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                <title>air defence system - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>रूस से भारत के नए एस-400 और एस-500 सिस्टम खरीदने पर बड़ा संकट, अमेरिका लगा सकता है काट्सा पेनल्टी</title>
                                    <description><![CDATA[ऑपरेशन सिंदूर के दौरान रूस का एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम भारत के लिए कवच बन गया था। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/america-can-put-a-big-crisis-on-buying-indias-new/article-126527"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/11-(4)2.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन/मास्को। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान रूस का एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम भारत के लिए कवच बन गया था। एस-400 की इसी खासियत को देखते हुए भारत सरकार रूस से 5 से ज्यादा एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदने पर विचार कर रही है। माना जा रहा है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की इस साल के आखिर में होने वाली भारत यात्रा के दौरान एस-400 सौदे को मंजूरी मिल सकती है। इसके अलावा भारत रूस के अत्याधुनिक एस-500 प्रोमैटी एयर डिफेंस सिस्टम को भी खरीदने पर विचार कर रहा है जो अंतरिक्ष तक हमला करने की ताकत रखता है। भारत को चीन और पाकिस्तान के मिसाइलों का खतरा मंडरा रहा है। भारत और रूस के बीच इस सौदे पर अब अमेरिका के काट्सा पेनल्टी का खतरा मंडराने लगा है। वह भी तब जब रूस के साथ भारत के व्यापारिक रिश्तों को लेकर पहले से ही अमेरिका के साथ तनाव अपने चरम पर है। द वायर की रिपोर्ट के मुताबिक सैन्य सूत्रों ने चेतावनी दी है कि अगर भारत रूस से एस-400 और एस-500 प्रोमेथस खरीदता है तो इससे अमेरिका के एडवर्सरी थ्रू सेंक्शंस एक्ट (काट्सा) के तहत अमेरिका पेनल्टी लगा सकता है। अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने पर भारत के खिलाफ 25 फीसदी का भारी भरकम सेकंडरी टैरिफ लगाया है जिससे उसका कुल टैरिफ 50 फीसदी हो गया है। पिछले सप्ताह ही रूस के फेडरल सर्विस फॉर मिलिट्री टेक्निकल कापोर्रेशन के प्रमुख दमित्रि शुगायेव ने इस बात की पुष्टि की थी।</p>
<p><strong>एस 400 खरीदने पर भारत के खिलाफ पेनल्टी का खतरा :</strong></p>
<p>शुगायेव ने रूसी समाचार एजेंसी तास से बातचीत में कहा कि भारत और रूस के बीच में इस क्षेत्र में सहयोग का विस्तार करने की संभावना है। इसका मतलब है कि नए एस-400 की डिलिवरी शामिल है। वहीं स्थानीय रक्षा उद्योग के सूत्रों का कहना है कि साल 2018 में भारत के रूस से 5.5 अरब डालर में 5 एस-400 खरीदने के लिए समझौता किया था। इसमें और ज्यादा खरीदने के लिए कोई प्रावधान नहीं था। अब अगर भूराजनीतिक तनाव के बीच कोई बातचीत रूस और भारत में हो रही तो इस पर अमेरिका के काट्सा प्रतिबंधों का खतरा रहेगा। भारत और अमेरिका के बीच पहले ही टैरिफ को लेकर तनाव भड़का हुआ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Sep 2025 14:08:52 +0530</pubDate>
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                <title>ताइवान को अमेरिका देगा अपना सबसे खतरनाक एयर डिफेंस सिस्टम</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका और ताइवान के बीच हुई एक डिफेंस डील को ही अब आगे बढ़ाया गया है और इसकी कीमत 2.81 अरब डॉलर थी। अमेरिका कई बार यह बात कह चुका है कि वह हमेशा ताइवान की रक्षा के लिए तैयार है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/america-will-give-its-most-dangerous-air-defense-system-to/article-31769"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-12/v-1.jpg" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन।अमेरिका ने ताइवान को अपना सबसे खतरनाक पैट्रियॉट एयर डिफेंस सिस्टम देने का मन बनाया है। अमेरिका की तरफ से ताइवान को 100 पैट्रियॉट एयर डिफेंस सिस्टम देने का प्रस्ताव दिया गया है। इसके अलावा अमेरिका रडार और सपोर्ट उपकरण भी देने को राजी है। बताया जा रहा है कि यह डील 882 मिलियन डॉलर की हो सकती है। अमेरिका और ताइवान के बीच हुई एक डिफेंस डील को ही अब आगे बढ़ाया गया है और इसकी कीमत 2.81 अरब डॉलर थी। अमेरिका कई बार यह बात कह चुका है कि वह हमेशा ताइवान की रक्षा के लिए तैयार है। साथ ही उसने चीन को इस द्वीप से दूर रहने की चेतावनी दी है। आपको बता दें कि यह सिस्टम अभी ताइवान के पास है लेकिन अब इनकी संख्या बढ़ सकती है।</p>
<p><strong>इराक युद्ध में प्रयोग</strong></p>
<p>अमेरिका ने सबसे पहले इस सिस्टम को साल 2003 में इराक युद्ध के दौरान तैनात किया था। कुवैत में उस समय इस सिस्टम को तैनात किया गया था और इसकी मदद से कई मिसाइलों को ढेर किया गया था। अक्टूबर 2019 में अमेरिका ने दो पैट्रियॉट मिसाइल बैटरीज को सऊदी अरब में तैनात किया था। यह तैनाती उस समय हुई थी जब तेल कंपनी अरामको पर ड्रोन हमला हुआ था। यह एयर डिफेंस सिस्टम चार बड़े आॅपरेशनल फंक्शंस को अंजाम दे सकता है। यह सिस्टम कम्युनिकेशंस, कमांड और कंट्रोल, रडार सर्विलांस और मिसाइल गाइडेंस जैसे काम कर सकता है। इनकी वजह से सिस्टम एक सुरक्षित और मोबाइल एयर डिफेंस को पूरा करता है।</p>
<p> </p>
<p><strong>हाथ लगी असफलता भी</strong></p>
<p>सऊदी अरब और अमीराती सेनाएं इस सिस्टम का प्रयोग हाउदी विद्रोहियों के खिलाफ कर रहरी हैं। इस सबसे एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम को एक असफलता भी झेलनी पड़ी है। 25 फरवरी 1991 को खाड़ी युद्ध के दौरान यह सिस्टम फेल हो गया था और इसकी वजह से 28 लोगों की मौत हो गई थी। जांच में पता लगा था कि गलत तरीके से इस हैंडल करने की वजह से यह असफलता हाथ लगी थी। पैट्रियॉट मिसाइल डिफेंस सिस्टम हिट-टू-किल टेक्नोलॉजी पर काम करता है। इसकी वजह से किसी भी टारगेट को सीधा शूट कर सकता है।</p>
<p><strong>हर मौसम में कारगर</strong></p>
<p>पैट्रियॉट एक लंबी रेंज का एयर डिफेंस सिस्टम है जो हर मौसम में ऑपरेट हो सकता है। यह सिस्टम इतना ताकतवर है कि बैलेस्टिक, क्रूज मिसाइल और यहां तक कि किसी एडवांस्ड एयरक्राफ्ट तक को ढेर कर सकता है। इस सिस्टम को मैसाच्यूसेट्स स्थित रेथॉन और फ्लोरिडा स्थित लॉकहीड मार्टिन मिसाइल और फायर कंट्रोल की तरफ से तैयार किया जाता है। यह मिसाइल डिफेंस सिस्टम इस समय अमेरिकी सेनाओं के अलावा जर्मनी, ग्रीस, इजरायल, जापान, कुवैत, नीदरलैंड्स, सऊदी अरब, दक्षिण कोरिया, पोलैंड, स्वीडन, कतर, यूएई, रोमानिया, स्पेन और ताइवान की सेनाएं इसका प्रयोग कर रही हैं। इस एयर डिफेंस सिस्टम को सबसे पहले साल 1982 में अमेरिकी सेना में शामिल किया गया था। वर्तमान समय में अमेरिकी सेना के पास 1100 पैट्रियॉट लॉन्चर्स हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 08 Dec 2022 11:39:46 +0530</pubDate>
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