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                <title>street dog - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>हर श्वान की नसबंदी पर मिलेंगे दो हजार, राजस्थान को 300 करोड़ की उम्मीद</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान के नगर निकायों के लिए आवारा श्वानों की नसबंदी अब सिर्फ  जनस्वास्थ्य और पशु कल्याण का विषय नहीं रहेगा, बल्कि इसके जरिए केन्द्र सरकार से करोड़ों रुपए की प्रोत्साहन राशि भी हासिल की जा सकेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/rajasthan-will-get-two-thousand-rupees-on-sterilization-of-every/article-156389"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/1111200-x-600-px)-(5)4.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान के नगर निकायों के लिए आवारा श्वानों की नसबंदी अब सिर्फ जनस्वास्थ्य और पशु कल्याण का विषय नहीं रहेगा, बल्कि इसके जरिए केन्द्र सरकार से करोड़ों रुपए की प्रोत्साहन राशि भी हासिल की जा सकेगी। भारत सरकार की स्पेशल असिस्टेंस टू स्टेट्स फॉर कैपिटल इन्वेस्टमेंट (एसएएससीआई) योजना 2026-27 के तहत पोर्टल पर दर्ज प्रत्येक श्वान नसबंदी पर 2000 रुपए का प्रोत्साहन अनुदान दिया जाएगा। इसी आधार पर राजस्थान को पशुधन क्षेत्र सुधार मद में 300 करोड़ तक की सहायता मिलने की संभावना है।</p>
<p><strong>नसबंदी का आंकड़ा बढ़ाने पर जोर</strong><br />योजना के तहत श्वान नसबंदी की संख्या जितनी अधिक होगी, राज्य को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि भी उतनी ही बढ़ेगी। यही वजह है कि विभाग ने सभी निकायों को पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) कार्यक्रम को तेज गति से लागू करने और प्रतिदिन की प्रगति भारत पशुधन पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश दिए हैं। केन्द्र ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रोत्साहन राशि का निर्धारण केवल डिजिटल पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों के आधार पर होगा। ऐसे में नगर निकायों को नसबंदी कायोंर् का रिकॉर्ड ऑनलाइन देना होगा। </p>
<p><strong>30 सितंबर तक करनी होगी मैपिंग</strong><br />राज्य के सभी एबीसी केन्द्रों, डॉग शेल्टरों, डॉग वैनों और रिकवरी क्षेत्रों की 30 सितंबर 2026 तक भारत पशुधन पोर्टल पर मैपिंग करना अनिवार्य किया गया है। केन्द्र सरकार ने साफ  कर दिया है कि मैन्युअल रिपोर्ट या अलग से भेजे गए आंकड़ों को मान्यता नहीं दी जाएगी।</p>
<p><strong>नए केन्द्रों के लिए भी मिलेगा अनुदान</strong><br />योजना के तहत नगर निकायों को नए एबीसी केन्द्र स्थापित करने के लिए 35 लाख रुपए तक तथा डॉग शेल्टर विकसित करने के लिए 30 लाख रुपए तक का पूंजीगत अनुदान भी उपलब्ध कराया जाएगा। इससे शहरी क्षेत्रों में आवारा श्वानों के प्रबंधन के लिए आधारभूत ढांचे को मजबूत करने में मदद मिलेगी।</p>
<p><strong>नोडल अधिकारी होंगे नियुक्त</strong><br />राज्य जीव-जन्तु कल्याण बोर्ड ने सभी निकायों में नोडल अधिकारी नियुक्त करने, समयबद्ध डेटा प्रविष्टि सुनिश्चित करने और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने का आग्रह किया है। अधिकारियों का मानना है कि यदि निकाय निर्धारित लक्ष्य हासिल करते हैं तो राजस्थान केन्द्र से मिलने वाली 300 करोड़ तक की सहायता प्राप्त करने में सफल हो सकता है।</p>
<p>एलएसजी की क्या तैयारी: डीएलबी निदेशक एवं विशिष्ट सचिव जुईकर प्रतीक चन्द्रशेखर ने सभी क्षेत्रीय उपनिदेशकों को पत्र लिखकर योजना के तहत एबीसी केन्द्रों की मैपिंग एवं लक्ष्यों की पूर्ति के लिए दशा-निर्देश दिए हैं। राज्य जीव जन्तु कल्याण बोर्ड के निदेशक डॉ. सुरेश चन्द्र मीणा ने एलएसजी को पत्र लिखकर योजना के सुचारू संचालन एवं अंतर्विभागीय समन्वय के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने का आग्रह किया है। </p>
<p><strong>क्या है एबीसी कार्यक्रम</strong><br />एबीसी (एनिमल बर्थ कंट्रोल) कार्यक्रम श्वानों की नसबंदी और रेबीज नियंत्रण से जुड़ा अभियान है।<br />इसका उद्देश्य आवारा श्वानों की संख्या को वैज्ञानिक तरीके से नियंत्रित करना है।<br />सभी गतिविधियों का रिकॉर्ड एनडीएलएम भारत पशुधन पोर्टल पर दर्ज करना अनिवार्य होगा।<br />समय पर डेटा अपलोड नहीं होने पर राज्य प्रोत्साहन राशि से वंचित हो सकता है।<br />योजना में स्थानीय निकायों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण मानी गई है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 10:56:44 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>दुर्घटनाएं रोकने के कदम उठाने के निर्देश : दैनिक नवज्योति में प्रकाशित समाचारों पर कोर्ट ने संज्ञान लेकर की थी जनहित याचिका दायर</title>
                                    <description><![CDATA[जस्टिस कुलदीप माथुर एवं जस्टिस रवि चिरानिया की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान न्याय मित्र वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. सचिन आचार्य, प्रियंका बोराणा एवं हेली पाठक ने रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए तर्क दिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jodhpur/instructions-to-take-steps-to-stop-accidents-were-filed-by/article-123344"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws-(12)2.png" alt=""></a><br /><p>जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्यभर में आवारा कुत्तों और अन्य पशुओं के बढ़ते खतरे पर स्वत: संज्ञान लेते दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते कई सख्त निर्देश जारी करते राज्य सरकार को 8 सितंबर तक जवाब देने एवं निर्देशों की पालना के लिए आदेश दिया है। आवारा कुत्तों एवं अन्य पशुओं की वजह से होने वाली दुर्घटनाओं को लेकर दैनिक नवज्योति में प्रकाशित समाचारों पर कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दायर की थी। जस्टिस कुलदीप माथुर एवं जस्टिस रवि चिरानिया की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान न्याय मित्र वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. सचिन आचार्य, प्रियंका बोराणा एवं हेली पाठक ने रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए तर्क दिए।</p>
<p>न्यायमित्रों ने तर्क दिया कि शहर की सड़कों, राजमार्गों पर नागरिकों की स्वतंत्र और सुचारू आवाजाही में किसी भी प्रकार की बाधा, असुविधा, व्यवधान या असुविधा न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए वैधानिक दायित्व होने के बावजूद संबंधित अधिकारियों की घोर लापरवाही और कर्तव्यों के पालन न करने के कारण, आवारा पशुओं द्वारा हमले और काटने की घटनाओं में कई गुना वृद्धि हुई है और इससे न केवल राज्य में मानव जीवन को खतरा पैदा हो रहा है। बल्कि राज्य की छवि भी खराब हो रही है। जहां न केवल पूरे देश से, बल्कि दुनिया भर के विभिन्न देशों से भी पर्यटक आते हैं। </p>
<p><strong>राजमार्गों से पशु हटाने के लिए नियमित गश्त हो</strong><br />नगर निगमों से यह भी अपेक्षा करते हैं कि वे एक टेलीफोन,मोबाइल नंबर,ई-मेल आईडी जारी करेंगे जहां उस क्षेत्र के नागरिक, निवासी आवारा पशुओं के संबंध में अपनी शिकायत दर्ज करा सकें। आमजन अपनी भावनाओं या धार्मिक विश्वासों या जानवरों के प्रति प्रेम के चलते उन्हें खाना खिलाना या उनकी देखभाल करना चाहते हैं, तो वे ऐसी गतिविधियां नगर पालिकाओं या निजी व्यक्ति, संगठन द्वारा संचालित कुत्ता आश्रयों और मवेशी तालाबों,गौशालाओं में करेंगे।</p>
<p>नगर निगम, जोधपुर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान जोधपुर और जिला न्यायालय परिसर, जोधपुर के संबंध में तत्काल कदम उठाएगा, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग अपने उपचार कार्य के लिए आते हैं।  एम्स जोधपुर ने 10 अगस्त 2025 को न्यायमित्र अधिवक्ता प्रियंका बोराना को पत्र भेजकर अपने परिसर में आवारा कुत्तों की समस्या और मरीजों एवं स्टाफ पर हमलों की घटनाओं की जानकारी दी थी, जिसे कोर्ट ने संज्ञान में लिया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जोधपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 Aug 2025 13:11:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वार्ड 53- सड़कें और नालियां बनी, पार्कों के हालात नहीं सुधरे</title>
                                    <description><![CDATA[आज भी वार्ड के कई हिस्सों में काम नहीं हुआ है, कही शुरू हुआ तो वहां आधा अधूरा पड़ा हैं। वार्ड की गलियों में साफ सफाई की पर्याप्त व्यवस्था नहीं हैं। नालियां भरी रहती हैं, पानी सड़कों पर फैला रहता हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/ward-53--roads-and-drains-were-built--the-condition-of-parks-did-not-improve/article-35015"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-01/ward-53--sadke-aur-naaliya-bani-parko-k-haalat-nahi-sudhre...kota-news..16.1.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। जहां आज तक सड़क नहीं बनी वहां सड़क बनी, रोड लाइट नई भी लगी और पुरानी को ठीक भी करवाया गया लेकिन क्षेत्र के पार्कों की हालात अभी भी ज्यादा नहीं सुधरे हैं तो कुछ स्थानों पर नालियां आज भी खराब हालात में है। ये स्थिति हैं इस समय कोटा नगर दक्षिण के वार्ड नम्बर 53 की। भले ही इस वार्ड का प्रतिनिधित्व निगम में विपक्ष की पार्टी भाजपा की सदस्य करती है लेकिन वार्ड में हुए विकास कार्य ये कह रहे हैं कि यहां के लोगों को ऐसी कई समस्याओं से छुटकारा मिला है जिनसे वो सालों से परेशान थे। कोटा नगर निगम दक्षिण के वार्ड नम्बर 53 में विधायक कॉलोनी, नाले तक का विश्वकर्मा नगर, रंगबाड़ी योजना सेक्टर 1, 2 और 5 तथा सेक्टर 4 का आंशिक भाग, बालाजी नगर,  कृष्णा नगर तथा हरिओम नगर कच्ची बस्ती आदि इलाकें आते हैं। ये वार्ड भी उन वार्डों में शामिल हैं जिनकी देखरेख का जिम्मा निगम और यूआईटी दोनों संस्थाओं का हैं लेकिन वार्ड के लोग बताते हैं कि उनके यहां निगम की ओर से कोई काम नहीं हुआ हैं जो कुछ भी हुआ है वो यूआईटी की ओर से ही करवाया गया है।</p>
<p>वार्डवासियों का कहना है कि वार्ड पार्षद भाजपा की होने के बावजूद भी वार्ड में विकास के कई कार्य हुए हैं, पार्षद ने यहां के लोगों की सुनती है और जहां तक संभव हो उनकी समस्याओं का समाधान करवाने का प्रयास करती है। कुछ स्थानों के नागरिक बताते हैं कि आज भी वार्ड के कई हिस्सों में काम नहीं हुआ है, कही शुरू हुआ तो वहां आधा अधूरा पड़ा हैं। वार्ड की गलियों में साफ सफाई की पर्याप्त व्यवस्था नहीं हैं। नालियां भरी रहती हैं, पानी सड़कों पर फैला रहता हैं। वार्ड के लोगों ने बताया कि आज भी यहां पर श्वानों और सांडों की समस्या इतनी ज्यादा है कि बच्चे तो बच्चे बड़ों तक संभलकर चलना पड़ता हैं। इन आवारा जानवरों के कारण वाहन चालक टकराते-टकराते बचते हैं। कई बार निगम और यूआईटी, दोनों को इस समस्या के बारे में बताया गया लेकिन समस्या का आज तक समाधान नहीं हुआ हैं। वार्ड की कुछ सड़कों की तो ऐसी सफाई करवाई जाती है कि लगता है हम स्मार्ट सिटी में हैं लेकिन कुछ सड़कों की धूल तक समय पर साफ नहीं होती है। </p>
<p>वार्ड पार्षद इस बारे में कहती है कि उनके वार्ड की लगभग 60 प्रतिशत सड़कें सीसी हो चुकी है। कुछ स्थानों पर तो विधायक मदन दिलावर के कोष से भी विकास कार्य करवाएं हैं। कुछ स्थानों का काम पूरा हो चुका है तो कुछ जगहों पर काम होना बाकी हैं। भाजपा की होने के कारण उनके कोई काम आसानी से नहीं हुए हैं। वार्ड के हर इंसान की बात को सुनती हंू और काम करवाने का प्रयास करती हंू। </p>
<p>पार्षद ने वार्ड में ठीक काम करवा रही है। नालियां नई बनी हैं। रोड लाइट ठीक करवा दी है। पार्षद को कहते ही वो काम करवा देती है। वार्ड में जो समस्याएं बनी हुई थी उनमें से कई का समाधान हो चुका है। समय पर सड़कों पर झाड़ू लगता हैं। अब लोग ही सड़कों पर कचरा फैंककर गंदगी करें तो इसमें निगम और यूआईटी क्या करेगी।<br /><strong>- ओमप्रकाश, वार्डवासी। </strong></p>
<p>वार्ड में विकास कार्य करवाने में पार्षद का शत प्रतिशत प्रयास रहता है। कई स्थानों पर कार्य हो चुके हैं। कुछ पर होने बाकी है। पार्कों की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। फुटपाथ उखड़े हुए हैं, दीवारें टूटी हुई हैं। लेबर टाइम पर आती है लेकिन पर्याप्त नहीं है। मुख्य सड़कों की तो सफाई हो जाती है लेकिन गलियों में नहीं हो रही हैं। <br /><strong>- इन्द्रजीत सिंह राणा, वार्डवासी।   </strong><br />   <br />वार्ड के बालाजी नगर में बीते 15 साल से सड़क नहीं बनी थी। बारिश के दिनों में घुटनों तक पानी भर जाता था लेकिन मैने बनवाई है, चुनाव के दौरान तो मुझे उस स्थान पर जाने तक नहीं दिया गया था लेकिन अब लोग खुश हैं। रोड लाइट लगवाई हैं, चैम्बर लगवाएं हैं। नालियों की हालात सुधार दिए हैं।<br /><strong>- रेखा यादव, वार्ड पार्षद।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Jan 2023 15:24:51 +0530</pubDate>
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