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                <title>एनआरआई की बचाई जान, मलेरिया बन रहा था जानलेवा</title>
                                    <description><![CDATA[दक्षिण अफ्रीका से दीपावली पर जयपुर लौटे एनआरआई वीरेंद्र सिंह को तेज बुखार, प्लेटलेट्स घटने और सेप्सिस के कारण गंभीर हालत में महात्मा गांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया। 60–70% पैरासिटिक इंडेक्स वाले मलेरिया ने किडनी व फेफड़ों को भी प्रभावित किया। वेंटिलेटर व CRRT सपोर्ट के बावजूद तीन दवाएँ बेअसर रहीं, लेकिन विशेष मलेरिया दवा से सुधार हुआ। एक महीने बाद वे स्वस्थ होकर घर भेजे गए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/nris-life-saved-malaria-was-becoming-fatal/article-133096"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/11-(1200-x-600-px)-(4)4.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। दक्षिण अफ्रीका में रहने वाले एनआरआई वीरेंद्र सिंह दीपावली पर अपने घर लौटे ही थे कि उन्हें अचानक तेज बुखार, प्लेटलेट्स कम होने, ब्लड प्रेशर गिरने और सेप्सिस जैसे गंभीर लक्षणों की वजह से तुरंत महात्मा गांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया। उनकी हालत इतनी खराब थी कि किडनी फेलियर हो गया और उन्हें कई दिनों तक वेंटिलेटर पर रखा गया।</p>
<p>मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर और यूनिट हेड डॉ. मुकेश सरना ने बताया कि अनुभव के तौर पर ही पहचान की गई कि मरीज को गंभीर मलेरिया है। वीरेंद्र का पैरासिटिक इंडेक्स 60–70 प्रतिशत तक पहुँच गया था, जिससे दिमाग पर असर पड़ रहा था। साथ ही किडनी भी काम करना बंद कर चुकी थी। उनके फेफड़े भी संक्रमण से प्रभावित थे। तुरंत मलेरिया की दवाइयाँ शुरू की गईं। पर, तीन तरह की दवाएं असर नहीं कर रहीं थीं। उनकी बिगड़ती स्थिति को देखते हुए उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया और CRRT मशीन की मदद से शरीर के अपशिष्ट बाहर निकाले गए।  लेकिन अंत में मलेरिया की एक विशेष दवा ने असर दिखाया और मरीज की हालत में सुधार शुरू हुआ।</p>
<p>करीब एक माह तक लगातार इलाज के बाद अंततः वीरेंद्र सिंह की जान बचा ली गई और अब वे स्वस्थ हो गए हैं। डॉ. सरना ने बताया कि इस चुनौतीपूर्ण उपचार में उनकी टीम के साथ गुर्दा रोग विषयों की टीम, गहन चिकित्सा विभाग के डॉ. आशीष जैन, डॉ. सृष्टि जैन और पूरी टीम का महत्वपूर्ण योगदान रहा। ठीक होने पर उन्हें घर भेज दिया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 20 Nov 2025 19:09:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रोज 720 टीमें कर रही सर्वे, नहीं दिख रहा असर, पनप रहे मच्छर </title>
                                    <description><![CDATA[शहर के  खाली प्लॉट, पार्क के फव्वारों व ब्लैक स्पोट में पनप रहे मच्छर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/720-teams-are-conducting-surveys-every-day--no-effect-is-visible--mosquitoes-are-breeding/article-119819"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/882roer-(2)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने मानसून पूर्व  मलेरिया डेंगू, स्क्रब टाइफस जैसी बीमारियों से लड़ने के लिए जो कमर कसी थी उसकी पेटी अब खुल गई है। बारिश पूर्व विभाग ने खाली प्लॉट, गड्ढो की जो कवायद की थी वो पूरी नहीं होने से शहर में कई जगह बारिश का पानी जमा हो गया उसमें अब मच्छर पनप रहे जिससे लोग अब इसकी चपेट में आना शुरू हो गए है। विभाग की ओर से  व्यापक प्रचार प्रसार और सर्वे के बावजूद भी लोग डेंगू की चपेट में आ रहे है।  उल्लेखनीय है कि  इस बार चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने घरों में सर्वे करने के साथ ही गली मोहल्लों के गड्ढो जिनमें बारिश का पानी जमा हो सकता है उनको चिहिंत करने का काम शुरू किया है।  लेकिन वो पूरी तरह मूर्तरूप नहीं ले सका। शहर में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की 720 टीमें प्रतिदिन शहर के विभिन्न इलाकों में जाकर मौसमी बीमारियों का तो सर्वे लेकिन उसका असर धरातल पर नजर नहीं आ रहा है। </p>
<p><strong>शहर में मच्छरों की उत्पत्ति के 50 से अधिक ब्लैक स्पॉट </strong><br />मानूसन जल्दी सक्रिय होने से विभाग को गड्ढे भरने का समय ही नहीं मिला जिससे शहर में करीब 50 से अधिक ऐस ब्लैक स्पॉट है जहां डेंगू मलेरिया के मच्छर पनप रहे है। एमबीएस अस्पताल के पीछे बने क्वॉटर पीछे पानी का तालाब बना हुआ है। वहीं शहर के विभिन्न कॉलोनियों में भी खाली प्लाट व गड्ढों में पानी जमा हो रहा है। शहर के विभिन्न पार्क में बने जलाशय और फव्वारों जमा पानी में मच्छर पनप रहे है।  इस बार  डेंगू, मलेरिया के मरीज बढ़ने  की संभावनों को ध्यान में रखते हुए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग कागजों में तो अलर्ट मोड पर चल रहा है।  लेकिन वास्तव में शहर में तेजी से मच्छर पनप रहे है। प्रतिदिन 12 हजार से अधिक घरों का सर्वे कर एंटी लार्वा गतिविधियां की जा रही है। उसके बावजूद मच्छर का आंतक बढ़ रहा है।  कोटा शहर में करीब 50 से अधिक ब्लैक स्पॉट चिहिंत किए  जहां सबसे ज्यादा मच्छर पनपते है। कोटा में पिछले साल कोटा में डेंगू काफी फैला था जिसके कारण कई लोगों की जान पर बन आई थी। इस बार इसके फैलाव से पहले विभाग इसकी रोकथाम में जुटा है।  </p>
<p><strong> जगह जगह गड्ढों में  पनप रहे लार्वा</strong><br />शहर में जगह जगह बने गड्ढो खाली प्लाट में बारिश का पानी जमा होने से मच्छर तेजी से पनप रहे है। वहीं नालों व नदियों की सफाई बेहतर तरीके से नहीं हुई जिसके कारण मच्छरों के लार्वा इनमें पनप रहे है। चिकित्सा एवं स्वास्थ विभाग की टीमे घरों का तो सर्वे कर कूलर, परिडों में एंटी लार्वा गतिविधियां कर रही है लेकिन शहर में कई ऐसे स्थान है जहां जहां मच्छरों का अड्डा बना हुआ है।   पिछले साल महावीर नगर, विज्ञान नगर, नया कोटा में डेंगू बेलगाम हो गया था। नगर निगम को नालों की सफाई कराकर यहां एंटी लार्वा गतिविधियां करानी चाहिए। नदी- नालों की सफाई के नाम कचरा निकालकर ढेर बना दिया जाता है।  वहां से संबंधित कचरे को हटाया नहीं जाता।  जिसकी वजह से मच्छरों के पनपने के अनुकूल परिस्थितियां तैयार हो गई। <br /><strong>-अजय पानेरी, विज्ञान नगर </strong></p>
<p><strong>इन इलाकों में सबसे ज्यादा आए डेंगू के मरीज</strong><br />पिछले साल मच्छर जनित बीमारियों के सबसे ज्यादा मरीज जवाहर नगर, इंद्रा विहार, तलवंडी सेक्टर ए ,सी,एसएफएस सहित महावीर नगर सैकंड से आए। इसके अलावा अनंतपुरा,भीमगंजमंडी, नयागांव,रंगबाड़ी, महावीर नगर,केशवपुरा  पुरोहित जी की टापरी, डीसीएम, विज्ञान नगर, दादाबाड़ी, बोरखेड़ा, नयापुरा, स्टेशन, काला तालाब, डकनिया, शॉपिंग सेंटर,छावनी, कुन्हाडी, नांता सहित करीब 50 से अधिक ब्लैक स्टॉप है यहां अधिक मच्छर के लार्वा पनप रहे है। इन इलाकों से पिछले साल ज्यादा लोग बीमार हुए थे। <br /><strong>-रामनारायण गुर्जर, निवासी नांता</strong></p>
<p><strong>मलेरिया और डेंगू के लक्षण</strong><br /><strong>डॉ. संजय शायर ने बताया</strong> कि  मलेरिया में सर्दी के साथ एक दिन छोड़कर बुखार आना है। उल्टी, सिरदर्द, बुखार उतरने के बाद पसीना निकलना, कमजोरी होना आदि मलेरिया के लक्षण है। वहीं, डेंगू में तेज बुखार, सिरदर्द, बदन व जोड़ों में दर्द, शरीर पर लाल दाने, चकत्ते पड़ जाना, खून की उल्टी, पेशाब और मल में खून आना, अत्याधिक घबराहट होना आदि डेंगू के लक्षण हैं।</p>
<p><strong>पानी भराव स्थानों कोकर रहे चिंहित </strong><br />शहर में रोज टीमें घरों में कूलर पानी टंकी में पनपने वाले लार्वा को नष्ट करा रही है।  साथ प्रतिदिन 720 टीमें 12 हजार घरों के साथ ही मोहल्लों में बारिश के दौरान पानी जमा होने वाले खाली प्लाट, गड्ढों को चिंहित कर उन्हें भरवाया जा रहा है। जिससे डेंगू के लार्वा नहीं पनपे। इस लार्वा मिलने पर लोगों नोटिस भी दिए जा रहे है। <strong>-डॉ. नरेंद्र नागर, सीएमएचओं</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 08 Jul 2025 14:58:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हमें एकजुट होकर मलेरिया से निपटना होगा </title>
                                    <description><![CDATA[मलेरिया केवल एक चिकित्सा समस्या नहीं है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों पर भी गहरा प्रभाव डालने वाला एक सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/we-have-to-unite-and-deal-with-malaria/article-112102"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/rtrer-(3)11.png" alt=""></a><br /><p>हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि मलेरिया केवल एक चिकित्सा समस्या नहीं है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों पर भी गहरा प्रभाव डालने वाला एक सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट है। मानव में पांच प्रमुख प्लाज्मोडियम प्रजातियां पाई जाती हैं, फाल्सिपारम, विवैक्स, ओवैले, मलेरिया और नोक्लेसिय इनमें फाल्सिपारम सबसे अधिक घातक है। ये परजीवी संक्रमित मच्छर के काटने से मानव शरीर में प्रवेश करते हैं। मच्छर द्वारा प्रचलित परजीवी लिवर में पहुंचकर वहां अपना विकास आरंभ करता है और रक्त कोशिकाओं में आक्रमण करता चला जाता है। इसी रक्त प्रवाह के माध्यम से यह शरीर के पूरे भाग में फैलता है, जिससे प्रभावित व्यक्ति को बुखार, ठंड लगना और सिरदर्द जैसे लक्षण महसूस होने लगते हैं। ये परजीवी हल्के से लेकर गंभीर स्तर तक मलेरिया उत्पन्न कर सकते हैं। कुछ हल्के मामले भी रोगी को महीनों तक पीड़ा दे सकते हैं और यदि समय पर निदान न हो तो जानलेवा अवस्था तक भी पहुंचा सकते हैं। संक्रमण के शुरुआती दिनों में मलेरिया के लक्षण अक्सर सामान्य सर्दी-जुकाम या फ्लू से मिलते-जुलते होते हैं।</p>
<p> तेज बुखार के साथ अचानक ठंड लगना, पसीना आना, सिर भारी होना, मांसपेशियों में खिंचाव और थकान जैसे लक्षण फ्लू के समान दिखते हैं। कई बार उल्टी और दस्त जैसी समस्याएं भी हो जाती हैं। व्यक्ति अपनी सामान्य गतिविधि जारी नहीं रख पाता और कमजोरी के चलते बिस्तर पर रह जाता है। यदि समय पर सही परीक्षण और उपचार न मिले तो यह परजीवी आगे बढ़कर लाल रक्त कोशिकाओं को नष्ट कर सकता है, जिससे गंभीर एनीमिया, अंगों की अनुकूलता में कमी और मल्टी-आॅर्गन फेल्योर जैसी जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में मलेरिया के लगभग दो सौ तिरेसठ मिलियन मामले दर्ज किए गए, जो पिछले वर्ष के मुकाबले फिर से बढ़त दिखाते हैं। इसी साल पांच लाख सत्तानवे हजार केआसपास मौतें मलेरिया से हुईं। यह आंकड़ा किसी एक वर्ष में मलेरिया के कारण होने वाली जानों की एक दुखद स्थिति है। </p>
<p>2000 के दशक की शुरुआत में मलेरिया के खिलाफ वैश्विक प्रयासों ने जबरदस्त सफलता दर्ज की थी। उस समय विश्वभर में हर साल लाखों मामले और लाखों मौतें टली जा रही थीं। लेकिन कोविड-19 महामारी ने रुकावटें पैदा कर दीं, स्वास्थ्य तंत्र पर दबाव बढ़ा, स्वच्छता अभियान कमजोर पड़े और वित्तीय संसाधन कहीं और केंद्रित हो गए। परिणामस्वरूप 2019 के बाद से मलेरिया के मामले फिर से बढ़ने लगे हैं। इस बीच दवाओं और कीटनाशकों के प्रति परजीवियों तथा मच्छरों में प्रतिरोध बढ़ा है, जिससे पारंपरिक उपायों की प्रभावकारिता पर सवाल खड़े हो गए हैं। इसी कारण से अब वित्तीय संसाधनों की कमी भी बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। अंतर्राष्टÑीय राशि आवश्यकता के मुकाबले करीब साढ़े चार अरब डॉलर तक कम है, जिससे नई तकनीक और व्यापक वितरण पर काम प्रभावित हुआ है। </p>
<p>बचाव के लिए अनुपालन वाली मच्छरदानी, दीवारों पर दी जाने वाली कीटनाशक स्प्रे एवं अन्य कीटनाशक तकनीकों ने मलेरिया संक्रमण के जोखिम को बहुत हद तक कम किया है। साथ ही पानी जमा होने वाले स्थानों की सफाई और निगरानी, गंदे पानी के तालाबों का सुखाना और निकासी सुनिश्चित करना बेहद महत्वपूर्ण है। जब तक मच्छर नियंत्रण योजनाएं सख्ती से नहीं अपनाई जाएंगी, बीमारी का चक्र नहीं टूटेगा। सामुदायिक जागरूकता ही वह पहला कदम है, जो घर-घर तक पहुंचकर लोगों को सफाई और मच्छरदानी के उपयोग के प्रति प्रेरित करती है। निदान एक और अहम कड़ी है। </p>
<p>तीव्र निदान परीक्षण किट और माइक्रोस्कोप से किए गए रक्त परीक्षणों ने बीमारी की पहचान में क्रांतिकारी बदलाव किया है। कुछ ही मिनटों में परिणाम मिलने से मरीज समय पर एंटीमलेरियल दवाएं ले सकता है, जिससे गंभीर जटिलताओं का खतरा कम हो जाता है। ग्रामीण व दूरदराज के इलाकों में यह सुविधा विशेष रूप से जीवनदायिनी साबित होती है, जहां लैब संसाधन सीमित होते हैं। उपचार के क्षेत्र में अब भी प्रमुख दवा आर्टेमिसिनिन आधारित सम्मिश्रित थेरेपी बनी हुई है, जो परजीवी को तेजी से खत्म कर देती है। हालांकि, दवा प्रतिरोध के मामलों में वृद्धि ने शोधकों को नए संयोजनों और औषधीय नमूनों की खोज के लिए प्रेरित किया है। अनुसंधान संस्थान नए मॉलिक्यूलर लक्ष्य खोज रहे हैं और प्राकृतिक स्रोतों से भी संभावित दवाओं पर काम कर रहे हैं, ताकि भविष्य मेंअधिक प्रभावी उपचार उपलब्ध हो सकें। टीकाकरण ने मलेरिया नियंत्रण के क्षेत्र में एक नया युग खोल दिया है।</p>
<p>आरटीएसएएस टीका पहले से प्रयोग में है, जिसने गंभीर मलेरिया के जोखिम में तीस प्रतिशत तक कमी दिखाई है। ड्रोन से पानी जमा होने वाले दूरस्थ क्षेत्रों का सर्वे, मोबाइल ऐप्स द्वारा बीमारी का नक्शा तैयार करना और बड़े डेटा एनालिटिक्स से उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान करना अब संभव हो गया है। ये उपाय सीमित संसाधनों वाले देशों में बचाव योजनाओं को अधिक लक्षित और प्रभावी बना रहे हैं। मलेरिया से होने वाला सामाजिक-आर्थिक बोझ भी बहुत भारी है।</p>
<p>परिवारों पर उपचार का खर्च, काम और पढ़ाई छूटने से भोजन व आय में कमी इन सभी का मिलकर समुदाय की प्रगति पर असर पड़ता है। ग्रामीण क्षेत्रों में जहां किसान काम पर नहीं जा पाता, वहां रोजी-रोटी प्रभावित होती है। जलवायु परिवर्तन की चुनौतियां इस लड़ाई को और जटिल बना रही हैं। अतिवृष्टि से बाढ़ के दौरान पानी जमा होने वाले नए आवास बनते हैं, सूखे के समय तालाब सूखने के बाद पानी रुक जाने से मच्छर पनपते हैं। विस्थापन के कारण लोग नए क्षेत्रों में जा बसते हैं, जहां मलेरिया वायरस की जानकारी नहीं होती, इसलिए वहां तेजी से संक्रमण फैलता है।</p>
<p><strong>-रंजना मिश्रा</strong><br /><strong>(यह लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 26 Apr 2025 12:01:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मलेरिया मुक्त हुआ मिस्र, डब्ल्यूएचओ ने किया प्रमाणित  </title>
                                    <description><![CDATA[बयान में कहा गया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने मिस्र को मलेरिया मुक्त के रूप में प्रमाणित किया है, जो 10 करोड़ से अधिक निवासियों वाले देश के लिए महत्वपूर्ण है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/who-certified-of-egypt--as-malaria-free/article-93542"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/who1.jpg" alt=""></a><br /><p>वाशिंगटन। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने मिस्र को मलेरिया मुक्त देश के रूप में प्रमाणित किया है, जो इस बीमारी के खिलाफ लड़ाई में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। संगठन ने एक बयान में यह जानकारी दी। बयान में कहा गया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने मिस्र को मलेरिया मुक्त के रूप में प्रमाणित किया है, जो 10 करोड़ से अधिक निवासियों वाले देश के लिए महत्वपूर्ण है।</p>
<p>डब्ल्यूएचओ ने कहा कि यह उपलब्धि प्राचीन काल से देश में मौजूद बीमारी को खत्म करने के लिए मिस्र सरकार और लोगों के लगभग 100 साल के प्रयास का परिणाम है। डब्ल्यूएचओ किसी देश को मलेरिया मुक्त दर्जा प्रदान करता है, बशर्ते इस बात के विस्तृत और विश्वसनीय सबूत हों कि उसके पूरे क्षेत्र में मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों के संचरण की श्रृंखला कम से कम पिछले तीन वर्षों से बाधित है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 21 Oct 2024 11:36:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बारिश थमी, मौसमी बीमारियों का खतरा : मलेरिया-डेंगू, स्क्रब टायफस जैसी बीमारियां होने लगी हावी</title>
                                    <description><![CDATA[चिकित्सा विभाग की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में इस साल एक जनवरी 2024 से अब तक डेंगू के 2802 पॉजीटिव मरीज मिले चुके हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/rain-stopped-threat-of-seasonal-diseases-diseases-like-malaria-dengue/article-90704"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/2rtrer13.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में इन दिनों मानसून का सीजन है, हालांकि कुछ दिनों से मानसून थम गया है और धूप खिली हुई है। ऐसे में अब मौसम में फिर से गर्मी का असर बढ़ गया है। ऐसे में बारिश के बाद मौसमी बीमारियों आमजन पर हावी हो जाती हैं और डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, वायरल बुखार जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा अब बढ़ गया है। बार-बार बदल रहे मौसम के चलते लोग काफी संख्या में मौसमी बीमारी के मरीज भी बढ़ गए हैं। चिकित्सकों का कहना है कि बारिश के बाद डेंगू, मलेरिया के केस तेजी से बढ़ते हैं। </p>
<p>ग्रामीण इलाकों में स्क्रब टायफस के मामले ज्यादा देखने को मिलते हैं। इस बीच जयपुर में डेंगू अपने पैर तेजी से पसार रहा है। जयपुर जिले में इस साल अब तक 472 केस डेंगू के दर्ज हो चुके हैं। जो कि प्रदेश में किसी भी जिले में सबसे ज्यादा हैं। इनमें 236 जयपुर शहर और 236 जयपुर ग्रामीण में दर्ज हुए हैं। वहीं स्क्रब टायफस के जयपुर में 215 केस दर्ज हुए हैं। हालांकि चिकित्सा विभाग ने मौसमी बीमारियों से निपटने के लिए एंटीलार्वा गतिविधियां शुरू करने का दावा किया है, लेकिन हकीकत में मौसमी बीमारियों पर लगाम नहीं लग पा रही है।</p>
<p><strong>स्वाइन फ्लू के 1085 केस पॉजीटिव मिले, 12 की मौत, जयपुर में सबसे ज्यादा 559 रोगी</strong><br /><strong>स्क्रब टायफस और डेंगू ने बढ़ाई चिंता</strong><br />चिकित्सा विभाग की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में इस साल एक जनवरी 2024 से अब तक डेंगू के 2802 पॉजीटिव मरीज मिले चुके हैं। डेंगू के बाद प्रदेश में इन दिनों सबसे ज्यादा प्रकोप स्क्रब टायफस का देखने को मिल रहा है। स्क्रब टायफस के अब तक 1366 मरीज मिल चुके हैं। वहीं मलेरिया के 872, चिकनगुनिया के 113 पॉजीटिव मिले हैं। इन बीमारियों से इस साल अब तक कोई मौत चिकित्सा विभाग के आंकड़ों में दर्ज नहीं है। स्वाइन फ्लू के अब तक 1085 पॉजीटिव केस दर्ज हो चुके हैं। इनमें से 12 लोगों की मौत भी हुई है। स्वाइन फ्लू के सबसे ज्यादा केस 528 जयपुर में दर्ज हुए हैं। स्वाइन फ्लू से मौतें सबसे ज्यादा उदयपुर में 4 हुई हैं। वहीं स्क्रब टायफस के सबसे ज्यादा 242 पॉजीटिव उदयपुर में, मलेरिया के 251 केस बाड़मेर में और चिकनगुनिया के सबसे ज्यादा 21 केस उदयपुर में दर्ज हुए हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Sep 2024 09:37:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बारिश में मच्छरों का प्रकोप, मलेरिया डेंगू-चिकनगुनिया का खतरा बढ़ा</title>
                                    <description><![CDATA[एक जनवरी से अब तक डेंगू के 1451, मलेरिया 604, चिकनगुनिया 95 और स्क्रब टायफस के 511 रोगी मिले, स्वाइन फ्लू के 1026 केस पॉजिटिव मिले]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/mosquito-outbreak-in-rain-increases-the-risk-of-malaria-dengue/article-88448"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/1rer-(2)6.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में इन दिनों मानसून का सीजन है। हाल ही में राजधानी जयपुर सहित प्रदेश के कई इलाकों में भारी बारिश का दौर कई दिनों तक लगातार जारी रहा। हालांकि बीते करीब एक सप्ताह से बारिश का दौर कम हो गया है और धूप भी खिलने लगी है। ऐसे में बारिश के दौरान हुए गड्ढ़ों और नालों में भरे पानी में अब खतरनाक मच्छर पनपने लगे हैं। धूप खिलने और मौसम खुलने के साथ ही ये मच्छर अब हर घर में परेशानी का सबब बन गए हैं।</p>
<p>इन मच्छरों से डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, वायरल बुखार जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। बार-बार बदल रहे मौसम के चलते लोग काफी संख्या में मौसमी बीमारी के मरीज भी बढ़ गए हैं। चिकित्सकों का कहना है कि बारिश के सीजन में मच्छरों से बचाव करके ही इन बीमारियों से बचा जा सकता है।</p>
<p><strong>तेजी से फैल रहा डेंगू, सरकारी आंकड़ों में मौतें नहीं</strong></p>
<p>चिकित्सा विभाग की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में इस साल एक जनवरी 2024 से 22 अगस्त 2024 तक डेंगू के 1451 पॉजिटिव मरीज मिले चुके हैं। मलेरिया के 604, चिकनगुनिया के 95 और स्क्रब टायफस के 551 मरीज पॉजिटिव मिले हैं। इन बीमारियों से इस साल अब तक कोई मौत चिकित्सा विभाग के आंकड़ों में दर्ज नहीं है। स्वाइन फ्लू के अब तक 1026 पॉजिटिव केस दर्ज हो चुके हैं। इनमें से 12 लोगों की मौत भी हुई है। स्वाइन फ्लू के सबसे ज्यादा केस 528 जयपुर में दर्ज हुए हैं लेकिन मौत एक भी दर्ज नहीं है। जबकि मौतें सबसे ज्यादा उदयपुर में 4 हुई हैं। वहीं स्क्रब टायफस के सबसे ज्यादा 120 पॉजिटव उदयपुर में, डेंगू के सबसे ज्यादा 218 बीकानेर में, मलेरिया के 151 बाड़मेर में और चिकनगुनिया के सबसे ज्यादा 18 केस उदयपुर में दर्ज हुए हैं। </p>
<p><strong>स्वाइन फ्लू से किस जिले में कितनी मौतें</strong></p>
<p>जिला            मौतें</p>
<p>उदयपुर         4<br />भीलवाड़ा       3<br />कोटा            2<br />बीकानेर        2<br />चित्तौड़गढ़     1</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 24 Aug 2024 10:19:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Rajasthan में डेंगू के मामले बढ़े, इस साल चिकनगुनिया-मलेरिया से भी आगे</title>
                                    <description><![CDATA[एडीज प्रजाति के मच्छर के काटने से फैलता है डेंगू, गंभीर स्थितियों में प्लेटलेट्स काउंट्स ज्यादा गिरने से हो सकती है मौत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/dengue-cases-increased-in-rajasthan-this-year-ahead-of-chikungunya/article-78161"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-10/dengue-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। डेंगू के कारण हर साल बड़ी संख्या में लोगों को अस्पताल में भर्ती होना पड़ता है। गंभीर स्थितियों में डेंगू जानलेवा भी हो सकता है। डेंगू के जोखिमों और बचाव के तरीकों के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 16 मई को नेशनल डेंगू डे मनाया जाता है। डेंगू का वायरस संक्रमित एडीज प्रजाति के मच्छर के काटने से इंसानों में फैलता हैं। इनमें ए. एजिप्टी और ए. एल्बोपिक्टस मच्छर प्रमुख हैं। ये मच्छर जीका, चिकनगुनिया और अन्य वायरस भी फैलाते हैं। डेंगू के मच्छर दिन के समय में अधिक सक्रिय होते हैं। इसके काटने से तेज बुखार, शरीर-मांसपेशियों में दर्द के साथ उल्टी-दस्त और कुछ गंभीर मामलों में इंटरनल ब्लीडिंग के कारण शौच के साथ खून आने की समस्या हो सकती है। गंभीर स्थिति में ब्लड प्लेटलेट्स काफी तेजी से कम होने लगते हैं। अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो यह जानलेवा भी हो सकता है।</p>
<p><strong>प्रदेश में अब तक 814 केस सामने आए, बीकानेर में सबसे ज्यादा 160 </strong><br />प्रदेश में डेंगू के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इस साल एक जनवरी, 2024 से लेकर 15 मई, 2024 तक डेंगू के 814 केस पॉजिटिव मिल चुके हैं। हालांकि राहत की बात यह है कि एक भी व्यक्ति की मौत चिकित्सा विभाग के आंकड़ों में रिपोर्टेड नहीं है। वहीं पॉजिटिव मामलों की बात करें तो सबसे ज्यादा बीकानेर में 160 केस अब तक सामने आए हैं। इसके बाद 107 केस जयपुर ग्रामीण में और जयपुर शहर में 55 केस मिले हैं।</p>
<p><strong>डेंगू के प्रकोप से ऐसे बचें</strong><br />घरों में मच्छरों को पनपने न दें, पानी एकत्रित न होने दें। अपने दरवाजे और खिड़कियां बंद रखें। मच्छरों से बचें, पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें। घर के आसपास कीटनाशकों का छिड़काव कराएं, जिससे मच्छरों के प्रजनन को रोका जा सके। डेंगू के लक्षण दिखते ही डॉक्टर को दिखाएं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 May 2024 10:56:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डेंगू मच्छर दिन में काट रहा, भगा रहे रात में</title>
                                    <description><![CDATA[लोग मच्छरों के बचाव समय उचित समय पर नहीं कर रहे जिससे डेंगू की चपेट में ज्यादा आ रहे है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/dengue-mosquito-biting-during-the-day--driving-away-at-night/article-55789"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/dengue-machhar-din-me-kaat-rha,-bhga-rha-raat-me...kota-news-29-08-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। इस बार रूक रूक हो रही बारिश के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ गया है। शहर में जगह जगह बारिश का पानी मच्छर पनपा रहा है। जिससे डेंगू मलेरिया के मरीज लगातार बढ़ रहे है। पिछले 28 दिन में 275 डेंगू व 60 स्क्रबटायफस मरीज आ चुके है। डेंगू इतना घातक हो रहा है कि शहर में दो लोगों को ब्रेन हेमरेज हो गया है। वहीं डेंगू से एक की मौत हो चुकी है। पिछले कुछ दिनों से बारिश का दौर थमते ही शहर में डेंगू के मच्छरों ने हमला बोलना शुरू कर कर दिया है। सरकारी से लेकर निजी अस्पताल में मच्छर जनित रोगों के मरीजों का लगातार अस्पताल में पहुंचना जारी है। शहर में चलाए जा रही एंटी लार्वा गतिविधियों बाद भी डेंगू पैर पसार रहा है। शहर में मौसमी एवं मच्छर जनित बीमारियों मरीजों की संख्या बढ़ने के साथ ही स्वास्थ्य विभाग की ओर से मच्छरों की रोकथाम की गतिविधियां लगातार की जा रही लेकिन लार्वा कम होने का नाम ही नहीं ले रहा है। लोग मच्छरों के बचाव समय उचित समय पर नहीं कर रहे जिससे डेंगू की चपेट में ज्यादा आ रहे है। </p>
<p><strong>कूलर में पनप रहा लार्वा</strong><br />मेडिकल अस्पताल के सीनियर फिजिशियन डॉ. मनोज सलूजा ने बताया कि इस बार बारिश रूक रूक होने से खाली प्लांट, घरों के आसपास पानी जमा हो गया। इस बार बारिश के बाद भी कुलर चल रहे है।लोग कुलर पानी खाली नहीं करते ऐसे में लार्वा पनप रहा है। डेंगू फैलने का दूसरा सबसे बड़ा कारण डेंगू का मच्छर दिन में काटता है। लोग इसके बचाव के उपचार रात में करते है। दिन के समय लोग घरों में बरबूडा, बनियान टी शर्ट में रहते इस दौरान ही मच्छर काट लेता है। लोग रात को सोते समय मच्छर भगाने की कॉयल, आॅडोमास और मच्छरदानी लगते है। जबकि डेंगू के शिकार तो सबसे ज्यादा दिन में ही होते है। इसलिए दिन में भी मच्छरों से बचाव का उपाय करना जरूरी है। घरों के आसपास पानी जमा नहीं होने दे। </p>
<p><strong>डेंगू से बचाव के लिए दो स्तर पर करना होगा काम</strong><br />डॉ. मनोज सलूजा ने बताया कि डेंगू के मच्छर से बचने के लिए दो स्तर पर लोगों को  काम करना होगा। पहला तो जो वयस्क मच्छर पनप चुके उनकी फोगिंग और अन्य संसाधनों से इनको नष्ट करें। दूसरा डेंगू का मच्छर हमें नहीं काटे इसके लिए पूरी आस्तिन के शर्ट पहने, शरीर को पूरा ढक रखे। दूसरा मच्छर भगाने ने वाली कॉयल अगरबत्ती का प्रयोग दिन में करें। स्कूल, कार्यस्थल पर दिन में बचाव के करें। दूसरा लार्वा की रोकथाम के लिए कूलर को एक बार खाली करके उसमें क्रूड आयल डाले। जिससे मच्छर का लार्वा नष्ट हो जाएगा। पानी जहां पानी जमा उसको खाली करें। </p>
<p><strong>आठ माह में 275 मरीज</strong><br />कोटा शहर में 1 अगस्त से 28 अगस्त तक डेंगू के 275 मरीज आ चुके है। ये तो वो मरीज है जो सरकारी अस्पतालों में पहुंचे। निजी में भर्ती और इलाज करा रहे मरीजों की संख्या तो इससे दुगुनी है। </p>
<p><strong>तलवंडी क्षेत्र में सबसे ज्यादा आ रहे डेंगू के मरीज</strong><br />शहर में लंबे समय से बारिश नहीं होने से जमा पानी में मच्छर पनप रहे है। शहर के तलवंडी, जवाहरनगर, महावीर नगर, इंदिरा विहार, तलवंडी सेक्टर 1, 2, 3, 4 तथा महावीर नगर सैकंड में लगातार डेंगू के मरीज आ रहे हैं। मलेरिया, डेंगू एवं मौसम जनित बीमारियों से बचाव के लिए सावधनी बरतें तथा निवास स्थान पर स्थित कूलर, पानी की टंकियों में मच्छर पनपने की संभावना रहती है। </p>
<p><strong>लगातार करा रहे मॉनिटरिंग </strong><br />मौसमी बीमारियों को लेकर एंटी लार्वा गतिविधियां और घर सर्वे का कार्य किया जा रहा है। मरीजों को चिहिंत कर उनके ब्लड की स्लाइड ली जा रही है। कुलर पानी की टंकियों में पनप रहे लार्वा को नष्ट किया जा रहा है। डॉ एनएस राजावत, डॉ. अनिल मीना, एपिडेमियोलॉजिस्ट डा.ॅ विनोद प्रभाकर, एनटीपीसी के अमित शर्मा की टीम सुपरविजन कर रहे है। <br /><strong>- जगदीश कुमार सोनी, सीएमएचओ कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 29 Aug 2023 16:12:23 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>सरकारी फाइलों से भागा डेंगू मच्छर, शहर में पसारे पैर</title>
                                    <description><![CDATA[ओपीडी में प्रतिदिन 12 से 15 मरीज डेंगू मलेरिया के लक्षण वाले आ रहे है। इसके अलावा मौसमी बीमारियों और फ्लू के मरीजों की संख्या लगतार बढ़ रही है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/dengue-mosquito-ran-away-from-government-files--spread-in-the-city/article-54794"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/kota2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। पिछले दस दिन से बारिश का दौर थमते ही शहर में वायरल और मौसमी बीमारियों के साथ ही डेंगू के मरीजों की संख्या में इजाफा हो गया। पिछले एक सप्ताह में डेंगू के सबसे ज्यादा मरीज तलवंडी, इंद्रा विहार, तलवंडी क्षेत्र के सेक्टर 1 से 4 में सबसे ज्यादा मरीज आने से चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। आनन फानन में तीन दिन में टीमे लगाकर 950 घरों का सर्वे किया। कूलर, परिड़ो और गड्ढो में जमा पानी में लार्वा नष्ट करने की कार्रवाई कर डेंगू की रोकथाम की। जहां जून तक डेंगू के24 मरीज ही थे वो जुलाई व अगस्त में बढ़कर 106 पर पहुंच गए। अब तक शहर के निजी अस्पतालों में बड़ी संख्या में डेंगू के मरीज आ रहे हैं। लेकिन अब सरकारी अस्पतालों में डेंगू के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। एक जनवरी से 15 अगस्त तक 106 मरीज डेंगू के आ चुके है। दरअसल सरकारी अस्पतालों में डेंगू के मरीज का इलाज तो डेंगू का किया जा रहा है लेकिन रिपोर्ट में उसे डेंगू नहीं बताया जा रहा। किसी भी रिपोर्ट में डेंगू नहीं लिखा जाता। मौसमी बीमारी लिखकर चिकित्सा विभाग अपना बचाव करने में जुटा है।  दरअसल पिछले कुछ सालों में डेंगू ने ऐसा कहर बरपाया कि सरकारी अस्पतालों ने उसे अपनी रिपोर्ट से ही नदारद कर दिया।</p>
<p><strong>सरकारी डंडे से गायब डेंगू</strong><br />अस्पतालों में ओपीडी में डेंगू के लक्षण जैसे मरीज आ रहे हैं लेकिन सरकारी डंडा ऐसा की मरीजों की जांच नेगेटिव ही आ रही है। शहर में मच्छरों का प्रकोप होने के बावजूद जनवरी से जून तक मात्र 24 डेंगू के मरीज ही अस्पताल में रजिस्टर्ड हुए है। वहीं स्क्रब टाइफस के 18 मरीज, एक मरीज पी वी मलेरिया का आया था। वहीं 1 जुलाई से 15अगस्त के बीच 82 मरीज डेंगू के आए। 16 मरीज स्क्रब टाइफस के 3 मरीज मलेरिया पीवी के आए।  जबकि निजी अस्पतालों में डेंगू मलेरिया के मरीजों से वार्ड फुल चल रहे है। मरीजों को दो से तीन एसडीपी की मांग आ रही है। एमबीएस अस्पताल की ओपीडी सहित सभी सरकारी अस्पतालों में डेंगू और मलेरिया के लक्षण वाले मरीजों की संख्या में लगतार इजाफा  हो रहा है। इनका इलाज भी डेंगू व मलेरिया के संदिग्ध मरीज मानकर किया जा रहा है लेकिन रिपोर्ट में ये सभी मरीज डेंगू नेगिटव ही नजर आ रहे है। ओपीडी में प्रतिदिन 12 से 15 मरीज डेंगू मलेरिया के लक्षण वाले आ रहे है। इसके अलावा मौसमी बीमारियों और फ्लू के मरीजों की संख्या लगतार बढ़ रही है। </p>
<p><strong>तीन दिन  में हर घर खंगाला</strong><br />डीप्टी सीएमएचओं डॉ. घनश्याम मीणा ने बताया कि तलवंडी क्षेत्र के इंदिरा विहार, तलवंडी सेक्टर 1 से 4 में स्थानीय आशा, एएनएम 15 डीबसी वर्कर, 50 नर्सिंग छात्र मां भारती कॉलेज के, 20 छात्र राजकीय नर्सिंग कॉलेज के द्वारा लगातार सर्वे कराया जा रहा है। विगत तीन दिनों में टीम की ओर से 950 घरों का सर्वे कर हाई रिस्क एरिया में प्रत्येक घर में एंटी लार्वा गतिविधि की। हाई रिस्क ऐरिया तलवंडी में उच्च अधिकारियों की टीम मॉनिटरिंग कर रही है। डॉ. अनिल मीना, डॉ नरेंद्र राजावत, कीट वैज्ञानिक डीपी चौधरी, एंव यूपीएम आलोक रंजन को लगाया गया है। जो प्रतिदिन मॉनिटरिंग कर रहे है। इसके अलावा तलवंडी स्टाफ के साथ चार पीएचएम लगाए है। जो सुपरविजन कर रहे है।</p>
<p><strong>तलवंडी में डेंगू मच्छर की भरमार</strong><br />इंद्रा विहार कॉलोनी निवासी विजय कुमार ने बताया कि पिछले एक सप्ताह से कॉलोनी में हर दूसरे घर में वायरल, बुखार और डेंगू के मरीज आ रहे है। पिछले तीन दिन से कॉलोनी में निगम की और से लगातार फोगिंग हो रही है। चिकित्सा विभाग की टीमें घर घर जाकर लार्वा नष्ट करा रही है। ये काम पहले हो जाता इस क्षेत्र में इतने संख्या में मरीज नहीं आते। तलवंडी के सेक् टर 1 से 4 में घर घर में कोई ना कोई बीमार मिल जाएगा।</p>
<p><strong>मौसम में आए परिवर्तन से बढ़ रहे मरीज</strong><br />मेडिसिन विभाग के डॉ. शिव चरण जेलिया ने बताया कि मौसम में आए परिवर्तन के कारण वायरल के साथ अब डेंगू मलेरिया के लक्षणों वाले मरीज भी अस्पताल में आना शुरू हो गए है। अस्पताल में आई फ्लू, सर्दी,गला जाम और बुखार के मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। इन दिनों वायरल इंफेक्शन के मरीज लगतार बढ़ रहे है। ओपीडी में सर्दी, खांसी जुकाम के मरीज ज्यादा आ रहे है।   शहर में डेंगू का कहर धीरे धीरे बढ़ रहा है। हालांकि शहर के सरकारी अस्पतालों में डेंगू के मरीज अभी 82 ही आए है। ऐसे में सरकारी रिकार्ड में मरीज दर्ज ही नहीं हो रहे है। वहीं निजी अस्पतालों में डेंगू के मरीजों से बेड फुल चल रहे है। निजी अस्पताल में चार से पांच मरीज आ रहे है। </p>
<p><strong>ये हैं लक्षण</strong><br />डॉ ओपी मीणा ने बताया कि मलेरिया में सर्दी के साथ एक दिन छोड़कर बुखार आता है। उल्टी, सिरदर्द, बुखार उतरने के बाद पसीना निकलना, कमजोरी होना आदि मलेरिया के लक्षण है। वहीं, डेंगू में तेज बुखार, सिरदर्द, बदन व जोड़ों में दर्द, शरीर पर लाल दाने, चकत्ते पड़ जाना, खून की उल्टी, पेशाब और मल में खून आना, अत्याधिक घबराहट होना आदि डेंगू के लक्षण हैं।</p>
<p><strong>बचाव के लिए ये काम करें</strong><br />- सभी मच्छर रुके हुए पानी में अंडे देते हैं। इसलिए रुके पानी को भर दें या कुछ बूंदे मिट्टी के तेल की डाल दें।<br />- डेंगू का मच्छर साफ पानी में जैसे कूलर, टंकियों आदि में पैदा होता है। सप्ताह में एक बार पानी अवश्य बदल दें।<br />- डेंगू का मच्छर दिन में काटता है। इसलिए दिन में पूरे आस्तीन के पकड़े और मौजे पहनें।<br />- घरों और छतों पर रखे पानी भरने वाले पात्रों को हटा दें। जिससे न पानी भरकर जमा होगा और न मच्छर जन्म लेगा।<br />- सोते समय मच्छरदानी, मच्छर भगाने वाली अगरबत्ती या क्रीम का प्रयोग करें।<br />- बुखार आने पर पैरासिटामाल दवा खाएं और नजदीकी अस्पताल में दिखाएं।</p>
<p> मौसमी बीमारियों को नियंत्रण के लिए लागातार टीमे कार्य कर रही है। तलवंडी क्षेत्र में तीन दिन में लगातार सर्वे कराकर 950 घरों एंटी लार्वा गतिविधियां की गई। सीएमएचओ कार्यालय की फोगिंग मशीन से पूरे इलाके फोगिंग कराई गई। डॉ घनश्याम मीणा के निर्देशन में दो डॉक्टरों की टीम ने हाई रिस्क इलाकों में सर्वे कर डेंगू मलेरिया की रोकथाम के प्रभावी कदम उठाए। जिससे अब इस क्षेत्र मरीज आना कम हुए। <br /><strong>- डॉ. जगदीश कुमार सोनी, सीएमएचओ</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Aug 2023 15:37:38 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का- आज से शुरू होगी कोटा दक्षिण निगम क्षेत्र में फोगिंग </title>
                                    <description><![CDATA[नगर निगम कोटा दक्षिण के अतिरिक्त आयुक्त राजेश डागा ने कोटा दक्षिण क्षेत्र के सभी 80 वार्डों में फोगिंग का शिड्यूल जारी किया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/asar-khabar-ka---fogging-will-start-in-kota-south-corporation-area-from-today/article-53652"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/asar-khabar-ka...aaj-se-shuru-hoge-kota-dakshin-nigam-shetr-mein-phoging...kota-news-04-08-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । नगर निगम कोटा दक्षिण की ओर से क्षेत्र के  वार्डों में शुक्रवार से फोगिंग की जाएगी। फोगिंग रोजाना शाम को चार वार्डों में दो घंटे तक की जाएगी। नगर निगम कोटा दक्षिण के अतिरिक्त आयुक्त राजेश डागा ने कोटा दक्षिण क्षेत्र के सभी 80 वार्डों में फोगिंग का शिड्यूल जारी किया है। बरसात के सीजन में शहर में मच्छरों की संख्या अधिक हो रही है। जिससे मच्छर जनित बीमारियां मलेरिया समेत अन्य लोगों को शिकार बना रही है। इसे देखते हुए अतिरिक्त आयुक्त ने गैराज अनुभाग के प्रभारी को इसके लिए पाबंद किया है। जिसमें रोजाना व्हीकल माउंटेंड फोगिंग  मशीन के वार्डों में जाने से पहले संबंधित स्वास्थ्य निरीक्षक व पार्षद को भी जानकारी दी जाएगी। फोगिंग रोजाना शाम को 6 से 8 बजे तक की जाएगी। </p>
<p><strong>इन वार्डों में होगी फोगिंग</strong><br />आदेश के अनुसार 4 अगस्त को वार्ड 1, 21,22 व 23 में, 5 अगस्त को वार्ड 46,47,60 व 2 में, 7 अगस्त को  वार्ड 3,4, 5 व 24 में, 8 अगस्त को वार्ड 25,26,61 व 72 में, 9 अगस्त को वार्ड 73,74,48 व 49 में, 10 अगस्त को वार्ड 50,62,63 व 64 में, 11 को वार्ड 75,76,77 व 80 में, 12 को वार्ड 6,7,8 व 27 में फोंिगंग होगी।</p>
<p><strong>नवज्योति ने उठाया था मामला</strong><br />गौरतलब है कि शहर में वायरल व बुखार के मरीज बढ़ रहे हैं और नगर निगम की ओर से फोगिंग तक नहीं करवाई जा रही है। इस मामले में दैनिक नवज्योति ने 1 अगस्त को पेज दो पर हर तीसरे घर में बुखार व वायरल शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। समाचार प्रकाशित होने के बाद अधिकारी हरकत में आए। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 04 Aug 2023 17:23:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सीजन @ बारिश : मच्छरों का प्रकोप, फैला रहे डेंगू-मलेरिया, तेजी से बढ़ रहे मरीज</title>
                                    <description><![CDATA[आंकड़ों की बात करें तो प्रदेश में एक जनवरी से 31 जुलाई तक डेंगू के 983 मरीज मिल चुके हैं। वहीं मलेरिया के 686, चिकनगुनिया के 56 और स्क्रब टायफस के 268 मरीज अब तक सामने आ चुके हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/dengue-malaria-patients-are-increasing-rapidly-due-to-the-outbreak-of/article-53375"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/630-400-size-की-कॉपी-(2).jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में इस बार बारिश का दौर काफी अच्छा रहा है। मई जून में भी जब तेज गर्मी पड़ती है तब भी बारिश का प्रदेश में असर रहा जो अभी भी जारी है। ऐसे में अब बारिश के सीजन में मौसमी बीमारियों का प्रकोप भी बढ़ रहा है। बारिश के कारण जगह-जगह जलभराव और गड्ढ़ों में पानी भरने से मच्छर काफी तेजी से पनप रहे हैं। इसके कारण प्रदेश में डेंगू-मलेरिया, चिकनगुनिया जैसी मच्छर जनित बीमारियों के मरीजों की संख्या भी काफी तेजी से बढ़ रही है। आंकड़ों की बात करें तो प्रदेश में एक जनवरी से 31 जुलाई तक डेंगू के 983 मरीज मिल चुके हैं। वहीं मलेरिया के 686, चिकनगुनिया के 56 और स्क्रब टायफस के 268 मरीज अब तक सामने आ चुके हैं। राजधानी जयपुर में भी पिछले एक महीने में डेंगू के केस तेजी से बढ़े हैं। जयपुर में तो डेंगू से एक मौत भी हो चुकी है। मेडिकल हेल्थ डिपार्टमेंट की रिपोर्ट के मुताबिक 80 से ज्यादा केस पिछले 30 दिनों में ही सामने आ चुके हैं।</p>
<p><strong>इस बार जुलाई में ही दिख रहा डेंगू-मलेरिया का प्रकोप</strong><br />विशेषज्ञों की मानें तो अमूमन यह बीमारी अगस्त आखिर या सितम्बर में फैलनी शुरू होती है और अक्टूबर-नवंबर तक बरकरार रहती है। बारिश के बाद बड़ी संख्या में मच्छरों के पनपने से डेंगू-मलेरिया के केस बढ़ते हैं, लेकिन इस बार ये ट्रेंड जुलाई में ही देखने को मिल रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश लगातार तो नहीं आ रही है, लेकिन खण्ड बारिश होने के कारण एक ही जगह पानी नहीं बरस रहा। जहां एक बार पानी बरसता है, उसके बाद 3-4 दिन तक वहां सूखा रहता है। इस कारण सड़क के गड्ढ़ों, डिवाइडर किनारे, नालियों में भरे पानी में मच्छर पनप रहे हैं।</p>
<p><strong>जयपुर में डेंगू का खतरा बढ़ा</strong><br />हर बार की तरह इस बार भी जयपुर में डेंगू के मरीज ज्यादा सामने आ रहे है। राज्य में एक जनवरी से 31 जुलाई तक डेंगू के 983 केस और मलेरिया के 686 केस मिल चुके हैं। जिलेवार रिपोर्ट देखे तो डेंगू के सबसे ज्यादा मरीज 232 जयपुर जिले में मिले हैं, जबकि मलेरिया के सबसे ज्यादा 455 मरीज बाड़मेर में मिले है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Aug 2023 10:34:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डेंगू मरीजों से निजी अस्पतालों के बेड फुल, सरकारी में खाली</title>
                                    <description><![CDATA[अस्पतालों की ओपीडी फुल चल रही है। लैब में सैम्पल देने वालों का तांता लगा हुआ है।  सिस्टम पर भारी पड़ रहा है डेंगू का डंक । एक जनवरी से 20 अक्टूबर तक सरकारी आंकड़ो में डेंगू के 132 मरीज ही रिकार्ड में दर्ज हुए है। वहीं निजी अस्पतालों  मरीजों के डेंगू से प्लेटलेट्स कम होने से एसडीपी चढ़ाई जा रही है। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/private-hospitals-beds-full-from-dengue-patients--empty-in-government/article-27405"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-10/dengue-marizo-se-niji-aspataalo-mei-bed-full-sarkari-mei-khali...kota-news-21.10.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । शहर में बारिश का दौर थमते ही मौसमी बीमारियों के साथ डेंगू मलेरिया के मरीजों की संख्या लगतार बढ़ रही है। इस बार सरकारी अस्पतालों में डेंगू मरीज एक दो आ रहे है जबकि निजी अस्पतालों में डेंगू और प्लेटलेट्स कम होने वाले मरीजों की संख्या  दोगुनी चल रही है। कई बड़े निजी अस्पतालों में बेड फूल चल रहे हैं। कई लोगों का फ्लोर पर लेटाकर इलाज किया जा रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि इस बार सरकारी अस्पतालों में डेंगू पॉजीटिव नहीं बताकर अज्ञात बीमारी से प्लेटलेट्स  कम होने को  कारण बताया जा रहा है। जिससे से डेंगू के मरीजों की संख्या सरकारी में नगण्य ही है। इसके विपरीत निजी अस्पतालों में बेड खाली नहीं है। उल्लेखनीय है कि शहर में औसत रोज 12-13 हजार घरों का सर्वे किया जाना बताया जा रहा है, फिर भी मच्छर जनित बीमारी फैल रही है। कोटा जिला इन दिनों मच्छरजनित बीमारी की जकड़ में है। शहर के साथ साथ गांवों में भी डेंगू, स्क्रब टायफस, चिकनगुनिया के मरीज सामने आ रहे हंै। चिकित्सा महकमें ने मौसमी बीमारी के खिलाफ अभियान छेड़ रखा है। रोज औसत 12-14 हजार घरों का सर्वे किया जा रहा है। उसके बाद भी डेंगू का मच्छर काबू में नहीं आ रहा है। उल्टा दिन ब दिन लोगों को बीमार कर रहा है। जिससे पॉजिटिव केस का आकंड़ा बढ़ता जा रहा है। अस्पतालों की ओपीडी फुल चल रही है। लैब में सैम्पल देने वालों का तांता लगा हुआ है।  सिस्टम पर भारी पड़ रहा है डेंगू का डंक । एक जनवरी से 20 अक्टूबर तक सरकारी आंकड़ो में डेंगू के 132 मरीज ही रिकार्ड में दर्ज हुए है। वहीं निजी अस्पतालों  मरीजों के डेंगू से प्लेटलेट्स कम होने से एसडीपी चढ़ाई जा रही है।  डेंगू के चलते ब्लड बैंकों में एसडीपी की डिमांड बढ़ गई है।</p>
<p><strong>100 दिन में 14 लाख घरों का सर्वे</strong><br />डेंगू की रोकथाम के लिए चिकित्सा विभाग पूरी ताकत से लगा है। एक दिन में 12 हजार से लेकर 14 हजार घरों का सर्वे किया जा रहा है। तीन माह दस दिन में अभियान के तहत अब तक 100 दिन में 14 लाख से ज्यादा मकानों का सर्वे किया जा चुका है। यानी औसत रोज 14 हजार से ज्यादा घरों का सर्वे किया जा रहा है। उसके बाद भी डेंगू का मच्छर भाग नहीं रहा। उल्टा लोगों को बीमार कर रहा है।</p>
<p><strong>2017 में मचाया था डेंगू ने कहर</strong><br />डेंगू के कहर ने साल 2017 में कहर बरपाया था। 2017 अक्टूबर महीने में 776 के करीब पॉजिटिव केस सामने आए थे। और करीब 30 से ज्यादा मरीजों की मौत हुई थी। इनमें कार्ड टेस्ट वाले मरीज शामिल थे। साल 2018 में डेंगू का असर देखने को नहीं मिला। साल 2019 के अक्टूबर महीने में 400 के करीब पॉजिटिव केस मिले। साल 2020 में कोरोना के कारण डेंगू के केस सामने नही आए। इस साल अक्टूबर महीने में एक बार फिर डेंगू का मच्छर कोहराम मचा रहा है। साल 2017 जैसे हालात बनते नजर आ रहे अभी दशहरा मेला चलने से केस रिकार्ड नहीं  हो रहे मेला और त्यौहारी सीजन में मरीजों की संख्या बढ़ने की संभावना है। </p>
<p>हमारी टीमें लगातार शहर में सर्वे कर रही हैं। लोगों के घरों में जाकर लार्वा नष्ट करायाजा रहा हैं। जिन इलाकों में डेंगू के केस मिल रहे हैं। वहां विशेष सतर्कता बरती जा रही है। विभाग डेंगू  उन्मूलन को लेकर सतर्क है। शहर में डेंगू फैल रहा है तो इसकों भी दिखवाएंगे। <br /><strong>- जगदीश सोनी, सीएमएचओ, कोटा</strong></p>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 21 Oct 2022 15:56:41 +0530</pubDate>
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