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                <title>ramgarh tiger reserve - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>असर खबर का - रामगढ़ टाइगर रिजर्व से लकड़ियां चोरी करवाने के मामले में रेंजर निलंबित</title>
                                    <description><![CDATA[ जांच में नवज्योति की खबर पर लगी मुहर।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/-impact-of-the-news---ranger-suspended-in-the-case-of-getting-wood-stolen-from-ramgarh-tiger-reserve/article-122154"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/1ne1ws5.png" alt=""></a><br /><p>कोटा।  रामगढ़ टाइगर रिजर्व के कोर एरिया से माफियों को ट्रक भरकर लकड़ियां चोरी करवाने के मामले में जेतपुर रेंज के रेंजर चंद्रकांत शर्मा को प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन, बल प्रमुख) ने बुधवार को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया है। वहीं, रेंजर शर्मा के खिलाफ विस्तृत जांच करवाई जाएगी। निलंबन काल में इनका मुख्यालय संभागीय मुख्य वन संरक्षक कोटा में रहेगा। </p>
<p><strong>यह था मामला :</strong> रामगढ़ टाइगर रिजर्व की जेतपुर रेंज में पापड़ा चौक है, जो कोर एरिया है। जहां वनकर्मियों ने माफियाओें से मिलीभगत कर दिनदहाड़े ट्रकों में बबूल की लकड़ियां  चोरी करवाई। जबकि, इस जगह पर टाइगर का मूवमेंट रहता है। अपने स्वार्थ के लिए वनकर्मियों ने टाइगर की सुरक्षा भी दांव पर लगाई। भ्रष्टाचार का यह खेल पिछले ढाई महीने से चल रहा था। दैनिक नवज्योति ने सिलसिलेवार खबर प्रकाशित कर जघन्य वन अपराध का पर्दाफाश किया था।  </p>
<p><strong>नवज्योति ने उजागर किया था मिलीभगत का खेल</strong><br />दैनिक नवज्योति ने गत 15 जुलाई को रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में ट्रक भरकर बेची जा रही लकड़ियां...शीर्षक से खबर प्रकाशित कर मिलीभगत का खेल उजागर किया था। मामले की जांच प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन्यजीव प्रतिपालक शिखा मेहरा के आदेश पर सीसीएफ वन्यजीव टी-मोहनराज ने मामले की जांच की थी। जिसमें रेंजर की माफियाओं के साथ मिलीभगत पाई गई। मामले में फोरेस्टर को भी दोषी माना गया है। </p>
<p><strong>नवज्योति की खबर पर किया निलंबित</strong><br />प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन बल प्रमुख) द्वारा जारी किया गया निलंबन आदेश में दैनिक नवज्योति की खबर का हवाला दिया गया है। आदेश में बताया गया  कि दैनिक नवज्योति में गत 15 जुलाई को ‘टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में ट्रक भरकर बेची जा रही लकड़ियां’ शीर्षक से खबर प्रकाशित हुई थी। जिसकी प्रारंभिक जांच में रेंजर चंद्रकांत शर्मा मिलीभगत पायी गई है। इस पर शर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया। </p>
<p><strong>बाघ व शावकों की जान से किया खिलवाड़</strong><br />वन विभाग के मुखिया होफ द्वारा की गई कार्रवाई से जंगल का सौदा करने वाले भ्रष्ट वनकर्मियों व अधिकारियों में डर बनेगा और जंगल के प्राणियों की रक्षा सुनिश्चित हो सकेगी। जहां चार बाघों का मूवमेंट रहता है वहां वनकर्मी माफियाओं से सांठगांठ कर ट्रकों में लकड़ियां भरवाकर बेच रहे थे। जिससे जंगल के साथ बाघों की सुरक्षा भी दांव पर लग गई थी। कार्रवाई से वन अपराध पर अंकुश लगेगा। भ्रष्टाचार के खिलाफ दमदारी से आवाज उठाने पर दैनिक नवज्योति का बहुत-बहुत आभार। नवज्योति की खबरों से ही जांच में वनकर्मियों का माफियाओं से सांठगांठ का खुलासा हुआ।  <br /><strong>- विट्ठल सनाढ्य, पूर्व मानद वन्यजीव प्रतिपालक बूंदी </strong></p>
<p>रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के कोर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में वन विभाग जहां बोघों का मूवमेंट बताकर वन्यजीव प्रेमियों व मडियाकर्मियों को प्रवेश नहीं देते। वहीं, दूसरी ओर बाहरी व्यक्तियों को ट्रकों में लकड़ियां भरवाकर अवैध परिवहन की इजाजत देता है, जो गलत है। मामले में अन्य दोषियों पर भी कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि तेजी से उभरते इस टाइगर रिजर्व में दोबारा ऐसा वन अपराध न हो। जंगल और वन्य प्राणियों की सुरक्षा और भ्रष्टाचार के खिलाफ सार्थक प्रयास के लिए दैनिक नवज्योति का आभार। <br /><strong>- पृथ्वी सिंह राजावत, सदस्य कोर-बफर निर्धारण समिति आरवीटीआर </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 31 Jul 2025 16:11:14 +0530</pubDate>
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                <title>टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में ट्रक भर कर बेची जा रही लकड़ियां, बंबूल का जंगल बेच रहे वनकर्मी</title>
                                    <description><![CDATA[ वनकर्मियों की मिलीभगत से माफिया न केवल टाइगर के कोर एरिया में ट्रक लेकर घुस रहे बल्कि प्रतिदिन हजारों टन लकड़ियां चोरी कर ले जा रहे हैं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/truck-loads-of-wood-are-being-sold-in-the-core-area-of-tiger-reserve/article-117549"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/258642.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। रामगढ़ टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में दिनदहाड़े बबूल की लकड़ियां बेची जा रही हैं। वनकर्मियों की मिलीभगत से माफिया न केवल टाइगर के कोर एरिया में ट्रक लेकर घुस रहे बल्कि प्रतिदिन हजारों टन लकड़ियां चोरी कर ले जा रहे हैं। जबकि, इस जगह पर टाइगर का मूवमेंट रहता है। हालात यह हैं, अपने स्वार्थ के लिए वनकर्मी टाइगर की सुरक्षा दांव पर लगाने से भी नहीं चूक रहे। भ्रष्टाचार का यह खेल पिछले ढाई महीने से चल रहा है। जघन्य वन अपराध का खुलासा शुक्रवार को जीपीएस कोर्डिनेट के साथ तस्वीरें सामने आने से हुआ। दरअसल, मामला आरवीटीआर की जेतपुर रेंज के पापड़ा चौक का है, जो रिजर्व का कोर एरिया है। इतना ही नहीं, इस इलाके में टाइगर का मूवमेंट रहता है। इसके बावजूद वनकर्मी माफियाओं से सांठगांठ बबूल का जंगल बेच रहे हैं।</p>
<p><strong>बाघ व शावकों की जान से खिलवाड़</strong><br />वन्यजीव प्रेमी विट्ठल सनाढ्य ने बताया कि जेतपुर रेंज का पापड़ा चौक, बांदरा पोल से रामगढ़ महल के बीच स्थित है। यहां बाघ आरवीटीआर-1 का मूवमेंट रहता है। इसके बावजूद यहां से प्रतिदिन 5 से 7 ट्रक लकड़ियां भर-भर कर बेची जा रही है। जबकि, इस जगह से रामगढ़ महल और टाइगर रिलोकेशन एनक्लोजर   बिलकुल नजदीक है, जहां रणथम्भौर या अन्य जगहों से लाए जाने वाले टाइगर को रखा जाता है। वर्तमान में मृत बाघिन आरवीटीआर-2 की दोनों मादा शावक व अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क से शिफ्ट किए गए नर शावक की मौजूदगी भी इसी क्षेत्र में है। वन अधिकारियों व माफियाओं के गठजोड़ से बाघों की सुरक्षा दांव पर लग गई है। </p>
<p><strong>प्रतिदिन 5 से 7 ट्रक बेची जा रही लकड़ियां </strong><br />वन सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जेतपुर रेंज में  ग्रासलैंड डवलप करने के लिए गत वर्ष ज्यूलीफ्लोरा उनमूलन का टेंडर किया गया था। संबंधित फर्म ने बबूल के पेड़ों की कटाई की थी। ऐसे में यहां लकड़ियों का ढेर पड़ा है। जिसे वनकर्मियों द्वारा माफिओं को बेचा जा रहा है। जबकि, टाइगर रिजर्व व नेशनल पार्क से किसी भी प्रजाति की लकड़ियां न तो बेची जा सकती और न ही नीलाम की जा सकती है। इसके बावजूद कोर एरिया से प्रतिदिन 5 से 7 ट्रक लकड़ियां माफिया भिवाड़ी-हरियाणा ले जा रहे हैं। </p>
<p><strong>वन सुरक्षा समिति के नाम पर माफियाओं से कटवाया बंबूल</strong><br />नाम न छापने की शर्त पर वनकर्मचारी ने बताया कि रिकॉर्ड में ज्यूलीफ्लोरा उन्मूलन का कार्य वन सुरक्षा समिति के श्रमिकों से करवाना दिखाया गया है। जबकि, हकीकत में माफियाओं से जंगल कटवाया गया और उन्हें ही लकड़ियां बेची जा रही है। हालात यह है, 1 अप्रेल 2025 से 11 जून तक टाइगर रिजर्व के कोर एरिया से ट्रक भरकर लकड़ियां भिवाड़ी व हरियाणा जा रही है। जबकि, सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार, नेशनल पार्क या टाइगर रिजर्व से लकड़ियों की नीलामी नहीं की जा सकती। इसके अलावा टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में अवैध परिवहन जघन्य अपराध है। </p>
<p>मामला संज्ञान में आ गया है। रामगढ़ टाइगर रिजर्व के डीएफओ से जांच करवाकर तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि वन अपराध में स्टाफ की संलिप्ता व मिलीभगत तो नहीं है। रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। टाइगर रिजर्व या नेशनल पार्क में कटी हुई लकड़ियों की नीलामी किए जाने का कोई प्रावधान नहीं है। चाहे वो बबूल की लकड़ियां ही क्यों न हो। <br /><strong>- सुगनाराम जाट, संभागीय मुख्य वनसंरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक </strong></p>
<p>टेंडर तो पहले का था, एक-दो जगहों से शिकायत आई है। हमने टीम बनाकर मौके पर जांच के लिए भेज दी है। मामले की जांच चल रही है। रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई करेंगे। <br /><strong>- अरविंद कुमार झा, डीएफओ रामगढ़ टाइगर रिजर्व</strong></p>
<p>टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में ट्रक को अनुमत किया जाना टाइगर की सुरक्षा के साथ समझौता है, जो घातक है। जूलीफ्लोरा घोटाला रामगढ़ टाइगर रिजर्व में नया नहीं है। वर्तमान व पूर्व के जिम्मेदार अधिकारियों  द्वारा करोड़ों रुपए मूल्य का जूलीफ्लोरा बेच चुके हैं, जिसकी राशि जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों से वसूली जानी चाहिए।<br /><strong>- तपेश्वर सिंह भाटी, पर्यावरणविद् एवं एडवोकेट </strong></p>
<p>जेतपुर रेंज का पापड़ा वनक्षेत्र आरवीटीआर का कोर एरिया है। 11 जून की तस्वीर में जिस जगह ट्रक में लकड़िया लोड हो रही है, वो रामगढ़ महल और टाइगर रिलोकेशन एनक्लोजर के बिलकुल नजदीक है। इस इलाके में बाघ आरवीटीआर-1, मृत बाघिन आरवीटीआर-2 की मादा शावकों का मूवमेंट है। इसके बावजूद वन अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा टाइगर टेरीटरी में माफियाओं की घुसपैठ करवाकर वन सम्पदा चोरी करवा रहे हैं। जघन्य अपराध में लिप्त वनकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी  चाहिए। <br /><strong>- विट्ठल सनाढ्य, वन्यजीव प्रेमी बूंदी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Jun 2025 16:23:55 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>जहां 4 बाघों का मूवमेंट, वहां ट्रकों में भरवा रहे थे लकड़ियां </title>
                                    <description><![CDATA[विशेषज्ञों ने वन्यजीवों के शिकार व तस्करी की जताई आशंका । 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/where-4-tigers-move--trucks-were-being-loaded-with-wood/article-117548"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/254687.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। रामगढ़ टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में ट्रकों में लकड़ियां भरवाकर बेचे जाने के मामले में रविवार को चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। मेज नदी किनारे जिस वनक्षेत्र में ट्रक में बंबूल की लकड़ियां भरवाई जा रही थी, वह जगह क्रिटिकल टाइगर हेबीटाट है। इस क्षेत्र में 4 टाइगर का मूवमेंट रहता है। वहीं, कुछ माह पहले इसी इलाके में बाघिन आरवीटीआर-2 का कंकाल मिला था। जिसकी खाल गायब थी, उसका आज तक सुराग नहीं लगा। इधर, वन्यजीव विशेषज्ञों ने कोर एरिया में जिम्मेदार वन अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत से हो रहे अवैध परिवहन के दौरान तस्करी की आशंका जताई है। वहीं, वन विभाग ने अपनी प्राथमिक जांच रिपोर्ट में लकड़ियों के अवैध परिवहन में एक से अधिक स्टाफ की संलिप्ता स्वीकारी है। </p>
<p><strong>टाइगर मॉनिटरिंग व ट्रैकिंग टीम की गश्त पर उठे सवाल</strong><br />वन्यजीव प्रेमी विट्ठल सनाढ्य ने बताया कि रामगढ़ टाइगर रिजर्व की जेतपुर रेंज के पापड़ा चौक में ट्रक में लकड़िया लोड़ हो रही थी। यहां से एक से डेढ़ किमी दूरी पर बांदरा पोल, रामगढ़ महल है। जहां 4 टाइगर्स का मूवमेंट है। जिनकी मॉनटिरिंग व ट्रैकिंग के लिए वनकर्मियों की टीम गश्त करती है। ऐसे में सवाल उठता है कि बाघों की टेरिटरी में दिनदहाड़े ट्रक लकड़ियां भरकर ले जाते हैं और वनकर्मियों की टीम को दिखाई नहीं दे, ऐसा संभव नहीं है। कर्मचारियों की मिलीभगत  से पिछले ढाई माह से ट्रकों में लकड़ियों का अवैध परिवहन हो रहा है, जो न केवल टाइगर की सुरक्षा से खिलवाड़ है बल्कि वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट 1972 का भी सीधा उल्लंघन है। अवैध गतिविधियों से वन सुरक्षा खतरे में पड़ गई। </p>
<p><strong>संलिप्तता स्वीकारी, विस्तृत जांच के आदेश जारी</strong><br />नवज्योति द्वारा खबर प्रकाशित करने के बाद रामगढ़ टाइगर रिजर्व प्रशासन ने जांच कमेटी बनाकर मामले की प्राथमिक जांच करवाई। जिसकी रिपोर्ट में उच्चाधिकारियों ने कोर एरिया में ट्रकों में लकड़ियों के अवैध परिवहन में एक से अधिक स्टाफ की मिलीभगत  स्वीकारी है। हालांकि, डीएफओ अरविंद कुमार झा ने मामले की विस्तृत जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। </p>
<p>जेतपुर रेंज में तैनात नाकेदार, फोरेस्टर, फोरेस्ट गार्ड व रेंजर के बयान लिए जा रहे हैं। मामले की विस्तृत जांच की जा रही है। जिसकी रिपोर्ट जल्द ही उच्चाधिकारियों को सौंपेंगे। <br /><strong>-नवीन नारायण, एसीएफ रामगढ़ टाइगर रिजर्व </strong></p>
<p>पापड़ा चौक में जिस जगह ट्रक में बम्बूल की लकड़ियां लोड करवाई जा रही थी, उस जगह से ब्रांदापोल,  रामगढ़ महल, टाइगर रिलोकेशन एनक्लोजर काफी नजदीक है। जबकि, बांद्रापोल के 5 किमी के रेडियस  में नर बाघ आरवीटीआर-1 तथा मादा शावकों का मूवमेंट रहता है। वहीं, महल के पीछे 30 बीघा का एनक्लोजर है, जहां अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क से लाए गए नर शावक को रखा गया है। इसके अलावा रिलोकेशन एनक्लोजर में बाहर से लाए जाने वाले टाइगर्स को शिफ्ट किया जाता है। ऐसे सेंसेटिव इलाके में अवैध परिहव निश्चित रूप से बाघों की बसावट के लिए गंभीर खतरा है। यहां अप्रेल माह से ही वन अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत से लकड़ियों का अवैध परिवहन हो रहा है।            <br /><strong>- विट्ठल सनाढ्य, वन्यजीव प्रेमी बूंदी</strong></p>
<p>क्रिटिकल टाइगर हेबीटाट में ट्रकों व बाहरी व्यक्तियों का प्रवेश और वनसम्पदा की चोरी गंभीर प्रवृति का अपराध है। यह न केवल टाइगर की सुरक्षा में भारी चूक है बल्कि वन्यजीवों के स्वच्छंद विचरण में व्यधान होने के साथ वन संरक्षण अधिनियम 1972 का सीधा उल्लंघन है। मामले की निष्पक्ष जांच करवाई जानी चाहिए और माफियाओं से मिलीभगत करने वाले कर्मचारियों व अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो।<br /><strong>- पृथ्वीराज सिंह राजावत, वन्यजीव विशेषज्ञ बूंदी</strong></p>
<p>प्राथमिक जांच रिपोर्ट में जब वन सम्पदा की चोरी करवाने में वन स्टाफ की संलिप्ता मानी गई है तो संबंधित स्टाफ  को निलंबित किया जाना चाहिए ताकि, आगे की जांच किसी भी तरह से प्रभावित न हो। <br /><strong>- तपेश्वर सिंह भाटी, एडवोकेट एवं पर्यावरणविद्</strong></p>
<p>प्रारंभिक जांच रिपोर्ट आ गई है। जिसमें मौके पर गड़बड़ियों के साक्ष्य मिले हैं। टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में ट्रकों  में लकड़ियां भरकर ले जाए जाने में एक से अधिक स्टाफ की संलिप्ता से इंकार नहीं किया जा सकता। नियमानुसार विस्तृत जांच शुरू करवा दी है। सक्षम अधिकारी जांच कर रहे हैं, रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।<br /><strong>- अरविंद कुमार झा, डीएफओ रामगढ़ टाइगर रिजर्व</strong></p>
<p>डीएफओ से तथ्यात्मक रिपोर्ट मिल गई है। इसमें स्टाफ की मिलीभगत प्रतीत होना माना है। इसकी जांच के आदेश दे दिए हैं। रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार कार्रवाई  की जाएगी। <br /><strong>- सुगनाराम जाट, संभागीय मुख्य वन संरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक, वन्यजीव </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Jun 2025 16:23:42 +0530</pubDate>
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                <title>रामगढ़ टाइगर रिजर्व में दो बाघों में खूनी संघर्ष, आरवीटीआर-4 की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[हार्ड रिलीज के कुछ दिनों बाद ही नंदपुरा की पहाड़ी पर लहुलूहान हालत में मृत मिला बाघ।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/bloody-fight-between-two-tigers-in-ramgarh-tiger-reserve--death-of-rvtr-4/article-102692"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/78-(3)12.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। रामगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघ आरवीटीआर-4 का शव शुक्रवार सुबह लहुलुहान हालत में मिलने से हड़कम्प मच गया। 6 महीने में ही दो बाघों की संदिग्ध मौत होने से रामगढ़ का प्रबंधन सवालों के कटघरे में आ गया। आरवीटीआर-4 की मौत टेरिटोरियल फाइट में होना बताया जा रहा है। हालांकि, स्पष्ट कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम के बाद ही पता चल सकेगा। इस बाघ को तीन महीने पहले ही सरिस्का टाइगर रिजर्व की टीम ने हरियाणा से रेस्क्यू कर रामगढ़ में शिफ्ट किया था।</p>
<p><strong>दो दिन से एक ही जगह आ रही थी लोकेशन </strong><br />सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, बाघ आरवीटीआर-4 की मौत तीन दिन पहले ही हो चुकी थी। रेडियो कॉलर  के सिग्नल दो दिन से एक ही जगह मिल रहे थे। बाघ की लोकेशन जैतपुर रेंज की नंदपुरा पहाड़ी पर रही। खतरे की संभावना को देखते हुए ट्रैकिंग टीम मौके पर पहुंची तो आरवीटीआर-4 लहुलूहान हालत में मृत पड़ा था।बताया जा रहा है, आरवीटीआर-4 का सामना अपने से दोगुनी उम्र के आरवीटीआर-1 से हुआ। जहां दोनों में टेरिटोरियल फाइट हुई, जिसमें आरवीटीआर-4 की मौत हो गई।</p>
<p><strong>हार्ड रिलीज करने के 26 दिन बाद ही मौत</strong><br />बाघ आरवीटीआर-4 को जैतपुर रेंज में बजालिया सॉफ्ट एनक्लोजर से गत 4 जनवरी को 26 दिन पहले ही हार्ड रिलीज किया गया था। यह अपनी टेरिटेरी बनाने के लिए इलाका छान रहा था। इस बीच इसने दो दर्जन से अधिक शिकार भी किए। कुछ दिनों से इसका मूवमेंट नंदपुरा की पहाड़ियों पर था। इस बीच उसका सामना 6 वर्षीय बाघ आरवीटीआर-1 से हुआ। जहां दोनों में खूनी संघर्ष हुआ। जिसमें आरवीटीआर-4 की मौत हो गई। लेकिन, वन्यजीव प्रेमियों ने टेरिटोरियल फाइट पर संशय जताते हुए कहा कि बाघों की संख्या के मुकाबले रामगढ़ का क्षेत्रफल कहीं ज्यादा है। ऐसे में टेरिटोरियल फाइट की संभावना नहीं बनती। वन अधिकारियों को मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा करना चाहिए।</p>
<p><strong>हरियाणा से किया था रेस्क्यू</strong><br />यह बाघ सरिस्का टाइगर रिजर्व अलवर का था। यह वहां से निकल कर हरियाणा के झाबुआ में पहुंच गया था। सरिस्का प्रबंधन ने रणथम्भौर की मदद से गत वर्ष 10 नवम्बर को ट्रेंकुलाइज कर रेस्क्यू किया था। इसके बाद 11 नवंबर  को रामगढ़ की जैतपुर रैंज में 5 हैक्टेयर के पोर्टेबल एनक्लोजर में शिफ्ट किया था।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />प्रथम दृष्टया बाघ आरवीटीआर-4 की मौत आरवीटीआर-1 के साथ हुई टेरिटोरियल फाइट में होना सामने आ रहा है। वास्तविक कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पता चल सकेगा।<br /><strong>-रामनारायण खैरवा, संभागीय मुख्य वनसंरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक, वन विभाग कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 31 Jan 2025 18:06:33 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>अब मुकुंदरा व रामगढ़ टाइगर रिजर्व के कोर में सफारी की तैयारी!</title>
                                    <description><![CDATA[अप्रूवल मिलने पर कोर के 20% प्रतिशत हिस्से में शुरू होगा पर्यटन। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/now-preparations-for-safari-in-the-core-of-mukundra-and-ramgarh-tiger-reserve/article-97990"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/257rtrer38.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। मुकुंदरा हिल्स व रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में अब सफारी शुरू किए जाने की तैयारी है। संभागीय मुख्य वनसंरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक द्वारा टाइगर कंजरर्वेशन प्लान तैयार कर प्रधान मुख्य वनसंरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक-जयपुर को भेजा गया है। अब यह टाइगर कंजरर्वेशन प्लान मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक द्वारा एनटीसीए को भेजे जाएंगे। जहां से अप्रूवल मिलते ही मुकुंदरा व रामगढ़ टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में सफारी शुरू की जाएगी। दरअसल, हाड़ौती के दोनों टाइगर रिजर्व में अब तक बफर एरिया में ही सफारी की जा रही है। एनटीसीए से मंजूरी मिलते ही कोर एरिया के सीमित क्षेत्र करीब 20% हिस्से में पर्यटन शुरू किया जा सकेगा। यह प्रयास ट्यूरिज्म को बढ़ावा देने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। </p>
<p><strong>यह है मुकुंदरा का कोर एरिया </strong><br />जानकारी के अनुसार मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में भैंसरोडगढ़, जवाहर सागर, दरा अभयारणय, गागरोन व कोलीपुरा का जंगल का जंगल शामिल है। इनके सीमित क्षेत्र में एनटीसीए की मंजूरी के बाद सफारी शुरू की जाएगी। </p>
<p><strong>अब एनटीसीए को भेजे टाइगर कंजरवेशन प्लान </strong><br />सीसीएफ आरके खैरवा ने बताया कि मुकुंदरा हिल्स व रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के कोर  एरिया में सफारी शुरू किए जाने के प्रयास कर रहे हैं। इसके लिए टाइगर कंजरर्वेशन प्लान तैयार किया गया है, जिसे गत अक्टूबर माह में प्रधान मुख्य वनसंरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक को भेजा है। जहां से एनटीसीए को भेजा जा रहा है। वहां से स्वीकृति मिलने के बाद दोनों टाइगर रिजर्व के सीमित कोर एरिया में पर्यटन शुरू किया जा सकेगा। </p>
<p><strong>मुकुंदरा के बफर जोन में यह 4 रूट स्वीकृत </strong><br />मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के बफर जोन में ईको-टूरिज्म का संचालन करने के लिए वन विभाग ने 4 रूट स्वीकृत किए हैं। इनमें से एक रुट्स दरा सेंचुरी में सफारी गत वर्ष से ही संचालित की जा रही है। जबकि,  तीन अन्य रुट्स पर अभी सफारी शुरू नहीं हो पाई है। इन 4 रुट्स में पहला-बोराबांस रेंज में बंधा-बग्गी रोड, अखावा-बलिंडा-बंधा, दूसरा रूट कोलीपुरा रेंज में नागनी चौकी पोस्ट, कालाकोट-दीपपुरा घाटा-कान्या तालाब-नागनी चौकी पोस्ट, तीसरा रूट मंदरगढ़ में बेरियर-मंदरगढ़, तालाब-केशोपुरा-रोझा तालाब होते हुए मंदरगढ़ बेरियर और चौथा रूट दरा रेंज में मौरूकलां-बंजर-रेतिया तलाई-पटपडिया-सावनभादौ एरिया शामिल है। इन क्षेत्र में पर्यटक जंगल सफारी का लुत्फ ले सकेंगे। </p>
<p><strong>कंजरवेशन प्लान में यह किए शामिल</strong><br />टाइगर कंजरर्वेशन प्लान में मुकुंदरा व रामगढ़ टाइगर रिजर्व के बफर व कोर एरिया निर्धारित किया है। जिसमें हैबीटॉट डवलेपमेंट,  वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन, कंजरर्वेशन इम्प्रूमेंट, सफारी रुट्स, ईको टेल व रिसर्च सहित तमाम बिंदूओं को शामिल किया गया है। मुकुंदरा के कोर एरिया में दरा अभयारणय, जवाहर सागर सेंचुरी, गागरोन, बोराबांस व राउंठा रेंज के क्षेत्र हैं। एनटीसीए की मंजूरी के बाद यहां  सफारी रुट्स तय किए जाएंगे। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />हमने टाइगर कंजरर्वेशन प्लान का प्रपोजल बनाकर प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक  को भेज चुके हैं। जहां से कुछ क्योरी आई थी, वह  भी दुरुस्त करवाकर भिजवा दी गई है। अब उनके स्तर से यह प्रपोजल एनटीसीए को भिजवाया जाएगा। जहां से अप्रूवल मिलने के बाद पर्यटन शुरू किया जा सकेगा। यह प्रयास ट्यूरिज्म विकास में मील का पत्थर साबित होगा। <br /><strong>- रामकरण खैरवा, संभागीय मुख्य वनसंरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक वन विभाग </strong></p>
<p>मुकुंदरा के बफर व कोर एरिया में सफारी शुरू किए जाने के प्रस्ताव भेजे गए हैं। जिसमें जवाहर सागर, गागरोन, दोलतगंज, मंदरगढ़, राउंठा महल, दरा, भैंसरोडगढ़ सहित अन्य रुट्स शामिल हैं। एनटीसीए से मंजूरी मिलने के बाद आगे की कार्यवाही की जाएगी। <br /><strong>- मुथु एस, डीएफओ मुकुंदरा टाइगर रिजर्व </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Dec 2024 17:30:10 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - आखिरकार 25 महीने बाद पिंजरे से आजाद हुआ शावक</title>
                                    <description><![CDATA[दैनिक नवज्योति ने लगातार खबरें प्रकाशित कर दोनों शावकों को पिंजरे से खुले जंगल में शिफ्ट करने की आवाज उठाई थी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/effect-of-the-news---finally-the-cub-got-free-from-the-cage-after-25-months/article-96739"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/9930400-sizee-(3)3.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटावासियों व वन्यजीव पे्रेमियों के लिए बुधवार की सुबह खुशियों से भरी रही। बाघिन टी-114 के नर शावक को आखिरकार 25 महीने बाद पिंजरे से आजादी मिल ही गई। अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क से नर शावक को रामगढ़ टाइगर रिजर्व में शिफ्ट कर दिया गया है। जहां उसने 5 हैक्टेयर के एनक्लोजर  में आजादी की छलांग लगाई। साथ ही शिकार करने की कला, घात लगाना, जंगल की चुनौतिपूर्ण परिस्थितियों में खुद को ढालना सीख पाएगा। असल में रिवाइल्डिंग बेहतर तरीके से हो सकेगी। दरअसल, दैनिक नवज्योति ने लगातार खबरें प्रकाशित कर दोनों शावकों को पिंजरे से खुले जंगल में शिफ्ट करने की आवाज उठाई थी। साथ ही 2 साल से 3 गुना 3 साइज के नाइट शेल्टर में रहने से रिवाइल्डिंग प्रभावित होना, शारीरिक अंगों में विकार उत्पन्न होना, जंगल की परिस्थतियों के अनुकूल होने में चूनौतियों को लेकर बायोलॉजिस्ट, वन्यजीव विशेषज्ञों की नजर से खबरें प्रकाशित कर तथ्यों से वन अधिकारियों को रुबरू किया। इसी का नतीजा है कि दोनों शावकों में से नर शावक को बुधवार को रामगढ़ शिफ्ट कर दिया गया।</p>
<p><strong>पांच हैक्टेयर के एनक्लोजर में शिफ्ट</strong><br />चिकित्सक रियाड़ ने बताया कि दोपहर 2 बजकर 18 मिनट पर रामगढ़ टाइगर रिजर्व की जैतपुर रैंज में 5 हैक्टेयर के एनक्लोजर में नर शावक को शिफ्ट किया गया है। यहां प्रे-बेस, पानी सहित अन्य जरूरी व्यवस्था की गई है। 7 दिन तक शावक चिकित्सकों की गहन निगरानी में रहेगा।  इस दौरान उसके व्यवहार, गतिविधियां, भोजन लेने की मात्रा, शिकार कर पा रहा है या नहीं सहित तमाम गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी।  </p>
<p><strong>कैमरों से लैस एनक्लोजर, वॉच टावर से निगरानी</strong><br />जैतपुर रैंज के पांच हैक्टेयर एनक्लोजर को ग्रीन नेट से पूरी तरह से कवर किया गया है। वहीं, सीसीटीवी कैमरों से लैस किया गया है। रेडियोकॉर्लर के सिग्नल व तीन मंजिला वॉच टॉवर से 24 घंटे निगरानी की जा रही है। साथ ही मानव दखल से बिलकुल दूर व जीरो मॉबिलिटी में सुनिश्चित की गई है। </p>
<p><strong>अगले हफ्ते मुकुंदरा में शिफ्ट होगी मादा शावक</strong><br />सीसीएफ रामकरण खैरवा ने बताया कि अगले हफ्ते तक मादा शावक को मुकुंदरा की दरा रैंज में बने 5 हैक्टेयर के एनक्लोजर में शिफ्ट किया जाएगा। अभी नर शावक की गतिविधियों को आॅर्ब्जर किया जा रहा है। </p>
<p><strong>अभेड़ा और रामगढ़ में रिवाइल्डिंग में अंतर</strong><br /><strong>अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क :</strong> यहां पिछले 25 महीने से 3 गुणा 3 मीटर के नाइट शेल्टर में रखा जा रहा था। वहीं, मूवमेंट के लिए 11 गुणा 10 मीटर साइज के कराल में रह रहा था। चलने-फिरने की जगह नहीं मिलने से शारीरिक ग्रोथ, शिकार करने की कला, घात लगाकर शिकार करना, शिकार को बचने के लिए भागने व शिकार के पीछे शावकों को दौड़ने की जगह नहीं मिल पाने रिवाइल्डिंग के उद्देश्य पूरे नहीं हो पा रहे थे। यहां एक ही तरह का भोजन बकरा, पाड़ा व मुर्गा दिया जा रहा था। वहीं, जंगल की वास्तविक चुनौतियों से वाकिफ नहीं हो पाए। </p>
<p><strong>रामगढ़ टाइगर रिजर्व </strong>: यहां जैतपुर रैंज में रामगढ़ महल के पीछे स्थित 5 हैक्टेयर के एनक्लोजर में रखा गया है। शारीरिक विकास के लिए  जितना मूवमेंट होना चाहिए, उतना हो सकेगा। भोजन के लिए उसे खुद शिकार करना पड़ेगा। एनक्लोजर में हिरण, चीतल, नील गाय, सांभर सहित 12 तरह का प्रे-बस है। जिन्हें किल करने के लिए घात लगाकर शिकार करना, छिपना, रास्ता पहचानने के लिए बैंच मार्क बनाना सहित जंगल की वास्तिविक परिदृश्य में खुद को ढाल पाएगा। 2 साल तक बायोलॉजिकल पार्क में कितनी रिवाइल्डिंग हुई, इसकी परख भी हो सकेगी।</p>
<p><strong>ट्रैंकुलाइज कर लगाया रेडियोकॉलर</strong><br />वरिष्ठ वन्यजीव चिकित्सक डॉ. तेजेंद्र सिंह रियाड़ ने बताया कि सुबह 10 बजकर 8 मिनट पर नर शावक को ट्रैंकुलाइज किया गया। इसके बाद स्वास्थ्य परीक्षण कर ब्लड व डीएनए सैंपल लिए। साथ ही वजन किया गया। इसके बाद 11.15 बजे रामगढ़ टाइगर रिजर्व के लिए रवाना कर दिया गया। उन्होंने बताया कि नर बाघ का वजन 160 किलो है। गले में रेडियोकॉलर लगाया गया है। जिससे उसकी मॉनिटरिंग होती रहेगी।</p>
<p><strong>अब यह रहेगी चुनौतियां </strong><br />- शावक दो साल तक अपनी बहन के साथ अभेड़ा बायोलॉजिकल में रहा है, ऐसे में बिछड़ने पर स्ट्रेस में आ सकता है, जिससे उबरना व नए वातावरण में ढलना।<br />- घात लगाकर शिकार कर पाने में सफल होना सबसे बड़ी चुनौती है। क्योंकि, बायोलॉजिकल पार्क में सीमित दायरे में लाइव शिकार छोड़ा जाता था लेकिन यहां शिकार चिंकारा, नील गाय, सांभर व  हिरण हैं, जिन्हें दौड़कर, छिपकर और घात लगाकर  किल करने में सफल होना। <br />- सफल शिकार का परसेंटेज बढ़ना। <br />- जंगल में रास्ता बनाना व पहचानने के लिए पेड़ों पर मार्किंग करने की कला सिखना आवश्यक है। </p>
<p> हमने रिवाइल्डिंग की तरफ पहला कदम बढ़ा दिया है। शिकार कर पाता है या नहीं, करता है तो सफल किल परसेंटेज, कितना भोजन करता है, बिहेवियर में बदलाव सहित कई गतिविधियों पर विशेषज्ञों की निगरानी रहेगी। एनक्लोजर को ग्रीन नेट से कवर कर इंसानी दखल से दूर रखा है। सीसीटीवी कैमरे व टॉच टावर से निगरानी और रेडियोकॉर्लर सिग्नल से मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।<br /><strong>- रामकरण खैरवा, संभागीय वनसंरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक, वन विभाग</strong></p>
<p>नर शावक को रामगढ़ में रिलीज कर दिया है। रणथम्भौर में बाघिन टी 114 की मृत्यु के बाद उसके दो शावकों को गत वर्ष 31 जनवरी को  बायोलॉजिकल पार्क कोटा में शिफ्ट किया गया था। तब उनकी उम्र लगभग ढाई महीने थी। मादा शावक को भी करीब एक सप्ताह बाद मुकुंदरा में शिफ्ट किए जाने की संभावना है। <br /><strong>- अनुराग भटनागर, डीसीएफ वन्यजीव विभाग कोटा </strong></p>
<p>पांच हैक्टेयर के एनक्लोजर में शिफ्ट करने के दौरान वह थोड़ा चला फिर रुका, इधर-उधर देखा और लंबी लंबी दौड़ लगाई। यहां 7 दिन विशेषज्ञों की निगरानी में रहेगा। रिलीज के दौरान व्यवहार समान्य था। यहां प्रे-बेस के रूप में 12 तरह के एनिमल है। यह शत-प्रतिशत रिवाइल्ड होगा और जंगल में आसानी से सरवाइव करेगा। <br /><strong>- दौलत सिंह शक्तावत, टाइगर विशेषज्ञ</strong></p>
<p>नर शावक की अब पांच हैक्टेयर के एनक्लोजर में रिवाइल्डिंग की जा रही है। यहां पर्याप्त मात्रा में प्रे-बेस की व्यवस्था की है। करीब एक साल तक  यहां रखा जाने की प्लानिंग है। जब यह सफलतापूर्वक 50 से ज्यादा घात लगाकर शिकार करने तथा पूरी तरह से मेच्योर हो जाएगा तब उच्चाधिकारियों के निर्देश पर हार्ड रिलीज किया जाएगा। हमारी कोशिश यही है कि इसे पूरी तरह से जंगल में सरवाइव करने लायक बनाना है। <br /><strong>- संजीव शर्मा, डीएफओ रामगढ़ टाइगर रिजर्व बूंदी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Dec 2024 13:30:35 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - वन विभाग ने रामगढ़ टाइगर रिजर्व के बफर में बनी सड़क तोड़ी</title>
                                    <description><![CDATA[  जांच के नाम पर केवल पीडब्ल्यूडी को पत्र ही लिखे जा रहे हैं। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news---forest-department-broke-the-road-built-in-the-buffer-of-ramgarh-tiger-reserve/article-78847"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/t21rer-(6)19.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। वन विभाग ने रामगढ़ टाइगर रिजर्व के बफर जोन में बनी सीसी सड़क का कुछ हिस्सा सोमवार रात तोड़ दिया है।  देर रात जाखमूंड रैंजर सहित वनकर्मी मौके पर पहुंचे और जेसीबी की मदद से करीब 25 से 35 फीट तक सड़क तोड़ दी है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है, हाथी के दांत दिखाने के कुछ और खाने के कुछ, इसी तर्ज पर वन विभाग काम कर रहा है। असल में यह कार्रवाई बुधवार को अरण्य भवन जयपुर में अतिरिक्त मुख्य सचिव अर्पणा अरोड़ा की अध्यक्षता में प्रदेश के सभी डीएफओ व सीसीएफ की बैठक होनी है। जिसमें यह मुद्दा सुर्खियों में रहेगा। ऐसे में बूंदी डीएफओ ने बैठक में जवाब देने के लिए एक दिन पहले देर रात यह कार्रवाई की है। </p>
<p><strong>कितनी वनभूमि में बनी सड़क, बता नहीं पा रहा विभाग</strong><br />वनक्षेत्र में सीसी सड़क बनने का मामला उजागर होने के बाद भी वन विभाग अब तक यह नहीं बता सका कि आखिर सड़क कितनी वन भूमि पर बनी है। जांच के नाम पर केवल पीडब्ल्यूडी को पत्र ही लिखे जा रहे हैं। कार्रवाई के नाम पर न तो पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों के खिलाफ वन संरक्षण अधिनियम 1980 के उल्लंघन का मामला दर्ज किया और न ही कोर्ट में इस्तगासा पेश किया। </p>
<p><strong>क्या था मामला </strong><br />डाबी रेंज में स्थित जाखमूंड वनखंड करीब 2276 हैक्टेयर में फैला जंगल है, जो राज्य सरकार से नोटिफाइड है और आरवीटीआर का बफर क्षेत्र है। इसमें रामपुरिया गांव बसा है। जिसे कोटा-बूंदी हाइवे से जोड़ने के लिए पीडब्ल्यूडी ने दो से ढाई किमी लंबी सड़क बना दी। जबकि, इसके लिए विभाग ने एफसीए-1980 के तहत भूमि डायवर्जन की कार्यवाही नहीं की और न ही वाइल्ड लाइफ क्लियरनेंस ली गई, जो वन संरक्षण अधिनियम 1980 का खुला उल्लंघन है।  यदि, पीडब्ल्यूडी द्वारा एफसीए की कार्यवाही की जाती तो इसकी जानकारी मुख्य संभागीय वन संरक्षक एवं फिल्ड निदेशक व उप वनसंरक्षक बूंदी को होती लेकिन, दोनों ही अधिकारियों ने वनक्षेत्र में सड़क निर्माण की जानकारी होने से इंकार कर दिया। ऐसे में सवाल उठता है कि पीडब्ल्यूडी ने वनभूमि पर किसकी परमिशन से सड़क बना दी।</p>
<p> सड़क जितनी वन भूमि में आ रही होगी, उतनी तोड़ी जाएगी। सोमवार देर रात सड़क का कुछ हिस्सा तो तोड़ दिया है। हालांकि, रामपुरिया गांव के कुछ ग्रामीण विरोध कर रहे हैं। नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी।<br /><strong>- वीरेंद्र सिंह कृष्णिया, डीएफओ बूंदी वनमंडल</strong></p>
<p>फोरेस्ट लैंड में बनी सड़क जेसीबी की मदद से तोड़ी है। चार से पांच जगहों से सड़क खोदकर खुर्द-बुर्द किया है। कार्रवाई जारी रहेगी। <br /><strong>- हेमराज, रैंजर जाखमूंड रैंज, वन मंडल बूंदी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 May 2024 13:05:38 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>रामगढ़ टाइगर रिजर्व के बफर में सरेआम बनी 2 किमी सड़क, अधिकारियों को होश तक नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[जेसीबी व डम्परों ने बर्बाद किया जंगल, रौंद दिए पेड़, खोद दी वन भूमि। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/2-km-road-built-openly-in-the-buffer-of-ramgarh-tiger-reserve--officials-are-not-even-aware/article-75435"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/ramgarh-tiger-reserve-k-buffer-me-sreaam-bni-2-km-sadak,-adhikariyo-ko-hosh-tk-nhi...kota-news-19-04-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। रामगढ़ टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्र में दिनदहाड़े  2 किमी लंबी सीसी सड़क बन गई और वन अधिकारियों को भनक तक नहीं लगी। पिछले 20-25 दिनों  से सड़क निर्माण कार्य चल रहा है। दर्जनों जेसीबी से करीब पौने दो हैक्टेयर वनभूमि को खोद सड़क बना डाली। वन्यजीवों का आशियाना उजाड़ दिया और सैंकड़ों पौधे भी नष्ट कर दिए। इसके बावजूद रेंजर से लेकर डीएफओ तक ने सड़क निर्माण रोकने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की। जबकि, इसी वन भूमि पर गत वर्ष राजनेतिक सभा के लिए टेंट लगाने पर ही वन विभाग ने आयोजक से 2 लाख रुपए जुर्माना वसूला था। विशेषज्ञों का मत है, वन अधिकारियों की मिलीभगत के बगैर यह संभव नहीं है। बफर क्षेत्र में सड़क बनाना तो दूर कदम भी नहीं रख सकते। दरअसल, मामला बूंदी वन मंडल के डाबी रेंज की जाखमूंड वनखण्ड का है। इसका अधिकांश वनक्षेत्र रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व का बफर है, जो वनमंडल के अधिकार क्षेत्र में आता है। यहां जंगल में बसा रामपुरिया गांव को कोटा-बूंदी हाइवे से जोड़ने के लिए पीडब्ल्यूडी ने बिना एफसीए-1980 की कार्यवाही किए दो से ढाई किमी की सड़क बना दी। ताज्जुब की बात यह है, सीसीएफ और डीएफओ को पता ही नहीं कि उनके क्षेत्र में सीसी सड़क बन गई। </p>
<p><strong>एफसीए-1980 की उड़ी धज्जियां</strong><br />बूंदी वन मंडल की नाक के नीचे आरवीटीआर के बफर एरिया में खुलेआम वन संरक्षण अधिनियम 1980 की धज्जियां उड़ाई जा रही है और वन विभाग कार्रवाई के बजाए आंखें मूंदे पड़ा है। गत 14 अप्रेल को नवज्योति जाखमूंड वनखंड में पहुंची तो हालात चौंकाने वाले थे। यहां गिट्टियों से भरे दर्जनों डम्पर खाली हो रहे थे और जेसीबी से खुदाई चल रही थी। निर्माण कार्य में लगे श्रमिक व सुपरवाइजर ने बताया कि पीडब्ल्यूडी द्वारा पिछले महीने से सीसी सड़क बनवाई जा रही है। जंगल में पक्की सड़क बनना रैंजर की कार्यशैली सवालों के कठघरे में आती है। </p>
<p><strong>यह है मामला</strong><br />डाबी रेंज में स्थित जाखमूंड वनखंड करीब 2276 हैक्टेयर में फैला जंगल है, जो राज्य सरकार से नोटिफाइड है और आरवीटीआर का बफर क्षेत्र है। इसमें रामपुरिया गांव बसा है। जिसे कोटा-बूंदी हाइवे से जोड़ने के लिए पीडब्ल्यूडी ने दो से ढाई किमी लंबी सड़क बना दी। जबकि, इसके लिए विभाग ने एफसीए-1980 के तहत भूमि डायवर्जन की कार्यवाही नहीं की और न ही वाइल्ड लाइफ क्लियरनेंस ली गई, जो वन संरक्षण अधिनियम 1980 का खुला उल्लंघन है।  यदि, पीडब्ल्यूडी द्वारा एफसीए की कार्यवाही की जाती तो इसकी जानकारी मुख्य संभागीय वन संरक्षक एवं फिल्ड निदेशक व उप वनसंरक्षक बूंदी को होती लेकिन, दोनों ही अधिकारियों ने वनक्षेत्र में सड़क निर्माण की जानकारी होने से इंकार कर दिया।  ऐसे में सवाल उठता है कि पीडब्ल्यूडी ने वनभूमि पर किसकी परमिशन से सड़क बना दी। </p>
<p><strong>इधर, एयरपोर्ट का काम अटकाया, उधर सड़क बनवा दी</strong><br />शंभुपुरा में प्रस्तावित ग्रीन फिल्ड एयरपोर्ट की जमीन भी जाखमूंड वनखंड में ही आती है। यहां वन विभाग की कथनी और करनी में अंतर नजर आता है। एक तरफ तो वनभूमि के डायवर्जन व वाइल्ड लाइफ क्लीयरेंस के नाम पर 6 साल से एयरपोर्ट जैसे महत्वकांशी प्रोजेक्ट को अटकाया हुआ है। वहीं, दूसरी ओर इसी वनखंड में एयरपोर्ट की जमीन से सटी वनभूमि पर वन संरक्षण अधिनियम 1980 के तहत डायवर्जन की कार्रवाई किए बिना ही सीसी रोड का निर्माण करवा दिया, जो वन अधिकारियों की मिलीभगत के बगैर संभव नहीं है। </p>
<p><strong>वन संरक्षण अधिनियम 1980 का उल्लंघन जघन्य अपराध </strong><br />डाबी रेंज का जाखमूंड वन क्षेत्र रामगढ़ टाइगर रिजर्व का बफर एरिया है। जहां दिनदहाड़े करीब 2 किमी सीसी सड़क बना दी गई। यह सड़क कार्यकारी एजेंसी ने बिना एफसीए-1980 के तहत वनभूमि डायवर्जन किए ही बना दी है, जो वन संरक्षण अधिनियम 1980 का खुला उल्लंघन है। यह वन विभाग की दुनिया का सबसे जघन्य अपराध की श्रेणी में आता है। केंद्रीय व राज्य स्तर के उच्च वन अधिकारियों द्वारा स्थानीय वन अधिकारियों व कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।<br /><strong>- देवव्रत सिंह,अध्यक्ष, पगमार्क फाउंडेशन कोटा</strong></p>
<p>जब सीसीएफ व बूंदी वन मंडल के डीएफओ को प्रोटेक्टेड वनक्षेत्र में सड़क बनने की जानकारी नहीं है तो संबंधित एजेंसी ने किसके आदेश पर सड़क बना दी। बफर क्षेत्र में सड़क बनना वन अधिकारियों की घोर लापरवाही का नतीजा है। एक तरफ तो भूमि डायवर्जन व वाइल्ड लाइफ क्लीयरेंस के चक्कर में शंभुपुरा एयरपोर्ट का काम 6 साल से अटका रखा है और दूसरी तरफ बिना एफसीए की कार्रवाई के टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्र में सड़क बना दी। यह गंभीर मामला है, इसकी तह तक जांच होनी चाहिए।<br /><strong>- अजय मीणा, वाइल्ड लाइफ रिसर्चर</strong></p>
<p>मुझे बूंदी आए अभी 15 दिन ही हुए हैं। आपके द्वारा ही जानकारी मिल रही है। वैसे जाखमूंड वनक्षेत्र में सीसी सड़क बन रही है, इसकी मुझे जानकारी नहीं है।<br /><strong>- वीरेंद्र सिंह कृष्णिया, उप वन संरक्षक बूंदी वन मंडल</strong></p>
<p>डाबी रेंज के जाखमूंड वनखंड में सीसी सड़क बनने की मुझे जानकारी नहीं है। इस तरह की सड़क बनाए जाना मेरे संज्ञान में नहीं आया। बूंदी डीएफओ से मालूम कर मामले का पता करेंगे। <br /><strong>- रामकरण खैरवा, मुख्य वनसंरक्षक एवं संभागीय फिल्ड निदेशक, कोटा वन विभाग </strong></p>
<p>रामगढ़ टाइगर रिजर्व में दो तरह के क्षेत्र आते हैं, पहला-कोर एरिया होता है, जो मेरे अधिकार क्षेत्र में आता है और दूसरा-बफर क्षेत्र है, लेकिन यह बूंदी वन मंडल के अधिकार में आता है। यहां सड़क बनने संबंधित जानकारी वहां के डीएफओ ही दे सकते हैं। <br /><strong>- संजीव शर्मा, उपवन संरक्षक, रामगढ़ टाइगर रिजर्व बूंदी</strong></p>
<p>जाखमूंड वनक्षेत्र स्थित रामपुरिया गांव की सीसी सड़क कितने किमी की और कब से बनाई जा रही है यह शुक्रवार को वर्कआॅर्डर देखकर बताऊंगा। वहीं, एफसीए कार्यवाही के बारे में अभी नहीं सुबह बताऊंगा। कल बात करना।<br /><strong>- राजाराम मीणा, एक्सईएन, पीडब्ल्यूडी विभाग बूंदी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Apr 2024 14:10:55 +0530</pubDate>
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                <title>खुशखबरी : शावकों की किलकारी से गूंजा रामगढ़, बाघिन ने 2 शावकों को दिया जन्म!</title>
                                    <description><![CDATA[ग्रामीणों व वनसूत्रों ने बाघिन द्वारा 2 शावकों को जन्म देने की बात कहीं  है लेकिन रामगढ़ टाइगर रिजर्व से जुड़े अधिकारियों ने इसकी अधिकारिक पुष्टि नहीं की है। लेकिन जंगल से जुड़े गांवों में यह चर्चा आम है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/good-news--ramgarh-echoed-with-the-cries-of-the-cubs--the-tigress-gave-birth-to-2-cubs/article-38069"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-02/khushkhabri--ramgarh-mei-kilkari-gunji...kota-news..23.2.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। रामगढ़ टाइगर रिजर्व में आखिरकार वो घड़ी आ गई जिसका वन्यजीव प्रेमियों व शहरवासियों को बरसों से इंतजार था। रामगढ़ के जंगलों में शावकों की किलकारी गूंज उठी। बाघिन आरवीटी-2 ने जेतपुरा रेंज में शावकों को जन्म दिया है।  ग्रामीणों व विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बाघिन ने 2 शावकों को जन्म दिया है। गत वर्ष सितम्बर माह में बाघ-बाघिन की सफल मेटिंग हो चुकी थी। शावकों को जन्म देने का समय भी पूरा हो चुका है। वहीं, रेडियोकॉलर से बाघिन के एक-डेढ़ माह से एक ही जगह बार-बार आने जाने की लॉकेशन मिल रही है। इसके अलावा गर्भकाल के दौरान बाघिन का वजन बढ़ने से शरीर में भारीपन नजर आ रहा था, जो अभी समान्य दिखाई दे रहा है। वहीं, दो शावकों को देखा गया है। ग्रामीणों ने भी शावकों के होने की पुष्टि की है। सुरक्षा कारणों के चलते शावकों के जन्म स्थान व रेंज को खबर में नहीं लिखा जा रहा है। </p>
<p><strong>गाय का किया शिकार</strong> <br />जंगल से सटे हरिपुरा की झौंपड़िया गांव के ग्रामीणों ने बताया कि कुछ दिन पहले पालतू गाय जंगल में चरने गई थी। इस दौरान श्वान भी साथ था। उनके वापस नहीं लौटने पर अगले दिन ग्रामीण जंगल में गए थे। वहां गाय व श्वान मृत मिले। ग्रामीणों द्वारा 2 शावकों को देखे जाने की बात कही जा रही है। वहीं, फोरेस्ट से जुड़े सूत्रों ने भी इसकी पुष्टि की है। </p>
<p><strong>शावकों की अधिकारिक पुष्टि नहीं</strong><br />ग्रामीणों व वनसूत्रों ने बाघिन द्वारा 2 शावकों को जन्म देने की बात कहीं  है लेकिन रामगढ़ टाइगर रिजर्व से जुड़े अधिकारियों ने इसकी अधिकारिक पुष्टि नहीं की है। लेकिन जंगल से जुड़े गांवों में यह चर्चा आम है। </p>
<p><strong>रणथम्भौर में दिया था 4 शावकों को जन्म</strong><br />बाघिन आरवीटी-2 बाघिन मछली की नाती और सुंदरी यानी टी-17 की बेटी है। इसका जन्म 29 जून 2012 को रणथम्भौर में हुआ था। इसने 8 साल की उम्र में 4 शावकों को जन्म दिया था। जिसमें से एक शावक की मौत हो गई थी। </p>
<p><strong>17 जुलाई को रामगढ़ आई थी आरटीवी-2</strong><br />बाघिन आरवीटी-2 यानी टी-102 को 17 जुलाई 2022 को रणथम्भौर के आमाघाटी वन क्षेत्र से रामगढ़ टाइगर रिजर्व में शिफ्ट किया गया था। एक माह माह बाद सॉफ्ट एनक्लोजर से हार्ड रिलीज किया गया था। सितम्बर माह में बाघ आरवीटी-1 से पहली बार मुलाकात हुई थी।  इसके बाद दोनों में नजदीकियां बढ़ी और सफल मेटिंग हुई थी। </p>
<p>ऐसी सूचना मिली है लेकिन स्पष्ट रूप से नहीं कह सकते। जब तक कैमरों में शावकों की तस्वीर कैद नहीं होगी और आंखों से न देख लें तब तक शावकों के जन्म के बारे में स्पष्ट रूप से नहीं कह सकते। <br /><strong>- संजीव कुमार शर्मा, डीएफओ रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Feb 2023 14:41:14 +0530</pubDate>
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                <title> उम्र सीमा खत्म करो, परिवार के प्रत्येक सदस्य को दें 25 लाख </title>
                                    <description><![CDATA[रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में बसे 8 गांवों का विस्थापन किया जाना है। इस कड़ी में सबसे पहले गुलखेड़ी गांव को विस्थापित किया जाएगा। जिसका सर्वे हो चुका है। दैनिक नवज्योति टीम ने ग्रामीणों के बीच पहुंच हाल जानने की कोशिश की तो विस्थापन का दर्द छलक पड़ा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/end-age-limit--give-25-lakhs-to-each-family-member/article-27049"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-10/umra-seema-khatm-karo,-pariwar-ke-prtyek-sadasy-ko-de-25-lakh...kota-news-18.10.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। आसमां तो वो ही रहेगा, पर रंग बदल जाएंगें, अपनी माटी की खुशबू सांसों से कहां ले पाएंगे। बचपन खेला, जवानी बीती जिन राहों से गुजरा दिल, बूढ़ी होती ठंडी आंखें अब कहां होगी बंद। एक-एक ईंटों में बसी पुरखों की यादें, अब न जाने कितने टुकड़ों में बंट जाएगी। बाप-दादा की निशानियां, जमीदोंज होती धूल में मिट जाएंगी। विस्थापन की काली छाया, विरासत से दूर कर जाएगी। ये पंक्तियां सटीक बैठ रही हैं रामगढ़ टाइगर रिजर्व के बीच बसे गांव जावरा की झौपड़ियां व हरिपुरा की झौपड़ियां के बाशिंदों पर। इन दिनों ग्रामीण विस्थापन के डर के साए में दिन काट रहे हैं। दोपहर से रात तक विस्थापन पर चर्चा आम हो गई। जहां भी दो लोग मिले वहीं मुआवजे को लेकर बहर छिड़ जाती है। दैनिक नवज्योति टीम ने ग्रामीणों के बीच पहुंच हाल जानने की कोशिश की तो विस्थापन का दर्द छलक पड़ा। पेश है, लाइव रिपोर्ट...</p>
<p><strong>पापा हमें गांव से निकालने आ गए: </strong><br />गांवों में अब विस्थापन की चर्चा स्कूलों से लेकर खेत खलियानों तक हो रही। बच्चों के बीच विस्थापन के अलग-अलग रंग दिख रहे हैं। नवज्योति टीम को गांव में देख पांच वर्षीय बालक राहूल पिता से बोला, हमें निकालने वाले आ गए..., मासूम के शब्द से ग्रामीणों के चेहरों के हाव-भाव बदल गए। जिन्हें देख ऐसा लगा मानो, शब्द नहीं, धनुष से निकला तीर हो, जो दिल जख्मी कर गया। </p>
<p><strong>किसी ने 3 तो किसी ने 5 लाख का कर्ज लेकर बनाया मकान  </strong><br />जावरा की झौंपड़ियां गांव में कई परिवार ऐसे हैं, जिन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान का काम तो शुरू किया लेकिन पूरा करने के लिए कर्ज के तले दब गए। गांव के ही हेमराज गुर्जर ने 3 लाख का कर्ज लेकर अधूरा निर्माण पूरा करवाया। वहीं, सूरतराज मीणा ने साहूकारों से ब्याज पर 6 लाख लेकर मकान बनाया। अब सरकार विस्थापन करना चाहती है, जिसके लिए उन्हें जो मुआवजा राशि दी जाएगी उसमें से कर्ज चुकाने के बाद जो राशि बेचगी उससे तो प्लॉट भी नहीं मिल पाएगा। प्रहलाद मीणा व पप्पूलाल ने कहा, दूसरी जगह बसने के लिए प्लॉट, कृषि भूमि और पशुपालन के लिए बाड़ा खरीद सकें, इतना तो मुआवजा मिलना चाहिए। </p>
<p><strong>हम आदिवासी, पहाड़ों पर रहने का अधिकार </strong><br />जावरा की झौपड़ियां निवासी लटूर प्रजापित व प्रहलाद मीणा कहते हैं, हमारे पूर्वज 500 सालों से यहां रहते आए हैं। हम आदीवासी हैं, हमें पहाड़ों पर रहने का अधिकार है। घरों की एक-एक ईंटों में पुरखों की यादें बसी हैं। उस माटी को कैसे भूला दें, जहां जन्म लिया और खेले-बडे हुए। कुछ महीने पहले पास के गुलखेड़ी गांव में सरकारी हाकम आए थे और कहा था, आपको यह गांव छोड़ना पड़ेगा। बात बूंदी के विकास की है, तो मिट्टी से दूर हो जाएंगे लेकिन मुआवजा तो इतना मिले कि बच्चों का पेट पाल सकें। प्रत्येक परिवार को मुआवजा के रूप में 15 लाख रुपए देने की बात कह रहे हैं, जबकि हमारी जमीन, घर, खेत-खलियान व बाड़े की कीमत ही इससे कहीं अधिक है। </p>
<p><strong>विस्थापन का जिक्र होते ही छलक पड़ी आंखें...</strong><br />विस्थापन का जिक्र होते ही नंदलाल व पृथ्वीराज की आंखें छलक उठी। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों को घर-जमीन छोड़ने के बदले सरकार प्रत्येक परिवार को जो मुआवजा दे रही है, जो पर्याप्त नहीं है। वन विभाग के अफसर कह रहे हैं, जिन घरों में 21 साल के बच्चे होंगे, उन्हें भी 15 लाख मिलेंगे। लेकिन, गांव के अधिकतर परिवारों में बच्चे 21 से कम उम्र के हैं, ऐसे में इन परिवारों को भारी नुकसान होगा। सरकार मुआवजे में उम्र की सीमा खत्म कर प्रत्येक परिवार के सदस्य को को 25 लाख रुपए मुआवजा दे, ताकि हम अच्छी जिंदगी बसर कर सकें। उचित मुआवजा नहीं मिला तो किसी भी सूरत में घर-जमीन नहीं छोड़ेंगे। </p>
<p><strong>30 करोड़ से विस्थापित होगा गुलखेड़ी </strong><br />रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में बसे 8 गांवों का विस्थापन किया जाना है। इस कड़ी में सबसे पहले गुलखेड़ी गांव को विस्थापित किया जाएगा। जिसका सर्वे हो चुका है। इसके लिए विभाग को बजट भी आवंटित हो चुका है। गांव का सर्वे पूरा होने के बाद आपत्तियां मांगी गई है। जिसके निस्तारण के बाद गांव को विस्थापित किया जाएगा। विभाग दिसम्बर तक गांव को विस्थापित करने की तैयारी में जुटा है।  </p>
<p><strong>4 गांवों को जोड़ने वाले रास्ते पर पत्थरों का ढेर</strong><br />जावर गांव से आगे 4 गांवों को जोड़ने वाली रामझर नाले की पुलिया दो साल पहले आई बाढ़ से टूट गई थी। रास्ते में पत्थरों का ढेर लगा है। जिससे वाहनों का यहां से गुजना मुश्किल हो गया। जैसे-तैसे दुपहिया वाहन तो निकल जाते हैं लेकिन चार पहिया वाहन नहीं निकल पाते। खटकड़ पंचायत समिति ने रास्ता बहाल कर पुलिया का निर्माण करवाने का प्रयास किया लेकिन वन विभाग के अडंगे के कारण काम नहीं हो सका। वहीं, टाइगर रिजर्व की घोषणा के बाद से गांवों में विकास कार्य भी अवरूद्ध हो गए।  </p>
<p><strong>नहीं डलवा पा रहे छत, वसूल रहे 50 हजार का जुर्माना</strong><br />हरिपुरा की झौंपड़ियां निवासी पप्पु लाल, शंकर व लटूर लाल ने बताया कि गांव में एक दर्जन से अधिक मकानों की छत डलना बाकी है। खटकड़ से निर्माण सामग्री लेकर गांव में आती ट्रैक्टर-ट्रॉली को वन नाके पर ही रोक लिया जाता हैं और वनकर्मी निर्माण सामग्री पर पाबंदी का हवाला देते हुए 50 हजार का जुमार्ना लगा रहे हैं। अब तक 10 से ज्यादा ट्रैक्टर चालकों पर जुमार्ना किया जा चुका है। इसी डर से कोई भी ट्रैक्टर चालक गांव में निर्माण सामग्री लाने को तैयार नहीं है। विरोध जताने पर वनकर्मी झगड़े पर उतारू हो जाते हैं।  </p>
<p><strong>खत्म हो उम्र की बाधा, प्रत्येक सदस्य को मिले 25 लाख</strong><br />प्रहलाद गुर्जर व देवराज ने बताया कि वन विभाग द्वारा पति-पत्नी को एक यूनिट मानकर 15 लाख रुपए मुआवजा देने की बात कही जा रही है। जबकि, घर, जमीन जायदाद की कीमत इससे कहीं ज्यादा है। डीएलसी रेट भी नहीं दी जा रही। वहीं, परिवार में बच्चों की उम्र 21 वर्ष होने पर ही उन्हें अलग से 15 लाख रुपए दिए जाएंगे लेकिन जिनके बच्चे निर्धारित उम्र से कम के हों तो उन्हें कुछ नहीं मिलेगा। गांव में अधिकांश परिवार ऐसे हैं जिनके बच्चे 18 वर्ष से कम उम्र के हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में ग्रामीणों को नुकसान हैं। मुआवजा राशि में उम्र की सीमा न रखे और समान रूप से मुआवजा दें।  </p>
<p><strong>एक नजर: जावरा की झौपड़ियां</strong><br />- आबादी:    550<br />- घर:     105<br />- वोटर:     400<br />- पंचायत:     खटकड़<br />- विधानसभा:     बूंदी </p>
<p><strong>एक नजर: हरिपुरा की झौपड़ियां</strong><br />- आबादी:    600<br />- घर:     150<br />- वोटर:     350<br />- पंचायत:     खटकड़<br />- विधानसभा:     बूंदी </p>
<p>गुलखेड़ी गांव के विस्थापन के लिए आरपैक योजना के तहत 30 करोड़ का बजट आवंटित हो चुका है। मुआवजे के लिए जिला कलक्टर की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई है। मुआवजा राशी तीन किश्तों में दी जाएगी। पहली किश्त ग्रामीण द्वारा अपने मकान, जमीन, बाड़े, खेत का कब्जा तहसीलदार को सौंपने पर, दूसरी किश्त मकान, बाड़ा तोड़ने पर तथा तीसरी किश्त कहीं बाहर मकान खरीदने के बाद सबूत पेश करने पर मिलेगा। वहीं, 50 हजार का जुर्माना उन ट्रैक्टर चालकों पर लगाया है जो सेंचूरी एरिया में अवैध खनन कर पत्थर, मिट्टी खोदकर ले जा रहे थे। मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए रिजर्व एरिया में बसे गांवों में निर्माण कार्य पर किसी तरह की कोई रोक नहीं लगाई है। ग्रामीणों द्वारा अधूरे निर्माण कार्य पूरा करा सकते हैं। जिसके लिए बाहर से निर्माण सामग्री मंगवा सकते हैं। वर्ष 2021 से अक्टूबर 20222 तक वनकर्मी द्वारा किसी भी ग्रामीण के साथ मारपीट का कोई मामला सामने नहीं आया है और न ही थाने में किसी के खिलाफ कोई रिपोर्ट दर्ज हुई है।  ग्रामीणों द्वारा मारपीट का आरोप लगाना बेबुनियाद है। <br /><strong>- तरुण मेहरा, एसीएफ रामगढ़ टाइगर रिजर्व </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 18 Oct 2022 14:40:34 +0530</pubDate>
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