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                <title>street dogs - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>स्ट्रीट डॉग की जिम्मेदारी डॉग लवर्स को मिले तो श्वान समस्या से मिले मुक्ति</title>
                                    <description><![CDATA[देखभाल से लेकर उनके खिलाने-पिलाने तक की व्यवस्था की निभाएंगे जिम्मेदारी।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/if-the-responsibility-for-street-dogs-is-given-to-dog-lovers--the-stray-dog-problem-can-be-solved/article-137267"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/500-px)-(7).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा शहर ही नहीं पूरे प्रदेश व दिल्ली तक में आमजन के लिए समस्या बने स्ट्रीट डॉग का अभी तक स्थानीय निकाय स्थायी समाधान नहीं निकाल सकें हैं। एक तरफ आए दिन श्वानों के हमले और काटने की गंभीर घटनाएं हो चुकी हैं। इन घटनाओं से लोग परेशान हैं । दूसरी तरफ डॉग लवर्स भी इन बेजुबान प्राणियों की पूरी तरह से मदद नहीं कर पा रहे हैं। इस समस्या को देखते हुए गत दिनों सुप्रीम कोर्ट को संज्ञान लेना पड़ा। इसके बावजूद स्ट्रीट डॉग लवर्स व पीड़ितों के बीच तनाव के मामले सामने आ रहे हैं। यदि स्ट्रीट डाग लवर्स को ही इलाके वार इन श्वानों की रखवाली करने की जिम्मेदारी देने के साथ साथ उन्हें कुछ सरकारी मदद दी जाए तो इस समस्या का निष्पादन हो सकता है।</p>
<p><strong>क्या किया जा सकता है</strong><br />1-डाग लवर्स को श्वानों की रखवाली की मौहल्लेवार जिम्मेदारी दे सकते हैं।<br />2- नगर निगम जो पैसा इन्हें पकड़ने,रखने और अन्य कामों पर खर्च करती है उसे डाग लवर्स के माध्यम से खर्च किया जा सकता है।<br />3- सुप्रीम कोर्ट ने एरियावाइज फीड़िंग जोन बनाने को कहा है। फीड जोन बनाकर निगम उसकी जिम्मेदारी डाग लवर्स को दे सकती है।<br />4- निगम पार्क, सामुदायिक भवन, पुराने भवन अथवा अन्य स्थान इन्हें रखने के लिए मौहल्लेवार उपलब्ध कराए और जिम्मेदारी डाग लवर्स को दे तो हमले और काटने जैसी घटनाएं नहीं हो पाएंगी।<br />5-मौहल्ले के लोग इन्हें फीड देने में अपनी भूमिका निभा सकते हैं। इससे दान का दान और घटनाओं पर अंकुश भी लगेगा। टीकाकरण और बधियाकरण भी डॉग लवर्स की निगरानी में नियमित होने से इनकी संख्या पर अंकुश लगने के साथ रैबीज का डर भी कम हो जाएगा।</p>
<p><strong>क्या कहते हैं स्ट्रीट डाग लवर्स</strong><br /><strong>सरकारी जगह जो आमजन के लिए उपयोगी नहीं हो उसे आवंटित कर दें</strong><br />स्ट्रीट डॉग के लिए वैसे तो डॉग लवर्स अपने स्तर पर देखभाल व खिलाने की व्यवस्था कर रहे हैं। लेकिन वह अलग-अलग व निजी स्तर पर या संस्था के स्तर पर किया जा रहा है। जिसका स्थानीय लोगों द्वारा कई बार विरोध भी किया जाता है। यदि नगर निगम एरिया वाइस पार्क या सामुदायिक भवन में से कोई भी सरकारी जगह जो आमजन के लिए उपयोगी नहीं हो उसे आवंटित कर दे तो डॉग लवर्स अपने स्तर पर उन स्थानों पर क्षेत्र के स्ट्रीट डॉग को रखकर उनकी देखभाल की जिम्मेदारी लेने को तैयार है। हमारी संस्था से करीब पांच हजार डॉग लवर्स जुड़े हुए हैं जो इस जिम्मेदारी को पूरे शहर में अलग-अलग जगह पर निभाने को तैयार हैं। सहयोग निगम को करना होगा। साथ ही उनका टीकाकरण व बधियाकरण निगम को करवाना होगा।<br /><strong>- सोनल गुप्ता, स्ट्रीट डॉग लवर्स</strong></p>
<p><strong>डॉग लवर्स स्ट्रीट डॉग की एरिया वाइज देखभाल की जिम्मेदारी निभाने को तैयार</strong><br />स्ट्रीट डॉग यदि लम्बे समय तक एक ही जगह पर रह जाता है तो वह दूसरी जगह पर बहुत मुश्किल से जा पाता है। नगर निगम द्वारा पकड़कर ले जाने के बाद भी वे वापस उसी जगह पर आ जाते हैं। डॉग लवर्स अपने स्तर पर डॉग को रोटी खिलाने से लेकर उनके बीमार व चोटिल होने पर उनके इलाज तक की व्यवस्था कर रहे हैं। लेकिन यह हर किसी के लिए संभव नहीं हो पाता है। ऐसे में यदि नगर निगम एरिया वाइस जगह उपलब्ध करवा दे और उनके घायल होने पर पशु चिकित्सालय भिजवाने व उपचार की व्यवस्था कर दे तो डॉग लवर्स स्ट्रीट डॉग की एरिया वाइज देखभाल की जिम्मेदारी निभाने को तैयार हैं। यह अच्छा प्रयास रहेगा।<br /><strong>- वैशाली, स्ट्रीट डॉग लवर्स</strong></p>
<p><strong>समस्या का स्थायी समाधान हो सकता है</strong><br />स्ट्रीट डॉग द्वारा लोगों को काटने की समस्या से अधिक आदमी द्वारा आदमी को काटने व मारने के मामले अधिक हो रहे हैं। स्ट्रीट डॉग को खिलाने व देखभाल करने वाले कई लोग हैं जो अपने स्तर पर उनकी देखभाल कर रहे हैं। लेकिन यदि नगर निगम उनके लिए हर क्षेत्र में जगह उपलब्ध करवा दे तो इस समस्या का स्थायी समाधान हो सकता है। नगर निगम इतने बड़े स्तर पर एक जगह पर सभी डॉग को रखकर उनकी देखभाल की जिम्मेदारी नहीं निभा सकता। निगम डॉग पर अभी जो खर्चा कर रहा है उससे कम खर्च में लोग अपने स्तर पर इनकी देखभाल की जिम्मेदार निभा सकते हैं। जिससे स्ट्रीट डॉग का विरोध भी नहीं होगा।<br /><strong>- राकेश वर्मा, स्ट्रीट डॉग लवर्स</strong></p>
<p><strong>स्ट्रीट डॉग को तो शहर व आबादी क्षेत्र से दूर ही रखा जाना चाहिए</strong><br />स्ट्रीट डॉग कोटा शहर ही नहीं पूरे देश की समस्या बनी हुई है। वल्लभ नगर क्षेत्र में ही कुछ लोग स्ट्रीट डॉग को रोटी खिलाकर पाल रहे हैं। जिससे वहां न्यूसेंस होता है। इसका कई बार विरोध किया गया तो मामला पुलिस तक भी पहुंच गया। स्ट्रीट डॉग को तो शहर व आबादी क्षेत्र से दूर ही रखा जाना चाहिए। ये अधिकतर बच्चों और महिलाओं को अपना शिकार बना रहे हैं। डॉग बाइट के मामले लगातार बढ़ते ही जा रहे हैं।<br /><strong>- सुरेश गुप्ता,स्ट्रीट डॉग से परेशान</strong></p>
<p><strong>श्वानों की समस्या का इससे अच्छा इलाज नहीं</strong><br />यदि श्वानों को मौहल्लेवार शेल्टर में रखा जाए तो इससे अच्छा इलाज कोई हो नहीं सकता। इनके खाने पीने की व्यवस्था सोसाइटी के रहवासी कर सकते हैं। साथ ही श्वानों के काटने, हमला करने की घटनाएं भी रुक जाएंगी।<br /><strong>- भगवान सिंह हाड़ा. अध्यक्ष, आदर्श नगर विस्तार हाउसिंग सोसाइटी बोरखेड़ा,</strong></p>
<p><strong>वफादार जानवर आराम से रह सकेगा</strong><br />सोसाइटी में एक निश्चित स्थान पर स्वानों को रखने का सुझाव बहुत अच्छा है। इससे आए दिन काटने, वाहनों के पीछे दौड़ने जैसी घटनाओं से तो निजात मिलेगी ही, इन्हें सोसाइटी से ही पर्याप्त भोजन भी मिलने लगेगा जिससे यह वफादार जानवर आराम से रह सकेगा।<br /><strong>- शैलेन्द्र सुमन.कैशवपुरा प्रगतिशील सोसाइटी,सेक्टर सात</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पालना में श्वानशाला में स्ट्रीट डॉग का बधियाकरण व टीकाकरण तो किया ही जा रहा है। वहीं श्वानशाला के पास ही डॉग शेल्टर हाउस भी बनाया है। नगर निगम के पास जो जगह उपलब्ध है उसी का उपयोग किया जा रहा है वह भी शहर व आबादी से दूर। एरिया वाइज निगम के स्तर पर जगह उपलब्ध करवा पाना संभव नहीं है। पहले तो इतनी जगह नहीं है। दूसरी तरफ आबादी क्षेत्र में डॉग लवर्स से अधिक इनका विरोध करने वाले अधिक है। एक जगह पर कई डॉग के रहने पर उनके द्वारा किए जाने वाले एक साथ शोर से लोगों को परेशानी का भी सामना करना पड़ेगा। कोर्ट का आदेश स्ट्रीट डॉग को आबादी क्षेत्र से दूर ही रखने का है।<br /><strong>- ओम प्रकाश मेहरा, आयुक्त, नगर निगम कोटा</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Dec 2025 13:10:04 +0530</pubDate>
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                <title>एक खतरनाक बारिश ने बना दिया श्वानों का संरक्षक</title>
                                    <description><![CDATA[बिना किसी की मदद के स्ट्रीट डॉग्स की केयर करने का उनका  मिशन जारी  हैं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/a-dangerous-rainstorm-turned-him-into-a-protector-of-dogs/article-136746"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px-(1)26.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। सड़क पर रहने वाले श्वान जो खुले आसमान के नीचे रहते हैं जिनका कोई मालिक नहीं है, उन्हें खाना-पानी देना, उनकी चिकित्सा का ध्यान रखना,उन्हें प्यार व सुरक्षा देने का सराहनीय काम कर रहे है शहर के राकेश वर्मा । वह सड़क पर रहने वाले श्वानों की नि:स्वार्थ भाव से सेवा करते हैं । उनका यह जुड़ाव सड़क के श्वानों के साथ इस कदर गहरा हो चुका है कि सर्दी, गर्मी, या बारिश कोई भी मौसम हो, हमेशा उनका ध्यान रखते है। जब भी किसी स्ट्रीट डॉग को स्वास्थ्य संबंधित समस्या होती है, तो उसे अपने खर्चे पर पशु चिकित्सालय में इलाज करवाते हैं। वर्मा की दुकान बैंड बॉक्स, गुमानपुरा में स्थित है, वहीं 10-11 स्ट्रीट डॉग्स आसपास रहते हैं । स्ट्रीट डॉग्स से अपने जुड़ाव को वह कहते है शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। हालांकि, इस नेक कार्य में आज तक शहर की किसी संस्था ने उनका सहयोग तो दूर संपर्क तक नहीं किया, फिर भी वे बिना किसी मदद के अपने मिशन को जारी रखे हुए हैं।</p>
<p><strong>स्ट्रीट डॉग्स से जुड़ी कहानी</strong><br />वह बताते है श्वानों से लगाव शुरू से था। वर्ष 2017 में उन्होंने जर्मन शेफर्ड नस्ल की श्वान डेजी को घर में पाला उससे गहरा जुड़ाव हो गया। उसे रणथंभौर गणेश जी , सांवरिया सेठ, इन्द्रगढ़ माताजी के दर्शन भी करवाएं। दर्शनों के लिए हाथ में उठाकर दूर से दर्शन करवाते थे। वे बताते हैं, इसी तरह स्ट्रीट डॉग गिल्ली जो अब अपने बच्चे के साथ उनके घर में रहती है उसे तब अपनाया जब 21 जुलाई 2024 को वह बारिश की रात में गंभीर हालत में सड़क पर मिली उसे तुरंत उठाकर अस्पताल ले गए । 15-20 दिन तक रोज अस्पताल इलाज के लिए ले जाते बाद में गिल्ली ठीक हो गई। तब राकेश और उनकी पत्नी पूजा ने तय किया कि वे गिल्ली को उसी स्थान पर छोड़ने के बजाय अपने घर रखेंगे।जब वह ठीक हो गई तो उसे खड़ेगणेश जी के दर्शन कराने लेकर गए।</p>
<p><strong>लॉकडाउनसे शुरू हुआ देखभाल का सिलसिला</strong><br />राकेश वर्मा का कहना है कि लॉकडाउन के दौरान जब पाबंदियां थीं रात 8 बजे बाजार बंद हो जाते थे, तब एक रात बारिश के दौरान दुकान के पास नाली में दो श्वान थीं जिन्होंने 6-6 बच्चों को जन्म दिया था। तब उन्होंने उन श्वानों को बाहर निकालकर फुटपाथ पर रखा और दुकानों के टीनशेड के नीचे इस तरह व्यवस्था की कि वे भीगें नहीं। उस समय तो आसपास के दुकानदारों ने मदद की उनके , दूध, ब्रेड लाते, लेकिन फिर बाद में सारी जिम्मेदारी हमने ही संभाली।</p>
<p><strong>शेरू से विशेष लगाव</strong><br />उनका शेरू से गहरा लगाव है क्योंकि उसे उसके बचपन से पाला है। एक दिन शेरू सड़क पर गिरा हुआ था और उसे किसी कार ने टक्कर मार दी थी। उसे नाली से बाहर निकाला उसके हिप बोन में फ्रैक्चर था और बगल में घाव भी था। शेरू का इलाज कराया, घाव ठीक हो गया, लेकिन फ्रैक्चर का आॅपरेशन नहीं हो सका, इसलिए वह ठीक से नहीं चल पाता। बावजूद इसके, रात कहीं भी रहे सुबह दुकान पर पहुंच जाता है।</p>
<p><strong>डॉग्स के नाम</strong><br />इन डॉग्स के नाम भी रखे हैं, जैसे शेरू, रानी, गिल्ली, मुखी आदि। वह इन डॉग्स को एंटी रेबीज इंजेक्शन भी लगवाते हैं और उनका इलाज कराते हैं। खाने के लिए वह इन्हें टोस्ट की टुकड़ी, रोटी, दूध, और ब्रेड देते हैं, लेकिन मीठा नहीं देते। उनका कहना है, मैं खुद ही इन डॉग्स की देखभाल करता हूँ। कभी किसी से मदद नहीं मांगी, जो बन पड़ता है वह करता हूँ। परमात्मा देता है, हम तो सिर्फ माध्यम हैं। कई बार इन डॉग्स के कीड़े निकालते समय कभी दांत लग गया या डॉक्टर से इलाज करवाने गए उस दौरान पकड़ना पड़ता है तो इनके दांत या पंजा लग गया तो सुरक्षा के लिए अपने रेबीज के इंजेक्शन भी लगवाता हूं।हालांकि कभी भी ये ख्याल नहीं आया कि इनके दांत या पंजा लगा मैंने इंजेक्शन लगवाएं कि इन्हें अब नहीं संभालूं इनसे ज्यादा खतरनाक तो इंसान हो रहे है। इंसान -इंसान को मार रहे है। ये तो फ्री के चौकीदार है।</p>
<p><strong>कस्टमर्स को डॉग्स से बचाने का तरीका</strong><br />वर्मा की दुकान में जब कस्टमर्स आते हैं, तो उन्हें डर लगता है डॉग्स दुकान में आ कर बैठ जाते है ऐसे में वर्मा ने एक तरीका निकाला है वह एक लोहे के डंडे को बजाते हैं, और डॉग्स यह समझ जाते हैं कि उन्हें अब दुकान से बाहर जाना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Dec 2025 16:40:43 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>International Dog Day: एक एक्सीडेंट ने बदला  डॉग्स का जीवन, मुहिम से जुड़कर स्ट्रीट डॉग्स को गोद ले रहे लोग</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुराइट्स सिर्फ  ब्रीड वाले डॉग्स ही न पालकर स्ट्रीट डॉग्स को भी गोद ले रहे हैं और देशभर में इसकी मिसाल पेश कर रहे हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/international-dog-day-an-accident-changed-the-life-of-dogs/article-88633"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/1rer-(4)7.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। एक एक्सीडेंट से शुरू हुई यह मुहिम आज सात हजार से ज्यादा स्ट्रीट डॉग्स को बेहतर जीवन दिलवा चुकी है। जयपुर के डॉग लवर वीरेन शर्मा ने पांच साल पहले स्ट्रीट डॉग्स को अडॉप्ट करने की मुहिम शुरू की और आमजन में हमेशा से बनी आ रही अच्छी ब्रीड के डॉग को पालने की भ्रांति को तोड़ा। जयपुराइट्स सिर्फ  ब्रीड वाले डॉग्स ही न पालकर स्ट्रीट डॉग्स को भी गोद ले रहे हैं और देशभर में इसकी मिसाल पेश कर रहे हैं। </p>
<p><strong>रोड एक्सीडेंट से शुरू हुई मुहिम </strong><br />स्ट्रीट डॉग्स अडॉप्शन की मुहिम शुरू करने वाले वीरेन बताते हैं कि मालवीय नगर से महिला ने मुझे फोन पर बताया कि उनके घर के पास एक स्ट्रीट डॉग और उसके 10 बच्चे थे जिन्हें वह समय-समय पर खाना दिया करती थी लेकिन फीमेल डॉग और एक बच्चा रोड एक्सीडेंट में मारे गए। ऐसे में हमने उन बच्चों को लिया और इंस्टाग्राम पर पोस्ट शेयर करके लोगों से उसे अडॉप्ट करने की अपील की। हमने इन डॉग्स को लेकर लोगों में जागरूकता फैलाने पर काम किया। स्ट्रीट डॉग्स कई मायनों में विदेशी नस्ल के डॉग्स से बेहतर होते हैं। उनकी इम्यूनिटी पावर अच्छी होती, लो मेंटीनेंस होते हैं। वीरेन ने बताया कि शुरूआत में पोस्ट शेयर करने पर उसका कोई रेस्पॉन्स नहीं मिलता था लेकिन जब हमने लोगों को स्ट्रीट डॉग्स के फायदे बताए तो अब इंस्टग्राम पर पोस्ट शेयर होते ही लोगों के मैसेज कॉल्स आने लगते हैं। हम दिन में औसतन 3 से 4 पपीज को अडॉप्ट कराते हैं। लीगल डॉक्यूमेंटेशन करके ही लोगों को बच्चा हैंडओवर करते हैं। </p>
<p><strong>रिकॉर्ड बुक में दर्ज हुआ अडॉप्शन  </strong><br />मुहिम शुरू होने के बाद लोगों में देसी डॉग्स रखने का ऐसा उत्साह बना है कि एक कैंप में सबसे ज्यादा देसी डॉग्स के अडॉप्शन का विश्व रिकॉर्ड भी कायम किया जा चुका है। इस एक्टीविटी को गोल्डन बुक ऑफ  वर्ल्ड रिकॉर्ड व वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ऑफ  इंडिया ने अपनी रिकॉर्ड बुक में दर्ज किया। रिकॉर्ड्स बुक के अनुसार विश्व में इस तरह का रिकॉर्ड पहली बार बना।</p>
<p><strong>300 डॉग्स का कराया इलाज </strong><br />वहीं दूसरी ओर होप एंड बियोंड के डॉ.जॉय गार्डनर और उनकी टीम पेडीग्री एवं स्ट्रीट डॉग्स को गोद लेने, इनके एनिमल बर्थ कंट्रोल कराने, उन्हें रेडियम कॉलर पहनाने और सड़कों पर घायल डॉग्स की मदद करने के लिए लगातार काम कर रही है। गार्डनर ने बताया कि 3 साल के दौरान संगठन ने लगभग 250 डॉग्स की नसबंदी करवाई है। वहीं कहीं भी घायल या बीमार डॉग्स मिलने पर इनका इलाज भी कराया गया है। अब तक इस पहल के तहत लगभग 300 डॉग्स का इलाज किया जा चुका है। समय-समय पर लोगों को जागरूक करने और उनमें डॉग्स के प्रति भय कम करने के लिए जागरूकता अभियान भी चलाया जाता है। </p>
<p>घर के आसपास रोजाना स्ट्रीट डॉग्स को खाना खिलाता था। लेकिन जब देखा कि वे सड़क पर सर्वाइव नहीं कर पाएंगे तो इन्हें घर ले आया। अब ये भी मेरी फैमिली का एक अहम हिस्सा बन गए हैं। लोगों से बोलना चाहूंगा कि वे भी इस मुहिम में जुड़ सकते हैं।<br />-रजनीश दास, निवासी, जवाहर नगर</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 26 Aug 2024 10:21:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्ट्रीट डॉग से अभी कुछ दिन और नहीं मिलेगी निजात</title>
                                    <description><![CDATA[नगर निगम कोटा दक्षिण में श्वानों को पक़ड़कर उनका बधियाकरण व वैक्सीनेशन का काम पिछले कई महीने से बंद है। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/there-will-be-no-relief-from-street-dogs-for-a-few-more-days/article-83134"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/6699-copy12.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में एक ओर जहां आवारा मवेशी समस्या बने हुए हैं। वहीं उससे बड़ी समस्या है स्ट्रीट डॉग। नगर निगम कोटा दक्षिण में पिछले कई महीने से इन्हें पकड़ने का काम बंद है। लेकिन लोकसभा चुनाव की आचार संहिता हटते ही निगम ने अब इन्हें पकड़ने का टेंडर किया है। लेकिन उसके अगले महीने खुलने से अभी कुछ दिन और लोगों को इससे निजात मिलने वाली नहीं है। शहर में स्ट्रीट डॉग द्वारा काटने की घटनाएं लगातार हो रही हैं। शहर का हर व्यक्ति इनसे परेशान है। ये बच्चों से लेकर महिलाओं व बुजुर्ग तक को अपना शिकार बना रहे हैं। राह चलते पैदल व्यक्ति हो या दो पहिया वाहन पर सवार या फिर घर के बाहर खेल रहे बच्चे हों। ये किसी को भी नहीं छोड़ रहे। शहर में आए दिन दिन इस तरह की घटनाएं होने के बाद भी बरसों से स्ट्रीट डॉग की समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा। </p>
<p><strong>फर्म को डी बार करने से बंद है काम</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण में श्वानों को पक़ड़कर उनका बधियाकरण व वैक्सीनेशन का काम पिछले कई महीने से बंद है। नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण में पुणे की फर्म यह काम कर रही थी। लेकिन दक्षिण निगम में कुछ समय पहले फर्म को डीबार कर दिया गया। इसका कारण अधिकारियों द्वारा फर्म के सही ढंग से काम नहीं करने व उसके खिलाफ शिकायतें होना बताया जा रहा है। जबकि वह फर्म कोटा उत्तर निगम में काम कर रही है। </p>
<p><strong>50 लाख का किया टेंडर</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण की ओर से हाल ही में 18 जून को टेंडर जारी किया है। जिसमें एक साल तक कोटा दक्षिण निगम क्षेत्र में श्वानों का बधियाकरण व वैक्सीनेशन किया जाना है। उसका 50 लाख रुपए का टेंडर किया है। टेंडर के लिए 8 जुलाई तक निविदा आमंत्रित की गई है। उसके  बाद टेंडर खोले जाएंगे और फर्म द्वारा सभी औपचारिकताएं पूरी करने पर कार्यादेश जारी होगा। जिसमें समय लगेगा। हालांकि निगम द्वारा पूर्व में भी  टेंडर निकाला था लेकिन कोई भी फर्म नहीं आई थी। </p>
<p><strong>पार्षद कर चुके मांग</strong><br />शहर वासियों के साथ ही नगर निगम कोटा दक्षिण के पार्षद भी स्ट्रीट डॉग को पकड़ने व उनका वैक्सीनेशन करने की मांग कर चुके हैं। पार्षदों का कहना है कि जब फर्म कोटा उत्तर में सही काम कर रही है तो फिर दक्षिण में ऐसा क्या हुआ जो उसे डीबार कर दिया गया। बड़ी मुश्किल से तो कोई फर्म काम करने आई थी। </p>
<p>स्ट्रीट डॉग के लिए टेंडर जारी किया है। 18 जून को जारी टेंडर 8 जुलाई को खोले जाएंगे। इस बार अधिक दिन का समय इसलिए दिया गया है जिससे कोई अच्छी व दूर की फर्म भी आ सकती है। जिस फर्म को डीबार किया गया है वह दो साल तक आवेदन ही नहीं कर सकती। <br /><strong>- रिचा गौतम, नगर निगम कोटा दक्षिण की स्वास्थ्य अधिकारी  </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 29 Jun 2024 14:39:30 +0530</pubDate>
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                <title>करोड़ों खर्च, नहीं हो रहा श्वानों का बर्थ कंट्रोल</title>
                                    <description><![CDATA[नगर निगम ने श्वान शाला बना दी। उसके साथ ही श्वानों को पकड़ने का टेंडर कर दिया। जिससे श्वानों का बधियाकण व टीकाकरण किया जा रहा है। लेकिन वह इतना कारगर साबित नहीं हो पाया है। नगर निगम  द्वारा करोड़ों पए खर्च करने के बाद भी शहर में श्वानों की संख्या कम नहीं हो रही है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/crores-spent--birth-control-of-dogs-is-not-happening/article-27995"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-10/karoro-kharch-nahi-ho-raha-shwano-ka-birth-control...kota-news-28.10.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । <strong>केस1</strong> - नगर निगम कोटा दक्षिण क्षेत्र में गत दिनों श्वानों के झुंड ने महापौर राजीव अग्रवाल के पुत्र पर हमला कर पैर में काट लिया था। जिससे पैर में श्वान के दांत का निशान हो गया। उन्हें ड्रेसिंग करवाने के साथ ही इंजेक् शन भी लगवाने पड़े। </p>
<p><strong>केस2</strong> - नगर निगम कोटा दक्षिण में ही इससे पहले भाजपा की महिला पार्षद पर भी एक श्वान ने हमला कर दिया था। स्कूटी पर सवार होने के बाद भी उनके पैर में श्वान ने काट लिया। जिससे उन्हें भी इंजेक् शन लगवाने पड़े। </p>
<p><strong>केस3</strong> - बजरंग नगर क्षेत्र में घर के बाहर खेल रहे एक बालक पर श्वानों के झुंड ने हमला कर दिया था। जिससे श्वानों ने उसकी गर्दन पर काट <br />लिया था। ऐसे में उसकी जान बड़ी मुश्किल से बच सकी।</p>
<p> ये उदाहरण पर्याप्त हैं शहर की उस समस्या को बताने के लिए जिसका सामना शहर के हर व्यक्ति को किसी न किसी रूप में करना पड़ रहा है। शहर में हर गली मोहहल्ले में श्वानेंं के झुंड नजर आते ही लोगों के मन में इतनी अधिक दशहत हो जाती है कि वे उनके आस-पास से भी निकलने में डरने लगे हैं। कोटा में दो नगर निगम बनने और करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी  श्वानों का बर्थ कंट्रोल नहीं हो पा रहा है। जिससे शहर की सड़कों पर श्वानों कीे संख्या कम होने की जगह बढ़ती ही जा रही है। वहीं श्वानों द्वारा लोगों को काटने की घटनाओं में भी कमी नहीं आई है। शहर में डॉग बाइट की समस्या दिनों दिन विकराल होती जा रही है। आए दिन किसी ने किसी के काटने के मामले सामने आ रहे हैं। जबकि कई मामलों का तो पता भी नहीं चल पाता है। सबसे अधिक महिलाएं व बच्चे श्वानों के काटने का शिकार हो रहे हैं। नगर निगम कोटा उत्तर व कोटा दक्षिण की बोर्ड बैठकों में इस  मुद्दे को सभी पार्षदों ने उठाया। उसके ससाधान के लिए नगर निगम ने श्वान शाला बना दी। उसके साथ ही श्वानों को पकड़ने का टेंडर कर दिया। जिससे श्वानों का बधियाकण व टीकाकरण किया जा रहा है। लेकिन वह इतना कारगर साबित नहीं हो पाया है। नगर निगम  द्वारा करोड़ों पए खर्च करने के बाद भी शहर में श्वानों की संख्या कम नहीं हो रही है। </p>
<p><strong>दक्षिण निगम ने 60 लाख  में बनाई श्वान शाला</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण ने करीब 60 लाख रुपए खर्च कर बंधा धर्मपुरा सिथतय निगम की गौशाला परिसर में ही श्वान शाला बनाई है। 33 कैनाल वाली इस श्वान शाला में श्वानों के टीकाकरण व बधियाकरण के लिए आॅपरेशन थियेटर भी बनाया है। साथ ही पूणे की फर्म को श्वानों को पकड़ने व बधियाकरण का टेंडर भीे दिया गया है। जिस पर प्रति श्वान का अलग से खर्चा किया जा रहा है।  कोटा दक्षिण निगम क्षेत्र में अब तक करीब 12 सौ से अधिक श्वानों का बधियाकरण व टीकाकरण भी किया जा चुका है। </p>
<p><strong>कोटा उत्तर में 76 लाख से हो रही तैयार</strong> <br />इधर नगर निगम कोटा दक्षिण की तर्ज पर ही कोटा उत्तर निगम द्वारा भी करीब 76  लाख रुपए की लागत से श्वानशाला बनाई जा रही है। बंधा धर्मपुरा में ही कोटा दक्षिण की श्वान शाला के पास ही 125 कैनल वाली इस श्वानशाला का अधिकतर काम पूरा हो चुका है। यह शीघ्र ही बनकर तैयार हो जाएगी। हालांकि कोटा उत्तर निगम ने भी श्वानों को पकड़ने का टेंडर पुणे की ही फर्म को दिया हुआ है। लेकिन उसने अभी तक इस क्षेत्र में श्वानों को पकड़ने का काम शुरू नहीं किया है। </p>
<p>शहर में श्वानों के काटने की समस्या कम होने की जगह दिनों दिन बढ़ती ही जा रही है। नगर निगम द्वारा जब से इनका बधियाकरण किया जा रहा है उसके बाद ये अधिक खूंखार नजर आ रहे हैं। श्वानों को तो शहर से दूर जंगल में छोड़ना चाहिए। तभी इनकी संख्या कम होगी। <br /><strong>-मनीष सक्सेना, नयापुरा </strong></p>
<p> जब गौ माता को शहर से दूर बंधा धर्मपुरा में शिफ्ट किया जा सकता है तो श्वानों को भी इसी तरह से शहर से दूर भेजा जाए। बधियाकरण  व टीकाकरण कर वापस शहर में ही छोड़ना समस्या का समाधान नहीं है। श्वानों के झुंड हर क्षेत्र की समस्या है। श्वानों के डर के कारण बच्चे घर के बाहर खेल तक नहीं पा रहे। <br /><strong>-रितेष सक्सेना, सुभाष नगर  </strong></p>
<p>श्वानों द्वारा आए दिन लोगों को काटने के मामले हो रहे हैं। लेकिन नगर निगम कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर पा रहा है। जिसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। श्वानों को तो श्वानशाला में हमेशा के लिए बंद करके रखा जाए तब तो उसका लाभ है। लेकिन टीकाकरण करके वापस छोड़ने से तो इनकी संख्या कम नहीं होगी। <br /><strong>-भागचंद, महावीर नगर </strong></p>
<p> श्वानों के बधियाकरण व टीकाकण का काम तेजी से किया जा रहा है। संवेदक फर्म द्वारा कोर्ट के निर्देशों की पालना करते हुए ही काम किया जा रहा है। जिनका बधियाकरण हो गया है उनकी नस्ल नहीं बढ़ रही है। लेकिन जिनका बयियाकरण नहीं हुआ है उनके कारण संख्या बढ़ रही है। साथ ही श्वानों को जिस जगह से पकड़ रहे हैं बधियाकरण व टीकाकरण के बाद वापस वहीं छोड़ा जा रहा है। जिससे भी इनकी संख्या कम नजर नहीं आ रही है। जबकि टीकाकरण वाले श्वानों के काटने पर नुकसान नहीं हगा। टीकाकरण व बधियाकरण को और बढ़ाया जाएगा। <br /><strong>-राजपाल सिंह, आयुक्त नगर निगम कोटा दक्षिण </strong><br /><strong> </strong><br />हाईकोर्ट के निर्देश की पालना में श्वानों का बधियाकरण व टीकाकरण किया जा रहा है। जिनका बधियाकरण हो चुका है उनकी नस्ल नहीं बढ़ रही है। प्रयास है कि अधिक से अधिक श्वानों का जितनी जल्दी हो सके बधियाकरण किया जाए। जिससे श्वानों की संख्या को बढ़ने से रोका जा सके। कोटा उत्तर निगम में भी श्वान शाला बनने के बाद बधियाकरण व टीकाकरण में तेजी आएगी। <br /><strong>-राजीव अग्रवाल, महापौर, नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 28 Oct 2022 15:21:47 +0530</pubDate>
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