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                <title>jairam ramesh - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>jairam ramesh RSS Feed</description>
                
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                <title>कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर लगाया यू-टर्न का आरोप : जयराम रमेश बोले- महिला आरक्षण को लेकर स्पष्ट योजना नहीं बना पाई सरकार,  विपक्ष से संवाद करने में रही विफल </title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री मोदी पर महिला आरक्षण को लेकर "यू-टर्न" लेने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि जनगणना और परिसीमन के नाम पर देरी करने के बाद, सरकार अब चुनावी लाभ के लिए अपना रुख बदल रही है। कांग्रेस ने इसे "भ्रामक राजनीति" करार देते हुए महिलाओं से माफी की मांग की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/congress-accused-the-central-government-of-u-turn-jairam-ramesh-said/article-149829"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/jairam-ramesh.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस पार्टी के संचार विभाग प्रभारी जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर महिला आरक्षण को लेकर "यू-टर्न" लेने का आरोप लगाया है। रमेश ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि प्रधानमंत्री मीडिया में लेख लिखकर खुद को महिला आरक्षण का "अकेला चैंपियन" दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को देश की महिलाओं से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम संसद द्वारा सर्वसम्मति से पारित हुआ था, तब कांग्रेस ने इसे 2024 से लागू करने की मांग की थी लेकिन सरकार ने इसे जनगणना और परिसीमन से जोड़ दिया, जिन प्रक्रियाओं में देरी हुई। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि करीब 30 महीने बाद, संभावित चुनावी नुकसान को देखते हुए सरकार अब अपना रुख बदल रही है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार अब जनगणना और उससे जुड़े परिसीमन को नजरअंदाज करने की बात कर रही है, जबकि अधिकारियों के अनुसार इसके परिणाम 2027 तक आ सकते हैं।</p>
<p>जयराम रमेश ने केंद्र सरकार पर यह भी आरोप लगाया कि वह विपक्ष से संवाद करने में विफल रही है और महिला आरक्षण को लेकर स्पष्ट योजना नहीं बना पाई। उन्होंने कहा कि यह "भ्रामक राजनीति" है, जिसका उद्देश्य सरकार की विफलताओं और विदेश नीति के मुद्दों से ध्यान हटाना है। उन्होंने यह भी दावा किया कि यह पूरा दृष्टिकोण खासतौर पर तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की महिलाओं को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है, जहां भारतीय जनता पार्टी के पास अन्य ठोस मुद्दों की कमी है।</p>
<p>गौरतलब है कि कांग्रेस ने आज शाम कांग्रेस कार्यसमिति की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है जिसमें पार्टी की तरफ महिला आरक्षण पर चर्चा होगी और भविष्य की रणनीति पर विचार किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 12:29:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>महिला आरक्षण विधेयक पर घमासान : कांग्रेस ने सरकार के फैसले को बताया 'एकतरफा' , सर्वदलीय बैठक की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने 16 अप्रैल से बुलाई गई संसद की तीन दिवसीय बैठक को सरकार की 'मनमानी' करार दिया है। विपक्ष ने विधानसभा चुनावों के मद्देनजर इसे 29 अप्रैल के बाद करने का सुझाव दिया था। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार बिना सर्वदलीय सहमति के नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन और परिसीमन जैसे गंभीर मुद्दों को थोप रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/congress-targets-the-centre-calling-a-three-day-meeting-of-parliament/article-148995"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/congress-logo.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने कहा है कि कुछ राज्यों के विधानसभा चुनावों के बीच 16 अप्रैल से महिला आरक्षण विधेयक में संशोधन पर चर्चा के लिए संसद की तीन दिवसीय बैठक बुलाना सरकार का एकतरफा निर्णय है और इस बैठक को लेकर विपक्ष को नजरअंदाज कर पूरी तरह से मनमानी की गई है। कांग्रेस के संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने शुक्रवार को यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि संसद की बैठक 16, 17 और 18 अप्रैल को बुलाई गयी है। </p>
<p>इस बारे में सरकार के साथ जो विचार विमर्श हुआ था उसमें कहा गया था कि कुछ राज्यों के विधानसभा चुनाव हो रहे हैं इसलिए 29 अप्रैल के बाद सर्वदलीय बैठक बुलाकर इस बारे में विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि 16 मार्च को संसदीय कार्य मंत्री किरन रिजिजू ने राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को पत्र लिखकर 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023' में प्रस्तावित संशोधनों पर चर्चा की इच्छा जताई तो श्री खरगे ने 15 मिनट के भीतर ही पत्र का जवाब देते हुए सुझाव दिया कि अलग-अलग चर्चा करने के बजाय सभी विपक्षी दलों को एक साथ आमंत्रित कर सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए।</p>
<p>लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी कहा कि यदि सरकार महिला आरक्षण विधेयक में संशोधन करना चाहती है, तो इस पर सभी दलों की सहमति आवश्यक है और इसके लिए सर्वदलीय बैठक सबसे उपयुक्त मंच होगा। कांग्रेस नेता के अनुसार खरगे ने कहा था कि इस बारे में सामूहिक तौर पर फ़ैसला लीजिए और 29 अप्रैल के बाद सभी दलों की बैठक इस बारे में बुलाइए। सरकार के साथ इसको लेकर 16 से 26 मार्च तक खतों का आदान प्रदान हुआ लेकिन लगता है कि सरकार पहले ही मन बना चुकी थी और अंत में उसने एकतरफा निर्णय लेते हुए 16, 17, 18 अप्रैल को संसद की बैठक बुलाने का निर्णय लिया। मतलब साफ है कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से कुछ दिन पहले ही आचार संहिता के दौरान ये संसद की बैठक होगी जबकि 24 मार्च को तृणमूल कांग्रेस को छोड़कर, सभी विपक्षी दल सर्वदलीय बैठक के पक्ष में थे।</p>
<p>विपक्षी दलों ने सर्वसम्मति से सुझाव दिया था कि 29 अप्रैल के बाद बैठक बुलाए क्योंकि तब तक सभी राज्यों के विधानसभा चुनाव समाप्त हो जाएंगे। इसके बावजूद सरकार ने इस सुझाव को नहीं माना। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने विपक्ष की मांग को दरकिनार करते हुए 16 अप्रैल से तीन दिन की संसद की बैठक बुलाई है, जिससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि इस सत्र में महिला आरक्षण विधेयक के साथ-साथ परिसीमन का मुद्दा भी उठाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण विषय पर अब तक कोई व्यापक चर्चा नहीं हुई है।</p>
<p>कांग्रेस ने यह भी कहा कि सितंबर 2023 में लोकसभा और राज्यसभा द्वारा पारित महिला आरक्षण विधेयक में 30 महीनों के भीतर संशोधन लाने की बात कही गई थी और अब तीन दिन की बैठक बुलाकर इसी दिशा में कदम उठाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा महिला आरक्षण का समर्थन किया है और पहली बार चुनाव में महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने किया था। उनके नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने 1989 में 64, 65 संविधान संशोधन कर पंचायत और नगर पालिकाओं में एक तिहाई महिला आरक्षण का प्रावधान किया था। लोकसभा में यह संविधान संशोधन विधेयक पारित हुआ लेकिन राज्यसभा में भाजपा तथा उसके लोगों ने ही इसका विरोध किया था, जिसके कारण ये पारित नहीं हो पाया। तब 1993 में कांग्रेस की सरकार में 73, 74 संविधान संशोधन लोकसभा और राज्यसभा में पारित कराया जिसके कारण आज पंचायत और नगरपालिकाओं में करीब 30 लाख चुने प्रतिनिधियों में से 15 लाख महिलाएं हैं। आरक्षण का प्रावधान एक तिहाई है लेकिन महिलाओं की भूमिका उससे भी ज्यादा बढ़कर 50 प्रतिशत के करीब है लेकिन केंद्र सरकार आज इसका श्रेय लेने की कोशिश कर रही है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 18:06:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जयराम रमेश ने की केंद्र सरकार की आलोचना: बोले-'आत्मनिर्भरता' के प्रयासों के बावजूद भारत की ऊर्जा आयात पर निर्भरता बढ़ी, यह सब तब हो रहा है जब नारा आत्मनिर्भरता का दिया गया था</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने केंद्र पर निशाना साधते हुए कहा कि भारत की कच्चे तेल पर निर्भरता 84% से बढ़कर 90% हो गई है। उन्होंने LPG आयात में भी 62% की वृद्धि का हवाला देते हुए 'आत्मनिर्भर भारत' के नारे को विफल बताया। रमेश ने गुजरात के पुराने गैस भंडार दावों को "20,000 करोड़ का घोटाला" करार देते हुए तीखा तंज कसा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/jairam-ramesh-criticized-the-central-government-and-said-despite/article-148065"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/jairam-ramesh.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने शुक्रवार को ऊर्जा आयात पर बढ़ती निर्भरता को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि पिछले एक दशक में देश प्रमुख ईंधन क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता से और दूर चला गया है। रमेश ने एक बयान में कहा कि 2014-15 से 2024-25 के बीच कच्चे तेल के आयात पर भारत की निर्भरता 84 प्रतिशत से बढ़कर 90 प्रतिशत हो गई है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इसी अवधि में एलपीजी आयात पर निर्भरता 46 प्रतिशत से बढ़कर 62 प्रतिशत तक पहुंच गयी है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "यह सब तब हो रहा है जब नारा आत्मनिर्भरता का दिया गया था।"</p>
<p>कांग्रेस नेता ने कहा कि देश में प्राकृतिक गैस उत्पादन की स्थिति "और भी अस्पष्ट" बनी हुई है, जिसे उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान किए गए दावों से जोड़ा। उन्होंने याद दिलाया कि 26 जून 2005 को तत्कालीन गुजरात सीएम ने घोषणा की थी कि गुजरात स्टेट पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (जीएसपीसी) ने कृष्णा-गोदावरी बेसिन के गहरे समुद्र में देश के सबसे बड़े गैस भंडार की खोज की है, जिसे भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने वाला बताया गया था।</p>
<p>जयराम रमेश ने हालांकि यह आरोप लगाया कि बाद की जांचों में ये दावे गलत साबित हुए। उन्होंने कहा, "2011 से 2016 के बीच कैग की पांच रिपोर्टों में इसे 20,000 करोड़ रुपये का घोटाला बताया गया।" उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अगस्त 2017 में जीएसपीसी का ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन में विलय कर इस मुद्दे को "दबा दिया गया।" उन्होंने टिप्पणी की, " तत्कालीन गुजरात सीएम जिस गैस का बड़े स्तर पर वादा किया गया था, वह केवल 'गैस' ही बनकर रह गई।"</p>
<p>यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश की ऊर्जा सुरक्षा और आयात निर्भरता को लेकर राजनीतिक बहस तेज है, खासकर तब जब बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए भारत अभी भी विदेशी स्रोतों पर काफी हद तक निर्भर है। दूसरी ओर, सरकार घरेलू उत्पादन बढ़ाने, ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने और दीर्घकालिक रणनीति के तहत नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने जैसे कदमों का लगातार उल्लेख करती रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Mar 2026 13:54:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पश्चिम एशिया में शांति बहाली पर पाकिस्तान को महत्व देना भारत की कूटनीतिक विफलता: जयराम रमेश ने खड़े किए भारत की विदेश नीति पर गंभीर सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने पश्चिम एशिया संकट में पाकिस्तान को मध्यस्थ बनाए जाने पर मोदी सरकार को घेरा है। उन्होंने इसे भारत की बड़ी कूटनीतिक विफलता बताते हुए कहा कि आतंकवाद को पनाह देने वाले देश को 'ब्रोकर' बनाना आपत्तिजनक है। जयराम ने डॉ. मनमोहन सिंह सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए वर्तमान विदेश नीति पर सवाल उठाए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/giving-importance-to-pakistan-on-restoration-of-peace-in-west/article-147949"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/jairam-ramesh.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने कहा है कि पश्चिम एशिया में शांति बहाली के वास्ते मध्यस्थ के रूप में आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने वाले पाकिस्तान का नाम सामने आना भारत की कूटनीतिक विफलता है और अब विदेश मंत्री एस जयशंकर इस विफलता पर पर्दा डालने का प्रयास कर रहे हैं। कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने गुरुवार को एक बयान में कहा कि पाकिस्तान जैसे देश को मध्यस्थ के रूप में स्वीकार किया जाना बेहद आपत्तिजनक है। उनका कहना था कि पाकिस्तान लंबे समय से आतंकवाद को बढ़ावा देने, ओसामा बिन लादेन जैसे आतंकियों को पनाह देने, परमाणु अप्रसार नियमों के उल्लंघन और ए. क्यू. खान नेटवर्क के जरिए परमाणु प्रसार में शामिल रहा है। उसने अफगानिस्तान में नागरिक ठिकानों पर हमले किए और अपने ही नागरिकों तथा अल्पसंख्यकों के खिलाफ कार्रवाई की।</p>
<p>जयराम रमेश ने कहा कि 2008 के मुंबई हमले के बाद डॉ मनमोहन सिंह सरकार ने पाकिस्तान को वैश्विक स्तर पर अलग-थलग कर दिया था, लेकिन हाल के घटनाक्रमों में ऐसा नहीं हो सका। उन्होंने आसिम मुनीर के बयानों का हवाला देते हुए कहा कि इसके बावजूद पाकिस्तान विश्व मंच पर और प्रासंगिक बनता जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया "हमारी सरकार की कूटनीति, वैश्विक संपर्क और नैरेटिव प्रबंधन की कमजोरियों के कारण एक अस्थिर देश को 'ब्रोकर' की भूमिका मिल गई है, जो भारत की विदेश नीति पर गंभीर सवाल खड़े करता है।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 14:42:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जयराम रमेश का दावा: अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध में पाकिस्तान की भूमिका भारत के लिए कूटनीतिक झटका, पाकिस्तानी सत्ता प्रतिष्ठान ने ट्रंप के साथ घनिष्ठ संबंध विकसित किए</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने दावा किया कि अमेरिका-ईरान संघर्ष में पाकिस्तान प्रमुख मध्यस्थ बनकर उभरा है, जो भारत के लिए बड़ा झटका है। उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तानी नेतृत्व की बढ़ती नजदीकियों पर चिंता जताई। रमेश ने केंद्र की इजरायल यात्रा की आलोचना करते हुए इसे भारत की तटस्थ मध्यस्थ भूमिका को कमजोर करने वाला कदम बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/jairam-ramesh-claims-pakistans-role-in-us-israel-iran-war-diplomatic-setback/article-147662"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/jairam-ramesh2.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए दावा किया कि पाकिस्तान एक तरफ अमेरिका और इजरायल और दूसरी तरफ ईरान के बीच एक प्रमुख मध्यस्थ के रूप में उभरा है जो भारत के लिए एक गंभीर झटका है। जयराम रमेश ने सोशल मीडिया 'एक्स' पर अपने संदेश में कहा, "प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों की कई रिपोर्टों ने पाकिस्तान को अमेरिका और इजरायल तथा दूसरी तरफ ईरान के बीच इस्तेमाल किए जा रहे मध्यस्थों में से एक के रूप में पहचाना है। यदि ये रिपोर्ट सच हैं, तो वे भारत के लिए एक गंभीर झटका और तिरस्कार का प्रतिनिधित्व करती हैं।</p>
<p>जयराम रमेश ने कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर' में भारत की "निस्संदेह सैन्य सफलताओं" के बावजूद पाकिस्तान ने पिछले एक साल में कूटनीतिक रूप से नई दिल्ली को पीछे छोड़ दिया है। उन्होंने कहा, "दुखद वास्तविकता यह है कि उसके बाद पाकिस्तान का कूटनीतिक जुड़ाव और विमर्श प्रबंधन केंद्र सरकार की तुलना में काफी बेहतर रहा है।" उन्होंने कहा कि इस्लामाबाद, जो कभी गंभीर राजनीतिक, आर्थिक और वैश्विक चुनौतियों का सामना कर रहा था, अब फिर से प्रासंगिक हो गया है।</p>
<p>कांग्रेस नेता ने पाकिस्तान के नेतृत्व और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच विकसित होते संबंधों की ओर भी इशारा किया और आरोप लगाया कि इसने इस्लामाबाद की वैश्विक स्थिति को मजबूत किया है। उन्होंने दावा किया कि ट्रंप ने पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व को "गर्मजोशी से और बार-बार गले लगाया" था और कई मौकों पर असीम मुनीर की व्हाइट हाउस में मेजबानी की, जिसमें उन्होंने एक "अभूतपूर्व दोपहर के भोजन" का भी उल्लेख किया। रमेश ने कहा कि "पाकिस्तानी सत्ता प्रतिष्ठान ने राष्ट्रपति ट्रंप के करीबी घेरे के साथ घनिष्ठ संबंध विकसित कर लिये हैं।"</p>
<p>केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए रमेश ने उनकी हालिया कूटनीतिक पहुंच की आलोचना की, विशेष रूप से ईरान पर अमेरिका-इजरायल के कथित हवाई हमलों से ठीक पहले की गई इजरायल यात्रा को लेकर कटाक्ष किया है। उन्होंने कहा, केंद्र सरकार की इजरायल की अनुचित यात्रा, जो ईरान पर अमेरिका-इजरायल के अकारण हवाई हमले शुरू होने से ठीक दो दिन पहले समाप्त हुई, हमारे राजनीतिक इतिहास में एक बेहद विनाशकारी विकल्प के रूप में दर्ज की जाएगी।" उन्होंने तर्क दिया कि इस यात्रा ने इस क्षेत्र में एक तटस्थ मध्यस्थ के रूप में कार्य करने की भारत की क्षमता को कमजोर कर दिया है।</p>
<p>उन्होंने सरकार की विदेश नीति के प्रति अपने दृष्टिकोण की आलोचना तेज करते हुए कहा, "केंद्र सरकार की कूटनीति की पोल बुरी तरह खुल गई है। देश को इसकी कीमत चुकाने के लिए मजबूर किया जा रहा है।" ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब भारत ने पारंपरिक रूप से इजरायल, ईरान और प्रमुख अरब देशों सहित पूरे पश्चिम एशिया में संतुलित संबंध बना रखे थे ओर अक्सर क्षेत्रीय संघर्षों में खुद को एक संभावित सेतु के रूप में प्रस्तुत किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Mar 2026 12:26:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अमेरिकी और इजरायली को नाराज करने से बच रही सरकार : खामेनेई की मौत पर मौन क्यों? जयराम बोले- वजह बताएं सरकार</title>
                                    <description><![CDATA[जयराम रमेश ने आयतुल्लाह खामेनेई की हत्या पर सरकार के "मौन" पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने याद दिलाया कि रईसी की मृत्यु पर राजकीय शोक घोषित करने वाली भाजपा सरकार अब अमेरिका-इजरायल को नाराज करने से डर रही है। कांग्रेस ने संसद में शोक प्रस्ताव न लाने को कूटनीतिक विफलता और भेदभावपूर्ण व्यवहार करार दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/the-government-is-avoiding-angering-the-americans-and-israelis-why/article-146329"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/jairam-ramesh1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने कहा है कि ईरान के पूर्व राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की रहस्यमई हवाई दुर्घटना में मृत्यु पर राजकीय शोक की घोषणा करने वाली मोदी सरकार को बताना चाहिए कि अब वह हमले में मारे गये ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह खामेनेई की मौत पर मौन क्यों है।</p>
<p>कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने शुक्रवार को सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ईरान के संवैधानिक प्रमुख आयतुल्लाह खामेनेई की 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा हत्या कर दी गयी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मौन हैं। विदेश मंत्री एस जयशंकर मौन हैं। संसद में अब तक इस पर शोक प्रस्ताव तक नहीं रखा गया है। उन्होंने कहा कि भारत ने खाड़ी देशों पर ईरान के हमलों की सही रूप से निंदा की है, लेकिन ईरान पर हुए अमेरिका और इजरायल के हमले पर पूरी तरह चुप्पी साध रखी है। यह भी याद रखा जाना चाहिए कि ईरान ब्रिक्स का हिस्सा है जिसकी अध्यक्षता इस वर्ष भारत के पास है।</p>
<p>कांग्रेस नेता ने कहा कि मई 2024 में ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की एक रहस्यमय हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। तब मोदी सरकार ने 21 मई 2024 को एक दिन के राजकीय शोक की घोषणा की थी और संसद में एक जुलाई 2024 को (जब सत्र शुरू हुआ) शोक प्रस्ताव भी रखा गया था।</p>
<p>उन्होंने सवाल करते हुए कहा, अब यह हिचकिचाहट क्यों। इसमें कोई संदेह नहीं कि एक समझौतावादी प्रधानमंत्री अपने अमेरिकी और इजरायली दोस्तों को नाराज करने से बचना चाहते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Fri, 13 Mar 2026 13:56:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा को लेकर कांग्रेस का निशाना: सरकार कर रही परंपरा का उल्लंघन, पीएम मोदी की गैर मौजूदगी को लेकर उठाए सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ चर्चा में प्रधानमंत्री की अनुपस्थिति पर सवाल उठाए हैं। जयराम रमेश ने 1954 का उदाहरण देते हुए कहा कि तब नेहरू सदन में मौजूद थे। उन्होंने उपाध्यक्ष पद रिक्त रहने को संवैधानिक उल्लंघन बताते हुए सरकार पर नियमों की अनदेखी का आरोप लगाया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/government-is-targeting-congress-for-discussion-on-no-confidence-motion-government/article-146064"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/jai-ram-ramsh.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ लाये अपने प्रस्ताव पर जारी चर्चा में पीएम की गैर मौजूदगी को लेकर सवाल उठाए और कहा कि सरकार इसमें भी परंपराओं और नियमों का उल्लंघन कर रही है।</p>
<p>कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जय राम रमेश ने बुधवार को यहां एक बयान में कहा कि लोकसभा अध्यक्ष को हटाने के प्रस्ताव पर मंगलवार को हुई बहस के दौरान संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने गर्व से दावा किया कि इस बहस के लिए 10 घंटे का समय दिया गया है, जबकि दिसंबर 1954 में इसी तरह के एक प्रस्ताव के लिए केवल ढाई घंटे निर्धारित किए गए थे। </p>
<p>उन्होंने कहा कि रिजिजू शायद यह बताना भूल गए कि 18 दिसंबर 1954 को स्वयं प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु बहस के दौरान सदन में मौजूद रहे और उसमें हिस्सा भी लिया था। सदन में बोलते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू ने सदन की अध्यक्षता कर रहे उपाध्यक्ष से अनुरोध किया था कि बहस के समय का अधिकांश हिस्सा विपक्ष को दिया जाए। लोकसभा में जब यह प्रस्ताव लाया गया था तो तब 489 सदस्यों वाली लोकसभा में कांग्रेस के 364 सांसद थे।</p>
<p>कांग्रेस नेता ने कहा कि इसके बाद जब भी अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आये और उन पर बहस हुई तब लोकसभा का संचालन उपाध्यक्ष कर रहे थे लेकिन 2019 के मध्य से लोकसभा में कोई उपाध्यक्ष नहीं है, जो संविधान का स्पष्ट उल्लंघन है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Mar 2026 15:00:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>केंद्र सरकार की विदेश नीति विफल और देशहित के विपरीत: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कमजोर हुई देश की स्थिति, जयराम रमेश बोले - विदेश नीति के कारण भारत के प्रति दुनिया के रुख में दिख रहा बदलाव </title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने केंद्र की विदेश नीति को विफल बताते हुए पुनर्विचार की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रंप प्रशासन का झुकाव भारत के बजाय पाकिस्तान की ओर बढ़ा है। कांग्रेस ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को एकतरफा करार दिया और रूस-चीन मुद्दों पर सरकार की चुप्पी को राष्ट्रीय हितों के खिलाफ बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/congress-attacked-and-said-that-the-foreign-policy-of-the/article-145039"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/jairam-ramesh.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने केंद्र सरकार की विदेश नीति को विफल और देशहित के विपरीत बताते हुए कहा है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की स्थिति कमजोर हुई है इसलिए इसमें पुनर्विचार की जरूरत है। कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने रविवार को कहा कि केंद्र सरकार की विदेश नीति के कारण भारत के प्रति दुनिया के रुख में बदलाव दिख रहा है और अमेरिका का रुख भारत की तुलना में पाकिस्तान की तरफ नरम है जिसे विफल विदेश नीति का परिणाम कहा जा सकता है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रुख पाकिस्तान के प्रति नरम है और यही कारण है कि ट्रंप पहलगाम आतंकवादी हमलों की पृष्ठभूमि से जुड़े व्यक्ति की सार्वजनिक सराहना कर रहे हैं। उनका कहना था कि अमेरिका ने अफगानिस्तान के खिलाफ पाकिस्तान की कार्रवाई का समर्थन किया है। राष्ट्रपति ट्रंप कई बार दावा कर चुके हैं कि उन्होंने 10 मई 2025 को आयात शुल्क बढ़ाने की धमकी देकर ऑपरेशन सिंदूर रुकवाया, लेकिन प्रधानमंत्री ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। उनके अनुसार, अभियान रोकने की पहली घोषणा अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने की थी।</p>
<p>भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि गत 2 फरवरी को राष्ट्रपति ट्रंप ने इसकी घोषणा की। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मामला उठाया लेकिन मुद्दों से ध्यान हटाने की सरकार ने कोशिश की। बाद में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप की आयात शुल्क नीति को अवैध करार दिया। कांग्रेस ने अमेरिका के साथ समझौते को एकतरफा बताया और कहा कि भारत ने आयात को उदार बनाने की प्रतिबद्धता जताई लेकिन अमेरिका ने इसका कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया। रूस से तेल खरीद के मुद्दे पर भी सरकार ने स्थिति स्पष्ट नहीं की।</p>
<p>इसके आगे कांग्रेस ने कहा कि केंद्र सरकार की हाल की इजरायल यात्रा और 19 जून 2020 को चीन पर दिए गए बयान ने भारत की स्थिति कमजोर की है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की विदेश नीति की दिशा और शैली पर पुनर्विचार की जरूरत है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Mar 2026 15:40:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>कांग्रेस का केंद्र सरकार पर तीखा हमला, बोलें एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम में बदलाव पर स्पष्ट झलकता है बनावटीपन </title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने एनसीईआरटी विवाद पर केंद्र सरकार के आक्रोश को 'डैमेज कंट्रोल' करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पाठ्यपुस्तकों में बदलाव एक सुनियोजित वैचारिक अभियान है, जिसका रिमोट कंट्रोल नागपुर में है। कांग्रेस ने उच्चतम न्यायालय से मांग की है कि वह पाठ्यक्रम के राजनीतिकरण और ध्रुवीकरण की गहन जांच के आदेश दे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/congress-should-launch-a-sharp-attack-on-the-central-government/article-144805"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/ncert-disput-congress.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। एनसीईआरटी की पुस्तकों के पाठ्यक्रम में बदलाव को लेकर कांग्रेस ने कहा है कि केंद्र सरकार का गुस्सा बनावटी है और यदि उनका गुस्सा कृत्रिम नहीं है तो उन्हें पाठ्यक्रम बदलने से संबंधित पूरे मामले की जांच करवानी चाहिए। कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने शुक्रवार को एक बयान में आरोप लगाया कि केंद्र सरकार राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की पुस्तकों के मुद्दे पर बनावटी आक्रोश जता रहे हैं। पाठ्यक्रम में बदलाव पर वह अपनी नाराजी का सिर्फ दिखावा कर रहे हैं।</p>
<p>उन्होंने पीएम मोदी की नाराजगी को स्थिति संभालने का प्रयास बताया और कहा स्पष्ट रूप से एक डैमेज कंट्रोल प्रयास के तहत यह संदेश दिया जा रहा है कि वे एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों में न्यायपालिका से जुड़े आलोचनात्मक उल्लेखों से बेहद नाखुश हैं। पिछले एक दशक में उन्होंने ऐसे शिक्षाविदों और झोलाछाप अकादमिकों के एक नेटवर्क की अगुवाई की है, जिन्होंने अपने विचारधारात्मक वायरस से पाठ्यपुस्तकों को संक्रमित कर गंभीर नुकसान पहुंचाया है। यह कोई आकस्मिक चूक नहीं, बल्कि एक सुनियोजित वैचारिक घुसपैठ अभियान का हिस्सा है।</p>
<p>कांग्रेस नेता ने केंद्र सरकार पर हमला किया और कहा कि पाठ्यक्रम कैसा होना चाहिए इसकी भूमिका संघ मुख्यालय नागपुर में बनती है जिससे केंद्र सरकार स्वयं सम्बद्ध हैं। उन्होंने कहा सत्ता पक्ष स्वयं नागपुर कॉम्युनल इकोसिस्टम फॉर रिराइटिंग टेक्सबुक असली एनसीईआरटी-को दिशा देते और आकार देते रहे हैं।</p>
<p>इसके आगे जयराम रमेश ने कहा कि उच्चातम न्यायालय को उद्वेलित करने वाली पाठ्यपुस्तकों से स्वयं को अलग दिखाने की उनकी कोशिश महज ढोंग है। अब उच्चतम न्यायालय के लिए अगला तार्किक कदम यह होना चाहिए कि वह इस बात की विस्तृत जांच कराए कि पाठ्यपुस्तकों को किस प्रकार दोबारा लिखा गया और वे किस तरह ध्रुवीकरण तथा राजनीतिक हिसाब-किताब चुकाने के औजार में बदल गईं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Feb 2026 13:20:32 +0530</pubDate>
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                <title>बजट 2026-27 : कांग्रेस की बजट पर प्रतिक्रिया-केंद्रीय बजट निराशाजनक और फीका,सरकार की वास्तविक मुद्दों से ध्यान हटाने की कोशिश</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस ने बजट 2026-27 को फीका और निराशाजनक बताया। जयराम रमेश ने कहा कि बजट न दिशा देता है, न बदलाव, आवंटन अस्पष्ट हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/budget-2026-congresss-reaction-to-the-budget-union-budget/article-141578"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(3).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने केंद्रीय बजट 2026-27 पर प्रतिक्रिया करते हुए इसे पूरी तरह निराशाजनक और फीका करार दिया है। कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने बजट पर प्रतिक्रिया करते  हुए सोशल मीडिया पर रविवार को लिखा कि भले ही बजट दस्तावेजों का विस्तृत अध्ययन अभी किया जाना बाकी है, लेकिन बजट भाषण के 90 मिनट बाद ही यह साफ हो गया है कि बजट को लेकर जो माहौल और प्रचार बनाया गया था, उस पर यह पूरी तरह खरा नहीं उतरता। उन्होंने कहा कि यह बजट न तो नई दिशा दिखाता है और न ही किसी बड़े बदलाव का संकेत देता है।</p>
<p>जयराम रमेश ने बजट भाषण को अस्पष्ट और गैर-पारदर्शी बताते हुए कहा, इसमें प्रमुख कार्यक्रमों और योजनाओं के लिए बजटीय आवंटन की कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। उनके अनुसार सरकार ने वास्तविक मुद्दों से ध्यान हटाने की कोशिश की है और आम जनता को निराशा हाथ लगी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Feb 2026 15:32:43 +0530</pubDate>
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                <title>कांग्रेस ने कहा, एनसीएपी को कानूनी रूप से और सशक्त बनाकर निधि बढ़ाने की जरूरत</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने NCAP को कानूनी दर्जा देने और इसका बजट बढ़ाकर 25,000 करोड़ करने की मांग की। उन्होंने कहा कि देश के 1,787 प्रदूषित शहरों में स्वच्छ हवा सुनिश्चित करना अनिवार्य है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/congress-said-there-is-a-need-to-increase-funds-by/article-139161"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/jairam-ramesh.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने कहा है कि वायु प्रदूषण राष्ट्रीय समस्या बन गई है इसलिए इसकी निगरानी के लिए बने राष्ट्रीय स्वच्छ हवा कार्यक्रम (एनसीएपी) का कानूनी आधार और मजबूत कर अधिक वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने के साथ ही इसका तत्काल पुनर्गठन किया जाना चाहिए।</p>
<p>कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने रविवार को यहां एक बयान में एनसीएपी की हालिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि सैटेलाइट डेटा आधारित इस अध्ययन के अनुसार देश के 4,041 नगरों में से 1,787 शहर बीते पाँच वर्षों में लगातार राष्ट्रीय मानकों से अधिक प्रदूषित रहे है। इसके बावजूद एनसीएपी के तहत केवल 130 शहरों को शामिल किया गया है, जो गंभीर रूप से प्रदूषित शहरों का महज चार प्रतिशत है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि एनसीएपी को''नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम'' के रूप में प्रचारित किया जा रहा है, जबकि वास्तविकता में यह एक 'नोशनल क्लीन एयर प्रोग्राम' बनकर रह गया है। इससे जुड़े 130 शहरों में से 28 शहरों में आज तक वायु गुणवत्ता मापन के निगरानी स्टेशन नहीं  हैं और जहाँ हैं वहाँ भी प्रदूषण का स्तर बेहद ङ्क्षचताजनक है।</p>
<p>कांग्रेस नेता ने एनसीएपी कानूनी दर्जा देने की मांग की और कहा कि इसके प्रभावी क्रियान्वयन की सख्त व्यवस्था के साथ ही एनसीएपी की मौजूदा फंडिंग व्यवस्था को बढ़ाया जाना चाहिए। उनका कहना था कि वर्तमान में इसके लिए लगभग 10,500 करोड़ रुपये के बजट को 131 शहरों में बाँटा जा रहा है, जबकि वास्तविक जरूरत इससे 10 से 20 गुना अधिक की है। उन्होंने यह भी कहा कि एनसीएपी को कम से कम 25,000 करोड़ रुपये देकर देश के 1,000 सबसे अधिक प्रदूषित शहरों और कस्बों वह इसके दायरे में लाया जाना चाहिए।</p>
<p>जयराम रमेश ने कहा, एनसीएपी का प्रदर्शन मापने का पैमाना पीएम 2.5 स्तर होना चाहिए और इसका फोकस ठोस ईंधन के जलने, वाहन उत्सर्जन और औद्योगिक प्रदूषण जैसे प्रमुख स्रोतों पर केंद्रित किया जाना चाहिए। कोयला आधारित बिजली संयंत्रों में इस साल के अंत तक एफजीडी अनिवार्य रूप से लगाने, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की स्वतंत्रता बनाये रखने और मोदी सरकार में बने जन विरोधी पर्यावरण कानून संशोधनों को वापस लेने की भी मांग दोहराई।</p>
<p>उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार संसद में वायु प्रदूषण के स्वास्थ्य प्रभावों को बार-बार कमतर दिखाने की कोशिश कर अपनी अक्षमता और लापरवाही को छिपाने का प्रयास करती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 11 Jan 2026 17:41:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>कांग्रेस निकोबार परियोजना: कांग्रेस का गंभीर आरोप, पारिस्थितिकी की अनदेखी कर सरकार चला रही है विकास परियोजना </title>
                                    <description><![CDATA[जयराम रमेश ने अरावली और निकोबार में पर्यावरण अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि 72,000 करोड़ की मेगा-प्रोजेक्ट पारिस्थितिकी और आदिवासियों के लिए विनाशकारी है। उन्होंने इसे "विश्वासघात" करार दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/congress-nicobar-project-is-a-serious-allegation-of-congress-that/article-138138"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/great-nicobar-project.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने अरावली में सरकारी नीतियों के कारण प्रदूषण संकट पर सवाल उठाने के साथ कहा है कि निकोबार में भी सरकार पारिस्थितिकी की परवाह किये बिना पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली परियोजनाएं चला रही है जो विकास के नाम पर पारिस्थितिकी तंत्र को ध्वस्त करने वाली हैं।</p>
<p>कांग्रेस संसदीय दल की नेता सोनिया गांधी ने कुछ माह पहले 'ग्रेट निकोबार मेगा-इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट' को अनावश्यक बताते हुए कहा था कि इस परियोजना पर सरकार 72,000 करोड़ रुपये खर्च कर गलत कर रही है। उनका कहना था कि यह परियोजना द्वीप के मूल आदिवासी समुदायों के अस्तित्व के लिए खतरा पैदा करती है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे तथा राहुल गांधी ने भी इस परियोजना को पारिस्थितिकी के लिए खतरनाक बताया था। </p>
<p>शुक्रवार को पार्टी के संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने फिर यह मुद्दा उठाया और सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि ग्रेट निकोबार जैसे पारिस्थितिक रूप से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र में सरकार ने विकास के नाम पर हजारों करोड़ रुपये की आक्रामक परियोजनाओं को जिस लालच और नासमझी के चलते जल्दबाजी से मंजूरी दी है, वह पूरे इलाके के लिए एक खतरनाक और दीर्घकालिक त्रासदी साबित होने वाली है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि ये परियोजनाएँ न सिर्फ वहां की नाजुक पारिस्थितिकी को अपूरणीय नुकसान पहुँचाएंगी, बल्कि आदिवासी समुदायों के अस्तित्व को भी योजनाबद्ध तरीके से हाशिये पर धकेलेंगी। यह पूरा इलाका पहले से ही जलवायु आपदाओं के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है, जहां प्राकृतिक संतुलन से जरा-सी भी छेड़छाड़ विनाशकारी परिणाम ला सकती है। इसके बावजूद सरकार ने चेतावनियों, वैज्ञानिक आकलनों और स्थानीय वास्तविकताओं को नजरअंदाज करते हुए चंद कॉरपोरेट के मुनाफ़े के लालच में इन परियोजनाओं को आगे बढ़ाया है।</p>
<p>कांग्रेस नेता ने कहा कि पंकज सेखसरिया द्वारा संकलित 'ग्रेट निकोबार: कहानी विश्वासघात की' कई शोधपरक, तथ्यात्मक और प्रासंगिक लेखों के माध्यम से इस पूरे मामले में सरकार की भूमिका, नीतिगत लापरवाहियों और आदिवासी अधिकारों के साथ किए जा रहे समझौतों की समीचीन पड़ताल करती है। यह संकलन इस बात का जीता-जागता दस्तावेजी साक्ष्य है कि कैसे विकास के नाम पर एक पूरे क्षेत्र और उसके लोगों के भविष्य को दांव पर लगा दिया गया है। रमेश ने इसके साथ ही इस पुस्तक का लिंक भी सोशल मीडिया पर साझा किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 02 Jan 2026 15:49:38 +0530</pubDate>
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