<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://dainiknavajyoti.com/counter/tag-33065" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Dainik Navajyoti Rising Rajasthan RSS Feed Generator</generator>
                <title>counter - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
                <link>https://dainiknavajyoti.com/tag/33065/rss</link>
                <description>counter RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>एक ऑपरेटर के भरोसे एमबीएस का आरजीएचएस पर्ची काउन्टर, मची अफरा तफरी</title>
                                    <description><![CDATA[काउंटर पर घंटों खड़ा रहने के बाद भी मरीजों की पर्चीयां नही बनी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/mbs-hospital-s-rghs-slip-counter-left-dependent-on-a-single-operator--chaos-ensues/article-151944"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/ek-operator-k-bharose-mbs-ka-rghs-parche-caunter-,-mache-aphara-taphare...kota-news-28.04.2026.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। राजस्थान भर में निजी अस्पतालों और दवा काउंटरों द्वारा आरजीएचएस  के बहिष्कार के चलते अब सरकारी अस्पतालों पर मरीजों का दबाव असहनीय स्तर तक पहुँच गया है। सोमवार सुबह कोटा के एमबीएस अस्पताल में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब आरजीएचएस पर्ची काउंटर पर घंटों खड़ा रहने के बाद भी मरीजों की पर्चीयां नही बनी। इसके अव्यवस्था इतनी बढ़ गई कि काउंटर पर मौजूद एकमात्र कर्मचारी को देख लोगों के सब्र का बांध टूट गया। वह आपस में ही उलझते नजर आये।संविदा कर्मियों के काम छोड़ने और एक साथ छुट्टी पर जाने से व्यवस्था चरमरा गई।</p>
<p><strong>लाभार्थियों के लिये सरकारी इलाज से दवा में परेशानी</strong><br />एमबीएस अस्पताल से सामने आयी तस्वीरे बताती है कि आरजीएचएस को लेकर निजी अस्पतालों के विरोध के चलते सरकारी तंत्र पूरी तरह से बैकअप प्लान के बिना चल रहा है, जिसका खामियाजा आम जनता और बुजुर्ग पेंशनर्स को भुगतना पड़ रहा है। मरीजों की परेशानी है कि वह निजी अस्पताल में इलाज ले नहीं पा रहे यदि सरकारी मे सामान्य पर्ची से इलाज लेते है तो उन्हे पहले से चल रही ब्राण्ड़ेड दवाओं को सरकारी डॉक्टर सरकारी पर्चे पर नहीं लिख सकता।</p>
<p><strong>5 में से 4 ऑपरेटर नदारद: सिस्टम हुआ फेल</strong><br />जानकारी के अनुसार, आरजीएचएस काउंटर के सुचारू संचालन के लिए कुल 5 कंप्यूटर ऑपरेटर नियुक्त हैं, जिनमें से 3 सुबह और 2 शाम की शिफ्ट में रहते हैं। लेकिन सोमवार को बदहाली का आलम यह था कि ऑपरेटर चेतन शर्मा ने काम छोड़ दिया। ऑपरेटर जीतू सहित अन्य कार्मिक छुट्टी पर चले गए। काउंटर पर केवल एक मात्र कर्मचारी योगेंद्र मौजूद था। जिससे लोगों के ओपीड़ी,भर्ती तथा डिस्चार्ज के लिये घंटों लगने लगे।</p>
<p><strong>भर्ती व डस्चार्ज की प्रक्रिया में लगता है समय</strong><br />बाहर खडे मरीजों में भर्ती-डिस्चार्ज की जटिल प्रक्रिया के बीच अकेला कर्मचारी पर्ची नहीं काट पा रहा था। जिससे कतार में खड़े बुजुर्गों और तीमारदारों का गुस्सा फूट पड़ा और पूरे परिसर में अफरा-तफरी मच गई। ऐसे में सामान्य ओपीड़ी के लिये आये मरीजों को आरजीएचएस की पर्ची न बनने के कारण बिना इलाज के लौटना पड़ा।</p>
<p><strong>बुआ को लेने जाने की जिद पर अड़ा</strong><br />हैरानी की बात यह रही कि मुख्य नर्सिंग इंचार्ज खुद ड्यूटी से नदारद थे। इंचार्ज का जिम्मा संभाल रहीं वर्षा राठौर ने आनन-फानन में व्यवस्था संभालने के लिए एक लिफ्ट ऑपरेटर को पर्ची काउंटर पर बैठाया। लेकिन तमाशा तब खड़ा हुआ जब वह लिफ्ट ऑपरेटर भी थोड़ी देर बाद अपनी 'बुआ' को लेने जाने की जिद पर अड़ गया। लगभग 40 मिनट तक प्रभारी वर्षा उस ऑपरेटर की मान-मनुहार करती नजर आईं ताकि काउंटर चालू रह सके।</p>
<p><strong>मरीजों का फूटा गुस्सा, इंचार्ज को सुनाई खरी-खोटी</strong><br />निजी अस्पतालों में इलाज बंद होने के कारण मजबूरी में सरकारी अस्पताल पहुंचे मरीजों को यहाँ भी भारी जद्दोजहद करनी पड़ी। घंटों इंतजार से झल्लाए लोगों ने अस्पताल प्रशासन की कुप्रबंधन पर नाराजगी जताई और मौके पर मौजूद प्रभारी को भी खरी-खोटी सुनाई। मरीजों का आरोप है कि जब निजी क्षेत्र में विरोध के चलते सरकारी अस्पतालों में भीड़ बढ़ना तय था, तो प्रशासन ने अतिरिक्त स्टाफ की व्यवस्था क्यों नहीं की?</p>
<p>संविदा पर लगे कार्मिकों के काम छोडने और छुट्टी के समय लिफ्ट पर लगाये गये व्यक्ति को इमरजेन्सी में ऑपरेटर पर लगाया गया था। सभी को मौके पर मौजुद इंचार्ज के निर्देशों के अनुसार काम करना चाहिये।<br /><strong>- नरेन्द्र खींची, नर्सिंग इन्चार्ज</strong></p>
<p>मै सुबह ओपीड़ी की तरफ गया था मुझे किसी ने इस बारें में सूचना नहीं दी। नर्सिंग इंचार्ज से जानकारी जुटाई जा रही है।<br /><strong>- डॉ. धर्मराज मीणा अधीक्षक एमबीएस अस्पताल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/mbs-hospital-s-rghs-slip-counter-left-dependent-on-a-single-operator--chaos-ensues/article-151944</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/mbs-hospital-s-rghs-slip-counter-left-dependent-on-a-single-operator--chaos-ensues/article-151944</guid>
                <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 14:34:35 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-04/ek-operator-k-bharose-mbs-ka-rghs-parche-caunter-%2C-mache-aphara-taphare...kota-news-28.04.2026.jpg"                         length="1881929"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सरकारी अस्पताल में दवाओं का टोटा, मरीजों को हो रही परेशानी</title>
                                    <description><![CDATA[ मरीज की पर्ची में पांच दवा में मुश्किल से तीन दवा ही मिल रही दो दवाओं के लिए मरीजों को इधर से उधर भटकना पड़ रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/shortage-of-medicines-in-government-hospital--patients-are-facing-problems/article-115510"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/news-(4)22.png" alt=""></a><br /><p> कोटा। एमबीएस अस्पताल में मरीजों को पहले डॉक्टर को दिखाने के लिए घंटों लाइन में लगना मजबूरी बना हुआ है। वहीं अब मुख्यमंत्री नि:शुल्क दवा योजना में कई रूटिन के साथ गंभीर बीमारियों की दवाओं की सप्लाई कम आने से मरीजों को एनओसी दी जा रही है। एक मरीज की पर्ची में पांच दवा में मुश्किल से तीन दवा ही मिल रही दो दवाओं के लिए मरीजों को इधर से उधर भटकना पड़ रहा है। हालांकि अस्पताल प्रशासन की ओर से जो दवाएं काउंटर पर नहीं मिल रही उनकी एनओसी देकर दूसरे काउंटर से दवाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है लेकिन यहां पर लंबी कतारों के चलते कई मरीज बाहर से दवा खरीदने के लिए मजबूर हो रहे है। हार्ट, बीपी, शुगर थाइरॉयड प्रोस्टेट की दवा के लिए एक काउंटर से दूसरे काउंटर का चक्कर लगाना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>एनओसी जटिल प्रक्रिया</strong><br />कोटा निवासी शहनाज ने बताया कि वो बीपी, शुगर और थायराइड की दवा लेने के लिए एक घंटे तक दवा की लाइन में लगी लेकिन पांच दवाओं में से  तीन दवाए ही मिली। दो दवाओं के लिए एनओसी बनाने के लिए इधर उधर चक्कर काटने में समय पूरा हो गया । मौसमी बीमारी के चलते रोज बड़ी संख्या मरीज उपचार के लिए अस्पताल पहुंच रहे है। पहले पर्ची बनवाने की कतार में इंतजार व मशक्कत, उसके बाद आउटडोर में डॉक्टर को दिखाने की कतार में जैसे-तैसे नम्बर आ  गया। उसके बाद डॉक्टर द्वारा पर्ची पर लिखी गई दवाई लेने के लिए जब मरीज व तीमारदार दवा काउंटर जाते उन्हें पूरी दवा नहीं मिल रही है। एनओसी की जटिल प्रक्रिया से लोग बाहर से दवाएं ले रहे है। </p>
<p><strong>छह में से तीन दवा ही मिली</strong><br />अशोक ने बताया कि पहले तो घंटो डॉक्टर को दिखाने के लिए लाइन में खड़ा रहा उसके बाद दवा लेने पहुंचा वहां भी लंबी कतारे थी। आधे घंटे बाद नंबर आया डॉक्टर ने छह दवाएं लिखी काउंटर से तीन दवाएं ही मिली तीन की एनओसी बनाने के लिए कहा। वहां काउंटर 124 पर लंबी लाइन लगी थी। बाकी तीन दवाएं बाजार से खरीदी।</p>
<p><strong>प्रोस्टेट की दवा नहीं मिली</strong><br />अस्पताल में इलाज कराने आए मरीज विजय ने बताया कि उसके डॉक्टर चार दवाएं लिखी जिसमें दो दवाएं मिली दो दवाएं नहीं मिली प्रोस्टेट की दवा टेमसूलिन नहीं मिली बाजार से खरीदनी पड़ी।</p>
<p><strong>काउंटर 124 पर लग रही लंबी कतारें</strong><br />नि:शुल्क दवा केंद्रों पर जो दवाएं नहीं मिल रही उनकी एनओसी बनाई जा रही है वो दवाएं काउंटर 124 पर मिल रही है लेकिन वहां पर बहुत सी दवाएं नहीं मिल रही है। मरीजों लंबी कतारें लगी है। नंबर आने पर वहां भी एक दो दवाई मिलती है बाकी सप्लाई नहीं है कहकर टाला जा रहा है।</p>
<p><strong>लंबी कतार में घंटों खड़े रहने का दर्द अब आम हो गया</strong><br />शहर के कुन्हाड़ी निवासी 70 वर्षीय रामभरण शर्मा  ने बताया कि सरकारी अस्पताल में नि:शुल्क इलाज और दवा लेना बहुत मुश्किल काम है। एक तो डॉक्टर को दिखाने में घंटो लग जाते उस पर दवाए पूरी नहीं मिलती सीनियर सिटीजन का भी लोग लिहाज नहीं करते है।  मेडिसीन विभाग में दिखाया वहां से दवा लेने के लिए काउंटर पर पहुंची तो एक घंटा लाइन में खड़ी रही उसके बाद मेरा नंबर आया छह दवा में तीन दवा ही मिली तीन दवा नहीं मिली। दवा काउंटर वाले ने बताया कि बाकी दवा की एनओसी दे दी। एमबीएस में नि:शुल्क दवा लेना आसान काम नहीं है। प्रोस्टेट की दवा नहीं मिली। टेमसूलिन दवा नहीं मिली। </p>
<p>अस्पताल में सभी दवाओं की सप्लाई नियमित की जा रही है। कुछ दवाओं की आगे से सप्लाई आने देरी होने पर वैकल्पिक व्यवस्था के लिए अस्पताल प्रशासन की ओर से लोकल स्तर पर ही एनओसी के माध्यम से कांउटर 124 पर दवाओं उपलब्ध कराया जा रहा है। सभी काउंटर पर डिमांड के अनुसार सप्लाई की जा रही है। <br /><strong>- सुशील सोनी, प्रभारी औषधी भंडार कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/shortage-of-medicines-in-government-hospital--patients-are-facing-problems/article-115510</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/shortage-of-medicines-in-government-hospital--patients-are-facing-problems/article-115510</guid>
                <pubDate>Tue, 27 May 2025 17:53:44 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-05/news-%284%2922.png"                         length="523951"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>यह कैसा मर्ज है, अब दवाएं भी दे रही दर्द </title>
                                    <description><![CDATA[एमबीएस अस्पताल में भर्ती मरीजों को दवा नहीं मिलने पर 13 नंबर काउंटर दवा की सुविधा दे रखी है यहां दवाईयां नहीं मिलने पर बाहर से दवा लाने के लिए एनओसी जारी होती है। लेकिन विडंबना ये है कि इस काउंटर पर कोई फार्मास्टिट ही नहीं लगा रखा काउंटर कम्प्यूटर आॅपरेटरों के भरोसे चल रहा है । 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/what-kind-of-a-merge-is-this-now-medicines-are-also-giving-pain/article-26306"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-10/yah-kaisa-marj-hai-,-ab-dawaye-bhi-de-rahi-dard...kota-news-12.10.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। मुख्यमंत्री नि:शुल्क दवा मरीजों के जी का जंजाल बन रही है। सरकार की ओर से 864 नई दवाएं की स्वीकृति दी है। लेकिन अभी तक इन सप्लाई ड्रग हाउस में नहीं हुई जिससे मरीजों को परेशानी हो रही है। डॉक्टर नई स्वीकृत दवाए पर्ची पर लिख रहे लेकिन अस्पताल में इसका स्टॉक नहीं होने से इसकी एनओसी देकर बाजार से दवा उपलब्ध कराई जा रही है। जिससे मरीजों को दवा के लिए घनचक्कर बनना पड़ रहा है। मौसमी बीमारियों की तादात बढ़ने से दवाओं की खपत बढ़ गई है। संभाग के सबसे बड़े एमबीएस अस्पताल के हालात सुधारने का नाम ही नहीं ले रहे है। पहले मरीजों को डॉक्टर को दिखाने में मशक्कत करनी पड़ती है अब दवा का चक्कर मरीजों को मर्ज से ज्यादा दर्द दे रहा है। कहने को अस्पताल में मुख्यमंत्री दवा योजना के 10 से अधिक काउंटर हैं लेकिन इन काउंटरों के खुलने का समय और बंद होने का समय अलग होने से मरीजों को घंटों लाइन में खड़ा होना मजबूरी बनता जा रहा है। कई दवा काउंटर तो अस्पताल के बंद होने से पहले ही बंद हो जाते हैं ऐसे में खुले हुए दवा काउंटरों पर मरीजों तादात बढ़ जाती है जिससे मरीजों दवा लेने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही है।  सरकारी अस्पतालों में नि:शुल्क दवाओं की सुविधा तो कर दी लेकिन मरीजों को वहां दवा काउंटरों पर उपलब्ध ही नहीं हो रही है। एमबीएस में एक ही काउंटर पर दवा दी जा रही है वहां भी आधी दवाओं के लिए एनओसी जारी की जा रही है। जिसके लिए मरीजों व तीमारदारों को इधर से उधर चक्कर काटने पड़ रहे हैं। सालभर में जिले में 8 से 10 लाख टैबलेट की खपत होती है, मौसमी बीमारियों के दौरान खपत बढ़ जाती थी। कोविड के में यह आंकड़ा दो साल में 16 लाख 80 हजार तक पहुंच गया था। मेडिकल कॉलेज ड्रग वेयर हाउस से अप्रैल 2020 से 2022  तक पेरासिटा मोल की 500 एमजी की 8 लाख 80 हजार और 250 एमजी की 8 लाख 80 हजार टैबलेट खपत हो चुकी है। मेडिकल व्यवसायियों अनुसार कोविड में 20 लाख टैबलेट की खपत हुई है। अभी पेरासिटा मोल, खांसी की दवाई और एजिथ्रोमाइसीन की डिमांड ज्यादा है।</p>
<p><strong>अस्पताल बंद होने के पहले ही सात दवा काउंटर हो जाते बंद</strong><br />अंता निवासी धनराज ने बताया कि अस्पताल में बने दवा काउंटर के खुलने और बंद होने के समय अलग अलग होने से मरीजों को परेशानी का समाना करना पड़ रहा है। सुबह अस्पताल खुलने के साथ ही सभी दवा काउंटर खुल जाते है लेकिन 2 बजे तक एक से लेकर सात काउंटर एक -एक कर बंद होने लगते है। दो बजे तक एनओसी व एक दवा काउंटर से चलता है। ऐसे में इमरजेंसी से लेकर 3 बजे तक डॉक्टरों दिखाने वाले मरीज दवा लेने के के लिए मशक्कत करते नजर आते है। ऐसा किसी एक दो मरीज के साथ नहीं होता है। कई मरीजों के साथ हुआ। जिससे मरीज परेशान होते रहे। कई मरीज तो गर्मी के कारण थक हार कर अस्पताल में जमीन पर ही बैठ गए। शहर ही नहीं ग्रामीण क्षेत्रों से आए मरीज अधिक  परेशान हुए। मरीजों का कहना था कि सरकार ने दवा तो नि:शुल्क कर दी है। लेकिन व्यवस्था इतनी जटिल कर दी है कि उससे पार पाना मुश्किल हो रहा है। दवाई के लिए चक्कर घिन्नी होने से झुंझलाहट भी होने लगी। इन व्यवस्थाओं के चलते दवा काउंटर, आउटडोर में डॉक्टर को दिखाने और एनओसी जारी करवाने के लिए मरीजों व तीमारदारों की भीड़ लग गई। 2 बजे से 3 बजे तक काउंटर नंबर 9 व 10 ही खुले हुए थे जिसमें मरीजों की दवा लेने के लिए लंबी कतारे लगी हुई थी। </p>
<p><strong>लंबी कतार में घंटों खड़े रहने का दर्द अब आम हो गया</strong><br />शहर के कालातालाब निवासी 62 साल की वंदना ने बताया कि उसके सिर की नस में परेशानी होने से न्यूरोलॉजी विभाग में दिखाया वहां से दवा लेने के लिए काउंटर पर पहुंची तो एक घंटा लाइन में खड़ी रही उसके बाद मेरा नंबर आया छह दवा में दो दवा ही मिली चार दवा नहीं मिली। दवा काउंटर वाले ने बताया कि बाकी दवा की एनओसी लेकर बाहर से लेनी पड़ेगी अभी सप्लाई नहीं आ रही है। एमबीएस में नि:शुल्क दवा लेना आसान काम नहीं है। </p>
<p><strong>इंडोर मरीजों के लिए 13 नंबर काउंटर बना परेशानी का सबब</strong><br />एमबीएस अस्पताल में भर्ती मरीजों को दवा नहीं मिलने पर 13 नंबर काउंटर दवा की सुविधा दे रखी है यहां दवाईयां नहीं मिलने पर बाहर से दवा लाने के लिए एनओसी जारी होती है। लेकिन विडंबना ये है कि इस काउंटर पर कोई फार्मास्टिट ही नहीं लगा रखा काउंटर कम्प्यूटर ऑपरेटरों के भरोसे चल रहा है । ऐसे में यहां दो बजे बाद मरीजों की दवा और एनओसी लेने के लिए लंबी कतारे लगी रहना आम बात है। </p>
<p><strong>एनओसी लेना नहीं है आसान</strong><br />रोटेडा निवासी 86 वर्षीय शमशुद्दीन ने बताया वो बीपी, शुगर और थाइराईड की दवा लेने के लिए एक घंटे तक दवा की लाइन में लगा लेकिन सात दवाओं में तीन दवाए ही मिली। चार दवाओं के लिए एनओसी बनाने के लिए इधर उधर चक्कर काटने में समय पूरा हो गया । ऐसे ही कई मामले मंगलवार को एमबीएस अस्पताल में देखने को मिले। मंगलवार को बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए अस्पताल पहुंचे। पहले पर्ची बनवाने की कतार में इंतजार व मशक्कत, उसके बाद आउटडोर में डॉक्टर को दिखाने की कतार में जैसे-तैसे नम्बर आ  गया। उसके बाद डॉक्टर द्वारा पर्ची पर लिखी गई दवाई लेने के लिए जब मरीज व तीमारदार दवा काउंटर पर गए तो उन्हें 13 नम्बर काउंटर पर भेजा गया। वहां जाने पर आधी ही दवा उपलब्ध थी। जबकि आधी दवा के लिए उन्हें एनओसी जारी की जा रही है। लेकिन एनओसी के लिए पहले उसी डॉक्टर से हस्ताक्षर करवाने, उप अधीक्षक के हस्ताक्षर करवाने और फिर उस पर्ची की दो जेरोक्स करवाकर लाने की मशक्कत करनी पड़ रही है। </p>
<p>सरकार की ओर से 864 दवाए स्वीकृत कर रखी है। अभी नई स्वीकृत दवाओं का स्टॉक नहीं आया है। वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में अस्पताल में एनओसी काटकर मरीजों को दवाए उपलब्ध कराई जा रही है। मौसमी बीमारियों के मरीज बढ़ने से दवाओं की खपत बढ गई है। पुरानी स्वीकृत दवाओं की सप्लाई नियमित हो रही है लेकिन खपत ज्यादा होने से बहुत सी दवाओं का स्टॉक खत्म हो गया है। नई दवाओं का स्टॉक आने में अभी एक माह लगेगा। <br /><strong>- सुशील सोनी, प्रभारी औषधी भंडार कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/what-kind-of-a-merge-is-this-now-medicines-are-also-giving-pain/article-26306</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/what-kind-of-a-merge-is-this-now-medicines-are-also-giving-pain/article-26306</guid>
                <pubDate>Wed, 12 Oct 2022 14:39:22 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-10/yah-kaisa-marj-hai-%2C-ab-dawaye-bhi-de-rahi-dard...kota-news-12.10.2022.jpg"                         length="48168"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        