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                <title>Indira Gandhi Urban Employment Guarantee scheme - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Indira Gandhi Urban Employment Guarantee scheme RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>योजनाओं को फिर से दें रफ्तार : टी. रविकांत</title>
                                    <description><![CDATA[इंदिरा गांधी रोजगार गारंटी योजना, प्रधानमंत्री अन्नपूर्णा योजना, प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना के साथ ही बजट घोषणाओं और ऑनलाइन सेवाओं को लेकर भी अधिकारियों से फीडबैक लिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/give-momentum-to-the-plans-again-t-ravikant/article-80897"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/m.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। लोकसभा चुनाव की आचार संहिता समाप्त होने के साथ ही स्वायत्त शासन विभाग के प्रमुख शासन सचिव टी. रविकांत ने विभाग की चल रही योजनाओं को फिर से गति प्रदान कर आमजन को राहत पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। रविकांत ने निदेशालय में विभागीय योजनाओं की प्रगति की समीक्षा बैठक में इंदिरा गांधी रोजगार गारंटी योजना, प्रधानमंत्री अन्नपूर्णा योजना, प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना के साथ ही बजट घोषणाओं और ऑनलाइन सेवाओं को लेकर भी अधिकारियों से फीडबैक लिया।</p>
<p><strong>अन्नपूर्णा रसोइयों का हो सघन निरीक्षण</strong> <br />प्रमुख सचिव ने अधिकारियों से कहा कि वे मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना के तहत चल रही रसोइयों का सघन निरीक्षण करना सुनिश्चित करें ताकि आमजन को सुलभ और शुद्ध भोजन मिलता रहे। पीएम आवास योजना के निर्माणाधीन आवासों को जल्द से जल्द पूरा करवाने के प्रयास किए जाएं। स्ट्रीट वेंडर्स के लिए अभियान चलाकर प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के प्रति जागरूकता लाए। इंदिरा गांधी शहरी रोजगार गारंटी योजना के लिए कार्यों की सूची तैयार करने के भी निर्देश दिए। बैठक में डीएलबी अतिरिक्त निदेशक श्याम सिंह, वित्तीय सलाहकार महेन्द्र मोहन, जयपुर हेरिटेज निगम के आयुक्त अभिषेक सुराणा सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 09 Jun 2024 10:29:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>शहरों को हराभरा बनाने का निकायों को जिम्मा, 67 लाख पौधें लगाने का लक्ष्य आवंटित</title>
                                    <description><![CDATA[स्थानीय प्रजाति के कम जल खपत वाले पौधे जैसे-खेजड़ी, पारस, पीपल, आकाश-नीम, कनेर, गूलर, बरगद, नीम, पीपल, शीशम, सेमल, कचनार, सहजना, कदम्ब, लेतुवा, बोगेनवेलिया, शहतूत देशी, महुआ, बेरी, चांदनी, करंज इत्यादि उत्तम गुणवत्ता के पौधों का चयन कर वन विभाग से प्राप्त किए जाएंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/the-target-of-planting-67-lakh-saplings-has-been-allotted/article-80768"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/yy211rer-(2)4.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। शहरों को हराभरा बनाने की स्थानीय निकायों को जिम्मेदारी दी है। सभी निकायों को 67 लाख पौधें लगाने का लक्ष्य आवंटित किया है। तीन साल तक पौधों के देख रेख की जिम्मेदारी भी निकाय ही निभाएंगे।</p>
<p>डीएलबी निदेशक सुरेश ओला ने निकाय क्षेत्रों में वृक्षारोपण एवं शहरी वन क्षेत्र स्थापित किए जाने के लिए निर्धारित लक्ष्यों को लेकर निर्देशित किया है कि समस्त नगरीय निकाय निर्धारित टाइमलाईन अनुसार कार्यवाही करते हुए स्वयं के संसाधनों एवं विभागीय योजनाओं (इंदिरा गांधी शहरी रोजगार गारंटी योजना (श्रम मद मात्र), NCAP एवं अन्य) से कन्वर्जेंस कर कार्य-योजना तैयार कर वृक्षारोपण का कार्य संपादित करवाएं। इसमें पौधो का वितरण कार्य सम्मिलित नहीं किया जाना है।</p>
<p>वन विभाग के अधिकारियों से समन्वय कर, प्राप्त सुझाव अनुसार सुधन वृक्षारोपण मियावाकी पद्धति के उदाहरण अनुरूप स्थानीय प्रजाति के पौधे उपयोग कर शहरी वन क्षेत्र स्थापित किए जाने की कार्यवाही के लिए शहरी सीमा में स्थित वेस्टलेण्ड अथवा अनुपयोगी भूमि को प्राथमिकता से चिन्हित करते हुए पौधों की सुरक्षा के प्रावधान (वायर फैसिंग) प्रस्ताव में सम्मिलित किए जाए।</p>
<p><strong>ये होगी पौधों की किस्म</strong> <br />स्थानीय प्रजाति के कम जल खपत वाले पौधे जैसे-खेजड़ी, पारस, पीपल, आकाश-नीम, कनेर, गूलर, बरगद, नीम, पीपल, शीशम, सेमल, कचनार, सहजना, कदम्ब, लेतुवा, बोगेनवेलिया, शहतूत देशी, महुआ, बेरी, चांदनी, करंज इत्यादि उत्तम गुणवत्ता के पौधों का चयन कर वन विभाग से प्राप्त किए जाएंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 07 Jun 2024 20:59:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>11 कनिष्ठ अभियंताओं का नहीं किया कार्य विभाजन </title>
                                    <description><![CDATA[नगर निगम का विभाजन होने के बाद कोटा उत्तर की तुलना में कोटा दक्षिण निगम में गिनती के ही कनिष्ठ अभियंता मिले। जिससे उन्हं काम काम में परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/work-division-of-11-junior-engineers-not-done/article-40519"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-03/11-kanisht-abhiyantaon-ka-karya-vibhajan-nahi-hua...kota-news-22-03-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम कोटा दक्षिण में 11 नए कनिष्ठ अभियंता आने के बाद भी 6 माह से उनका कार्य विभाजन तक नहीं किया गया है। जिससे अभियंता मिलने के बाद भी अभी तक 6 अभियंताओं पर ही पूरे निगम क्षेत्र के काम का भार है। नगर निगम में कई ऐसे काम हैं जो कनिष्ठ अभियंताओं की रिपोर्ट पर ही होते हैं। निर्माण से लेकर पट्टा बनाने तक के काम की फाइल उनकी रिपोर्ट पर ही आगे बढ़ती है। नगर निगम का विभाजन होने के बाद कोटा उत्तर की तुलना में कोटा दक्षिण निगम में गिनती के ही कनिष्ठ अभियंता मिले। जिससे उन्हं काम काम में परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। इसे देखते हुए स्वायत्त शासन विभाग की ओर से करीब 6 माह पहले कोटा दक्षिण निगम में 11 कनिष्ठ अभियंता दिए गए। इनमें 9 सिविल के हैं और 2 इलेक्ट्रीकल के हैं। इन अभियंताओं को आए हुए 6 माह से अधिक होने के बाद भी अभी तक निगम अधिकारियों ने इनका कार्य विभाजन तक नहीं किया है। जिससे ये अन्य अभियंताओं के अधीन ही काम कर रहे हैं। इन्हें स्वतंत्र रूप से काम की जिम्मेदारी नहीं दी गई है। </p>
<p><strong>यह हो रही परेशानी</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण की निर्माण समिति के अध्यक्ष इसरार मोहम्मद का कहना है कि कनिष्ठ अभियंताओं को पट्टा बनाने के लिए मौका रिपोर्ट करने, इंदिरा गांधी शहरी रोजगार गारंटी योजना, निर्माण संबंधी कई काम करने होते हैं। लेकिन नए अभियंताओं का कार्य विभाजन नहीं होने से पूर्व के 6 कनिष्ठ अभियंताओं को ही अभी तक ये सभी काम करने पड़ रहे हैं। जिससे काम की गति नहीं बन पा रही है। उन 6 कनिष्ठ अभियताओं पर ही पूरे दक्षिण निगम के 9 सेक्टरों के 80 वार्डों का भार है। जिनमें एक-एक कनिष्ठ  अभियंता पर करीब 12 से 15 वाडोरं का काम है। ऐसे में हर पार्षद अपने वार्ड में कनिष्ठ अभियंता का इंतजार ही करता रहता है लेकिन वे सभी जगह पर समय पर नहीं पहुंच पा रहे हैं। इसरार मोहम्मद ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में आयुक्त को कई बार व्यक्तिगत रूप से और लिखित  में भी अवगत कराया है कि नए कनिष्ठ अभियंता का कार्य विभायन किया जाए। जिससे  पूराने कनिष्ठ अभियंताओं के काम कम हो सके।</p>
<p><strong>डेढ़ महीने पहले निकाला आदेश, वापस लेना पड़ा</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण के कार्यवाहक आयुक्त अम्बालाल मीणा का कहना है कि उन्होंने तो करीब डेढ़ महीने पहले ही नए 11 कनिष्ठ अभियंताओं के कार्य विभाजन का आदेश निकाल दिया था। लेकिन निगम के कुछ पार्षदो ने इस पर आपत्ती जताई। जिसमें कहा कि उनसे पूछकर ही कार्य विभाजन किया जाए। इस कातण से उस आदश को निरस्त करना पड़ा। लेकिन अभी तक जनप्रतिनिधियों की ओर से कोई पत्र नहीं मिला है। जिससे आधार पर कनिष्ठ अभियंताओं को उनके हिैसाब से लगाया जा सके। आयुक्त ने बताया कि अभी भी नए कनिष्ठ अभियंता काम तो कर रहे हैं लेकिन वे किसी न किसी अभियंता के साथ जुड़कर कर रहे हैं। शीघ्र ही सभी 11 कनिष्ठ अभियंताओं को भी स्वतंत्र कार्य भार दे दिया जाएगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Mar 2023 14:27:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ढाई माह में 3.82 लाख जॉब कार्ड बने, रोजगार लेने महज 90 हजार लोग ही पहुंचे</title>
                                    <description><![CDATA[पंजीकृत परिवार की ओर से डिमांड करने पर उसे 100 प्रतिशत रोजगार देने की गारंटी है। इसमें मिनिमम वेजेज 259 रुपए निर्धारित है। एलएसजी सचिव डॉ. जोगाराम के अनुसार प्रदेश में 90 हजार श्रमिकों का नियोजन विभिन्न नगरीय निकायों में किया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/3-82-lakh-job-cards-were-made-in-two-and-a-half-months--only-90-thousand-people-reached-to-get-employment/article-30478"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/q-912.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। शहरी क्षेत्रों में जरुरतमंद को रोजगार मुहैया करवाने के लिए शुरू की गई इंदिरा गांधी शहरी रोजगार गारंटी योजना में ढाई माह में 3.82 लाख जॉब कार्ड बने, लेकिन रोजगार लेने के लिए महज 90 हजार लोग ही पहुंचे। निकायों की ओर से लोगों को जागरूक करने के प्रयास भी किए जा रहे है, लेकिन फिर भी लोग नहीं पहुंच रहे है। स्वायत्त शासन विभाग की ओर से संचालित के लिए करीब 800 करोड़ का बजट रखा गया है। योजना में अब तक शहरी क्षेत्र के 3.82 लाख से अधिक परिवारों ने पंजीकरण करवाया है। इनमें से लगभग 90 हजार लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया जा चुका है। योजना के तहत प्रदेशभर में 6 हजार 995 स्वीकृत कार्यों में से 2 हजार 175 काम चल रहे हैं। इसमें स्वच्छता संबंधी कार्यों को प्राथमिकता देने के साथ ही पर्यावरण जल संरक्षण कार्य, ठोस कचरा प्रबंधन कार्य, अतिक्रमण, अवैध बोर्ड, होर्डिंग्स हटाने का कार्य, हेरिटेज संरक्षण जैसे कार्य किए जा रहे हैं। योजना में लाभार्थी परिवार को 100 दिन का रोजगार उपलब्ध करवाने का प्रावधान किया गया है।<br /><br /><strong>मिनिमम वेजेज 259 रुपए निर्धारित</strong><br />पंजीकृत परिवार की ओर से डिमांड करने पर उसे 100 प्रतिशत रोजगार देने की गारंटी है। इसमें मिनिमम वेजेज 259 रुपए निर्धारित है। एलएसजी सचिव डॉ. जोगाराम के अनुसार प्रदेश में 90 हजार श्रमिकों का नियोजन विभिन्न नगरीय निकायों में किया गया है। हर व्यक्ति के पास चॉइस है कि वो ई-मित्र के माध्यम से नगरीय निकाय में बनी हेल्पडेस्क पर या खुद भी अप्लाई कर सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 23 Nov 2022 10:26:02 +0530</pubDate>
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