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                <title>pollution control - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>pollution control RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>दिल्ली सीएम रेखा गुप्ता ने किया नए वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्र और वायु रक्षक वाहनों का शुभारंभ, कहा-राजधानी में प्रदूषण नियंत्रण सर्वोच्चा प्राथमिकता</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने छह नए वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्र और 35 वायु रक्षक वाहन लॉन्च किए, प्रदूषण नियंत्रण को राजधानी की सर्वोच्च प्राथमिकता बताया। सरकार प्रतिबद्ध है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/delhi-cm-rekha-gupta-inaugurated-new-air-quality-monitoring-center/article-142469"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(16)2.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने छह नए वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों और 35 वायु रक्षक वाहनों का लोकार्पण किया है। मुख्यमंत्री ने सोमवार को मीडिया से बात करते हुए कहा कि उनकी सरकार ने एक साल का कार्यकाल पूरा कर लिया है और उनकी राजधानी में प्रदूषण नियंत्रण को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान की है।</p>
<p>उन्होंने दिल्ली सचिवालय में कहा कि पर्यावरण विभाग द्वारा स्थापित किए गए छह नए वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्र मौजूदा कमियों को दूर करने और पूरे शहर में वायु गुणवत्ता की बेहतर निगरानी करने में मदद करेंगे।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने जानकारी देते हुए कहा कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों की संख्या 40 से बढ़ाकर 46 हो गई है और आने वाले दिनों में 14 और केंद्र स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि सरकार राजधानी में प्रदूषण को कम करने एवं वायु गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए चौबीसों घंटे और 365 दिन काम कर रही है।</p>
<p>इस कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री और पर्यावरण मंत्री ने 35 वायु रक्षक वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इन वाहनों को दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) के 100 इंजीनियरों की एक टीम संचालित करेगी।</p>
<p>अधिकारियों ने कहा कि वायु रक्षक वाहन दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में संचालित होंगे और प्रदूषण नियंत्रण मानदंडों का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों और प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Feb 2026 15:50:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>दिल्ली सीएम रेखा गुप्ता ने कहा, प्रदूषण और जाम की समस्या के समाधान के लिए ठोस कदम उठा रही है सरकार </title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि डीयूएमटीए के गठन से सार्वजनिक परिवहन मजबूत होगा, अंतिम छोर कनेक्टिविटी सुधरेगी और निजी वाहनों पर निर्भरता घटने से जाम व प्रदूषण कम होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/delhi-cm-rekha-gupta-said-that-the-government-is-taking/article-142195"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(13)5.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आज कहा कि दिल्ली यूनिफाइड मेट्रोपॉलिटन ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (डीयूएमटीए) सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने, अंतिम बिंदु तक संपर्क सुविधा सुधारने और निजी वाहनों पर निर्भरता कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगा जिससे सड़कों पर जाम में कमी आएगी।</p>
<p>दिल्ली सरकार ने दिल्ली यूनिफाइड मेट्रोपॉलिटन ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (डीयूएमटीए) तथा एक समर्पित दिल्ली अर्बन ट्रांसपोर्ट फंड (डीयूटीएएफ) के गठन हेतु एक व्यापक विधेयक का मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। प्रस्तावित कानून का उद्देश्य दिल्ली की वर्तमान में खंडित परिवहन व्यवस्था को एकीकृत, सुसंगत और समन्वित योजना एवं शासन ढांचे के अंतर्गत लाना है, ताकि राजधानी के लिए एक आधुनिक, कुशल, जन-केंद्रित और पर्यावरण की दृष्टि से सतत परिवहन प्रणाली विकसित की जा सके। यह पहल दिल्ली के शहरी परिवहन शासन में एक महत्वपूर्ण संस्थागत सुधार की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होगी। प्रस्तावित कानून के शीघ्र और समावेशी मसौदे को सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय टास्क फोर्स का गठन किया है। टास्क फोर्स को निर्देश दिए गए हैं कि वह निर्धारित समय-सीमा में विधेयक का मसौदा तैयार कर प्रस्तुत करे, जिससे सरकार की सुधारोन्मुख प्रतिबद्धता और तत्परता स्पष्ट होती है।</p>
<p>उन्होंने कहा, डीयूएमटीए दिल्ली की संपूर्ण शहरी गतिशीलता प्रणाली में समन्वय स्थापित करेगा। मेट्रो, बस, क्षेत्रीय रेल, रेलवे और फीडर सेवाओं जैसे सभी परिवहन साधनों को एकीकृत योजना क्षेत्राधिकार के अंतर्गत लाकर हम यह सुनिश्चित करेंगे कि परिवहन समाधान कुशल, समावेशी और नागरिक केंद्रित हों।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि डीयूएमटीए सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने, अंतिम बिंदु तक संपर्क सुविधा को सुधारने और निजी वाहनों पर निर्भरता कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, जिससे सड़कों पर जाम में कमी आएगी। उन्होंने रेखांकित किया कि यह पहल वायु प्रदूषण से निपटने की सरकार की दीर्घकालिक रणनीति का एक अहम अंग है। वाहन उत्सर्जन प्रदूषण का एक प्रमुख स्थानीय स्रोत है और सुव्यवस्थित तथा विश्वसनीय सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क का विस्तार पर्यावरणीय लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए अनिवार्य है।</p>
<p>उन्होंने कहा, हमारी सरकार प्रदूषण से निपटने के लिए अल्प कालिक, मध्यम कालिक और दीर्घ कालिक समाधानों पर एक साथ काम कर रही है। यह समस्या पिछले वर्षों में संरचनात्मक सुधारों के अभाव में और गंभीर हुई है। डीयूएमटीए की स्थापना निजी वाहनों पर निर्भरता घटाने और दिल्ली के प्रत्येक नागरिक को स्वच्छ, सुरक्षित और कुशल गतिशीलता उपलब्ध कराने के लिए सबसे महत्वपूर्ण दीर्घकालिक हस्तक्षेपों में से एक होगी।</p>
<p>राष्ट्रीय शहरी परिवहन नीति के तहत बड़े शहरों में एकीकृत महानगरीय परिवहन प्राधिकरण (यूएमटीए) की परिकल्पना की गई है, ताकि शहरी परिवहन की रणनीतिक योजना और समन्वित क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके। दिल्ली एनसीआर में बढ़ती जनसंख्या, प्रदूषण, सड़कों पर दबाव और सुव्यवस्थित सार्वजनिक परिवहन की बढ़ती आवश्यकता  डीयूएमटीए की स्थापना को अत्यंत आवश्यक बनाती है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Feb 2026 18:16:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पीएम मोदी ने कहा, 'समुद्र प्रताप' से रक्षा क्षेत्र में आत्मनिभर्रता की दिशा में छलांग के साथ-साथ देश की सुरक्षा व्यवस्था को मिली मजबूती</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री मोदी ने आईसीजीएस 'समुद्र प्रताप' के बेड़े में शामिल होने को समुद्री सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में मील का पत्थर बताया। यह आधुनिक पोत प्रदूषण नियंत्रण और तटीय निगरानी को सशक्त करेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/pm-modi-said-that-along-with-the-leap-towards-self-reliance/article-138738"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/modi.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय तटरक्षक पोत (आईसीजीएस)'समुद्र प्रताप' को बल के बेड़े में शामिल किये जाने को भारत के समुद्री सफऱ में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा है कि इससे समुद्री क्षमताओं के क्षेत्र में देश का आत्मनिर्भरता का विजन और मजबूत हुआ है। पीएम मोदी ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के सोशल मीडिया पोस्ट पर प्रतिक्रिया करते हुए कहा है कि इससे देश की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूती मिलती है। </p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, इस पोत के बल के बेड़े में शामिल होना रक्षा और समुद्री क्षमताओं के क्षेत्र में देश के आत्मनिर्भर भारत के विजन को और सुदृढ़ करता है। उन्होंने कहा कि इससे देश की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूती मिलती है, तटीय निगरानी सशक्त होती है और भारत के व्यापक समुद्री हितों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है। साथ ही, इसमें पर्यावरण-अनुकूल संचालन सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक प्रौद्योगिकियों के समावेशन से स्थायित्व के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता भी परिलक्षित होती है।</p>
<p>पीएम मोदी ने कहा, भारतीय तटरक्षक पोत (आईसीजीएस)'समुद्र प्रताप' की कमीशनिंग हमारे आत्मनिर्भरता के दृष्टिकोण को मजबूती देने, हमारी सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने और स्थायित्व के प्रति हमारी वचनबद्धता को प्रतिबिंबित करने आदि सहित अनेक कारणों से उल्लेखनीय है। उल्लेखनीय है कि, रक्षा मंत्री ने हाल ही में एक कार्यक्रम में प्रदूषण नियंत्रण समुद्री पोत को राष्ट्र को समर्पित किया था। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 07 Jan 2026 19:06:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दिल्ली ईवी पॉलिसी 2.0: पुरानी कार को इलेक्ट्रिक में कन्वर्ट करवाने पर दिल्ली सरकार देगी 50,000 रुपए, जानें योजना लागू होने किसे मिलेगा इसका लाभ</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली सरकार पुरानी पेट्रोल-डीजल कारों को इलेक्ट्रिक (रेट्रोफिटिंग) कराने पर ₹50,000 की प्रोत्साहन राशि देगी। इसका उद्देश्य प्रदूषण कम करना और 10-15 साल पुराने वाहनों को स्क्रैप होने से बचाना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/delhi-government-will-give-rs-50000-for-converting-an-old/article-138524"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/delhi-ev.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। देश की राजधानी में बढ़ते वायु प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली सरकार नित नए कदम उठा रही है। अब एक और बड़ी तैयारी हो रही है। खबर है कि, नई इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी के ड्राफ्ट के तहत पुराने पेट्रोल और डीजल कारों को इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने यानी रेट्रोफिट कराने पर प्रोत्साहन देने की योजना बनाई जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यदि पुराने वाहन मालिक अपने गाड़ियों को इलेक्ट्रिक में कन्वर्ट कराते हैं तो उन्हें इसके लिए सरकार की तरफ इंसेंटिव मिलेगा। इससे लोगों को अपनी पुरानी गाड़ियों को स्क्रैप करने के बजाय इलेक्ट्रिक वाहन में बदलने के लिए प्रेरित किया जाएगा।</p>
<p><strong>50,000 रुपए की प्रोत्साहन राशि</strong></p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली सरकार पहली 1,000 पुरानी कारों को इलेक्ट्रिक में बदलने पर 50,000 रुपए की प्रोत्साहन राशि देने पर विचार कर रही है। यह प्रस्ताव इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी 2.0 के ड्राफ्ट में शामिल किया गया है। इसका मकसद नई इलेक्ट्रिक व्हीकल खरीदने के साथ-साथ पुराने वाहनों के इलेक्ट्रिक कन्वर्जन को भी बढ़ावा देना है।</p>
<p><strong>दिल्ली में पुराने वाहनों पर सख्त नियम</strong></p>
<p>दिल्ली में 15 साल से पुराने पेट्रोल और 10 साल से पुराने डीजल वाहनों पर प्रतिबंध है। यह नियम एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत लागू हैं ताकि वाहन प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सके। नियम तोड़ने पर चालान, वाहन को सीज करना और केवल अधिकृत स्क्रैपिंग या एनओसी के जरिए बाहर भेजने का विकल्प मिलता है।</p>
<p><strong>ईवी पॉलिसी 2.0 के अन्य प्रस्ताव</strong></p>
<p>ड्राफ्ट ईवी पॉलिसी 2.0 में स्क्रैपिंग के बाद नई इलेक्ट्रिक व्हीकल खरीद पर प्रोत्साहन देने का भी सुझाव है। इसके अलावा रिसर्च और डेवलपमेंट फंड को 5 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 100 करोड़ रुपये करने, बैटरी और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने जैसे सुझाव दिए गए हैं। इसके अलावा स्वैपिंग स्टेशनों पर ज्यादा सब्सिडी और ई-रिक्शा व ई-कार्ट के लिए सेफ्टी रेटिंग जैसे प्रस्ताव शामिल किए गए हैं।</p>
<p>रिपोर्ट में एक पूर्व अधिकारी के हवाले से गया है कि,रेट्रोफिटिंग उन गाड़ियों के लिए ज्यादा बेहतर होगा जिनका इस्तेमाल सीमित होता है। इसकी कन्वर्जन की सफलता वाहन के मॉडल, इलेक्ट्रिक किट की कम्पैटिबिलिटी और गियरबॉक्स कंपोनेंट्स इत्यादि पर निर्भर करती है। हालांकि यह कह पाना थोड़ा मुश्किल है कि, सरकार की ये नई प्लॉनिंग कितनी कारगर साबित होगी, क्योंकि यदि इस नए नियम को लागू किया जाता है तो भी शुरूआत में केवल 1,000 वाहनों के लिए ही ये सुविधा उपलब्ध होगी।</p>
<p><strong>क्या होता है रेट्रोफिटिंग</strong></p>
<p>रेट्रोफिटिंग एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें पेट्रोल या डीजल इंजन को हटाकर इलेक्ट्रिक मोटर, बैटरी और इससे संबंधित कंपोनेंट्स लगाए जाते हैं। जिससे कोई भी रेगुलर वाहन ईवी में कन्वर्ट हो जाती है। हालांकि ये प्रक्रिया महंगी है, लेकिन सरकार द्वारा मिलने वाली प्रोत्साहन राशि से आम लोगों को काफी मदद मिलने की उम्मीद है। पहले भी इस योजना को बढ़ावा देने की कोशिश की गई थी, लेकिन ज्यादा लागत के कारण लोगों की रुचि कम रही। अधिकारियों का कहना है कि प्रस्तावित सब्सिडी से यह प्रक्रिया किफायती बनेगी और लोग अपनी गाड़ियों का दोबारा उपयोग कर सकेंगे।</p>
<p>रिपोर्ट में सरकारी अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि, यह योजना खासतौर पर प्रीमियम और लग्जरी कार मालिकों को आकर्षित कर सकती है। 50 लाख या उससे ज्यादा कीमत की गाड़ियों को स्क्रैप करने पर बहुत कम कीमत मिलती है, जिससे मालिक हिचकते हैं। रेट्रोफिटिंग के जरिए वे अपनी महंगी गाड़ियों को भी इलेक्ट्रिक कारों में कन्वर्ट करा सकेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 06 Jan 2026 11:36:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विश्वकर्मा इंडस्ट्रीज एसोसियेशन भवन में राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण विभाग संवाद कार्यक्रम</title>
                                    <description><![CDATA[संवाद का उद्देश्य विभाग से संबंधित नवीनतम जानकारियों को साझा करना और उद्योगपतियों की समस्याओं का समाधान करना था।

]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/rajasthan-pollution-control-department-dialogue-program-at-vishwakarma-industries-association/article-98120"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/5554-(6)6.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। विश्वकर्मा इंडस्ट्रीज एसोसियेशन भवन में राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण विभाग के साथ दो दिवसीय संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। संवाद का उद्देश्य विभाग से संबंधित नवीनतम जानकारियों को साझा करना और उद्योगपतियों की समस्याओं का समाधान करना था। कार्यक्रम का शुभारंभ एसोसियेशन के अध्यक्ष  जगदीश सोमानी और महासचिव पुष्प कुमार स्वामी द्वारा अधिकारियों के स्वागत के साथ हुआ। मंच का संचालन राजस्थान चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के महासचिव और रीको कमेटी के चेयरमैन डॉ. अरुण अग्रवाल ने किया, उन्होंने कहा,"यह संवाद कार्यक्रम उद्योगपतियों को नवीनतम परिवर्तनों और उनके प्रभाव को समझने में मदद करेगा"।</p>
<p><strong>प्रदूषण नियंत्रण विभाग से नवीनतम जानकारी :</strong></p>
<p>राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अधिकारियों, रीजनल मैनेजर (उत्तर) विजय शर्मा,  शिव कुमार, और  अभिषेक ने प्रोजेक्टर के माध्यम से प्रतिभागियों को पहली बार रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया, कानूनी प्रावधान, और तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी। ऑन-स्पॉट रजिस्ट्रेशन फॉर्म भरवाने की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई।</p>
<p>अध्यक्ष जगदीश सोमानी ने कहा, "संस्था का लक्ष्य उद्यमियों को प्रदूषण नियंत्रण विभाग की सुविधाओं से जोड़ना और जागरूकता फैलाना है । इस प्रकार के संवाद सत्र नियमित रूप से आयोजित होने चाहिए"।</p>
<p><strong>व्यापारियों की समस्याओं का समाधान :</strong></p>
<p>महासचिव पुष्प कुमार स्वामी ने  बताया कि इस कार्यक्रम से व्यापारियों को विभाग से संबंधित समस्याओं को समझने और उनका समाधान पाने में मदद मिली। उन्होंने कहा, "यह संवाद कार्यक्रम व्यापार और व्यवसाय को सशक्त बनाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है"।</p>
<p><strong>विशेषज्ञों और उद्योगपतियों की भागीदारी :</strong></p>
<p>संवाद कार्यक्रम में विश्वकर्मा इंडस्ट्रीज एसोसियेशन के पदाधिकारी, कार्यकारिणी सदस्य, और बड़ी संख्या में उद्योगपति उपस्थित रहे। यह आयोजन व्यवसायियों के लिए उपयोगी जानकारी और समाधान प्रदान करने में सफल रहा।</p>
<p>दो दिवसीय संवाद कार्यक्रम ने व्यापार और प्रदूषण नियंत्रण विभाग के बीच संवाद की नई राहें खोलीं, जिससे उद्योग जगत को न केवल जानकारी बल्कि समस्याओं का त्वरित समाधान भी प्राप्त हुआ।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Dec 2024 17:20:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>इंटरलॉकिंग व ग्रीन बेल्ट से प्रदूषण में कमी का कर रहे प्रयास</title>
                                    <description><![CDATA[जिनके माध्यम से शहर के अलग-अलग हिस्सों में पानी का छिड़काव कराया जा रहा है। जिससे हवा में उड़ने वाले धूल के कणों को कम करने का प्रयास किया जा रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/efforts-are-being-made-to-reduce-pollution-through-interlocking-and-green-belt/article-49773"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/630-400-size-(5)18.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए किए जा रहे प्रयासों के तहत अधिकतर मुख्य मार्गों पर सड़क किनारे इंटरलॉकिंग की जाने लगी है। साथ ही ग्रीन बेल्ट बनाई जा रही हैं। शहर के अधिकतर मुख्य मार्गों पर सड़क किनारे ब्लॉक से बनी इंटरलॉकिंग देखी जा सकती है। सीसी रोड हो या डामर रोड। बीच में तो इस तरह की सड़क है। उसके दोनों तरफ शेष रहे कच्चे हिस्से में इंटरलोकिंग की जा रही है। नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण की ओर से इस तरह की इंटरलोकिंग की जा रही है।  डीसीएम रोड हो या भदाना रोड। समेत कई जगहों पर इंटर लोकिंग व ग्रीन बेल्ट नजर आ जाएंगी। </p>
<p><strong>प्रदूषण नियंत्रण मंडल के बजट से हो रहा काम</strong><br />शहर में बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने नगर निगम को बजट आवंटित किया है। जानकारी के अनुसार 15 वें वित्त आयोग के तहत मंडल ने नगर निगम कोटा उत्तर व कोटा दक्षिण को 54-54 करोड़ रुपए दो -दो किश्तों में दिए हैं। उसके तहत ही प्रदूषण नियंत्रण के काम किए जा रहे हैं।</p>
<p><strong>एंटी स्मॉग गन से पानी का छिड़काव</strong><br />प्रदूृषण नियंत्रण मंडल से मिले बजट से नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण ने करीब एक साल पहले एंटी स्मॉग गन मशीनें खरीदी हैं। जिनके माध्यम से शहर के अलग-अलग हिस्सों में पानी का छिड़काव कराया जा रहा है। जिससे हवा में उड़ने वाले धूल के कणों को कम करने का प्रयास किया जा रहा है। हजारों लीटर पानी का रोजाना छिड़काव किया जा रहा है।</p>
<p><strong>ग्रीनबेल्ट विकसित</strong><br />प्रदूषण नियंत्रण के तहत नगर निगम द्वारा शहर में जगह-जगह पर ग्रीन बेल्ट भी विकसित की जा रही है। जहां मिट्टी डलवाकर सीमेंट के पिलर और लोहे की जालियां लगाई जा रही है। उस जगह पर बरसात से पहले पौधे लगाए जाएंगे। जिससे बरसात में वहां पौधे हरे-भरे हो जाएं और कच्ची जगह पर पौधे लगने से वहां हरियाली छा जाए। डीसीएम रोड व भदाना समेत कई जगहों पर ग्रीन बेल्ट विकसित की जा रही है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />शहर में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए प्रदूषण नियंत्रण  मंडल ने 15 वें वित्त आयोग के तहत दोनों नगर निगमों को बजट आवंटित किया है। उस बजट से प्रदूषण को कम करने के जो भी काम हो सकते हैं वह किए जा रहे हैं। पूर्व में क्रय की गई एंटी स्मॉग गन मशीनों से अधिक  प्रदशित स्थानो पर पानी का छिड़काव कराया जा रहा है। वहीं सड़क किनारे कच्ची जगह से  उड़ने वाली धूल को कम करने के लिए इंटरलोकिंग की जा रही है। वहीं बरसात से पहले ग्रीन बेल्ट बनाई जा रही है। जिससे वहां हरियाली छा जाए। कई जगह पर इस तरह के काम हो गए हैं और कई जगह पर किए जा रहे हैं। जहां भी आवश्यकता महसूस हो रहीे है वहां काम करवाए जा रहे हैं। <br /><strong>- प्रेम शंकर शर्मा, मुख्य अभियंता नगर निगम कोटा उत्तर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 23 Jun 2023 14:39:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बढ़ता प्रदूषण :  “कल” को बचाने के लिए “आज” सतर्क होना बहुत जरूरी</title>
                                    <description><![CDATA[प्रदूषण के बढ़ते दुष्प्रभाव से “कल” को बचाने के लिए “आज” सतर्क होना बहुत जरूरी है। प्रदूषण रोक सकते हैं हालाँकि  प्रदूषण से बचाव के उपाय भी हैं जिन्हें हर व्यक्ति निजी स्तर पर अपनाना शुरू करे तो यह प्रदूषण कम किया जा सकता है। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/increasing-pollution--it-is-very-important-to-be-alert-today-to-save-tomorrow/article-36052"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-01/badhata-pradooshan--kal-ko-bachaane-ke-lie-aaj-satark-hona-bahut-jaroori...kota-news-30-01-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। बढ़ता प्रदूषण वर्तमान समय की एक सबसे बड़ी समस्या है, जो आधुनिक और तकनीकी रूप से उन्नत समाज में तेजी से बढ़ रहा है। प्रदूषण के कारण मनुष्य जिस वातावरण  में रह रहा है, वह दिन-ब-दिन खराब होता जा रहा है। इस समस्या पर यदि हम आज मंथन नहीं करेंगे तो प्रकृति संतुलन स्थापित करने के लिए स्वयं कोई भयंकर कदम उठाएगी और हम मनुष्यों को प्रदूषण का भयंकर परिणाम भुगतना होगा। प्रदूषण का  पर्यावरण के साथ साथ हमारे स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर पड़ रहा है । प्रदूषण के बढ़ते दुष्प्रभाव से “कल” को बचाने के लिए “आज” सतर्क होना बहुत जरूरी है। प्रदूषण रोक सकते हैं हालाँकि  प्रदूषण से बचाव के उपाय भी हैं जिन्हें हर व्यक्ति निजी स्तर पर अपनाना शुरू करे तो यह प्रदूषण कम किया जा सकता है। आम लोगों द्वारा प्रदूषण को दूर करने के लिए कौन से व्यावहारिक समाधान का उपयोग करें जिससे शहर प्रदूषण मुक्त बनें । पर्यावरणीय प्रदूषण को रोकने के लिए एक व्यक्ति के रूप में आप क्या उपाय अपने प्रतिदिन के जीवन में कर सकते है, इस बारे में दैनिक नवज्योति ने शहर के लोगों से प्रैक्टिकल साल्यूशन्स जानें। जिन्हें अपनाकर पर्यावरण प्रदूषण कम किया जा सकता है।</p>
<p>- रोजमर्रा की जिंदगी की आदतों को बदलना पड़ेगा। घर में कहीं कचरा है तो खुले में नहीं जलाए, खुले में कचरा नहीं फैंके।<br />- घरों से निकलने वाले एमएसडब्ल्यू वेस्ट का सेग्रीगेशन प्रॉपर होना चाहिए। <br />- घरों में बिजली के उपकरण में चार्जिंग में कोई फोन चार्जर में लगा है चार्जिंग के बाद फोन चार्जर से निकाल कर रख दिया उसका स्विच आॅन रह जाता है। वह आन स्विच  बिजली चाहे कम मात्रा में कन्ज्यूम रहा  है।  तो नई बिजली पैदा करने के लिए कोयला भी चाहिए। कोयले से बिजली फिर पैदा होगी तो प्रदूषण बढ़ेगा।<br />- क ई-व्हीकल्स का इस्तेमाल करें।<br /><strong>-अमित सोनी, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण मंडल, कोटा</strong></p>
<p>- देश में पॉलिथिन को बैन कर दिया उसके बाद भी सब्जीमंडी में या कोई भी चीज खरीदन जाते है तो पॉलिथिन की थैली की मांग करते हैं। पॉलिथिन की थैली नहीं मांगे और कपड़े के थैलो का उपयोग करें।<br />- कम दूरी का कार्य स्वास्थ्य की दृष्टि से व पेट्रोल बचाने के लिए ठीक है सबसे बढ़िया पॉल्यूशन मुक्त साइकिल का उपयोग करें।<br />- हम कहीं भी किसी भी कार्यक्रम घर में जन्मदिन या किसी भी पार्टी या शादी-समारोह में पॉलिथिन व डिस्पोजेबल के उपयोग पर स्वयं चलकर पाबंदी लगाए।<br />- ऐसी कोई सामग्री नहीं लाए जिसको बाद में फेकेंगे नाली में सड़क किनारे फैके तो गाय उसमें खाद्य सामग्री समझेगी और उसे खाकर उसका अंत हो जाएगा। 450 गायों की रोज राजस्थान में पॉलिथिन खा जाने से मृत्यु हो रही है। यह हमारी सर्वे रिपोर्ट है।<br />- चंबल नदी में सरकारी व प्रशासनिक अनदेखी के सैकड़ो बड़े नाले व हजारो छोटी नालियां सीधे चंबल नदी में गिर रही है। जो प्रदूषण का बहुत बड़ा कारण हैं। चंबल नदी एक मात्र घड़ियाल सेंचुरी है उसमें गंदगी नहीं डालें।<br />- पानी की, बिजली की बर्बादी नहीं करें।                                           <br />    - <strong>बाबू लाल जाजू, पर्यावरणविद्</strong></p>
<p>- कम से कम जीवाष्म ईधन (लकडी, केरोसिन) के समन के  उपयोग से वायु प्रदूषण को कम किया जा सकता है।<br />- किसी भी सामूहिक कार्यक्रम में ध्वनि कारक यंत्रों के कम एवं दिन के समय में 70 डेसीबल एवम्  रात्रि में 55 डेसीबल कम ध्वनि पर चलाने से ध्वनि प्रदूषण  को कम किया जा सकता है।<br />- प्लास्टिक के उपयोग को कम करने हेतु हमें रोजमर्रा के जीवन से प्लास्टिक को किन्ही अन्य से बदलना होगा जैसे कि  प्लास्टिक थैलों की जगह कागज, फाइबर, कपड़े के थैलों के उपयोग से, प्लास्टिक के बर्तनों की जगह मैटल, मिटटी से बने बर्तनों के उपयोग से, भी प्लास्टिक से उत्पन्न होने वाले पर्यावरणीय संबधित समस्याएं कम होगी।<br />- यात्रा या वाहन चलाते समय लाल बत्ती होने पर वाहन को बंद कर देने से ईधन,वायु,ध्वनि प्रदूषण को कम किया जा सकता है।<br />- घरों में नलों के समय-समय पर रखरखाव से बूंद-बंदू कर रिसने वाले पानी से व्यर्थ में बहने वाले पानी को रोककर जल संरक्षण किया जा सकता है!<br />- ज्यादा से ज्यादा नवीकरणीय उर्जा के साधनों के उपयोग से हम गैर नवीकरणीय उर्जा के साधनों पर कम निर्भर होंगें जिससे बिजली उत्पादन हेतू कोयले का कम उपयोग होगा जिससे प्राकृतिक संसाधनों की बचत के साथ-साथ कोयले के जलने से निकलने वाली हानिकारक गैसों से वायु प्रदूषण में कमी होगी।<br />- बायोडिग्रेबल कचरे को घर गार्डन में एक छोटा गडडा कर डालने से कचरे का सही निस्तारण व लाभ प्राप्त कर सकते है।<br />- किसी भी खाली जगह पर कचरा डालने की बजाय निर्धारित जगह पर कचरा डालने से दुर्गन्ध, बिमारियों एवं वायु प्रदूषण से बचा जा सकता है।<br />- आवश्यकता ना होने पर लाईट बंद रखने से बेवजह विद्युत खपत को रोका जा सकता है।<br /><strong>- विवेक त्यागी, जूनियर मैनेजर, वरदान एनविरोनेट जयपुर </strong></p>
<p>- किसान खेतों में पराली जलाते हैं उस वेस्टओवर  से कोई बेस्ट चीज बना सकें जैसे मस्टर्ड हस्क बच जाता था तो हमे उससे बिजली बना रहे है। इससे पर्यावरण भी बच रहा है और बिजली बच रही है। कोयले से बिजली बनती है। यदि हस्क का इस्तेमाल करें तो कोयला भी बचेगा, उससे होने वाला प्रदूषण , खेतों में जो हस्क जलने से पॉल्यूशन होता है वह भी नहीं होगा।<br />- आम आदमी को अपना माइंड सेट बदलने की जरूरत हैं। जितनी जरूरत हो उतनी ही बिजली का इस्तेमाल करें। जिस वॉलटेज की लाइट चाहिए वह लगवाए। कहीं बाहर जा रहे है तो लाइट आॅन नहीं छोड़ कर जाए।<br />- गीजर में पानी उतना ही गरम करें जितनी जरूरत हो। पानी जरूरत के अनुसार इस्तेमाल करें। <br />- आज इस तरह के घर बन रहे हैं जो पुराने समय में बनते थे कच्चे घर, गर्मियों में ठंडे और सर्दियों में गर्म रहते थे उसी तरह की चीजों पर वपिस आए। कम्फर्ट के अनुसार थोड़ा एडवांस बना सकते है।<br />- प्रदूषण सिर्फ धुएं से ही नहीं होता बल्कि एनर्जी को रेडिएट करते है, वह भी पर्यावरण को प्रदूष्ति करते है। कई बार किचन में गैस  बर्नर को आॅन रखकर एक चीज से दूसरी चीज चेंज करते है इस बीच गैस अनावश्यक जलती रहती है, प्रैस आॅन छोड़ देते है, इन आदतों को बदलना होगा।  <br />- पॉलिथिन को डामर में इस्तेमाल करके रोड बना सकते है। सीमेंट रोड में जितना खर्चा होता है उतना खर्चा करने की  जरूरत नहीं है। पॉलिथिन यूज करेगें तो 20 से 25 साल के रोड बनेगें। यह बहुत सफल तकनीक है। <br />-  कोई भी वस्तु खरीदते समय  दुकानदार  पॉलिथिन की थैली या  पॉलिथिन बैग दे तो मना करे तो वह कागज का लिफाफा  या  कागज का बैग रखना शुरू करेगें। हिमाचल में कोई भी शॉपकीपर पॉलिथिन नहीं देता वहां सब सब्जी खरीदने के लिए कपड़े का थैला लेकर जाते है। इस साल 2023 से सोच लें  कि प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं करेंगे । <br />- विवाह समारोह में डिस्पोजेबल आइटम के इस्तेमाल पर कहें कि डिस्पोजेबल इस्तेमाल नहीं होगा। यदि कोई व्यक्ति  ऐसा करता है तो उसे पब्लिसाइज करें तो जागरूकता आएगी।<br />- नदियों को खोदे नहीं इन्हें खोदेंगे तो घड़ियाल मर जाएगे।                                          <br /> <strong>- मेजर विक्रम सिंह, जीएम श्रीराम रेयंस</strong></p>
<p>-  घरों के वेंटीलेशन को जितना हवादार बनाएंगे घर के अंदर की बुरी हवा को बाहर जाने में उतनी ही आसानी होगी। <br />- काफी लोग कुकिंग के समय किचन के धुएं के लिए चिमनी का इस्तेमाल नहीं करते, घर के किचन में चिमनी का उपयोग जरूर करें, ताकि धुंआ घर से बाहर निकल जाए। <br />- अगर स्वयं का वाहन लेना है तो बैटरी वाले वाहनों का उपयोग करें । <br />-  घरों में एनर्जी की खपत को कम करने वाले उपकरण लगाए ।  सौर ऊर्जा का  इस्तेमाल करें। ऐसे यंत्र इस्तेमाल किए जाते हैं, जिनमें मेंटीनेंस का खर्च न के बराबर हो।<br /><strong> - दर्शना गांधी, अध्यक्ष, विजयवर्गीय महिला मंडल</strong></p>
<ul>
<li>वायु प्रदूषण में परिवहन का अहम योगदान है। घर में जितने सदस्य होते हैं सभी के पास व्हीकल होता है कहीं जाना है तो प्लान आऊट करके जाए। घर पास हैं समान संस्था में कार्य करते है कार्यस्थल पर पहुचने के लिए कारपूलिंग का उपयोग  किया जा सकता है।<br />- प्रदूषण रोकने में पेड़-पौधे अहम भूमिका निभाते हैं। कुछ पौधे जैसे सेंसेवियरा ये धूल के महीन कणों (पार्टीकुलेट मैटर) को सोखते हैं इस तरह के पौधे डिवाइडरों व घरों के आस-पास लगाए जा सकते है। ये काफी हद तक वायु प्रदूषण को रोकते है। - जहां काम करते है वह आॅर्गनाइजेशन अगर शहर में  पास ही है तो वॉक डाउन करें या साइकिल से जाए। </li>
<li>घर या मंदिर में भगवान पर चढ़ाए  गए फूल- माला सूखने पर या बच जाने पर सीधे या प्लास्टिक की थैली सहित पानी में डाल देते है। इस आदत से बचें।  इससे पानी दूषित होता है। एक्वेटिक एनिमल्स भी सर्वाइव नहीं कर पाते है। यूट्रोफिकेशन बढ़ने से जलकुंभी फलती-फूलती है वह भी पानी के लिए प्रदूषण है। <br />- लाउडस्पीकर भी तेज आवाज में चलाना ध्वनि प्रदूषण में आता है। शादी आदि में डीजे लगाते हैं  तो उसका वॉल्यूम कम से कम रखना चाहिए, उसे बजाने की अवधि भी कम रखे, कानो को तेज आवाज सहन करने की भी एक निश्चित सीमा होती है।  - पेस्टीसाइड्स का मिट्टी में बहुत इस्तेमाल करना मिट्टी को खराब करता है और कई बीमारियां पैदा करता है। </li>
</ul>
<p>- प्लास्टिक का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं करें। <br />- अपने वाहनों की समय-समय पर नियमित जांच व सर्विस कराते रहें। <br />-बिजली के उपकरणों का दुरुपयोग भी पर्यावरण पर असर डाल रहा है। इससे क्लाइमेंट चेंज हो रहा है। मौसम का शिफ्टिंग हो रहा है। अनावश्यक बिजली के उपकरणों का इस्तेमाल नहीं करें। फ्रिज व एसी जब डिस्पोज आॅफ करते है तो क्लोरो फ्लोरो  कार्बन गैस निकलती है वह ओजोन लेकर को डिक्रीट करता है। इससे अल्ट्रावॉयलेट किरणें आती है जो हानिकारक है। <br />- पानी को कंर्जव करें । वाटर हार्वेस्टिंग का उपयोग करें। प्लांटेंशन को बढ़ावा दें। अगर पेड़ को मजबूरी में काटना पड़ रहा है तो उसकी एवज में प्लांटेशन उतना करें कि पांच पौधे तो उगाने ही है।                     <br /><strong>- डॉ. प्रतिमा श्रीवास्तव, विभागाध्यक्ष बॉटनी, जेडीबी गर्ल्स कॉलेज, कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Jan 2023 15:10:39 +0530</pubDate>
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