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                <title>drug addicts - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>शहर में आसानी से मिल रहे मादक पदार्थ, बढ़ रही नशेड़ियों की संख्या</title>
                                    <description><![CDATA[पुलिस और नारकोटिक्स विभाग की नशे के खिलाफ कार्रवाई नाकाफी।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/drugs-are-easily-available-in-the-city--number-of-drug-addicts-is-increasing/article-114433"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/rtrer-(1)79.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में नशे का कारोबार इतनी तेजी से फेल रहा है कि अब यह नशा करने वालों को आसानी से मिलने लगा है। जिससे नशेड़ियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। वहीं नशेड़ी पहले जहां घरों से पानी के मीटर व छोटी-छोटी चोरियां कर रहे थे। वहीं अब ये सरकारी सम्पत्तियों की चोरी कर उन्हें नुकसान पहुंचा रहे हैं। नशे का कारोबार करने वालों और नशा करने वालों पर पुलिस व नारकोटिक्स विभाग की कार्रवाई नाकाफी साबित हो रही है। शहर में सुनसान इलाका हो या अंधेरी जगह। पार्क का कोना हो या खाली पड़े मकान। झाड़ झंकार हो या थोड़ी से भी आड़ वाली जगह। इन सभी जगह पर नशा करने वालों को देखा जा सकता है। कागज की छोटी सी पुड़िया को हाथों से  रगड़ते हुए और उसे जलाकर उसका सुट्टा लगाकर स्मैक का नशा करते हुए नशेड़ी। कोई सिगरेट में नशीला पदार्थ मिलाकर तो कोई पुड़िया में लेकर। कोई इंजक् शन लगाकर तो कोई अन्य तरीके से नशे का सेवन कर रहा है।  शहर में इस तरह से नशा करते युवा व बुजुर्ग नशेड़ियों को देखा जा सकता है। इनकी संख्या दिनों दिन बढ़ती ही जा रही है। नशे के लिए कर रहे चोरियां: शहर में स्मैक व गांजे के अलावा इंजेक् शन से नशा करने वालों की संख्या लगातार बढ़ती ही जा रही है। शुरुआत में एक से दो और दो से चार की तरह से इनकी संख्या इतनी अधिक हो गई कि शुरुआत में इन्हें नि:शुल्क नशा उपलब्ध कराया जाता है। बाद में आदत पड़ने पर उनसे उसकी कीमत वसूल की जा रही है। नशा करने के कारण वे कोई काम तो कर नहीं पाते। ऐसे में नशे की पुड़िया या इंजेक् शन का इंतजाम करने के लिए  पहले जहां नशेड़ी अपने घर में चोरी कर रहे थे। उसके बाद दूसरों के घरों से पानी के मीटर, लोहे का सामान, साइकिल या अन्य सामान चोरी कर रहे थे। वहीं अब ये बड़ी-बड़ी और सरकारी सम्पत्तियों तक की चोरी करने लगे हैं। उन सामानों को चोरी कर कबाड़ियों को सस्ते दाम में बेचकर पुड़िया का इंतजाम कर रहे हैं। </p>
<p><strong>केबल से लेकर रैलिंग तक की चोरी</strong><br />शहर में नशेड़ियों का इतना अधिक आतंक हो गया है कि अब ये कोई भी चीज नहीं छोड़ रहे हैं। सुनसान व अंधेरे इलाकों से ही नहीं अब तो मुख्य मार्गों से दिन दहाड़े चोरियां करने लगे हैं।  सीएडी रोड पर अभय कमांड सेंटर के सामने डिवाइडर की रैलिंग हो या  घोड़ा चौराहे पर हरितिमा पट्टी की रैलिंग। एरोड्राम चौराहे पर  लाइट का पैनल बॉक्स व बिजली की  केबल  हो या सड़क किनारे लगी डेकोरेटिव लाइटें। तालाब किनारे लगी लोहे की रैलिंग हो या नयापुरा और अदालत चौराहे पर लगी बेश कीमती व मोटी रैलिंग। स्टील के हो या लोहे और अब तो प्लास्टिक तक के डस्टबीन भी नशेड़ी नहीं छोड़ रहे हैं। नशेड़ियों का जहां दांव लग रहा है उसे ही निशाना बना रहे हैं और 50 से 100 रुपए गें मिलने वाली नशे की एक पुड़िया के लिए लाखों की सरकारी सम्पत्ति को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इंसानी चूहों के रूप में ये शहर को इस तरह से कुतर कर खोखला कर रहे हैं जिसकी भनक न तो पुलिस को लग रही है और न ही संबंधित विभागों को जिनकी सम्पत्तियों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।  </p>
<p><strong>लाखों का नुकसान कर चुके नशेड़ी</strong><br />नशा करने वाले जिस तरह से शहर में सरकारी सम्मितियों की चोरी कर रहे हैं। उससे ऐसा लग रहा है मानो यह एक दो लोगों का नहीं वरन् पूरे गिरोह के रूप में काम किया जा रहा है। शहर के मुख्य मार्ग, व्जस्त रोड और दिन दहाड़े की गई इन चोरियों से नशेड़ी अब तक शहर में लाखों रुपए का नुकसान कर चुके हैं।  विभागीय अधिकारियों को भी चोरी का काफी समय बाद पता चलता है जब या तो केबल चोरी होने से लाइटें बंद हो या  किसी अधिकारी की उन पर निगाह पड़ जाए।  हालांकि केडीए अधिकारी उनकी सम्पत्तियों को नुकसान पहुंचाने पर पुलिस में कई बार शिकायत भी कर चुके हैं। पुलिस ने कुछ नशेड़ियों पर कार्रवाई की भी है लेकिन फिर से जमानत पर छूटते ही वे यही काम करने लग जाते हैं।</p>
<p><strong>चोरियां रोकनी हैं तो नशेड़ियों पर कार्रवाई हो </strong><br />लोगों का कहना है कि शहर में बढ़ती चोरियों पर रोक लगाने के लिए  नशा करने वालों पर  कार्रवाई होना आवश्यक है।  भीमगंजमंडी निवासी महेश योगी का कहना है कि पहले तो नशा करने वाले घरों से सीवरेज के चैम्बर के  ढक्कन, साइकिल व पानी के मीटर चोरी कर रहे थे। ऐसे में अब लोगों ने सीसीटीवी लगाने से वह तो कम हो गई। लेकिन अब सरकारी सम्पत्तियों की चोरी अधिक होने लगी है। शहर को खोखला किया जा रहा है। इन्हें रोकने के लिए पुलिस को चोरों पर व नारकोटिक्स विभाग को नशा बेचने वालों पर कार्रवाई करनी चाहिए।  जवाहर नगर निवासी अनिल गोयल का कहना है कि पिछले कुछ समय से सरकारी सम्पत्तियों की चोरी व उनके नुकसान के मामले अधिक हो रहे हैं। यह काम अधिकतर नशेड़ी कर रहे हैं। पुलिस भी नशेड़ियों पर ठोस कार्रवाई नहीं करती। इनकी आसानी से जमानत होने से इनकी संख्या बढ़ रही है। जबकि इन पर रोक लगाना जरूरी है। </p>
<p><strong>नारकोटिक्स विभाग ने नहीं की कार्रवाई</strong><br />मादक पदाथों की तस्करी रोकने व तस्करों पर कार्रवाई करने की जिम्मेदारी निभाने वाले नारकोटिक्स विभाग की ओर से अभी तक शहर में नशा करने वालों व नशे का कारोबार करने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। विभाग द्वारा जो कार्रवाई की भी जा रही है तो वह नाम मात्र की हो रही हैं। उनकी आड़ में बड़ी मात्रा में नशे की खैप शहर में छोटी-छोटी जगह पर पहुंच रही है। जिससे यह आसानी से लोगों तक  पहुंच रहा है। उससे नशा आसानी से उपलब्ध होने पर नशा करने वालों की संख्या बढ़ रही है और चोरी की घटनाएं भी अधिक होने लगी हैं। </p>
<p>नारकोटिक्स विभाग की ओर से पिछले काफी समय से लगातार कार्रवाई की जा रही है। जिनमें बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ जब्त करने के साथ ही आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया है। शहर में नशे का कारोबार करने वालों पर विभाग एनडीपीएस एक्ट में कार्रवाई तो कर सकता है लेकिन अभी तक ऐसी कार्रवाई नहीं की है।  चोरियों पर तो पुलिस कार्रवाई करती है। जबकि नशे का कारोबार व उसका उपयोग करने वालों पर विभाग कार्रवाई कर सकता है। विभाग का प्रयास है कि नशे का कारोबार करने वालों का नेटवर्क ही ध्वस्त किया जाए। जिससे कोटा शहर में नशा नहीं आए और शहर को नशा मुक्त बनाया जा सके। इस दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। नशा करने वालों को पकड़ने  पर उनकी आसानी से जमानत होने पर वे फिर से इसी काम में लग जाते हैं। इस पर रोक लगाने के लिए उनका पुनर्वास करना और नशा मुक्ति केन्द्रों में उनका नशा छुड़ाने का काम करना आवश्यक है। <br /><strong>- नरेश बुंदेल, उप नारकोटिक्स आयुक्त केन्द्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो, कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 17 May 2025 16:51:53 +0530</pubDate>
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                <title>चोरी के लिए जान जोखिम में डाल रहे नशेड़ी</title>
                                    <description><![CDATA[तीसरी आंख की नजर में आए अधिकतर चोर।  ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/drug-addicts-risking-their-lives-for-theft/article-80333"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नशा करने वालों व चोरों के लिए सड़क पर पड़ी निर्माण सामग्री से लोहे के सरिये चुराना आसान है। घर के अंदर से पानी का मीटर चोरी करना भी आसान है। दुकान के बाहर से दिन दहाड़े बाइक चोरी करना भी चोरों के लिए आसान है। लेकिन चालू लाइट में बिजली के खम्बे से सजावटी लाइटें और वायरिंग चोरी करना मुश्किल ही नहीं जानलेवा भी हो सकता है। कोटा शहर में अब चोरी के लिए नशा करने वाले अपनी जान तक जोखिम में डाल रहे हैं। शहर में लोहे की रैलिंग, पानी के मीटर, सीवरेज के चैम्बर व वाहन और डस्टबीन तो काफी समय से चोरी हो रहे हैं। नगर विकास न्यास व नगर निगम की ओर से बार-बार उन्हें सही कराया जा रहा है और चोर उन्हें निशाना बना रहे हैं। वहीं अब तो चोर बिजली के खम्बों से महंगी सजावटी लाइटें और बिजली के तार तक चोरी करने लगे हैं। चालू लाइट में और दिन दहाड़े व्यस्त व सुनसान रोड पर इस तरह की घटनाएं हो रही हैं। जानकारों के अनुसार बिजली के खम्बों में करंट रहता है। चालू लाइन में इस तरह से लाइट व तार की चोरी करने से से चोरी करने वालों को करंट लगने व जान जाने तक का खतरा रहता है। लेकिन चोर इस होशियारी से काम कर रहे हैं कि किसो भी भनक  तक नहीं लग रही। </p>
<p><strong>लाइटों पर किए लाखों खर्च, होने लगी दुर्दशा</strong><br />नगर विकास न्यास की ओर से शहर में करवाए गए विकास व सौन्दर्यी करण के तहत मेन रोड पर महंगी सजावटी लाइटें लगाई हैं। जिनकी रोशनी अच्छी होने के साथ ही वे दिखने में भी आकर्षक है। फिर चाहे वह कोटड़ी-छावनी मेन  रोड हो या सेवन वंडर्स रोड। स्टेशन का मुख्य मार्ग हो या नए कोटा का क्षेत्र। यहां तक कि चम्बल रिवर फ्रंट के आस-पास दिन के समय सुनसान रोड होने पर वहां से भी लाइटें चोरी की जा रही हैं।  लेकिन हालत यह है कि महंगी लाइटें होने के बाद भी रात के समय अधिकतर जगह पर अंधेरा छाया रहता है। अधिकतर लाइटें दुर्दशा की शिकार हो गई। कई खम्बों से तो लाइटें गायब हो गई। कई जगह पर टूट गई। कहीं तार गायब है तो कहीं से डीपी। धीरे-धीरे और एक-एक कर अधिकतर जगह की लाइटें चोरी होने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। </p>
<p><strong>दो से तीन लोग दे रहे अंजाम</strong><br />शहर में बिजली के खम्बों से लाइटें व वायरिंग चोरी करने की घटनाओं को एक  बार में दो से तीन जने अंजाम दे रहे हैं। दो-तीन जने मुंह पर  कपड़ा ढककर आते हैं। इधर-उधर देखते हैं। आस-पास कोई नजर नहीं आने  पर बोखौफ होकर खम्बे के पास जाकर उनमें से लाइटें खोलने व तार चोरी करने की वारदात को अंजाम दे रहे हैं। पहली बार में सफल नहीं होने पर दो से तीन बार में प्रयास कर अपने मंसूबों में कामयाब हो रहे हैं। </p>
<p><strong>सीसीटीवी कमरे में कैद हुई अधिकतर घटनाएं</strong><br />शहर  में न्यास की सम्पति को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं के बारे में जब अधिकारियों ने जानकारी जुटाई। जिन जगह पर इस तरह की घटनाएं हो रही हैं। वहां आस-पास लगे सीसीटीवी  कैमरे खंगाले तो उनमें अधिकतर घटनाएं कैद हो गई।  मेन रोड पर राह चलते चोर इतनी आसानी से खम्बों से लाइटें चोरी करते हुए नजर आ रहे हैं कि कोई सोच भी नहीं सकता। राह चलते लोग तो उन पर ध्यान भी नहीं देते। ध्यान जाता भी है तो बिजली विभाग या न्यास का कर्मचारी समझकर कोई न तो टोकता है और न ही उन्हें रोकता है।  न्यास अधिकारियों ने नए कोटा क्षेत्र में घटोत्कच्छ चौराहे के आस-पास, जेडीबी से बड़ तिराहा रोड, चम्बल रिवर फ्रंट के आस-पास समेत कई जगह से इस तरह की घटनाओं के फुटेज  लिए हैं। जिनमें चोर व नशेड़ी चोरी करते हुए व उनके तरीके कैद हुए हैं। यहां तक कि कुछ जगह पर तो चोरों को लोगों ने  वायरिंग के साथ पकड़कर थानों के सुपुर्द भी किया है।  सूत्रों के अनुसार अब पुलिस और प्रशासन सतर्क हुआ है। अधिकतर चोरों को सर्विलांस पर लेकर तीसरी आंख के आधार पर पकड़ने का काम किया जा रहा है। </p>
<p><strong>घटनाएं बढ़ी तो हरकत में आया  न्यास प्रशासन</strong><br />शहर में सुंदरता को ग्रहण लगाने व आए दिन हो रही चोरियों पर पहले तो नगर विकास न्यास प्रशासन ने भी ध्यान नहीं दिया। संवेदक के माध्यम से लाइटों को बार-बार सही करवाने व नया लगवा दिया गया। लेकिन इस तरह की घटनाएं अधिक होने व बढ़ने पर न्यास प्रशासन हरकत में आया। उन्होंने इस तरह की घटनाओं की जानकारी जुटाई तो अधिकारी भी अचम्भित हो गए। बिजली के खम्बों का रखरखाव करने वाली संवेदक फर्म ने पूर्व में महावीर नगर थाने में भी इस संबंध में रिपोर्ट दी थी। </p>
<p><strong>एसपी को पत्र लिखकर दी जानकारी</strong><br />शहर में सरकारी सम्पति की चोरी करने के मामले लगातार हो रहे हैं। पिछले कुछ समय से तो बिजली के खम्बों से लाइटें व  वायरिंग तक चोरी होने लगे। इसकी जानकारी के लिए सीसीटीवी खंगाले तो उनमें चोरी की घटनाएं होती साफ नजर आ रही हैं। उन फुटेज के आधार पर शहर पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखा है। जिसमें इस तरह की चोरी की घटनाओं पर निगरानी रखने व चोरों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा गया है। <br /><strong>- कुशल कोठारी, सचिव नगर विकास न्यास </strong></p>
<p>अभी तक इस तरह की चोरी से संबंधित कोई रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है। न्यास ने एसपी को पत्र लिखा है तो उसके आधार पर सभी थानों को निर्देश प्राप्त हो जाएंगे। पुलिस ने रात में भी गश्त बढ़ाई है। अब इस तरह से संदिग्ध नजर आने वालों पर सख्ती की जाएगी। <br /><strong>- राजेश सोनी, उप अधीषकपुलिस वृत्त</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Mon, 03 Jun 2024 18:09:30 +0530</pubDate>
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                <title>शहर की सुंदरता पर ग्रहण लगा रहे नशेड़ी व चोर </title>
                                    <description><![CDATA[न्यास ने लाखों रुपए खर्च कर सड़क किनारे लगवाए थे। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/drug-addicts-and-thieves-are-spoiling-the-beauty-of-the-city/article-80110"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/shehr-ki-sundarta-pr-grahan-lga-rhe-nashedi-va-chor...kota-news-01-06-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। पर्यटन की दृष्टि से विकसित किए गए  कोटा शहर की सुंदरता पर इन दिनों नशेड़ी व चोर ग्रहण लगा रहे हैं।  मेन रोड पर सड़क किनारे लगाई गई बैंच व स्मार्ट डस्टबीन तक चोरी हो गए हैं।  पिछली कांग्रेस सरकार में नगर विकास न्यास की ओर से शहर में करवाए गए विकास व सौन्दर्यीकरण कार्य के तहत लाखों रुपए खर्च सड़क किनारे लोगों के बैठने के लिए बैंच व कचरा डालने के लिए स्मार्ट डस्टबीन लगाए थे। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत विकसित की गई डिवाइडर रोड के किनारे व फुटपाथ पर राह चलते लोगों के थकने पर उनके बैठने के लिए लकड़ी की बैंच लगाई थी। जमीन  में लोहे के एंगल से मजबूती से गाड़ कर उन बैंचों को लगाया गया था। पीछे सहारा भी दिया गया था। जिससे दोनों तरफ से लोग बैठ सकें। लेकिन लगने के कुछ समय बाद ही इनकी दशा बिगड़ने लगी। वर्तमान में अधिकतर बैंचों के पाटे व लोहे के एंगल तक चोरी हो गए हैं। यहां लगाई थी बैंच: नगर विकास न्यास की ओर से शहर में मेन रोड पर किनारे की तरफ इस तरह की बैंच लगाई थी। सर्किट हाउस से राजकीय महाविद्यालय होते हुए जेडीबी के पास से तालाब के किनारे तक सड़क के दोनों तरफ थोड़ी-थोड़ी दूरी पर कई बैंच लगाई गई थी। इसी तरह से इन बैंच को शहर के अन्य स्थानों पर भी लगाया गया था।  लेकिन हालत यह है कि मेन रोड पर लगी होने के बाद भी सर्किट हाउस के पास से लेकर अंटाघर तक और किशोर सागर तालाब के किनारे तक से बैंचों के पाटे व एंगल गायब हो गए हैं। शुरुआती में यह एक दो बैंचों के हुए थे। लेकिन अब तो अधिकतर की हालत की दशा बिगड़ चुकी है। कई बैंच तो पूरी ही गायब हो गई। </p>
<p><strong>निगम के डस्टबीन और रैलिंग तक चोरी</strong><br />चोर इतने अधिक बेखौफ हैं कि उन्हें न तो पकड़े जाने का डर है और न ही पिटाई होने का। यही काण है कि नगर निगम कोटा दक्षिण की ओर से भी शहर में कई जगह पर सड़क किनारे स्टील के स्मार्ट डस्टबीन लगाए थे। करीब 35 हजार का एक डस्टबीन था और ऐसे 100 डस्टीन लगाए थे। लेकिन उनमें से अधिकतर के तो डिब्बे ही गायब हो गए। सिर्फ उनके स्टैंड बचे हैं। वहीं कई जगह से तो पूरे डस्टबीन ही गायब हो गए। जनता के लाखों रुपए की बर्बादी तो हुई और चोरों व नशेड़ियों की पौबाहर हो रही है। छावनी चौराहा, कोटडीे चौराहा, घोड़ा चौराहा और निगम क्षेत्र के अन्य स्थानों पर डस्टबीन की यही हालत है। इसी तरह से शहर में करवाए गए विकास कार्य के तहत लगाई गई लोहे की रैलिंग तक टुकड़ों में काट-काटकर चोरी की जा रही है।  सीएडी मेन रोड पर अभय कमांड सेंटर के सामने सड़क के बीच डिवाइडर पर लगाई रैलिंग हो या घोड़ा चौराहे के पास हरितिमा पट्टी की रैलिंग। सभी जगह से रैलिंग के आधे-आधे हिस्से चोरी हो चुके हैं। ऐेस में नगर निगम कोटा उत्तर द्वारा भी शहर में स्मार्ट डस्टबीन लगानी की तैयारी की जा रही है। जिसके टेंडर किए गए हैं। हालांकि वे लोकसभा चुनाव की आचार संहिता के कारण अटके हुए हैं। यदि शहर में डस्टबीन लगे तो उनकी दशा भी ऐसी ही होने वाली है। </p>
<p><strong>पुलिस व प्रशासन के साथ आमजन की भी जिम्मेदारी</strong><br />शहर वासियों का कहना है कि स्मैकची व चोरों की हालत इतनी अधिक खराब है कि वे घरों में से नल को टोटियां, साइकिल, मीटर, सीवरेज के चैम्बर तक चोरी कर रहे हैं। ऐसे में उन्हें जो भी कीमती चीज दिखती है। वह नशे की एक पुड़िया के लिए उसे चोरी कर बेच देते हैं। निर्माण कार्य के लिए सड़क पर रखे लोहे के सरिये हों या फिर अन्य कोई सामान।  लोगों का कहना है कि शहर में जगह-जगह पर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। ऐसे में पुलिस और प्रशासन को चोरी करने वालों पर निगाह रखकर उन्हें पकड़ना चाहिए। वहीं आमजन की भी जिम्मेदारी है कि यदि कोई संदिग्ध व्यक्ति चोरी करता पाया जाए तो उसे रोकें व टोंके। या फिर पुलिस को सूचना दी। जिससे इन घटनाओं पर रोक या कमी लाई जा सके। </p>
<p><strong>यही हालत डस्टबीन की</strong><br />राह चलते लोगों द्वारा कचरा सड़क पर नहीं डालकर कचरा पात्र में डालने के लिए न्यास की ओर से तालाब के किनारे समेत कई अन्य स्थानों पर स्मार्ट व मजबूत डस्टबीन लगाए थे। उनके चोरी होने व टूटने की संभावना को देखते हुए उन्हें लोहे की चैन से बांधकर ताला तक लगाया हुआ था। लेकिन नशेड़ी व चोरों के हौंसले इतने अधिक बुलंद हैं कि व्यस्त रोड होने के बाद भी वहां से बेश कीमती डस्टबीन तक चोरी कर ले गए। जिसकी भनक तक किसी को नहीं लगी। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />नगर विकास न्यास की ओर से शहर को सुंदर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। बाहर से आने वालों को या राह चलते लोगों को बैठने के लिए आराम दायक बैंच मिल सके। उसके लिए लाखों रुपए खर्च कर सड़क किनारे बैंच लगाई थी। कचरा सड़क पर नहीं डले उसके लिए डस्टबीन लगाए थे। लेकिन नशेड़ी व चोर उन सुंदरता को बिगाड़ रहे हैं। ऐसी घटनाएं कई जगह होने पर एसपी को पत्र लिखा है। जिसमें सीसीटीवी कैमरों चैक करने और पुलिस गश्त के दौरान उन पर निगरानी  रखने को कहा गया है। <br /><strong>- कुशल कोठारी, सचिव नगर विकास न्यास</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Jun 2024 15:24:48 +0530</pubDate>
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                <title>चोरों व नशेड़ियों के हौंसले बुलंद, पैनल बॉक्स किए खोखले</title>
                                    <description><![CDATA[शहर में अधिकतर पैनल बॉक्स अधूरे ही मिलेंगे। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-courage-of-thieves-and-drug-addicts-is-high--panel-boxes-are-made-hollow/article-59521"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/choro-va-nashediyo-k-hosle-buland,-penal-box-kiye-khokhle...kota-news-14-10-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में चोरों व नशा करने वालों के हौंसले इतने अधिक बुलंद हैं कि उन्होंने मुख्य मार्गों पर लगे बिजली के पैनल बॉक्स तक खोखले कर दिए हैं। कहीं उनके ढक्कन चोरी कर ले गए तो कहीं पीतल। यहां तक कि कई जगह से तो पूरे बॉक्स ही खोलकर ले गए। चोर व नशा करने वालों के लिए एक 50 रुपए की पुड़िया का इंतजाम ही बड़ा काम है। इसके लिए उन्हें जो भी चीज नजर आती है वे उसे ही उठाकर व चोरी कर ले जाते हैं और सस्ते में बेचकर नशे का इंतजाम कर रहे हैं। इसके लिए फिर चाहे घरों से नल की टोटी चोरी करने पड़े या साइकिल। यहां तक कि अब तो बिजली के पैनल बॉक्स तक से चोरी होने लगी है। शहर में जगह-जगह पर रोड लाइटों के लिए पैनल बॉक्स लगाए गए हैं। ट्रांसफामँर से खम्बों तक बिजली पहुंचाने के लिए अंडरग्राउंड केबल कनेक् शन जोड़ने का काम पैनल बॉक्स करते हैं। शहर में सभी जगहों पर इस तरह से पैनल बॉक्स जरा-जरा सी दूरी पर लगे हुए हैं। लेकिन अधिकतर बॉक्स की हालत ऐसी हो गई है कि कोई भी पूरा नजर नहीं आएगा। किशोर सागर तालाब की पाल हो या सरोवर टॉकीज के सामने, गुमानपुरा का मेन बाजार हो या नयापुरा का क्षेत्र। हर जगह पर लगे पैनल बॉक्स अधूरे ही मिलेंगे। किशोर सागर तालाब के चारों तरफ लगे पैनल बॉक्स में से अधिकतर के तो ढक्कन चोरी हो गए हैं। किसी के अंदर से पीतल चोरी हो गया है। यहां तक कि न्यू क्लॉथ मार्केट व सरोवर टॉकीज के सामने तालाब के किनारे से तो पूरे पैनल बॉक्स ही गायब हो चुके हैं। गुमानपुरा में इंदिरा गांधी तिराहे से प्रतिमा स्थल तक नई रोड लाइटें लगाई गई थी। उनके बॉक्स दुकानों के आगे जमीन से कुछ ही ऊपर लगाए गए हैं। भीड़भाड़ भरा मेन बाजार होने के बाद भी वहां से उन पैनल बॉक्स को गंजा कर दिया गया है। </p>
<p><strong>हादसे व करंट का खतरा</strong><br />पैनल बॉक्स में बिजली का करंट रहता है। इस कारण से उसे ढककर व कवर करके रखा जाता है। लेकिन चोरों व नशा करने वालों ने उन तक को नहीं छोड़ा। खतरनाक पैनल बॉक्स से चोरी करते समय कई चोर व नशेशी भी करंट की चपेट में आ चुके  हैं। वहीं उधर से गुजरने वालों के लिए भी वे बॉक्स हादसे व खतरे का कारण बन रहे हैं। </p>
<p><strong>जनता कहिन</strong><br />गुमानपुरा निवासी संजय शर्मा ने बताया कि सड़क किनारे दुकानों के सामने लगे अधिकतर पैनल बॉक्स के ढक्कन चोरी हो गए हैं। जिससे वहां दुकानदकार व ग्राहकों के वाहन खड़े होने व लोगों’ के आने-जाने का सिलसिला दिनभर चलता है। ऐसे में बरसात के समय तो करंट का खतरा बना हुआ ही था। सामान्य दिनों में भी यह खतरनाक ही है। इन्हें ढकना जरूरी है वरना कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। सिंधी कॉलोनी निवासी रमेश मंगनानी का कहना है कि चोरों व नशा करने वालों पर पुलिस को कड़ी नजर रखनी होगी। नशा करने वालों के लिए तो चोरी करना आसान है लेकिन उसका नुकसान आमजन को भुगतना पड़ रहा है। बिजली के बॉक्स में करंट होने से यह अधिक खतरनाक है। कई बार खुले पैनल बॉक्स की चपेट में आने से लोगों व विशेष रूप से बच्चों की मौत तक हो चुकी है। इन्हें समय रहते ढकना और चोरों पर निगाह रखना आवश्यक है। </p>
<p><strong>अफसर कहिन</strong><br />बिजली कम्पनी के अधिकारियों का कहना है कि रोड लाइट के पैनल बॉक्स नगर निगम व नगर विकास न्यास के अधीन आते हैंÞ। चोर तो बड़े ट्रांसफार्मर से पीतल चोरी कर ले जाते हैं। बाजार ें वह मात्र 10 रुपए में बिकता है लेकिन उससे करीब एक  लाख रुपए का डीजल बह जाता है। ऐसा करते समय कई चोर करंट की चपेट में भी आ चुके हैं। वहीं नगर निगम के एक्सईएन सचिन यादव का  कहना है कि बिजली के बैनल बॉक्स जगह-जगह पर लगे होते हैं। वैसेी तो उनके ढक्कन मजबूती से लगाए जाते हैं लेकिन चोरों के आगे वे सब बेकार है। हर जगह पर निगरानी रखना भी संभव नहीं है। फिर भी जहां ढक्कन गायब हैंÞ या चोरी हो गए हैं उन्हें दिखवाकर सही करवाने का प्रयास करेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 Oct 2023 17:24:39 +0530</pubDate>
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                <title>खाली पार्किंग बनी नशेड़ियों का अड्डा</title>
                                    <description><![CDATA[पार्किंग चालू नहीं होने से इस शौचालय का उपयोग तो नहीं हुआ लेकिन दुर्दशा जरूर हो रही है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/empty-parking-became-a-den-of-drug-addicts/article-55540"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/khali-parking-bni-nshediyo-ka-adda...kota-news-26-08-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर विकास न्यास की ओर से आमजन के साथ ही मरीजों के परिजनों की सुविधा के लिए लाखों रुपए खर्च कर पार्किंग बनाई थी। लेकिन देखरेख अभी तक उसका उपयोग नहीं होने से वह नशेडियों का अड्डा बनी हुई है। साथ ही वहां बने शौचालय की दुर्दशा हो रही है।  जे.के. लोन अस्पताल के सामने सड़क के पार न्यास ने 27 दुकानें बनाई है। उन दुकानों के पीछे काफी लम्बी-चौड़ी जगह पर पार्किंग बनाई गई है। जिससे अस्पताल आने वाले मरीजों के तीमारदार व आमजन यहां अपने वाहन खड़े कर सकें। लेकिन इस पार्किंग को बनने के बाद से अभी तक इसका उपयोग नहीं हो सका है। जिससे यहां रात के समय अंधेरा होते ही नशेडियों का जमघट लग जाता है। स्थानीय लोगों ने बताया कि इस जगह पर पार्किंग की सुविधा तो नहीं मिली लेकिन नशेड़ियों के कारण परेशानी हो गई है। अंधेरा होते ही यहां कई लोग नशा करने आ जाते हैं। स्मैक का नशा और इंजेक्शन तक का नशा करते हैं। जिसका अंदाजा वहां पड़े इंजेक्शन की निडिल से लगया जा सकता है। </p>
<p><strong>हो रही दुर्दशा</strong><br />पार्किंग स्थल पर शौचालय का निर्माण भी किया गया है। जिससे वहां काम करने वाले कर्मचारियों के अलावा आमजन भी उनका उपयोग कर सके। लेकिन पार्किंग चालू नहीं होने से इस शौचालय का उपयोग तो नहीं हुआ लेकिन दुर्दशा जरूर हो रही है। स्थानीय दुकानदारों ने बताया कि लोग यहां से शौचालय की  सीट तोड़ दी। पाइप व अन्य सामान चोरी कर ले गए। बिजली का बोर्ड तक तोड़ दिया। यहां तक कि दरवाजों तक को तोड़ दिया है। जिससे रात के समय यहां असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है। </p>
<p><strong>सुविधा है तो उपयोग हो</strong><br />स्थानीय दुकानदारों ने बताया कि लाखों रुपए खर्च कर सुविधा की गई है तो उसका उपयोग भी होना चाहिए। लम्बे समय तक उपयोग नहीं होने से वह पूरी तरह से जर्जर हो जाएगी। जिससे फिर से उपयोग करने के समय उसे सही करने पर खर्चा किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार दुकानों के आवंटन में विवाद की स्थिति बनने के कारण न तो उनका उपयोग हो रहा है और न ही पार्किंग का। इधर नगर विकास न्यास के अधिकारियों का कहना है कि पार्किंग व शौचालय आमजन की सुविधा के लिए बनाए गए हैं। उन्हें नुकसान पहुंचाकर लोग ही उसे बिगाड़ रहे हैं। यदि ऐसा हो रहा है तो उसे दिखवाया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 26 Aug 2023 17:08:50 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>उम्मेदगंज पक्षी विहार में पेड़ों पर चली कुल्हाड़ी</title>
                                    <description><![CDATA[उम्मेदगंज पक्षी विहार में गत माह असमाजिक तत्वों ने हरे पेड़ों पर जमकर कुल्हाड़ियां बरसाई। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/ax-on-trees-in-umaidganj-bird-sanctuary/article-47825"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/ummedganj-pakshi-vihar-me-pedo-pr-chali-kulhadi...kota-news-05-06-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर से 8 किमी दूर उम्मेदगंज पक्षी विहार अपनी बर्बादी पर आंसू बहा रहा है। जहां पक्षियों का खूबसूरत संसार बसता था, आज वहां नशेड़ियों की महफिलें सजती हैं। परिंदों का आशियाना उजाड़ा जा रहा और वन्यजीव अधिकारी आंखें मूंदे पड़े हैं। लापरवाही का आलम यह है कि गत दिनों असमाजिक तत्वों ने पक्षी विहार के हरे पेड़ काट दिए और जंगल में आग लगा दी। इसके बावजूद जिम्मेदारों की कुंभकरर्णीय नींद नहीं टूटी। नतीजन, पेड़-पौधे जलकर खाक हो गए। घटना के 15 दिन बाद भी न डीएफओ मौके पर पहुंचे और न ही एसीएफ ने सुध ली। हैरानी की बात यह है, एसीएफ को न तो घटना की जानकारी है और न ही अपने क्षेत्र की। वह अपने ही क्षेत्र को टेरिटोरियल का बताने से भी नहीं चूके। जबकि, वन्यजीव विभाग के ही रैंजर ने यह क्षेत्र उम्मेदगंज पक्षी विहार में होना स्वीकार किया। </p>
<p><strong>4 साल से सारस ने नहीं बनाया घौंसला</strong><br />बर्ड्स रिर्सचर अंशू शर्मा बतातीं है, उम्मेदगंज पक्षी विहार में पिछले चार साल में सारस ने घौंसला नहीं बनाया। पहले मई से जून तक तालाब के किनारे 8 से 10 सारस ग्रुप में भोजन की तलाश में आते थे, जबकि सारस के तीन जोड़े पक्षी विहार में ही रहते थे। लेकिन, श्वानों के हमले के कारण कुछ अकाल मौत का शिकार हो गए तो शेष यहां से चले गए। वर्ष 2019 के बाद से ही सारस यहां से पलायन कर गए। वर्ष 2020 में भोजन की तलाश में आए सारस जोड़े पर श्वानों ने हमला कर दिया था। जिसमें एक सारस पंख कटने से जख्मी हो गया था। वह करीब एक माह तक उड़ान नहीं भर पाया। बाद में करीब डेढ़ माह बाद जब कुदरती रूप से पंख आए तो वह उड़कर चला गया। वर्तमान में उम्मेदगंज पक्षी विहार में एक भी सारस नहीं है। </p>
<p><strong>सफेदे के पेड़ों पर चली कुल्हाड़ियां</strong><br />उम्मेदगंज पक्षी विहार में गत माह असमाजिक तत्वों ने हरे पेड़ों पर जमकर कुल्हाड़ियां बरसाई। सफेदे सहित आधा दर्जन अन्य पेड़ काट दिए। वहीं, झाड़ियों में आग लगा दी। जिससे आसपास के पेड़-पौधे जलकर खाक हो गए। मधुमक्खियों के छत्ते जमीन पर बिखरे पड़े थे। दूर-दूर तक पेड़-पौधों के जलने के काले निशान थे। वहीं, कई जगहों पर सूखे पेड़ भी काटे हुए थे। घटना को करीब 15 दिन बीत चुके हैं। इसके बावजूद वन्यजीव डीएफओ व एसीएफ को मामले की भनक तक नहीं लगना काम के प्रति लापरवाही दर्शाती है।</p>
<p><strong>वॉच टावर में सजती है नशेड़ियों की महफिल</strong><br />नेचर प्रमोटर एएच जैदी ने बताया कि गत माह 21 मई को अपने कुछ स्टूडेंट्स के साथ उम्मेदगंज पक्षी विहार पहुंचे थे। वहां के हालात बेहद चौंकाने वाले थे। कई जगह पेड़ कटे हुए थे तो कई जगहों पर आगजनी के निशान थे। यहां वॉच टावर, बड़ तालाब सहित कई जगहों पर शराब व बीयर की खाली बोतलें बिखरी पड़ी थी। वहीं, कुछ मृत पक्षियों के अवशेष भी मिले, जो संभवत: श्वानों के हमले में अकाल मौत का शिकार होना प्रतित होते हैं। </p>
<p><strong>खत्म हो रहा पक्षियों का रहवास</strong><br />जैदी के अनुसार, पूर्व में उम्मेदगंज में बड़ी संख्या में देशी-विदेशी पक्षी नजर आते थे, लेकिन अब इनकी संख्या न के बराबर रह गई है। वन्यजीव विभाग द्वारा पक्षियों के संरक्षण पर ध्यान नहीं दिया जा रहा और न ही विकास कार्य करवाए जा रहे। विभाग की अनदेखी के कारण पक्षियों का बसेरा खत्म होता जा रहा है। पहले नहर बंद होने के बाद भी उम्मेदगंज तालाब पर एक हजार से अधिक पक्षी दिखाई देते थे लेकिन आज 150 से 200 ही नजर आ रहे हैं। यहां 70 प्रजातियों के पक्षियों की मौजूदगी रहती थी लेकिन वर्तमान में पेड़-पौधों की कटाई, मछली शिकार व आवारा श्वानों का बढ़ते हमले से पक्षी यहां से माइग्रेट हो गए। जबकि, स्पोटेड ओवल व तोतों के लिए वंश वृद्धी का यह सबसे उपयुक्त स्थान था। पेड़ों पर इनकी आबादी बसती थी, जो अब देखने को नहीं मिलती।</p>
<p><strong>नहीं होती मॉनिटरिंग</strong><br />वन्यजीव विभाग ने उम्मेदगंज पक्षी विहार की सुरक्षा के नाम पर एक वन रक्षक तैनात कर रखा है। लेकिन, पक्षी विहार का क्षेत्रफल अधिक होने से मॉनिटरिंग नहीं हो पाती। नाम न छापने की शर्त पर एक वनकर्मी ने बताया कि वन्यजीव विभाग ने लंबे समय से न तो पक्षी विहार में विकास कार्य करवाए और न ही पक्षियों के संरक्षण व सुरक्षा को लेकर कोई काम किए। इतना ही नहीं, अधिकारियों को पेड़ काटे जाने व आग लगाने की घटना तक की जानकारी नहीं है। हालात यह हैं कि विभाग के अधिकारी पक्षी विहार के निरीक्षण तक को नहीं आते।</p>
<p><strong>2012 में घोषित हुआ था पक्षी कंजरवेशन रिजर्व </strong><br />उन्होंने बताया कि नवम्बर 2012 में उम्मेदगंज के 272.47 हैक्टेयर को पक्षी कंजरवेशन रिजर्व घोषित किया गया था। यह हाड़ौती का एक मात्र संरक्षित क्षेत्र होने के बावजूद दुर्दशा का शिकार हो रहा हैं। हालांकि, विभाग ने पक्षी विहार के नाम पर यहां एक वॉच टॉवर, गार्ड चौकी और 540 मीटर दीवार ही बनाई है। लेकिन, यहां आने वाले सैलानियों के लिए बैंच से लेकर पीने के पानी की भी व्यवस्था नहीं है। निगरानी के लिए यहां महज एक फॉरेस्ट गार्ड तैनात है, जो  पक्षी विहार के क्षेत्रफल के लिहाज से नाकाफी है। </p>
<p><strong>तितलियों का बसेरा भी हुआ खत्म</strong><br />बर्ड्स रिर्सचर हर्षित शर्मा बताते हैं, उम्मेदगंज में पक्षियों के साथ तितलियों की विभिन्न प्रजातियां देखने को मिलती थी। यहां उनका रहवास था, जो मानवीय दखल के कारण खत्म हो गई है, अब पक्षी विहार में तितलियां नजर नहीं आती। वहीं, सारस का आशियाना भी उजड़ गया। यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो उम्मेदगंज नाम का ही पक्षी विहार रह जाएगा। </p>
<p><strong>इन पक्षियों का रहता है बसेरा</strong><br />उम्मेदगंज पक्षी विहार में पेंटेड स्टोर्क, ओपन बिल स्टोर्क, वूली नेक स्टोर्क, सारस, ग्लोसी व व्हाइट आईबीस, स्पून बिल, इग्रेट, इंडियन रोलर वाइट, किंगफिशर, कॉमन किंग फिशर, गोल्डन ओरिओल, कोयल, कोरमोरेंट, वुड पैकर, ग्रीन बीईटर सहित विभिन्न प्रजातियों के कई पक्षियों की मौजूदी रहती है। </p>
<p><strong>यह एरिया हमारा नहीं टेरिटोरियल का है</strong><br />उम्मेदगंज वनभूमि दो हिस्सों में वन्यजीव और टेरिटोरियल के बीच बंटी है। चौकी के पीछे 70 मीटर और चौकी से ऊपर व साइड की ओर 50 से 60 मीटर का हिस्सा वन्यजीव विभाग में आता है। उम्मेदगंज के 272.47 हैक्टेयर को पक्षी विहार घोषित किया गया है। इसमें 52 हैक्टेयर तो तालाब है। वॉच टावर व आसपास का क्षेत्र भी टेरिटोरियल में ही आता है। वहीं, उम्मेदगंज में पेड़ काटे जाने व आगजनी की मुझे कोई जानकारी नहीं है। <br /><strong>-राजबिहारी मित्तल, एसीएफ वन्यजीव विभाग</strong></p>
<p><strong>यह क्षेत्र वन्यजीव में आता है </strong><br />वॉच टावर, रियासतकालीन महल व तालाब उम्मेदगंज पक्षी विहार का हिस्सा है, जो वन्यजीव विभाग के हिस्से में आता है। हमारा इलाका ढाड़देवी रोड स्थित देवनारायण मंदिर से सीधे हाथ पर आने वाला क्षेत्र व ढाड़देवी से चरण चौकी तक सीधे हाथ पर आने वाली वनभूमि टेरिटोरियल में आती है। जबकि, इन लॉकेशन के उल्टे हाथ पर आने वाला क्षेत्र वन्यजीव विभाग में आता है। ऐसे में पेड़ काटे जाने वाला क्षेत्र टेरिटोरियल में नहीं आता। <br /><strong>-जयराम पांडे्य, डीएफओ, वनमंडल कोटा</strong></p>
<p><strong>यह क्षेत्र हमारे दायरे में है, पेड़ नहीं टहनियां कटी थी</strong><br />उम्मेदगंज में बना वॉच टावर व रियासतकालीन तालाब किनारे वाला क्षेत्र और दूसरी तरफ आने वाले खेत के बीच का हिस्सा वन्यजीव विभाग में आता है। यह उम्मेदगंज पक्षी विहार कहलाता है। यहां पेड़ नहीं सफेदे की टहनियां काटी गई थी। <br /><strong>-दुर्गेश कहार, रैंजर अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क, वन्यजीव विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 05 Jun 2023 14:36:20 +0530</pubDate>
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                <title>अतिक्रमण से मुक्त मकानों पर नशेडियों का कब्जा </title>
                                    <description><![CDATA[नगर निगम के अधिकारियों की अनदेखी के चलते  इस कॉलोनी के मकानों पर तो नशेड़ियों का कब्जा हो ही रहा है। साथ ही इस कॉलोनी को लोगों ने कचरा घर बना दिया है। जर्जर मकानों में हर तरफ नशे का सामान बिखरा पड़ा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/encroachment-free-houses-occupied-by-drug-addicts/article-32834"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-12/atikraman-se-mukt-makano-mei-nashediyo-ka-kabjaa...kota-news...20.12.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । नगर निगम की छावनी स्थित कॉलोनी के पुराने मकानों को निगम ने अतिक्रमण से तो मुक्त  करवा लिया। लेकिन उसके बाद से उन मकानों की सुध नहीं ली जिससे अब उन मकानों पर नशेड़ियों का कब्जा हो गया है। कॉलोनी कचरा घर बनकर रह गई है और सूअरों का जमावड़ा रहने लगा है। जिससे उस क्षेत्र में रहने वाले लोगों की परेशानी बढ़ गई है। नगर निगम कोटा दक्षिण क्षेत्र स्थित छावनी में निगम की कॉलोनी में दो तरह के मकान बने हुए हैं। एक तरह के मकानों में तो कर्मचारी रह रहे हैं। जबकि उनके पास ही दूसरे मकान हैं जिनमें पहले तो निगम के कर्मचारी रहते थे। लेकिन उनके सेवानिवृत्त होने व स्थानांतरण होने के बाद वहां कुछ लोगों ने अतिक्रमण कर लिया था। काफी समय तक अतिक्रमण रहने के बाद निगम की तत्कालीन आयुक्त कीर्ति राठौड़ ने प्रयास कर उन मकानों को अतिक्रमण से मुक्त कराया था। सभी मकानों को खाली करवाकर उनमें ताले लगवा दिए थे। लेकिन उसके बाद भी कुछ लोगों ने ताले तोड़कर अतिक्रमण कर लिया था। </p>
<p><strong>कचरा घर व सूअरों का जमावड़ा</strong><br />नगर निगम के अधिकारियों की अनदेखी के चलते  इस कॉलोनी के मकानों पर तो नशेड़ियों का कब्जा हो ही रहा है। साथ ही इस कॉलोनी को लोगों ने कचरा घर बना दिया है। कुछ लोग  व सफाई कर्मचारी यहां कचरा डालने लगे हैं। जिससे कचरे का ढेर लगा हुआ है। साथ ही उस कचरे पर सूअरों का जमावड़ा लगा रहता है। </p>
<p><strong>हर तरफ नशे का सामान, बिस्तर भी मिले</strong><br />नगर निगम के जर्जर मकानों में हर तरफ नशे का सामान बिखरा पड़ा है। स्मैक की पुड़िया, नशे के इंजेक् शन,माचिस और नशीले पदार्थों की  खाली पन्नियों का ढेर लगा हुआ है। जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है यहां कितने बड़े स्तर पर नशा करने वाले लोग यहां रह रहे हैं। हालत यह है कि नशा करने वाले कई लोग तो वहां रात को रहने भी लगे हैं। इसके लिए उन्होंने गद्दा तकिया व बिस्तर तक लाकर रखे हुए हैं। लोगों का कहना है कि यहां नशे के अलावा अन्य अनाधिकृत काम भी हो रहे हैं। </p>
<p><strong>खिड़की दरवाजे तक हटवाए</strong><br />निगम के मकानों पर बार-बार हो रहे अतिक्रमण से बचाने के लिए निगम अधिकारियों ने उन करीब एक दर्जन से अधिक मकानों के खिड़की दरवाजे ही हटवा दिए। जिससे उन मकानों में कोई अतिक्रमण कर नहीं रह सके। ऐसा होने से परिवार के लोग तो अतिक्रमण नहीं कर पाए। लेकिन नशेड़ियों की मौज हो गई। उन्हें नशा करने का एक नया व सुरक्षित ठिकाना मिल गया। हालत यह है कि अंधेरे में ही नहीं दिन के उजाले में भी यहां दिनभर नशेड़ियों का जमावड़ा लगा रहता है। दिन में आधा दर्जन नशेडी हर समय यहां नशा करते हुए देखे जा सकते हैं। </p>
<p><strong>जगह का नहीं हुआ उपयोग</strong><br />नगर निगम के अधिकारियों द्वारा पूर्व में इन मकानों को खाली कर इस जगह का उपयोग करने की बात कही जा रही थी। निगम का सेक्टर कार्यालय से लेकर सामुदायिक भवन बनाने तक की चर्चा चली। लेकिन कई साल बीतने के बाद भी अभी तक उस जगह का न तो कोई उपयोग हो सका है और न ही निगम के अधिकारी अपनी करोड़ों की सम्पत्ति की सार संभाल कर पा रहे हैं। जिससे  कभी अतिक्रमण करने वालों की तो कभी नशेड़ियों की मौज हो रही है। </p>
<p><strong>लोगों की पीड़ा</strong><br />कॉलोनी के पास रहने वाले राधेश्याम महावर ने बताया कि निगम अधिकािरयों की अनदेखी से यहां नशेड़ियों का जवामड़ा लगा रहता है। जिससे रात के समय चोरी होने का डर बना रहता है। नशेड़ी दिन के समय भी सामान चोरी कर ले जाते हैं। रात के समय उस जगह के पास से महिलाओं को निकलने में डर लगने लगा है। स्थानीय निवासी रेशमा बानो का कहना है कि कॉलोनी में कचरे का ढेर लगा होने से दिनभर दुर्गंध फेली रहती है। सूअरों के जमावड़े से गंदगी फेल रही है। निगम में कई बार शिकायत करने के बाद भी कोई ध्यान नहीं दे रहा है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />निगम कॉलोनी के पुराने मकान जर्जर हो गए थे। इस कारण से उनहें अतिक्रमण से मुक्त करवाया गया था। दोबारा अतिक्रमण न हो इसके लिए उनके खिड़की दरवाजे तक हटवा दिए थे। लेकिन अब यहां नशेड़ियों का कब्जा हो गया है तो शीघ्र ही उन जर्जर मकानों को डिस्मेंटल करवाया जाएगा। उसके बाद यहां बहुमंजिला  भवन बनाया जाएगा। जिसमें कर्मचारियों के आवास  या निगम कार्यालय के उपयोग में लिया जा सकेगा। <br /><strong>- राजपाल सिंह, आयुक्त, नगर निगम कोटा दक्षिण </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 20 Dec 2022 16:46:31 +0530</pubDate>
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