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                <title>technical university - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>एनआईआरएफ रैंकिंग में आरटीयू को लाकर प्रदेश की पहली टेक्निकल यूनिवर्सिटी बनाएंगे : प्रो. चौधरी</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलगुरु का साक्षात्कार।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/we-will-make-rtu-the-first-technical-university-in-the-state-to-be-included-in-the-nirf-ranking--prof--chaudhary/article-131979"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/111-(5)6.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। राष्ट्रीय स्तर पर उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और अनुसंधान के मानकों को परखने वाली नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फे्रमवर्क में राजस्थान की कोई भी सरकारी यूनिवर्सिटीज शामिल नहीं है। जिससे सरकारी उच्च शिक्षा संस्थानों की शैक्षणिक  गुणवत्ता, अनुसंधान और प्लेसमेंट के दावों पर सवालिया निशान खड़े हो गए। जबकि, इस रैंकिंग से विश्वविद्यालयों की साख देश-दुनिया में परखी जाती है। लेकिन, इस बार एनआईआरएफ रैंकिंग में राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय का नाम चमकाने की तैयारियां चल रही हैं।  आरटीयू के निवनियुक्त कुलगुरु प्रो. निमित चौधरी ने कार्यभार ग्रहण करते ही रैंकिंग को लेकर पूरी ताकत से जुट गए हैं। दैनिक नवज्योति को दिए साक्षात्कार में प्रो. चौधरी ने स्पष्ट कर दिया है कि इस बार रैंकिंग में आरटीयू का नाम होगा। इसके लिए टास्क फोर्स भी गठित कर दी गई है, जिसने इस दिशा में काम भी शुरू कर दिया है।</p>
<p><strong>सवाल : </strong>वर्तमान में आरटीयू की कोई एनआईआरएफ रैंकिंग नहीं है, इस बार विश्वविद्यालय को रैंकिंग में शामिल करने की आपकी क्या रणनीति है?<br /><strong>जवाब- </strong> आरटीयू को इस रैंकिंग में लाना ही मेरी पहली प्राथमिकता है। ताकि, देश की टॉप यूनिवर्सिटीज की रैंकिंग में राजस्थान से आरटीयू का नाम शुमार हो सके। इसके लिए हमने टास्क फोर्स का गठन भी कर दिया है, जो यह काम देखेगी। जामिया मिलिया इस्लामिया विवि देश की टॉप-3 रैंकिंग में है। जब मैंने जामिया के मुकाबले आरटीयू के शिक्षकों की काबिलियत देखी तो जरा भी फर्क नहीं आया।  यहां के शिक्षक इतने काबिल हैं कि आरटीयू को नेशनल  इंस्टीट्यूशनल की टॉप रैंकिंग में ला सकते हैं। <br /><strong>सवाल :</strong> कंप्यूटर इंजीनियरिंग विभाग में पिछले 5 वर्षों से कंप्यूटर लैब बंद पड़ी है, छात्र बिना प्रैक्टिकल किए ही पास हो रहे हैं, इस पर विश्वविद्यालय क्या कदम उठा रहा है?<br /><strong>जवाब -</strong>  मैं, हर डिपार्टमेंट का निरीक्षण कर रहा हूं। मैकेनिकल व इलेक्ट्रीकल विभाग में जाकर व्यवस्थाएं देखी है। हर डिपार्टमेंट का जायजा लिया जा रहा है। हमने स्पेशलाइजेशन कमेटी गठित कर दी है, जो हर डिपार्टमेंट का फिजिकली दौरा करेगी। कहां क्या कमी है, किस चीज की आवश्यकता है, उसे पूरा किया जाएगा।  <br /><strong>सवाल :</strong> आरटीयू में शिक्षकों के प्रमोशन पिछले 10 वर्षों से लंबित हैं, इस दिशा में क्या कार्यवाही की जा रही है?<br /><strong>जवाब -</strong> यदि, शिक्षक दुखी होंगे तो कोई भी व्यवस्था कभी सही नहीं हो सकती। प्रमोशन उनका जायज हक है, जो मिलना ही चाहिए। हम इस दिशा में काम कर रहे हैं। कुछेक जगहों पर रुकावट आ रही है, जिसे दूर किया जा रहा है। इसके लिए एक टीम को काम पर लगा दिया है, जो शिक्षकों से जुड़ी जानकारी अपडेट की जा रही है। जैसे ही हमें सरकार से अनुमति मिलेगी तुरंत प्रमोशन कर दिए जाएंगे। <br />ई-स्पोर्ट्स और इनडोर गेम्स की सुविधाएं बहुत ही खराब स्थिति में हैं, इनमें सुधार के लिए क्या योजनाएं बनाई जा रही हैं?<br />सवाल : यह सही है कि स्पोर्ट्स की सुविधाओं में कमी है। जिसमें हम विस्तार करेंगे। पढ़ाई के साथ खेलकूद भी जरूरी है, क्योंकि स्पोर्ट्स भी उतना ही जरूरी है, जितना इंजीनियरिंग। हम विद्यार्थियों को नेशनल लेवल का इंफ्रास्ट्रेक्चर डवलप करकें देंगे। <br /><strong>सवाल :</strong> आप स्वयं पर्यटन विभाग से हैं, ऐसे में पर्यटन और तकनीकी शिक्षा के संयोजन से नया कोर्स करने की योजना है?<br /><strong>जवाब : </strong>बिलकुल, ऐसा करने का मेरा मन है। आज पूरी दुनिया का ट्यूरिज्म टेक्नोलॉजी पर बेस्ड है। जहां तक अकेडमिक इनपुट की बात है, हमने इस संबंध में तैयारी शुरू कर दी है। हम पूरी दुनिया में एनालिसिस कर रहे हैं कि ट्यूरिज्म में इंजीनियरिंग को लेकर कहां क्या कोर्सेज हैं। इसके लिए मैंने एक टीम को काम पर लगा दिया है, जो पिछले 5 दिनों से इसी काम में लगी हुई है। <br /><strong>सवाल : </strong>आरटीयू और  इसके अधीन कॉलेजों में कई पदाधिकारी एवं डीन लंबे समय से एक ही पद पर जमे हैं, क्या निकट भविष्य में कोई प्रशासनिक फेरबदल होने की संभावना है?<br /><strong>जवाब : </strong> अभी इसके बारे में मुझे जानकारी नहीं है, यदि ऐसा है तो दिखवा लेंगे। <br /><strong>सवाल :</strong> विश्वविद्यालय में छात्रों के प्लेसमेंट प्रतिशत को बढ़ाने के लिए क्या प्रयास किए जा रहे हैं?<br /><strong>जवाब :</strong> हमारा मकसद बच्चों को इतना काबिल बनाना है कि कम्पनियों को उनकी जरूरत रहें न की हमें। स्टूडेंट्स की स्किल इतनी डवलप करनी है कि कम्पनियों को अच्छा चलना है तो उन्हें आरटीयू के बच्चे लेने ही होंगे। <br /><strong>सवाल : </strong>चर्चा है, आरटीयू में जानबुझकर छात्रों को बैक दी जा रही है, ताकि विवि को फीस के रूप में राजस्व प्राप्त हो?<br /><strong>जवाब :</strong> ऐसा बिलकुल भी नहीं है। लेकिन, इस बात पर हमने चर्चा जरूर की है कि बच्चों के बैक क्यों आ रही है और हम क्या कर सकते हैं। यदि, कुछ कमियां होंगी तो उन्हें सुधारा जाएगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Nov 2025 16:46:19 +0530</pubDate>
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                <title>आरटीयू का दावा : हर साल 60 फीसदी प्लेसमेंट, स्टूडेंट बोले-सिर्फ 35 फीसदी </title>
                                    <description><![CDATA[सिविल इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों का बहुत ही कम प्लेसमेंट हो पाता है, क्योंकि कैम्पस में इस क्षेत्र की कम्पनियां नहीं आती। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/rtu-claims--60-percent-placement-every-year--students-say---only-35-percent/article-56832"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/rtu-ka-dawa...har-saal-60-fisadi-placement,-student-bole-sirf-35-fisadi...kota-news..11.9.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय की ओर से हर साल बीटेक में ओवरआॅल 60 फीसदी स्टूडेंट्स को प्लेसमेंट के जरिए रोजगार उपलब्ध करवाने का दावा किया गया है, जबकि बीटेक व एमटेक स्टूडेंट्स ने आरटीयू की प्लेसमेंट रेट 35 से 40 फीसदी ही बताया है। दैनिक नवज्योति ने कैम्पस में  बीटेक थर्ड व फोर्थ ईयर और एमटेक के स्टूडेंट्स से बात की तो उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा किए दावों को खारिज कर दिया।  साथ ही प्लेसमेंट के दौरान होने वाली समस्याओं पर भी खुलकर अपनी बात रखी। इस दौरान छात्रहित को देखते हुए उनके नाम परिवर्तित कर दिए हैं। पेश हैं प्रमुख अंश....</p>
<p><strong>ओवरओल प्लेसमेंट रेट 35 से 40 फीसदी</strong><br />बीटेक कम्प्यूटर साइंस फोर्थ ईयर के छात्र महावीर पटेल ने बताया कि 60 फीसदी कैम्पस प्लेसमेंट का दावा सच्चाई से परे है, यह रेट बहुत ज्यादा बताई गई है, जबकि वास्तविकता बीटेक की सभी 11 ब्रांचों को मिलाकर ओवरआॅल 35 से 40 फीसदी विद्यार्थियों को ही प्लेसमेंट से रोजगार मिलता है। अधिकतर विद्यार्थी आउट आॅफ प्लेसमेंट के जॉब पर लगते हैं। वहीं, सिविल इंजीनियरिंग के छात्र विश्वेंद्र खन्ना का कहना है, सिविल इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों का बहुत ही कम प्लेसमेंट हो पाता है, क्योंकि कैम्पस में इस क्षेत्र की कम्पनियां नहीं आती। हालांकि, सीएस आईटी की कम्पनियां ही अधिक आती है। इसलिए छात्र इन इंजीनियरिंग की इन दोनों ब्रांचों को ही सबसे ज्यादा प्राथमिकता देते हैं। </p>
<p><strong>अधिकतर स्टूडेंट्स क्राइट एरिया से ही बाहर</strong><br />बीटेक मैकेनिकल इंजीनियरिंग के थर्ड ईयर के छात्र हेमंत, साहिल ने बताया कि विश्वविद्यालय में आने वाली कम्पनियां छठे व सातवें सेमेस्टर के विद्यार्थियों के लिए आती हैं, लेकिन उनके क्राइट एरिया में फर्स्ट डिविजन वाले विद्यार्थियों को ही शामिल किया जाता है। साथ ही किसी भी विषय में बैक नहीं होने की कंडीशन रखी जाती है, ऐसे में किसी ब्रांच में 80 स्टूडेंट्स हैं तो उनमें से आधे तो रोजगार की दौड़ से वैसे ही बाहर हो जाते हैं। शेष बचे इंटरव्यू में निकाल दिए जाते हैं। असल में कम्पनियों को चुनिंदा ही एम्पलोई चाहिए होते हैं। वहीं, एयरोनोटिकल इंजीनियरिंग के थर्ड ईयर के मुकेश ने बताया कि पिछले साल 4 स्टूडेंट्स का ही चयन हुआ था, जबकि सातवें सेमेटर में करीब 30 से ज्यादा स्टूडेंट्स थे।  </p>
<p><strong>गत वर्ष रोजगार देकर मुकर गई कम्पनी</strong><br />एमटेक कम्प्यूटर साइंस के छात्र हरिहंत वैष्णव का कहना है, गत वर्ष प्लेसमेंट कैम्प में आईटी कम्पनी में बीटेक कम्प्यूटर साइंस व इनफोर्मेशन टेक्नोलॉजी के तीन विद्यार्थियों का चयन हुआ था। उन्हें आॅफर लेटर भी दिए गए थे लेकिन फाइनल एग्जाम देकर जब कम्पनी ज्वाइंन करने पहुंचे तो वहां आर्थिक मंदी का हवाला देते हुए कम्पनी ने जॉब देने से साफ इंकार कर दिया। कई कम्पनियां विद्यार्थियों के साथ ऐसे विश्वासघात भी करती है। </p>
<p><strong>इंजीनियरों से कम्पनी करवाती है मार्केटिंग </strong><br />बीटेक इनफोर्मेशन टेक्नोलॉजी के पासआउट स्टूडेंटस योगेश ने बताया कि राजस्थान  टेक्नीकल यूनिवर्सिटी में प्लेसमेंट कैम्प में प्लैनेट स्पार्क जैसी सेल्स एंड मार्केटिंग कम्पनियां भी आती हैं, जो इंजीनियरों से आॅन लाइन कोर्स बेचने का काम करवाती है। रोजगार की तलाश में छात्र ऐसी कम्पनियों को ज्वाइंन कर तो लेता है लेकिन दो-तीन माह में उसे नौकरी छोड़नी पड़ती है। गत वर्ष भी दो बच्चों को नौकरी छोड़नी पड़ी थी। टेक्नीकल यूनिवर्सिटी में सेल्स कम्पनियों का क्या काम है। विवि 60 फीसदी प्लेसमेंट का दावा कर रहा है तो कॉलेज की वेबसाइड पर विद्यार्थी का नाम और किस कम्पनी में प्लेसमेंट मिला यह जानकारी अपलोड कर पारदर्शिता बरते। सच्चाई सामने आ जाएगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 Sep 2023 19:25:23 +0530</pubDate>
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                <title>20 तरह के हाई सिक्योरिटी फीचर से लैस होगी आरटीयू की डिग्री</title>
                                    <description><![CDATA[डिग्री में उपयोग किए गए हाई सिक्योरिटी फीचर में बारकोड का भी महत्वपूर्ण किरदार है। डिग्री को कोडिंग सिस्टम से प्रोटेक्ट किया गया है। इसमें नीचे की तरफ बारकोड होगा, जिसे स्कैन करते ही छात्रों की सम्पूर्ण डिटेल आॅनलाइन सामने आ जाएगी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/rtu-degree-will-be-equipped-with-20-types-of-high-security-features/article-37389"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-02/20-tarah-k-high-security-feature-se-less-hogi-rtu-ki-degree..kota-news.15.2.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में नवाचार करने के लिए जानी जाती है। इंजीनियरिंग में नयापन करना अब आरटीयू की पहचान बन चुकी है। डिग्री में तकनीक का इस्तेमाल कर यूनिवर्सिटी इन दिनों खूब चर्चा बटोर रही है। इस बार विश्वविद्यालय की डिग्री 20 तरह के हाई सिक्योरिटी फिचर से लैस की गई है। यह डिग्री न तो पानी में गिलेगी और न ही इसकी फोटोकॉपी की जा सकेगी। यह पूरी तरह से वाटरप्रूफ होने के साथ कोडिंग सिस्टम से लैस होगी। बार कोड स्कैन करते ही छात्रों का आॅनलाइन डेटा सामने आ जाएगा।</p>
<p><strong>नहीं होगी फोटोकॉपी</strong><br />कुलपति प्रो. एसके सिंह ने बताया कि आए दिन डिग्री फजीवाडेÞ के मामले सामने आते रहते हैं। ऐसे फर्जीवाड़े से निजात पाने के लिए विश्वविद्यालय ने अपनी डिग्रियों को हाई सिक्योरिटी सिस्टम से लैस किया है। जिसमें सबसे महत्वपूर्ण फिचर एंटी लॉकिंग कॉपी यानी कोई भी व्यक्ति डिग्री की फोटोकॉपी नहीं करवा सकता। यदि कोई फोटोकॉपी करवाने की कोशिश करेगा तो डिग्री पर आॅटोमेटिक कॉपी लिखा हुआ वाटरमार्क प्रिंट हो जाएगा। इस फीचर से डिग्री का फर्जीवाड़ा करने वाले धोखेबाजों पर नकेल कस सकेगी।</p>
<p><strong>फर्जीवाड़े पर लग सकेगी लगाम </strong><br />छात्रों के एनरोल्ड नम्बर डिग्री के किसी खास हिस्से में लिखे होंगे, जो समान्य रूप से दिखाई नहीं देंगे। लेकिन लैजर से देखने पर दिखाई देंगे। फर्जीवाड़ा करने वाले लोग विश्वविद्यालय के नाम से ही डिग्री बना लेते हैं, जिनका पता कई दस्तावेज देखने के बाद लग पाता है। ऐसे मामले रोकने के लिए ही आरटीयू ने अपनी डिग्रियों को 20 तरह के हाई सिक्योरिटी फीचर से लैस किया गया है। डिग्री प्रमाण पत्र उच्च कोटि का आसानी से न फटने वाला, वाटर प्रूफ और ए-4 साइज के खास मेटेरियलयुक्त कागज पर तैयार किया गया है। </p>
<p><strong>बारकोड स्कैन करते ही सामने आ जाएगी कुंडली</strong><br />डिग्री में उपयोग किए गए हाई सिक्योरिटी फीचर में बारकोड का भी महत्वपूर्ण किरदार है। डिग्री को कोडिंग सिस्टम से प्रोटेक्ट किया गया है। इसमें नीचे की तरफ बारकोड होगा, जिसे स्कैन करते ही छात्रों की सम्पूर्ण डिटेल आॅनलाइन सामने आ जाएगी। इसके अलावा डिग्री में अनेक सिक्योरिटी फीचर्स भी शामिल किए गए हैं। हिन्दी और अंग्रेजी दोनों भाषा में छपी डिग्री पर छात्र का रंगीन फोटो, क्यूआर कोड होगा। छात्रों का डेटा नेशनल डिपॉजिटरी में डाला जाता है। इससे दो फायदे होंगे। पहला डिग्री गुम हो जाने पर यहां से डाटा प्राप्त हो जाएगा औैर दूसरा बार कोड स्कैन करते ही छात्र की पूरी डिटेल सामने आ जाएगी।</p>
<p><strong>न पानी में गलेगी और न ही फटेगी</strong><br />अक्सर देखने में आता है कि डिग्री के लिए नॉर्मल कागज का उपयोग किया जाता है। जिसकी वजह से डिग्री पानी में गिर जाए तो वह गल जाती है और फट भी जाती है। वहीं, डिग्री कई वर्षों तक रखे-रखे गलने की भी शिकायत रहती है। लेकिन, आरटीयू ने इस बार दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को वितरित की जाने वाली डिग्री को ऐसे विशेष मेटेरियल से तैयार की है कि वह पानी में गिर भी जाए तो गलेगी नहीं और न ही उस पर छपे नम्बर व प्रिंट की इंक भी नहीं फैलेगी। यह पूरी तरह से वाटर फ्रूफ होगी। इसके अलावा लंबे समय से तक रखे रखे भी डिग्री एकदम नई जैसी ही रहेगी। इसका कागज गलेगा नहीं। </p>
<p><strong>दिखाई नहीं देंगे वाइस चांसलर के हस्ताक्षर</strong><br />डिग्री के किसी एक हिस्से में वाइस चांसलर के हस्ताक्षर होंगे, जो समान्यरूप से <br />दिखाई नहीं देंगे। इनको देखने के लिए खास तरह की रोशनी की जरूरत होगी। देखने में आता है कि नकलबाज किसी भी डॉक्यूमेंट की हुबहु नकल कर लेते हैं। जिन पर नकेल कसने के लिए ही खास इंतजाम किए गए हैं। इसके  अलावा कई फीचर ऐसे हैं, जिनके होते हुए नकलबाज आरटीयू की फर्जी डिग्री नहीं बना पाएंगे। तकनीकी विश्वविद्यालय ने छात्र हित में तकनीक का उन्नत उपयोग किया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Feb 2023 14:45:59 +0530</pubDate>
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                <title>आरटीयू आंखें मूंदे रहा, परमार खुले आम धमकी देता रहा</title>
                                    <description><![CDATA[परमार ने वर्ष 2019 बीटेक बैच के छात्र अमन मीना सहित उसके सहयोगी दस छात्रों को फाइनल सेमेस्टर में जानबूझकर फेल किया है। जबकि, छात्रों की पढ़ाई का ट्रैक रिकॉर्ड काफी अच्छा था। नवज्योति के पास सबूतों सहित कई छात्र सामने आए हैं लेकिन आरटीयू की लचर व्यवस्था के चलते उनके नाम नहीं दिए जा रहे। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/rtu-kept-turning-a-blind-eye--parmar-kept-threatening-openly/article-33946"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-01/rtu-aankhe-moonde-raha,-parmar-khule-aam-dhamki-dta-raha..kota-news..02.01.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों पर दबाव बनाना और अपनी बात न मानने पर फेल करने का खेल आरोपी प्रोफेसर गिरीश परमार पिछले कई सालों से खुलेआम खेल रहा था। यदि, विश्वविद्यालय प्रशासन थोड़ी भी गंभीरता दिखाता तो 4 साल पहले ही उसकी करतूतों की परतें खुल चुकी होती। लेकिन, आरटीयू के किसी भी प्रोफेसर ने इसके खिलाफ आवाज तक नहीं उठाई और मनमानी पर पर्दा डालते रहे। वह छात्रों को क्लास में खुलेआम धमकाता था कि यूनिवर्सिटी में किसी से उसकी शिकायत की तो वह उसे फेल कर देगा। दैनिक नवज्योति को मिली आरोपी छात्रा ईशा यादव व परमार की बातचीत की रिकॉर्डिंग में इस बात का खुलासा हो रहा है कि परमार ने वर्ष 2019 बीटेक बैच के छात्र अमन मीना सहित उसके सहयोगी दस छात्रों को फाइनल सेमेस्टर में जानबूझकर फेल किया है। जबकि, छात्रों की पढ़ाई का ट्रैक रिकॉर्ड काफी अच्छा था। नवज्योति के पास सबूतों सहित कई छात्र सामने आए हैं लेकिन आरटीयू की लचर व्यवस्था के चलते उनके नाम नहीं दिए जा रहे। एक छात्र पूरी तरह से पहले से सामने आ चुका था लेकिन किसी ने उसकी नहीं सुनी। </p>
<p><strong>आरटीआई लगानी पड़ी</strong><br /> छात्र अमन मीना ने बताया कि पहले सेमेस्टर से सातवें सेमेस्ट तक उसे सीजीपीए (ग्रेडफर्स्ट डिवीजन) मिली हैं। इसमें कोई बैक भी नहीं है। लेकिन, आठवें सेमेस्टर में उसे मात्र डेढ़ नम्बर से प्रो. गिरीश ने जानबूझकर फेल कर दिया। इसकी तस्दीक  छात्रा ईशा यादव व परमार की बातचीत की रिकॉर्डिंग से होती है। आरटीयू में कॉपी चेक होने के बाद छात्रों को दिखाई जाती है लेकिन मुझे नहीं दिखाई गई। इसके विरोध में 3 अगस्त 2022 को मैंने 181 मुख्यमंत्री सूचना पोर्टल पर शिकायत की। कार्रवाई नहंी होने पर सितम्बर माह में कॉपी दिखाने के लिए आरटीआई लगाई लेकिन कॉपी नहीं दिखाई गई। इसके बाद एवीडेंस एक्ट 72 के तहत फिर से आरटीआई लगाने पर नवम्बर के आखिरी सप्ताह में कॉपी दिखाई गई। कॉपी देखने पर पता लगा कि अधिकतर प्रश्नों के जवाब में मुझे परमार ने 2 ही नम्बर दिए। </p>
<p><strong>सबसे बड़ी लापरवाही: ग्रेड मॉडरेशन का निष्क्रिय होना</strong><br />आॅटोनॉमस रेगुलेशन में ग्रेड मॉडरेशन कमेटी गठित किए जाने का प्रावधान है। विभागाध्यक्ष इस कमेटी का गठन करता है, जिसमें तीन सदस्य मनोनित किए जाते हैं। यह कमेटी विद्यार्थियों के परीक्षा परिणाम पर नजर रखती है, हर गतिविधियों की मॉनिटरिंग करती है। असमान्य परिणाम घोषित होने पर कमेटी द्वारा जांच की जाती है। यदि इसमें कॉपी चेक करने वाला शिक्षक दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ अग्रिम कार्रवाई के लिए रिपोर्ट तैयार कर विभागाध्यक्ष को दी जाती है। लेकिन वर्ष 2019 के बाद से इस कमेटी का गठन नहीं किया गया। जिसकी वजह से आरोपी प्रोफेसर परमार द्वारा परीक्षा परिणाम में बरती गई मनमानी अंकुश नहीं लग सका। यह आरटीयू प्रशासन की सबसे बड़ी कमी थी कि उसने इस कमेटी को निष्क्रय रखा। </p>
<p><strong>बैच-बीटेक वर्ष 2019 छात्रों की जुबानी: 5 से 8वें सेमेस्टर तक यूं चली परमार की मनमानी </strong><br />वर्ष 2019 में बीटेक के पांचवे सेमेस्टर से ही प्रो. परमार की मनमानी का सिलसिला शुरू हो गया था, जो आखिरी 8वें समेस्टर तक जारी रहा। पांचवे सेमेस्टर में ही उसने विद्यार्थियों को टारगेट करना शुरू कर दिया था। वह क्लास में खुलेआम कहता था कि जो उससे बनाकर नहीं रखेगा वह उसे फेल कर देगा। नाम न छापने की शर्त पर छात्र ने बताया कि वर्ष 2020 में कोराना काल चल रहा था। यूनिवर्सिटी बंद थी। उस वक्त परमार ने छात्र को फोन कर पांचवे सेमेस्टर के सभी छात्रों का आॅनलाइन असाइनमेंट लेने और पोर्टल पर नम्बर चढ़ाने का काम सौंपा। इस पर छात्र ने ग्रुप पर लिंक भेजकर सभी के असाइनमेंट जमा कर दिए। लेकिन, एक  आंदोलन के कारण इंटरनेट बंद होने से पोर्टल पर नम्बर चढ़ाने में असमर्थता जताते हुए मना कर दिया। इस पर परमार ने अपशब्द बोलते हुए देख लेने की धमकी दी। </p>
<p>5वां सेमेस्टर: छात्रों ने आरोप लगाया कि जनवरी 2021 में पांचवे सेमेस्टर की परीक्षा के दौरान प्रैक्टिकल एग्जाम देने हम लोग आरटीयू आए थे। उस समय प्रो. परमार एग्जाम से पहले ही कह दिया था कि तुम लोग तो फेल होने वाले हो। हालांकि, तैयारी होने के चलते हम फेल नहीं हुए। क्लास में उनका घूरना, बात-बात पर ताने मारना, फेल करने की धमकी देना जारी रहा। उनके इस बर्ताव से सभी छात्र मानसिक दबाव में रहते थे। <br />6 सेमेस्टर: फरवरी 2021 में छठा सेमेस्टर शुरू हुआ। इस दौरान परमार ने कुछ छात्रों को क्लास के सभी विद्यार्थियों का असाइनमेंट लेना, पोर्टल पर नंबर चढ़ाना, उनके लिए मुखबरी करना, गर्ल्स को उनके रसूख के बारे में बताने सहित अन्य काम सौंपे। इस पर छात्रों के मना करने पर भुगतने की धमकी दी गई।</p>
<p><strong>खुले आम कहता था, वीसी हो या डीन सब मेरे आदमी</strong><br />7वां सेमेस्टर : एक छात्र ने बताया कि जुलाई 2021 में सातवां सेमेस्टर शुरू हुआ। उस समय प्रो. परमार प्रोजेक्ट हैड थे। उनके अंडर में दो सब्जेक्ट, एक लैब, प्रोजेक्ट सेमीनार थी। बीटेक में सबसे ज्यादा नम्बर प्रोजेक्ट व इंडस्ट्रियल रिपोर्ट के ही होते हैं। जिसके चलते विद्यार्थियों को उनकी मनमानी सहनी पड़ती थी। वे क्लास में खुलेआम कहते थे कि जो मुझसे बनाकर नहीं रखेगा, उसे तो मैं फेल करूंगा। वीसी हो या डीन सब मेरे आदमी है। शिकायत पर भी मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। इसी सेमेस्टर के दौरान उन्होंने टेस्ट लिया। जिसकी कॉपी चेक होने के बाद क्लास में दिखाई गई। एक प्रश्न का सभी ने एक जैसा ही आंसर लिखा। इसके बावजूद एक छात्रा को 10 में से 9 नम्बर दिए गए जबकि, अन्य विद्यार्थियों को 7 से कम नम्बर दिए गए। क्लास की एक छात्रा ने विरोध किया तो प्रोफेसर ने उसकी कॉपी ही फाड़ दी। </p>
<p>8वां सेमेस्टर: छात्रों ने बताया कि फरवरी 2022 में 8वां सेमस्टर शुरू हुआ तो परमार ने बोला कि यह आखिरी सेमेस्टर है। इसमें वो ही पास होगा जो मुझसे बनाकर रखेगा। नहीं, तुम लोगों को अगले साल भी मेरे पास ही आना पड़ेगा। मेरे आगे-पीछे चक्कर काटने पड़ेंगे। </p>
<p><strong>20 में से 14 प्रश्न हल किए और 2 नंबर मिले</strong><br />एक छात्र ने बताया कि आरटीआई द्वारा मांगी गई रिलाइबिलिटी इंजीनियरिंग परीक्षा की कॉपी देखने पर पता लगा कि अधिकतर प्रश्नों के जवाब में मुझे 2 ही नम्बर दिए गए। पेपर में कुल प्रश्नों की संख्या 20 थी, जिसमें से 14 प्रश्न हल किए थे। सभी प्रश्न 2, 5 और 10 अंकों के थे। सबसे ज्यादा 10 अंकों के प्रश्न हल किए थे। जिसमें से एक ही प्रश्न में 3 नम्बर मिले बाकि के प्रश्नों के जवाब मे दो-दो ही नम्बर मिले। जबकि, हल किए गए प्रश्नों के औसत 5 से 7 नम्बर आसानी से मिलने चाहिए थे। </p>
<p><strong>रि-चेकिंग में 1 नम्बर और काट लिया</strong><br />उत्तर पुस्तिका की जांच से संतुष्ट नहीं था। ऐसे में रि-चेकिंग के लिए एप्लाई किया लेकिन आरटीयू में कॉपी री-चेकिंग के लिए आॅनलाइन फॉर्म भरना पड़ता है। जिसके लिए लिंक ओपन होना जरूरी है। जब मैंने एप्लाई किया तो लिंक बंद था। जिसे खोलने के लिए अन्य प्रोफेसरों से गुहार लगाई लेकिन किसी ने भी मदद नहीं की। बाद में तत्कालीन कुलपति निलिमा सिंह ने लिंक ओपन कर दिया। इसके बाद री-चेकिंग के लिए एप्लाई कर सका। प्रो. मनीषा भंडारी ने पुन: कॉपी की जांच कर एक नम्बर और काट लिया। इस तरह से अब ढाई नम्बर से फेल कर दिया गया। </p>
<p><strong>यूनिवर्सिटी ने नहीं की कार्रवाई</strong><br />उनके पास कई शिकायतें आती थी। एक छात्र तो इतना परेशान था कि वह आत्महत्या करने पर उतारू था। उसको काउंसलिंग के जरिए हमने समझाया। यूनिवर्सिटी को पत्र भी भेजे लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। प्रो. परमार का शिकार अकेला अमन नहीं है बल्कि 10 और छात्र हैं, जिन्हें भी दुष्भावनाओं से फेल किया गया था। रिकॉर्डिंग में वह इस बात का जिक्र कर रहा है कि उसने अमन मीना सहित अन्य छात्रों को फेल किया। छात्र अमन की कॉपी को निष्पक्ष रूप से चेक करवाकर इंसाफ किया जाए। <br /><strong>- प्रतिभा माहेश्वरी, संस्थापक, अस्मिता संस्था जयपुर</strong></p>
<p><strong>शिक्षिका के अंडर गारमेंट चुराता पकड़ा गया था </strong><br />आरोपी प्रोफेसर की करतूतों की परतें जैसे-जैसे खुल रही हैं वैसे वैसे चौंकाने वाले खुलासे भी हो रहे हैं। परमार एक शिक्षिका के छत पर सूख रहे अंडर गारमेंट चुराते हुए पकड़ा गया था। इस पर शिक्षिका के पति ने उसकी जमकर पिटाई भी की थी। यह मामला थाने तक पहुंचा था। परीक्षा में पास करने की एवज में छात्रा से अस्मत मांगने के मामले में परमार वर्तमान में जेल में है। </p>
<p>इस संबध में मैं कुछ नहीं कर सकता, क्योंकि यह मेरे अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। प्रोक्टर का काम केवल एडमिशन, अनुशासन, डिग्री, टीसी देने का होता है। इस संबंध में एग्जाम चेयरमैन से बात की जा सकती है। मुझसे किसी ने शिकायत नहीं की। <br /><strong>- ब्रजेश त्रिपाठी,  चीफ प्रोक्टर आरटीयू</strong></p>
<p>मैने संबंधित छात्रों की कॉपी प्रश्नों के जवाब देखकर ही चेक किए हैं। री-चेकिंग की कॉपी में कोई नाम या रोल नंबर नहीं आता। ऐसे में यह कहना गलत है कि हमने बेवजह किसी के नम्बर काटे हों। रही बात री-मार्क की तो आॅटोनॉमी में यह नियम है कि कॉपी जांचने वाला शिक्षक कॉपी में नंबर देने के बाद हाऊ या कुछ और यह रिमार्क लिख सकता है। फिर भी कोई विद्यार्थी असंतुष्ट है तो वह फिर से री-चेकिंग करवा सकता है। इस संबंध में एग्जाम कंट्रोलर से बात कर सकते हैं। <br /><strong>- प्रो. मनीषा भंडारी, आरटीयू</strong></p>
<p>यदि विद्यार्थियों ने डिपार्टमेंट में किसी तरह की कोई शिकायत की है तो मामले की नए सिरे से जांच करवाई जाएगी। जांच में संबंधित प्रोफेसर दोषी मिलता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। <br /><strong>- प्रो. एके द्विवेदी, डीन फैकल्टी अफेयर, आरटीयू</strong></p>
<p>प्रो. परमार द्वारा द्वेषतापूर्वक छात्रों को परीक्षा में फेल करने जैसी कोई शिकायत मुझे नहीं मिली है और न ही विद्यार्थियों ने इस संबंध में कोई ई-मेल किया है। इसके अलावा कोई सोशल एक्टिविस्ट की भी ई-मेल द्वारा कोई शिकायत नहीं मिली है।  <br /><strong>- प्रो. अनिल माथुर, पूर्व डीन फैकल्टी अफेयर, आरटीयू</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 Jan 2023 15:09:18 +0530</pubDate>
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