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                <title>facing problems - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>संकट में भारतीय फुटबॉल : स्थगित हुई आईएसएल, आई लीग क्लबों के भविष्य पर भी सवाल आरयूएफसी चेयरमैन बोले- एक टीम तैयार करने में 10 करोड़ तक खर्च</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय फुटबॉल इन दिनों अभूतपूर्व संकट से गुजर रहा है।  ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/rufc-chairman-also-said-on-the-future-of-indian-football/article-120752"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/ghnv.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। भारतीय फुटबॉल इन दिनों अभूतपूर्व संकट से गुजर रहा है। इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) के स्थगित होने के बाद अब देश के दूसरे प्रमुख टूनार्मेंट आई-लीग के अस्तित्व पर भी खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। भारी निवेश, समर्पण और वर्षों की मेहनत के बावजूद क्लबों को न तो पर्याप्त वित्तीय सहायता मिल रही है और न ही भविष्य को लेकर कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश। ऐसे में कई क्लबों ने भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। टाक ने कहा कि यह समय केवल चिंता जताने का नहीं, बल्कि मिलकर कार्रवाई करने का है। अगर जमीनी स्तर पर खिलाड़ियों को तैयार करने वाले ये क्लब खत्म हो गए, तो भारतीय फुटबॉल का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान हालात में क्लब चलाना बेहद मुश्किल हो गया है।</p>
<p><strong>भविष्य का कोई रोडमैप नहीं :</strong></p>
<p>केके टाक ने अपने पत्र में सवाल किया कि जब आईएसएल का ही कोई स्पष्ट भविष्य नहीं है, तो आई-लीग के विजेता क्लब और उनके खिलाड़ियों के लिए आगे क्या स्कोप बचेगा? उन्होंने कहा कि कोई रोडमैप नहीं है, न ही प्रसारण योजनाएं या वाणिज्यिक सहयोग की स्पष्टता है। ऐसे में क्लबों का संचालन एक ऐसे गड्ढे में निवेश करने जैसा हो गया है, जहां से कोई रिटर्न नहीं दिखता।</p>
<p><strong>क्लब नहीं बचे तो फुटबॉल नहीं बचेगी :</strong></p>
<p>केके टाक ने आगाह किया कि देश में फुटबॉल की रीढ़ बने ये क्लब अगर नहीं बचे, तो पूरा फुटबॉल ढांचा चरमरा सकता है। उन्होंने बताया कि उन्होंने अन्य क्लब अधिकारियों से भी बात की है और जल्द ही ऑनलाइन या भौतिक बैठक कर आगे की रणनीति पर चर्चा की जाएगी। उनकी योजना है कि यह मुद्दा भारत सरकार, खेल मंत्रालय और प्रधानमंत्री तक पहुंचाया जाए, ताकि राष्ट्रीय स्तर पर कोई ठोस कार्ययोजना बने।</p>
<p><strong>चिंतित हैं आई-लीग क्लब, आरयूएफसी ने उठाए सवाल :</strong></p>
<p>राजस्थान यूनाइटेड फुटबॉल क्लब (आरयूएफसी) के चेयरमैन और उद्योगपति के.के. टाक ने एआईएफएफ और लीग आयोजकों को एक पत्र लिखते हुए मौजूदा हालात पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि एक सीजन में क्लबों को टीम तैयार करने, एकेडमी चलाने और स्थानीय फुटबॉल को जिंदा रखने के लिए 5 से 10 करोड़ रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं, जबकि बदले में मुश्किल से 50 लाख रुपये मिलते हैं। उसमें से भी 60 से 70 फीसदी राशि पेनल्टी के नाम पर काट ली जाती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Jul 2025 11:23:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गाजा में 2 लाख से अधिक नए लोग विस्थापित, लोग फिर से सुरक्षा की तलाश में भागने को मजबूर : संरा</title>
                                    <description><![CDATA[मानवीय सहायताकर्ताओं ने बताया कि दो सप्ताह पहले से लगभग 2,80,000 गाजावासी विस्थापित हो गए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/more-than-2-lakh-new-people-displaced-people-forced-to/article-109687"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/united-nations.jpg" alt=""></a><br /><p>संयुक्त राष्ट्र। मानवीय सहायताकर्ताओं ने बताया कि दो सप्ताह पहले से लगभग 2,80,000 गाजावासी विस्थापित हो गए हैं। संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (ओसीएचए) ने कहा कि अधिक इजरायली विस्थापन आदेश जारी किए गए हैं, जिससे लोग फिर से सुरक्षा की तलाश में भागने को मजबूर हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि बढ़ती हुई संख्या में लोग शरणार्थी शिविरों में आ रहे हैं, जो पहले से ही भीड़भाड़ वाले हैं। यहां पिस्सू और घुन के संक्रमण की रिपोर्ट मिल रही है, जिससे त्वचा पर चकत्ते और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो रही हैं।</p>
<p>कार्यालय ने कहा कि सहायता अवरोध के कारण गाजा में स्वच्छता स्थितियों को सुधारने के लिए आवश्यक सामग्री की कमी हो रही है, जिससे समस्या को हल करना मुश्किल हो रहा है। ओसीएचए ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र और उसके मानवीय साझेदार परिस्थितियों के अनुसार आबादी की अत्यधिक जरूरतों को पूरा करना जारी रखेंगे। सभी मानवीय सहायता और जरूरी सामानों के प्रवेश पर महीने भर की नाकाबंदी ने आबादी को बुनियादी जरूरतों से वंचित कर दिया है। गाजा के अंदर खाद्य सहायता तेजी से खत्म हो रही है। कार्यालय ने कहा कि खाद्य सुरक्षा साझेदार अब तक प्रतिदिन 9 लाख से ज्यादा गर्म भोजन पहुंचाने में सक्षम हैं। ओसीएचए ने गाजा में कार्गो और मानवीय सहायता के लिए क्रॉसिंग को तुरंत फिर से खोलने का आग्रह किया।</p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 04 Apr 2025 15:15:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जर्जर नहरें बन रही बाधा, खेत प्यासे</title>
                                    <description><![CDATA[जर्जर नहर से कई स्थानों से पानी रिस कर बह जाता है। जिससे प्यासे खेतों को पानी नहीं मिल पाता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/dilapidated-canals-are-becoming-an-obstacle--fields-are-thirsty/article-84958"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/jarjar-nahar-ban-rahe-badha-khet-pyase...kota-news-17.07.2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। मानसून कूमजोर रहने के कारण धान की फसल के लिए कोटा बैराज की दायीं व बायीं नहर में जलप्रवाह किया जा रहा है। नहरों की मरम्मत नहीं होने से टेल क्षेत्र के खेतों तक नहरी पानी नहीं पहुंच पा रहा है। इससे किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मरम्मत के अभाव में नहरों से पानी रिस कर व्यर्थ बह रहा है। साठ के दशक में कोटा बैराज से चबल की नहरों का निर्माण हुआ था। वर्तमान में नहरें जगह-जगह से जर्जर हो चुकी हैं। हर साल रबी और खरीफ सीजन में फसलों में सिंचाई के लिए जलप्रवाह के दौरान काफी मात्रा में नहरी पानी सीपेज में व्यर्थ बह जाता है। हर साल नहरों की मरम्मत के कार्य किए जाते हैं, लेकिन कार्यो में खानापूर्ति के कारण उनका लाभ नहीं मिल पाता है।    </p>
<p><strong>व्यर्थ बह जाता है हजारों क्यूसेक पानी</strong><br />किसान जानकीलाल व रामेश्वर ने बताया कि हाड़ौती के जर्जर नहरी तंत्र के कारण हर साल हजारों क्यूसेक पानी व्यर्थ बह जाता है। जर्जर नहर से कई स्थानों से पानी रिस कर बह जाता है। जिससे प्यासे खेतों को पानी नहीं मिल पाता है। यदि व्यर्थ बहते पानी को सहेज लिया जाए तो हजारों हैक्टेयर भूमि की फसलों में सिंचाई हो सकी है। इससे करोड़ों का सालाना कृषि उत्पादन बढ़ सकता है। हम हर साल जर्जर नहरी तंत्र की मांग को लेकर आंदोलन करते हैं, लेकिन प्रशासन उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देता है। इस कारण हर साल जर्जर नहरी तंत्र के कारण परेशानी का सामना करना पड़ता है। </p>
<p><strong>बायीं मुख्य नहर नहीं हो रही पक्की</strong><br />दोनों नहरों में धान की फसल के लिए जलप्रवाह शुरू किया जा रहा है, लेकिन सिंचित क्षेत्र के किसानों के लिए खरीफ व रबी की फसलों को पानी पिलाने के लिए बनाई गई बायीं मुख्य नहर 6 दशक बाद भी पक्की नहीं होने से आधा पानी बह कर ड्रेनों के माध्यम से चबल नदी में चला जाता है। इस बार नहरों में सफाई कार्य शुरू ही नहीं हो पाया। नहरों की दीवारों के पत्थर पानी को आगे बढ़ने से रोकते हैं। नहरी समस्याओं के प्रति राज्य सरकार व जल संसाधन विभाग गंभीर नहीं है। जर्जर हो चुकी नहरों को क्षमता से अधिक पानी छोड़ने के बाद भी कब कहां से टूट जाए कहना मुश्किल है। नहरों की पक्की दीवारें जगह जगह टूटी हुई है। बायीं मुख्य नहर की कापरेन व केशवरायपाटन ब्रांच जगह जगह क्षतिग्रस्त पड़ी है।</p>
<p><strong>फैक्ट फाइल</strong><br /><strong>दायीं मुख्य नहर</strong><br />- 6300 क्यूसेक जल प्रवाह क्षमता<br />-  124 किलोमीटर राजस्थान में<br />-  248 किलोमीटर मध्यप्रदेश में<br />-  1.27 लाख हैक्टेयर भूमि राजस्थान में सिंचित<br />-  3.70 लाख हैक्टेयर भूमि मध्यप्रदेश में सिंचित<br /><strong>बायीं मुख्य नहर </strong><br />- 1500 क्यूसेक जलप्रवाह क्षमता<br />- 178 किलोमीटर राजस्थान में<br />-  1.02 लाख हैक्टेयर भूमि सिंचित</p>
<p><strong>करोड़ों की योजना का नहीं मिला लाभ</strong><br />चंबल की दायीं और बायीं मुख्य नहरों की मरमत के लिए साल 2012-13 में 1274 करोड़ की परियोजना मंजूर की थी। इसमें नहरों के कच्चे धोरों को पक्का करने तथा नहरों का आधुनिकीकरण का कार्य पांच साल में पूरा करना था। यह काम आज तक पूरा नहीं हुआ। परियोजना सरकारी सुस्ती और लापरवाही की भेंट चढ़ गई है। किसान संघों के प्रतिनिधियों ने निर्माण कार्याे में सरकार को घटिया निर्माण की शिकायत भी की थी, लेकिन जांच केवल कागजों में चल रही है। </p>
<p><strong>दोनों नहरों में हो रहा जलप्रवाह</strong><br />सीएडी विभाग के अधिकारियों के अनुसार धान की फसल के लिए वर्तमान में दायीं नहर में 10500 क्यूसेक और बायीं नहर में 500 क्यूसेक जलप्रवाह किया जा रहा है। नहरों में पानी छोड़ने के लिए जवाहर सागर पनबिजलीघर से विद्युत उत्पादन किया जा रहा है। वहां से बिजली उत्पादन कर 3200 क्यूसेक पानी की निकासी की जा रही है। जवाहर सागर से आने वाले पानी को दोनों नहरों में छोड़ा जा रहा है।</p>
<p>नहरों की समय पर साफ सफाई नहीं होने से किसानों के खेतों तक पानी पहुंचने में परेशानी आती है। जर्जर नहरों की वजह से 25 प्रतिशत पानी व्यर्थ बह जाता है। अधिकारियों को समय पर नहरों में सफाई अभियान चलाना चाहिए ताकि पानी खेतों तक पहुंच सके।<br /><strong>-जगदीश कुमार, किसान नेता</strong></p>
<p> नहरों में जल प्रवाह शुरू करने को लेकर कोई व्यवधान नहीं है। किसानों को मांग के अनुरूप नहरी पानी मिलेगा। नहरों में चल रहे पक्के निर्माण कार्य जल प्रवाह शुरू होने के बाद बंद करवा दिए गए हैं। <br /><strong>-लखनलाल गुप्ता, अधीक्षण अभियंता, सीएडी कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jul 2024 16:01:06 +0530</pubDate>
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                <title>घंटाघर से स्टेशन तक सिकुड़ गई सड़कें</title>
                                    <description><![CDATA[सड़क पर चलने वालों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/roads-shrunk-from-ghantaghar-to-station/article-63757"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-12/gan-(2)5.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में मेन रोड ही नहीं अंदरूनी इलाकों व बाजारों  में भी अतिक्रमण पसरा हुआ है। जिससे न केवल रास्ते संकरे हो गए हैं वरन् यातायात में भी बाधा उत्पन्न हो रही है। शहर का कोई भी इलाका ऐसा नहीं है जहां मेन रोड पर सड़क किनारे व फुटपाथ पर अतिक्रमण नहीं हो रहा हो। हालत यह है कि फुटपाथ पर पैदल चलने वालों के लिए तो जगह ही नहीं है। सड़क पर चलने वालों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसा अतिक्रमण के कारण हो रहा है। </p>
<p><strong>दुकानों के आगे तक फेला रखा सामान</strong><br />नगर निगम कोटा उत्रर और कोटा दक्षिण के हर क्षेत्र में अतिक्रमण बड़ी समस्या बनता जा रहा है। नगर निगम कोटा दक्षिण की ओर से हाल ही में सीएडी मेन रोड से अतिक्रमण हटाया गया है। जबकि बाजारों में भी अतिक्रमण पसरा हुआ है।  नगर निगम कोटा उत्तर क्षेत्र में जहां परकोटा से लेकर स्टेशन तक का क्षेत्र है। उसमें भी अंदरूनी इलाकों व बाजारों में अतिक्रमण की भरमार हो रही है। टिपटा चौराहे से पाटनपोल दरवाजे तक, घंटाघर से रामपुरा तक, सब्जीमंडी से जे.पी. सर्किल तक और लाड़पुरा से नयापुरा तक, नयापुरा से स्टेशन के बजरिया तक यही हालत है। यहां हर क्षेत्र में दुकानदारों ने न केवल फुटपाथ पर कब्जा किया हुआ है। वरन् सड़क के आगे तक सामान फेलाकर रखा हुआ है। </p>
<p><strong>सबसे अधिक सब्जीमंडी व स्टेशन क्षेत्र प्रभावित</strong><br />वैसे तो शहर में हर जगह पर अतिक्रमण नासूर बना हुआ है। वहीं सबसे अधिक समस्या सब्जीमंडी व स्टेशन के बजरिया क्षेत्र में है। सब्जीमंडी में जहां जे.पी. सर्किल के चारों तरफ फलों के ठेले वालों ने अतिक्रमण किया हुआ है। ये पूरी सड़क तक फेले हुए हैं। जिससे सर्किल के आस-पास का क्षेत्र संकरा होने के साथ ही यातायात भी बाधित हो रहा है। वहीं सर्किल से वाल्मीकि सामुदायिक भवन के सामने की तरफ संदूक वालों से लेकर अन्य दुकानदारों ने सड़क पर काफी आगे तक सामान बिखेर रखे हैं। जिससे सड़क काफी संकरी हो गई है और यातायात बाधित हो रहा है। यहां की सड़क काफी चौड़ी है। लेकिन अतिक्रमण के चलते यह काफी संकरी हो गई है।  दुकानों का अतिक्रमण, ग्राहकों के वाहन व  मिनी बसों व आॅटो के खड़े होने से  वाहनों को निकलने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।  वहीं स्टेशन के बजरिया क्षेत्र  में सड़क के बीच फलों के ठेलों और दुकानें के सामान सड़क के आगे तक फेले होने से अतिक्रमण की भरमार है। </p>
<p><strong>लोगों की पीड़ा</strong><br />स्टेशन क्षेत्र निवासी जगजीत सिंह ने कहा कि स्टेशन का क्षेत्र काफी महत्वपूर्ण व व्यस्त रहता है। यहां ट्रेन से आने व जाने वालों  की भीड़ अधिक रहती है। सभी को समय पर ट्रेन पकड़नी होती है। लेकिन स्टेशन आने-जाने के दोनों तरफ रास्तों पर अतिक्रमण होने से लोगों को परेशानी होती है। शाम के समय तो यहां से कारों का निकलना किसी चुनौती से कम नहीं है। पाटनपोल निवासी अनवर हुसैन का कहना है कि सब्जीमंडी पूरे शहर का ह्रदय स्थल है। यहां सभी तरह की दुकानें व मार्केट होने से शहर के सभी जगहों से लोग आते हैं। जिससे यहां दिनभर काफी भीड़भाड़ रहती है। ऐसे में यहां बीच सड़क पर खड़े ठेले और दुकानों के आगे का अतिक्रमण और ग्राहकों के वाहनों से सभी को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि यहां पूरे बाजार में ट्रैफिक के जवान तैनात रहते हैं लेकिन उसके बाद भी समस्या अधिक है। अतिक्रमण को हटाया जाएगा तो यहां की सड़क इतनी चौड़ी है कि यातायात काफी सुगम हो सकता है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />दशहरा मेला और विधानसभा चुनाव के चलते निगम के अधिकारी और कर्मचारी व्यस्त थे। आचार संहिता के चलते कोई कार्यवाही भी नहीं हो पा रही थी। अब आचार संहिता खत्म हो गई है। चुनाव प्रक्रिया भी पूरी हो गई है। ऐसे में अब निगम आना शुरू किया है। अतिक्रमण निरोधक दस्ते के निरीक्षक को बुलाकर बाजारों से लेकर मुख्य मार्ग तक के अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए हैं। घंटाघर से लेकर स्टेशन तक जितना भी अतिक्रमण है उसे एक बार समझाइश से हटाया जाएगा। नहीं मानने पर आगे की कार्यवाही की जाएगी। <br /><strong>- मंजू मेहरा, महापौर नगर निगम कोटा उत्तर </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 Dec 2023 18:31:45 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>क्षतिग्रस्त पुलिया पर पानी से होकर गुजरने को मजबूर हैं राहगीर</title>
                                    <description><![CDATA[प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा वन विभाग की आपत्ति का बहाना बनाकर टाल दिया जाता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/pedestrians-are-forced-to-pass-through-water-on-the-damaged-culvert/article-60448"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/kshtigrast-puliya-pr-pani-s-hokr-guzarne-ko-majboor-h-rahgir...rawatbhata,-kota-news-25-10-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>रावतभाटा। वन विभाग की आपत्ति के कारण रावतभाटा को लुहारिया सहित 25 गांवों से जोड़ने वाली सड़क व बड़ी पुलिया 2019 में हुई बारिश के समय से ही क्षतिग्रस्त पड़ी हुई है। चार साल गुजरने के बाद भी सड़क और पुलिया की मरम्मत नहीं होने से क्षेत्र वासियों व ग्रामीणों में काफी रोष है। जानकारी के अनुसार रावतभाटा को ग्राम पंचायत लुहारिया, पाड़ाझर माताजी शक्तिपीठ और अन्य 25 गांवों को जोड़ने वाली बड़ी पुलिया 2019 से ही चंबल नदी क्षेत्र में अतिवृष्टि बारिश के कारण टूटकर क्षतिग्रस्त हो गई थी। लेकिन 2019 से लेकर आज तक ना तो सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा इस पुलिया का निर्माण कराया गया और ना ही कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। यह पुलिया महत्वपूर्ण होने के बावजूद भी प्रशासन द्वारा ना तो बनवाई गई और ना ही इन 25 गांव के लोगों की समस्या को समझा गया। इन ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले ग्राम वासियों को रोज इस टूटी हुई पुलिया के अंदर से पानी में होते हुए निकलना पड़ता है। जिसमें पाडाझर माताजी शक्तिपीठ आने वाले श्रद्धालुओं, बीमार व्यक्ति तथा प्रसाविका महिलाओं को लाने में कई तकलीफें श्रद्धालु और ग्रामवासी झेलते हैं। प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा वन विभाग की आपत्ति का बहाना बनाकर टाल दिया जाता है। </p>
<p><strong>संपूर्ण क्षेत्र में ना तो सड़क है ना पुलिया </strong><br />नगर वासियों ने बताया कि रावतभाटा क्षेत्र के समस्त सड़क मार्गों की यही हालत है। चाहे वह मार्ग रावतभाटा-गांधी सागर रोड़ हो या फिर रावतभाटा-कोटा मुख्य मार्ग। सभी की हालत जैसी है। सभी सड़कें दयनीय स्थिति में हैं। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />कोलीपुरा गांव से रावतभाटा की सड़क बेहद जर्जर अवस्था में है। वन विभाग की आपत्ति के कारण सड़क नहीं बन पा रही है। जिससे इमरजेंसी में अगर जाना हो तो काफी परेशानी होती है।<br /><strong>- शंभुलाल मीणा, ग्रामीण, कोलीपुरा </strong></p>
<p>इस सड़क मार्ग से पाड़ाझर माताजी शक्तिपीठ जाने वाले वाले श्रद्धालुओं को आवागमन में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। पुलिया के क्षतिग्रस्त होने के कारण नीचे भरे पानी से होकर यहां से गुजरना पड़ता है। जिससे कई बार वाहन बंद हो जाते हैं। बाइक सवारों को अपना वाहन घसीटते हुए दूसरी तरफ जाना पड़ता है। परिवार के साथ होने पर और अधिक परेशानी होती है।<br /><strong>- अशोक वाघ, श्रद्धालु, रावतभाटा</strong></p>
<p>इस पुलिया के निर्माण मेंं वन विभाग की आपत्ति है। साल 2019 से 2023 तक भी सार्वजनिक निर्माण विभाग इस समस्या का समाधान नहीं करवा सका है। इस बात को लेकर वन विभाग को लिखित आदेश के लिए आपत्ति दी हुई है। लेकिन 2019 से 2023 चार साल निकल जाने पर भी पुलिया का निर्माण नहीं हो पा रहा है। <br /><strong>- उदयभान, अधीक्षण अभियंता, सार्वजनिक निर्माण विभाग </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Oct 2023 19:46:14 +0530</pubDate>
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                <title>बगतरी गांव में 5 दिनों से नहीं हो रही पेयजल सप्लाई</title>
                                    <description><![CDATA[ करीब 5 दिन पूर्व सुल्तानपुर से बगतरी गांव के बीच चल रहे नहर के कार्य में पाइप लाइन टूट जाने के बाद उसे दुरुस्त नहीं कराया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/there-is-no-drinking-water-supply-in-bagtari-village-for-5-days/article-59944"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/bagtari-gaanv-me-5-dino-s-nhi-ho-rhi-payjal-supply...sultanpur,-kota-news-19-10-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>सुल्तानपुर। सुल्तानपुर क्षेत्र के बगतरी गांव में पिछले 5 दिनों से पेयजल की सप्लाई बाधित होने से ग्रामीणों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों को पीने का पानी लेने के लिए करीब 2 किलोमीटर दूर पानी लेने के लिए जाना पड़ रहा है। गांव में पेयजल पानी पीने योग्य नहीं होने के कारण ग्रामीणों को अधिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। बगतरी गांव में पेयजल का पानी नहीं होने के कारण अधिक समस्या बन गई है। क्योंकि गांव में बोरिंग व ट्यूबवेल में निकलने वाले पानी से फ्लोराइड अधिक होने के कारण पेट की बीमारियां हो जाती है। चाय बनाते समय दूध में डालने पर दूध भी फट जाता है। पानी पेयजल के योग्य नहीं होने के साथ ही खाना बनाने में भी काम में नहीं लिया जा सकता है। जिससे लोगों को अधिक समस्या का सामना करना पड़ रहा है। टूटी पाइप लाइन को नहीं करवाया दुरुस्त: बगतरी गांव में सुल्तानपुर के तालाब की पाल पर स्थित बोरिंग से जनता जल योजना के तहत पाइप लाइन द्वारा पानी सप्लाई किया जाता है। करीब 5 दिन पूर्व सुल्तानपुर से बगतरी गांव के बीच चल रहे नहर के कार्य में पाइप लाइन टूट जाने के बाद उसे दुरुस्त नहीं कराया गया। जिसके चलते पेयजल सप्लाई बाधित हुई। ग्रामीणों ने इस मामले में संबंधित अधिकारियों को भी अवगत करा दिया है। लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं होने से ग्रामीणों को पेयजल के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है।</p>
<p><strong>5 दिन में भी नहीं हुआ समस्या का समाधान </strong><br />ग्रामीण कमल सुमन, शिव शंकर सैनी, हेमंत, वार्ड पंच सुमित्रा बाई आदि का कहना है कि पेयजल की समस्या होने से ग्रामीण 5 दिनों से लगातार परेशान हो रहे हैं। इस मामले में संबंधित अधिकारियों को भी अवगत करा दिया गया है। लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हो सका है।</p>
<p>सुल्तानपुर क्षेत्र के बगतरी गांव में जनता जल योजना से बनी पानी की टंकी में पानी सप्लाई करने वाली पाइप लाइन टूट जाने के कारण 5 दिन से पानी नहीं आ पा रहा है। जिसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। समय पर मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलने के कारण ग्रामीण  परेशानियों का सामना कर रहे हैं।<br /><strong>- दुर्गा शंकर सैनी, ग्रामीण </strong></p>
<p>सुल्तानपुर से बगतरी के बीच में चल रहे नहर के निर्माण कार्य के दौरान पाइप लाइन टूट जाने से समस्या का सामना करना पड़ रहा है। इस ओर न तो किसी जनप्रतिनिधि का ध्यान है और ना ही किसी प्रशासनिक अधिकारी का। लोगों को 2 किलोमीटर दूर जाकर हैंडपंप से पानी लेकर आना पड़ रहा है।<br /><strong>- महावीर सुमन, ग्रामीण</strong></p>
<p>जब से जनता जल योजना का कार्य शुरू हुआ है, तब से पानी की समस्या बहुत कम आती थी। लोगों को पेयजल की सप्लाई आसानी से हो जाती थी। लेकिन 5 दिन बाद भी पाइप लाइन दुरुस्त नहीं होने के कारण समस्या अधिक बढ़ गई है।<br /><strong>- महावीर बैरवा, उपसरपंच  </strong></p>
<p>सुबह से ही लोगों को पेयजल की समस्या सताने लगती है जिसके तहत करीब 2 किलोमीटर दूर नहर के पास बने हेड पंप पानी लेने के लिए जाना पड़ता है।<br /><strong>- मनोज गौड, ग्रामीण</strong></p>
<p>सुल्तानपुर से बगतरी के बीच में सीएडी विभाग द्वारा तारों को दुरुस्त करने का कार्य किया जा रहा है। इसी दौरान जनता जल योजना की पाइप लाइन टूट गई। विभाग के अधिकारियों से पाइप लाइन को दुरुस्त करने की बात हो गई है। पाइप लाइन को शीघ्र ही दुरुस्त कराकर आम जनता की समस्या का समाधान किया जाएगा।<br /><strong>- मुकुट बिहारी मीणा, एईएन, जलदाय विभाग </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Oct 2023 17:50:14 +0530</pubDate>
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                <title>40 साल से लाखेरी गौण मंडी को विकास का इंतजार</title>
                                    <description><![CDATA[मंडी को 40 वर्ष हो जाने के बाद भी मंडी का अभी तक विकास नहीं होने के कारण क्षेत्र के किसान मंडी पर अपना माल बेचने में कतराते हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/lakheri-secondary-market-has-been-waiting-for-development-for-40-years/article-59876"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/40-saal-s-lakheri-gon-mandi-ko-vikas-ka-intezar...lakheri,-bundi-news-18-10-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>लाखेरी। लाखेरी रेलवे स्टेशन के समीप बनी कृषि उपज मंडी समिति के पाटन की गौण मंडी यार्ड लाखेरी में बार-बार हो रहे व्यवधान से किसानों के साथ आमजन को परेशान होना पड़ रहा है। मंडी की अव्यवस्थाओं के कारण व्यापारी और किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मंडी परिसर में अतिक्रमण के कारण किसानों को अपने माल रखने के लिए पूरी जगह तक नहीं मिल पाती है। व्यापारियों और किसानों को जगह की कमी के चलते अपने वाहनों को खड़ा करना तक मुश्किल हो जाता है। व्यापारियों को अपना माल बेचने के लिए प्लेटफार्म तक पूरे नहीं है। जानकारी के अनुसार 1980 से लाखेरी रेलवे स्टेशन के पास बनी मंडी पर वर्तमान में मंडी के आधा हिस्सा अतिक्रमण के चपेट में आने के कारण जहां किसानों को अपने माल को बेचने में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। दूसरी और व्यापारियों को कहीं प्रकार की तकलीफों से गुजरते हुए अपने खरीदे माल की हिफाजत करने में समस्या से गुजरना पड़ रहा है। मंडी के व्यापारी और अध्यक्ष राजेंद्र नंदवाना,दिलीप बालचंदानी, कांति प्रसाद गोयनका, ज्ञानचंद जैन, महेश कुमार, शंकरलाल बालचंदानी, घनश्याम गर्ग आदि ने बताया कि मंडी पर पूर्व में चार प्लेटफॉर्म बने हुए थे। जिनमें से एक प्लेटफार्म पर माल रखने के लिए छाया की व्यवस्था कर रखी थी बाकी प्लेटफार्म पर व्यापारी अपना माल खरीदते रहते थे लेकिन वर्तमान में मंडी पर कार्य कराने के दौरान तीन प्लेटफार्म स्वरूप बदलते हुए निचा करने के कारण प्लेटफॉर्म ही नहीं रहे जिससे व्यापारियों और किसानों को अपना माल बेचने और खरीदने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। व्यापारियों की दिक्कत ये है कि बगैर प्लेटफॉर्म माल कैसे खरीदें।</p>
<p><strong>मंडी परिसर में अतिक्रमण से काश्तकार भी परेशान</strong><br />मंडी पर मौजूद किसान प्रवीण कुमार गुर्जर, राम कल्याण गुर्जर, पूर्व सरपंच दयाचंद मीणा, बुद्धि प्रकाश मीणा, शंकरलाल मीणा, सत्यनारायण मीणा, जगदीश मीणा ,पानबाई, बजरंगी, शांति बाई आदि ने बताया की मंडी परिसर पर बने बाथरूम की सफाई नहीं होने के कारण बाथरूम में जाना भी मुश्किल का कार्य हो रहा है।  साथ ही मंडी के चारों ओर अतिक्रमण होने के कारण अपने माल को मंडी में छोड़कर बाहर भी नहीं जा सकते। इस प्रकार के हालातों से व्यापारियों के साथ किसानों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मंडी अधिकारी इन समस्याओं पर अपना ध्यान आकर्षित करें तो मंडी व्यापारियों के साथ किसानों को राहत मिल सके। </p>
<p><strong>किसान अतिरिक्त किराया चुकाकर दूसरे जगह ले जा रहे माल</strong><br />बुजुर्ग किसानों ने बताया कि मंडी को 40 वर्ष हो जाने के बाद भी मंडी का अभी तक विकास नहीं होने के कारण क्षेत्र के किसान मंडी पर अपना माल बेचने में कतराते हैं। जबकि व्यापारियों द्वारा मंडी पर किसानों को अपने माल के अच्छे भाव लगाए जाते हैं। उसके उपरांत भी मंडी की अव्यवस्था को देखते हुए किसान अपना माल अन्य जगह ले जाना पसंद करते हैं जिससे किसानों को अपने माल का अतिरिक्त किराया चुकाकर अन्य जगह ले जाना पड़ रहा है। मंडी की व्यवस्था ठीक हो मिले किसानों को राहत मिल सके। </p>
<p><strong>किसानों की पीड़ा</strong><br />युवा किसान प्र्रवीण गुर्जर का कहना है कि मंडी परिसर पर व्यवस्था की कमी के कारण किसानों को कहीं समस्याओं का सामना करना पड़ता है। मंडी में अव्यवस्थाओं का अंबार लगा हुआ है जिनकी सुधार की जरुरत है। व्यवस्था ठीक हो तो किसानों को राहत मिल सके। </p>
<p>बलराम गुर्जर ने बताया कि मंडी परिसर में बने बाथरूम की सफाई नहीं होने के कारण वहां पर टॉयलेट करने के लिए भी जगह तक नहीं होने के कारण महिलाओं  को अत्यधिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। </p>
<p>बबलू सैनी ने बताया कि मंडी परिसर में अतिक्रमण अधिक होने के कारण वहां पर वाहन चालकों को अपने वाहन खड़े करने में किसानों को माल रखने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। समस्या का समाधान हो तो किसानों को राहत मिल सके। </p>
<p>रामरतन सैनी का कहना है कि मंडी परिसर में किसानों को माल की सुरक्षा के हिसाब से काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। किसानों के लिए वहां पर सुरक्षा की व्यवस्था होनी चाहिए। </p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />अतिक्रमण हटाने के लिए रेवेन्यू कोर्ट में मामला चल रहा है बाकी व्यवस्था बिल्कुल सुचारू है। अगर किसी प्रकार की समस्या होगी तो देखते हैं। <br /><strong> - हरिओम बैरवा, मंडी सचिव लाखेरी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Oct 2023 17:44:15 +0530</pubDate>
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                <title>परेशानी: घर-घर में लोग पानी को तरस रहे</title>
                                    <description><![CDATA[पानी की टंकी में लीकेज के कारण पानी व्यर्थ बह रहा है जिससे ग्रामीणों का काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/problem--people-are-yearning-for-water-in-every-house/article-59463"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/sizte--(1)3.jpg" alt=""></a><br /><p>खेड़ारसूलपुर। जल जीवन मिशन के तहत ग्राम पंचायत खेड़ारसूलपुर में नवीन पेयजल पानी की टंकी बनाई पर लोग पानी को तरस रहे है। यहीं नहीं अब तक पाइप लाइन बिछाने का काम अब तक पूरा नहीं हो पाया है। जिससे अब तक भी कई घर में नलों में पानी नही पहुंच रहा है। जिसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है। हैरत की बात यह है कि दो साल गुजरने के बाद भी पानी की पाइप लाइन बिछाने का काम पूरा न होने से लोग पानी के लिए वंचित है। ग्रामीण सुनील राठौर ने बताया कि पिछले 2 साल से खेड़ारसूलपुर में जल जीवन मिशन के तहत पेयजल की टंकी निर्माण और पाईप लाइन बिछाने का कार्य किया जा रहा है जो आज तक भी पूरा नही हुआ है। पाइप लाईन बिछाने में टेंडर के अनुसार कार्य नही किया गया है एवं घटिया स्तर के पाइप गांव में बिछा दिए है जिसके कारण गांव में जगह-जगह पर पाइप लाइन फूट गई है। पानी की टंकी में लीकेज के कारण पानी व्यर्थ बह रहा है। ग्रामीणों का काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों को पानी तक नहीं मिल पा रहा है। </p>
<p>ग्रामीण रमेश गुर्जर ने कहा कि घरों में पानी न मिलने की समस्या का पीएचडी विभाग के सहायक अभियंता जतिश डांगल को कई बार  शिकायत की गई फिर भी सहायक अभियंता द्वारा कोई कार्यवाही नही की और ना ही ठेकेदार का कोई टेंडर के अनुसार कार्य करने के लिए पाबन्द नही किया गया और न ही कोई नोटिस दिया गया। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में रसूलपुर में कई घरों में अभी तक पानी नही पहुंचा है और जगह-जगह पर पाईप फूटी हुई है। जिसकी शिकायत सुनने वाले जिम्मेदार अधिकारी आंखें बंद कर बैठे है। लोगों ने जब इन समस्याओं के लिए कोई सुनवाई नही हो रही है। ग्रामीणों ने बताया कि पाइप लाइन डालने में भी मनमानी की जा रही है। जहां मकान ही नही है और पशुओं के बाड़े बने हुए है या किसी व्यक्ति को लाभ पहुंचाने के लिए नलों को पाइप लाइन बिछवा दी एवं नलों के कनेक्शन भी दिलवा दिए जिससे सरकारी पैसे का दुरुपयोग किया गया है। दूसरी ओर ग्रामीण हरिओम सैनी ने कहा कि पीएचडी विभाग सहायक अभियंता को हमारे घरों में नल कनेक्शन करने व पाइप लाइन बिछाने के लिए आग्रह किया गया परन्तु आज दिन तक हमारे घर प न तो पानी की पाइप लाइन बिछाई गई और न ही कोई कार्यवाही की गई। जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा अपने चहेतों को ही लाभ पहुंचाया जा रहा है। आम आदमी की सुनने वाला कोई नही है। वर्तमान में जल जीवन मिशन के तहत घर-घर पानी पहुंचाने का कार्य बंद पड़ा है। कई घरों में अभी तक पानी नही पहंच पाया है। गांव में जिन घरों में पानी आ गया और वहां पर ठेकेदार ने नल नही लगाए है जिसके कारण काफी परेशानी हो रही है।</p>
<p><strong>टंकी निर्माण व पाइप लाइन बिछाने में अनियमितता का आरोप</strong><br />उपसरपंच कपिल गुर्जर ने बताया कि जल जीवन मिशन के तहत मनमाने तरीके से कार्य किया गया है। शिकायत के बाद भी पीएचडी सहायक अभियंता द्वारा कोई कार्यवाही नही की,निर्माण कार्य में अधिकारी व ठेकेदार द्वारा मिलीभगत कर भ्रष्टाचार किया गया है,इसकी उच्च स्तरीय जांच एसीबी द्वारा जांच की जावे।</p>
<p>गांव में बड़े बाजार  में कई दिनों से पाइप लाइन फूटी हुई है जिसकी सम्बंधित अधिकारी को कई बार शिकायत करने के बाद भी ठीक नही हुई है,जिसका पानी रोड पर बहता रहता है। कीचड़ हो रहा है। तुरंत लीकेज ठीक कराया जाए और ठेकेदार पर घटिया पाइप बिछाने पर सख्त कार्यवाही की जावे।<br /><strong>- प्रवीण नामा, जनप्रतिनिधि लाडपुरा</strong></p>
<p>गांव में नवीन पानी की टंकी बनकर तैयार हो गई फिर भी आज दिन तक हमारे मोहल्ले के कई घरों में पानी नही पहुंचा है। ठेकेदार काम बंद कर के चला गया है। पता नही कब हमे नलों का पानी कब मिलेगा। जल्दी ही हर घर तक पानी पहुंचाया जाए।<br /><strong>- कैलाश सैनी, ग्रामीण</strong></p>
<p>गांव में घरों में कनेक्शन तो कर दिए है परंतु टेंडर के अनुसार नल नही लगाए गए है जिससे पानी रोड पर बहता रहता है,शीघ्र नल लगाया जाए। <br /><strong>- नंदबिहारी रावल, ग्रामीण</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />जल जीवन मिशन में बनी टंकी के तहत में समय-समय पर निरीक्षण किया गया है। घटिया निर्माण कार्य व भ्रष्टाचार के आरोप निराधार है,निर्माण में घटिया सामग्री नही लगाई है। टेंडर के अनुसार ही गुणवत्तापूर्ण पाईप लाईन बिछाई गयी है। गांव में घर-घर पानी पहुंचाने,लीकेज सही करने व घरों में नल टूटियां लगाने के लिए निर्देशित किया गया है शीघ्र ही कार्य पूरा कर दिया जाएगा।<br /><strong>- जतिश डांगल, सहायक अभियंता, पीएचडी विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Oct 2023 19:30:33 +0530</pubDate>
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                <title>कछुआ चाल से छिना सुकून, खरगोशी रफ्तार दे रहा तनाव</title>
                                    <description><![CDATA[जगह की तंगी से वाहन जाम में फंसने से लोग परेशान हो रहे हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/peace-taken-away-at-a-snail-s-pace--stress-moving-at-a-rabbit-s-pace/article-59461"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/kachhua-chal-s-china-sukoon,-khargoshi-raftaar-de-rha-tanaav...kota-news-13-10-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कछुआ और खरगोश की कहानी का निष्कर्ष असल जिंदगी में अलग-अलग रूप में चरितार्थ किया जाता है। इसका ताजा उदारहण संजय गांधी नगर के बाशिंदों पर देखने को मिल रहा है। हुआ यूं, विज्ञान नगर स्थित संजय नगर को डीसीएम रोड से जोड़ने वाले मुख्य मार्ग की क्षतिग्रस्त पुलिया का निर्माण कार्य 6 माह बाद भी पूरा नहीं हो सका। 3 महीने तक आवागमन पूरी तरह बंद रहा। लोगों को वैकल्पिक मार्ग के रूप में तंग गलियों से होकर गुजरना पड़ रहा है। बड़े वाहन तो कई किमी का चक्कर लगाकर डीसीएम रोड तक पहुंच रहे हैं। निर्माण की कछुआ चाल से रहवासियों की दिनचर्या प्रभावित हो गई। वहीं, गलियों में खरगोश की रफ्तार से दौड़ते वाहनों के शोर-शराबे से बच्चे पढ़ाई नहीं कर पा रहे। क्षेत्रवासियों के आक्रोश को देखते हुए ठेकेदार ने पुलिया की दूसरी साइड से वैकल्पिक रूप से ट्रैफिक शुरू किया लेकिन यहां जगह की तंगी से वाहन जाम में फंसने से लोग परेशान हो रहे हैं। </p>
<p><strong>छिन गया सुकून, दिनभर जाम  </strong><br />क्षेत्रवासी श्याम सुंदर ने बताया कि पुलिया जुलाई माह में अचानक क्षतिग्रस्त हो गई थी। पुलिया के ऊपर डामर की सड़क भीतर घंस गई, लेकिन साइड से लोगों का आना-जाना शुरू था। कई दिनों तक पुलिया की तरफ ध्यान ही नहीं दिया गया। लोगों की शिकायत के बाद पुलिया का निर्माण शुरू होने लगा तो यहां जलदाय विभाग की पाइप लाइन फूट गई। इस कारण निर्माण कार्य शुरू होकर फिर अटक गया। जब निर्माण शुरू हुआ तो रास्ता बंद कर दिया गया, जो तीन माह तक बंद ही रहा। इस दरमियान वाहन चालक व लोग परेशान रहे। लोगों के आक्रोश के चलते ठेकेदार को पुलिया के दूसरी साइड से रास्ता बहाल करना पड़ा। लेकिन जगह की तंगी से यहां दिनभर जाम लगा रहता है।  </p>
<p><strong>3 माह गलियों से गुजरा ट्रैफिक </strong><br />दुकानदार राजेश टेलर ने बताया कि इस मार्ग से डीसीएम रोड जाने के लिए एक मात्र वैकल्पिक रास्ता संजय नगर सब्जीमंडी के पास गली से होकर जाता है। ऐसे में तलवंडी, डकनिया, विज्ञान नगर, संजय नगर सहित अन्य इलाकों से आने वाला ट्रैफिक इस तंग गली से गुजरने लगा। जिससे इन इलाकों के बाशिंदों की मुसीबत हो गई है। दुपहिया वाहनों की रेलमपेल सुबह से लेकर देर रात तक रहती है। गली में कोई कार या आॅटो घुस जाए तो जाम लग जाता है। </p>
<p><strong>घरों में कैद हो गए बच्चे</strong><br />गली में रहने वाले किराना संचालक अशोक बैरवा ने बताया कि मुख्य मार्ग का सारा यातायात तीन माह तक हमारी गली से ही डायवर्ट हुआ। दो दिन पहले ही लोगों के गुस्से के कारण ठेकेदार ने पुलिया का छोटा सा हिस्सा खोलकर वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था की। लेकिन जाम की स्थिति होने के कारण अभी भी वाहन हमारी गली से ही गुजर रहा है। जिससे बच्चों का गली में खेलना बंद हो गया है। बच्चे तो घरों में कैद हो गए हैं। डर लगता है कोई वाहन चालक टक्कर न मार दे। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />पांच-छह माह से पुलिया का निर्माण कार्य चल रहा है, जो अब तक पूरा नहीं हुआ। गलियों से ट्रैफिक निकलने से बाशिंदे परेशान हो रहे हैं, वहीं, मुख्य मार्ग पर दुकानदारों का व्यवसाय प्रभावित हो गया। उनका किराया निकालना तक मुश्किल हो गया। हालांकि, दो दिन पहले ही पुलिया की दूसरी साइड से वैकल्पिक मार्ग शुरू किया है लेकिन चौड़ाई कम होने से जाम के हालात बने रहते हैं। अनंत चतुदर्शी से पहले अधिकारियों ने एक महीने में पुलिया का काम पूरा करने को कहा था, करीब 20 दिन बीत गए यदि  10 दिन बाद भी काम पूरा नहीं हुआ तो अधिकारियों के खिलाफ प्रदर्शन कर धरना देंगे।                        <br /><strong>  - गफ्फार हुसैन अंसारी, पार्षद, वार्ड-40</strong></p>
<p><strong>6 माह से व्यापार प्रभावित</strong><br />मिष्ठान भंडार के संचालक राकेश नामा बताते हैं, करीब 7 माह से पुलिया का निर्माण कार्य चल रहा है, जो अब तक पूरा नहीं हो सका। वाहनों का आवागमन नहीं होने से ग्राहक दुकान तक नहीं पहुंच पाते। पहले एक दिन में 200 से ज्यादा कचौरी बिक जाती थी लेकिन इन दिनों 50 भी नहीं बिक रही। वहीं, धूल के गुबार उड़ने से मिठाइयां खराब हो रही है। प्रशासन को कार्य जल्द पूरा करवाना चाहिए। </p>
<p><strong>सांस की हो गई बीमारी</strong><br />74 वर्षीय बुजुर्ग बद्रीलाल पांचाल बताते हैं, गली में ट्रैफिक जाम होने से वाहनों से निकलने वाले धुएं से श्वांस की बीमारी हो गई। डॉक्टर को दिखाने के लिए घर से निकलना भी दूभर हो गया। हमारे वाहन भी घर से 2 किमी दूर बस स्टैंड पर खड़े करने पड़ते हैं। फल-सब्जीमंडी जाने वाले वाहन भी रातभर यहीं से दौड़ते हैं। जिसके शोर से नींद तक नहीं आती। </p>
<p><strong>नहीं कर पा रहे परीक्षा की तैयारी</strong><br />10वीं का छात्र जतिन ने बताया कि पुलिया का निर्माण कार्य बहुत ही धीमी गति से हो रहा है। वाहनों का शोर-शराबे से दिनभर पढ़ाई बाघित रहती है। देर रात तक वाहनों का आवागमन जारी रहता है। 11 दिसम्बर से अर्द्धवार्षिक परीक्षा है और पढ़ाई का नुकसान हो रहा है। हालात यह है, न तो चैन से सो पाते हैं और न ही पढ़ाई कर पाते। </p>
<p><strong>पढ़ाई का हो रहा नुकसान</strong><br />12वीं की छात्रा खुशी शुक्ला कहतीं हैं, दिनभर में एक भी ऐसा समय नहीं मिल रहा जब पढ़ाई कर सके। मुख्य मार्ग पर निकाले गए वैकल्पिक मार्ग पर जाम लगा रहने से वाहनों का शोर इतना होता है कि पढ़ाई करना संभवन नहीं होता। रात 12 बजे के बाद ही पढ़ाई करनी पड़ती है लेकिन सुबह स्कूल जाने में देरी हो जाती है। </p>
<p><strong>रसोई से लेकर कमरों तक धूल</strong><br />पुलिया के पास रहने वाली श्यामा शुक्ला का कहना है कि साफ-सफाई के बाद भी घर में धूल की परतें जमी रहती है। सुबह का खाना दोपहर को बनता है क्योंकि इस समय मजदूर काम रोक लंच पर जाते हैं। वहीं, सड़क पर मिट्टी, गिट्टी व क्रेशर का ढेर लगा हुआ है। वहां के साथ घरों में धूल जमा हो रही है। अफसरों को साइड पर आकर कार्य की मॉनिटरिंग करनी चाहिए तभी क्षेत्रवासियों की परेशानी समझ आएगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Oct 2023 15:36:08 +0530</pubDate>
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                <title>गड्ढों में तब्दील हुई सुल्तानपुर-बगतरी संपर्क सड़क </title>
                                    <description><![CDATA[चलते वाहन चालकों व यात्रियों को हिचकोले भरा सफर तय करना पड़ रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/sultanpur-bagtari-link-road-turned-into-potholes/article-58958"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/gaddo-me-tabdil-hui-sultanpur-bagtari-sampark-sadak...sultanpur,-kota-news-07-10-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>सुल्तानपुर। बगतरी गांव को सुल्तानपुर नगर से जोड़ने वाल संपर्क सड़क पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। सड़क पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। सड़क पर गिट्टी हो जाने के कारण ग्रामीणों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं।  वाहन चालकों व ग्रामीणों ने बताया कि बगतरी गांव की संपर्क सड़क जगह-जगह से कट चुकी है। जिससे दो पहिया वाहन चालकों को बैलेंस बनाने में काफी मुश्किल हो रही है। बाइक चालकों का बैलेंस बिगड़ जाने के कारण आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं। गिरकर चोटिल होते रहते हैं। वाहन चालकों व ग्रामीणों ने बताया कि इस मामले में सरपंच चंपा बाई सहित संबंधित अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों को भी अवगत करा दिया है। लेकिन समस्या का कोई समाधान नहीं हो सका है। </p>
<p><strong>एक्सप्रेस हाइवे के निर्माण के दौरान बढ़ी समस्या</strong><br />सरपंच चंपाबाई का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र की सड़कों की दशा नहीं सुधर रही है। जिसके चलते वाहन चालकों व यात्रियों को हिचकोले भरा सफर तय करना पड़ रहा है। संपर्क सड़कों की हालत और भी बदतर होती जा रही है। जब से 8 लाइन एक्सप्रेस हाइवे का कार्य चालू हुआ है, तब से समस्या और अधिक बढ़ गई है। क्योंकि बड़े वाहन चलने के कारण रोड पूरी तरह से जर्जर अवस्था में पहुंच चुके हैं। लेकिन अभी तक दुरुस्त नहीं कराया गया है।</p>
<p><strong>सर्दी के मौसम में बढ़ेगी समस्या </strong><br />दुर्गाशंकर सैनी का कहना है कि शीघ्र ही सर्दी का मौसम आने वाला है। सर्दी के मौसम में कोहरे के चलते दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है।</p>
<p><strong>बढ़ रही हैं दुर्घटनाएं </strong><br />शिव शंकर सैनी, महावीर, हेमंत, वार्ड पंच सुमित्रा बाई, उपसरपंच महावीर मेहरा ने बताया कि सड़क जर्जर होने के कारण दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं। सुल्तानपुर से बगतरी की सड़क पूरी तरह से उखड़ चुकी है। जिसके चलते वाहन चालकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बाइक एवं साइकिलों से आने जाने वाले लोगों को अधिक परेशानी का सामना करना पड़ता है।</p>
<p>सुल्तानपुर से बगतरी सड़क करीब 10 वर्षों से जर्जर अवस्था में है। पहले बाइक सवारों को परेशानी नहीं होती थी। क्योंकि इस सड़क पर मरड़ा डला हुआ था। लेकिन जब से भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत 8 लाइन का कार्य शुरू हुआ है, तब से डंपर व बड़े वाहनों की अधिकता के चलते सड़क पूरी तरह से जर्जर हो चुकी है।<br /><strong>- अंकुर नंदवाना, ग्रामीण</strong></p>
<p>बारिश के दिनों में इन जर्जर सड़कों पर पानी भर जाने से आवागमन दुश्वार हो जाता है। सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढों के कारण आए दिन वाहन चालक दुर्घटनाग्रस्त होकर घायल होते रहते हैं।<br /><strong>- रितिक नंदवाना, जनप्रतिनिधि </strong></p>
<p>बगतरी संपर्क सड़क का पूर्व में टेंडर हो चुका था। ठेकेदार ने कार्य नहीं किया। इसलिए टेंडर विड्रो करके शीघ्र ही काम शुरू कराए जाएंगे।<br /><strong>- कमल मीणा, एईएन, पीडब्ल्यूडी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Sat, 07 Oct 2023 18:11:00 +0530</pubDate>
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                <title>तीरंदाजी प्रतियोगिता में मनमानी, टैलेंड का पिछड़ रहा लक्ष्य</title>
                                    <description><![CDATA[संस्थान से गए हुए काफी बच्चे ऐसे थे जो राज्य स्तरीय प्रतियोगिता खेल सकते थे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/arbitrariness-in-archery-competition--target-of-talent-lagging-behind/article-57444"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/तीरंदाजी-प्रतियोगिता-में-मनमानी,-टैलेंड-का-पिछड़-रहा.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। राजस्थान शिक्षा विभाग द्वारा जिला स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है जिसमें अनेक प्रकार के खेल जैसे बेडमिन्टन, बॉक्सिंग, तैराकी और बॉस्केटबॉल आदि का आयोजन किया जा रहा है। लेकिन विभागीय अव्यवस्था के कारण खिलाड़ियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गत दिनों हुई तीरंदाजी प्रतियोगिता में तो मनमानी का स्तर यह था कि बच्चें के तीन-तीन हजार के तीर टूट रहे थे और आयोजक थे कि अपनी मनमानी पर उतरे थे। दरअसल प्रतियोगिता ऐसे स्थान पर थी जहां टार्गेटके पीछे दीवार थी। दीवार से टकराकर महंगे तीर टूट रहे थे। जब कि तीरंदाजी के लिए टार्गेट के पीछे खाली स्थान होना चाहिए जिससे तीर कितनी भी दूरी पर जाकर गिर सके। </p>
<p><strong>3 हजार का है एक तीर</strong><br />प्रतियोगी लक्ष्यराज(परिवर्तित नाम) ने बताया कि इस प्रतियोगिता में तीर और बाण उनके अपने थे जो उन्हें खुद ही ले जाने थे। एक तीर की कीमत करीब 3 हजार रुपए थी और बच्चों के ऐसे तीन से चार तीर खराब हो गए। लक्ष्यराज का कहना है कि इसकि जिम्मेदारी लेने वाला भी कोई नहीं है जो नुकसान कि भरपाई कर सके। </p>
<p><strong>9,10 व 11 सितम्बर को हुआ था आयोजन</strong><br />कोटा जिला स्तरीय खेल प्रतियोगिता के तहत हुई अन्डर 17 तीरंदाजी प्रतियोगिता में यह अनियमिताएं पाई गई। प्रथम चरण कि तीरंदाजी प्रतियोगिताओं का आयोजन शिक्षा विभाग द्वारा 9,10 व 11 सितम्बर को  एक निजी स्कूल में किया गया था जहां खिलाड़ीयों को इन अनियमितताओं के चलते निराश होना पड़ा। श्री पंचमुखी आर्चरी अकादमी के कोच बृजपाल सिंह सोलंकी का कहना है कि उनके  करीब बीस बच्चों ने इस प्रतियोगिता में भाग लिया था जहां बच्चों को काफी परेशानीं का सामना करना पड़ा। बच्चों का कहना है कि जब वो आयोजन स्थल पर गए तो पाया कि बटर जिसे निशाना भी कहा जाता है उसके पीछे बफर के तौर पर कम से कम 20 मीटर कि खाली जगह रखनी होती है ताकि अगर कोई तीर निशाने से चूक भी जाए तो कहीं टकराए नहीं और खराब ना हो लेकिन आयोजन स्थल पर ऐसा कुछ नहीं था। निशाने को दीवार से कुछ फीट दूरी पर ही लगाया गया था। आगे बच्चों ने बताया कि बफर नहीं होने के कारण उनके तीर निशाना चूकने पर दीवार से टकराकर टूट गए और  वो प्रतियोगिता में आगे नहीं खेल पाए। </p>
<p><strong>प्रभारी ने झाड़ा पल्ला</strong><br />इस मामले को लेकर जब तीरंदाजी प्रतियोगिता प्रभारी संगीता शर्मा से कोच बृजपाल सिंह ने बात कि तो उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। प्रभारी शर्मा ने कहा कि जैसा विभाग ने व्यवस्था की है में उसी में प्रतियोगिता करा सकती हूं। अगर आपको कोई समस्या है तो आप विभाग में शिकायत कर सकते हो यह कहते हुए पल्ला झाड़ लिया। </p>
<p><strong>नियमों के चलते राज्य स्तरीय प्रतियोगिता से चूके</strong><br />कोच बृजपाल सिंह सोलंकी का कहना है कि संस्थान से गए हुए काफी बच्चे ऐसे थे जो राज्य स्तरीय प्रतियोगिता खेल सकते थे। मगर प्रशासन के नियमों व अनियमिताओं के चलते चूक गए। सिंह ने बताया कि अनियमिताओं से कई बच्चे तीर टूट जाने के कारण राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए क्वालिफाई होने से चूक गए क्योंकि प्रशासन ने तीर के टूट जाने कि अवस्था में प्रतिभागियों के लिए किसी प्रकार के नियम नहीं बनाए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 Sep 2023 17:38:19 +0530</pubDate>
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                <title>सड़क गड्ढों में हुई गुम, हिचकोले खा रहे वाहन </title>
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/roads-lost-in-potholes--vehicles-hesitating/article-57197"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/gadhon-mein-khoe-sadaken,-hichakole-khate-vahan...baran-harnavdashji-15-09-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>हरनावदाशाहजी।  हरनावदाशाहजी से कलमोदिया मार्ग की सड़क गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। जिससे वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अकलेरा मार्ग पर हरनावदाशाहजी से कलमोदिया तक की सड़क पर लंबे से समय से गड्ढे हो रहे हैं। इन गड्ढों को समय से न भरे जाने की वजह से यहां काफी सड़क पूरी तरह से गड्ढों में गुम हो गई है। कुछ यही स्थिति कस्बे में अकलेरा रोड़ मुख्य मार्ग पर है। यहां भी सड़क काफी खुद गई है।  यहां वाहन हिचकोले लेकर चल रहे हैं। वाहन चालकों को इससे परेशानी हो रही है। दुर्घटना का भी डर बना रहता है। इस सड़क से कस्बे के आमजन से लेकर जनप्रतिनिधि और अधिकारी आए दिन गुजरते रहते है, लेकिन गड्ढों को लेकर कोई पहल नहीं करता। सड़क पर पर बने गड्ढे इस मार्ग से गुजरने वाले राहगीरों के लिए परेशानी का सबब बने हुए है। कस्बे की सड़कों के गड्ढों की वजह से लोगों का चलना दूभर हो गया है।</p>
<p><strong>वाहन चालक गिरकर हो जाते है घायल</strong><br />सड़क पर हो रहे गड्ढों से बचकर वाहन निकालने के प्रयास में वाहन चालक गिरकर घायल हो रहे है। सबसे खराब दशा कस्बे के विवेकानंद सर्किल से अकलेरा व छीपाबडौद के बीच सड़क की है, जो पूरी तरह से गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। जिनसे बचाने के चक्कर में वाहन चालक असंतुलित होकर गिर जाते हैं। अकलेरा मार्ग की सड़क पर होने वाले गड्ढों को नहीं भरा जा रहा है, जिससे उनका आकार बढ़ता जा रहा है और वे बदहाल होती जा रही है, जिससे इन पर गुजरने वाले राहगीर परेशान है। जबकि जिम्मेदार अफसर इनकी मरम्मत पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। परिणामस्वरूप लोगों की समस्या का समाधान नहीं हो रहा है। कस्बा निवासी हरिओम कारपेंटर, लोकेश शर्मा, सुनील सोनी ने बताया कि अकलेरा मार्ग पर रोजाना अधिक संख्या में आमजन का आना-जाना लगा रहता है। लेकिन हरनावदाशाहजी से कलमोदिया तक सड़क पर गड्डो से तब्दील हो जाने से आमजन को परेशान होना पड़ रहा है।  </p>
<p> <strong>जिला परिषद सदस्य प्रतिनिधि सिंह ने अधिकारियों को लगाई लताड़ </strong><br />छबड़ा-छीपाबडौद विधान सभा क्षैत्र के वरिष्ठ भाजपा नेता ओर जिला परिषद सदस्य प्रतिनिधि वीरभद्र सिंह उर्फ निप्पू बना गुरूवार को परिवर्तन यात्रा को लेकर हरनावदाशाहजी दौरे पर थे। कलमोदिया से हरनावदाशाहजी सड़क के हालात देखकर संबंधित अधिकारियों को मौके से ही फोन पर लताड़ लगाई और जल्द से जल्द सड़क का कार्य शुरू करवाने को कहा। निप्पू बना ने बताया कि बारां जिले के अंतिम छोर पर स्थित हरनावदा शाहजी कस्बे की मुख्य सड़क से अकलेरा मार्ग की और कलमोदिया गांव तक की सड़क पिछले कई महिनों से क्षतिग्रस्त होने के कारण वाहन चालक सहित आमजन को तकलीफों का सामना करना पड़ रहा है।   हरनावदा शाहजी मुख्य सड़क से कलमोदिया गांव तक लगभग दस किलोमीटर तक सड़क पर जगह-जगह गहरे गड्ढ़े हो जाने के कारण आमजन को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। </p>
<p><br />हरनावदाशाहजी से कलमोदिया सड़क की स्वीकृती मिले हुए अरसा गुजर गया। पहले बजट कमी का बहाना और अब बारिश का बहाना बनाकर संबंधित अधिकारियों द्वारा टालमटोल किया जा रहा है। कहीं ना कहीं हमे तो इसमें राजनीतिक खेल नजर आता है। इस खेल के चक्कर में आमजन की आफत पर बन आई हुई है।<br /><strong>- सुरेश रेगर, आॅटो चालक। </strong></p>
<p>सड़क पर बडे गहरे गड्ढे हो रहे हैं। अब तो सड़क का डामर भी नजर नहीं आता। ठेकेदार को जल्द कार्य शुरू करना चाहिए ताकि आम जनता को राहत मिल सके।<br /><strong>- प्रदीप चक्रधारी, ग्रामीण। </strong></p>
<p>हरनावदाशाहजी से कलमोदिया की बदहाल सड़क पर आए दिन हादसे का अंदेशा बना रहता है। वहीं सालरखो की सड़क भी स्वीकृत हुए  लगभग एक वर्ष बीत गया लेकिन अभी तक सड़क निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका। राहगीरों को पैदल चलने में भी परेशानी होती है।<br /><strong>- निजाम अली, पूर्व सदर, जामा मस्जिद। </strong></p>
<p>मैं एक दिन इस सड़क मार्ग से गुजरते समय वाहन से गिरकर घायल हो गया था। जल्द ही प्रशासन को समस्या का समाधान करना चाहिए। <br /><strong>- आशु मंसूरी, वाहन चालक। </strong><br />    <br />टेंडर की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। अभी सड़क किनारे खेतों में फसल होने से यह कार्य फसल कटाई के बाद शुरू होगा। <br /><strong>- नरेन्द्र सिंह चौधरी, एईएन, पीडब्ल्यूडी छबड़ा। </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Fri, 15 Sep 2023 17:14:29 +0530</pubDate>
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