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                <title>kota division - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>कोटा के खेतों में दिखेगी डेनमार्क व नीदरलैंड की झलक, विदेशा यात्रा पर जाएंगे किसान</title>
                                    <description><![CDATA[प्रशिक्षण लेने के बाद किसानों द्वारा कोटा संभाग के खेतों में डेनमार्क और नीदरलैंड की खेती की तकनीक का उपयोग किया जाएगा।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/a-glimpse-of-denmark-and-netherlands-will-be-seen-in-the-fields-of-kota/article-106000"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/257rtrer-(2)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । प्रदेश के 100 प्रगतिशील व नवाचारी किसानों को सरकार खेती में आधुनिक तकनीक व नवाचार से रूबरू करवाने के लिए जल्द ही विदेश यात्रा पर भेजेगी। इनमें कोटा संभाग के 9 किसान भी शामिल हैं। अब तक किसानों को इजरायल भेजा जाता रहा है। पिछले कुछ समय इजरायल व हमास के बीच चल रहे संघर्ष को देखते हुए इस बार सरकार ने किसानों को डेनमार्क व नीदरलैंड भेजने का निर्णय किया है। वहां इन किसानों को हाईटेक खेती व डेयरी का प्रशिक्षण दिया जाएगा। एक सप्ताह के इस भ्रमण कार्यक्रम को लेकर किसानों का चयन हो चुका है। कोटा सहित जोधपुर, भरतपुर, बीकानेर और अन्य संभागों के किसानों को यह मौका दिया जाएगा। प्रशिक्षण लेने के बाद किसानों द्वारा कोटा संभाग के खेतों में डेनमार्क और नीदरलैंड की खेती की तकनीक का उपयोग किया जाएगा।</p>
<p><strong>कोटा जिले के तीन किसानों का चयन</strong><br />उद्यान विभाग के अधिकारियों के अनुसार सरकार की ओर से किसानों का चयन करने के लिए अंक निर्धारित किए गए थे। इन अंकों के आधार पर कोटा जिले के तीन किसानों का चयन किया गया है। इनमें दो किसान सांगोद और एक किसान सीमल्या क्षेत्र का है। नॉलेज एनहांसमेंट प्रोग्राम के तहत 75 फीसदी किसानों का चयन विभागीय स्तर पर हो चुका है। अब शेष पच्चीस प्रतिशत किसानों का चयन राज्य सरकार के स्तर पर होना है। कोटा संभाग के कुल 9 किसानों का चयन किया गया है। इनमें एक पशुपालन क्षेत्र का शामिल किया गया है। उद्यान विभाग ने अंकों के आधार पर किसानों का पैनल बनाकर सरकार के पास भेज दिया था। बाद में सरकार द्वारा विदेश यात्रा के लिए किसानों का चयन किया गया है।   </p>
<p><strong>प्रथम चरण में जाएंगे सौ किसान</strong><br />उद्यान विभाग के अधिकारियों के अनुसार किसानों को विदेशों में भेजने की घोषणा राजस्थान सरकार ने वित्तीय वर्ष 2024-25 के बजट में की थी। इस सम्बंध में किसानों से दस सितम्बर तक आवेदन मांगे गए थे। चयनित होने वाले किसानों में एसटी, एससी, महिला कृषक के साथ-साथ बीस प्रतिशत पशुपालकों को शामिल किया गया। कुल अस्सी किसानों व बीस पशुपालकों का चयन किया गया। प्रथम चरण में कुल सौ किसान विदेश जाएंगे। वहां नई तकनीक सीखकर राजस्थान में अन्य किसानों को सिखाएंगे व खुद भी उसका उपयोग करेंगे।  </p>
<p><strong>128 किसानों ने किया था आवेदन</strong><br />सरकारी खर्च पर विदेश यात्रा करने के लिए किसानों में होड़ मची गई थी।  नॉलेज एनहांसमेंट प्रोग्राम के तहत किसानों से विदेशा यात्रा के लिए आवेदन मांगे गए थे। इसके तहत कोटा संभाग से 128 किसानों ने विदेश यात्रा के लिए आवेदन किया था। यानी अधिकांश किसान सरकारी खर्च पर विदेश जाना चाहते थे। उद्यान विभाग ने अंकों के आधार पर किसानों का पैनल बनाकर सरकार के पास भेज दिया था। इसके बाद सरकार ने कोटा संभाग के 9 किसानों को चयन कर लिया है। संभाग के एक किसान का चयन सरकार द्वारा किया जाएगा। सरकार द्वारा सभी संभा्रगों से किसानों का चयन करने के बाद जल्द ही इनकों को विदेश यात्रा पर भेजा जाएगा।  </p>
<p><strong>फैक्ट फाइल</strong><br />-100 प्रगतिशील किसान जाएंगे विदेश<br />- 09 किसानों का कोटा संभाग से चयनित<br />- 128 किसानों ने किया था आवेदन<br />- 25 फीसदी किसानों का चयन सरकार करेगी</p>
<p>राज्य सरकार का यह प्रोग्राम युवा किसानों को खेती के लिए प्रोत्साहित करने का अच्छा प्रयास है। विदेशों में हाईटेक तरीके से खेती की जाती है। यहां के किसानों को वहां पर खेती की उन्नत तकनीक सीखने को मिलेगी। इससे अन्य किसानों को भी खेती की जानकारी मिलेगी।<br /><strong>-लक्ष्मीचंद नागर, किसान </strong></p>
<p>राज्य सरकार नॉलेज एनहांसमेंट प्रोग्राम के तहत किसानों को जल्द डेनमार्क व नीदरलैंड हाईटेक खेती के प्रशिक्षण के लिए भेजेगी। कोटा संभाग से 9 किसानों का चयन कर लिया गया है। एक किसान का चयन सरकार करेगी। इसके लिए 128 किसानों ने आवेदन किया था। <br /><strong>-आर. के. जैन, संयुक्त निदेशक, उद्यान विभाग, कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Mar 2025 16:23:29 +0530</pubDate>
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                <title>दुनिया का सबसे बड़ा उड़ान भरने वाला पक्षी लुप्त होने के कगार पर</title>
                                    <description><![CDATA[अब सारस की कम होती तादाद और सिमटते आवास पर्यावरण प्रेमियों के लिए चिंता का विषय बन गए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-world-s-largest-flying-bird-is-on-the-verge-of-extinction/article-79514"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/duniya-ka-sbse-bada-udan-bharane-wala-pakshe-lupt-hone-ke-kagar-par...kota-news-27.05.2024.jpg" alt=""></a><br /><p>क ोटा। उड़ान भरने वाला दुनिया का सबसे बड़ा पक्षी सारस लुप्त होने की कगार पर खड़ा है। सारस पक्षियों का कुनबा दिनों-दिन घटता जा रहा है। दो दशक पहले तक कोटा संभाग में अपने कलरव से लोगों को आकर्षित करने वाले सारस अब चुनिंदा जलाशयों तक सिमट कर रह गए। जल स्रोतों पर अतिक्रमण, अवैध मतस्य आखेट, इंसानी दखल और कमजोर मानसून के चलते बदली परिस्थितियों से सारस के प्राकृतिक आवास नष्ट हो गए। गोड़ावण व गिद्धों पर पहले ही लुप्त होने का संकट गहरा रहा है, अब सारस की कम होती तादाद और सिमटते आवास पर्यावरण प्रेमियों के लिए चिंता का विषय बन गए। हालांकि, 25 साल बाद कोटा शहर में एक साथ एक ही जगह पर 50 से ज्यादा सारस नजर आए हैं। ऐसे में पक्षी प्रेमियों ने वन विभाग से इनके संरक्षण के लिए कार्य योजना बनाने की मांग उठाई है।</p>
<p><strong>साल दर साल यूं घटी संख्या</strong><br />जैदी ने बताया कि आलनिया में वर्ष 2000 से पहले 92 सारस को पूरे तालाब में देखा गया था। चम्बल के मानस गांव में पहले बीच में टापू था, जिस पर ककड़ी की खेती होती थी। उन्हीं के बीच और दूसरे किनारे पर वर्ष 2001 में 84 सारस को देखा था। उस समय वाइल्ड लाइफ देहरादून के डॉ. वीसी चौधरी भी मेरे साथ थे, जो सारस का झुंड देख खुशी जाहिर की थी लेकिन साल दर साल इनकी संख्या में तेजी से गिरावट होती गई।  </p>
<p><strong>30 से 40 साल होती है उम्र</strong><br />पक्षी विशेषज्ञ डॉ. सुरभि बतातीं हैं, पक्षियों में सारस की उम्र काफी लंबी होती है। यह पक्षी 30 से 40 साल तक जिंदा रहता है। 300 फीट ऊंचाई तक उड़ान भरता है। पानी में झाड़ियां या पेड़-पौधें के बीच घौंसला बनाते हैं, ताकि श्वान सहित अन्य जानवरों से बचा सके। </p>
<p><strong>5 सालों में नहीं बना एक भी घौंसला</strong><br />हाड़ौती नेचुरल सोसाइटी के सदस्य पिछले 34 वर्षो से इस पक्षी पर अध्ययन कर रहे हंै। सूर सागर से उम्मेदगंज तक कम से कम 6 घोसले बनते थे, वहां पिछले 5 वर्षों में एक भी नहीं बना। वर्तमान में  वर्षा कम होने के कारण अधिकतर तालाब सुख गए। गामछ के आसपास के खेतों में अवैध पम्प चल रहे हैं। वर्ष 2001 में यहां 40 से अधिक सारस का जमावड़ा नजर आया था। क्योंकि, उस समय आलनिया बांध में पानी था और पेठा कास्त भी बहुत कम थी। लेकिन वर्तमान में जल दोहन के कारण तालाब ही सूख गए। प्राकृतिक आवास नष्ट हो गए।</p>
<p><strong>वर्ष 2000 के बाद लगातार घटी संख्या</strong><br />नेचर प्रमोटर एएच जैदी बताते हैं, वर्ष 2000 के बाद सारस पक्षियों की संख्या में लगातार गिरावट आई है। पिछले 25 साल पहले कोटा के जलाशयों में जितने सारस दिखाई देते थे, उतने अब नहीं दिखते। पिछले 32 वर्षों से अध्ययन रहा हूं, पहले आसपास के जलाशयों में इनके मेले लगे होते थे। युवा सारस अपने लिए जोड़े बनाते, इनकी कोल और डांस देखने को मिलता था। लेकिन अब हर वेटलैंड पर अतिक्रमण, पानी की मोटरों से जल दोहन, अवैध मतत्य आखेट, इंसानी दखल के चलते इनका प्राकृतिक आवास नष्ट होने लगा है, जो इनकी घटती संख्या के लिए जिम्मेदार है।</p>
<p><strong>दो दशक बाद नजर आए 52 सारस</strong><br />पक्षी विशेषज्ञ डॉ. सुरभि श्रीवास्तव कहतीं हैं, 25 साल बाद यह पहला मौका है, जब सारस एक ही जगह एक साथ 52 की संख्या में नजर आए। रंगपुर इलाके के खेतों में पिछले महीने देखा गया था। गंगाईचा गांव के पास चंबल नदी में इनका बसेरा है। यहा खेतों में सारस (क्रेन) की अठखेलियां पक्षी प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र रहती है। सुबह जल्दी खेतों में ये दाना चुगने आते हैं और इसके बाद वापस गंगाईचा गांव स्थित चंबल नदी पर चले जाते है। यहां पर पर्याप्त भोजन-पानी की उपलब्धता और समृद्ध जैव विविधता सारस के अनुकूल है। इसलिए यहां सारस आते रहते हैं। अप्रैल से जून तक यही रहते हैं। पिछले कई सालों से सारस की संख्या कम होती जा रही है, जो चिंता का विषय है।</p>
<p><strong>प्राकृतिक आवास नष्ट होना ही सबसे बड़ा कारण</strong><br />बर्ड्स रिसर्चर हर्षित शर्मा कहते हैं, सारस पर संकट के बादल छाने लगे हंै। सारस के रहवास इलाके, जलाशयों के पास मानवीय दखल, खेतों में कीटनाशकों के अधिक इस्तेमाल, अवैध खनन, अतिक्रमण, तालाबों में अवैध मतस्य आखेट से इनका प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहा है। जिससे यह हालात बन रहे हैं। जबकि, यह किसानों का दोस्त होता है। कीड़े-मकोड़े खाकर फसलों को बचाता है। पिछले कुछ वर्षों से पर्यावरण के साथ छेड़छाड़ का खमियाजा इंसानों के साथ जीव-जंतुओं पर भी देखा जा सकता है। खेतों में कीटनाशक का उपयोग, पानी की कमी और करंट के तार भी पक्षियों की मौत के कारण बन रहे हैं। इन्हें सुरक्षित रखने के लिए वेटलैंड को बचाना जरूरी है।</p>
<p>वन्यजीव विभाग की जहां भी वनभूमि है, वहां पक्षियों के लिए वेटलैंड विकसित किए जा रहे हैं। उम्मेदगंज पक्षी विहार में तो हम चावल की फसल भी करेंगे, ताकि सारस को भोजन की उपलब्धता हो सके। वहीं, अवैध गतिविधियों पर लगाम लगा दी गई है। यहां तालाब में पानी व मछलियां पर्याप्त होने से प्राकृतिक आवास डवलप हो रहा है। पक्षियों की संख्या में इजाफा हो रहा है। इनके संरक्षण के लिए सुरक्षित रहवास की कार्य योजना पर लगातार कार्य जारी है।<br /><strong>-अनुराग भटनागर, डीएफओ, वन्यजीव विभाग कोटा</strong></p>
<p><strong>संरक्षण के सुझाव</strong><br />पक्षी प्रेमियों ने सारस के संरक्षण के लिए विभिन्न सुझाव दिए हैं। <br />-वेटलैंड को अतिक्रमण से बचाएं।<br />-जिन इलाकों में आबादी वहां कंट्रेक्शन होने से रोका जाए।<br />-तालाबों में भू-जल दोहन के लिए लगी मोटरें बंद करवाई जाए।<br />-अवैध मतस्य आखेट, अवैध खनन, अवैध गतिविधियां रोकी जाए। <br />-वन विभाग द्वारा वेटलैंड पर चावल, मक्का, ज्वार की फसल करें ताकि इन्हें आसानी से भोजन मिल सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 May 2024 14:50:00 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अवैध वेंडर का फैला कारोबार, बेखौफ बेच रहे प्रतिबंधित सामग्री</title>
                                    <description><![CDATA[यात्रियों की सेहत से खुलेआम हो रहे खिलवाड़ के बाद भी रेल प्रशासन और सुरक्षा कर्मी चुप्पी साधे बैठे हुए है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/illegal-vendors-are-spreading-their-business--selling-banned-items-without-any-fear/article-72054"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/train.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा मंडल के रेलवे स्टेशनों पर अवैध वेंडरों का कारोबार लगातार फैलता जा रहा है। इन पर अनवरत कार्रवाई नहीं होने से यह बेखौफ होकर प्रतिबंधित सामग्री बेच रहे है। वहीं गुणवत्ता युक्त सामग्री नहीं होने से यात्रियों के स्वास्थ्य के साथ भी खिलवाड़ कर रहे है। रेलवे प्रशासन के यात्रियों को गुणवत्ता युक्त और पोष्टिक आहार देने के दावे खोखले साबित हो रहे है। खास बात यह है कि रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को सुलभ और गुणवत्तापूर्व खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के स्टॉल संचालित किए जा रहे हैं। इसके बाद भी यात्रियों को गुणवत्ता विहीन खाद्य सामग्री मिल रही है। ये सामग्री कोई और नहीं बल्कि स्टेशन पर बिना अनुमति व्यापार करने वाले अवैध वेंडर उपलब्ध करा रहे हैं। फरवरी के पहले पखवाडे में रेलवे की ओर से कार्रवाई की गई जिसमें कई अवैध वेंडर पकड़े लेकिन कुछ दिन बाद ही फिर से यह सक्रिय हो गए है। लंबे समय से आरपीएफ और रेलवे के कॉमर्शियल विभाग द्वारा कार्रवाई न किए जाने के कारण इनका कारोबार एक बार फिर तेजी से फैल गया है। इन वेंडरों द्वारा अधिकृत स्टॉल से सामग्री बेचने की बजाय स्टेशन के आसपास की होटलों में बन रही सामग्री लाकर बेची जा रही है जिसकी जांच नहीं की जा रही। यात्रियों की सेहत से खुलेआम हो रहे खिलवाड़ के बाद भी रेल प्रशासन और सुरक्षा कर्मी चुप्पी साधे बैठे हुए है।</p>
<p><strong>आईआरसीटीसी से लाइसेंस होल्डर के अलावा अन्य बेच रहे सामग्री</strong><br />स्टेशन पर यात्रियों को नाश्ते से लेकर अन्य प्रकार की खाद्य सामग्री मुहैया कराने आईआरसीटीसी से लाइसेंस पर प्लेटफॉर्म पर स्टॉल दिए जाते हैं। इसके अलावा रेस्टॉरेंट तक संचालित किए जा रहे हैं, ताकि यात्रियों को शुद्ध गुणवत्ता युक्त खाद्य सामग्री मिल सके।</p>
<p><strong>स्टॉल पर भी बिना मानक की खाद्य सामग्री</strong><br />कोटा मंडल के प्लेटफॉर्म पर संचालित हो रहे स्टॉल पर तय मानक की खाद्य सामग्री बेचने का प्रावधान है लेकिन  कोटा मुख्य स्टेशन के साथ ही आसपास संचालित हो रहे स्टेशनों पर जो खाद्य सामग्री बेची जा रही है वो कहां से आ रही है, रेलवे अधिकारियों को भी यह नहीं मालूम होता। मुख्य स्टेशन के अधिकांश स्टॉल्स पर स्टेशन के बाहर संचालित हो रहे होटल से खाद्य सामग्री पहुंच रही है, जिसकी गुणवत्ता की कभी जांच ही नहीं होती। इस तरह यात्रियों को बिना जांच व मानक के गुणवत्ताविहीन खाद्य सामग्री बेची जा रही है।<br /><strong>- अभिषेक गुप्ता, यात्री कोटा</strong></p>
<p><strong>ट्रेन आते ही दौड़ पड़ते हैं अवैध वेंडर</strong><br />कोटा मंडल के प्लेटफॉर्म पर जब दूर-दराज की ट्रेने पहुंचती हैं, तब अवैध वेंडरों की भीड़ आ जाती है। जो चाय, नाश्ता, कचोरी, समोसा लेकर पहुंच जाते है। ट्रेन आउटर से प्लेटफार्म पर प्रवेश के दौरान ही यह अवैध वेंडर ट्रेन में चढ जाते है।  ट्रेनों में खाद्य सामग्री बेचकर रफूचक्कर हो जाती है। इसके अलावा जिन स्टॉल्स पर वेंडरों की संख्या निर्धारित की गई वहां भी स्टॉल संचालकों द्वारा निर्धारित संख्या से अधिक वेंडरों को स्टेशन पर लगाया जा रहा है। इन सब के बावजूद भी रेलवे के अधिकारियों व सुरक्षा कर्मियों द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। <strong> - रामचरण वैष्णव, यात्री</strong></p>
<p><strong>ड्रेस कोड होने बाद भी नहीं पहनते ड्रेस</strong><br />रेलवे की ओर से अधिकृत वेंडर को ड्रेस कोड और शर्ट पर नेम प्लेट लगानी होती लेकिन स्टेशनों पर बिना ड्रेस पहने ही वेंडर सामग्री बचते है। ऐसे में वैध और अवैध वेंडर में यात्री पहचान नहीं हो पाती है। अवैध वेंडर से खाद्य सामग्री खरीदकर अपना पेट खराब कर हो जाता है।<br /><strong>- विशाल गर्ग, यात्री</strong></p>
<p><strong>पेटीकार खाना भी नहीं मिलता शुद्ध</strong><br />राजधानी एक्सप्रेस में टायलेट गंदे है। पेटीकार की खाद्य सामग्री भी गुणवत्ता युक्त नहीं पुराने आटे की रोटियां दी जाती है।  सुबह तैयार चावल शाम को दे दिए जाते है। इनकी शिकायत करने के लिए दिए टोल फ्री नंबर ट्रेन में लगते ही नहीं है।<br /><strong>- निशा वर्मा, यात्री</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />कोटा मंडल में अवैध रूप से खाद्य सामग्री बेचने वालों पर अनवरत कारवाई जा रही है। लगातार अभियान चलाकर इन कार्रवाई हो रही है।  लाइसेंस होल्डर वेंडर की खाद्य सामग्री की जांच कर अमानक पाए जाने पर उसको नष्ट कराया जाता है। <br /><strong>- रोहित मालवीय, वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक कोटा  </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 Mar 2024 17:48:23 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अवध एक्सप्रेस की पेंट्रीकार में डीसीएम ने खराब खाद्य सामग्री पकड़ी</title>
                                    <description><![CDATA[निरीक्षण के दौरान पेंट्रीकार में तकरीबन 20 किलो खराब गुणवत्तायुक्त आटा पाया।  ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/dcm-caught-spoiled-food-items-in-the-pantry-car-of-awadh-express/article-68538"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/whatsapp-image-2024-01-29-at-14.32.47.jpeg" alt=""></a><br /><p>कोटा। टिकट चेकिंग अभियान के साथ मंडल में संचालित सभी खानपान ट्रॉलियों, स्टालों की जांच के अतिरिक्त ट्रेनों में पेंट्रीकार के माध्यम से प्रदत्त की जा रही खानपान सेवाओं की भी समय-समय पर चेकिंग की जा रही है। इसी क्रम में मंडल वाणिज्य प्रबंधक  किशोर कुमार पटेल ने 28 जनवरी को कोटा से सवाई माधोपुर के मध्य गाड़ी संख्या 19037 बांद्रा टर्मिनल-बरौनी अवध एक्सप्रेस में निरीक्षण के दौरान पेंट्रीकार में तकरीबन 20 किलो  खराब गुणवत्तायुक्त आटा पाया।  जिस पर मंडल वाणिज्य प्रबंधक (डीसीएम ) ने तत्काल सख्त कार्रवाई करते हुए खराब आटे को डिस्पोज कराया। साथ ही उक्त पेंट्रीकार के लाईसेंस धारक पर 20 हजार रुपए का जुमार्ना लगाया। </p>
<p>सीजन में यात्री भीड़ के मद्देनजर खानपान यूनिटों के द्वारा ओवरचार्जिंग पर अंकुश लगाने एवं ट्रेनों के पेंट्रीकार में गुणवत्तायुक्त खाद्य पदार्थो की बिक्री के लिए कोटा रेल प्रशासन लगातार सकारात्मक कदम उठा रही है। पेंट्रीकार में पूर्णत: वर्जित गैस सिलिंडर के उपयोग कीभी नियमित औचक जांच की जा रही है। मंडल वरिष्ठ वाणिज्य प्रबंधक रोहित मालवीय ने बताया कि   इस प्रकार के औचक निरीक्षण लगातार जारी रहेगें जिससे अवैध वेंडरों पर पूर्णत: लगाम लगाया जा सके और यात्रियों को ट्रेनों एवं स्टेशनों पर गुणवत्तायुक्त खाद्य सामग्री मिल सके। यात्रियों से अनुरोध है कि खानपान यूनिट पर अंकित अद्यतन दर के अनुसार ही भुगतान करें। किसी प्रकार की समस्या होने पर रेल मदद 139 पर सम्पर्क कर सकते है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jan 2024 16:41:40 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>पहली बार 180 किमी  प्रतिघंटा से एलएचबी के साथ की ट्रायल</title>
                                    <description><![CDATA[एक तो तीन माल गाडियों को एक साथ परिवहन कर समय और ईधन की बचत की गई। दूसरा एक साधारण ट्रेन को 180 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से 50 किमी चलाकर यहां के ट्रेक और एलएचबी कोच पेटीकार सहित जांच की गई। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/trial-with-lhb-at-180-kmph-for-the-first-time/article-65045"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-12/pahali-bar-180-kilometer-prati-ghanta-lhb-ke-sath-ki-trial-...kota-news-25.12.2023.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा मंडल में हाई स्पीड वंदे भारत ट्रेन का इंतजार लंबा होता जा रहा है। लेकिन अच्छी बात यह है कि यहां का तैयार किया ट्रेक देश की सभी वंदे भारत से लेकर एक्सप्रेस और अन्य ट्रेनों की गति परीक्षण के लिए अवश्य काम आ रहा है। लोगों को लंबे समय से वंदे भारत ट्रेन का इंतजार है लेकिन वो अभी तक नहीं मिली है। लेकिन कोटा मंडल में आए दिन किसी ना किसी हाई स्पीड ट्रेन की गति का अवश्य प्रशिक्षण हो जाता है।</p>
<p><strong>180 किमी प्रतिघंटा स्पीड पर चलाई एलएचबी कोच की ट्रेन</strong><br />कोटा में शुक्रवार को दो बड़े नवाचार किए गए। एक तो तीन माल गाडियों को एक साथ परिवहन कर समय और ईधन की बचत की गई। दूसरा एक साधारण ट्रेन को 180 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से 50 किमी चलाकर यहां के ट्रेक और एलएचबी कोच पेटीकार सहित जांच की गई। </p>
<p><strong>तीन दिन चला ट्रायल </strong><br />वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक रोहित मालवीय ने बताया कि एलएचबी कोच व पेटीकार सहित बुधवार को तीन दिवसीय परीक्षण किया गया। पहले दिन बुधवार को ट्रेन को 65, 70, 80 प्रति किमी प्रतिघंटा की गति से चलाया गया। गुरुवार को 80, 85,90 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से साधारण ट्रेन का ट्रायल किया गया। शुक्रवार को अंतिम दिन 170,175,180 किमी प्रतिघंटे तक कोटा से नागदा के बीच 50 किमी तक 180 किमी प्रतिघंटे से ट्रेन चलाकर नया रिकार्ड बनाया। आरडीएसओ की टीम साथ में थी। एलएचबी पेटीकार वाले रेक से परीक्षण किया गया। </p>
<p><strong>वंदे भारत ट्रेन संचालन के लिए तीन मार्गो के प्रस्ताव भेज रखे है रेलवे बोर्ड को </strong><br />अपर मंडल रेल प्रबंधक मनोज कुमार जैन ने बताया कि वंदे भारत ट्रेनों के रैक तेजी से तैयार हो रहे है। आगामी महीनों में  कोटा मंडल को वंदे भारत ट्रेन की सौगात मिल सकती है। रेलवे बोर्ड को कोटा मंडल के तीन मार्गो पर वंदे भारत ट्रेन संचालन के प्रस्ताव बनाकर भेजे है। कोटा मंडल में भी शीघ्र ही वंदे भारत ट्रेन मिलेगी ऐसी संभावना है । रेलवे की ओर से सभी आवश्यक तैयारियां की जा चुकी है।</p>
<p><strong>अभी तक सेमी हाई स्पीड ट्रेन ही चली थी 180 पर</strong><br />पहली बार साधारण ट्रेन को 180 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से दौड़ाया गया।  जिसमें कोटा-नागदा रेल खंड में एलएचबी कोच की पैंटीकार को अधिकतम 180 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ा कर परीक्षण किया गया। आरडीएसओ ने यह परीक्षण कई बार किया गया।  एलएचबी कोच की किसी ट्रेन को 180 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ाने का कोटा मंडल में यह पहला मामला है।  इससे सेमी हाई स्पीड ट्रेन वंदे भारत को कई बार अधिकतम 180 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से दौड़ाया जा चुका है। लेकिन साधारण ट्रेन को पहली बार दौड़या गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 Dec 2023 18:47:33 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>तीन मार्गो में किसी एक पर चल सकती है वंदे भारत ट्रेन</title>
                                    <description><![CDATA[यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देने के साथ ही कोटा मंडल में विकास कार्य कराए जा रहे है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/vande-bharat-train-can-run-on-any-one-of-three-routes/article-57755"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/teen-margo-me-me-kisi-ek-pr-chl-skti-h-vande-bharat-train...kota-news-22-09-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा ।  कोटा मंडल में चल रहे विकास कार्यो व मंडल हो रहे नवाचारों को लेकर गुरुवार को  मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय के सभागृह में  प्रेसवार्ता का आयोजन हुआ। अपर मंडल रेल प्रबंधक कोटा मनोज कुमार जैन की अध्यक्षता हुई मासिक प्रेसवार्ता में एडीआरएम ने पावर पवाइंट प्रजन्टेशन (पीपीटी) के माध्यम से मंडल में यात्री सुविधाओं की बढ़ोत्तरी की दिशा में किए जा रहे कार्यो एवं आय वृद्धि तथा अन्य कई महत्वपूर्ण बिंदुओं चर्चा की। </p>
<p><strong>160 किमी प्रतिघंटा चलाने के लिए तैयार</strong><br />कोटा सवाईमाधोपुर नागदा तक ट्रेक 160 किमी प्रति घंटे से ट्रेन संचालन के लिए तैयार हुआ है। इस मार्ग पर कई बार टेस्टिंग की जा चुकी है। कोटा मंडल सेक्शन का कार्य पुरा हो चुका है। </p>
<p><strong>कवच लगाने का कार्य हुआ शुरू</strong><br />कोटा मंडल में पहला कवच सिस्टम का टेस्ट 18 अगस्त को किया गया। जो सफल रहा उसके बाद अब ट्रेनों में इसके लगाने का कार्य शुरू किया जा रहा है। पश्चिम मध्य रेलवे में पहली बार कोटा में कवच फैक्ट्री एक्सेपटेन्स टेस्टिंग रूम की स्थापना की गई । जिसका शुभारंभ 31 अगस्त को किया गया। इसमें एक स्टेशनरी कवच एवं दो लोको कवच इंस्टाल किया गया। इस आधुनिक तकनीक से कवच परीक्षण में विशेष बल मिलेगा। कोटा मंडल को इस प्रकार आधुनिक परीक्षण के लिए पूर्व में सिकंदराबाद जाना पड़ता था। कोटा मंडल में अबतक कुल 46 टावर लगाए जा चुके है एवं विभिन्न खंडो में कई परिस्थितियों में कवच का लोको ट्रायल किया गया है। कवच रेल संचालन प्रणाली में विश्वसनीय सुरक्षात्मक परत प्रदान करती है। इसे लागू होने के बाद ट्रेन चालको के द्वारा मानवीय भूल से सिग्नल को अनदेखा कर होने वाली सुरक्षा चूक की दुर्घटनाओं से हमेशा के लिए निजात मिल जाएगी।</p>
<p><strong>वंदे भारत ट्रेन संचालन के लिए  प्रस्ताव भेजे रेलवे बोर्ड को </strong><br />अपर मंडल रेल प्रबंधक मनोज कुमार जैन ने बताया कि वंदे भारत ट्रेनों के रैक तेजी से तैयार हो रहे है। आगामी महीन में कोटा मंडल को वंदे भारत ट्रेन की सौगात मिल सकती है। रेलवे बोर्ड को कोटा मंडल के तीन मार्गो पर वंदे भारत ट्रेन संचालन के प्रस्ताव बनाकर भेजे है। जिसमें प्रमुखता से कोटा दिल्ली मार्ग को दी गई। इसके अलावा दूसरा कोटा बडौदा व तीसरा इंदौर जयपुर मार्ग के प्रस्ताव भेजे है। कोटा के जनप्रतिनिधि भी वंदे भारत संचालन को लेकर लगातार प्रयास कर रहे है। जैसे जैसे रैक उपलब्ध हो रहे उन मार्गो पर ट्रेने संचालित की जा रही है। 24 सितंबर को उदयपुर जयपुर वंदेभारत ट्रेन की शुरुआत होगी । कोटा मंडल में भी शीघ्र ही वंदे भारत ट्रेन मिलेगी । रेलवे की ओर से सभी आवश्यक तैयारियां की जा चुकी है। एक दो दिन में वंदे भारत ट्रेन और ट्रायल के लिए आ रही है। </p>
<p><strong>माल लोडिंग बढ़ाने के लिए छोटे कंसाइनमेंट शुरू किए</strong><br />कोटा मंडल की ओर से लगातार माल लदान में नवाचार और व्यापारियों को विभिन्न प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध कराकर मालभाडेÞ में उत्तोतर वृद्धि की जा रही है। अब तक 3.354 मिलियन टन माललदान से मंडल को 440.21 करोड़ आय हो चुकी है। सर्वाधिक 1.465 मिलियन टन केवल यूरिया का का लदान किया गया है। इसके अलावा 1.82 लाख टिकट चेकिंग मामलों से 11.45 करोड़ का राजस्व अर्जित किया। जिससे कोटा मंडल में यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देने के साथ ही विकास कार्य कराए जा रहे है। अगस्त माह में अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत पुनर्विकास किए जा रहे 14 स्टेशनों का प्रधानमंत्री द्वारा वर्चुअल शिलान्यास करने के बाद से इन स्टेशनों पर कार्य शुरू किया जा रहा है। बैठक मेंअपर मंडल रेल प्रबंधक ( टी एंड आई) आर. आर. के. सिंह, वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक रोहित मालवीय, वरिष्ठ मंडल परिचालन प्रबंधक सौरभ जैन, वरिष्ठ मंडल कार्मिक अधिकारी सुप्रकाश सहित अन्य शाखा अधिकारी मौजूद रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 Sep 2023 17:13:40 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>नहरों पर सोलर प्लांट के मामले में संभागीय आयुक्त को नोटिस </title>
                                    <description><![CDATA[अहमदाबाद में कुछ दूरी पर बनी नहरों पर बने कैनाल टॉप सोलर प्लांट की तरह कोटा में बह रही नहरों पर ऐसा होने से कई लाभ होंगे। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/notice-to-divisional-commissioner-regarding-solar-plant-on-canals/article-49352"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/court-hammer013.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर की स्थाई लोक अदालत ने सोमवार को कोटा संभाग में नहरों पर सोलर प्लांट के मामले को लेकर संभागीय आयुक्त को नोटिस जारी कर 3 जुलाई 2023 तक जवाब तलब किया है । इस मामले में एडवोकेट लोकेश कुमार सैनी ने न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर करते हुए बताया कि कोटा सहित हाडोती की कृषि के लिए जीवनदायिनी दाएं और बाएं मुख्य नहरो में विगत वर्षों में कई दुखद घटनाएं हुई है ।गुजरात के अहमदाबाद में कुछ दूरी पर बनी नहरों पर बने कैनाल टॉप सोलर प्लांट की तरह कोटा में बह रही नहरों पर ऐसा होने से कई लाभ होंगे।  इससे दुर्घटनाओं व आत्महत्या पर रोक लगेगी।  पानी का वाष्पीकरण भी रुकेगा साथ ही बिजली का उत्पादन भी होगा । इससे लोगों को रोजगार मिलेगा। याचिका में बताया  कि असुरक्षित नहरों  पर पूर्ण सुरक्षित लोहे की बार , जालियां व रेलिंग बनवाई जानी चाहिए।  सन 2019 से लेकर अब तक इन नहरों में 95 घटनाएं हुई हैं जिसमें से 30 से अधिक लाशें निकाली गई । वर्ष 2021 में 150 घटनाएं हुई।  विगत 4 वर्षों में डूबने से 250 से अधिक घटनाएं हुई हैं ।एक किलोमीटर तक की नहर को ढक कर इस तरह का प्लांट लगने से 25000 लोगों को बिजली की आपूर्ति होगी व परंपरागत ऊर्जा स्रोत पर दबाव कम होगा कोयला और पानी की बचत होगी । बायीं मुख्य नहर की कुल क्षमता 1500 क्यूसेक की है इसका क्षेत्रफल 111 किलोमीटर में फैला हुआ है जिससे एक लाख 20000 हेक्टेयर खेत में सिंचाई होती है । दोनों नहरों से हाडोती के 15 उपखंड सिंचित होते हैं लेकिन अनदेखी के कारण आज यह समस्या उत्पन्न हो रही है।इस मामले में सुनवाई करते हुए न्यायालय ने संभागीय आयुक्त से जवाब तलब किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 Jun 2023 16:17:40 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>जेके लोन अस्पताल में भी अब मरीज और तीमारदारों को मिलेगी सुरक्षा</title>
                                    <description><![CDATA[अस्पताल में आने वाले मरीजों  और उनके तीमारदारों को सुरक्षा मुहैया हो सके इसके लिए अब यहां पुलिस चौकी भी स्थापित की गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/patients-and-attendants-will-now-get-security-in-jk-lon-hospital-as-well/article-47859"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/whatsapp-image-2023-06-05-at-16.39.32.jpeg" alt=""></a><br /><p>कोटा। संभाग के सबसे बड़े मातृ एवं शिशु चिकित्सालय जेकेलोन में सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस चौकी स्थापित की गई है । पुलिस चौकी का शुभारंभ सोमवार को नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल ने किया। उद्घाटन के मौके पर उन्होंने  कहा कि कोटा चिकित्सा के लिहाज से अत्याधुनिक सुविधाओं व संसाधनों के साथ प्रदेश के अग्रणी जिलों में शामिल है । अस्पताल में आने वाले मरीजों  और उनके तीमारदारों को सुरक्षा मुहैया हो सके इसके लिए अब यहां पुलिस चौकी भी स्थापित की गई है।  पुलिस चौकी में महिला पुलिसकर्मियों की भी तैनात की जाएगी।</p>
<p>शुभारंभ के मौके पर पीसीसी सदस्य अमित धारीवाल , कोटा रेंज के आईजी प्रसन्न कुमार खमेसरा ,एसपी शरद चौधरी, मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. संगीता सक्सेना सहित पुलिस अधिकारी एवं चिकित्सा अधिकारी एवं डॉक्टर्स उपस्थित रहे। चौकी का शुभारंभ कर मंत्री  धारीवाल ने पुलिस अधिकारियों से अस्पताल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा की और व्यवस्थाएं दुरुस्त रखने के निर्देश दिए। गौरतलब है कि अभी तक जेके लोन अस्पताल में पुलिस चौकी अस्थाई रूप से  पुराने अस्पताल में संचालित हो रही थी। नया ओपीडी ब्लॉक बनने के बाद पहली बार पुलिस चौकी स्थापित की गई है। यहां चौकी पर तैनात स्टाफ अस्पताल में होने वाली घटनाओं पर नजर रखेगा । हाल ही में एमबीएस व जेके लोन अस्पताल में जेब कटी और बच्चा चोरी समेत कई घटनाएं हो चुकी हैं ऐसे में  जेके लोन अस्पताल में पुलिस चौकी पर महिला स्टाफ भी लगाए जाने से महिलाओं की सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 05 Jun 2023 16:51:38 +0530</pubDate>
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                <title>कोटा मंडल के 12 स्टेशन गेस्ट हाउस सोलर बिजली बनाएंगे</title>
                                    <description><![CDATA[अधिकारियों के अनुसार रेलवे  में अब जो भी रूफ टॉप सोलर प्लांट लगाने की तैयारी की जा रही है उन्हें बिल्ट आॅपरेट एंड मेंटेनेंस मोड़ पर जाएगा। उधर बीना में भी 1.8 मेगावॉट का प्लॉट संचालित किया जा रहा है। इस प्लांट से बनने वाली बिजली को सीधे रेल इंजन को दिया जाता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/12-station-guest-houses-of-kota-division-will-make-solar-power/article-43137"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/kota-mandal-ke-12-station-guest-house-banaenge-solar-plant...kota-news-18-04-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा मंडल के 12 से अधिक स्टेशन व गेस्ट हाउस और महत्वपूर्ण इमारतों पर रेलवे रूफ टॉप सोलर प्लांट 2.5 मेगावॉट लगाएंगा।  इसके कारण  करीब 4 से 5 करोड रुपए की बिजली की बचत होगी।  कोटा मंडल व भोपाल स्टेशन सहित रेल मंडल के स्टेशनों पर पहले चरण में करीब 2.5 मेगावॉट के सोलर प्लांट लगाया जाना है। यहां एक प्लांट पूर्ण से लगा है। वहीं परिचम-मध्य रेल जोन के तीनों भोपाल, जबलपुर और कोटा मंडलों के बड़े स्टेशन, बिल्डिंग गेस्ट हाउस, जैसे स्थानों पर कुल 12 मेगावॉट के सोलर प्लांट रूप टॉप लगाए जाने है। निर्णय हुआ है। इससे जोन को साल भर लगभग 4 से 5 करोड़ रुपए की बिजली बचने की उम्मीद है।</p>
<p><strong>बिल्ट, आॅपरेट एंड मेंटीनेंस मोड से लगेगा</strong><br />अधिकारियों के अनुसार रेलवे  में अब जो भी रूफ टॉप सोलर प्लांट लगाने की तैयारी की जा रही है उन्हें बिल्ट आॅपरेट एंड मेंटेनेंस मोड़ पर जाएगा। उधर बीना में भी 1.8 मेगावॉट का प्लॉट संचालित किया जा रहा है। इस प्लांट से बनने वाली बिजली को सीधे रेल इंजन को दिया जाता है।</p>
<p><strong>इस तरह बचेगी बिजली</strong><br />भोपाल स्टेशन पर वर्तमान में एक लाख यूनिट बिजली की खपत हर महीने होती है। इसके  बिजली का बिल करीब 6 से 8.5 लाख के बीच आता है। वर्तमान में 240 किलोवॉअ का सोलर प्लांट यहां लगा है। इससे महीने भर में 30 हजार यूनिट बिजली बनती है। बिल में करीब 75 हजार रुपए महीने की बचत पिछले एक साल से हो रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 18 Apr 2023 14:29:38 +0530</pubDate>
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                <title>संभाग में ना संभागीय आयुक्त, ना एसपी और ना निगम आयुक्त </title>
                                    <description><![CDATA[शहर में पुलिस के मुखिया एसपी का पद करीब एक माह से रिक्त है। वहीं नगर निगम कोटा दक्षिण में आयुक्त का पद भी पिछले कई दिन से रिक्त है। इन सभी पदों पर अधीनस्थ अधिकारियों को कार्यवाहक का चार्ज दिया हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/no-divisional-commissioner--no-sp-and-no-corporation-commissioner-in-the-division/article-35919"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-01/sambhag-mei-na-sambhagiya-aayukt,-na-sp-aur-na-nigam-aayukt...kota-news..28.1.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। जयपुर और जोधपुर के बाद कोटा तीसरा सबसे बड़ा संभाग मुख्यालय है। इसके बावजूद यहां की हालत इतनी बुरी है कि संभाग के सबसे बड़े अधिकारी संभागीय आयुक्त से लेकर निगम आयुक्त तक कार्यवाहक लगे हुए हैं। शिक्षा नगरी कोटा को एक तरफ तो स्मार्ट सिटी और दूसरी तरफ पर्यटन नगरी बनाने का प्रयास किया जा रहा है। उसके लिए यहां हजारों करोड़ रुपए के विकास कार्य करवाए जा रहे हैं। प्रदेश का तीसरा सबसे बड़ा संभागीय मुख्यालय होने के बाद भी सरकार का यहां ध्यान नहीं है। यही कारण है कि यहां कई सरकारी विभागों में तो अधिकारियों व कर्मचारियों के पद रिक्त हैं। वहीं हैरानी की बात यह है कि संभाग के सबसे बड़े अधिकारी संभागीय आयुक्त तक का पद दो माह से रिक्त है। शहर  में जहां आए दिन गम्भीर आपारधिक घटनाएं हो रही हैं। उस शहर में पुलिस के मुखिया एसपी का पद करीब एक माह से रिक्त है। वहीं नगर निगम कोटा दक्षिण में आयुक्त का पद भी पिछले कई दिन से रिक्त है। इन सभी पदों पर अधीनस्थ अधिकारियों को कार्यवाहक का चार्ज दिया हुआ है। जबकि अधीनस्थ अधिकारियों के पास उनका ही इतना अधिक काम है कि ऐसे में कार्यवाहक अधिकारी का काम आने से दोहरी जिम्मेदारी निभानी पड़ रही है। जिला कलक्टर की बैठकों में शामिल होने से लेकर प्रशासनिक काम अधिक करने पड़ रहे हैं। जिससे उनका मूल काम प्रभावित हो रहा है। हालांकि कार्यवाहक अधिकारी इस बारे में कुछ भी कहन से बचते रहे। प्रदेश के कद्दावर नेता स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल कोटा के होने के बाद भी यहां इतने बड़े अधिकारियों के पद रिक्त हैं।   </p>
<p><strong>दो माह पहले सेवानिवृत्त हुए थे संभागीय आयुक्त</strong><br />कोटा में संभागीय आयुक्त का पद दो माह से रिक्त है। तत्कालीन संभागीय आयुक्त दीपक नंदी  30 नवम्बर 2022 को इस पद से सेवानिवृत्त हुए थे। उसके बाद से इस पद पर किसी भी अधिकारी की स्थायी नियुक्ति नहीं की गई है। कुछ समय तक अतिरिक्त संभागीय आयुक्त अनुभाग भार्गव के पास संभागीय आयुक्त का चार्ज रहा। उनका नगर निगम कोटा उत्तर में तबादला होने व उनके स्थान पर कोटा दक्षिण के तत्कालीन आयुक्त राजपाल सिंह को अतिरिक्त संभागीय आयक्त बनाया गया। सिंह के कार्यभार संभालने के बाद से उनके पास कायवाहक संभागीय आयुक्त का चार्ज है। </p>
<p><strong>एक माह पहले हुई थी शहर एसपी की विदाई</strong><br />कोटा शहर  में जहां आए दिन गम्भीर अपराध हो रहे हैं। राह चलती महिलाओं के हाथ से बैग व गले से सोने की चैन छीनी जा रही है। दुकान में घुसकर व्यापारी पर चाकु से हमला किया जा रहा है। उस समय में एक माह से पुलिस का मुखिया  पुलिस अधीक्षक ही नहीं है।  तत्कालीन पुलिस अधीक्षक केसर सिंह शेखावत का कार्यकाल 31 दिसम्बर को समाप्त होने से वे उसी दिन सेवानिवृत्त हो गए थे। उनके सेवानिवृत्त होने के बाद किसी को भी इस पद पर नहीं लगाया गया है। शहर एसपी का चार्ज एएसपी शहर प्रवीण जैन को दिया हुआ है। करीब एक महीने से वही कार्यवाहक एसपी का कार्य संभाल रहे हैं। </p>
<p><strong>विभागीय काम प्रभावित</strong><br />जानकारों के अनुसार कोटा संभागीय मुख्यालय होने के बाद भी यहां इतने बड़े अधिकारियों के पद रिक्त होने से विभागों का काम प्रभावित होता है।  जो काम जिस पद के लिए है वह काम उसका अधिकारी ही सही ढंग से कर सकता है। जबकि कार्यवाहक अधिकारी  उतना पारंगतता से काम नहीं कर पाता है। साथ ही कई तरह की वित्तीय स्वीकृतियों में भी अड़चन आती है। इसलिए अधिकारी तो होने ही चाहिए।</p>
<p><strong>कोटा दक्षिण में आयुक्त ही नहीं</strong><br />सरकार ने आरएएस अधिकारियों के तबादले तो कर दिए लेकिन उसमें कई पदों पर नियुक्ति ही नहीं की। उसी के तहत नगर निगम कोटा दक्षिण के तत्कालीन आयुक्त राजपाल सिंह को अतिरिक्त संभागीय आयुक्त के पद पर लगा दिया। लेकिन उनके स्थान पर किसी भी अधिकारी को कोटा दक्षिण का आयुक्त नहीं लगाया। राजपाल सिंह 20 जनवरी को आयुक्त के पद से रिलीव हो गए थे। उन्होंने अपना चार्ज अतिरिक्त आयुक्त अम्बालाल मीणा को दे दिया। उसके बाद से अम्बालाल मीणा ही कार्यवाहक आयुक्त का काम भी कर रहे हैं। </p>
<p><strong>कांग्रेस अध्यक्ष ने नहीं दिया कोई जवाब</strong><br />कोटा में बड़े अधिकारियों के कई पद रिक्त होने पर जब शहर कांग्रेस अध्यक्ष रविन्द्र त्यागी से बात करना चाही तो उन्होंने शादी में होने की बात कहकर इस बारे में कोई जवाब नहीं दिया। जबकि कांग्रेस के अन्य नेताओं का कहना है कि यह सरकार के स्तर का मामला है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />संभाग मुख्यालय होने के बाद भी यहां संभागीय आयुक्त  और पुलिस अधीक्षक जैसे अधिकारियों के पद रिक्त होना चिंता का विषय है। सरकार का कोटा की तरफ कोई ध्यान नहीं है। कानून व्यवस्था बिगड़ रही है। जनता के काम नहीं हो रहे हैंÞ। जिस तरह से बड़े पद रिक्त हैं उससे तो साफ जाहिर है कि चुनावी वर्ष होने से कोई भी अधिकारी कोटा में नहीं आना चाहता है। यहां नेताओं का इतना अषिक  दबाव रहता है कि अधिकारी अधिक दिन तक टिक भी नहीं पाते। <br /><strong>-कृष्ण कुमार सोनी, शहर जिला अध्यक्ष भाजपा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Jan 2023 15:14:25 +0530</pubDate>
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