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                <title>केंद्र सरकार का प्रौद्योगिकी आधारित श्रम सुधारों को लागू करने पर जोर, सुचारू कार्यान्वयन के लिए राज्य और उद्योग जगत की भूमिका : श्रम सचिव</title>
                                    <description><![CDATA[श्रम सचिव वंदना गुरनानी ने नए श्रम संहिताओं के तहत 29 कानूनों को 4 संहिताओं में समेकित करने की घोषणा की है। इस डिजिटल सुधार से 1,228 धाराओं को घटाकर मात्र 480 कर दिया गया है। सरकार का लक्ष्य तकनीक के जरिए पारदर्शिता बढ़ाना, अनुपालन बोझ कम करना और श्रमिकों का कल्याण सुनिश्चित करना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/central-governments-emphasis-on-implementing-technology-based-labor-reforms-role-of/article-153704"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/vandana.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। केन्द्रीय श्रम एवं रोजगार सचिव वंदना गुरनानी ने बुधवार को कहा कि सरकार अनुपालन के बोझ को कम करने, श्रमिक कल्याण में सुधार लाने और भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करने के उद्देश्य से नए श्रम संहिताओं के सुचारू और प्रौद्योगिकी-आधारित कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के उपाय कर रही है। उन्होंने कहा कि ऐसा करने के लिए सरकार राज्यों और उद्योग जगत के साथ मिलकर काम कर रही है। वह "नए श्रम संहिता: कार्यान्वयन, प्रतिस्पर्धात्मक लाभ के लिए अनुपालन और उद्योग की तैयारी" के विषय में राजधानी में उद्योग मंडल संगठन द्वारा आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित कर रही थीं ।</p>
<p>संगोष्ठी में शामिल उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, मानव संसाधन पेशेवरों, कानूनी विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं को संबोधित करते हुए गुरनानी ने कहा कि केंद्र ने श्रम संहिताओं के कार्यान्वयन में सामंजस्य स्थापित करने के लिए राज्यों के साथ व्यापक परामर्श किया है, साथ ही नियमों और अनुपालन ढाँचों को अंतिम रूप देने के लिए तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान कर रहा है है। उन्होंने कहा, "श्रम संहिताओं की सफलता सरकार, उद्योग और श्रमिकों के बीच मजबूत सहयोग पर निर्भर करेगी।"</p>
<p>श्रम सचिव ने बताया कि इन सुधारों के तहत 29 श्रम कानूनों को चार श्रम संहिताओं में समेकित किया गया है, 1,228 धाराओं को घटाकर 480 धाराएं कर दिया गया है और 1,436 नियमों को सुव्यवस्थित करके 357 नियम बना दिए गए हैं, जिससे भारत की श्रम अनुपालन प्रणाली में काफी सरलता आई है। सरकार के डिजिटल-प्रथम दृष्टिकोण पर प्रकाश डालते हुए श्रम सचिव ने कहा कि श्रम संहिता के तहत भविष्य में होने वाले निरीक्षण जोखिम-आधारित, प्रौद्योगिकी-सक्षम और हस्तक्षेपकारी प्रवर्तन के बजाय सुविधा प्रदान करने पर केंद्रित होंगे। उन्होंने कहा, "उद्देश्य अनावश्यक मानवीय हस्तक्षेप को कम करना और स्वैच्छिक अनुपालन को प्रोत्साहित करना है।"</p>
<p>केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त (सीपीएफसी) और कर्मचारी भविष्य निधि संगठन, भारत के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रमेश कृष्णमूर्ति ने कार्यक्रम में कहा, "ईपीएफओ नए श्रम संहिता के अनुरूप डिजिटल सेवा वितरण का तेजी से विस्तार कर रहा है।" उन्होंने बताया कि ईपीएफओ नियोक्ताओं और श्रमिकों के लिए अनुपालन को आसान बनाने के लिए एपीआई-आधारित रिटर्न फाइलिंग सिस्टम, स्वचालित खाता हस्तांतरण और सरलीकृत निकासी तंत्र शुरू कर रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 May 2026 17:13:30 +0530</pubDate>
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                <title>कागजों में मनरेगा कार्य, धरातल पर नहीं दिखे मैट और मजदूर</title>
                                    <description><![CDATA[ग्रामीणों ने बताया कि जहां पर कार्य तो जारी कर दिया गया है लेकिन अभी तक ना तो मैट का पता चला है ना ही किसी के द्वारा यहां कार्य करवाया जा रहा है तो इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि किस तरह सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/dholpur/mnrega-work-on-paper--mats-and-laborers-not-seen-on-the-ground/article-27506"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-10/67.jpg" alt=""></a><br /><p>सरमथुरा। सरकारें मनरेगा के तहत ज्यादा से ज्यादा लोगों को काम देने का दावा कर रही हैं। वहीं अफसरों की मिलीभगत से जिम्मेदार मनरेगा के नाम पर भ्रष्टाचार का परचम लहराने में जुटे हैं। आलम यह है कि जिम्मेदार अपने रिश्तेदारों को मजदूर दर्शा कर उनके नाम पर मजदूरी हड़प ले रहे हैं। सरमथुरा पंचायत समिति की ग्राम पंचायत मडासिल में मनरेगा के तहत गांव अमृत सरोवर पर पाल मरम्मत कार्य किया जा रहा है। जब अमृत सरोवर के पास मौके पर जाकर देखा तो वहां पर कोई भी कार्य नहीं किया जा रहा था। <br /><br />ग्रामीणों ने बताया कि जहां पर कार्य तो जारी कर दिया गया है लेकिन अभी तक ना तो मैट का पता चला है ना ही किसी के द्वारा यहां कार्य करवाया जा रहा है तो इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि किस तरह सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है। गौर करने लायक है जानकर बताते है कि कथित पोखर के निर्माण में 2-3 साल पहले 14 लाख रुपए खर्च किए गए और इस बार उसकी मरम्मत के नाम पर 10 लाख रुपए सरकार से ले लिए गए हैं लेकिन सच्चाई यह है कि इसी पोखर की पाल फिर से टूट गई है। मतलब कुल 2400000 रुपए पानी में बह गए हैं। केन्द्र सरकार की पानी को अहमियत देने वाली योजना जल शक्ति अभियान के नाम से चल रही है जिसके लिए मिनिस्ट्री आफ जल शक्ति ने हर जिले में जल विभाग के टेक्निकल ऑफिसर आईपीएस व अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की टीम बनाकर दौरा करवाया गया है जिसके तहत पानी की व्यवस्था पानी के बचाव रेन वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर के महत्व को ध्यान में रखते हुए हर जिले में 75 अमृत सरोवर बनाने की अहमियत को आगे बढ़ाया है। इसी कार्यक्रम के तहत जल शक्ति डिपार्टमेंट के उच्च अधिकारी इसी पोखर को देखने आए थे और पोखर की तारीफ कर गए। सरमथुरा पंचायत समिति की ग्राम पंचायत मड़ासिल में जब हमने मनरेगा के तहत हो रहे कार्य को मौके पर जाकर देखा तो पता चला कि ग्राम पंचायत मड़ासिल के गांव मड़ासिल में मनरेगा के तहत अमृत सरोवर का कार्य तो जारी हो गया है कागजों में कार्य चालू भी है लेकिन जब मौके पर जमीनी हकीकत देखी तो पता चला की जो मनरेगा का कार्य ग्राम पंचायत में करवाया जा रहा है वह सिर्फ कागजों में ही और आॅनलाइन चल रहा है जमीनी हकीकत में वहां पर कोई भी मजदूर उपस्थित नहीं था मजदूर तो छोड़ो मेट तक वहां उपस्थित नहीं थे तो आप इससे अंदाजा लगा सकते हैं कि जमीनी हकीकत में धरातल पर। इसी प्रकार ग्राम पंचायतों में काम तो ले लिया जाता है, लेकिन धरातल पर अगर देखा जाए तो मजदूर ही नहीं मिलते। जब हमने किसी ग्रामीण से जानकारी ली तो उन्होंने कहा कि हां यहां पर कार्य तो जारी हुआ है, लेकिन ग्राम पंचायत मुखिया के संरक्षण के चलते यहां पर कोई कार्य नहीं किया जा रहा  है। यह सिर्फ कागजों में ही कार्य करवाया जा रहा है। प्रशासन का ढुलमुल रवैया अवश्य ही एक अभिशाप साबित हो रहा है और मार गरीब पर पड़ रही है। जानकार बताते हैं कि सरकारी पैसा नियमानुसार खर्च हो रहा है लेकिन यह पैसा कहां खर्च हो रहा है यह आमजन की पहुंच और जानकारी से परे है और एरिया में अति बेरोजगारी फैली हुई है और कोई भी सुनने को तैयार नहीं है यह क्रमांक घर कब टूटेगा यह भी समझ से बाहर है। इस संबंध में  दीवान सिंह, कार्यवाहक विकास अधिकारी पंचायत समिति सरमथुरा का कहना है कि नियमानुसार पंचायत समिति से मनरेगा कार्य जारी किया गया है। कार्य प्रगति पर है। अगर वहां मेट मजदूर नही जा रहें है तो सचिव से बात कर के और जो नियमानुसार जो कार्रवाई होगी वह की जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>धौलपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 22 Oct 2022 12:48:34 +0530</pubDate>
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