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                <title>tamilnadu - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>रेलवे परियोजनाओं में तेजी लाने के लिए तमिलनाडु सीएम स्टालिन ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, 2500.61.06 हेक्टेयर भूमि के अधिग्रहण को प्रशासनिक स्वीकृति</title>
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                        <![CDATA[तमिलनाडु मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने प्रधानमंत्री मोदी से रेलवे परियोजनाओं के त्वरित क्रियान्वयन, भूमि अधिग्रहण हेतु धनराशि जारी करने और लंबित योजनाएं पुनर्जीवित करने का आग्रह किया।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/tamil-nadu-cm-stalin-writes-letter-to-pm-modi-to/article-142324"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(2).jpg" alt=""></a><br /><p>चेन्नई। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर राज्य में रेलवे परियोजनाओं के त्वरित क्रियान्वयन, भूमि अधिग्रहण के लिए धनराशि जारी करने और स्थगित रखी गयी परियोजनाओं को पुनर्जीवित करने का आग्रह किया है। उन्होंने इस संबंध में राज्य सरकार की ओर से पूर्ण सहयोग का आश्वासन भी दिया है।</p>
<p>प्रधानमंत्री को लिखे अर्ध-सरकारी पत्र में मुख्यमंत्री ने तमिलनाडु में रेलवे परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए लंबित मुद्दों के समयबद्ध समाधान के लिए हस्तक्षेप का अनुरोध किया, विशेषकर भूमि अधिग्रहण के लिए धनराशि जारी करने और ठप पड़ी परियोजनाओं को पुन: आरंभ करने के संदर्भ में। </p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि इस विषय में मीडिया में कुछ तथ्यात्मक रूप से गलत जानकारियां प्रसारित की जा रही हैं, जिसके चलते उन्हें यह पत्र लिखने की आवश्यकता पड़ी है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार की विभिन्न रेलवे परियोजनाओं के लिए कुल 2500.61.06 हेक्टेयर भूमि के अधिग्रहण को प्रशासनिक स्वीकृति दी जा चुकी है। </p>
<p>उन्होंने कहा कि इस कुल भूमि में से 931.52.96 हेक्टेयर के लिए अभी तक रेलवे द्वारा धनराशि स्वीकृत नहीं की गयी है। इसके अलावा, हाल ही में रेलवे से प्राप्त संशोधित भूमि योजना अनुसूची (एलपीएस) के आधार पर दो परियोजनाओं के लिए 296.02.95 हेक्टेयर निजी भूमि के अधिग्रहण की प्रशासनिक स्वीकृति प्रक्रिया में है और शीघ्र जारी की जाएगी।</p>
<p>शेष 1273.05.15 हेक्टेयर भूमि से संबंधित 19 प्रमुख चल रही रेलवे परियोजनाओं में से 1198.02.34 हेक्टेयर (लगभग 94 प्रतिशत) भूमि का अधिग्रहण पूरा कर रेलवे को सौंपा जा चुका है। पांच परियोजनाओं के लिए रेलवे द्वारा अब तक एलपीएस उपलब्ध नहीं कराया गया है।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने बताया कि टिडीवनम-नागरी, मदुरै-तूतुकुडी, मणियाची-नागरकोइल, कन्याकुमारी-नागरकोइल दोहरीकरण, नगरकोइल-एरनियल दोहरीकरण, तूतुकुडी-मदुरै (अरुप्पुक्कोट्टई होकर), चिन्नासलेम-कल्लकुरिची, मयिलादुथुरई-तिरुवरूर, पट्टुकोट्टई फोर जंक्शन प्वाइंट, सलेम-करूर ट्रैक फॉर्मेशन, मन्नारगुडी-नीडामंगलम, चेन्नई बीच-कोरुक्कुपेट तीसरी/चौथी लाइन तथा विल्लुपुरम-ङ्क्षदडीगुल ब्रॉड गेज लाइनों सहित कई परियोजनाओं में भूमि अधिग्रहण कार्य पूर्ण हो चुका है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि शेष परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण कार्य तेजी से किया जा रहा है, लेकिन भूमि स्वामियों को समय पर मुआवजा देना अनिवार्य है। रेल मंत्रालय द्वारा परियोजना-वार और टुकड़ों में धनराशि जारी किए जाने से कार्य प्रभावित हो रहा है, जिससे देरी और अनिश्चितता बढ़ रही है।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने तिरुवनंतपुरम-कन्याकुमारी ब्रॉड गेज दोहरीकरण परियोजना का उदाहरण देते हुए कहा कि 16.86.51 हेक्टेयर भूमि के लिए 289.78 करोड़ रुपये की राशि अब तक आवंटित नहीं की गई है। उन्होंने एकमुश्त और समय पर धनराशि आवंटन की मांग करते हुए कहा कि इससे परियोजनाओं को निर्बाध गति मिलेगी। साथ ही, उन्होंने तमिलनाडु को नए रेलवे परियोजनाओं के सीमित आवंटन पर चिंता जताई और राज्य की आर्थिक क्षमता के अनुरूप अतिरिक्त परियोजनाओं को स्वीकृति देने का अनुरोध किया।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि सहकारी संघवाद की भावना के साथ इन मुद्दों का शीघ्र समाधान होगा और राज्य सरकार रेलवे परियोजनाओं के त्वरित क्रियान्वयन के लिए हरसंभव सहयोग देती रहेगी। </p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Feb 2026 13:03:02 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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                <title>करूर भगदड़ मामला: सीबीआई की पूछताछ के बाद टीवीके प्रमुख विजय चेन्नई के लिए रवाना</title>
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                        <![CDATA[करूर भगदड़ मामले में सीबीआई के सामने पेश होने के बाद अभिनेता-राजनेता विजय चुपचाप चेन्नई रवाना हुए, एजेंसी ने रैली आयोजन और भीड़ प्रबंधन को लेकर गहन पूछताछ की।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/karur-stampede-case-tvk-chief-vijay-leaves-for-chennai-after/article-139454"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/actor-vijay.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। टीवीके प्रमुख और तमिल फिल्म अभिनेता विजय करूर भगदड़ मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के समक्ष पेश होने के बाद मंगलवार को चेन्नई के लिए रवाना हो गए। दिल्ली से वापस जाते समय अभिनेता ने अपनी उपस्थिति को गुप्त रखा और मीडिया से बात करने से परहेज किया।</p>
<p>अभिनेता विजय सोमवार सुबह सीबीआई मुख्यालय पहुंचे जहां जांचकर्ताओं ने उनसे पिछले साल 27 सितंबर को करूर में एक सार्वजनिक रैली के दौरान हुई भगदड़ के संबंध में पूछताछ की। इस त्रासदी में 41 लोगों की मौत हो गई थी और लगभग 100 अन्य घायल हो गए थे। जांच में कई प्रमुख मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया गया जिनमें विजय के कार्यक्रम में पहुंचने में कथित रूप से सात घंटे की देरी और भीड़ प्रबंधन में संभावित चूक शामिल हैं।</p>
<p>सूत्रों ने कहा कि विजय से रैली की योजना बनाने और उसे मंजूरी देने में उनकी भूमिका, अपेक्षित भीड़ की जानकारी, स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय, भीड़ प्रबंधन, आयोजन स्थल की तैयारी एवं क्या कार्यक्रम से पहले भीड़भाड़ के बारे में चेतावनी आदि विषयों पर विस्तृत पूछताछ की गई। जांचकर्ताओं ने यह भी स्पष्टीकरण मांगा कि क्या विजय को रैली रद्द करने, स्थगित करने या ऑनलाइन आयोजित करने के संबंध में कोई सलाह दी गई थी। उच्चतम न्यायालय के निर्देश के बाद पिछले साल अक्टूबर में सीबीआई ने तमिलनाडु पुलिस से जांच अपने हाथ में ले ली थी। एजेंसी भगदड़ की वजह बनने वाली घटनाओं के क्रम को समझने के लिए इस घटना से जुड़े कई लोगों के बयान जुटा रही है। सीबीआई सूत्रों ने संकेत दिया है कि जांच जारी रहने के दौरान विजय को आगे की पूछताछ के लिए दोबारा बुलाया जा सकता है।</p>
<p>अधिकारियों ने कहा कि जांच जारी है और आने वाले हफ्तों में और अधिक जानकारी सामने आने की उम्मीद है। प्रशंसक एवं राजनीतिक समर्थक अभिनेता की सार्वजनिक उपस्थिति पर बारीकी से नजर रख रहे हैं और उनके प्रति समर्थन एवं एकजुटता दिखा रहे हैं।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 13 Jan 2026 17:57:53 +0530</pubDate>
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                <title>तमिलनाडु में दो दलित युवकों को निर्वस्त्र कर पेशाब करने का आरोप, छह लोग गिरफ्तार</title>
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                        <![CDATA[अस्पृश्यता और जातिगत भेदभाव के खिलाफ काम करने वाले एक फोरम के सदस्य ने घटना की निंदा करते हुए तमिलनाडु सरकार से ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कठोर कदम उठाने की मांग की है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/six-people-arrested-for-stripping-and-urinating-on-two-dalit/article-61139"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-11/arrest-.jpg" alt=""></a><br /><p>चेन्नई। तमिलनाडु के तिरूनेलवेली जिले के एक स्कूल में हाल ही में कथित रूप से दलित भाई-बहनों पर हमला करने के बाद ऐसी ही अन्य घटना बुधवार को सामने आई, जिसमें नशे में धुत्त कुछ लोगों ने दो दलित युवकों के साथ मारपीट की और उन्हें निर्वस्त्र कर दिया तथा उनके साथ जातिसूचक व्यवहार करते हुए उन पर पेशाब कर दिया।</p>
<p>पुलिस सूत्रों ने बताया कि मनोज कुमार (21) और  उसका दोस्त मरियप्पन (19) थमीराबारानी नदी में स्नान करने के बाद जब घर लौट  रहे थे, तभी नदी के पास कथित रूप से शराब पी रहे आरोपियों ने उन्हें रोका  और उनसे उनका घर और उनकी जाति के बारे में पूछा। जब आरोपियों को पता चला कि वे एक दलित बस्ती से हैं, तो नशे में धुत  लोगों ने उनसे मारपीट की और उनके कपड़े उतार दिए और उन पर पेशाब कर दिया।  पीड़तिों ने कहा कि उन्हें उन बदमाशों ने देर रात तक बंधक बनाए रखा और उन  पर लाठी और छड़ों से हमला किया। उन्होंने उनसे घटनास्थल से भगाने से पहले  5,000 रुपये और दो मोबाइल फोन भी छिन लिया। दोनों पीड़ति पास में एक  रिश्तेदार के घर गए, अपने माता-पिता से संपर्क किया और अपनी आपबीती सुनाई,  जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।</p>
<p>पीड़ितों का बयान दर्ज करने के बाद दक्षिणी तिरुनेलवेली जिले की थचनल्लूर पुलिस ने पीड़ितों को तिरुनेलवेली मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया और दो दलित युवकों पर हमला करने, उन्हें निर्वस्त्र करने और पेशाब करने के आरोप में छह लोगों को गिरफ्तार किया। आरोपियों की पहचान पलयमकोट्टई निवासी पोन्नुमणि (25), नल्लामुथु (21), आयराम (19), रमार (22), शिवा (22) और लक्ष्मणन (22) के रूप में की गई है। सभी छह आरोपियों को बाद में एक अदालत में पेश किया गया और न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।</p>
<p>अस्पृश्यता और जातिगत भेदभाव के खिलाफ काम करने वाले एक फोरम के सदस्य ने घटना की निंदा करते हुए तमिलनाडु सरकार से ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कठोर कदम उठाने की मांग की है।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Nov 2023 15:01:05 +0530</pubDate>
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                <title>तमिलनाडु सीएम के बेटे ने सनातन धर्म को बीमारी बताया, डेंगू, मलेरिया और कोरोना से की तुलना</title>
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                        <![CDATA[ भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा ने उदयनिधि स्टालिन के सनातन धर्म पर दिए कथित बयान को लेकर विपक्षी दलों के गठबंधन ‘इंडिया’ पर हमला बोलते हुए आज कहा कि राहुल गांधी की ‘मुहब्बत की दुकान’ में सनातन धर्म से नफरत का सामान कैसे बिक रहा है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/tamil-nadu-cm-son-calls-sanatan-dharma-a-disease--compares-it-with-dengue-malaria-and-corona/article-56190"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/udaynidhi.jpg" alt=""></a><br /><p>एजेंसी/नई दिल्ली। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म की तुलना डेंगू, मलेरिया और कोरोना से की है। उदयनिधि ने कहा कि मच्छर, डेंगू, फीवर, मलेरिया और कोरोना ये कुछ ऐसी चीजें हैं, जिनका केवल विरोध नहीं किया जा सकता, बल्कि उन्हें खत्म करना जरूरी होता है। उदयनिधि तमिलनाडु के युवा मामलों के मंत्री भी हैं। उनके इस बयान से कांग्रेस ने किनारा कर लिया है। वहीं भाजपा ने कहा कि इनकी हकीकत यही है। इंडिया गठबंधन के नेताओं को बताना चाहिए कि क्या वे इस बयान का समर्थन करते हैं। उदयनिधि स्टालिन के खिलाफ  एक वकील ने दिल्ली पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई है। उदयनिधि ने शनिवार को सनातन उन्मूलन कार्यक्रम में ये बातें कहीं। उन्होंने कार्यक्रम के नाम की भी तारीफ  की। उन्होंने कहा कि सनातन क्या है, सनातन शब्द संस्कृत से आता है। ये समानता और सामाजिक न्याय के खिलाफ है। सनातन का अर्थ होता है कि स्थायी यानी ऐसी चीज जिसे बदला नहीं जा सकता। जिस पर कोई सवाल खड़े नहीं कर सकता।<br /><br />भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा ने उदयनिधि स्टालिन के सनातन धर्म पर दिए कथित बयान को लेकर विपक्षी दलों के गठबंधन ‘इंडिया’ पर हमला बोलते हुए आज कहा कि राहुल गांधी की ‘मुहब्बत की दुकान’ में सनातन धर्म से नफरत का सामान कैसे बिक रहा है। एनडीए गठबंधन जहां प्रधानमंंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत को विकसित बना रहा है, वहीं परिवारवादी गठबंधन ‘घमंडिया गठबंधन’ के सबसे बड़े सदस्य द्रमुक के नेता और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री स्टालिन के बेटे उदयनिधि स्टालिन हमारे धर्म संस्कारों संस्कृति पर आघात पहुंचा रहे हैं। <br /><br />सनातन धर्म को किसी भी कीमत पर खत्म नहीं किया जा सकता है। ये धर्म सदियों से चला आ रहा है और सदियों तक चलता रहेगा। उदयनिधि को सनातन का असल मतलब नहीं पता है। वे जो भी कह रहे हैं वो बिल्कुल गलत है।<br />- आचार्य सतेन्द्र दास, प्रमुख पुजारी, राम जन्मभूमि</p>]]>
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                <pubDate>Mon, 04 Sep 2023 09:47:13 +0530</pubDate>
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                <title>जेएनयू में तमिल छात्रों पर हमला, स्टालिन ने की निंदा</title>
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                        <![CDATA[उन्होंने कहा कि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में एबीवीपी द्वारा तमिल छात्रों पर कायरतापूर्ण हमला और पेरियार, कार्ल माक्र्स जैसे नेताओं के चित्रों को नष्ट करना घोर निंदनीय है। मैं विश्वविद्यालय प्रशासन से दोषियों के खिलाफ  सख्त कार्रवाई की मांग करता हूं।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/stalin-condemns-attack-on-tamil-students-in-jnu/article-37806"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-02/site-photo-size-(1)9.jpg" alt=""></a><br /><p>चेन्नई। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने दिल्ली स्थित जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के सदस्स्यों द्वारा तमिल छात्रों पर कायरतापूर्ण हमले की सोमवार को निंदा की।</p>
<p>स्टालिन ने एक ट्वीट में कहा कि विश्वविद्यालय सिर्फ सीखने की जगह नहीं हैं, बल्कि...चर्चा, बहस और असहमति व्यक्त करने की जगह भी है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में एबीवीपी द्वारा तमिल छात्रों पर कायरतापूर्ण हमला और पेरियार, कार्ल माक्र्स जैसे नेताओं के चित्रों को नष्ट करना घोर निंदनीय है। मैं विश्वविद्यालय प्रशासन से दोषियों के खिलाफ  सख्त कार्रवाई की मांग करता हूं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि मैं छात्रों के साथ अपनी एकजुटता व्यक्त करता हूं और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और तमिलनाडु के छात्रों की रक्षा के लिए कुलपति से पहल करने का अनुरोध करता हूं।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Feb 2023 20:15:23 +0530</pubDate>
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                <title>काशी और तमिलनाडु के सदियों पुराने रिश्ते</title>
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                        <![CDATA[ केन्द्र की बीजेपी सरकार तथा कुछ सांस्कृतिक संगठनों ने काशी और तमिलनाडु के बीच सैकडों वर्ष पुराने इन संबंधों को फिर से पुनर्जीवित करने और इन्हें मजबूत करने के एक कार्यक्रम का हाल में आयोजन किया। इस कार्यक्रम का नाम काशी तमिल संगम रखा गया है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/kashi-and-tamil-nadus-age-old-relationship/article-30927"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/q-711.jpg" alt=""></a><br /><p>सदियों पूर्व एक ऐसा समय था जब धुर दक्षिण स्थित तमिलनाडु से बड़ी संख्या में हिन्दू काशी की यात्रा पर आते थे तथा काशी विश्वनाथ मंदिर में बाबा के दर्शन करके अपने आपको धन्य समझते थे। यह यात्रा बहुत लम्बी होती थी, जो बैल गाड़ियों जैसे साधनों से महीनों में पूरी की जाती थी। अगर पुराने  इतिहास को खंगला जाए तो यह बात सामने आती है कि तमिलनाडु के रामेश्वरम  से काशी (बनारस) तक के लम्बे मार्ग पर कुछ- कुछ मीलों के अन्तराल पर चातारम (धर्मशालाएं) बनी हुई थी। इन स्थानों पर तीर्थयात्री विश्राम करते थे। यहां उन्हें भोजन के अलावा अन्य सभी प्रकार के सुविधाएं निशुल्क दी जाती थी। ये धर्मशालाएं 18वीं सदी में पूरी तरह से अस्तित्व में थी। लेकिन अचानक एक दिन  ईस्ट इंडिया कम्पनी, जिसका इस क्षेत्र पर आधिपत्य था, ने इन धार्मशालाओं को तोड़ने का आदेश दिया। उस समय तंजवौर के राजा ने कम्पनी के अधिकारियों को एक पत्र लिखकर अनुरोध किया था कि इन धर्मशालाओं को नष्ट नहीं किया जाए, क्योंकि हर साल काशी जाने वाले तमिलनाडु के हिन्दू तीर्थ यात्रियों को कोई मुश्किल नहीं आए। लेकिन उनके अनुरोध को नहीं माना गया।<br /><br />उस समय काशी और तमिलनाडु की बीच मजबूत सांस्कृतिक और धार्मिक रिश्ता था। तमिलनाडु के बड़ी संख्या में लोग यहां न केवल संस्कृत की पढ़ाई करने आते थे बल्कि वेदों जैसे आदि ग्रथों का अध्ययन भी करते थे। काशी विश्वनाथ मंदिर उनकी आस्था का एक बड़ा केंद्र था। आज की तरह उस समय दक्षिण के इस प्रदेश में देश के अलगाव की कोई भावनाएं नहीं थीं। उस समय एक प्रकार से भारत के एक होने की अनुभूति थी।<br /><br />हजारों किलोमीटर दूर स्थित देश के इन दोनों स्थानों के बीच धार्मिक तथा  सांस्कृतिक भावनाएं  इतनी अधिक मजबूत थी। तमिल भाषा के महाकवि सुब्रमनियम भारती, जिन्हें राष्टÑीय कवि होने का गौरव प्राप्त है। विश्व के इस सबसे अधिक पुरातन शहर में आकर बस गए थे। आज भी उनके परिवार के सदस्य यही रहते हैं। तमिलनाडु से आने वाले तीर्थयात्री पवित्र गंगा नदी के केदार घाट पर पूजा पाठ करते हैं। इसके पास ही तमिल भाषी लोगों का एक पूरा का पूरा मोहल्ला बसा हुआ है। लेकिन आजादी के बाद तमिलनाडु में हिंदी के विरोध के चलते तथा देश से अलग होने की बात को लेकर यहां तमिलनाडु से आने वाले तीर्थ यात्रियों के संख्या भी कम होती चली गई।<br /><br />केन्द्र की बीजेपी सरकार तथा कुछ सांस्कृतिक संगठनों ने काशी और तमिलनाडु के बीच सैकडों वर्ष पुराने इन संबंधों को फिर से पुनर्जीवित करने और इन्हें मजबूत करने के एक कार्यक्रम का हाल में आयोजन किया। इस कार्यक्रम का नाम काशी तमिल संगम रखा गया है। नवम्बर के तीसरे सप्ताह से शुरू हुआ यह आयोजन एक माह से भी अधिक समय जारी रहेगा। इस कार्यक्रम के अंतर्गत हर कुछ दिन के अंतराल पर रेल से लगभग 250 यात्रियों के एक जत्था तमिलनाडु से यहां पहुंचेगा तथा वह एक सप्ताह तक यहां रहकर यहां के अलग-अलग धार्मिक स्थलों का भ्रमण करेगा। कुल मिलाकर 12 जत्थे  यहां आएंगे। इस प्रकार लगभग 3,000 लोग तमिलनाडु के अलग हिस्सों से यहां लाए जाएंगे। प्रत्येक जत्था काशी के अलावा अयोध्या तथा प्रयागराज भी जाकर मंदिरों के दर्शन करेगा। प्रत्येक जत्थे में अलग-अलग व्यवसाय और क्षेत्र के लोग होंगे। बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी इन सारे कार्यक्रमों का केंद्र  बिंदु बनाया गया है। <br /><br />यहां न केवल एक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है  बल्कि काशी को तमिलनाडु से जोड़ने वाले विषयों पर सेमिनारों का आयोजन किया जाएगा। बीजेपी और इससे जुड़े संगठन इस कार्यक्रम को इतना अधिक महत्व दे रहे हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां आकर इस आयोजन का शुभारंभ किया। वैसे भी बनारस मोदी का संसदीय चुनाव क्षेत्र है।<br /><br />इतिहासकार बताते है कि बनारस और कांजीवरम के सिल्क की साड़ियों  के बीच नजदीक का रिश्ता है। एक समय था जब बनारस को कांची से जोड़ने वाले मार्ग को सिल्क रूट कहा जाता था। चूंकि यहां के सामान्य आदमी के लिए यहां की यात्रा करना मुश्किल था, इसलिए तमिलनाडु के विभिन्न रियासतों के राजाओं ने अपने राज्यों में काशी मंदिरों का निर्माण करवाया था। राज्य शैव साम्प्रदा, बड़ी संख्या में है। इसलिए एक रियासत के राजा ने तो अपने यहां जो काशी मंदिर बनवाया, वह काशी के विश्वनाथ मंदिर का हू-ब-हू रूप है। आयोजकों का कहना है कि अब इस कार्यक्रम का आयोजन साल में किया जाएगा, ताकि काशी और तमिलनाडु के बीच पुराने संबंध फिर से बन सकें और मजबूत हो सकें।<br />(ये लेखक के अपने विचार हैं)</p>]]>
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                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 28 Nov 2022 10:45:24 +0530</pubDate>
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