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                <title>jaishankar - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>आतंकवाद से सख्ती से निपटने के अपने उद्देश्यों पर अड़िग रहे एससीओ : जयशंकर ने कहा– आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद से सख्ती जरूरी</title>
                                    <description><![CDATA[विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) से आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद की चुनौती से सख्ती से निपटने के अपने उद्देश्यों पर अड़िग रहने का आह्वान किया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/sco-jaishankar-stuck-on-its-objectives-to-deal-with-terrorism/article-120589"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/s.-jaishankar.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) से आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद की चुनौती से सख्ती से निपटने के अपने उद्देश्यों पर अड़िग रहने का आह्वान करते हुए कहा है कि भारत आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करने की अपनी नीति पर चलते हुए आतंकवादियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करता रहेगा। डॉ. जयशंकर ने मंगलवार को यहां बीजिंग में संगठन के सदस्य देशों के विदेश मंत्रियो की बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि इस संगठन की स्थापना आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद की चुनौती से निपटने के लिए की गई थी।</p>
<p>जम्मू कश्मीर के पहलगाम में नृशंस आतंकवादी हमले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ये तीनों चुनौती अक्सर एक साथ आती हैं। उन्होंने कहा कि यह हमला जानबूझकर जम्मू-कश्मीर की पर्यटन अर्थव्यवस्था को कमजोर करने और धर्म के आधार पर विभाजन को बढ़ावा देने के लिए किया गया था। उन्होंने कहा कि शंघाई सहयोग संगठन के कुछ सदस्य संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के भी सदस्य हैं और सुरक्षा परिषद ने इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है। सुरक्षा परिषद ने ,“आतंकवाद के इस निंदनीय कृत्य के अपराधियों, आयोजकों, वित्तपोषकों और प्रायोजकों को जवाबदेह ठहराने तथा उन्हें न्याय के कटघरे में लाने की आवश्यकता पर बल दिया। ” उन्होंने कहा कि भारत ने इसी के अनुरूप कार्रवाई की है। उन्होंने कहा कि “ हमने तब से ठीक यही किया है और आगे भी करते रहेंगे। यह ज़रूरी है कि एससीओ अपने संस्थापक उद्देश्यों के प्रति समर्पित रहे और इस चुनौती पर अडिग रुख अपनाए।”</p>
<p>डॉ. जयशंकर ने दुनिया भर में जारी संघर्षों और टकरावों का उल्लेख करते हुए कहा कि संगठन को वैश्विक व्यवस्था को स्थिर करने तथा इन समस्याओं का समाधान करने की चुनौती है। उन्होंने कहा कि “ हम ऐसे समय में मिल रहे हैं जब अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था में भारी अव्यवस्था व्याप्त है। पिछले कुछ वर्षों में, हमने और अधिक संघर्ष, प्रतिस्पर्धा और दबाव देखा है। आर्थिक अस्थिरता भी स्पष्ट रूप से बढ़ रही है। हमारे सामने चुनौती वैश्विक व्यवस्था को स्थिर करना, विभिन्न पहलुओं को जोखिम मुक्त करना और इन सबके माध्यम से, उन दीर्घकालिक चुनौतियों का समाधान करना है जो हमारे सामूहिक हितों के लिए खतरा हैं।”</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 15 Jul 2025 18:54:19 +0530</pubDate>
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                <title>एससीओ महासचिव से मिले जयशंकर, संगठन की कार्यप्रणाली में बदलाव पर हुई चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए चीन यात्रा पर गए विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने सोमवार को बीजिंग में एससीओ के महासचिव नूरलान येरमेकबायेव से मुलाकात की]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/jaishankar-discussed-measures-to-modernize-the-functioning-of-sco-general/article-120455"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/news-(10)2.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए चीन यात्रा पर गए विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने सोमवार को बीजिंग में एससीओ के महासचिव नूरलान येरमेकबायेव से मुलाकात की। संगठन के योगदान एवं महत्व के साथ-साथ इसकी कार्यप्रणाली को आधुनिक बनाने के बारे में चर्चा की।</p>
<p>डॉ. जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर कहा कि “ आज बीजिंग में एससीओ के महासचिव नूरलान येरमेकबायेव से मिलकर खुशी हुई। एससीओ के योगदान और महत्व के साथ-साथ इसके कामकाज को आधुनिक बनाने के प्रयासों पर चर्चा हुई।”</p>
<p>डॉ. जयशंकर की पिछले पांच वर्षों में यह पहली बीजिंग यात्रा है। वह मंगलवार को तियानजिन में एससीओ के विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेंगे। इस दौरान उनकी कई नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें करने की भी संभावना है। इससे पहले डॉ. जयशंकर ने चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग से मुलाकात की और विश्वास व्यक्त किया कि चीन के नेताओं के साथ उनकी बातचीत से दोनों देशों के बीच संबंधों में ‘सकारात्मक प्रगति’ होगी। डॉ. जयशंकर की अपने चीनी समकक्ष वांग यी से भी बातचीत करने की उम्मीद है। सूत्रों ने बताया कि दोनों नेताओं के बीच भारत को दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति, दलाई लामा के उत्तराधिकार और हाल के भारत-पाकिस्तान तनाव सहित कई मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Mon, 14 Jul 2025 14:34:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>भारत के साथ चलने से पड़ोसी देशों को फायदा, पाकिस्तानी सेना ने शुरू से ही अपने लोगों में भारत के खिलाफ दुश्मनी भरी : जयशंकर</title>
                                    <description><![CDATA[ विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि हर पड़ोसी को समझना चाहिए कि भारत के साथ मिलकर चलने से फायदा और दूरी बनाने से नुकसान है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/jaishankar-benefits-neighboring-countries-from-walking-with-india/article-118262"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-12/s-jaishankar11.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि हर पड़ोसी को समझना चाहिए कि भारत के साथ मिलकर चलने से फायदा और दूरी बनाने से नुकसान है। हालांकि, पाकिस्तान एक अपवाद है, वहां की सेना की सोच भारत विरोधी है और वो ही वहां देश चलाती है। विदेश मंत्री जयशंकर डीडी न्यूज से बातचीत में बोल रहे थे जिसका वीडियो उन्होंने शनिवार रात अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर शेयर किया। जयशंकर ने कहा कि भारत को अपने पड़ोसी देशों के साथ रिश्तों में हर बार सब कुछ आसान नहीं मिलेगा। </p>
<p>हालांकि, भारत ने ऐसा माहौल बनाया है जिसमें सामूहिक हित को प्राथमिकता दी जाती है ताकि सरकारें बदलें, फिर भी रिश्ते मजबूत रहें। जयशंकर ने कहा कि पाकिस्तानी सेना ने शुरू से ही अपने लोगों में भारत के खिलाफ दुश्मनी भरी है। चीन के बारे में उन्होंने कहा कि गलवान झड़प के बाद भारत ने बॉर्डर पर खड़े रहने की नीति अपनाई है। पहले बड़ी गलती थी कि हम सीमा पर ढांचा ही नहीं बना रहे थे। लेकिन अब भारत अब अपने हितों की रक्षा कर सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Jun 2025 13:03:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ट्रंप के टैरिफ पर जयशंकर की खरी-खरी : समझा दिया दुनिया का गणित, जयशंकर ने कहा- देश आर्थिक ताकत का इस्तेमाल हथियार की तरह कर रहे </title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी टैरिफ नीतियों से पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/on-trumps-tariff-jaishankars-procurement-was-explained-to-the-worlds/article-108038"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/news-(4)10.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी टैरिफ नीतियों से पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है। इस बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर का इसे लेकर बड़ा बयान आया है। रायसीना डायलॉग 2025 में जयशंकर ने कहा कि टैरिफ एक सच्चाई है। कई देश इसका इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने यह बात कमिश्नर्स एंड कैपिटलिस्ट्स: पॉलिटिक्स, बिजनेस एंड न्यू वर्ल्ड आॅर्डर सेशन में कही। उन्होंने कहा कि देश अपनी आर्थिक ताकत का इस्तेमाल हथियार की तरह कर रहे हैं। इसमें वित्तीय लेनदेन, ऊर्जा सप्लाई और टेक्नोलॉजी शामिल है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी भारत के ज्यादा टैरिफ पर चिंता जताई है। उन्होंने कई देशों पर टैरिफ लगाए हैं। इसके जवाब में चीन और कनाडा ने भी अमेरिका पर टैरिफ लगाए हैं। जयशंकर ने कहा कि भारत को सबसे अच्छा रास्ता निकालना होगा। आज अंतरराष्ट्रीय संबंध पहले से कम संयमित हैं।</p>
<p>विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रायसीना डायलॉग 2025 में कहा कि टैरिफ और तकनीकी प्रतिबंध अंतरराष्ट्रीय व्यापार में एक कड़वी सच्चाई हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देश इनका इस्तेमाल करते हैं। कमिश्नर्स एंड कैपिटलिस्ट्स: पॉलिटिक्स, बिजनेस एंड न्यू वर्ल्ड ऑर्डर विषय पर बात करते हुए जयशंकर ने कहा कि टैरिफ, एक्सपोर्ट कंट्रोल... चाहे हम इसे पसंद करें या नहीं, ये एक सच्चाई हैं। देश इनका इस्तेमाल करते हैं। अगर हम पिछले दस सालों को देखें तो पाएंगे कि देशों ने अपनी ताकत का इस्तेमाल हथियार की तरह किया है। इसमें आर्थिक गतिविधियां, वित्तीय लेन-देन, ऊर्जा सप्लाई या टेक्नोलॉजी सब शामिल हैं। यही आज की दुनिया की सच्चाई है।</p>
<p><strong>सबसे अच्छा रास्ता खोजना होगा</strong><br />जयशंकर ने आगे कहा कि हमें इस माहौल में अपने देश के लिए सबसे अच्छा रास्ता खोजना होगा। सरकार का काम है कि वह अपने बिजनेस, रोजगार और देश की ताकत के लिए लड़े। बिजनेस देश की तरक्की में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जयशंकर ने यह भी कहा कि आज के समय में अलग-अलग क्षेत्रों के बीच की सीमाएं मिट गई हैं। अंतरराष्ट्रीय संबंधों में पहले के मुकाबले अब कम संयम देखने को मिलता है। हमें इस बात को ध्यान में रखना होगा। यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2 अप्रैल से कई देशों पर टैरिफ लगाने का फैसला किया है। ट्रंप ने भारत के हाई टैरिफ पर चिंता जताई है। उन्होंने यूरोपीय यूनियन (ईयू) से आने वाले सामानों पर भी अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की है। इससे दुनिया भर में व्यापार को लेकर तनाव बढ़ गया है। इससे पहले, अमेरिका ने स्टील और एल्यूमीनियम के आयात पर 25% ड्यूटी लगाई थी, जिससे कई देशों के साथ उसके संबंध खराब हो गए थे। ट्रंप ने ईयू को चेतावनी दी है कि अगर उसने जवाबी कार्रवाई की तो अमेरिका उस पर और भी ज्यादा टैरिफ लगाएगा। उन्होंने कहा, वे हम पर जो चार्ज लगाएंगे, हम उन पर वही चार्ज लगाएंगे।</p>
<p><strong>व्यापार को लेकर बढ़ा है तनाव</strong><br />अमेरिका ने कनाडा और मेक्सिको से आने वाले सामानों पर भी 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाया है। चीन से आने वाले सामानों पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगाया गया है। इसके जवाब में चीन और कनाडा ने भी अमेरिका से आने वाले सामानों पर टैरिफ लगाए हैं। कनाडा ने अमेरिका से आने वाले मेटल्स और इलेक्ट्रॉनिक्स सहित 20 अरब डॉलर के सामानों पर टैरिफ लगाया है। यह अमेरिका को स्टील और एल्यूमीनियम का सबसे बड़ा सप्लायर है। चीन ने अमेरिका से आने वाले कृषि और खाद्य उत्पादों पर टैक्स लगाया है। उसने 25 अमेरिकी कंपनियों से जुड़े एक्सपोर्ट और इन्वेस्टमेंट पर रोक लगा दी है। उसने तीन अमेरिकी कंपनियों के सोयाबीन इम्पोर्ट लाइसेंस रद्द कर दिए हैं। अमेरिका से आने वाले लकड़ी के लट्ठों का इम्पोर्ट बंद कर दिया है। इसके अलावा, चीन ने अमेरिका के कुछ फाइबर आॅप्टिक उत्पादों की जांच भी शुरू कर दी है। इन सभी घटनाओं से पता चलता है कि दुनिया में व्यापार को लेकर तनाव बढ़ रहा है। देश अपनी आर्थिक ताकत का इस्तेमाल एक-दूसरे पर दबाव बनाने के लिए कर रहे हैं। ऐसे में भारत को बहुत सोच-समझकर अपनी विदेश नीति बनानी होगी ताकि वह अपने देश के हितों की रक्षा कर सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 20 Mar 2025 12:59:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>राहुल गांधी के बयान पर विदेश मंत्री एस जयशंकर का पलटवार : राहुल पर लगाया झूठ बोलने का आरोप, बोले- इससे खराब होती है देश की छवि </title>
                                    <description><![CDATA[विदेश मंत्री एस जयशंकर ने उनकी दिसंबर में हुई अमेरिका यात्रा को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर जानबूझ कर झूठ बोलने का आरोप लगाया ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/foreign-minister-s-jaishankars-retaliation-on-rapul-gandhis-statement-accused/article-103068"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/untitled-design-(29).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने उनकी दिसंबर में हुई अमेरिका यात्रा को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर जानबूझ कर झूठ बोलने का आरोप लगाया और कहा कि भले ही उनके झूठ का उद्देश्य राजनीतिक हो लेकिन इससे देश की छवि खराब होती है। विदेश मंत्री ने सोमवार को एक्स पर अपनी एक पोस्ट में लिखा कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने दिसंबर 2024 में मेरी अमेरिका यात्रा के बारे में जानबूझकर झूठ बोला। मैं बिडेन प्रशासन के विदेश मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार से मिलने गया था। साथ ही हमारे महावाणिज्य दूतों की एक बैठक की अध्यक्षता भी की थी। मेरे प्रवास के दौरान, आने वाले ट्रंप प्रशासन के लिए नामित राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने भी मुझसे मुलाकात की थी।</p>
<p><strong>हमारे पीएम ऐसे आयोजनों में शामिल नहीं होते </strong><br />डॉ. जयशंकर ने कहा कि किसी भी स्तर पर प्रधानमंत्री के लिए निमंत्रण के बारे में कहीं कोई चर्चा नहीं की गई। यह सामान्य समझ की बात है कि हमारे प्रधानमंत्री ऐसे आयोजनों में शामिल नहीं होते हैं। वास्तव में, भारत का प्रतिनिधित्व आम तौर पर विशेष दूतों द्वारा किया जाता है। राहुल गांधी के झूठ का उद्देश्य राजनीतिक हो सकता है। लेकिन विदेश में देश को नुकसान पहुंचाते हैं। </p>
<p><strong>क्या कहा था राहुल गांधी ने</strong><br />राहुल गांधी ने लोकसभा में कहा कि हम अपने प्रधानमंत्री को शपथ ग्रहण में बुलाने के लिए विदेश मंत्री को भी नहीं भेजते। अगर हमारे पास उत्पादन प्रणाली होती, अगर हम तकनीकों पर काम कर रहे होते तो अमेरिकी राष्ट्रपति खुद यहां आते और प्रधानमंत्री को आमंत्रित करते। इस पर किरेन रिजिजू ने उन्हें टोका और कहा कि विपक्ष के नेता ऐसे गंभीर और तथ्यहीन बयान नहीं दे सकते। यह दो देशों के बीच संबंधों से जुड़ा है। वह हमारे देश के प्रधानमंत्री के निमंत्रण के बारे में एक अधूरा बयान दे रहे हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Feb 2025 11:35:27 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>QUARD ही सुनिश्चित कर सकता है कि हिंद-प्रशांत स्वतंत्र, सुरक्षित बना रहे: जयशंकर</title>
                                    <description><![CDATA[बैठक में अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन, जापान के विदेश मंत्री योको कामिकावा और ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग मौजूद थे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/only-quad-can-ensure-that-the-indo-pacific-remains-independent-and/article-86202"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/4111u1rer-(10)1.png" alt=""></a><br /><p>टोक्यो। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को क्वाड (भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया) के विदेश मंत्रियों की बैठक में कहा कि केवल क्वाड देशों के बीच सहयोग ही यह सुनिश्चित कर सकता है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र स्वतंत्र, खुला, सुरक्षित और समृद्ध बना रहे। </p>
<p>जयशंकर ने जापान की राजधानी टोक्यो में आयोजित क्वाड के विदेश मंत्रियों की बैठक में अपने उद्घाटन भाषण में कहा कि विश्व की भलाई के लिए क्वाड की प्रतिबद्धता हिंद-प्रशांत क्षेत्र से कहीं आगे तक है। उन्होंने कहा कि  चारों देशों (भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया) की बैठक 10 महीने पहले न्यूयॉर्क में हुई थी, लेकिन बीच की अवधि के दौरान इन देशों के मंत्री द्विपक्षीय रूप से या अन्य कार्यक्रमों से इतर एक-दूसरे से मिलते रहे हैं और उनके शेरपा भी लगातार बातचीत करते रहे हैं। ये आसान समय नहीं है। वैश्विक आर्थिक वृद्धि सुनिश्चित करना और साथ ही जोखिम को कम करना एक बड़ी चुनौती है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि आपूर्ति श्रृंखला के लचीलेपन पर विशेष ध्यान केंद्रित है। यह ठीक उसी तरह से हैं, जैसे हम विश्वसनीय और पारदर्शी डिजिटल साझेदारी के लिए जोर देते हैं। प्रौद्योगिकी के विकास ने भी असाधारण अनुपात हासिल कर लिया है, जिस तरह से हम रहते हैं, सोचते हैं और कार्य करते हैं, उसमें बहुत संभावनाएं हैं। एक तरह से हम पुन: वैश्वीकरण के बीच में हैं। केवल हमारे सामूहिक प्रयास ही अंतरराष्ट्रीय प्रणाली को मानव निर्मित या प्राकृतिक व्यवधानों से बचा सकते हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि हमारे पास इसके अतिरिक्त महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ भी हैं। राजनीतिक लोकतंत्र, बहुलवादी समाज और बाजार अर्थव्यवस्थाओं के रूप में नियम-आधारित व्यवस्था को बनाए रखने का महत्वपूर्ण प्रश्न है। केवल हमारा सहयोग ही यह सुनिश्चित कर सकता है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र स्वतंत्र, खुला, स्थिर, सुरक्षित और समृद्ध बना रहे। हम लोगों ने वैश्विक भलाई करने की जिस प्रतिबद्धता को अपनाया है , उसका इस क्षेत्र से कहीं आगे तक प्रभाव है। यह आवश्यक है कि चारों देशों के बीच राजनीतिक समझ मजबूत हो, आर्थिक साझेदारी बढ़े, प्रौद्योगिकी सहयोग बढ़े तथा लोगों के बीच सहजता बढ़े।</p>
<p>जयशंकर ने कहा कि हमारी बैठक से यह स्पष्ट संदेश जाना चाहिए कि क्वाड यहां रहने, काम करने और आगे बढऩे के लिए है।</p>
<p>बैठक में अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन, जापान के विदेश मंत्री योको कामिकावा और ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग मौजूद थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jul 2024 15:18:36 +0530</pubDate>
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                <title>गांधीजी का अहिंसा का संदेश मौजूदा समय में भी प्रासंगिक: जयशंकर</title>
                                    <description><![CDATA[ केंद्र में लगातार तीसरी बी मोदी सरकार के गठन और मोदी सरकार-3 में विदेश मंत्री की जिम्मेदारी मिलने के बाद जयशंकर और ब्लिंकन के बीच यह पहली बैठक है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/gandhijis-message-of-non-violence-is-relevant-even-in-present-times/article-86158"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/4111u1rer-(3)3.png" alt=""></a><br /><p>टोक्यो। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रविवार को कहा कि मौजूदा समय में समय में भू-राजनीतिक संघर्ष और तनाव के मद्देजनर महात्मा गांधी का वह संदेश, जिसमें उन्होंने कहा था कि समाधान युद्ध के मैदान से नहीं आते हैं और कोई भी युग युद्ध का युग नहीं होना चाहिए, उतना ही प्रासंगिक है, जितना उस समय था। जयशंकर ने जापान की राजधानी टोक्यो में एडोगावा के फ्रीडम प्लाजा में महात्मा गांधी की प्रतिमा का अनावरण किया और इस अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि गांधीजी के संदेश कालातीत हैं। मैं आज कहूंगा कि ऐसे समय में जब हम दुनिया में इतना संघर्ष, इतना तनाव, इतना ध्रुवीकरण, इतना रक्तपात देख रहे हैं, गांधीजी का वह संदेश बहुत महत्वपूर्ण है, जिसमें उन्होंने कहा था समाधान युद्ध के मैदान से नहीं आते हैं, कोई भी युग युद्ध का युग नहीं होना चाहिए। यह संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना 80 साल पहले था।</p>
<p><strong>गांधीजी समावेशिता के पैरोकार</strong><br />गांधीजी को सतत विकास का मूल पैगम्बर बताते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि स्थायित्व, जलवायु प्रेम, हरित विकास, हरित नीतियों के संदर्भ में, गांधीजी सतत विकास के मूल पैगम्बर थे। वे प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाकर जीने के सबसे बड़े पैरोकार थे। इसलिए गांधीजी का संदेश केवल सरकारों के लिए नहीं है, बल्कि हर किसी को अपनी जीवन शैली में अपनाना चाहिए। निश्चित रूप से, गांधीजी समावेशिता के पैरोकार थे और यही हम आज भारत और दुनिया भर में देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी की उपलब्धियां उनके समय से कहीं अधिक आगे की हैं, समय बीतने के साथ उनका महत्व और भी बढ़ गया है। इससे पहले भारतीय दूतावास ने एक्स पर कहा कि विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर दो दिवसीय यात्रा पर जापान पहुंचे और राजदूत सिबी जॉर्ज ने उनका स्वागत किया। दूतावास ने कहा कि जयशंकर टोक्यो के एडोगावा में फ्रीडम प्लाजा में महात्मा गांधी की प्रतिमा का अनावरण किया। विदेश मंत्री लाओस के वियनतियाने से टोक्यो पहुंचे हैं, जहां उन्होंने  दक्षिण पूर्वी एशियाई राष्ट्रों का संगठन (आसियान)-संबंधी कई बैठकों में भाग लिया और कई विदेश मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं। टोक्यो में, विदेश मंत्री सोमवार को क्वाड के विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेंगे। </p>
<p><strong>टोक्यो में जयंशकर और ब्लिंकन ने की द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा</strong><br />क्वाड (भारत, अमेरिका, जापान और आॅस्ट्रेलिया) में शामिल देशों विदेश मंत्रियों की बैक में भाग लेने के लिए जापान की राजधानी टोक्यों पहुंचे विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रविवार को अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन से मुलाकात की। जयशंकर ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर व्यापक चर्चा की। उन्होंने कहा कि आज टोक्यो में ब्लिंकन से मिलकर बहुत अच्छा लगा।हमारा द्विपक्षीय एजेंडा लगातार आगे बढ़ रहा है। क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी व्यापक चर्चा हुई। कल क्वाड के विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए उत्सुक हूं। बैठक में अमेरिकी विदेश मंत्री के साथ सहायक सचिव (दक्षिण एवं मध्य एशियाई मामले) डोनाल्ड लू और अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर भी थे। जयशंकर के साथ जापान में भारत के राजदूत सिबी जॉर्ज भी रहे। केंद्र में लगातार तीसरी बी मोदी सरकार के गठन और मोदी सरकार-3 में विदेश मंत्री की जिम्मेदारी मिलने के बाद जयशंकर और ब्लिंकन के बीच यह पहली बैठक है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jul 2024 11:14:26 +0530</pubDate>
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                <title>जयशंकर की लाओस के प्रधानमंत्री से मुलाकात भारतीय नागरिकों की तस्करी पर चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[विदेश मंत्री ने कहा, लाओस के प्रधानमंत्री से मुलाकात के दौरान मैंने साइबर घोटाला केंद्रों के जरिए भारतीय नागरिकों की तस्करी का मुद्दा उठाया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/jaishankar-meets-laos-prime-minister-to-discuss-trafficking-of-indian/article-86084"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/4111u1rer-(5)1.png" alt=""></a><br /><p>वियनतियाने/नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को लाओस के प्रधानमंत्री सोनेक्साय सिफांडोन से मुलाकात की। इस दौरान विदेश मंत्री ने दक्षिण पूर्व एशियाई देश में साइबर घोटाला केंद्रों के जरिए भारतीय नागरिकों की तस्करी का मुद्दा उाया तथा रक्षा एवं ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में विकास साझेदारी और सहयोग पर चर्चा की। </p>
<p>विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट किया, विदेश मंत्री आसियान की बैठक के लिए लाओस में हैं, उन्होंने कंबोडियाई और थाईलैंड के विदेश मंत्रियों के साथ भारतीय नागरिकों की तस्करी के मुद्दे पर भी चर्चा की।  डॉ जयशंकर ने एक्स पर कहा, लाओस के पीएम सोनेक्से सिफांडोन से मुलाकात करते हुए खुशी हो रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से हार्दिक बधाई दी। रक्षा, विरासत संरक्षण, ऊर्जा, डिजिटल और क्षमता निर्माण में हमारी विकास साझेदारी और सहयोग पर चर्चा की। हमारे घनिष्ठ संबंधों को और मजबूत करने के लिए उनके मार्गदर्शन को महत्व दिया, जो साझा सभ्यतागत जुड़ाव में गहराई से निहित हैं।    </p>
<p>विदेश मंत्री ने कहा, लाओस के प्रधानमंत्री से मुलाकात के दौरान मैंने साइबर घोटाला केंद्रों के जरिए भारतीय नागरिकों की तस्करी का मुद्दा उठाया। हमारे नागरिकों को बचाने के लिए पीडीआर सरकार के निरंतर सहयोग की सराहना करते हैं। इस मामले पर कंबोडिया और थाईलैंड के विदेश मंत्रियों के साथ भी चर्चा की।  उन्होंने यह भी कहा कि भारत आसियान और पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में लाओ पीडीआर की अध्यक्षता का पूरा समर्थन करता है।</p>
<p>ज्ञातव्य है कि 21 जुलाई को लाओस में साइबर घोटाला केंद्रों में लालच देकर भेजे गए 13 भारतीयों को बचाया गया और स्वदेश भेजा गया था। लाओस में रोजगार के अवसरों के झूठे वायदों के साथ भारतीय नागरिकों की तस्करी साइबर घोटाला केंद्रों में की जाती है। लाओस में भारतीय दूतावास ने अब तक दूतावास ने 518 भारतीयों को बचाया है। दूतावास ने भारतीयों को नौकरी की फर्जी पेशकश के प्रति आगाह करते हुए एक एडवाइजरी भी जारी की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Jul 2024 11:23:06 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय के लिए मार्बल एसोसिएशन ने लिखा प्रधानमंत्री को पत्र</title>
                                    <description><![CDATA[ यहां से कई व्यापारी अपने व्यापार को बढ़ाने हेतु विदेश आते जाते ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/marble-association-wrote-a-letter-to-the-prime-minister-for/article-59555"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/sizte--(1)12.png" alt=""></a><br /><p>उदयपुर। राजस्थान के उदयपुर में पासपोर्ट का क्षेत्रीय  कार्यालय खोलने की मांग को लेकर मार्बल एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी एवं विदेश मंत्री एस जयशंकर को पत्र लिखा है।</p>
<p>      एसोसिएशन अध्यक्ष पंकज कुमार गंगावत ने बताया कि मार्बल व्यापारियों की ओर  से उदयपुर में पासपोर्ट सेवा केंद्र को अपग्रेड कर क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय बनाने के लिए प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री को पत्र लिखा। साथ ही  बताया कि उदयपुर का प्रमुख खनिज एवं पर्यटन उद्योग विश्व विख्यात है। यहां से कई व्यापारी अपने व्यापार को बढ़ाने हेतु विदेश आते जाते रहते हैं। ऐसे  में उदयपुर में पासपोर्ट का क्षेत्रीय कार्यालय होना बहुत आवश्यक हो गया  है।</p>
<p>एसोसिएशन ने आग्रह किया है कि दक्षिणी राजस्थान के व्यापारियों  को  पासपोर्ट के कार्य के लिए बार बार जयपुर नहीं जाना पड़े, इसके लिए  उदयपुर में ही स्थित कार्यालय को क्षेत्रीय कार्यालय में बदल कर यह सुविधा  उपलब्ध कराई जाए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 Oct 2023 18:22:52 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>जी-20 विकास मंत्रियों के सम्मेलन में जयशंकर करेंगे भारत का नेतृत्व</title>
                                    <description><![CDATA[भारत की अध्यक्षता में जी-20 के सदस्य देशों की विभिन्न मुद्दों पर दो सौ से अधिक बैठकों का आयोजन किया जा रहा है जिनमें से कम से कम छह बैठकें वाराणसी में होनी हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/jaishankar-to-lead-india-at-g-20-development-ministers-conference/article-45907"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/photo-size-630-400-(9).jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। जी-20 के सदस्य देशों के विकास मामलों के मंत्रियों का सम्मेलन 12 एवं 13 जून को वाराणसी में होगी। विदेश मंत्रालय के अनुसार जी-20 विकास मंत्रियों के सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री एस जयशंकर करेंगे। </p>
<p>भारत की अध्यक्षता में जी-20 के सदस्य देशों की विभिन्न मुद्दों पर दो सौ से अधिक बैठकों का आयोजन किया जा रहा है जिनमें से कम से कम छह बैठकें वाराणसी में होनी हैं। इस समय सौ से अधिक बैठकें हो चुकीं हैं। जम्मू कश्मीर के श्रीनगर में पर्यटन संबंधी बैठक का आयोजन किया गया है। इससे पहले अप्रैल में जी-20 देशों के प्रमुख कृषि वैज्ञानिकों की बैठक हुई थी जिसमें पूरे विश्व को स्वस्थ रखने के लिए पौष्टिक आहार, खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण के अनुकूल खेती को बढ़ावा देने का संदेश दिया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 May 2023 16:13:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>जयशंकर ने आठ देशों के विदेश मंत्रियों के साथ की द्विपक्षीय बैठकें</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय विदेश मंत्री ने अपने सिलसिलेवार ट्वीट्स में आठ देशों के अपने समकक्षों के साथ बातचीत का उल्लेख किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/jaishankar-holds-bilateral-meetings-with-foreign-ministers-of-eight-countries/article-45528"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/jaishankarrr.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में आयोजित यूरोपीय यूनियन-इंडो पैसिफिक मिनिस्ट्रियल के इतर आठ देशों लातविया, ऑस्ट्रिया, फ्रांस, बेल्जियम, रोमानिया, साइप्रस और बुल्गारिया और लिथुआनिया के अपने समकक्षों के साथ द्विपक्षीय बैठकें की है। डॉ जयशंकर ने जिन विदेश मंत्रियों के साथ बातचीत की, उनमें लातविया के एडगर रिंकेविक्स, ऑस्ट्रिया के अलेक्जेंडर शालेनबर्ग, लिथुआनिया के गेब्रियलियस लैंड्सबर्गिस, फ्रांस के कैथरीन कोलोना, बेल्जियम के हादजा लाहबिब, बुल्गारिया के इवान कोंडोव, रोमानिया के बोगडान ऑरेस्कु और साइप्रस के कॉन्स्टेंटिनोस कोम्बोस शामिल रहे। </p>
<p>भारतीय विदेश मंत्री ने अपने सिलसिलेवार ट्वीट्स में आठ देशों के अपने समकक्षों के साथ बातचीत का उल्लेख किया। लातवियाई विदेश मंत्री के साथ अपनी बैठक के बारे में कहा कि हमने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और यूक्रेन संघर्ष के नतीजों पर बात की। इसके अलावा बहुपक्षीय सहयोग पर भी चर्चा हुई। उन्होंने ऑस्ट्रिया के अलेक्जेंडर शालेनबर्ग के साथ अपनी बैठक के संबंध में दोनों पक्षों ने गतिशीलता और प्रवासन में समझौतों पर हस्ताक्षर किए और यूक्रेन संघर्ष और भारत-प्रशांत पर भी चर्चा की।</p>
<p>डॉ जयशंकर ने आगे कहा कि फ्रांसीसी विदेश मंत्री कैथरीन कोलोना के साथ बैठक में आगामी जुलाई में बैस्टिल दिवस समारोह के लिए मुख्य अतिथि के रूप में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फ्रांस की आगामी यात्रा पर चर्चा की तथा ङ्क्षहद-प्रशांत और ती-20 पर विचारों को साझा किया गया।</p>
<p>लिथुआनियाई समकक्ष गेब्रियलियस लैंड्सबर्गिस के साथ अपनी बैठक में कहा कि दोनों ने द्विपक्षीय सहयोग के साथ-साथ भू-राजनीतिक घटनाओं पर यूरोप के दृष्टिकोण पर चर्चा की। बेल्जियम के मंत्री हादजा लहबीब के साथ अपनी बैठक पर उन्होंने दोनों नेताओं ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने के साथ-साथ बहुपक्षीय सहयोग के लिए मिलकर काम करने पर सहमति जताई। </p>
<p>डॉ जयशंकर ने बल्गेरियाई विदेश मंत्री के साथ अपनी बैठक के संबंध में कहा कि बुल्गारिया के विदेश मंत्री इवान कोंडोव के साथ क्षेत्र और इसके वैश्विक प्रभाव पर विचारों का आदान-प्रदान किया। हमारे बढ़ते द्विपक्षीय और बहुपक्षीय संबंधों पर चर्चा की। अपने रोमानियाई समकक्ष बोगडान ऑरेस्कु के साथ अपनी बैठक पर भारतीय विदेश मंत्री ने कहा कि उन्होंने पिछले साल यूक्रेन से भारतीय छात्रों को निकालने के दौरान रोमानियाई सरकार की मदद के लिए उन्हें धन्यवाद दिया। इसके साथ ही दोनों नेताओं ने रक्षा और ऊर्जा सहयोग पर भी चर्चा की।</p>
<p>उन्होंने साइप्रस के विदेश मंत्री कॉन्स्टेंटिनोस कोम्बोस से मुलाकात पर कहा  '' हमने गतिशीलता और पर्यटन के बारे में और अधिक द्विपक्षीय जुड़ाव की आवश्यकता पर भी बात की।''</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 May 2023 15:27:57 +0530</pubDate>
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                <title>अमेरिकी राजदूत को प्यार से समझा देंगे: जयशंकर</title>
                                    <description><![CDATA[ जयशंकर कहा कि भारत किसी तरह के समझौते का उल्लंघन नहीं सहेगा। विदेश मंत्री ने कहा कि दुनिया के अलग अलग देशों में नागरिकता प्राप्त करने के अलग अलग क्राइटेरिया हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/jaishankar-will-lovingly-explain-to-the-american-ambassador/article-40251"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-03/1666874423_jaishankar-1111.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) पर अमेरिका के नए राजदूत एरिक गार्सेटी के रुख पर जवाब दिया है। उन्होंने कहा, अगर कोई पाकिस्तानी हिंदू है जिसका उत्पीड़न किया गया हो, तो वह भारत के अलावा और कहां जाएगा। यह एक ऐसी सच्चाई है, जिसे हर कोई जानता है। एक न्यूज चैनल से प्राप्त समाचार के अनुसार भारत में गार्सेटी की नियुक्ति के सवाल पर विदेश मंत्री ने मजाकिया अंदाज में कहा, आने दीजिए उन्हें प्यार से समझा देंगे। गार्सेटी ने पहले सीएए  को मुस्लिम विरोधी और भेदभाव वाला बताया था। अब वे भारत में अमेरिका के नए राजदूत बन गए हैं। न्यूज चैनल ने बताया कि जयशंकर ने चीन को भी मैसेज दिया। जयशंकर कहा कि भारत किसी तरह के समझौते का उल्लंघन नहीं सहेगा। विदेश मंत्री ने कहा कि दुनिया के अलग अलग देशों में नागरिकता प्राप्त करने के अलग अलग क्राइटेरिया हैं। अगर यूरोप को देखें तो वहां जर्मनी के लोगों को आसानी से नागरिकता मिल जाती है।</p>
<p><strong>चीन ने पहले हुए समझौते तोड़े, सब कुछ नॉर्मल नहीं</strong><br />इस दौरान उन्होंने भारत-चीन के मौजूदा संबंधों पर भी बात की। विदेश मंत्री ने दोनों देशों के बीच संबंधों को चुनौतीपूर्ण बताया। जयशंकर ने कहा कि  आप समझौतों का उल्लंघन करके यह नहीं दिखा सकते हैं कि सबकुछ नॉर्मल है। पहले जो समझौते हुए, उनका चीन ने उल्लंघन किया। हम साफ कर चुके हैं कि समझौतों का उल्लंघन नहीं सहेंगे। इंटरव्यू के दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि देश और समाज अब बदल रहा है। हम ग्लोबल और डायनमिक होते जा रहे हैं। देश और समाज अब बदल चुका है। हम अब अलग नजरिए से आगे बढ़ रहे हैं। न्यूज चैनल ने जयशंकर के हवाले कहा कि इस दशक के अंत तक भारत दुनिया का तीसरा सबसे ताकतवर देश बनकर उभरेगा।</p>
<p><strong>बाइडेन ने नए अमेरिकी राजूदत एरिक गार्सेटी पर विश्वास जताया </strong><br />अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने भारत के लिए नए अमेरिकी राजूदत एरिक गार्सेटी पर पूरा विश्वास जताया है। लॉस एंजिल्स के पूर्व मेयर एरिक गार्सेटी भारत में अमेरिका के नए राजदूत बन गए हैं। अमेरिकी सीनेट ने उनके नाम पर मुहर लगा दी है। इसके पहले केनिथ जस्टर भारत में अमेरिका के आखिरी राजदूत थे। जिन्हें जनवरी 2021 में अमेरिकी सरकार ने वापस बुला लिया था। इसके बाद अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने गार्सेटी को नॉमिनेट किया था। पिछले साल भी गार्सेटी को नॉमिनेट किया गया था, लेकिन उन्होंने लॉस एंजिल्स का मेयर रहते हुए यौन शोषण करने वाले अपने आफिस स्टाफ पर कार्रवाई नहीं की थी। इसके चलते उन्हें राजदूत नियुक्त नहीं किया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Mar 2023 11:26:02 +0530</pubDate>
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