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                <title>Money Laundering - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Money Laundering RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>दिल्ली ऑनलाइन सट्टेबाजी: 1,000 करोड़ रुपये के घोटाले मामले में प्रवर्तन निदेशालय की 18 ठिकानों पर छापेमारी, तीन आरोपी गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दिल्ली-एनसीआर और बेंगलुरु में 18 ठिकानों पर छापेमारी कर ₹1,000 करोड़ के ऑनलाइन सट्टेबाजी और मनी लॉन्ड्रिंग रैकेट का पर्दाफाश किया। देर रात तक चली इस कार्रवाई में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। 'गेम्सक्राफ्ट' और 'पॉकेट52' जैसे प्लेटफॉर्म्स के जरिए धोखाधड़ी और डिजिटल साक्ष्यों की गहन जांच जारी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/enforcement-directorate-raids-18-locations-in-delhi-online-betting-scam/article-153120"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/ed.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय ने कथित 1,000 करोड़ रुपये के ऑनलाइन सट्टेबाजी और मनी लॉन्ड्रिंग रैकेट से जुड़े बड़े अभियान के तहत दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, बेंगलुरु और अन्य स्थानों पर लगभग 18 ठिकानों पर व्यापक छापेमारी की। गुरुवार सुबह शुरू हुई यह छापेमारी कल देर रात एक बजे तक चली। जांच एजेंसी के सूत्रों के अनुसार, तलाशी के बाद तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार किये गये आरोपियों के नाम दीपक सिंह अहलावत, पृथ्वी कुमार और विकास तनेजा है। दीपक सिंह अहलावत हरियाणा के रहने वाला है, जबकि पृथ्वी कुमार उत्तराखंड का निवासी है।</p>
<p>कार्रवाई के दौरान ईडी ने कथित तौर पर जांच से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य डिजिटल साक्ष्य जब्त किये हैं। सूत्रों ने बताया कि यह मामला लगभग 1,000 करोड़ रुपये के कथित ऑनलाइन सट्टेबाजी और गेमिंग से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क से संबंधित है। ईडी के बेंगलुरु क्षेत्रीय कार्यालय ने मेसर्स गेम्सक्राफ्ट टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड, इसके निदेशकों और मामले से जुड़े कई अन्य आरोपियों के खिलाफ यह कार्रवाई की।</p>
<p>अधिकारियों के अनुसार, इस संबंध में पहले बेंगलुरु के स्थानीय थानों में कई प्राथमिकी दर्ज की गयी थीं। इसके बाद ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत जांच अपने हाथ में ली और आगे की कार्रवाई शुरू की। एजेंसी ने पिछले साल मेसर्स गेम्सक्राफ्ट टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड और अन्य कंपनियों से जुड़े एक अलग लेकिन संबंधित मामले में भी तलाशी अभियान चलाया था। पिछले वर्ष 18 नवंबर से 22 नवंबर के बीच, ईडी ने बेंगलुरु और गुरुग्राम में मेसर्स निर्देश नेटवर्क प्राइवेट लिमिटेड (एनएनपीएल), मेसर्स गेम्सक्राफ्ट टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड (जीटीपीएल) के कार्यालयों के साथ-साथ उनके निदेशकों और अन्य संदिग्धों के आवासों पर छापेमारी की थी।</p>
<p>वह जांच कर्नाटक पुलिस की दर्ज प्राथमिकियों के आधार पर शुरू की गयी थी। ईडी के अनुसार, प्राथमिकियों में आरोप लगाया गया था कि एनएनपीएल की तरफ से संचालित गेमिंग प्लेटफॉर्म 'पॉकेट52' बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी में शामिल था। इसमें खेल के परिणामों में हेरफेर, खिलाड़ियों के बीच मिलीभगत, तकनीकी खामियां, पैसे निकालने पर प्रतिबंध और प्लेटफॉर्म पर पारदर्शिता की कमी जैसे आरोप शामिल थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/enforcement-directorate-raids-18-locations-in-delhi-online-betting-scam/article-153120</link>
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                <pubDate>Fri, 08 May 2026 13:26:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव : पूर्व टीएमसी सांसद नुसरत जहां ईडी के समक्ष हुईं पेश, कंपनी की अनियमितताओं में उनकी कोई भूमिका नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[करोड़ों के आवास घोटाले में फंसी पूर्व सांसद और अभिनेत्री नुसरत जहां साल्ट लेक स्थित ईडी कार्यालय में पेश हुईं। उन पर राजारहाट आवासीय परियोजना में फ्लैट के नाम पर खरीदारों से ₹25 करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी का आरोप है। नुसरत ने आरोपों को खारिज करते हुए खुद को कंपनी के कामकाज से अलग बताया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/former-west-bengal-assembly-election-tmc-mp-nusrat-jahan-appears/article-151333"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/ed2.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। बंगला फिल्म अभिनेत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की पूर्व सांसद नुसरत जहां बुधवार को यहां प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों के समक्ष पेश हुईं। नुसरत कोलकाता के बाहरी इलाके राजारहाट में एक आवासीय परियोजना से जुड़े कथित आवास धोखाधड़ी के मामले में समन भेजे जाने के बाद साल्ट लेक स्थित सीजीओ कॉम्प्लेक्स में केंद्रीय एजेंसी के कार्यालय पहुंचीं। ईडी के एक अधिकारी ने बताया कि सुश्री नुसरत एक रियल एस्टेट कंपनी की निदेशक थीं। यह कंपनी राजारहाट में आवासीय फ्लैट विकसित कर रही थी। उन्होंने जानकारी दी कि जिस कंपनी में उन्होंने निदेशक के रूप में कार्य किया है, उस पर वादा किए गए फ्लैट देने में विफल रहने और सैकड़ों संभावित घर खरीदारों से धन एकत्र करने का आरोप है।</p>
<p>एक अन्य अधिकारी के अनुसार, लगभग 429 खरीदारों में से प्रत्येक ने राजारहाट परियोजना में आवासीय इकाइयों के लिए लगभग 5.5 लाख रुपये का भुगतान किया था, जिससे इसमें शामिल कुल राशि 25 करोड़ रुपये से अधिक हो गई। भुगतान के बावजूद, कथित तौर पर फ्लैट कभी नहीं सौंपे गए, जिससे प्रभावित खरीदारों को कानूनी रास्ता अपनाना पड़ा। नुसरत ने हालांकि कई मौकों पर खुद को इस रियल एस्टेट फर्म से अलग बताया है। उन्होंने कहा है कि उन्होंने किसी भी जांच शुरू होने से बहुत पहले 2017 में ही कंपनी के निदेशक पद से इस्तीफा दे दिया था। उनका दावा है कि कंपनी के दैनिक कामकाज या कथित अनियमितताओं में उनकी कोई भूमिका नहीं थी। बुधवार को नुसरत ने इस बारे में पत्रकारों के पूछे किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया। इससे पहले उन्होंने ईडी से दिल्ली कार्यालय में पूछताछ करने का अनुरोध भी किया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 17:27:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>क्रिप्टोकरेंसी मामला: कर्नाटक के कांग्रेस विधायक हारिस के परिवार पर ईडी की बड़ी कार्रवाई, कई अहम दस्तावेज जब्त</title>
                                    <description><![CDATA[बेंगलुरु में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने क्रिप्टोकरेंसी घोटाले से जुड़े धन शोधन मामले में कांग्रेस विधायक एनए हारिस के बेटों के ठिकानों पर छापेमारी की। करीब एक दर्जन परिसरों पर जारी इस तलाशी का संबंध 2017 के बिटकॉइन घोटाले और मास्टरमाइंड 'श्रीकी' से है। अधिकारियों ने आरोपियों पर अपराध की कमाई का लाभार्थी होने का आरोप लगाया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/cryptocurrency-case-eds-major-action-against-the-family-of-karnataka/article-151098"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/ed1.png" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरु। कर्नाटक में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार को क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े धन शोधन मामले की जांच के सिलसिले में राज्य के कांग्रेस विधायक एनए हारिस के परिवार से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की। अधिकारियों के अनुसार, इन ठिकानों में उनके दो बेटों के परिसर भी शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत बेंगलुरु में लगभग एक दर्जन परिसरों की तलाशी ली जा रही है। इन छापों में हारिस के बेटे मोहम्मद हारिस नलपाद और उमर फारूक नलपाद से जुड़ी संपत्तियों के साथ-साथ क्रिप्टो-संबंधित अपराधी श्रीकृष्ण रमेश उर्फ श्रीकी से जुड़े ठिकानों की भी तलाशी ली गयी।</p>
<p>जांचकर्ताओं ने कहा कि यह मामला 2017 के क्रिप्टोकरेंसी मामले में कर्नाटक पुलिस के दर्ज एफआईआर और चार्जशीट से उपजा है, जिसमें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय वेबसाइटों में कथित सेंधमारी शामिल थी। इस मामले में श्रीकी और उसके सहयोगी आरोपी हैं। अधिकारियों ने आगे आरोप लगाया कि मोहम्मद हारिस और उमर फारूक उन अपराधों की कमाई के लाभार्थी हैं, जो जांच के घेरे में आये क्रिप्टो-अपराधों के माध्यम से अर्जित की गयी थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 15:30:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पश्चिम बंगाल में वोटिंग से पहले 'मनी ट्रेल' पर वार: मर्लिन ग्रुप के खिलाफ ईडी की बड़ी छापेमारी, कई अहम दस्तावेज जब्त</title>
                                    <description><![CDATA[प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कोलकाता में रियल एस्टेट दिग्गज मर्लिन ग्रुप के कई ठिकानों पर छापेमारी की। जांच एजेंसी को फर्जी दस्तावेजों के जरिए जमीन हड़पने और मनी लॉन्ड्रिंग का संदेह है। साल्ट लेक और मिडलटन स्ट्रीट सहित विभिन्न स्थानों पर डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन की गहन जांच जारी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/war-on-money-trail-before-voting-in-west-bengal-big/article-150783"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/merlin-group.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार तड़के कोलकाता स्थित रियल एस्टेट डेवलपर मर्लिन ग्रुप की कई जगहों पर समन्वित छापेमारी की। माना जा रहा है कि ईडी की यह कार्रवाई, कंपनी की कुछ कथित वित्तीय अनियमितताओं की चल रही जांच का हिस्सा है। आशंका है कि कंपनी ने धन शोधन कानूनों का उल्लंघन किया है। अधिकारियों के अनुसार, ईडी की टीमें शहर और आसपास के इलाकों में कई स्थानों पर तैनात की गईं। जिन ठिकानों पर तलाशी ली गई, उनमें मिडलटन स्ट्रीट और साल्ट लेक के सीएफ ब्लॉक स्थित मर्लिन ग्रुप की संपत्तियां शामिल हैं।</p>
<p>जांच एजेंसी ने डीसी पाल ग्रुप के एक कार्यालय में भी तलाशी अभियान चलाया, जिससे संकेत मिलता है कि जांच अब संबंधित संस्थाओं और कारोबारी संबंधों तक भी फैल सकती है। अधिकारियों ने हालांकि अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है लेकिन तलाशी से जुड़े ईडी अधिकारियों का कहना है कि मामला भूमि सौदों और स्वामित्व रिकॉर्ड से जुड़े गंभीर आरोपों से संबंधित है। मर्लिन ग्रुप के प्रमोटरों और कंपनी पर आरोप है कि उन्होंने "फर्जी" दस्तावेजों का उपयोग कर स्वामित्व की "झूठी" कड़ी तैयार की और भूमि हड़प ली। ईडी का यह भी आरोप है कि आरोपियों ने कथित रूप से कब्जाई गई जमीन का व्यावसायिक "शोषण" करते हुए बड़े पैमाने पर रियल एस्टेट परियोजनाएं शुरू कीं। एजेंसी के अनुसार, "फर्जी" दस्तावेजों के जरिए खुद को वैध मालिक दिखाकर आरोपियों ने आम जनता को इन परियोजनाओं में "बड़ी" रकम निवेश करने के लिए प्रेरित किया।</p>
<p>फिलहाल, यह अभी कुछ भी स्पष्ट नहीं है कि इस कार्रवाई के दौरान कोई जब्ती या गिरफ्तारी हुई है या नहीं। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि जांचकर्ता दस्तावेजों, डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन की जांच कर रहे हैं, जिसके कारण छापेमारी अगले कुछ दिनों तक जारी रह सकती है। मर्लिन ग्रुप और डीसी पाल ग्रुप के प्रतिनिधियों ने अब तक इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। जांच आगे बढ़ने के साथ और जानकारी मिल पायेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 15:35:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ईडी ने किया भूमि हड़पने और जालसाजी रैकेट का पर्दाफाश : कोलकाता में मर्लिन ग्रुप पर छापेमारी, कई अहम दस्तावेज जब्त</title>
                                    <description><![CDATA[प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कोलकाता में मर्लिन प्रोजेक्ट्स के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में छापेमारी की। जांच में सामने आया कि सुशील और साकेत मोहता ने जाली दस्तावेजों के जरिए सरकारी जमीन हड़पी और अवैध रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स बनाए। इस घोटाले में प्रभावशाली नेताओं और अधिकारियों की मिलीभगत की भी गहन जांच जारी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/ed-busts-land-grab-and-fraud-racket-raids-on-merlin/article-149735"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/ed.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के कोलकाता क्षेत्रीय कार्यालय ने सुशील मोहता और साकेत मोहता द्वारा प्रवर्तित मर्लिन प्रोजेक्ट्स लिमिटेड के खिलाफ चल रही धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) जांच के सिलसिले में सात परिसरों पर छापेमारी की। छापेमारी में पता चला कि आरोपियों और उनसे जुड़ी संस्थाओं ने कथित तौर पर जाली दस्तावेज बनाकर सार्वजनिक भूमि सहित कई भूखंडों पर धोखाधड़ी से कब्जा किया था। ईडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जांच में पता चला है कि सुशील मोहता, साकेत मोहता और उनसे जुड़ी संस्थाओं ने विभिन्न भूखंडों को अवैध रूप से हासिल करने के लिए जाली दस्तावेज बनाए। आरोपियों ने बाद में इन जमीनों का व्यावसायिक रूप से बड़े पैमाने पर रियल एस्टेट परियोजनाओं को शुरू करके फायदा उठाया।</p>
<p>जाली दस्तावेजों के आधार पर खुद को वैध मालिक बताकर, उन्होंने कथित तौर पर आम जनता को इन परियोजनाओं में बड़ी रकम निवेश करने के लिए प्रेरित किया। अधिकारी ने बताया, "आगे की जांच में मर्लिन समूह और वरिष्ठ राजनीतिक नेताओं के साथ-साथ राज्य सरकार के सार्वजनिक अधिकारियों के बीच संबंध सामने आए हैं। समूह और उसके प्रमोटरों के साथ उनकी भूमिका और वित्तीय लेन-देन की वर्तमान में जांच की जा रही है।" ईडी ने बताया कि छापेमारी वाले परिसरों से आपत्तिजनक डिजिटल उपकरण और दस्तावेज जब्त किए गए हैं और मामले की जांच जारी है ।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 18:14:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नेपाल में राजनीतिक भूचाल:  धन शोधन मामले में नेपाल के पूर्व ऊर्जा, जल संसाधन और सिंचाई मंत्री दीपक खड़का गिरफ्तार, सात दिनों की हिरासत में भेजा</title>
                                    <description><![CDATA[नेपाल के धन शोधन विभाग (DMLI) ने पूर्व पीएम देउबा, ओली और प्रचंड के खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं की जांच तेज कर दी है। विरोध प्रदर्शनों के दौरान नेताओं के घरों से जले हुए नोट मिलने के बाद यह कार्रवाई शुरू हुई। पूर्व मंत्री दीपक खड़का को गिरफ्तार किया गया है, जबकि कई दिग्गज नेता फिलहाल देश से बाहर हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/nepals-former-energy-water-resources-and-irrigation-minister-deepak-khadka/article-148445"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/deepak-khadaka.png" alt=""></a><br /><p>नेपाल। नेपाल के धन शोधन जांच विभाग (डीएमएलआई) के अधिकारियों ने तीन पूर्व प्रधानमंत्रियों और दो पूर्व मंत्रियों से जुड़े धन शोधन के मामले की जांच तेज कर दी है। 'द काठमांडू पोस्ट' की एक रिपोर्ट के अनुसार यह कार्रवाई प्रारंभिक पूछताछ में उनके वित्तीय रिकॉर्ड और संपत्तियों में विसंगतियां पाए जाने के बाद की गई है। डीएमएलआई ने नेपाल पुलिस के केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीआईबी) के सहयोग से पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा, केपी शर्मा ओली और पुष्प कमल दहल के साथ-साथ पूर्व मंत्री आरज़ू राणा देउबा और दीपक खड़का के खिलाफ विस्तृत जांच शुरू की है।</p>
<p>दीपक खड़का पहले ऊर्जा, जल संसाधन और सिंचाई मंत्री के रूप में कार्य कर चुके हैं, उन्हें अदालत की अनुमति के बाद सात दिनों की हिरासत में भेज दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, विभाग ने हाल ही में जांच को आगे बढ़ाने के लिए पुलिस मुख्यालय से सहायता मांगी थी। इस अनुरोध पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने रविवार को नेपाली कांग्रेस के नेता खड़का को बुधानिलकंठ स्थित उनके आवास से गिरफ्तार कर लिया।</p>
<p>यह जांच 9 सितंबर 2025 को हुई तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाओं के बाद कई राजनीतिक हस्तियों के आवासों से जले हुए करेंसी नोटों के टुकड़े बरामद होने के बाद शुरू हुई थी। ये घटनाएं 'जेन-जेड' (युवा पीढ़ी) के नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शनों के एक दिन बाद हुई थीं। बाद में सामने आए दृश्यों में देउबा, खड़का और दहल के घरों पर जले हुए नोट देखे गए थे, जिनकी प्रयोगशाला विश्लेषण के माध्यम से असली मुद्रा के रूप में पुष्टि की गई थी। चल और अचल दोनों संपत्तियों के बारे में प्रारंभिक जानकारी एकत्र करने और घटनास्थलों का दौरा करने के बाद, अधिकारियों ने इस मामले को सीआईबी अधिकारियों के नेतृत्व में एक व्यापक जांच में बदल दिया है।</p>
<p>सूत्रों का संकेत है कि खड़का और जांच के दायरे में आए अन्य व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई एक साथ आगे बढ़ रही है। देउबा 1991 से सार्वजनिक पद पर हैं, लेकिन उन्होंने 5 मार्च को हुए प्रतिनिधि सभा के चुनाव में भाग नहीं लिया था। चुनावों से ठीक पहले, 25 फरवरी को वे चिकित्सा उपचार के लिए सिंगापुर चले गए थे। उनकी पत्नी आरज़ू राणा देउबा, जिन्होंने सितंबर के विरोध प्रदर्शनों तक विदेश मंत्री के रूप में कार्य किया था, 5 जनवरी को नई दिल्ली के लिए रवाना हुईं और तब से वापस नहीं लौटी हैं। इस दंपति के वर्तमान ठिकाने के बारे में अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 16:32:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>मध्य प्रदेश के पूर्व स्वास्थ्य अधिकारी के खिलाफ 9.78 करोड़ रूपये के धन शोधन का मामला दर्ज, जांच जारी</title>
                                    <description><![CDATA[प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मध्य प्रदेश के पूर्व स्वास्थ्य सेवा निदेशक डॉ. अमरनाथ मित्तल के खिलाफ भोपाल कोर्ट में शिकायत दर्ज की है। लोकायुक्त की प्राथमिकी के आधार पर हुई जांच में ₹2.38 करोड़ की आय से अधिक संपत्ति का खुलासा हुआ। आरोपी ने कथित तौर पर भ्रष्टाचार की कमाई को भोपाल और रायसेन की अचल संपत्तियों में निवेश कर मनी लॉन्ड्रिंग की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/money-laundering-case-of-rs-978-crore-registered-against-former/article-148319"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/ed1.png" alt=""></a><br /><p>मध्य प्रदेश। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मध्य प्रदेश सरकार के पूर्व स्वास्थ्य सेवा निदेशक डॉ. अमरनाथ मित्तल और अन्य के खिलाफ घन शोधन रोकथाम अधिनियम के प्रावधानों के तहत भोपाल की विशेष अदालत (पीएमएलए) में शिकायत दर्ज की है। ईडी के सूत्रों ने बताया कि लोकायुक्त भोपाल द्वारा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (संशोधित) की धारा 13(1)(ई) और 13(2) के तहत दर्ज प्राथमिकी के आधार पर अपनी जांच शुरू की थी। यह प्राथमिकी उन आरोपों से संबंधित है जिसमें डॉ. अमरनाथ मित्तल ने लोक सेवक के रूप में काम करते हुए अपनी आय के ज्ञात स्रोतों से कहीं अधिक संपत्ति अर्जित की, जिसकी कीमत लगभग 2.38 करोड़ रूपये थी।</p>
<p>पीएमएलए जांच के दौरान पता चला कि आरोपी ने कथित तौर पर भ्रष्टाचार के तरीकों से हासिल अपराध की कमाई को भोपाल और रायसेन जिलों में स्थित चल और अचल संपत्तियों में निवेश करके धन शोधन किया था। इस मामले में आगे की कार्रवाई जारी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 29 Mar 2026 12:32:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>आय से अधिक संपत्ति मामला: ईडी ने एसईसीएल अधिकारी की 83.24 लाख रुपये की संपत्ति कुर्क की, जांच जारी</title>
                                    <description><![CDATA[प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करते हुए SECL कोरबा के सहायक प्रबंधक प्रभाकर शुक्ला की ₹83.24 लाख की संपत्ति जब्त की है। जांच में सामने आया कि शुक्ला ने परिवार के बैंक खातों और बीमा पॉलिसियों के जरिए काली कमाई को सफेद करने का प्रयास किया। सीबीआई की एफआईआर के बाद अब PMLA के तहत शिकंजा कसा गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/disproportionate-assets-case-ed-continues-investigation-into-secl-officers-assets/article-148146"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/ed.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार को 'साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड' (एसईसीएल), कोरबा (छत्तीसगढ़) के सहायक प्रबंधक (सर्वेक्षण) प्रभाकर शुक्ला और उनके परिवार से जुड़ी 83.24 लाख रुपये की चल और अचल संपत्ति कुर्क करने की घोषणा की है। ईडी के भोपाल जोनल कार्यालय ने यह कार्रवाई सीबीआई (एसीबी), जबलपुर द्वारा प्रभाकर शुक्ला के खिलाफ आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर शुरू की थी। धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत की गई जांच में सामने आया कि एक मार्च 2008 से 30 नवंबर 2022 के बीच शुक्ला ने अपनी वैध आय से लगभग 39.83 प्रतिशत अधिक यानी 83.24 लाख रुपये की अवैध संपत्ति जुटाई।</p>
<p>जांच में यह भी खुलासा हुआ कि इस काली कमाई को बैंकिंग प्रणाली में नकद जमा के माध्यम से खपाया गया था। आरोपी ने अपनी पत्नी और बेटियों सहित परिवार के उन सदस्यों के बैंक खातों का उपयोग किया। इस कमाई को बाद में सावधि जमा, बीमा पॉलिसियों और भूखंडों जैसी अचल संपत्तियों की खरीद में निवेश कर वैध बनाने का प्रयास किया गया। सीबीआई पहले ही इस मामले में जबलपुर की विशेष अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है, जबकि ईडी की जांच फिलहाल जारी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Mar 2026 17:56:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को बड़ा झटका: ब्रिटेन हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका, भारत में प्रत्यर्पण का रास्ता साफ</title>
                                    <description><![CDATA[ब्रिटिश हाईकोर्ट ने भगोड़े कारोबारी नीरव मोदी की भारत प्रत्यर्पण रोकने वाली अपील को सिरे से खारिज कर दिया है। अदालत ने भारत सरकार के राजनयिक आश्वासनों को "विश्वसनीय और पर्याप्त" माना है। इस फैसले के साथ ही नीरव के भारत आने का रास्ता साफ हो गया है, क्योंकि कोर्ट ने असाधारण परिस्थितियों के अभाव में केस दोबारा खोलने से इनकार कर दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/big-blow-to-fugitive-diamond-trader-nirav-modi-uk-high/article-147990"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/nirav-modi.png" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली। ब्रिटेन के हाईकोर्ट ने भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को एक बड़ा झटका देते हुए उसके भारत में प्रत्यर्पण के खिलाफ अपील पर फिर से सुनवाई की मांग करने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने केंद्र सरकार के ताजा आश्वासनों को पर्याप्त और विश्वसनीय मानते हुए यह फैसला सुनाया। लंदन स्थित रॉयल कोर्ट ऑफ जस्टिस की खंडपीठ ने 25 मार्च 2026 को दिए फैसले में कहा कि अपील को दोबारा खोलने के लिए 'असाधारण परिस्थितियों' की आवश्यकता होती है, जो इस मामले में मौजूद नहीं हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि कानूनी मापदंडों के आधार पर अपील को फिर से शुरू करने का कोई ठोस कारण नहीं है। यह निर्णय लॉर्ड जस्टिस स्टुअर्ट-स्मिथ और जस्टिस जे ने सुनाया।</p>
<p>गौरतलब है कि नीरव मोदी की याचिका मुख्य रूप से 2025 के एक अन्य अदालती फैसले पर आधारित थी, जिसमें भारत में पूछताछ के दौरान खराब व्यवहार की आशंका जताई गई थी। ब्रिटिश अदालत ने सुनवाई करते कहा कि भारत सरकार ने सितंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच "व्यापक, विस्तृत और विश्वसनीय" आश्वासन दिए हैं कि प्रत्यर्पण के बाद नीरव मोदी से किसी भी प्रकार की पूछताछ नहीं की जाएगी। भारतीय राजनयिक आश्वासनों के अनुसार, सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय या किसी अन्य भारतीय जांच एजेंसी को ब्रिटेन के अधिकारियों की पूर्व सहमति के बिना नीरव मोदी से पूछताछ करने की अनुमति नहीं होगी। अदालत ने कहा कि ये वादे राजनयिक स्तर पर बाध्यकारी हैं और यह मानने का कोई आधार नहीं है कि भारत अपनी प्रतिबद्धताओं के विपरीत कार्य करेगा।</p>
<p>जजों ने कहा कि भले ही भारत के भीतर कानून लागू करने को लेकर कुछ सैद्धांतिक सवाल बाकी हों, लेकिन दिए गए आश्वासनों का व्यावहारिक असर इतना काफी है कि इससे किसी भी तरह के प्रतिबंधित बर्ताव का कोई भी असली खतरा खत्म हो जाता है। मामले को समाप्त करते हुए, अदालत ने फैसला दिया कि अपील को दोबारा खोलना न तो ज़रूरी था और न ही सही। अदालत ने नीरव मोदी की अर्ज़ी को खारिज कर दिया है और प्रत्यर्पण की प्रक्रिया को पहले के आदेशों के मुताबिक आगे बढ़ाने की इजाज़त दे दी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 15:48:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप पर ED का शिकंजा: 581.65 करोड़ रुपये की 31 संपत्तियां जब्त, तलाशी के बाद कार्रवाई का आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रिलायंस होम फाइनेंस मामले में ₹581.65 करोड़ की 31 संपत्तियां कुर्क । फेमा और पीएमएलए के तहत हुई इस कार्रवाई से समूह की कुल जब्त संपत्ति ₹16,310 करोड़ । जांच में बैंकों से जुटाए गए ₹11,000 करोड़ के सार्वजनिक धन के गबन और फर्जी संस्थाओं में हेराफेरी का खुलासा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/eds-noose-on-anil-ambanis-reliance-group-31-properties-worth/article-146350"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/anil-ambani-and-ed.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय ने गुरुवार को कहा कि उसने रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (आरएचएफएल) और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (आरसीएफएल) से संबंधित मामलों में 581.65 करोड़ रुपये मूल्य की 31 अचल संपत्तियां जब्त की है। ईडी ने कहा कि जब्त की गई संपत्तियां गोवा, केरल, कर्नाटक, पंजाब, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, झारखंड, महाराष्ट्र, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश और राजस्थान में स्थित जमीन हैं। यह कुर्की विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के प्रावधानों के तहत रिलायंस पावर लिमिटेड के मामले में छह मार्च, 2026 को की गई तलाशी कार्रवाई के बाद की गई है।</p>
<p>गौरतलब है कि, ईडी ने इससे पहले आरसीएफएल/आरएचएफएल और रिलायंस कम्युनिकेशंस से जुड़े बैंक धोखाधड़ी मामलों में 15,729 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां जब्त की थीं। नवीनतम कार्रवाई के साथ, रिलायंस अनिल अंबानी समूह से संबंधित कुल जब्त की गई संपत्तियां 16,310 करोड़ रुपये हो चुकी हैं। इसके अलावा, पीएमएलए और फेमा के तहत तलाशी अभियानों के दौरान, सावधि जमा, म्यूचुअल फंड और नकदी के रूप में 2.48 करोड़ रुपये की संपत्ति को संबंधित कानूनों के प्रावधानों के अंतर्गत फ्रीज या जब्त किया गया। ईडी ने फेमा की धारा 37ए के तहत रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के 13 बैंक खातों में जमा 77.86 करोड़ रुपये की राशि भी जब्त की।</p>
<p>ईडी ने केंद्रीय जांच ब्यूरो द्वारा भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी और 420 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(2) और धारा 13(1)(डी) के तहत आरसीएफएल और आरएचएफएल के विरुद्ध दर्ज की गई कई एफआईआर के आधार पर पीएमएलए जांच शुरू की। ये एफआईआर यस बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ महाराष्ट्र द्वारा दायर शिकायतों के आधार पर दर्ज की गई थीं।<br />ईडी की जांच से पता चला कि आरएचएफएल और आरसीएफएल ने कई बैंकों और वित्तीय संस्थानों से सार्वजनिक धन जुटाया था, जिसमें से 11,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि बाद में गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) में बदल गई।</p>
<p>एजेंसी के अनुसार, आरएचएफएल और आरसीएफएल द्वारा जुटाए गए धन को कथित रूप से रिलायंस समूह की विभिन्न कंपनियों जैसे रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड, रिलायंस पावर लिमिटेड, रिलायंस कम्युनिकेशंस और रिलायंस कैपिटल में स्थानांतरित किया गया था। ईडी ने आगे आरोप लगाया कि रिलायंस अनिल अंबानी समूह द्वारा नियंत्रित एवं प्रबंधित बड़ी संख्या में फर्जी या दिखावटी संस्थाओं के माध्यम से सार्वजनिक धन का गबन किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, इन संस्थाओं की वित्तीय स्थिति नगण्य थी और इनका कोई वास्तविक व्यावसायिक संचालन नहीं था। जांच से समूह के प्रवर्तकों और प्रमुख व्यक्तियों की गलत मंशा का संकेत मिला।</p>
<p>एजेंसी ने कहा कि उसने सार्वजनिक धन की हेराफेरी के लिए विभिन्न संस्थाओं और समूह के सदस्यों के माध्यम से कथित रूप से इस्तेमाल की जाने वाली कार्यप्रणाली की भी पहचान कर ली है। 11 मार्च, 2026 के अंतरिम कुर्की आदेश के माध्यम से जब्त की गई संपत्तियां अपराध से प्राप्त आय के मूल्य को दर्शाती हैं। ईडी के एक अधिकारी ने कहा, "ईडी वित्तीय अपराधों के अपराधियों के पीछे सक्रियता से लगी हुई है और अपराध की आय को उनके सही हकदारों को वापस दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।" मामले में आगे की जांच जारी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Mar 2026 13:23:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दुनिया के सबसे बड़े ड्रग लॉडर्स, जो अमेरिका से भी नहीं हुए कंट्रोल: पाब्लो एस्कोबार से एल मेंचो तक, दशकों से कानून व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं ड्रग लॉर्ड? </title>
                                    <description><![CDATA[मेक्सिको के कुख्यात माफिया 'एल मेंचो' के खात्मे ने वैश्विक ड्रग नेटवर्क को हिला दिया है। पाब्लो एस्कोबार से लेकर एल चापो तक, इन ड्रग लॉर्ड्स ने अरबों डॉलर के अवैध साम्राज्य खड़े किए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/worlds-biggest-drug-lords-who-could-not-be-controlled-even/article-144350"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/1200-x-60-px)-(4).png" alt=""></a><br /><div>जयपुर । दुनिया भर में ड्रग माफिया का नेटवर्क दशकों से कानून व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। कोलंबिया से मेक्सिको और अमेरिका तक फैले इन गिरोहों ने अवैध नशीले पदार्थों के कारोबार से अरबों डॉलर की काली कमाई की। कई बार इनकी ताकत इतनी बढ़ गई कि सरकारों और यहां तक कि महाशक्ति अमेरिका को भी सख्त कार्रवाई करनी पड़ी। मेक्सिको के सबसे बड़े ड्रग माफिया एल मेंचो को वहां की सिक्योरिटी फोर्स ने मौत के घाट उतार दिया है।  ऐसे में इस कार्रवाई ने सबका ध्यान खींचा है। एल मेंचो अकेला ड्रग माफिया नहीं है जो इतनी सुर्खियां बटोर रहा। हम बताने जा रहे दुनिया के टॉप ड्रग लॉर्ड्स के बारे में, जिन्होंने अपने कारनामों में चर्चा बटोरीं।</div>
<div> </div>
<div><strong>ड्रग लॉर्ड कौन होता है</strong></div>
<div> </div>
<div>सबसे पहले जानिए ड्रग लॉर्ड क्या होते हैं। ऐसा बॉस होता है जो ड्रग तस्करी नेटवर्क, संगठन का प्रभारी होता है। जब स्वतंत्र ड्रग लॉडर््स का एक समूह अपने मुनाफे को बढ़ाने और अवैध ड्रग व्यापार पर हावी होने के लिए एक दूसरे के साथ मिलीभगत करता है, तो वे एक संगठन बनाते हैं जिसे ड्रग कार्टेल कहा जाता है। </div>
<div> </div>
<div><strong>अवैध ड्रग व्यापार की प्रक्रिया आमतौर पर 4 चरणों में चलती है</strong></div>
<div> </div>
<div>उत्पादन: अफीम, कोका पौधे या सिंथेटिक लैब्स में निर्माण।</div>
<div>तस्करी: सीमा पार गुप्त मार्गों, समुद्री रास्तों, हवाई कार्गो या सुरंगों के जरिए सप्लाई।</div>
<div>वितरण नेटवर्क: स्थानीय गिरोहों और गैंग के माध्यम से थोक और खुदरा बिक्री।</div>
<div>मनी लॉन्ड्रिंग: अवैध कमाई को वैध व्यवसायों में निवेश कर सफेद धन में बदलना।</div>
<div> </div>
<div><strong>पाब्लो एक्सोबार </strong></div>
<div> </div>
<div>कार्टेल: मेडेलिन कार्टेल</div>
<div>समयकाल: 1970-1993</div>
<div>खासियत: 1980 के दशक में दुनिया की लगभग 80% कोकीन सप्लाई पर नियंत्रण।</div>
<div>संपत्ति: अनुमानित 25-30 अरब डॉलर।</div>
<div>रणनीति: राजनेताओं को रिश्वत, विरोधियों की हत्या, बम धमाके।</div>
<div>अंत: 2 दिसंबर 1993 को पुलिस मुठभेड़ में मारा गया।</div>
<div> </div>
<div>पाब्लो एस्कोबार का जन्म 1 दिसंबर 1949 में हुआ था। 1989 में, फोर्ब्स पत्रिका ने एस्कोबार को दुनिया का सातवां सबसे अमीर आदमी घोषित किया। इसकी अनुमानित निजी संपत्ति 30 अरब अमेरिकी डॉलर थी। 1986 में, उसने कोलंबियाई राजनीति में एंट्री का प्रयास किया। </div>
<div> </div>
<div><strong>एल चापो </strong></div>
<div> </div>
<div>कार्टेल: सिनालोआ कार्टेल</div>
<div>जन्म: 1957</div>
<div>खासियत: सुरंगों और समुद्री मार्गों से ड्रग तस्करी।</div>
<div>जेल ब्रेक: 2001 और 2015 में हाई-सिक्योरिटी जेल से फरार।</div>
<div>समय काल : 1988 के बाद का समय </div>
<div> </div>
<div>सबसे पहले बात दुनिया के सबसे खतरनाक शातिर ड्रग माफिया की, जिसने जेल में रहकर अपनी दहशत फैलाई। जोआक्किन आर्किवाल्डो एल चापो जिसे दुनिया ड्रग लॉर्ड के नाम से जानती है। मेक्सिको के प्रांत सिनालोआ में 4 अप्रैल 1957 को एल चापो का जन्म हुआ। पिता गांजे और अफीम की खेती करते थे, यानी पैदा होने के साथ ही ड्रग से इसका नाता था। एल चापो भी अपने पिता के साथ खेती में काम करता। </div>
<div> </div>
<div><strong>ड्रग डीलर अमाडो कैरिलो</strong></div>
<div> </div>
<div>जन्म : 1956 में</div>
<div>उपनाम: लॉर्ड ऑफ द स्काईज</div>
<div>कार्टेल: जुआरेज कार्टेल</div>
<div>खासियत: जेट विमानों से कोकीन तस्करी।</div>
<div>संपत्ति: 20-25 अरब डॉलर अनुमानित।</div>
<div>अंत: 1997 में प्लास्टिक सर्जरी के दौरान मौत।</div>
<div> </div>
<div>उसने ड्रग कारोबार से 25 अरब डॉलर से ज्यादा की संपत्ति अर्जित की। उसे आसमान का स्वामी कहा जाता था क्योंकि वह कोलंबियाई कोकीन को मेक्सिको के विभिन्न हवाई अड्डों तक पहुंचाने के लिए जेट विमानों का इस्तेमाल करता था। </div>
<div> </div>
<div><strong>ओसिएल काडेर्नास गुइलेन </strong></div>
<div> </div>
<div>कार्टेल: गल्फ कार्टेल</div>
<div>खास कदम: लॉस जेटास नामक सशस्त्र विंग का गठन।</div>
<div>गिरफ्तारी: 2003, बाद में अमेरिका प्रत्यर्पित।</div>
<div>प्रभाव: कार्टेल को अर्धसैनिक ताकत में बदला।</div>
<div> </div>
<div>ओसिएल काडेर्नास गुइलेन का जन्म 18 मई 1967 में हुआ। वह भी मैक्सिको का बड़ा ड्रग लॉर्ड बना। गुइलेन ने मैक्सिकन सेना की विशेष फोर्स यूनिट के कुछ सदस्यों को अपने साथ मिलाकर कार्टेल की सशस्त्र शाखा का गठन किया। 1999 में, गुइलेन और गल्फ कार्टेल के बंदूकधारियों ने अमेरिका के खिलाफ मोर्चा संभाला। इसी के बाद इस कार्टेल पर एक्शन शुरू हुआ। </div>
<div> </div>
<div><strong>जॉर्ज अल्बर्टो रोड्रिगेज</strong></div>
<div> </div>
<div>कार्टेल: कैली कार्टेल</div>
<div>खासियत: कम हिंसा, ज्यादा रिश्वत और राजनीतिक घुसपैठ।</div>
<div>मौत: 2022 में जेल में।</div>
<div> </div>
<div>जन्म अर्जेंटीना में हुआ था और वह प्यूर्टो रिको और कोलंबिया मूल का था। वह कैली कार्टेल के एक भंग हो चुके सीक्रेट गैंग, 400 आपराधिक संगठन का मुखिया था। 12 साल की उम्र में वो ड्रग्स के धंधे में उतरा। 14 साल की उम्र में उसने घर छोड़ दिया, छह साल के भीतर ही रोड्रिगेज ने कोलंबिया से अमेरिका के लगभग हर राज्य में ड्रग्स की तस्करी करके 30 करोड़ अमेरिकी डॉलर से अधिक की संपत्ति जमा कर ली थी। उसे 6 जुलाई, 1990 को फ्लोरिडा के टल्लाहस्सी में गिरफ्तार किया गया। </div>
<div> </div>
<div><strong>मेक्सिको</strong></div>
<div> </div>
<div>कार्टेल: जलिस्को न्यू जेनरेशन कार्टेल (उखठॠ)</div>
<div>खासियत: फेंटेनिल और सिंथेटिक ड्रग्स का बड़ा नेटवर्क।</div>
<div>ताकत: अत्याधुनिक हथियारों से लैस गिरोह।</div>
<div>स्थिति: लंबे समय तक अमेरिका की मोस्ट वांटेड सूची में।</div>
<div> </div>
<div><strong>कोलंबिया</strong></div>
<div> </div>
<div>कार्टेल: कैली कार्टेल</div>
<div>खासियत: कम हिंसा, ज्यादा रिश्वत और राजनीतिक घुसपैठ।</div>
<div>गिरफ्तारी: 1995, बाद में अमेरिका भेजा गया।</div>
<div>मौत: 2022 में जेल में।</div>
<div> </div>
<div><strong>कोलंबिया/अमेरिका</strong></div>
<div> </div>
<div>उपनाम: कोकीन गॉडमदर</div>
<div>नेटवर्क: मियामी ड्रग युद्धों में सक्रिय।</div>
<div>खासियत: महिला ड्रग डॉन के रूप में बदनाम।</div>
<div>अंत: 2012 में हत्या।</div>
<div> </div>
<div><strong>अमेरिका</strong></div>
<div> </div>
<div>खासियत: वियतनाम युद्ध के दौरान गोल्डन ट्रायंगल से हेरोइन आयात।</div>
<div>रणनीति: बिचौलियों को हटाकर सीधे सप्लाई।</div>
<div>सजा: 1976 में गिरफ्तार, बाद में सजा कम हुई।</div>
<div> </div>
<div><strong>मेक्सिको</strong></div>
<div> </div>
<div>कार्टेल: ग्वाडालाजारा कार्टेल</div>
<div>मामला: अमेरिकी ऊएअ एजेंट की हत्या में शामिल।</div>
<div>गिरफ्तारी: 1985, 2013 में रिहा, फिर 2022 में दोबारा गिरफ्तार।</div>
<div> </div>
<div><strong>म्यामार/थाईलैंड</strong></div>
<div> </div>
<div>क्षेत्र: गोल्डन ट्रायंगल</div>
<div>खासियत: 1970-80 के दशक में दुनिया की बड़ी अफीम सप्लाई।</div>
<div>स्थिति: 1996 में आत्मसमर्पण, 2007 में मृत्यु।</div>
<div> </div>
<div><strong>भारत के लिए क्या सबक ?</strong></div>
<div> </div>
<div>ड्रग्स का अवैध व्यापार सिर्फ लैटिन अमेरिका तक सीमित नहीं है। एशिया में गोल्डन क्रेसेंट (अफगानिस्तान-पाकिस्तान-ईरान) और गोल्डन ट्रायंगल (म्यांमार-लाओस-थाईलैंड) भी बड़े स्रोत रहे हैं। भारत में भी सीमावर्ती राज्यों में तस्करी के मामले सामने आते हैं। एजेंसियां लगातार कार्रवाई कर रही हैं, लेकिन नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय होने से चुनौती बड़ी है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Feb 2026 11:27:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जम्मू-कश्मीर में हवाला रैकेट का भंडाफोड़: 8,000 अकाउंट फ्रीज, साइबर अपराध की कड़ी में म्यूल अकाउंट की अहम भूमिका</title>
                                    <description><![CDATA[सुरक्षा एजेंसियों ने जम्मू-कश्मीर में 8,000 से अधिक 'म्यूल अकाउंट' फ्रीज कर बड़े डिजिटल हवाला नेटवर्क का भंडाफोड़ किया। इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी और देश विरोधी गतिविधियों की फंडिंग के लिए किया जा रहा था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/hawala-racket-busted-in-jammu-and-kashmir-8000-accounts-frozen/article-143321"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/1200-x-600-px)-(2)7.png" alt=""></a><br /><p>जम्मू कश्मीर। जांचकर्ताओं के मुताबिक म्यूल अकाउंट साइबर अपराध की श्रृंखला का सबसे कमजोर, लेकिन बेहद जरूरी हिस्सा होते हैं। इनके बिना अपराधियों के लिए चोरी का पैसा क्रिप्टोकरेंसी जैसी डिजिटल संपत्तियों में बदलना मुश्किल हो जाता है। बढ़ते खतरे को देखते हुए केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने जम्मू-कश्मीर पुलिस और अन्य प्रवर्तन एजेंसियों को बैंकों के साथ मिलकर ऐसे खातों पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।</p>
<p>म्यूलर की तलाश तेज</p>
<p>एजेंसियां उन बिचौलियों की भी तलाश कर रही हैं, जिन्हें म्यूलर कहा जाता है। ये लोग वित्तीय धोखाधड़ी की इस श्रृंखला में अहम भूमिका निभाते हैं। अधिकारियों के अनुसार, जब 2017 में एनआईए ने क्षेत्र में अवैध फंडिंग पर सख्ती शुरू की, तो देश विरोधी नेटवर्क ने अपने तरीके बदल लिए। पारंपरिक तरीकों की जगह अब कथित तौर पर डिजिटल हवाला प्रणाली अपनाई गई है।</p>
<p>डिजिटल हवाला का नया तरीका</p>
<p>इस नए मॉडल में म्यूल अकाउंट धारकों और म्यूलरों को मिलने वाला कमीशन राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए हानिकारक गतिविधियों में लगाया जा सकता है। म्यूलर सीधे ठगी के शिकार लोगों से संपर्क नहीं करता और न ही फर्जी लिंक भेजता है, लेकिन वह ऐसे खातों की व्यवस्था करता है जिनसे ठग चोरी का पैसा जमा और ट्रांसफर करते हैं। जांच में सामने आया है कि एक ठग एक समय में 10 से 30 म्यूल खातों का इस्तेमाल कर सकता है। कई मामलों में शेल कंपनियों के नाम पर खाते खोले जाते हैं, जिनसे एक दिन में 40 लाख रुपये तक का लेनदेन हो जाता है, ताकि शक न हो।</p>
<p>खाताधारक भी जिम्मेदार</p>
<p>सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि भले ही म्यूल अकाउंट धारक सीधे ठगी नहीं करते, लेकिन वे मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल माने जाएंगे। कमीशन लेकर अपने खाते सौंपना अंतरराष्ट्रीय अपराध नेटवर्क को मजबूत बनाता है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, पूरा ठगी तंत्र इन्हीं खातों पर निर्भर है। अगर पैसा पहुंचाने का जरिया ही न हो, तो ठगी शुरू में ही फेल हो जाएगी।</p>
<p>घाटी में वीपीएन पर रोक</p>
<p>अधिकारियों के मुताबिक क्षेत्रीय पुलिस पहले ही घाटी में वीपीएन के इस्तेमाल पर रोक लगा चुकी है, क्योंकि इसका उपयोग आतंकी और अलगाववादी तत्व पहचान छिपाने के लिए करते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/hawala-racket-busted-in-jammu-and-kashmir-8000-accounts-frozen/article-143321</link>
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                <pubDate>Mon, 16 Feb 2026 11:17:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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