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                <title>accidents - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>ताकि पिकनिक पैनिक न बनें, रील्स से बनाएं दूरी</title>
                                    <description><![CDATA[ वन विभाग की चेतावनी: प्रतिबंधित क्षेत्रों में बिना अनुमति गए तो लगेगा 25 हजार का फटका।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/don-t-let-a-picnic-turn-into-a-panic--steer-clear-of-making--reels/article-159323"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)27.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। मानसून की पहली फुहारों के साथ ही कोटा और पूरे हाड़ौती अंचल के प्राकृतिक पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों और पिकनिक प्रेमियों की भीड़ उमड़ने लगी है। हालांकि हाडौती में मानसून अभी पुरी तरह से सक्रिय नहीं हुआ है लेकिन लोग वीकेंड पर परिवार और दोस्तों के साथ प्रकृति के बीच समय बिताने और पिकनिक की तैयारियों में जुट गए हैं। इस मस्ती के बीच जरा सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।अक्सर देखा जाता है कि लोग सेल्फी, इंस्टाग्राम रील्स और लाइव वीडियो बनाने के चक्कर में इतने मशगूल हो जाते हैं कि अपनी सुरक्षा और एहतियात पूरी तरह भूल बैठते हैं। रील्स का यह नशा हादसों का सबसे बड़ा कारण बन रहा है।</p>
<p>सुरक्षा के लिहाज से वन विभाग और स्थानीय प्रशासन ने कई खतरनाक और संवेदनशील प्राकृतिक स्थलों को पूरी तरह से प्रतिबंधित (नो-एंट्री ज़ोन) घोषित कर दिया है। वन विभाग ने इस मानसून सीजन में अवैध एंट्री करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं। किसी भी प्रतिबंधित वन क्षेत्र में बिना अनुमति अवैध प्रवेश करने पर 25 हजार तक का जुर्माना वसूला जाएगा। शाम 6 बजे के बाद या अंधेरा होने पर यदि कोई इन प्रतिबंधित क्षेत्रों में घूमता हुआ पाया गया, तो उसे गिरफ्तार कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p><strong>'तीसरी आंख' (कैमरा ट्रैप) से निगरानी</strong><br />वन विभाग ने जंगल के संकरे और गुप्त रास्तों पर कैमरा ट्रैप और गश्ती दल तैनात किए हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति अवैध रूप से प्रवेश करता है, उसकी तस्वीर कैमरे में कैद हो जाती है।</p>
<p><strong>पूरी तरह प्रतिबंधित स्थल</strong><br />भंवरकुंज: वन विभाग ने यहाँ पौधारोपण कर इसे पूरी तरह बंद कर दिया है।<br />गेपरनाथ: यहाँ वन विभाग की चौकी है; यह आम दिनों में बंद रहता है और केवल सावन में दर्शनार्थियों के लिए सशर्त खोला जाता है।<br />नाहरसिंह माताजी: रावतभाटा रोड स्थित इस क्षेत्र में बाघों (टाइगर) का मूवमेंट होने और सुरक्षा कारणों से प्रवेश वर्जित है।</p>
<p><strong>इन पिकनिक स्थलों पर लौटेगी रौनक</strong><br /><strong>1. पाड़ाझर वॉटरफॉल (भैंसरोड़गढ़)</strong><br />कोटा से लगभग 65 किमी दूर स्थित भैंसरोड़गढ़ अभयारण्य के जंगलों में स्थित 35 मीटर ऊँचा प्राकृतिक झरना और प्राचीन पाड़ाझर महादेव मंदिर जानेे के लिए भैंसरोड़गढ़ अभयारण्य क्षेत्र होकर जाया जाता है। यह स्थान एडवेंचर और आउटरीच केम्पेन के लिये ज्यादा फैमस है। यहां केवल निजी साधन से ही पहुचां जा सकता है।<br /><strong>सुविधाएं व सावधानी</strong><br />यहाँ कोई दुकानें नहीं हैं, खाना-पानी साथ लाएँ। रास्ता कच्चा व फिसलन भरा है। यहां ज्यादा बरसात के दिनों मे रास्तें में बाईक खराब होने के अलावा छिपने की कोई जगह नहीं होना भी बड़ी परेशानी का कारण हो सकता है।<br />जंगली जानवरों का आवास होने से दिन के समय समूह में ही जाना सुरक्षित है।<br /><strong>2. चट्टानेश्वर महादेव</strong><br />कोटा से लगभग 25 किमी दूर केबलनगर के पास अरावली पहाड़ियों के बीच बहता झरने के पास स्थित है। प्राचीन शिव प्रतिमा और लगभग 3600 वर्ष पुराने प्रागैतिहासिक शैलचित्रों काे देखने के लिये यहां वर्षपर्यन्त लोग आते है। लेकिन बरसात के मौसम में यह स्थल पुरी तरह पिकनिक स्पाॅट बन जाता है।<br /><strong>सुविधाएं व सावधानी</strong><br />एनीकट पर काई जमने से भारी फिसलन रहती है। यहाँ घुटनों तक दलदल व कीचड़ होने से हादसे होते हैं, इसलिए पानी में गहराई तक जाने से बचें।<br /><strong>3. आलनिया डैम</strong><br />कोटा-झालावाड़ रोड़ पर शहर से 25 किमी की दूरी पर शांत जलराशि, शानदार सूर्यास्त (सनसेट) और मानसून में बांध पर चलने वाली चादर प्रकृति प्रेमियाें के साथ साथ परिवार के साथ पिकनिक मनाने वाले लोगों के लिये मुफीद स्थान है।<br /><strong>4. बरधा बांध</strong><br />कोटा से बूंदी मार्ग पर स्थित लगभग 35 किमी की सडक दुरी पर स्थित 'हाड़ौती का मिनी गोवा' के नाम से जाने जाने वाला यह स्थल मानसून में हाडौती के लोगों के लिये किसी बीच से कम नहीं । बांध की 4 फीट चौड़ी दीवार पर चढ़कर लोग वहां से गिरते पानी के बीच खडे होकर फोटाे खिंचवाते है। 22 फीट की ऊंचाई से गिरते पानी के नीचे नहाने का आनन्द लेने की हाेड़ में उमडता लोगों का हुजुम किसी समुद्री किनारें जमा हुई भीड़ का नजारा बन जाता है।<br /><strong>सुविधाएं व सावधानियां</strong><br />यहां आसपास गांव होने से खाने पीने की दुकाने मिल जाती है। दीवार पर फिसलन और कीचड़ के कारण बहने का खतरा रहता है। यहाँ सुरक्षा के लिए एसडीआरएफ की टीम तैनात रहती है।<br /><strong>5. रामेश्वरम् महादेव (बूंदी)</strong><br />शहर से 60 कि. मी. दुर रामेश्वरम् महादेव पहाड़ों की कंदरा में स्थित प्राकृतिक गुफा मंदिर है। जहाँ स्वयंभू शिवलिंग पर निरंतर जलधारा से साक्षात जलाभिषेक होता है।<br /><strong>सुविधाएं व सावधानी</strong><br />धार्मिक आस्था का बड़ा केंद्र। गुफा और सीढ़ियों में नमी व फिसलन से सतर्क रहें।</p>
<p><strong>आपात स्थिति में काम आएगा मोबाइल</strong><br />मानसून में पिकनिक पर जाते समय मोबाइल आपदा के समय मदद बुलाने में बहुत काम आता है, बशर्ते इसका इस्तेमाल रील्स बनाने की जगह सतर्कता के लिए किया जाए। हाड़ौती के अधिकांश पिकनिक स्पॉट्स घने जंगलों या घाटियों में स्थित हैं, जहाँ नेटवर्क गायब हो जाता है। ऐसे में पिकनिक पर निकलते समय अपने साथ इमरजेंसी किट और एहतियात अवश्य रखें। पिछले दिनों देखने में आया है कि लोग ऐसी जगहों पर जहां खड़े रहना तक मुश्किल हो वहां जाकर रील्स बना रहे है। फिसलन वाली जगहों पर या पीछे गहरा पानी, झरना, या बैकग्राउण्ड़ दिखानेे के चक्कर में लोगों ने खतरें को कई गुणा बढ़ा दिया था। रील्स बनाते समय व्यक्ति में एकाग्रता व संतुलन के साथ साथ सुरक्षा के प्रति भारी उपेक्षा ही हादसों का कारण बनती है।<br /><strong>-विष्णु श्रृंगी, गोताखाेर नगर निगम कोटा</strong></p>
<p><strong>आपदा प्रबंधन और रेस्क्यू टीमें मुस्तैद</strong><br />सिविल डिफेंस और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों को मानसून के दौरान भंवरकुंज, गेपरनाथ, अलनिया और बरधा डैम जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में मुस्तैद किया गया है। प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि वे केवल अधिकृत व सुरक्षित स्थानों पर ही पर्यटन का आनंद लें और मानसून की मस्ती में अपनी सुरक्षा का ध्यान प्राथमिकता से रखें।<br /><strong>- राकेश व्यास, उपायुक्त, नगर निगम</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />हमारे द्वारा सभी संभावित खतरें वाले स्थानों काे चिन्हित करके वहां लगातार निगरानी की जाती है। पिकनिक सींजन में सभी एंट्री पर आधुनिक ट्रेकिंग सिस्टम एक्टिव रहता है। आमजन से अपील है कि केवल स्वीकृति प्राप्त स्थानों पर ही जायें व रील्स व आदि के लिये खतरे व पानी से दुरी बनाये रखें।<br /><strong>-मुथू एस, डीसीएफ मुकून्दरा हिल्स एण्ड़ टाईगर रिजर्व</strong></p>
<p>पिकनिक के दौरान बरसात या बाहर के पानी में नहाने से आपके शरीर को इन्फेक्शन हो सकता है। इसलिये घर पर आकर दौबारा से साफ पानी से नहायें ध्यान रहे पानी साफ ही पियें जिससे पानी जनित बिमारी न हो। मेडिकल फर्स्ट एड के अलावा जरूरी दवाईया अवश्य साथ रखें।<br /><strong>- डॉ. चन्द्रप्रकाश कलवार, चिकित्सा प्रभारी (क्रिटिकल केयर) सीएचसी कुन्हाड़ी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 14:15:31 +0530</pubDate>
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                <title>हादसों के बाद भी नहीं सुधरे हालात</title>
                                    <description><![CDATA[शहर में मकानों के ऊपर व पास से निकल रही हैं हाइटेंशन लाइनें।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/conditions-remain-unchanged-despite-accidents/article-159102"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)-(1)10.png" alt=""></a><br /><p>कोटा ।  <strong>केस एक:</strong> अनंतपुरा थाना क्षेत्र स्थित बरड़ा बस्ती में एक दिन पहले हाइटेंशन लाइन का इंसुलेटर टूटने से फेले करेंट से एक महिला की मौत हो गई और करीब 10 लोग बुरी तरह से झुलस गए। वहीं हादसे में दो गायों की भी मौत हो गई।</p>
<p><strong>केस दो: </strong>कुन्हाड़ी थाना क्षेत्र स्थित काली बस्ती में मार्च 2024 में धार्मिक यात्रा के दौरान झंडा हाईटेंशन लाइन से छू जाने के कारण लगे करेंट से करीब एक दर्जन लोग झुलस गए थे। हादसे में तीन लोगों की मौत भी हो गई थी।</p>
<p><strong>केस तीन:</strong> कुन्हाड़ी थाना क्षेत्र के सकतपुरा काली बस्ती में ही जुलाई 2025 में छत पर कपड़े सुखाते समय करंट लगने से एक महिला की मौत हो गई थी। वहीं महिला को बचाने के प्रयास में उनके पति भी करंट लगने से झुुलस गए थे।</p>
<p>ये तो कुछ उदाहरण मात्र हैं। उन घटनाओं व हादसों को बताने के लिए जो हाइटेंशन लाइनों के कारण हुए हैं। शहर में ऐसे कई मामले हो चुके हैं। पिछले करीब दो साल में ही आधा दर्जन से अधिक मामले हाइटेंशन लाइनों से करंट लगने के हो चुके हैं। जिनमें करीब 10 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और दर्जनों लोग झुलस चुके हैं। इतना सब कुछ होने के बावजूद अभी तक भी हालात नहीं सुधरे हैं। अभी भी शहर के इलाके हो या आस-पास के ग्रामीण इलाके। वहां मकानों के ऊपर व पास से 33 केबी व 11 केबी की हाइटेंशन लाइनें गुजर रही है। जिनसे रोजाना हजारों लोगों की जान खतरे में है। उसके बाद भी न तो ये लाइनें शिफ्ट हो रही हैं और न ही लोग वहां से हट रहे हैं। नतीजा हजारों लोगों के सिर पर रोजाना जान का खतरा मंडरा रहा है।</p>
<p><strong>हर जगह है हाइटेंशन लाइनें</strong><br />शहर के इलाके हो या ग्रामीण क्षेत्र के हाइटेंशन लाइनें हर जगह पर है। फिर चाहे वह अनंतपुरा स्थित बरड़ा बस्ती हो या शिवपुरा क्षेत्र। दादाबाड़ी का वक्फ नगर हो या कुन्हाड़ी का नांता क्षेत्र। इतना ही नहीं डीसीएम क्षेत्र के प्रेम नगर व गोविंद नगर या काली बस्ती। रेलवे कॉलोनी, भीमगंजमंडी, नयापुरा, पाटनपोल समेत शहर के सभी क्षेत्रों में हाइटेंशन लाइनें गुजर रही है। इनमें से अधिकतर जगह पर ये लाइनें मकानों के ऊपर से व मकानों के नजदीक से गुजर रही हैं।</p>
<p><strong>बरसात में अधिक खतरा</strong><br />हाइटेंशन लाइन से हर समय खतरा है। इन लाइटों में इतना अधिक करंट होता है कि वह करीब 3 से साढ़े तीन फीट से कम की दूरी पर लोगों को अपनी चपेट में ले सकते हैं। ऐसे में जिन घरों के ऊपर व पास से ये लाइनें गुजर रही हैं उनके लिए बरसात में खतरा अधिक है। बरसात के समय ऐसी जगह पर करंट फेलने व करंट लगने की घटनाएं अधिक होने की संभावना बनी हुई है।</p>
<p><strong>ऊर्जा मंत्री ने दिए थे लाइन शिफ्ट करने के निर्देश</strong><br />करीब दो साल पहले सकतपुरा की काली बस्ती में हाइटेंशन लाइन से हुए हादसे में तीन लोगों की मौत व एक दर्जन लोगों के झुलसने की घटना के बाद मौके पर पहुंचे ऊर्जा मंत्री हीरालाल नगर ने यहां से हाइटेंशन लाइनें शिफ्ट करने के आदेश दिए थे। लोगों का कहना है कि अभी तक भी वहां से लाइनें शिफ्ट नहीं हुई है। ऐसा एक ही जगह पर नहीं कई जगह पर है लेकिन लाइनें वहीं के वहीं है।</p>
<p><strong>खतरनाक लाइनें हों शिफ्ट</strong><br />लोगों का कहना है कि हाइटेंशन लाइनों से आए दिन हादसे हो रहे हैं। ऐसे में इन खतरनाक लाइनों को शिफ्ट किया जाना चाहिए। कुन्हाड़ी निवासी मोहन सिंह सोलंकी का कहना है कि नदी पार क्षेत्र की काली बस्ती में हाइटेंशन लाइनों से कई बार हादसे हो चुके हैं उसके बाद भी लाइनें शिफ्ट नहीं हुई है। जबकि चाहे मकान बाद में बने हों लेकिन हाइटेंशन लाइनों को शिफ्ट करना बिजली विभाग का काम है। शिवपुरा निवासी महेश कुमार नागर का कहना है कि हाइटेंशन लाइनें शहर से दूर व आबादी क्षेत्र से नहीं गुजरनी चाहिए। हालांकि कई लोगों ने मकान बाद में बनाए जिससे लाइनें उनके मकान के पास से निकल रही है। लेकिन मकान बनने के बाद जब लोग वहां रहने लगे हैं तो उन लाइनों को शिफ्ट करने के प्रयास किए जाएं। जिससे लोगों की जान को खतरा नहीं हो।</p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />लोगों को लाइट की सुविधा चाहिए तो इसके लिए जीएसएस से ट्रांसफार्मर तक लाइट हाइटेंशन के माध्यम से ही आती है। बिना हाइटेंशन के लाइट की सुविधा निर्बाध रूप से मिलना मुश्किल है। लेकिन हाइटेंशन लाइनें पहले डली हुई है। लोगों ने मकान बाद में बनाए हैं। जिससे वे लाइनों के नजदीक पहुंचे है। अनंतपुरा की बरड़ा बस्ती में अवैध खनन के कारण इंसुलेटर टूटने से हादसा हुआ है। हाइटेंशन लाइनों से एक निर्धारित मानक दूरी बनाए रखना आवश्यक है। विभाग की ओर से समय-समय पर लोगों को नोटिस व चेतावनी दी जाती है। लेकिन उसके बाद भी जहां अधिक लोगों के जानमाल को नुकसान का खतरा रहता है। वहां से अन्य स्थानों पर हाइटेंशन लाइन शिफ्ट की जा सकती है। लेकिन उसका आधा खर्चा लोगों को वहन करना होता है। साथ ही लाइन के साथ ही खम्बे शिफ्ट करने की जगह भी होनी चाहिए। पूर्व में कई जगह पर ऐसा किया भी गया है।<br /><strong>- शिवचरण जांगिड़, अधीक्षण अभियंता जेवीवीएनएल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 14:29:55 +0530</pubDate>
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                <title>दो वर्ष में उखड़ी सड़क, निर्माण गुणवत्ता पर ग्रामीणों का सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[निमोद-बड़गांव जर्जर सड़क: गड्ढों और बबूल की झाड़यों से बढ़ा हादसों का खतरा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/road-surface-disintegrated-within-two-years--villagers-question-construction-quality/article-158843"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)2.png" alt=""></a><br /><p>सांवतगढ़। निमोद से बड़गांव को जोड़ने वाली मुख्य सड़क बदहाल स्थिति के कारण क्षेत्रवासियों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। सड़क पर जगह-जगह बड़े गड्ढे होने से वाहन चालकों, राहगीरों और किसानों को प्रतिदिन कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। <br />सबसे अधिक परेशानी दोपहिया वाहन चालकों, स्कूली विद्यार्थियों, महिलाओं और बुजुर्गों को उठानी पड़ रही है। बारिश के दौरान गड्डों में पानी भर जाने से उनकी गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ गई है।</p>
<p>ग्रामीणों ने बताया कि यह सड़क निमोद, बड़गांव सहित आसपास के कई गांवों का प्रमुख संपर्क मार्ग है। इसी रास्ते से किसान कृषि उपज मंडी तक पहुंचाते हैं तथा विद्यार्थी स्कूल-कॉलेज आते-जाते हैं। सड़क की जर्जर स्थिति के कारण आवागमन जोखिमभरा हो गया है। <br />उपसरपंच लटूरलाल बेरवा एवं आशाराम मीपणा ने बताया कि सड़क किनारे बबूल की घनी झाड़ियां उग आने से मार्ग संकरा दिखाई देता है।</p>
<p>कई स्थानों पर शाखाएं सड़क तक फैल चुकी हैं, जिससे सामने से आने वाले वाहन दिखाई नहीं देते और दुर्घटना का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण में गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया। निर्माण के दो वर्ष पूरे होने से पहले ही डामर उखड़ गया और सड़क गड्डों में तब्दील हो गई। ग्रामीणों ने सड़क की तत्काल क्षतिग्रस्त हिस्सों के मरम्मत, पुनर्निर्माण तथा सड़क किनारे उगी झाड़ियों की शीघ्र कटाई कराने की मांग की है।</p>
<p><strong>यह कहा अधिकारी ने</strong><br />मैं स्वयं मौके का निरीक्षण करूंगा। जहां-जहां सड़क की मरम्मत की आवश्यकता होगी, वहां शीघ्र मरम्मत करवाई जाएगी। साथ ही सड़क के दोनों ओर उगे बबूल के पेड़ों एवं झाड़ियों की कटाई भी जल्द करवाई जाएगी, जिससे आवागमन सुरक्षित हो सके।<br /><strong>- सोनू नागर, एईएन सार्वजनिक निर्माण विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 14:32:08 +0530</pubDate>
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                <title>जरा संभल कर...सड़कों पर दौड़ रहे ओवरलोड यमदूत</title>
                                    <description><![CDATA[वाहनों में क्षमता से ज्यादा भूसा भरकर ले जा रहे चालक।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/proceed-with-caution----overloaded-vehicles-on-the-roads-are-like-harbingers-of-death/article-158381"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/12200-x-600-px)-(1)8.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। ओवरलोड भूसे से भरे वाहनों से सड़क हादसे होने के बावजूद भी वाहन चालक ओवरलोडिंग से बाज नहीं आ रहे हैं। इसका खामियाजा सड़क से गुजरने वाले राहगीरों एवं अन्य वाहन चालकों को भुगतना पड़ रहा हैं। शहर के विभिन्न मार्गों पर इन दिनों काफी संख्या में ओवरलोड भूसे से भरे वाहन धड़ल्ले से दौड़ऩे लगे हैं। यह ओवरलोड वाहन रात के समय अधिक तेज चलते है। सड़कों को घेर कर चलते हुए समय हादसे को निमंत्रण देते रहते हैं। इनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से शहर के विभिन्न मार्गो पर इनका धड़ल्ले से संचालन हो रहा है। ऐसे में सड़क हादसों का खतरा बना हुआ है।</p>
<p><strong>अधिक कमाई की चाहत में नियम दरकिनार</strong><br />ग्रामीण क्षेत्रों में गर्मी के मौसम में किसानों ने अब भूसा बेचना शुरू कर दिया है। इस समय अधिकांश स्थानों पर भूसे का संकट बना हुआ है। इस कारण राजस्थान के किसान पंजाब, हरियाणा और मध्यप्रदेश से भूसा मंगवा रहे हैं। यह भूसा ट्रैक्टर-ट्रॉली के साथ ही ट्रकों और अन्य वाहनों में राजस्थान के कई शहरों में भेजा जा रहा है। मध्यप्रदेश से आने वाले भूसे से भरे कई ओवरलोड वाहन इन दिनों से कोटा से गुजर रहे हैं। कमाई के लालच में कई वाहन चालक नियम कायदों की धज्जियां उड़ा रहे है और क्षमता से अधिक भूसे का परिवहन कर रहे हैं। ऐसे में दुपहिया वाहन सहित अन्य वाहन चालकों को हादसों का खतरा बना हुआ है।</p>
<p><strong>ओवरलोड को ओवरटेक करना काफी खतरनाक</strong><br />सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए आए दिन सरकार व प्रशासन की ओर से जागरूकता अभियान चलाया जाता है, लेकिन दुर्घटनाओं को न्योता दे रहे भूसे से भरे ओवरलोड वाहनों पर किसी जिम्मेदार विभाग का ध्यान नहीं है। निर्धारित वजन से अधिक भूसा इन वाहनों में भरा रहता है। वाहनों में भूसा भरने के बाद हालत यह होती है कि दोनों तरफ और पीछे कई फिट बाहर तक उसका हिस्सा निकला रहता है। ऐसे में सड़क पर चलने वाले अन्य वाहन चालकों को सामने कुछ भी नजर नहीं आ पाता है। इसी दौरान ओवरलोड वाहन को ओवरटेक करने के दौरान कई बार सड़क दुर्घटना तक हो जाती है। इसके बावजूद ओवरलोड वाहनों का धड़ल्ले से संचालन हो रहा है।</p>
<p><strong>सुबह व रात के समय अधिक संचालन</strong><br />कोटा शहर में दिन के समय ओवरलोड वाहनों की एंट्री बंद हैं। इस कारण भूसे का परिवहन सुबह जल्दी और रात के समय अधिक होता है। इन दिनों से मध्यप्रदेश से भूसा लेकर आने वाले वाहन रायपुरा, देवली अरब और बोरखेड़ा मार्ग से रात के समय गुजरते हुए नजर आ रहे हैं। पुलिस की कार्रवाई से बचने के लिए वाहन चालक सुबह व रात को वाहन का संचालन करते हैं। इन वाहनों में पीछे व साइडों में तिरपाल लगाकर इतना भूसा भर दिया जाता है कि पीछे से आने वाला वाहन या उसके होर्न की आवाज तक सुनाई नहीं देती है। वहीं साइडों से निकल रहे भूसे से वाहन चालकों के टकराकर गिरने की आशंका रहती है।</p>
<p>रायपुरा चौराहे से देवली अरब रोड पर इन दिनों काफी संख्या में भूसे से भरे ओवरलोड वाहनों का संचालन हो रहा है। इन वाहनों के कारण कई बार जाम की स्थिति तक हो जाती है। वहीं पीछे चलने वाले वाहन चालकों को सामने कुछ नजर नहीं आता है। ऐसे में दुर्घटना का खतरा बना रहता है।<br /><strong>-सुरेश जांगिड, दुपहिया वाहन चालक</strong></p>
<p>इन दिनों भूसे से भरे ओवरलोड वाहन हमारी कॉलोनी के सामने से रोजाना निकल रहे हैं। कई वाहनों से भूसा उड़ता रहता है, जो हमारे मकानों तक में घुस जाता है। इससे सफाई में काफी परेशानी होती है। पुलिस को इनके संचालन पर रोक लगानी चाहिए।<br /><strong>-रोशनी देवी, निवासी रायपुरा</strong></p>
<p>ओवरलोड वाहनों के खिलाफ नियमित रूप से यातायात पुलिस द्वारा कार्रवाई की जाती है। इनके चालान भी बनाए जाते हैं। अब भूसे से भरे वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए रायपुरा से देवली अरब रोड पर लगातार चैकिंग की जाएगी।<br /><strong>-पूरण सिंह, ट्रैफिक इंस्पेक्टर, कोटा</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 15:02:08 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>बरसात से पहले ही सड़कों का हुआ बुरा हाल, पानी भरने पर रहेगा हादसों का खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[कहीं गड्ढे हैं तो कहीं सड़कें खुदी पड़ी हैं, वहीं सीवरेज कार्य के बाद कई सड़कों की मरम्मत भी अधूरी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/roads-in-poor-condition-even-before-the-monsoon/article-157558"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/111200-x-600-px)-(8)4.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। <strong>दृश्य एक:</strong> जयपुर गोल्डन से ज्वाला तोप की तरफ जाने वाले रास्ते पर सरोवर टॉकीज के सामने मंदिर के पीछे तालाब के सहारे की सड़क पर इतने अधिक गड्ढ़े हो रहे हैं कि वहां से निकलने वाले वाहन हिचकोले खा रहे हैं। विशेष रूप से दो पहिया वाहनों का यहां संतुलन बिगड़ रहा है। जिससे रोजाना कई वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं।</p>
<p><strong>दृश्य दो:</strong> एरोड्राम सर्किल पर अंरडपास के ऊपर की सड़क जो झालावाड़ हाइवे रोड है। यहां से दिनभर बड़ी संख्या में और तेजी से वाहन निकल रहे हैं। वह सड़क बीच से बदहाल हो रही है। जिससे वहां से गुजरने वाले वाहनों के गड्ढ़ों से बचकर निकलने के कारण कई बार वाहन आपस में टकरा रहे हैं। ऐसे में हादसे का खतरा बना हुआ है।</p>
<p><strong>दृश्य तीन:</strong> डीसीएम रोड स्थित इंद्रप्रस्थ औद्योगिक क्षेत्र में एक सड़क का बीच से काफी बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो रहा है। ऐसे में वहां से दो पहिया वाहन ही नहीं चार पहिया वाहनों तक को निकलने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वाहन चालकों को इन गड्ढ़ों से बचकर निकलना पड़ रहा है।</p>
<p>ये तो उदाहरण मात्र हैं शहर की सड़कों के बदहाली को बताने के लिए। ऐसी कई अन्य सड़कें व मुख्य मार्ग हैं जहां बरसात से पहले ही सड़कों की हालत खराब हो रही है। कहीं गड्ढ़े हो रहे हैं तो कहीं सड़कें खुदी पड़ी है। कहीं सीवरेज के लिए खोदी गई सड़कों को सही ढंग से नहीं भरा गया। जिससे सड़कें बीच से धंस गई है। ऐसे में अभी ही उनसे हादसों का खतरा बना हुआ है। जबकि कुछ समय बाद बरसात शुरु होने वाली है। ऐसे में इन गड्ढों व टूटी सड़कों पर पानी भरने से उनका अंदाजा वाहन चालकों को नहीं होने पर इनसे गुजरने वाले वाहनों का संतुलन बिगडऩे पर हादसों का खतरा अधिक होने की संभावना है।</p>
<p><strong>हमेशा होती मरम्मत, फिर भी हालत खराब</strong><br />सरोवर टॉकीज के सामने मंदिर के पीछे वाली सड़क का छोटा सा हिस्सा पिछले कई सालों से बार-बार खराब हो रहा है। संबंधित विभाग द्वारा इसे हर बार सही भी कराया जाता है। लेकिन यह अधिक समय तक नहीं टिक पाता। कुछ समय बाद फिर से वही पुरानी हालत हो जाती है। गत वर्ष भी बरसात में यहां की सड़क खराब होने से इसमें पानी भरने पर वाहनों का संतुलन बिगड़ रहा था। लोगों की परेशानी को देखते हुए इसे सही भी करवा दिया था। लेकिन वर्तमान में फिर वही पुरानी जैसी हालत हो गई है। शुक्रवार को भी इस जगह पर कई वाहनों का संतुलन बिगड़ा। जिससे पीछे से आने वाले अन्य वाहनों को गति धीमी करनी पड़ी। वरना बड़ा हादसा हो सकता था। बरसात में यहां हादसों की संभावना अधिक है।</p>
<p><strong>सीवरेज के लिए खोदी सड़कों की हालत अधिक खराब</strong><br />शहर में डामर सड़क हो या सीसी अधिकतर की हालत खराब है। लेकिन विशेष रूप से सीवरेज के लिए बीच से खोदी गई सीसी सड़कों की हालत अधिक खराब है। हर सड़क बीच से खुदी हुई है। लाइन डालने के बाद उनकी मरम्मत तो की गई लेकिन सही ढ़ंग से नहीं होने से अधिकतर सड़कों की हालत खराब है। जिससे बरसात में पानी भरने पर वहां गड्ढ़े होने से हादसों का खतरा अधिक है। यह स्थिति किसी एक या दो जगह की नहीं वरन् पूरे शहर की है। फिर चाहे वह छावनी का क्षेत्र हो या धानमंडी का। नयापुरा का क्षेत्र हो या विज्ञान नगर का। विज्ञान नगर मुक्तिधाम से पीएफ ऑफिस के सामने से कॉमर्स कॉलेज तक की सड़क और विज्ञान नगर मुख्य मार्ग की सड़क, नयापुरा मुक्तिमार्ग की सड़क सभी जगह पर ऐसी स्थिति है कि दो पहिया वाहनों का चलना दूभर हो रहा है।</p>
<p><strong>नाले को व्यू कटर से ढका, सड़क बदहाल</strong><br />औद्योगिक क्षेत्र स्थित इंद्रा गांधी नगर में एसएफएस चौराहे से प्रेम नगर की तरफ जाने वाले रास्ते में नाले पर पुलिया बनी हुई है। हाल ही में नगर निगम की ओर से उस पुलिया पर दोनों तरफ दीवार खड़ी कर व्यू कटर लगा दिए। जिससे नाले की गंदगी नजर नहीं आए। लेकिन उस सड़क को सही नहीं किया गया। निगम सूत्रों का कहना है कि यह सड़क केडीए के अधीन है। ऐसे में उस सड़क पर इतने अधिक व बड़े-बड़े गड्ढ़ें हैं कि वहां जरा सी बरसात में ही पानी भर गया। जिससे वाहनों व पैदल ही लोगों को निकलने पर संतुलन बिगडऩे से हादसों का खतरा बना हुआ है। </p>
<p><strong>संबंधित विभाग सुधारे सड़कें</strong><br />छावनी निवासी ऐश्वर्य श्रृंगी का कहना है कि नगर निगम हो या केडीए। सड़कों को सही करना इनकी जिम्मेदारी है। कई सड़कें तो सीवरेज लाइनों के कारण खराब हुई है। जिन विभाग के अधीन जो सड़क आती है उसे सही करवानी चाहिए। वरना बरसात में ये सही होंगी नहीं। जिससे लोगों को महीनों तक परेशानी व हादसों का दंश झेलने को मजबूर होना पड़ेगा।</p>
<p>प्रेम नगर निवासी मुकेश जोनवाल का कहना है कि इंद्रा गांधी नगर के इस नाले की पुलिया से रोजाना बड़ी संख्या में लोग गुजरते हैं। यहां से कई निजी व सरकारी स्कूलों के ऑटो व वैन भीबच्चों को लेकर जाती है। अभी गर्मी की छुट्टी है जिससे बच्चों के वाहन तो नहीं आ-जा रहे। लेकिन स्थानीय लोग तो निकल ही रहे हैं। अभी से यह हालत है तो बरसात में हालत अधिक खराब होने से हादसों का खतरा बना हुआ है। नगर निगम या केडीए जिस भी विभाग के अधीन सड़क आती है उन्हें बरसात से पहले सही करवाना चाहिए।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />समय-समय पर सड़कों की मरम्मत करवाई जाती है। सीवरेज लाइन डालने के बाद उस सड़क को सही करने की जिम्मेदारी संबंधित संवेदक फर्म की रहती है। फिर भी यदि कहीं सड़कों पर गड्ढ़े हैं तो उनका पता करवाकर सही करवाया जाएगा।<br /><strong>- मुकेश कुमार चौधरी, सचिव कोटा विकास प्राधिकरण </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 14:59:02 +0530</pubDate>
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                <title>असर का खबर - नाला निर्माण का तेज हुआ काम</title>
                                    <description><![CDATA[पिछले दिनों नाले को खोदकर खुला छोड़ दिया गया था। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-report-%E2%80%93-work-on-drain-construction-accelerated/article-157553"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/111200-x-600-px)-(6)8.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। बसंत विहार क्षेत्र में चल रहे नाले का निर्माण कार्य तेज हो गया है। नाले को सीसी बनाने के लिए सरियों को ढकने का काम किया जा रहा है। कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से बसंत विहार क्षेत्र में नाला निर्माण का काम किया जा रहा है। इसके लिए पिछले दिनों नाले को खोदकर खुला छोड़ दिया गया था। जिससे कई घरों के आगे ऐसी स्थिति हो गई थी कि लोग घरों से बाहर नहीं निकल पा रहे थे। घरों के आगे लकड़ी के पाटे लगाकर वाहन निकलना पड़ रहा है। जिससे कभी भी हादसा होने का खतरा बना हुआ है।</p>
<p><strong>नवज्योति ने किया था मामला प्रकाशित</strong><br />गौरतलब है कि बसंत विहार में नाला निर्माण के दौरान उसे खुला व अधूरा छोडऩे का मामला दैनिक नवज्योति ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। समाचार पत्र में 16 जून के अंक में पेज 7 पर 'हादसे के बाद भी नहीं चेता प्रशासन' शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। जिसमें नाला निर्माण के दौरान उसे अधूरा छोडऩे से स्थानीय लोगों को हो रही पीड़ा को उजागर किया था। समाचार प्रकाशित होने के बाद केडीए अधिकारी व संवेदक सक्रिय हुए। उसके बाद नाला निर्माण के काम में तेजी से काम शुरु किया गया।</p>
<p>स्थानीय निवासी अरविंद विजय ने बताया कि एक साथ कई श्रमिक आकर काम कर रहे हैं। नाले में लगे सरियों को कवर करने का काम किया गया। जिस तरह से काम किया जा रहा है। उससे स्पष्ट है कि नाला जल्दी ही बनकर तैयार हो जाएगा। जिससे लोगों की परेशानी कम होने के साथ ही हादसों का खतरा भी नहीं रहेगा।</p>
<p>इधर केडीए अधिकारियों का कहना है कि संवेदक को निर्देश दिए हुए हैं कि निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा के पूरे इंतजाम किए जाएं। साथ ही काम ऐसे किया जाए जिससे लोगों को परेशानी नहीं हो। बसंत विहार में नाले का काम तेजी से किया जा रहा है। शीघ्र ही काम पूरा हो जाएगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 14:15:36 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>देई से नैनवां के बीच स्टेट हाइवे का मामला : गड्डों से छलनी मार्ग बना हादसों का कारण</title>
                                    <description><![CDATA[वर्षाकाल में गड्डों में पानी भरने  से दुर्घटनाओं की आशंका और अधिक बढ़ जाएगी। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/issue-regarding-the-state-highway-between-dei-and-nainwa--pothole-riddled-road-becomes-a-cause-of-accidents/article-156363"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/1111200-x-600-px)-(2)12.png" alt=""></a><br /><p>देई। देई-नैनवां राज्य राजमार्ग संख्या 34 पर जगह-जगह बने गहरे गड्डों के कारण वाहन चालकों में भारी रोष व्याप्त है। विशेष रूप से देई से नैनवां के बीच सड़क की स्थिति अत्यंत खराब हो चुकी है, जिससे आवागमन करने वाले लोगों को प्रतिदिन परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सड़क पर बने गड्डों के कारण वाहनों का संतुलन बिगड़ रहा है और दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। पीपल्या तथा बांसखोल के जंगल क्षेत्र में भी सड़क पर अनेक स्थानों पर गहरे गड्ढे बने हुए हैं। </p>
<p>स्थानीय लोगों के अनुसार इन गड्डों के कारण आए दिन छोटी-बड़ी दुर्घटनाएं हो रही हैं। समय रहते मरम्मत नहीं होने पर किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।अधिवक्ता संजय दीवाना एवं नरेश मीणा ने बताया कि मार्ग कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो चुका है। सड़क पर बने गड्डों का सही अनुमान नहीं लग पाने से वाहन चालक दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि आगामी वर्षाकाल में गड्डों में पानी भर जाने से दुर्घटनाओं की आशंका और अधिक बढ़ जाएगी। ऐसे में सार्वजनिक निर्माण विभाग को वर्षा ऋतु से पहले सड़क की मरम्मत करानी चाहिए।</p>
<p>समाजसेवी अशोक जिंदल ने बताया कि कस्बे के बूंदी मार्ग पर एक वर्ष से अधिक समय से डामर उखड़ चुका है और गिट्टी बाहर निकल आई है। वर्षाकाल में सड़क पर पानी भर जाने से लोगों का आवागमन दूभर हो जाता है। उन्होंने मार्ग के शीघ्र डामरीकरण की मांग की।वहीं जेतपुर में नाईपुरिया के आगे निकले नुकीले पत्थरों से दुपहिया वाहन चालक गिरकर चोटिल हो रहे हैं। स्थानीय लोगों ने विभाग से तत्काल सुधार कार्य कराने की मांग की है।</p>
<p>स्टेट हाईवे 34 की नैनवां से जेतपुर सडक के मरम्मत के लिए टेण्डर हो चुके है। मौसम साफ रहने व डामर मिलने पर शीघ्र मरम्मत की जायेगी।<br /><strong>- हरिराम मीना, अधिशाषी अभियंता, सार्वजनिक निर्माण विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 15:53:55 +0530</pubDate>
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                <title>गड्डों में तब्दील स्टेट हाइवे, हादसों के डर से सहमे राहगीर</title>
                                    <description><![CDATA[कवाई में जीएसएस से मंडी तक सड़क बदहाल,  दुकानदार ने खुद भरे गड्डे। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/state-highway-riddled-with-potholes--commuters-fear-accidents/article-156362"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/1111200-x-600-px)-(1)18.png" alt=""></a><br /><p>कवाई। कवाई कस्बे से होकर गुजरने वाले कोटा-धरनावदा स्टेट हाईवे पर बिजली के जीएसेएस से लेकर कृषि उपज मंडी के आगे तक सड़क की हालत बेहद खराब हो चुकी है। मार्ग पर जगह-जगह गहरे गड्ढे हो जाने से वाहन चालकों और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार इस मार्ग पर पहले भी कई बार वाहन चालक गड्डों के कारण संतुलन खोकर गिर चुके हैं, जिससे कई लोग चोटिल हुए हैं। पूर्व में भी इस सड़क पर अनेक हादसे हो चुके हैं, लेकिन अब तक सड़क की मरम्मत नहीं होने से समस्या लगातार बनी हुई है।  क्षेत्रवासियों का कहना है कि दिन के समय तो गड्ढे दिखाई दे जाते हैं, लेकिन रात के समय दुर्घटना की आशंका और अधिक बढ़ जाती है। विशेषकर दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह मार्ग जोखिम भरा बन गया है। लोगों ने संबंधित विभाग और प्रशासन से शीघ्र सड़क की मरम्मत करवाने तथा गड्डों को भरवाने की मांग की है, ताकि किसी बड़े हादसे से पहले समस्या का स्थायी समाधान हो सके।</p>
<p><strong>दुकानदार ने दिखाई जिम्मेदारी, प्रशासनिक मरम्मत का इंतजार</strong><br />आमजन की समस्या को देखते हुए वहीं पास के दुकानदार ने स्वयं पहला करते हुए कई गड्डों में कंकर और मिट्टी डलवाकर अस्थायी राहत देने का प्रयास किया है। हालांकि यह व्यवस्था केवल अस्थायी समाधान है और बारिश या भारी वाहनों की आवाजाही के बाद स्थिति फिर से गंभीर हो जाती है। स्थानीय निवासी रोहित पारेता ने बताया कि उनके मकान के पास से गुजरने वाली इस मुख्य सड़क के किनारे अभी तक एक तरफ नाला नहीं बना है। इसी के चलते घरों का पानी सड़क पर भर जाता है और गहरे गड्डों में जमा हो जाता है। ऐसे में वाहन चालकों को यह अंदाजा नहीं लग पाता कि सड़क पर पानी भरा है या उसके नीचे गहरा गड्डा है। पानी से ढके गड्ढे दुर्घटनाओं का कारण बन जाता हैं और विशेष रूप से दोपहिया वाहन चालक इनके कारण हादसों का शिकार हो सकते हैं। इस सड़क की मरम्मत का जल्द से जल्द मरम्मत कार्य शुरू किया जाए ताकि बरसात के मौसम में दुर्घटनाओं की आशंकाओं से राहत मिल सके।</p>
<p>सांगोद से कवाई तक स्टेट हाईवे के नवीनीकरण (रिन्यूवल) का कार्य प्रगति पर है। स्टेट हाईवे सड़क का नवीनीकरण कार्य सांगोद से बपावर तक पूर्ण किया जा चुका है। शेष बपावर से कवाई तक का कार्य भी शीघ्र शुरू कर पूरा कराया जाएगा। कार्य वर्तमान में प्रगति पर है तथा जल्द ही संपूर्ण मार्ग का नवीनीकरण कर आमजन को बेहतर एवं सुगम आवागमन सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।<br /><strong>- पूजा नामा, परियोजना अधिकारी, स्टेट हाईवे कोटा </strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 15:52:11 +0530</pubDate>
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                <title>अधूरी सड़क बन रही हादसों का कारण, ग्रामीणों में रोष</title>
                                    <description><![CDATA[खड़िया-उमरदा मार्ग पर गिट्टी डालकर रोका निर्माण कार्य।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/unfinished-road-becomes-a-cause-for-accidents--villagers-outraged/article-153528"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(2)41.png" alt=""></a><br /><p>बपावरकलां। आदर्श ग्राम पंचायत खड़िया में निर्माणाधीन डामरी सड़क  ग्रामीणों के लिए परेशानी और हादसों बनाई है। का कारण बनती जा रही है।  बारां-झालावाड़ मेगा हाइवे से खड़िया होकर उमरदा जाने वाले मुख्य मार्ग पर करीब डेढ़ किलोमीटर हिस्से में ठेकेदार द्वारा सड़क खोदकर  गिट्टी डालने के बाद निर्माण कार्य  अधूरा छोड़ दिया गया है। पिछले डेढ़  माह से बंद पड़े काम के कारण आए दिन दोपहिया वाहन चालक दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा खड़िया-उमरदा-अरनिया मार्ग का निर्माण कार्य स्वीकृत किया गया था।, ठेकेदार ने संड़क पर मोटी और नुकीली गिट्टी डाल दी, लेकिन उसके बाद कार्य बंद कर दिया। सड़क पर फैली गिट्टियों के कारण बाइक चालकों का संतुलन बिगड़ रहा है और लगातार हादसे हो रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि हाल ही में खड़िया निवासी प्रमोद मेघवाल की हो पत्नी सड़र्क पर फिसलकर घायल गई, जिससे परिवार को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा। इससे पहले प्रभुलाल गोचर की पत्नी की भी इसी सड़क पर गिट्टी में श्वाइक फिसलने से मौत हो चुकी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय पर सड़क निर्माण पूरा नहीं हुआ तो बारिश के मौसम में हालात और गंभीर हो जाएंगे।</p>
<p><strong>सड़कनिर्माण पीडब्ल्यूडी की जिम्मेदारी</strong><br />मंडल कांग्रेस अध्यक्ष विशाल मीणा ने कहा कि सड़क निर्माण समय पर करवाना सार्वजनिक निर्माण विभाग की जिम्मेदारी है। यदि डामर महंगा हो गया है तो इसका खामियाजा आमजन को नहीं भुगतना चाहिए।</p>
<p>कार्य में विलंब हुआ है। ठेकेदार को नोटिस देकर पाबंद किया जोएगा तथा जल्द ही निर्माण कार्य शुरू करवाने का प्रयास किया जा रहा है। अन्यथा ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की<br />जाएगी। <br /><strong>- पवन कुमार भगत, एईएन, सार्वजनिक निर्माण विभाग सांगोद</strong></p>
<p>वह अपनी पत्नी के साथ बाइक से जा रहे थे, तभी गिट्टी में बाइक फिसल गई और उनकी पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गई। सार्वजनिक निर्माण विभाग से जल्द सड़क निर्माण शुरू कराने की मांग की है।<br /><strong>- प्रमोद कुमार मेघवाल, ग्रामवासी</strong></p>
<p>यदि ठेकेदार काम करने का इच्छुक नहीं है तो विभाग किसी अन्य एजेंसी से निर्माण कार्य करवाए। जब समय पर काम पूरा नहीं करना था तो सड़क को खोदकर अधूरा क्यों छोड़ दिया गया।<br /><strong>- हरिराम, ग्रामीण</strong></p>
<p>पूरी विधानसभा क्षेत्र में कई कई सड़कें इसी तरह अधूरी पड़ी हैं और लोग दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं। <br /><strong>- मिर्जाशकील अहमद, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष, सांगोद</strong></p>
<p><strong>जल्द शुरू करवाया जाएगा निर्माण कार्य</strong><br />भाजपा मंडल अध्यक्ष राजेश शर्मा ने बताया कि ठेकेदार से बातचीत की गई है और जल्द ही निर्माण कार्य शुरू करवाया जाएगा। उन्होंने कहा कि डामर महंगा होना देरी का कारण हो सकता है, लेकिन कार्यसमय पर पूरा होना चाहिए। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 May 2026 14:44:19 +0530</pubDate>
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                <title>जर्जर भवन ढ़ह रहे, जिम्मेदार अधिकारी मौन</title>
                                    <description><![CDATA[ठोस कार्रवाई नहीं होने से इस तरह के हादसे हो रहे हैं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/dilapidated-buildings-collapsing--responsible-officials-remain-silent/article-152863"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(4)9.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में बहुमंजिला बिल्डि़ंगों के गिरने का मंगलवार को तीन माह में दूसरा बड़ा हादसा हुआ है। इन हादसों के बाद भी सबक नहीं लेते हुए जिम्मेदार अधिकारी पुराने व जर्जर भवनों पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। जवाहर नगर थाना क्षेत्र स्थित इंद्र विहार में तीन माह पहले 7 फरवरी को एक नॉनवेज रेस्टोरेंट की बिल्डिंग धराशाही हो गई थी। इसका कारण उस बिल्डिंग के पास अन्य बिल्डिंग में चल रहा निर्माण कार्य बताया गया था। जिससे इस रेस्टोरेंट की बिल्डिंग में दबने से दो लोगों की मौत हो गई थी। वहीं एक महिला का पैर काटना पड़ा था। उस हादसे के बाद कुछ समय तक तो नगर निगम व केडीए प्रशासन हरकत में आया और अवैध निर्माण को नोटिस दिए। जर्जर मकानों व भवनों का सर्वे कर उन्हें मकान मालिक द्वारा या तो स्वयं गिराने या निगम के स्तर पर गिरवाकर खर्चा मकान मालिकों से लेने का आदेश जारी किया गया। लेकिन उस हादसे के कुछ समय बाद सभी जिम्मेदार विभागों ने आगे कोई कार्रवाई नहीं की।इसी का नतीजा है कि मंगलवार को एक बार फिर से तीन मंजिला पुराने मकान के गिरने का हादसा हो गया। इस मकान में गनीमत रही कि वर्तमान में कोई नहीं रह रहा था। वरना पड़ा हादसा हो सकता था।</p>
<p><strong>भीड़भाड़ वाला इलाका</strong><br />प्रत्यक्ष दर्शियों ने बताया कि घौंसी मौहल्ले में जिस जगह यह मकान गिरा वह काफी भीड़भाड़ वाला क्षेत्र है। हालांकि गली संकरी होने से वहां लोगों के निकलने के बाद यदि किसी पर मकान का मलबा गिरता तो भी कई लोगों की जान जा सकती थी। मकान गिरते ही मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। हालांकि मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारियों ने मलबे व मकान के आस-पास किसी को भी जाने से रोक दिया। जिससे किसी को कोई चोट नहीं लगे। उसके बाद भी लोग रात तक वहीं डटे रहे।</p>
<p><strong>सामने मकान से बनाया लाइव वीडियो</strong><br />जिस समय यह मकान गिरा उस समय उसके सामने वाले मकान से एक बच्चे द्वारा उसका वीडियो बनाया जा रहा था। हादसे के बाद तेजी से वायरल हुए मकान गिरने के उस लाइव वीडियो में आवाज भी सुनाई दे रही है कि मैं वीडियो बना रहा हूं। साथ ही लोगों के चिल्लाने की आवाजें भी आ रही है। वहीं मकान में पहले छज्जा गिरने और उसके कुछ ही सैकंड में पूरा मकान ताश के पत्तों की तरह धराशाही होता दिख रहा है। हादसे में कई वाहन व सामान दबे हैं। वहीं आस-पास धार्मिक स्थान व अन्य मकानों को भी नुकसान पहुंचा है।</p>
<p><strong>मकान गिरते ही मचा हाहाकार</strong><br />जैसे ही मकान गिरा वहां लोगों की भीड़ जमा हो गई। सभी को लगा कि मकान के मलबे में कोई दबा है। ऐसे में आस-पास हाहाकार मच गया। लोग चिल्लाने लगे कि कोई दबा तो नहीं। काफी देर तक लोगों में व प्रशासन में भी आशंका बनी रही। लेकिन जांच के बाद निगम व पुलिस अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की कि मलबे में फिलहाल किसी के दबे होने की कोई जानकारी नहीं है। मकान में काम कर रहे महिला पुरुष श्रमिक व उनका एक बच्चा हादसे से पहले वहां से दूर हट गए थे।</p>
<p><strong>मकान को लेकर विवाद ही स्थिति बनी</strong><br />तीन मंजिला इस पुराने मकान के गिरने के बाद इसे लेकर मौके पर विवाद की स्थिति भी बनी। मौके पर एक मंगलमुखी  पहुंची और उन्होंने दावा किया कि यह मकान उनकी गुरु रेखा का है। उन्होंने इस मकान की चाबी उन्हें दी थी। लेकिन वह हरिद्वार गई हुई थी। इस कारण से मकान की चाबी आयशा अंसारी को दे गई थी। जबकि किसी ने बताया कि यह मकान आयशा अंसारी का है। मंगलमुखी ने बताया कि वे हरिद्वार से आई तो उन्हें मकान गिरा हुआ मिला है। उनकी जानकारी के बिना ही मकान की मरम्मत का काम कराया जा रहा था। इस मकान को लेकर मौके पर विवाद की स्थिति भी देखने को मिली। जिसे मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों ने समझाइश से शांत कराया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मकान के टाइगर की जांच की जाएगी। फिलहाल प्राथमिकता मलबा हटाने व लोगों को सुरक्षित करना है।</p>
<p><strong>अभी भी चिढ़ा रहे हैं पुराने व जर्जर मकान</strong><br />शहर में अभी भी बड़ी संख्या में पुराने व जर्जर मकान जैसे के तैसे खड़े हुए हैं। यह प्रशासन को चिढ़ा रहे हैं। प्रशासन द्वारा पुराने शहर के सूरजपोल से मोखापाड़ा, कैथूनीपोल से लालबुर्ज तक और नयापुरा व स्टेशन समेत कई जगह पर पुराने व जर्जर मकानों का सर्वे कराया गया है। उनके खिलाफ कार्रवाई के दावे भी किए गए लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। जिससे इस तरह के हादसे हो रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 May 2026 14:20:31 +0530</pubDate>
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                <title>सीसी के लिए खोदी सड़क, जाम व हादसों का खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[डाली गई सीवरेज लाइन के चैम्बर काफी बाहर तक निकल गए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/road-dug-up-for-concrete-paving--risk-of-traffic-jams-and-accidents/article-152724"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)22.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से छावनी मेन रोड पर डामर की जगह सीसी रोड बनायी जा रही है। लेकिन उसके लिए खोदी गई सड़क वहां से गुजरने वालों के लिए परेशानी का कारण बन रही है। दिनभर जाम व हादसों का खतरा बना हुआ है। केडीए की ओर से छावनी में डॉ. रामकुमार चौराहे से मुख्य बाजार में होते हुए रामचंद्रपुरा तक सीसी रोड काफी समय पहले बनाई जा चुकी है। ऐसे में जहां डामर रोड बरसात के समय बार-बार गड्ढ़ो में तब्दील होने से लोगों के लिए हादसों कारण बन रही थी। उससे काफी राहत मिली है। वहीं अब मेन रोड पर चौराहे के आस-पास की सड़क पर जहां हर बार बरसात में पानी भरने से गड्ढ़े हो रहे थे। उसे भी सीसी किया जा रहा है। इसके लिए संवेदक द्वारा पिछले कई दिन से सड़क को खोदकर छोड़ा हुआ है। डामर सड़क को खोदने से वहां डाली गई सीवरेज लाइन के चैम्बर काफी बाहर तक निकल गए हैं। ऐसे में यह मार्ग काफी व्यस्त होने से यहां वाहनों का आवागमन बना रहता है। ऐसे में यहां दिनभर वाहनों का जाम व छोटे वाहनों विशेष रूप से ई रिक् शा के पलटने व दो पहिया वाहनों के संतुलन बिगडऩे से गिरने का खतरा बना हुआ है।</p>
<p><strong>चौराहा है तो चार तरफ से आ रहा ट्रैफिक</strong><br />स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह चौराहा है इस कारण से यहां चार तरफ से वाहन निकल रहे हैं। छावनी अंदर की कॉलोनियों से चौराहे की तरफ जाने वाले, चौराहे से अंदर कॉलोनी में जाने वाले, बंगाली कॉलोनी की तरफ से आने व उधर की तरफ जाने वाले वाहनों के एक साथ आने से वहां दिनभर जाम की स्थिति बनी हुई है। इतना ही नहीं सुबह के समय तो थोक फल सब्जीमंडी के लोडिंग वाहन तक निकल रहे हैं। जिससे उनका कई बार संतुलन बिगड़ चुका है। वहीं सोमवार को बरसात होने से वहां खुदी सड़क में पानी भरने से कीचड़ हो गया। जिससे हादसों का खतरा अधिक बना रहा।</p>
<p><strong>काम होना अच्छा है लेकिन जल्दी हो</strong><br />छावनी निवासी देवेश तिवारी ने बताया कि केडीए की ओर से चौराहे की सड़क को सीसी किया जा रहा है। यह अच्छा काम होगा लेकिन उसे कई दिन तक खोदकर खुला छोड़ा हुआ है। जिससे मेन रोड होने से वहां से निकलने वालों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।<br />छावनी निवासी राकेश जैन व मोहम्मद इसरार ने बताया कि केडीए द्वारा संवेदक से काम कराया जा रहा है तो उसकी मॉनिटरिंग भी होनी चाहिए। जिससे संवेदक काम को समय पर और बेहतर ढ़ंग से करे। जैन ने बताया कि सड़क खुदी होने से वहां रास्ता उबड़ खाबड़ हो रहा है। जिससे दो पहिया वाहन असंतुति होकर हादसों का शिकार हो रहे हैं। ऐसे में यह काम जितना जल्दी पूरा होगा उतना अच्छा रहेगा।</p>
<p><strong>बरसात के कारण देरी हुई, काम जल्दी पूरा होगा</strong><br />इधर केडीए अधिकारियों का कहना है कि चौराहे का कुछ हिस्सा डामर का है। जिससे वहा बरसात में पानी भरने पर बार-बार सड़क खराब हो रही है। उसे सही करने के लिए यहां सीसी रोड बनाया जा रहा है। इसका काम शुरु होना था लेकिन बरसात आने से काम अटक गया। मंगलवार को काम शुरु कर जल्दी ही पूरा कर दिया जाएगा। संवेदक का कहना है कि पहले एक तरफ की सड़क सीसी करने के बाद दूसरी तरफ की की जाएगी। जिससे आवागमन सुचारू रह सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 May 2026 14:14:50 +0530</pubDate>
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                <title>रॉन्ग साइड ड्राइविंग, हादसों का खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[छावनी सर्किल और घोड़ा वाले बाबा सर्किल पर खुलेआम टूट रहे नियम।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/wrong-side-driving--a-looming-threat-of-accidents/article-151937"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/wrong-side-draiving,-hadason-ka-khatara...kota-news-28.04.2026-(1).jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में यातायात नियमों की अनदेखी लगातार बढ़ती जा रही है। खासकर रॉन्ग साइड से वाहन चलाने की प्रवृत्ति अब आम होती जा रही है, जिससे सड़क हादसों का खतरा बढ़ गया है। लोग शॉर्टकट के चक्कर में न केवल अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं, बल्कि दूसरों की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा पैदा कर रहे हैं। शहर के कोटड़ी सर्किल, गुमानपुरा, नाग नागिन मंदिर से बड़ तिराहा और घोड़ा वाले बाबा सर्किल जैसे व्यस्त चौराहों पर यह समस्या सबसे ज्यादा देखने को मिल रही है। यहां दिनभर बड़ी संख्या में वाहन चालक नियमों की अनदेखी करते हुए रॉन्ग साइड से गुजरते हैं। खासतौर पर ऑफिस टाइम और बाजार के व्यस्त समय में हालात और भी खतरनाक हो जाते हैं। इस तरह की लापरवाही सड़क दुर्घटनाओं का बड़ा कारण बन सकती है। अचानक सामने से आने वाले वाहनों के कारण टक्कर की आशंका बनी रहती है, जिससे कभी भी गंभीर हादसा हो सकता है।</p>
<p><strong>नियम ठंडे, लापरवाही गर्म: शहर में बेखौफ रॉन्ग साइड का खेल</strong><br />शहर में यातायात नियमों की अनदेखी अब आम होती जा रही है। पुलिस द्वारा चालान की कार्रवाई धीमी पड़ने के बाद लोगों में नियमों का डर कम हो गया है। नतीजतन वाहन चालक मनमर्जी से रॉन्ग साइड चलकर और शॉर्टकट अपनाकर सड़कों पर फर्राटा भर रहे हैं। इससे न सिर्फ यातायात व्यवस्था बिगड़ रही है, बल्कि हादसों का खतरा भी लगातार बढ़ रहा है। खासकर व्यस्त चौराहों और मुख्य मार्गों पर स्थिति अधिक चिंताजनक बनी हुई है, जहां छोटी सी लापरवाही बड़े हादसे का कारण बन सकती है।</p>
<p><strong>खतरे को न्योता</strong><br />रॉन्ग साइड ड्राइविंग सड़क हादसों के प्रमुख कारणों में शामिल है। अचानक सामने से वाहन आने पर ड्राइवर काे संभलने का मौका नहीं मिलता, जिससे गंभीर दुर्घटनाएं हो सकती हैं। कुछ मिनट बचाने बचाने के लिए लोग अपनी और दूसरों की जान जोखिम में डाल रहे हैं। कई बार तो वाहन में टक्कर होते होते बचती है,लेकिन इसके बावजूद आदत नहीं बदल रहीं ।</p>
<p><strong>शिकायत के बाद भी कार्यवाही नहीं</strong><br />कई बार इस मुद्दे की शिकायत भी की गई, लेकिन स्थिति में ज्यादा सुधार नहीं हुआ। “लोग जल्दी पहुंचने के लिए नियमों को नजरअंदाज कर रहे हैं, लेकिन यह आदत कभी भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है,”  जरूरत है कि यातायात पुलिस ऐसे संवेदनशील स्थानों पर सख्ती बढ़ाए और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई करे। साथ ही, आम नागरिकों को भी अपनी जिम्मेदारी समझते हुए यातायात नियमों का पालन करना चाहिए, ताकि शहर में सुरक्षित यातायात व्यवस्था सुनिश्चित हो सके।<br /><strong>-राहुल शर्मा, शहरवासी</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />समय समय पर कार्रवाई भी करते करते है, हमने शहर के ऐसे हॉटस्पॉट चिन्हित किये हुए है, जहां नियमित रूप से यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालको के खिलाफ कार्यवाही की जाती है।<br /><strong>- अशोक कुमार मीणा, पुलिस उपअधीक्षक यातायात</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 14:31:37 +0530</pubDate>
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