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                <title>solar system - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>8.87 लाख खर्च, फिर भी बंद पड़ा कनवास सीएचसी का सोलर सिस्टम</title>
                                    <description><![CDATA[बिजली गुल होते ही ठप हो जाता है कामकाज, मरीजों को उठानी पड़ रही परेशानी।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/solar-system-at-kanwas-chc-remains-non-functional-despite-8-87-lakh-expenditure/article-157738"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/1200-x-600-px)-(1)2.png" alt=""></a><br /><p>कनवास। कनवास स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में लाखों को रुपए की लागत से स्थापित सोलर  सिस्टम वर्षों बाद भी बंद पड़ा है। विधायक कोष योजना के तहत वर्ष 2022-23 में सोलर पैनल, इन्वर्टर, ने बैटरी एवं अन्य उपकरण लगाने के । लिए 10 लाख रुपए स्वीकृत किए गए थे। सूचना पट्ट के अनुसार इस कार्य पर 8 लाख 87 हजार 640 1 रुपए खर्च किए जा चुके हैं तथा कार्य म पूर्ण भी दर्शाया गया है। लेकिन  वर्तमान में पूरा सोलर सिस्टम निष्क्रिय पड़ा हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि लाखों रुपए खर्च होने के बावजूद सोलर सिस्टम का कोई लाभ अस्पताल को नहीं मिल रहा। उनका कहना है कि बिजली कटौती के दौरान यदि सोलर सिस्टम चालू रहता तो मरीजों और अस्पताल स्टाफ को राहत मिलती।<br /> लेकिन इसके बंद होने से योजना का उद्देश्य अधूरा रह गया है।</p>
<p>जानकारी के अनुसार अस्पताल परिसर में लगे कुछ सोलर पैनल क्षतिग्रस्त होने की स्थिति मंल पहुंच चुके हैं। बिजली आपूर्ति बाधित होते ही अस्पताल का कामकाज प्रभावित हो जाता है। भीषण गर्मी में मरीजों को पंखों एवं अन्य सुविधाओं के अभाव में परेशानी झेलनी पड़ती है। वहीं ऑनलाइन पंजीयन, रिपोर्टिंग और कंप्यूटर आधारित कार्य भी बाधित हो जाते हैं।</p>
<p><strong>ग्रामीणों ने की जांच और कार्रवाई की मांग</strong><br />ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की जांच कराने, सोलर सिस्टम को शीघ्र चालू करवाने तथा योजना पर रखरखाव व्यवस्था की समीक्षा करने की मांग की है। उनका कहना है कि जनता के पैसे से स्थापित व्यवस्था का लाभअस्पताल और मरीजों को मिलना चाहिए।</p>
<p><strong>इमरजेंसी में बढ़ जाती है समस्या</strong><br />ग्रामीणों का कहना है कि आंधी-तूफान, प्राकृतिक आपदा या अन्य कारणों से बिजली बाधित होने पर अस्पताल में गंभीर स्थिति उत्पन्न हो जाती है। इमरजेंसी सेवाओं के दौरान बिजली कटते ही मरीजों, चिकित्सकों और कर्मचारियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे समय में सोलर सिस्टम महत्वपूर्ण बैकअप साबित हो सकता था, लेकिन इसके बंद रहने से लाखों रुपए की योजना निष्प्रभावी हो गई है।</p>
<p><strong>कई बार की शिकायत, नहीं हुआ समाधान</strong><br />सीएचसी प्रभारी डॉ. लाल सिंह मीणा ने बताया कि खराब पड़े सोलर सिस्टम को लेकर दो-तीन बार एसडीएम कार्यालय में लिखित शिकायत दी जा चुकी है, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि संबंधित ठेकेदार से भी कई बार संपर्क किया गया। वहीं ठेकेदार का कहना है कि ग्राम पंचायत की ओर से पूरा भुगतान नहीं होने के कारण वह मशीन एवं कुछ उपकरण वापस खोलकर ले गया था।</p>
<p>सीएचसी कनवास में सोलर सिस्टम बंद होने का मामला संज्ञान में आया है। संबंधित विभाग से जानकारी लेकर पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी। यदि तकनीकी या रखरखाव संबंधी कोई समस्या है तो उसे दूर कर सोलर सिस्टम को जल्द चालू करवाने के निर्देश दिए जाएंगे। साथ ही योजना के तहत हुए कार्य, भुगतान और उपकरणों की वर्तमान स्थिति की भी समीक्षा की जाएगी।<br /><strong>- बाबूलाल मीणा, एसडीएम, कनवास </strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 15:14:32 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>असर खबर का - 8 माह बाद शुरू हुआ 25 लाख का सौलर सिस्टम</title>
                                    <description><![CDATA[अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क को सालाना 6 लाख की होगी बचत
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/effect-of-news---25-lakh-solar-system-started-after-8-months/article-91014"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/427rtrer-(3)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में 25 लाख की लागत से लगा सौलर सिस्टम आखिकार 8 महीने बाद गुरुवार से शुरू हो गया है। 40 किलोवाट का यह सौलर प्रतिदिन औसत 160 यूनिट बिजली सूरज की रोशन से बनाएगा। वहीं, हर माह 4800 यूनिट बिजली बनने से बायोलॉजिकल पार्क का महीने का एक लाख का बिजली का बिल आधा रह जाएगा। बता दें, दैनिक नवज्योति ने लगातार खबर प्रकाशित कर मामले के प्रति वन्यजीव अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया था। इसके बाद अधिकारियों ने दस्तावेज से संबंधित कार्य व बकाया 10 लाख का बिजली का बिल और डिमांड राशि जमा करवाई। तब जाकर सौलर सिस्टम शुरू हो सका। </p>
<p><strong>कैम्पा मद से लगा 40 किलोवाट का सौलर</strong><br />कैम्पा योजना के तहत बायोलॉजिकल पार्क में 25 लाख की लागत से गत जनवरी माह में 40 किलोवॉट का सौलर सिस्टम लगाया गया था। फाउंडेशन लगने के बाद फरवरी में सौलर प्लेटें भी लगा दी गई थी। लेकिन वन्यजीव विभाग द्वारा जरूरी डॉक्यूमेंट संबंधित कार्य समय पर पूरे नहीं किए जाने व लेटलतीफी के कारण सौलर सिस्टम शुरू नहीं हो सका। जबकि, बायोलॉजिकल पार्क बजट की कमी से जूझता है। ऐसे में बकाया बिजली का बिल भी समय पर नहीं भर पाता। सर्दियों में बायोलॉजिकल पार्क का बिजली बिल 80 से 1 लाख प्रतिमाह तक रहता है, वहीं गर्मियों में बिल बढ़कर 1.20 से 1.50 लाख तक पहुंच जाता है। ऐसे में सौलर सिस्टम शुरू होने से पार्क का बिजली बिल आधा रह जाएगा।  </p>
<p><strong>सालाना 6 लाख की हो सकती बचत </strong><br />वन्यजीव विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में 40 किलोवाट का सौलर सिस्टम शुरू हो चुका है। जिससे सालाना 6 लाख रुपए की बचत हो सकेगी। राजस्थान रील इलेक्ट्रोनिक्स एंड इंस्टूमेंट लिमिटेड के अशोक कुमार ने बताया कि एक किलोवाट औसतन 3 से  4 यूनिट बिजली का उत्पादन करता है। ऐसे में चालीस किलोवाट सौलर से प्रतिदिन 160 यूनिट बिजली जनरेट होगी और सालभर में 58 हजार से अधिक यूनिट का उत्पादन होगा। ऐसे में एक यूनिट 10 रुपए चार्ज के हिसाब से बायोलॉजिकल पार्क को 5.84 लाख रुपए की बचत हो सकती है। हालांकि, सौलर से बिजली का उत्पादन सूरज के ताप पर निर्भर करता है। औसतन, विभाग को सालाना बिजली बिल में 6 लाख की बचत होने से 12 लाख का बिल आधा रह जाएगा। </p>
<p><strong>हर महीने 1 लाख का बिजली बिल</strong><br />अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क का बिजली बिल प्रतिमाह 1 लाख से अधिक का आता है। सर्दियों की अपेक्षा गर्मियों में खपत अधिक बढ़ जाती है। यहां मांसाहारी वन्यजीवों के 7 एनक्लोजर हैं, जिनके नाइट शेल्टरों में कूलिंग के लिए डक्टिंग चलाई जाती है। पानी की टंकी भरने सहित अन्य व्यवस्था के लिए नियमित मोटर चलाई जाती है। जिससे बिजली की खपत अधिक रहती है। ऐसे में सालाना बिजली बिल 12 लाख से अधिक पहुंच जाता है, जिसे भरने में विभाग को पसीने आ जाते हैं। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />सौलर सिस्टम शुरू हो गया है। सर्दियों में बायोलॉजिकल पार्क का बिजली का बिल 1 लाख तो गर्मियों में करीब डेढ़ लाख का आता है। ऐसे में सौलर से जनरेट होने वाली बिजली से यह बिल आधा रह जाएगा। <br /><strong>- अनुराग भटनागर, डीएफओ वन्यजीव विभाग </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Sep 2024 17:35:59 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>8 माह में बायोलॉजिकल पार्क को 39 हजार यूनिट बिजली का लगा झटका </title>
                                    <description><![CDATA[सौलर से पार्क को सालाना होगी 5.84 लाख रुपए की बचत।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/biological-park-suffered-a-loss-of-39-thousand-units-of-electricity-in-8-months/article-89352"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/solar-pump.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क को हर महीने 4800 यूनिट बिजली का नुकसान हो रहा है। लेटलतीफी के कारण अब तक 8 माह में करीब 39 हजार यूनिट बिजली का नुकसान हो चुका है। जिसकी वजह से वन्यजीव विभाग को हर माह एक लाख रुपए बिजली बिल का करंट झेलना पड़ रहा है। जबकि, पार्क में 40 किलोवाट का सौलर सिस्टम लगा है। लेकिन, बकाया बिजली बिल जमा नहीं होने से 8 माह बाद भी सौलर शुरू नहीं हो सका। हालांकि, गत जुलाई माह में ही वन्यजीव विभाग ने बकाया 10 लाख का बिजली बिल जमा करवाया है। ऐसे अब 16 हजार की डिमांड राशि जमा करवाने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद नेट मिटरिंग सिस्टम लग सकेगा। इसके बाद ही सौलर सिस्टम शुरू हो पाएगा।  यदि, सौलर शुरू हो जाता तो सूरज से बनने वाली बिजली से बायोलॉजिकल पार्क का बिल आधा रह जाता। जिससे विभाग को बजट की बचत हो सकती है। 25 लाख की लागत से लगा सौलर : कैम्पा योजना के तहत बायोलॉजिकल पार्क में 25 लाख की लागत से गत जनवरी माह में 40 किलोवॉट का सौलर सिस्टम लगाया गया था। फाउंडेशन लगने के बाद फरवरी में सौलर प्लेटें भी लगा दी गई। इसके बावजूद अब तक सौलर सिस्टम शुरू नहीं हो सका। जबकि, वन्यजीव विभाग बजट की कमी से जूझता रहता है। जबकि, सर्दियों में बायोलॉजिकल पार्क का बिजली बिल 80 से 1 लाख प्रतिमाह तक रहता है, वहीं गर्मियों में बिल बढ़कर 1.20 से 1.50 लाख तक पहुंच जाता है। ऐसे में सौलर सिस्टम शुरू होने से पार्क का बिजली बिल आधा रह जाएगा।  </p>
<p><strong>हर महीने 1 लाख का बिजली बिल</strong><br />वन्यजीव विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क का बिजली बिल प्रतिमाह 1 लाख से अधिक का आता है। सर्दियों की अपेक्षा गर्मियों में खपत अधिक बढ़ जाती है। यहां मांसाहारी वन्यजीवों के 6 एनक्लोजर हैं, जिनके नाइट शेल्टरों में कूलिंग के लिए डक्टिंग चलाई जाती है। इसके अलावा पानी की टंकी भरने सहित अन्य व्यवस्था के लिए नियमित मोटर चलाई जाती है। जिससे बिजली की खपत अधिक रहती है। ऐसे में सालाना बिजली बिल 12 लाख से अधिक पहुंच जाता है, जिसे भरने में विभाग को पसीने आ जाते हैं। </p>
<p><strong>सालाना 6 लाख की हो सकती बचत </strong><br />राजस्थान रील इलेक्ट्रोनिक्स एंड इंस्टूमेंट लिमिटेड के अशोक कुमार ने बताया कि अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में 40 किलोवाट का सौलर सिस्टम लग चुका है। एक किलोवाट औसतन 3 से  4 यूनिट बिजली का उत्पादन करता है। ऐसे में चालीस किलोवाट सौलर से प्रतिदिन 160 यूनिट बिजली जनरेट होगी और सालभर में 58 हजार से अधिक यूनिट का उत्पादन होगा। ऐसे में एक यूनिट 10 रुपए चार्ज के हिसाब से बायोलॉजिकल पार्क को 5.84 लाख रुपए की बचत हो सकती है। हालांकि, सौलर से बिजली का उत्पादन सूरज के ताप पर निर्भर करता है। ऐसे में औसतन, विभाग को सालाना बिजली बिल में 6 लाख की बचत होने से 12 लाख का बिल आधा रह जाएगा। </p>
<p><strong>क्यों शुरू नहीं हो पा रहा सौलर</strong><br />विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, सौलर से बनने वाली बिजली को स्टोर करने के लिए एक मीटर लगता है। जिसे नेट मिटरिंग कहते हैं। इसमें स्टोर हुई बिजली के बदले विद्युत कम्पनी से बिजली मिलती है। इसके लिए नेट मिटरिंग करनी होती है। लेकिन, इस प्रक्रिया पूरी करने के लिए आवश्यक डॉक्यूमेंट की आवश्यकता होती है, जिसकी पूर्ति न हो पाने से शुरुआती 4 माह तक सौलर सिस्टम शुरू नहीं हो पाया। जब दस्तावेज का काम पूरा हुआ तो बकाया बिल  जमा नहीं हो पाने से काम पूरा नहीं हो सका। हालांकि, वर्तमान में बकाया 10 लाख का बिल भी जमा हो चुका है। वहीं, डिमांड राशि 16 हजार रुपए जमा करवाने की आॅन लाइन प्रोसेज जारी है। ऐसे में सितम्बर माह में सौलर सिस्टम शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है। </p>
<p><strong>मांसाहारियों के शेल्टर में चल रहे डक्टिंग </strong><br />अभेड़ा पथरीला क्षेत्र है। गर्मियों में यहां तापमान अधिक रहता है। ऐसे में बायोलॉजिकल पार्क में मांसाहारी वन्यजीवों के नाइट शेल्टर में गर्मी से बचाव के लिए कूलिंग सिस्टम डक्टिंग चलाई जाती है। जिससे बिजली की खपत अधिक बढ़ती है। हालांकि, गर्मी से बचाव के लिए डक्टिंग चलाए जाना आवश्यक है।</p>
<p>पुराना बिजली बिल बकाया होने के कारण समस्या हो रही थी। 13 लाख का बकाया बिल पास कर दिए हैं। साथ ही 16 हजार की जो डिमांड राशि निकल रही थी, वह भी जमा करवा दी है। ऐसे में अब जल्द ही सौलर सिस्टम शुरू हो जाएगा। इसके शुरू होने से अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क को बिजली बिलों में काफी राहत मिल सकेगी।  <br /><strong>-अनुराग भटनागर, डीएफओ, वन्यजीव विभाग कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 Sep 2024 18:24:39 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>बायोलॉजिकल पार्क: हर माह 1 लाख का मिल रहा झटका</title>
                                    <description><![CDATA[इसके बावजूद अब तक सौलर सिस्टम शुरू नहीं हो सका। जबकि, वन्यजीव विभाग बजट की कमी से जूझता रहता है। ऐसे में वर्तमान में पार्क का अप्रेल-मई माह का बिजली का बिल बकाया चल रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/biological-park--getting-a-shock-of-1-lakh-every-month/article-79523"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/biological-park-har-mah-ek-lakh-ka-mil-raha-jhataka...kota-news-27.05.2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क हर महीने एक लाख रुपए बिजली का बिल करंट झेल रहा है। जबकि, पार्क में 40 किलोवाट का सौलर सिस्टम लगा हुआ है। लेकिन, लेटलतीफी के कारण 4 माह बाद भी शुरू नहीं हो सका। ऐसे में वन्यजीव विभाग को प्रतिमाह 80 हजार से 1 लाख रुपए का बिजली बिल चुकाना पड़ रहा है। यदि, सौलर शुरू हो जाता तो सूरज से बनने वाली बिजली से बायोलॉजिकल पार्क का बिल आधा रह जाता। जिससे विभाग को बजट की बचत हो सकती है।  दरअसल, कैम्पा योजना के तहत बायोलॉजिकल पार्क में 25 लाख की लागत से गत जनवरी माह में 40 किलोवॉट का सौलर सिस्टम लगाया गया था। फाउंडेशन लगने के बाद फरवरी में सौलर प्लेटें भी लगा दी गई। इसके बावजूद अब तक सौलर सिस्टम शुरू नहीं हो सका। जबकि, वन्यजीव विभाग बजट की कमी से जूझता रहता है। ऐसे में वर्तमान में पार्क का अप्रेल-मई माह का बिजली का बिल बकाया चल रहा है। </p>
<p><strong>हर महीने 1 लाख का बिजली बिल</strong><br />वन्यजीव विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क का बिजली बिल प्रतिमाह 1 लाख से अधिक का आता है। सर्दियों की अपेक्षा गर्मियों में खपत अधिक बढ़ जाती है। यहां मांसाहारी वन्यजीवों के 6 एनक्लोजर हैं, जिनके नाइट शेल्टरों में कूलिंग के लिए डक्टिंग चलाई जाती है। इसके अलावा पानी की टंकी भरने सहित अन्य व्यवस्था के लिए नियमित मोटर चलाई जाती है। जिससे बिजली की खपत अधिक रहती है। ऐसे में सालाना बिजली बिल 12 लाख से अधिक पहुंच जाता है, जिसे भरने में विभाग को पसीने आ जाते हैं।</p>
<p><strong>मांसाहारी वन्यजीवों के शेल्टर में चल रहे डक्टिंग </strong><br />इन दिनों जिले में भीषण गर्मी पड़ रही है। जिससे इंसान ही नहीं वन्यजीव भी बेहाल है। ऐसे में बायोलॉजिकल पार्क में मांसाहारी वन्यजीवों के नाइट शेल्टर में गर्मी से बचाव के लिए कूलिंग सिस्टम डक्टिंग चलाई जा रही है। जिससे बिजली की खपत बढ़ रही है। हालांकि, गर्मी से बचाव के लिए डक्टिंग चलाए जाना आवश्यक है।</p>
<p><strong>सालाना 6 लाख की हो सकती बचत </strong><br />राजस्थान रील इलेक्ट्रोनिक्स एंड इंस्टूमेंट लिमिटेड के अशोक कुमार ने बताया कि अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में 40 किलोवाट का सौलर सिस्टम लगाया जा रहा है। एक किलोवाट औसतन 3 से  4 यूनिट बिजली का उत्पादन करता है। ऐसे में चालीस किलोवाट सौलर से प्रतिदिन 160 यूनिट बिजली जनरेट होगी और सालभर में 58 हजार से अधिक यूनिट का उत्पादन होगा। ऐसे में एक यूनिट 10 रुपए चार्ज के हिसाब से बायोलॉजिकल पार्क को 5.84 लाख रुपए की बचत हो सकती है। हालांकि, सौलर से बिजली का उत्पादन सूरज के ताप पर निर्भर करता है। ऐसे में औसतन, विभाग को सालाना बिजली बिल में 6 लाख की बचत होने से 12 लाख का बिल आधा रह जाएगा।</p>
<p><strong>अप्रेल-मई का बकाया चल रहा बिल</strong><br />सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार वर्तमान में अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क का अप्रेल-मई का बिजली बिल बकाया चल रहा है।  बायोलॉजिकल पार्क संचालित हुए करीब दो साल से अधिक समय हो गया है लेकिन इसके मेंटिनेंस को लेकर बायोलॉजिकल पार्क के नाम से एक बार भी बजट नहीं मिला। पार्क के मेंटिनेंस का खर्चा रियासतकालीन चिड़ियाघर के बजट से चल रहा है। ऐसे में यहां सौलर सिस्टम लगने से विभाग को बिजली के बिल में काफी राहत मिल सकेगी। </p>
<p><strong>क्यों शुरू नहीं हो पा रहा सौलर</strong><br />विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, सौलर से बनने वाली बिजली को स्टोर करने के लिए एक मीटर लगता है। उसमें स्टोर हुई बिजली के बदले विद्युत कम्पनी से बिजली मिलती है। इसके लिए नेट मिटरिंग करनी होती है। लेकिन, इस प्रक्रिया पूरी करने के लिए आवश्यक डॉक्यूमेंट की आवश्यकता होती है, जिसकी पूर्ति न हो पाने की वजह से सौलर सिस्टम शुरू नहीं हो पा रहा। हालांकि, इसके लिए फाइल तैयार कर ली गई है। जल्द ही सौलर सिस्टम शुरू किए जाने की संभावना है। </p>
<p><strong>बायोलॉजिकल पार्क में 80 से ज्यादा वन्यजीव</strong><br />बायलॉजिकल पार्क में मांसाहारी व शाकाहारी मिलाकर करीब 80 से ज्यादा वन्यजीव हैं। मांसाहारी में लॉयनेस- 1, बाघ-बाघिन- 2, भेड़िया-4, सियार-5, भालू-2, लेपर्ड-2, जरख-3 है। वहीं, 1 मादा भालू है। इसी तरह शाकाहारी में नीलगाय-12, चिंकारा-5, चितल 27, ब्लैक बक 17 है। यहां एक सांभर भी था, जिसकी गत माह पहले मृत्यु हो गई।</p>
<p><strong>रील कम्पनी को दिए नोटिस</strong><br />राजस्थान इलेक्ट्रोनिक्स एंड इंस्ट्रूमेंशन लिमिटेड (रील) कम्पनी को सौलर शुरू नहीं किए जाने को लेकर दो बार नोटिस चुके हैं लेकिन उनकी तरफ अभी तक जवाब नहीं मिला है। कम्पनी को 31 मार्च तक काम पूरा करना था। लेकिन, अब तक पूरा नहीं किया गया। नेट मिटरिंग के लिए रील कम्पनी को बिजली कम्पनी में फाइल लगानी है, जो अब तक नहीं लगाई गई। हालांकि, सौलर सिस्टम जल्द से जल्द शुरू करवाने की प्रक्रिया की जा रही है। <br /><strong>-अनुराग भटनागर, डीएफओ, वन्यजीव विभाग कोटा</strong></p>
<p>आवश्यक डॉक्यूमेंट नहीं मिल रहे<br />नेट मिटरिंग प्रक्रिया पूरी करने के लिए आवश्यक दस्तावेजों की जरूरत होती है, जो वन्यजीव विभाग की ओर से अभी तक नहीं मिले हैं। इसकी वजह से हमारी फाइल अटकी हुई है। हमारे कर्मचारी विभाग के नयापुरा व अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क के चक्कर काट चुके हैं। इसके बावजूद डॉक्यूमेंट नहीं मिल पा रहे। जैसे ही डॉक्यूमेंट मिलेंगे, वैसे ही निजी बिजली कम्पनी में फाइल लगा दी जाएगी।  जहां से अप्रूव्ल मिलते ही सौलर प्लांट शुरू हो जाएगा।  <br /><strong>-अशोक कुमार, कोटा डिविजन इंचार्ज, रील</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/biological-park--getting-a-shock-of-1-lakh-every-month/article-79523</link>
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                <pubDate>Mon, 27 May 2024 16:25:37 +0530</pubDate>
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                <title>Budget 2024: सौर प्रणाली लगाने वाले एक करोड़ परिवारों को हर माह मिलेगी 300 यूनिट बिजली मुफ्त </title>
                                    <description><![CDATA[वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि छत पर सौर प्रणाली लगाने वाले एक करोड़ परिवारों को हर माह 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली उपलब्ध कराई जाएगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/budget-2024-one-crore-families-installing-solar-system-will-get/article-68915"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-02/photo-(1)1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि छत पर सौर प्रणाली लगाने वाले एक करोड़ परिवारों को हर माह 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली उपलब्ध कराई जाएगी।</p>
<p>सीतारमण ने लोकसभा में अंतरिम बजट 2024-25 बजट पेश करते हुए कहा कि यह योजना बहुत उपयोगी है और यह एक करोड़ परिवारों को हर माह तीन सौ यूनिट तक बिजली उपलब्ध कराने में सक्षम है। सार्वजनिक परिवहन के लिए बड़े स्तर पर ई-बसों को भुगतान सुरक्षा व्यवस्था के माध्यम से प्रोत्साहित किया जाएगा। उन्होंने सर्वांगीण, सर्वस्पर्शी और सर्वसमावेशी विकास के सरकार के दृष्टिकोण के बारे में बताया।</p>
<p>वित्त मंत्री ने कहा कि छत पर सौर प्रणाली लगाने से एक करोड़ परिवार प्रत्येक महीने 300 यूनिट तक नि:शुल्क बिजली प्राप्त कर सकेंगे। यह योजना अयोध्या में राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के ऐतिहासिक दिन प्रधानमंत्री के लिए गए संकल्प के अनुसरण में लाई गई है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों की चार्जिंग, आपूर्ति और इन्स्टालेशन के लिए बड़ी संख्या में वेंडरों को उद्यमशीलता का अवसर मिलेगा और विनिर्माण, इन्स्टालेशन और रखरखाव में तकनीकी कौशल रखने वाले युवाओं के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे।</p>
<p>वित्त मंत्री ने हरित ऊर्जा में 2070 तक नेट-जीरो की प्रतिबद्धता बताते हुए कहा कि अंतरिम बजट 2024-25 में किए गये उपायों के प्रस्ताव के तहत एक गीगा-वाट की शुरुआती क्षमता के लिए अपतटीय पवन ऊर्जा की संभावना को हासिल करने के लिए व्यवहार्यता अंतर-निधियन की व्यवस्था की जाएगी और 2030 तक 100 टन की कोयला गैसीकरण और तरलीकरण क्षमता स्थापित की जाएगी। इससे प्राकृतिक गैस, मेथेनाल,स्थापित की जाएगी। इससे प्राकृतिक गैस, मैथेनॉल और अमोनिया के आयात को  कम करने में मदद मिलेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 01 Feb 2024 20:31:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>अब बिजली का बिल नहीं मारेगा करंट, बायोलॉजिकल पार्क को मिला लाखों का सोलर प्लांट </title>
                                    <description><![CDATA[अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में 40 किलोवाट का सौलर सिस्टम में चालीस किलोवाट सौलर से प्रतिदिन 160 यूनिट बिजली जनरेट होगी और सालभर में 58 हजार से अधिक यूनिट का उत्पादन होगा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/now-electricity-bill-will-not-be-affected-by-current--biological-park-gets-solar-plant-worth-lakhs/article-66821"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/photo-(1)3.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क को अब बिजली का बिल करंट नहीं मार सकेगा। पार्क में 40 किलोवॉट का सौलर सिस्टम लगाया जा रहा है। जिससे लाखों का बिजली का बिल आधा रह जाएगा। दरअसल, कैम्पा योजना के तहत वन्यजीव विभाग को 25 लाख रुपए का बजट सौलर सिस्टम लगाने के लिए मिले है। पार्क में ग्राउंड माउंडेड भी बना दिया गया है। राज्य सरकार की एजेंसी राजस्थान इलेक्ट्रोनिक्स एंड इंस्ट्रूमेंशन लिमिटेड द्वारा सौलर सिस्टम लगाया जा रहा है, जो 15 से 20 दिन में तैयार कर दिया जाएगा। </p>
<p><strong>हर महीने 1 लाख आता है बिल</strong><br />वन्यजीव विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क का बिजली बिल प्रतिमाह 1 लाख से अधिक का आता है। सर्दियों की अपेक्षा गर्मियों में खपत अधिक बढ़ जाती है। यहां मांसाहारी वन्यजीवों के 6 एनक्लोजर हैं, जिनके नाइट शेल्टरों में कूलिंग के लिए डक्टिंग चलाई जाती है। इसके अलावा पानी की टंकी भरने सहित अन्य व्यवस्था के लिए नियमित मोटर चलाई जाती है। जिसकी वजह से बिजली की खपत अधिक रहती है। ऐसे में सालाना बिजली बिल 12 लाख से अधिक पहुंच जाता है, जिसे भरने में विभाग को पसीने आ जाते हैं। </p>
<p><strong>सालाना 6 लाख की होगी बचत </strong><br />अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में 40 किलोवाट का सौलर सिस्टम लगाया जा रहा है। एक किलोवाट करीब 4 यूनिट बिजली का उत्पादन करता है। ऐसे में चालीस किलोवाट सौलर से प्रतिदिन 160 यूनिट बिजली जनरेट होगी और सालभर में 58 हजार से अधिक यूनिट का उत्पादन होगा। ऐसे में एक यूनिट 10 रुपए चार्ज के हिसाब से बायोलॉजिकल पार्क को 5.84 लाख रुपए की बचत होगी। हालांकि, सौलर से बिजली का उत्पादन सूरज के ताप पर निर्भर करता है। ऐसे में औसतन, विभाग को सालाना बिजली बिल में 6 लाख की बचत होने से 12 लाख का बिल आधा रह जाएगा। </p>
<p><strong>6.50 लाख का बकाया चल रहा बिल</strong><br />सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार वर्तमान में अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क का करीब 6 माह का 6.50 लाख का बिजली का बिल बकाया चल रहा है। बायोलॉजिकल पार्क संचालित हुए करीब दो साल से अधिक समय हो गया है लेकिन इसके मेंटिनेंस को लेकर बायोलॉजिकल पार्क के नाम से एक बार भी बजट नहीं मिला। पार्क के मेंटिनेंस का खर्चा रियासतकालीन चिड़ियाघर के बजट से चल रहा है। </p>
<p><strong>मांसाहारी वन्यजीवों के शेल्डर में चल रहे हीटर</strong><br />बायोलॉजिकल पार्क में मांसाहारी वन्यजीवों के नाइट शेल्टर में सर्दी से बचाव के लिए हीटर चलाए जा रहे हैं। जिससे भी बिजली की खपत बढ़ रही है। हालांकि, सर्दियों से बचाव के लिए हीटर चलाना भी वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए जरूरी है। </p>
<p><strong>बायोलॉजिकल पार्क में हैं 79 वन्यजीव </strong><br />बायलॉजिकल पार्क में मांसाहारी व शाकाहारी मिलाकर कुल 79 वन्यजीव हैं। मांसाहारी में लॉयनेस- 1, बाघ-बाघिन- 2, भेड़िया-4, सियार-5, भालू-1, लेपर्ड-2, जरख-3 है। वहीं, 1 मादा भालू है। इसी तरह शाकाहारी में नीलगाय-12, चिंकारा-5, चितल 27, ब्लैक बक 17 है। यहां एक सांभर भी था, जिसकी गत माह पहले मृत्यु हो गई। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br /><strong>प्रतिदिन 160 यूनिट बिजली उत्पादन</strong><br />एक किलो वाट सौलर से प्रतिदिन औसत 4 यूनिट बिजली जनरेट होती है। ऐसे में 40 किलोवाट से 160 यूनिट बिजली का रोजाना उत्पादन होगा। इस तरह से सौलर सिस्टम से सालभर में 58 हजार 400 यूनिट बिजली बनेगी, जो आॅन ग्रिड सिस्टम होने के नाते सीधे ग्रिड को मिलेगी। एक यूनिट बिजली का चार्ज 10रुपए के हिसाब से एक साल में विभाग को करीब 5 लाख 84 हजार रुपए का फायदा होगा। इस तरह बायोलॉजिकल पार्क के सालाना बिजली का बिल आधा रह जाएगा।<br /><strong>- अशोक कुमार, कोटा डिविजन इंचार्ज, रील</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Jan 2024 15:33:33 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>निगम हर महीने बना रहा एक से सवा लाख रुपए की बिजली </title>
                                    <description><![CDATA[ निगम का हर महीने का बिजली का ही बिल करीब 2 से ढाई लाख रुपए महीना आने लगा। ऐेसे में बिजली की खपत को कम करने के प्रयास के साथ ही बिजली उत्पादन कर इसके खर्च को भी कम करने  पर विचार किया गया। जिसके तहत वर्ष 2016 में यहां सोलर सिस्टम लगाया गया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/nigam-is-making-electricity-of-one-to-1-25-lakh-rupees-every-month/article-30423"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/nigam-har-mahine-bana-rha-ek-se-sawa-lakh-rupaye-ki-bijli...kota-news.22.11.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में एक ओर जहां बिजली की खपत बढ़ने के साथ ही उसकी प्रति यूनिट दर भी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में बिजली के बिल का खर्चा वहन कर पाना अधिकतर लोगों के लिए मुश्किल हो रहा है। इससे राहत पाने के लिए अब सोलर सिस्टम का उपयोग बढ़ने लगा है। नगर निगम द्वारा हर महीने एक से सवा लाख रुपए की बिजली सोलर सिस्टम से बनाई जा रही है। जिससे 6 साल में ही करीब 70 लाख से अधिक की लागत का सोलर सिस्टम फ्री हो गया है।  प्रदेश में लगातार महंगी हो रही बिजली को देखते हुए अधिकतर लोग विशेष रूप से बड़े मकानों , व्यवसायिक प्रतिष्ठानों और सरकारी कार्यालयों में भी सोलर सिस्टम लगाने को प्राथमिकता दी जा रही है। सरकार की ओर से भी सोलर सिस्टम लगाने पर सब्सीडी दी जा रही है। जिससे अधिक से अधिक लोग इस सिस्टम का उपयोग कर सके।  नगर निगम का नया भवन बनने के बाद उसमें सोलर सिस्टम लगाया गया था। जिसका लाभ निगम को हर  महीने लाखों रुपए की बिजली बनाने पर मिल रहा है। </p>
<p><strong>2012 में भवन बना, 16 में लगा सोलर सिस्टम</strong><br />दशहरा मैदान के पास नगर निगम का पूर्व में छोटा व पुराना भवन बना हुआ था। जिसे ध्वस्त कर उसकी जगह पर वर्ष 2012 में नया भवन बनाया गया। जिसे राजीव गांधी प्रशासनिक भवन नाम दिया गया। उस तीन मंजिला भवन में एबीसी तीन ब्लॉक बनाए गए हैं। जिनमें निगम के कार्यालय संचालित हो रहे हैं।  भवन बनने के बाद उसमें संचालित होने वाले विभिन्न अनुभागों में जब दिनभर बिजली जलने लगी तो उसकी खपत अधिक हो गई। हालत यह थी कि निगम का हर महीने का बिजली का ही बिल करीब 2 से ढाई लाख रुपए महीना आने लगा। ऐेस में बिजली की खपत को कम करने के प्रयास के साथ ही बिजली उत्पादन कर इसके खर्च को भी कम करने  पर विचार किया गया। जिसके तहत वर्ष 2016 में यहां सोलर सिस्टम लगाया गया। </p>
<p><strong>100 किलोवाट का सिस्टम, आधा हुआ बिल</strong><br />नगर निगम द्वारा कार्यालय की छत पर करीब 100 किलोवाट का सोलर सिस्टम लगाया गया। जिसकी लागत उस समय में करीब एक करोड़ रुपए थी। लेकिन सरकार से सोलर सिस्टम लगाने पर करीब 30 से 33 फीसदी सब्सीडी दी गई थी। ऐसे में निगम को यह सिस्डम लगाने पर करीब 70 लाख का खर्चा करना पड़ा।  सोलर सिस्टम लगने के बाद निगम का बिजली बिल पहले से करीब आधा हो गया। पहले जहां 2 से 2.50 लाख रुपए महीने का बिल आ रहा था वह वर्तमान में 1 से सवा लाख रुपए महीना आ रहा है। इस तरह से निगम द्वारा हर महीने करीब एक से सवा लाख रुपए की बिजली सोलर सिस्टम से बनाई जा रही है। </p>
<p><strong>फैक्ट फाइल</strong><br />नगर निगम का भवन बना    - साल 2012 में<br />उस समय बिजली का बिल था- करीब 2.50 लाख रुपए महीना<br />निगम में सोलर सिस्टम लगा    - 2016 में<br />सोलर सिस्टम की लागत थी    - 1 करोड़ रुपए<br />सरकार से सब्सीडी मिली    - 33 फीसदी<br />निगम का सोलर सिस्टम पर हुआ खर्च- 70 लाख<br />सोलर सिस्टम से निगम रह महीने बना रहा बिजली- 1 लाख रुपए की<br />निगम में सोलर सिस्टम लगे हुए         -  6 साल<br />निगम का सोलर सिस्टम बना चुका अब तक बिजली-70 लाख की </p>
<p><strong>2022 में फ्री हो गया सिस्टम</strong><br />नगर निगम द्वारा वर्ष 2016 में सोलर सिस्टम लगाया गया था। जिस पर करीब 70 लाख रुपए खर्च हुए थे। हर महीने एक से सवा लाख रुपए की बिजली बनाई जा रही है। ऐसे में सोलर सिस्टम को लगे हुए करीब 6 साल हो गए हैं।  हर साल 12 महीने के हिसाब से 6 साल में 72 महीने होते हैं। ऐसे में 2016 से 2022 तक 6 साल में निगम द्वारा लगाया गया सोलर सिस्टम फ्री हो गया है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br /> नगर निगम का नया भवन 2012 में बना था। उस समय से बिजली का बिल अधिक आने लगा। इसे देखते हुए सोलर सिस्टम लगाया गया। उस समय सब्सीडी के बाद करीब 70 लाख से अधिक की कीमत में सिस्टम लगा था। सिस्टम लगने के बाद से निगम में बिजली का बिल आधा रह गया है। इस तरह से सोलर सिस्टम से हर महीने करीब एक से सवा लाख रुपए की बिजली बनाई जा रही है। 6 साल में सिस्टम की लागत वसूल हो गई है। अब भविष्य में जितनी भी बिजली बनेगी वह निगम की बचत होगी। <br /><strong>- ए.क्यू कुरैशी, अधिशाषी अभियंता</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 22 Nov 2022 15:23:33 +0530</pubDate>
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