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                <title>&quot;नहरें सूखी, किसान परेशान&quot;  पंजाब में बिजली और सिंचाई संकट पर बवाल: कांग्रेस ने मान सरकार को घेरा, राज्यव्यापी आंदोलन की दी चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[पंजाब के पूर्व मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू ने बिजली और सिंचाई संकट को लेकर आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि धान की रोपाई के दौरान किसानों को न पर्याप्त बिजली मिल रही है, न नहरों का पानी। सिद्धू ने अघोषित कटौती बंद करने, सिंचाई व्यवस्था सुधारने और जल्द समाधान नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/uproar-over-electricity-and-irrigation-crisis-in-punjab-congress-surrounds/article-158497"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/12200-x-600-px)-(2)8.png" alt=""></a><br /><p>मोहाली। पंजाब के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता बलबीर सिंह सिद्धू ने मंगलवार को राज्य में गहराते बिजली और सिंचाई संकट को लेकर आम आदमी पार्टी (आप) सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के दावों और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर है, जिसके कारण किसान और आम लोग गंभीर परेशानियों का सामना कर रहे हैं। सिद्धू ने कहा कि धान की रोपाई के सबसे महत्वपूर्ण समय में किसानों के खेतों तक न तो नहरों का पानी पहुंच रहा है और न ही पर्याप्त बिजली मिल रही है। इसके कारण हजारों एकड़ फसल प्रभावित हो रही है। </p>
<p>उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान लगातार दावा करते रहे हैं कि नहरों का पानी अंतिम छोर (टेल) तक पहुंच चुका है, लेकिन वास्तविक स्थिति इसके विपरीत है। नहरों के अंतिम छोर और छोटी नहरें सूखी पड़ी हैं तथा किसान पानी की एक-एक बूंद के लिए भटक रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि किसान अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही। सरकार के दावे केवल विज्ञापनों और कागजों तक सीमित रह गये हैं।</p>
<p>कांग्रेस नेता ने कहा कि बदलाव का वादा करने वाली आप सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हुई है। पूरे पंजाब में शहरों और गांवों में कई-कई घंटे की अघोषित बिजली कटौती से लोगों का जनजीवन प्रभावित हो रहा है। सिद्धू ने चुनावी वादों का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार ने किसानों से समय पर बिजली उपलब्ध कराने के बड़े दावे किये थे, लेकिन आज हालात इसके बिल्कुल उलट हैं। उन्होंने इसे पंजाब के अन्नदाता के साथ विश्वासघात करार दिया। उन्होंने कहा कि बिजली आपूर्ति बाधित होने के कारण किसान अपनी धान की फसल बचाने के लिए दिन-रात डीजल जनरेटर चलाने को मजबूर हैं। एक हाई-पावर ट्यूबवेल या मोटर चलाने के लिए प्रतिदिन 60 से 70 लीटर डीजल खर्च हो रहा है, जिससे किसानों पर रोजाना लगभग 5,000 से 7,000 रुपये तक का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। इससे खेती की लागत लगातार बढ़ रही है और किसानों की आर्थिक स्थिति कमजोर होती जा रही है।</p>
<p>सिद्धू ने कहा कि सरकार की नाकामी का असर केवल किसानों तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापारी, दुकानदार, उद्योगपति और आम नागरिक भी लंबे बिजली कटों से परेशान हैं। भीषण गर्मी में उद्योगों का काम प्रभावित हो रहा है, छोटे कारोबार ठप पड़ रहे हैं, अस्पतालों में मरीजों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है और घरों में बच्चे, महिलाएं तथा बुजुर्ग भी परेशान हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब के लोगों के टैक्स का करोड़ों रुपये अन्य राज्यों में चुनाव प्रचार और सरकारी विज्ञापनों पर खर्च किया जा रहा है, जबकि राज्य के बिजली और सिंचाई ढांचे को मजबूत करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाये गये।</p>
<p>सिद्धू ने मांग की कि बिजली विभाग तत्काल अघोषित बिजली कटौती बंद कर कृषि एवं घरेलू उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करे। साथ ही सिंचाई विभाग को निर्देश दिये जायें कि नहरों के अंतिम छोर तक तुरंत पानी पहुंचाया जाये, ताकि किसानों की धान की फसल को बचाया जा सके।उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो पंजाब कांग्रेस पूरे राज्य में आंदोलन करेगी तथा बिजली ग्रिडों, सिंचाई विभाग के कार्यालयों और अन्य सरकारी दफ्तरों का घेराव करेगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी पंजाब सरकार की होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 18:31:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>मानसून की मेहरबानी से बूंदी में फसलों की बंपर पैदावार </title>
                                    <description><![CDATA[इस बार औसत से कहीं ज्यादा हुई बरसात के चलते  भूजल स्तर में पर्याप्त वृद्धि देखी गई जिससे आने वाले समय मे लंबे वक्त तक पानी की उपलब्धता रहेगी। इस बार पानी पर्याप्त मिलने से धान की पैदाबार में व्यापक वृÞद्धी देखने को मिली।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/bumper-yield-of-crops-in-bundi-by-the-grace-of-monsoon/article-31705"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-12/monsoon-ki-meharbani-se-bundi-mei-faslo-ki-bumper-paidawar...bundi-news..7.12.2022.jpg" alt=""></a><br /><p> बूंदी। जिले में मानसून में इस बार मानसून मेहरबान रहा। अच्छी बरसात का असर  फसलों में साफ देखने को मिल रहा है। आंकड़ों पर नजर डाले तो गत तीन सालों की अपेक्षा में इस साल फसलों का उत्पादन भी बढ़ा है। धान की गत वर्ष की अपेक्षा अच्छी पैदावार हो रही है। साथ ही अन्य फ सलों पैदावार बढ़ रही है। धान की बंपर आवक हो रही है। और आने वाली सरसों, गेंहू की पैदावार भी अच्छी रहेगा। मंडी मे पिछले वर्ष से डेढ़ गुना अधिक धान की आवक का अनुमान है। इस साल अन्य वर्षों के मुकाबले बहुत अच्छी बारिश हुई है। वाटर लेवल अच्छा होने से मार्च, अप्रेल तक पर्याप्त पानी उपलब्ध है। अक्टूबर में बारिश होने के कारण इस बार बूंदी जिले में सरसों की थोड़ी बुवाई लेट हुई है। लेकिन गेहूं की बुवाई के लिए नमी पर्याप्त हैं, जिससे किसानों को पलेवा करने की आवश्यकता नही थी।  जिन किसानों ने थोड़ा इंतजार करना मुनासीब समझा इनके लिए यह बारिश लाभदायक सिद्ध हुई। जहां पूरे मानसून हुई अच्छी बारिश और बाद में हुई बेमौसम बरसात के चलते वर्षा जल के परम्परागत स्त्रोत लबालब हो गए। कुएं, तालाब, नदी नाले सभी में पानी पर्याप्त में एकत्र हो गए। वहीं सभी प्रकार के छोटे बड़े बांध तालाब में हुइ पानी की आवक ने सभी के मन को आल्हादित कर दिया। इस बार औसत से कहीं ज्यादा हुई बरसात के चलते  भूजल स्तर में पर्याप्त वृद्धि देखी गई जिससे आने वाले समय मे लंबे वक्त तक पानी की उपलब्धता रहेगी। इस बार पानी पर्याप्त मिलने से धान की पैदाबार में व्यापक वृÞद्धी देखने को मिली। पिछले साल के मुकाबले इस साल डेढ़ गुणा आने का अनुमान है। जिसमें से 50 फि सदी की आवक मंड़ी में हो चुकी है। बतौर कृषि अधिकारियों के पड़त खेतों में  भी बुवाई होने से रकबें मे वृद्धि हुई है। </p>
<p><strong>ये रहेगा फसलों का उत्पादन</strong><br />मानसून की अच्छी बरसात से खरीफ  की फ सल में अनाज 3 लाख 73 हजार 81.6 मैट्रिक टन, दलहन 51 हजार 675 मैट्रिक टन, तिलहन 88 हजार 559 मैट्रिक टन, अन्य खरीफ  फसलें 37 हजार 652 मैट्रिक टन उत्पादन अनुमानित है।  रबी की फसल में गेंहू 15 हजार 500 हेक्टेयर, दलहन 39 हजार हेक्टेयर, सरसों 72 हजार हेक्टेयर मिला कर कुल रबी की फसल का रकबा 2 लाख 83 हजार हेक्टेयर का अनुमान है।</p>
<p><strong>बून्दी</strong><br /><strong>विगत तीन वर्षों में जिले में हुई वर्षा </strong><br />वर्ष    वर्षा दर    औसत वर्षा    विगत 5 वर्षों की औसत दर<br />2020    3036    510.5    -<br />2021    6637    1106.2    750.54<br />2022     5979    996.5    971.78 <br />(30 सित.तक)</p>
<p><strong>कृषि उत्पादन विगत तीन वर्षों में (बुवाई)</strong><br />        2020    2021    2022 अग्रिम अनु.<br />अनाज    खरीफ    110781    85961    109253<br />    रबी    141325    141225    156000<br />दलहन    खरीफ    91160    77933    54108<br />    रबी    48167    46450    39000<br />तिलहन    खरीफ    41299    51332    67592<br />    रबी    37637    37637    73000<br />अन्य    खरीफ    5444    12767    14443<br />    रबी    14181    15895    15000<br />योग    खरीफ    248684    227993    245396<br />    रबी    241317    241207    283000</p>
<p>इस साल की बारिश का खेतों के साथ मंडी में भी देखने को मिल रहा है। अच्छी बारिश के चलते मंडी में धान की बंपर आवक हो रही है। वही आने वाले समय में सरसों, गेंहू, मक्का, चना की भी बंपर आवक होने की संभावना है। वर्तमान में 80.90 हजार बोरी धान की आवक मंडी में चल रही है, जो पिछले दिनों डेढ़ लाख बोरी थी।<br /><strong>- नाथूलाल लोकेश कुमार मंडी व्यवसायी</strong></p>
<p>इस बार हुई अच्छी बरसात का असर फ सलों में देखने को मिलेगा। फ सलों पैदावार के साथ गुणवत्ता बढ़ेगी। मंडी में पिछले वर्ष से डेढ़ गुना धान की आवक का अनुमान है। वर्तमान में धान के 50 फ ीसदी की खरीद मंडी में हो चुकी है, जो अभी और  बढ़ेगी। तीन लाख बोरी धान की आवक का अनुमान है। <br /><strong>-अमित बिरला, धान व्यापारी</strong></p>
<p>बेमौसम हुई तेज बारिश से जहां सभी जल संसाधन लबालब हैं। उसके चलते आने वाली फसलों मे बंपर पैदावार देखने को मिलेंगी। गेंहू की फ सल में इस बारिश का फ ायदा सीधा सीधा दिखेगा। धान की पैदावार में तो अच्छा असर दिख ही गया हैं।<br /><strong>-कृष्ण नारायण शर्मा,अग्रणी कृषक. बडून्दा</strong></p>
<p>बैमोसम बरसात होने से फ सलों में नुकसान तो हुआ है। लेकिन इससे फ ायदा भी है। अच्छी बरसात से रकबा बढ़ा भी है। लेकिन लेट बुवाई होने से क्षेत्र में फ सलों मे जोर कम दिखाई दे रहा हैं। वाटर लेवल अच्छा हैं, जो मार्च अप्रेल तक पर्याप्त है।<br /><strong>-प्रहलाद नागर, कृषक जैविक कृषि, भवानीपुरा</strong></p>
<p>इस साल अन्य वर्षों के मुकाबले बहुत अच्छी बारिश हुई है। वाटर लेवल अच्छा होने से मार्च अप्रेल तक पर्याप्त पानी उपलब्ध है। अक्टूबर में बारिश होने के कारण इस बार बूंदी जिले में सरसों की थोड़ी बुवाई लेट हुई है। लेकिन गेहूं की बुवाई के लिए नमी पर्याप्त हैं, जिससे किसानों को पलेवा करने की आवश्यकता नही थी। एक पानी बचाने के लिए गेहूं की बुवाई जल्दी हो गई इसलिए यूरिया की समस्या बन थी। इस मांग के तहत माहवार यूरिया का वितरण होना है। जिसके तहत दिसंबर में 20 हजार मैटिक टन, जनवरी में 20 हजार मैटिक टन यूरिया का वितरण होना निर्धारित है। असिंचित क्षेत्र में थोड़ा बुवाई जल्दी होती हैं । इस सप्ताह में असिंचित क्षेत्र 75 प्रतिशत कंप्लीट हो जाएगा। सिंचित क्षेत्र में बुवाई शुरू हो गई हैं। गेहूं की बुवाई अभी चल रही हैं। 1.50 लाख हेक्टेयर में जिले में बुवाई होती हैं 70 हजार हेक्टयर में गेहूं की बुवाई अभी बाकी हैं । 65 हजार हेक्टयर में जिले में सरसो की बुवाई हुई हैं 42 हजार हेक्टयर में चने की बुवाई हैं। धान की अच्छी पैदावार होने ेसे बंपर आवक हो रही है। और वाली सरसों, गेंहू की पैदावार भी अच्छी रहेगा।<br /><strong>- रतन लाल मीणा,उपनिदेशक, कृषि विभाग बूंदी</strong></p>
<p>वर्तमान में कीट प्रजातियों का प्रकोप फ सलों में देखा नहीं जा रहा है। चने की फ सल में लेकर संभावना है तो किसान फेरोमॉन ट्रेप का उपयोग कर सकते हैं, वही सरसों की फसल में मोयले की संभावना देखी जा सकती है। इसलिए बॉर्डर पर लगे देशी आंकड़े कटाई करने के साथ मेंथोल, फेरोमोन का उपयोग किया जा सकता है। सरसों मे गलने की शिकायत आ रही है, वहां से सिंचाई से कार्बनडाजीन वर्मी कंपोस्ट मिलाकर उपयोग कर सकते हैं। किसानों को सलाह की सरसों में 25 दिसंबर से 15 जनवरी तक सिंचाई करने से बचें, ताकि फ सल में सड़ने गलने की समस्या नहीं रहेगी। वहीं पर चनें सहित अन्य फ सलों में लट और कीट पतंगों से बचाव करने के लिए खेतों में डंडे  (बर्डपर्च) गाढ़े जा सकते हैं, ताकि परभक्षी पक्षी खेतों में मौजूद रहे और कीट, पतंगों तथा लटों आदि को चट कर सकें। गेहूं,सरसों,चना आदि में मौत का फ ायदा भी देखने को मिलेगा।<br /><strong>- डॉ हरीश वर्मा, कार्यक्रम समन्वयक कृषि विज्ञान केंद्र बून्दी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 07 Dec 2022 15:07:00 +0530</pubDate>
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