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                <title>fire safety - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>होली के त्यौहार पर सफाई व्यवस्था को लेकर दिये अधिकारियों को निर्देष</title>
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                        <![CDATA[नगर निगम जयपुर ने 2 और 3 मार्च को होली के लिए विशेष सफाई अभियान और सुरक्षा इंतजाम किए हैं। आयुक्त डॉ. गौरव सैनी के अनुसार, राख और कचरे के त्वरित निस्तारण हेतु अतिरिक्त कर्मी तैनात रहेंगे। आगजनी रोकने के लिए शहर के प्रमुख पुलिस स्टेशनों पर अग्निशमन वाहन सुबह 7 से रात 10 बजे तक मुस्तैद रहेंगे।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/instructions-given-to-officials-regarding-cleanliness-during-holi-festival/article-144884"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/1200-x-600-px)-(1)20.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। आगामी होली एवं धुलंडी पर्व (2 एवं 3 मार्च) के अवसर पर नगर निगम जयपुर द्वारा शहर में विशेष साफ-सफाई व्यवस्थाएँ सुनिश्चित की गई हैं। नगर निगम आयुक्त डाॅ. गौरव सैनी के निर्देषानुसार नगर निगम क्षेत्र में होलिका दहन एवं धुलंडी के दौरान उत्पन्न होने वाली राख, कोयला, लकड़ी अवशेष, रंग-गुलाल एवं अन्य कचरे की त्वरित सफाई हेतु विशेष अभियान चलाया जाएगा। मुख्य सड़कों, चैराहों एवं सार्वजनिक स्थलों पर अतिरिक्त सफाई कर्मियों की तैनाती की जाएगी ताकि आमजन को किसी प्रकार की असुविधा न हो तथा दुर्घटनाओं की संभावना को रोका जा सके।</p>
<p>नगर निगम आयुक्त डाॅ. गौरव सैनी ने आमजन से अपील की कि होली पर्व सौहार्द एवं सुरक्षित वातावरण में मनाएं तथा सार्वजनिक स्थलों पर स्वच्छता बनाए रखने में नगर निगम प्रषासन का सहयोग करें। इसके अतिरिक्त, सुरक्षा की दृष्टि से दिनांक 2 व 3 मार्च  को अग्निशमन वाहन मय आवश्यक उपकरण एवं स्टाफ की तैनाती शहर के विभिन्न स्थानों पर की जायेगी। 2 व 3 मार्च को थाना रामगंज, माणक चैक, ब्रह्मपुरी, शास्त्रीनगर, कोतवाली, लालकोठी, मालवीय नगर, आदर्शनगर, सांगानेर, मानसरोवर, वैशाली नगर तथा पुलिस कंट्रोल रूम, यादगार जयपुर पर की जाएगी। यह व्यवस्था प्रातः 7 बजे से रात्रि 10 बजे तक प्रभावी रहेगी।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Feb 2026 18:20:07 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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                <title>सांप मारने को लाठी पीट  रहे, वह भी आधी अधूरी</title>
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                        <![CDATA[ एक बार फिर नोटिस देकर की इतिश्री-हादसों के कुछ दिन तक ही नजर आती है अधिकारियों की सक्रियता।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/they-re-using-sticks-to-kill-a-snake--and-that-too-is-half-hearted/article-144681"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/1200-x-60-px)13.png" alt=""></a><br /><p>कोटा।<strong> केस एक :</strong> जवाहर नगर थाना क्षेत्र स्थित इंद्र विहार में एक तीन मंजिला रेस्टोरेंट के ढहने से दो लोगों की मौत के बाद नगर निगम व कोटा विकास प्राधिकरण कुछ दिन तक तो सक्रिय नजर आया। अवैध निर्माण के नोटिस भी दिए गए। लेकिन उसके बाद केडीए ने तो किसी के भी खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई तक नहीं की। जबकि निगम ने की चार अवैध निर्माण भवनों को सीज करने के बाद आगे कोई कार्रवाई नहीं की।</p>
<p><strong>केस दो : </strong>रेस्टोरेंट हादसे के बाद नगर निगम का फायर अनुभाग भी सक्रिय हुआ। फायर टीम ने नए कोटा शहर के कोचिंग इलाकों में तीन से चार दिन तक तो अभियान चलाकर करीब डेढ़ सौ से अधिक नोटिस जारी किए। लेकिन उसके बाद उन नोटिसों की पालना हुई या नहीं। किसी के भी खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।</p>
<p><strong>स्कूल हादसे के बाद भी चेते थे अधिकारी:</strong> इसी तरह बरसात के समय में झालावाड़ जिले के पिपलोदी गांव में एक सरकारी स्कूल की छत ढहने से कई बच्चों की मौत हो गई थी। उस हादसे के बाद सरकार व प्रशासन और शिक्षा विभाग हरकत में आया। आनन-फानन में सभी जर्जर स्कूलों का सर्वे कराया गया। उनमें बच्चों को बैठने से रोका गया। सरकार ने जर्जर स्कूल भवनों के लिए बजट भी पारित कर दिया। लेकिन हुआ कुछ भी नहीं। अभी तक भी किसी स्कूल की मरम्मत तक नहीं हुई है। ये तो उदाहरण मात्र हैं उस स्थिति को बताने के लिए जो कुछ दिन पहले शहर में उत्पन्न हुई थी। हालत यह है कि हर बार किसी भी तरह का बड़ा हादसा होने के बाद प्रशासन उस समय या कुछ दिन तक तो सक्रिय नजर आता है लेकिन उसके बाद फिर वही ढाक के तीन पात वाली स्थिति हो जाती है।</p>
<p><strong>केडीए ने दिए सौ से अधिक नोटिस</strong><br />रेस्टोरेंट हादसा होने के बाद जांच में पता चला कि जो रेस्टोरेंट ध्वस्त हुआ था उसका निर्माण अवैध था। उसके पास के अन्य 5 भवन भी अवैध निर्माण की बुनियाद पर खड़े हुए थे। उसे देखते हुए कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से नए कोटा शहर के कोचिंग एरिया जवाहर नगर, इंद्र विहार, तलवंडी, महावीर नगर, के अलावा कुन्हाड़ी लैंड मार्क और बोरखेड़ा स्थित नयानोहरा समेत कई जगह पर बहुमंजिला इमारतों को अवैध निर्माण मानते हुए नोटिस जारी किए। जानकारी के अनुसार करीब 100 से 125 नोटिस जारी किए। लेकिन उन नोटिसों को देने के बाद उन पर आगे क्या कार्रवाई की गई। इस बारे में कोई भी अधिकारी बोलने को तैयार ही नहीं है।</p>
<p><strong>अग्नि सुरक्षा नहीं होने पर दिए नोटिस</strong><br />इसी तरह नगर निगम के फायर अनुभाग की ओर से हॉस्टलों व रेस्टोरेंट समेत अन्य बहुमंजिला उमारतों में आग से सुरक्षा की जांच की गई। उनमें से कहीं फायर सिस्टम नहीं था तो कहीं कार्यशील अवस्था में नहीं थे। कहीं आग से सुरक्षा के नाम पर मात्र दिखावे के छोटे उपकरण रखे हुए थे। ऐसे में नगर निगम के फायर अनुभाग की ओर से अभियान चलाकर करीब 150 से अधिक नोटिस दिए गए। उन नोटिसों के बाद उनकी पालना हुई या नहीं। भवन मालिकों ने फायर सेफ्टी सिस्टम लगाए या नहीं। इसकी कोई जानकारी अभी तक नहीं है।</p>
<p><strong>फिर किसी हादसे का इंतजार</strong><br />शहर में किसी तरह का हादसा होने के कुछ दिन बाद तक तो सभी विभाग व जिला प्रशासन सक्रिय रहता है। फिर चाहे संभागीय आयुक्त हो या जिला कलक्टर। सभी ने बैठकें लेकर अधिकारियों को निर्देश दिए कि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा नहीं हो। इसके लिए जो भी संभव हो कार्रवाई की जाए। अधिकारियों के निर्देश के बाद संबंधित विभाग हरकत में आए और कुछ दिन तक ऐसा लगा मानो अब शहर में ऐसी कार्रवाई होगी जिससे अवैध निर्माण व अतिक्रमण करने वालों को सबक मिलेगा। जबकि ऐसा लगता है कि प्रशासन व संबंधित विभाग फिर किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं। उसके बाद ही सख्त कार्रवाई होगी।</p>
<p><strong>17 दिन हुए हादसे को</strong><br />दिल्ली स्पाइसी रेस्टोरेंट को ध्वस्त हुए 17 दिन का समय हो गया है। 8 फरवरी की रात को हुए हादसे में एक कोचिंग छात्र व एक युवक की मौत हो गई थी। जबकि एक महिला के मलबे में दबने से उनका पैर इतना जख्मी हो गया था कि उसे काटना ही पड़ा। विभागीय व भवन मालिकों की लापरवाही का खामियाया बेगुनाहों को भुगतना पड़ रहा है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />इंद्र विहार में जिस रेस्टोरेंट का अवैध निर्माण था। उस समेत आस-पास के 5 भवनों को नोटिस दिया गया था। जिनमें से एक जर्जर भवन के मालिक ने तो स्वयं ही उसे ढहा दिया था। जबकि अन्य 4 को सीज कर दिया है। वहीं फायर के नोटिसों की पालना करवाई जाएगी। पालना नहीं करने वालों के खिलाफ निर्धारित समय के बाद कार्रवाई की जाएगी।<br /><strong>- ओम प्रकाश मेहरा, आयुक्त, नगर निगम कोटा</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Feb 2026 14:24:55 +0530</pubDate>
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                <title>आंध्र प्रदेश के कोव्वूरु में फ्लाईओवर पर निजी बस में लगी आग, 10 लोग बाल-बाल बचे</title>
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                        <![CDATA[आंध्र प्रदेश के कोव्वूरु में बुधवार को विशाखापत्तनम जा रही एक निजी बस में अचानक आग लग गई। चालक की सूझबूझ से बस में सवार सभी दस लोग सुरक्षित बाहर निकल आए।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/private-bus-catches-fire-on-flyover-in-kovvur-andhra-pradesh/article-138719"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/andra-pradesh-bus-accident.png" alt=""></a><br /><p>राजमुंदरी। आंध्र प्रदेश के कोव्वूरु में बुधवार को एक फ्लाईओवर पर एक निजी बस में आग लग गयी लेकिन समय रहते सभी  छह यात्रियों और चालक दल के चार सदस्यों के उतर जाने से एक बड़ा हादसा टल गया। पुलिस के अनुसार यह घटना उस समय हुई जब बस तेलंगाना के खम्मम से विशाखापत्तनम की ओर जा रही थी। पुलिस उपाधीक्षक देव कुमार ने बताया कि जब बस फ्लाईओवर से गुजर रही थी, तभी उसमें अचानक आग की लपटें दिखाई दीं। </p>
<p>चालक ने समय रहते आग को देख लिया और तुरंत बस रोककर यात्रियों को सतर्क किया। इसके बाद बस में सवार सभी छह यात्री और चालक दल के चार सदस्य सुरक्षित नीचे उतर गए। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और कुछ ही मिनटों में पूरी बस जलकर खाक हो गई।</p>
<p>घटना की सूचना मिलने पर दमकल की गाडिय़ां मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाया। कोव्वूरु के संभागीय अग्निशमन अधिकारी एवीएनएस वेनु ने बताया कि इस हादसे में बस पूरी तरह जल गयी है।  </p>
<p> </p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 07 Jan 2026 15:00:37 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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                <title>रिहायशी इलाकों में व्यवसायिक गोदाम, आग से सुरक्षा के नहीं इंतजाम</title>
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                        <![CDATA[आग लगने वाले दोनों गोदाम मालिकों को दिए नोटिस। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/commercial-warehouses-in-residential-areas--no-fire-safety-arrangements/article-80845"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/41.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । शहर में एक तरफ  भीषण गर्मी पड़ रही है। वहीं दूसरी तरफ आग लगने की घटनाएं हो रही है। हालत यह है कि रिहायशी इलाकों में गोदाम बनाकर व्यवसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही है। वहां आग से सुरक्षा के इंतजाम तक नहीं होने से स्थानीय लोगों की जान को जोखिम में डाला जा रहा है। ऐसा शहर में किसी एक जगह पर नहीं हो रहा है। पुराने शहर से लेकर नए कोटा के अधिकतर क्षेत्रों में यही हालत है। तीन दिन पहले एक ही दिन में दो गोदामों में भीषण आग लगी थी। एक  गोदाम फर्नीचर का था तो दूसरा कपड़ों व होजरी के सामान का था। ये दोनों ही गोदाम रिहायशी इलाकों में हैं। जहां भीषण आग लगी लेकिन वहां आग बुझाने के न तो फायर सिस्टम लगे हुए हैं और न ही उससे बचाव के संसाधन है। जिससे गोदामों के आस-पास रहने वाले हजारों लोगों की जान उस समय तक जोखिम में रही जब तक आग पर पूरी तरह से काबू नहीं पा लिया गया। निगम की फायर दमकलों ने उस समय तो आग को काबू कर लिया किसी तरह की जन हानि नहीं होने दी। लेकिन इस तरह का हादेसा वहां दोबारा या किसी अन्य स्थान पर भी हो सकता है। </p>
<p><strong>यह है स्थिति</strong><br />सिंधी कॉलोनी स्थित चार मंजिला जिस कपड़े के गोदाम में आग लगी थी उसमें सामान इतना अधिक भरा हुआ था कि निगम के फायर मैन को अंदर जाने तक का रास्ता नहीं था। सीढ़ियों तक में कपड़े व होजरी का सामान भरा हुआ था। इस बिल्डिंग के आसपास भी काफी मकान है।  सिंधी कॉलोनी में अधिकतर लोगों ने मकानों के आगे रैम्प बनाकर सड़क पर अतिक्रमण कर गलियों को संकरा किया हुआ है। यहां हर गली में कहीं कबाड़ का तो कहीं पीपों का गोदाम है। कहीं पैकेट में बिकने वाली खाद्य सामग्री के गोदाम हैं तो कहीं पानी पताशे बनाने का काम हो रहा है। अधिकतर काम मकानों में नीचे की तरफ किया जा रहा है। कई लोगों ने तो सड़क पर ही सामान बिखेर रखा है। किसी के भी पास आग बुझाने के संसाधन व सिस्टम नहीं होने से यहां आग का खतरा हमेशा बना हुआ है। यही स्थिति शहर के अन्य क्षेत्रों में भी है।  इसी तरह से बजंर नगर कैनाल रोड स्थित जिस फर्नीचर के गोदाम में आग लगी वह भी रिहायशी इलाके में है। यहां आस-पास कई मल्टी स्टोरी बिल्डिंग हैं। जिनमें हजारों लोग रहते हैं। जिस गोदाम में आग लगी उसके नीचे शोरूम है। गनीमत रही कि आग ऊपर की तरफ कच्चे माल में लगी। यदि आग नीचे गोदाम की तरफ आ जाती तो कई  लोगों की जान को खतरा हो सकता था। </p>
<p><strong>8 से 10 दमकल ने कई घंटों में पाया काबू</strong><br />जिन दोनों गोदामों में आग लगी वह काफी भीषण थी। नगर निगम के फायर अनुभाग के अधिकारियों व फायरमैन को उन आग को बुझाने में 8 से 10 दमकलों व लाखों लीटर पानी का उपयोग करना पड़ा। निगम के फायर अधिकारियों का कहना है कि समय रहते आग पर काबू नहीं पाया जाता तो बड़ा हादसा हो सकता था।  गौरतलब है कि कुछ समय पहले बजंरंग नगर रोड स्थित एलपीजी गैस गोदाम के पास भी आग लगी चुकी है। रिहायशी इलाकों में गैस गोदाम से लेकर अत्यंत ’वलनशील पदार्थों का काम किया जा रहा है। जिससे हजारों-लाखों लोगों की जान को खतरे में डाला जा रहा है। </p>
<p><strong>निगम ने नहीं किया कभी सर्वे</strong><br />नगर निगम के फायर अनुभाग ने अभी तक हॉस्टल व कोचिंग संस्थानों और आवासीय मल्टी स्टोरी में ही फायर सिस्टम की जांच की है। उन्हें नोटिस दिए गए लेकिन कभी इस तरह ध्यान नहीं दिया गया। जहां रिहायशी इलाकों में गोदाम संचालित हो रहे हैं। वहां भी आग से सुरक्षा के इंतजाम नहीं है। हमेशा की तरह इस बार भी फायर अनुभाग हादसा होने के बाद ही हरकत में आएगा। </p>
<p><strong>यहां इंडस्ट्रीयल एरिया में संचालित हो रहे हॉस्टल</strong><br />एक तरफ जहां रिहायशी इलाकों में व्यवसायिक गतिविधियां संचालित कर हजारों लोगों की जान जोखिम में डाली जा रही है। वहीं दूसरी तरफ रीको इंडस्ट्रीयल एरिया जो व्यवसायिक क्षेत्र है वहां हॉस्टल बनाकर आवासीय क्षेत्र बना दिए हैं। यहां भी कोचिंग स्टूडेंट व लोगों की जान को खतरे में डाला जा रहा है। हालांकि रीको इंडस्ट्रीयल एरिया स्थित कैमिकल फैक्ट्री में आग लगने की घटना हो चुके है। वहां आस-पास ही हॉस्टल भी हैं। </p>
<p><strong>फायर विभाग ने दिए नोटिस, करवाएंगे सर्वे</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण के सीएफओ राकेश व्यास ने बताया कि सिंधी कॉलोनी व बजरंग नगर में जिन गोदामों में आग लगी थी। वहां आग से सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं थे। ऐसे में सिंधी कॉलोनी निवासी दिनेश अम्बवानी व बजरंग नगर स्थित एस के फर्नीचर के मालिक को नोटिस जारी किए  हैं। उन्हें फायर सिस्टम लगाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही शहर में एसे सभी इलाकों का सर्वे किया जाएगा जहां रिहायशी इलाकों में गोदाम या व्यवसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 08 Jun 2024 17:30:01 +0530</pubDate>
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                <title>बिल्डिंग पर करोड़ों खर्च, अग्निसुरक्षा पर नहीं</title>
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                        <![CDATA[हॉस्टल मालिकों की लापरवाही से बच्चों की जान जोखिम में।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/crores-spent-on-building--not-on-fire-safety/article-75213"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/building-pr-croro-khrch,-agnisuraksha-pr-nhi...kota-news-16-04-2024-(1).jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में पहले जहां एक या दो मंजिल के मकान ही अधिक बनते थे। वहीं अब महानगरों की तर्ज पर कोटा में भी बहुमंजिला इमारतें बनने लगी है। इनकी संख्या भी लगातार बढ़ रही है। हालत यह है कि बिल्डिंग बनाने पर तो लोग लाखों-करोड़ों रुपए खर्च कर रहे हैं जबकि उनमें आग से सुरक्षा पर एक रुपए भी खर्च नहीं कर रहे। नतीजा हॉस्टल मालिकों की लापरवाही का खामियाजा बेकसूर बच्चों को जान जोखिम में डालकर भुगतने को मजबूर होना पड़ रहा है। कुन्हाड़ी थाना क्षेत्र के लक्ष्मण विहार प्रथम स्थित आदर्श रेजीडेंसी में रविवार को सुबह अचानक आग लग गई। आग इतनी अधिक थी कि उस हॉस्टल में रहने वाले बच्चों को दो से तीन मंजिल से कूदकर अपनी जान बचानी पड़ी। जिससे उनमें से कई के पैर में फ्रेक्चर हो गया तो किसी के हाथ-पैर जल गए। गनीमत रही कि कोई जन हानि नहीं हुई। हादसे के बाद जांच की तो पता चला कि उस हॉस्टल में फायर सिस्टम तो लगा हुआ ही नहीं है। 5 मंजिला हॉस्टल के 75 कमरों में से 61 कमरों में बच्चे रह रहे थे उस हॉस्टल में अवैध रूप  से ट्रांसफार्मर भी लगा हुआ था। हॉस्टल मालिक व संचालक स्वयं को प्रशासन से बड़ा मान रहे थे। यही कारण है कि निगम के फायर अनुभाग द्वारा दो बार नोटिस देने के बाद भी उन पर कोई असर नहीं हुआ। नतीजा उसमें रहने वाले बच्चों को भुगतना पड़ा। हालांकि हादसे के बाद निगम व पुलिस प्रशासन चेता और उस हॉस्टल को सीज कर दिया। साथ ही संचालक व लीज धारक के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कर लिया। शहर में पूर्व में भी कई हॉस्टलों में आग लग चुकी है।  जानकारों के अनुसार बहुमंजिला इमारतें बनाने में लाखों-करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं।  जबकि उनमें आग से सुरक्षा के नाम पर एक रुपए भी खर्च नहीं किया जा रहा। यहां तक कि दिखावे के तौर पर कई जगह छोटे फायर उपकरण लगाकर इतिश्री कर ली जाती है। फायर अनुभाग के अधिकारियों के अनुसार मल्टी स्टोरी बिल्डिंग में निमाण की कुल लागत का मात्र एक फीसदी से भी कम खर्चा फायर सिस्टम लगाने पर आता है। यह खर्चा मात्र 15 से 50 हजार रुपए आता है। लेकिन उससे वहां रहने वाले लोगों का जीवन सुरक्षित रहता है। </p>
<p><strong>बिना यूडी टैक्स फायर एनओसी नहीं</strong><br />स्वायत्त शासन विभाग द्वारा फायर एनओसी के लिए यूडी टैक्स जमा करवाना आवश्यक किया हुआ है। लेकिन अधिकतर हॉस्टल संचालक यूडी टैक्स जमा ही नहीं करवाते हैं। ऐसे में वे फायर एनओसी के लिए आवेदन तो कर देते हैं लेकिन यूडी टैक्स जमा नहीं होने से कारण उन्हें एनओसी नहीं मिल पाती। जबकि संचालक आवेदन करने को ही एनओसी मानकर चलता रहता है। प्रशासन भी हादसे का इंतजार करता है। </p>
<p><strong>एक दिन में तीन सीज किए तो मची भगदड़</strong><br />इधर एक हॉस्टल में आग लगने की घटना होने पर जब निगम द्वारा उसे सीज किया गया। उसके साथ ही लैंडमार्क सिटी को दो अन्य हॉस्टल सीज किए तो मालक व संचालकों में भगदड़ मच गई। फायर अधिकारियों के अनुसार सोमवार को उत्तर व दक्षिण निगम में करीब 50 से 100 फोन आ गए। जिसमें फायर सिस्टम व एनओसी लेने के सबंध में जानकारी ली गई। </p>
<p><strong>ऐसे सैकड़ों हॉस्टलों को नोटिस</strong><br />शहर में आदर्श रेजीडेंसी एक मात्र हॉस्टल नहीं है जिसमें न तो फायर सिस्टम है और न ही फायर एनओसी ले रखी है। निगम के फायर अनुभाग द्वारा सर्वे में फायर सिस्टम व एनओसी नहीं लेने वाले करीब 2300 से अधिक भवन मालिकों जिनमें 90 फीसदी हॉस्टल है उन्हें नोटिस दे रखे हैं। उसके बाद भी उन पर कोई असर नहीं हो रहा है। नगर निगम कोटा उत्तर क्षेत्र में 1100 और कोटा दक्षिण क्षेत्र में 1200 बिल्डिग को नोटिस दिए हुए हैं।  नए कोटा के जवाहर नगरव डिस्ट्रिक्ट सेंटर, राजीव गांधी नगर, तलवंडी, इंद्र विहार, कम्पीटिशन कॉलोनी, दादाबाड़ी, विज्ञान नगर, लैंडमार्क कुन्हाड़ी, लक्ष्मण विहार, नया नोहरा, कोरल पार्क समेत हर क्षेत्र में हॉस्टलों की भरमार हो गई है। यहां तक कि लोगों ने अपने घरों को सीमित कर लिया है। उसके स्थान पर हॉस्टल व पीजी में कंवर्ट कर कमाई का जरिया तो बना लिया। 15 से 18 हजार रुपए महीना बच्चों से वसूल किया जा रहा है। लेकिन आग से सुरक्षा के नाम पर एक रुपए भी खर्चा नहीं किया जा रहा। </p>
<p><strong>सीएफओ राकेश व्यास से सवाल-जवाब</strong><br /><strong>- सवाल- </strong>शहर के हॉस्टलों में आए दिन आग लगने की घटनाएं हो रही हैं फिर भी उनके खिलाफ ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हो रही।<br /><strong>व्यास-</strong> समय-समय पर हॉस्टलों व मल्टी स्टोरी  का सर्वे करते हैं। कमियां पाए जाने पर नोटिस दे रहे हैं। दोनों निगम क्षेत्र में 2300 नोटिस दे  रखे हैं। <br /><strong>सवाल- </strong>केवल नोटिस देना ही पर्याप्त है। नोटिस के बाद भी व्यवस्था नहीं सुधर रही।<br /><strong>व्यास-</strong> कमियां पाई जाने पर नियमानुसार पहले नोटिस दिए जाने का प्रावधान है। उसके बाद भी सुधार नहीं होने पर उस हॉस्टल व बिल्डिंग को सीज किया जाता है। <br /><strong>सवाल-</strong> हर बार हादसा होने के बाद ही कार्रवाई क्यों की जाती है।<br /><strong>व्यास-</strong> निगम व प्रशासन का प्रयास रहता है कि हर मल्टी में फायर सिस्टम हो। ऐसा नहीं करने वालों के खिलाफ पूर्व में भी कई बार सीजिंग की कार्रवाई की है। आग वाले के साथ ही दो अन्य हॉस्टल भी सीज किए हैं। इस तरह की कार्रवाई समय-समय पर करते रहते हैं। <br /><strong>सवाल- </strong>क्या भविष्य में भी  कार्रवाई के लिए इसी तरह की घटनाएं होने का इंतजार किया जाएगा। <br /><strong>व्यास-</strong> निगम का फायर अनुभाग पूरे साल काम करता है। बीच-बीच में चुनाव व अन्य आवश्यक काम होने से उनमें लगना पड़ता है। हादसे से पहले ही कार्रवाई की जाएगी। फायर टीम की ओर से शहर में सर्वे का काम किया जा रहा है। <br /><strong>सवाल- </strong>फायर सिस्टम व एनओसी नहीं लेने का कारण क्या है<br /><strong>व्यास-</strong> फायर सिस्टम बिल्ड़िग के निर्माण के हिसाब से लगता है। तीन-चार मंजिल से अधिक निर्माण होने पर फायर सिस्टम आवश्यक होता है। फायर एनओसी के लिए यूडी टैक्स जमा होना आवश्यक है। अधिकतर लोग टैक्स जमा नहीं करवा पाते। जिससे उन्हें एनओसी नहीं मिल पाती।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Apr 2024 16:33:26 +0530</pubDate>
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                <title>बच्चों के जीवन से खिलवाड़ तो हॉस्टल होंगे सीज</title>
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                        <![CDATA[कोटा के विभिन्न क्षेत्रों में छोटे-बड़े करीब 4 से 5 हजार हॉस्टल हैं। अधिकतर बच्चे हॉस्टलों में ही किराए से रह रहे हैं। लेकिन सुरक्षा के नाम पर अधिकतर हॉस्टलों में फायर उपकरण तक लगे हुए नहीं हैं। जिससे कभी की आग जनित घटना होने पर उन हॉस्टलों में रहने वाले बच्चों का जीवन खतरे में पड़ सकता है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/playing-with-the-lives-of-children--hostels-will-be-seized/article-32833"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-12/bachcho-k-jeevan-se-khilwad-to-hostel-honge-seez...kota-news..20.12.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शिक्षा नगरी कोटा में संचालित हॉस्टलों में अब फायर सेफ्टी को गभ्मीरता से नहीं लेने वालों के खिलाफ सख्ती की जाएगी। हजारों बच्चों के जीवन से हो रहे खिलवाड़ को रोकने के लिए नगर निगम का फायर अनुभाग ऐसे हॉस्टलों को शीघ्र ही सीज करेगा। शिक्षा नगरी के साथ ही कोटा स्मार्ट सिटी भी बन रहा है। ऐसे में शहर का विकास व विस्तार हो रहा है। शिक्षा की छोटी काशी के नाम से विख्यात कोटा में वर्तमान में करीब दो लाख से अधिक बच्चे देशभर से आकर यहां रह रहे हैं और मेडिकल व इंजीनियरिंग की कोचिंग कर रहे हैं। अधिकतर बच्चे हॉस्टलों में ही किराए से रह रहे हैं। हजारों रुपए महीना किराया लेने वाले हॉस्टलों में सुविधा के नाम पर कमरों को एसी तो बना दिया गया है। उनमें अटैच लैट-बाथ भी दिए गए हैं। आलमारी और मेज कुर्सी के साथ ही पलंग भी आराम दायक हैं। साथ ही हॉस्टल में ही मैस की सुविधा भी दी गई है। लेकिन सुरक्षा के नाम पर अधिकतर हॉस्टलों में फायर उपकरण तक लगे हुए नहीं हैं। जिससे कभी की आग जनित घटना होने पर उन हॉस्टलों में रहने वाले बच्चों का जीवन खतरे में पड़ सकता है। </p>
<p><strong>कोटा में करीब 4 हजार हॉस्टल</strong><br />कोटा के विभिन्न क्षेत्रों में छोटे-बड़े करीब 4 से 5 हजार हॉस्टल हैं। कोटा व्यापार महासंघ के महासचिव अशोक माहेश्वरी ने बताया कि कोटा की आर्थिक स्थिति कोचिग व हॉस्टलों पर अधिक निर्भर है। ऐसे में यहां आने वाले बच्चों की सुरक्षा शहर वासियों की पहली प्राथमिकता है। हॉस्टलों में आग से सुरक्षा के इंतजाम हैं तो लेकिन पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए सभी हॉस्टल संचालकों व एसोसिएशनों से समझाइश कर उन्हें फायर उपकरण लगवाने के लिए प्रेरित करेंगे। </p>
<p><strong>लगातार हो रही घटनाएं</strong><br />शहर में राजीव गांधी नगर, जवाहर नगर, तलवंडी, दादाबाड़ी, महावीर नगर, इंद्र विहार व कुन्हाड़ी स्थित लैंड मार्क सिटी, बारां रोड नया नोहरा स्थित कोरल पार्क और बूंदी रोड समेत कई जगह पर बहुमंजिला हॉस्टल बने हुए हैं। जिनमें से आए दिन किसी न किसी जगह पर हॉस्टल में आग जनित घटनाएं हो रही हैं। गत दिनों लैंड मार्क सिटी स्थित गर्ल्स हॉस्टल में शॉर्ट सर्किट से आग लग गई थी। आग लगने के बाद वहां रहने वाली छात्राओं में हडकम्प मच गया था। निगम की दमकलों ने समय पर पहुंचकर आग पर तो काबू पा लिया। लेकिन जांच करने पर वहां आग से सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम तक नहीं पाए गए। इस पर निगम के फायर अनुभाग ने उसी सीज कर दिया। इसी तरह की घटनाएं जवाहर नगर, तलवंडी व कोरल पार्क के हॉस्टलों में भी हो चुकी हैं। </p>
<p>कोटा उत्तर व दक्षिण निगम में करीब 1500 सौ बहुमंजिला इमारतों को नोटिस दिए हुए हैं। जिनमें आग से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। बार-बार नोटिस देने के बाद भी उसे गम्भीेरता से नहीं लिया जा रहा है। ऐसे में जिला कलक्टर के निर्देश पर हॉस्टलों के खिलाफ सख्ती की जाएग़ी। हॉस्टलों को सीज करने की कार्रवाई की जाएग़ी। उससे पहले हॉस्टल एसोसिएशन वालों से मिलकर समझाइश का प्रयास करेंगे। यदि फिर भी फायर सेफ्टी पर गम्भीरता नहीं रखने वाले हॉस्टलं को सीज किया जाएगा। <br /><strong>- राकेश व्यास, सीएफओ नगर निगम कोटा दक्षिण </strong></p>
<p>हॉस्टलों में बच्चे रहते हैं। जिनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी हम सभी की प्राथमिकता है। हॉस्टलों में आग से सुरक्षा के इंतजाम होने चाहिए। निगम के फायर अनुभाग को निर्देश दिए गए हैं कि लापरवाही बरतने व फायर से सुरक्षा की कमियों वाले हॉस्टलों के खिलाफ सख्ती की जाए। <br /><strong>- ओ.पी. बुनकर, जिला कलक्टर</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 20 Dec 2022 16:45:58 +0530</pubDate>
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                <title>बहुमंजिला इमारतों में लोगों का जीवन संकट में </title>
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                        <![CDATA[नगर निगम कोटा दक्षिण क्षेत्र में सबसे अधिक बहुमंजिला इमारतों में हॉस्टल संचालित हो रहे हैं। निगम के फायर अनुभाग द्वारा जारी किए गए नोटिसों में से सबसे अधिक नोटिस हॉस्टल संचालकों को दिए गए हैं। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/people-s-lives-in-danger-in-multi-storey-buildings/article-29691"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/661.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में विकास व विस्तार के साथ ही बहुमंजिला इमारतों का निर्माण भी किया जा रहा है। जिनमें आवासीय के साथ ही व्यवसायिक इमारतें भी शामिल हैं। लेकिन उनमें से अधिकतर इमारतों में फायर सेफ्टी का कोई इंतजाम तक नहीं है। हॉस्टल संचालकों से लेकर कोचिंग संचालक तक फायर सेफ्टी के प्रति ग्म्भीर नहीं हैं।  शहर में बहुमंजिला इमारतों का निर्माण लगातार होता जा रहा है। शहर का कोई इलाका ऐसा नहीं हैं जहां बहुमंजिला इमारतें नहीं हों। हालत यह है कि हर क्षेत्र में अब तो बहुमंजिला इमारतों की बाढ़ से आ गई है। नए कोटा का राजीव गांधी नगर हो या इंद्र विहार, तलवंडी हो या जवाहर नगर, दादाबाड़ी हो या बसंत विहार, बारां रोड पर बोरखेड़ा क्षेत्र हो या नया नोहरा, कोरल पार्क, पुराने शहर का बूंदी रोड हो या कुन्हाड़ी, लैंडमार्क सिटी हो या कृष्णा नगर हर क्षेत्र में बहुमंजिला इमारतें ही इमारतें नजर आने लगी हैं। इन इमारतों को बनाने में करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। जिनमें हजारों लोग रह रहे हैं। व्यवसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। हॉस्टलं में हजारों विद्यार्थी रह रहे हैं। कोचिंग में हजारों विद्यार्थी घंटों रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। उसी तरह से होटलों से लेकर अस्पताल तक  बहुमंजिला बन चुके हैं। लेकिन उनमें से अधिकतर में फायर से सुरक्षा के इंतजाम तक नहीं हैं। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि नगर निगम कोटा दक्षिण क्षेत्र में ही दो साल में मात्र 177 इमारतों में फायर एनओसी जाी की गई व उनका नवीनीकरण किया गया। जबकि  फायर के सुरक्षा के इंतजाम नहीं होने पर निगम के फायर अनुभाग द्वारा करीब एक हजार से अधिक लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं। </p>
<p><strong>सबसे अधिक नोटिस हॉस्टल संचालकों को</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण क्षेत्र में सबसे अधिक बहुमंजिला इमारतों में हॉस्टल संचालित हो रहे हैं। निगम के फायर अनुभाग द्वारा जारी किए गए नोटिसों में से सबसे अधिक नोटिस हॉस्टल संचालकों को दिए गए हैं। जानकारी के अनुसार हालत यह है कि  हॉस्टल संचालक हो या कोचिंग संस्थान संचालक निगम के नोटिसों में से मात्र 5 फीसदी ने भी निगम में जवाब तक पेश नहीं किया है।  </p>
<p><strong>177 को जारी की फायर एनओसी</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण द्वारा बोर्ड का गठन होने के बाद दो साल में मात्र 177 फायर एनओसी जारी की गई है। जिनमें पूर्व में जारी फायर एनओसी का नवीनीकरण भी शामिल है।  </p>
<p><strong>नियमों की नहीं हो रही पालना</strong><br />फायर एनओसी के लिए नियमों की पालना नहीं की जा रही है। जिसमें पर्याप्त जगह का होना, सैट बैक होना, प्रवेश व निकास की अलग-अलग व्यवस्था होना, पार्किंग की सुविधा होना अरुर आपात काल में बाहर निकलने की व्यवस्था होना समेत कई मापदंड हैं। जिनकी बहुमंजिला इमारतों में पालना तक नहीं हो रही है। नगर निगम का फायर अनुभाग भी कहीं बड़ा हादसा होने के बाद ही हरकत में आता है। </p>
<p><strong>इस तरह की हैं कमियां</strong><br />निगम सूत्रों के अनुसार अधिकतर बहुमंजिला  इमारतों में प्रवेश व निकास का एक ही रास्ता है। दोनों के लिए अलग-अलग रास्ता नहीं होने से आपातकाल में लोगों को निकलने का रास्ता तक नहीं है। हॉस्टलों में न तो सैट बैक छोड़ा हुआ है और न ही खुली जगह। यहां तक  कि ट्रेन के डिब्बों की तरह से गैलेरी नुमा हॉस्टलों में छोट-छोटे कमरे बने हुए हैं। एसी कक्ष होने से उनमें वेंटीलेटर तक की सुविधा नहीं है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />नगर निगम के फायर अनुभाग द्वारा करीब एक हजार बहुमंजिला इमारतों के संचालकों को नोटिस दिए गए हैं। जिनमें सबसे अधिक हॉसटल हैं। अभी तक दिए गए नोटिसों में से मात्र 5 फीसदी ने भी नोटिसों का जवाब नहीं दिया है। साथ ही फायर से सुरक्षा के इंतजाम भी अधिकतर में नहीं है। निगम ने दो साल में बहुत कम इमारतों को फायर एनओसी जारी की है। अब फायर अनुभाग द्वारा इसी माह नोटिस दिए गए इमारतों पर सख्ती की जाएगी। <br /><strong>- दीपक राजौरा, सीएफओ, नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 15 Nov 2022 14:35:32 +0530</pubDate>
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