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                <title>justice system - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>justice system RSS Feed</description>
                
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                <title>पंकज चौधरी का सपा पर हमला: बोले-आतंकवादियों, गुंडों और माफियाओं के प्रति पार्टी की पुरानी हमदर्दी फिर हुई उजागर, सपा की न तो नीति बदली है और न ही नीयत</title>
                                    <description><![CDATA[भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि सपा की हमदर्दी हमेशा अपराधियों और आतंकियों के साथ रही है। उन्होंने मुकदमों की वापसी को न्यायपालिका का अपमान बताया। चौधरी ने तंज कसा कि लोकतंत्र में कोई 'जिल्ले-इलाही' नहीं है और सपा की तुष्टीकरण की नीति अब नहीं चलेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/pankaj-choudhary-attacked-samajwadi-party-said-that-the-partys-old/article-148471"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/pankaj-choudhary.png" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा ) के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने सोमवार को कहा कि उत्तर प्रदेश में आतंकवादियों, गुंडों और माफियाओं के प्रति समाजवादी पार्टी (सपा) की पुरानी हमदर्दी एक बार फिर सामने आ गई है। पंकज चौधरी ने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर पोस्ट शेयर करते हुए कहा है कि प्रमुख अखिलेश यादव के हालिया बयान का जिक्र करते हुए कहा कि सपा सरकार बनने पर मुकदमे वापस लेने की बात करना न्याय व्यवस्था के साथ खिलवाड़ है। चौधरी ने कहा कि सपा के पिछले कार्यकाल में भी आतंकवाद से जुड़े मामलों में मुकदमे वापस लेने के प्रयास किए गए थे, जिसे लेकर अदालतों ने भी आपत्ति जताई थी।</p>
<p>भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि इससे साफ है कि सपा की न तो नीति बदली है और न ही नीयत। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सपा सुप्रीमो खुद को संविधान और न्यायपालिका से ऊपर मानते हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में किसी को दोषी या निर्दोष ठहराने का अधिकार केवल न्यायपालिका के पास है, न कि किसी राजनीतिक दल या सरकार के पास। “देश और प्रदेश में लोकतांत्रिक व्यवस्था है, यहां कोई ‘जिल्ले-इलाही’ नहीं है।</p>
<p>पंकज चौधरी ने आरोप लगाया कि सपा की कार्यशैली हमेशा से पक्षपातपूर्ण रही है, जहां पसंद के आधार पर अपराधियों को राहत दी जाती थी और विरोधियों को निशाना बनाया जाता था। उन्होंने यह भी कहा कि उच्च न्यायालय की टिप्पणियों में भी सपा की नीतियों पर सवाल उठ चुके हैं, जिनमें आतंकवादियों के प्रति नरमी का जिक्र किया गया था। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में सपा की सरकार बनने की संभावना नहीं है और न ही अपराधियों को किसी प्रकार की राहत मिलने वाली है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 17:26:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>न्याय व्यवस्था से मौलिक कर्तव्य बरकरार :  उपराष्ट्रपति धनखड़</title>
                                    <description><![CDATA[उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा कि न्याय व्यवस्था ने ही भारत के नागरिकों के मौलिक कर्तव्यों को बरकरार रखा हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jodhpur/fundamental-duties-of-justice-system-intact-vice-president-dhankhar/article-87418"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/photo-size-(4)7.png" alt=""></a><br /><p>जोधपुर। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा कि न्याय व्यवस्था ने ही भारत के नागरिकों के मौलिक कर्तव्यों को बरकरार रखा हुआ है। वे आज यहां बार काउंसिल ऑफ राजस्थान की ओर से राजस्थान हाईकोर्ट के प्लेटिनम जुबली महोत्सव को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान रोल ऑफ ज्यूडिशरी इन इमर्जिंग इंडिया विषय पर सेमिनार भी आयोजित हुई।</p>
<p>उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सभी को प्लेटिनियम जुबली की बधाई दी। उन्होंने अपने उद्बोधन में कई ऐसे केस व कोर्ट के फैसलों को जिक्र किया। जिनके फैसलों से नागरिकों को मौलिक आजादी का फायदा मिल रहा है। उन्होंने न्याय प्रणाली को देश का मजबूत स्तम्भ बताया।<br />उपराष्ट्रपति ने कहा कि मानव जीवन का सबसे अनमोल पहलू स्वतंत्रता है। लोग लोकतंत्र से प्यार करते हैं, क्योंकि वे स्वतंत्रता को अपनी जीवनरेखा मानते हैं। कानून प्रजा के लिए या बाहर से काम करने वाली संप्रभु शक्ति के लिए नहीं हैं, बल्कि वे हमारे से हैं, हमारे लिए हैं और हमें उन्हें वास्तविकता में अनुवादित करना है।</p>
<p>कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति जगदीश धनखड़ के साथ सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश एजी मसीह, न्यायाधीश संदीप मेहता, राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश मनिन्द्र मोहन श्रीवास्तव, विधि मंत्री जोगाराम पटेल, बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा व बार काउंसिल ऑफ राजस्थान के चेयरमैन भुवनेश शर्मा सहित कई पूर्व न्यायाधीश व अधिवक्ताओं ने भी शिरकत की। समारोह में राजस्थान हाईकोर्ट के वर्तमान एवं पूर्व न्यायाधीश, बार कौंसिल ऑफ राजस्थान के वर्तमान एवं पूर्व सदस्य, प्रदेश में स्थित बार संघों के पदाधिकारी एवं अधिवक्ताओं ने भाग लिया। इस दौरान बार कौंसिल ऑफ राजस्थान के पूर्व सदस्यों का सम्मान किया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जोधपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 10 Aug 2024 19:02:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>नीदरलैंड में क्राइम रेट कम, बंद किया जा रहा है जेलों को </title>
                                    <description><![CDATA[नीदरलैंड में एक लाख आबादी पर बस 50 कैदी हैं। डच जस्टिस डिपार्टमेंट की तरफ से अनुमान लगाया गया है कि साल 2023 तक जेल की कुल आबादी बस 9,810 तक आ जाएगी। जेलों में अब अपराधी ही नहीं बचे हैं। हालत यह है कि नीदरलैंड में उसके पड़ोसी देश नॉर्वे से कैदी भेजे जा रहे है। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/crime-rate-low-in-netherlands--jails-are-being-closed/article-29362"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/46546546517.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा।  पिछले कुछ सालों में नीदरलैंड में अपराध की दर सालाना गिरती जा रही है। इस वजह से इस देश की जेलों का हाल ये है कि यहां कैदी नहीं हैं। यहां की जेलों को बंद किया जा रहा है और होटल में तब्दील किया जा रहा है। यह सिलसिला 2013 में शुरू हुआ था। आखिर ऐसा क्या है कि इस देश में जेलों को बंद किया जा रहा है। और यहां अपराध की दर गिरने की क्या वजह है? यह देश दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है जहां की जेलों की यह स्थिति है। किस तरह से वहां की सरकार ने क्राइम रेट को कम किया। यह भारत के लिए अन्य देशों के लिए भी एक उदाहरण है। हमारे देश में आए दिन आपराधिक घटनाएं घटित होती रहती है। क्राइम रेट कम होने की बजाए बढ़ता ही जा रहा है। ऐसे में यह जानना बहुत आवश्यक है नीदरलैंड में ऐसा क्या सिस्टम अपनाया गया कि वहां सलाखों के पीछे डालने के लिए अपराधी लगभग खत्म हो चुके है। वहां एक लाख आबादी पर बस 50 कैदी हैं। डच जस्टिस डिपार्टमेंट की तरफ से अनुमान लगाया गया है कि साल 2023 तक जेल की कुल आबादी बस 9,810 तक आ जाएगी। जेलों में अब अपराधी ही नहीं बचे हैं। हालत यह है कि नीदरलैंड में उसके पड़ोसी देश नॉर्वे से कैदी भेजे जा रहे है। क्योंकि नॉर्वे में अपराध का स्तर काफी ज्यादा है। वहां की जेलों में कैदियों को रखने के लिए जगह नहीं है। नीदरलैंड में क्राइम रेट कम होने के पीछे यहां के अपराधियों के साथ होने वाले बर्ताव के तरीकों में सुधार को एक बड़ा कारण माना जाता है। यहां जेल में बंद कैदियों को सुधारने व उनके साथ किए जाने वाले व्यवहार पर कई सालों से काम किया गया। </p>
<p><strong>क्या है डच जस्टिस सिस्टम</strong><br />-डच जस्टिस सिस्टम को ऐसा बनाया गया है जहां कैदियों की सजा पर जोर देने की बजाय उनकी अपराध करने की भावना को समझने और अपराध की रोकथाम पर ज्यादा जोर दिया जाता है।<br />- इस सिस्टम में किसी अपराधी के जुर्म करने पर भारी जुर्माना अदा करना पड़ता है।  इसके अलावा जिन कैदियों ने कई सालों की सजा काट ली होती है उनकी सजा को भी कम कर दिया जाता है।<br />-डच जस्टिस सिस्टम में कैदियों के लिए एक प्रोग्राम चलाया जाता है। जिसे हर कैदी को अटेंड करना होता है। इस प्रोग्राम में कैदियों की मदद के लिए मनोवैज्ञानिकों को जिम्मेदारी दी जाती है।<br />-मानसिक बीमारी से ग्रसित कैदियों पर विशेष ध्यान दिया गया। इस सिस्टम को सजा की बजाय समझ और रोकथाम पर आधारित करके बनाया गया।<br />-वर्ष 2016 में सरकार की तरफ से हुई एक स्टडी में कम अवधि की सजा के नियम और समाज पर इसके प्रभाव का अध्ययन किया गया था। इसकी वजह से जेल की आबादी को कम करने में काफी मदद मिली।</p>
<p><strong>अपराधियों पर निगरानी</strong><br />नीदरलैंड में गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए इलेक्ट्रानिक टैगिंग सिस्टम को उपयोग में लाया जाता है। इसमें टखने से जुड़ा एक उपकरण है जो व्यक्ति की हर गतिविधि को रिकॉर्ड करता है। इस डिवाइस के साथ बहुत सारे अपराधियों को रिहा किया जाता है। इसके  साथ ही अपराधियों को अपने सामान्य जीवन को फिर से शुरू करने की अनुमति दी जाती है। इस तरीके से अधिकारी अपराधियों की निगरानी रखते है और उन्हें सुधरने का मौका भी मिलता है।</p>
<p> <strong> समाज सेवा और जुर्माना जैसी सजाएं</strong><br />यहां कैदियों को जेल की सजा देने के बजाय समाज सेवा और जुर्माना जैसी सजाएं दी जाती है। जेल सिर्फ उन्हीं कैदियों को भेजा जाता है जिनमें इस बात का खतरा रहता है कि वो बाहर जाकर खतरनाक साबित होंगे। यही वजह है कि लोग अपने परिवार और काम धंधों को करते हुए ही अन्य तरीकों से सजा भुगतते है। वहां कम समय के लिए जेल की सजा होने से अपराध दर कम हो रही है। इसलिए वहां की जेलों में कैदियों की संख्या कम हो रही है। डच जस्टिस सिस्टम आम तौर पर सजा पर पुनर्वास का समर्थक करता है। दूसरा,वहां उच्च प्रशिक्षित ओर अच्छी तरह से तैयार पुलिस बल है। वहां पुलिस पर आमतौर भरोसा अधिक है। वहां के नागरिक पुलिस से संपर्क करने पर डरते नहीं है।वहीं भारत की जेलों में कैदियों की संख्या बढ़ने से जेल की व्यवस्थाएं भी ठीक नहीं है। यहां क्षमता से अधिक कैदी रखे जाते है। क्या हमारे यहां भी ऐसे प्रयोग करके या जस्टिस सिस्टम में बदलाव करके क्राइम रेट कम किया जा सकता है? यह एक बड़ा सवाल है।  </p>
<p>हम लोग प्रयास कर रहे हैं। सरकार के बहुत सारे प्रोग्राम चल रहे हैं। कैदी अपराध से दूर हो सकें इसके लिए जेल में औसतन एक-दो दिन में कोई ना कोई कार्यक्रम कराते रहते है। नशा मुक्ति के कार्यक्रम भी कराते रहते है। कैदियों के लिए यहां मनोचिकित्सक और चिकित्सक  भी हैं। मेडिकल जांच की सुविधा भी हैं। सुविधाएं जेल में बढ़ी हैं। प्रयास कर रहे हैं। लेकिन, नीदरलैंड का कहें कि वहां क्राइम खत्म हो गया हैं, जेल खत्म हो गई हैं तो उनसे हमारी आर्थिक, सामाजिक परिस्थितियां बिल्कुल अलग हैं। इस मामले में हम उनसे काफी दूर हैं। <br /><strong>- परमजीत सिंह सिद्धू, जेल अधीक्षक, सेन्ट्रल जेल कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 12 Nov 2022 12:05:12 +0530</pubDate>
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