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                            <item>
                <title>दुनिया इतिहास के सबसे बड़े ऊर्जा संकट की ओर बढ़ रही, डीजल और जेट ईंधन की कमी के खतरे की दी चेतावनी : दिमित्रीव</title>
                                    <description><![CDATA[रूसी विशेषज्ञ किरिल दिमित्रीव ने चेतावनी दी है कि दुनिया इतिहास के सबसे बड़े ऊर्जा संकट की ओर बढ़ रही है। होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण तेल की कीमतें $150 प्रति बैरल तक जा सकती हैं। ईंधन की कमी से यूरोप में उड़ानें रद्द होने और वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/kirill-dmitriev-warned-of-the-danger-of-diesel-and-jet/article-152524"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/vladimir.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। रूसी प्रत्यक्ष निवेश कोष (आरडीआईएफ) के सीईओ और अन्य देशों के साथ निवेश एवं आर्थिक सहयोग के लिए राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के विशेष प्रतिनिधि किरिल दिमित्रीव ने कहा कि दुनिया इतिहास के सबसे बड़े ऊर्जा संकट की ओर बढ़ रही है और उसे इसका एहसास भी नहीं है। दिमित्रीव ने एक्स पर टिप्पणी करते हुए कहा, "दुनिया इतिहास के सबसे बड़े ऊर्जा संकट की ओर नींद में चलती जा रही है और अब जाकर कुछ समझदार लोग इस पर ध्यान देना शुरू कर रहे हैं।" उन्होंने साथी निवेशक एरिक नटाल के ब्लूमबर्ग को दिए एक साक्षात्कार पर टिप्पणी की, जिसमें उन्होंने भविष्यवाणी की थी कि तेल की कीमत जल्द ही 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाएगी।</p>
<p>इससे पहले, अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के प्रमुख फातिह बिरोल ने यूरोप में डीजल और जेट ईंधन की कमी के खतरे की चेतावनी दी थी।इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के महानिदेशक विलियम वाल्श ने बाद में कहा कि जेट ईंधन की कमी के कारण मई के अंत तक यूरोप में उड़ानें रद्द होना शुरू हो सकता है जैसा कि पहले से ही कुछ एशियाई देशों में हो रहा है।</p>
<p>ईरान को लेकर बढ़ते तनाव के कारण फारस की खाड़ी से वैश्विक बाजारों तक तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस की आपूर्ति का एक प्रमुख मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य प्रभावी रूप से अवरुद्ध हो गया है और इससे तेल निर्यात और उत्पादन भी प्रभावित हुआ है। इस अवरोध के कारण, दुनिया के अधिकांश देशों में ईंधन एवं औद्योगिक उत्पादों की कीमतें बढ़ रही हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 May 2026 14:33:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ट्रंप की बड़ी घोषणा : युद्धविराम टूटा तो होर्मुज जलडमरूमध्य में होंगे लगातार हमले, नौकाओं, बारूदी सुरंग बिछाने वाले जहाजों और अन्य समुद्री संसाधनों को बनाएंगे निशाना</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका ने ईरान के विरुद्ध नई रणनीति तैयार की है, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य के समुद्री संसाधनों को निशाना बनाया जाएगा। वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे दबाव के बीच, अमेरिका नौसैनिक नाकेबंदी और विशिष्ट सैन्य ठिकानों पर हमलों पर विचार कर रहा है। क्षेत्र में तनाव चरम पर है क्योंकि ईरान की मिसाइल क्षमता अब भी सक्रिय है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/trumps-big-announcement-if-the-ceasefire-is-broken-there-will/article-151582"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/होर्मुज-जलडमरू.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के सैन्य अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि यदि मौजूदा संघर्षविराम समाप्त होता है तो ईरान की उपस्थिति को लक्ष्य बनाते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य में हमलों की नयी योजनाएं तैयार की जा रही हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्तावित योजनाएं पहले की रणनीति से अलग हैं, जिसमें हमले मुख्य रूप से ईरान के अंदरूनी क्षेत्रों तक सीमित थे। नई रणनीति में जलमार्गों पर ध्यान केंद्रित किया गया है, विशेष रूप से तेज गति वाली नौकाओं, बारूदी सुरंग बिछाने वाले जहाजों और अन्य समुद्री संसाधनों को निशाना बनाने पर जोर दिया जा रहा है।</p>
<p>रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान द्वारा जलडमरूमध्य को बंद किए जाने से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा है और इससे अमेरिका की आर्थिक नीतियों पर भी दबाव बढ़ा है। सात अप्रैल से लागू युद्धविराम अभी औपचारिक रूप से कायम है। सूत्रों के अनुसार, केवल हवाई हमलों के जरिए जलमार्ग को शीघ्र खोल पाना कठिन हो सकता है, क्योंकि ईरान की तटीय रक्षा प्रणाली का बड़ा हिस्सा अब भी सक्रिय है और उसके पास पर्याप्त संख्या में छोटी नौकाएं मौजूद हैं।</p>
<p>इसके साथ ही अमेरिकी योजनाकार ईरान के ऊर्जा ढांचे और अन्य महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों पर हमलों की संभावना पर भी विचार कर रहे हैं, जिसे संभावित रूप से स्थिति को और गंभीर बना देने वाला कदम माना जा रहा है। एक अन्य विकल्प के तहत कुछ विशिष्ट सैन्य अधिकारियों को निशाना बनाने पर भी विचार किया जा रहा है, जिनमें अहमद वाहिदी का नाम शामिल बताया गया है।</p>
<p>अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने हाल ही में स्वीकार किया था कि युद्धविराम के दौरान ईरान ने अपनी कुछ सैन्य क्षमताओं को पुनर्स्थापित किया है, जिन्हें समझौता विफल होने की स्थिति में निशाना बनाया जा सकता है। अमेरिकी आकलनों के अनुसार, ईरान की लगभग आधी मिसाइल प्रक्षेपण क्षमता और बड़ी संख्या में हमलावर ड्रोन अभी भी सुरक्षित हैं। वर्तमान में क्षेत्र में अमेरिका के 19 नौसैनिक पोत तैनात हैं, जिनमें दो विमानवाहक पोत शामिल हैं, जबकि हिंद महासागर में सात अन्य पोत मौजूद हैं।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, 13 अप्रैल से अमेरिकी बल ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकेबंदी लागू कर रहे हैं और कई जहाजों को रोका या उनकी जांच की गई है। विश्लेषकों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने के ईरान के कदम का आकलन पहले कम किया गया था, जबकि यह स्थिति क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 16:33:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ईरान-अमेरिका वार्ता टूटने की संभावना के बीच ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, अमेरिकी बलों ने ईरानी ज़हाज की किया जब्त</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका-ईरान वार्ता टूटने और ओमान की खाड़ी में जहाज जब्त होने से वैश्विक बाजार में हड़कंप मच गया है। ब्रेंट क्रूड 6.3% बढ़कर $96 प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जबकि यूरोपीय गैस कीमतें 10% उछलकर $515 के ऊपर हैं। कूटनीतिक अस्थिरता और नाकाबंदी ने दुनिया भर में ऊर्जा संकट गहराने की आशंका बढ़ा दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/brent-crude-oil-prices-rise-amid-possibility-of-iran-us-talks/article-151109"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/crude-oil.png" alt=""></a><br /><p>मास्को। ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत टूटने की संभावना के संकेतों की वजह से ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है और वह 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच रही हैं, जबकि यूरोपीय गैस की कीमतें लगभग 10 प्रतिशत उछलकर 515 डॉलर प्रति हजार घन मीटर से ऊपर पहुंच गयी हैं। यह जानकारी व्यापारिक आकड़ों में दी गयी। ग्रीनविच मानक समय के अनुसार रात 10:15 बजे तक ब्रेंट कच्चे तेल के वायदा भाव में 6.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो 96 डॉलर प्रति बैरल से अधिक हो गया। लंदन स्थित आईसीई एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, यूरोपीय गैस की कीमतों में करीब 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है वह अब 515 डॉलर प्रति हजार घन मीटर से अधिक हो चुकी हैं।</p>
<p>टीटीएफ (नीदरलैंड में स्थित यूरोप का सबसे बड़ा केंद्र) सूचकांक पर मई के वायदा सौदे रात 09:59 बजे 518 डॉलर प्रति हजार घन मीटर पर कारोबार कर रहे थे, जो पिछले कारोबारी दिन की 472.7 डॉलर की कीमत से 9.6 प्रतिशत अधिक है। रविवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की थी कि उनके प्रतिनिधि ईरान पर बातचीत के लिये इस्लामाबाद जा रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज ने दावा किया कि अगले 24 घंटों के भीतर अमेरिका-ईरान वार्ता फिर से शुरू होगी। हालांकि, बाद में आईआरएनए ने सूचना दी कि ईरान ने अमेरिका के साथ दूसरे दौर की बातचीत में शामिल होने से इनकार कर दिया है। इसके अतिरिक्त, सोमवार को अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ओमान की खाड़ी में अमेरिकी नाकाबंदी को तोड़ने का प्रयास कर रहे एक ईरानी व्यापारिक जहाज को जब्त करने की पुष्टि की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 17:34:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कच्चा तेल फिर 95 डॉलर के करीब, जानें दाम बढ़ने के कारण, थोक मुद्रास्फीति मार्च में बढ़कर 3.88 प्रतिशत पर पहुंची</title>
                                    <description><![CDATA[होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी हस्तक्षेप और ईरान वार्ता विफल होने से कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने की आशंका से दाम $95 प्रति बैरल के पार पहुंचने की कगार पर हैं। वैश्विक तनाव और ताज़ा प्रतिबंधों ने ऊर्जा बाज़ार में अस्थिरता बढ़ा दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/crude-oil-again-close-to-95-dollars-due-to-increase/article-150472"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/crude.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल बुधवार को 95 डॉलर प्रति बैरल करीब पहुंच गया। हार्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका हस्तक्षेप के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति श्रृंखला की बहाली में एक बार फिर संशय पैदा हो गया है। इससे इसके दामों पर काफी असर पड़ा। अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता विफल होने के बाद कच्चे तेल के दामों में बढ़ोतरी होने की उम्मीद लगाई जा रही है। अमेरिका की ताजा घोषणा से तनाव बढ़ने के कारण कच्चा तेल फिर 95 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर निकलने की संभावना है। </p>
<p>कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के कारण मार्च में थोक मूल्य आधारित मुद्रास्फीति की दर बढ़कर 3.88 प्रतिशत पर पहुंच गयी। पिछले साल मार्च में यह आंकड़ा 2.25 प्रतिशत और इस साल फरवरी में 2.13 प्रतिशत था। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के बुधवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, मार्च में कच्चे तेल की कीमत सालाना आधार पर 51.57 प्रतिशत बढ़ी। कच्चे तेल में जबरदस्त उछाल के कारण प्राथमिक वस्तु वर्ग में थोक महंगाई की दर 6.36 प्रतिशत दर्ज की गयी।</p>
<p>थोक मुद्रास्फीति में सबसे अधिक 64 प्रतिशत का भारांश रखने वाले विनिर्मित वस्तुओं के वर्ग में भी मुद्रास्फीति एक साल पहले के 3.21 प्रतिशत से बढ़कर 3.39 प्रतिशत पर पहुंच गयी। तिलहनों के थोक दाम भी सालाना आधार पर 22.81 प्रतिशत बढ़े और महंगाई बढ़ाने में इनका भी योगदान रहा।पेट्रोल और डीजल के दाम में साल-दर-साल क्रमशः 2.50 प्रतिशत और 3.26 प्रतिशत की वृद्धि हुई। एलपीजी की थोक कीमत हालांकि एक साल पहले के मुकाबले 1.54 प्रतिशत कम रही।</p>
<p>खाने-पीने की वस्तुओं में अनाजों के दाम 2.51 प्रतिशत कम हुए हैं। सब्जियों की मुद्रास्फीति 1.45 प्रतिशत दर्ज की गयी है। फलों के दाम 2.11 प्रतिशत और दूध के 2.62 प्रतिशत बढ़े हैं। अंडा, मांस और मछली की महंगाई दर 6.63 प्रतिशत रही। गत 28 फरवरी को शुरू हुए पश्चिम एशिया संकट के कारण कच्चे तेल के दाम में तेज उछाल देखा गया है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में इस संकट से पहले कच्चा तेल 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था जो अब बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब है। इससे देश में भी थोक महंगाई बढ़ी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 13:23:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पश्चिम एशिया संकट के बीच संयुक्त राष्ट्र की अपील : होर्मुज़ जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखना जरूरी, गुटेरेस ने कहा-मौजूदा संघर्ष का कोई सैन्य समाधान नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता और अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान की अपील की है। उन्होंने कूटनीतिक समाधान पर जोर देते हुए कहा कि समुद्री व्यापार में व्यवधान वैश्विक अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है। यूएन ने पाकिस्तान और सऊदी अरब के मध्यस्थता प्रयासों की सराहना करते हुए शांति वार्ता जारी रखने का आह्वान किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/uns-appeal-amid-west-asia-crisis-it-is-necessary-to/article-150405"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(13).png" alt=""></a><br /><p>न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच सभी पक्षों से होर्मुज़ जलडमरूमध्य में अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार नौवहन की स्वतंत्रता का सम्मान बनाए रखने की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि इस जलडमरूमध्य में समुद्री व्यापार में व्यवधान का असर क्षेत्र से बाहर भी पड़ा है और इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था में अस्थिरता तथा विभिन्न क्षेत्रों में असुरक्षा बढ़ी है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि मौजूदा संघर्ष का कोई सैन्य समाधान नहीं है और कूटनीतिक प्रयासों को जारी रखना जरूरी है। उन्होंने इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई वार्ता को "सकारात्मक कदम" बताते हुए कहा कि युद्धविराम बनाए रखना और उल्लंघनों को रोकना आवश्यक है।</p>
<p>एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि गहरे मतभेदों के कारण समझौता तुरंत संभव नहीं है, लेकिन रचनात्मक बातचीत जारी रहनी चाहिए। उन्होंने पाकिस्तान, सऊदी अरब, मिस्र और तुर्किये सहित मध्यस्थ देशों के प्रयासों की सराहना की। संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी कि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में व्यवधान से लगभग 20,000 नाविक प्रभावित हुए हैं और वैश्विक व्यापार, खाद्य सुरक्षा तथा आपूर्ति शृंखलाओं पर गंभीर असर पड़ा है। संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न एजेंसियां सुरक्षित नौवहन सुनिश्चित करने के लिए तंत्र विकसित करने में जुटी हैं, जबकि महासचिव के विशेष दूत क्षेत्र में बातचीत जारी रखे हुए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Apr 2026 18:26:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ट्रम्प ने फिर दी चेतावनी : होर्मुज खोलने के लिए ईरान के पास सिर्फ 48 घंटे, फिर कहर बरपेगा</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) खोलने के लिए ईरान को दी गई 10 दिन की मोहलत खत्म होने से पहले 48 घंटे का आखिरी अल्टीमेटम दिया है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि समझौता न होने पर ईरान पर 'कहर' टूटेगा। इस मार्ग के बंद होने से वैश्विक तेल और एलएनजी आपूर्ति ठप हो गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/trump-again-warns-that-iran-has-only-48-hours-to/article-149151"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/donald-trump.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के लिए ईरान को दिया गया 10 दिन का समय खत्म होने में अब सिर्फ 48 घंटे बचे हैं। ईरान-अमेरिका के बीच समझौता न होने या होर्मुज न खुलने की स्थिति में ईरान पर कहर टूट पड़ेगा।  उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, याद है जब मैंने ईरान को समझौता करने या होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के लिए 10 दिन का समय दिया था। समय निकलता जा रहा है। सिर्फ 48 घंटे बाद ईरान पर कहर टूट पड़ेगा। गौरतलब है कि होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से दुनियाभर में तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) और कच्चे तेल का निर्यात प्रभावित हुआ है। ईरान ने कहा है कि वह अमेरिका, इजरायल और इनके सहयोगियों के जहाजों को होर्मुज से पार नहीं होने देगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Apr 2026 13:37:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारतीय कंपनियों को भी झटका: ईरान से लड़ाई के बीच ट्रंप ने किया टैक्स नियमों में बड़ा बदलाव, मेटल और फार्मा सेक्टर पर लगाया 50% टैरिफ</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्टील और एल्युमीनियम पर 50% टैरिफ बरकरार रखते हुए नए आयात नियम लागू किए हैं। 15% से अधिक धातु वाले उत्पादों पर 25% टैक्स लगेगा। 2027 तक प्रभावी इन नियमों का उद्देश्य अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ाना है, जिससे भारत से होने वाला निर्यात महंगा होना तय है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/indian-companies-also-got-a-shock-amid-the-fight-with/article-148928"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/trump.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय कंपनियों को झटका देते हुए बड़ा ऐलान किया है। ट्रंप ने स्टील, एल्युमीनियम और कॉपर के आयात से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए कहा है कि कच्चे स्टील और एल्युमीनियम पर 50% टैरिफ पहले की तरह ही लागू रहेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, ये कदम अमेरिकी इंडस्ट्री को मजबूत बनाने और टैक्स सिस्टम को आसान करने के लिए उठाया गया है। इसके एक दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने राष्ट्र को संबोधित किया था, जिसमें उन्होंने ईरान युद्व को समाप्त करने की बात कही थी। </p>
<p>हाल ही में, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति ट्रंप को झटका देते हुए पहले लगाए गए टैरिफ को पूरी तरह से रद्द कर दिया था, लेकिन अब नए नियमों के तहत जो प्रोडक्ट सीधे मेटल नहीं हैं, बल्कि उनसे बने हुए है यानि किसी प्रोडक्ट में स्टील, एल्युमीनियम या कॉपर की मात्रा 15% से कम है, तो उस पर अब से टैरिफ नही लगेगा। अगर किसी भी प्रोटक्ट को बनाने में इन सभी धातुओं की मात्रा 15 प्रतिशत से अधिक है तो उस पर करीब 25 प्रतिशत टैरिफ लगेगा। नए ​नियमों के अनुसार, कुछ खास इंडस्ट्रियल मशीनों और इलेक्ट्रिकल उपकरणों पर टैरिफ को घटाकर 15% किया गया है। </p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि नए नियम साल 2027 तक लागू रहेंगे। इसका मकसद केवल और केवल अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना है और कुछ नहीं। इसके अलावा ट्रंप ने कहा कि यदि को प्रोडक्ट विदेश में बना हुआ है और उसमें इन सभी धातुओं की मात्रा मिली हुई है तो उस पर 10 प्रतिशत टैरिक लगेगा। अमेरिका के इस नए नियम का असर अब भारत पर भी दिखाई देगा। नए नियमों के अनुसार, भारत जैसे देशों के लिए अमेरिकी बाजार में भी निर्यात महंगा हो सकता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 11:33:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईरान युद्ध तनाव : ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री अल्बनीस ने ट्रंप से पूछा–अब और क्या हासिल करना बाकी है? युद्ध जितने लंबे समय तक चलेगा, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर उतना ही पड़ेगा गहरा प्रभाव</title>
                                    <description><![CDATA[ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीस ने ईरान पर बढ़ते हमलों पर चिंता जताते हुए युद्ध विराम की अपील की है। उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप के सैन्य उद्देश्यों पर सवाल उठाते हुए कहा कि युद्ध लंबा खिंचने से वैश्विक अर्थव्यवस्था और ईंधन आपूर्ति ठप हो सकती है। ऑस्ट्रेलिया ने ईंधन संकट से निपटने के लिए करों में कटौती और रणनीतिक चर्चा शुरू कर दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/iran-war-tension-australian-prime-minister-albanese-asked-trump-%E2%80%93/article-148842"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/aust.png" alt=""></a><br /><p>कैनबरा। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीस ने गुरुवार को ईरान युद्ध में तनाव कम करने की अपील करते हुए चेतावनी दी है और यह सवाल उठाया है कि ईरान की नौसेना और वायु सेना को कमजोर करने सहित प्रमुख सैन्य उद्देश्य हासिल कर लिए गए हैं, लेकिन अभी भी यह स्पष्ट नहीं है कि अब और क्या हासिल किया जाना बाकी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्र के नाम संबोधन पर प्रतिक्रिया देते हुए  ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री अल्बनीस ने यहां एक एक भाषण के दौरान कहा, "अब जब वे उद्देश्य प्राप्त कर लिए गए हैं, तो यह स्पष्ट नहीं है कि और क्या हासिल करने की आवश्यकता है।" उन्होंने आगे कहा कि युद्ध जितने लंबे समय तक चलेगा, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर उतना ही गहरा प्रभाव पड़ेगा। ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री अल्बनीस ने इस बात पर जोर दिया कि अमेरिका-इजरायल के हमलों ने पहले ही ईरान की वायु सेना, नौसेना और सैन्य औद्योगिक आधार को 'क्षतिग्रस्त' कर दिया है।</p>
<p>ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी ट्रंप के उस 19 मिनट के टेलीविजन संबोधन के बाद आई है, जिसमें उन्होंने ईरान के खिलाफ "दो से तीन सप्ताह और" तक "अत्यधिक कठोर" हमले जारी रखने का संकल्प लिया था। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा था कि वाशिंगटन का उद्देश्य ईरान की सेना को कुचलना, क्षेत्रीय सशस्त्र समूहों को इस्लामी गणराज्य का समर्थन समाप्त करना और उसे परमाणु बम प्राप्त करने से रोकना है। ट्रंप ने कहा, "मुझे यह कहते हुए खुशी हो रही है कि ये मुख्य रणनीतिक उद्देश्य पूर्ण होने के करीब हैं।"</p>
<p>इस बीच, हॉर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से तेल आपूर्ति बाधित होने से दुनिया भर में चिंताएं बढ़ गई हैं। ऑस्ट्रेलिया, खुद आयातित ईंधन पर बहुत अधिक निर्भर है और उसके पास पेट्रोल का लगभग 37 दिनों का भंडार है। उसने ईंधन करों में कटौती करके और व्यवसायों को 680 मिलियन डॉलर के ऋण का वादा करके आर्थिक झटके को कम करने के कदम उठाए हैं। रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्लेस ने कहा कि कैनबरा हॉर्मुज जलडमरूमध्य के रणनीतिक मार्ग को फिर से खोलने के संभावित प्रयासों पर ब्रिटेन और फ्रांस सहित सहयोगियों के साथ चर्चा कर रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Apr 2026 15:05:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के बयान के बाद शेयर बाजारों में गिरावट, सेंसेक्स 1,500 अंक लुढ़का, इन शेयरों पर रख़े नज़र</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान पर हमले तेज करने के बयान ने निवेशकों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। गुरुवार को सेंसेक्स 1500 अंक से अधिक लुढ़क गया, जबकि निफ्टी में 2% की भारी गिरावट दर्ज की गई। युद्ध समाप्ति की जगह तनाव बढ़ने की आशंका से बैंकिंग, ऑटो और अडानी पोर्ट्स जैसे शेयरों में चौतरफा बिकवाली हावी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/after-us-president-trumps-statement-stock-markets-fell-sensex-fell/article-148793"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/share-market1.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनोल्ड ट्रंप के ईरान युद्ध को लेकर जारी बयान के बाद गुरुवार को दुनिया भर में शेयर बाजारों में गिरावट देखी गयी और घरेलू स्तर पर बीएसई का सेंसेक्स 1,500 अंक से ज्यादा लुढ़क गया। सेंसेक्स 872.27 अंक की गिरावट में 72,262.05 अंक पर खुला और कुछ ही मिनट में लगभग 1,525 अंक टूटकर 71,608.05 अंक तक उतर गया। खबर लिखे जाते समय यह 1,473.37 अंक (2.01 प्रतिशत) की गिरावट में 71,660.95 अंक पर रहा।</p>
<p>अमेरिकी ट्रंप ने राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा है कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ मिशन में अपने मुख्य लक्ष्य हासिल कर लिये हैं, लेकिन अगले दो-तीन सप्ताह में हमले और तेज किये जायेंगे। उनके इस बयान के बाद जल्द युद्ध समाप्ति की उम्मीद लगाये बैठे निवेशकों को निराशा हुई और शेयर बाजारों में बिकवाली देखी गयी। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 सूचकांक भी 296 अंक गिरकर 22,383.40 अंक पर खुला। खबर लिखे जाते समय यह 460.70 अंक यानी 2.03 प्रतिशत नीचे 22,218.70 अंक पर था।</p>
<p>शेयर बाजार में फिलहाल चौतरफा बिकवाली देखी जा रही है। बैंकिंग, फार्मा, स्वास्थ्य, रियलटी, टिकाऊ उपभोक्ता उत्पाद, ऑटो, वित्त, धातु, मीडिया, तेल एवं गैस और रसायन समूहों पर ज्यादा दबाव है। सेंसेक्स की सभी 30 कंपनियां अभी गिरावट में हैं। विमान सेवा कंपनी इंडिगो और दवा बनाने वाली सनफार्मा के शेयर चार फीसदी से ज्यादा नीचे चल रहे हैं। अडानी पोर्ट्स, एलएंडटी, इटरनल और टाट स्टील के शेयर तीन से चार प्रतिशत फिसल चुके हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Apr 2026 10:59:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ट्रंप के बयान के बाद क्रूड ऑयल की कीमतों में बड़ी गिरावट: 100 डॉलर के नीचे आया ब्रेंट क्रूड, रूपए में भी गिरावट</title>
                                    <description><![CDATA[कच्चे तेल की कीमतों में राहत की खबर है! ब्रेंट क्रूड गिरकर 99.21 डॉलर पर आ गया है। यह नरमी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ तनाव घटाने के संकेतों के बाद आई है। हालांकि, भारतीय रुपया अब भी 95 प्रति डॉलर पर दबाव में है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि संघर्ष बढ़ने पर तेल 150 डॉलर पार कर सकता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/big-fall-in-crude-oil-prices-after-trumps-statement-brent/article-148703"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/crude-oil2.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बुधवार, 1 अप्रैल को बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। ब्रेंट क्रूड घटकर 99.21 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि कच्चे तेल का भाव 97.495 डॉलर प्रति बैरल दर्ज किया गया। यह गिरावट अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा ईरान के साथ तनाव कम करने के संकेतों के बाद आई है।</p>
<p>हालांकि, इससे पहले मार्च महीने में तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला था और ब्रेंट क्रूड 115 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया था। इस तेजी का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है, जहां रुपया कमजोर होकर 95 प्रति डॉलर के स्तर तक पहुंच चुका है।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मध्यपूर्व में तनाव लंबा खिंचता है तो रुपया 100 प्रति डॉलर तक गिर सकता है और तेल की कीमतें 150 से 200 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं। भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए यह स्थिति महंगाई और आर्थिक दबाव को बढ़ाने वाली साबित हो सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Apr 2026 15:26:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>होर्मुज जलडमरूमध्य अगले एक महीने तक बंद : आसमान छू सकती है तेल की कीमतें; 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने की संभावना, अर्थशास्त्री ब्रूस कासमैन ने जताई चिंता</title>
                                    <description><![CDATA[जेपी मॉर्गन के मुख्य अर्थशास्त्री ने चेतावनी दी है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य एक महीने और बंद रहा, तो तेल $150 प्रति बैरल तक पहुंच जाएगा। ईरान-इजरायल युद्ध के चलते वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला ठप है। इससे दुनिया भर में ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं और औद्योगिक उत्पादन पर गहरा संकट मंडरा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/strait-of-hormuz-closed-for-the-next-one-month-oil/article-148506"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/hormuz.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी बैंक जेपी मॉर्गन के मुख्य अर्थशास्त्री ब्रूस कासमैन का मानना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य एक और महीने के लिए बंद रहता है, तो तेल की कीमतें आसमान छूने के साथ 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। रिपोर्ट के अनुसार, अर्थशास्त्री कासमैन के बयान के हवाले से कहा, "ऐसी स्थिति में, यदि होर्मुज जलडमरूमध्य एक और महीने तक बंद रहता है, तो तेल की कीमतें लगभग 150 डॉलर प्रति बैरल तक बढ़ सकती हैं और ऊर्जा आपूर्ति पर निर्भर औद्योगिक उपभोक्ताओं को कमी का सामना करना पड़ सकता है।"</p>
<p>उल्लेखनीय है कि, अमेरिका-इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान की राजधानी तेहरान सहित देश के विभिन्न ठिकानों पर हमले शुरू किए थे, जिससे भारी क्षति हुई और नागरिक हताहत हुए थे। ईरान पे इजरायली क्षेत्र के साथ-साथ पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमले कर रहा है।</p>
<p>इस बीच, फारस की खाड़ी के देशों से वैश्विक बाजारों में तेल और तरल प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की आपूर्ति के लिए एक प्रमुख मार्ग - होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से होने वाला नौपरिवहन प्रभावी रूप से ठप हो गया है। इसके परिणामस्वरूप, दुनिया के अधिकांश देशों में ईंधन की कीमतें बढ़ रही हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 11:34:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>तेल बाजार में हलचल:  अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, ब्रेंट क्रूड 107 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचा</title>
                                    <description><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल फिसलकर $107 प्रति बैरल पर आ गया। डोनाल्ड ट्रम्प के सैन्य अभियान समाप्त करने के संकेतों ने कीमतों पर लगाम लगाई है। हालांकि, पश्चिम एशिया संकट के कारण ब्रेंट क्रूड अब भी $115 के पार है। आपूर्ति बाधाओं के चलते एक महीने में तेल की कीमतों में 60% का रिकॉर्ड उछाल देखा गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/rise-in-crude-oil-brent-crude-crosses-107-per/article-148499"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/crude-oil5.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मंगलवार को कच्चे तेल की कीमत गिरकर लगभग 107 डॉलर प्रति बैरल हो गई। लंदन का ब्रेंट क्रूड का मार्च वायदा 2.76 प्रतिशत चढ़कर 115.68 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। अमेरिकी क्रूड का अप्रैल वायदा 3.18 डॉलर की बढ़त में 102.81 डॉलर प्रति बैरल बोला गया। पश्चिम एशिया संकट शुरू होने के बाद कच्चा तेल 60 प्रतिशत से ज्यादा उछल चुका है। यह फरवरी के अंत में 70 डॉलर प्रति बैरल के करीब था। पश्चिम एशिया संकट के कारण कच्चे तेल का उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला दोनों बाधित हुई है। इस कारण इसकी कीमतों में उछाल देखा जा रहा है।</p>
<p>रिर्पोट के अनुसार, अंतर्राष्ट्रीय बाजार में यह गिरावट राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के उन बयानों के बाद आई, जिनमें उन्होंने अपने सहयोगियों से कहा था कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य काफी हद तक बंद भी रहता है, तो भी वे ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान समाप्त करने को तैयार हैं। अंतरराष्ट्रीय तेल मानक में 60% से अधिक की रिकॉर्ड मासिक वृद्धि दर्ज होने की संभावना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 11:19:43 +0530</pubDate>
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