<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://dainiknavajyoti.com/employability/tag-33848" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Dainik Navajyoti Rising Rajasthan RSS Feed Generator</generator>
                <title>employability - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
                <link>https://dainiknavajyoti.com/tag/33848/rss</link>
                <description>employability RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>2026 में नौकरी देने में सबसे आगे रहेंगे उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक, रोजगार क्षमता  में होगी बढोतरी</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[भारत में रोजगार के अवसर तेजी से बढ़ रहे हैं। इंडिया स्किल रिपोर्ट 2026 के अनुसार, देश की रोजगार क्षमता 56.35% तक पहुंचने की उम्मीद है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल स्किल्स वाले युवाओं की मांग तेजी से बढ़ी है। बैंकिंग, फाइनेंस और तकनीकी क्षेत्रों में नौकरियों में सबसे अधिक वृद्धि संभावित है।
]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/uttar-pradesh-maharashtra-and-karnataka-will-be-at-the-forefront/article-132128"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/111-(17).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत में रोजगार के मौके तेजी से बढ़ रहे हैं। टेक्नोलॉजी स्किल्स से लैस युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुले हैं। जॉब मार्केट में जनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सिक्योरिटी और दूसरे एडवांस्ड डिजिटल फील्ड में स्किल्स युवाओं की डिमांड बढ़ रही है। यह जानकारी इंडिया स्किल रिपोर्ट 2026 में सामने आई है। दरअसल, ग्लोबल एजुकेशन एंड टेलेंट सॉल्यूशन ऑर्गेनाइजेशन, ईटीएस ने कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री, एआईसीटीई, एआईयू और टैग्ड के साथ मिलकर 2026 की इंडिया स्किल रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट में स्किल्स, स्टेट और सेक्टर वाइज रोजगार के नए मौके और भविष्य की मांग के बारे में बताती है।</p>
<p><strong>एआई नौकरी छीनेगा नहीं, नए मौके देगा</strong></p>
<p>रिपोर्ट से पता चलता है कि भारत की रोजगार क्षमता 2025 में 54.81% से बढ़कर 2026 में 56.35% हो जाएगी, खासकर उन कंपनियों में जो आर्टिफिशियल इंटेजिलेंस (एआई), डिजिटलाइजेशन और ग्लोबल मोबिलिटी को अपना रही हैं। भारत में डिजिटल बदलाव और टेक्निकल स्किल भर्ती की मांग सबसे ज्यादा बढ़ी है। देश का एआई प्रतिभा पूल 23.5 लाख प्रोफेशनल्स तक पहुंच गया है, जो साल-दर-साल 55 प्रतिशत की दर से ग्रो हो रहा है। नौकरी देने वाले जनरेटिव एआई, क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सुरक्षा और एडवांस्ड डिजिटल फील्ड्स के लिए स्किल्ड युवाओं की तलाश कर रहे हैं। लगभग 10 में से 4 हायरिंग नए पदों के लिए होने की उम्मीद है, जबकि पिछले साल यह संख्या 10 में से केवल 2 थी, जो मजबूत बिजनेस कॉन्फिडेंस और बड़े प्रोजेक्ट्स की ओर इशारा करती हैं। दूसरी ओर नौकरी छोड़ने की दर पहले के मुकाबले कम हो हुई है।</p>
<p><strong>इन क्षेत्रों में तेजी से बढ़ेंगी नौकरियां</strong></p>
<p>मांग में सबसे ऊपर डिजिटल और डेटा एक्सपर्ट, एआई/एमएल इंजीनियर, समाधान आर्किटेक्ट और सस्टेनेबिलिटी एक्सपर्ट शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, भारत का जॉब मार्केट 2026 में एक बड़े उछाल के लिए तैयार है, जहां हायरिंग 2025 के 9.75 प्रतिशत से बढ़कर 11 प्रतिशत पर डबल डिजिट में पहुंच रही है। बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विस और इंश्योरेंस सेक्टर में रोजगार के मौके 20 प्रतिशत बढ़ सकते हैं। इसके बाद मेटल एंड माइनिंग, बिजली, यूटिलिटीज, स्टील और सीमेंट कंपनियों में 12 प्रतिशत नौकरियां बढ़ने का अनुमान है।</p>
<p> </p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/business/uttar-pradesh-maharashtra-and-karnataka-will-be-at-the-forefront/article-132128</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/business/uttar-pradesh-maharashtra-and-karnataka-will-be-at-the-forefront/article-132128</guid>
                <pubDate>Wed, 12 Nov 2025 11:39:56 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-11/111-%2817%29.png"                         length="331995"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डिग्री बनी कागज का टुकड़ा,नहीं दिला पा रही रोजगार</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[बदलते दौर में एकेडमिक विषयों को व्यवसायी में बदलना जरूरी है। जब तक यह प्रयास सार्थक नहीं होंगे तब तक उच्च शिक्षा और रोजगार के बीच बढ़ती खाई पार कर पाना मुश्किल होगा। 
]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/degree-made-piece-of-paper--unable-to-get-employment/article-32340"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-12/kota1111.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा।  स्कूल से कॉलेज का सफर तय करने के बाद हाथ में डिग्री तो मिल रही लेकिन रोजगार नहीं मिल रहा। उच्च शिक्षा और रोजगार के बीच बढ़ती खाई केवल ग्रेजुएट पैदा कर रही है, प्रोफेशनल टेलेंट नहीं। वर्तमान शिक्षण व्यवस्था में इतनी ताकत नहीं कि सबके लिए रोजगार सुनिश्चित कर सके। उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले युवा भी अपने भविष्य को लेकर असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। डिग्री होने के बावजूद हाथ से रोजगार गायब है। दरअसल, यूनिवर्सिटी व कॉलेज डिग्री देने की फैक्ट्री बन चुकी है, जो हर साल लाखों स्टूडेंटस का प्रोडक्शन निकाल रही है और उनके माथे पर ग्रेजुएट का लेबल चिप्का कमाने-खाने की दौड़ में खुला छोड़ रहे हैं। असल में ये स्टूडेंट्स ग्रेजुएट तो हैं लेकिन नोलेजबल नहीं है। जिसकी वजह से रोजगार के अवसर होेते हुए भी स्टूडेंट्स रोजगार की दौड़ में पिछड़ रहे है।  इसका मुख्य कारण कॉलेजों में बरसों से चल रहे परम्परागत विषयों को प्रोफेशनल में तब्दील नहीं करना है। जबकि, बदलते दौर में एकेडमिक विषयों को व्यवसायी में बदलना जरूरी है। जब तक यह प्रयास सार्थक नहीं होंगे तब तक उच्च शिक्षा और रोजगार के बीच बढ़ती खाई पार कर पाना मुश्किल होगा। </p>
<p><strong>शिक्षा से दूर हो रही क्वालिटी</strong></p>
<p>विषयवार प्रोफेसरों के पद रिक्त होने से कॉलेजों में शिक्षा का माहौल खत्म होता जा रहा है। उच्च शिक्षा से क्वालिटी दूर हो रही है। क्वालिटी एजुकेशन के अभाव में हर साल सैंकड़ों स्टूडेंट्स ग्रेजुएट होते हुए भी बेरोजगार घूम रहे हैं। आर्ट्स, साइंस और कॉमर्स की भी यही स्थिति है। वहीं, प्रोफेशनल कोर्सेज की बात करें तो एमबीए का सबसे बुरा हश्र है। आईआईएम जैसे प्रतिष्ठित संस्थान को छोड़कर अन्य यूनिवर्सिटी व कॉलेज अपने स्टूडेंट्स को रोजगार तक नहीं दिला पा रहे।    </p>
<p><strong>महत्वपूर्ण विषयों में भी शिक्षकों की कमी</strong></p>
<p>शहर के प्रमुख राजकीय महाविद्यालयों में महत्वपूर्ण विषयों के विशेषज्ञों की कमी है। गवर्नमेंट आर्ट्स कॉलेज में कुल 107 प्रोफेसरों के पद स्वीकृत हैं, जिसमें से 34 शिक्षकों के पद खाली चल रहे हैं। जबकि, यहां करीब 9 हजार विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। इनके मुकाबले शिक्षकों के पद रिक्त होने से शिक्षा प्रभावित होती है। यहां अंग्रेजी और लोकप्रशासन विषय में 50 प्रतिशत से अधिक पद रिक्त हैं। ऐसे में दो या तीन सेक्शन को एक साथ बिठाकर पढ़ाना पड़ता है। ऐसे में प्रोफेसर स्टूडेट्स को अपनी बात ठीक से समझा नहीं पाते। नतीजन, अधूरा ज्ञान विद्यार्थियों को बेरोजगारी की ओर धकेल रहा है। </p>
<p><strong>परम्परागत विषयों को प्रोफेशनल में बदलने की जरूरत</strong></p>
<p>यूनिवर्सिटी व कॉलेजों में आज भी बरसों पुराने परम्परागत विषय पढ़ाए जा रहे हैं। जबकि, बदलते दौर में जरूरतें भी बदल गई हैं। ऐसे में किताबी ज्ञान की जगह प्रेक्टिकली नोलेज बढ़ाने के प्रयास होने चाहिए। वहीं, ट्रैडिशनल कोर्सों को प्रोफेशनल में बदलकर स्किल डवलपमेंट पर काम करने की महती आवश्यकता है।  विशेषज्ञ बताते हैं, ग्रेजुएट होना ही काफी नहीं है बल्कि विषय का विशेषज्ञ बनने की जरूरत है। यदि स्किल मजबूत होगी तो रोजगार लाखों की भीड़ में भी मिल जाएगा।  </p>
<p><strong>थ्योरी के साथ प्रेक्टिकल पढ़ाई भी प्रभावित</strong><br />राजकीय साइंस कॉलेज में कुल 93 शिक्षकों के पद स्वीकृत हैं, जिसमें से 36 प्रोफेसरों के पद लंबे समय से खाली हैं। इनमें भौतिक शास्त्र  रसायन शास्त्र, वनस्पति व गणित के कई शिक्षकों के कई पद रिक्त हैं। प्राचार्य डॉ. जेके विजयवर्गीय ने बताया कि विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण संकाय में पदों का रिक्त होना चिंताजनक है। यहां करीब ढाई से तीन हजार विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। थ्योरी के साथ प्रेक्टिकल पढ़ाई भी प्रभावित होती है। प्रोफेसर की कमी से बच्चों की समुचित पढ़ाई संभव नहीं हो पा रही। </p>
<p><strong>कहीं धर्मशाला तो कहीं स्कूल के आधे हिस्से में कॉलेज संचालित</strong><br />शहरी कॉलेजों की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्रों के महाविद्यालयों की स्थिति दयनीय है।  हालात यह है, कहीं धर्मशाला तो कहीं स्कूल के आधे हिस्से में कॉलेज संचालित हो रहे हैं। राजकीय इटावा महाविद्यालय की स्थापना वर्ष 2018 में हुई थी, तब से यह करीब 50 साल पुरानी त्यागी धर्मशाला में चल रहा है। भवन जितना पुराना है, उतना ही जर्जर अवस्था में है। वहीं, कनवास राजकीय आर्ट्स महाविद्यालय 5 साल से राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में चल रहा है। स्थिति विकट है, यहां स्कूल और कॉलेज एक ही भवन में संचालित हो रहे हैं। इस भवन में तीन दर्जन से अधिक कमरे हैं, जबकि कॉलेज के लिए 6 ही कमरे दिए हुए हैं। जिनमें से एक कक्ष प्राचार्य आॅफिस है और 5 कक्षों में 600 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। </p>
<p><strong>यहां कोर्स पूरा करवाना ही चुनौती</strong><br />शहर के सभी महाविद्यालयों में से सबसे बुरी स्थिति जेडीबी व गवर्नमेंट कॉमर्स कॉलेज की है।  दोनों कॉलेजों को मिलाकर कुल 64 पद स्वीकृत हैं, जिसमें से 54 शिक्षकों के पद रिक्त हैं। जेडीबी कॉमर्स की बात करें तो यहां 25 पदों में से मात्र 3 ही शिक्षक कार्यरत हैं, जबकि 22 पद खाली चल रहे हैं। इसी तरह राजकीय कॉमर्स कॉलेज में कुल 39 में मात्र 7 ही शिक्षक कार्यरत हैं। वहीं, 32 पद लंबे समय से खाली हैं। ऐसे में यहां क्वालिटी एजुकेशन मिलना तो दूर कोर्स पूरा करवाना ही चुनौती बनी है। </p>
<p><strong>600 विद्यार्थियों पर दो शिक्षक </strong><br />शिक्षक और विद्यार्थियों के बीच बढ़ते अनुपात टैलेंट की राह में सबसे बड़ा रोड़ा है। यूजीसी की गाइड लाइन के अनुसार 40 बच्चों पर एक शिक्षक होना चाहिए, लेकिन शहर के गवर्नमेंट आर्ट्स कॉलेज में 100 बच्चों पर 1 तो इटावा कॉलेज में 600 बच्चों पर 2 शिक्षक है। बच्चों से शिक्षक का सीधा जुड़ाव नहीं हो पाता।   क्वालिटी एजुकेशन तो दूर की बात व्यवस्थाएं बनाना ही शिक्षक के लिए चुनौती बन जाती है। </p>
<p> कॉलेज में प्लेसमेंट सेल बनी है। हमारी कोशिश बच्चों को रोजगार से जोड़ने की रहती है। हाल ही में एमएससी विद्यार्थियों को राजस्थान परमाणु ऊर्जा स्टेशन (आरएपीपी)  की विजिट करवाई थी। जहां उन्हें अपने विषयों से संभावित रोजगार की संभावनाओं से अवगत कराया था। इस विजिट के माध्यम से उनकी कॅरिअर काउंसलिंग करवाई गई। इसके अलावा अन्य कम्पनियों को बुलाकर प्लेसमेंट शिविर भी आयोजित करवाए जाते हैं। असल में समस्या उन विद्यार्थियों के साथ होती है जो नियमित कॉलेज नहीं आते और अपने शिक्षक के सम्पर्क में नहीं रहते। <br /><strong>-डॉ. संजय भार्गव, प्राचार्य जेडीबी साइंस कॉलेज</strong></p>
<p> आर्ट्स के विषयों में प्राइवेट सेक्टर्स में रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। विभिन्न विषयों के प्रोफेसर अपने स्टूडेंट्स के साथ उनके विषयों से संबंधित रोजगार के अवसरों से रुबरु करते हैं। इसके लिए बाहर से विशेषज्ञों को बुलाकर सेमिनार करवाकर उन्हें अपने विषयों में कहां, कैसे रोजगार मिल सकता है, इसकी जानकारी दी जाती है। हम विद्यार्थियों को रोजगार के लिए तैयार कर सकते हैं लेकिन जॉब के लिए मेहनत तो उन्हें ही करनी होगी। इसके अलावा कॉलेजों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने के लिए अलग से सेल बनी हुई है, जहां विद्यार्थियों को किस परीक्षा की कैसे तैयारी करनी है, आरएएस, आईएएस अधिकारियों को बुलाकर बच्चों को मोटिवेट भी करते हैं। <br /><strong>-डॉ. ज्योति सिडाना, सह आचार्य समाजशास्त्र जेडीबी आर्ट्स कॉलेज</strong></p>
<p>वाणिज्य संकाय में प्रोफेशनल विषयों को सम्मलित करना समय की जरूरत है। प्रोफेशनल विषय माइक्रो आॅडिटिंग, फाइनेंस आॅफ मार्केटिंग, लीगल आस्पेक्ट्स आॅफ बिजनेस, स्किलस आॅफ एंटरप्रिन्योरशिप जैसे महत्वपूर्ण विषयों को जोड़ते हुए पाठ्यक्रम बनाना आवश्यक है। साथ ही बच्चों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए वाणिज्य के व्यसायक प्रसाशन  को काला , विज्ञान, लॉ में आॅप्शनल विषय के रूप में जोड़ा जाना चाहिए। जिससे विद्यार्थियों को स्वरोजगार की जानकारी स्नातक करने के दौरान ही मिल जाए। <br /><strong>-डॉ. अनुज विलियम, सहायक आचार्य विद्या सम्बल योजना कॉमर्स कॉलेज</strong></p>
<p>वाणिज्य संकाय में विद्यार्थियों को कॉरपोरेट कम्पनियां व फैक्ट्रियों में व्यवहारिक ट्रैनिंग देने के लिए ऐसे कार्यक्रमों को पाठ्यक्रमों का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।  कॉमर्स के क्षेत्र बैंकिंग, फाइनेंशियल एडवाइजर, लेखा अधिकारी, ह्यूमन रिसोर्स मैनेजर, मार्केटिंग मैनेजर, होटल, प्रोडक्ट, रिटेल मैनेजर,  तहसीलदार व क्लर्क जैसे पदों पर भर्ती के लिए आयोजित परीक्षा में वाणिज्य विषयों को परीक्षा पाठ्यक्रम में सम्मिलित नहीं किया जाता। जबकि, अन्य संकायों को प्राथमिकता मिलने के  कारण विद्यार्थियों का कॉमर्स के प्रति रुझान कम होता जा रहा है। इस व्यवस्था में बदलाव जरूरी है। <br /><strong>-डॉ. वंदना आहूजा, प्राचार्य, जेडीबी कॉमर्स कॉलेज</strong></p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/degree-made-piece-of-paper--unable-to-get-employment/article-32340</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/degree-made-piece-of-paper--unable-to-get-employment/article-32340</guid>
                <pubDate>Wed, 14 Dec 2022 16:27:40 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-12/kota1111.jpg"                         length="217455"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[kota]]>
                    </dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        