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                <title>devasthan department - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>हाडौती के मंदिरों की विरासत संभालने वाला विभाग खुद बेहाल, भवन की स्थिति जर्जर</title>
                                    <description><![CDATA[ न रास्ता सुगम, न पार्किंग की जगह  देवस्थान कार्यालय पहुंचना फरियादियो के लिए बनी अग्निपरीक्षा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-department-responsible-for-preserving-the-temple-heritage-of-hadauti-is-itself-in-a-sorry-state/article-160213"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)-(2)49.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के खाई रोड स्थित देवस्थान विभाग सहायक आयुक्त कार्यालय इन दिनों अपनी ही दुर्दशा पर आंसू बहाने को मजबूर है। जिन कंधों पर शहर सहित हाड़ौती अंचल के दर्जनों ऐतिहासिक मंदिरों, कीमती धार्मिक संपत्तियों, ट्रस्टों और व्यवस्थाओं को सहेजने का जिम्मा है, वही कार्यालय आज प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार होकर अपनी पहचान खोता नज़र आ रहा है। पुजारियों व फरियादियों के साथ-साथ कर्मचारियों के लिए भी भारी परेशानी का सबब बना हुआ है। इसके अलावा, कार्यालय तक पहुँचने का रास्ता सुगम न होने के कारण फरियादियों को यहाँ आने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है। वहीं, पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था न होने से यहाँ आने वाले लोगों को अपने वाहन खड़े करने में भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।</p>
<p><strong>भवन की स्थिति जर्जर, रिकॉर्ड भीगने की आशंका </strong><br />सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यह कार्यालय वर्षों पुराना है और इसकी इमारत दिन-ब-दिन जर्जर होती जा रही है। बारिश के दिनों में छत टपकने से महत्वपूर्ण दस्तावेज़ और फाइलें भीगने की नौबत आ जाती है। विभाग के पास रियासतकालीन व ऐतिहासिक मंदिरों, कीमती जमीनों और जमींदारियों से जुड़े कई संवेदनशील कागजात मौजूद हैं, लेकिन उचित रखरखाव के अभाव में अलमारियों में रखी फाइलें बारिश के समय भीग जाती हैं। नियमित साफ-सफाई न होने से इन फाइलों पर लंबे समय से धूल जमी हुई है, जिससे इन पर दीमक लगने और रिकॉर्ड नष्ट होने की आशंका बनी हुई है।</p>
<p><strong>डर के साए में काम करने को मजबूर </strong><br />कार्यालय की इस खस्ताहाल स्थिति का सीधा असर प्रशासनिक कामकाज पर पड़ रहा है। जर्जर छत के नीचे बैठकर काम करना कर्मचारियों के लिए किसी खतरे से कम नहीं है। हाड़ौती भर के दूर-दराज़ इलाकों से आने वाले पुजारियों और फरियादी राम कुमार व दिनेश ने बताया, "हम यहाँ मंदिर से संबंधित कार्य के लिए आए हैं, लेकिन कार्यालय की छत के नीचे बैठना खतरे से खाली नहीं है, क्योंकि बारिश में पानी टपकने का डर बना रहता है। ऐसे में स्थानीय लोगों और मंदिर प्रतिनिधियों ने मांग की है कि हाड़ौती की इस ऐतिहासिक व धार्मिक विरासत को बचाने के लिए जर्जर भवन की तुरंत मरम्मत कराई जाए या इसे किसी सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित किया जाए। साथ ही, रियासतकालीन संवेदनशील फाइलों का तत्काल डिजिटलाइजेशन कराया जाए, ताकि यह ऐतिहासिक रिकॉर्ड भविष्य के लिए सुरक्षित रह सके।</p>
<p><strong>रास्ता सुगम नहीं, पहुँचने में छूट रहे पसीने</strong><br />देवस्थान विभाग कार्यालय में मंदिर संबंधी आवेदन लेकर बूंदी से आए दिनेश कुमार ने बताया, "बस वाले ने हमें बस स्टैंड पर उतार दिया। इसके बाद यहाँ आने के लिए ऑटो किया, लेकिन ऑटो वाले को भी कार्यालय का रास्ता पता नहीं था। जैसे-तैसे समझाकर लाए, लेकिन कार्यालय पहुँचने वाली सड़क पर घुमावदार घाटी होने के कारण ऑटो को चढ़ाने में काफी परेशानी हुई।"</p>
<p>वहीं, बारां से फरियाद लेकर आए मोहनलाल ने बताया कि वे लोगों से रास्ता पूछते-पूछते यहाँ पहुँचे। रास्ता इतना घुमावदार और ढलान भरा है कि उन्हें पैदल आने में एक-दो जगह विश्राम करना पड़ा।</p>
<p><strong>पार्किंग और छाया के लिए स्थान नहीं </strong><br />कहने को तो यह कार्यालय हाड़ौती भर के मंदिरों और ट्रस्टों के पंजीकरण सहित अन्य महत्वपूर्ण कार्य संभालता है, लेकिन इसके बाहर न तो ठीक ढंग से वाहन पार्किंग की जगह उपलब्ध है और न ही फरियादियों के बैठने के लिए छायादार स्थान। इसके चलते भीषण गर्मी और बारिश के मौसम में यहाँ आने वालों की मुसीबतें और बढ़ जाती हैं।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />कार्यालय काफी पुराना व जर्जर अवस्था में है। यहां बैठने के लिए न तो पर्याप्त जगह है और न ही उचित व्यवस्था। बारिश के दिनों में स्थिति और विकट हो जाती है। कार्यालय एक कोने में स्थित होने के कारण आसानी से मिलता भी नहीं है, जिससे बुजुर्ग लोगों को आने-जाने में भारी असुविधा होती है।<br /><strong>-रौनक आनंद, विहिप मंदिर एवं अर्चक पुरोहित प्रमुख, चित्तौड़ प्रांत</strong></p>
<p> मैं सांगोद से यहाँ काम के सिलसिले में आया था। बस स्टैंड से पर्सनल ऑटो करके आया, लेकिन रास्ता घुमावदार होने के कारण ऑटो चालक को यहाँ तक आने में काफी परेशानी हुई।<br /><strong>-रामलाल, फरियादी</strong></p>
<p>नया ऑफिस बनाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा हुआ है। जैसे ही इसकी मंजूरी आएगी, नए भवन का निर्माण कार्य शुरू करवा दिया जाएगा।"<br /><strong>- के.के. खंडेलवाल, सहायक आयुक्त, देवस्थान विभाग, कोटा</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 15:30:13 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>असर खबर का - मंदिरों की जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराएं</title>
                                    <description><![CDATA[ देवस्थान विभाग अपनी ही जमीनों की देखरेख नहीं कर पा रहा है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news---make-the-land-of-temples-encroachment-free/article-86576"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/photo-size-(5)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। विधानसभा सत्र के दौरान लाडपुरा विधायक कल्पना देवी ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव में देवस्थान विभाग की जमीनों पर अतिक्रमियों द्वारा किए जा रहे अतिक्रमण के मुद्दे को सदन में रखा। विधायक ने सदन में अवगत कराया कि  देवस्थान विभाग की भूमियों पर अतिक्रमियों द्वारा अतिक्रमण कर नित नई-नई कॉलोनियां काटी जा रही है। उनके द्वारा बेशकीमती जमीन को कोडियों में बेच दिया जाता है। सस्ता प्लाट या जमीन मिलने के चक्कर में आम जनता भ्रमित हो जाती है।  विभाग  अपनी भूमियों को चिन्हित कर उन पर स्वयं का बोर्ड लगाकर या फिर चारदीवारी करवाकर और सी.सी. टीवी कैमरें लगवाकर इनकी निगरानी का दायित्व संबंधित थानाधिकारी या पटवारी को दिया जाए। ताकि वे समय-समय पर इसका जायजा कर भूमि की रिपोर्ट विभाग के उच्च अधिकारियों को प्रस्तुत करते रहें। इससे भविष्य में अतिक्रमण जैसी समस्या से निदान पाया जा सकेगा।  </p>
<p><strong>नवज्योति ने उठाया था अतिक्रमण का मामला</strong><br />देवस्थान विभाग के अधीन आने वाले मंदिरों के नाम की बेशकीमती जमीनों पर हो रहे अतिक्रमण के सम्बंध में दैनिक नवज्योति के 21 जुलाई के अंक में प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया गया था।  देवस्थान विभाग अपनी ही जमीनों की देखरेख नहीं कर पा रहा है। सरकारी मंदिरों की जमीनों पर लोगों ने कब्जे कर रखे हैं, लेकिन विभाग इन जमीनों को अतिक्रमण मुक्त नहीं करवा पा रहा है। यह स्थिति प्रदेश में देवस्थान विभाग के सभी मंदिरों की जमीनों की है।</p>
<p><strong>संपत्तियों को चिन्हित कर लगाएंगे कैमरे</strong><br />विधायक ने कहा कि पुराने रियासत कालीन समय से राजा-महाराजाओं द्वारा मंदिरों के लिए यह जमीन अधीन इसलिए रखी गई थी कि मंदिरों के रख-रखाव में कोई कमी न आए और मंदिर में जो पुजारी सेवाएं दे रहे है अपने परिवार का पालन-पोषण भी कर सके। परन्तु नियम तो बहुत बने है उस नियम की पालना कोई नहीं कर रहा है। जिस पर मंत्री कुमावत ने विधायक को आश्वस्त किया कि देवस्थान विभाग के मंदिरों पर जहां पर बोर्ड नहीं है वहां पर बोर्ड लगवाएंगे, देवस्थान की परिसंपत्तियों पर जो अतिक्रमण से मुक्त है उन्हें चिन्हित कर उन संपत्तियों कलर पेन्ट एवं लेखन भी करवाएंगे। विभाग की वित्तिय संसाधनों को ध्यान में रखते हुए उनकी उपलब्धता होने पर प्रमुख मंदिरों को चिन्हित कर सी.सी. टीवी कैमरे भी लगाएंंगे। मंदिरों एवं मंदिरों की परिसत्तियों के समग्र विकास एवं सुरक्षा के लिए विचार मंथन कर ठोस कदम उठाएंगे।</p>
<p><strong>सरकार ने स्वीकारा, 1773 अतिक्रमियों का कब्जा</strong><br />देवस्थान विभाग मंत्री जोराराम कुमावत ने बताया कि देवस्थान विभाग द्वारा प्रबंधित एवं नियंत्रित राजकीय प्रत्यक्ष प्रभार मंदिर आत्म निर्भर मंदिरों की कुल 7294.43 हैक्टयर भूमि है, जिसमें 2768.6064 हैक्टयर भूमि पर 1773 अतिक्रमियों का कब्जा है। जिनके खिलाफ विभिन्न न्यायालयों में 263 वाद विचाराधीन है। मंदिर भूमि पर अतिक्रमण की स्थिति पुजारी या पटवारी द्वारा ध्यान में लाए जाने पर तहसीलदार अतिक्रमी के विरुद्ध प्रभावी कार्यवाही करेंगे तथा मंदिर मूर्ति के हितों के संरक्षण के लिए दायित्वाधीन होंगे। जिला कलक्टर मूर्ति मंदिर के भूमि संबंधी अतिक्रमण रिपोर्ट सिवायचक/चरागाह भूमि की तरह राजस्व कर्मियों से नियमित रूप से प्राप्त कर धारा- 91 राजस्थान भू राजस्व अधिनियम 1956 के अन्तर्गत उनके प्रकरण दर्ज कर तदनुसार प्रभावी नियंत्रण करेंगे। हमारा विभाग लगातार अतिक्रमियों से देवस्थान विभाग की भूमि को अपने कब्जे में लेने के लिए प्रयासरत रहता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 02 Aug 2024 14:00:58 +0530</pubDate>
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                <title>डिजिटल सर्वे: हर खसरे की बारीकी से हो रही जांच</title>
                                    <description><![CDATA[विभाग अब देवस्थान विभाग की जमीनों को लेकर विशेष सतर्कता बरत रहा है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/digital-survey--every-khasra-is-being-investigated-closely/article-85838"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/27.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा के प्रमुख देवालय कर्णेश्वर महादेव मंदिर की रायपुरा क्षेत्र स्थित जमीन पर बुधवार को विभिन्न सरकारी विभागों की संयुक्त टीम द्वारा डिजिटल सर्वे जारी रहा। टीम ने सेटेलाइट के माध्यम से जमीन की स्थिति देखी और नापजोख किया। विभाग को यहां पर अतिक्रमण की सूचना मिली थी। इस आधार पर संयुक्त टीम ने मौके पर जाकर सर्वे का कार्य शुरू किया है। कर्णेश्वर महादेव मंदिर के नाम रायपुरा क्षेत्र में मोटा महादेव मंदिर के पास जमीन बरसों पहले जमीन आवंटित की गई थी। यह जमीन विभिन्न खसरों के रूप में मंदिर के नाम दर्ज है। रायपुरा में अब कॉलोनियां बन चुकी है। इसी की आड़ में भूमाफियाओं ने इस जमीन को भी अतिक्रमण की चपेट में ले लिया। राजस्व विभाग, देवस्थान विभाग और लाडपुरा तहसील के कार्मिकों की संयुक्त टीम यहां सर्वे कार्य में जुटी हुई है।</p>
<p><strong>मकानों की रजिस्ट्री को भी खंगाल रहे</strong><br />देवस्थान विभाग की सहायक आयुक्त ऋचा बलवदा ने बताया कि इस जमीन के आसपास काफी संख्या में कॉलोनियों बन चुकी हैं। इन कॉलोनियों में रहने वाले लोगों के मकानों से सम्बंधित रजिस्ट्री विभागीय कार्यालय में मंगवा रखी है। इन मकानों की रजिस्ट्री की जांच करवाई जा रही है। जांच से पता चल जाएगा कि इनके मकान किसी जमीन पर बने हुए हैं। इससे फर्जी रजिस्ट्री के सम्बंध में जानकारी सामने आ जाएगी। विभाग अब देवस्थान विभाग की जमीनों को लेकर विशेष सतर्कता बरत रहा है।</p>
<p><strong>मंदिर के नाम करीब 15 बीघा जमीन</strong><br />देवस्थान विभाग के अधिकारियों के अनुसार रायपुरा क्षेत्र में मोटा महादेव के पास कर्णेश्वर महादेव मंदिर के नाम करीब 15 बीघा जमीन दर्ज है। इस जमीन के आसपास काफी कॉलोनियों बन गई हैं। इन कॉलोनियों का लगातार विस्तार होता जा रहा था। यहां कई भूमाफियाओं ने देवस्थान विभाग की जमीन पर भी कब्जा शुरू कर दिया था। अतिक्रमण की गतिविधियां बढ़ती जा रही थी। इस पर विभाग ने अतिक्रमण का डिजिटल सर्वे करने का निर्णय किया था। अब संयुक्त टीम द्वारा लगातार सर्वे किया जा रहा है। इस जमीन के आसपास कुछ मकान बने हुए हैं। राजस्व विभाग के कर्मचारियों द्वारा जमीन के दस्तावेजों के आधार पर नापजोख किया जा रहा है। सर्वे पूरा होने पर पता चलेगा कि यह जो मकान बने हुए हैं वह मंदिर की जमीन पर है या फिर उसके दायरे के बाहर है। यदि जमीन पर अतिक्रमण पाया जाता है तो हटाने की कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p>रायपुरा क्षेत्र में स्थित कर्णेश्वर महादेव मंदिर के नाम दर्ज सरकारी जमीन के सर्वे का कार्य चल रहा है। लाड़पुरा तहसील, राजस्व विभाग और देवस्थान विभाग की संयुक्त टीम सेटेलाइट के माध्यम से जमीन का सर्वे कर रही है। आसपास करीब 70 से 80 मकान बने हुए हैं। उनकी रजिस्ट्री की जांच कर रहे हैं। अतिक्रमण मिलने पर प्रभावी कार्रवाई की जाएगी।<br /><strong>- ऋचा बलवदा, सहायक आयुक्त, देवस्थान विभाग कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Jul 2024 17:41:10 +0530</pubDate>
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                <title>देवस्थान के मंदिर पर ही खिलेंगे और यहीं चढ़ेंगे फूल</title>
                                    <description><![CDATA[वन विभाग और नगरीय निकायों  पेड़ पौधे उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी दी गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/will-bloom-only-on-the-temple-of-devasthan-and-flowers-will-climb-here/article-52610"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/devsthan-k-mandir-pr-hi-khilenge-or-yhi-chdhenge-phool...kota-news-24-07-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। सनातन धर्म में पेड़-पौधों का विशेष महत्व माना गया है। ये धार्मिक आस्था के भी प्रतीक है, जिन्हें अब आस्था के केंद्र देवस्थान विभाग के मंदिरों में उपवन विकसित करने की तैयारी की जा रही है। नंदनकानन योजना के तहत देवस्थान के जितने भी मंदिर हैं, वहां पुष्प वाले पौधे सदाबहार, हारशृंगार, मोगरे, रात की रानी, चंपा, चमेली लगाए जा रहे है। इसके अलावा बेलपत्र, पीपल, आंवला, बड़ जैसे पूजनीय पेड़ भी लगाए जाएंगे, ताकि सावन में भगवान शिव की पूजा के लिए बीलपत्र, वटसावित्री पर बड़, आंवला नवमी पर आंवले के पेड़ की पूजा भी हो और ये पेड़-पौधे पर्यावरण को भी शुद्ध करेंगे, ऑक्सीजन भी देंगे।  देवस्थान विभाग के मंदिरों में भगवान को मंदिर परिसर में ही उगाए गए फूल-पत्ती अर्पित करने की योजना शुरू की है। प्रदेश 593 मंदिरों को नंदनकानन योजना के तहत आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। कोटा में इस का कार्य दो माह पूर्व ही शुरू हो गया। कोटा के देवस्थान विभाग के करीब 12 मंदिरों में उपवन वाटिकाए  तैयार की जा चुकी है। यहां पौधारोपण का कार्य हो गया है। तुलसी और मोगरा के फूल तो भगवान को अर्पण होने लगें है। प्रदेश में विभाग के करीब 593 मंदिरों में पेड़-पौधे लगाने की जिम्मेदारी देवस्थान विभाग के इंस्पेक्टर और मंदिर प्रशासन को सौंपी  गई है। वन विभाग और नगरीय निकायों  पेड़ पौधे उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी दी गई है।</p>
<p><strong>पर्याप्त जगह वाले मंदिर में लगेंगे पौधे</strong><br />देवस्थान विभाग की सहायक आयुक्त ऋचा बलदवा ने बताया कि जिन मंदिर परिसरों में पानी और पर्याप्त जमीन उपलब्ध होगी, वहां पेड़ लगाए जाएंगे। गमलों में सदाबहार, हजारे और तुलसी के छोटे पौधे लगाए जाएंगे। मंदिरों में पुजारी, सेवागीर और गार्ड इन पेड पौधों को संवारेंगे। विभाग का इंस्पेक्टर भी अपनी ड्यूटी निभाएगा। कई मंदिर परिसरों में खुले क्षेत्र की वजह से बंदर या पशुओं से पेड़ पौधों को नुकसान का खतरा हो सकता है, ऐसे में वहां स्थानीय निकायों का सहयोग लेकर ट्री गार्ड लगाए जाएंगे। नंदन कानन योजना से मंदिरों को हरियाली युक्त वाटिका विकसित करना है और भक्तों को भी पूजनीय पेड़ पौधे उपलब्ध हो जाएंगे।</p>
<p><strong>जहां खुली जमीन नहीं वहां गमलों होगा पौधारोपण</strong><br />देवस्थान विभाग के मंदिरों में अब खुद की जमीन में उगे फूल व फल भगवान को चढ़ाए जाने की तैयारियां पूरी कर ली है। इसके लिए नंदन कानन योजना के तहत मंदिरों की खुली जमीन में पौध रोपण किया जा रहा। जहां खुली जमीन नहीं है वहां पर गमलों में पौधरोपे जा रहे है।अभी तक अधिकतर सभी मंदिरों भगवान को फूल, मालाएं एवं फल बाजार से मंगाने पड़ते हैंं, क्योंकि मंदिर परिसर में इतने फल-फूल नहीं हैं। ऐसे में अब नंदन कानन योजना के तहत देवस्थान विभाग के अधीन जिले के सभी मंदिरों में पौधरोपण किया जा रहा है। इससे मंदिरों में चढऩे वाले फूल परिसर में ही उपलब्ध हो सकेंगे और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।</p>
<p><strong>आने वाली पीढ़ी को प्राकृतिक आॅक्सीजन मिले </strong><br />देवस्थान विभाग के प्रबंधक रामसिंह ने बताया कि प्रकृति पूजनीय है।  वृक्ष को पूजने की परंपरा रही है, उस परंपरा को जीवित रखने के लिए ये पहल की जा रही है।  देवस्थान विभाग के सभी मंदिरों में पेड़-पौधे लगाए जा रहे हैऔर इनकी जिम्मेदारी मंदिर प्रशासन के साथ-साथ देवस्थान विभाग के इंस्पेक्टर को सौंपी गई है। नंदनकानन योजना को सफल बनाया जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ी को कभी आॅक्सीजन सिलेंडर की आवश्यकता न पड़े और उन्हें प्राकृतिक आॅक्सीजन मिल सके। </p>
<p><strong>इंस्पेक्टर्स की लगाई जाएगी ड्यूटी </strong><br />कोटा व बूंदी  में करीब एक दर्जन से अधिक देवस्थान के मंदिर कोटा में 9 देवस्थान विभाग के मंदिर है। जहां पानी की व्यवस्था और पर्याप्त कच्ची जमीन है, वहां ये पेड़-पौधे लगाए जा रहे है। जहां कच्ची जमीन नहीं है वहां गमलों में सदाबहार, हजारे और तुलसी के छोटे पौधे लगाए जा रहे है। सहायक आयुक्त ऋचा बलदवा ने बताया कि  मंदिरों में पुजारी, सेवागीर और गार्ड तैनात हैं। सभी मिलकर इस उपवन को संवारेंगे।  इसके अलावा विभाग के इंस्पेक्टर्स की भी ड्यूटी लगाई जाएगी। </p>
<p><strong>ट्री गार्ड लगाकर पौधों की रखवाली </strong><br />कई क्षेत्र ऐसे हैं जहां बंदर या दूसरे पशुओं की बहुतायत की वजह से इन पेड़ पौधों को नुकसान भी पहुंच सकता है। इनके बचाव के लिए उपाय करेंगे।  बंदर जैसे पशुओं को पकड़ना तो नामुमकिन है। जिन मंदिरों में आवश्यकता हो वहां जाल वाले ट्री गार्ड लगाकर पौधों की रखवाली की जाएगी, ताकि ये पौधे पनप सके। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 24 Jul 2023 19:15:34 +0530</pubDate>
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                <title>वरिष्ठ नागरिकों के पास आ रहे ठगी के कॉल</title>
                                    <description><![CDATA[वरिष्ठ नागरिकों की तीर्थयात्रा योजना के नाम पर भी अब शातिरों द्वारा ठगी का खेल खेला जा रहा है। मेडिकल सहित अन्य प्रमाण पत्रों के लिए प्रदेश के कई वरिष्ठ नागरिकों के पास कॉल पहुंचे हैं। देवस्थान विभाग की ओर से बताया कि किसी भी तरह की राशि मांगने के लिए कॉल आने पर राशि नहीं दें। इस योजना से कोई भी वेंडर नहीं जुड़ा हुआ है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/fraud-calls-coming-to-senior-citizens/article-29689"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/varishth-nagriko-k-paas-aa-rahe-thagi-k-call...kota-news-15.11.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा।<strong> केस - 1 :  एक मेडिकल प्रमाण के लिए तीन हजार मांगे</strong><br />वरिष्ठ नागरिक रामवतार ने बताया कि पिछले दिनों उनके घर के एक सदस्य के पास कॉल आया कि यात्रा के लिए मेडिकल प्रमाण पत्र आवश्यक है। इसके लिए तीन हजार रुपए की मांग की गई। वरिष्ठ नागरिक ने जब जिम्मेदार अधिकारियों से पता किया तो ठगी के लिए फर्जी कॉल आने की जानकारी मिली।</p>
<p><strong>केस - दो : खानपान के लिए भी किया कॉल</strong><br />वरिष्ठजन शिवप्रसाद सिंह ने बताया कि खानपान और किराया राशि को लेकर भी वरिष्ठ नागरिकों के पास कॉल पहुंचे है। वहीं देवस्थान विभाग के अलर्ट के बाद वरिष्ठ नागरिकों ने लापरवाही पर सवाल भी उठाए है। वरिष्ठ नागरिकों का कहना है कि आखिरकार विभाग से डेटा कैसे लीक हुआ, इसकी जांच होनी चाहिए। </p>
<p>वरिष्ठ नागरिकों की तीर्थयात्रा योजना के नाम पर भी अब शातिरों द्वारा ठगी का खेल खेला जा रहा है। मेडिकल सहित अन्य प्रमाण पत्रों के लिए प्रदेश के कई वरिष्ठ नागरिकों के पास कॉल पहुंचे हैं। इस मामले में जब वरिष्ठ नागरिकों ने योजना से जुड़े अधिकारियों से सम्पर्क किया तो विभाग ने अलर्ट जारी किया है। देवस्थान विभाग की आयुक्त प्रज्ञा केवलरमी ने इस संबध में आदेश जारी किया है। जिसमें बताया कि मुख्यमंत्री की ओर से बजट में इस योजना की घोषणा की गई। इस योजना के तहत 20 हजार वरिष्ठ नागरिकों को यात्रा कराई जाएगी। इसमें 18 हजार यात्रियों को रेल मार्ग से एवं 2 हजार यात्रियों को हवाई मार्ग से यात्रा कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि यह यात्रा पूरी तरह नि:शुल्क है। इस यात्रा का पूरा खर्चा राजस्थान सरकार की ओर से उठाया जाएगा। चयनित यात्रियों को मेडिकल रिपोर्टिंग के नाम पर किसी को कोई शुल्क नहीं देना है।</p>
<p><strong>वेंडर के नाम से भी राशि न दें</strong><br />देवस्थान विभाग की ओर से वरिष्ठ नागरिकों के लिए जारी अलर्ट में लगातार वसूली के लिए कॉल करने वालों के नंबर भी जारी किए गए है। विभाग की ओर से बताया कि किसी भी तरह की राशि मांगने के लिए कॉल आने पर राशि नहीं दें। इस योजना से कोई भी वेंडर नहीं जुड़ा हुआ है। इसलिए वेंडर के नाम पर भी किसी तरह की राशि नहीं दें। कुछ शातिर लोग फोन के माध्यम से वरिष्ठजनों से ठगी का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में वरिष्ठजनों को सावधान रहने की जरूरत है। इस मामले में जरा सी आवधानी से वरिष्ठजनों को आर्थिक नुकसान हो सकता है।</p>
<p>मेडिकल प्रमाण पत्र से लेकर किराया राशि वसूलने को लेकर कोई गिरोह सक्रिय बना हुआ है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए धार्मिक स्थलों की तीर्थयात्रा पूरी तरह से नि:शुल्क है। ऐसे में किसी के झांसे में नहीं आएं।<br /><strong>- राम सिंह, प्रबंधक देवस्थान विभाग</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Tue, 15 Nov 2022 14:36:17 +0530</pubDate>
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