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                <title>accidents - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>असर खबर का... अब न कमानी टूटेगी और न ही बिगड़ेगा वाहनों का संतुलन</title>
                                    <description><![CDATA[कई वाहन रोजाना इन गड्ढ़ों के कारण दुर्घटनाग्रस्त हो रहे थे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-report----no-more-broken-suspension-springs-or-loss-of-vehicle-balance/article-162841"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(5)16.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। टिपटा स्थित गढ़ पैलेस के पास अब न तो वाहनों का संतुलन बिगड़ेगा और न ही किसी वाहन की कमानी टूटेगी। अब वाहन आसानी से निकल रहे हैं। यह संभव हुआ है नगर निगम की ओर से उन गड्ढ़ों को भरने से। किशोरपुरा स्थित एलिवेटेड पुुलिया से टिपटा गढ़ पैलेस की तरफ जाते समय सड़क के मोड पर बड़े-बड़े गड्ढ़े हो रहे थे। पिछले काफी समय से हो रहे इन गड्ढ़ों से रोजाना भारी भरकम वाहनों के साथ ही दो पहिया व ई रिक् शा जैसे वाहन भी निकल रहे हैं। जिससे गड्ढ़ों का साइज बढ़ता ही गया। हालत यह हो गई कि कई वाहन रोजाना इन गड्ढ़ों के कारण दुर्घटनाग्रस्त हो रहे थे। साथ ही गड्ढ़ों के कारण वाहनों की गति धीमी होने से वहां दिन के समय कई बार ट्रैफिक जाम तक की समस्या का सामना करना पड़ रहा था। इस मार्ग से गुजरने वाले सभी वाहन चालक परेशान हो रहे थे।</p>
<p><strong>नवज्योति ने किया था मामला प्रकाशित</strong><br />गौरतलब है कि लोगों की इस समस्या को दैनिक नवज्योति ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। समाचार पत्र में 9 अगस्त को पेज 8 पर' किसी की कमानी टूट रही तो किसी वाहन का बिगड़ रहा संतुलन शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। समाचार प्रकाशित होने के साथ ही नगर निगम के अधिकारी हरकत में आए। उन्होंने इन गड्ढ़ों को भरने व सड़क को सही करने का निर्णय किया।</p>
<p>नगर निगम के अधिषाषी अभियंता ए.क्यू कुरैशी ने बताया कि इन गड्ढ़ों में रेडी मिक्स बिटुमिन कॉफ्रींट डाली गई है। एलिवेटेड पुलिया से लेकर बैराज के समानांतर पुल व शक्ति नगर के आस-पास तक के सभी गड्ढ़ों को इससे भरा गया है। करीब 35 कट्टे मैटेरियल का उपयोग किया गया है। इससे ये बरसात में नहीं उखड़ेंगा और लम्बे समय तक टिका रहेगा।</p>
<p><strong>नाला व इंटर लोकिंग होगी</strong><br />एक्सईएन कुरैशी ने बताया कि इस सड़क पर इनटरलोकिग की जाएगी। साथ ही किशोरपुरा दवराजे तक आरसीसी का नाला भी बनाया जाएगा। जिससे यहां पानी नहीं भरेगा और सड़क भी क्षतिग्रस्त नहीं होगी। इसके लिए टेंडर जारी कर बरसात के बाद काम शुरू किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 15:15:00 +0530</pubDate>
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                <title>किसी वाहन की कमानी टूट रही, तो किसी का बिगड़ रहा संतुलन</title>
                                    <description><![CDATA[गड्ढों में तब्दील हुई टिपटा की सड़क, हर कदम पर खतरा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/vehicles-suffering-broken-suspension-springs-and-loss-of-balance/article-162536"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(3)21.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में अभी तो ठीक से बरसात शुरु भी नहीं हुई है। उससे पहले ही सड़कों की हालत खराब होने लगी है। जिससे हादसों का खतरा बना हुआ है। ऐसे ही खतरे से सैकड़ों वाहन चालकों को रोजाना दो चार होना पड़ रहा है।यह मामला वैसे तो एक जगह का है लेकिन इसी तरह की स्थिति शहर में कई जगह पर देखी जा सकती है। टिपटा में गढ़ पैलेस के पास सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढ़े हो रहे हैं। जिससे उस सड़क से रोजाना गुजर रहे सैकड़ों वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं वाहनों का संतुलन बिगडऩे से हादसों का भी खतरा बना हुआ है।</p>
<p>हालत यह है कि एक तो यहां का रास्ता काफी संकरा है। ऐसे में यहां दोनों तरफ से वाहनों की आवाजाही 24 घंटे बनी हुई है। दिन के समय तो इस सड़क पर ट्रैफिक अधिक होने से यहां कई बार जाम के हालात बने रहते हैं। जिससे वाहनों को रैंग-रैंग कर निकलना पड़ रहा है। वाहन चालकों का कहना है कि गढ़ के पास सड़क पर लम्बे समय से बड़े-बड़े गड्ढे हो रहे हैं। ऐसे में किशोरपुरा स्थित एलिवेटेड पुलिया से साई बाबा मंदिर की तरफ जाते समय गड्ढ़ों में वाहनों को दचके लग रहे हैं। साथ ही कई वाहनों को रोजाना नुकसान भी हो रहा है।</p>
<p>लोगों का कहना है कि आए दिन ई रिक् शा हो या ऑटो किसी ने किसी वाहन की या तो कमानी टूट रही है या फिर वाहन का संतुलन बिगडऩे से हादसों का खतरा बना हुआ है। दिन में रोजाना कई बार इस तरह के दृश्य देखे जा सकते हैं।इतना ही नहीं इसके आगे बैराज के समानांतर पुल पर भी दोनों तरफ काफी बड़े गड्ढ़े हो रहे हैं। जिससे वाहनों का संतुलन बिगड़ रहा है।</p>
<p><strong>तीन तरफ से आ रहे वाहन</strong><br />स्थानीय लोगों का कहना है कि गढ़ के सामने से दशहरा मैदान की तरफ जाने का रास्ता काफी संकरा है। ऐसे में यहां तीन तरफ से वाहन निकल रहे हैं। एक सकतपुरा व पाटनपोल की तरफ से दशहरा मैदान की तरफ जाने वाले वाहन, दूसरे दशहरा मैदान व एलिवेटेड पुलिया से आने वाले वाहन उस संकरे रास्ते से निकल रहे हैं। दिन के समय तो यहां से कचरे के डम्पर और स्कूली बच्चों के वाहन ऑटो व वैन तक निकलते हैं। जिससे वहां जाम के साथ ही हादसों का भी खतरा बना हुआ है।</p>
<p><strong>काम जरा सा, हादसों का इंतजार</strong><br />स्थानीय लोगों का कहना है कि गढ़ के पास सड़क का जरा सा हिस्सा खराब हो रहा है। लेकिन गड्ढ़े अधिक गहरे व बड़े हैं। जिससे अचानक आने वाले वाहन झटके से उन गड्ढ़ों में उछल रहे हैं। जिससे वाहनों को नुकसान व हादसों का खतरा बना हुआ है। इसके बावजूद प्रशासन बड़ा हादसा होने का इंतजार कर रहा है। लोगों का कहना है कि प्रशासन तो बड़ा हादसा होने के बाद ही चेेतता रहा है। जबकि छोटा सा काम बहुत कम समय में हो सकता है उसे नहीं कर रहे।</p>
<p>यह तो एक जगह का मामला है। इसी तरह से शहर में अधिकतर सड़कों की भी यही स्थिति है। जिनमें विज्ञान नगर पीएफ कार्यालय के सामने की सड़क हो या मस्जिद रोड,नयापुरा की अंदरूनी सड़कें हो या छावनी की। सभी जगह सड़कों पर अभी से बड़े-बड़े गड्ढ़े हो रहे हैं। बरसात आने पर ये गड्ढ़े और बड़े हो जाएंगे।</p>
<p><strong>24 घंटे ट्रैफिक से परेशानी</strong><br />नगर निगम के अधिशाषी अभियंता ए.क्यू कुरैशी ने बताया कि इस सड़क पर 24 घंटे ट्रैफिक चलता है। दिन ही नहीं रात में भी डम्पर निकलते रहते हैं। जिससे इस सड़क को नुकसान होता है। पूर्व में कई बार इसे सुधारा भी जा चुका है। लेकिन वाहनों के दबाव के कारण यहां फिर से गड्ढ़े हो जाते हैं। लेकिन इन गड्ढ़ों को जल्दी ही सही करवा दिया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Aug 2026 16:08:49 +0530</pubDate>
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                <title>तालाब किनारे रास्ता चालू हुआ : नहीं हटी बाधा, बरसात में दुर्घटना का  खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[रास्ता बंद करने वाली बैरिकेडिंग व मिट्टी के ढेर नहीं हटाए गए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/road-near-the-pond-reopened--but-obstructions-remain--risk-of-accidents-during-rains/article-162357"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(1)34.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। जयपुर गोल्डन रोड स्थित सरोवर टॉकीज के सामने मंदिर के पास बदहाल हो चुकी सड़क को तो कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से सही कर दिया गया। जिससे वहां से रास्ता तो चालू हो गया लेकिन अभी तक भी दोनों तरफ की बाधाएं नहीं हटी हैं। जिससे वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं बरसात में वाहनों के फिसलने से दुर्घटना का खतरा भी बना हुआ है। तालाब किनारे मंदिर के पास की सड़क का एक बड़ा हिस्सा पिछले काफी समय से खस्ताहाल हो रहा था। जिससे वाहन चालकों को उन गड्ढ़ों से हिचकोले खाते हुए निकलना पड़ रहा था। उससे भी वाहनों का संतुलन बिगड़कर दुर्घटना का खतरा बना हुआ था।आमजन की इस समस्या को देखते हुए कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से सड़क की मरम्मत तो करवा दी गई। मरम्मत के दौरान जयपुर गोल्डन के सामने मल्टी स्टोरी पार्किंग से ही वाहनों को डायवर्ट कर वनवे रास्ते से निकाला गया था। जिससे गीता भवन से नयापुरा की तरफ और नयापुरा से गीता भवन की तरफ जाने का एक ही सड़क से रास्ता था। जिससे वाहनों के जाम की समस्या बनी हुई थी।</p>
<p><strong>एक तरफ बोर्ड तो दूसरी तरफ मिट्टी के ढेर</strong><br />वहीं सड़क मरम्मत के बाद भी संवेदक की ओर से सड़क के दोनों तरफ रास्ता बंद करने के लिए लगाई गई बेरीकेडिंग व लगाए मिट्टी के ढेर को नहीं हटाया गया। जिससे वाहन चालकों ने परेशान होकर खुद ही सड़क मरम्मत के बाद वहां से वाहनों को निकालना शुरु कर दिया। जबकि अभी भी सड़क के दोनों तरफ की बाधाओं को नहीं हटाया गया है। ऐसे में हालत यह है कि मल्टी स्टोरी पाकिंग के सामने तो कार्य प्रगति पर होने का बोर्ड लगा हुआ है। जहां साइड से थोड़ी सी जगह से वाहन निकल रहे हैं। वहीं आगे मंदिर के पास व उसके आगे दो जगह पर मिट्टी के ढेर से वाहनों को निकलने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<p><strong>बरसात होने पर अधिक खतरा</strong><br />वाहन चालकों ने बताया कि जैसे-तैसे दो पहिया वाहन तो निकल रहे हैं। जबकि चार पहिया वाहनों को मिट्टी के ढेर से निकलने में परेशानी हो रही है। कई बार वाहन का पिछला हिस्सा तो कभी बोनट का हिस्सा मिट्टी के ढेर से अडऩे पर वाहनों को नुकसान हो रहा है। वहीं दो पहिया वाहनों का भी संतुलन बिगडऩे का खतरा बना हुआ है। बरसात के समय में यह खतरा अधिक बढ़ जाएगा। ऐसे में वाहनों के फिसलने पर लोगों के चोटिल होने तक का खतरा बना हुआ है। शुक्रवार को भी दिनभर वाहन तो निकले लेकिन लोग परेशान होते रहे।</p>
<p><strong>वनवे वाले रास्ते पर जाम</strong><br />वहीं जो वाहन इस रास्ते से नहीं निकले तो दूसरी तरफ वनवे वाली साइड पर लोगों को ट्रैफिक जाम की समस्या का सामना करना पड़ा। इस रास्ते से निकलने वाले वाहन चालक प्रशासन को कोसते रहे।</p>
<p><strong>मिट्टी का ढेर जल्दी हटवा देंगे</strong><br />सीसी रोड बनने के बाद उसे सैट होने में समय लगता है। इस कारण से रास्ता बंद रखना पड़ता है। लेकिन अब रास्ता चालू हो गया है तो मिट्टी के ढेर व बोर्ड को भी जल्दी ही हटवा देंगे।<br /><strong>-मुकेश कुमार चौधरी, सचिव, कोटा विकास प्राधिकरण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 08 Aug 2026 14:24:14 +0530</pubDate>
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                <title>खस्ताहाल सड़क बनी हादसे का सबब, राहगीर परेशान</title>
                                    <description><![CDATA[बरसात के दौरान गड्ढों में पानी भर जाने से उनकी गहराई का सही अनुमान नहीं लग पाता।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/dilapidated-road-causes-accidents--commuters-face-hardship/article-161700"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(2)2.png" alt=""></a><br /><p>चौमहला। राज्य सरकार के गड्डा मुक्त सड़क अभियान के दावों की पोल चौमहला कस्बे की मुख्य बाजार सड़क खोल रही है। झंडा चौक से डॉ. रमेश खटीक तक जाने वाला प्रमुख मार्ग लंबे समय से जर्जर हालत में पड़ा है। सड़क की एक ओर की पूरी परत उखड़ जाने से जगह-जगह बड़े गड्ढे बन गए हैं, जबकि दूसरी ओर सड़क ऊंची-नीची होने से वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आए दिन दोपहिया वाहन चालक संतुलन खोकर गिर रहे हैं और चोटिल हो रहे हैं। </p>
<p>यह मार्ग कस्बे का सबसे व्यस्त व्यापारिक क्षेत्र होने केकारण दिनभर भारी यातायात रहता है। बरसात के दौरान गड्डों में पानी भर जाने से उनकी गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा और बढ़ जाता है। सड़क की बदहाली से स्थानीय व्यापारियों, राहगीरों और वाहन चालकों में भारी नाराजगी है। </p>
<p>स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सड़क की मरम्मतको लेकर कई बार संबंधित विभाग और प्रशासन को अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। लोगों का आरोप है कि गड्डा मुक्त सड़क अभियान केवल कागजों तक सीमित नजर आ रहा है, जबकि जमीनी स्तर पर हालात बद से बदतर हैं।</p>
<p><strong>बड़े हादसे की आशंका, शीघ्र मरम्मत की मांग</strong><br />क्षेत्रवासियों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से सड़क की तत्काल मरम्मत कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते गड्डों को भरकर सड़क दुरुस्त नहीं की गई, तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। लोगों ने चेतावनी दी कि किसी अप्रिय घटना की स्थिति में इसकी जिम्मेदारी संबंधित विभाग और प्रशासन की होगी। </p>
<p>सड़क दिखवाकर शीघ्र मरम्मत करवाई जाएगी।<br /><strong>- शंकर सिंह कनिष्ठ अभियंता सार्वजिनक निर्माण विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 16:09:19 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का :  आवारा मवेशियों पर कार्रवाई तेज, एक दिन में पकड़ीं 80 गायें</title>
                                    <description><![CDATA[ नवज्योति में मुद्दा उठने के बाद निगम ने अभियान किया तेज।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-report--crackdown-on-stray-cattle-intensified--80-cows-captured-in-a-single-day/article-160656"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)-(2)62.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर की सड़कों पर आवारा व बेसहारा मवेशियों से होने वाली दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए नगर निगम का विशेष अभियान लगातार जारी है। बुधवार को निगम की दो टीमों ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों में कार्रवाई करते हुए एक ही दिन में कुल 80 गायों को पकड़कर कायनहाउस (गौशाला) पहुंचाया।आयुक्त ओमप्रकाश मेहरा ने बताया कि एक टीम ने नए कोटा क्षेत्र के विज्ञान नगर, तलवंडी, महावीर नगर तृतीय चौराहा, धरणीधर चौराहा व खड़े गणेश जी मंदिर मार्ग क्षेत्र में 41 गायों को पकड़ा।</p>
<p>वहीं दूसरी टीम ने औद्योगिक क्षेत्र में थेगड़ा, रायपुरा चौराहा, डीसीएम चौराहा व फ ोर-लेन बायपास (डाकघर के पास) क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए 39 गौवंश को पकड़ा गौशाला प्रभारी महावीर सिंह सिसोदिया ने बताया कि शहर में आवारा मवेशियों की समस्या से आमजन को राहत दिलाने व यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के उद्देश्य से यह अभियान निरंतर जारी रहेगा। साथ ही पशुपालकों से भी अपने मवेशियों को खुले में नहीं छोडऩे की अपील की गई है।</p>
<p><strong>नवज्योति ने किया था मामला प्रकाशित</strong><br />गौरतलब है कि शहर में मुख्य मार्गों पर आवारा मवेशियों की समस्या का मामला दैनिक नवज्योति ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। समाचार पत्र में 8 जुलाई को पेज 8 पर गड्ढ़े व मवेशी बरसात में खतरा शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। जिसमें बताया था कि बरसात के समय मुख्य मार्गों पर विशेष रूप से रात के समय लगा मवेशियों का जमघट हादसों का खतरा बने हुए है। वहीं 19 जुलाई को पेज 6 पर भी ' सड़कों पर यमदूत बनकर घूम रहे मवेशी शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। नवज्योति में लगातार इस मुद्दे को प्रमुखता से प्रकाशित करने के बाद नगर निगम अधिकारी हरकत में आए और आवारा मवेशियों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 11:59:55 +0530</pubDate>
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                <title>ताकि पिकनिक पैनिक न बनें, रील्स से बनाएं दूरी</title>
                                    <description><![CDATA[ वन विभाग की चेतावनी: प्रतिबंधित क्षेत्रों में बिना अनुमति गए तो लगेगा 25 हजार का फटका।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/don-t-let-a-picnic-turn-into-a-panic--steer-clear-of-making--reels/article-159323"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)27.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। मानसून की पहली फुहारों के साथ ही कोटा और पूरे हाड़ौती अंचल के प्राकृतिक पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों और पिकनिक प्रेमियों की भीड़ उमड़ने लगी है। हालांकि हाडौती में मानसून अभी पुरी तरह से सक्रिय नहीं हुआ है लेकिन लोग वीकेंड पर परिवार और दोस्तों के साथ प्रकृति के बीच समय बिताने और पिकनिक की तैयारियों में जुट गए हैं। इस मस्ती के बीच जरा सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।अक्सर देखा जाता है कि लोग सेल्फी, इंस्टाग्राम रील्स और लाइव वीडियो बनाने के चक्कर में इतने मशगूल हो जाते हैं कि अपनी सुरक्षा और एहतियात पूरी तरह भूल बैठते हैं। रील्स का यह नशा हादसों का सबसे बड़ा कारण बन रहा है।</p>
<p>सुरक्षा के लिहाज से वन विभाग और स्थानीय प्रशासन ने कई खतरनाक और संवेदनशील प्राकृतिक स्थलों को पूरी तरह से प्रतिबंधित (नो-एंट्री ज़ोन) घोषित कर दिया है। वन विभाग ने इस मानसून सीजन में अवैध एंट्री करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं। किसी भी प्रतिबंधित वन क्षेत्र में बिना अनुमति अवैध प्रवेश करने पर 25 हजार तक का जुर्माना वसूला जाएगा। शाम 6 बजे के बाद या अंधेरा होने पर यदि कोई इन प्रतिबंधित क्षेत्रों में घूमता हुआ पाया गया, तो उसे गिरफ्तार कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p><strong>'तीसरी आंख' (कैमरा ट्रैप) से निगरानी</strong><br />वन विभाग ने जंगल के संकरे और गुप्त रास्तों पर कैमरा ट्रैप और गश्ती दल तैनात किए हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति अवैध रूप से प्रवेश करता है, उसकी तस्वीर कैमरे में कैद हो जाती है।</p>
<p><strong>पूरी तरह प्रतिबंधित स्थल</strong><br />भंवरकुंज: वन विभाग ने यहाँ पौधारोपण कर इसे पूरी तरह बंद कर दिया है।<br />गेपरनाथ: यहाँ वन विभाग की चौकी है; यह आम दिनों में बंद रहता है और केवल सावन में दर्शनार्थियों के लिए सशर्त खोला जाता है।<br />नाहरसिंह माताजी: रावतभाटा रोड स्थित इस क्षेत्र में बाघों (टाइगर) का मूवमेंट होने और सुरक्षा कारणों से प्रवेश वर्जित है।</p>
<p><strong>इन पिकनिक स्थलों पर लौटेगी रौनक</strong><br /><strong>1. पाड़ाझर वॉटरफॉल (भैंसरोड़गढ़)</strong><br />कोटा से लगभग 65 किमी दूर स्थित भैंसरोड़गढ़ अभयारण्य के जंगलों में स्थित 35 मीटर ऊँचा प्राकृतिक झरना और प्राचीन पाड़ाझर महादेव मंदिर जानेे के लिए भैंसरोड़गढ़ अभयारण्य क्षेत्र होकर जाया जाता है। यह स्थान एडवेंचर और आउटरीच केम्पेन के लिये ज्यादा फैमस है। यहां केवल निजी साधन से ही पहुचां जा सकता है।<br /><strong>सुविधाएं व सावधानी</strong><br />यहाँ कोई दुकानें नहीं हैं, खाना-पानी साथ लाएँ। रास्ता कच्चा व फिसलन भरा है। यहां ज्यादा बरसात के दिनों मे रास्तें में बाईक खराब होने के अलावा छिपने की कोई जगह नहीं होना भी बड़ी परेशानी का कारण हो सकता है।<br />जंगली जानवरों का आवास होने से दिन के समय समूह में ही जाना सुरक्षित है।<br /><strong>2. चट्टानेश्वर महादेव</strong><br />कोटा से लगभग 25 किमी दूर केबलनगर के पास अरावली पहाड़ियों के बीच बहता झरने के पास स्थित है। प्राचीन शिव प्रतिमा और लगभग 3600 वर्ष पुराने प्रागैतिहासिक शैलचित्रों काे देखने के लिये यहां वर्षपर्यन्त लोग आते है। लेकिन बरसात के मौसम में यह स्थल पुरी तरह पिकनिक स्पाॅट बन जाता है।<br /><strong>सुविधाएं व सावधानी</strong><br />एनीकट पर काई जमने से भारी फिसलन रहती है। यहाँ घुटनों तक दलदल व कीचड़ होने से हादसे होते हैं, इसलिए पानी में गहराई तक जाने से बचें।<br /><strong>3. आलनिया डैम</strong><br />कोटा-झालावाड़ रोड़ पर शहर से 25 किमी की दूरी पर शांत जलराशि, शानदार सूर्यास्त (सनसेट) और मानसून में बांध पर चलने वाली चादर प्रकृति प्रेमियाें के साथ साथ परिवार के साथ पिकनिक मनाने वाले लोगों के लिये मुफीद स्थान है।<br /><strong>4. बरधा बांध</strong><br />कोटा से बूंदी मार्ग पर स्थित लगभग 35 किमी की सडक दुरी पर स्थित 'हाड़ौती का मिनी गोवा' के नाम से जाने जाने वाला यह स्थल मानसून में हाडौती के लोगों के लिये किसी बीच से कम नहीं । बांध की 4 फीट चौड़ी दीवार पर चढ़कर लोग वहां से गिरते पानी के बीच खडे होकर फोटाे खिंचवाते है। 22 फीट की ऊंचाई से गिरते पानी के नीचे नहाने का आनन्द लेने की हाेड़ में उमडता लोगों का हुजुम किसी समुद्री किनारें जमा हुई भीड़ का नजारा बन जाता है।<br /><strong>सुविधाएं व सावधानियां</strong><br />यहां आसपास गांव होने से खाने पीने की दुकाने मिल जाती है। दीवार पर फिसलन और कीचड़ के कारण बहने का खतरा रहता है। यहाँ सुरक्षा के लिए एसडीआरएफ की टीम तैनात रहती है।<br /><strong>5. रामेश्वरम् महादेव (बूंदी)</strong><br />शहर से 60 कि. मी. दुर रामेश्वरम् महादेव पहाड़ों की कंदरा में स्थित प्राकृतिक गुफा मंदिर है। जहाँ स्वयंभू शिवलिंग पर निरंतर जलधारा से साक्षात जलाभिषेक होता है।<br /><strong>सुविधाएं व सावधानी</strong><br />धार्मिक आस्था का बड़ा केंद्र। गुफा और सीढ़ियों में नमी व फिसलन से सतर्क रहें।</p>
<p><strong>आपात स्थिति में काम आएगा मोबाइल</strong><br />मानसून में पिकनिक पर जाते समय मोबाइल आपदा के समय मदद बुलाने में बहुत काम आता है, बशर्ते इसका इस्तेमाल रील्स बनाने की जगह सतर्कता के लिए किया जाए। हाड़ौती के अधिकांश पिकनिक स्पॉट्स घने जंगलों या घाटियों में स्थित हैं, जहाँ नेटवर्क गायब हो जाता है। ऐसे में पिकनिक पर निकलते समय अपने साथ इमरजेंसी किट और एहतियात अवश्य रखें। पिछले दिनों देखने में आया है कि लोग ऐसी जगहों पर जहां खड़े रहना तक मुश्किल हो वहां जाकर रील्स बना रहे है। फिसलन वाली जगहों पर या पीछे गहरा पानी, झरना, या बैकग्राउण्ड़ दिखानेे के चक्कर में लोगों ने खतरें को कई गुणा बढ़ा दिया था। रील्स बनाते समय व्यक्ति में एकाग्रता व संतुलन के साथ साथ सुरक्षा के प्रति भारी उपेक्षा ही हादसों का कारण बनती है।<br /><strong>-विष्णु श्रृंगी, गोताखाेर नगर निगम कोटा</strong></p>
<p><strong>आपदा प्रबंधन और रेस्क्यू टीमें मुस्तैद</strong><br />सिविल डिफेंस और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों को मानसून के दौरान भंवरकुंज, गेपरनाथ, अलनिया और बरधा डैम जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में मुस्तैद किया गया है। प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि वे केवल अधिकृत व सुरक्षित स्थानों पर ही पर्यटन का आनंद लें और मानसून की मस्ती में अपनी सुरक्षा का ध्यान प्राथमिकता से रखें।<br /><strong>- राकेश व्यास, उपायुक्त, नगर निगम</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />हमारे द्वारा सभी संभावित खतरें वाले स्थानों काे चिन्हित करके वहां लगातार निगरानी की जाती है। पिकनिक सींजन में सभी एंट्री पर आधुनिक ट्रेकिंग सिस्टम एक्टिव रहता है। आमजन से अपील है कि केवल स्वीकृति प्राप्त स्थानों पर ही जायें व रील्स व आदि के लिये खतरे व पानी से दुरी बनाये रखें।<br /><strong>-मुथू एस, डीसीएफ मुकून्दरा हिल्स एण्ड़ टाईगर रिजर्व</strong></p>
<p>पिकनिक के दौरान बरसात या बाहर के पानी में नहाने से आपके शरीर को इन्फेक्शन हो सकता है। इसलिये घर पर आकर दौबारा से साफ पानी से नहायें ध्यान रहे पानी साफ ही पियें जिससे पानी जनित बिमारी न हो। मेडिकल फर्स्ट एड के अलावा जरूरी दवाईया अवश्य साथ रखें।<br /><strong>- डॉ. चन्द्रप्रकाश कलवार, चिकित्सा प्रभारी (क्रिटिकल केयर) सीएचसी कुन्हाड़ी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 14:15:31 +0530</pubDate>
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                <title>हादसों के बाद भी नहीं सुधरे हालात</title>
                                    <description><![CDATA[शहर में मकानों के ऊपर व पास से निकल रही हैं हाइटेंशन लाइनें।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/conditions-remain-unchanged-despite-accidents/article-159102"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)-(1)10.png" alt=""></a><br /><p>कोटा ।  <strong>केस एक:</strong> अनंतपुरा थाना क्षेत्र स्थित बरड़ा बस्ती में एक दिन पहले हाइटेंशन लाइन का इंसुलेटर टूटने से फेले करेंट से एक महिला की मौत हो गई और करीब 10 लोग बुरी तरह से झुलस गए। वहीं हादसे में दो गायों की भी मौत हो गई।</p>
<p><strong>केस दो: </strong>कुन्हाड़ी थाना क्षेत्र स्थित काली बस्ती में मार्च 2024 में धार्मिक यात्रा के दौरान झंडा हाईटेंशन लाइन से छू जाने के कारण लगे करेंट से करीब एक दर्जन लोग झुलस गए थे। हादसे में तीन लोगों की मौत भी हो गई थी।</p>
<p><strong>केस तीन:</strong> कुन्हाड़ी थाना क्षेत्र के सकतपुरा काली बस्ती में ही जुलाई 2025 में छत पर कपड़े सुखाते समय करंट लगने से एक महिला की मौत हो गई थी। वहीं महिला को बचाने के प्रयास में उनके पति भी करंट लगने से झुुलस गए थे।</p>
<p>ये तो कुछ उदाहरण मात्र हैं। उन घटनाओं व हादसों को बताने के लिए जो हाइटेंशन लाइनों के कारण हुए हैं। शहर में ऐसे कई मामले हो चुके हैं। पिछले करीब दो साल में ही आधा दर्जन से अधिक मामले हाइटेंशन लाइनों से करंट लगने के हो चुके हैं। जिनमें करीब 10 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और दर्जनों लोग झुलस चुके हैं। इतना सब कुछ होने के बावजूद अभी तक भी हालात नहीं सुधरे हैं। अभी भी शहर के इलाके हो या आस-पास के ग्रामीण इलाके। वहां मकानों के ऊपर व पास से 33 केबी व 11 केबी की हाइटेंशन लाइनें गुजर रही है। जिनसे रोजाना हजारों लोगों की जान खतरे में है। उसके बाद भी न तो ये लाइनें शिफ्ट हो रही हैं और न ही लोग वहां से हट रहे हैं। नतीजा हजारों लोगों के सिर पर रोजाना जान का खतरा मंडरा रहा है।</p>
<p><strong>हर जगह है हाइटेंशन लाइनें</strong><br />शहर के इलाके हो या ग्रामीण क्षेत्र के हाइटेंशन लाइनें हर जगह पर है। फिर चाहे वह अनंतपुरा स्थित बरड़ा बस्ती हो या शिवपुरा क्षेत्र। दादाबाड़ी का वक्फ नगर हो या कुन्हाड़ी का नांता क्षेत्र। इतना ही नहीं डीसीएम क्षेत्र के प्रेम नगर व गोविंद नगर या काली बस्ती। रेलवे कॉलोनी, भीमगंजमंडी, नयापुरा, पाटनपोल समेत शहर के सभी क्षेत्रों में हाइटेंशन लाइनें गुजर रही है। इनमें से अधिकतर जगह पर ये लाइनें मकानों के ऊपर से व मकानों के नजदीक से गुजर रही हैं।</p>
<p><strong>बरसात में अधिक खतरा</strong><br />हाइटेंशन लाइन से हर समय खतरा है। इन लाइटों में इतना अधिक करंट होता है कि वह करीब 3 से साढ़े तीन फीट से कम की दूरी पर लोगों को अपनी चपेट में ले सकते हैं। ऐसे में जिन घरों के ऊपर व पास से ये लाइनें गुजर रही हैं उनके लिए बरसात में खतरा अधिक है। बरसात के समय ऐसी जगह पर करंट फेलने व करंट लगने की घटनाएं अधिक होने की संभावना बनी हुई है।</p>
<p><strong>ऊर्जा मंत्री ने दिए थे लाइन शिफ्ट करने के निर्देश</strong><br />करीब दो साल पहले सकतपुरा की काली बस्ती में हाइटेंशन लाइन से हुए हादसे में तीन लोगों की मौत व एक दर्जन लोगों के झुलसने की घटना के बाद मौके पर पहुंचे ऊर्जा मंत्री हीरालाल नगर ने यहां से हाइटेंशन लाइनें शिफ्ट करने के आदेश दिए थे। लोगों का कहना है कि अभी तक भी वहां से लाइनें शिफ्ट नहीं हुई है। ऐसा एक ही जगह पर नहीं कई जगह पर है लेकिन लाइनें वहीं के वहीं है।</p>
<p><strong>खतरनाक लाइनें हों शिफ्ट</strong><br />लोगों का कहना है कि हाइटेंशन लाइनों से आए दिन हादसे हो रहे हैं। ऐसे में इन खतरनाक लाइनों को शिफ्ट किया जाना चाहिए। कुन्हाड़ी निवासी मोहन सिंह सोलंकी का कहना है कि नदी पार क्षेत्र की काली बस्ती में हाइटेंशन लाइनों से कई बार हादसे हो चुके हैं उसके बाद भी लाइनें शिफ्ट नहीं हुई है। जबकि चाहे मकान बाद में बने हों लेकिन हाइटेंशन लाइनों को शिफ्ट करना बिजली विभाग का काम है। शिवपुरा निवासी महेश कुमार नागर का कहना है कि हाइटेंशन लाइनें शहर से दूर व आबादी क्षेत्र से नहीं गुजरनी चाहिए। हालांकि कई लोगों ने मकान बाद में बनाए जिससे लाइनें उनके मकान के पास से निकल रही है। लेकिन मकान बनने के बाद जब लोग वहां रहने लगे हैं तो उन लाइनों को शिफ्ट करने के प्रयास किए जाएं। जिससे लोगों की जान को खतरा नहीं हो।</p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />लोगों को लाइट की सुविधा चाहिए तो इसके लिए जीएसएस से ट्रांसफार्मर तक लाइट हाइटेंशन के माध्यम से ही आती है। बिना हाइटेंशन के लाइट की सुविधा निर्बाध रूप से मिलना मुश्किल है। लेकिन हाइटेंशन लाइनें पहले डली हुई है। लोगों ने मकान बाद में बनाए हैं। जिससे वे लाइनों के नजदीक पहुंचे है। अनंतपुरा की बरड़ा बस्ती में अवैध खनन के कारण इंसुलेटर टूटने से हादसा हुआ है। हाइटेंशन लाइनों से एक निर्धारित मानक दूरी बनाए रखना आवश्यक है। विभाग की ओर से समय-समय पर लोगों को नोटिस व चेतावनी दी जाती है। लेकिन उसके बाद भी जहां अधिक लोगों के जानमाल को नुकसान का खतरा रहता है। वहां से अन्य स्थानों पर हाइटेंशन लाइन शिफ्ट की जा सकती है। लेकिन उसका आधा खर्चा लोगों को वहन करना होता है। साथ ही लाइन के साथ ही खम्बे शिफ्ट करने की जगह भी होनी चाहिए। पूर्व में कई जगह पर ऐसा किया भी गया है।<br /><strong>- शिवचरण जांगिड़, अधीक्षण अभियंता जेवीवीएनएल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 14:29:55 +0530</pubDate>
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                <title>दो वर्ष में उखड़ी सड़क, निर्माण गुणवत्ता पर ग्रामीणों का सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[निमोद-बड़गांव जर्जर सड़क: गड्ढों और बबूल की झाड़यों से बढ़ा हादसों का खतरा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/road-surface-disintegrated-within-two-years--villagers-question-construction-quality/article-158843"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)2.png" alt=""></a><br /><p>सांवतगढ़। निमोद से बड़गांव को जोड़ने वाली मुख्य सड़क बदहाल स्थिति के कारण क्षेत्रवासियों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। सड़क पर जगह-जगह बड़े गड्ढे होने से वाहन चालकों, राहगीरों और किसानों को प्रतिदिन कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। <br />सबसे अधिक परेशानी दोपहिया वाहन चालकों, स्कूली विद्यार्थियों, महिलाओं और बुजुर्गों को उठानी पड़ रही है। बारिश के दौरान गड्डों में पानी भर जाने से उनकी गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ गई है।</p>
<p>ग्रामीणों ने बताया कि यह सड़क निमोद, बड़गांव सहित आसपास के कई गांवों का प्रमुख संपर्क मार्ग है। इसी रास्ते से किसान कृषि उपज मंडी तक पहुंचाते हैं तथा विद्यार्थी स्कूल-कॉलेज आते-जाते हैं। सड़क की जर्जर स्थिति के कारण आवागमन जोखिमभरा हो गया है। <br />उपसरपंच लटूरलाल बेरवा एवं आशाराम मीपणा ने बताया कि सड़क किनारे बबूल की घनी झाड़ियां उग आने से मार्ग संकरा दिखाई देता है।</p>
<p>कई स्थानों पर शाखाएं सड़क तक फैल चुकी हैं, जिससे सामने से आने वाले वाहन दिखाई नहीं देते और दुर्घटना का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण में गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया। निर्माण के दो वर्ष पूरे होने से पहले ही डामर उखड़ गया और सड़क गड्डों में तब्दील हो गई। ग्रामीणों ने सड़क की तत्काल क्षतिग्रस्त हिस्सों के मरम्मत, पुनर्निर्माण तथा सड़क किनारे उगी झाड़ियों की शीघ्र कटाई कराने की मांग की है।</p>
<p><strong>यह कहा अधिकारी ने</strong><br />मैं स्वयं मौके का निरीक्षण करूंगा। जहां-जहां सड़क की मरम्मत की आवश्यकता होगी, वहां शीघ्र मरम्मत करवाई जाएगी। साथ ही सड़क के दोनों ओर उगे बबूल के पेड़ों एवं झाड़ियों की कटाई भी जल्द करवाई जाएगी, जिससे आवागमन सुरक्षित हो सके।<br /><strong>- सोनू नागर, एईएन सार्वजनिक निर्माण विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 14:32:08 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>जरा संभल कर...सड़कों पर दौड़ रहे ओवरलोड यमदूत</title>
                                    <description><![CDATA[वाहनों में क्षमता से ज्यादा भूसा भरकर ले जा रहे चालक।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/proceed-with-caution----overloaded-vehicles-on-the-roads-are-like-harbingers-of-death/article-158381"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/12200-x-600-px)-(1)8.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। ओवरलोड भूसे से भरे वाहनों से सड़क हादसे होने के बावजूद भी वाहन चालक ओवरलोडिंग से बाज नहीं आ रहे हैं। इसका खामियाजा सड़क से गुजरने वाले राहगीरों एवं अन्य वाहन चालकों को भुगतना पड़ रहा हैं। शहर के विभिन्न मार्गों पर इन दिनों काफी संख्या में ओवरलोड भूसे से भरे वाहन धड़ल्ले से दौड़ऩे लगे हैं। यह ओवरलोड वाहन रात के समय अधिक तेज चलते है। सड़कों को घेर कर चलते हुए समय हादसे को निमंत्रण देते रहते हैं। इनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से शहर के विभिन्न मार्गो पर इनका धड़ल्ले से संचालन हो रहा है। ऐसे में सड़क हादसों का खतरा बना हुआ है।</p>
<p><strong>अधिक कमाई की चाहत में नियम दरकिनार</strong><br />ग्रामीण क्षेत्रों में गर्मी के मौसम में किसानों ने अब भूसा बेचना शुरू कर दिया है। इस समय अधिकांश स्थानों पर भूसे का संकट बना हुआ है। इस कारण राजस्थान के किसान पंजाब, हरियाणा और मध्यप्रदेश से भूसा मंगवा रहे हैं। यह भूसा ट्रैक्टर-ट्रॉली के साथ ही ट्रकों और अन्य वाहनों में राजस्थान के कई शहरों में भेजा जा रहा है। मध्यप्रदेश से आने वाले भूसे से भरे कई ओवरलोड वाहन इन दिनों से कोटा से गुजर रहे हैं। कमाई के लालच में कई वाहन चालक नियम कायदों की धज्जियां उड़ा रहे है और क्षमता से अधिक भूसे का परिवहन कर रहे हैं। ऐसे में दुपहिया वाहन सहित अन्य वाहन चालकों को हादसों का खतरा बना हुआ है।</p>
<p><strong>ओवरलोड को ओवरटेक करना काफी खतरनाक</strong><br />सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए आए दिन सरकार व प्रशासन की ओर से जागरूकता अभियान चलाया जाता है, लेकिन दुर्घटनाओं को न्योता दे रहे भूसे से भरे ओवरलोड वाहनों पर किसी जिम्मेदार विभाग का ध्यान नहीं है। निर्धारित वजन से अधिक भूसा इन वाहनों में भरा रहता है। वाहनों में भूसा भरने के बाद हालत यह होती है कि दोनों तरफ और पीछे कई फिट बाहर तक उसका हिस्सा निकला रहता है। ऐसे में सड़क पर चलने वाले अन्य वाहन चालकों को सामने कुछ भी नजर नहीं आ पाता है। इसी दौरान ओवरलोड वाहन को ओवरटेक करने के दौरान कई बार सड़क दुर्घटना तक हो जाती है। इसके बावजूद ओवरलोड वाहनों का धड़ल्ले से संचालन हो रहा है।</p>
<p><strong>सुबह व रात के समय अधिक संचालन</strong><br />कोटा शहर में दिन के समय ओवरलोड वाहनों की एंट्री बंद हैं। इस कारण भूसे का परिवहन सुबह जल्दी और रात के समय अधिक होता है। इन दिनों से मध्यप्रदेश से भूसा लेकर आने वाले वाहन रायपुरा, देवली अरब और बोरखेड़ा मार्ग से रात के समय गुजरते हुए नजर आ रहे हैं। पुलिस की कार्रवाई से बचने के लिए वाहन चालक सुबह व रात को वाहन का संचालन करते हैं। इन वाहनों में पीछे व साइडों में तिरपाल लगाकर इतना भूसा भर दिया जाता है कि पीछे से आने वाला वाहन या उसके होर्न की आवाज तक सुनाई नहीं देती है। वहीं साइडों से निकल रहे भूसे से वाहन चालकों के टकराकर गिरने की आशंका रहती है।</p>
<p>रायपुरा चौराहे से देवली अरब रोड पर इन दिनों काफी संख्या में भूसे से भरे ओवरलोड वाहनों का संचालन हो रहा है। इन वाहनों के कारण कई बार जाम की स्थिति तक हो जाती है। वहीं पीछे चलने वाले वाहन चालकों को सामने कुछ नजर नहीं आता है। ऐसे में दुर्घटना का खतरा बना रहता है।<br /><strong>-सुरेश जांगिड, दुपहिया वाहन चालक</strong></p>
<p>इन दिनों भूसे से भरे ओवरलोड वाहन हमारी कॉलोनी के सामने से रोजाना निकल रहे हैं। कई वाहनों से भूसा उड़ता रहता है, जो हमारे मकानों तक में घुस जाता है। इससे सफाई में काफी परेशानी होती है। पुलिस को इनके संचालन पर रोक लगानी चाहिए।<br /><strong>-रोशनी देवी, निवासी रायपुरा</strong></p>
<p>ओवरलोड वाहनों के खिलाफ नियमित रूप से यातायात पुलिस द्वारा कार्रवाई की जाती है। इनके चालान भी बनाए जाते हैं। अब भूसे से भरे वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए रायपुरा से देवली अरब रोड पर लगातार चैकिंग की जाएगी।<br /><strong>-पूरण सिंह, ट्रैफिक इंस्पेक्टर, कोटा</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 15:02:08 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>बरसात से पहले ही सड़कों का हुआ बुरा हाल, पानी भरने पर रहेगा हादसों का खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[कहीं गड्ढे हैं तो कहीं सड़कें खुदी पड़ी हैं, वहीं सीवरेज कार्य के बाद कई सड़कों की मरम्मत भी अधूरी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/roads-in-poor-condition-even-before-the-monsoon/article-157558"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/111200-x-600-px)-(8)4.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। <strong>दृश्य एक:</strong> जयपुर गोल्डन से ज्वाला तोप की तरफ जाने वाले रास्ते पर सरोवर टॉकीज के सामने मंदिर के पीछे तालाब के सहारे की सड़क पर इतने अधिक गड्ढ़े हो रहे हैं कि वहां से निकलने वाले वाहन हिचकोले खा रहे हैं। विशेष रूप से दो पहिया वाहनों का यहां संतुलन बिगड़ रहा है। जिससे रोजाना कई वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं।</p>
<p><strong>दृश्य दो:</strong> एरोड्राम सर्किल पर अंरडपास के ऊपर की सड़क जो झालावाड़ हाइवे रोड है। यहां से दिनभर बड़ी संख्या में और तेजी से वाहन निकल रहे हैं। वह सड़क बीच से बदहाल हो रही है। जिससे वहां से गुजरने वाले वाहनों के गड्ढ़ों से बचकर निकलने के कारण कई बार वाहन आपस में टकरा रहे हैं। ऐसे में हादसे का खतरा बना हुआ है।</p>
<p><strong>दृश्य तीन:</strong> डीसीएम रोड स्थित इंद्रप्रस्थ औद्योगिक क्षेत्र में एक सड़क का बीच से काफी बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो रहा है। ऐसे में वहां से दो पहिया वाहन ही नहीं चार पहिया वाहनों तक को निकलने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वाहन चालकों को इन गड्ढ़ों से बचकर निकलना पड़ रहा है।</p>
<p>ये तो उदाहरण मात्र हैं शहर की सड़कों के बदहाली को बताने के लिए। ऐसी कई अन्य सड़कें व मुख्य मार्ग हैं जहां बरसात से पहले ही सड़कों की हालत खराब हो रही है। कहीं गड्ढ़े हो रहे हैं तो कहीं सड़कें खुदी पड़ी है। कहीं सीवरेज के लिए खोदी गई सड़कों को सही ढंग से नहीं भरा गया। जिससे सड़कें बीच से धंस गई है। ऐसे में अभी ही उनसे हादसों का खतरा बना हुआ है। जबकि कुछ समय बाद बरसात शुरु होने वाली है। ऐसे में इन गड्ढों व टूटी सड़कों पर पानी भरने से उनका अंदाजा वाहन चालकों को नहीं होने पर इनसे गुजरने वाले वाहनों का संतुलन बिगडऩे पर हादसों का खतरा अधिक होने की संभावना है।</p>
<p><strong>हमेशा होती मरम्मत, फिर भी हालत खराब</strong><br />सरोवर टॉकीज के सामने मंदिर के पीछे वाली सड़क का छोटा सा हिस्सा पिछले कई सालों से बार-बार खराब हो रहा है। संबंधित विभाग द्वारा इसे हर बार सही भी कराया जाता है। लेकिन यह अधिक समय तक नहीं टिक पाता। कुछ समय बाद फिर से वही पुरानी हालत हो जाती है। गत वर्ष भी बरसात में यहां की सड़क खराब होने से इसमें पानी भरने पर वाहनों का संतुलन बिगड़ रहा था। लोगों की परेशानी को देखते हुए इसे सही भी करवा दिया था। लेकिन वर्तमान में फिर वही पुरानी जैसी हालत हो गई है। शुक्रवार को भी इस जगह पर कई वाहनों का संतुलन बिगड़ा। जिससे पीछे से आने वाले अन्य वाहनों को गति धीमी करनी पड़ी। वरना बड़ा हादसा हो सकता था। बरसात में यहां हादसों की संभावना अधिक है।</p>
<p><strong>सीवरेज के लिए खोदी सड़कों की हालत अधिक खराब</strong><br />शहर में डामर सड़क हो या सीसी अधिकतर की हालत खराब है। लेकिन विशेष रूप से सीवरेज के लिए बीच से खोदी गई सीसी सड़कों की हालत अधिक खराब है। हर सड़क बीच से खुदी हुई है। लाइन डालने के बाद उनकी मरम्मत तो की गई लेकिन सही ढ़ंग से नहीं होने से अधिकतर सड़कों की हालत खराब है। जिससे बरसात में पानी भरने पर वहां गड्ढ़े होने से हादसों का खतरा अधिक है। यह स्थिति किसी एक या दो जगह की नहीं वरन् पूरे शहर की है। फिर चाहे वह छावनी का क्षेत्र हो या धानमंडी का। नयापुरा का क्षेत्र हो या विज्ञान नगर का। विज्ञान नगर मुक्तिधाम से पीएफ ऑफिस के सामने से कॉमर्स कॉलेज तक की सड़क और विज्ञान नगर मुख्य मार्ग की सड़क, नयापुरा मुक्तिमार्ग की सड़क सभी जगह पर ऐसी स्थिति है कि दो पहिया वाहनों का चलना दूभर हो रहा है।</p>
<p><strong>नाले को व्यू कटर से ढका, सड़क बदहाल</strong><br />औद्योगिक क्षेत्र स्थित इंद्रा गांधी नगर में एसएफएस चौराहे से प्रेम नगर की तरफ जाने वाले रास्ते में नाले पर पुलिया बनी हुई है। हाल ही में नगर निगम की ओर से उस पुलिया पर दोनों तरफ दीवार खड़ी कर व्यू कटर लगा दिए। जिससे नाले की गंदगी नजर नहीं आए। लेकिन उस सड़क को सही नहीं किया गया। निगम सूत्रों का कहना है कि यह सड़क केडीए के अधीन है। ऐसे में उस सड़क पर इतने अधिक व बड़े-बड़े गड्ढ़ें हैं कि वहां जरा सी बरसात में ही पानी भर गया। जिससे वाहनों व पैदल ही लोगों को निकलने पर संतुलन बिगडऩे से हादसों का खतरा बना हुआ है। </p>
<p><strong>संबंधित विभाग सुधारे सड़कें</strong><br />छावनी निवासी ऐश्वर्य श्रृंगी का कहना है कि नगर निगम हो या केडीए। सड़कों को सही करना इनकी जिम्मेदारी है। कई सड़कें तो सीवरेज लाइनों के कारण खराब हुई है। जिन विभाग के अधीन जो सड़क आती है उसे सही करवानी चाहिए। वरना बरसात में ये सही होंगी नहीं। जिससे लोगों को महीनों तक परेशानी व हादसों का दंश झेलने को मजबूर होना पड़ेगा।</p>
<p>प्रेम नगर निवासी मुकेश जोनवाल का कहना है कि इंद्रा गांधी नगर के इस नाले की पुलिया से रोजाना बड़ी संख्या में लोग गुजरते हैं। यहां से कई निजी व सरकारी स्कूलों के ऑटो व वैन भीबच्चों को लेकर जाती है। अभी गर्मी की छुट्टी है जिससे बच्चों के वाहन तो नहीं आ-जा रहे। लेकिन स्थानीय लोग तो निकल ही रहे हैं। अभी से यह हालत है तो बरसात में हालत अधिक खराब होने से हादसों का खतरा बना हुआ है। नगर निगम या केडीए जिस भी विभाग के अधीन सड़क आती है उन्हें बरसात से पहले सही करवाना चाहिए।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />समय-समय पर सड़कों की मरम्मत करवाई जाती है। सीवरेज लाइन डालने के बाद उस सड़क को सही करने की जिम्मेदारी संबंधित संवेदक फर्म की रहती है। फिर भी यदि कहीं सड़कों पर गड्ढ़े हैं तो उनका पता करवाकर सही करवाया जाएगा।<br /><strong>- मुकेश कुमार चौधरी, सचिव कोटा विकास प्राधिकरण </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 14:59:02 +0530</pubDate>
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                <title>असर का खबर - नाला निर्माण का तेज हुआ काम</title>
                                    <description><![CDATA[पिछले दिनों नाले को खोदकर खुला छोड़ दिया गया था। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-report-%E2%80%93-work-on-drain-construction-accelerated/article-157553"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/111200-x-600-px)-(6)8.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। बसंत विहार क्षेत्र में चल रहे नाले का निर्माण कार्य तेज हो गया है। नाले को सीसी बनाने के लिए सरियों को ढकने का काम किया जा रहा है। कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से बसंत विहार क्षेत्र में नाला निर्माण का काम किया जा रहा है। इसके लिए पिछले दिनों नाले को खोदकर खुला छोड़ दिया गया था। जिससे कई घरों के आगे ऐसी स्थिति हो गई थी कि लोग घरों से बाहर नहीं निकल पा रहे थे। घरों के आगे लकड़ी के पाटे लगाकर वाहन निकलना पड़ रहा है। जिससे कभी भी हादसा होने का खतरा बना हुआ है।</p>
<p><strong>नवज्योति ने किया था मामला प्रकाशित</strong><br />गौरतलब है कि बसंत विहार में नाला निर्माण के दौरान उसे खुला व अधूरा छोडऩे का मामला दैनिक नवज्योति ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। समाचार पत्र में 16 जून के अंक में पेज 7 पर 'हादसे के बाद भी नहीं चेता प्रशासन' शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। जिसमें नाला निर्माण के दौरान उसे अधूरा छोडऩे से स्थानीय लोगों को हो रही पीड़ा को उजागर किया था। समाचार प्रकाशित होने के बाद केडीए अधिकारी व संवेदक सक्रिय हुए। उसके बाद नाला निर्माण के काम में तेजी से काम शुरु किया गया।</p>
<p>स्थानीय निवासी अरविंद विजय ने बताया कि एक साथ कई श्रमिक आकर काम कर रहे हैं। नाले में लगे सरियों को कवर करने का काम किया गया। जिस तरह से काम किया जा रहा है। उससे स्पष्ट है कि नाला जल्दी ही बनकर तैयार हो जाएगा। जिससे लोगों की परेशानी कम होने के साथ ही हादसों का खतरा भी नहीं रहेगा।</p>
<p>इधर केडीए अधिकारियों का कहना है कि संवेदक को निर्देश दिए हुए हैं कि निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा के पूरे इंतजाम किए जाएं। साथ ही काम ऐसे किया जाए जिससे लोगों को परेशानी नहीं हो। बसंत विहार में नाले का काम तेजी से किया जा रहा है। शीघ्र ही काम पूरा हो जाएगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 14:15:36 +0530</pubDate>
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                <title>देई से नैनवां के बीच स्टेट हाइवे का मामला : गड्डों से छलनी मार्ग बना हादसों का कारण</title>
                                    <description><![CDATA[वर्षाकाल में गड्डों में पानी भरने  से दुर्घटनाओं की आशंका और अधिक बढ़ जाएगी। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/issue-regarding-the-state-highway-between-dei-and-nainwa--pothole-riddled-road-becomes-a-cause-of-accidents/article-156363"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/1111200-x-600-px)-(2)12.png" alt=""></a><br /><p>देई। देई-नैनवां राज्य राजमार्ग संख्या 34 पर जगह-जगह बने गहरे गड्डों के कारण वाहन चालकों में भारी रोष व्याप्त है। विशेष रूप से देई से नैनवां के बीच सड़क की स्थिति अत्यंत खराब हो चुकी है, जिससे आवागमन करने वाले लोगों को प्रतिदिन परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सड़क पर बने गड्डों के कारण वाहनों का संतुलन बिगड़ रहा है और दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। पीपल्या तथा बांसखोल के जंगल क्षेत्र में भी सड़क पर अनेक स्थानों पर गहरे गड्ढे बने हुए हैं। </p>
<p>स्थानीय लोगों के अनुसार इन गड्डों के कारण आए दिन छोटी-बड़ी दुर्घटनाएं हो रही हैं। समय रहते मरम्मत नहीं होने पर किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।अधिवक्ता संजय दीवाना एवं नरेश मीणा ने बताया कि मार्ग कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो चुका है। सड़क पर बने गड्डों का सही अनुमान नहीं लग पाने से वाहन चालक दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि आगामी वर्षाकाल में गड्डों में पानी भर जाने से दुर्घटनाओं की आशंका और अधिक बढ़ जाएगी। ऐसे में सार्वजनिक निर्माण विभाग को वर्षा ऋतु से पहले सड़क की मरम्मत करानी चाहिए।</p>
<p>समाजसेवी अशोक जिंदल ने बताया कि कस्बे के बूंदी मार्ग पर एक वर्ष से अधिक समय से डामर उखड़ चुका है और गिट्टी बाहर निकल आई है। वर्षाकाल में सड़क पर पानी भर जाने से लोगों का आवागमन दूभर हो जाता है। उन्होंने मार्ग के शीघ्र डामरीकरण की मांग की।वहीं जेतपुर में नाईपुरिया के आगे निकले नुकीले पत्थरों से दुपहिया वाहन चालक गिरकर चोटिल हो रहे हैं। स्थानीय लोगों ने विभाग से तत्काल सुधार कार्य कराने की मांग की है।</p>
<p>स्टेट हाईवे 34 की नैनवां से जेतपुर सडक के मरम्मत के लिए टेण्डर हो चुके है। मौसम साफ रहने व डामर मिलने पर शीघ्र मरम्मत की जायेगी।<br /><strong>- हरिराम मीना, अधिशाषी अभियंता, सार्वजनिक निर्माण विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 15:53:55 +0530</pubDate>
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