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                <title>winter season - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>जयपुर एयरपोर्ट पर उड़ानों का संचालन प्रभावित, यात्रियों को परेशानी</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर एयरपोर्ट पर कोहरे के कारण लगातार चौथे दिन चंडीगढ़ फ्लाइट रद्द रही। दुबई और मुंबई जाने वाली उड़ानें भी घंटों देरी से संचालित हुईं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/flight-operations-at-jaipur-airport-affected-problems-for-passengers/article-139775"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/airport.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जयपुर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर लगातार चौथे दिन उड़ानों के संचालन पर असर देखने को मिला। इंडिगो एयरलाइंस की जयपुर–चंडीगढ़ फ्लाइट एक बार फिर रद्द कर दी गई। यह फ्लाइट रोज सुबह 5:50 बजे जयपुर से चंडीगढ़ के लिए रवाना होती है, लेकिन लगातार चौथे दिन रद्द होने से सुबह यात्रा करने वाले यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई यात्री एयरपोर्ट पर समय से पहले पहुंच गए, जिन्हें बाद में फ्लाइट रद्द होने की जानकारी मिली।</p>
<p>इसके अलावा स्पाइसजेट की इंटरनेशनल फ्लाइट भी देरी से संचालित हुई। जयपुर से सुबह 9:40 बजे दुबई जाने वाली स्पाइसजेट की फ्लाइट आज करीब 50 मिनट की देरी से सुबह 10:30 बजे रवाना हो सकेगी। वहीं इंडिगो की जयपुर–मुंबई फ्लाइट भी निर्धारित समय से करीब तीन घंटे लेट रही। यह फ्लाइट सुबह 10:55 बजे के बजाय दोपहर 1:55 बजे मुंबई के लिए रवाना होगी। लगातार फ्लाइट रद्द और लेट होने से यात्रियों में नाराजगी देखी जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 16 Jan 2026 14:20:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>वायु प्रदूषण : धुएं-धूल की मार, आंखें हुई लाचार, एलर्जी जैसी समस्याएं, सर्दी के मौसम में वायु प्रदूषण के कण हवा में</title>
                                    <description><![CDATA[बच्चों और बुजुर्गो को सर्द मौसम में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/air-pollution--smoke-and-dust--eyes-become-vulnerable--and-problems-like-allergies--air-pollution-particles-in-the-air-during-the-winter-season/article-132514"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/500-px)5.png" alt=""></a><br /><p>कोटा ।  शहर में बढ़ते वायु प्रदूषण ने आमजन की सेहत पर गंभीर प्रभाव डालना शुरू कर दिया है। पिछले एक सप्ताह में विशेष तौर पर आंखों से जुड़े मरीजों की संख्या में 20-30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सरकारी अस्पतालों से लेकर निजी नेत्र चिकित्सालयों तक रोजाना ऐसे दर्जनों मरीज पहुंच रहे हैं, जिन्हें आंखों में जलन, लालिमा, लगातार पानी बहना, सूखापन और एलर्जी जैसी समस्याएं हो रही हैं। दिवाली के बाद से ही शहर में वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ता जा रहा है। सर्दी के मौसम में वायु प्रदूषण के कण हवा में तैरते रहते हैं। जिससे वायु दिनभर प्रदूषित बनी रहती है। इसका असर लोगों के स्वास्थ्य पर हो रहा है। प्रदूषण नियंत्रण मंडल के आंकड़ों के अनुसार शहर में शुक्रवार को एक्यूआई यानी वायु गुणवत्ता सूचकांक 176 दर्ज किया गया है। यानी यहां की हवा जहरीली हो चुकी है। </p>
<p><strong>प्रदूषण आंखों पर ऐसे डालता है असर</strong><br />नेत्र विशेषज्ञों के अनुसार सर्दी के मौसम में हवा में मौजूद पीएम 2.5 और पीएम 10 जैसे छोटे कण बहुत खतरनाक होते हैं। यह कण इतने छोटे होते हैं कि सीधे आंखों की सतह तक पहुंचकर कंजंक्टिवा और कॉर्निया पर जमा हो जाते हैं। इससे सूजन, खुजली, जलन और पानी आने जैसे समस्या शुरू हो जाती है। वहीं लंबे समय तक ऐसे माहौल में रहने से ड्राई आई सिंड्रोम, एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस और यहां तक की आंखों के इंफेक्शन का खतरा भी बढ़ जाता है। डॉक्टरों का मानना है कि बच्चों और बुजुर्गों में यह असर ज्यादा दिखाई देता है, क्योंकि उनकी आंखें ज्यादा संवेदनशील होती है। इन दिनों बुजुर्ग और बच्चे आंखों की समस्या लेकर अस्पतालों में अधिक आ रहे हैं। इनकी संख्या में रोजाना इजाफा होता जा रहा है।</p>
<p><strong>धूल-धुएं की अधिक मात्रा बनी परेशानी</strong><br />शहर के विभिन्न क्षेत्रों में पीएम 2.5 और पीएम 10 कणों की मात्रा सामान्य स्तर से अधिक दर्ज की जा रही है। ट्रैफिक का बढ़ता दबाव, निर्माण कार्यों की धूल और मौसम में बदलाव के चलते हवा में धूलकणों की मात्रा लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह महीन कण सीधे आंखों की ऊपरी परत को प्रभावित करते हैं, जिससे संक्रमण और कॉर्निया को नुकसान तक हो सकता है। इस माहौल में जहां लोगों में सांस संबंधी समस्याएं भी बढ़ जाती है, वहीं बड़ी संख्या में लोग आंखों में जलन, चुभन और पानी आने जैसी दिक्कतों से भी जूझने लगते है। इस कारण बच्चों और बुजुर्गो को सर्द मौसम में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।</p>
<p><strong>आंखों को हेल्दी रखने के लिए अपनाएं यह उपाय</strong><br />- प्रदूषण में जब भी आप बाहर निकले अपनी आंखों को धूल और धुएं से बचाए। इसके लिए सनग्लासेस या बड़े साइज के काले चश्मे यूज करें। जिससे हवा सीधे आंखों में न जाए और एलर्जी और जलन से बचाव हो।<br />- बाहर फैली प्रदूषित हवा आंखों की नमी को कम कर देती है। जिससे आंखों में जलन और खुजली जैसी समस्याएं हो जाती है। इससे बचने के लिए आप दिन में 2 से 3 बार लुब्रिकेटिंग आई ड्रॉप आंखों में डालें।<br />- अगर पॉल्यूशन के समय में आपको भी आंखों में जलन और सूजन महसूस हो तो आपको आंखों को दिन में दो बार ठंडे पानी से धोना चाहिए. इसके अलावा आप आंखों पर आईस पैक सिकाई भी कर सकते हैं। <br />- कई बार ज्यादा धुएं की वजह से आंखों में जलन बढ़ जाती है और चुभन की भी शिकायत रहती है। ऐसे में लोग आंखों को रगड़ने लगते हैं। ऐसे में कोशिश करें कि आंखों को रगड़े नहीं बल्कि उन्हें पानी से धो लें।</p>
<p><strong>एक्यूआई यह देता है संकेत</strong><br />अच्छा यानि कोई दिक्कत नहीं - 0-50 <br />संतोषजनक  -  51-100<br />बाहर जाने से बचें - 101-200<br />श्वसन के मरीजों को तकलीफ - 201-300<br />लम्बे बीमार रोगियों को दिक्कत - 301-400<br />बाहर बिलकुल नहीं निकलें - 401-500</p>
<p>प्रशासन निर्माण स्थलों पर पानी का छिड़काव करवाएं, धूल नियंत्रण के नियमों का पालन सुनिश्चित करें और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर कड़ी कार्रवाई करें। तभी शहर की हवा और आंखों की सेहत दोनों सुधर पाएंगी। <br /><strong>- राजू कुमार, पर्यावरणविद</strong></p>
<p>बच्चों और बुजुर्गों में आंखों की प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। धूल और प्रदूषित हवा के लगातार संपर्क में रहने से इन वर्गों में आंखों की समस्या तेजी से बढ़ रही है। बाहर निकलते समय चश्मे का उपयोग करें, आंखों को बार-बार धोएं और संक्रमण बढ़ने पर तुरंत चिकित्सा लें।<br /><strong>- डॉ. सुधीर गुप्ता, नेत्र रोग विशेषज्ञ  </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 15 Nov 2025 15:21:01 +0530</pubDate>
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                <title>सर्दी के मौसम में भी पेयजल की किल्लत</title>
                                    <description><![CDATA[जलदाय विभाग ने अभी तक नहीं डाली पाइप लाइन ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/water-shortage-even-in-winter-season/article-101833"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/257rtrer-(2)27.png" alt=""></a><br /><p>सुकेत। सुकेत के महावीर कॉलोनी वासियों को जलदाय विभाग की लापरवाही से सर्दी के मौसम में भी पेयजल की किल्लत से जूझना पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार जलदाय विभाग ने करीब एक साल पहले महावीर कॉलोनी में पाइप लाइन डालने के लिए खुदाई की थी। विभाग ने बस्ती में पीने का पानी पहुंचाने के लिए पाइप भी डाल दिए थे। लेकिन एक साल से ये पाइप ज्यों के त्यों पड़े हुए हैं। कॉलोनी वासियों ने बताया कि बस्ती में नल कनेक्शन नहीं होने से पूरे मोहल्ले वालों को पीने के पानी की समस्या से जूझना पड़ता था। जलदाय विभाग ने मोहल्ले वालों की इस गंभीर समस्या को देखते हुए नल कनेक्शन के लिए एक साल पहले खुदाई करके पाइप डाल दिए। जिससे मोहल्ले वासियों को भी आस बंधी कि अब पानी की समस्या का समाधान हो जाएगा। लेकिन जलदाय विभाग ने अभी तक लाइन नहीं बिछाई। खोदी गई जमीन को वापस भर दिया और पाइप खुदाई वाली जगह पर ही छोड़ दिए। बीच रास्ते में पड़े हैं पाइपबीच रास्ते में पड़े हैं पाइपहालांकि जलदाय विभाग द्वारा पाइप डाले एक साल हो गया, लेकिन बस्ती वालों को अभी भी आस कि इन पाइपों के माध्यम से हमारे घरों तक पानी आ जाएगा। लेकिन एक साल से घरों के बाहर पाइप ही देखते हैं। जलदाय विभाग ने इन पाइपों को बीच रास्ते में पटक रखा है। जिनके कारण आएदिन कोई ना कोई व्यक्ति चोटिल हो जाता है।</p>
<p><strong>जनप्रतिनिधियों को भी करवा चुके हैं अवगत</strong><br />मोहल्ले वासियों ने बताया कि समस्या समाधान के लिए जनप्रतिनिधियों को अनेकों बार अवगत कराया गया है। लेकिन अभी तक समस्या का समाधान नहीं हुआ है। जबकि नगर पालिका चेयरमैन भी इसी मोहल्ले में रहते हैं। इनके घर के सामने से ही होकर पाइप लाइन डाली जाएगी। परंतु इनके पास भी इस समस्या का कोई समाधान नहीं है।</p>
<p><strong>इनका कहना</strong><br /> करीब दस पाइप इस मोहल्ले में डालने थे। लेकिन वो भी नहीं डाले गए। यह पाइप पड़े-पड़े खराब हो गए हैं। इनका उपयोग होता तो करीब आधी बस्ती की पानी की समस्या का उचित समाधान हो जाता। इसके बारे में जन प्रतिनिधियों को कई बार अवगत करवा दिया गया है। लेकिन समाधान नहीं हो सका।<br /><strong>-कमलेश मेहर, मोहल्लावासी</strong></p>
<p> पाइप लाइन का कार्य जल्द करवाया जाएगा। गर्मी शुरू होने तक पानी घर-घर पहुंचाए जाने के प्रयास कर रहे हैं। नए अधिकारी के आदेश हो चुके हैं। इनके आने से समस्याओं का समाधान होगा।<br /><strong>-बच्चू सिंह मीणा, सहायक अभियंता, जलदाय विभाग, रामगंजमंडी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Jan 2025 16:01:35 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>हजारों किमी दूर से कोटा पहुंचे स्टेपी ईगल</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रीय पक्षी स्टेपी ईगल शहर में बड़ी संख्या में नजर आ रहे हैं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/steppe-eagle-reached-kota-from-thousands-of-km-away/article-99798"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/747474.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। सर्दी के तेवर तीखे होते ही विदेशी परिंदों का कोटा आना शुरू हो गया है। कजाकिस्तान, रूस, मंगोलिया, चीन से हजारों किमी का सफर तय कर भोजन की तलाश में आते हैं। पांच महीने के प्रवास के बाद वापस अपने मुल्क की ओर लौट जाते हैं। दरअसल, इन दिनों मिस्त्र का राष्ट्रीय पक्षी स्टेपी ईगल शहर में बड़ी संख्या में नजर आ रहे हैं। यह बाज की प्रजाति और शिकारी पक्षी है, जो हवा में काफी उंचाई पर उड़ते हुए अपने शिकार पर पैनी नजर रखता है। खरगोश, चूहे का शिकार करता है। </p>
<p><strong>मिस्त्र का राष्ट्रीय पक्षी है स्टेपी ईगल</strong><br />बर्ड्स रिसर्चर हर्षित शर्मा ने बताया कि स्टेपी ईगल मिस्त्र का राष्ट्रीय पक्षी है और कजाकिस्तान के राष्ट्रीय ध्वज में इसका चित्र है। नवम्बर माह से इनका आना शुरू हो जाता है और मार्च-अप्रेल तक रहते हैं। यह मुख्य रूप से घास के मैदानों व खुले जंगलों में रहना पसंद करते हैं। इनका रंग गहरे भूरा होता है। पंखों पर सफेद रंग की धारी होती है। शरीर के आकार के हिसाब से इनका सिर छोटा होता है।</p>
<p><strong>अभेड़ा में 100 से ज्यादा ईगल </strong><br />बायोलॉजिकल पार्क के फोरेस्टर बुधराम जाट ने बताया कि बायोलॉजिकल पार्क के तालाब एरिया में इन दिनों 100 से ज्यादा ईगल नजर आ रहे हैं। जिसमें विभिन्न प्रजातियों के ईगल शामिल हैं। इसके अलावा अन्य पक्षियों का भी यहां प्राकृतिक रहवास बना हुआ है। पर्यटकों में बर्ड्स वॉचर व रिसर्चर भी आ रह हैं।</p>
<p><strong>अवसरवादी होता है ईगल</strong><br />रिसर्चर हर्षित बताते हैं, स्टेपी ईगल अवसरवादी शिकारी पक्षी है, जो शिकार के लिए कई तरह की तकनीक का उपयोग करता है। हवा में काफी उंचाई पर उड़ते हैं और जमीन पर शिकार की तलाश में पैनी नजर रखते हैं। शिकार नजर आते ही तुरंत झपट्टा मारते हैं और अपने मजबूत व नुकीले पंजों से वार कर उठा लेते हैं। कई बार ये अपने शिकार का इंतजार उसके बिल या मांद के सामने घंटों बैठकर करते हैं। जैसे ही शिकार बाहर आता है तो उन्हें तुरंत पकड़ लेता हैं।</p>
<p><strong>हाईटेंशन लाइनें बन रही काल  </strong><br />नेचर प्रमोटर डॉ. सुब्रत शर्मा ने बताया कि स्टेपी ईगल आईयूसीएन की रेड लिस्ट में है। बाज की यह प्रजाति संकटग्रस्त है,जो विलुप्त होने के कगार पर है।  दुनियाभर में वर्ष 1990 से इसकी संख्या में भारी कमी आई है। घास के मैदानों का खेतों में बदलना व प्राकृतिक आवास नष्ट होने के कारण लगातार इनकी संख्या में कमी होती जा रही है। वहीं, हाईटेंशन विद्युत लाइनों से टकराकर पक्षी अकाल मौत के शिकार हो रहे हैं। सरकार को सभी बिजली लाइनें भूमिगत करनी चाहिए। साथ ही परिदों के संरक्षण के लिए घास के मैदानों व प्राकृतिक आवास बचाने के पुख्ता बंदोबस्त किए जाने की आवश्यकता है। </p>
<p><strong>शहर में यहां बसी आबादी</strong><br />नेचर प्रमोटर एएच जैदी ने बताया कि शहर के कई इलाकों में इनकी कॉलोनी बसी है। जिनमें अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क, जोरा बाई का तालाब, गरड़िया महादेव, गैपरानाथ, उम्मेदगंज व बारां रोड स्थित डम्पिंग यार्ड,  के आसपास झुंड में नजर आते हैं। यह गिद्द की तरह प्रकृति के सफाईकर्मी होते हैं। खरगोश व चूहें का शिकार करता है। यह पक्षी अपना घोंसला पहाड़ों, चट्टानों, खंडर इमारतों व उंचे पेड़ों पर बनाते हैं। नर व मादा दोनों ही अन्य शिकारी पक्षियों से अंडों की रक्षा करते हैं। जन्म के 3 माह बाद ही बच्चे उड़ना सीख जाते हैं। </p>
<p><strong>कजाकिस्तान में सबसे ज्यादा संख्या</strong><br />पक्षी विशेषज्ञ डॉ. अंशु शर्मा ने बताया कि स्टेपी ईगल मध्य एशिया के घास के मैदानों से सर्दियों में देश के विभिन्न हिस्सों में पहुंचता है। यह पक्षी कुरजा जैसे बड़े पक्षियों, बत्तख, खरगोश व चूहों तक का शिकार करने में सक्षम होता है। यह बड़े शिकारी चील, बाज समूह में एक मात्र शिकारी पक्षी है जो घास के मैदानों पर ही प्रजनन करता है। इसकी संख्या कजाकिस्तान में ज्यादा मिलती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Jan 2025 17:10:02 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>शेखावाटी अंचल में सर्दी ने किया बेहाल, फतेहपुर शेखावाटी में माइनस 1.2 डिग्री दर्ज हुआ तापमान </title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर में दिन का तापमान 25.3 और रात का तापमान 7.8 डिग्री दर्ज हुआ। शहर के अनेक हिस्सों में शाम ढलने के साथ ही अलाव जलाकर लोग तापने लगते हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/cold-has-wreaked-havoc-in-shekhawati-region-temperature-recorded-at/article-97739"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/5554-(3)2.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। पहाड़ों से आई सर्द हवा ने पूरे प्रदेश को अपने आगोश में ले लिया है। ठिठुरन से जनजीवन अस्तव्यस्त बना हुआ है। राज्य के अधिकांश हिस्सों में दिन और रात के तापमान में गिरावट दर्ज हुई। रात के तापमान में भारी गिरावट से खेतों में पाला गिरने और फसल पर विपरीत असर पड़ने की आशंका है। फतेहपुर शेखावाटी में रात का तापमान माइनस 1.2 डिग्री दर्ज होने से खेतों में बर्फ की परत जम गई। मटकों में रखा पानी बर्फ में तब्दील हो गया। माउण्ट आबू में रात का तापमान 1.2 डिग्री दर्ज होने से लोग सर्दी से खासे परेशान रहे। मौसम विभाग ने आगामी पांच-छह दिन तक दिन और रात के तापमान में अधिक बदलाव की संभावना नहीं हैं। राज्य के कुछेक हिस्सों में तेज शीत लहर चलने से जन-जीवन अधिक परेशान होगा।</p>
<p><strong>शेखावाटी अंचल, भीलवाड़ा, अलवर, चित्तौडगढ़ में सर्दी से हाल खराब </strong><br />राज्य के शेखावाटी अंचल के चूरू में 1.6, पिलानी 2.6, सीकर 2.5, उदयपुर 4.0, चित्तौडगढ़ 3.2, अलवर 4.0, भीलवाड़ा 2.2, सिरोही 2.6, संगरिया में 2.6 डिग्री तापमान रहने से इन शहरों में खेतों में पाला गिरने से रबी की फसल पर विपरीत असर पड़ने की संभावना हैं। लोग सर्दी से खासे परेशान रहे और सर्दी से बचने के जुगत करते रहे। शेखावाटी अंचल में सर्दी से बुरा हाल बना हुआ है। </p>
<p><strong>गुलाबी नगरी में भी सर्दी ने बिगाड़े हाल</strong><br />गुलाबी नगरी में सर्दी से लोगों की दिनचर्या बदल गई है। जयपुर में दिन का तापमान 25.3 और रात का तापमान 7.8 डिग्री दर्ज हुआ। शहर के अनेक हिस्सों में शाम ढलने के साथ ही अलाव जलाकर लोग तापने लगते हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Dec 2024 10:16:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कश्मीर में कड़ाके की ठंड, धूप में सुखाई सब्जियों की बढ़ी मांग </title>
                                    <description><![CDATA[इन सब्जियों को सुखाने की प्रक्रिया में इन्हें धूप में घर की दीवारों पर लटका दिया जाता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/demand-for-sun-dried-vegetables-increases-due-to-severe-cold-in/article-97638"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/6633-copy.jpg122.jpg" alt=""></a><br /><p>श्रीनगर। केन्द्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में कड़ाके की ठंड के कारण धूप में सुखाई गई सब्जियों 'होख स्यून' की मांग कश्मीर घाटी में बढऩे लगी है। यह पुरानी पाक परंपरा सदियों से चली आ रही है, जिसने कश्मीर को उन कुछ जगहों में से एक बना दिया है जहाँ आधुनिक समय में भी सूखी सब्जियाँ मुख्य भोजन बनी हुई हैं। कड़ाके की ठंड और हिमपात के कारण पर्वतीय राज्य के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में वाहनों की आवाजाही नहीं होने पाने से वहां सब्जियां नहीं पहुंच पाती हैं। </p>
<p>'होख स्यून' में बैंगन, लौकी, शलजम, पालक, टमाटर और मेथी शामिल हैं। ये सभी सब्जियां गर्मियों के महीनों में उगायी जाती हैं। इन सब्जियों को भीषण सर्दियों के लिए संरक्षित करने के लिए सुखाया जाता है, ताकि जब ताजी उपज कम हो तो भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। इन सब्जियों को सुखाने की प्रक्रिया में इन्हें धूप में घर की दीवारों पर लटका दिया जाता है। सर्दियों के मौसम में श्रीनगर के पुराने शहर और अन्य ऊंचाई वाले इलाकों में सुखाई गई खास सब्जियां बेचने वाले विक्रेता इन सब्जियों को बेचते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 Dec 2024 16:46:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सर्दियों में बिजली कटौती से बनी पानी की किल्लत </title>
                                    <description><![CDATA[ बिजली गुल होने पर पानी की समस्या बस्ती के लोगों को परेशानी पैदा कर देती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/water-shortage-due-to-power-cuts-in-winter/article-96557"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/9930400-sizee-(7)1.png" alt=""></a><br /><p>राजपुर। एक तरफ तो सरकार हर घर को स्वच्छ पेयजल मुहैया कराने के नाम पर लाखों रुपए का बजट सहरिया क्षेत्र की ग्राम पंचायतो में दे रही है ताकि जल संकट से क्षेत्रवासी परेशान ना रहे। शाहाबाद पंचायत समिति क्षेत्र के गांव बिची, बेहट, कलोनी, बडारा, खांडा सहरोल,शाहपुर, गंगापुर राजपुर,धतुरिया,खटका ,गणेशपुरा,सेमली फाटक आदि ग्राम पंचायत में सरकारी ट्यूबवेल लगी हुई है जो बिजली आने पर उपयोगी साबित होती हैं और बिजली गुल होने पर अनुपयोगी शोपीस मात्र बनकर रह जाती हैं। इसके चलते इन गांवों के बाशिंदों को दैनिक आवश्यकता के पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है और सर्दी के मौसम में पानी की समस्या लोगों को परेशानी का सबब बनी हुई है।</p>
<p><strong>पानी के लिए होते है लड़ाई झगडे</strong><br />अर्जुन सहरिया, बद्री सहरिया, मिलन सहरिया, बाई सहरिया रामनिवास सहरिया ने बताया कि गंगापुर सहरिया बस्ती में करीब 70-80 सहरिया परिवार निवास करते हैं। इस बस्ती में एक ट्यूबवेल लगी हुई है। जिससे लोग दैनिक आवश्यकता की पूर्ति के लिए पानी लेते हैं लेकिन बिजली गुल होने पर पानी की समस्या बस्ती के लोगों को परेशानी पैदा कर देती है। दिनभर बिजली नहीं आती है तो ट्यूबवेल नहीं चलती है और बिजली आने-जाने का कोई निर्धारित समय भी तय नहीं है। ऐसे में पेयजल के लिए  कड़ी मशक्कत उठानी पड़ रही है। जब बिजली आती है तो पानी भरने को लेकर लोगों की भीड़ जमा हो जाती है और इस दौरान लड़ाई झगड़ा भी पानी को लेकर अक्सर होते रहते हैं। <br /> <br /><strong>खेतों में चल रहा पलेवा कार्य, पानी की है जरूरत</strong><br /> ग्रामीणों का कहना है कि खेतों में पानी की सिंचाई पलेवा  का काम चल रहा है। ऐसे में पर्याप्त मात्रा में बिजली मुहैया नहीं हो पा रही है। ऐसे में दूर-दराज क्षेत्र से पानी का जुगाड़ करना पड़ता है अगर बिजली आती है तो ट्यूबबैल पर पानी भरने वालों की भीड़ लगी रहती हैं तो आवश्यकता के अनुरूप लोगों को पानी नहीं मिल पाता है। अगर ट्यूबवेल के पास पक्की पानी टंकी का निर्माण या फिर प्लास्टिक की टकियां लगवा दी जाए तो  पर्याप्त मात्रा में पानी मिलता रहेगा और सर्दी के मौसम में पानी की मारामारी की समस्या से निजात मिल सकती है। पानी की टंकी बनवाने की मांगवहीं बस्तीवासियों ने ट्यूबवेल के स्थान पर पानी टंकी निर्माण करवाने की क्षेत्रीय विधायक ललित मीणा से मांग की है ताकि बिजली नहीं आए, तब भी लोगों को आवश्यकता के अनुरूप पानी टंकी से पानी उपलब्ध हो सके। शाहाबाद पंचायत समिति क्षेत्र की ग्राम पंचायत में अधिकतर पेयजल सुविधा की दृष्टि से सिंगल फेस की ट्बवेल लगी हुई है जो बिजली आने पर चलती रहती हैं लेकिन कई स्थानों पर ट्यूबवेल के पास पानी की टंकी नहीं लगी हुई है। ऐसे में पानी बिजली आने पर ट्यूबवेल से ही क्षेत्र के लोगों को मिल पाता है अगर पानी टंकीयों का निर्माण या प्लास्टिक की बड़ी टंकियां लगवा दी जाए तो पर्याप्त मात्रा में पानी टंकी से  क्षेत्र के लोगों को मिलता रहेगा और पानी की समस्या से सर्दी के मौसम में निजात मिल सकती है। लोगों ने सबंधित विभागीय अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से पानी टंकी निर्माण करवाने की  मांग की है।</p>
<p>पानी टंकी का निर्माण हो जाए तो बिजली जाने पर भी आसानी से पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध होता रहेगा। इस मामले को अधिकारियों को गंभीरता से लेना चाहिए। <br /><strong>- अर्जुन बंजारा, ग्रामीण।</strong></p>
<p>सर्दी के मौसम में पानी की समस्या बिजली के चलते झेलनी पड़ रही है। ट्यूबवेल तो लगी हुई है लेकिन पानी स्टोरेज करने के लिए टंकी नहीं लगाई गई है। ऐसे में समस्या बनी हुई है।<br /><strong>- मिलन सहरिया, ग्रामीण।  </strong></p>
<p>गंगापुर सहरिया बस्ती में अधिकारियों को पानी टंकी का निर्माण करवाना चाहिए ताकि ग्रामीणों को बिजली जाने पर पानी के लिए परेशान नहीं होना पड़े। <br /><strong>- बद्री सहरिया, ग्रामीण।</strong></p>
<p><strong>पानी के लिए भटकने को मजबूर</strong><br />गंगापुर सहरिया बस्ती में 70 - 80 परिवार हैं। बिजली के भरोसे मोटर संचालित होती है। बिजली कटौती होने से पानी की समस्या बनी हुई है पानी टंकी बनवाई जानी चाहिए।<br /><strong>- श्रीमती बाई सहरिया, ग्रामीण। </strong></p>
<p>बिजली कटौती पेयजल समस्या में बाधा उत्पन्न कर रही है। अगर बिजली दिनभर नहीं आती है तो पानी के लिए लोग इधर-उधर भटकते रहते हैं ट्यूबवेल पर पानी टंकी का निर्माण होना चाहिए। <br /><strong>- रामनिवास सहरिया, ग्रामीण। </strong><br />    <br />ग्राम पंचयत में जहां सिंगल फेस ट्यूबवेल लगे हुए हैं और पानी टंकी नहीं बनी है तो वहां पर पानी टंकियों का निर्माण कराया जाएगा ताकि ग्रामीणों को पर्याप्त मात्रा में बिजली जाने पर भी आसानी से पेयजल उपलब्ध हो सके।<br /><strong>- बनवारीलाल मीणा, विकास अधिकारी, शाहाबाद। </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Dec 2024 14:21:12 +0530</pubDate>
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                <title>सर्दी में जायका बिगाड़ रहे प्याज व लहसुन</title>
                                    <description><![CDATA[विदेशों में प्याज भेजने के कारण यहां पर दाम कम नहीं हो रहे हैं। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/onion-and-garlic-are-spoiling-the-taste-in-winter/article-95574"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/srdi-me-zayeka-bigad-rhe-pyaz-va-lehsun...kota-news-22-11-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। सर्दी के मौसम में प्याज और लहसुन के भाव ज्यादा होने के कारण सब्जियों का जायका बिगड़ रहा है। हरी सब्जियों की आवक होने से भाव में गिरावट आने लगी है, लेकिन प्याज और लहसुन के भाव अभी भी तेज बने हुए हैं। सरकार ने प्याज के निर्यात से प्रतिबंध हटा लिया है और विदेशो में तीन लाख मीट्रिक टन निर्यात को मंजूरी दे दी है। इस कारण आमजन के लिए प्याज सस्ता नहीं हो पा रहा है। वर्तमान में कोटा की प्रमुख सब्जीमंडी में प्याज के भाव 50 से 60 रुपए प्रति किलो बने हुए हैं। इससे ज्यादा खराब स्थिति लहसुन की हो रही है। लहसुन की बुवाई का कार्य होने से इसके भाव 200 से 300 रुपए प्रति किलो बने हुए हैं। सब्जियों को स्वाद बढ़ाने के लिए प्याज और लहसुन का उपयोग किया जाता है, लेकिन अभी भाव ज्यादा होने से स्वाद बिगड़ रहा है।</p>
<p><strong>कीमतें बढ़ी तो लगाया था बैन</strong><br />पिछले साल दिसंबर महीने में प्याज की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली थी। तब प्याज के दाम 100 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गए थे। इसके बाद केन्द्र सरकार सक्रिय हुई। प्याज के उत्पादन में कमी और आसमान पर पहुंची कीमतों के चलते केंद्र सरकार ने पिछले साल 8 दिसंबर को प्याज के निर्यात पर बैन लगा दिया था। इससे प्याज के भावों में लगातार गिरावट होने लगी थी। 80 से 100 रुपए किलो बिकने वाले प्याज के भाव 50 से 60 रुपए किलो पर आ आ गए थे। अब नई प्याज की आवक होने से इसके भावों में और गिरावट होने की संभावना जताई जा रही थी, लेकिन अब प्याज के निर्यात से बैन हटने के बाद प्याज के भाव स्थिर हो गए हैं। इससे अभी भी लोगों को महंगा प्याज खरीदना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>अलवर से आ रहा गीला प्याज</strong><br />थोक सब्जीमंडी के व्यापारी सद्दाम वारसी ने बताया कि अलवर में लाल प्याज का उत्पादन होने लगा है और कोटा सहित प्रदेश की अधिकांश मंडियों में लाल प्याज की आवक होने भी लगी हैं, लेकिन अभी लाल प्याज गीला आ रहा है। इसमें नमी की मात्रा अधिक है। ऐसे में ग्राहक इसे खरीदने से कतरा रहे हैं। इसके भाव भी 50 रुपए किलो बने हुए हैं। इसके अलावा इन्दौर से सफेद प्याज आ रहा है, जो सूखा है, लेकिन यह 60 रुपए किलो में बिक रहा है। वारसी ने बताया कि यदि प्याज के निर्यात से बैन नहीं हटता तो प्याज के भावों में 10 से 15 रुपए किलो तक गिरावट आ सकती थी। विदेशों में प्याज भेजने के कारण यहां पर दाम कम नहीं हो रहे हैं। </p>
<p><strong>लहसुन खरीदने से बना रखी दूरी</strong><br />पिछले दो साल से लहसुन के भावों में तेजी बनी हुई है। इससे भाव 200 रुपए किलो से कभी नीचे ही नहीं आए। दो साल से किसानों को भाव ज्यादा मिलने के कारण इस साल लहसुन की बुवाई का रकबा अधिक हो गया है। इस समय लहसुन की बुवाई का दौर चल रहा है। ऐसे में लहसुन के बीज की डिमांड बनी हुई है। इस कारण लहसुन के भाव खुले बाजार में 200 से 300 रुपए प्रति किलो के बीच बने हुए हैं। थोक मंडी के व्यापारी अशोक कुमार ने बताया कि लहसुन की ग्राहकी काफी कम हो रही है। इसके भावों में गिरावट नहीं होने से अब ग्राहकों ने खरीदने की मात्रा कम कर दी है। अब अधिकांश ग्राहक केवल 250 ग्राम लहसुन खरीद कर काम चला रहे हैं। बाजार में लहसुन की बिक्री भी कुछ ही व्यापारी करते हैं। </p>
<p>प्याज सभी सब्जियों में काम आता है। अब दाम में तेजी से खरीदारी में कटौती करनी पड़ रही है। हर साल सर्दी के मौसम में प्याज के दाम कम हो जाते हैं, लेकिन इस साल भावों में कमी नहीं हो रही है। इससे सब्जियों का जायका ही बिगड़ रहा है।<br /><strong>- सुलोचना देवी, गृहिणी </strong></p>
<p>सरकार ने प्याज के निर्यात से प्रतिबंध हटा लिया है और विदेशो में तीन लाख मीट्रिक टन निर्यात को मंजूरी दे दी है। इस कारण आमजन के लिए प्याज सस्ता नहीं हो पा रहा है। लहसुन के भाव तो 200 रुपए किलो से नीचे ही नहीं आए हैं।<br /><strong>- भूपेन्द्र सोनी, थोक सब्जी विक्रेता </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/onion-and-garlic-are-spoiling-the-taste-in-winter/article-95574</link>
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                <pubDate>Fri, 22 Nov 2024 14:40:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>प्रदेश में तापमान गिरने से सुबह-शाम होने लगा सर्दी का अहसास</title>
                                    <description><![CDATA[ अजमेर, कोटा, धौलपुर, बारां में कल रात का न्यूनतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज हुआ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/the-feeling-of-cold-increased-in-the-morning-and-evening/article-93290"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/4427rtrer28.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में अब सुबह शाम सर्दी का अहसास बढ़ने लगा है। हालांकि दिन में अभी भी गर्मी सता रही है, लेकिन सुबह शाम मौसम सुहाना हो गया है। राजस्थान में तापमान के उतार-चढ़ाव शुरू होने के साथ ही धीरे-धीरे ठंडक बढ़ने लगी। अजमेर, कोटा, धौलपुर, बारां में कल रात का न्यूनतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज हुआ।</p>
<p>जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, जालोर में भी रात के तापमान में 2 से 3 डिग्री तक की गिरावट होने से यहां ठंडक बढ़ गई। दूसरी तरफ दिन के तापमान में बढ़ोतरी से कल कई शहरों में गर्मी मामूली बढ़ गई। मौसम विशेषज्ञों ने बताया कि अगले चार दिन राजस्थान में मौसम शुष्क रहने और तापमान में इसी तरह उतार-चढ़ाव होने की संभावना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Oct 2024 18:14:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>हर हफ्ते 40 टन पिंड खजूर खा रहा कोटा जिला</title>
                                    <description><![CDATA[पिंड खजूर के व्यापारियों ने बताया कि सर्दियों के सीजन में इनकी खपत ज्यादा होती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-district-is-eating-40-tons-of-dates-every-week/article-63922"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-12/hr-din-40-ton-pind-khajoor-kha-rha-kota-jila...kota-news-11-12-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। सर्दी के मौसम में स्वाद बढ़ाने वाले विभिन्न तरह के फल बाजार में खूब बिक रहे हैं, लेकिन बात जब पिंड खजूर की होती तो मुंह में मिठास-सी घुल जाती है। पिंड खजूर खाने में जितने स्वादिष्ट होते हैं उतने ही लाभकारी भी हैं। यही वजह है कि खजूर एक लोकप्रिय खाद्य पदार्थ है। वर्तमान में कोटा में खाड़ी देशों के पिंड खजूर की बिक्री जोरों पर है। सर्दियों में खजूर की खपत बहुत ज्यादा होती है। तापमान में गिरावट और शादी के सीजन में कोटा में इराक, ईरान और सऊदी अरब से आने वाले पिंड खजूर की मांग बढ़ गई है। फल विक्रेताओं के अनुसार कोटा में खाड़ी देशों से आने वाले पिंड खजूर की एक हफ्ते में खपत लगभग 40 टन हो रही है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पिंड खजूर का स्वाद घर-घर पहुंच रहा है। वर्तमान में थोक मंडी में खजूर की कीमत 90 से 100 रुपए किलो के बीच चल रही है। वहीं कोटा के अन्य इलाकों में यही सौ से सवा सौ रुपए किलो बेचा जा रहा है।</p>
<p><strong>इन देशों से आ रहा पिंड खजूर</strong><br />विश्व में सबसे अधिक पिंड खजूर का उत्पादन खाड़ी देशों में होता है। खाड़ी देशों में पिंड खजूर तैयार करने के लिए भूमि काफी उपयुक्त मानी जाती है। ऐसे में वहां पर उत्पादित पिंड खजूर का निर्यात पूरे विश्व में किया जाता है। भारत में भी काफी मात्रा में वहां से पिंड खजूर आता है। कोटा में इस समय   ईरान, इराक, सउदी अरब, फिलीस्तीन, अल्जीरिया देशों से खजूर आ रहा है। वर्तमान में मुंबई और गुजरात के बंदरगाहों से इराक, ईरान और सऊदी अरब से खजूर कोटा के बाजारों में आती हैं।</p>
<p><strong>विश्व  में खजूर की 200 से अधिक किस्म</strong><br />स्थानीय व्यापारियों के अनुसार दुनियाभर में दो सौ से अधिक किस्म के खजूर पाए जाते हैं। अजवा खजूर लोगों के बीच काफी प्रसिद्ध है। अरब के मदीना से आने वाला यह खजूर स्वाद के साथ ही काफी सेहतमंद और मुलायम होता है। अजवा खजूर अन्य खजूरों के मुकाबले छोटा होता है। इस खजूर को खाने के बाद मुंह से गुलाब की खुशबू आने लगती है। खजूर की खेती सबसे पहले इराक में शुरू हुई थी। उसके बाद यह अरब और अन्य देशों में उगाया जाने लगा है। भारत में सिर्फ गुजरात में खजूर उगाया जाता है।  </p>
<p><strong>दो दिन में 20 से 25 टन की आवक</strong><br />थोक फल सब्जी मंडी के प्रमुख व्यापारी शब्बीर अंसारी ने बताया कि कोटा में देशभर के लाखों बच्चे पढ़ने आते हैं। ऐसे में पिंड खजूर की खपत यहां ज्यादा है। खाड़ी देशों से आने वाले इन खजूरों को कोटा के व्यापारी गुजरात के बंदरगाह से 20 से 25 टन हर दो दिन में गाड़ी से मंगवाते हैं। कोटा के छोटे और बड़े दुकानदार यहां से लेकर जाते हैं। पिंड खजूर के व्यापारियों ने बताया कि सर्दियों के सीजन में इनकी खपत ज्यादा होती है। बच्चे इसे खरीदते हैं और दूध में उबालकर खाते हैं।</p>
<p>पिंड खजूर खाने में जितने ही स्वादिष्ट होते हैं, उतने ही सेहत के लिए भी लाभकारी होते हैं। यह फाइबर से भरपूर होते हैं। यह कब्ज की समस्या को रोकता है और दिल की सेहत में सुधार करता है। ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में यह काफी काम आता है। यह दिल और दिमाग के लिए काफी फायदेमंद है।<br /><strong>- डॉ. गिरिश स्वामी, आयुर्वेदिक चिकित्सक</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 Dec 2023 19:14:16 +0530</pubDate>
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                <title>ईरान के खजूर से महक रही कोटा की फल मंडी</title>
                                    <description><![CDATA[शहर की प्रमुख फल सब्जीमंडी में ईरान का खजूर ब्रिकी के लिए उपलब्ध है। फल व्यापारियों के अनुसार वर्तमान में ईरान से तीन गाड़ी खजूर कोटा आ रहा है। यह खजूर 10 किलो और 30 किलो के बैग में आता है। ईरान से आने वाला खजूर मुम्बई होते हुए कोटा पहुंचता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-s-fruit-market-is-smelling-of-iran-s-dates/article-33938"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-01/iran-k-khajoor-se-mahak-rahi-kota-ki-falmandi..kota-news...02.01.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में इन दिनों मौसमी फलों की अच्छी आवक हो रही है। फल सब्जी मंडी में देशी फलों के साथ ही कई विदेशी फल भी ब्रिकी के लिए उपलब्ध है। मंडी में ईरानी खजूर की भी आवक बनी हुई है। हालांकि यह देशी खजूर की तुलना में महंगा है। इसके बावजूद सेहत के लिए फायदेमंद होने के कारणग्राहक इसे खरीद रहे हैं। फल विक्रेता रमेश ने बताया कि पिछले कुछ समय से फलों के भाव में उतार-चढ़ाव आया है। इसके चलते अमरूद व पपीता सहित कुछ फलों के दामों में गिरावट आई है। वहीं कुछ फलों के भाव में अभी तेजी बनी हुई है। फिलहाल कोटा की मंडी में अमरूद, किन्नू, सेव,केला, अनार, मौसमी, नारियल, पपीता व खजूर आदि की खूब ब्रिकी हो रही है।</p>
<p><strong>देशी से महंगा विदेशी </strong><br />शहर की प्रमुख फल सब्जीमंडी में ईरान का खजूर ब्रिकी के लिए उपलब्ध है। फल व्यापारियों के अनुसार वर्तमान में ईरान से तीन गाड़ी खजूर कोटा आ रहा है। यह खजूर 10 किलो और 30 किलो के बैग में आता है। ईरान से आने वाला खजूर मुम्बई होते हुए कोटा पहुंचता है। इसका दाम देशी खजूर की तुलना में ज्यादा होता है। वर्तमान में मंडी में देशी खजूर 60 से 80 रुपए किलो और ईरानी खजूर 250 से 500 रुपए किलो तक बिक रहा है। सर्दी के मौसम में देशी के साथ विदेशी खजूर की भी अच्छी खरीदारी हो रही है। वहीं मंडी में कश्मीरी सेव सहित हरियाणा, पंजाब व हिमाचल प्रदेश से मौसमी फल बहुतायत ब्रिकी के लिए आ रहे हैं। फलों के भाव भी ग्रेडिंग के हिसाब से अलग-अलग हैं।</p>
<p><strong>सबसे मंहगा खजूर है अजवा</strong><br />खजूर व्यापारियों के अनुसार बाजार में सबसे महंगा खजूर मदीना शरीफ का अजवा है। इसकी कीमत 1400 रुपए से लेकर 3000 रुपए प्रति किलोग्राम है। इसके साथ ही सऊदी अरब,  इराक, अल्जीरिया, ट्यूनिशिया, मिस्र और उत्तरी अफ्रीका समेत कई देशों के खजूर भी काफी महंगे बिकते हैं। यह खजूर अलग-अलग किस्मों के नाम से जाने जाते हैं। सऊदी अरब की स्वादी, अलहम्द, खुलैस, राबिया, ईरान की कीमिया गोल्ड, इराक की जाहिदी सहित अन्य मध्य एशियाई देशों की राबी, कलमी, सफवी, अजवाह, अंबर, शल्बी, रब्बी, मजरूम, सुगाई, कलमी मीडियम, शहद किस्म के खजूर बाजार में बिकने के लिए आते हैं। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />खजूर सेहत के लिए भी काफी फायदेमंद है। इसमें कैल्शियम, विटामिन बी, कॉम्लेक्स, विटामिन सी प्रोटीन, फाइबर, ऐश और लोहतत्व पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं। लौह तत्व होने के कारण यह शरीर में रक्त बढ़ाने में मददगार होता है हड्डी और बाल मजबूत करता है। बी कॉम्पलेक्स शरीर के मेटाबोलिज्म को दुरुस्त रखता है। फाइबर पाचन क्षमता को बेहतर करता है और ऊतक निर्माण के लिए उपयोगी है।<br /><strong>- डॉ. रामधर शर्मा, आयुष चिकित्सक</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 Jan 2023 14:47:39 +0530</pubDate>
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