह चुके। अब यह घटनाक्रम महज संयोग या फिर कुछ और? लेकिन गुलाम कश्मीर ने दुनियाभर का ध्यान जरुर खींच लिया। आनन-फानन में पाक सरकार द्वारा 700 करोड़ की मदद की घोषणा की गई। मतलब हालात काबू से बाहर।</p>
<p><strong>रूस की एंट्री</strong><br />देश के आम चुनाव में पाक का जिक्र न हो। तो चुनाव ही क्या? लेकिन अब रूस की भी एंट्री। इसका जिक्र किया अरविंद केजरीवाल ने। जो इन दिनों सुप्रीम कोर्ट की जमानत पर। उन्होंने रूसी राष्ट्रपति पुतिन का जिक्र करके चुनावी तड़का तो लगा ही दिया। इससे पहले अमरीका पर आरोप। वह भारतीय चुनाव प्रक्रिया में दखलंदाजी कर रहा। इसके बाद अमरीका बैक फुट पर। वैसे बात पाक तक तो ठीक। लेकिन रूस के जिक्र से विदेशी संबंधों पर भी असर संभव। लेकिन विपक्षी नेता जिस तरह से पीएम मोदी पर हमला कर रहे। इसे क्या कहा जाए? चुनावी रस्म या अगला संदेश? और वह क्या? पीएम मोदी सभी पर भारी पड़ रहे? लेकिन एक बात। इस बार का चुनाव। कई नेताओं एवं दलों के लिए राजनीतिक अस्तित्व का सवाल। हारे तो वह मानकर चल रहे। राजनीति की रिंग से बाहर जाने का खतरा!</p>
<p><strong>विपक्ष का नजरिया!</strong><br />आम चुनाव का पांचवां चरण कल। लेकिन विपक्ष अभी भी यही दावा कर रहा कि एनडीए 400 पार नहीं करेगा। साथ में विपक्ष जोड़ रहा। यदि 400 सीटें पार हुईं। तो देश का संविधान और आरक्षण व्यवस्था को खत्म कर दिया जाएगा। इसी की काट में पीएम मोदी ने बोला। यदि कांग्रेस सत्ता में आई। तो ओबीसी का आरक्षण काटकर मुस्लिम समाज को दे दिया जाएगा। कर्नाटक इसका उदाहरण। रही सही कसर सलमान खुर्शीद की भतीजी ने वोट जेहाद का जिक्र करके कर दिया। इसके बाद कांग्रेस बैकफुट पर। इसके बावजूद विपक्ष और कांग्रेस यह नहीं बता रहे कि खुद उनकी कितनी सीटे आएंगी। अब तो ममता बनर्जी भी बोल गईं। इंडिया गठबंधन सत्ता में आया। तो टीएमसी उसे बाहर से समर्थन देगी। इसी, बीच पीओजेके में महंगाई को लेकर प्रदर्शन। तो इधर, देश में सीएए के तहत नागरिकता देने का कार्यक्रम शुरू हो गया।</p>
<p><strong>केजरीवाल मौन!</strong><br />अरविंद केजरीवाल राजनीतिक और कानूनी भंवर में। स्वाति मालीवाल के साथ सीएम आवास में मारपीट क्या हुई। केजरीवाल एकदम मौन हो गए। बाद में आप सांसद संजय सिंह नमूदार हुए। कहा, मालीवाल के साथ अभद्रता हुई। दोषी के खिलाफ कार्रवाई होगी। उन्होंने मालीवाल के घर जाकर उनका हालचाल जाना। लेकिन सवाल केजरीवाल का। उनसे न उगलते बन रहा और न निगलते। फिर उनके खास सिपहसालार विभव कुमार जेल पहुंच चुके। इधर, माहौल आम चुनाव का। अभी दिल्ली और पंजाब में मतदान बाकी। कहीं, यह सब आम आदमी पार्टी में अंदरखाने की ही तो कोई खदबदाहट तो नहीं? क्योंकि केजरीवाल को वापस जेल भी जाना। उससे पहले राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से आगे बढ़ रहा। आप सांसद राघव चढ्ढा की लंदन से अचानक स्वदेश वापसी। इसकी स्पष्ट बानगी। फिर सर्वोच्च न्यायालय भी कह चुका। अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री पद पर रहेंगे या नहीं। यह उप-राज्यपाल को तय करना।</p>
<p><strong>-दिल्ली डेस्क</strong><br /><strong>(ये लेखक के अपने विचार है)</strong><br /><br /></p>]]>
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                                                            <category>इंडिया गेट</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 May 2024 12:18:21 +0530</pubDate>
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                <title>DMK को कोई काम नहीं करना है, हमारी स्कीम पर लगाते हैं अपना स्टीकर: PM मोदी</title>
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                        <![CDATA[मोदी ने कहा कि कौन नहीं जानता कि ये लोग (द्रमुक) हमारी (केंद्र) योजनाओं पर अपना स्टिकर लगाते हैं। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/dmk-should-not-do-some-work-modi-is-ready-to/article-71394"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-02/transfer-(6)14.jpg" alt=""></a><br /><p>तिरुनेलवेली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तमिलनाडु की द्रविड मुनेत्र कषगम (द्रमुक) सरकार पर तीखा हमला करते हुए बुधवार को कहा कि राज्य सरकार  कोई काम नहीं करती, लेकिन झूठा श्रेय लेने के लिए तैयार रहती है।</p>
<p>मोदी ने तिरुनेलवेली में एक सार्वजनिक बैठक को संबोधित करते हुए कहा, '' कौन नहीं जानता कि ये लोग (द्रमुक) हमारी (केंद्र) योजनाओं पर अपना स्टिकर लगाते हैं। अब तो उन्होंने हद कर दी है। उन्होंने तमिलनाडु में इसरो लॉन्च पैड का श्रेय लेने के लिए चीन के स्टिकर चिपकाए हैं। वे भारत की अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी की प्रगति को देखने के लिए तैयार नहीं हैं और आपके द्वारा भुगतान किए जाने वाले कर से  इन्होंने विज्ञापन दिए हैं और इसमें भारत के अंतरिक्ष की तस्वीर भी शामिल नहीं की है।"</p>
<p>उन्होंने कहा,'' यह लोग दुनिया के सामने हमारे देश को अंतरिक्ष के क्षेत्र में मिली सफलता को साझा नहीं करना चाहते हैं। इन्होंने हमारे वैज्ञानिकों, अंतरिक्ष क्षेत्र और देश के करदाता का अपमान किया है और अब समय आ गया है कि द्रमुक को इसके लिए सजा दी जाए।"</p>
<p>मोदी ने केंद्र की योजनाओं को राज्य में लागू करने के लिए जरूरी सहयोग भी न करने का आरोप द्रमुक सरकार पर लगाया। उन्होंने कहा कि ऐसी पार्टियां केवल अपने परिवारों के लिए काम करती हैं। अगर इनसे पूछा जाए कि विकास के लिए आप क्या कर सकते हैं तो इनके पास कोई जवाब नहीं होगा लेकिन अगर इनसे पूछे कि द्रमुक का अगला अध्यक्ष कौन होगा तो यह तपाक से उत्तर दे देंगे।</p>
<p>मोदी ने कहा, ''द्रमुक जैसी पार्टियां देश के लिए नहीं बल्कि अपने परिवार के लिए काम करती हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि इस राज्य की जनता ऐसी पार्टी को सत्ता से उखाड़ फेकेगी जो केवल अपने परिवार के हित के लिए काम करती है। द्रमुक केवल विभाजनकारी राजनीति में रूचि रखती है।द्रमुक और कांग्रेस देश को बांटने पर तुले हुए हैं, जबकि भाजपा हर व्यक्ति को परिवार का सदस्य मानती है।"</p>
<p>उन्होंने ने कहा कि भारत ने अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा का जश्न मनाया। कुछ दिन पहले जब संसद में इसे लेकर एक प्रस्ताव पारित किया गया तो दुमक के सभी सदस्य सदन छोड़कर चले गये। यह व्यवहार दिखाता है कि द्रमुक नेता लोगों की आस्था का कितना तिरस्कार करते हैं।</p>]]>
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                <pubDate>Wed, 28 Feb 2024 16:28:30 +0530</pubDate>
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                <title>एकता का शक्ति प्रदर्शन</title>
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                        <![CDATA[ खड़गे ने अपने बयान में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते थे कि वह अकेले ही पूरे विपक्ष पर भारी है लेकिन अब वह खुद को शायद कमजोर महसूस कर रहे हैं।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/show-of-unity/article-52075"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/1-(1)4.png" alt=""></a><br /><p>एजेंसी/बेंगलुरु। 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले विपक्षी दल गठबंधन की कोशिश में मंगलवार को एकजुट हो रहे हैं। कांग्रेस नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी विपक्षी दलों की दो दिवसीय बैठक में भाग लेने के लिए पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ सोमवार को यहां पहुंचे। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार तथा पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने उनका स्वागत किया। इस बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, सपा प्रमुख अखिलेश यादव, रालोद नेता जयंत सिंह, दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल, राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव, द्रमुक अध्यक्ष एवं तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन, और एमडीएमके महासचिव वाइको भी यहां पहुंचे। सोमवार को कांग्रेस की ओर से विपक्ष के नेताओं को डिनर पर इनवाइट किया है। कांग्रेस पार्टी के मुताबिक, इसमें 26 दल के नेता शामिल हुए हैं।<br /><br /><strong>खुद को कमजोर महसूस कर रहे मोदी: खड़गे</strong><br />इससे पहले खड़गे ने अपने बयान में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते थे कि वह अकेले ही पूरे विपक्ष पर भारी है लेकिन अब वह खुद को शायद कमजोर महसूस कर रहे हैं इसलिए आम चुनाव के मद्देनजर उन दलों को भी साथ जोड़ने की कोशिश में हैं जिनको पहले महत्वहीन समझकर किनारे कर दिया गया था। हैरानी की बात यह है कि भारतीय जनता पार्टी को अचानक वैचारिक रूप से विरोधी पार्टियों का गठबंधन बनाने की जरूरत महसूस हुई है।</p>]]>
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                <pubDate>Tue, 18 Jul 2023 10:01:30 +0530</pubDate>
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                <title>दूसरी बार द्रमुक के अध्यक्ष बने स्टालिन</title>
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                        <![CDATA[परिषद में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए पार्टी सांसद कनिमोझी को पदोन्नत करके पार्टी की उप महासचिव बनाया गया है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/stalin-becomes-dmk-president-for-the-second-time/article-25965"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-10/index7.jpg" alt=""></a><br /><p>चेन्नई। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन रविवार को द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (द्रमुक) के दूसरी बार अध्यक्ष चुने गए। द्रमुक महापरिषद ने सर्वसम्मति से स्टालिन को दूसरी बार पार्टी के अध्यक्ष के रूप में चुना। कृषि मंत्री दुराई मुरुगन पुन: महासचिव और टी आर बालू कोषाध्यक्ष चुने गए।</p>
<p>परिषद में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए पार्टी सांसद कनिमोझी को पदोन्नत करके पार्टी की उप महासचिव बनाया गया है। इसके अलावा द्रमुक की आम परिषद की बैठक में पार्टी नेता दुरई मुरुगन को पार्टी महासचिव और टीआर बालू को कोषाध्यक्ष चुना गया है।सहकारिता मंत्री आई. पेरियासामी, उच्च शिक्षा मंत्री के. पोनमुडी, पूर्व केंद्रीय मंत्री ए राजा और सांसद अंतियूर सेल्वराज को भी पदोन्न्त किया गया है। पूर्व मंत्री सुब्बुलक्ष्मी जगदीशन ने हाल में पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। उसके स्थान पर कनिमोझी को उप महासचिव चुना गया।</p>]]>
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                <pubDate>Sun, 09 Oct 2022 16:09:37 +0530</pubDate>
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