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                <title>kota district - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>कोटा जिले की चार नगर पालिकाओं में भाजपा के उपाध्यक्ष बने</title>
                                    <description><![CDATA[सांगोद में महेंद्र कुमार शर्मा , इटावा में दीपक उपाध्याय  और सुल्तानपुर में नरेश शर्मा बने उपाध्यक्ष।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/bjp-candidates-elected-vice-chairpersons-in-four-kota-district-municipalities/article-166327"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/111200-x-600-px)-(2)73.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा जिले की पांच नगर पालिकाओं में से चार में मंगलवार को उपाध्यक्ष पद के चुनाव हुए। सांगोद, रामगंजमंडी, इटावा और सुल्तानपुर में भाजपा प्रत्याशी उपाध्यक्ष निर्वाचित हुए। वहीं सुकेत नगर पालिका में अध्यक्ष पद का चुनाव 25 सितंबर को होना है।</p>
<p><br /><strong>रामगंजमंडी नगरपालिका</strong> में कांग्रेस प्रत्याशी भैरूलाल खटीक के नामांकन वापस लेने के बाद भाजपा के महेंद्र सामरिया निर्विरोध उपाध्यक्ष निर्वाचित हुए। निर्वाचन अधिकारी ने नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सामरिया के निर्विरोध निर्वाचन की घोषणा की। निर्विरोध निर्वाचित होने के बाद सामरिया नगर पालिका से दंडवत प्रणाम करते हुए करीब 500 मीटर दूर गोवर्धननाथ मंदिर पहुंचे और ठाकुरजी के दर्शन कर पूजा की। </p>
<p><br /> <strong>सांगोद नगर पालिका</strong> में भाजपा के महेंद्र कुमार शर्मा उपाध्यक्ष निर्वाचित हुए। उन्हें 23 वोट मिले, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी नुसरत शाहीन को 12 वोट मिले। इस तरह महेंद्र शर्मा ने 11 वोट के अंतर से जीत दर्ज की। शर्मा भाजपा देहात जिला मंत्री हैं और पूर्व में मंडल अध्यक्ष भी रह चुके हैं। इस बार वे पहली बार पार्षद निर्वाचित हुए हैं।</p>
<p><br /><strong>इटावा में दीपक उपाध्याय तीन वोट से जीते</strong><br />इटावा नगर पालिका में भाजपा के दीपक उपाध्याय उपाध्यक्ष निर्वाचित हुए। उन्हें 19 वोट मिले। जबकि कांग्रेस प्रत्याशी विनोद प्रजापत को 16 वोट मिले। दीपक उपाध्याय ने तीन वोट के अंतर से जीत दर्ज की। कांग्रेस ने यहां निर्दलीय पार्षद विनोद प्रजापत को प्रत्याशी बनाया था।</p>
<p><br /><strong>सुल्तानपुर में नरेश शर्मा को 15 वोट</strong><br />सुल्तानपुर नगर पालिका में भाजपा प्रत्याशी नरेश शर्मा उपाध्यक्ष निर्वाचित हुए। उन्हें 15 वोट मिले, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी शेख मोइनुद्दीन को 10 वोट मिले। नरेश शर्मा ने पांच वोट के अंतर से जीत दर्ज की। सुल्तानपुर में भाजपा के 13, कांग्रेस के 11 और एक निर्दलीय पार्षद निर्वाचित हुए थे।<br /> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 23 Sep 2026 09:56:57 +0530</pubDate>
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                <title>15 हजार स्कूली बेटियां पैदल कर रही सफर</title>
                                    <description><![CDATA[ बेटियों को कब तक साइकिलों का वितरण किया जाएगा, इसकी जानकारी अधिकारियों को भी नहीं है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/15-thousand-school-girls-are-traveling-on-foot/article-56824"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/15-hazar-schooli-betiya-paidal-kar-rahi-safar..kota-news...11.9.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से चलाई जा रही नि:शुल्क साइकिल वितरण योजना खानापूर्ति बनकर रह गई। पिछले दो सालों से कोटा जिले की 15 हजार से ज्यादा बेटियों को पैदल ही स्कूल आना  जाना पड़ रहा है। कोरोनाकाल के बाद से ही योजना की क्रियांविति डगमगा गई। ऐसे में उन्हें साइकिलें नहीं मिलने से पैदल ही स्कूल आना-जाना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>15,599 बालिकाओं को साइकिल का इंतजार</strong><br />जिले के राजकीय विद्यालयों में शैक्षणिक सत्र 2021-22 व 2022-23 की कक्षा 9वीं की छात्राओं को अब तक साइकिलें नहीं मिल पाई। गत दो साल में करीब 15 हजार 599 बालिकाएं नि:शुल्क साइकिल से वंंचित रह गई। ऐसे में उन्हें घर से स्कूल आने-जाने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हैरानी की बात यह है कि बेटियों को कब तक साइकिलों का वितरण किया जाएगा, इसकी जानकारी अधिकारियों को भी नहीं है।</p>
<p><strong>विभाग को नहीं पता कब मिलेगी साइकिलें</strong><br />शैक्षणिक सत्र शुरू हुए करीब दो माह बीत गए, लेकिन अभी तक इस संबंध में कोई विभागीय कार्यवाही नहीं हुई। ऐसे में दूर-दराज से स्कूल आने वाली बेटियों को पैदल ही आना-जाना पड़ रहा है। जिसकी वजह से कई छात्राओं को विद्यालय पहुंचने में देरी हो जाती है। वहीं, शिक्षा विभाग के अधिकारी भी छात्राओं को साइकिलों का वितरण कब किया जाएगा, इसकी जानकारी तक नहीं दे सके। हालांकि, विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, कोरोना काल के पहले सत्र में बालिकाओं को साइकिलें नहीं मिली थी लेकिन दूसरे सत्र में साइकिलें वितरित की गई थी। </p>
<p><strong>यह था साइकिल वितरण का उद्देश्य</strong><br />साइकिल वितरण योजना की शुरूआत वर्ष 2007-08 में हुई थी। योजना के तहत 8वीं पास कर 9वीं कक्षा में प्रवेश पाने वाली बालिकाओं को सरकार की ओर से नि:शुल्क साइकिलें वितरित की जाती है। इसका उद्देश्य स्कूल और घर की दूरी अधिक होने के चलते बालिकाएं समय पर स्कूल नहीं पहुंच पाती हैं। ऐसी बालिकाओं को सुगम आवागमन के लिए साइकिल उपलब्ध कराई जाती है।</p>
<p><strong>साइकिल मिले तो समय पर पहुंचे स्कूल और घर</strong><br />कक्षा 9वीं में पढ़ने वाली छात्रा ज्योति का कहना है वह विद्यालय से करीब 2 किलोमीटर दूर  संजय नगर ब्लॉक बी में रहतीं हैं और विज्ञान नगर स्थित गर्ल्स स्कूल में पढ़ती हैं। जब मैं आठवीं में थी तब इस बात की खुशी थी कि 9वीं क्लास में जाएंगे तो साइकिल मिलेगी और साइकिल से स्कूल जाया करेंगे लेकिन सत्र खत्म होने को है अभी तक कुछ भी नहीं मिला। साइकिल मिलेगी या नहीं कुछ नहीं कह सकते। इधर, लता, रानू, अरुणा, महिमा कुश्वाह ने बताया कि वे करीब चार सौ मीटर दूर से प्रतिदिन पैदल ही विद्यालय आते हैं। जिसकी वहज से समय पर नहीं पहुंच पाते। साइकिल मिल जाए तो समय पर विद्यालय व घर पहुंच सकते हैं।  </p>
<p>बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार की ओर से कक्षा 9वीं की छात्राओं को नि:शुल्क साइकिलें दी जाती है। जल्द ही सभी पात्र बालिकाओं को साइकिलों का वितरण किया जाएगा। <br /><strong>-प्रदीप चौधरी, मुख्य जिला शिक्षाधिकारी कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 Sep 2023 17:53:06 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मुकुन्दरा टनल से वेस्ट मटेरियल का नहीं सुलझा मामला</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा राज्य का एक मात्र वो जिला है जहां सर्वाधिक एन्ट्री व एक्जिट पॉइंट होंगे। जिले से होकर गुजरने वाली सड़क में 6 इंटरचेंज होंगे। इन छह स्थानों से हाई-वे पर प्रवेश किया जा सकेगा और निकासी भी हो सकेगी। उल्लेखनीय है कि दिल्ली-मुम्बई एक्सप्रेस-वे भारत सरकार की एक दूरदर्शी परियोजना है। यह दिल्ली और मुम्बई को जोड़ेगा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-issue-of-waste-material-from-mukundara-tunnel-is-not-resolved/article-35844"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-01/mukandra-tunnel-se-waste-material-ka-nahi-suljha-maamla..kota-news..27.1.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। भारतमाला प्रोजेक्ट परियोजना के पहले चरण के हिस्से के रूप में बनाए जा रहे दिल्ली-मुम्बई एक्सप्रेस-वे में कोटा जिले में सड़क निर्माण का कार्य एग्रीमेंंंट के अनुसार जनवरी 2024 तक होने की संभावना है। जिले के मुकुन्दरा क्षेत्र में करीब 4 किलोमीटर टनल में हाईवे बनाया जा रहा है लेकिन फिलहाल वेस्ट मटेरियल के निस्तारण का मामला नहीं सुलझा है। मुकुन्दरा टनल में लगभग 20 प्रतिशत सड़क ही बन पाई है। ज्ञातव्य है कि कोटा जिले में होने वाले 106 किलोमीटर सड़क निर्माण कार्य में से 33.5 किलोमीटर के हिस्से में मुकुन्दरा टनल और चेचट तथा रामगंजमंडी के इलाकें आते है तो 72.5 किलोमीटर में दीगोद, लाडपुरा और कनवास तहसील के 47 गांव आते हैं। इनमे से 33.5 किलोमीटर हिस्से में से एक मुकुन्दरा टनल में लगभग 17 प्रतिशत सड़क ही बन पाई है तो दूसरे हिस्से में लगभग 65 प्रतिशत सड़क बन चुकी है। सड़क के निर्माण कार्य का खर्चा लगभग 30 करोड़ रूपए प्रति किलोमीटर है। </p>
<p>कोटा राज्य का एक मात्र वो जिला है जहां सर्वाधिक एन्ट्री व एक्जिट पॉइंट होंगे। जिले से होकर गुजरने वाली सड़क में 6 इंटरचेंज होंगे। इन छह स्थानों से हाई-वे पर प्रवेश किया जा सकेगा और निकासी भी हो सकेगी। उल्लेखनीय है कि दिल्ली-मुम्बई एक्सप्रेस-वे भारत सरकार की एक दूरदर्शी परियोजना है। यह दिल्ली और मुम्बई को जोड़ेगा। आठ लेन का ये एक्सप्रेस-वे विश्व का पहला सबसे लम्बा एक्सप्रेस वे है जिसे बारहलेन तक बढ़ाया जा सकता है। वर्तमान में दिल्ली से मुम्बई की दूरी सड़क मार्ग से करीब 1510 किलोमीटर है। एक्सप्रेस वे बनने के बाद इसकी दूरी 1350 किलोमीटर रह जाएगी। </p>
<p><strong>यह रहेंगे कोटा में एन्ट्री और एक्जिट के पॉइंट</strong><br />जिले में मंंंंंंंंडावरा, जालिमपुरा, कराड़िया, बालापुरा, गोपालपुरा तथा चेचट पर एन्ट्री/एग्जिट की सुविधा दी जाएगी।चेचट तथा रामगंज मंडी इलाके में सड़क निर्माण में अभी 8 माह का समय लगेगा तो मुकुन्दरा टनल के हिस्से की सड़क पूरा करने में 15 माह से अधिक का समय लगने की संभावना है। </p>
<p><strong>ग्रीन ओवरपास की सुविधा </strong><br />यह एशिया का पहला ऐसा हाईवे है जिसके निर्माण में वन्यजीवों के लिए ग्रीन ओवरपास की सुविधा दी जाएगी। इस एक्सप्रेस-वे पर हैलीपैड भी बनाने की योजना है। दोनो ओर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बनाने की भी योजना है। निर्माण पूरा होने पर जयपुर, किशनगढ़, अजमेर, कोटा, चित्तोड़गढ़, उदयपुर, भोपाल, उज्जेन, इंदौर, इहमदाबाद तथा वडोदरा जैसे आर्थिक केन्द्रों से कनेक्टिविटी में सुधार होगा। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />एग्रीमेेंंट के अनुसार अगले साल जनवरी तक काम पूरा होने की संभावना है। मुकुन्दरा टनल में वेस्ट का मामला अटका हुआ है। वाइल्ड लाइफ वालों के साथ बात चल रही है। <br /><strong>- बूजेन्द्र सिंह मीणा, तकनीकी प्रबन्धक, राष्टÑीय राजमार्ग प्राधिकरण, कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Jan 2023 15:22:06 +0530</pubDate>
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                <title>कोटा में बालिका तस्करी के मामलों में आया उछाल</title>
                                    <description><![CDATA[2022 में अब तक 208 बालक-बालिकाएं पलायन कर चुके हैं। इन बालक-बालिकाओं को टीम ने पुलिस मुख्यालय द्वारा हर साल अलग अलग खुशी, मिलाप आपरेशन के जरिए अभियान चलाकर दूर दराज से तलाश कर दस्तयाब किया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/rise-in-cases-of-girl-child-trafficking-in-kota/article-35564"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-01/kota-mei-balika-taskari-k-maamlo-mei-aaya-uchchal..kota-news-23.1.2023.jpeg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा जिले में बालक बालिकाओं के गायब होने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।  दुर्भाग्य की बात है कि किशोर वय की लड़कियों की तस्करी के मामलों में भारी इजाफा हुआ है। वर्ष 2020 में यह संख्या जहां 110 थी वहीं 2022 में बढ़कर यह  संख्या 149 पर पहुंच गई। दूसरी तरफ अच्छी बात यह है कि मानव तस्करी यूनिट ने अपहृत व इनामी बालक-बालिकाओं को दस्तयाब करने में लगभग शत-प्रतिशत कामयाबी हासिल की है। </p>
<p><strong>अभियान चलाकर किए दस्तयाब</strong><br />तीन साल की तुलना में 1 जनवरी 2022 में 220 बालक-बालिकाएं गुमशुदा हुए थे, जो कि वर्ष 2020-2021 से  64 अधिक हैं। जबकि वर्ष 62 बालक और 158 बालिकाओं ने शहर के विभिन्न पुलिस थाना क्षेत्रों से अपना घर छोड़ा था। इसके अलावा एक जनवरी से 31 दिसंबर 2021 तक  44 बालक व 112 बालिकाओं ने घर छोड़ा था। वही 2020 में 35 बालकों व 110 बालिकाओं ने घर छोड़ा था। पुलिस आकड़ों के अनुसार तीन सालों में गुमशुदा बालक बालिकाओं की दस्तयाबी में मानव तस्करी विरोधी यूनिट कोटा के प्रभारी घनश्याम मीणा के नेतृत्व में टीम ने वर्ष 2022 में बच्चों की दस्तयाबी में 94.54 प्रतिशत की कामयाबी हासिल की है। जबकि 2021 में कोरोना काल के चलते पूरे वर्ष में 156 बच्चे लापता हुए थे। जिसमें सर्वाधिक बालिकाएं 112 लापता हो गई थी और 44 बालक अपने घरों को छोड़कर पलायन कर गए थे। जिसमें कार्रवाई करते हुए टीम ने 100 प्रतिशत बालक-बालिकाओं को दस्तयाब किया। लेकिन 2020 में 145 बालक-बालिकाएं लापता हुए थे। उसमें से 143 को दस्तयाब किया गया। इस वर्ष दो बच्चों को तलाश किया गया, लेकिन कोई सुराग नहीं लगा है। पिछले साल 2021 की तुलना में 2022 में तीन बालक नौ बालिकाओं को तलाश किया जा रहा है। हालांकि 2022 में अब तक 208 बालक-बालिकाएं पलायन कर चुके हैं। इन बालक-बालिकाओं को टीम ने पुलिस मुख्यालय द्वारा हर साल अलग अलग खुशी, मिलाप आॅपरेशन के जरिए अभियान चलाकर दूर दराज से तलाश कर दस्तयाब किया गया। </p>
<p><strong>इनामी बच्चों को किया दस्तयाब </strong><br /> पुलिस उप-अधीक्षक घनश्याम मीणा ने बताया कि पिछले वर्षों में  लापता हुए बालक-बालिकाओं पर पुलिस द्वारा इनाम जारी किया गया था। ऐसे बच्चों को वर्ष 2022 में दस्तयाब किया गया। ुपलिस थाना आरकेपुरम क्षेत्र से वर्ष 2018 से लापता बालिका दस्तयाब नहीं हो रही थी। जिससे उस पर दो हजार का इनाम रखा गया था। इसी प्रकार से दादाबाड़ी थाना क्षेत्र से 2017 से लापता एक बालिका को पांच साल से कोई सुराग नहीं मिला था। इसके दस्तयाबी पर भी दो हजार रुपए का इनाम रखा गया था। थाना कुन्हाड़ी से तीन साल से लापता एक बालिका पर दो हजार, अनंतपुरा थाना क्षेत्र से एक साल से लापता एक बालिका पांच हजार का इनाम घोषित किया गया। पांच साल से ही अनंतपुरा से लापता बालिका पर भी दो हजार का इनाम रखा गया था। टीम ने वर्ष 2022 में सभी इनाम घोषित बालिकाआें को दस्तयाब किया गया। इस दौरान कई बालिकाओं को उनके माता-पिता तो कई को बालिका गृह में अस्थाई आश्रय दिया गया है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong></p>
<p>आज के समय में बदलते परिवेश के चलते बच्चों में परिवर्तन हो रहा है। कई बार माता-पिता के द्वारा डांट देना तथा पढ़ाई के दबाव के चलते मोह भंग होने पर पलायन कर जाते हैं। इसके अलावा किशोर-किशोरियों में उम्र के अनुसार  परिवर्तन होने और प्रेम प्रसंग के चक्कर में भी पलायन कर जाते हैं। साथ ही मोबाइल में गलत    वीडियो देखना जैसे अनेक ऐसे मामले हैं जिसके कारण ही बालक-बालिकाएं पलायन कर जाते  हैं। <br /><strong>-घनश्याम मीणा, डिप्टी एसपी एवं अनुसंधान अधिकारी मानव तस्करी विरोधी यूनिट कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Jan 2023 15:30:24 +0530</pubDate>
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                <title>बिना पंजीयन प्रमाणपत्र दौड रहे तीन हजार से अधिक वाहन</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा जिले में 3,23,341 दुपहिया वाहन, 90999 मोटर, कार तथा जीप, 8189 भार वाहन तथा  746 बस जिला परिवहन कार्यालय में पंजीकृत हैं। जो सड़कों पर दौड़ रहे हैं।  आरटीओ आॅफिस में आरसी बनने या छपने के लिए लगभग 1 माह की पैंडेंसी चल रही है। इस कारण लगभग 3 हजार से अधिक वाहन बिना आरसी यानि पंजीयन प्रमाण पत्र के सड़कों पर दौड रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/more-than-three-thousand-vehicles-running-without-registration-certificate/article-34613"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-01/img-20230110-wa0004.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा ।  परिवहन कार्यालय में आरसी छपने के नये टेंडर नहीं होने के कारण लगातार पंजीयन प्रमाण पत्र बनाने की पैंडेंसी बढ़ती जा रही है वहीं बिना आरसी के सड़कों बेधड़क हजारों वाहन दौड रहे हैं जो सुरक्षा और कानून के लिहाज से बिल्कुल गलत हैं। आरटीओ आॅफिस में आरसी बनने या छपने के लिए लगभग 1 माह की पैंडेंसी चल रही है। इस कारण लगभग 3 हजार से अधिक वाहन बिना आरसी यानि पंजीयन प्रमाण पत्र के सड़कों पर दौड रहे हैं। बताया जाता है कि आगे से स्मार्ट कार्ड नहीं आने के कारण ये देरी हो रही है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार काफी समय से आरसी छापने वाली फर्म को अभी तक टेंडर ही नहीं दिया गया है। जो छप रहे है वो भी फर्म की अपनी मर्जी से। एक कार्मिक का कहना है कि आरसी छापने के लिए पैसा तो चाहिए जब पैसा ही नहीं तो आरसी कैसे छपेगी। वहीं, इस बारे में विभाग के संबंधित कार्मिकों से जानकारी करने पर वो इधर से उधर भेजते नजर आए।</p>
<p> गौतरलब है कि आरसी एक ऐसा दस्तावेज है जो यह सत्यापित करता है कि वाहन देश के किस क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय में पंजीकृत है। ज्ञातव्य है कि मोटर वाहन अधिनियम 1988 के अनुसार, सभी वाहनों को सार्वजनिक स्थान और किसी भी जगह चलाने के लिए, पंजीकरण प्रमाणपत्र होने के साथ साथ वाहन पर ही पंजीकरण का निशान होना आवश्यक है। अधिनियम के इस अनुच्छेद का पालन करने में विफलता के परिणामस्वरूप मालिक को उसी कानून के तहत दंडित किया जा सकता है। प्रमाणपत्र शुरू में 15 साल की अवधि के लिए वैध होता है, जिसके बाद इसे हर 5 साल में समय-समय पर नवीनीकृत किया जाना चाहिए. कई वर्षों तक, पंजीकरण प्रमाणपत्र या आरसी पुस्तक दस्तावेजों का एक सेट होता था, हालांकि, अब उन्हें स्मार्ट कार्ड के रूप में भी जारी किया जा सकता है जिसमें या तो अंतर्निहित चिप्स (कार्ड के अंदर डाली गई चिप) या एक कोड होता है जिसे वाहन और उसके मालिक की  जानकारी तक पहुंचने के लिए स्कैन किया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि कोटा जिले में 3,23,341 दुपहिया वाहन, 90999 मोटर, कार तथा जीप, 8189 भार वाहन तथा  746 बस जिला परिवहन कार्यालय में पंजीकृत हैं। जो सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इन सभी वाहनों के पास यातायात/ परिवहन से जुड़े आवश्यक दस्तावेज हैं। जिनके आधार पर ही परिवहन कार्यालय में इनका पंजीयन किया गया है। कोटा जिले में हर वर्ष औसतन 5000-6000 गैर परिवहन वाहन तथा औसतन 400 से 500 परिवहन वाहन बढ़ जाते हैं।</p>
<p>एक अनुमान के मुताबिक प्रतिवर्ष जिले में पंजीकृत लगभग 4 से 5 हजार वाहन 15 वर्ष की पंजीयन अवधि समाप्त हो जाने के कारण चलन से बाहर हो जाते हैं। गैर परिवहन वाहन पंजीयन अवधि समाप्त होने के कारण एवं परिवहन वाहन फिटनेस एवं पंजीयन अवधि समाप्त होने के कारण चलन से बाहर हो जाते हैं। जानकारी के अनुसार 15 वर्ष की अवधि पार हो जाने के बाद उस वाहन की आरसी का नवीनीकरण फिटनेस हित अन्य मापदन्डों के आधार पर आगामी 10 वर्षों के लिए किया जा रहा है। </p>
<p>काफी दिनों से आरसी नहीं बनी हैं। हमेशा डर लगा रहता है कि कभी पुलिस वालों ने मांग ली तो क्या दिखाउंगा। पूछने पर बताते है कि अभी टाइम लगेगा। पहले की बन रही है। <br /><strong>-दीपक कुमार</strong></p>
<p>जब भी आरसी के लिए पूछने आता हूं तो यह कहा जाता है कि अभी तैयार नहीं है। जब तैयार होगी तब ले जाना। ना जाने कितना समय लगेगा। कहा तो यही जाता है कि कम से कम 20 दिन तो मानकर ही चलो।<br /><strong>-सुरेन्द्र कुमार</strong></p>
<p>आगे से स्मार्ट कार्ड नहीं आने के कारण देरी हो रही है। पैंडेंसी तो है लेकिन कितनी ये कन्फर्म नहीं है। पूछकर बता दूंगा। <br /><strong>-अरविन्द सिंह राठौड, जिला परिवहन अधिकारी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Jan 2023 20:45:25 +0530</pubDate>
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