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                <title>superstition - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>superstition RSS Feed</description>
                
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                <title>सांप के जहर से ज्यादा जहरीला अंधविश्वास, झाड़ फूंक में गंवा रहे अपनों की जान</title>
                                    <description><![CDATA[मंडाना और स्टेशन क्षेत्र में 2 मासूमों की हो चुकी मौत, परिवार बच्चों को डॉक्टर की बजाय ले गए झाड़-फूंक कराने ।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/superstition-proves-deadlier-than-snake-venom--lives-lost-while-seeking-faith-healing/article-166408"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/111200-x-600-px)-(6)23.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। तकनीक और विज्ञान के इस युग में भी अंधविश्वास सांप के जहर से भी ज्यादा खतरनाक साबित हो रहा है। लोग अब भी झाड़फूंक पर आंख बंदकर विश्वास कर जिंदगी को मौत की ओर धकेल रहे हैं। इसका प्रत्यक्ष उदारहण मंगलवार को मंडाना क्षेत्र में देखने को मिला। यहां 13 साल की बच्ची को जहरीले सांप ने डंस लिया था, परिजन अस्पताल ले जाने के बजाए देवी-देवताओं के स्थान पर ले गए। इलाज में देरी से मासूम की हालत लगातार बिगड़ती चली गई, बाद में गंभीर अवस्था में निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। अंधविश्वास का यह पहला मामला नहीं है, इससे पूर्व भी झाड़-फूंक के चक्कर में जान गंवाने के कई मामले सामने आ चुके हैं।</p>
<p><strong>केस-1 : अस्पताल पहुंचने में साढ़े तीन घंटे बर्बाद</strong><br />21सितम्बर 2026 : मंडाना निवासी कक्षा 6 की छात्रा अनसुईया सोमवार शाम 7 बजे करीब घर से से बाजार दीपक लेने गई थी, इसी दौरान रास्ते में जहरीले सांप ने उसे डंस लिया। परिजन उसे तुरंत अस्पताल ले जाने के बजाय देवी-देवताओं के स्थान पर लेकर गए। वहां काफी समय तक उसे रखा गया, लेकिन हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। रात 10.30 बजे गंभीर अवस्था में परिजन निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, तब तक काफी देर हो चुकी थी, डॉक्टरों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया।</p>
<p><strong>केस-2 : झाड़फूंक में 2 घंटे गवांए, शरीर में फैला जहर</strong><br />21 जून 2026 : रेलवे कॉलोनी टापरी इलाके में सर्पदंश से 2 साल के मासूम बच्चे कालू की मौत हो गई थी। सांप के डंसने के बाद परिजन उसे अस्पताल ले जाने के बजाय दो घंटे तक झाड़-फूंक करवाते रहे, जिससे जहर पूरे शरीर में फैल गया। हालत बिगड़ने पर उसे कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान मासूम की मौत हो गई।</p>
<p><strong>एक्सपर्ट्स व्यू </strong><br /><strong>विज्ञान से समझिए, झाड़ फूंक का भ्रम कैसे फैलता है?</strong><br />अक्सर लोग तर्क देते हैं कि उक्त व्यक्ति तांत्रिक की झाड़-फूंक से ठीक हो गया। असल में, इसके पीछे का सच विज्ञान की रोशनी में इस तरह समझाता जा सकता है।<br />-बिना जहर वाले सांप : भारत में पाए जाने वाले लगभग 90% सांप जहरीले नहीं होते। यदि वे डंस लें, तो इंसान बिना किसी इलाज के भी बच जाता है। लेकिन, तांत्रिक इसका श्रेय अपनी झाड़-फूंक को दे देते हैं।<br />-ड्राई बाइट : कई बार जहरीले सांप (जैसे कोबरा या करैत) सिर्फ डराने के लिए काटते हैं और शरीर में जहर नहीं छोड़ते, यदि छोड़ते भी हैं तो सिर्फ लगभग 0.1 एमएल। ऐसे मामलों में भी मरीज बच जाते हैं, जिससे लोगों का अंधविश्वास और गहरा हो जाता है।<br />-असली खतरा: जब कोई जहरीला सांप एग्रेसिव मोड़ में होता है, तब वह पूरी ताकत से बाइट करता है। ऐसी स्थिति में वह औसतन 1 से 3 एमएल तक जहर छोड़ देता है, तब झाड़-फूंक में गंवाया गया एक-एक मिनट मरीज को मौत के करीब ले जाता है।<br />-8 से 10 एमएल जहर बनाने में लगते तीन माह : जहरीले सांप में औसतन 8 से 10 एमएल वेनम होता है। जिसे बनाने में उसे करीब 3 माह का समय लगता है। इसका उपयोग वह भोजन के लिए शिकार करने में उपयोग करता है। वह चूहे का शिकार करने के लिए भी 0.1 एमएल ही जहर छोड़ता है, जिससे चूहा बेहोशी की स्थिति में आ जाता है और वह उसे निगल जाता है। सांप को यह सेंस होता है कि उसके पास कितना वेनम स्टोक है और कितनी मात्रा में उसका उपयोग करना है।<br /><strong>- अनुराग भटनागर, डीएफओ वन्यजीव-उदयपुर</strong></p>
<p><strong>सर्प दंश पर इन बातों का रखें ध्यान</strong><br />मेडिकल कॉलेज अस्पताल के सीनियर फिजिशियन डॉ. पंकज कुमार जैन ने सर्पदंश पर बरती जाने वाली सावधानियोें के बारे में बताया, जो इस प्रकार है।<br />-सर्प दंश के मरीज को जितना जल्दी हो सके, अस्पताल ले जाएं ताकि सांप के जहर का शरीर के अंगों पर प्रभाव न पड़े।<br />-सभी तरह के सांपों के लिए दवा ( एंटी स्नैक विनम) एक ही होती है, जिसे जितना जल्दी लगा सके उतना ही अधिक जान बचने के चांस होते हैं।<br />-झाड़-फूंक में समय न गंवाएं: ओझा, तांत्रिक या झाड़-फूंक के चक्कर में बिल्कुल न पड़ें, समय बर्बाद होने से मरीज की जान जा सकती है।</p>
<p><strong>प्राथमिक उपचार</strong><br />तंग चीजें हटाएं: सर्प दंश के बाद सूजन आने से पहले पीड़ित की अंगूठी, घड़ी, कंगन या तंग कपड़े तुरंत उतार दें।<br />चीरा न लगाएं: काटे गए स्थान पर ब्लेड या चाकू से चीरा लगाने की कोशिश बिल्कुल न करें।<br />जहर न चूसें: मुंह से जहर चूसने का प्रयास न करें, इससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।<br />कसकर पट्टी न बांधें: खून के बहाव को पूरी तरह रोकने के लिए बहुत ज्यादा कसकर कोई चीज न बांधें।<br />बर्फ न लगाएं: घाव पर बर्फ या ठंडा पानी न लगाएं।</p>
<p><strong>अंधविश्वास डिग्री के साथ चलता रहेगा</strong><br />आधुनिक जीवन ने डर और अनिश्चिता बढ़ा दी है। जब भय का मनोविज्ञान बढ़ने लगता है तब तर्क करने और निर्णय लेने की क्षमता कम होने लगती है। ऐसे में मनुष्य शॉर्टकट ढूंढता है और तांत्रिकों का ग्राहक बनता है। जबकि, शिक्षा की मुख्य भूमिका, लोगो में आलोचनात्मक चेतना और वैज्ञानिक दृष्टिकोण उत्पन्न करना है। जिसके कारण ही सवाल पूछने की हिम्मत करते हैं, जब तक ऐसी शिक्षा नहीं होगी तब तक अंधविश्वास डिग्री के साथ-साथ चलता रहेगा।<br /><strong>-ज्योति सिडाना, समाजशास्त्री जेडीबी आर्ट्स कॉलेज</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 23 Sep 2026 15:25:18 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>रहस्यमयी बीमारी की चपेट में झारखंड: एक ही परिवार के 4 लोगों की मौत, 2 की हालत गंभीर; रिम्स में मेडिकल बोर्ड गठित</title>
                                    <description><![CDATA[झारखंड के पलामू जिले के सिक्का गांव में कथित तौर पर दूषित सरसों तेल में ओझा की भभूत मिलाकर खाने से एक ही परिवार के 4 सदस्यों की मौत हो गई। चौथी पीड़ित श्वेता देवी ने रिम्स (RIMS) रांची में दम तोड़ा। डॉक्टरों को 'एपिडेमिक ड्रॉप्सी' की आशंका है, जबकि दो अन्य सदस्य गंभीर हालत में वेंटिलेटर पर हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/jharkhand-in-the-grip-of-mysterious-disease-4-people-of/article-158356"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/12200-x-600-px)-(6).png" alt=""></a><br /><p>रांची। झारखंड के पलामू जिले के पड़वा प्रखंड के सिक्का गांव में रहस्यमयी बीमारी से पिछले 10 दिनों में परिवार के चार सदस्यों की मौत हो चुकी है। शनिवार देर शाम रांची के रिम्स में इलाज के दौरान कुलदीप महतो की पुत्रवधू श्वेता देवी (28 वर्ष) ने दम तोड़ दिया। वह परिवार की चौथी सदस्य हैं, जिनकी इस बीमारी से मौत हुई है। फिलहाल परिवार के दो अन्य सदस्य – लाखो उर्फ लाखी देवी (52 वर्ष) और नकुल महतो (20 वर्ष) – रिम्स के क्रिटिकल केयर यूनिट में भर्ती हैं। डॉक्टरों के अनुसार दोनों की हालत गंभीर है और उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखकर इलाज किया जा रहा है।</p>
<p>प्रारंभिक लक्षणों के आधार पर एपिडेमिक ड्रॉप्सी (दूषित सरसों तेल के सेवन से होने वाली बीमारी) की आशंका जताई जा रही है, हालांकि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही बीमारी के वास्तविक कारणों की पुष्टि हो सकेगी। रिम्स प्रबंधन आज श्वेता देवी के शव का पोस्टमार्टम कराने का निर्णय लिया जिसके लिए आज शव को कराया जाएगा। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य जांच के बाद ही मौत के सही कारणों का खुलासा हो सकेगा।</p>
<p>ग्रामीणों के अनुसार प्रभावित परिवार ओझा-गुनी पर विश्वास करता था। करीब छह माह पहले परिवार का एक सदस्य बीमार पड़ा था, जिसके बाद वे एक ओझा के पास गए। ओझा ने उन्हें भभूत देकर कहा था कि इसे खाने से बीमारी ठीक हो जाएगी। इसके बाद परिवार के सदस्य घर में रखे सरसों तेल में भभूत मिलाकर उसका सेवन करते रहे। बताया जा रहा है कि कुलदीप महतो ने कुछ दिन पहले ही स्थानीय मिल से सरसों का तेल पेरवाया था।</p>
<p>इस बीच राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर रविवार को रिम्स पहुंचे और पीड़ित परिवार के परिजनों से मुलाकात कर पूरी जानकारी ली। उन्होंने रिम्स निदेशक से बातचीत कर मामले की गंभीरता को देखते हुए मेडिकल बोर्ड गठित करने का निर्देश दिया। मंत्री ने कहा कि बीमारी के कारणों की वैज्ञानिक तरीके से जांच कराई जाए और भर्ती मरीजों का बेहतर इलाज सुनिश्चित किया जाए। इस परिवार में सबसे पहले 19 जून को कुलदीप महतो की, 20 जून को उनकी पुत्री बबीता कुमारी और 26 जून को नाबालिग पुत्री इंदु कुमारी की मौत हुई थी। इसके बाद शनिवार को श्वेता देवी की भी जान चली गई।</p>
<p>स्थानीय चिकित्सकों का कहना है कि पहले हुई मौतों के पोस्टमार्टम की रिपोर्ट अब तक नहीं मिलने के कारण बीमारी की सही वजह का पता नहीं चल पाया है। मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एमएमसीएच) में फॉरेंसिक जांच की सुविधा नहीं होने से जांच प्रभावित हुई। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. श्रवण कुमार मेहता ने बताया कि काफी प्रयास के बाद परिवार के गंभीर मरीजों को रिम्स भेजा गया, क्योंकि वे पहले अस्पताल में इलाज कराने से कतरा रहे थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 12:16:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अंधविश्वास के चलते महिला फैलाई महिला के हत्या की झूठी खबर, आरोपी गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[धौलपुर के कंचनपुर में अंधविश्वास का अनोखा मामला सामने आया है। सिर पर कौआ बैठने को अपशकुन मानकर अनिष्ट टालने के लिए बेटी ने अपनी मां की हत्या की झूठी अफवाह फैला दी। शिकायत पर जब पुलिस गांव पहुंची, तो महिला चारपाई पर जीवित बैठी मिली। पुलिस अब झूठी सूचना देने वालों पर कार्रवाई कर रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bharatpur/accused-arrested-for-spreading-false-news-of-womans-murder-due/article-154168"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1200-x-60-px)-(youtube-thumbnail)-1.png" alt=""></a><br /><p>भरतपुर। राजस्थान में धौलपुर के कंचनपुर थाना क्षेत्र में अब्दुलपुर गांव में अंधविश्वास के चलते कथित अपशकुन से बचने के लिए एक महिला की उसके पति द्वारा हत्या कर दिए जाने की झूठी खबर से पुलिस को भागदौड़ करनी पड़ गई। पुलिस सूत्रों ने रविवार को बताया कि अब्दलपुर गांव निवासी आशा देवी के सिर पर कौआ बैठने को परिवार ने अपशकुन मानकर अनिष्ट टालने के लिए आशा देवी की एक बेटी शिवानी ने अपनी बड़ी बहन रजनी एवं रिश्तेदारों को आशा देवी की उसके पति द्वारा हत्या कर देने की झूठी खबर दे दी।</p>
<p>?इस खबर के बाद रजनी चौहान अपनी सास के साथ थाने पहुंची और प्राथमिकी दर्ज कराई। जानकारी होने पर पुलिस भी तुरंत अब्दलपुर गांव पहुंची तो देखा कि जिस महिला आशा देवी की हत्या की सूचना दी गई थी वह घर में चारपाई पर बैठी थीं। पुलिस अब झूठी खबर फैलाने वाली महिला के खिलाफ कार्रवाई पर विचार कर रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>भरतपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 18:40:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अंधविश्वास की हद: बांसवाड़ा से आए लोग ट्रोमा सेंटर से ले गए ‘बच्चे की आत्मा’! </title>
                                    <description><![CDATA[अंधविश्वास की पराकाष्ठा आज भी जारी है। इससे पहले भी मथुरादास माथुर अस्पताल में इस तरह की घटना हुई है। पहले भी सुनने को मिला है कि कुछ लोग आत्मा लेने के लिए अस्पताल पहुंचे हैं और यहां टोना-टोटका किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jodhpur/the-extent-of-superstition-people-from-banswara-took-away-the/article-29896"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/q-76.jpg" alt=""></a><br /><p>जोधपुर। शहर के मथुरादास माथुर अस्पताल में अचानक कुछ लोग पहुंचे और टोना टोटका करने लगे। वहां खड़े लोगों ने उनसे पूछा तो उन्होंने कहा कि अस्पताल के ट्रोमा सेंटर के बाहर हम एक आत्मा का इंतजार कर रहे हैं। कुछ ही देर में एक परिजन अस्पताल के पुराने ट्रोमा सेंटर के अंदर से आता है और कहता है कि वह आत्मा को ले आया है। फिर दिया धूप होता है और नारियल चढ़ाया जाता है। फिर लोग वहां से चले जाते हैं।अब जरा एक बार फिर से इस पूरे घटनाक्रम को समझिए। दरअसल बांसवाड़ा के रहने वाले कुछ लोग मथुरादास माथुर अस्पताल पहुंचे और यहां टोना-टोटका किया। उन्होंने बताया कि उनके परिवार के एक बच्चे की मौत अस्पताल में इलाज के बीच हो गई थी और उस बच्चे की आत्मा ने बांसवाड़ा में परिजनों के शरीर में आकर उन्हें कहा कि उसे अपने घर लाया जाए। वह परेशान है... तब उसकी मुक्ति होगी। उसके बाद परिजन यहां पहुंच गए और टोना-टोटका किया और फिर कहने लगे कि आत्मा अब उनके पास आ गई है और यहां से चल दिए। इस बीच बड़ी संख्या में लोग तमाशबीन बनकर उन्हें देखते रहे। ऐसा नहीं है कि यहां से पुलिस की आवाजाही भी नहीं रहती, हर वक्त पुलिस और होमगार्ड के जवानों के पहरे में रहने वाले मथुरादास माथुर अस्पताल में उन्हें रोकने और ठोकने वाला कोई नहीं था।<br /><br /><strong>पहले भी आत्मा को लेने आए हैं लोग</strong><br />अंधविश्वास की पराकाष्ठा आज भी जारी है। इससे पहले भी मथुरादास माथुर अस्पताल में इस तरह की घटना हुई है। पहले भी सुनने को मिला है कि कुछ लोग आत्मा लेने के लिए अस्पताल पहुंचे हैं और यहां टोना-टोटका किया है।<br /><br />(दैनिक नवज्योति ऐसे किसी जादू टोने और टोटका में विश्वास नहीं रखता है और ना ही इसकी पुष्टि करता है। यह खबर जो घटना घटी उसी पर आधारित है। सं.)</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जोधपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Nov 2022 11:13:43 +0530</pubDate>
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