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                <title>मदन राठौड़ की उपचुनाव काउंटिंग पर सीधी नजर, लगातार ले रहे फीडबैक </title>
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                        <![CDATA[मदन राठौड़ हर सीट पर मतगणना को लेकर फीडबैक भी ले रहे हैं । स्थानीय नेताओं और उम्मीदवारों से भी उनकी लगातार बातचीत चल रही है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/madan-rathore-take-feedback-of-the-byelection-result/article-95630"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/6633-copy142.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। भारतीय जनता पार्टी कार्यालय में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ उपचुनाव के परिणामों को लाइव देख रहे हैं। वह भाजपा के विभिन्न नेताओं पदाधिकारी के साथ यहां मौजूद है। </p>
<p>इसके अलावा मदन राठौड़ हर सीट पर मतगणना को लेकर फीडबैक भी ले रहे हैं । स्थानीय नेताओं और उम्मीदवारों से भी उनकी लगातार बातचीत चल रही है।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 Nov 2024 10:42:50 +0530</pubDate>
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                <title>उपचुनाव : उम्मीदवारों से ज्यादा बड़े चेहरों में मुकाबला</title>
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                        <![CDATA[ये बड़े चेहरे रात-दिन एक कर जनसंपर्क और वोटों के जोड़-तोड़ के लिए युद्ध स्तर पर काम कर रहे हैं। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/competition-among-bigger-faces-than-assembly-by-election-candidates/article-94447"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/election4.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। सात विधानसभा सीटों पर उपचुनाव में से 6 पर उम्मीदवार की जीत-हार होगी, लेकिन मुकाबला बड़े चेहरों के बीच है। ये या तो यहां से सरकार में मंत्री, सांसद या क्षेत्र की राजनीति की धुरी हैं। चुनाव परिणाम उनकी यहां अपनी-अपनी पार्टी में प्रतिष्ठा, पद-कद को प्रभावित करेगा। ऐसे में राजनीतिक पार्टियों के प्रत्याशी तो मैदान में प्रचार में जुटे हैं ही, ये बड़े चेहरे रात-दिन एक कर जनसंपर्क और वोटों के जोड़-तोड़ के लिए युद्ध स्तर पर काम कर रहे हैं। </p>
<p><strong>दौसा :  पायलट-मुरारी-किरोड़ी में जंग:  </strong></p>
<p>भाजपा ने जगमोहन मीणा, कांग्रेस ने डीसी बैरवा को उतारा है। असल जंग कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट, कांग्रेस सांसद मुरारीलाल मीणा वर्सेज कृषि मंत्री किरोड़ीलाल मीणा में है। बीते चुनावों में मुरारी यहां विधायक थे। पायलट-मुरारी यहां कांग्रेस के उम्मीदवार को जिताने में जुटे हैं।</p>
<p><strong>झुंझुनूं: ओला परिवार वर्सेज मंत्री खर्रा-गोदारा</strong><br />झुंझुनूं से विधायक रहे बृजेन्द्र ओला लोकसभा सांसद बन गए। बेटे अमित ओला परंपरागत सीट पर हैं। भाजपा से राजेन्द्र भांबू हैं। बृजेन्द्र बीते तीन चुनाव से यहां काबिज रहे। उनके तिलस्म को तोड़ने को यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा, सुमित गोदारा लगे हैं। वे माइक्रो मैनजमेंट से वोटर्स को साधने में लगे हैं। भाजपा जीती तो खर्रा-गोदारा का कद बढ़ेगा। </p>
<p><strong>चौरासी: रोत, हेमंत-सुशील-मालवीया, भगोरा में मुकाबला </strong><br />भाजपा से कारीलाल ननोमा, कांग्रेस से महेश रोत और बीएपी से अनिल कटारा मैदान में हैं। चुनाव में राजकुमार रोत विधायक थे। बाद में डूंगरपुर-बांसवाड़ा से सांसद बन गए। बीएपी सीट बचाने में लगी है। पूरा जिम्मा रोत पर ही है। भाजपा में राजस्व मंत्री हेमंत मीणा, पूर्व विधायक सुशील कटारा और महेन्द्र जीत सिंह मालवीया को जीत का जिम्मा दे रखा है। इनकी भाजपा में आगामी जीत कद तय करेगी। कांग्रेस के उम्मीदवार की जीत का जिम्मा पूर्व सांसद ताराचंद भगोरा को दे रखा है। </p>
<p><strong>खींवसर: बेनीवाल, मिर्धा परिवार, गजेन्द्र सिंह, दिव्या में मुकाबला </strong><br />भाजपा रेवंतराम डांगा, कांग्रेस ने रतन चौधरी, आरएलपी ने हनुमान की पत्नी कनिका बेनीवाल को उतारा है। आरएलपी के सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल ही चेहरे हैं। वे यहीं से गत चुनाव में विधायक और अब नागौर से सांसद है। यहां हारे तो उनका कोई विधायक नहीं रहेगा। सामने भाजपा में उनके चिर-प्रतिदंद्वी मिर्धा परिवार और चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर है। ज्योति यहां बेनीवाल से दो बार सांसद, एक बार विधायक का चुनाव हार चुकी है। ज्योति की राजनीति दांव पर है। वहीं कांग्रेस में औंसिया की पूर्व विधायक दिव्या मदेरणा ने ताल ठोंक रखी है। बेनीवाल-दिव्या के बीच छत्तीस का आंकड़ा है। </p>
<p><strong>रामगढ़: भूपेन्द्र-संजय-बालकनाथ की टीकाराम-भंवर जितेन्द्र से टक्कर</strong><br />भाजपा प्रत्याशी सुखवंत की जीत का मुख्य दारोमदार केन्द्रीय मंत्री और अलवर सांसद भूपेन्द्र यादव और वन मंत्री संजय शर्मा पर है। तिजारा विधायक बाबा बालकनाथ वोटों के धु्रवीकरण में लगे हैं। कांग्रेस के आर्यन खान जीते तो चेहरा नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और पूर्व केन्द्रीय मंत्री भंवर जितेन्द्र सिंह होंगे।  </p>
<p><strong>देवली-उनियारा: पायलट-हरीश वर्सेज कन्हैयालाल-प्रभुलाल</strong><br />भाजपा ने राजेन्द्र गुर्जर, कांग्रेस ने केसी मीणा को प्रत्याशी बनाया है। गत दो चुनावों से हरीश मीणा यहां कांग्रेस के विधायक बने। अब सांसद हैं। मीणा की प्रतिष्ठा दांव पर है। वहीं कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट के प्रभाव के चलते उनकी भी बड़ी जिम्मेदारी है। भाजपा में जलदाय मंत्री कन्हैयालाल चौधरी पार्टी की जीत के लिए लगे हैं। </p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 Nov 2024 13:29:54 +0530</pubDate>
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                <title>विधानसभा उपचुनाव वाले 7 क्षेत्रों में परवान चढ़ेगा प्रचार</title>
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                        <![CDATA[सात में से पांच सीटों पर त्रिकोणीय और दो पर भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है।]]>
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                        <![CDATA[<br /><p>जयपुर। प्रदेश की जिन 7 विधानसभा क्षेत्रों में उप चुनाव हो रहे हैं, उनमें प्रचार परवान पर चढ़ेगा। इन चुनावों में 30 अक्टूबर को नामांकन पत्र वापस लेने का अंतिम दिन था। चुनाव में दस महिलाओं समेत कुल 69 प्रत्याशी अपना भाग्य आजमा रहे हैं। सात में से पांच सीटों पर त्रिकोणीय और दो पर भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है। जिन पांच सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला है, उनमें झुंझुनूं, खींवसर, देवली-उनियारा, चौरासी और सलूंबर की सीट शामिल है, जबकि दौसा और रामगढ़ में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है। </p>
<p><strong>झुंझुनूं में गुढ़ा सेंधमारी में जुटे:</strong> पूर्ववर्ती गहलोत सरकार में मंत्री रह चुके राजेन्द्र सिंह गुढ़ा झुंझुनूं से निर्दलीय मैदान में उतरे हैं। कांग्रेस ने सांसद बृजेंद्र ओला के बेटे अमित ओला तथा भाजपा ने राजेंद्र भांबू को टिकट दिया है। गुढ़ा इस सीट पर कांग्रेस और भाजपा दोनों के खेमों में सेंधमारी करने में जुटे हैं। भाजपा के परंपरागत राजपूत वोट से लेकर कांग्रेस के मुस्लिम और एससी वोटरों पर इनकी नजर है। </p>
<p><strong>चौरासी में बीएपी भी टक्कर में: </strong>लोकसभा में चौरासी में बीएपी ने कांग्रेस से गठबंधन किया था। लेकिन इस बार गठबंधन नहीं होने से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। आदिवासी बाहुल्स इस सीट पर बीएपी ने अनिल कटारा, कांग्रेस ने महेश रोत और भाजपा ने कारीलाल निनामा को मैदान में उतारा है। पिछली साल नवम्बर हुए विधानसभा चुनाव में बीएपी के राजकुमार रोत ने बड़े अंतर से चुनाव जीता था।</p>
<p><strong>सलूंबर में भाजपा को सहानुभूति का आसरा: </strong>विधायक अमृत लाल मीणा के निधन के बाद खाली हुई सलूंबर सीट पर भाजपा ने शांता देवी मीणा को अपना प्रत्याशी बनाया है। भाजपा को उम्मीद है कि सहानुभूति की लहर का फायदा उन्हें मिलेगा। भारत आदिवासी पार्टी के चुनावी मैदान में डटे रहने से इस सीट पर भी मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। बीएपी ने पिछले विधानसभा चुनावों में भी यहां अपनी उपस्थिति जोरदार तरीके से दर्ज करवाई थी।  </p>
<p><strong>खींवसर में बेनीवान की साख दांव पर:</strong> आरएलपी की गढ़ मानी जाने वाली खींवसर विधानसभा सीट पर इस बार त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है। नागौर से आरएलपी सांसद हनुमान बेनीवाल ने यहां इस बार कनिका बेनीवाल को टिकट दिया है। कांग्रेस से रतन चौधरी चुनाव मैदान में है। भाजपा ने रेवंतराम डांगा चुनाव में उतारा है। डांगा का गत विधानसभा चुनाव में बेनीवाल से सीधा मुकाबला था, जिसमें वे केवल 2049 वोटों से ही हारे थे। लेकिन यह चुनाव इस बार हनुमान बेनीवाल की साख से जुड़ गया है। </p>
<p><strong>देवली में नरेश ने किया मुकबाला त्रिकोणीय: </strong>देवली-उनियारा सीट पर कांग्रेस और भाजपा के साथ-साथ कांग्रेस बागी निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नरेश मीणा ने नामांकन वापस नहीं लेकर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। कांग्रेस से केसी मीणा और भाजपा से राजेंद्र गुर्जर चुनाव मैदान में डटे हुए हैं। </p>
<p><strong>यहां आमने-सामने की टक्कर: </strong>रामगढ़ और दौसा सीट पर कांग्रेस और भाजपा के बीच आमने-सामने की टक्कर है। रामगढ़ विधानसभा सीट पर नेताओं को मनाकर भाजपा सीधे मुकाबले के लिए तैयार है। इस सीट पर कांग्रेस के प्रत्याशी आर्यन जुबेर खान तो भाजपा के सुखवंत सिंह के बीच आमने-सामने का मुकाबला है। </p>
<p><strong>दौसा सीट</strong> : इस सीटा पर मजबूत बागी उम्मीदवार मैदान में नहीं होने से मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच दिखाई दे रहा है। भाजपा की ओर से किरोड़ी लाल मीणा के भाई जगमोहन मीणा और कांग्रेस प्रत्याशी डीडी बैरवा के बीच मुकाबला है। </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 Nov 2024 12:52:45 +0530</pubDate>
                
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                <title>भाजपा‌ ने पंजाब, मेघालय के उपचुनावों के उम्मीदवार किए घोषित</title>
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                        <![CDATA[भाजपा की केन्द्रीय चुनाव समिति ने आगामी मेघालय और पंजाब के विधानसभा उपचुनाव के लिए उम्मीदवारों के नामों पर अपनी स्वीकृति प्रदान की है।]]>
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                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<br /><p>नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मेघालय और पंजाब की चार विधानसभा सीटों के उप चुनाव के लिए अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए। पार्टी महासचिव अरुण ङ्क्षसह ने यहां एक विज्ञप्ति में कहा कि भाजपा की केन्द्रीय चुनाव समिति ने आगामी मेघालय और पंजाब के विधानसभा उपचुनाव के लिए उम्मीदवारों के नामों पर अपनी स्वीकृति प्रदान की है।</p>
<p>सिंह ने कहा कि मेघालय विधानसभा में गाम्बेग्रे (अजजा) सीट से बर्नार्ड मारक तथा पंजाब विधानसभा के लिए डेरा बाबा नानक से सरदार रविकरण कहलों, गिद्देरबाहा से सरदार मनप्रीत बादल और बरनाला सरदार केवल सिंह ढिल्लों को टिकट दिया गया है।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/bjp-declared-candidates-for-punjab-meghalaya-by-elections/article-93665</link>
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                <pubDate>Tue, 22 Oct 2024 16:48:51 +0530</pubDate>
                
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                <title>सतरंगी सियासत</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[जम्मू-कश्मीर में नई उमर अब्दुल्ला सरकार ने कामकाज संभाल लिया। चुनाव परिणाम के बाद राजनीतिक उठापटक की संभावना थी। सो, उसका पहला संकेत आ गया।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/india-gate/colorful-politics/article-93552"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/india-gate031.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>एक और परीक्षा..</strong><br />तो महाराष्ट्र और झारखंड विधानसभा चुनाव की घोषणा हो गई। चुनाव आयोग ने इससे पहले हरियाणा एवं जम्मू-कश्मीर में चुनाव करवाए। जहां झारखंड में आदिवासियों के अधिकारों एवं संविधान समाप्त कर देने वाला नैरेटिव झीला पड़ता सा लग रहा। तो महाराष्ट्र में एक पूर्व विधायक की हत्या होने के बाद माहौल बदलने के आसार! मतलब अब तक जो मराठा आरक्षण आंदोलन का शोर था। शायद वह धीमा पड़ जाए। हां, इसके साथ ही दो लोकसभा उपचुनाव भी। जिसमें राहुल गांधी द्वारा छोड़ी गई वायनाड सीट भी। वहां से प्रियंका गांधी मैदान में। लेकिन अब बात पहले जैसी नहीं। क्योंकि माकपा पूरी ताकत से मुकाबला करेगी। क्योंकि साल 2026 में केरल में उसे कांग्रेस से लड़ता हुआ भी दिखाना होगा! लेकिन यहां लड़ाई में भाजपा भी होगी। और कोई बड़ी बात नहीं कि त्रिकोणिय संघर्ष में कोई बड़ा उलटफेर हो जाए!</p>
<p><strong>बीच में अमरीका...</strong><br />तो आखिरकार अमरीका, भारत और कनाडा के बीच तल्खी बढ़ाने में कामयाब रहा। जहां भारत, नई दिल्ली से कनाडाई राजनयिकों के निष्कासन पर मजबूर हुआ। तो उसके पहले कनाडा ने भारतीय राजनयिकों के खिलाफ विषवमन किया। असल में, कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रुडो जरुरत से ज्यादा भारत के खिलाफ आक्रामक हो रहे। लेकिन इसमें असली शह अमरीका की। उसी ने कनाडा की सरकार को भारत के खिलाफ उकसाया। जिससे ट्रुडो ने ऐसे बयान दिए कि हालात यहां तक पहुंच गए। हालांकि भारत ट्रुडो को ढीला करने में सफल रहा। लेकिन उन्हें भारत से ज्यादा अमरीका की मदद की दरकार। दोनों देश पड़ोसी भी। जबकि अमरीका भारत के खिलाफ वास्तव में ट्रुडो को उपयोग कर रहा। जो उन्हें शायद बाद में समझ आए। लेकिन फिलहाल तो वह अपनी धरती से अमरीकी हितों को संरक्षण दे रहे। क्योंकि मामला वोट बैंक का।</p>
<p><strong>गुंजाईश छोड़ी!</strong><br />जम्मू-कश्मीर में नई उमर अब्दुल्ला सरकार ने कामकाज संभाल लिया। चुनाव परिणाम के बाद राजनीतिक उठापटक की संभावना थी। सो, उसका पहला संकेत आ गया। कांग्रेस ने नेशनल कांफ्रेंस के साथ विधानसभा चुनाव तो गठजोड़ करके लड़ लिया। लेकिन कांग्रेस गठबंधन सरकार में शामिल नहीं हुई। कांग्रेस के सभी छह विधायक मुस्लिम समुदाय से। उसमें से एक जम्मू क्षेत्र से और बाकी घाटी से। अभी तो विधायक दल के नेता पर सहमति नहीं बन पाई। ऐसे में संभावना जताई जा रही। आज नहीं तो कल कहीं कांग्रेस विधायकों के एनसी में शामिल न हो जाएं। कांग्रेस हरियाणा की करारी हार से अभी तक उभर नहीं पा रही। सो, कहीं, महाराष्ट्र और झारखंड में भी कोई चूक न हो जाए। इसलिए अभी जम्मू-कश्मीर को छेड़ना ठीक नहीं समझा। हां, यह वह पहली सरकार। जो अनुच्छेद- 370 समाप्ति के बाद गठित हुई।</p>
<p><strong>झलक दिखेगी...</strong><br />इस साल आम चुनाव- 2024 हो जाने के बाद अक्टूबर में दो राज्यों की जनता ने अपनी राय व्यक्त कर दी। अब महाराष्ट्र और झारखंड की बारी। इसके साथ ही 15 राज्यों में 48 विधानसभा एवं दो लोकसभा सीटों पर भी उपचुनाव होने वाले। इसमें राजस्थान समेत उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार एवं आंध्रप्रदेश जैसे राज्य शामिल। सो, मानो एक सैंपल सर्वे भी राजनीतिक दलों के सामने वाला कि आम चुनाव के बाद देश की जनता अब क्या सोच रही? इसमें भाजपा एवं कांग्रेस की सबसे ज्यादा परीक्षा। क्योंकि लगभग सभी जगह इन दोनों ही दलों की साख दांव पर होगी। बाकी तो क्षेत्रीय दल। वैसे, कहीं भी उपचुनाव में माना जाता कि जनता उसी दल को वोट देती। जिसकी वर्तमान में सरकार। क्योंकि यह निरंतरता का भी प्रतीक। लेकिन यदि कहीं भी उलटफेर हुआ तो मानो खतरे की घंटी!</p>
<p><strong>मायने क्या होंगे?</strong><br />राजस्थान में सात विधानसभा सीटों पर भाजपा की भजनलाल सरकार की परीक्षा का समय आ गया। सवाल यह कि सफल रहे तो क्या होगा और हारे तो क्या समीकरण बनेंगे? हालांकि लोकसभा में आशानुरूपप रिणाम नहीं आए। उपचुनाव निपटने तक सरकार का लगभग एक साल भी पूरा हो जाएगा। सो, यह जनता की मुहर भी होगी कि भजनलाल सरकार ने प्रशासन कैसा चलाया। हां, इस दौरान पार्टी संगठन में तालमेल को लेकर कोई बड़ा मामला सामने नहीं आया। फिर प्रदेश भाजपा में फिलहाल संगठन महामंत्री भी नहीं। उपचुनाव में जो प्रत्याशी तय किए गए। उनके नामों से ही लग रहा कि प्रदेश नेतृत्व की बात मानी गई। जो स्वाभाविक कि स्थानीय समीकरणें के लिहाज से दिए गए। हां, एक बात और। इन उपचुनावों के बहाने केवल सीएम एवं प्रदेश भाजपा अध्यक्ष की ही राजनीतिक प्रतिष्ठा दांव पर? या कुछ और?</p>
<p><strong>घमासान तय!</strong><br />मानकर चलिए कि महाराष्ट्र में सत्ताधारी महायुति और विपक्षी एमवीए गठबंधनों के बीच भारी राजनीतिक घमासान होगा। हालांकि पूर्वानुमानों के मुताबिक न तो महायुति से अजित पवार बाहर हुए। और न ही अभी तक एमवीए से उद्धव ठाकरे की शिवसेना। हां, सीट बंटवारे में सिर फुटोवव्ल पूरी हो रही। इसके अलावा छोटे-छोटे दल भी जोर मार रहे। महायुति में राज ठाकरे की संभावनाएं। तो उधर, शेतकारी संगठनों से जुड़े दल। महाराष्ट्र के चुनाव देश की राजनीति के लिए बेहद अहम। क्योंकि मुंबई देश की आर्थिक राजधानी। और फिर इसके बाद कुछ ही समय में मुंबई महानगर पालिका के चुनाव भी होंगे ही। जिसमें उद्धव ठाकरे का सब कुछ दांव पर होगा। जहां अब वह पहले जैसी स्थिति में तो बिल्कुल भी नहीं होंगे। एक संभावना यह भी। चुनाव परिणाम के बाद महायुति और एमवीए में से कुछ दल इधर-उधर होंगे!</p>
<p><strong>-दिल्ली डेस्क</strong><br /><strong>(ये लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>]]>
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                                                            <category>इंडिया गेट</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 21 Oct 2024 12:04:30 +0530</pubDate>
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                <title>उपचुनाव में तीसरा मोर्चा भाजपा-कांग्रेस को टक्कर देने को तैयार</title>
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                        <![CDATA[ तीसरे मोर्चे के इन दलों के अभी तक किसी भी पार्टी से गठबंधन नहीं होने के कारण उपचुनाव का मुकाबला भी रोचक होने लगा है।  ]]>
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                        <![CDATA[<br /><p>जयपुर। प्रदेश में 13 नवम्बर को सात विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए तीसरे मोर्चे के दलो ने भी कमर कस ली है। उपचुनाव में बसपा, आरएलपी और बीएपी मुख्य रूप से भाजपा और कांग्रेस को चुनौती देती नजर आएंगी। तीसरे मोर्चे के इन दलों के अभी तक किसी भी पार्टी से गठबंधन नहीं होने के कारण उपचुनाव का मुकाबला भी रोचक होने लगा है। </p>
<p>बसपा, आरएलपी और बीएपी पार्टी के नेताओं ने उपचुनाव को लेकर अपनी रणनीति तैयार कर फील्ड में काम शुरू कर दिया है। इन पार्टियों में से आरएलपी और बीएपी के कांगे्रस से गठबंधन की चर्चाएं बनी रहती हैं,लेकिन गठबंधन को लेकर किसी भी पार्टी ने पत्ते नहीं खोले हैं। भारत आदिवासी पार्टी(बीएपी) ने अपना रुख साफ कर दिया है कि वो उपचुनाव में गठबंधन नहीं करके खुद के दम पर चुनाव लड़ेगी। आरएलपी ने अभी तक गठबंधन को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं की है और सीट बंटवारे को लेकर कांग्रेस से सहमति नहीं बन पाने के कारण गठबंधन नहीं हो पाया है। बसपा का भी फिलहाल अपने दम पर ही चुनाव लडने का मानस बना हुआ है। कांग्रेस का आरएलपी और बीएपी से गठबंधन अटकने के पीछे यह वजह मानी जा रही है कि कांग्रेस का मानना है कि उपचुनाव में सीट बंटवारा हुआ तो आगामी चुनावों में ये पार्टियां बहुत ज्यादा सीटें मांगेंगी।</p>
<p><strong>बसपा की चार सीटों पर तैयारी</strong><br />बहुजन समाज पार्टी(बसपा)के प्रदेशाध्यक्ष भगवान सिंह बाबा उपचुनाव में प्रत्याशी चयन की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। बाबा ने बसपा सुप्रीमो मायावती को पार्टी का वोट बैंक देखते हुए झुंझुनंू, दौसा, देवली-उनियारा और रामगढ़ सीट पर प्रत्याशी मैदान में उतारने की रिपोर्ट दी है। अंतिम फैसला मायावती करेंगी।</p>
<p><strong>आरएलपी ने मांगी दो सीटें</strong><br />कांग्रेस से गठबंधन को लेकर पशोपेश में फंसी आरएलपी के गठबंधन के आसार कम ही नजर आ रहे हैं। आरएलपी प्रमुख हनुमान बेनीवाल ने पहले तो  अपने दम पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया। अब गठबंधन की चर्चाओं के बीच कहा है कि कांग्रेस खींवसर के अलावा देवली-उनियारा सीट भी दे तो गठबंधन पर विचार करेंगे। देवली-उनियारा सीट पर विधानसभा चुनाव में आरएलपी को 20 हजार वोट मिले थे। गठबंधन हुआ तो ठीक है वरना चार पांच सीटों पर पार्टी अपने दम पर चुनाव लड़ सकती है। </p>
<p><strong>बीएपी का चार सीटों पर चुनाव लड़ने का मानस</strong><br />बीएपी पार्टी ने भी अपने दम पर चुनाव लड़ने की बात कही है। बीएपी सांसद राजकुमार रोत और प्रवक्ता जितेन्द्र मीणा कह चुके हैं कि उपचुनाव में गठबंधन को लेकर किसी पार्टी से बात नहीं हुई है। अभी तक बनी रणनीति के अनुसार बीएपी चौरासी, सलूम्बर के साथ दौसा और देवली-उनियारा सीट पर प्रत्याशी उतार सकती है। बीएपी आदिवासियों के बीच मजबूत पार्टी होने के कारण चौरासी और सलूम्बर में अपना प्रभाव रखती है। दौसा और देवली-उनियारा में आदिवासी माने जाने वाले मीणा समुदाय की संख्या देखते हुए प्रत्याशी मैदान में उतारे जा सकते हैं। </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 18 Oct 2024 12:03:57 +0530</pubDate>
                
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                <title>रामपुर शहर सीट पर पहली बार खिला कमल</title>
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                        <![CDATA[भाजपा प्रत्याशी को इस चुनाव में 80 हजार 902 वोट मिले वहीं सपा उम्मीदवार को 47 हजार 262 वोटों से संतोष करना पड़ा।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/lotus-blossomed-for-the-first-time-in-rampur-city-seat/article-31823"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-12/rampur11.jpg" alt=""></a><br /><p>रामपुर। पूर्व मंत्री और समाजवादी पार्टी (सपा) नेता आजम खान की परंपरागत विधानसभा सीट रामपुर सदर पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पहली बार कब्जा कर लिया है। यहां हुए उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी आकाश सक्सेना उर्फ हनी ने अपने निकटतम प्रतिद्धंदी सपा के आसिम रजा को 33 हजार 702 वोटों से हरा दिया। सपा प्रत्याशी मतगणना के 21वें चरण तक भाजपा उम्मीदवार से बढ़त बनाये हुये थे, मगर बाद में तस्वीर बदल गयी और मतगणना समाप्त होने तक भाजपा उम्मीदवार ने बढ़त के आंकड़ें को बढ़ाना जारी रखा और अंतत: पहली बार रामपुर शहर सीट पर बीजेपी का कब्जा हो गया।</p>
<p>भाजपा प्रत्याशी को इस चुनाव में 80 हजार 902 वोट मिले वहीं सपा उम्मीदवार को 47 हजार 262 वोटों से संतोष करना पड़ा। भाजपा के आकाश शर्मा ने जीत का श्रेय रामपुर की जनता विशेषकर मुस्लिम समुदाय को दिया। उन्होने कहा कि देश में रामपुर ऐसा इकलौता नगर है, जहां 70 फीसदी मुस्लिम आबादी निवास करती है। भाजपा को मिली जीत दर्शाती है, कि योगी सरकार के प्रति मुस्लिमों के विश्वास में इजाफा हुआ है। मुस्लिम वर्ग भाजपा राज में खुद को महफूज और सम्मानित महसूस करता है। </p>
<p>मतदाताओं को वोट डालने से रोकने और पुर्नमतदान की सपा की मांग पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये उन्होने कहा कि सपा नेताओं का हर बयान पहले से स्क्रिप्टड होता है। इसलिये रामपुर की जनता उन्हे तवज्जो नहीं देती है। रामपुर की जनता विकास चाहती है जो उन्हे भाजपा की सरकार में ही मिल सकता है।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 08 Dec 2022 20:03:00 +0530</pubDate>
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                <title>यूपी उपचुनाव: मैनपुरी,रामपुर में सपा आगे और खतौली में आरएलडी</title>
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                        <![CDATA[मुजफ्फरनगर की खतौली सीट पर भाजपा का कब्जा शुरूआती रूझानो में कमजोर पड़ता दिखायी दे रहा है। भाजपा की राजकुमारी सैनी अपने निकटतम प्रतिद्धंदी रालोद प्रत्याशी मदन भैया से चार हजार से अधिक मतों से पिछड़ रहीं हैं। मदन भैया को सुबह दस बजे तक 7882 वोट और राजकुमारी को 3870 वोट मिल चुके थे।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/up-by-election-sp-ahead-in-mainpuri-rampur-and-rld-in/article-31757"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-12/yadav.jpg" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। उत्तर प्रदेश की मैनपुरी लोकसभा सीट के उपचुनाव में समाजवादी पार्टी (सपा) ने शुरूआती बढ़त हासिल कर ली है वहीं रामपुर और मुजफ्फरनगर की खतौली विधानसभा सीट पर भी सपा और उसकी सहयोगी राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के प्रत्याशी बढ़त बनाये हुये हैं। निर्वाचन आयोग से सुबह 10 बजे तक मिले रूझानो के अनुसार मैनपुरी में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की पत्नी एवं पार्टी उम्मीदवार डिंपल यादव अपने निकटतम प्रतिद्धंदी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के रघुराज सिंह शाक्य से 45 हजार से अधिक मतों से आगे चल रहीं थीं। इस अवधि में यादव को 84 हजार 251 वोट मिल चुके थे जबकि भाजपा प्रत्याशी के खाते में 38 हजार 988 मत आये थे।</p>
<p>उधर, सपा के एक अन्य गढ़ रामपुर में भी पार्टी प्रत्याशी मोहम्मद आसिम राजा सुबह 10 बजे तक अपने निकटतम प्रतिद्धंदी भाजपा के आकाश शर्मा से 3848 वोटों से बढ़त बनाये हुये थे। सपा के कद्दावर नेता आजम खान के करीबी राजा को 7778 वोट मिल चुके हैं वहीं आकाश को सुबह 10 बजे तक 3930 मतदाताओं का आशीर्वाद मिला था। </p>
<p>मुजफ्फरनगर की खतौली सीट पर भाजपा का कब्जा शुरूआती रूझानो में कमजोर पड़ता दिखायी दे रहा है। भाजपा की राजकुमारी सैनी अपने निकटतम प्रतिद्धंदी रालोद प्रत्याशी मदन भैया से चार हजार से अधिक मतों से पिछड़ रहीं हैं। मदन भैया को सुबह दस बजे तक 7882 वोट और राजकुमारी को 3870 वोट मिल चुके थे।</p>
<p>गौरतलब है कि सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के निधन के कारण मैनपुरी संसदीय सीट पर उपचुनाव हो रहा है जबकि सपा के मोहम्मद आजम खान और भाजपा के विक्रम सैनी को विधानसभा के लिये अयोग्य ठहराने के कारण क्रमश: रामपुर और खतौली में उपचुनाव हो रहा है।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 08 Dec 2022 11:08:04 +0530</pubDate>
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                <title>भाजपा के टेपन 978 वोट से हुए विजयी </title>
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                        <![CDATA[ कांग्रेस के रोहित नावरिया को 1201 और निर्दलीय प्रत्याशी सुरेश बिवाल को 1866 वोट मिले हैं। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/bjps-tapan-won-by-978-votes/article-30872"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/website-photo-630400-(1)12.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। नगर निगम जयपुर हेरिटेज के वार्ड नंबर-66 में हुए उपचुनाव में भाजपा के घनश्याम टेपन 978 वोट से विजयी हुए है। रिटर्निंग अधिकारी राकेश मीणा ने बताया कि भाजपा के घनश्याम टेपन को 2844, कांग्रेस के रोहित नावरिया को 1201 और निर्दलीय प्रत्याशी सुरेश बिवाल को 1866 वोट मिले हैं। जबकि नोटा में 56 लोगों ने वोट डाले हैं। गौरतलब है कि वार्ड नंबर-66 में कुल 10271 वोट हैं। जिनमें से 5967 वोट यानि 58.10 प्रतिशत वोटिंग हुई थी।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 27 Nov 2022 11:40:29 +0530</pubDate>
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                <title>मैनपुरी उपचुनाव: डिंपल के संकटमोचक बने चाचा शिवपाल</title>
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                        <![CDATA[शिवपाल की ओर से बहू डिपंल को मिल रहे समर्थन से सपा के आम कार्यकर्ता से लेकर बड़े नेता तक खासे गदगद हैं और अधिकतर का मानना है कि संकटमोचक की भूमिका में उतरे शिवपाल ने यादव परिवार की बहू की संसद पहुंचने की राह आसान कर दी है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/mainpuri-by-election-dimples-uncle-shivpal-became-the-troubleshooter/article-30148"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/ee.jpg" alt=""></a><br /><p>मैनपुरी /इटावा। समाजवादी पार्टी (सपा) संस्थापक मुलायम सिंह यादव के निधन के कारण मैनपुरी संसदीय सीट पर पांच दिसम्बर को होने वाले उपचुनाव में सपा प्रत्याशी डिंपल यादव को संसद में पहुंचाने के संकल्प के साथ प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (प्रसपा) अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव पूरी तरह सक्रिय हो गये हैं। <br /><br />शिवपाल की ओर से बहू डिपंल को मिल रहे समर्थन से सपा के आम कार्यकर्ता से लेकर बड़े नेता तक खासे गदगद हैं और अधिकतर का मानना है कि संकटमोचक की भूमिका में उतरे शिवपाल ने यादव परिवार की बहू की संसद पहुंचने की राह आसान कर दी है। </p>
<p>वरिष्ठ पत्रकार हेम कुमार शर्मा बताते हैं कि संगठन के तर्जुबेकार शिवपाल ने उपचुनाव को लेकर सपा उम्मीदवार के पक्ष में कार्यकर्ताओं की लामबंदी शुरू की है, उससे क्षेत्र में सपा समर्थकों में खासा जोश देखने को मिल रहा है और जिस भी सपा कार्यकर्ता से बात की जाए, वह सीधे सीधे सपाट शब्दों में यही बताता दिख रहा है '' चाचा जी (शिवपाल) ने कहा है कि डिंपल यादव को नेताजी (मुलायम) से बड़ी जीत दिलाना है।"</p>
<p>शर्मा बताते है कि शिवपाल सिंह यादव एसएस मेमोरियल स्कूल में एक-एक कार्यकर्ता से अकेले में बात कर रहे हैं और हर किसी से इस बात का वादा ले रहे है कि डिंपल परिवार की बहू है जो चुनाव मैदान में नेताजी मुलायम सिंह यादव की जगह उतरी हुई है हम सबकी जिम्मेदारी अब डिंपल को नेताजी से अधिक बड़ी जीत कर दिला कर के सदन में भेजना है । इसमें कोई भी पीछे नहीं रहे यही नेता जी को सबसे बड़ी श्रद्धांजलि होगी।</p>
<p>मैनपुरी संसदीय सीट के शिवपाल की अहमियत को तवज्जो देते हुए सपा ने उन्हे अपना स्टार प्रचारक बनाया जिसके बाद पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव पत्नी डिपंल के साथ चाचा शिवपाल का आशीर्वाद लेने उनके घर पहुंचे थे। खासी चर्चा में रही इस मुलाकात के बाद शिवपाल उपचुनाव में बहू की जीत के लिये सक्रिय हो गये वहीं शिवपाल का संदेश मिलने के बाद कई कार्यकर्ता यह कहते हुए देखे गए हैं कि ङ्क्षडपल यादव की जीत नेताजी मुलायम ङ्क्षसह यादव से दुगनी मतों से होगी और वह हर हाल में नेताजी की तरह संसद की दहलीज तक पहुंचेगी।</p>
<p>मुलायम सिंह यादव के निधन के कारण हो रहे उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने दिवंगत पूर्व सांसद के शिष्य रघुराज सिंह शाक्य को अपना उम्मीदवार बनाया है।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 19 Nov 2022 15:33:21 +0530</pubDate>
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                <title>कांग्रेस ने सरदारशहर उपचुनाव में अनिल शर्मा को दिया टिकट</title>
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                        <![CDATA[ भंवरलाल शर्मा सरदारशहर से कई बार विधायक बने और वह मंत्री भी रहे। उनके निधन के बाद रिक्त हुई इस सीट पर उपचुनाव में कांग्रेस ने सहानुभूति कार्ड खेलते हुए उनके पुत्र अनिल शर्मा को उपचुनाव में मौका दिया है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/congress-gave-ticket-to-anil-sharma-in-sardarshahar-by-election/article-29837"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/website-photo-630400-(1)7.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान में चुरु जिले में सरदारशहर विधानसभा सीट पर आगामी पांच दिसम्बर को होने वाले उपचुनाव के लिए कांग्रेस ने पूर्व मंत्री भंवर लाल शर्मा के पुत्र अनिल कुमार शर्मा को चुनाव मैदान में उतारा है। कांग्रेस आलाकमान ने बुधवार को उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी के रुप में अनिल कुमार शर्मा के नाम की घोषणा की।  अनिल कुमार शर्मा सरदारशहर से विधायक रहे भंवरलाल शर्मा के पुत्र हैं और वह साल 1995 में नगरपालिका के अध्यक्ष रह चुके हैं। कांग्रेस ने राज्य में इससे पहले हुए उपचुनाव में सहानुभूति लहर का फायदा मिलने के बाद सरदारशहर उपचुनाव में भी यहां रहे विधायक के बेटे को टिकट देकर सहानुभूति कार्ड खेला हैं।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि भंवरलाल शर्मा सरदारशहर से कई बार विधायक बने और वह मंत्री भी रहे। उनके निधन के बाद रिक्त हुई इस सीट पर उपचुनाव में कांग्रेस ने सहानुभूति कार्ड खेलते हुए उनके पुत्र अनिल शर्मा को उपचुनाव में मौका दिया है। भाजपा ने उपचुनाव में पूर्व विधायक अशोक कुमार पिंचा को अपना उम्मीदवार घोषित कर चुकी है।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 16 Nov 2022 15:54:26 +0530</pubDate>
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                <title>प्रदेश में सत्ता में रहते कांग्रेस ने दस सालों में जीते सबसे ज्यादा उपचुनाव</title>
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                        <![CDATA[सत्ता में रहने के बावजूद भी कांग्रेस पार्टी ने 7 विधानसभा सीटों पर हुए उप चुनाव में से 5 में जीत दर्ज की है, जबकि 2013 से 2018 तक पूर्ववर्ती वसुंधरा सरकार के समय भाजपा को 8 उप चुनाव में से 6 उपचुनावों में हार का सामना करना पड़ा था। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/while-in-power-in-the-state-the-congress-won-the/article-29763"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/q-115.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में सत्ता और विपक्ष में रहते हुए कांग्रेस ने सबसे ज्यादा उप चुनाव जीते हैं। विपक्ष में रहते हुए कांग्रेस ने 6 उप चुनाव जीते, जबकि सत्ता में रहते हुए पांच उप चुनाव जीते हैं। कांग्रेस ने सरदारशहर विधानसभा क्षेत्र में होने जा रहे उप चुनाव को भी गुड गवर्नेंस के जरिए जीतने का दावा किया है। यह सीट कांग्रेस के दिग्गज विधायक रहे भंवर लाल शर्मा के निधन के चलते खाली हुई है। सत्ता में रहने के बावजूद भी कांग्रेस पार्टी ने 7 विधानसभा सीटों पर हुए उप चुनाव में से 5 में जीत दर्ज की है, जबकि 2013 से 2018 तक पूर्ववर्ती वसुंधरा सरकार के समय भाजपा को 8 उप चुनाव में से 6 उपचुनावों में हार का सामना करना पड़ा था। सत्ता में रहने और विपक्ष में रहने के बावजूद भाजपा के लिए उपचुनाव के नतीजे पक्ष में नहीं रहे।</p>
<p><strong>4 साल में कांग्रेस ने जीते छह उपचुनाव</strong><br />2013 में मोदी लहर के चलते विधानसभा चुनाव में कांग्रेस 21 सीटों पर सिमट गई थी। 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस सभी 25 लोकसभा सीटों पर हार गई थी, लेकिन इसके बाद हुए विधानसभा उपचुनाव कांग्रेस के लिए राहत भरे रहे थे। वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में नसीराबाद से सांवरलाल जाट, सूरतगढ़ से संतोष अहलावत, वैर से बहादुर कोली और कोटा दक्षिण से चुनाव जीते ओम बिरला को 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने टिकट देकर लोकसभा चुनाव लड़ाया। सांवरलाल जाट अजमेर, संतोष अहलावत झुंझुनूं, बहादुर कोली भरतपुर और ओम बिरला कोटा से लोकसभा का चुनाव जीत गए। इसके पांच महीने बाद चारों विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने सत्तारूढ़ भाजपा को बड़ा झटका दिया और नसीराबाद, सूरजगढ़ और वैर में जीत दर्ज की। भाजपा को केवल कोटा दक्षिण में ही जीत मिली। 2013 के विधानसभा चुनाव और 2014 के लोकसभा चुनाव में शर्मनाक हार का सामना कर चुकी कांग्रेस ने विधानसभा उपचुनाव में शानदार प्रदर्शन कर राजनीतिक पंडितों को भी हैरान कर दिया था। हालांकि 2017 में धौलपुर से बसपा विधायक रहे बीएल कुशवाह की विधायकी रद्द होने के बाद भाजपा ने उनकी पत्नी को धौलपुर सीट पर भाजपा का टिकट देकर चुनाव लड़ाया और जीत गई।<br />  <br /><strong>लोकसभा के दो उपचुनाव जीती थी कांग्रेस</strong><br />वर्ष 2018 की जनवरी की शुरुआत में सत्तारूढ़ भाजपा को उस वक्त बड़े झटके लगे थे, जब दो लोकसभा और एक विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने जबरदस्त जीत दर्ज की थी। कांग्रेस ने अजमेर और अलवर लोकसभा उपचुनाव में जीत दर्ज की। वहीं मांडलगढ़ विधानसभा सीट भी जीती। अजमेर लोकसभा उपचुनाव में रघु शर्मा सांसद चुने गए थे तो अलवर सीट से कांग्रेस के करण सिंह यादव सांसद चुने गए। मांडलगढ़ उपचुनाव में विवेक धाकड़ ने चुनाव जीता था। आमतौर पर माना जाता है कि सत्तारूढ़ पार्टी की एंटी इनकंबेंसी का फायदा उपचुनावों में विपक्षी पार्टियों को मिलता है, लेकिन यहां भी भाजपा को अब तक हुए 7 उपचुनाव में से 5 में हार का सामना करना पड़ा है, जबकि धरियावद और मंडावा सीट पर 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने जीत दर्ज की थी पर इन दोनों सीटों पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने जीत दर्ज कराई थी। कांग्रेस पार्टी ने जहां मंडावा, सुजानगढ़, सहाड़ा, वल्लभनगर, धरियावद सीटों पर जीत दर्ज की। वहीं भाजपा केवल राजसमंद सीट पर ही कब्जा बरकरार रख पाई। खींवसर सीट पर राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी ने अपना कब्जा बनाए रखा। मंडावा से साल 2018 में विधायक बने नरेंद्र खीचड़ 2019 के लोकसभा चुनाव में सीकर से सांसद चुने गए। वहीं खींवसर से विधायक रहे हनुमान बेनीवाल भी गठबंधन के प्रत्याशी के तौर पर नागौर से लोकसभा का चुनाव जीतकर सांसद बन गए थे। इन दोनों के सांसद बनने के बाद मंडावा और खींवसर सीट पर उपचुनाव हुआ था।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 16 Nov 2022 10:54:03 +0530</pubDate>
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