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                <title>farmer protest - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>farmer protest RSS Feed</description>
                
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                <title>केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर से किसानों की तीन घंटे बैठक: एमएसपी गारंटी कानून समेत 10 मांगें रखीं, व्यापार समझौते पर भी सरकार से मांगा स्पष्ट आश्वासन</title>
                                    <description><![CDATA[गुरुग्राम में संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर के बीच तीन घंटे लंबी बैठक हुई। किसान नेताओं ने पीएम मोदी के नाम 10 सूत्रीय मांग पत्र सौंपकर एमएसपी गारंटी कानून, कर्ज माफी, और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से कृषि क्षेत्र को बाहर रखने जैसी प्रमुख मांगें रखीं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/three-hour-meeting-of-farmers-with-union-minister-manohar-lal-khattar/article-164646"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/manohar-lal-khattar.png" alt=""></a><br /><p>गुरुग्राम। संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) के प्रतिनिधिमंडल की केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर के साथ गुरुग्राम में गुरूवार को तीन घंटे तक बैठक हुई। यह बैठक चार सितंबर को प्रस्तावित थी, लेकिन केंद्रीय मंत्री के आग्रह पर तीन सितंबर को ही आयोजित की गई। बैठक में किसानों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम 10 सूत्रीय मांग पत्र सौंपकर विभिन्न मांगों के समाधान की मांग की। मोर्चा की ओर से जगजीत सिंह डल्लेवाल (पंजाब), पी.आर. पांडियन (तमिलनाडु), महेश बेलगांवकर (कर्नाटक), गजेंद्र झाला (गुजरात), इंद्रजीत पन्नीवाला (राजस्थान), राजिंदर चहल और हर्षदीप सिंह (हरियाणा), लीलाधर राजपूत (मध्य प्रदेश), प्रह्लाद पुनिया व सोनवीर चौधरी (उत्तर प्रदेश), सतनाम सिंह बहेरू, सुखदेव सिंह भोजराज (पंजाब) और अभिमन्यु कोहाड़ (हरियाणा) और अन्य प्रतिनिधि मौजूद रहे। बैठक में भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर किसानों और मजदूरों की चिंताएं केंद्रीय मंत्री के समक्ष रखी गईं। </p>
<p>किसान नेताओं ने कृषि, डेयरी, पोल्ट्री और मछली पालन क्षेत्रों को प्रस्तावित समझौते से बाहर रखने की मांग की। मोर्चे के अनुसार, केंद्रीय मंत्री ने आश्वासन दिया कि इन क्षेत्रों के हितों को सुरक्षित रखा जाएगा और केंद्र सरकार जल्द ही इस विषय पर सार्वजनिक रूप से अपना रुख स्पष्ट करेगी। हाईटेंशन बिजली लाइनों के मुआवजे के मुद्दे पर मंत्री ने मौजूदा नीति में कुछ कमियां स्वीकार करते हुए उन्हें दूर कर बेहतर नीति लाने की बात कही। जमीन की बाजार कीमत तय करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली लाइनों के 'राइट ऑफ वे' के लिए बाजार मूल्य का 60 प्रतिशत मुआवजा देने के प्रस्ताव पर गंभीर विचार का आश्वासन दिया गया।</p>
<p>बिजली संशोधन विधेयक के संबंध में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार राज्य सरकारों के बिजली संबंधी निर्णयों में हस्तक्षेप नहीं करेगी और खेती-किसानी से संबंधित कोई बदलाव करने का एजेंडा केंद्र के पास नहीं है। किसान नेताओं के अनुसार, 2020-21 और 2024-25 सहित विभिन्न किसान आंदोलनों के दौरान दर्ज मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया के लिए भी संबंधित अधिकारियों से बातचीत कर सकारात्मक कदम उठाने का आश्वासन दिया गया।</p>
<p>किसान मोर्चे ने सभी फसलों की एमएसपी पर खरीद सुनिश्चित करने के लिए एमएसपी गारंटी कानून बनाने, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के अनुसार सी2 लागत पर 50 प्रतिशत जोड़कर एमएसपी निर्धारित करने और किसानों की संपूर्ण कर्ज माफी की मांग की। इसके अलावा 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के प्रावधान दोबारा लागू करने की मांग भी रखी गई। मांग पत्र में गन्ने का एफआरपी बढ़ाकर कम से कम 600 रुपये प्रति क्विंटल करने, किसानों को 14 दिनों के भीतर गन्ने का भुगतान सुनिश्चित करने, जलवायु परिवर्तन एवं प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए राष्ट्रीय नीति बनाने तथा फसल बीमा योजना में किसान हितैषी बदलाव करने की मांग की गई है।<br />मोर्चे ने बीज विधेयक और बिजली संशोधन विधेयक में किसानों से संबंधित प्रावधान व्यापक किसान सहमति के बिना लागू न करने तथा किसान आंदोलनों के दौरान दर्ज सभी मुकदमे रद्द करने की मांग भी रखी।</p>
<p>यह बैठक 16 अगस्त को संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) की 51 किसानों की 'किसान बचाओ पदयात्रा' को रोके जाने के बाद किसानों और केंद्र के बीच बातचीत की कड़ी में हुई। मोर्चे ने कहा कि वह किसानों और कर्मचारियों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर अपना संघर्ष जारी रखेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 13:22:22 +0530</pubDate>
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                <title>भोपाल की 'लेडी सिंघम' का साहस कैमरे में कैद, प्रदर्शनकारियों के सामने बस रोककर कानून-व्यवस्था बचाने का वीडियो हुआ वायरल</title>
                                    <description><![CDATA[भोपाल में किसान प्रदर्शन के दौरान एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का शांत और साहसिक रवैया चर्चा का विषय बन गया। प्रदर्शनकारियों को रोकने के दौरान उनकी तत्परता का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। अधिकारी ने कहा कि पुलिस का उद्देश्य केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखना और शांतिपूर्ण माहौल सुनिश्चित करना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/the-video-of-bhopals-lady-singhams-courage-to-save-law/article-161490"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/bhopal1.png" alt=""></a><br /><p>भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में किसान प्रदर्शन के दौरान असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (एसीपी) मोनिका शुक्ला की बहादुरी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। प्रदर्शनकारियों द्वारा मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ने के दौरान पुलिस ने रास्ता रोकने के लिए सड़क पर बसें खड़ी की थीं। इसी दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने बस को धक्का देकर आगे बढ़ाने की कोशिश की, लेकिन एसीपी मोनिका शुक्ला बस के सामने खड़ी हो गईं। उनके इस कदम के बाद प्रदर्शनकारियों ने बस को आगे बढ़ाने का प्रयास छोड़ दिया। </p>
<p>घटना के बाद उन्हें सोशल मीडिया पर 'लेडी सिंघम' कहा जा रहा है। हालांकि, मोनिका शुक्ला ने इसे अपनी ड्यूटी का हिस्सा बताते हुए कहा कि उनका उद्देश्य केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखना था। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक को शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार है, लेकिन विरोध कानून के दायरे में रहकर होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस को ऐसे हालात में संयम से काम लेना चाहिए, क्योंकि प्रदर्शनकारी अपराधी नहीं बल्कि अपनी मांग रखने वाले नागरिक होते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Jul 2026 18:34:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>किसान आंदोलन के बीच कांग्रेस का किसान प्रकोष्ठ ही निष्क्रिय</title>
                                    <description><![CDATA[एमएसपी कानून की मांग पर आंदोलनरत किसानों की मांगों पर भले ही कांग्रेस ने अपना समर्थन दे दिया हो, लेकिन कांग्रेस का किसान प्रकोष्ठ अभी तक निष्क्रिय ही नजर आ रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/farmer-cell-of-congress-remains-inactive-amid-farmer-movement/article-70496"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-02/congress-logo3.png" alt=""></a><br /><p> जयपुर। एमएसपी कानून की मांग पर आंदोलनरत किसानों की मांगों पर भले ही कांग्रेस ने अपना समर्थन दे दिया हो, लेकिन कांग्रेस का किसान प्रकोष्ठ अभी तक निष्क्रिय ही नजर आ रहा है। इसकी वजह है कि कांग्रेस के कई प्रकोष्ठ लंबे समय से भंग पड़े हैं। लोकसभा चुनाव से पहले इन प्रकोष्ठों के फिर से गठन की कोशिश की जा रही है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, पूर्व सीएम अशोक गहलोत, कांग्रेस महासचिव सचिन पायलट बार-बार किसानों के समर्थन में बयान दे रहे हैं। वर्ष 2020 में बगावत के समय बंद हुए कांग्रेस के विभाग और प्रकोष्ठ अभी भी बिना गठन के लंबित हैं। इससे पहले भी किसानों के आंदोलन के दौरान कांग्रेस से जुड़े किसान नेता तो खूब बयान देते रहे, लेकिन पार्टी के प्रकोष्ठ की तरफ से गतिविधियां कम रहीं। लोकसभा चुनाव से पहले इन विभाग और प्रकोष्ठों का गठन किया जाता है तो पार्टी को फायदा मिल सकता है। फिलहाल भंग प्रकोष्ठों और विभागों के गठन के लिए कवायद को लेकर कोई संकेत नजर नहीं आए हैं।</p>
<p> </p>
<p><strong>किसान नेताओं ने ज्वॉइन की कांग्रेस पर निष्क्रिय</strong></p>
<p>विधानसभा चुनाव के दौरान किसान नेता रामपाल जाट ने भी कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की थी। कई किसान नेता पहले से पार्टी से जुड़े हुए हैं, लेकिन किसान आंदोलन के दौरान इनकी गतिविधियां सुस्त ही बनी हुई हैं। बगावत के समय राजस्थान कांग्रेस के किसान प्रकोष्ठ के अध्यक्ष संदीप चौधरी थे, लेकिन निवर्तमान अध्यक्ष संदीप चौधरी सहित अधिकांश किसान नेताओं की सक्रियता नजर नहीं आ रही।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 Feb 2024 09:26:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>किसानों ने सरकार से की मांगे पूरी करने की मांग </title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय किसान संघ के बैनर तले प्रदेश के किसान विद्याधर नगर स्थित स्टेडियम में एकत्रित हुए और सरकार से विभिन्न मांगे पूरी करने की मांग की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/farmers-demand-from-the-government-to-fulfill-their-demands/article-45731"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/bku.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। भारतीय किसान संघ के बैनर तले प्रदेश के किसान विद्याधर नगर स्थित स्टेडियम में एकत्रित हुए और सरकार से विभिन्न मांगे पूरी करने की मांग की। यह किसान पिछले लंबे समय से सरकार से विभिन्न मांगे पूरी करने की मांग कर रहे थे, लेकिन सरकार ने इनकी मांगों की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया। ऐसे में सरकार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन करने के लिए विद्याधर नगर स्टेडियम में बड़ी संख्या में किसान एकत्रित हुए।</p>
<p>आंदोलन के संयोजक तुलछाराम सिंवर ने बताया कि सुबह 10 बजे से ही किसान विद्याधर नगर स्टेडियम में एकत्रित होना शुरू हो गए थे और दोपहर होते-होते भारी संख्या में किसान विद्याधर नगर स्टेडियम में एकत्रित हो गए। वह सरकार से किसानों को आर्थिक रुप से स्वावलंबन बनाने कृषि विकास की दर बढ़ाने और कृषि को टैक्स मुक्त करने सहित अन्य विभिन्न मांगे पूरी करने की सरकार से मांग कर रहे हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 May 2023 16:05:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>किसानों ने किया रामसागर माइनर नहर निर्माण कार्य का विरोध</title>
                                    <description><![CDATA[नहर पूर्व में जब कच्ची थी तो दस से पंद्रह फुट चौड़ी थी। अब उक्त नहर को सिंचाई विभाग द्वारा पक्का कराया जा रहा है, लेकिन इसकी चौड़ाई केवल 2 से 3 फुट रखी जा रही है। इससे बांध से पानी रिलीज होने पर मोरी नुमा नहर में पानी आएगा तो खेतों तक नहीं पहुंचेगा और किसानों में पानी के लिए झगड़ा होगा। साथ में सिंचाई नहीं होने से फसल सूखेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/karauli/farmers-opposed-the-construction-work-of-ramsagar-minor-canal/article-26276"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-10/83.jpg" alt=""></a><br /><p>बाड़ी। उपखंड के रामसागर बांध से निकलने वाली नहर माइनर रानपुर रोड के निर्माण कार्य को लेकर नहर से जुड़े खेतों के दर्जनों की संख्या में किसानों ने विरोध प्रदर्शन किया और नहर के निर्माण कार्य को रुकवाये जाने एवं नहर को पूर्व की भांति चौड़ा किए जाने की मांग की है। साथ ही किसानों ने बाजार में रैली निकालते हुए उपखंड अधिकारी को ज्ञापन सौंपा। नहर निर्माण को लेकर आंदोलन कर रहे किसान रामसहाय, हाकिम सिंह, औतार, अंगद, पवन के साथ बुजुर्ग पीतम सिंह, शेरखान, शाहरुख, महीपत ने बताया कि रामसागर बांध की मुख्य नहर से यह माइनर नहर निकली है जो कस्बा बाड़ी नंबर एक और नंबर तीन गुमट क्षेत्र के काश्तकारों की भूमि के बीच से निकलते हुए रानपुर गांव तक जाती है। इस नहर से दर्जनों किसानों के तकरीबन 15000 बीघा भूमि खेतों की सिंचाई की जाती है। यह नहर पूर्व में जब कच्ची थी तो दस से पंद्रह फुट चौड़ी थी। अब उक्त नहर को सिंचाई विभाग द्वारा पक्का कराया जा रहा है, लेकिन इसकी चौड़ाई केवल 2 से 3 फुट रखी जा रही है। इससे बांध से पानी रिलीज होने पर मोरी नुमा नहर में पानी आएगा तो खेतों तक नहीं पहुंचेगा और किसानों में पानी के लिए झगड़ा होगा। साथ में सिंचाई नहीं होने से फसल सूखेगी। ऐसे में किसानों को हर दृष्टि से नुकसान होगा। ऐसे में इस प्रकार से पक्की नहर निर्माण कार्य का किसान विरोध कर रहे है।</p>
<p>नाराज किसानों ने पहले विरोध प्रदर्शन किया। इसके बाद बाजार में रैली निकालते हुए उपखंड अधिकारी को ज्ञापन सौंपा है। इसमें निर्माण कार्य को रोके जाने और नहर को पूर्व की भांति चौड़ा किए जाने की मांग की है। साथ मे चेतावनी दी है कि यदि कार्य नहीं रखा तो आंदोलन किया जाएगा। चार महीने पहले भी उक्त नहर निर्माण कार्य का किसानों ने विरोध किया था और निर्माण कार्य को रुकवा दिया था। उस वक्त मामला गर्म होते देख संबंधित संवेदक ने निर्माण कार्य को रोक दिया था, जो लगातार चार महीने बंद रहा।  सिंचाई विभाग के एईएन विवेक अग्रवाल का कहना है कि नहर का निर्माण कार्य सेक्शन डिजाइन के अनुसार किया जा रहा है। किसी प्रकार की कोई लापरवाही नहीं की जा रही है।<br />बाड़ी फोटो नंबर एक।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>करौली</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 12 Oct 2022 11:54:30 +0530</pubDate>
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