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                <title>mukundara - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>मुकुंदरा में अब जल्द होगी एक और टाइग्रेस की एंट्री</title>
                                    <description><![CDATA[सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, गत वर्ष मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में एनटीसीए से एक बाघ और दो बाघिन लाए जाने की स्वीकृति मिल चुकी है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/now-another-tigress-will-soon-enter-mukundara/article-76211"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/mukundara-me-ab-jld-hogi-tigeress-ki-entry...kota-news-29-04-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में अब जल्द ही एक ओर बाघिन की एंट्री होगी। इसके लिए रणथम्भौर में बाघिन  की सर्चिंग भी शुरू कर दी गई है। लंबे समय से टाइग्रेस लाने के लिए मुकुंदरा प्रशासन की ओर से प्रयास किए जा रहे थे। पूर्व में भी सीडब्ल्यूएलडब्ल्यू को पत्र लिखे गए, जहां से परमिशन मिलने के बाद कवायद तेज कर दी गई है। बता दें, एमएचटीआर में वर्तमान में एक बाघ-बाघिन विचरण कर रहे हैं। बाघ एमटी-5 को 4 नवम्बर 2022 को शिफ्ट किया गया था। वहीं, बाघिन एमटी-2301 को गत वर्ष 9 अप्रेल को लाया गया था। करीब एक बीत जाने के बाद भी दोनों का आमना-सामना नहीं हुआ। जिसकी वजह से मुकुंदरा अब तक आबाद नहीं हो सका। जबकि, इसके ठीक उलट दो साल में ही रामगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या दो से छह हो गई। ऐसे में मुकुंदरा प्रशासन की ओर से एक टाइगर पर दो या तीन बाघिन का रेशो पूरा किए जाने का प्रयास शुरू किए गए हैं। </p>
<p><strong>बाघ बोराबांस व बाघिन का कोलीपुरा में मूवमेंट</strong><br />मुकुंदरा में तैनात वनकर्मियों ने बताया कि वर्तमान में बाघ का मूवमेंट बोराबांस रैंज व बाघिन का कोलीपुरा में बना हुआ है। दोनों कोलीपुरा में भी साथ नजर आ चुके हैं। लेकिन, मेटिंग होने  की स्पष्ट जानकारी नहीं है। हालांकि, एक और बाघिन आने से बाघ एमटी-5 का भटकाव रुकेगा। गौरतलब है कि बाघ कई बार चंबल नदी पार कर लंबी दूरी तय कर चुका है। कुछ माह पहले ही वह मध्यप्रदेश की सीमा तक पहुंच गया था। </p>
<p><strong>एनटीसीए से मिल चुकी एक बाघ व दो बाघिन की परमिशन</strong><br />सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, गत वर्ष मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में एनटीसीए से एक बाघ और दो बाघिन लाए जाने की स्वीकृति मिल चुकी है। लेकिन, स्थानीय स्तर पर बाघ-बाघिन का जोड़ा लाने के सार्थक प्रयास नहीं हुए। हाल ही में अजमेर से ट्रांसफर होकर आए नए उपवन संरक्षक अभिमन्यू  सहारण ने इसके प्रयास तेज किए और पहले बाघिन लाए जाने की आवश्यकता पर बल देते हुए मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक को पत्र लिखे। जहां से परमिशन मिलने के बाद रणथम्भौर में बाघिन की सर्चिंग शुरू कर दी गई है। यहां से अमूमन उन बाघ-बाघिन को शिफ्ट किया जाता है, जो अब तक टेरिटरी नहीं बना पाए हों। ऐसे टाइगर रणथम्भौर के पेरिफेरल क्षेत्र में विचरण करते हैं। </p>
<p><strong>बाघिन के चयन से पहले देखी जा रही फैमिली हिस्ट्री</strong><br />मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के डीएफओ अभिमन्यू सहारण ने बताया कि एक ओर बाघिन लाए जाने के जारी है। रणथम्भौर में भी कवायद शुरू हो गई है। मुकुंदरा में विचरण कर रहे टाइगर-टाइग्रेस से आने वाली बाघिन का बल्ड रिलेशन न हो। इसलिए, रणथम्भौर में बाघिन को चिन्हित करने से पहले उनकी फैमिली हिस्ट्री देखी जा रही है, ताकि, समान जीनपुल में इनब्रिडिंग को रोका जा सके। बाघिन लाने के बाद फिर बाघ लाए जाने की परमिशन ली जाएगी। हमारी ओर से भी तैयारी पूरी की जा रही है।</p>
<p><strong>नॉन ट्यूरिज्म जोन दो पारियों में सर्चिंग</strong><br />जानकारी के अनुसार, रणथम्भौर में बाघिन की सर्चिंग नॉन ट्यूरिज्म जोन में दो पारियों में वनकर्मी कर रहे हैं। लेकिन, वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि वर्तमान में गर्मी के तेवर तीखे हैं, अभी मई व जून दोे महीने तेज गर्मी रहने से बाघ-बाघिन को ट्रैंकुलाइज करने व एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट नहीं किए जाने की संभावना है। क्योंकि, गर्मी में वन्यजीवों को किसी दूसरी जगह शिफ्ट किया जाता है तो वह स्ट्रेस में आता है। वहीं, जुलाई माह में बारिश का दौर शुरू होने पर भी शिफ्टिंग प्रक्रिया प्रभावित होती है। ऐसे में अभी शिफ्टिंग की संभावना कम ही नजर आती है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />मुकुंदरा में एक और बाघिन लाए जाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। रणथम्भौर में भी सर्चिंग की जा रही है। जल्द ही मुकुंदरा में नई बाघिन की एंट्री हो सकती है। मुकुंदरा को आबाद करने व बेहतर व्यवस्थाएं बनाने के लिए लगातार प्रयास जारी है।<br /><strong>- अभिमन्यू सहारण, उप वन संरक्षक, मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Apr 2024 15:20:27 +0530</pubDate>
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                <title>देश - दुनिया में पहुंचेगी मुकुंदरा टाइगर की निशानियां</title>
                                    <description><![CDATA[सुविधाएं मिलने से यहां ईको-ट्यूरिज्म बढ़ेगा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/traces-of-mukundara-tiger-will-reach-the-country-and-the-world/article-73460"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/desh---duniya-me-pohchengi-mukundara-tiger-ki-nishaniya...kota-news-22-03-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व की खूबसूरत वादियों में पर्यटकों को अब जल्द ही गिफ्ट आइटम और कॉफी शॉप की सौगात मिलेगी। देश-विदेश से आने वाले पर्यटक मुस्कुराती चंबल और जंगल की गोद में पलते सैंकड़ों वन्यजीवों पर आधारित वस्तुओं को निशानियों के रूप में सहेज सकेंगे। वहीं, दुनिया के कैनवास में मुकुंदरा के अनोखे रंग महकेंगे। दरअसल, ईको ट्यूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए मुकुंदरा प्रशासन रणथम्भौर व सरिस्का टाइगर रिजर्व की तर्ज पर गरड़िया महादेव में सोविनियर शॉप खोलने जा रहा है। वहीं, पर्यटकों की सुविधा के लिए कैफेटेरिया भी खोली जाएगी। हालांकि, इसके टैंडर व निर्माण कार्य लोकसभा चुनाव के बाद होंगे। इसके लिए विभाग के पास अलग से बजट भी आया हुआ है। </p>
<p><strong>3 साल में 3 करोड़ से ज्यादा की कमाई</strong><br /><strong>वर्ष 2020-21</strong><br />34,241 कुल पर्यटकों की संख्या <br />42.249 लाख कुल इनकम <br /><strong>वर्ष 2021-22</strong><br />68,981 पर्यटक आए <br />1 करोड़ 2 लाख रुपए कमाए<br /><strong>वर्ष 2022-23 (सितम्बर तक)</strong><br />93,352  पर्यटक घूमने आए<br />1 करोड़ 36 लाख रुपए की कमाई हुई</p>
<p><strong>10 लाख से बनेगी</strong><br />मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के उपवन संरक्षक अभिमन्यू सहारण ने बताया कि गरड़िया महादेव टाइगर रिर्जव का ऐसा पर्यटन स्थल है, जहां देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं। यहां का व्यू प्वाइंट दुनियाभर में अपनी अलग ही पहचान रखता है। पर्यटकों का जंगल और वन्यजीवों के प्रति आत्मियता जुड़ाव बढ़े और प्रकृति के प्रति जागरूकता बढ़े, इस मंशा से यहां सोविनियर शॉप खोली जाएगी। जिसके निर्माण के लिए 10 लाख रुपए का बजट भी अलग से मिला हुआ है। शॉप में  पर्यटक जंगल और वन्यजीवों पर केंद्रित किताबों के साथ गिफ्ट आइटम भी खरीद सकेंगे। यहां कॉफी मग से लेकर जीवन से जुड़ी हर चीज मिल सकेगी। पर्यटकों के लिए यह सामग्री मात्र गिफ्ट आइटम नहीं बल्कि रोमांचित यात्रा की यादगार निशानी बनेगी। </p>
<p><strong>पर्यटकों को मिलेगा कैफेटेरिया</strong><br />गरड़िया महादेव में सैलानियों को सोविनियर शॉप के साथ कैफेटेरिया की भी सौगात मिलेगी। शॉप और कैंटिन इंटरपिटेक्शन परिसर में बनाए जाएंगे। वर्तमान में यहां पर्यटकों के लिए न तो पानी की व्यवस्था है और न ही अल्पहार की। जिसकी वजह से उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में यहां कैफेटेरिया शुरू होने से पर्यटक प्रकृति के बीच सुकून महसूस कर सकेंगे। क्योंकि, यहां कई पर्यटक परिवार संग आते हैं, जिन्हें अल्पाहार के लिए भटकना पड़ता है। सुविधाएं मिलने से यहां ईको-ट्यूरिज्म बढ़ेगा। जिससे सरकार के राजस्व में इजाफा होगा। </p>
<p><strong>क्या है सोविनियर शॉप</strong><br />सोविनियर शॉप एक ऐसी दुकान है, जहां प्रकृति और वन्यजीव पर केंद्रित गिफ्ट आइटम बिक्री के लिए उपलब्ध होंगे, जो पर्यटकों की यात्रा को यादगार बनाएंगे। इस शॉप में वन्यजीवों की प्रिंटेड टी-शर्ट, पैंसिल बॉक्स, टिफिन, मग और अन्य आकर्षक खिलौने शामिल होंगे। इसके अलावा वाइल्ड लाइफ और प्रकृति पर केंद्रित रोचक किताबें, कॉफी मग, फोटोफ्रेम, कैप, नेचर प्रिंटेड ड्रैस, सॉफ्ट ट्वॉयज उपलब्ध होंगे, जिस पर वन्यजीवों की तस्वीर, टैग, एमएचटीआर के की-चैन, लोगो आकर्षण का केंद्र बनेंगे।  यहां कस्टूमाइज प्रिटिंग मशीन भी होगी। जिससे दर्शकों द्वारा मोबाइल से खींची गई तस्वीर को कॉफी मग और टीशर्ट पर प्रिंट करवाया जा सकेगा। </p>
<p><strong>यहां 1 करोड़ का आर्टिफिशल जंगल </strong><br />पर्यटकों को जंगल और वन्यजीवों के प्रति प्रेरित करने के लिए वन विभाग ने गरड़िया में एक करोड़ की लागत से इंटरपिटेक्शन सेंटर बनाया हुआ है। जिसमें आर्टिफिशिल जंगल बसाया गया है। यहां महंगी एलईडी, मगरमच्छ, हिरण, टाइगर, पक्षी सहित अन्य वन्यजीवों की सजीव डमी  है। वहीं, वन्यजीवों पर आधारित शोर्ट मूवी दिखाने के लिए एलईडी व मिनी थियेटर भी बनाया हुआ है। साथ ही गरड़िया में पाए जाने वाले वन्यजीव व दुलर्भ वनस्पतियों की सम्पूर्ण जानकारी दी गई है।</p>
<p><strong>हर साल 70 हजार से ज्यादा आते हैं पर्यटक</strong><br />गरड़िया महादेव मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व का कोर एरिया है, जो घने जंगल के बीच चंबल की गोद में बसी जन्नत है। जिसके दीदार को प्रतिवर्ष 70 हजार से अधिक पर्यटक देश से विदेश से आते हैं, जो प्रकृति की खूबसूरत वादियों के बीच चंबल का विहंग्म नजारा देख रोमांचित हो उठते हैं। जिससे सरकार को प्रतिवर्ष 1.50 से 2 करोड़ का राजस्व प्राप्त होता है। गत वर्ष ही 93 हजार से अधिक सैलानी गरड़िया देखने पहुंचे थे, जिनसे सरकार को डेढ़ करोड़ से ज्यादा का राजस्व प्राप्त हुआ था। </p>
<p><strong>सुविधाओं में विस्तार से बढ़ेगा ट्यूरिज्म </strong><br />गरड़िया महादेव में प्रतिवर्ष 70 हजार से अधिक पर्यटक आते हैं। जिनकी यात्रा को यादगार बनाने के लिए रणथम्भौर और सरिस्का टाइगर रिजर्व की तर्ज पर सोविनियर शॉप और कैफेटेरिया बनाया जाएगा। पर्यटन बढ़ने से सरकार के राजस्व में भी इजाफा होगा। सोविनियर शॉप और कैफेटेरिया के टैंडर व निर्माण कार्य लोकसभा चुनाव की आदर्श आचार संहिता हटने के बाद किया जाएगा। सैलानियों के लिए सुविधाएं विकसित होने से ईको ट्यूरिज्म भी तेजी से ग्रोथ करेगा और स्थानीय निवासियों को रोजगार उपलब्ध हो सकेगा। <br /><strong>- अभिमन्यू सहारण, उप वन संरक्षक, मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 Mar 2024 15:40:07 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अबकी बार मुकुंदरा में चीते आबाद करने पर जोर</title>
                                    <description><![CDATA[ दक्षिण अफ्रीका से तीसरी खेप के रूप में संभवत जो चीते लाए जाएंगे, उन्हें मध्यप्रदेश में चंबल नदी पर बने गांधी सागर बांध के वन्यजीव अभयारण्य में छोड़े जाने का विचार है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/this-time-the-emphasis-is-on-populating-leopards-in-mukundhra/article-57367"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/cheetah.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। दक्षिणी अफ्रीका से एक बार फिर चीते आयात करके भारत में बसाया जाने की संभावना के बीच राजस्थान में कोटा जिले के कोटा-झालावाड़ जिले में विस्तृत मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में चीते बसाने की मांग फिर जोर पकडऩे लगी है।</p>
<p>ताजा मीडिया रिपोर्ट के अनुसार दक्षिण अफ्रीका से तीसरी खेप के रूप में संभवत जो चीते लाए जाएंगे, उन्हें मध्यप्रदेश में चंबल नदी पर बने गांधी सागर बांध के वन्यजीव अभयारण्य में छोड़े जाने का विचार है। पूर्व में भी दो बार दक्षिण अफ्रीका और नामीबिया से लाकर भारत में चीते बसाए गए थे लेकिन वन्यजीव एवं पर्यावरण प्रेमियों के आरोप के अनुसार दोनों ही बार मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के चीते बसाने की ²ष्टि से नैसर्गिक दावेदार होने के बावजूद केंद्र सरकार ने राजनीतिक आधार पर मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में  स्थित कूनो नेशनल पार्क में यह चीते आबाद किए गए। कुल 20 चीते वहां आबाद किए गए थे जिनमें से नौ चीतों की अब तक मौत हो चुकी है। </p>
<p>संभवत: दक्षिण अफ्रीका से तीसरी खेप के रूप में चीते आयात किए जाने की मीडिया रिपोर्ट के आधार पर सोशल मीडिया में भारतीय जनता पार्टी के सांसद वरुण गांधी ने उठाए सवाल खड़ा करते हुए कहा कि अफ़्रीका से चीतों को आयात करना और उनमें से नौ को विदेशी भूमि में मरने की अनुमति देना न केवल क्रूरता है, बल्कि लापरवाही का भयावह प्रदर्शन है। हमें इन शानदार प्राणियों की पीड़ा में योगदान देने के बजाय अपनी लुप्तप्राय प्रजातियों और आवासों के संरक्षण पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। विदेशी जानवरों की यह लापरवाह खोज तुरंत समाप्त होनी चाहिए, और हमें इसके बजाय अपने मूल वन्यजीवों के कल्याण को प्राथमिकता देनी चाहिए।</p>
<p>17 सितम्बर को आज ही के दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी ने अपने 72वें जन्मदिन के मौके पर पिछले साल अपनी $िफतरत के अनुरूप देशी-विदेशी मीडिया का जमावड़ा लगाकर कूनो अभयारण्य में नामीबिया से खरीद कर लाए गए चीते छोड़कर जमकर वाहवाही लूटी। दूसरी खेप में भी अफ्रीकी चीते लाकर कूनो में ही आबाद किए गए। पहली खेप में नामीबिया से लाए गए 8 चीतों को कूनो नेशनल पार्क में छोड़ा था। 18 फरवरी को दक्षिण अफ्रीका से 12 और चीतों को कूनो में छोड़ा गया था। यानी कुल 20 चीते लाए गए थे। इनमें से अब तक 9 चीतों की मौत हो चुकी है।</p>
<p>सांगोद से कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक भरत सिंह कुंदनपुर केन्द्र सरकार पर चीते बसाने के मामले में भी राजनीति करने का आरोप लगाते रहे हैं। भरत सिंह ने भाजपा के जनप्रतिनिधियों को अपने इस निम्न स्तर की संकीर्ण सोच से उबरने की सलाह देते हुए यहां तक कह चुके है कि यह सही है कि चीते तो बीजेपी को वोट देने से रहे, लेकिन यदि बीजेपी के यह नेता वन एवं वन्यजीवों के बारे में अपनी समझ को विकसित कर दरा अभयारण्य क्षेत्र में चीते बसा दे तो निश्चित रूप से इससे क्षेत्र में पर्यटन का विकास होगा, बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार मिलेगा, होटल- ट्यूरिज्म-ट्रांसपोर्ट जैसे क्षेत्रों में निवेश के अवसर मिलने से सैकड़ों परिवार लाभान्वित होंगे तो बीजेपी नेताओं के पास अपनी उपलब्धियां गिना कर इन जीते-जागते लोगों से वोट हासिल करने का हक तो होगा ही। इस नाते ही यह नेता राजनीति करे ले तो मुझे तो इसमें भी कोई आपत्ति नहीं है।</p>
<p>ज्ञातव्य है कि भारत ने साल 1952 में खुद को चीता विलुप्त देश घोषित कर लिया था। वर्ष 1947 में देश आजाद हुआ और दुर्भाग्य से उसके पांच वर्ष बाद ही देश एक नायाब वन्यजीव चीता से भी मुक्त हो गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 Sep 2023 17:02:08 +0530</pubDate>
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                <title> मुकुंदरा को झटका, सज्जनगढ़ जाएगा टी-104</title>
                                    <description><![CDATA[एनटीसीए की अनुमति के बाद बाघ टी-104 की शिफ्टिंग का रास्ता साफ हो गया है। ऐसे में साढ़े तीन साल के बाद टी-104 को रणथम्भौर के भिड नाके में बने एनक्लोजर से सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में शिफ्ट किया जाएगा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/shock-to-mukundara-t-104-will-go-to-sajjangarh/article-44981"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/mukundara-ko-jhataka,-sajjanagadh-ko-t-104...kota-news-photo-08-05-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा।  वन विभाग व नेशनल टाइगर कनजर्वेशन अथोरियटी (एनटीसीए) की ओर से आखिरकार रणथम्भौर के खूंखार बाघ टी-104 की किस्मत का फैसला कर दिया गया है। अब यह बाघ मुकुंदरा की जगह उदयपुर शिफ्ट किया जाएगा। एनटीसीए ने वन विभाग की ओर से भेजे गए प्रस्ताव पर मोहर लगा दी है। अब बाघ को रणथम्भौर से उदयपुर के सज्जनगढ बॉयोलिकल पार्क में शिफ्ट करने की अनुमति दे दी गई है। अनुमति मिलने के बाद विभाग की ओर से शिफ्टिंग की तैयारियां शुरू कर दी गई है। अगले सप्ताह तक बाघ टी-104 की शिफ्टिंग होना संभव है। </p>
<p><strong>अब टी-104 की शिफ्टिंग का रास्ता साफ</strong><br />एनटीसीए की अनुमति के बाद बाघ टी-104 की शिफ्टिंग का रास्ता साफ हो गया है। ऐसे में साढ़े तीन साल के बाद टी-104 को रणथम्भौर के भिड नाके में बने एनक्लोजर से सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में शिफ्ट किया जाएगा। गौरतलब है कि रणथम्भौर में लगातार बाघ टी-104 को अन्य जगह शिफ्ट करने की मांग की जा रही थी।</p>
<p><strong>अगले सप्ताह की जाएगी शिफ्टिंग</strong><br />सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बाघ टी-104 को शिफ्ट करने की अनुमति मिलने के बाद वन विभाग की ओर से भी शिफ्टिंग की तैयारियां शुरू कर दी गई है। जानकारी के अनुसार वन विभाग की ओर से बाघ को अगले सप्ताह रणथम्भौर से उदयपुर के सज्जनगढ़ बॉयोलोजिकल पार्क में शिफ्ट कर दिया जाएगा।</p>
<p><strong>कमेटी ने माना था बाघ का स्वभाग उग्र</strong><br />पूर्व में वन विभाग की ओर से बाघ टी-104 के स्वभाव के अध्ययन के लिए एक कमेटी का गठन किया गया था। कमेटी ने बाघ का स्वभाव उग्र मानते हुए इंसानों के लिए खतरा करार दिया था और बाघ को खुले जंगल में छोड़ने से इंकार किया था।</p>
<p><strong>दरा के सॉफ्ट एनक्लोजर में किया जाना था शिफ्ट  </strong><br />बाघ टी-104 को पूर्व में मुकुंदरा के दरा वनक्षेत्र के सॉफ्ट एनक्लोजर में शिफ्ट किया जाना था। यहां दो एनक्लोजर है। जिसमें पहला 32 स्क्वायर वर्ग किमी का और दूसरा 12 स्वायर वर्ग किमी का सॉफ्ट एनक्लोजर है। इस बाघ को इसी सॉफ्ट एनक्लोजर में शिफ्ट किया जाना था। इसके लिए विभाग द्वारा पहले एनटीसीए को प्रस्ताव भी भिजवाए गए थे और अनुमति मिलने की संभावना जताई जा रही थी लेकिन एनटीसीए से बाघ टी-104 को मुकुंदरा में शिफ्ट करने की अनुमति नहीं मिल सकी। ऐसे में अब बाघ दरा की जगह सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में शिफ्ट किया जाएगा। </p>
<p><strong>पहले मुकुंदरा भेजने का तैयार किया था प्रस्ताव </strong><br />पिछले साल जुलाई माह में वन विभाग के चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन की ओर से बाघ टी-104 को मुकुंदरा के दरा में बने एनक्लोजर में शिफ्ट करने का प्रस्ताव तैयार किया गया था। इस संबंध में पीसीसीएफ की ओर से रणथम्भौर के सीसीएफ और नेशनल टाइगर कनजर्वेशन अथोरियटी को भी पत्र लिखा था। लेकिन, एनटीसीए की ओर से इस संबंध में अनुमति नहीं मिल सकी थी। हाला ही में मुकुंदरा में बाघिन एमटी-4 की मौत के बाद बाघ को कोटा की जगह उदयपुर के सज्जनगढ़ बॉयोलोजिकल पार्क में शिफ्ट किया जाएगा।</p>
<p>एनटीसीए की ओर से टी-104 को सज्जनगढ़ बॉयोलिकल पार्क में शिफ्ट करने की अनुमति मिल गई है। शिफ्टिंग की तैयारी की जा रही है। अगले सप्ताह में बाघ को शिफ्ट कर दिया जाएगा।<br /><strong>- सेडूराम यादव, सीसीएफ, रणथम्भौर बाघ परियोजना सवाईमाधोपुर।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 May 2023 14:29:54 +0530</pubDate>
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                <title>मुकुंदरा में बाघों की संख्या बढ़ने पर ही बढ़ेगा पर्यटन उद्योग</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा जल्दी पर्यटन के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाने जा रहा है। कोटा में पर्यटन विकास के प्रोजेक्ट के साथ मुकुंदरा में टाइगर का आना पर्यटन के क्षेत्र में बड़ा कदम है लेकिन मुकुंदरा टाइगर रिजर्व में टाइगर्स की संख्या में बढ़ोतरी किए जाने पर ही पर्यटक मुकुंदरा टाइगर सफारी के लिए जाएंगे। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/tourism-industry-will-grow-only-if-the-number-of-tigers-in-mukundra-increases/article-28605"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/mukundara-mei-bagho-ki-sankhya-badhne-per-hi-badhega-paryatan-udyog...kota-live-news-4.11.2022.jpg" alt=""></a><br /><p> कोटा । स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल ने कोटा के मुकुंदरा में बाघ आने पर प्रसन्नता, जाहिर की है । उन्होंने कहा कि मुकुंदरा में बाघों की संख्या बढ़ने पर ही पर्यटन उद्योग को पंख लगेंगे । मंत्री धारीवाल ने यह बात शुक्रवार को कोटा प्रवास के दौरान अपने आवास पर मीडिया से बातचीत में कही । पांच दिवसीय प्रवास पर कोटा पहुंचे मंत्री शांति धारीवाल ने कहा कि कोटा में पर्यटन विकास के प्रोजेक्ट के साथ मुकुंदरा में टाइगर का आना पर्यटन के क्षेत्र में बड़ा कदम है लेकिन मुकुंदरा टाइगर रिजर्व में टाइगर्स की संख्या में बढ़ोतरी किए जाने पर ही पर्यटक मुकुंदरा टाइगर सफारी के लिए जाएंगे।  ऐसे में केंद्र और राज्य की सरकार मिलकर मुकुंदरा को टाइगर से आबाद करने के लिए प्रयत्नशील है । कोटा जल्दी पर्यटन के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाने जा रहा है।  </p>
<p> मंत्री धारीवाल ने राज्य सरकार के अभूतपूर्व अभियान प्रशासन शहरों के संग के तहत लगातार दी जा रही रियायतो को प्रदेशवासियों के लिए बड़ी सौगात बताते हुए कहा कि अभियान तहत 60 फीसदी लक्ष्य पूरा हो गया हैं । अभियान लगातार जारी है। उन्होंने कहा कि  ईडब्ल्यूएस वालों को 5 रुपए वर्ग फुट में जमीन दी जाएगी ।साथ ही पंजीयन शुल्क में भी कमी की जाएगी। पहले जहां ईडब्ल्यूएस वालों की जमीन के पंजीयन के 40 से 42000 रुपए लगते थे वहीं अब तीन से 5000 रुपए में पंजीयन किया जाएगा । इससे पूर्व उन्होंने सिविल लाइन आवास पर आम जनों, सामाजिक संगठनो के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। इस दौरान कांग्रेस नेता अमित धारीवाल, जिलाध्यक्ष रविन्द्र त्यागी सहित  राजेन्द सांखला सहित कांग्रेस कार्यकर्ता आमजन मौजूद रहे। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 04 Nov 2022 17:15:07 +0530</pubDate>
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