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                <title>jairam ramesh - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>jairam ramesh RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>कांग्रेस का हमला: ग्रेट निकोबार परियोजना में पर्यावरण, आदिवासी अधिकार और पारदर्शिता नदारद, इन विषयों पर जवाब देने में वह विफल रही सरकार</title>
                                    <description><![CDATA[जयराम रमेश ने ग्रेट निकोबार विकास परियोजना को पारिस्थितिक आपदा करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने लेदरबैक कछुओं के आवास, आदिवासी अधिकारों और पारदर्शिता को दरकिनार किया है। राहुल गांधी की यात्रा के बाद, कांग्रेस ने पेड़ों की कटाई और पर्यावरणीय मंजूरी में हितों के टकराव पर सरकार से जवाब मांगा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/congress-attacks-government-fails-to-respond-on-issues-like-environment/article-152514"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/jairam-ramesh1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि ग्रेट निकोबार द्वीप विकास परियोजना में मोदी सरकार ने पर्यावरण, आदिवासियों के अधिकार, वित्तीय व्यवहार्यता और पारदर्शिता को पूरी तरह नजरअंदाज किया है और इन चिंताओं का जवाब देने में वह विफल रही है। कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने रविवार को सोशल मीडिया एक्स पर एक बयान में कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की गत 28 अप्रैल की ग्रेट निकोबार यात्रा से सरकार विचलित हुई है, इसलिए उसने एक मई को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर ध्यान भटकाने की कोशिश की है। सरकार संभावित पर्यावरणीय संकट से ध्यान हटाने का प्रयास कर रही है।</p>
<p>जयराम रमेश ने कहा कि ग्रेट निकोबार द्वीप पारिस्थितिकी दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील और विशिष्ट क्षेत्र है। वहां गत पांच वर्षों में पक्षियों, सांपों, गिको (छिपकली) और केकड़ों सहित लगभग 50 नयी प्रजातियां खोजी गई हैं। गैलाथिया खाड़ी, जहां बंदरगाह प्रस्तावित है, तटीय विनियमन क्षेत्र-1-ए में आती है और यह लेदरबैक कछुओं का प्रमुख प्रजनन स्थल है। उन्होंने आरोप लगाया कि पर्यावरणीय मंजूरी प्रक्रिया में भारतीय वन्यजीव संस्थान और भारतीय प्राणी सर्वेक्षण जैसी संस्थाओं पर दबाव डाला गया और बाद में इन्हीं को परियोजना से जुड़े कार्य सौंपे गए, जिससे हितों के टकराव की स्थिति उत्पन्न होती है।</p>
<p>कांग्रेस नेता ने कहा कि पेड़ों की कटाई के आंकड़ों को लेकर सरकार के अलग-अलग दावे सामने आए हैं और अब तक इसमें स्पष्टता नहीं है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग समय पर भिन्न आंकड़े दिए जाने से स्थिति संदिग्ध हो जाती है। उन्होंने प्रतिपूरक वनीकरण के प्रस्ताव को पर्यावरणीय दृष्टि से अव्यावहारिक बताते हुए कहा कि निकोबार जैसे समृद्ध पारिस्थितिक क्षेत्र की भरपाई भिन्न भौगोलिक क्षेत्र में वृक्षारोपण से नहीं की जा सकती और यह पर्यावरणीय सिद्धांतों के विपरीत है। उन्होंने कहा कि गैलाथिया खाड़ी को पहले वन्यजीव अभयारण्य घोषित किया गया था, लेकिन बाद में परियोजना के लिए इसे अधिसूचना से हटाकर इसकी श्रेणी बदली गई।</p>
<p>आदिवासी अधिकारों के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि निकोबारी समुदाय ने परियोजना को लेकर चिंता जताई है और शोंपेन जैसे संवेदनशील समुदाय की सहमति की प्रक्रिया पर भी प्रश्न उठ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत अधिकारों की प्रक्रिया जल्दबाजी में पूरी की गई। परियोजना की वित्तीय व्यवहार्यता पर सवाल उठाते हुए श्री रमेश ने कहा कि प्रस्तावित हवाई अड्डे और परियोजना के अन्य दावे अव्यावहारिक प्रतीत होते हैं और इससे जुड़े कई व्यावहारिक प्रश्न अनुत्तरित हैं। उन्होंने पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाते हुए कहा कि परियोजना से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किए गए हैं और सूचना के अधिकार के तहत भी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि इसे परियोजना से जोड़ना उचित नहीं है और इस पर संसद में व्यापक चर्चा होनी चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 May 2026 17:59:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अमित शाह के लद्दाख दौरे पर कांग्रेस का निशाना: ऐतिहासिक बौद्ध अवशेषों का किया जिक्र, भूमि एवं रोजगार की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर उठाए सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने गृह मंत्री अमित शाह के लद्दाख दौरे पर सवाल उठाते हुए कहा कि वे बौद्ध अवशेषों के प्रदर्शन में व्यस्त हैं, लेकिन स्थानीय लोगों की राज्य का दर्जा और रोजगार की मांगों पर चुप हैं। उन्होंने नेहरू के ऐतिहासिक दौरों का जिक्र करते हुए सरकार को जनता की भावनाओं का सम्मान करने की सलाह दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/congress-targets-amit-shahs-visit-to-ladakh-mentions-historical-buddhist/article-152322"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/jairam-ramesh-333.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस संचार विभाग प्रभारी जयराम रमेश ने केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के लद्दाख दौरे को लेकर प्रतिक्रिया में कहा कि अमित शाह शुक्रवार को पिपरहवा के बौद्ध अवशेषों की "महिमा" में व्यस्त हैं, जबकि लद्दाख के लोगों की राज्य का दर्जा, छठी अनुसूची का दर्जा और भूमि एवं रोजगार की सुरक्षा जैसी अहम मांगों पर चुप्पी साधे हुए हैं।</p>
<p>जयराम रमेश ने कहा कि लद्दाख में इस तरह के धार्मिक और ऐतिहासिक प्रदर्शनों का एक लंबा इतिहास रहा है, जिससे गृह मंत्री शायद अनभिज्ञ हैं। उन्होंने 14 जनवरी 1949 की एक ऐतिहासिक घटना का उल्लेख करते हुए बताया कि उस दिन भगवान बुद्ध के दो प्रमुख शिष्यों सारिपुत्र और महा मोग्गलान के पवित्र अवशेष, जिन्हें 1851 में विक्टोरिया और अलबर्ट संग्रहालय ले गए थे, उन्हें वापस भारत लाया गया था। इन अवशेषों को तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने प्राप्त कर महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया को कोलकाता में सौंपा था।</p>
<p>कांग्रेस नेता के अनुसार, 1949 में ही नेहरू ने लद्दाख का चार दिवसीय दौरा किया था। इस दौरान प्रतिष्ठित बौद्ध नेता कुशोक बकुला रिनपोछे ने उनसे आग्रह किया था कि इन अवशेषों को लद्दाख भी लाया जाए। उन्होंने कहा कि यह पहल मई 1950 में साकार हुई, जब इन पवित्र अवशेषों को 79 दिनों तक पूरे लद्दाख में प्रदर्शित किया गया। इसके बाद इन्हें यांगून, कोलंबो और सांची में स्थापित किया गया। जयराम रमेश ने कहा कि इतिहास गवाह है कि ऐसे आयोजनों का उद्देश्य केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि लोगों के साथ संवाद और उनकी भावनाओं का सम्मान भी होता था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 May 2026 13:22:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>टालमटोल के बाद जातिगत जनगणना कराने पर सहमत भाजपा सरकार : जातिगत जनगणना की रूपरेखा अब तक अस्पष्ट, जयराम ने सरकार के रख में आए बदलाव को बताया 'नाटकीय यू-टर्न'</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने केंद्र सरकार पर जातिगत जनगणना को लेकर टालमटोल का आरोप लगाया है। उन्होंने इसे सरकार का 'नाटकीय यू-टर्न' बताते हुए कहा कि घोषणा के एक साल बाद भी कोई स्पष्ट रूपरेखा सामने नहीं आई है। कांग्रेस ने प्रक्रिया में पारदर्शिता और विपक्ष के साथ सार्थक संवाद की मांग की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/after-procrastination-bjp-government-agreed-to-conduct-caste-census-outline/article-152163"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/jairam-ramesh1.png" alt=""></a><br /><p>धर्मशाला। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार टालमटोल के बाद भले ही जातिगत जनगणना कराने पर सहमत हुई है लेकिन जनगणना कैसे होगी इसकी रूपरेखा को लेकर अब तक कोई स्पष्ट नीति सामने नहीं आई है। कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने गुरुवार को सोशल मीडिया एक्स पर कहा कि आज से ठीक एक वर्ष पहले सरकार ने जनगणना में जातिगत गणना शामिल करने की घोषणा की थी लेकिन एक साल बीतने के बावजूद इसके क्रियान्वयन को लेकर स्थिति अब भी अस्पष्ट बनी हुई है।</p>
<p>उन्होंने इस मुद्दे पर सरकार के रुख में आए बदलाव को 'नाटकीय यू-टर्न' बताते हुए घटनाक्रम का क्रमवार उल्लेख किया और कहा कि 21 जुलाई 2021 को केंद्रीय गृह मंत्री ने लोकसभा में कहा था कि सरकार ने नीति के तौर पर जाति आधारित जनगणना नहीं कराने का निर्णय लिया है। फिर 21 सितंबर 2021 को केंद्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय दायर हलफनामे में भी इसी रुख को दोहराया।</p>
<p>जयराम रमेश के अनुसार 16 अप्रैल 2023 को पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर नियमित जनगणना के साथ अद्यतन जाति जनगणना कराने की मांग की थी। इसके बावजूद 28 अप्रैल 2024 को एक साक्षात्कार में इस मांग को 'अर्बन नक्सल' सोच से प्रेरित बताया था। रमेश ने कहा कि इसके ठीक एक वर्ष बाद 30 अप्रैल 2025 को सरकार ने जातिगत जनगणना की घोषणा कर दी, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार का रुख लगातार बदलता रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार से इस बयान पर माफी मांगने और देश की जनता को इस बदलाव के कारण स्पष्ट करने की मांग की।</p>
<p>उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जातिगत जनगणना की प्रक्रिया को लेकर अब तक न तो विपक्षी दलों, न राज्य सरकारों और न ही विषय विशेषज्ञों के साथ कोई सार्थक संवाद किया गया है। उन्होंने कहा कि पांच मई 2025 को खरगे द्वारा लिखे गए पत्र का भी कोई जवाब नहीं दिया गया, जबकि उसमें उठाए गए मुद्दे आज भी प्रासंगिक हैं। हाल ही में, संपन्न संसद के विशेष सत्र का हवाला देते हुए कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार इस महत्वपूर्ण मुद्दे को टालने की मंशा रखती है और अभी तक इसकी स्पष्ट रूपरेखा सामने न आना इसी का संकेत है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 15:20:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कांग्रेस का गंभीर आरोप : अमेरिका को खुश करने के लिए केंद्र सरकार ने दी पाकिस्तान को 'क्लीन चिट', बयान को बताया राष्ट्रविरोधी</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने रक्षा मंत्री पर एससीओ बैठक में पाकिस्तान को 'क्लीन चिट' देने का आरोप लगाया है। उन्होंने इस रुख को शर्मनाक और राष्ट्रविरोधी बताते हुए कहा कि अमेरिका को खुश करने के लिए पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों को नजरअंदाज किया जा रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/congresss-serious-allegation-that-to-please-america-the-central-government/article-152045"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-02/jairam.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि रक्षा मंत्री ने आतंकवाद के मामले में पाकिस्तान को 'क्लीन चिट' दे दी है और दावा किया कि ऐसा अमेरिका को खुश करने के लिए किया गया है। कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने बुधवार को सोशल मीडिया एक्स पर लिखा कि निश्चित रूप से रक्षा मंत्री ने केंद्र सरकार की स्वीकृति और निर्देश पर ही किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक में 'क्लीन चिट' दी है। उन्होंने इसे शर्मनाक बताया और सवाल किया कि सरकार को ये बताना चाहिए कि क्या पाकिस्तान आतंकवाद का केन्द्र नहीं है।</p>
<p>उन्होंने सवाल किया" क्या वहां भारत के खिलाफ आतंकी शिविर नहीं चल रहे हैं और क्या मुंबई तथा पहलगाम जैसे हमलों की साजिश पाकिस्तान से जुड़े आतंकियों ने नहीं रची थी।" जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान के प्रति सरकार का यह रुख अमेरिका को खुश करने और चीन के सामने संतुलन साधने की नीति का हिस्सा है। उन्होंने 19 जून 2020 को चीन को लेकर दिए गए बयान का हवाला देते हुए कहा कि रक्षा मंत्री का यह भी उसी तरह का चौंकाने वाला रुख है। उन्होंने रक्षा मंत्री के बयान को राष्ट्रविरोधी करार दिया। जयराम रमेश ने एससीओ की बैठक में रक्षा मंत्री के भाषण के वीडियाे का एक हिस्सा भी पाेस्ट किया है जिसमें उन्होंने कहा है कि आतंकवाद का न कोई देश होता है और न कोई धर्म।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 18:40:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>महिला आरक्षण पर सर्वदलीय बैठक बुलाए सरकार : जयराम ने कहा-संसद के विशेष सत्र के दौरान नहीं था महिलाओं का आरक्षण वास्तविक मुद्दा </title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने केंद्र सरकार से 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को तत्काल प्रभावी बनाने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि चुनावी शोर थमने के बाद अब 2029 तक इंतजार करने के बजाय महिलाओं को न्याय दिलाने हेतु ठोस कदम उठाने चाहिए, ताकि संसद में उनकी भागीदारी सुनिश्चित हो सके।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/government-called-all-party-meeting-on-womens-reservation-jairam-said/article-151962"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/jairam-ramesh-2.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने कहा है कि जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित थे, वहां अब चुनाव लगभग समाप्त हो गए हैं, इसलिए सरकार को महिला आरक्षण लागू करने के मुद्दे पर तत्काल सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए। कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने मंगलवार को सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि अब विभिन्न राज्य विधानसभाओं के लिए होने वाले चुनाव का प्रचार समाप्त हो चुका है और लोकसभा के परिसीमन को लागू करने का सरकार का प्रयास विपक्ष की एकजुटता के कारण विफल रहा है, तो अब केंद्र सरकार को महिला आरक्षण लागू करने के मुद्दे पर पहल करनी चाहिए।</p>
<p>उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 को वर्ष 2029 से लोकसभा की मौजूदा संख्या के साथ किस प्रकार लागू किया जा सकता है, इस पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाई जानी चाहिए। यह कदम संभव, वांछनीय और आवश्यक है। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि संसद के विशेष सत्र के दौरान महिलाओं का आरक्षण वास्तविक मुद्दा नहीं था, बल्कि उस समय का एजेंडा परिसीमन से जुड़ा हुआ था। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 15:10:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>कांग्रेस का केंद्र पर निशाना : जनजातीय अधिकारों और पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों के उल्लंघन का लगाया आरोप, जयराम ने कहा-सरकार कराए निष्पक्ष जांच</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने ओडिशा के सिजीमाली खनन प्रोजेक्ट में जनजातीय अधिकारों और पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने विरोध कर रहे आदिवासियों पर पुलिसिया बल प्रयोग की स्वतंत्र जांच की मांग की। रमेश ने जोर दिया कि पेसा (PESA) और वन अधिकार अधिनियम की अनदेखी कर परियोजनाओं को जबरन थोपना असंवैधानिक है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/congress-targets-center-accuses-it-of-violating-tribal-rights-and/article-151919"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/jairam-ramesh.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने मंगलवार को ओडिशा के रायगड़ा और कालाहांडी जिलों में प्रस्तावित बॉक्साइट खनन परियोजना के संबंध में जनजातीय अधिकारों और पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों के गंभीर उल्लंघन का आरोप लगाया। उन्होंने क्षेत्र में हाल ही में हुई अशांति की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। जयराम रमेश ने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि ओडिशा में सार्वजनिक प्रतिरोध का एक लंबा इतिहास रहा है, खासकर तब जब पारिस्थितिक परिणामों वाली खनन परियोजनाओं को संवैधानिक और कानूनी सुरक्षा उपायों का पालन किए बिना 'जबरन थोपा' जाता है। उन्होंने सिजीमाली में प्रस्तावित परियोजना को इसी 'निराशाजनक गाथा' का हिस्सा बताया।</p>
<p>कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि जनजातीय और वनवासी समुदायों की सुरक्षा के लिए बनाए गए प्रमुख कानून, जिनमें पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम (पेसा), 1996 और वन अधिकार अधिनियम, 2006 शामिल हैं, उनकी अनदेखी की गई है। जयराम रमेश ने दावा किया कि जब हाल के दिनों में विरोध प्रदर्शन शुरू हुए, तो कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने 'अत्यधिक बल' का प्रयोग किया, जिसमें विशेष रूप से अनुसूचित जनजाति समुदायों और महिलाओं को निशाना बनाया गया। उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाइयां अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 का उल्लंघन हैं।</p>
<p>राजनीतिक संदर्भ का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ओडिशा के मुख्यमंत्री और केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री दोनों इसी राज्य से आते हैं, इसलिए उन्हें इस मुद्दे को संभालने में अधिक संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। उन्होंने केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री से सिजीमाली अशांति की स्वतंत्र जांच के आदेश देने और यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि पेसा और वन अधिकार अधिनियम के प्रावधानों को पारदर्शी और सहभागी प्रक्रिया के माध्यम से 'अक्षरशः' लागू किया जाए। ये आरोप दक्षिणी ओडिशा के कुछ हिस्सों में चल रहे तनाव के बीच आए हैं, जहाँ जनजातीय समुदाय विस्थापन, पर्यावरणीय क्षरण और पारंपरिक अधिकारों के नुकसान की चिंताओं को लेकर अक्सर खनन परियोजनाओं का विरोध करते रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 13:58:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>कांग्रेस का केंद्र पर निशाना : पंचायती राज व्यवस्था को सशक्त बनाने की राजीव गांधी की पहल ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी, दो लाख से अधिक गांवों को मिल रहा फायदा</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस पर जयराम रमेश ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के दूरदर्शी नेतृत्व को नमन किया। 73वें संविधान संशोधन के जरिए पंचायतों को संवैधानिक दर्जा और महिलाओं को आरक्षण मिला। आज 15 लाख महिला प्रतिनिधि ग्रामीण विकास की धुरी हैं, हालांकि कांग्रेस ने मनरेगा समाप्ति को लेकर केंद्र पर निशाना भी साधा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/congress-targets-central-government-rajiv-gandhis-historic-and-transformative-initiative/article-151555"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/rajiv-gandhi.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर शुक्रवार को कहा कि पंचायतों को सशक्त बनाने की दिशा में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नेतृत्व में की गई पहल ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी थी, जिसका आज देश के दो लाख 67 हजार से अधिक गांवों और जिला परिषदों को फायदा मिल रहा है। कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने आज यहां एक बयान में कहा कि 24 अप्रैल को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन 1993 में संविधान का 73वां संशोधन लागू किया गया था, जिसके तहत अनुच्छेद 243-ए- से 243-O तक के प्रावधान जोड़कर पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा और व्यापक अधिकार दिए गए।</p>
<p>उन्होंने कहा कि वर्तमान में देश में लगभग 2.6 लाख ग्राम पंचायतें, 6,700 से अधिक मध्यवर्ती पंचायतें और 673 जिला परिषद कार्यरत हैं, जो स्थानीय शासन की मजबूत नींव हैं। कांग्रेस के अनुसार, इस व्यवस्था को मजबूत करने में राजीव गांधी की दूरदृष्टि और प्रतिबद्धता का अहम योगदान रहा। उन्होंने कहा कि पंचायती राज संस्थाओं में एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने की पहल भी राजीव गांधी के प्रयासों का परिणाम थी, जिसमें अनुसूचित जाति और जनजाति की महिलाओं को भी शामिल किया गया। आज देश में लगभग 32 लाख निर्वाचित पंचायत प्रतिनिधि हैं, जिनमें करीब 15 लाख महिलाएं हैं।</p>
<p>कांग्रेस ने यह भी कहा कि पंचायतों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षण का प्रावधान अनुच्छेद 243-डी(6) के तहत किया गया, जिसका कई राज्यों ने लाभ उठाया है। पार्टी ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल का भी उल्लेख किया और कहा कि उनकी सरकार ने 2004 में पंचायती राज मंत्रालय की स्थापना की और 2006 में मनरेगा योजना शुरू की, जिससे ग्राम पंचायतों को विकास योजनाओं के निर्माण और क्रियान्वयन में केंद्रीय भूमिका मिली। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मौजूदा केंद्र सरकार ने दिसंबर 2025 में मनरेगा को समाप्त कर दिया। पार्टी ने कहा कि पंचायतों और नगरपालिकाओं के सशक्तिकरण की ज़रूरत केवल लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाने की राजनीति से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 14:36:04 +0530</pubDate>
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                <title>कांग्रेस का केंद्र पर हमला : महिला आरक्षण क्रियान्वयन की इच्छुक नहीं सरकार, रणनीतिक तरीके से इसे परिसीमन विधेयक से जोड़ा</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने केंद्र सरकार पर महिला आरक्षण को जानबूझकर टालने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस 10 वर्षों से इसके पक्ष में है, लेकिन सरकार ने इसे परिसीमन से जोड़कर देरी की रणनीति अपनाई है। सोनिया गांधी और राहुल गांधी द्वारा लिखे पत्रों के बावजूद क्रियान्वयन में हो रही देरी महिला सशक्तिकरण के प्रति सरकार की उदासीनता दर्शाती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/congresss-attack-on-the-central-government-not-being-willing-to/article-151183"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/jairam-ramesh1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने कहा है कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व हमेशा महिला आरक्षण के पक्ष में रहा है और इसके लिए वह समय-समय पर वह सरकार पर दबाव भी बनाती रही है लेकिन केंद्र सरकार रणनीति के तहत इसको लागू नहीं कर रही है। कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने मंगलवार को सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर कहा कि उनकी पार्टी करीब 10 साल से सरकार पर महिलाओं को आरक्षण देने का दबाव बना रही है और इस विधेयक को संसद में पारित कराने में भी अपना समर्थन दिया लेकिन सरकार ने जानबूझकर और रणनीतिक तरीके से इसे परिसीमन विधेयक से जोड़ दिया, जिससे इसे लागू करने में अड़चन आयी।</p>
<p>उन्होंने कहा कि 2017 में तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी महिला आरक्षण विधेयक पारित होने के संबंध में केंद्र को पत्र लिखा था। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी 16 जुलाई, 2018 को केंद्र को पत्र लिखकर महिला आरक्षण को तुरंत लागू करने की मांग की थी। केंद्र सरकार ने इस मांग पर कोई ध्यान नहीं दिया और फिर परिसीमन से जोड़कर इसे टालने की कोशिश की। जयराम रमेश ने कहा, "कांग्रेस का रुख महिला आरक्षण को लेकर अडिग और अपरिवर्तित रहा है। राहुल गांधी के लिखे पत्र के आठ साल बाद भी, केंद्र सरकार-परिसीमन से जोड़कर आरक्षण के कार्यान्वयन में देरी करने के इच्छुक हैं और इसलिए वह इस मांग पर कोई कार्रवाई नहीं की है।”</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 15:53:58 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>'दलाल' देश बना शांतिदूत? कांग्रेस नेता जयराम रमेश का केंद्र पर हमला ; शांति वार्ता में पाकिस्तान की मेजबानी, भारतीय कूटनीति में बदलाव ज़रूरी</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने केंद्र सरकार की विदेश नीति पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जिस पाकिस्तान को विदेश मंत्री ने 'दलाल' कहा, वही आज अमेरिका-ईरान शांति वार्ता की मेजबानी कर रहा है। रमेश के अनुसार, पाकिस्तान का बढ़ता वैश्विक प्रभाव और डोनाल्ड ट्रंप से उसकी करीबी भारत की रणनीतिक हार और कूटनीतिक विफलता का संकेत है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/pakistan-hosting-peace-talks-change-in-indian-diplomacy-necessary-congress/article-151104"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/jairam-ramesh-2.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने सरकार पर पाकिस्तान को उसकी नीतियों के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने में विफल रहने का आरोप लगाते हुए कहा है कि जिस देश को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ‘दलाल’ बता रहे थे, उसी को दूसरी बार अमेरिका-ईरान शांति वार्ता की मेजबानी का मौका मिल रहा है। कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने सोमवार को एक बयान में इसे केंद्र के नेतृत्व वाली सरकार की विदेश नीति के लिए झटका बताया और कहा कि अब कूटनीतिक तथा रणनीतिक स्तर पर बदलाव की सख्त जरूरत है।</p>
<p>उन्होंने विदेश मंत्री पर भी निशाना साधा और कहा, “बहुत जानकार और हमेशा सलीके से पेश आने वाले विदेश मंत्री ने जिस देश को ‘दलाल’ बताया था, वही आज अमेरिका-ईरान शांति वार्ता के दूसरे दौर की मेजबानी कर रहा है। बारह अप्रैल को पहले दौर की वार्ता पूरी होने के बाद पाकिस्तान ने सऊदी अरब और कतर से छह अरब डॉलर का कर्ज लिया, ताकि संयुक्त अरब अमीरात के 3.5 अरब डॉलर के कर्ज को चुका सके और 1.43 अरब डॉलर के यूरोबॉन्ड की एक किश्त का भुगतान कर सके।”</p>
<p>जयराम रमेश ने कहा कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था गंभीर संकट में है और वह मित्र देशों की सहायता पर निर्भर है, इसके बावजूद वह एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने ओसामा बिन लादेन जैसे सभी आतंकवादियों को शरण दी, अफगानिस्तान में ड्रग पुनर्वास केंद्रों पर बमबारी की और हाल में पहलगाम आतंकवादी हमले की साजिश रची। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट है कि केंद्र सरकार की क्षेत्रीय और वैश्विक कूटनीति पाकिस्तान को अलग-थलग करने में विफल रही है, जबकि नवंबर 2008 के मुंबई आतंकवादी हमले के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के समय भारत ने पाकिस्तान पर प्रभावी दबाव बनाया था।</p>
<p>कांग्रेस नेता ने कहा कि यह भारत के लिए चिंता का विषय है कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर अब डोनाल्ड ट्रंप के करीबी माने जा रहे हैं। उनके अनुसार, पाकिस्तान ने ट्रंप के परिवार और उनके करीबी नेटवर्क के साथ संबंध बनाने में भारत की तुलना में अधिक सफलता पायी है। उन्होंने कहा, “यह भी केंद्र सरकार की विदेश नीति के लिए बड़ा झटका है। भारत को अपनी कूटनीतिक रणनीति और तौर-तरीकों में व्यापक बदलाव की जरूरत है, जिसके लिए मौजूदा नेतृत्व सक्षम नहीं दिखता।”</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 18:13:15 +0530</pubDate>
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                <title>कांग्रेस ने परिसीमन को लेकर केंद्र पर बोला हमला : प्रतिनिधित्व पर दिए आश्वासनों पर उठाया सवाल, जनता को जानबूझकर धोखा देने का लगाया आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने केंद्र सरकार पर परिसीमन मुद्दे पर राष्ट्र को 'धोखा' देने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि दक्षिण और पूर्वी राज्यों का लोकसभा प्रतिनिधित्व कम हो जाएगा, जो संवैधानिक नैतिकता का उल्लंघन है। रमेश ने इसे डॉ. अंबेडकर की विरासत का अपमान बताते हुए सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/congress-attacked-the-center-over-delimitation-raised-questions-on-the/article-150483"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/jairam-ramesh-4.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने बुधवार को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला और सरकार पर जानबूझकर धोखा देने और संसदीय प्रतिनिधित्व पर पहले दिये गये आश्वासनों को कमजोर करने का आरोप लगाया। सोशल मीडिया साइट ‘एक्स’ पर लिखे एक तीखे पोस्ट में, जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि परिसीमन पर केंद्र सरकार के दावों का आगामी संसद के विशेष सत्र के लिए प्रसारित विधेयकों में खंडन किया गया है।</p>
<p>उन्होंने कहा, “केंद्र सरकार एकमात्र विशिष्ट विशेषता उनकी बेजोड़ भ्रामक नेतृत्व क्षमता वाली पार्टी है। उन्होंने परिसीमन मुद्दे पर राष्ट्र के साथ जानबूझकर छल किया है।” प्रस्तावित परिवर्तनों के संभावित प्रभाव पर चिंता व्यक्त करते हुए, कांग्रेस नेता ने दावा किया कि कई क्षेत्रों के लोकसभा में सापेक्ष प्रतिनिधित्व में कमी आ सकती है। उन्होंने कहा, “दक्षिणी राज्यों के सदस्यों की लोकसभा में संख्या कम हो जाएगी और इसी तरह की स्थिति उत्तर-पश्चिम भारत के छोटे राज्यों और पूर्वी राज्यों की भी है।” उन्होंने सरकार की विफलता पर सवाल उठाया, जो सभी राज्यों में सीटों में एक समान एवं आनुपातिक वृद्धि करने की अपनी पिछली प्रतिबद्धता का सम्मान करने में विफल रही।</p>
<p>जयराम रमेश ने कहा, “सभी राज्यों के लिए लोकसभा में समानुपातिक संख्या में वृद्धि का जो वादा केंद्र सरकार और उनके कुछ सहयोगियों ने किया था, उसका क्या हुआ? ऐसा नहीं हुआ है।” उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के आश्वासनों पर भरोसा नहीं किया जा सकता।” उन्होंने सरकार पर संवैधानिक सिद्धांतों के बजाय राजनीतिक लाभ को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया। जयराम रमेश ने कहा,“वह सत्ता हथियाने की अपनी अशिष्ट प्रवृत्ति से ऊपर उठकर एक राजनेता बनने में असमर्थ हैं यहां तक कि परिसीमन जैसे संवेदनशील मुद्दे पर भी।”</p>
<p>कांग्रेस ने इस कदम के समय पर भी आपत्ति दर्ज की और कहा कि विधेयक की प्रतियां डॉ बी.आर.अंबेडकर की जयंती पर अपलोड किये गये थे। जयराम रमेश ने परिसीमन प्रावधानों को बाबासाहेब की विरासत का अपमान करार दिया और 25 नवंबर, 1949 को संविधान सभा में डॉ अंबेडकर द्वारा संवैधानिक नैतिकता से मुक्त सरकार के खतरों के बारे में दी गयी चेतावनी का हवाला दिया। जनसंख्या परिवर्तन के आधार पर संसद एवं विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं को पुनर्निर्धारित करने की परिसीमन प्रक्रिया लंबे समय से एक राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दा रही है। इसका हालांकि उद्देश्य समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है लेकिन कई विपक्षी दलों, विशेष रूप से दक्षिणी राज्यों के दलों ने चिंता व्यक्त की है कि जनसंख्या आधारित समायोजन से क्षेत्रों के बीच सत्ता संतुलन बिगड़ सकता है। सरकार का हालांकि कहना है कि परिसीमन संबंधी कोई भी प्रक्रिया संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार ही की जाएगी, लेकिन संसद के विशेष सत्र से पहले यह मुद्दा विवाद का विषय बने रहने का अनुमान है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 14:02:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर लगाया यू-टर्न का आरोप : जयराम रमेश बोले- महिला आरक्षण को लेकर स्पष्ट योजना नहीं बना पाई सरकार,  विपक्ष से संवाद करने में रही विफल </title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री मोदी पर महिला आरक्षण को लेकर "यू-टर्न" लेने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि जनगणना और परिसीमन के नाम पर देरी करने के बाद, सरकार अब चुनावी लाभ के लिए अपना रुख बदल रही है। कांग्रेस ने इसे "भ्रामक राजनीति" करार देते हुए महिलाओं से माफी की मांग की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/congress-accused-the-central-government-of-u-turn-jairam-ramesh-said/article-149829"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/jairam-ramesh.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस पार्टी के संचार विभाग प्रभारी जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर महिला आरक्षण को लेकर "यू-टर्न" लेने का आरोप लगाया है। रमेश ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि प्रधानमंत्री मीडिया में लेख लिखकर खुद को महिला आरक्षण का "अकेला चैंपियन" दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को देश की महिलाओं से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम संसद द्वारा सर्वसम्मति से पारित हुआ था, तब कांग्रेस ने इसे 2024 से लागू करने की मांग की थी लेकिन सरकार ने इसे जनगणना और परिसीमन से जोड़ दिया, जिन प्रक्रियाओं में देरी हुई। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि करीब 30 महीने बाद, संभावित चुनावी नुकसान को देखते हुए सरकार अब अपना रुख बदल रही है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार अब जनगणना और उससे जुड़े परिसीमन को नजरअंदाज करने की बात कर रही है, जबकि अधिकारियों के अनुसार इसके परिणाम 2027 तक आ सकते हैं।</p>
<p>जयराम रमेश ने केंद्र सरकार पर यह भी आरोप लगाया कि वह विपक्ष से संवाद करने में विफल रही है और महिला आरक्षण को लेकर स्पष्ट योजना नहीं बना पाई। उन्होंने कहा कि यह "भ्रामक राजनीति" है, जिसका उद्देश्य सरकार की विफलताओं और विदेश नीति के मुद्दों से ध्यान हटाना है। उन्होंने यह भी दावा किया कि यह पूरा दृष्टिकोण खासतौर पर तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की महिलाओं को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है, जहां भारतीय जनता पार्टी के पास अन्य ठोस मुद्दों की कमी है।</p>
<p>गौरतलब है कि कांग्रेस ने आज शाम कांग्रेस कार्यसमिति की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है जिसमें पार्टी की तरफ महिला आरक्षण पर चर्चा होगी और भविष्य की रणनीति पर विचार किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 12:29:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>महिला आरक्षण विधेयक पर घमासान : कांग्रेस ने सरकार के फैसले को बताया 'एकतरफा' , सर्वदलीय बैठक की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने 16 अप्रैल से बुलाई गई संसद की तीन दिवसीय बैठक को सरकार की 'मनमानी' करार दिया है। विपक्ष ने विधानसभा चुनावों के मद्देनजर इसे 29 अप्रैल के बाद करने का सुझाव दिया था। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार बिना सर्वदलीय सहमति के नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन और परिसीमन जैसे गंभीर मुद्दों को थोप रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/congress-targets-the-centre-calling-a-three-day-meeting-of-parliament/article-148995"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/congress-logo.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने कहा है कि कुछ राज्यों के विधानसभा चुनावों के बीच 16 अप्रैल से महिला आरक्षण विधेयक में संशोधन पर चर्चा के लिए संसद की तीन दिवसीय बैठक बुलाना सरकार का एकतरफा निर्णय है और इस बैठक को लेकर विपक्ष को नजरअंदाज कर पूरी तरह से मनमानी की गई है। कांग्रेस के संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने शुक्रवार को यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि संसद की बैठक 16, 17 और 18 अप्रैल को बुलाई गयी है। </p>
<p>इस बारे में सरकार के साथ जो विचार विमर्श हुआ था उसमें कहा गया था कि कुछ राज्यों के विधानसभा चुनाव हो रहे हैं इसलिए 29 अप्रैल के बाद सर्वदलीय बैठक बुलाकर इस बारे में विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि 16 मार्च को संसदीय कार्य मंत्री किरन रिजिजू ने राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को पत्र लिखकर 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023' में प्रस्तावित संशोधनों पर चर्चा की इच्छा जताई तो श्री खरगे ने 15 मिनट के भीतर ही पत्र का जवाब देते हुए सुझाव दिया कि अलग-अलग चर्चा करने के बजाय सभी विपक्षी दलों को एक साथ आमंत्रित कर सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए।</p>
<p>लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी कहा कि यदि सरकार महिला आरक्षण विधेयक में संशोधन करना चाहती है, तो इस पर सभी दलों की सहमति आवश्यक है और इसके लिए सर्वदलीय बैठक सबसे उपयुक्त मंच होगा। कांग्रेस नेता के अनुसार खरगे ने कहा था कि इस बारे में सामूहिक तौर पर फ़ैसला लीजिए और 29 अप्रैल के बाद सभी दलों की बैठक इस बारे में बुलाइए। सरकार के साथ इसको लेकर 16 से 26 मार्च तक खतों का आदान प्रदान हुआ लेकिन लगता है कि सरकार पहले ही मन बना चुकी थी और अंत में उसने एकतरफा निर्णय लेते हुए 16, 17, 18 अप्रैल को संसद की बैठक बुलाने का निर्णय लिया। मतलब साफ है कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से कुछ दिन पहले ही आचार संहिता के दौरान ये संसद की बैठक होगी जबकि 24 मार्च को तृणमूल कांग्रेस को छोड़कर, सभी विपक्षी दल सर्वदलीय बैठक के पक्ष में थे।</p>
<p>विपक्षी दलों ने सर्वसम्मति से सुझाव दिया था कि 29 अप्रैल के बाद बैठक बुलाए क्योंकि तब तक सभी राज्यों के विधानसभा चुनाव समाप्त हो जाएंगे। इसके बावजूद सरकार ने इस सुझाव को नहीं माना। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने विपक्ष की मांग को दरकिनार करते हुए 16 अप्रैल से तीन दिन की संसद की बैठक बुलाई है, जिससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि इस सत्र में महिला आरक्षण विधेयक के साथ-साथ परिसीमन का मुद्दा भी उठाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण विषय पर अब तक कोई व्यापक चर्चा नहीं हुई है।</p>
<p>कांग्रेस ने यह भी कहा कि सितंबर 2023 में लोकसभा और राज्यसभा द्वारा पारित महिला आरक्षण विधेयक में 30 महीनों के भीतर संशोधन लाने की बात कही गई थी और अब तीन दिन की बैठक बुलाकर इसी दिशा में कदम उठाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा महिला आरक्षण का समर्थन किया है और पहली बार चुनाव में महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने किया था। उनके नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने 1989 में 64, 65 संविधान संशोधन कर पंचायत और नगर पालिकाओं में एक तिहाई महिला आरक्षण का प्रावधान किया था। लोकसभा में यह संविधान संशोधन विधेयक पारित हुआ लेकिन राज्यसभा में भाजपा तथा उसके लोगों ने ही इसका विरोध किया था, जिसके कारण ये पारित नहीं हो पाया। तब 1993 में कांग्रेस की सरकार में 73, 74 संविधान संशोधन लोकसभा और राज्यसभा में पारित कराया जिसके कारण आज पंचायत और नगरपालिकाओं में करीब 30 लाख चुने प्रतिनिधियों में से 15 लाख महिलाएं हैं। आरक्षण का प्रावधान एक तिहाई है लेकिन महिलाओं की भूमिका उससे भी ज्यादा बढ़कर 50 प्रतिशत के करीब है लेकिन केंद्र सरकार आज इसका श्रेय लेने की कोशिश कर रही है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 18:06:43 +0530</pubDate>
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