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                <title>abheda - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>बायोलॉजिकल पार्क में बनेगा 80 लाख का सुरक्षा कवच</title>
                                    <description><![CDATA[सौलर फेंसिंग से कवर होगा पूरा बायोलॉजिकल पार्क।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/a-security-cover-of-80-lakhs-will-be-built-in-the-biological-park/article-126229"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/untitled-design-(3)4.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क को अब मांसाहारी जानवरों के हमले से सुरक्षित बनाया जाएगा। इसके लिए 80 लाख की लागत से सौलर फेंसिंग का सुरक्षा कवच बनाया जाएगा। जिसमें शाकाहारी वन्यजीव व रात को ड्यूटी पर तैनात वनकर्मियों की जान महफूज रह सकेगी। पार्क की सम्पूर्ण दीवार सौलर फेंसिंग रूपी लक्ष्मण रेखा से कवर्ड होगी, जिसमें विद्युत करंट प्रवाहित होता रहेगा। यदि, लेपर्ड छलांग लगाकर दीवार पार करने की कोशिश करेगा तो सौलर फेंसिंग, करंट का झटका देगी। इलेक्ट्रिक शॉक लगने से पैंथर बायोलॉजिकल पार्क के अंदर घुस नहीं पाएंगे। हालांकि, इस करंट से वाइल्ड एनिमल को नुकसान नहीं होगा।  दरअसल, अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क के चारों ओर घना जंगल है। जहां पैंथर, भालू , जरख, भेड़िया सहित कई खूंखार मांसाहारी जानवरों का मूवमेंट रहता है। ऐसे में वह पार्क की 10 फीट ऊंची सुरक्षा दीवार को फांद अंदर घुस जाते हैं। जिससे शाकाहारी वन्यजीवों व रात को गश्त करते वनकर्मियों पर हमले का खतरा बना रहता है। गत वर्ष ऐसी घटना घट चुकी है। वन्यजीव विभाग ने सौलर फेंसिंग लगवाने के लिए प्रस्ताव बनाकर उच्चाधिकारियों को भेज दिए हैं। </p>
<p><strong>5 हजार मीटर सुरक्षा दीवार पर लगेगी सौलर फेंसिंग </strong><br />वन्यजीव विभाग के उप वन संरक्षक अनुराग भटनागर ने बताया कि अभेड़ा बायोलॉजिकल की सुरक्षा दीवार 5 हजार रनिंग मीटर लंबी है। वर्तमान में यह दीवार 10 फीट ऊंची है, जिस पर करीब 4 फीट ऊंची सौलर फेंसिंग लगाई जाएगी, जो सौलर से कनेक्ट रहेगी और चार्ज होने के साथ उसमें निर्धारित मात्रा में विद्युत करंट प्रवाहित होता रहेगा। इससे बाहर का कोई भी वाइल्ड एनिमल खास तौर पर लेपर्ड दीवार फांद पार्क के अंदर नहीं आ सकेगा। जिससे शाकाहारी वन्यजीव व गश्त करते वनकर्मियों पर मांसाहारी जानवरों के हमले का खतरा टल सकेगा। इस सौलर फेंसिंग से पूरा बायोलॉजिकल पार्क कवर्ड रहेगा। इसमें करीब 80 लाख रुपए का खर्चा आएगा। इसके प्रस्ताव बनाकर उच्चाधिकारियों को भेज दिए हैं।  </p>
<p><strong>पिंजरे में घुसकर लेपर्ड ने किया था ब्लैक बक का शिकार</strong><br />अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में वर्ष 2023 में 29 अप्रेल की रात को लेपर्ड ने बाहर से बायोलॉजिकल पार्क की 10 फीट ऊंची दीवार फांद परिसर में घुस गया था और ब्लैक बक के एनक्लोजर में घुसकर हमला कर दिया। शाकाहारी वन्यजीवों के नाइट शेल्टर तक पहुंच गया और ब्लैक बक के शावक का शिकार कर लिया। घटना का पता अगले दिन सुबह गश्त कर रहे कर्मचारियों की सूचना पर लगा। घटना के बाद से वनकर्मियों में भी सुरक्षा को लेकर चिंता व्याप्त हो गई थी। ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए लेपर्ड प्रूफ सौलर फेंसिंग लगवाना बेहद जरूरी है। इसलिए सैकंड फेस के निर्माण कार्यों में सौलर फेंसिंग करवाए जाना भी शामिल किया है। </p>
<p><strong>रात को गश्त करते वनकर्मियों पर हमले का रहता खतरा </strong><br />नाम न छापने की शर्त पर वनकर्मियों ने बताया कि बायोलॉजिकल पार्क के आसपास खुला वनक्षेत्र है। जिसमें खूंखार मांसाहारी जानवरों का मूवमेंट रहता है।  चूंकी, वन्यजीव रात को ही सक्रिय होते हैं और शिकार की तलाश में जंगल से बाहर निकलते हैं। ऐसे में भालू, जरख, भेड़िया और पैंथरों का बायोलॉजिकल पार्क में प्रवेश करने का अंदेशा लगा रहता है। जिससे रात को पार्क में गश्त करने वाले वनकर्मियों व होम गार्ड पर मांसाहारी वन्यजीवों के हमले का खतरा रहता है। ऐसे में सुरक्षा दीवारों पर सौलर फेंसिंग होने से शाकाहारी वन्यजीवों के साथ गश्त करने वाले कर्मचारी भी अनजाने खतरों से महफूज हो सकेंगे। </p>
<p><strong>इधर, 50 लाख से लगेगा इलेक्ट्रिक शवदाह गृह</strong><br />बायोलॉजिकल पार्क में सैकंड फेज के निर्माण कार्यों में इलेक्ट्रिक शवदाह गृह भी बनवाया जाना शामिल है। इससे मृत जानवरों के शव का सुगमता से डिस्पोजल हो सकेगा। अब तक शव का अंतिम संस्कार करने के लिए जलाया जाता है, जिससे लकड़ियों की खपत बढ़ती है और धुएं से हवा में प्रदूÑषण भी बढ़ता है। ऐसे में  इलेक्ट्रिक शवदाह गृह बनने से लकड़ियों की खपत रुकेगी और वायुमंडल में प्रदूषण भी नहीं फैलेगा। इसके अलावा इंफेक्शन, बैक्ट्रेरिया व संक्रमण का खतरा भी टलेगा। ऐसे में 50 लाख की लागत से इलेक्ट्रिक शवदाह गृह बनाया जाएगा। वन्यजीव विभाग द्वारा तैयार किए प्रस्ताव में इसे भी शामिल किया गया है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />बजट घोषणा के तहत अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क के द्वितीय चरण के निर्माण के लिए  25 करोड़ रुपए का प्रस्ताव बनाकर मुख्य वन संरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक व मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक को भेजे गए हैं। प्रस्ताव में बायोलॉजिकल पार्क को लेपर्ड पू्रफ सौलर फेंसिंग से कवर्ड किया जाना शामिल किया है। वहीं, 50  लाख की लागत से इलेक्ट्रिक शवदाह गृह भी बनाया जाना है। बजट मिलने पर अधूरे प्रस्तावित कार्यों का निर्माण कार्य पूर्ण हो सकेंगे। पर्यटकों की सुविधाओं में विस्तार के प्रयास लगातार जारी है। <br /><strong>- अनुराग भटनागर, उप वन संरक्षक वन्यजीव विभाग कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Sep 2025 17:30:00 +0530</pubDate>
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                <title>अब भोपाल पर टिकी कोटा की उम्मीदें</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा वन्यजीव विभाग ने मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक व सीजेडए को लिखा पत्र। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/now-kota-s-hopes-are-pinned-on-bhopal/article-97789"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/257rtrer33.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में युवा बाघ-बाघिन का जोड़ा लाने की कवायद तेज हो गई है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य  वन्यजीव प्रतिपालक व भोपाल चिड़िया घर प्रशासन को पत्र भेजा जा चुका है। अब भोपाल जू प्रशासन की स्वीकृति का इंतजार है। भोपाल की रजामंदी मिलने के साथ ही शिफ्टिंग का रास्ता भी साफ हो जाएगा। हालांकि, कोटा वाइल्ड लाइफ डिपार्टमेंट स्वीकृति मिलने की उम्मीद जता रहा है। गौरतलब है कि अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में बाघ नाहर की मौत व लॉयन नहीं होने से पार्क के राजस्व पर विपरीत असर पड़ा। ऐसे में वन्यजीव विभाग बड़े एनिमल लाने की तैयारी में जुटा है। </p>
<p><strong>4 से 8 वर्ष के बाघ-बाघिन लाना प्राथमिकता</strong><br />वन्यजीव विभाग के डीएफओ अनुराग भटनागर ने बताया कि भोपाल चिड़ियाघर में अच्छी संख्या में बाघ-बाघिन हैं। वहां से कम उम्र का ही जोड़ा लाना प्राथमिकता है। हमारी कोशिश है कि 4 से 8 वर्ष के बीच आयु के बाघ-बाघिन लाने की है। ताकि, ब्रिडिंग होने से बायोलॉजिकल पार्क में इनकी संख्या में इजाफा हो सके और भविष्य में यहां बाघों का कुनबा पनप सके। इस संबंध में मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक को पत्र लिखा जा चुका है। भोपाल चिड़ियाघर के अधिकारियों से भी सम्पर्क किया गया है। </p>
<p><strong>सज्जनगढ़ ने लॉयन देने से किया इंकार  </strong><br />डीएफओ भटनागर ने कहा, उदयपुर के सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क से लॉयन लाया जाना था लेकिन उनके यहां लॉयन सफारी शुरू किए जाने के कारण लॉयन देने से मना दिया। वहीं, सज्जनगढ़ में गुजरात से लॉयन का जोड़ा लाया जा चुका है। ऐसे में एक लॉयन अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क को मिले, इसके लिए मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक को फिर से पत्र लिखा गया है। पार्क के विकास के लिए हर संभव कोशिश की जा रही है। </p>
<p><strong>समय पर चेत जाते तो मिल जाता लॉयन</strong><br />जानकारी के अनुसार अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में लॉयनेस व लॉयन का जोड़ा लाने की तत्कालीन मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक जयपुर से स्वीकृति दिसम्बर 2022 में ही मिल गई थी। इसके लिए कोटा से वन्यजीव डीएफओ उदयपुर से पत्राचार भी किया गया था। उस समय वहां से हाईब्रिड लॉयन अली कोटा को दिए जाने की हरी झंडी भी मिल गई थी। लेकिन, कोटा वन्यजीव विभाग के तत्कालीन अधिकारी स्वीकृति मिलने के दो साल बाद भी केंद्रिय चिड़ियाघर प्राधिकरण से शिफ्टिंग की स्वीकृति नहीं ले सके। जिसकी वजह से शिफ्टिंग में अनावश्यक देरी होती रही। इसका नतीजा यह रहा कि वर्तमान में सज्जनगढ़ में अब लॉयन सफारी शुरू किए जाने की तैयारी चल रही है। ऐसे में अब उन्होंने कोटा को लॉयन देने में असमर्थता जाहिर कर दी। </p>
<p><strong>लॉयन-टाइगर नहीं होने से घटा राजस्व</strong><br />विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, लॉयन व टाइगर जैसे बड़े एनीमल न होने से अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क की सालाना इनकम पर विपरीत असर पड़ रहा है। जनवरी 2023 से 14 अक्टूबर 2024 तक बायोलॉजिकल पार्क को 63 लाख 25 हजार 82 रुपए का ही राजस्व एकत्रित हॉुआ है। राजस्व का यह आंकड़ा करीब दो साल का है। जबकि, गत वर्ष 12 महीनों में ही राजस्व करीब 48 लाख रुपए था। ऐसे में लॉयन, टाइगर व एमू, फॉक्स जैसे वन्यजीव के अभाव में पर्यटकों का अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क के प्रति रुझान कम हो रहा है। जिससे सरकार को होने वाली आय में गिरावट हो रही है। </p>
<p><strong>मगरमच्छ, घड़ियाल आए तो दोगुनी हो आय </strong><br />बायोलॉजिकल पार्क के निर्माण के दौरान 44 एनक्लोजर बनने थे लेकिन प्रथम चरण में मात्र 13 ही बन पाए। जबकि, 31 एनक्लोजर अभी बनने बाकी हैं। जब तक यह एनक्लोजर नहीं बनेंगे तब तक पुराने चिड़ियाघर में मौजूद घड़ियाल, मगरमच्छ, अजगर, बंदर, कछुए, सारस व लव बर्ड्स सहित एक दर्जन से अधिक वन्यजीव बायलॉजिकल पार्क में शिफ्ट नहीं हो पाएंगे। यदि, यह जानवर व पक्षी यहां शिफ्ट किया जाए तो पार्क की कमाई में दोगुना इजाफा होगा। वहीं, पर्यटकों को देखने के लिए ज्यादा एनीमल मिल सकेंगे। </p>
<p><strong>पर्यटक बोले-क्या देखें, बड़े एनिमल तो है ही नहीं</strong><br />विज्ञान नगर निवासी भावेश नागर, कविता नागर, गांधी गृह निवासी मेहमूद भाई ने बताया कि अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में पहले दो टाइगर थे, लेकिन  कुछ महीनों पर वह भी मर गया। जिसके बाद वन अधिकारी कोई बड़ा एनिमल्स नहीं लाए। वहीं, ऐमू पक्षी लाने की सिर्फ बातें ही की जाती है लेकिन लाते नहीं है। इसके अलावा वर्ष 2022 से ही लॉयन लाने की बात कही जा रही है लेकिन अब तक वह भी नहीं आ सका। ऐसे में यहां बड़े एनिमल तो है ही नहीं तो देखने क्या जाएं। सुविधाएं भी आधी-अधूरी हैं। जबकि, टिकट महंगा है। </p>
<p><strong>इनका कहना</strong><br />अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क के विकास के लिए लगातार प्रयास जारी हैं। भोपाल चिड़ियाघर से बाघ का एक जोड़ा लाने का प्रयास कर रहे हैं। इसके लिए मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक  व भोपाल चिड़ियाघर अधिकारियों को पत्र लिखा जा चुका है। साथ ही ऐमू व चिंकारा सहित अन्य एनीमल लाने की परमिशन मिल चुकी है, जो अगले हफ्ते तक कोटा ले आएंगे। <br /><strong>- अनुराग भटनागर, डीएफओ वन्यजीव विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Dec 2024 15:58:53 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - खुश खबरी : आज से बायोलॉजिकल पार्क में दौड़ेंगी गोल्फ कार्ट</title>
                                    <description><![CDATA[पर्यटकों की परेशानियों को लेकर नवज्योति ने लगातार खबरें प्रकाशित गंभीर मुद्दों प्रमुखता से उठाया था। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news---good-news--golf-carts-will-run-in-the-biological-park-from-today/article-70515"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-02/asar-khabar-ka---khushkhabri---aaj-s-biological-park-me-daudegi-golf-cart...kota-news-19-02-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। पर्यटकों के लिए खुश खबरी है। पांच महीने से पर्दे में ढकी गोल्फ कार्ट बुधवार से अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में दौड़ती नजर आएगी। लंबे इंतजार के बाद सैलानी 12 लाख की गोल्फ में सवार होकर जंगल का लुफ्त उठाएंगे और वन्यजीवों की दुनिया से रुबरू होंगे। दैनिक नवज्योति के लगातार प्रयासों से पर्यटकों को ई-कार्ट की सौगात मिलेगी। दोपहर तीन बजे मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के मुख्य वन संरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक रामकरन खैरवा गोल्फ कार्ट का शुभारंभ करेंगे। दरअसल, डीसीएम श्रीराम फर्टिलाइजर कम्पनी ने ईको ट्यूरिज्म बढ़ाने के उद्देश्य से गत वर्ष 10 सितम्बर को वन्यजीव विभाग को 12 लाख की दो गोल्फ कार्ट सौंपी थी, जो 5 माह से धूल खा रही थी। पार्क का ट्रैक साढ़े तीन किमी लंबा होने के कारण पूरा पार्क देखे बिना पर्यटकों को बैरंग लौटना पड़ता था। पर्यटकों की परेशानियों को लेकर नवज्योति ने लगातार खबरें प्रकाशित गंभीर मुद्दों प्रमुखता से उठाया था। जिसकी वजह से ही विभाग को ई-कार्ट संचालित करने की सुध आई। </p>
<p><strong>गोल्फ कार्ट से जंगल की सफारी</strong><br />अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क के रैंजर दुर्गेश कहार ने बताया कि बुधवार दोपहर तीन बजे अतिथि सीसीएफ रामकरन खैरवा, डीसीएम कम्पनी प्रतिनिधि, डीएफओ सुनील गुप्ता व एसीएफ राज बिहारी मित्तल की उपस्थिति में 5 सीटर व 7 सीटर दोनों गोल्फ कार्ट का शुभारंभ किया जाएगा। इसी के साथ पर्यटक गोल्फ की सवारी का लुफ्त उठा सकेंगे। </p>
<p><strong>प्रति व्यक्ति 50 रुपए होगा टिकट </strong><br />अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में गोल्फ कार्ट संचालन के लिए टिकट दर तय कर दी गई है। प्रत्येक व्यक्ति का टिकट 50 रुपए रहेगा। 5 सीटर ई-कार्ट के लिए 250 रुपए तथा 7 सीटर के लिए 350 रुपए शुल्क तय किया गया है। पूरी सीट भरने पर ही पर्यटकों को गोल्फ कार्ट की सवारी करवाई जाएगी। शाकाहारी व मांसाहारी वन्यजीवों के पिंजरों पर कुछ देर रुक कर पर्यटकों को साइटिंग करवाई जाएगी। यदि, निर्धारित समय के बाद भी पर्यटक रुकते हैं तो उनसे प्रत्येक 15 मिनट के लिए 100 रुपए अलग से चार्ज किए जाएंगे। </p>
<p><strong>शंभुपुरा कमेटी करेगी ई-कार्ट का संचालन</strong><br />ई-कार्ट का संचालन ईको इवलपमेंट कमेटी शंभुपुरा के माध्यम से किया जाएगा। इस कमेटी के माध्यम से दोनों गोल्फ कार्ट चलाई जाएगी। इससे वाली आय कमेटी के बैंक खाते में जमा होगी। जिससे दोनों वाहनों के ड्राइवरों को 8-8 हजार रुपए प्रति माह मानदेय दिया जाएगा। शेष राशि को बायोलॉजिकल पार्क के रख-रखाव में उपयोग ली जाएगी। </p>
<p><strong>बायोलॉजिकल पार्क के राजस्व में होगा इजाफा</strong><br />वन्यजीव विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क को पर्यटकों से प्रतिमाह 3 लाख रुपए का राजस्व प्राप्त होता है। ऐसे में दोनों गोल्फ कार्ट चलने से सरकार को होने वाले राजस्व में इजाफा होगा। </p>
<p><strong>वनकर्मियों को झेलना पड़ता था पर्यटकों का गुस्सा  </strong><br />पार्क में आने वाले पर्यटकों में बच्चे, बुर्जुग और दिव्यांगजन भी होते हैं। जिन्हें साढ़े तीन किमी का लंबा ट्रैक पैदल चलने में परेशानी होती है। ऐसे में वे टिकट लेकर भी बायोलॉजिकल पार्क के पूरे वन्यजीवों को देखे बिना ही वापस बैरंग लौटना पड़ता था। सुविधा होने के बावजूद न मिलने से पर्यटकों का गुस्सा वहां तैनात वनकर्मचारियों को झेलना पड़ता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 Feb 2024 16:45:18 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>दुर्लभ वनस्पतियों पर शौध कर सकेंगे रिसर्चर</title>
                                    <description><![CDATA[बॉटनिकल गार्डन में हाड़ौती क्षेत्र की ऐसी वनस्पतियां लगाई जाएंगी, जो संकटग्रस्त हैं या विलुप्त होने की कगार पर हैं। उन्हें संरक्षित किया जाएगा। वनस्पति उद्यान वैज्ञानिकों, वनस्पति शास्त्रियों, स्टूडेंट्स, रिसर्चर, बागवानों या ऐसे लोगों के लिए शैक्षणिक संस्थान है जो पौधों के जीवन में जागृत और प्रबुद्ध रुचि रखते हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/researchers-will-be-able-to-do-research-on-rare-plants/article-41698"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/durlabh-vanaspatiyo-par-shodh-kar-sakege-researchers..kota-news..4.4.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। आभेड़ा में बन रहे बॉटनीकल गार्डन में कैक्टस, फ्रूट, बटर फ्लाई, मेडिसिनल गार्डन सहित अलग-अलग थीम के कई गार्डन विकसित किए जाएंगे। यहां शहरवासियों को वनस्पतियों की जानकारी मिल सकेंगी, वहीं रिसर्चर को शोध के लिए दुलर्भ वनस्पतियों की खोज आसान होगी। साथ ही टयूरिज्म स्पॉट विकसित होगा। ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए कोटा वन मंडल की ओर से 5 करोड़ की लागत से बॉटनिकल पार्क का निर्माण करवाया जा रहा है। यह पार्क अभेड़ा महल के पास तालाब के पीछे 50 हैक्टेयर में तैयार किया जा रहा है। प्रथम चरण में 1.13 करोड़ की लागत से 30 से 35 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। 6 फीट ऊंची सुरक्षा दीवार खड़ी हो चुकी है। साथ ही दीवारों पर 4-4 फीट उंची तार फैंसिंग का काम भी पूरा हो गया है।   </p>
<p><strong>संकटग्रस्त पौधों की तैयार होगी नर्सरियां</strong><br />बॉटनिकल गार्डन में हाड़ौती क्षेत्र की ऐसी वनस्पतियां लगाई जाएंगी, जो संकटग्रस्त हैं या विलुप्त होने की कगार पर हैं। उन्हें संरक्षित किया जाएगा। इसके अलावा पलाश, खेजड़ी, अमलताश, बोरड़ी, कैर, जाल, रोहिड़ा, गोरख इमली, झरबेला, फोग, नीम, ऐलोविरा, कुमटा, गौंद, औषधीय पौधे, बम्बू, फल-फूल अश्वगंधा, प्रायोगिक तौर पर शहतूत व अन्य पौधे लगाकर नर्सरियां तैयार की जाएगी। </p>
<p><strong>पहले चरण में गार्डन में यह हुए काम</strong><br />फोरेस्टर रामस्वरूप गोचर ने बताया कि बॉटनीकल गार्डन का निर्माण कार्य दो चरणों में पूरा किया जाएगा। प्रथम चरण में 1.13 करोड़ की लागत से कई निर्माण कार्य पूरे हो चुके हैं। जिनमें 80 लाख की लगात से 50 हैक्टेयर में सुरक्षा दीवार, तार फेंसिंग, गेट, बोरिंग, सौलर प्लांट, 1200 मीटर इको टेल बना है, हालांकि 3500 मीटर बनाया जाना है। सुरक्षा के लिए चौकियां बनाई है। ज्यूलीफ्लोरा झाड़ियों को साफ किया है। अब दूसरे चरण में यहां प्लांटेशन का कार्य किया जाएगा। </p>
<p><strong>वनस्पतियों में अनुसंधान का बढ़ेगा दायरा</strong><br />वनस्पति उद्यान वैज्ञानिकों, वनस्पति शास्त्रियों, स्टूडेंट्स, रिसर्चर, बागवानों या ऐसे लोगों के लिए शैक्षणिक संस्थान है जो पौधों के जीवन में जागृत और प्रबुद्ध रुचि रखते हैं। वहीं, बॉटनिकल गार्डन की स्थापना पुस्तकालयों, जड़ी-बूटियों, प्रयोगशालाओं के माध्यम से शिक्षा और अनुसंधान के उद्देश्य से की जाती है। यहां पर विभिन्न पौधों के अलग-अलग ब्लॉक बनाएं जाएंगे। साथ ही किन पौधों का क्या फायदा है, विद्यार्थियों व शोधार्थियों को इसकी जानकारियां मिल सकेगी। </p>
<p><strong>दुलर्भ प्रजातियों को मिलेगा संरक्षण</strong><br />बॉटनिकल पार्क में वनस्पतियां सहेजी जाएंगी। रिसर्चर को यहां आने पर विभिन्न प्रजातियों की वनस्पतियों के बारे में जानकारी मिलेगी। कैक्टस से लेकर अन्य कई दुर्लभ प्रजातियों के पौधे लगेंगे। यहां एक नया जंगल विकसित हो सकेगा। लोकल दुर्लभ प्रजातियों के पौधों का संरक्षण होगा। बायोलॉजिकल पार्क विजिट के साथ अभेड़ा महल देखने और बॉटनिकल गार्डन विजिट के साथ-साथ करणी माता मंदिर के दर्शन करने का मौका भी मिलेगा।</p>
<p><strong>द्वितीय चरण में ये होंगे काम </strong><br />डीएफओ जयराम पांडे्य ने बताया कि द्वितीय चरण में दुलर्भ वनस्पतियों व विभिन्न किस्मों के फूलों की नर्सरियां तैयार की जाएंगी। इंटरपिटेक्शन सेंटर, थीम पार्क, इको टेल, बर्ड्स व्यू पाइंट्स बनाए जाएंगे। इसके अलावा विभिन्न किस्मों के फल, फूल, औषधीय, सुगंधित पौधे, टिम्बर व गोंद सहित कई वैराइटी के पौधों की नर्सरी विकसित की जाएगी। शहरवासियों को पौधों व वनस्पतियों से संबंधित जानकारी मिल सके। गार्डन तैयार होने पर पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। </p>
<p><strong>क्या है बॉटनिकल गार्डन </strong><br />वन मंडल के डीएफओ जयराम पांडय ने बताया कि बॉटनिकल गार्डन एक ऐसा स्थान होता है, जहां लोगों को जागरूक करने के लिए विभिन्न प्रकार के पेड़-पौधों के संरक्षण के साथ ही उनका प्रदर्शन किया जाता है। बॉटनिकल गार्डन में पेड़ पौधों पर उनके वानस्पतिक नाम का भी उल्लेख किया जाता है ताकि गार्डन में घूमने आने वाले बच्चे व लोगों को पेड़ पौधों और वनस्पतियों के बारे में सम्पूर्ण जानकारी मिल सके। इस गार्डन को टूरिज्म से जोड़ा जाएगा। ताकि स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहर से आने वाले लोग भी यहां पहुंचकर दुलर्भ वनस्पतियां, पेड़-पौधों की जानकारी हासिल कर सके। </p>
<p><strong>बार कोड से मिलेगी पौधों की जानकारी </strong><br />पर्यटकों को बॉटनिकल पार्क में लगे फल, फूल, औषधीय पेड़-पौधों की जानकारी देने के लिए इंटरपिटेक्शन हॉल भी बनाया जाना है। यहां हर पौधों की तस्वीर के नीचे बार कोड होगा, जिसे मोबाइल पर स्केन करते ही पौधे से संबंधित सभी जानकारियां प्राप्त की जा सकेगी। </p>
<p>अभेड़ा महल के पास वन मंडल की 50 हैक्टेयर भूमि पर 5 करोड़ की लागत से बॉटनिकल पार्क का निर्माण करवाया जा रहा है। जहां हाड़ौती क्षेत्र में पाए जाने वाली विभिन्न प्रजातियों की वनस्पतियां, पेड-पौधे व औषधीय लगाकर संरक्षित किए जाएंगे। इस गार्डन के अंदर कैक्टस, फ्रूट, बटर फ्लाई, मेडिसिनल गार्डन सहित अलग-अलग पेड़-पौधों की वाटिकाएं बनाई जाएंगी। कार्य दो चरणों में पूरा किया जाएगा। पहले चरण में 1 करोड़ 13 लाख की लागत से विभिन्न काम पूरे हो गए हैं। अब द्वितीय चरण में कार्य जारी रखने के लिए बजट की आवश्यकता है, जिसके लिए सरकार को लिखा है।  जल्द ही बजट मिलने पर काम शुरू हो जाएंगे। इस गार्डन का निर्माण मुख्यमंत्री बजट घोषणा के तहत किया जा रहा है। बजट का इश्यू नहीं है, वो जल्द मिल जाएगा। फिलहाल, कार्य प्रगृति पर है।  <br /><strong>- जयराम पांडेय, डीएफओ वन मंडल कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Apr 2023 15:53:11 +0530</pubDate>
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                <title>लॉयन और टाइगर की धमक से ही बायोलॉजिकल पार्क मालामाल</title>
                                    <description><![CDATA[इस वर्ष बायोलोजिकल पार्क ने लॉयन-टाइगर की रिलीज के साथ ही पिछले साल मार्च में हुई कमाई के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। साथ ही पर्यटकों की संख्या में भी  3 हजार की बढ़ोतरी हुई है। इस वर्ष बायोलोजिकल पार्क 7 हजार 828 पर्यटकों के साथ 3 लाख 7 हजार   740 रुपए की आय कर चुका है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/biological-park-malamal-since-the-arrival-of-lion-and-tiger/article-41036"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-03/lion-aur-tiger-ki-dhamak-se-hi-biological-park-maalamaal..kota-news..28.3.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। प्रदेश के सबसे बड़े अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क टाइगर और लॉयन की धमक से ही मालामाल हो गया है। साल के शुरुआती महीनों में ही पार्क लाखों रुपए कमा चुका है। 1 जनवरी से 26 मार्च तक पार्क करीब 11 लाख की कमाई कर चुका है। हालांकि, चंद दिनों पहले ही बाघ-बाघिन और शेरनी को दर्शकों के लिए डिस्पले एरिया में छोड़ा गया था। ऐसे में अप्रेल से कमाई का आंकड़ा और बढ़ने की संभावना है। वहीं, वन्यजीव विभाग की कोशिशों से पर्यटकों का नजरिए में भी बदलाव आया है।   पिछले साल की अपेक्षा इस वर्ष पर्यटकों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। साथ ही जंगल के राजा और महाराजा के दीदार से लोगों की शिकायतें भी दूर हो गई। अब यहां आने वाले पर्यटकों के चेहरों पर लॉयन-टाइगर देखने की खुशी बायोलॉजिकल पार्क को सुकून पहुंचा रही है। </p>
<p><strong>जनवरी में ही कमा लिए 5.51 लाख से ज्यादा </strong><br />गत वर्ष से लॉयन और टाइगर लाने की सुगबुगाहट ने पर्यटकों की उत्सुकता बढ़ा दी थी। शेर व बाघ की तैयारियां और वन्यजीवों के दीदार को ही 13 हजार 180 पर्यटक जनवरी में बायोलॉजिकल पार्क पहुंच गए। जिससे पार्क को कुल 5 लाख 51 हजार 450 रुपए की कमाई हो गई। हालांकि, यह आंकड़ा पिछली जनवरी के मुकाबले कम है। उस समय  बायोलोजिलक पार्क ने करीब 10 लाख का आंकड़ा छू लिया था। लेकिन, इसकी वजह  इसी माह में बायोलॉजिकल पार्क को दर्शकों के लिए खोला जाना था। </p>
<p><strong>लॉयन-टाइगर की रिलीज से मार्च ने तोड़ा रिकॉर्ड </strong><br />मार्च माह में अमूमन पर्यटकों की संख्या कम हो जाती है, क्योेंकि गर्मी बढ़ने के साथ ही लोगों का नजरिया भी बदल जाता है। लेकिन, इस वर्ष बायोलोजिकल पार्क ने लॉयन-टाइगर की रिलीज के साथ ही पिछले साल मार्च में हुई कमाई के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। साथ ही पर्यटकों की संख्या में भी  3 हजार की बढ़ोतरी हुई है। वन्यजीव विभाग से मिले आंकड़ों के मुताबिक, गत वर्ष मार्च में 4 हजार 730 पर्यटकों से 2 लाख 22 हजार 380 रुपए की कमाई हुई थी। जबकि, इस वर्ष बायोलोजिकल पार्क 7 हजार 828 पर्यटकों के साथ 3 लाख 7 हजार   740 रुपए की आय कर चुका है। जबकि, अभी महीना खत्म होने में 4 शेष हैं। ऐसे में राजस्व का आंकड़ा और बढ़ेगा। </p>
<p><strong>दूसरे में घटी तो तीसरे माह में बढ़ी आय</strong><br />फरवरी में 5 हजार 621 पर्यटकों से 2 लाख 21 हजार 610 रुपए की आय हुई। लेकिन कमाई का आंकड़ा अगले ही मार्च माह में फिर से बढ़ गया। क्योंकि, इस समय शेरनी और बाघ-बाघिन अभेड़ा की जमीन पर कदम रख चुके थे। जिन्हें प्रत्यक्ष रूप से देखने के लिए पर्यटक उत्साहित थे। नतीजन, 7 हजार 828 पर्यटक पहुंच गए। जिनसे सरकार के खजाने में 3 लाख 7 हजार 740 रुपए जमा हो गए। जबकि, मार्च खत्म होने में अभी 4 दिन शेष हैं। ऐसे में इस माह का आंकड़ा और बढ़ेगा। </p>
<p><strong>एक ही दिन में कमाए 34 हजार </strong><br />सहायक वनपाल मनोज शर्मा व फोरेस्टर बुद्धराम जाट ने बताया कि बाघ-बाघिन और शेरनी को दर्शक दीर्घा में छोड़ने के बाद सैलानियों का जबरदस्त रुझान देखने को मिला है। जंगल के राजा और महाराजा के दीदार के लिए रविवार को अभेड़ा में 778 पर्यटक पहुंच गए। जिससे वन विभाग को 34 हजार 230 रुपए की आय हो गई। आने वाले दिनों में कमाई का आंकड़ा नया बैंचमार्क स्थापित करेगा। </p>
<p>बाघ-बाघिन और शेरनी आने के साथ ही लोगों की शिकायतें बंद हो गई। साथ ही पर्यटकों का बायोलॉजिकल पार्क के प्रति रुझान भी बढ़ा है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में शहरवासी परिवार के साथ टाइगर-लॉयन के दीदार को पहुंच रहे हैं। वहीं, पर्यटकों के लिए सुविधाएं विकसित की जा रहीं हैं। जल्द ही यहां ई-रिक्शा और कैफेटेरिया शुरू किए जाएंगे। जिससे पार्क की आमदनी में निश्चित रूप से और इजाफा होगा।<br /><strong>-राजबिहारी मित्तल, एसीएफ अभेड़ा बायोलोजिकल पार्क</strong></p>
<p>उदयपुर के सज्जनगढ़ बायोलोजिकल पार्क से बब्बर शेर अली को लाने के प्रयास जारी हैं। भविष्य में भालू, लोमड़ी सहित अन्य वन्यजीव भी लाने की प्लानिंग है। इसके अलावा  पर्यटकों के लिए 1.50 करोड़ की लागत से इंटरप्रिटेक्शन सेंटर बनाया जा रहा है. जिसमें आधुनिक आॅडियो विजुअल प्रकरण लगाए जाएंगे। इसके अलावा 10 हैक्टेयर में बायोडायवर्सिटी भी बनाया जाना है। <br /><strong>- सुनील गुप्ता, डीएफओ वन्यजीव विभाग </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Mar 2023 14:37:16 +0530</pubDate>
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                <title>दो दिन बाद पर्यटकों को होंगे महारानी सुहासिनी के दीदार </title>
                                    <description><![CDATA[सुहासिनी ने एनक्लोजर के लगातार 6 चक्कर काटे थे। उसने घूम-घूम कर बायोलॉजिकल पार्क का अवलोकन किया और तेज दहाड़ के साथ अन्य वन्यजीवों को अपनी मौजूदगी का अहसास कराया। आधे घंटे तक एनक्लोजर में विचरण करती रही। इसके बाद वह नाइट शेल्टर में चली गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/tourists-will-get-to-see-maharani-suhasini-after-two-days/article-39479"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-03/do-din-baad-paryatako-ko-honge-maharani-suhaasini-k-didaar...kota-news..10.3.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में जल्द ही रोमांच से भरा सफर शुरू होने वाला है। जैविक उद्यान के पर्यटन में नए अध्याय का आगाज हो चुका है। कहानियों व किताबों में देखे जाने वाले जंगल के राजा लॉयन को अब साक्षात देख सकेंगे। दरअसल, अभेड़ा की  शेरनी सुहासिनी को दर्शक दीर्घा में छोड़ने की तैयारियां शुरू हो चुकी है। 21 दिन का क्वारंटाइन रविवार को पूरा हो जाएगा। इसी के साथ कोटावासियों की बब्बर शेरनी को नजदीक से देखने की हसरत पूरी हो जाएगी।  </p>
<p><strong>तीन दिन पहले हो चुका सफल ट्रायल</strong><br />व्रिष्ठ वन्यजीव चिकित्सक डॉ. विलासराव गुल्हाने ने बताया कि शेरनी को नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क से 20 फरवरी को लाया गया था। क्वारंटाइन में रखते हुए 19 दिन पूरे हो चुके हैं। इस दौरान उसके व्यवहार, डाइट, रहन-सहन व स्वास्थ्य सहित अन्य गतिविधियों पर बारिकी से नजर रखी गई। जिसमें वह पूरी से स्वस्थ मिली। तीन दिन पूर्व करीब 30 मिनट के लिए डिस्पले एरिया में छोड़ सफल ट्रायल किया था। इस दौरान 4 हजार स्क्वायर मीटर में फैले एनक्लोजर में जोश और उत्साह के साथ आत्मविश्वास की छलांग लगाई। वह पूरी तरह से अभेड़ा बायोलॉजिकल के माहौल में ढल चुकी है।    </p>
<p><strong>एनक्लोजर के काटे 6 चक्कर</strong><br />सुहासिनी ने एनक्लोजर के लगातार 6 चक्कर काटे थे। उसने घूम-घूम कर बायोलॉजिकल पार्क का अवलोकन किया और तेज दहाड़ के साथ अन्य वन्यजीवों को अपनी मौजूदगी का अहसास कराया। आधे घंटे तक एनक्लोजर में विचरण करती रही। इसके बाद वह नाइट शेल्टर में चली गई। चिकित्सक गुल्हाने का कहना है कि शेल्टर व कराल में जगह कम होती है। ऐसे में लंबे समय तक एक ही पॉजिशन में बैठे रहने से पैरों में कम्पकपी छुटने की आशंका थी, जिसे दूर करने के लिए ही सुहासिनी को 4 हजार स्क्वायर मीटर के दायरे में छोड़ा गया था। वहां शेरनी ने लंबी दौड़ लगाई। इसी के साथ आशंकाएं भी दूर हो गई। </p>
<p><strong>सज्जनगढ़ से आएगा जोड़ीदार  </strong><br />सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क उदयपुर में पला-बड़ा बब्बर शेर अली को भी लाने की तैयारियां शुरू कर दी गई है। जल्द ही वन्यजीव विभाग की टीम उदयपुर के लिए रवाना होगी। वहां से बब्बर शेर लाकर सुहासिनी के साथ जोड़ी बनाई जाएगी। हालांकि, अली की जोड़ी वर्ष 2017 में शेरनी सारा के साथ बनाई गई थी, उसे पिलीकुला से लाया गया था। इस दौरान कुछ समय साथ रहने के बाद दोनों की सफल मेटिंग हुई थी। इसके बाद सारा ने दो शावकों को जन्म दिया था, जिसमें एक नर व दूसरी मादा शावक थी। </p>
<p><strong>बैंगलुरू के बैनरगटटा में हुआ था जन्म</strong><br />गुल्हाने ने बताया कि शेरनी सुहासिनी का जन्म 5 जनवरी 2012 को बैंगलुरू के जुलॉजिकल पार्क बैनरगटटा में हुआ था। इसके पांच साल बाद वर्ष 2016 में नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क जयपुर में शिफट कर दिया गया था। वर्तमान में सुहासिनी की 11 वर्ष की है। इसका वजन 210 किलो है। यह हाईब्रिड होने के साथ बहुत एक्टिव है। नाहरगढ़ में इसकी सबसे ज्यादा साइटिंग होती है। बताया जाता है कि सुहासिनी एक बार मां बन चुकी है और उसके दो शावक हुए थे। </p>
<p><strong>पांच साल बाद शेरनी से रूबरु होंगे कोटावासी </strong><br />वरिष्ठ पशुचिकित्सक अखिलेश पांडे ने बताया कि 1995 से कोटा चिड़ियाघर में लॉयन परिवार रहा है। यहां 2017 तक शेरनी गौरी रहा करती थी। जिसे 2018 में जोधपुर माछिया बायोलॉजिकल पार्क में शिफ्ट कर दिया गया था। गौरी लॉयन रतन सिंह व लॉयनेस पद्ममिनी की बेटी थी। गौरी ने दो शावकों को जन्म दिया था लेकिन वे बच नहीं सके। वहीं, रीना नामक शेरनी भी थी, जिसे 2010 में जयपुर चिड़िया घर शिफ्ट कर दिया गया था। </p>
<p><strong>रविवार से देख सकेंगे</strong><br />पर्यटकों के लिए रविवार का दिन बेहद ही खास होने वाला है। क्वारंटाइन की अवधि पूरी होने के साथ ही उसे दर्शक दीर्घा में रिलीज कर दिया जाएगा। इसके बाद पर्यटक नजदीक से शेरनी को देख सकेंगे। वहीं, दहाड़ से रोमांचित हो उठेंगे। अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में पर्यटक डर और रोमांच के बीच जंगल का अनुभव महसूस कर सकेंगे। </p>
<p>दो दिन बाद क्वारंटाइन की अवधि पूरी होने के साथ ही उच्चाधिकारियों के निर्देश पर शेरनी को डिस्पले एरिया में रिलीज कर दिया जाएगा। सुहासिनी बहुत ही समझदार और सहज स्वभाव की है। नाहरगढ़ में भी उसकी अच्छी साइटिंग होती थी। वह पूरी तरह से स्वस्थ है और व्यवहार भी समान्य है। <br /><strong>- डॉ. विलास राव गुल्हाने, वन्यजीव चिकित्सक अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Mar 2023 14:31:57 +0530</pubDate>
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                <title>कोटा में 1.50 करोड़ से बनेगा इंटरप्रिटेशन सेंटर</title>
                                    <description><![CDATA[इंटरप्रिटेशन सेंटर में थियेटर भी बनाया जाएगा। जिस पर पर्यटकों को वन्यजीवों की फिल्म दिखाई जाएगी। रात में वन्यजीव जंगल में कैसे विचरण करते हैं और कैसे शिकार करते हैं, यह फिल्म के माध्यम से पर्यटकों को रुबरू कराया जाएगा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/interpretation-center-will-be-built-in-kota-with-1-50-crores/article-35843"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-01/kota-mei-1.50-karor-se-banega-interpritation-center...kota-news..27.1.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहरवासियों व वन्यजीव प्रेमियों के लिए खुशखबरी है। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में करीब 1400 स्क्वायर मीटर में इंटरप्रिटेशन सेंटर बनाया जाएगा। इसके लिए पर्यटन विभाग ने 1.50 लाख का बजट स्वीकृत कर दिया है। अब पर्यटक वन्यजीवों की दुनिया से रुबरू हो सकेंगे।  सेंटर में आधुनिक आॅडियो-विजुअल उपकरण भी लगाए जाएंगे, जिससे पर्यटक खुद को जंगल में होने का अहसास महसूस कर सकेंगे। </p>
<p><strong>1.70 करोड़ का बजट स्वीकृत </strong><br />अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क के पास करीब 1400 स्क्वायर मीटर में 1.50 करोड़ की लागत इंटरप्रिटेशन सेंटर व 10 हैक्टेयर में 20 लाख की लागत से बायोडायवर्सिटी पार्क बनाया जाना है। गत दो वर्ष पहले जिला कलक्टर ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए वन विभाग से प्रपोजल मांगे थे। इस पर वन्यजीव विभाग ने बायोलॉजिकल पार्क में इंटरप्रिटेशन सेंटर व बायोडायवर्सिटी पार्क बनाने के प्रस्ताव रखे थे। जिसकी नवम्बर 2022 में स्वीकृति मिली थी। पर्यटन विभाग ने वित्त विभाग से स्वीकृति लिए वन्यजीव विभाग को एस्टीमेट मांगे थे। एस्टीमेट देने के बाद 19 जनवरी को दोनों कार्यों के लिए कुल 1 करोड़ 70 लाख रुपए का बजट स्वीकृत किया गया। बजट राशि आने के काम इंटरप्रिटेशन सेंटर व बायोडायवर्सिटी पार्क का निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। </p>
<p><strong>देख सकेंगे, जंगल में बाघ कैसे करता है शिकार </strong><br />इंटरप्रिटेशन सेंटर में थियेटर भी बनाया जाएगा। जिस पर पर्यटकों को वन्यजीवों की फिल्म दिखाई जाएगी। रात में वन्यजीव जंगल में कैसे विचरण करते हैं और कैसे शिकार करते हैं, यह फिल्म के माध्यम से पर्यटकों को रुबरू कराया जाएगा।  इतना ही नहीं जंगल में बारिश और रात में दहाड़ते बाघ की आवाज रोमांचित स्पीकर के माध्यम से लोगों को रोमांचित करेगी।  इसके  अलावा दुर्लभ व विभिन्न प्रकार के पेड़-पौधे, औषधीय पौधे लगाए जाएंगे। राजस्थान में कितने प्रकार की जैव विविधता पाई जाती है, इसकी भी जानकारी दी जाएगी।</p>
<p><strong>क्या है इंटरप्रिटेशन सेंटर</strong><br />नेचर प्रमोटर एएच जैदी ने बताया कि इंटरप्रिटेशन सेंटर वन्यजीव, पक्षी व जंगल की संपूर्ण जानकारी देने वाली गैलरी है। यहां वन्यजीवों का वैज्ञानिक नाम, जीवनकाल, दिनचर्या, प्रजनन, खानपान आवास व जीवनचक्र की जानकारी दी जाएगी। साथ ही उसके व्यवहार के साथ प्रदेश में पाए जाने वाले अन्य फ्लोरा, जैव विविधता, पक्षियों, रेप्टाइल्स और अन्य वन्यजीवों की जानकारी भी मिलती है। सेंटर में बच्चों का ध्यान रखते हुए ज्ञानवर्धक एवं मनोरंजन युक्त जानकारियां भी जाती है।  इसमें अभेड़ा की जीवनी से लेकर वन्यजीवों व पर्यटन स्थलों के बारे में जानने का मौका मिलेगा। यहां आने वाले पर्यटकों को इंटरप्रिटेशन सेंटर के जरिये अलग ही अनुभव मिलेगा।  वहीं, बाघ, तेंदुआ,  भालू, हिरन सहित अन्य वन्यजीवों, जंगल एवं नदियों को शिल्पकला के माध्यम से दशार्या जाएगा।</p>
<p><strong>बायोडायवर्सिटी पार्क में मिलेगा सुकून</strong><br />अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क के पास ही बायोडायवर्सिटी पार्क बनाया जाना है। वैसे तो यह पार्क 50 से 100 हैक्टेयर के बीच बनना है लेकिन बजट कम होने से 10 हैक्टेयर में ही पार्क बनाया जाएगा। इसके लिए अभी 20 लाख रुपए का ही बजट सेंशन हुआ है।  भविष्य में बजट बढ़ता है तो इसका दायरा बढ़ाया जाएगा।  इस पार्क में पर्यटकों के पैदल चलने के लिए ट्रैक, विभिन्न प्रजातियों के पौधे और बैठने के लिए लकड़ियों के शेड बनाए जाएंगे। यहां आने वाले लोगों को सुकून मिलेगा। </p>
<p><strong>जंगल और वन्यजीवों का रोचक संसार होगा सेंटर </strong><br />डीसीएफ फ्लाइंग अनुराग भटनागर ने बताया कि पर्यटकों को वन्यजीवों के प्रति जागरूक करने के लिए यहां विभिन्न एनीमल की डमी बनाई जाएगी, जो उनके असल में होने का अहसास कराएंगे। साथ ही उनका सम्पूर्ण इतिहास भी बताया जाएगा। इसके अलावा लाइफ साइंस एक्जिबिट्स भी लगाए जाएंगी। बच्चों के लिए यह सेंटर जंगल और वन्यजीवों का रोचक संसार होगा। यह सब मॉडल के रूप में दशार्या जाएगा। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पर्यटन विभाग ने अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क के पास इंटरप्रिटेशन सेंटर व बायोडायवर्सिटी पार्क बनाने के लिए 1 करोड़ 70 लाख रुपए का बजट स्वीकृत कर दिया है। इसकी प्रथम किश्त 25 हजार रुपए मिलेगी। सम्पूर्ण बजट राशि मिलने के बाद काम शुरू करवा दिया जाएगा। <br /><strong>- अनुराग भटनागर, डीसीएफ उड़नदस्ता कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Jan 2023 15:21:38 +0530</pubDate>
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                <title>15 जनवरी तक कोटा में गूंजेगी बब्बर शेर की दहाड़!</title>
                                    <description><![CDATA[सज्जनगढ़ उदयपुर से कोटा बायोलॉजिकल पार्क के लिए बब्बर शेर अली और शेरनी सुहासिनी को लाया जाना  है। सीडब्ल्यूएलडब्ल्यू से परमिशन मिलने के साथ ही विभागीय तैयारियां पूरी कर ली गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-roar-of-babbar--lion-will-echo-in-kota-till-january-15/article-34225"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-01/bailogical-park-(9).jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहरवासियों को इसी माह में अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में इसी माह कभी भी बब्बर शेर व टाइगर के दीदार हो सकते हैं। वन्यजीव विभाग को सीडब्ल्यूएलडब्ल्यू से लॉयन, टाइगर व लोकड़ी का जोड़ा लाने की परमिशन मिल चुकी है। ऐसे में उदयपुर के सज्जनगढ़ से बब्बर शेर अली, शेरनी सुहासनी तथा नाहरगढ़ जयपुर बायोलॉजिकल पार्क से बाघिन महक व नर बाघ के साथ लोमड़ी का जोड़ा भी लाया जाना है।  जिसकी तैयारियां पूरी कर ली गई है। इन्हें लाने के लिए सीजेडएआई से 15 जनवरी से पहले स्वीकृति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। सहमति मिलने के अगले दिन ही इन वन्यजीवों को अभेड़ा बायॉलोजिकल पार्क में शिफ्ट कर दिया जाएगा।</p>
<p><strong>शेर-शेरनी से लौटेगी रौनक  </strong><br />डीसीएफ अनुराग भटनागर ने बताया कि सज्जनगढ़ उदयपुर से कोटा बायोलॉजिकल पार्क के लिए बब्बर शेर अली और शेरनी सुहासिनी को लाया जाना  है। सीडब्ल्यूएलडब्ल्यू से परमिशन मिलने के साथ ही विभागीय तैयारियां पूरी कर ली गई है। उधर, उदयपुर चिड़ियाघर प्रशासन से भी हरी झंडी मिल चुकी है। अब सेंट्रल-जू अथॉरिटी से सहमति मिलते ही इन्हें यहां शिफ्ट कर दिया जाएगा।  चूंकि बब्बर शेर हाईब्रिड होने से इसका सलेक्शन भी हाईब्रिड बब्बर शेरनी के लिए किया है। एनक्लोजर में लॉयन का ओपन एरिया करीब 173 स्क्वायर मीटर है। </p>
<p><strong>नाहरगढ़ जयपुर से आएगा बाघ-बाघिन का जोड़ा </strong><br />बाघ-बाघिन और लोमड़ी का जोड़ा जयपुर के नाहरगढ़ बायॉलोजिकल पार्क से कोटा लाया जाएगा। वरिष्ठ वन्यजीव चिकित्सक डॉ. अखिलेश पांडे ने बताया कि कोटा चिड़ियाघर में बाघिन महक वर्ष 2013 में जयपुर-जू से लाई गई थी। पहले उसकी जोड़ी टाइगर शत्रुघ्न के साथ बनाई थी लेकिन उसकी मौत के बाद वह अकेली रह गई थी। इसके बाद वर्ष 2018 में बाघ मछंदर के साथ फिर से जोड़ी बनाई गई, सफल मेटिंग भी हुई लेकिन महक मां नहीं बन सकी। मछंदर की मौत के बाद वर्ष 2019 में केंद्रीय जंतुआलय प्राधिकरण ने महक को नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में भिजवाने के आदेश दिए थे। एनक्लोजर में टाइगर का ओपन एरिया 400 स्क्वायर मीटर होगा। </p>
<p><strong>बच्चों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगी लोमड़ी</strong><br />बायोलॉजिकल पार्क में लोमड़ी का जोड़ा खासकर बच्चों के लिए आकर्षण का केंद्र रहेगा। अब तक लोमड़ी की चलाकी किताबों में पड़ी और सूनी थी। जिसे वह प्रत्यक्ष रूप से देखेंगे। हालांकि, लॉयन और टाइगर सभी के लिए आकर्षण बनेंगे। लोमड़ी का ओपन एरिया 1 हजार स्क्वायर मीटर होगा। </p>
<p><strong>बायोलॉजिकल पार्क की बढ़ेगी कमाई </strong><br />बायलॉजिकल पार्क में कुल 75 वन्यजीव हैं। जिनमें मांसाहारी वन्यजीवों में 3 पैंथर, 4 भेड़िए, 6 सियार और 3 हायना हैं। वहीं, 2 भालू थे, जिनमें से एक नर भालू की गत वर्ष मौत हो गई। ऐसे में यहां एक ही मादा भालू है। इसके अलावा शाकाहारी वन्यजीवों में चीतल 26, नीलगाय 11, ब्लैक बक 14, चिंकारा 5 और सांभर 2 हैं। अब बब्बर शेर, टाइगर और लोमड़ी के दीदार होने से पर्यटक रोमांचित हो उठेंगे। साथ ही बायोलॉजिकल पार्क की कमाई का आंकड़ा भी बढ़ेगा। </p>
<p><strong>ई-रिक्शा और कैफेटेरिया शुरू करने की भी तैयारी </strong> <br />बायोलॉजिकल पार्क तीन किमी दायरे में फैला हुआ है। ऐसे में पर्यटकों को वन्यजीवों को देखने के लिए लंबा चक्कर पैदल ही काटना पड़ता है। इलेक्ट्रिकल व्हीकल नहीं होने से लंबे ट्रैक पर पर्यटकों का पैदल घूमना मुश्किल हो जाता है। वहीं, कैफेटेरिया सुविधा नहीं होने से लोगों को चाय-नाश्ते के लिए परेशान होना पड़ता है। इसके अलावा पर्यटकों के बैठने के लिए छायादार शेड व वाटरकूलर भी र्प्याप्त नहीं होने से भटकना पड़ता है। पर्यटकों की तमाम समस्याओं को देखते हुए वन्यजीव विभाग ई-रिक्शा व कैफेटेरिया शुरू करने की भी तैयारियों में जुटा हुआ है। </p>
<p>बब्बर शेर अली और शेरनी सुहासिनी को उदयपुर के सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क, बाघिन महक व नर बाघ और लोमड़ी का जोड़ा जयपुर के नाहरगढ़ से लाने की तैयारी पूरी कर ली गई है। इसके लिए सीडब्ल्यूएलडब्ल्यू से परमिशन मिल चुकी है। सीजेडएआई से 15 जनवरी तक सहमति मिलने की पूरी संभावना है। बड़े वन्यजीवों की मौजूदगी से अभेड़ा पार्क में रौनक लौट आएगी और रेवन्यू में भी इजाफा हो सकेगा। <br /><strong> -अनुराग भटनागर, डीसीएफ उड़नदस्ता, सीसीएफ आॅफिस कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Jan 2023 15:11:31 +0530</pubDate>
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