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                <title>cancer patients - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>cancer patients RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>कैंसर मरीजों को सरकार की बड़ी राहत, RGHS में कार-टी सेल थेरेपी भी शामिल </title>
                                    <description><![CDATA[राज्य सरकार ने गंभीर कैंसर रोगियों के उपचार की कार-टी सेल थेरेपी को RGHS पैकेज में शामिल किया। उपचार के लिए अधिकतम 30 लाख रुपए निर्धारित। कार-टी सेल निर्माण पर 26 लाख और सहायक उपचार के लिए 4 लाख रुपए तक देय होंगे। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/governments-big-relief-to-cancer-patients-car-t-cell-therapy-also/article-163355"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/rghs.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राज्य सरकार ने गंभीर कैंसर रोगियों के उपचार में इस्तेमाल होने वाली कार-टी सेल थेरेपी को राजस्थान सरकार स्वास्थ्य योजना (आरजीएचएस) के पैकेज में शामिल कर लिया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सोशल मीडिया के जरिए इस निर्णय की जानकारी दी। इसके बाद वित्त विभाग ने इसके आदेश जारी किए। सीएम ने कहा कि यह पहल गंभीर बीमारी से जूझ रहे कर्मचारियों एवं उनके परिजनों को आधुनिक उपचार की बेहतर सुविधा और मजबूत स्वास्थ्य सुरक्षा का संबल प्रदान करेगी। आदेश के अनुसार, इस उपचार के लिए अधिकतम 30 लाख रुपए की दर तय की गई है। यह सुविधा तत्काल प्रभाव से लागू होगी।</p>
<p><strong>कार-टी सेल निर्माण पर 26 लाख तक :</strong></p>
<p>सरकार के आदेश के मुताबिक कार-टी सेल निर्माण की लागत के लिए अधिकतम 26 लाख रुपए या वास्तविक लागत, जो भी कम हो, देय होगी। सहायक उपचार और जटिलताओं के प्रबंधन के लिए अधिकतम 4 लाख रुपए निर्धारित किए गए हैं। इसमें टोसीलिजुमैब, आईवीआईजी, अस्पताल में भर्ती और छुट्टी के बाद 30 दिन की दवाएं शामिल हैं। यह प्रावधान आरजीएचएस के लाभार्थियों के साथ राजस्थान राज्य पेंशनर्स चिकित्सा रियायत योजना-2021 के तहत चिकित्सा सुविधा लेने वाले पेंशनर्स पर भी लागू होगा।</p>
<p><strong>स्वास्थ्य संस्थान की सिफारिश पर फैसला :</strong></p>
<p>वित्त विभाग ने यह निर्णय राजस्थान सिविल सेवा (चिकित्सा परिचर्या) नियम-2013 के नियम 20 के तहत स्वास्थ्य लाभ सशक्त समिति के निर्णय और राज्य कैंसर संस्थान, जयपुर की सिफारिशों के आधार पर लिया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 20 Aug 2026 09:39:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सीएमएल ब्लड कैंसर के मरीजों के लिए अब पर्सनलाइज टारगेट दवा बनी नई उम्मीद : बीएमकॉन हेम 2025 सम्पन्न, हेमेटोलॉजी विषय पर हुई गहन चर्चाएं</title>
                                    <description><![CDATA[ब्लड कैंसर की एक गंभीर किस्म क्रोनिक मायलोइड ल्यूकेमिया (सीएमएल) है। अब तक इसके इलाज में टीकेआई  नामक दवा दी जाती रही हैं, जिनसे लाखों मरीजों को फायदा मिला]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/new-hope-has-been-made-for-cml-blood-cancer-patients/article-123943"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/oer12.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। ब्लड कैंसर की एक गंभीर किस्म क्रोनिक मायलोइड ल्यूकेमिया (सीएमएल) है। अब तक इसके इलाज में टीकेआई  नामक दवा दी जाती रही हैं, जिनसे लाखों मरीजों को फायदा मिला। लेकिन समय के साथ कई मरीजों में इनके कई साइड इफेक्टस भी नजर आ रहे है। ऐसे मरीजों के लिए नई दवा अस्सीमिनिब एक उम्मीद बनकर सामने आई है। यह जानकारी बीएमकॉन हेम के तीसरे दिन मुंबई से आए डॉ एम बी अग्रवाल ने दी। </p>
<p>भगवान महावीर कैंसर हॉस्पिटल की ओर से चल रही बीएमकॉन हेमः हीलिंग थ्रू हीमैटोलॉजी कॉन्फ्रेंस के मौके पर डॉ एम बी अग्रवाल ने बताया कि सीएमएल रोगियों में जहां पारंपरिक दवाएँ प्रोटीन के एक हिस्से को रोकती थीं, वहीं अस्सीमिनिब उस प्रोटीन के दूसरे हिस्से पर काम करती है। इस वजह से यह उन मरीजों में भी असरदार साबित हो रही है, जिन पर पहले की दवाएँ काम नहीं करतीं। इस दवा से मरीजों के जीवन की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है और लंबे समय तक रोग को नियंत्रित रखा जा सकता है। </p>
<p>कॉन्फ्रेंस के अंतिम दिन की शुरुआत पेपर और पोस्टर प्रेजेंटेशन से हुई, जिसका संचालन दिल्ली के डॉ. दिनेश भूरानी ने किया। देशभर से आए युवा डॉक्टरों और शोधकर्ताओं ने अपने शोध कार्य प्रस्तुत किए। साथ ही मोहाली से आए डॉ. सुभाष वर्मा ने प्रतिभागियों से संवाद किया और जटिल मामलों के समाधान एवं क्लीनिकल निर्णय लेने की बारीकियों को साझा किया। मुंबई से आए डॉ. अभय भावे ने एक शोध के माध्यम से बताया कि किस तरह सीएमल बीमारी में लंबे समय तक दवा लेने वाले मरीज अब बिना दवा के भी रोग मुक्त जीवन जी सकते हैं। दिल्ली के डॉ. मोहित चौधरी ने मायलोमा के मरीजों के उपचार में दी जाने वाली थेरेपी के बारे में जानकारी दी। बेंगलुरु के डॉ. मल्लिकार्जुन कलशेट्टी ने कार-टी सेल थेरेपी की नई रणनीतियों पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि यह थेरेपी भविष्य में मायलोमा उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 Aug 2025 16:42:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कैंसर पीड़ितों के लिये हल्के बैंगनी रंग की जर्सी पहनेगी गुजरात</title>
                                    <description><![CDATA[इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) की गत चैंपियन गुजरात टाइटन्स कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिये 15 मई को सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ होने वाले सीजन के आखिरी घरेलू मैच में हल्के बैंगनी रंग की जर्सी पहनकर उतरेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/gujarat-to-wear-light-purple-jersey-for-cancer-patients/article-45206"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/350.png" alt=""></a><br /><p>अहमदाबाद। इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) की गत चैंपियन गुजरात टाइटन्स कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिये 15 मई को सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ होने वाले सीजन के आखिरी घरेलू मैच में हल्के बैंगनी रंग की जर्सी पहनकर उतरेगी।</p>
<p>फ्रेंचाइजी ने बुधवार को एक बयान जारी कर कहा कि हर तरह के कैंसर का प्रतीक हल्का बैंगनी रंग हमें हर उस जीवन की याद दिलाता है जो कैंसर से लड़ रहा है। यह रंग पहनकर हार्दिक पांड्या की टीम कैंसर की शुरुआती पहचान और रोकथाम के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना चाहती है।</p>
<p>गुजरात टाइटन्स के मुख्य परिचालन अधिकारी (सीओओ) कर्नल अरविंदर सिंह ने कहा, कैंसर दुनिया भर में लाखों लोगों की मौत का कारण बनता है और रोगियों और उनके परिवारों पर विनाशकारी प्रभाव डालता है। हम कैंसर के बारे में जागरूकता बढ़ाने में अपना काम करने में प्रसन्न हैं, जो न केवल लोगों को शुरुआती पहचान के महत्व के बारे में शिक्षित करने का एक प्रयास है, बल्कि कैंसर के जोखिम को कम करने के लिए एक स्वस्थ जीवन शैली अपनाने के महत्व को भी रेखांकित करता है। हमारी टीम सकारात्मक बदलाव लाने और कैंसर के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध है।</p>
<p>विश्व स्तर पर कैंसर मृत्यु का दूसरा सबसे आम कारण है, जिसके कारण 2020 में लगभग 99  लाख मौतें हुईं। पिछले दशक में दुनिया भर में कैंसर की घटनाओं में 26% की वृद्धि देखी गई, जबकि कैंसर से संबंधित मौतों में 21% की वृद्धि देखी गई। साल 2022 में भारत में नये कैंसर मामलों की अनुमानित संख्या 14.16 लाख से अधिक थी। साल 2020 की तुलना में 2025 तक कैंसर की घटनाओं में अनुमानित 12.8% की वृद्धि होने का अनुमान भी है।</p>
<p>गुजरात के कप्तान हार्दिक पांड्या ने कहा, कैंसर एक जंग है जिसे देश और दुनिया में कई लोग लड़ रहे हैं। एक टीम के तौर पर हम इस जानलेवा बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाना चाहते हैं। हल्के बैंगनी रंग की जर्सी पहनना कैंसर पीड़ितों और उनके परिवारों के प्रति सहानुभूति दिखाने का हमारा तरीका है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 May 2023 16:18:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रावतभाटा में तैयार हो रहा कोबाल्ट सोर्स </title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान परमाणु बिजलीघर रावतभाटा केंद्र कोबाल्ट सोर्स को कई देशों में निर्यात भी कर रहा है। लेकिन कैंसर रोगियों के लिए अस्पतालों की मांग आने के बाद पहली प्राथमिकता कैंसर अस्पतालों को दी जा रही है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/cobalt-source-being-prepared-in-rawatbhata/article-27997"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-10/rawatbhata-mei-taiyar-ho-raha-cobalt-sorse..rawatbhata-news..28.10.2022.jpg" alt=""></a><br /><p> रावतभाटा। रावतभाटा का बोर्ड आॅफ रेडिएशन एवं आइसोटॉप टेक्नोलॉजी विभाग लाखों कैंसर रोगियों के लिए जरूरी कोबाल्ट सोर्स बनाने में दिन रात जुटा हुआ है। जानकारी के अनुसार वैज्ञानिक अधिकारियों और टेक्निकल कर्मचारियों द्वारा कोबाल्ट सोर्स को दिन-रात तैयार कर पैकिंग की जा रही है। जिससे कैंसर रोगियों को किसी भी तरह की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा। रावतभाटा कोबाल्ट सुविधा रेप कॉप प्रमुख उप महाप्रबंधक सईद अनवर तारिक ने बताया कि भारत वर्ष में कैंसर रोगियों के लिए अत्यधिक आवश्यक कोबाल्ट सोर्स लगभग 15 देशों के बड़े कैंसर अस्पतालों को आवश्यक रूप से जल्द से जल्द पहुंचाने की प्राथमिकता है। रावतभाटा देश का एकमात्र कोबाल्ट सोर्स का केंद्र है। यहां एक पूर्ण उत्पादन चक्र के साथ यह एकमात्र सुविधा है, जहां बिजली रिएक्टरों से कोबाल्ट एकत्रित कर निर्माण कर आपूर्ति की जा रही है। उन्होंने बताया कि आपूर्ति के बाद सभी कार्य व्यवस्थित सुरक्षित तरीके से कर कोबाल्ट को पहुंचाया जाता है। रेप कॉप सभी उच्च तीव्रता वाले गामा स्त्रोत, अनुप्रयोगों के लिए विभिन्न प्रकार के कोबाल्ट-60 सीलबंद स्रोतों की मांग को पूरा करने वाली नोडल एजेंसी है। राजस्थान परमाणु बिजलीघर रावतभाटा केंद्र कोबाल्ट सोर्स को कई देशों में निर्यात भी कर रहा है। लेकिन कैंसर रोगियों के लिए अस्पतालों की मांग आने के बाद पहली प्राथमिकता कैंसर अस्पतालों को दी जा रही है। </p>
<p><strong>टेली थेरेपी के लिए आवश्यक है कोबाल्ट सोर्स</strong><br />कैंसर जैसी लाइलाज बीमारी में विकिरण चिकित्सा रेडियोथैरेपी चिकित्सा विज्ञान की एक शाखा है, जो कैंसर और कुछ गैर कैंसर रोगों के इलाज के लिए हाई एनर्जी की विकिरण जैसे एक्स-रे, गामा किरणों, इलेक्ट्रॉनों, प्रोटॉन आदि का उपयोग करती है। ज्यादातर कैंसर रोगियों के उपचार के दौरान विकिरण के साथ इलाज किया जाता है। रेडियोथैरेपी कोशिकाओं के डीएनए को नष्ट करके कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाती है। रेडियोथैरेपी स्वस्थ और कैंसर ग्रस्त दोनों कोशिकाओं को क्षति ग्रस्त करती है। लेकिन सामान्य कोशिकाएं अक्सर विकिरण के कारण होने वाले नुकसान की अधिक मरम्मत कर सकती हैं। इसी तरह विकिरण कैंसर कोशिकाओं की दोबारा सुचारू एवं प्रजनन की क्षमता को नष्ट कर देती है और शरीर स्वाभाविक रूप से इन कोशिकाओं से छुटकारा पाता है। </p>
<p><strong>लगभग एक दशक तक चलता है एक सोर्स </strong><br />कैंसर रोगियों के उपचार में होने वाली टेली थेरेपी के लिए कोबाल्ट- 60 सोर्स लगभग एक दशक यानी 10 साल तक चलता है। इससे कई कैंसर मरीजों का उपचार किया जाता है। जब कोबाल्ट सोर्स खत्म होता है तो वह दोबारा रावतभाटा साइट से लाया जाता है और फिर से इसे लोड कर कैंसर रोगियों का उपचार किया जाता है। एक कोबाल्ट सोर्स की कीमत लगभग 70 लाख रुपए के आसपास आंकी जाती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 28 Oct 2022 15:23:20 +0530</pubDate>
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