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                <title>next month - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>कोटा : अगले माह से हमारे शहर में दौड़ने लगेंगी ई-बसें</title>
                                    <description><![CDATA[वर्तमान में 34 सिटी बसों में  से फिलहाल करीब 27 बसों का नियमित संचालन हो रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/e-buses-set-to-hit-the-roads-in-our-city-starting-next-month/article-154770"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(4)40.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। देश में एक ओर जहां पेट्रोल -डीजल की किल्लत होने वाली है। वहीं इसे बचाने के प्रयास भी शुरु हो गए हैं। उसी दिशा में कारगर साबित होंगी कोटा में आने वाली ई बसें। कोटा में अगले माह जून तक ई बसों के आने की संभावना है। जिससे वर्तमान में संचालित सिटी बसे बंद हो जाएंगे। ऐसे में हर महीने लाखों रुपए के डीजल की बचत होने लगेगी। कोटा में नगरीय परिवहन सेवा के तहत वर्तमान में 34 सिटी बसें हैं। जिनमें से फिलहाल करीब 27 बसों का नियमित संचालन हो रहा है। स्टेशन से खड़े गणेशजी मंदिर व अन्य स्थानों तक इन बसों के माध्यम से लोगों को सस्ती व सुलभ परिवहन सेवा उपलब्ध हो रही है।नगर निगम अधिकारियों के अनुसार इन बसों के संचालन से वर्तमान में करीब 40 से 50 लाख रुपए महीने के डीजल की खपत हो रही है।</p>
<p><strong>ई बसें आएंगी तो सिटी बसें होंगी बंद</strong><br />निगम अधिकारियों के अनुसार कोटा में प्रधानमंत्री ई बस योजना के तहत 100 बसें आनी हैं। जिनमें 95 तो 9 मीटर वाली हैं और 5 बसें 12 मीटर वाली हैं। ये बसें पूरी तरह से एसी होंगी। शहर में केडीए सीमा तक 20 निर्धारित मार्गों पर इन बसों का संचालन किया जाएगा। प्रति बस प्रति दिन करीब 180 से 200 कि.मी. चलेगी। ई बसों के आने के बाद सिटी बसों का संचालन बंद हो जाएगा। जिससे नगर निगम को तो लाभ नहीं होगा। इसका कारण सिटी बसों में डीजल का खर्चा संवेदक फर्म द्वारा ही वहन किया जा रहा है।</p>
<p><strong>भविष्य में नहीं होगी डीजल की जरूरत</strong><br />नगर निगम के अधिशाषी अभियंता गैराज रविन्द्र सैनी ने बताया कि शुरुआत में 20 से 25 ई बसों के आने की संभावना है। इतनी बसें आने पर सिटी बसों का संचालन बंद नहीं हो पाएगा। ई बसें 20 मार्गों पर चलेंगी। यदि ई बसों की संख्या अधिक होगी तो सिटी बसें बंद हो जाएंगी।<br />सैनी ने बताया कि वर्तमान में सिटी बसों में हर महीने औसत 40 से 50 लाख रुपए के डीजल की खपत हो रही है। ई बसों के आने के बाद इतना डीजल तो बचेगा ही साथ ही भविष्य में बसों में डीजल पेट्रोल की जरूरत नहीं होगी। इससे कोटा के साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर पेट्रोल-डीजल की खपत कम होगी।</p>
<p><strong>इस माह तक पूरा होना है बस स्टॉप का काम</strong><br />नगर निगम कोटा के आयुक्त ओम प्रकाश मेहरा ने बताया कि इस माह के अंत तक सुभाष नगर में ई बस स्टॉप का निर्माण कार्य पूरा होना है। साथ ही बसों के लिए चार्जिंग पॉइंट भी लग जाएंगे। उसके बाद जून के पहले सप्ताह तक ई बसों के आने की संभावना है। बसों के आने के बाद उनका संचालन किया जाएगा। सिटी बसों की तुलना में ई बसें पूरी तरह से एसी होंगी। ऐसे में इनका किराया भी संशोधित करने पर विचार किया जा रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 May 2026 14:32:35 +0530</pubDate>
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                <title>एग्रो कमोडिटी पर कम हो टैक्स का भार</title>
                                    <description><![CDATA[आगामी वित्त वर्ष 2023-24 के लिए अगले महीने फरवरी में बजट पेश किया जाएगा। मंडी व्यापारियों व रोज मर्रा के उपयोग में आने वाली वस्तुओं के व्यापारियों को भी राहत की उम्मीद है। व्यापारियों का कहना है कि जीएसटी व टैक्स को कम किया जाना चाहिए। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/reduce-tax-burden-on-agro-commodities/article-35148"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-01/agro-commodity-par-kum-ho-taz-ka-bhaar...kota-news-18.1.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। आम आदमी के लिए खाने-पीने और रोजमर्रा उपयोग में आने वाली वस्तुओं के दामों में इतनी अधिक बढ़ोतरी हो गई है कि गरीब आदमी के लिए महगाई भारी पड़ रही है। ऐसे में अगले महीने पेश होने वाले बजट से मंडी व्यापारियों व एफएमसीजी ( फास्ट  मूविंग कन्ज्यूमर गुड्स) के व्यापारियों को राहत की उम्मीद है। आगामी वित्त वर्ष 2023-24 के लिए अगले महीने फरवरी में बजट पेश किया जाएगा। राज्य और केन्द्र सरकार द्वारा बजट में कई क्षेत्रों के लिए प्रावधान किए जाएंगे। जिससे हर वर्ग के लोगों को कुछ न कुछ राहत व रियायत की उम्मीद सरकारों से है।  ऐसे में मंडी व्यापारियों व रोज मर्रा के उपयोग में आने वाली वस्तुओं के व्यापारियों को भी राहत की उम्मीद है। व्यापारियों का कहना है कि जीएसटी व टैक्स को कम किया जाना चाहिए। </p>
<p><strong>तेल पर टैक्स हो कम</strong><br />खाद्य तेल आम आदमी की जरूरत की वस्तु है। गरीब से गरीब व्यक्त भी परिवार में इसका उपयोग करता है। तेल के दाम अधिक होने से कोई कम तो कोई अधिक मात्रा में उपयोग करता है। तेल पर साढ़े पांच फीसदी जीएसटी लगाया जा रहा है। जिससे तेल के दाम आसमान छू रहे हैं। हालांकि अन्य वस्तुओं की तुलना में तेल पर टैक्स अपेक्षाकृत कम है। फिर से सरकार को चाहिए कि बजट में तेल पर जितना संभव हो सके टैक्स कम किया जाए। सरकार पर निर्भर करेगा कि बजट में किस तरह के प्रावधान करेगी। व्यापारियों को तो हर बार बजट में राहत की ही उम्मीद रहती है। इस बार भी टैक्स में छूट की ही उम्मीद है। <br /><strong>-दीपक दलाल, व्यापारी</strong></p>
<p><strong>कम हो एग्रो कमोडिटी टैक्स</strong> <br />सरकार को एग्रो कमोडिटी  पर लगने वाले टैक्स को कम करना चाहिए। आॅयल सीड्स व किराने के सामन पर 5 फीसदी जीएसटी लगाया जा रहा है। जिससे महगाई बढ़ रही है। किसानों के साथ ही आमजन को भी महंगाई की मार झेलनी पड़ रही है। टैक्स कम होने से महंगाई कम होगी तो  य्यापारी, किसान व आमजन को भी राहत मिलेगी। कोरोना काल के समय में धान समेत मसालों के निर्यात पर रोक लगा दी गई थी। उसे तो फिर से चालू कर दिया है। निर्यात को बढ़ावा देने के प्रावधान किए जाने चाहिए।  <br /><strong>-महेश खंडेलवाल, व्यापारी, भामाशाह मंडी </strong></p>
<p><strong>सभी सूखे मेवे पर एक समान हो टैक्स का स्लैब</strong><br />सूखा मेवा (ड्राय फूड्स) आम आदमी की जरूरत की वस्तु है। हालांकि वैसे ही ये महंगे होने से  अधिकतर लोग कम मात्रा में और जरूरत होने पर ही इसे खरीद रहे हैÞं। ड्राय फूड्स में भी जीएसटी की स्लैप अलग-अलग है। काजू व 5 फीसदी और बादाम पर 12 फीसदी टैक्स लग रहा है। जिससे इनक दाम बढ़ रहे हैं। ऐसे में सभी ड्राय फूड्स की टैक्स स्लैप एक समान होनीे चाहिए। वहीं पैकिग वाले खाद्य पदार्थ जिनमें मैदा, सूजी, आटा, दाल व चावल समेत सभी खाद्य पदार्थ शामिल हैं उन पर भी 5 फीसद जीएसटी लगाई जा रही है। जबकि पहले नहीं लगती थी। इससे महंगाई बढ़ी है। इसे समाप्त या कम किया जाए। <br /><strong>-राजकुमार जैन, व्यापारी </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Jan 2023 15:15:01 +0530</pubDate>
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