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                <title>cv garden - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>सीवी गार्डन की खूबसूरती पर अब बदहाली की छाया, गार्डन में घूम रहे असामाजिक तत्व, पहले भी कई बार हो चुकी चोरियां</title>
                                    <description><![CDATA[रात में गार्डन की सुंदरता को निखारने वाले फव्वारे व लाइटिंग व्यवस्था पूरी तरह ठप पड़ी है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/cb-garden-s-beauty-is-now-marred-by-disrepair--with-anti-social-elements-roaming-the-garden-and-numerous-thefts-having-occurred-in-the-past/article-132708"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/11128.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा शहर में अपनी खूबसूरती, हरियाली और शांत वातावरण के लिए पहचान बनाने वाला सीबी गार्डन इन दिनों बदहाली की मार झेल रहा है। एक समय था जब यह गार्डन परिवारों, बच्चों और पर्यटकों की पहली पसंद हुआ करता था। शहर के मंत्री, बड़े अधिकारी और प्रतिष्ठित लोग भी यहां अक्सर सैर करने आते थे, लेकिन आज इसकी दयनीय हालत देखकर हर कोई हैरान है। प्रशासन की अनदेखी और रखरखाव के अभाव ने इस प्रसिद्ध पर्यटन स्थल की सुंदरता पर ग्रहण लगा दिया है। गार्डन में पहले जहां रोजाना चलने वाली जोए ट्रेन बच्चों के लिए आकर्षण का केंद्र थी, अब वह हफ्ते में केवल एक बार ही चलाई जा रही है। इससे बच्चों के साथ आने वाले परिवारों को निराशा का सामना करना पड़ रहा है। वही पार्क में अव्यवस्थाओं की तस्वीर साफ दिखाई देती है। जगह-जगह कचरे के ढेर फैले हुए हैं, जिससे न केवल वातावरण दूषित हो रहा है बल्कि सौंदर्य भी पूरी तरह बिगड़ गया है। </p>
<p><strong>शाम होते ही गार्डन में अंधेरा</strong><br />रात में गार्डन की सुंदरता को निखारने वाले फव्वारे व लाइटिंग व्यवस्था भी पूरी तरह ठप पड़ी है। लाइटें खराब होने से शाम के समय गार्डन में अंधेरा छा जाता है, जिससे सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। अंधेरा होने पर लोग गार्डन में घूमने से कतराने लगे हैं। वहीं गार्डन में बने दोनों सुविधा घर बदहाली की अव्यवस्था में है। इसमें न तो पानी की व्यवस्था है और नही लाईट की सुविधा है। </p>
<p><strong>लंबे समय से बंद है बोटिंग सुविधा</strong><br />गॉर्डन में वाटर बोटिंग सुविधा भी लंबे समय से बंद पड़ी है। तालाब का पानी दूषित हो चुका है और उसकी देखरेख पूरी तरह ठप नजर आती है। तालाब के चारों ओर का क्षेत्र, जो पहले फोटोग्राफी और घूमने के लिए पसंदीदा स्थान था, अब बदहाल स्थिति में पहुंच चुका है। गंदगी और जलीय काई जमने से तालाब का पानी बदरंग हो चुका है। वहीं गार्डन में लगे बिजली के स्वीच बॉक्स खुले पड़े हुए है, जिससे कभी भी हादसा होने की आशंका बनी रहती है।</p>
<p><strong>जिम्मेदारों की अनदेखी</strong><br />यदि समय रहते गार्डन की मरम्मत और साफ-सफाई पर ध्यान नहीं दिया गया, तो शहर के इस महत्वपूर्ण स्थल की पहचान पूरी तरह मिट जाएगी। सीबी गार्डन को पुन: उसकी पुरानी चमक लौटाने के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत है। नियमित सफाई, लाइटिंग सुधार, तालाब की साफ-सफाई, जोए ट्रेन और बोटिंग सुविधाओं को फिर से शुरू कर गार्डन को आकर्षक बनाया जा सकता है। यह केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि शहर की विरासत है, जिसे बचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।<br /><strong>- दीपक नायक, शुभम मेहरा</strong></p>
<p>सीबी गार्डन में मौजूद अव्यवस्थाओं को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन जल्द ही आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करेगा। गार्डन में आने वाले पर्यटकों को सभी मूलभूत सुविधाएँ निर्बाध रूप से उपलब्ध हों, इस पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।<br /><strong>- मुकेश चौधरी, केडीए सचिव</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 Nov 2025 17:07:34 +0530</pubDate>
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                <title>नयापुरा स्थित सीवी गार्डन का मामला : कीड़े कांटों का डर, किड्स जोन बना बच्चों के लिए खतरा, झूलों के आस-पास उगी है बड़ी-बड़ी घास</title>
                                    <description><![CDATA[बड़ी-बड़ी घास झूलों के आस-पास ही नहीं वहां चलने वाली टॉय ट्रेन की पटरियों पर भी है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-case-of-cv-garden-in-nayapura--fear-of-insects-and-thorns--the-kids--zone-has-become-a-danger-for-children--and-tall-grass-has-grown-around-the-swings/article-130437"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/111-(2)20.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। बाग-बगीचों में बच्चे ताजी हवा के साथ ही झूला झूलने व खेलने-कूदने का आनंद लेने जाते हैं। लेकिन सीबी गार्डन का किड्स जोन इन दिनों बच्चों के मनोरंजन से अधिक खतरा बना हुआ है। गार्डन में लगे झृूलों के आस-पास बड़ी-बड़ी घास उगी हुई है। जिससे वहां आने वाले बच्चों को कीड़े -कांटों के काटने का खतरा बना हुआ है।  सीबी गार्डन में गोपाल निवास बाग की तरफ किड्स जोन बना हुआ है। जहां छोटे-बड़े कई तरह के झूले लगे हुए हैं। उन झूलों में बच्चे यहां सुबह-शाम झूला झृलने आ रहे है। लेकिन हालत यह है कि इन दिनों उन झृूलों के आस-पास इतनी अधिक  व बड़ी-बड़ी घास उगी हुई है कि कई बच्चों से तो बड़ी घास होने से वे नजर ही नहीं आते। कई जगह पर इतनी अधिक घनी घास है कि वहां कोई कीडा-कांटा छिपकर बैठा हो तो उसका पता ही नहीं चल रहा। हालत यह है कि अभी दीपावली अवकाश होने से कई बच्चे सुबह की तुलना में शाम के समय गार्डन में घूमने व झृला झृलने आ रहे हैं। घास अधिक व बड़ी होने के बाद भी मजबूरन उन्हें उसी के बीच झूले झूलने पड़ रहे है। जिससे उन्हें कीड़े-कांटों के काटने का डर बना हुआ है। </p>
<p><strong>टूटे झूले व बिजली के खुले पोल भी खतरा</strong><br />बड़ी-बड़ी घास केवल झूलों के आस-पास ही नहीं वहां चलने वाली टॉय ट्रेन की पटरियों पर भी है। साथ ही जिस जगह यार्ड में ट्रेन रात के समय खड़ी होती है उसके प्रवेश द्वार तक पर बड़ी घास उगी हुई है। गार्डन आने वाले लोगों का कहना है कि बरसात के समय में गार्डन में घास बड़ी हो गई है तो उसे कटवाने की जिम्मेदारी भी संबंधित विभाग की है। नयापुरा निवासी मयंक सैनी का कहना है कि वह अपने दोस्तों के साथ शाम के समय यहां घूमने व झूला झृलने आता है लेकिन यहां घास बड़ी होने व कई झूले टूटे होने के साथ ही बिजली के खुले खम्बे खतरा बने हुए हैं।  </p>
<p><strong>अभी बरसात रूकी है, अब कटवाएंगे घास</strong><br />इधर केडीए अधिकारियों का कहना है कि बरसात के समय में गार्डन में घास बड़ी हो जाती है। बरसात का दौर अब थमा है। ऐसे में संवेदक के माध्यम से अब घास को कटवाया जाएगा। यह काम जल्दी ही करवा दिया जाएगा। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />जिस तरह की बड़ी घास यहां है उससे तो  यहां दिन के समय ही जानवरों व कीड़ों के होने का खतरा बना हुआ है। दोस्तों के साथ यहां आने पर बड़ी-बड़ी घास देखकर झूला झूलने की हिम्मत ही नहीं हो रही है। <br /><strong>- राहुल कुमावत, खाई रोड </strong></p>
<p>स्कूलों की छुट्टी होने से बच्चों को सीबी गार्डन घुमाने लाया था। बच्चे झूला झूलने की जिद करने लगे तो उन्हें यहां लेकर आया। यहां देखा तो काफी झाड़ झंकार हो रहे हैं। छोटे बच्चे से तो बड़ी  व घनी घास उगी हुई है। जिससे यह बच्चों के  लिए खतरा बना हुआ है। नगर  निगम या केडीए जो भी गार्डन की देखभाल करता है उन्हें चाहिए कि वह इस घास को कटवाकर बच्चों के खेलने की जगह को सही करवाएं और टूटे झूले व खुले बिजली के खम्बों को भी सही करवाएं। <br /><strong>- महेश शर्मा सिविल लाइंस </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Oct 2025 16:30:57 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>असर खबर का -  एक साल से दहशत मचा रहे दानव को फ्लोटिंग केज से पानी में ही दबोचा </title>
                                    <description><![CDATA[नवज्योति की मेहनत और वन्यजीव विभाग का प्रयास लाया रंग। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/effect-of-news---the-monster-that-was-creating-terror-for-the-last-one-year-was-caught-in-the-water-with-a-floating-cage/article-110684"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/257rtrer-(2)37.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा, प्रदेश का पहला ऐसा जिला है, जहां वन्यजीव विभाग ने पानी में जाकर मगरमच्छ  का रेस्क्यू करने में सफलता हासिल की है। पिछले एक साल से सीवी गार्डन में दहशत मचा रहा मगरमच्छ को आखिरकार रविवार को धर-दबोच लिया है। 6 फिट लंबे और 60 किलो वजनी मगरमच्छ से मॉर्निंग वॉकर्स, पर्यटक दहशत में थे। चूंकी, मगरमच्छ पानी में था इसलिए वन्यजीव विभाग रेस्क्यू नहीं कर पा रहा था। ऐसे में हाल ही में आॅस्टेÑलियन तकनीक से तैयार किया गया प्रदेश का पहला फ्लोटिंग क्रोकोडाइल केज को तालाब में लगाया। पिछले 15 दिन के प्रयास के बाद आखिरकार मगरमच्छ पिंजरे में कैद हो गया। मगरमच्छ के पकड़े जाने से मॉर्निंग वॉकर्स, पर्यटक व शहरवासियों ने खुशी जताते हुए दैनिक नवज्योति का आभार जताया। </p>
<p><strong>पानी में तैरते पिंजरे में यूं फंसा मगरमच्छ</strong><br />वन्यजीव विभाग के डीएफओ अनुराग भटनागर ने बताया कि गत वर्ष से ही मगरमच्छ को पकड़ने का प्रयास कर रहे थे। लेकिन पानी में होने के कारण रेस्क्यू सफल नहीं हो पा रहा था। ऐसे में गत 27 मार्च को को 12 फीट लंबे और 3 फिट चौड़े फ्लोटिंग क्रोकोडाइल कैज को गार्डन के तालाब में लगाकर 5 किलो पाड़ा मांस बांधा। इसके बाद उसके पिंजरे में आने का इंतजार करते रहे। आखिरकार 15 दिन बाद वह मांस खाने जैसे ही पिंजरे में आया तो वह ट्रैप हो गया। इस पर सीवी गार्डन के संवेदक से सूचना मिलने पर तुरंत टीम  मौके पर पहुंची और तालाब से पिंजरे को बाहर निकाल  चिड़ियाघर ले आए। जिसे बाद में चंबल नदी में शिफ्ट किया जाएगा। इसकी उम्र करीब 8 से 10 साल है। </p>
<p><strong>बोटिंग में बच्चों पर हमले का रहता था डर  </strong><br />सीवी गार्डन के तालाब में केडीए द्वारा पेडल बोटिंग करवाई जाती है। जबकि, इसी तालाब में मगरमच्छ छुपा हुआ था। बोट में छोटे बच्चे भी होते हैं, जो पानी में भी हाथ डाल देते हैं। ऐसे में मगरमच्छ के हमले का डर बना रहता है। वहीं, तालाब किनारे पर्यटकों के सेलफी लेते समय मगरमच्छ के हमले का डर बना रहता था। </p>
<p><strong>दैनिक नवज्योति ने लगातार उठाया था मामला</strong><br />गत वर्ष मई माह में पहली बार सीवी गार्डन के तालाब में मॉर्निंग वॉकर्स को मगरमच्छ नजर आया था। इसके बाद वह अक्टूबर में फिर से नजर आया और बतखों पर हमला किया। घटना के बाद से ही पर्यटकों, मॉर्निंग वॉकर्स व श्रद्धालुओं में दहशत फैल गई। दैनिक नवज्योति ने लगातार खबरें प्रकाशित कर वन विभाग व जिला प्रशासन का इस ओर ध्यान आकर्षित किया। इसके बाद वन्यजीव विभाग मगरमच्छ को रेस्क्यू करने को मजबूर हुआ और आखिरकार को पकड़ने में सफलता हासिल हुई। सीवी गार्डन के स्टाफ, मॉर्निंग वाकर्स, पर्यटक व शहरवासियों ने नवज्योति का आभार जताया।  </p>
<p><strong>प्रदेश में पहली बार पानी में मगरमच्छ का रेस्क्यू</strong><br />डीएफओ अनुराग भटनागर ने बताया कि कोटा वन्यजीव विभाग ने पानी में मगरमच्छ को रेस्क्यू करने में सफलता हासिल की है। संभव: यह प्रदेश का पहला मामला है। मगरमच्छ के कारण गार्डन में आने वाले पर्यटक व मॉर्निंग वॉकर्स अनहोनी की आशंका से आशिंकित थे।  पहले हमने तालाब किनारे पैंथर का पिंजरा लगाकर उसे पकड़ने की कोशिश की थी लेकिन सफलता नहीं मिली। इसी दौरान सहायक वनपाल प्रेम कंवर के सुझाव पर आॅस्ट्रेलियन तकनीक से फ्लोटिंग क्रोकोडाइल कैज (पानी में तैरता पिंजरा) बनवाकर तालाब में लगाया, जिसका फायदा मगरमच्छ के रेस्क्यू के रूप में मिला। </p>
<p><strong>नवज्योति का आभार </strong><br />पिछले साल से सीवी गार्डन के तालाब में मगरमच्छ ने आतंक मचा रखा था।  पूर्व में बतखों पर हमला कर शिकार कर चुका है। तालाब किनारे मंदिर है, जहां श्रद्धालुओं पूजा करने जाते हैं, ऐसे में अनहोनी का डर सताता था। दैनिक नवज्योति ने लगातार खबरे प्रकाशित कर वन विभाग को मगरमच्छ को रेस्क्यू करने पर मजबूर किया। नवज्योति की वजह से ही मगरमच्छ का रेस्क्यू हो सका। इसके लिए नवज्योति का बहुत-बहुत आभार।<br /><strong>- डॉ. सुधीर गुप्ता, मॉर्निंग वॉकर</strong></p>
<p><strong>ठप हो गई थी बोटिंग </strong><br />दिनभर में 200 रुपए भी नहीं आते थे। कर्मचारियों की तनख्वाह निकालना भी मुश्किल हो गया था। वन विभाग के अधिकारियों को केडीए के माध्यम से पत्र  दिलवाकर मगरमच्छ को पकड़ने का आग्रह किया था लेकिन अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया। इस पर दैनिक नवज्योति ने लगातार खबरें प्रकाशित कर वन विभाग और प्रशासन को गंभीर समस्या से रुबरू कराया। इसके बाद ही वन विभाग रेस्क्यू करने पर मजबूर हुआ। ज्वलंत मुद्दे को अंजाम तक पहुंचाने के लिए दैनिक नवज्योति का बहुत-बहुत आभार। <br /><strong>- शिव शर्मा संवेदक सीवी गार्डन</strong></p>
<p><strong>दो-तीन और बनवाएंगे फ्लोटिंग क्रोकोडाइल कैज </strong><br />पानी में से मगरमच्छ को रेस्क्यू करने का प्रदेश का यह  पहला मामला है। फ्लोटिंग क्रोकोडाइल कैज की वजह से ही सफलता मिली है। वर्ष 2024 में सहायक वनपाल प्रेम कंवर शक्तावत मगरमच्छ रेस्क्यू प्रशिक्षण के लिए आॅस्टेÑलिया गई थी।  वहां पानी में मगरमच्छ को रेस्क्यू के लिए तैरते पिंजरों का उपयोग किया जाता है। ऐसे में प्रेम कंवर ने वहां पिंजरों को बनाने की टेक्निक समझी और उनके सुझाव पर हमने कोटा में फ्लोटिंग क्रोकाइल केज तैयार करवाया। <br /><strong>- अनुराग भटनागर, डीएफओ वन्यजीव विभाग कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 14 Apr 2025 15:08:51 +0530</pubDate>
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                <title>सर्दी में पानी से बाहर आ रहा दानव, खतरे में पर्यटक</title>
                                    <description><![CDATA[तालाब किनारे जॉय ट्रेन होने से बच्चों की मौजूदगी अधिक रहती है। ऐसे में हादसे का खतरा बना रहता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/monster-coming-out-of-water-in-winter--tourists-in-danger/article-99596"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/465465.jpg" alt=""></a><br /><p> कोटा। नयापुरा स्थित सीवी गार्डन के तालाब में 8 महीने से भारी-भरकम मगरमच्छ ने डेरा डाल रखा है। शिकायतों के बावजूद वन्यजीव विभाग के अफसरों ने आंखें मूंदी रखी। जबकि, 15 दिन पहले ही मगरमच्छ तालाब किनारे बतखों पर हमला कर चुका है। एक बतख को तो खा भी गया और दूसरी को लहुलूहान कर दिया। घटना के बाद से ही पर्यटक व मॉर्निंग वॉकर्स दशहत में है। वहीं, खतरे की जद में केडीए द्वारा बोटिंग  करवाई जा रही है। तालाब किनारे जॉय ट्रेन होने से बच्चों की मौजूदगी अधिक रहती है। ऐसे में हादसे का खतरा बना रहता है। जागरूक मॉर्निंग वॉकर्स ने पहले भी इसकी शिकायत वन्यजीव विभाग से की थी। सम्पर्क पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज करवाई। इसके बावजूद वन्यजीव विभाग द्वारा अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। हालांकि, कुछ माह पहले पिंजरा लगाकर खानापूर्ति जरूर की।  </p>
<p><strong>मॉर्निंग वॉकर्स में दहशत </strong><br />सीवी गार्डन में बोटिंग व जॉय ट्रेन संचालन में लगे कर्मचारियों ने बताया कि गत वर्ष 9 दिसम्बरको तालाब में छिपा मगरमच्छ ने बतखों पर हमला कर दिया था। बतखों के जोर-जोर से चिल्लाने की आवाज सुन स्टाफ व पर्यटक सकते में आ गए थे। मौके पर जाकर देखा तो मगरमच्छ बतखों पर हमला कर रहा था। एक बतख को तो खा गया और दूसरी को लहुलूहान कर दिया। लोगों की आवाजाही होने से मगरमच्छ वापस पानी में  चला गया। घटना के बाद से ही लोगों में दहशत है। </p>
<p><strong>वन अधिकारियों को लिख चुके पत्र, कोई सुनवाई नहीं</strong><br />सीवी गार्डन के बोटिंग व जॉय ट्रेन कॉन्ट्रेक्टर शिव शर्मा ने बताया कि गार्डन के तालाब में मगरमच्छ लंबे समय है। जबकि, इसी तालाब में पैदल बोटिंग करवाई जाती है। वहीं, जॉय ट्रेन भी यहीं हैं। ऐसे में लोगों व बच्चों की मौजूदगी अधिक रहती है। ऐसे में हादसे का खतरा बना रहता है। मगरमच्छ रेस्क्यू को लेकर हमने वन विभाग के अधिकारियों को कई बार पत्र लिखे लेकिन किसी ने भी ध्यान नहीं दिया। विभाग की अनदेखी से बड़ा हादसा हो सकता है। केडीए के अधिकारियों ने भी पत्र भेज रेस्क्यू करवाने की मांग की थी, जिसे भी वन अधिकारियों ने अनदेखा कर दिया। जबकि, पार्क में सुबह-शाम बड़ी संख्या में लोग आते हैं। </p>
<p><strong>तालाब किनारे ही धूप सेंक रहा मगरमच्छ</strong><br />मॉर्निंग वॉकर्स डॉ. सुधीर उपाध्याय ने बताया कि तालाब में एक नहीं दो मगरमच्छ है। सर्दियों में वह अक्सर तालाब किनारे ही धूप सेंकता नजर आता है। जबकि, तालाब के किनारे पर ही मंदिर है, जहां सुबह व शाम को श्रद्धालु आते हैं, ऐसे में वह मगरमच्छ के हमले का खतरा बना रहता है। वन अधिकारियों से इसकी शिकायत की थी तो उन्होंने कुछ दिन पिंजरा लगाकर खानापूर्ति कर दी लेकिन  रेस्क्यू करने का प्रयास नहीं किया। </p>
<p><strong>सम्पर्क पोर्टल पर भी की शिकायत   </strong><br /><strong>डॉ. उपाध्याय</strong> ने बताया कि गत वर्ष अगस्त माह में मुख्यमंत्री सम्पर्क पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज करवाई थी। तालाब में 8 से 10 फीट लंबा मगरमच्छ डेरा जमाए हुआ है। मॉर्निंग व इवनिंग वॉक पर प्रतिदिन यहां बड़ी संख्या में शहरवासी व पर्यटक आते हैं। मगरमच्छ कभी पानी में तो कभी जमीन पर झाड़-झंकाड़ों के बीच छिपा रहता है। ऐसे में राहगीरों व बच्चों पर मगरमच्छ के हमले का खतरा ज्यादा रहता है। </p>
<p><strong>मंदिर के पास झाड़ियों में छिपा रहता है  </strong><br />राहगीरों ने बताया कि सीवी गार्डन में तालाब किनारे गणेश मंदिर बना हुआ है। जहां बोटिंग के लिए टिकट विंडो है। यहां बड़ी संख्या में बच्चे खेलते हैं। वहीं, श्रद्धालु दर्शन को जाते हैं। ऐसे में मगरमच्छ द्वारा हमला करने का डर लगा रहता है। सर्दियों में मगरमच्छ तालाब से बाहर आने  की संभावना अधिक रहती है। ऐसे में वह लोगों पर हमला कर सकता है। वन अधिकारियों की घोर लापरवाही से बड़ा हादसा हो सकता है। पूर्व में मगरमच्छ के फोटो-वीडियो वन्यजीव विभाग के डीएफओ को भेजकर रेस्क्यू का आग्रह किया था। इसके बावजूद वन अधिकारी लापरवाह बने हुए हैं। </p>
<p><strong>बोटिंग में बच्चे, हादसे का डर </strong><br />सीवी गार्डन के तालाब में केडीए द्वारा पेडल बोटिंग करवाई जाती है। जबकि, इसी तालाब में मगरमच्छ छुपा हुआ है। बोट में छोटे बच्चे भी होते हैं, जो पानी में भी हाथ डाल देते हैं। ऐसे में मगरमच्छ के हमले का डर बना रहता है। इधर, पर्यटक कैलाश माहेश्वरी व अशोक मीणा का कहना है, केडीए को या तो बोटिंग बंद करवानी चाहिए या फिर मगरमच्छ को रेस्क्यू करवाना चाहिए। अफसरों की लेटलतीफी व अनदेखी के चलते बच्चों की जान संकट में रहती है। </p>
<p><strong>पिंजरा भी उठा ले गए वनकर्मी </strong><br />मॉर्निंग वॉकर सुरेंद्र कुमार, नीलेश जोशी, अरविंद जाट का कहना है कि दो महीने पहले वन्यजीव विभाग के कर्मचारियों ने तालाब किनारे पिंजरा लगाया था लेकिन मॉनिटरिंग नहीं करते थे। वह पिंजरा देखने तक भी नहीं आते थे। मगरमच्छ को रेस्क्यू करने का प्रयास ही नहीं किया। वन अधिकारियों की घोर लापरवाही से किसी दिन बड़ा हादसा हो सकता है। जिला प्रशासन को हस्तक्षेप कर सीवी गार्डन के तालाब से मगरमच्छ को रेस्क्यू करने के लिए वन विभाग के अधिकारियों को पाबंद करना चाहिए। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />सर्दियों में मगरमच्छ के पानी से बाहर रहने की संभावना अधिक रहती है। ऐसे में रेस्क्यू करने के प्रयास करेंगे। हालांकि, पर्यटकों को भी सावधानी बरतनी चाहिए। <br /><strong>- रामकरण खैरवा, संभागीय मुख्य वनसंरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक वन विभाग </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jan 2025 14:35:02 +0530</pubDate>
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                <title>सीवी गार्डन में घात लगाए बैठा काल</title>
                                    <description><![CDATA[शिकायतों के बावजूद वन विभाग नहीं गंभीर । 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/death-lurks-in-cv-garden/article-97790"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/257rtrer-(2)24.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नयापुरा सीवी गार्डन के तालाब में 6 महीने से भारी-भरकम मगरमच्छ ने डेरा डाल रखा है। शिकायतों के बावजूद वन्यजीव विभाग के अफसरों ने आंखें मूंदी रखी। जबकि, 7 दिन पहले ही मगरमच्छ ने तालाब किनारे बतखों पर हमला कर दिया। एक बतख को खा गया और दूसरी को जख्मी कर दिया। इसी तालाब में केडीए द्वारा पैडल बोटिंग करवाई जाती है। बोटिंग में बच्चों की संख्या अधिक रहती है। वहीं, तालाब किनारे जॉय ट्रेन होने से बच्चों की मौजूदगी अधिक रहती है। ऐसे में हादसे का खतरा बना रहता है। जागरूक मॉर्निंग वॉकर्स ने पहले भी इसकी शिकायत वन्यजीव विभाग से की थी। इसके बावजूद उसे रेस्क्यू नहीं किया जा रहा। हालांकि, पिंजरा लगाकर खानापूर्ति कर दी गई थी। </p>
<p><strong>बतखों पर किया हमला, दहशत में लोग </strong><br />सीवी गार्डन में बोटिंग व जॉय ट्रेन के कॉन्ट्रेक्टर शिव शर्मा ने बताया कि 7 दिन पहले 9 दिसम्बरको तालाब में छिपा मगरमच्छ ने बतखों पर हमला कर दिया था। बतखों के जोर-जोर से चिल्लाने की आवाज सुन स्टाफ सकते में आ गया। मौके पर देखा तो मगरमच्छ बतखों पर हमला कर रहा था। एक बतख को तो खा गया और दूसरी को लहुलूहान कर दिया। लोगों की आवाजाही होने से मगरमच्छ वापस पानी में  चला गया। बाद में घायल बतख का पशु चिकित्सा केंद्र ले जाकर इलाज करवाया।</p>
<p><strong>वन अधिकारियों को लिखे पत्र, नहीं किया रेस्क्यू</strong><br />सीवी गार्डन के कॉन्ट्रेक्टर शिव शर्मा ने बताया कि गार्डन के तालाब में मगरमच्छ लंबे समय है। जबकि, इसी तालाब में पैदल बोटिंग करवाई जाती है। वहीं, जॉय ट्रेन भी यहीं हैं। ऐसे में लोगों व बच्चों की मौजूदगी अधिक रहती है। ऐसे में हादसे का खतरा बना रहता है। मगरमच्छ रेस्क्यू को लेकर हमने वन विभाग के अधिकारियों को कई बार पत्र लिखे लेकिन किसी ने भी ध्यान नहीं दिया। विभाग की अनदेखी से बड़ा हादसा हो सकता है। केडीए के अधिकारियों ने भी पत्र भेज रेस्क्यू करवाने की मांग की थी, जिसे भी वन अधिकारियों ने अनदेखा कर दिया। जबकि, पार्क में सुबह-शाम बड़ी संख्या में लोग आते हैं। </p>
<p><strong>सम्पर्क पोर्टल पर की शिकायत फिर भी नहीं चेता वन विभाग </strong><br />मॉर्निंग वॉकर डॉ. सुधीर उपाध्याय ने बताया कि गत 6 माह से करीब 8 से 10 फीट लंबा मगरमच्छ सीवी गार्डन के तालाब में डेरा जमाए हुआ है। जिसकी पूर्व में प्रशासनिक व वन अधिकारियों से शिकायत भी की। लेकिन, सुनवाई नहीं हुई। जबकि, मॉर्निंग व इवनिंग वॉक पर प्रतिदिन यहां बड़ी संख्या में शहरवासी व पर्यटक आते हैं। मगरमच्छ कभी पानी में तो कभी जमीन पर झाड़-झंखाड़ं के बीच छिपा रहता है। ऐसे में राहगीरों व बच्चों पर मगरमच्छ के हमले का खतरा बना रहता है। इसके बाद मुख्यमंत्री सम्पर्क पोर्टल पर भी शिकायत की। इसके बाद विभाग को मगरमच्छ पकड़ने की याद आई। </p>
<p><strong>मंदिर के पास मूवमेंट, सर्दियों में बड़ा खतरा</strong><br />सीवी गार्डन में तालाब किनारे गणेश मंदिर बना हुआ है। जहां बोटिंग के लिए टिकट विंडो है। यहां बड़ी संख्या में बच्चे खेलते हैं। वहीं, श्रद्धालु दर्शन को जाते हैं। ऐसे में मगरमच्छ द्वारा हमला करने का डर लगा रहता है। सर्दियों में मगरमच्छ तालाब से बाहर आने  की संभावना अधिक रहती है। ऐसे में वह लोगों पर हमला कर सकता है। वन अधिकारियों की घोर लापरवाही से बड़ा हादसा हो सकता है। पूर्व में मगरमच्छ के फोटो-वीडियो वन्यजीव विभाग के डीएफओ को भेजकर रेस्क्यू का आग्रह किया था। इसके बावजूद वन अधिकारी लापरवाह बने हुए हैं। </p>
<p><strong>तालाब किनारे चिल्लाती 39 बतखें </strong><br />डॉ. गुप्ता ने बताया कि गार्डन में करीब 40 बतखें थी, जो मगरमच्छ के डर के मारे पिछले कई महीनों से पानी में नहीं उतरी। 9 दिसम्बर को मगरमच्छबतखों पर हमला कर एक को खा गया और दूसरी को जख्मी कर दिया। पानी में नहीं उतरने से बतखों का भोजन का संकट हो गया। तालाब किनारे छोटे बड़े पौधे व झाड़ियां उगी हुई हैं। जहां मगरमच्छ पानी से निकल घात लगाकर छिपा रहता है। जिससे हादसे का खतरा बना रहता है।</p>
<p><strong>तालाब में बोटिंग व किनारे पर जॉय ट्रेन</strong><br />राहगीरों का कहना है, तालाब में केडीए की ओर से बोटिंग करवाई जाती है। बोटिंग के दौरान पानी के बीच में बच्चे व बड़े अनजाने खतरे के साय में रहते हैं। वहीं, तालाब किनारे जॉय ट्रेन की टिकट विंडो है। जहां बच्चों की भीड़ लगी रहती है। वन विभाग की लापरवाही से बड़ा हादसा हो सकता है। </p>
<p><strong>पिंजरा भी उठा ले गए वनकर्मी</strong><br />मॉर्निंग वॉकर सत्येंद्र सिंह, यूसुफ खान, इरफान व हितेश जोशी ने बताया कि पिछले महीने वन्यजीव विभाग के कर्मचारियों ने तालाब किनारे पिंजरा लगाया था लेकिन मॉनिटरिंग नहीं करते थे। वह पिंजरा देखने तक नहीं आते थे। मगरमच्छ को रेस्क्यू करने का प्रयास ही नहीं किया। वन अधिकारियों की घोर लापरवाही से किसी दिन बड़ा हादसा हो सकता है। जिला प्रशासन को हस्तक्षेप कर सीवी गार्डन के तालाब से मगरमच्छ को रेस्क्यू करने के लिए वन विभाग के अधिकारियों को पाबंद करना चाहिए। </p>
<p>पानी के अंदर से हम मगरमच्छ को पकड़ नहीं सकते। डेढ़ महीने पिंजरा भी लगाया था। जिसमें कभी श्वान तो कभी अन्य जानवर ट्रैप होता रहा। किसी भी व्यक्ति ने पत्र के माध्यम से अब तक हमसे कोई शिकायत नहीं की है।  यहां कॉन्ट्रेक्टर या केडीए को एक व्यक्ति 24  निगरानी के लिए लगाना चाहिए। जब मगरमच्छ पानी से बाहर आए तो हमें सूचना कर दें और हम टीम भेजकर रेस्क्यू करवा लेंगे। </p>
<p><strong>अनुराग भटनागर, डीएफओ वन्यजीव विभाग</strong><br />मगरमच्छ का पानी से पकड़ नहीं सकते और पकड़ना भी नहीं चाहिए। लोगों की सुरक्षा के उपाए किए जा सकते हैं, बजाए मगरमच्छ को पकड़ने के। तालाब के चारों तरफ सुरक्षा दीवार बनाई जा सकती है और चेतावनी बोर्ड लगा दिए जाए। वैसे भी मगरमच्छ बोटिंग पर हमला नहीं करता। <br /><strong>- रामकरण खैरवा, संभागीय मुख्य वनसंरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक वन विभाग </strong></p>
<p>मामला आपके द्वारा संज्ञान में आया है, संबंधित विभाग के अधिकारियों से सम्पर्क कर जल्द से जल्द समस्या का निस्तारण करवाएंगे।<br /><strong>- राजेंद्र माथूर, निदेशक अभियांत्रिकी केडीए</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Dec 2024 16:30:28 +0530</pubDate>
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                <title>सीवी गार्डन में एक नहीं दो मगरमच्छों का डेरा</title>
                                    <description><![CDATA[मॉर्निंग वॉकर्स व पर्यटकों पर बढ़ा हमले का खतरा।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/not-one-but-two-crocodiles-camp-in-cv-garden/article-97788"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/257rtrer-(2)23.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नयापुरा स्थित सीवी गार्डन में  मॉर्निंग वॉकर्स, पर्यटकों व बच्चों की जान खतरे में है। गार्डन के तालाब में एक नहीं दो मगरमच्छ ने डेरा जमाया हुआ है। रविवार को भी दूसरा  मगरमच्छ  नजर आया। वह तालाब किनारे कमल पौधों के पास दलदली जमीन पर घात लगाए बैठा था। जबकि, तालाब में बोटिंग व किनारे पर जॉय ट्रेन होने से बच्चों की आवाजाही ज्यादा रहती है। ऐसे मे हादसे की आशंका बनी रहती है। वहीं, तालाब के आसपास पर्यटकों मौजूदगी होने से मगरमच्छ के हमले का  खतरा बढ़ गया है। मॉर्निंग वॉकर्स द्वारा वन्यजीव विभाग को कई बार संभावित खतरे से आगाज किया जा चुका है, इसके बावजूद मगरमच्छ को रेस्क्यू नहीं किया जा रहा। वन अधिकारियों की लापरवाही से किसी दिन सीवी गार्डन में बड़ा हादसा हो सकता है। </p>
<p><strong>सुबह-शाम पर्यटकों की रहती है भीड़</strong><br />डॉ. सुधीर उपाध्याय का कहना है, सीवी गार्डन शहर का सबसे बड़ा व पुराना गार्डन है। जहां सुबह व शाम के वक्त बड़ी संख्या में लोग परिवार संग घूमने आते हैं। जिनके साथ बच्चे भी होते हैं। ऐसे में तालाब किनारे दो मगरमच्छों की मौजूदगी से हादसे का खतरा बना रहता है। वन अधिकारियों को व्यक्तिगत व सम्पर्क पोर्टल के तहत शिकायत कर चुके है, इसके बावजूद वन अधिकारी लापरवाह बने हुए हैं। </p>
<p><strong>एक 8-10 फीट तो दूसरा 5 फीट लंबा मगरमच्छ</strong><br />सीवी गार्डन में तैनात गार्ड्स का कहना है कि पार्क के तालाब में दो मगरमच्छ हैं। एक 8 से 10 फिट लंबा व दूसरा 5 फिट लंबा मगरमच्छ है। यहां पैदल बोटिंग की जाती है। शनिवार को भी बच्चे  बोटिंग कर रहे थे। वह पानी में भी हाथ डाल देते हैं, ऐसे में हादसे का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है। </p>
<p><strong>पानी में नहीं उतर रही बतख </strong><br />पार्क में बतख पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। लेकिन, हाल ही में हुए हमले से वह इतनी सहम गई की वे पानी में नहीं उतरी हैं। जिससे उनके भोजन का संकट हो गया। डॉ. उपाध्याय ने बताया कि तालाब स्थित मंदिर पर महिला श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है। ऐसे में मगरमच्छ के हमले का खतरा बना रहता है। खतरों से अनजान बच्चे खेलते हुए तालाब किनारे आ जाते हैं, ऐसे में मगरमच्छ उन पर झपट्टा मार सकता है। उन्होंने बताया कि प्रशासन को भी समस्या से अवगत करवाने के बावजूद गंभीर समस्या पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Dec 2024 14:28:44 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>असर खबर का -  6 माह से मगरमच्छ की दहशत, अब जागा वन्यजीव विभाग </title>
                                    <description><![CDATA[शिकार की तलाश में मगरमच्छ के पिंजरे में आने के दौरान ट्रैप होने की संभावना है।  ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/effect-of-the-news---fear-of-crocodile-for-6-months--now-the-wildlife-department-has-woken-up/article-93412"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/630400-size-(16)2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नयापुरा सीवी गार्डन के तालाब में 6 महीने से भारी-भरकम मगरमच्छ ने डेरा डाल रखा है। शिकायतों के बावजूद वन्यजीव विभाग के अफसरों ने आंखें मूंदी रखी। जबकि, तालाब में शाम के वक्त बोटिंग करवाई जाती है। ऐसे में पर्यटकों व राहगीरों की जान खतरा रहता है।  समाजसेवी डॉ. सुधीर उपाध्याय के 6 माह के लंबे संघर्ष के बाद आखिरकार, जिम्मेदार वन अधिकारी कुंभकरर्णीय नींद से जागे और शुक्रवार को सीवी गार्डन में मगरमच्छ को पकड़ने के लिए पिंजरा लगवाया। </p>
<p><strong>मगरमच्छ पकड़ने को लगाया पिंजरा, बांधा शिकार</strong><br />वन्यजीव विभाग की टीम शुक्रवार दोपहर को सीवी गार्डन पहुंची और मगरमच्छ को पकड़ने के लिए 6 से 8 फीट लंबा पिंजरा लगाया। इस दौरान पिंजरे में शिकार भी बांधा गया। शिकार की तलाश में मगरमच्छ के पिंजरे में आने के दौरान ट्रैप होने की संभावना है।  </p>
<p><strong>सुनवाई नहीं हुई तो सम्पर्क पोर्टल पर की शिकायत </strong><br />मॉर्निंग वॉकर डॉ. उपाध्याय ने बताया कि गत 6 माह से करीब 8 फीट लंबा मगरमच्छ सीवी गार्डन के तालाब में डेरा जमाए हुआ है। जिसकी पूर्व में प्रशासनिक व वन अधिकारियों से शिकायत भी की। लेकिन, सुनवाई नहीं हुई। जबकि, मॉर्निंग व इवनिंग वॉक पर प्रतिदिन यहां बड़ी संख्या में शहरवासी व पर्यटक आते हैं। मगरमच्छ कभी पानी में तो कभी जमीन पर झाड़-झंकाड़ों के बीच छिपा रहता है। ऐसे में राहगीरों व बच्चों पर मगरमच्छ के हमले का खतरा बना रहता है। इसके बाद मुख्यमंत्री सम्पर्क पोर्टल पर भी शिकायत की। इसके बाद विभाग को मगरमच्छ पकड़ने की याद आई। </p>
<p><strong>गणेश मंदिर के पास रहता है मूवमेंट</strong><br />राहगीरों ने बताया कि सीवी गार्डन में तालाब किनारे गणेश मंदिर बना हुआ है। जहां बोटिंग के लिए टिकट विंडो है। यहां बड़ी संख्या में बच्चे खेलते हैं। वहीं, श्रद्धालु दर्शन को जाते हैं। ऐसे में मगरमच्छ द्वारा हमला करने का डर लगा रहता है। मगरमच्छ के फोटो-वीडियो पूर्व में वन्यजीव विभाग के डीएफओ को भेजकर रेस्क्यू का आग्रह किया था। </p>
<p><strong>तालाब किनारे चिल्लाती 40 बतखें </strong><br />डॉ. गुप्ता ने बताया कि गार्डन में करीब 40 बतखें हैं, जो मगरमच्छ के डर के मारे पिछले कई महीनों से पानी में नहीं उतरी। तालाब किनारे बतखों का समूत चिल्लाती हुई वॉर्निंग कॉल देती है।  ऐसे में उनके भोजन का संकट हो गया। तालाब किनारे छोटे बड़े पौधे व झाड़ियां उगी हुई हैं। जहां मगरमच्छ पानी से निकल घात लगाकर छिपा रहता है।</p>
<p><strong>तालाब में बोटिंग व किनारे पर जॉय ट्रेन</strong><br />राहगीरों का कहना है, तालाब में केडीए की ओर से बोटिंग करवाई जाती है। बोटिंग के दौरान पानी के बीच में बच्चे व बड़े अनजाने खतरे के साय में रहते हैं। वहीं, तालाब किनारे जॉय ट्रेन की टिकट विंडो है। जहां बच्चों की भीड़ लगी रहती है। वन विभाग की लापरवाही से बड़ा हादसा हो सकता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 19 Oct 2024 12:32:14 +0530</pubDate>
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                <title>सीवी गार्डन में मगरमच्छ की दहशत, बच्चों पर हमले का खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[तालाब किनारे गणेश मंदिर के पास हो रही साइटिंग।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/terror-of-crocodile-in-cv-garden--danger-of-attack-on-children/article-84278"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/53.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नयापुरा स्थित सीवी गार्डन में एक महीने से शहरवासी मगरमच्छ की दहशत में हैं। मॉर्निंग व इवनिंग वॉक पर आने वाले राहगीर व पर्यटकों पर मगरमच्छ के हमले का खतरा बना हुआ है। वन विभाग को शिकायत करने के बावजूद मगरमच्छ का रेस्क्यू नहीं किया जा रहा। जबकि, गार्डन में सुबह-शाम बड़ी संख्या में शहरवासी घूमने आते हैं। इनमें बच्चों की संख्या अधिक रहती है। हैरानी की बात यह है, तालाब में बोटिंग भी करवाई जाती है। मगरमच्छ कभी पानी में तो कभी जमीन पर छिपा रहता है। ऐसे में राहगीरों व बच्चों पर मगरमच्छ के हमले का खतरा बना रहता है। </p>
<p><strong>गणेश मंदिर के पास रहता है मूवमेंट</strong><br />डा. सुधीर उपाध्याय ने  बताया कि सीवी गार्डन में स्थित तालाब किनारे गणेश मंदिर बना हुआ है। जहां बोटिंग के लिए टिकट विंडो है। यहां बड़ी संख्या में बच्चे खेलते हैं। वहीं, श्रद्धालु दर्शन को जाते हैं। ऐसे में मगरमच्छ द्वारा हमला करने का डर लगा रहता है। मगरमच्छ के फोटो-वीडियो वन्यजीव विभाग के डीएफओ को भेज रेस्क्यू करने का आग्रह किया। इसके बावजूद मगरमच्छ  का रेस्क्यू नहीं किया जा रहा। </p>
<p><strong>तालाब में बोटिंग व किनारे पर जॉय ट्रेन</strong><br />राहगीरों का कहना है, तालाब में केडीए की ओर से बोटिंग करवाई जाती है। बोटिंग के दौरान पानी के बीच में बच्चे व बड़े अनजाने खतरे के साय में रहते हैं। वहीं, तालाब किनारे जॉय ट्रेन की टिकट विंडो है। जहां बच्चों की भीड़ लगी रहती है। वन विभाग की लापरवाही से बड़ा हादसा हो सकता है। </p>
<p><strong>एक माह से पानी में नहीं उतरी बतख</strong><br />डॉ. सुधीर गुप्ता ने बताया कि गार्डन में सुबह व शाम सैर करने बड़ी संख्या में शहरवासी आते हैं। वहीं, पार्क में बच्चे खेलते हैं। ऐसे में मगरमच्छ के हमले का डर बना रहता है। इसकी शिकायत वन्यजीव विभाग के डीएफओ से भी कर चुके हैं। इसके बावजूद सुनवाई नहीं हो रही है। हालात यह हैं, पिछले एक महीने से 40 बतख पानी में नहीं उतरी। तालाब किनारे छोटे बड़े पौधे व झाड़ियां उगी हुई हैं। जहां मगरमच्छ पानी से निकल घात लगाकर छिपा रहता है। जिससे हादसे का खतरा बना रहता है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />मामला संज्ञान में आया है। मगरमच्छ सुबह व शाम के समय पानी से बाहर निकलते हैं। टीम को मौके पर भेज मगरमच्छ का रेस्क्यू करवाएंगे। <br /><strong>- रामकरण खैरवा, संभागीय मुख्य वन संरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक, वन विभाग कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jul 2024 16:27:12 +0530</pubDate>
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                <title> हांफने लगा सीवी गार्डन की जॉय ट्रेन का इंजन</title>
                                    <description><![CDATA[ ट्रेन को संचालित होते हुए दस साल हो गए। इंजन भी इतना ही पुराना हो गया है। ऐसे में वह करीब दो साल से कभी भी कहीं भी रासते में बंद हो जाता है। ट्रेन में सवारी बैठी होने के दौरान रास्ते में ही इंजन बंद होने पर सवारियों को उतारकर धक्का मारकर इंजन को स्टार्ट करना पड़ रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-engine-of-cv-garden-s-joy-train-started-gasping/article-30812"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/haafane-laga-cv-garden-ki-joy-train-ka-engine...kota-news..26.11.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । चल यार धक्का मार....हाथी मेरे साथी फिल्म के इस गाने की ये पक्ति इन दिनों सीवी गार्डन की जॉय ट्रेन के इंजन पर सही साबित हो रही है। इस ट्रेन का इंजन कभी भी और कहीं भी रास्ते में बंद हो जाता है। जिसे धका मारकर या ट्रेक्टर से खींचकर ही चलाना पड़ रहा है। नयापुरा स्थित सीवी गार्डन से नागाजी बाग तक लोगों को  सैर करवाने वाली जॉय ट्रेन का संचालन नगर विकास न्यास द्वारा संवेदक के माध्यम से किया जा रहा है। यह ट्रेन करीब 10 साल से चल रही है। जिसमें सुबह से शाम तक बड़ी संख्या में बच्चे ही नहीं युवा और महिला-पुरुष भी बैठकर दोनों गार्डन की  सैर करते हुए गार्डन की हरियाली का लुत्फ ले रहे हैं। नाना देवी मंदिर के पास से इस ट्रेन में बैठने के लिए टिकट विंडो बनाई गई है। यहां स्टेशन भी बना हुआ है। चम्बल एक्सप्रेस के नाम से संचालित इस ट्रेन को वर्तमान में एलपीजी गैस से चलाया जा रहा है।  ट्रेन का संचालन अहमदाबाद की फर्म द्वारा किया जा रहा है। </p>
<p><strong>दो साल से ंिजन खराब</strong><br />संवेदक फर्म के प्रबंधक बाबू भाई ने बताया कि ट्रेन को संचालित होते हुए दस साल हो गए। इंजन भी इतना ही पुराना हो गया है। ऐसे में वह करीब दो साल से कभी भी कहीं भी रासते में बंद हो जाता है। ट्रेन में सवारी बैठी होने के दौरान रास्ते में ही इंजन बंद होने पर सवारियों को उतारकर धक्का मारकर इंजन को स्टार्ट करना पड़ रहा है। कई बार तो ट्रेन प्लेटफार्म पर खड़ी रहने के दौरान ही स्टार्ट नहीं हो पाती है। जिससे उसे धक्का मारकर चालू करना पड़ता है। ऐसा आए दिन हो रहा है। यहां तक कि सीवी गार्डन से नागाजी के बाग में बने यार्ड तक ट्रेन के इंजन को इसी हालत में  ले जाना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>अंडरपास में रूकने पर ट्रेक्टर का उपयोग</strong><br />बाबू भाई ने बताया कि पटरी पर ट्रेन रूकने पर तो धका मारकर स्टार्ट कर दिया जाता है। लेकिन दोनों गार्डन के बीच बने अंडरपास में ट्रेन रूकने पर उसे धक्का देकर स्टार्ट करना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में ट्रेक्टर की सहायता से ही उसे खींचकर आगे बढ़ाया जाता है। </p>
<p><strong>सेल्फ स्टार्ट खराब, चालू रखने पर गैस का नुकसान</strong><br />संवेदक फर्म के प्रबंधक का कहना है कि इंजन पुराना होने से उसका सेल्फ स्टार्ट खराब हो रहा है। उसे हाथ से घुमाने वाले स्टार्टअर से चालू करने पर वह भी कई बार खराब हो चुका है। ऐसे में इंजन को चालू रखने पर एलपीजी गैस की खपत अधिक हो रही है। व्यवसायिक सिलेंडर महंगा होने से वह खर्चा अधिक भारी पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि इंजन के खराब हो रहा है। उसके पार्टस यहां नहीं मिल रहे हैं। इस बारे में दो साल से न्यास सचिव को अवगत कराया  जा रहा है। लेकिन अभी तक इसे ठीक नहीं कराया गया है। जिससे कभी भी यह इंजन पूरी तरह से खराब होने पर ट्रेन का संचालन ही बंद हो सकता है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />सीवी गार्डन की जॉय ट्रेन के इंजन में खराबी के बारे में जानकारी है। उसकी भी मरम्मत शीघ्र ही करवाई जाएगी। जिससे न तो यात्रियों को परेशानी होगी और न ही संवेदक फर्म को। <br /><strong>- राजेश जोशी, सचिव, नगर विकास न्यास </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 26 Nov 2022 15:25:37 +0530</pubDate>
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