<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://dainiknavajyoti.com/kashi/tag-33690" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Dainik Navajyoti Rising Rajasthan RSS Feed Generator</generator>
                <title>kashi - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
                <link>https://dainiknavajyoti.com/tag/33690/rss</link>
                <description>kashi RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>शंकराचार्य कौन होगा? क्या अब केंद्र सरकार तय करेगी सबकुछ; स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बोला सरकार पर हमला </title>
                                    <description>
                        <![CDATA[स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विधानसभा बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि कोई मुख्यमंत्री यह तय नहीं कर सकता कि शंकराचार्य कौन होगा; यह धार्मिक हस्तक्षेप है।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/who-will-be-shankaracharya-will-the-central-government-now-decide/article-143158"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/1200-x-600-px)-(7)1.png" alt=""></a><br /><p>वाराणसी। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा विधानसभा में शंकराचार्य के मुद्दे पर दिए गए बयान के बाद शनिवार को काशी से शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के बयान से ऐसा प्रतीत होता है कि जिसे वे प्रमाण-पत्र देंगे, वही शंकराचार्य कहलाएगा, जबकि देश में ऐसी कोई विधिक व्यवस्था नहीं है कि प्रदेश का मुख्यमंत्री किसी को शंकराचार्य घोषित कर दे। उन्होंने इसे आपत्तिजनक बताते हुए कहा कि लोकतंत्र के मंदिर यानी विधानसभा में इस प्रकार की टिप्पणी उचित नहीं है।</p>
<p>स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, क्या अब केंद्र सरकार या उत्तर प्रदेश सरकार यह तय करेगी कि शंकराचार्य कौन होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री द्वारा जिन वासुदेवानंद जी को शंकराचार्य कहा जा रहा है, उन्हें लेकर न्यायालयों में आपत्तियां दर्ज हैं। उनके अनुसार उच्चतम न्यायालय और निचली अदालतों ने संबंधित व्यक्ति को स्वयं को शंकराचार्य के रूप में प्रस्तुत करने से रोका है, इसके बावजूद उन्हें यह पदवी दी जा रही है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि जिन्हें परंपरागत मान्यता प्राप्त है, उन्हें शंकराचार्य नहीं माना जा रहा, जो कि धार्मिक क्षेत्र में हस्तक्षेप का संकेत है। उन्होंने मुख्यमंत्री पर पद के अहंकार का आरोप भी लगाया। कुंभ और माघ मेले में स्नान पर उठे विवाद के संदर्भ में उन्होंने कहा कि शंकराचार्य अनादि काल से मर्यादा के अनुसार स्नान करते आए हैं और कभी भगदड़ की शिकायत नहीं रही। उन्होंने प्रश्न किया कि इसी बार इनके समय में भगदड़ की आशंका कैसे उत्पन्न हो गई।</p>
<p>गौरतलब है कि, मुख्यमंत्री के विधानसभा में दिए गए बयान के बाद यह विवाद राजनीतिक और धार्मिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।</p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/who-will-be-shankaracharya-will-the-central-government-now-decide/article-143158</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/bharat/who-will-be-shankaracharya-will-the-central-government-now-decide/article-143158</guid>
                <pubDate>Sat, 14 Feb 2026 17:46:19 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-02/1200-x-600-px%29-%287%291.png"                         length="684011"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>11 दिन बाद शंकराचार्य का विरोध प्रदर्शन खत्म, इस बात पर बनी सहमति</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[प्रयागराज में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने 11 दिन बाद विरोध समाप्त किया। काशी रवाना होते हुए बोले, सनातन धर्म और गौहत्या रोकने की लड़ाई जारी रहेगी। समर्थकों ने जताया भरोसा।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/shankaracharyas-protest-ends-after-11-days-consensus-reached/article-141037"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(2)6.png" alt=""></a><br /><p>प्रयागराज। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने 11 दिन बाद आखिरकार विरोध प्रदर्शन खत्म कर दिया है। बता दें कि इससे पहले कल मंगलवार को 10वें दिन गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री शंकर सिंह वाघेला शंकराचार्य का समर्थन करने पहुंचे थे।</p>
<p>बता दें कि 11 वे दिन आज शंकराचार्य प्रयागराज माघ मेले को छोड़कर काशी के लिए रवाना हुए तो उन्होंने आखिर में कहा-यह वक्त बताएगा किसकी हार हुई है किसकी जीत हुई है। हम सनातन धर्म की लड़ाई और गौ हत्या बंद हो इसे लेकर लड़ते रहे हैं और लड़ते रहेंगे।</p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/shankaracharyas-protest-ends-after-11-days-consensus-reached/article-141037</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/bharat/shankaracharyas-protest-ends-after-11-days-consensus-reached/article-141037</guid>
                <pubDate>Wed, 28 Jan 2026 14:12:35 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-01/1200-x-600-px%29-%282%296.png"                         length="1014044"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बाबा नहीं बवाल हूं, जयपुर अपना काशी है कराची नहीं बनने दूंगा : बालमुकुंदाचार्य</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[नगर निगम हेरिटेज ने अतिक्रमण व अवैध मीट की दुकानों पर की कार्रवाई]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/baba-i-am-not-a-ruckus-jaipur-is-my-kashi-balmukundacharya/article-63448"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-12/balmukand-aachary.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। शहर में अवैध मीट की दुकानों और अतिक्रमणों को लेकर भारतीय जनता पार्टी के नव निर्वाचित विधायक बालमुकुंदाचार्य ने कहा कि मै बाबा नहीं बवाल हूं और अपना काशी है जयपुर, इसे कराची नहीं बनने दूंगा। अवैध रूप से संचालित अवैध मीट की दुकानों एवं अतिक्रमणों पर उन्होंने निगम के अधिकारियों की जमकर खिंचाई करते हुए कहा कि अब तक आपने लापरवाही कर ली होगी, लेकिन अब नहीं चलने दी जाएगी। </p>
<p>नव निर्वाचित विधायक बालमुकुंदाचार्य ने सोमवार को सुभाष चौक से जलमहल तक दौरा किया और जगह-जगह हो रहे अतिक्रमणों पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने अधिकारियों को सख्त लहजे में कहा कि समय रहते काम कर लो। मीट की कई दुकानें बिना लाइसेंस के चल रही हैं। लाइसेंस नियमों का खुला उल्लंघन कर मीट का खुलेआम प्रदर्शन किया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि मीट की दुकानों पर गाय का मांस भी बेचा जा रहा है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विधानसभा चुनाव परिणाम के दूसरे दिन सोमवार को विधायक बालमुकुन्दाचार्य की इस कार्रवाई से निगम हेरिटेज के अधिकारी सक्ते में गए और आनने फानन में स्थानीय पुलिस के साथ ही निगम के अधिकारी मौके पर पहुंचे। <br />इससे पहले बालमुकुंदाचार्य ने आमजन की अवैध मीट की दुकानों एवं अतिक्रमणों को लेकर की गई शिकायत के बाद चुनाव के दौरान बनाए गए प्रधान कार्यालय से निगम हेरिटेज के अधिकारियों की खिंचाई की थी और कहा था कि अब यह नहीं चलेगा। उन्होंने कहा कि अवैध मीट की दुकानों को बंद करने के साथ ही मीट की दुकानों पर मीट के होने वाले प्रदर्शन को भी बंद करना होगा। इसके साथ ही उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अतिक्रमणों पर भी सख्ती से कार्रवाई कर इसकी शाम तक रिपोर्ट देनी होगी। </p>
<p><strong>जवाब देने से निगम के अधिकारी बचते रहे</strong><br />नव निर्वाचित विधायक के इस एक्शन के बाद निगम के अधिकारी मौके पर तो पहुंचे, लेकिन जबाव देने से बचते रहे। उपायुक्त सतर्कता एसके मेहरानिया ने कहा कि यह तो उनकी रूटीन की कार्रवाई है, जिससे वह समय-समय पर करते रहते हैं। अतिक्रमणों पर कार्रवाई की जाती है।</p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/baba-i-am-not-a-ruckus-jaipur-is-my-kashi-balmukundacharya/article-63448</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/baba-i-am-not-a-ruckus-jaipur-is-my-kashi-balmukundacharya/article-63448</guid>
                <pubDate>Tue, 05 Dec 2023 10:49:06 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2023-12/balmukand-aachary.png"                         length="561603"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Jaipur]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>काशी और तमिलनाडु के सदियों पुराने रिश्ते</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[ केन्द्र की बीजेपी सरकार तथा कुछ सांस्कृतिक संगठनों ने काशी और तमिलनाडु के बीच सैकडों वर्ष पुराने इन संबंधों को फिर से पुनर्जीवित करने और इन्हें मजबूत करने के एक कार्यक्रम का हाल में आयोजन किया। इस कार्यक्रम का नाम काशी तमिल संगम रखा गया है। ]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/kashi-and-tamil-nadus-age-old-relationship/article-30927"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/q-711.jpg" alt=""></a><br /><p>सदियों पूर्व एक ऐसा समय था जब धुर दक्षिण स्थित तमिलनाडु से बड़ी संख्या में हिन्दू काशी की यात्रा पर आते थे तथा काशी विश्वनाथ मंदिर में बाबा के दर्शन करके अपने आपको धन्य समझते थे। यह यात्रा बहुत लम्बी होती थी, जो बैल गाड़ियों जैसे साधनों से महीनों में पूरी की जाती थी। अगर पुराने  इतिहास को खंगला जाए तो यह बात सामने आती है कि तमिलनाडु के रामेश्वरम  से काशी (बनारस) तक के लम्बे मार्ग पर कुछ- कुछ मीलों के अन्तराल पर चातारम (धर्मशालाएं) बनी हुई थी। इन स्थानों पर तीर्थयात्री विश्राम करते थे। यहां उन्हें भोजन के अलावा अन्य सभी प्रकार के सुविधाएं निशुल्क दी जाती थी। ये धर्मशालाएं 18वीं सदी में पूरी तरह से अस्तित्व में थी। लेकिन अचानक एक दिन  ईस्ट इंडिया कम्पनी, जिसका इस क्षेत्र पर आधिपत्य था, ने इन धार्मशालाओं को तोड़ने का आदेश दिया। उस समय तंजवौर के राजा ने कम्पनी के अधिकारियों को एक पत्र लिखकर अनुरोध किया था कि इन धर्मशालाओं को नष्ट नहीं किया जाए, क्योंकि हर साल काशी जाने वाले तमिलनाडु के हिन्दू तीर्थ यात्रियों को कोई मुश्किल नहीं आए। लेकिन उनके अनुरोध को नहीं माना गया।<br /><br />उस समय काशी और तमिलनाडु की बीच मजबूत सांस्कृतिक और धार्मिक रिश्ता था। तमिलनाडु के बड़ी संख्या में लोग यहां न केवल संस्कृत की पढ़ाई करने आते थे बल्कि वेदों जैसे आदि ग्रथों का अध्ययन भी करते थे। काशी विश्वनाथ मंदिर उनकी आस्था का एक बड़ा केंद्र था। आज की तरह उस समय दक्षिण के इस प्रदेश में देश के अलगाव की कोई भावनाएं नहीं थीं। उस समय एक प्रकार से भारत के एक होने की अनुभूति थी।<br /><br />हजारों किलोमीटर दूर स्थित देश के इन दोनों स्थानों के बीच धार्मिक तथा  सांस्कृतिक भावनाएं  इतनी अधिक मजबूत थी। तमिल भाषा के महाकवि सुब्रमनियम भारती, जिन्हें राष्टÑीय कवि होने का गौरव प्राप्त है। विश्व के इस सबसे अधिक पुरातन शहर में आकर बस गए थे। आज भी उनके परिवार के सदस्य यही रहते हैं। तमिलनाडु से आने वाले तीर्थयात्री पवित्र गंगा नदी के केदार घाट पर पूजा पाठ करते हैं। इसके पास ही तमिल भाषी लोगों का एक पूरा का पूरा मोहल्ला बसा हुआ है। लेकिन आजादी के बाद तमिलनाडु में हिंदी के विरोध के चलते तथा देश से अलग होने की बात को लेकर यहां तमिलनाडु से आने वाले तीर्थ यात्रियों के संख्या भी कम होती चली गई।<br /><br />केन्द्र की बीजेपी सरकार तथा कुछ सांस्कृतिक संगठनों ने काशी और तमिलनाडु के बीच सैकडों वर्ष पुराने इन संबंधों को फिर से पुनर्जीवित करने और इन्हें मजबूत करने के एक कार्यक्रम का हाल में आयोजन किया। इस कार्यक्रम का नाम काशी तमिल संगम रखा गया है। नवम्बर के तीसरे सप्ताह से शुरू हुआ यह आयोजन एक माह से भी अधिक समय जारी रहेगा। इस कार्यक्रम के अंतर्गत हर कुछ दिन के अंतराल पर रेल से लगभग 250 यात्रियों के एक जत्था तमिलनाडु से यहां पहुंचेगा तथा वह एक सप्ताह तक यहां रहकर यहां के अलग-अलग धार्मिक स्थलों का भ्रमण करेगा। कुल मिलाकर 12 जत्थे  यहां आएंगे। इस प्रकार लगभग 3,000 लोग तमिलनाडु के अलग हिस्सों से यहां लाए जाएंगे। प्रत्येक जत्था काशी के अलावा अयोध्या तथा प्रयागराज भी जाकर मंदिरों के दर्शन करेगा। प्रत्येक जत्थे में अलग-अलग व्यवसाय और क्षेत्र के लोग होंगे। बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी इन सारे कार्यक्रमों का केंद्र  बिंदु बनाया गया है। <br /><br />यहां न केवल एक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है  बल्कि काशी को तमिलनाडु से जोड़ने वाले विषयों पर सेमिनारों का आयोजन किया जाएगा। बीजेपी और इससे जुड़े संगठन इस कार्यक्रम को इतना अधिक महत्व दे रहे हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां आकर इस आयोजन का शुभारंभ किया। वैसे भी बनारस मोदी का संसदीय चुनाव क्षेत्र है।<br /><br />इतिहासकार बताते है कि बनारस और कांजीवरम के सिल्क की साड़ियों  के बीच नजदीक का रिश्ता है। एक समय था जब बनारस को कांची से जोड़ने वाले मार्ग को सिल्क रूट कहा जाता था। चूंकि यहां के सामान्य आदमी के लिए यहां की यात्रा करना मुश्किल था, इसलिए तमिलनाडु के विभिन्न रियासतों के राजाओं ने अपने राज्यों में काशी मंदिरों का निर्माण करवाया था। राज्य शैव साम्प्रदा, बड़ी संख्या में है। इसलिए एक रियासत के राजा ने तो अपने यहां जो काशी मंदिर बनवाया, वह काशी के विश्वनाथ मंदिर का हू-ब-हू रूप है। आयोजकों का कहना है कि अब इस कार्यक्रम का आयोजन साल में किया जाएगा, ताकि काशी और तमिलनाडु के बीच पुराने संबंध फिर से बन सकें और मजबूत हो सकें।<br />(ये लेखक के अपने विचार हैं)</p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/opinion/kashi-and-tamil-nadus-age-old-relationship/article-30927</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/opinion/kashi-and-tamil-nadus-age-old-relationship/article-30927</guid>
                <pubDate>Mon, 28 Nov 2022 10:45:24 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-11/q-711.jpg"                         length="204840"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Jaipur]]>
                    </dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        