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                <title>परिचर्चा: मेडिकल और इंजीनियरिंग के अलावा और भी हैं राहें-डाटा, एआई और स्किल बेस्ड फील्ड में हैं सैकड़ों कॅरियर ऑप्शंस </title>
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                        <![CDATA[अब सिर्फ मेडिकल-इंजीनियरिंग ही नहीं, बल्कि एआई, डेटा एनालिटिक्स, डिजिटल मार्केटिंग, ग्रीन एनर्जी, रोबोटिक्स, पैरामेडिकल, ईवी, कृषि और खेल जैसे क्षेत्रों में भी करियर के अपार अवसर। युवाओं को स्किल बेस शिक्षा और सही गाइडेंस के साथ नए और उभरते करियर अपनाने चाहिए। स्कूलों से करियर मार्गदर्शन जरूरी।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/discussion--beyond-medicine-and-engineering--there-are-other-paths%E2%80%94hundreds-of-career-options-in-data--ai--and-skill-based-fields/article-144509"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/kota3.png" alt=""></a><br /><p>कोटा।  अधिकतर अभिभावक अपने बच्चों को मेडिकल व इंजीनियरिंग करवाकर डॉक्टर और इंजीनियर बनाना चाहते हैं। उन्हें लगता है कि इसी में सबसे अच्छा करियर है। हालांकि अभी भी कई अभिभावक अपने बच्चों में अपने सपनों को पूरा होता देखना चाहते हैं। लेकिन वर्तमान में जिस तरह से देश व दुनिया में तकनीक का उपयोग अधिक हो रहा है। उसे देखते हुए आने वाले समय में एआई और स्किल बेस फील्ड में करियर के सैकड़ों ऑप्शन हैं। वे भी इतने अधिक कि न तो युवा और न ही उनके पेरेंट्स सोच सकते हैं।</p>
<p>जरूरत है युवाओं को उन करियर ऑप्शंस के बारे में जागरूक करने व जानकारी देने की। ग्रीन एनर्जी,सस्टेनेबल डवलपमेंट, डाटा,साइबर सिक्युरिटी,डिजीटल मार्केटिंग,एनीमेशन,कला वाणिज्य,विज्ञान  सभी क्षेत्रों में पारंपरिक करियर से हटकर करियर के नए अवसर की भरमार आ रही है। ऐसे में अभी से लोगों को बदलते दौर के लिए तैयार होना चाहिए। हम इंजीनियरिंग और मेडिकल में ही करियर ढूंढते हैं लेकिन अब ऐसा नहीं है। नये दौर में नए करियर की भरमार होने वाली है। बस इन करियर के लिए स्किल और जानकारी होना चाहिए।  दैनिक नवज्योति कार्यालय में मंगलवार को आयोजित टॉक शो में कोटा शहर ही नहीं वरन् देश व दुनिया में अपने ज्ञान व कौशल और शिक्षा के साथ तकनीक का उपयोग कर अपना लोहा मनवा रहे हैं। उन सभी ने युवाओं के लिए करियर के इतने अधिक ऑप्शंस की जानकारी दी।</p>
<p><strong>इन क्षेत्रों में हैं भारी अवसर</strong></p>
<p>- एमएचए, एमपीएस, आईएस डीएन व एमएस डब्ल्यू में भी काफी स्पेशलाइज कोर्स।<br />-ईवी इको सिस्टम बिजनेस के क्षेत्र में करियर के अच्छे अवसर। <br />- कृषि क्षेत्र में मार्केटिंग, पैकेजिंग व निर्यात के क्षेत्र।<br />- रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस  करियर के सबसे अच्छे विकल्प बनकर उभरे।<br />- डिजिटल पेमेंट्स, क्रिप्टोकरेंसी और, डेटा एनालिटिक्स, डिजिटल मार्केटिंग सहित इंपोर्ट-एक्सपोर्ट और ग्लोबल लॉजिस्टिक्स।<br />- ओटी डिप्लोमा , एक्सरे डिप्लोमा और ब्लड बैंक हेल्पर जैसे शॉर्ट टर्म पैरामेडिकल कोर्स।<br />- एमएसएमई, ईएसजी व स्टार्टअप पर फोकस, निर्यात का क्षेत्र हो या मार्केटिंग का सभी को सीएस से काम।</p>
<p><strong>स्कूलों से हो कॅरियर गाइडेंस की शुरूआत</strong><br />जिस तरह से देश व दुनिया में एआई और तकनीक का उपयोग हो रहा है। उसमें सूचनाओं व जानकारी के कमी नहीं है। लेकिन जरूरत है बच्चों व युवाओं को सही मार्ग दर्शन की। इसकी शुरूआत स्कूलों से ही की जानी चाहिए। करियर डे साल में एक बार मनाया जाता है। उसकी जगह हर महीने  मनाया जाना चाहिए। बच्चों की योग्यता को पहचानकर उनके हिसाब से ही आगे बढ़ने के अवसर बताए जाएंगे तो वे जीवन में बेहतर करियर बना सकेंगे। ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में भी जॉब व करियर के कई आॅप्शंस हैं। लेकिन अधिकतर को उनकी जानकारी ही नहीं है। स्किल बेस शिक्षा होने पर युवा अच्छे पैकेज की नौकरी पा सकते हैं। <br /><strong>-मनोज कुमार शर्मा,  फाउंडर एन्ड चीफ मेंटोर स्कोलर सिटी</strong></p>
<p><strong>12वीं के बाद भी अपार संभावनाएं</strong><br />कॅरियर में आगे बढने के लिए जरूरी नहीं है कि एमबीबीएस या इंजीनियिरिंग ही की जाए। एमएचए, एमपीएस,आईएसडीएन व एमएस डब्ल्यू में भी काफी स्पेशलाइज कोर्स हैं।  आवश्यकता है उन कोर्स व इंस्टीट्यूट के बारे में जानकारी की। सरकार व कम्पनियों को डिग्री के साथ ही नॉलेज व प्रेक्टीकल जानकारों की जरूरत रहती है। 12 वीं पास करने के बाद भी करियर में  अपार संभावनाएं हैं। अकेले सोशल और  हैल्थ सेक्टर में ही दर्जनों ऐसे कोर्स हैं जिन्हें करने के बाद सौ फीसदी नौकरी की गारंटी रहती है। जितना समय व मेहनत एमबीबीएस करने में लगती है उससे कम समय व मेहनत में उन कोर्स को करके आगे बढ़ा जा सकता है। वह भी बड़ी-बड़ी कम्पनियों में या सरकारी क्षेत्र में। जहां लाखों में नहीं करोड़ों में पैकेज रहते हैं। <br /><strong>-डॉ.नयन प्रकाश गांधी, इंटरनेशनल एनएलपी, लाइफ एन्ड कॅरियर कोच कोटा</strong></p>
<p><strong>डेटा एनालिटिक्स व मार्केटिंग में अवसर</strong><br />अब कॉमर्स का क्षेत्र केवल पारंपरिक बैंकिंग, सीए  या एमबीए तक सीमित नहीं रह गया है। पढ़ाई और करियर दोनों ही स्तरों पर व्यापक परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। आज कॉमर्स के छात्र और प्रोफेशनल्स क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रहे है। जिसमें डिजिटल पेमेंट्स, क्रिप्टोकरेंसी और, डेटा एनालिटिक्स, डिजिटल मार्केटिंग सहित अन्य हैं। आज भारत डिजिटल पेमेंट्स, यूपीआई  और फाइनेंशियल क्रिप्टो के मामले में दुनिया में नंबर 1 स्थान पर है। वर्तमान में डेटा ही सबसे बड़ी शक्ति है और 'डेटा-बेस्ड बिजनेस' सबसे अधिक सफल हो रहे हैं। कंपनियाँ अब ऐसे प्रोफेशनल्स की तलाश में हैं जो न केवल ई-कॉमर्स को समझें, बल्कि एल्गोरिदम के जरिए मार्केट के रुझानों को भी पहचान सकें। आॅनलाइन प्लेटफॉर्म्स के कारण इंपोर्ट-एक्सपोर्ट और ग्लोबल लॉजिस्टिक्स की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। <br /><strong>-डॉ. अनिता माहेश्वरी, असिसटेंट प्रोफेसर गवर्नमेंट कॉमर्स गर्ल्स कॉलेज कोटा</strong></p>
<p><strong>माइंड सेट बदलने की जरूरत</strong><br />आज हमें माइंड सेट बदलने की जरूरत है। भारत में अधिकतर लोग तकनीक में हो रहे बदलाव के साथ खुद को बदलना नहीं चाहते हैं। जबकि वर्तमान के साथ ही आने वाले समय में तकनीक और स्किल बेस शिक्षा काफी महत्वपूर्ण होगी। विदेशों में स्किल बेस शिक्षा पर ही जोर दिया जाता है। यहां माता पिता अपने बच्चों की इच्छा जाने बिना उन पर अपनी मर्जी थोपते हैं। जिससे युवा जिस तरह से सर्वाइव करना चाहिए वह नहीं कर पाते। भारत में एआई को जिस तरह से काम में लिया जा रहा है उसमें मात्र 30 फीसदी ही उसका सदुपयोग कर रहे हैं। जबकि एआई के क्षेत्र को अपनाकर करियर में जॉब के काफी अवसर तलाशे जा सकते हैं।<br /><strong>-वेद तिवारी, यूएस आर्मी से रिटायर्ड,लिविंग होप एनजीओ के फाउंडर</strong></p>
<p><strong>तकनीक में बड़ा परिवर्तन</strong><br />समाज में तकनीक के कारण बड़ा परिवर्तन आ रहा है। कारें और टैक्सियां अब 'ड्राइवरलेस' (स्वचालित) होती जा रही हैं। यह स्पष्ट संकेत है कि समय के साथ निरंतर परिवर्तन ही प्रगति का आधार है। नई शिक्षा नीति का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह विद्यार्थियों को किसी एक दायरे में नहीं बांधती। आने वाले समय में योग और हेल्थ केयर जैसे क्षेत्र सबसे अधिक उभरकर सामने आएंगे, जहाँ कुशल प्रोफेशनल्स की मांग चरम पर होगी। हाल के युद्धों में ड्रोन तकनीक के कमाल ने पूरी दुनिया को अचंभित किया है, जो युद्ध कौशल में तकनीकी श्रेष्ठता को दशार्ता है। यह भविष्य की सुरक्षा और रणनीति की नई दिशा है। जैसे-जैसे तकनीक आगे बढ़ रही है, रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस  करियर के सबसे अच्छे विकल्प बनकर उभरे हैं। जब भी कोई नई स्किल  सामने आती है, तो उसे छात्रों को विस्तार से समझाना और सिखाना चाहिए। <br /><strong>- डॉ.मनीष चतुवेर्दी, चेयरमेन ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट आरटीयू</strong></p>
<p><strong>तकनीकी रूप से ट्रेंड के लिए अधिक अवसर</strong><br />जिस तरह से देश व दुनिया में तकनीकी का उपयोग हो रहा है। सरकार का भी फोकस तकनीक  आधारित जॉब पर है। ऐसी स्थिति में जो युवा समय के साथ तकनीकी रूप से जितना अधिक साउंड है उसके लिए नौकरियों व करियर बनाने के उतने ही अधिक अवसर उपलब्ध हैं। प्राइवेट सेक्टर में जितनी भी बड़ी कम्पनियां हैं उन्हें भी ट्रेंड लोगों की जरूरत होती है। कम्पनियां ट्रेनिंग में समय व्यर्थ नहीं करती। युवाओं को पैकेज की जगह स्किल पर ध्यान देने की जरूरत है। हर एम्पलाई चाहता है कि उसे स्किल का मिडिल मेन मिले। आज तक आयुर्वेद के डाक्टर विदेशों में प्रेक्टिस नहीं कर पाते थे। अब आयुर्वेद डाक्टर भी विदेशों में काम कर सकते हैं। बस कुछ शौध की जरूरत है।  संभावनाएं अपार सामने आ रही हैं। बस आपको अपनी स्किल को लगातार आगे बढ़ाना है।  <br /><strong>- विकास आसावत, पैटेंट एंड ट्रेडमार्क अटार्नी</strong></p>
<p><strong>हर फील्ड में कम्पनी सैकेट्री की जरूरत</strong><br />केवल मेडिकल व इंजीनियरिंग में ही करियर नहीं है। इसके अलावा भी सैकड़ों ऐसे फील्ड हैं। जिनमें युवा चरम पर पहुंच सकते हैं। वैसे हर फील्ड में कम्पनी सैकेट्री की जरूरत होती है। जिस तरह से सरकार का एमएसएमई, ईएसजी व स्टार्टअप पर फोकस है। ऐसे में इन क्षेत्रों को आगे बढ़ाने व उनके काम को मैनेज करने में भी सीएस का काफी महत्वपूर्ण योगदान होता है। निर्यात का क्षेत्र हो या मार्केटिंग का सभी को सीएस से काम करवाना होता है। जरूरत है जानकारी और मैनेजमेंट सिस्टम को अपनाने की। <br /><strong>-सीएस कमल सोनी, कंपनी सैकेट्री चैप्टर के चैयरमेन, सीईओ एंड काउंसलर</strong></p>
<p><strong>नया करने वाले युवाओं को प्रोत्साहित करने की जरूरत</strong><br />हमारे समाज में आज भी पुरानी शिक्षा पद्धति को अत्यधिक महत्व दिया जाता है, जिसके कारण लीक से हटकर कुछ नया करने वाले युवाओं को प्रोत्साहित करने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। हालांकि, बदलते समय के साथ अब कैरियर का दायरा बहुत व्यापक हो चुका है। अब पारंपरिक डिग्री के अलावा बीए+एलएलबी और बीएससी+एलएलबी जैसे ड्यूअल डिग्री कोर्सेज में अपार संभावनाएं हैं। ये एकीकृत पाठ्यक्रम न केवल समय बचाते हैं बल्कि छात्रों को दो विषयों की विशेषज्ञता भी प्रदान करते हैं। इसके साथ ही, दूरस्थ शिक्षा भी आज के दौर में कैरियर बनाने का एक सशक्त माध्यम बन चुकी है। वर्तमान में मेडिकल फील्ड सबसे तेजी से उभरता हुआ क्षेत्र है। अब केवल डॉक्टर बनना ही एकमात्र विकल्प नहीं है।  विद्यार्थी ओटी डिप्लोमा , एक्सरे डिप्लोमा और ब्लड बैंक हेल्पर जैसे शॉर्ट टर्म पैरामेडिकल कोर्स करके भी सम्मानजनक रोजगार प्राप्त कर सकते हैं। जरूरत सिर्फ सही समय पर सही कौशल को पहचानने और उसे अपनाने की है।<br /><strong>-भुवनेश गुप्ता, कॅरियर काउंसलर, डायरेक्टर लायन्स क्लब कोटा टेक्नोह्ण</strong></p>
<p><strong>डेटा एक बहुमूल्य संपत्ति </strong><br />डार्विन ने सिखाया था कि केवल वही प्रजाति जीवित रहती है जो समय के साथ खुद को बदलती है। आज की तेजी से बदलती तकनीक भी हमसे यही मांग कर रही है कि हम स्वयं को अपडेट करें और नई परिस्थितियों के अनुसार ढालें।  आज के दौर में डेटा केवल सूचना मात्र नहीं है, बल्कि यह एक बहुमूल्य संपत्ति बन चुका है।  भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए अब एक नया मंत्र अपनाना अनिवार्य है: 'लर्न (सीखना), ई-लर्न (डिजिटल माध्यम से सीखना) और री-लर्न (पुराने को छोड़कर नया सीखना)'। बदलते परिवेश में केवल एक बार डिग्री हासिल कर लेना काफी नहीं है। अब निरंतर सीखने की प्रक्रिया ही आपको प्रासंगिक बनाए रख सकती है।  जब तक आप खुद को तकनीक और बाजार की मांग के अनुरूप अपडेट करते रहेंगे, तब तक आपके पास रोजगार के बेहतरीन अवसर बने रहेंगे। <br /><strong>-डॉ. हरिश शर्मा, एसोसिएट प्रोफेसर आरटीयू, कोटा </strong></p>
<p><strong>ईवी के क्षेत्र में अच्छा करियर है</strong><br />जिस तरह से सरकार प्रदूषण को कम करने व फ्यूल का कम से कम उपयोग करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। उसके लिए ईवी सेक्टर पर अधिक फोकस किया जा रहा है। आने वाले समय में अधिकतर वाहन ईवी से चलेंगे। ऐसे में इस क्षेत्र में ईवी इको सिस्टम बिजनेस के क्षेत्र में करियर के अच्छे अवसर हैं। लेकिन अभी सरकार के स्तर पर इसके लिए इंफ्रास् ट्रक्चर उस स्तर का नहीं है। विशेष रूप से चार्जिंग फील्ड में। यदि युवा ईवी आधारित कोर्स या उस फील्ड को अपनाते हैं तो उनके लिए करियर में आगे बढने के काफी अवसर हैं। डिजिटल मार्केटिंग व एआई का उपयोग कर युवा अपना बेहतर करियर बना सकते हैं। <br /><strong>-नीरज शर्मा, सीईओ एन्ड काउंसलर फार्मस कार्ट</strong></p>
<p><strong>कृषि में क्वांटिटी की नहीं क्वालिटी की जरूरत</strong><br />इंसान तभी अच्छा काम कर पाएगा जब उसे भरपेट व पौष्टिक भोजन मिलेगा। पहले जहां आॅर्गनिक खेती होने से भोजन में सभी पोषक तत्व मिल जाते थे। वहीं एक बार में अधिक फसल लेने के लिए यूरिया व कैमिकल का उपयोग होने लगा। जिससे क् वांटिटी तो बढ़ गई लेकिन क् वालिटी बिगड़ गई। कृषि क्षेत्र में मार्केटिंग, पैकेजिंग व निर्यात के क्षेत्र में काफी  अवसर हैं लेकिन उसके लिए क्वा लिटी की जरूरत है। विदेशों में क् वालिटी  पर अधिक ध्यान दिया जाता है। खेती में यूरिया या कैमिकल का उपयोग नहीं कर आॅर्गनिक खेती करने की जरूरत है।   <br /><strong>-बृजराज गौड़ आॅर्गेनिक फार्मर</strong></p>
<p><strong>खेलों में भी नौकरी के अवसर</strong><br />केवल पढ़ाई से ही नौकरी नहीं मिल सकती। लेकिन पढ़ाई के साथ यदि युवा अच्छा खिलाड़ी है तो उसे नौकरी के अधिक अवसर हैं। इस तरह के कई कोर्स व डिप्लोमा व डिग्री हैं जिनके आधार पर सरकारी नौकरी में पीटीआई या कोच बन सकते हैं। खेल के साथ पढ़ाई भी जरूरी है। बड़ी-बड़ी कम्पनियों में अच्छे खिलाडियोंं को नौकरी पर रखा जाता है। उन्हें अच्छी सैलरी मिलती है। लेकिन खिलाडियों को अच्छे खेल मैदान देने व कोचिंग की जरूरत है। <br /><strong>-मधु विश्नोई फुटबॉल कोच कोटा</strong></p>
<p><strong>तकनीक का  विस्तार भविष्य की नींव </strong><br />आज के तकनीकी युग में डेटा विशेषज्ञ और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसे विषयों पर तेजी से काम हो रहा है। तकनीक का यह विस्तार भविष्य की नींव है, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण चुनौती यह है कि इन आधुनिक विकल्पों की पहुंच और जानकारी हर बच्चे तक, विशेषकर ग्रामीण और सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों तक सुलभ हो।  इन कोर्सेज की सफलता केवल कागजों पर नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के कौशल में दिखनी चाहिए। स्कूलों में प्रशिक्षित प्रशिक्षकों की संख्या बढ़ानी होगी और आधुनिक संसाधनों व लैब की उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी। जब तक विद्यार्थियों को आधुनिक मशीनों और सॉफ्टवेयर पर काम करने का अवसर नहीं मिलेगा, तब तक वे वैश्विक बाजार के लिए तैयार नहीं हो पाएंगे।<br /><strong>-आभा शर्मा, रिॅटायर्ड प्रिंसिपल कोटा</strong></p>]]>
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                <pubDate>Wed, 25 Feb 2026 13:21:44 +0530</pubDate>
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                <title>आठ हजार बेटियों को नहीं मिली साइकिल, सत्र खत्म होने में 3 माह बाकी</title>
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                        <![CDATA[बालिका शिक्षा को प्रोत्साहन करने के लिए सरकार की ओर से राजकीय विद्यालय में अध्ययनरत कक्षा 9वीं की बालिकाओं को हर साल नि:शुल्क साइकिल वितरित की जाती है। कोरोनाकाल के बाद से ही योजनाओं की क्रियांविति डगमगा गई। ऐसे में उन्हें समय पर साइकिलें नहीं मिलने से पैदल ही घर से स्कूल जाना पड़ रहा है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/eight-thousand-daughters-did-not-get-cycles--3-months-left-for-the-session-to-end/article-35562"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-01/01+.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। सरकार भले ही बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने का दावा करती हो लेकिन जिले में हालात इसके उलट हैं। बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सरकार कई योजना संचालित कर रही है। मगर नि:शुल्क साइकिल वितरण योजना महज खानापूर्ति साबित हो रही है। जिले की 8 हजार से अधिक बेटियों को अब तक साइकिलें नहीं मिली हैं। जबकि, सरकारी स्कूलों का शैक्षणिक सत्र 3 माह बाद खत्म हो जाएगा। उन्हें यह साइकिल दीपावली के आसपास अक्टूबर माह में वितरित की जानी थी। लेकिन, कोरोनाकाल के बाद से ही योजनाओं की क्रियांविति डगमगा गई। ऐसे में उन्हें समय पर साइकिलें नहीं मिलने से पैदल ही घर से स्कूल जाना पड़ रहा है। दरअसल, बालिका शिक्षा को प्रोत्साहन करने के लिए सरकार की ओर से राजकीय विद्यालय में अध्ययनरत कक्षा 9वीं की बालिकाओं को हर साल नि:शुल्क साइकिल वितरित की जाती है। ताकि, वे साइकिल से स्कूल समय पर पहुंच सके। </p>
<p><strong>यह था साइकिल वितरण का उद्देश्य</strong><br />साइकिल वितरण योजना की शुरूआत वर्ष 2007-08 में हुई थी। योजना के तहत 8वीं पास कर 9वीं कक्षा में प्रवेश पाने वाली बालिकाओं को सरकार की ओर से नि:शुल्क साइकिलें वितरित की जाती है। इसका उद्देश्य स्कूल और घर की दूरी अधिक होने के चलते बालिकाएं स्कूल नहीं जाती पाती हैं। ऐसी बालिकाओं को सुगम आवागमन के लिए साइकिल उपलब्ध कराई जाती है।</p>
<p><strong>साइकिल मिले तो समय पर पहुंचे स्कूल और घर</strong><br />कक्षा 9 में पढ़ने वाली छात्रा प्रियंका का कहना है वह विद्यालय से करीब 1 किलोमीटर दूर  संजय नगर रहतीं हैं और विज्ञान नगर स्थित गर्ल्स स्कूल में पढ़ती हैं। जब मैं आठवीं में थी तब इस बात की खुशी थी कि 9वीं क्लास में जाएंगे तो साइकिल मिलेगी और साइकिल से स्कूल जाया करेंगे लेकिन सत्र खत्म होने को है अभी तक कुछ भी नहीं मिला। साइकिल मिलेगी या नहीं कुछ नहीं कह सकते।</p>
<p><strong>दीपावली पर मिलती तो दोगुनी हो जाती खुशी</strong>  <br />पल्लवी शर्मा ने बताया कि करीब 800 मीटर दूर से प्रतिदिन पैदल ही विद्यालय आते हैं। आठवीं का रिजल्ट आया था तभी हमने सोच लिया था कि अब हमें साइकिल मिलेगी और साइकिल से ही विद्यालय जाएंगे। गत वर्ष दीपावली तक साइकिल मिलने का बेसब्री से इंतजार था। लेकिन, त्योहार भी सुखा ही निकल गया। अब साइकिल मिलने की उम्मीद कम होने लगी है। अगर हमें साइकिल मिल जाए तो समय पर विद्यालय व घर पहुंच सकते हैं।  </p>
<p><strong>आठ हजार बालिकाओं को साइकिल का इंतजार</strong><br />कोटा जिले के राजकीय विद्यालयों में कक्षा 9वीं में कुल 8 हजार 353 छात्राएं हैं। जिन्हें योजना के तहत नि:शुल्क साइकिल दी जानी है। लेकिन 8 माह गुजर जाने के बाद भी उन्हें साइकिल नहीं मिली हैं। ऐसे में उन्हें घर से स्कूल आने-जाने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। खास बात यह है कि विभाग द्वारा हर साल सितंबर माह में 9वीं में अध्यनरत बालिकाओं के नामांकन की सूचना जिलावार मांग ली जाती थी। लेकिन, इस बार अक्टूबर माह गुजर जाने के बाद भी सूचना तक नहीं मांगी है। हैरानी की बात यह है कि विभाग के अधिकारियों से इस मामले में बात की जाती है तो उनके पास भी कोई जानकारी नहीं है कि बेटियों को कब तक साइकिलों का वितरण किया जाएगा।</p>
<p><strong>कब मिलेगी साइकिलें, विभाग को भी नहीं पता</strong><br />इस साल शैक्षणिक सत्र शुरू हुए करीब 8 माह बीत गए हैं। फिर भी दूर-दराज से स्कूल आने वाली जिले की 8 हजार से ज्यादा छात्राओं को अब तक साइकिल का इंतजार है। स्थिति ये है कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूल दूर होने से छात्राएं पैदल आने को मजबूर है। वहीं शिक्षा विभाग के अधिकारी भी इस बारे में कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे रहे हैं। ऐसे में बेटियों को साइकिलों का वितरण कब तक होगा यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा। इधर, कोरोना काल के पहले सत्र में बालिकाओं को साइकिलें नहीं मिली थी लेकिन दूसरे सत्र 2021-22 में दोनों सत्रों की छात्राओं को एक साल साइकिलें वितरित की गई थी। </p>
<p>बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से हर वर्ष कक्षा 9वीं की छात्राओं को नि:शुल्क साइकिलें दी जाती है। इस बार भी मिलेगी लेकिन कब, इस संबंध में अभी तक निदेशालय से कोई सूचना नहीं मिली है। उच्चाधिकारियों से जो निर्देश मिलेंगे उसी के अनुसार काम किया जाएगा। वक्त लग सकता है लेकिन साइकिलें जरूर मिलेंगी। <br /><strong>-राजेश कुमार मीणा, अतिरिक्त जिला शिक्षाधिकारी कोटा</strong></p>]]>
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                <pubDate>Mon, 23 Jan 2023 15:28:21 +0530</pubDate>
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