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                <title>बस में 42 यात्री बिना टिकट पकड़े, जयपुर की टीम ने श्योपुर में की कार्रवाई</title>
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                        <![CDATA[राजस्थान रोडवेज की विशेष जांच में कोटा डिपो की बस में 42 यात्री बिना टिकट पकड़े गए। बस सारथी नईम खान ने 2520 रुपये लेने के बावजूद टिकट जारी नहीं किए। मौके पर कार्रवाई कर रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी गई है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/42-passengers-in-bus-without-tickets-jaipur-team-took-action/article-135224"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/rajasthan-roadways--busss.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान रोडवेज प्रशासन की ओर से चलाए जा रहे विशेष चेकिंग अभियान के दौरान कोटा डिपो की एक बस में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। चेयरमैन शुभ्रा सिंह और एमडी पुरुषोत्तम शर्मा के निर्देश पर जयपुर आगार की टीम कोटा डिपो की बसों की जांच कर रही है। इसी क्रम में प्रबंधक यातायात वीरेंद्र सिंह और टीआई राधा किशन राणा ने श्योपुर में कोटा डिपो की एक बस को रोका और चेकिंग की।</p>
<p>जांच में बस में कुल 51 यात्री पाए गए, जिनमें से 42 यात्री बिना टिकट यात्रा कर रहे थे। टीम ने तुरंत बस सारथी के पास विवरण मांगा, जिसके बाद खुलासा हुआ कि बस सारथी नईम खान ने इन 42 यात्रियों से 2520 रुपए तो ले लिए थे, लेकिन उन्हें टिकट जारी नहीं किया। यह सीधे-सीधे राजस्व हानि और गंभीर लापरवाही का मामला माना गया।</p>
<p>जयपुर आगार की टीम ने मौके पर ही बस सारथी के खिलाफ रिमार्क लगाकर कार्रवाई की और संपूर्ण मामले की रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेज दी है। रोडवेज प्रशासन ने साफ किया है कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी, ताकि यात्रियों को सही सेवा मिले और राजस्व की हानि न हो।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Dec 2025 17:31:54 +0530</pubDate>
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                <title>रोडवेज की तीसरी आंख को मोतियाबिंद, टीवी हुए कंडम</title>
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                        <![CDATA[कोटा आगार में भी कुछ बसों में कैमरे लगाए थे, लेकिन अब बसों से कैमरे नदारद है। वहीं महिलाओं की सुरक्षा के लिए लगाए पैनिक बटन भी खराब हो चुके है। रोडवेज लगी शिकायत पुस्तिका और फर्स्ट एड बॉक्स तो सालों से गायब है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/cataract-in-the-third-eye-of-roadways--tv-became-useless/article-33654"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-12/roadways-ki-teesari-aankh-ko-motiyabind,-tv-hue-kandum...kota-new..29.12.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा डिपो को मिलने वाली पांच नई बसों का इंतजार लंबा होता जा रहा है। वहीं यात्रियों को खटारा बसों में सफर करना पड़ रहा है। लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए वीडियों कोच की तर्ज पर बसों में टीवी लगाए और उनको सेटलाइट से जोड़ा था । उस कंपनी का करार खत्म होने से लोग अब  कोटा से जयपुर जाने वाली बसों में मनोरंजन के साधन भी हटा लिए है। वहीं रोडवेज प्रशासन का तीसरी आंख से अपनी बसों पर नजर रखने का सपना पूरा नहीं हुआ है। लीकेज पर अंकुश और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर हाथ में ली गई सीसी कैमरे लगाने की कवायद अधूरी ही रह गई। इसका बड़ा कारण रोडवेज प्रबंधन की अनदेखी है। इससे रोडवेज बसों में निगरानी का प्रबंधन के पास कोई तरीका नहीं रहा। राजस्थान में रोडवेज की बसों का पिछले लंबे समय से यहीं हाल है। जिन बसों में निगरानी के लिए कैमरे लगाए थे, वे भी गायब हो चुके हैं। प्रदेश में प्रायोगिक तौर पर जयपुर समेत कुछ आगार में इसकी शुरुआत हुई थी। कोटा आगार में भी कुछ बसों में कैमरे लगाए थे, लेकिन अब बसों से कैमरे नदारद है। वहीं महिलाओं की सुरक्षा के लिए लगाए पैनिक बटन भी खराब हो चुके है। रोडवेज लगी शिकायत पुस्तिका और फर्स्ट एड बॉक्स तो सालों से गायब है। वहीं आग से सुरक्षा के लिए रखे गए मिनी सलेंडर कुछ बसों से गायब हो गए कुछ को एक्सपायरी डेट निकल गई है। रोडवेज की बसे भगवान भरोसे चल रही है। </p>
<p><strong>वर्कशॉप में अभी 7 बसें कंडम </strong><br />कोटा वर्कशॉप में अभी सात बसें ऐसी है जो कंडम हैं। इनकी मरम्मत हो सकती है लेकिन इनके लिए मड रूट नहीं है। ऐसे में इनकी फिलहाल मरम्मत नहीं की जा रही है। इसके अलावा कुछ ग्रामीण परिवहन की बसें भी खटारा होकर पड़ी है। </p>
<p><strong>80 चालकों के भरोसे 85 रूट का शेड्यूल </strong><br />कोटा डिपों में चालकों 149 पद स्वीकृत है। जिसमें 12 चालक संविदा पर लगी निजी बस और बुलेरो, ट्रक चलाने के लिए लगे हुए ।  कुल रूट के लिए 137 चालकों के पद हैं जिसमें से वर्तमान में 80 उपलब्ध है। 57 चालक कम होने से रूट पर बसों का संचालन करने में परेशानी हो रही है। </p>
<p><strong>कुछ दिन ही हो सकी निगरानी, फिर वहीं ढर्रा</strong><br />कैमरे लगाए जाने के बाद कुछ माह तक तो रोडवेज बसों में निगरानी हुई। उसके बाद धीरे-धीरे हालात पुराने ढर्रे पर आ गए। स्थिति यह हो गई, जिन भी बसों में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे वे सभी खराब पड़े हैं। कैमरों की मॉनिटरिंग के लिए अनुबंधित कम्पनी की ओर से लगाए कर्मचारी भी सही तरीके से काम नहीं कर पाए। ऐसे में योजना पर खर्च लाखों रुपए व्यर्थ चले गए।</p>
<p><strong>पांच साल पहले लगाए थे सीसीटीवी कैमरे अब हो गए गायब</strong><br />रोडवेज ने करीब पांच साल पहले बसों में सीसीटीवी कैमरे लगाने का काम हाथ में लिया था। राज्यभर में करीब 2500 रोडवेज बसों में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए। इसके लिए मुख्यालय स्तर पर निजी कम्पनी को बसों में सीसीटीवी कैमरा लगाने और मॉनिटरिंग का जिम्मा सौंपा था। इसके पीछे दो मकसद थे। पहला-यात्रियों की सुरक्षा थी। विशेष तौर से महिला यात्रियों की सुरक्षा को पुख्ता करना था। बसों में महिला के अकेली यात्रा करने के दौरान असहज महसूस नहीं करें और बेखौफ होकर यात्रा कर सकें इसलिए कैमरे लगाए गए। दूसरा-घाटे से जूझते रोडवेज को अपनों के नुकसान पहुंचाने वाले नजर रखने व लीकेज रोकना था। बिना टिकट यात्रा करवाने वाले परिचालकों पर नजर रखने के लिए भी बसों में तीसरी आंख लगाई गई। लेकिन यह योजना सफल नही हो सकी। लंबे समय तक रोडवेज में सीसीटीवी कैमरे नजर आते रहे उसके बाद अब ये गायब हो गए है। </p>
<p><strong>आरामदाय सफर के लिए शुरू की केयर डे योजना हो रही विफल</strong><br />दो साल पहले राजस्थान रोडवेज की बसों में यात्रियों के सफर आरामदाय बनाने के लिए केयर-डे  योजना की शुरुआत की थी। एक साल तक तो इसके काफी सार्थक परिणाम भी आए। जिसमें  यात्रियों को सफर के दौरान रोडवेज की बसों में न तो हिचकोले खाने पड़े और न ही बसों में गंदगी नजर आई । ऐसा इसलिए संभव हो सका क्योंकि ‘केयर डे’ के दिन आगार प्रबंधन अपनी-अपनी बसों की ठीक से सार-संभाल कर रहे थे। 2020 से 2021 के मध्य यांत्रिक विभाग की मेहनत से कई खटारा हो चुकी बसें फिर से ठीक होकर रोड पर दौड़ने लगी जिससे बसों की कमी कुछ हद तक कम हुई । लेकिन रोडवेज के महा प्रबंधक बदलने के साथ ही डिपो का वर्कशॉप पुराने ढर्र पर आ गया।  हालांकि कोटा वर्कशॉप में अभी टारगेट के अनुसार ही कार्य होने से यहां की बसों की हालत अन्य डिपो से बेहतर है। </p>
<p>कोटा डिपो में पांच नई बसों की स्वीकृति हो चुकी है लेकिन अभी तक डिपो में बसे नहीं आई है। पुरानी बसों की मरम्मत कर उन्हें ही रूट पर चलाया जा रहा है। बसों में यात्रियों के मनोरंज के लिए लगाए टीवी लगाए थे। उस कंपनी का करार खत्म होने से टीवी हटा लिए गए है। <br /><strong>- अजय मीणा, आगार प्रबंधक कोटा </strong></p>]]>
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                <pubDate>Thu, 29 Dec 2022 15:47:41 +0530</pubDate>
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