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                <title>accidents - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>देई से नैनवां के बीच स्टेट हाइवे का मामला : गड्डों से छलनी मार्ग बना हादसों का कारण</title>
                                    <description><![CDATA[वर्षाकाल में गड्डों में पानी भरने  से दुर्घटनाओं की आशंका और अधिक बढ़ जाएगी। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/issue-regarding-the-state-highway-between-dei-and-nainwa--pothole-riddled-road-becomes-a-cause-of-accidents/article-156363"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/1111200-x-600-px)-(2)12.png" alt=""></a><br /><p>देई। देई-नैनवां राज्य राजमार्ग संख्या 34 पर जगह-जगह बने गहरे गड्डों के कारण वाहन चालकों में भारी रोष व्याप्त है। विशेष रूप से देई से नैनवां के बीच सड़क की स्थिति अत्यंत खराब हो चुकी है, जिससे आवागमन करने वाले लोगों को प्रतिदिन परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सड़क पर बने गड्डों के कारण वाहनों का संतुलन बिगड़ रहा है और दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। पीपल्या तथा बांसखोल के जंगल क्षेत्र में भी सड़क पर अनेक स्थानों पर गहरे गड्ढे बने हुए हैं। </p>
<p>स्थानीय लोगों के अनुसार इन गड्डों के कारण आए दिन छोटी-बड़ी दुर्घटनाएं हो रही हैं। समय रहते मरम्मत नहीं होने पर किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।अधिवक्ता संजय दीवाना एवं नरेश मीणा ने बताया कि मार्ग कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो चुका है। सड़क पर बने गड्डों का सही अनुमान नहीं लग पाने से वाहन चालक दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि आगामी वर्षाकाल में गड्डों में पानी भर जाने से दुर्घटनाओं की आशंका और अधिक बढ़ जाएगी। ऐसे में सार्वजनिक निर्माण विभाग को वर्षा ऋतु से पहले सड़क की मरम्मत करानी चाहिए।</p>
<p>समाजसेवी अशोक जिंदल ने बताया कि कस्बे के बूंदी मार्ग पर एक वर्ष से अधिक समय से डामर उखड़ चुका है और गिट्टी बाहर निकल आई है। वर्षाकाल में सड़क पर पानी भर जाने से लोगों का आवागमन दूभर हो जाता है। उन्होंने मार्ग के शीघ्र डामरीकरण की मांग की।वहीं जेतपुर में नाईपुरिया के आगे निकले नुकीले पत्थरों से दुपहिया वाहन चालक गिरकर चोटिल हो रहे हैं। स्थानीय लोगों ने विभाग से तत्काल सुधार कार्य कराने की मांग की है।</p>
<p>स्टेट हाईवे 34 की नैनवां से जेतपुर सडक के मरम्मत के लिए टेण्डर हो चुके है। मौसम साफ रहने व डामर मिलने पर शीघ्र मरम्मत की जायेगी।<br /><strong>- हरिराम मीना, अधिशाषी अभियंता, सार्वजनिक निर्माण विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 15:53:55 +0530</pubDate>
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                <title>गड्डों में तब्दील स्टेट हाइवे, हादसों के डर से सहमे राहगीर</title>
                                    <description><![CDATA[कवाई में जीएसएस से मंडी तक सड़क बदहाल,  दुकानदार ने खुद भरे गड्डे। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/state-highway-riddled-with-potholes--commuters-fear-accidents/article-156362"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/1111200-x-600-px)-(1)18.png" alt=""></a><br /><p>कवाई। कवाई कस्बे से होकर गुजरने वाले कोटा-धरनावदा स्टेट हाईवे पर बिजली के जीएसेएस से लेकर कृषि उपज मंडी के आगे तक सड़क की हालत बेहद खराब हो चुकी है। मार्ग पर जगह-जगह गहरे गड्ढे हो जाने से वाहन चालकों और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार इस मार्ग पर पहले भी कई बार वाहन चालक गड्डों के कारण संतुलन खोकर गिर चुके हैं, जिससे कई लोग चोटिल हुए हैं। पूर्व में भी इस सड़क पर अनेक हादसे हो चुके हैं, लेकिन अब तक सड़क की मरम्मत नहीं होने से समस्या लगातार बनी हुई है।  क्षेत्रवासियों का कहना है कि दिन के समय तो गड्ढे दिखाई दे जाते हैं, लेकिन रात के समय दुर्घटना की आशंका और अधिक बढ़ जाती है। विशेषकर दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह मार्ग जोखिम भरा बन गया है। लोगों ने संबंधित विभाग और प्रशासन से शीघ्र सड़क की मरम्मत करवाने तथा गड्डों को भरवाने की मांग की है, ताकि किसी बड़े हादसे से पहले समस्या का स्थायी समाधान हो सके।</p>
<p><strong>दुकानदार ने दिखाई जिम्मेदारी, प्रशासनिक मरम्मत का इंतजार</strong><br />आमजन की समस्या को देखते हुए वहीं पास के दुकानदार ने स्वयं पहला करते हुए कई गड्डों में कंकर और मिट्टी डलवाकर अस्थायी राहत देने का प्रयास किया है। हालांकि यह व्यवस्था केवल अस्थायी समाधान है और बारिश या भारी वाहनों की आवाजाही के बाद स्थिति फिर से गंभीर हो जाती है। स्थानीय निवासी रोहित पारेता ने बताया कि उनके मकान के पास से गुजरने वाली इस मुख्य सड़क के किनारे अभी तक एक तरफ नाला नहीं बना है। इसी के चलते घरों का पानी सड़क पर भर जाता है और गहरे गड्डों में जमा हो जाता है। ऐसे में वाहन चालकों को यह अंदाजा नहीं लग पाता कि सड़क पर पानी भरा है या उसके नीचे गहरा गड्डा है। पानी से ढके गड्ढे दुर्घटनाओं का कारण बन जाता हैं और विशेष रूप से दोपहिया वाहन चालक इनके कारण हादसों का शिकार हो सकते हैं। इस सड़क की मरम्मत का जल्द से जल्द मरम्मत कार्य शुरू किया जाए ताकि बरसात के मौसम में दुर्घटनाओं की आशंकाओं से राहत मिल सके।</p>
<p>सांगोद से कवाई तक स्टेट हाईवे के नवीनीकरण (रिन्यूवल) का कार्य प्रगति पर है। स्टेट हाईवे सड़क का नवीनीकरण कार्य सांगोद से बपावर तक पूर्ण किया जा चुका है। शेष बपावर से कवाई तक का कार्य भी शीघ्र शुरू कर पूरा कराया जाएगा। कार्य वर्तमान में प्रगति पर है तथा जल्द ही संपूर्ण मार्ग का नवीनीकरण कर आमजन को बेहतर एवं सुगम आवागमन सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।<br /><strong>- पूजा नामा, परियोजना अधिकारी, स्टेट हाईवे कोटा </strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 15:52:11 +0530</pubDate>
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                <title>अधूरी सड़क बन रही हादसों का कारण, ग्रामीणों में रोष</title>
                                    <description><![CDATA[खड़िया-उमरदा मार्ग पर गिट्टी डालकर रोका निर्माण कार्य।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/unfinished-road-becomes-a-cause-for-accidents--villagers-outraged/article-153528"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(2)41.png" alt=""></a><br /><p>बपावरकलां। आदर्श ग्राम पंचायत खड़िया में निर्माणाधीन डामरी सड़क  ग्रामीणों के लिए परेशानी और हादसों बनाई है। का कारण बनती जा रही है।  बारां-झालावाड़ मेगा हाइवे से खड़िया होकर उमरदा जाने वाले मुख्य मार्ग पर करीब डेढ़ किलोमीटर हिस्से में ठेकेदार द्वारा सड़क खोदकर  गिट्टी डालने के बाद निर्माण कार्य  अधूरा छोड़ दिया गया है। पिछले डेढ़  माह से बंद पड़े काम के कारण आए दिन दोपहिया वाहन चालक दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा खड़िया-उमरदा-अरनिया मार्ग का निर्माण कार्य स्वीकृत किया गया था।, ठेकेदार ने संड़क पर मोटी और नुकीली गिट्टी डाल दी, लेकिन उसके बाद कार्य बंद कर दिया। सड़क पर फैली गिट्टियों के कारण बाइक चालकों का संतुलन बिगड़ रहा है और लगातार हादसे हो रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि हाल ही में खड़िया निवासी प्रमोद मेघवाल की हो पत्नी सड़र्क पर फिसलकर घायल गई, जिससे परिवार को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा। इससे पहले प्रभुलाल गोचर की पत्नी की भी इसी सड़क पर गिट्टी में श्वाइक फिसलने से मौत हो चुकी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय पर सड़क निर्माण पूरा नहीं हुआ तो बारिश के मौसम में हालात और गंभीर हो जाएंगे।</p>
<p><strong>सड़कनिर्माण पीडब्ल्यूडी की जिम्मेदारी</strong><br />मंडल कांग्रेस अध्यक्ष विशाल मीणा ने कहा कि सड़क निर्माण समय पर करवाना सार्वजनिक निर्माण विभाग की जिम्मेदारी है। यदि डामर महंगा हो गया है तो इसका खामियाजा आमजन को नहीं भुगतना चाहिए।</p>
<p>कार्य में विलंब हुआ है। ठेकेदार को नोटिस देकर पाबंद किया जोएगा तथा जल्द ही निर्माण कार्य शुरू करवाने का प्रयास किया जा रहा है। अन्यथा ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की<br />जाएगी। <br /><strong>- पवन कुमार भगत, एईएन, सार्वजनिक निर्माण विभाग सांगोद</strong></p>
<p>वह अपनी पत्नी के साथ बाइक से जा रहे थे, तभी गिट्टी में बाइक फिसल गई और उनकी पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गई। सार्वजनिक निर्माण विभाग से जल्द सड़क निर्माण शुरू कराने की मांग की है।<br /><strong>- प्रमोद कुमार मेघवाल, ग्रामवासी</strong></p>
<p>यदि ठेकेदार काम करने का इच्छुक नहीं है तो विभाग किसी अन्य एजेंसी से निर्माण कार्य करवाए। जब समय पर काम पूरा नहीं करना था तो सड़क को खोदकर अधूरा क्यों छोड़ दिया गया।<br /><strong>- हरिराम, ग्रामीण</strong></p>
<p>पूरी विधानसभा क्षेत्र में कई कई सड़कें इसी तरह अधूरी पड़ी हैं और लोग दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं। <br /><strong>- मिर्जाशकील अहमद, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष, सांगोद</strong></p>
<p><strong>जल्द शुरू करवाया जाएगा निर्माण कार्य</strong><br />भाजपा मंडल अध्यक्ष राजेश शर्मा ने बताया कि ठेकेदार से बातचीत की गई है और जल्द ही निर्माण कार्य शुरू करवाया जाएगा। उन्होंने कहा कि डामर महंगा होना देरी का कारण हो सकता है, लेकिन कार्यसमय पर पूरा होना चाहिए। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 May 2026 14:44:19 +0530</pubDate>
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                <title>जर्जर भवन ढ़ह रहे, जिम्मेदार अधिकारी मौन</title>
                                    <description><![CDATA[ठोस कार्रवाई नहीं होने से इस तरह के हादसे हो रहे हैं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/dilapidated-buildings-collapsing--responsible-officials-remain-silent/article-152863"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(4)9.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में बहुमंजिला बिल्डि़ंगों के गिरने का मंगलवार को तीन माह में दूसरा बड़ा हादसा हुआ है। इन हादसों के बाद भी सबक नहीं लेते हुए जिम्मेदार अधिकारी पुराने व जर्जर भवनों पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। जवाहर नगर थाना क्षेत्र स्थित इंद्र विहार में तीन माह पहले 7 फरवरी को एक नॉनवेज रेस्टोरेंट की बिल्डिंग धराशाही हो गई थी। इसका कारण उस बिल्डिंग के पास अन्य बिल्डिंग में चल रहा निर्माण कार्य बताया गया था। जिससे इस रेस्टोरेंट की बिल्डिंग में दबने से दो लोगों की मौत हो गई थी। वहीं एक महिला का पैर काटना पड़ा था। उस हादसे के बाद कुछ समय तक तो नगर निगम व केडीए प्रशासन हरकत में आया और अवैध निर्माण को नोटिस दिए। जर्जर मकानों व भवनों का सर्वे कर उन्हें मकान मालिक द्वारा या तो स्वयं गिराने या निगम के स्तर पर गिरवाकर खर्चा मकान मालिकों से लेने का आदेश जारी किया गया। लेकिन उस हादसे के कुछ समय बाद सभी जिम्मेदार विभागों ने आगे कोई कार्रवाई नहीं की।इसी का नतीजा है कि मंगलवार को एक बार फिर से तीन मंजिला पुराने मकान के गिरने का हादसा हो गया। इस मकान में गनीमत रही कि वर्तमान में कोई नहीं रह रहा था। वरना पड़ा हादसा हो सकता था।</p>
<p><strong>भीड़भाड़ वाला इलाका</strong><br />प्रत्यक्ष दर्शियों ने बताया कि घौंसी मौहल्ले में जिस जगह यह मकान गिरा वह काफी भीड़भाड़ वाला क्षेत्र है। हालांकि गली संकरी होने से वहां लोगों के निकलने के बाद यदि किसी पर मकान का मलबा गिरता तो भी कई लोगों की जान जा सकती थी। मकान गिरते ही मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। हालांकि मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारियों ने मलबे व मकान के आस-पास किसी को भी जाने से रोक दिया। जिससे किसी को कोई चोट नहीं लगे। उसके बाद भी लोग रात तक वहीं डटे रहे।</p>
<p><strong>सामने मकान से बनाया लाइव वीडियो</strong><br />जिस समय यह मकान गिरा उस समय उसके सामने वाले मकान से एक बच्चे द्वारा उसका वीडियो बनाया जा रहा था। हादसे के बाद तेजी से वायरल हुए मकान गिरने के उस लाइव वीडियो में आवाज भी सुनाई दे रही है कि मैं वीडियो बना रहा हूं। साथ ही लोगों के चिल्लाने की आवाजें भी आ रही है। वहीं मकान में पहले छज्जा गिरने और उसके कुछ ही सैकंड में पूरा मकान ताश के पत्तों की तरह धराशाही होता दिख रहा है। हादसे में कई वाहन व सामान दबे हैं। वहीं आस-पास धार्मिक स्थान व अन्य मकानों को भी नुकसान पहुंचा है।</p>
<p><strong>मकान गिरते ही मचा हाहाकार</strong><br />जैसे ही मकान गिरा वहां लोगों की भीड़ जमा हो गई। सभी को लगा कि मकान के मलबे में कोई दबा है। ऐसे में आस-पास हाहाकार मच गया। लोग चिल्लाने लगे कि कोई दबा तो नहीं। काफी देर तक लोगों में व प्रशासन में भी आशंका बनी रही। लेकिन जांच के बाद निगम व पुलिस अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की कि मलबे में फिलहाल किसी के दबे होने की कोई जानकारी नहीं है। मकान में काम कर रहे महिला पुरुष श्रमिक व उनका एक बच्चा हादसे से पहले वहां से दूर हट गए थे।</p>
<p><strong>मकान को लेकर विवाद ही स्थिति बनी</strong><br />तीन मंजिला इस पुराने मकान के गिरने के बाद इसे लेकर मौके पर विवाद की स्थिति भी बनी। मौके पर एक मंगलमुखी  पहुंची और उन्होंने दावा किया कि यह मकान उनकी गुरु रेखा का है। उन्होंने इस मकान की चाबी उन्हें दी थी। लेकिन वह हरिद्वार गई हुई थी। इस कारण से मकान की चाबी आयशा अंसारी को दे गई थी। जबकि किसी ने बताया कि यह मकान आयशा अंसारी का है। मंगलमुखी ने बताया कि वे हरिद्वार से आई तो उन्हें मकान गिरा हुआ मिला है। उनकी जानकारी के बिना ही मकान की मरम्मत का काम कराया जा रहा था। इस मकान को लेकर मौके पर विवाद की स्थिति भी देखने को मिली। जिसे मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों ने समझाइश से शांत कराया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मकान के टाइगर की जांच की जाएगी। फिलहाल प्राथमिकता मलबा हटाने व लोगों को सुरक्षित करना है।</p>
<p><strong>अभी भी चिढ़ा रहे हैं पुराने व जर्जर मकान</strong><br />शहर में अभी भी बड़ी संख्या में पुराने व जर्जर मकान जैसे के तैसे खड़े हुए हैं। यह प्रशासन को चिढ़ा रहे हैं। प्रशासन द्वारा पुराने शहर के सूरजपोल से मोखापाड़ा, कैथूनीपोल से लालबुर्ज तक और नयापुरा व स्टेशन समेत कई जगह पर पुराने व जर्जर मकानों का सर्वे कराया गया है। उनके खिलाफ कार्रवाई के दावे भी किए गए लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। जिससे इस तरह के हादसे हो रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Wed, 06 May 2026 14:20:31 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>सीसी के लिए खोदी सड़क, जाम व हादसों का खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[डाली गई सीवरेज लाइन के चैम्बर काफी बाहर तक निकल गए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/road-dug-up-for-concrete-paving--risk-of-traffic-jams-and-accidents/article-152724"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)22.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से छावनी मेन रोड पर डामर की जगह सीसी रोड बनायी जा रही है। लेकिन उसके लिए खोदी गई सड़क वहां से गुजरने वालों के लिए परेशानी का कारण बन रही है। दिनभर जाम व हादसों का खतरा बना हुआ है। केडीए की ओर से छावनी में डॉ. रामकुमार चौराहे से मुख्य बाजार में होते हुए रामचंद्रपुरा तक सीसी रोड काफी समय पहले बनाई जा चुकी है। ऐसे में जहां डामर रोड बरसात के समय बार-बार गड्ढ़ो में तब्दील होने से लोगों के लिए हादसों कारण बन रही थी। उससे काफी राहत मिली है। वहीं अब मेन रोड पर चौराहे के आस-पास की सड़क पर जहां हर बार बरसात में पानी भरने से गड्ढ़े हो रहे थे। उसे भी सीसी किया जा रहा है। इसके लिए संवेदक द्वारा पिछले कई दिन से सड़क को खोदकर छोड़ा हुआ है। डामर सड़क को खोदने से वहां डाली गई सीवरेज लाइन के चैम्बर काफी बाहर तक निकल गए हैं। ऐसे में यह मार्ग काफी व्यस्त होने से यहां वाहनों का आवागमन बना रहता है। ऐसे में यहां दिनभर वाहनों का जाम व छोटे वाहनों विशेष रूप से ई रिक् शा के पलटने व दो पहिया वाहनों के संतुलन बिगडऩे से गिरने का खतरा बना हुआ है।</p>
<p><strong>चौराहा है तो चार तरफ से आ रहा ट्रैफिक</strong><br />स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह चौराहा है इस कारण से यहां चार तरफ से वाहन निकल रहे हैं। छावनी अंदर की कॉलोनियों से चौराहे की तरफ जाने वाले, चौराहे से अंदर कॉलोनी में जाने वाले, बंगाली कॉलोनी की तरफ से आने व उधर की तरफ जाने वाले वाहनों के एक साथ आने से वहां दिनभर जाम की स्थिति बनी हुई है। इतना ही नहीं सुबह के समय तो थोक फल सब्जीमंडी के लोडिंग वाहन तक निकल रहे हैं। जिससे उनका कई बार संतुलन बिगड़ चुका है। वहीं सोमवार को बरसात होने से वहां खुदी सड़क में पानी भरने से कीचड़ हो गया। जिससे हादसों का खतरा अधिक बना रहा।</p>
<p><strong>काम होना अच्छा है लेकिन जल्दी हो</strong><br />छावनी निवासी देवेश तिवारी ने बताया कि केडीए की ओर से चौराहे की सड़क को सीसी किया जा रहा है। यह अच्छा काम होगा लेकिन उसे कई दिन तक खोदकर खुला छोड़ा हुआ है। जिससे मेन रोड होने से वहां से निकलने वालों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।<br />छावनी निवासी राकेश जैन व मोहम्मद इसरार ने बताया कि केडीए द्वारा संवेदक से काम कराया जा रहा है तो उसकी मॉनिटरिंग भी होनी चाहिए। जिससे संवेदक काम को समय पर और बेहतर ढ़ंग से करे। जैन ने बताया कि सड़क खुदी होने से वहां रास्ता उबड़ खाबड़ हो रहा है। जिससे दो पहिया वाहन असंतुति होकर हादसों का शिकार हो रहे हैं। ऐसे में यह काम जितना जल्दी पूरा होगा उतना अच्छा रहेगा।</p>
<p><strong>बरसात के कारण देरी हुई, काम जल्दी पूरा होगा</strong><br />इधर केडीए अधिकारियों का कहना है कि चौराहे का कुछ हिस्सा डामर का है। जिससे वहा बरसात में पानी भरने पर बार-बार सड़क खराब हो रही है। उसे सही करने के लिए यहां सीसी रोड बनाया जा रहा है। इसका काम शुरु होना था लेकिन बरसात आने से काम अटक गया। मंगलवार को काम शुरु कर जल्दी ही पूरा कर दिया जाएगा। संवेदक का कहना है कि पहले एक तरफ की सड़क सीसी करने के बाद दूसरी तरफ की की जाएगी। जिससे आवागमन सुचारू रह सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 May 2026 14:14:50 +0530</pubDate>
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                <title>रॉन्ग साइड ड्राइविंग, हादसों का खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[छावनी सर्किल और घोड़ा वाले बाबा सर्किल पर खुलेआम टूट रहे नियम।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/wrong-side-driving--a-looming-threat-of-accidents/article-151937"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/wrong-side-draiving,-hadason-ka-khatara...kota-news-28.04.2026-(1).jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में यातायात नियमों की अनदेखी लगातार बढ़ती जा रही है। खासकर रॉन्ग साइड से वाहन चलाने की प्रवृत्ति अब आम होती जा रही है, जिससे सड़क हादसों का खतरा बढ़ गया है। लोग शॉर्टकट के चक्कर में न केवल अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं, बल्कि दूसरों की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा पैदा कर रहे हैं। शहर के कोटड़ी सर्किल, गुमानपुरा, नाग नागिन मंदिर से बड़ तिराहा और घोड़ा वाले बाबा सर्किल जैसे व्यस्त चौराहों पर यह समस्या सबसे ज्यादा देखने को मिल रही है। यहां दिनभर बड़ी संख्या में वाहन चालक नियमों की अनदेखी करते हुए रॉन्ग साइड से गुजरते हैं। खासतौर पर ऑफिस टाइम और बाजार के व्यस्त समय में हालात और भी खतरनाक हो जाते हैं। इस तरह की लापरवाही सड़क दुर्घटनाओं का बड़ा कारण बन सकती है। अचानक सामने से आने वाले वाहनों के कारण टक्कर की आशंका बनी रहती है, जिससे कभी भी गंभीर हादसा हो सकता है।</p>
<p><strong>नियम ठंडे, लापरवाही गर्म: शहर में बेखौफ रॉन्ग साइड का खेल</strong><br />शहर में यातायात नियमों की अनदेखी अब आम होती जा रही है। पुलिस द्वारा चालान की कार्रवाई धीमी पड़ने के बाद लोगों में नियमों का डर कम हो गया है। नतीजतन वाहन चालक मनमर्जी से रॉन्ग साइड चलकर और शॉर्टकट अपनाकर सड़कों पर फर्राटा भर रहे हैं। इससे न सिर्फ यातायात व्यवस्था बिगड़ रही है, बल्कि हादसों का खतरा भी लगातार बढ़ रहा है। खासकर व्यस्त चौराहों और मुख्य मार्गों पर स्थिति अधिक चिंताजनक बनी हुई है, जहां छोटी सी लापरवाही बड़े हादसे का कारण बन सकती है।</p>
<p><strong>खतरे को न्योता</strong><br />रॉन्ग साइड ड्राइविंग सड़क हादसों के प्रमुख कारणों में शामिल है। अचानक सामने से वाहन आने पर ड्राइवर काे संभलने का मौका नहीं मिलता, जिससे गंभीर दुर्घटनाएं हो सकती हैं। कुछ मिनट बचाने बचाने के लिए लोग अपनी और दूसरों की जान जोखिम में डाल रहे हैं। कई बार तो वाहन में टक्कर होते होते बचती है,लेकिन इसके बावजूद आदत नहीं बदल रहीं ।</p>
<p><strong>शिकायत के बाद भी कार्यवाही नहीं</strong><br />कई बार इस मुद्दे की शिकायत भी की गई, लेकिन स्थिति में ज्यादा सुधार नहीं हुआ। “लोग जल्दी पहुंचने के लिए नियमों को नजरअंदाज कर रहे हैं, लेकिन यह आदत कभी भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है,”  जरूरत है कि यातायात पुलिस ऐसे संवेदनशील स्थानों पर सख्ती बढ़ाए और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई करे। साथ ही, आम नागरिकों को भी अपनी जिम्मेदारी समझते हुए यातायात नियमों का पालन करना चाहिए, ताकि शहर में सुरक्षित यातायात व्यवस्था सुनिश्चित हो सके।<br /><strong>-राहुल शर्मा, शहरवासी</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />समय समय पर कार्रवाई भी करते करते है, हमने शहर के ऐसे हॉटस्पॉट चिन्हित किये हुए है, जहां नियमित रूप से यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालको के खिलाफ कार्यवाही की जाती है।<br /><strong>- अशोक कुमार मीणा, पुलिस उपअधीक्षक यातायात</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 14:31:37 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अधूरी सड़क बनी मुसीबत : 2 किमी खंड से बढ़ा हादसों का खतरा, सड़क की चौड़ाई बढ़ाने के चलते हिस्सा निर्माण से रहा वंचित </title>
                                    <description><![CDATA[कस्बे से एनएच-52 को जोड़ने वाली 9 किमी सीसी सड़क का 2 किमी हिस्सा अधूरा और जर्जर होने से लोगों की परेशानी बढ़ गई है। 7 किमी सड़क तैयार है, लेकिन बाकी हिस्सा खतरनाक बन चुका है। हादसे बढ़ रहे हैं। ग्रामीणों ने कई बार शिकायत की, पर बजट के अभाव में काम अटका है। अधिकारी ने जल्द निर्माण का भरोसा दिया है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/unfinished-road-becomes-a-hazard--two-kilometer-stretch-heightens-risk-of-accidents/article-151671"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(1)47.png" alt=""></a><br /><p>नमाना। कस्बे से नमाना रोड होते हुए एनएच-52 को जोड़ने वाली सीसी सड़क का अधूरा निर्माण अब आमजन के लिए परेशानी का कारण बन गया है। करीब 9 किलोमीटर लंबी इस सड़क में से 7 किलोमीटर हिस्सा तो बनकर तैयार हो चुका है, लेकिन शेष 2 किलोमीटर का हिस्सा अधूरा रह गया, जो अब पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है। ग्रामीणों के अनुसार सड़क की चौड़ाई बढ़ाने के चलते यह हिस्सा निर्माण से वंचित रह गया। वर्तमान में इस जर्जर मार्ग से गुजरना वाहन चालकों के लिए जोखिम भरा साबित हो रहा है। कई बार दोपहिया वाहन चालक गिरकर चोटिल हो चुके हैं और हादसों का खतरा लगातार बना हुआ है। ग्रामीणों ने बताया कि इस समस्या को लेकर कई बार पीडब्ल्यूडी अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है, लेकिन बजट के अभाव में अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है।</p>
<p>स्थानीय निवासी दुर्गालाल ने बताया कि यह सड़क जिला मुख्यालय से जोड़ने के लिए स्वीकृत हुई थी, लेकिन अधूरा छोड़ा गया हिस्सा अब सबसे ज्यादा परेशानी का कारण बन गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि शेष 2 किलोमीटर सड़क का शीघ्र निर्माण कराया जाए, ताकि आमजन को राहत मिल सके और संभावित हादसों से बचाव हो सके।</p>
<p><strong>यह कहा अधिकारी ने</strong><br />इस रोड की सेक्सन बनाकर आगे भिजवाई गई है, लेकिन बजट के अभाव में सेंक्सन नहीं मिलने के कारण मरम्मत का काम अटका  हुआ है। सेंक्सन आते ही उबड़-खाबड़ रोड को समतल बनाकर तैयार किया जाएगा। <br /><strong>- राहुल बागड़ी, सहायक अभियंता, सार्वजनिक निर्माण विभाग, बूंदी  </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Apr 2026 14:29:33 +0530</pubDate>
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                <title>वसूली पर ध्यान, खतरे में यात्रियों की जान</title>
                                    <description><![CDATA[टैक्स देने के बाद भी एनएच-27 पर जोखिमभरा सफर, न डिवाइडर न पौधे, वाहन चालकों पर हाई बीम का कहर। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/focus-on-revenue-collection--passengers--lives-at-risk/article-150915"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(6)8.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा-बारां फोरलेन के हालात इतने बदतर हो रहे हैं कि हर दिन हजारों लोगों की जान दांव पर लगी रहती है। एनएचएआई का सिर्फ टोल वसूली पर ही फोकस है लेकिन सुरक्षा मानकों की पूरी तरह से अनदेखी की जा रही है।हालात यह हैं, एनएच-27 स्थित पोलाईकलां से कोटा मार्ग पर न व्यवस्थित डिवाइडर हैं और न ही पौधे, ऊपर से हाई बीम का कहर अलग से बना हुआ है, जिससे वाहन चालकों की जान दांव पर लगी रहती है। टोल टैक्स चुकाने के बावजूद यात्रियों को सुरक्षित सफर नहीं मिल रहा। जिम्मेदारों की लापरवाही से हाल ही में एनएच-52 पर हुए दर्दनाक बस हादसा जैसा खतरा मंडरा रहा है।</p>
<p><strong>हाई बीम से चौंधिया रहीं आंखें, बढ़ रहा खतरा</strong><br />फोरलेन पर पोलाई कलां से आगे कोटा की ओर डिवाइडर सड़क से बिलकुल सटे हुए हैं। जिनमें कई जगह पौधे नहीं हैं तो कई जगह सूख गए। जिससे कोटा से बारां जाने वाले भारी वाहनों की तेज हाई बीम लाइट सामने से दूसरी लेन से कोटा आने वाले वाहन चालकों की आखों पर सीधे पड़ती है। तेज रोशनी से आंखें चौंधिया जाती हैं। इससे कुछ क्षण के लिए विजिबिलिटी खत्म हो जाती है और हादसे का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।</p>
<p><strong>रात का सफर जोखिम भरा</strong><br />वाहन चालक शोयब खान, आकाश मेहरा, राजीव सेन का कहना है कि बारां से कोटा फोरलेन पर पोलाईकलां से आगे का रास्ता बेहद जोखिमभरा है। करीब पांच किमी की सड़क पर जगह-जगह से डिवाइडर आधे-अधूरे बने हुए हैं, वह भी नेशनल हाइवे आॅथोरिटी के मापदंड के अनुरूप नहीं है। इन पर न तो पीली लाइनिंग हो रही और न ही सुरक्षा दीवार है। इसके अलावा पौधे नहीं होने से वाहनों की तेज रोशनी सीधे आंखों पर पड़ती है। जिससे कुछ दिखाई नहीं देता और रफ्तार से चल रहे वाहन अनियंत्रित होकर डिवाइडर पर चढ़ने का खतरा बना रहता है। जबकि, पहले घने पौधे थे, जो हाई बीम की रोशनी को रोकते थे, लेकिन अब उनकी अनुपस्थिति से रात में सफर बेहद जोखिम भरा हो गया है।</p>
<p><strong>रोड लाइनिंग नहीं, लेन का अंदाजा मुश्किल</strong><br />गत वर्ष एनएचएआई द्वारा पोलाईकलां से कोटा टर्न तक डामर सड़क बनाई थी लेकिन उस पर सफेद लाइनिंग नहीं की गई। इससे वाहन चालकों को अपनी लेन समझने में दिक्कत होती है और ओवरटेक के दौरान दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है। वहीं,पूरे मार्ग पर स्ट्रीट लाइटें नहीं होने से सड़क पर अंधेरा पसरा रहता है। ऐसे में हाई बीम की रोशनी और भी ज्यादा घातक हो जाती है।</p>
<p><strong>कट से पहले चेतावनी लाइट भी नदारद</strong><br />वाहन चालक कमलेश दीक्षित व यश कुमार का कहना है कि नेशनल हाइवे पर कुछ जगहों पर कट होते हैं, जिसका संकेत देने के लिए लाइट लगी होती है, जिससे 100 से 150 मीटर पहले ही कट होने की जानकारी चालक को मिल जाती है। इस दौरान वह स्पीड कम कर सकता है। लेकिन, पोलाईकलां से कोटा तक केवल एक ही लाइट लगी है। इसके अलावा पूरे रोड पर कही इस तरह की लाइटें लगी हुई नहीं है। ऐसे में स्पीड से गुजरने वाले वाहनों को एकाएक कट का पता नहीं लग पाता।</p>
<p><strong>डिवाइडरों की ऊंचाई नहीं, मवेशियों का खतरा</strong><br />डिवाइडर सड़क से सटे हुए हैं, जिनकी ऊंचाई नहीं होने से मवेशियों का डिवाइडर पार कर सड़क पर आने का खतरा बना रहता है। इससे वाहन अनियंत्रित होकर दूसरी लेन में जा सकते हैं, जिससे गंभीर हादसा होने का खतरा बना रहता है।</p>
<p><strong>दोहरी मार झेल रहे वाहन चालक</strong><br />जिम्मेदारों की लापरवाही से एनएच-27 पर वाहन चालक दोहरी मार झेल रहे हैं, एक तरफ टोल टैक्स वसूली और दूसरी-सुरक्षा सुविधाओं का अभाव। जबकि, प्रतिदिन हजारों लोग इस मार्ग से आवागमन करते हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे।</p>
<p>कोटा से बारां 104 किमी सड़क पर आवश्यक कार्य स्वीकृत हैं। जिसमें डिवाइडर बनाना, पौधे लगवाना, स्ट्रीट लाइटिंग व रोड लाइनिंग सहित अन्य कार्य शामिल हैं। अभी, बारां साइड पर काम चल रहा है, जल्द ही कोटा साइड का भी काम शुरू हो जाएगा।<br /><strong>-संदीप अग्रवाल, प्रोजेक्ट डायरेक्टर एनएचएआई कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Apr 2026 15:19:32 +0530</pubDate>
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                <title>डोबड़ा-भगवानपुरा खस्ताहाल सड़क से हादसे की आशंका, एंबुलेंस भी समय पर नहीं पहुंच पा रही </title>
                                    <description><![CDATA[छह किलोमीटर लंबी सड़क महीनों से अधूरी, बारिश में हालात होंगे बदतर।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/accidents-feared-on-dilapidated-dobra-bhagwanpura-road/article-150047"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/1200-x-600-px)-(6)5.png" alt=""></a><br /><p>सूमर। सूमर उपखण्ड के डोबड़ा-भगवानपुरा मार्ग, जो बारां-झालावाड़ मेगा हाईवे से जुड़ता है, विकास के दावों के बीच बदहाल स्थिति में नजर आ रहा है। करीब 6 किलोमीटर लंबी यह सड़क पिछले तीन महीनों से खुदी पड़ी है, जो अब ग्रामीणों के लिए गंभीर समस्या और खतरे का कारण बन गई है। सड़क की हालत इतनी जर्जर हो चुकी है कि हर कदम पर हादसे का डर बना रहता है। उबड़-खाबड़ रास्ता, बिखरे पत्थर और धूल से भरा मार्ग आमजन के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। हालात ऐसे हैं कि इसी रास्ते से गुजरने वाली एंबुलेंस और अन्य आपात सेवाएं भी समय पर नहीं पहुंच पा रही हैं। इस मार्ग से डोबड़ा, भगवानपुरा, रामपुरा, सिंगोला, भोजूखेड़ी,खुजा पदमिया आदि गांव कालारेवा तक जुड़े हुए है।</p>
<p><strong>बदहाल स्थिति ने जनजीवन को प्रभावित </strong><br />ग्रामीणों का कहना है कि उनके अधिकांश जरूरी कार्य खानपुर में ही होते हैं चाहे चिकित्सा सुविधा हो, सरकारी कामकाज हो या अन्य आवश्यकताएं। लेकिन इस खराब सड़क के चलते वहां तक पहुंचना अब जोखिम भरा और समयसाध्य हो गया है। इस मुद्दे पर सत्यनारायण नागर, नरेश प्रजापति ,सत्येंद्र नागर, पवन नागर, मुकेश शर्मा और कमल नागर सहित कई ग्रामीणों ने प्रशासन के प्रति गहरा रोष व्यक्त किया है। उनका कहना है कि यह मार्ग गांव की जीवनरेखा है, लेकिन इसकी बदहाल स्थिति ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। </p>
<p><strong>ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी</strong><br />इधर, ग्रामीणों की चिंता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि आगामी दो महीनों में बारिश का मौसम शुरू होने वाला है। ऐसे में सड़क की स्थिति और अधिक खराब होकर कीचड़ व गड्ढों में तब्दील हो सकती है, जिससे आवागमन पूरी तरह बाधित होने का खतरा है। वहीं ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही सड़क निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया, तो ग्रामीण आंदोलन के लिए मजबूर होंगे और डोबड़ा से भगवानपुरा तक इस महत्वपूर्ण सड़क का निर्माण कार्य तत्काल प्रभाव से शुरू कर इसे शीघ्र पूर्ण कराया जाए, ताकि आमजन को राहत मिल सके और क्षेत्र का आवागमन सुचारू हो सके।</p>
<p>करीब 3 महीने पहले सड़क को खोद दिया गया, लेकिन आज तक कोई समाधान नहीं निकला। अधूरा काम छोड़ दिया गया है और इसका खामियाजा ग्रामीणों को रोज भुगतना पड़ रहा है।<br /><strong>- सुरेंद्र नागर, भाजपा युवा मोर्चा जिला मंत्री        </strong></p>
<p>यह सड़क हमारे गांव की जीवनरेखा है, लेकिन इसकी हालत ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है।<br /><strong>-नरेश प्रजापति, ग्रामीण       </strong>  </p>
<p>कांट्रेक्टर के पुराने कार्यों का भुगतान अटका हुआ है। साथ ही डामर के टैंकर उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। डामर लाने के लिए लगाई गई गाड़ी फिलहाल वेटिंग में है, जिसके कारण निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है।<br /><strong>-सत्यनारायण मीणा, अधिशाषी अभियंता</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Apr 2026 17:35:23 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>वाहनों की जगह जिंदगी पर लग सकता है ब्रेक,शहर में अधिकतर स्पीड ब्रेकर क्षतिग्रस्त</title>
                                    <description><![CDATA[छोटी-छोटी गलियों और मौहल्लों में जरा-जरा सी दूरी पर स्पीड ब्रेक बने हुए हैं। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/instead-of-braking-vehicles--they-could-put-a-stop-to-lives--most-speed-breakers-in-the-city-are-damaged/article-149082"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/122200-x-60-px)8.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में मुख्य मार्गों से लेकर गली मौहल्लों तक में वाहनों की तेज गति को नियंत्रित करने के लिए स्पीड ब्रेकर बनाए गए हैं। लेकिन अधिकतर ब्रेकर या तो क्षतिग्रस्त हो रहे हैं या बिना मानकों के बने हुए हैं। जिनसे हादसों का खतरा बना हुआ है। ऐसे में ये ब्रेकर वाहनों की गति पर ब्रेक लगाने की जगह व्यक्ति की जिंदगी पर ब्रेक लगा सकते हैं। वाहन चालक निर्धारित गति से वाहन चलाएं और मोड व स्कूल-कॉलेज के पास वाहनों की गति को नियंत्रित कर सकें। इसके लिए यातायात नियमों के तहत मुख्य मार्गों समेत कई जगह पर नगर निगम, कोटा विकास प्राधिकरण व सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा स्पीड ब्रेकर बनाए गए हैं। नियमानुसार तो ये स्पीड ब्रेकर निर्धारित मानकों के अनुसार ही बनाए जाने चाहिए। जिसमें उनकी ऊंचाई लम्बाई व चौड़ाई सभी निर्धारित है। साथ ही हर स्पीड ब्रेकर पर सफे द पट्टी भी होनी चाहिए। जिससे दूर से ही वाहन चालकों को स्पीड ब्रेकर का पता चल सके और वे अपने वाहनों की गति को धीमा कर सके। लेकिन हालत यह है कि शहर में अधिकतर ब्रेकर बिना मानक के और लोगों की मनमर्जी से बने हुए हैं।</p>
<p><strong>अधिकतर ब्रेकर बीच से टूटे हुए</strong><br />शहर में मुख्य मार्गो पर जहां बड़े-बड़े स्पीड ब्रेकर बने हुए हैं। वहीं छोटी-छोटी गलियों और मौहल्लों तक में जरा-जरा सी दूरी पर स्पीड ब्रेक बने हुए हैं। कई लोगों ने तो अपने घर के सामने, किसी ने अपनी दुकान के सामने, किसी ने शोरूम के सामने तो किसी ने बिना किसी कारण के स्पीड ब्रेकर बनाए हुए हैं। रबड़ वाले व डामर- गिट्टी के बने इन स्पीड ब्रेकर में अधिकतर बीच से टूटे हुए हैं। कई उबड़-खाबड़ हो रहे हैं। कई स्पीड ब्रेकर पर सफेद पट्टी भी नहीं हो रही है। जिससे उन स्पीड ब्रेकर से गुजरने वाले वाहनों विशेष रूप से दो पहिया वाहन चालक दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। वाहन चालकों के लिए ऐसे स्पीड ब्रेकर खतरा बने हुए हैं।<br /> <br /><strong>कुछ को तोड़ा तो कुछ हुए खराब</strong><br />जानकारों के अनुसार नगर निगम व केडीए की ओर से यातायात पुलिस की सलाह पर जो स्पीड ब्रेकर बनाए गए हैं वे तो नियमानुसार बने हैं। लेकिन कई स्पीड ब्रेकर लोगों ने अपनी मर्जी से या बिना किसी की जानकारी के बनाए हैं वे गलत तरीके से बने हुए हैं। उनमें से कुछ को तो लोगों ने ही तोड़ दिया है। वहीं डामर के स्पीड ब्रेकर बरसात व भारी वाहनों के कारण क्षतिग्रस्त हो गए हैं।</p>
<p><strong>शहर में हर जगह ऐसी स्थिति</strong><br />शहर में कोई भी जगह ऐसी नहीं हैं जहां स्पीड ब्रेकर पूरी तरह से सही हों। विज्ञान नगर पीएफ कार्यालय रोड, छावनी, स्माल स्केल इंडस्ट्रीयल एरिया, नयापुरा, बसंत विहार, बजरंग नगर,महावीर नगर, रंगबाड़ी रोड व दादाबाड़ी और वल्लभ नगर समेत सभी जगह पर ऐसी स्थिति हैं जहां जितने स्पीड ब्रेकर हैं उनमें से ज्यादातर टूटे हुए ही हैं। जिन पर आए दिन वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं।</p>
<p><strong>जहां जरूरत हो वहीं बने ब्रेकर</strong><br />लोगों का कहना है कि स्पीड ब्रेकर की जहां जरूरत हो वहीं बनने चाहिए। साथ ही यातायात नियमों व मानकों के अनुसार ही बनाए जाएं।बजरंग नगर निवासी संजय साहू का कहना है कि जगह-जगह छोटी गलियों में बिना मानक के रबड़ वाले व डामर के छोटे ब्रेकर बनाना गलत है। उनसे वाहन तो रूकते नहीं हैं लोग दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। साथ ही इन ब्रेकर पर वाहन उछलने ने लोगों को कमर दर्द समेत कई तरह की बीमारियों का भी सामना करना पड़ रहा है।भीमगंजमंडी निवासी महेश लोधा का कहना है कि बिना मानक के बने व क्षतिग्रस्त ब्रेकर अधिक नुकसान दायक हैं। इनसे दुर्घटना का खतरा होने के साथ ही वाहनों को भी नुकसान हो रहा है। नगर निगम व कोटा विकास प्राधिकरण के इंजीनियरों को पूरे मानक के अनुसार ही ब्रेकर बनाए जाने चाहिए। गलत तरीके से ब्रेकर बनवाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />शहर में स्पीड ब्रेकर तो वाहनों की गति को नियंत्रित करने के लिए बनाए गए हैं। जहां भी ब्रेकर क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। उनका सर्वे कराया गया है। पूरे मानक के अनुसार और जिला सड़क सुरक्षा समिति के निर्देशानुसार ब्रेकर की मरम्मत व रखरखाव का कार्य कराया जा रहा है।<br />-<strong>मुकेश चौधरी, सचिव कोटा विकास प्राधिकरण </strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Apr 2026 14:30:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजस्थान में बढ़े घातक सड़क हादसे : एक साल में 45 प्रतिशत की वृद्धि, जागरूकता अभियान से दुर्घटनाएँ कम करने की तैयारी</title>
                                    <description><![CDATA[राज्य में सड़क हादसों को लेकर चिंताजनक स्थिति सामने आई। 2025 में 2024 की तुलना में घातक दुर्घटनाएं 45% बढ़ीं, मौतें 42% और गंभीर घायल 21% बढ़े। जयपुर सहित 15 जिलों में 76% हादसे दर्ज। 2025 में 211 हादसों में 785 मौतें। विभाग अब जागरूकता और सख्त कार्रवाई से रोकथाम की रणनीति बना रहा।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/fatal-road-accidents-increased-in-rajasthan-by-45-percent-in/article-148603"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-11/transport-department-logo.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राज्य में सड़क सुरक्षा को लेकर चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। परिवहन एवं सड़क सुरक्षा विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 की तुलना में 2025 में घातक सड़क हादसों में 45 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। घातक हादसे वे माने गए हैं जिनमें मौके पर ही तीन या उससे अधिक लोगों की मौत हुई। इन हादसों में मरने वालों की संख्या में 42 प्रतिशत और गंभीर घायलों में 21 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। विभाग अब जागरूकता और सख्त कार्रवाई के जरिए हादसों पर अंकुश लगाने की रणनीति बना रहा है। सबसे ज्यादा असर 15 जिलों में देखने को मिला, जहां कुल घातक हादसों के 76 प्रतिशत मामले और 50 प्रतिशत मौतें दर्ज हुईं। इनमें जयपुर, बीकानेर, जैसलमेर, दौसा, चूरू, श्रीगंगानगर, बारां, बांसवाड़ा, बूंदी, हनुमानगढ़, सीकर, जोधपुर, कोटा, उदयपुर और बाड़मेर शामिल हैं। मौतों के आंकड़ों में जयपुर सबसे ऊपर रहा, जहां 2025 में 93 लोगों की जान गई। इसके बाद बीकानेर में 46, जैसलमेर में 44, दौसा में 38 और चूरू में 36 मौतें दर्ज हुईं।</p>
<p>दूसरी ओर कुछ जिलों में राहत भी मिली। अलवर, धौलपुर, सीकर, सिरोही, टोंक और नागौर में घातक हादसों व मौतों में कमी दर्ज हुई। आंकड़ों के मुताबिक 2024 में 140 घातक हादसों में 553 मौतें हुई थीं, जबकि 2025 में यह संख्या बढ़कर 211 हादसे और 785 मौतों तक पहुंच गई। पांच या उससे अधिक मौत वाले हादसे भी 23 से बढ़कर 25 हो गए, जो हाई-सीवियरिटी क्रैश के बढ़ते खतरे को दर्शाता है। विभाग का मानना है कि जागरूकता अभियान, सख्त निगरानी और सड़क सुरक्षा नियमों के पालन से ही इस बढ़ती चुनौती पर काबू पाया जा सकता है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 18:10:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मेज नदी की पुलिया छह माह से क्षतिग्रस्त, पानी से होकर गुजरने पर मजबूर ग्रामीण</title>
                                    <description><![CDATA[सादेड़ा-विषधारी मार्ग अवरुद्ध ,  मेज नदी को पार करना बना जोखिम]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/mej-river-culvert-damaged-for-six-months--villagers-forced-to-wade-through-water/article-146812"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(2)19.png" alt=""></a><br /><p>भण्डेड़ा। क्षेत्र के सादेड़ा से विषधारी मार्ग पर मेज नदी की पुलिया पिछले लगभग छह महीनों से क्षतिग्रस्त पड़ी है, जिससे इस मार्ग पर वाहनों का आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया है। पुलिया टूटने के कारण राहगीरों और श्रद्धालुओं को तीन से चार फीट पानी से होकर गुजरने को मजबूर होना पड़ रहा है, जिससे हर समय दुर्घटना का खतरा बना रहता है। बावजूद इसके संबंधित विभाग अब तक समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा पाया है।जानकारी के अनुसार सादेड़ा से संगमेश्वर (समेला) महादेव होते हुए विषधारी जाने वाले मुख्य ग्रेवल मार्ग पर मेज नदी में एक छोटी पुलिया बनी हुई थी। इसी पुलिया के माध्यम से दोनों ओर से आने-जाने वाले ग्रामीण और वाहन चालक आवागमन करते थे। मेज नदी और बेजाण नदी में कम पानी का बहाव होने पर भी इसी पुलिया से पानी निकल जाता था और लोगों को आवागमन में सुविधा रहती थी। गत वर्ष लंबे समय तक हुई बारिश के कारण यह पुलिया क्षतिग्रस्त हो गई। पुलिया के क्षतिग्रस्त हिस्से पर गहराई बढ़ जाने से यहां से वाहन निकलना असंभव हो गया है। इसके बाद से ही यह मार्ग अवरुद्ध पड़ा है। अब लोगों को विषधारी पहुंचने के लिए कल्याणपुरा और कालानला होकर लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है। पैदल राहगीर जब इस स्थान से गुजरते हैं तो उन्हें तीन से चार फीट पानी से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे कपड़े भी भीग जाते हैं और जान का खतरा बना रहता है। ग्रामीणों ने बताया कि पास ही स्थित धार्मिक स्थल संगमेश्वर (समेला) महादेव के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को भी इसी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। क्षेत्रीय ग्रामीणों का कहना है कि मेज और बेजाण नदी के ऊपरी क्षेत्रों में बड़े बांध बने हुए हैं, जिनसे नहरों में पानी छोड़ा जाता है। ऐसे में अचानक पानी बढ़ने का खतरा भी बना रहता है।</p>
<p><strong>अस्थायी रास्ता बारिश की भेंट चढा</strong><br />ग्रामीणों ने बताया कि पिछले वर्ष मिनी डैम निर्माण कार्य के दौरान पुलिया के क्षतिग्रस्त स्थान पर मिट्टी डालकर अस्थायी रास्ता बनाया गया था, लेकिन बारिश में वह भी बह गया। तब से यह मार्ग बंद पड़ा है, जिससे क्षेत्रवासियों और श्रद्धालुओं को लगातार परेशानी झेलनी पड़ रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से पुलिया का शीघ्र पुनर्निर्माण कराने की मांग की है।</p>
<p><strong>इन गांवों से पहुंचते श्रद्धालु</strong><br />नैनवां सहित हिण्डोली दोनों उपखंडों की ग्राम पंचायतों के निकट यह मंदिर है। यहां विषधारी, डाबेटा, दरा का नयागांव, भण्डेड़ा, सादेड़ा, बांसी, रामगंज, कल्याणपुरा, गुजरियाखेड़ा, दुगारी, उरांसी, मानपुरा, डोड़ी, सांवतगढ़, निमोद, भजनेरी, मरां, मुण्डली, कालानला सहित अन्य गांवों के श्रद्धालु भगवान के दर्शनार्थ पहुंचते है। भण्डेड़ा क्षेत्र से इस रुट द्वारा आवाजाही करने पर जिला मुख्यालय की दूरी कम हो जाती है। अभी भी सैकड़ों राहगीर शॉर्टकट की वजह से रोजमर्रा ही जानजोखिम में डालकर इस रुट पर अपना सफर तय करते है पर संगमेश्वर की पुलिया व रास्ते की वजह से परेशानी झेलनी पड़ती है। </p>
<p><strong>पुलिया व रास्ते की वजह से श्रद्धालुओं की राह में बाधाएँ</strong><br />श्रद्धालुओं ने बताया कि बारह गांव की मुख्य आस्था का केन्द्र संगमेश्वर (समेला) महादेव है। यहां पर बारिश के समय की खुबसूरती आनेवाले को आकर्षित करती है। यहाँ की हरियाली चतुदर्शी व अमावस्या पर श्रद्धालुओं की अच्छी भीड़ रहती है। मगर इसके रास्ते पर संगमेश्वर की टूटी पुलिया एवं अभी तक किसी ने डामरीकृत सड़क नही बनवा पाए है। जो श्रद्धालुओं के लिए बारिश के समय एक चुनौती से कम नही है। बूंदी के लिए आवाजाही हेतु शॉर्टकट रास्ता भी है। पर संगमेश्वर पुलिया की वजह से परेशानी होती है। क्षेत्रीय लोगों को अन्य रुट से जाने पर 10 किमी का अतिरिक्त फेरा लगता है।  <br /><strong>-छोटूलाल जोशी, श्रद्धालु भण्डेडा, निवासी</strong></p>
<p>हमारे क्षेत्र की मुख्य आस्था का धार्मिकस्थल है। यहां पर बारिश के समय कच्ची पुलिया व जगह-जगह पर नाले पड़ते है। फिर भी श्रद्धालु इस समस्या का सामना करते हुए भी आते जाते है। जो काफी खतरे भरी राह से गुजरना होता है।  आवाजाही को लेकर डामरीकृत व सीसी सड़क बनाने को लेकर लंबे समय से मांग उठा रहे है। ग्रेवल रास्ते के बावजूद भी हरवर्ष दिनोंदिन श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती जा रही है। लेकिन किसी ने सुध नहीं ली है।<br /><strong>-निखिल शर्मा, रामगंज निवासी</strong></p>
<p>मेज नदी की संगमेश्वर पुलिया की वजह से क्षेत्रवासियों को परेशान झेलनी पड़ती है। बारिश के समय दोनों नदियों में पानी की लहरों का नजारा व हरियाली के कारण हर किसी को आकर्षित करती है।   लड्डू-बाटी चूरमा की गोट का नजारा आम होता है लेकिन बारिश के समय श्रद्धालुओं को नदी के पानी में अपनी जान जोखिम में डालकर निकलना पड़ता है।  समेला महादेव पहुंचने के लिए कच्चा रास्ता परेशानी का सबब बना हुआ है। <br /><strong>- नारायण सिंह हाड़ा, श्रद्धालु</strong></p>
<p>क्षेत्र में बारह गांवों की मुख्य आस्था का सबसे बड़ा धार्मिक स्थल है। संगमेश्वर महादेव का स्थान पर यहा पर तीन ग्राम पंचायतों की सीमा जुड़ा है। बारिश के समय दोनों नदियों की तरफ से आनेवाले रास्ते कच्चे है, बारिश के समय गहरे गड्ढे व कीचड़ हो जाता है।  इस राह को पार कर भगवान शिव तक पहुंचने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस पुलिया व कच्चे रास्ते की वजह से राहगीरों सहित श्रद्धालुओं को समस्या से जूझना पड़ता है।  <br /><strong>- पदम कुमार जैन, बांसी निवासी</strong></p>
<p>यह पुलिया लंबे समय से टूटी होने से क्षेत्रीय लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। समेला महादेव मंदिर के दर्शनार्थ श्रद्धालुओं को काफी परेशानी उठानी पड़ती है। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि व संबंधित विभाग इस आधुनिक युग में भी डामरीकरण सड़क को लेकर गंभीर नहीं है। हालांकि  बरसाती दिनों में यहां का मनमोहक नजारा श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करहीं होने से भक्तों को परेशानी होती है।<br /><strong>-रोहित कुमार शर्मा, भण्डेड़ा निवासी</strong></p>
<p><strong>इनका कहा है </strong><br />यह पुलिया डामरीकृत सड़क नहीं है। मेज नदी की पुलिया का कार्य हमारे अधीन में नहीं है। हमारे अधीन में होती तो दुरूस्त करवाया जाता हो सकता है ग्राम पंचायत द्वारा किसी मद से पुलिया का निर्माण करवाया गया होगा। <br /><strong>- रेवतीरमन शर्मा, जेईएन, सार्वजनिक निर्माण विभाग देई-नैनवां</strong></p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Tue, 17 Mar 2026 15:03:10 +0530</pubDate>
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