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                <title>forest workers - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>forest workers RSS Feed</description>
                
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                <title>बायोलॉजिकल पार्क में बनेगा 80 लाख का सुरक्षा कवच</title>
                                    <description><![CDATA[सौलर फेंसिंग से कवर होगा पूरा बायोलॉजिकल पार्क।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/a-security-cover-of-80-lakhs-will-be-built-in-the-biological-park/article-126229"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/untitled-design-(3)4.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क को अब मांसाहारी जानवरों के हमले से सुरक्षित बनाया जाएगा। इसके लिए 80 लाख की लागत से सौलर फेंसिंग का सुरक्षा कवच बनाया जाएगा। जिसमें शाकाहारी वन्यजीव व रात को ड्यूटी पर तैनात वनकर्मियों की जान महफूज रह सकेगी। पार्क की सम्पूर्ण दीवार सौलर फेंसिंग रूपी लक्ष्मण रेखा से कवर्ड होगी, जिसमें विद्युत करंट प्रवाहित होता रहेगा। यदि, लेपर्ड छलांग लगाकर दीवार पार करने की कोशिश करेगा तो सौलर फेंसिंग, करंट का झटका देगी। इलेक्ट्रिक शॉक लगने से पैंथर बायोलॉजिकल पार्क के अंदर घुस नहीं पाएंगे। हालांकि, इस करंट से वाइल्ड एनिमल को नुकसान नहीं होगा।  दरअसल, अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क के चारों ओर घना जंगल है। जहां पैंथर, भालू , जरख, भेड़िया सहित कई खूंखार मांसाहारी जानवरों का मूवमेंट रहता है। ऐसे में वह पार्क की 10 फीट ऊंची सुरक्षा दीवार को फांद अंदर घुस जाते हैं। जिससे शाकाहारी वन्यजीवों व रात को गश्त करते वनकर्मियों पर हमले का खतरा बना रहता है। गत वर्ष ऐसी घटना घट चुकी है। वन्यजीव विभाग ने सौलर फेंसिंग लगवाने के लिए प्रस्ताव बनाकर उच्चाधिकारियों को भेज दिए हैं। </p>
<p><strong>5 हजार मीटर सुरक्षा दीवार पर लगेगी सौलर फेंसिंग </strong><br />वन्यजीव विभाग के उप वन संरक्षक अनुराग भटनागर ने बताया कि अभेड़ा बायोलॉजिकल की सुरक्षा दीवार 5 हजार रनिंग मीटर लंबी है। वर्तमान में यह दीवार 10 फीट ऊंची है, जिस पर करीब 4 फीट ऊंची सौलर फेंसिंग लगाई जाएगी, जो सौलर से कनेक्ट रहेगी और चार्ज होने के साथ उसमें निर्धारित मात्रा में विद्युत करंट प्रवाहित होता रहेगा। इससे बाहर का कोई भी वाइल्ड एनिमल खास तौर पर लेपर्ड दीवार फांद पार्क के अंदर नहीं आ सकेगा। जिससे शाकाहारी वन्यजीव व गश्त करते वनकर्मियों पर मांसाहारी जानवरों के हमले का खतरा टल सकेगा। इस सौलर फेंसिंग से पूरा बायोलॉजिकल पार्क कवर्ड रहेगा। इसमें करीब 80 लाख रुपए का खर्चा आएगा। इसके प्रस्ताव बनाकर उच्चाधिकारियों को भेज दिए हैं।  </p>
<p><strong>पिंजरे में घुसकर लेपर्ड ने किया था ब्लैक बक का शिकार</strong><br />अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में वर्ष 2023 में 29 अप्रेल की रात को लेपर्ड ने बाहर से बायोलॉजिकल पार्क की 10 फीट ऊंची दीवार फांद परिसर में घुस गया था और ब्लैक बक के एनक्लोजर में घुसकर हमला कर दिया। शाकाहारी वन्यजीवों के नाइट शेल्टर तक पहुंच गया और ब्लैक बक के शावक का शिकार कर लिया। घटना का पता अगले दिन सुबह गश्त कर रहे कर्मचारियों की सूचना पर लगा। घटना के बाद से वनकर्मियों में भी सुरक्षा को लेकर चिंता व्याप्त हो गई थी। ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए लेपर्ड प्रूफ सौलर फेंसिंग लगवाना बेहद जरूरी है। इसलिए सैकंड फेस के निर्माण कार्यों में सौलर फेंसिंग करवाए जाना भी शामिल किया है। </p>
<p><strong>रात को गश्त करते वनकर्मियों पर हमले का रहता खतरा </strong><br />नाम न छापने की शर्त पर वनकर्मियों ने बताया कि बायोलॉजिकल पार्क के आसपास खुला वनक्षेत्र है। जिसमें खूंखार मांसाहारी जानवरों का मूवमेंट रहता है।  चूंकी, वन्यजीव रात को ही सक्रिय होते हैं और शिकार की तलाश में जंगल से बाहर निकलते हैं। ऐसे में भालू, जरख, भेड़िया और पैंथरों का बायोलॉजिकल पार्क में प्रवेश करने का अंदेशा लगा रहता है। जिससे रात को पार्क में गश्त करने वाले वनकर्मियों व होम गार्ड पर मांसाहारी वन्यजीवों के हमले का खतरा रहता है। ऐसे में सुरक्षा दीवारों पर सौलर फेंसिंग होने से शाकाहारी वन्यजीवों के साथ गश्त करने वाले कर्मचारी भी अनजाने खतरों से महफूज हो सकेंगे। </p>
<p><strong>इधर, 50 लाख से लगेगा इलेक्ट्रिक शवदाह गृह</strong><br />बायोलॉजिकल पार्क में सैकंड फेज के निर्माण कार्यों में इलेक्ट्रिक शवदाह गृह भी बनवाया जाना शामिल है। इससे मृत जानवरों के शव का सुगमता से डिस्पोजल हो सकेगा। अब तक शव का अंतिम संस्कार करने के लिए जलाया जाता है, जिससे लकड़ियों की खपत बढ़ती है और धुएं से हवा में प्रदूÑषण भी बढ़ता है। ऐसे में  इलेक्ट्रिक शवदाह गृह बनने से लकड़ियों की खपत रुकेगी और वायुमंडल में प्रदूषण भी नहीं फैलेगा। इसके अलावा इंफेक्शन, बैक्ट्रेरिया व संक्रमण का खतरा भी टलेगा। ऐसे में 50 लाख की लागत से इलेक्ट्रिक शवदाह गृह बनाया जाएगा। वन्यजीव विभाग द्वारा तैयार किए प्रस्ताव में इसे भी शामिल किया गया है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />बजट घोषणा के तहत अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क के द्वितीय चरण के निर्माण के लिए  25 करोड़ रुपए का प्रस्ताव बनाकर मुख्य वन संरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक व मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक को भेजे गए हैं। प्रस्ताव में बायोलॉजिकल पार्क को लेपर्ड पू्रफ सौलर फेंसिंग से कवर्ड किया जाना शामिल किया है। वहीं, 50  लाख की लागत से इलेक्ट्रिक शवदाह गृह भी बनाया जाना है। बजट मिलने पर अधूरे प्रस्तावित कार्यों का निर्माण कार्य पूर्ण हो सकेंगे। पर्यटकों की सुविधाओं में विस्तार के प्रयास लगातार जारी है। <br /><strong>- अनुराग भटनागर, उप वन संरक्षक वन्यजीव विभाग कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Sep 2025 17:30:00 +0530</pubDate>
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                <title>टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में ट्रक भर कर बेची जा रही लकड़ियां, बंबूल का जंगल बेच रहे वनकर्मी</title>
                                    <description><![CDATA[ वनकर्मियों की मिलीभगत से माफिया न केवल टाइगर के कोर एरिया में ट्रक लेकर घुस रहे बल्कि प्रतिदिन हजारों टन लकड़ियां चोरी कर ले जा रहे हैं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/truck-loads-of-wood-are-being-sold-in-the-core-area-of-tiger-reserve/article-117549"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/258642.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। रामगढ़ टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में दिनदहाड़े बबूल की लकड़ियां बेची जा रही हैं। वनकर्मियों की मिलीभगत से माफिया न केवल टाइगर के कोर एरिया में ट्रक लेकर घुस रहे बल्कि प्रतिदिन हजारों टन लकड़ियां चोरी कर ले जा रहे हैं। जबकि, इस जगह पर टाइगर का मूवमेंट रहता है। हालात यह हैं, अपने स्वार्थ के लिए वनकर्मी टाइगर की सुरक्षा दांव पर लगाने से भी नहीं चूक रहे। भ्रष्टाचार का यह खेल पिछले ढाई महीने से चल रहा है। जघन्य वन अपराध का खुलासा शुक्रवार को जीपीएस कोर्डिनेट के साथ तस्वीरें सामने आने से हुआ। दरअसल, मामला आरवीटीआर की जेतपुर रेंज के पापड़ा चौक का है, जो रिजर्व का कोर एरिया है। इतना ही नहीं, इस इलाके में टाइगर का मूवमेंट रहता है। इसके बावजूद वनकर्मी माफियाओं से सांठगांठ बबूल का जंगल बेच रहे हैं।</p>
<p><strong>बाघ व शावकों की जान से खिलवाड़</strong><br />वन्यजीव प्रेमी विट्ठल सनाढ्य ने बताया कि जेतपुर रेंज का पापड़ा चौक, बांदरा पोल से रामगढ़ महल के बीच स्थित है। यहां बाघ आरवीटीआर-1 का मूवमेंट रहता है। इसके बावजूद यहां से प्रतिदिन 5 से 7 ट्रक लकड़ियां भर-भर कर बेची जा रही है। जबकि, इस जगह से रामगढ़ महल और टाइगर रिलोकेशन एनक्लोजर   बिलकुल नजदीक है, जहां रणथम्भौर या अन्य जगहों से लाए जाने वाले टाइगर को रखा जाता है। वर्तमान में मृत बाघिन आरवीटीआर-2 की दोनों मादा शावक व अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क से शिफ्ट किए गए नर शावक की मौजूदगी भी इसी क्षेत्र में है। वन अधिकारियों व माफियाओं के गठजोड़ से बाघों की सुरक्षा दांव पर लग गई है। </p>
<p><strong>प्रतिदिन 5 से 7 ट्रक बेची जा रही लकड़ियां </strong><br />वन सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जेतपुर रेंज में  ग्रासलैंड डवलप करने के लिए गत वर्ष ज्यूलीफ्लोरा उनमूलन का टेंडर किया गया था। संबंधित फर्म ने बबूल के पेड़ों की कटाई की थी। ऐसे में यहां लकड़ियों का ढेर पड़ा है। जिसे वनकर्मियों द्वारा माफिओं को बेचा जा रहा है। जबकि, टाइगर रिजर्व व नेशनल पार्क से किसी भी प्रजाति की लकड़ियां न तो बेची जा सकती और न ही नीलाम की जा सकती है। इसके बावजूद कोर एरिया से प्रतिदिन 5 से 7 ट्रक लकड़ियां माफिया भिवाड़ी-हरियाणा ले जा रहे हैं। </p>
<p><strong>वन सुरक्षा समिति के नाम पर माफियाओं से कटवाया बंबूल</strong><br />नाम न छापने की शर्त पर वनकर्मचारी ने बताया कि रिकॉर्ड में ज्यूलीफ्लोरा उन्मूलन का कार्य वन सुरक्षा समिति के श्रमिकों से करवाना दिखाया गया है। जबकि, हकीकत में माफियाओं से जंगल कटवाया गया और उन्हें ही लकड़ियां बेची जा रही है। हालात यह है, 1 अप्रेल 2025 से 11 जून तक टाइगर रिजर्व के कोर एरिया से ट्रक भरकर लकड़ियां भिवाड़ी व हरियाणा जा रही है। जबकि, सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार, नेशनल पार्क या टाइगर रिजर्व से लकड़ियों की नीलामी नहीं की जा सकती। इसके अलावा टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में अवैध परिवहन जघन्य अपराध है। </p>
<p>मामला संज्ञान में आ गया है। रामगढ़ टाइगर रिजर्व के डीएफओ से जांच करवाकर तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि वन अपराध में स्टाफ की संलिप्ता व मिलीभगत तो नहीं है। रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। टाइगर रिजर्व या नेशनल पार्क में कटी हुई लकड़ियों की नीलामी किए जाने का कोई प्रावधान नहीं है। चाहे वो बबूल की लकड़ियां ही क्यों न हो। <br /><strong>- सुगनाराम जाट, संभागीय मुख्य वनसंरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक </strong></p>
<p>टेंडर तो पहले का था, एक-दो जगहों से शिकायत आई है। हमने टीम बनाकर मौके पर जांच के लिए भेज दी है। मामले की जांच चल रही है। रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई करेंगे। <br /><strong>- अरविंद कुमार झा, डीएफओ रामगढ़ टाइगर रिजर्व</strong></p>
<p>टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में ट्रक को अनुमत किया जाना टाइगर की सुरक्षा के साथ समझौता है, जो घातक है। जूलीफ्लोरा घोटाला रामगढ़ टाइगर रिजर्व में नया नहीं है। वर्तमान व पूर्व के जिम्मेदार अधिकारियों  द्वारा करोड़ों रुपए मूल्य का जूलीफ्लोरा बेच चुके हैं, जिसकी राशि जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों से वसूली जानी चाहिए।<br /><strong>- तपेश्वर सिंह भाटी, पर्यावरणविद् एवं एडवोकेट </strong></p>
<p>जेतपुर रेंज का पापड़ा वनक्षेत्र आरवीटीआर का कोर एरिया है। 11 जून की तस्वीर में जिस जगह ट्रक में लकड़िया लोड हो रही है, वो रामगढ़ महल और टाइगर रिलोकेशन एनक्लोजर के बिलकुल नजदीक है। इस इलाके में बाघ आरवीटीआर-1, मृत बाघिन आरवीटीआर-2 की मादा शावकों का मूवमेंट है। इसके बावजूद वन अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा टाइगर टेरीटरी में माफियाओं की घुसपैठ करवाकर वन सम्पदा चोरी करवा रहे हैं। जघन्य अपराध में लिप्त वनकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी  चाहिए। <br /><strong>- विट्ठल सनाढ्य, वन्यजीव प्रेमी बूंदी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Jun 2025 16:23:55 +0530</pubDate>
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                <title>जहां 4 बाघों का मूवमेंट, वहां ट्रकों में भरवा रहे थे लकड़ियां </title>
                                    <description><![CDATA[विशेषज्ञों ने वन्यजीवों के शिकार व तस्करी की जताई आशंका । 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/where-4-tigers-move--trucks-were-being-loaded-with-wood/article-117548"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/254687.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। रामगढ़ टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में ट्रकों में लकड़ियां भरवाकर बेचे जाने के मामले में रविवार को चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। मेज नदी किनारे जिस वनक्षेत्र में ट्रक में बंबूल की लकड़ियां भरवाई जा रही थी, वह जगह क्रिटिकल टाइगर हेबीटाट है। इस क्षेत्र में 4 टाइगर का मूवमेंट रहता है। वहीं, कुछ माह पहले इसी इलाके में बाघिन आरवीटीआर-2 का कंकाल मिला था। जिसकी खाल गायब थी, उसका आज तक सुराग नहीं लगा। इधर, वन्यजीव विशेषज्ञों ने कोर एरिया में जिम्मेदार वन अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत से हो रहे अवैध परिवहन के दौरान तस्करी की आशंका जताई है। वहीं, वन विभाग ने अपनी प्राथमिक जांच रिपोर्ट में लकड़ियों के अवैध परिवहन में एक से अधिक स्टाफ की संलिप्ता स्वीकारी है। </p>
<p><strong>टाइगर मॉनिटरिंग व ट्रैकिंग टीम की गश्त पर उठे सवाल</strong><br />वन्यजीव प्रेमी विट्ठल सनाढ्य ने बताया कि रामगढ़ टाइगर रिजर्व की जेतपुर रेंज के पापड़ा चौक में ट्रक में लकड़िया लोड़ हो रही थी। यहां से एक से डेढ़ किमी दूरी पर बांदरा पोल, रामगढ़ महल है। जहां 4 टाइगर्स का मूवमेंट है। जिनकी मॉनटिरिंग व ट्रैकिंग के लिए वनकर्मियों की टीम गश्त करती है। ऐसे में सवाल उठता है कि बाघों की टेरिटरी में दिनदहाड़े ट्रक लकड़ियां भरकर ले जाते हैं और वनकर्मियों की टीम को दिखाई नहीं दे, ऐसा संभव नहीं है। कर्मचारियों की मिलीभगत  से पिछले ढाई माह से ट्रकों में लकड़ियों का अवैध परिवहन हो रहा है, जो न केवल टाइगर की सुरक्षा से खिलवाड़ है बल्कि वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट 1972 का भी सीधा उल्लंघन है। अवैध गतिविधियों से वन सुरक्षा खतरे में पड़ गई। </p>
<p><strong>संलिप्तता स्वीकारी, विस्तृत जांच के आदेश जारी</strong><br />नवज्योति द्वारा खबर प्रकाशित करने के बाद रामगढ़ टाइगर रिजर्व प्रशासन ने जांच कमेटी बनाकर मामले की प्राथमिक जांच करवाई। जिसकी रिपोर्ट में उच्चाधिकारियों ने कोर एरिया में ट्रकों में लकड़ियों के अवैध परिवहन में एक से अधिक स्टाफ की मिलीभगत  स्वीकारी है। हालांकि, डीएफओ अरविंद कुमार झा ने मामले की विस्तृत जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। </p>
<p>जेतपुर रेंज में तैनात नाकेदार, फोरेस्टर, फोरेस्ट गार्ड व रेंजर के बयान लिए जा रहे हैं। मामले की विस्तृत जांच की जा रही है। जिसकी रिपोर्ट जल्द ही उच्चाधिकारियों को सौंपेंगे। <br /><strong>-नवीन नारायण, एसीएफ रामगढ़ टाइगर रिजर्व </strong></p>
<p>पापड़ा चौक में जिस जगह ट्रक में बम्बूल की लकड़ियां लोड करवाई जा रही थी, उस जगह से ब्रांदापोल,  रामगढ़ महल, टाइगर रिलोकेशन एनक्लोजर काफी नजदीक है। जबकि, बांद्रापोल के 5 किमी के रेडियस  में नर बाघ आरवीटीआर-1 तथा मादा शावकों का मूवमेंट रहता है। वहीं, महल के पीछे 30 बीघा का एनक्लोजर है, जहां अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क से लाए गए नर शावक को रखा गया है। इसके अलावा रिलोकेशन एनक्लोजर में बाहर से लाए जाने वाले टाइगर्स को शिफ्ट किया जाता है। ऐसे सेंसेटिव इलाके में अवैध परिहव निश्चित रूप से बाघों की बसावट के लिए गंभीर खतरा है। यहां अप्रेल माह से ही वन अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत से लकड़ियों का अवैध परिवहन हो रहा है।            <br /><strong>- विट्ठल सनाढ्य, वन्यजीव प्रेमी बूंदी</strong></p>
<p>क्रिटिकल टाइगर हेबीटाट में ट्रकों व बाहरी व्यक्तियों का प्रवेश और वनसम्पदा की चोरी गंभीर प्रवृति का अपराध है। यह न केवल टाइगर की सुरक्षा में भारी चूक है बल्कि वन्यजीवों के स्वच्छंद विचरण में व्यधान होने के साथ वन संरक्षण अधिनियम 1972 का सीधा उल्लंघन है। मामले की निष्पक्ष जांच करवाई जानी चाहिए और माफियाओं से मिलीभगत करने वाले कर्मचारियों व अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो।<br /><strong>- पृथ्वीराज सिंह राजावत, वन्यजीव विशेषज्ञ बूंदी</strong></p>
<p>प्राथमिक जांच रिपोर्ट में जब वन सम्पदा की चोरी करवाने में वन स्टाफ की संलिप्ता मानी गई है तो संबंधित स्टाफ  को निलंबित किया जाना चाहिए ताकि, आगे की जांच किसी भी तरह से प्रभावित न हो। <br /><strong>- तपेश्वर सिंह भाटी, एडवोकेट एवं पर्यावरणविद्</strong></p>
<p>प्रारंभिक जांच रिपोर्ट आ गई है। जिसमें मौके पर गड़बड़ियों के साक्ष्य मिले हैं। टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में ट्रकों  में लकड़ियां भरकर ले जाए जाने में एक से अधिक स्टाफ की संलिप्ता से इंकार नहीं किया जा सकता। नियमानुसार विस्तृत जांच शुरू करवा दी है। सक्षम अधिकारी जांच कर रहे हैं, रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।<br /><strong>- अरविंद कुमार झा, डीएफओ रामगढ़ टाइगर रिजर्व</strong></p>
<p>डीएफओ से तथ्यात्मक रिपोर्ट मिल गई है। इसमें स्टाफ की मिलीभगत प्रतीत होना माना है। इसकी जांच के आदेश दे दिए हैं। रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार कार्रवाई  की जाएगी। <br /><strong>- सुगनाराम जाट, संभागीय मुख्य वन संरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक, वन्यजीव </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Jun 2025 16:23:42 +0530</pubDate>
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                <title>न पौधे न चौकीदार, किसकी सुरक्षा में खर्च किए लाखों रुपए</title>
                                    <description><![CDATA[वन अधिकारियों की लापरवाही से बर्बाद हुआ प्लांटेशन और वनभूमि। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/no-plants--no-watchmen--for-whose-security-lakhs-of-rupees-were-spent/article-79161"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/na-podhe-na-chokidar,-kiski-suraksha-me-kharch-kiye-lakho-rupay...kota-news-24-05-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। नेशनल हाइवे स्थित लाडपुरा रेंज के लखावा-8 मेटिगेटिव प्लांटेशन में आवासीय प्लॉटनिंग कटने के मामले में  वनकर्मियों की माफियाओं से मिलीभगत की इंतेहा देखने को मिल रही है। जिस प्लांटेशन की सुरक्षा व देखभाल का बजट मिल रहा है वहां माफिया कॉलोनी काट प्लॉट बेच रहे हैं। मामले का खुलासा होने के बावजूद अधिकारी कार्रवाई करने के बजाए वन भूमि को माफियाओं की जमीन बताने पर तुला है। जबकि, फोरेस्ट सेटलमेंट नक्शें व वन विभाग के ब्लॉक नक्शों के अनुसार यह लखावा आरक्षित वनभूमि है, जो वर्ष 2019 में हुए ज्वाइंट सर्वे में साबित हुआ है। नवज्योति मौके पर पहुंची तो हालात बेहद चौंकाने वाले थे। यहां न पेड़-पौधे मिले और न ही चौकीदार। जबकि, पौधों की सुरक्षा के नाम पर पिछले कई सालों से कैम्पा मद से लाखों रुपए का बजट उठाया जा रहा है।  प्लांटेशन केवल कागजों में ही चल रहा है, असल में वन अधिकारी-कर्मचारी अपनी वनभूमि को माफियाओं के हवाले कर रहा है। हैरत की बात यह है, लखावा-8 प्लांटेशन अभी रनिंग में है। इसकी मॉनिटरिंग के लिए रैंजर, नाका प्रभारी व बीट गार्ड तक की ड्यूटी होती है। फिर भी आवासीय कॉलोनी कट गई। वन अधिकारियों की माफियाओं से मिलीभगत के बगैर यह संभव नहीं है।  </p>
<p><strong>भौतिक सत्यापन किया होता तो उजागर होती मिलीभगत</strong><br />नाम न छापने की शर्त पर रिटायर्ड अधिकारी ने बताया कि  लखावा-8 मेटिगेटिव प्लांटेशन के लिए हर साल कैम्पा से बजट जारी होता है। जिससे  पौधों की सार-संभाल, कच्ची दीवार की मरम्मत, मिट्टी डलवाने, नए पौधे लगाने सहित सुरक्षा के लिए चौकीदार की तैनाती सहित अन्य कार्यों में खर्च किया जाता है। बजट का उपयोग सही हो रहा या नहीं, इसके लिए रैंजर, एसीएफ या फिर डीएफओ को मौके का निरीक्षण कर प्लांटेशन कार्यों का सत्यापन करना होता है। लेकिन, अधिकारियों द्वारा मौके का निरीक्षण नहीं किया जाता।  जिससे माफियाओं को वनभूमि पर आवासीय कॉलोनी काटने, अवैध खनन, सरकारी सम्पति चोरी करने का मौन इशारा मिलता है।  यदि, अधिकारियों द्वारा वन कार्यों का भौतिक सत्यापन किया होता तो वन भूमि पर आवासीय प्लोटिंग नहीं कट पाती। वहीं, माफियाओं से वनकर्मियों की मिलीभगत की गठजोड़ की कलई खुल जाती। </p>
<p><strong>पैसा उठ गया और दीवार की मरम्मत भी नहीं हुई </strong><br />लखावा प्लांटेशन की कच्ची दीवार जगह-जगह से खंडित हो रही है। जबकि, बजट इसकी मरम्मत के लिए भी था। पैसा तो उठ गया लेकिन दीवार की मरम्मत नहीं करवाई गई। 50 हैक्टेयर की वन भूमि पर जगह-जगह गिट्टियों का ढेर लगा हुआ है। बिजली के खंभों पर प्रोपर्टी एसोसिएट के नाम और मोबाइल नम्बर लिखे हुए हैं। अधिकारी से लेकर बीट गार्ड तक प्लांटेशन की तरफ झांकते तक नहीं है। </p>
<p><strong>क्या कहते हैं वन्यजीव प्रेमी</strong><br />वन विभाग की अपराधिक लापवाही से हर साल पौधों का अस्तित्व मिट रहा है। प्लांटेशन का खर्चा केवल कागजों में ही चल रहा है, जबकि, हकीकत में वन भूमि को माफियाओं के हवाले किया जा रहा है। कागजों में हो रहे लाखों रुपयों के खर्चे गंभीर प्रकृति का भ्रष्टाचार है। इससे वन संरक्षण कमजोर होगा। विभाग के आला अधिकारियों को मामले की निष्पक्ष जांच करवाकर दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।<br /><strong>- अजय दुबे, वाइल्ड लाइफ एक्टिविस्ट भोपाल</strong></p>
<p>मेटिगेटिव मेजर्स में प्लांटेशन व प्रोटेक्शन वॉल का काम कोटा वन मंडल और मुकुंदरा वाइल्ड लाइफ दोनों ने करवाया है। इसके लिए जो पैसा मिला उसका दोनों डिविजन द्वारा दुरुपयोग किया गया। वर्तमान में प्रोटेक्शन वॉल अपनी जगह नहीं है और प्लांटेशन भी  गायब है। गुगल मैप से पूरी मॉनिटरिंग की जानी चाहिए और किस किस के समय दीवार चोरी व प्लांटेशन बर्बाद हुआ है, उन अधिकारियों को दंडित किया जाना चाहिए।<br /><strong>- तपेशवर सिंह भाटी, अध्यक्ष मुकुंदरा एवं पर्यावरण समिति</strong></p>
<p><strong>क्या कहते हैं अधिकारी</strong><br />मामले की जांच करवाएंगे, जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। डीएफओ का कहना है, यहां खाते की जमीन है, हालांकि मामले की विस्तृत जांच करवाएंगे। <br /><strong>- रामकरण खैरवा, संभागीय मुख्य वन संरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक, वन विभाग कोटा</strong></p>
<p>मैं कोटा आकर मौका देखुंगा। इसके बाद ही वास्तविक कारणों का पता लग पाएगा।<br /><strong>- कैलाश चंद मीणा, एपीसीसीएफ, वन सुरक्षा जयपुर</strong></p>
<p>जयपुर से सीनियर आॅफिसर को मामले की जांच के लिए कोटा भेजेंगे। यह बात सही है, इतना पैसा खर्च करके प्लांटेशन करवाकर छोड़ देते हैं। जिससे सरकार का पैसा व्यर्थ होता है। ऐसा न हो इसके लिए स्टेट लेवल पर एक पॉलिसी बनाएंगे कि प्लांटेशन का काम या तो पंचायत को संभलाएं या किसी अन्य संस्था को। ताकि, इसकी बेहतर देखरेख हो सके और सरकार के उद्देश्य की पूर्ति हो सके। <br /><strong>- अपर्णा अरोरा, अतिरिक्त मुख्य सचिव, वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, राजस्थान सरकार </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 May 2024 16:42:37 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - वन विभाग की टीम ने कोटा यूनिवर्सिटी पर छापा मारा</title>
                                    <description><![CDATA[विवि प्रशासन द्वारा लैब से कोबरा व करेत की डेढ़ बॉडी और हड्डियां गायब  किए जाने के बाद वन विभाग की टीम फोटो व वीडियोग्राफी करने लगी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/effect-of-news----forest-department-team-raided-kota-university/article-60081"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/asar-khabar-ka--van-vibhag-ki-team-ne-kota-university-par-chhapa-mara-...kota-news-21-10-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा यूनिवर्सिटी की वाइल्ड लाइफ डिपार्टमेंट की लैब में अवैध रूप से रखे गए शेड्यूल-1 व 2 के वन्यजीवों की डेडबॉडी और कंकाल की खबर नवज्योति में प्रकाशित होने के बाद वन विभाग हरकत में आ गया। सोमवार दोपहर रेंजर की अगुवाई में 4 सदस्यीय टीम ने विश्वविद्यालय में छापा मारा। वन अधिकारी व कर्मचारियों को देख यूनिवर्सिटी में हड़कम्प मच गया। टीम ने विभाग कोर्डिनेटर के कक्ष में पहुंच साक्ष्य खंगाले, कुछ साक्ष्यों को जब्त किया। लेकिन यूनिवर्सिटी प्रशासन ने लैब में रखे कोबरा और करेत सांप के मृत शरीर और हड्डियां गायब कर दी। इस मामले को लेकर  सर्च के दौरान विवि के अनुशासन अधिकारी और रेंजर के बीच गर्मा-गर्मी हो गई। </p>
<p><strong>प्रोक्टर और रेंजर में गहमा-गहमी </strong><br />विवि प्रशासन द्वारा लैब से कोबरा व करेत की डेढ़ बॉडी और हड्डियां गायब  किए जाने के बाद वन विभाग की टीम फोटो व वीडियोग्राफी करने लगी। इस दौरान यूनिवर्सिटी के प्रोक्टर चक्रपाणी गौतम वहां आ गए और वन टीम को फोटोग्राफी से रोकने लगे। इस बात पर उनकी रेंजर से गहमा-गहमी हो गई। करीब 20 मिनट तक दोनों के बीच हॉट टॉक चलती रही। हंगामे की स्थिति बनी रही। रजिस्ट्रार से परमिशन मिलने के बाद वनकर्मियों ने लैब में सर्च आॅपरेशन को अंजाम दिया। सांपों के मृत शरीर गायब करने व परमिशन से संबंधित जानकारी को लेकर डॉ. रंजना के बयान दर्ज किए। </p>
<p><strong>लैब से गायब किए कोबरा-करेत और हड्डियां</strong><br />वन विभाग की टीम दोपहर करीब 2 बजे यूनिवर्सिटी पहुंची थी। वहां वाइल्ड लाइफ डिपार्टमेंट में पहुंचे। जहां कोर्डिनेटर डॉ. रंजना गुप्ता से शेड्यूल-1 व 2 के कोबरा और करेत रखे जाने की परमिशन लेटर मांगा, जिस पर उन्होंने आवेदन की कॉपी सौंपी लेकिन परमिशन मिलने का कोई प्रमाण नहीं सौंपा। बयान लेने के बाद टीम जैसे ही लैब में पहुंची तो पूर्व में वहां रखे कोबरा-करैत की डेढ़ बॉडी और सांप की हड्डियां गायब कर दी गई। जब इसके बारे में पूछा तो कोर्डिनेटर जवाब नहीं दे सकी। वन अधिकारी व कर्मचारियों द्वारा आधे घंटे तक लैब को खंगालने के बावजूद मृत सांपों के शरीर व हड्डियां नहीं मिली। </p>
<p><strong>यूनिवर्सिटी में दिनभर चर्चा में रहा नवज्योति</strong><br />यूनिवर्सिटी कैम्पस में दिनभर नवज्योति में प्रकाशित खबर चर्चा में रही। विद्यार्थी, शिक्षक व कर्मचारी अलग-अलग जगहों पर गु्रप बनाकर खबर को लेकर बतियाते नजर आए। हर कोई लैब में रखे सांपों के मृत शरीर एकाएक कैसे गायब होने का सवाल खोजते नजर आए। </p>
<p><strong>विनीत महोबिया लेकर आए लैब में कोबरा और करेत </strong><br />वनमंडल के डीएफओ जयराम पांड्ेय का कहना है कि टीम ने वन्यजीव विभाग की कोर्डिनेटर रंजना गुप्ता से शेड्यूल-1 व 2 के कोबरा और करेत सांप किससे लिए, कौन लेकर आया? सहित अन्य सवाल किए, जिसके जवाब देते हुए उन्होंने यह सांप रेप्टियल साइंस की फैकल्टी व कोर्डिनेटर विनीत महोबिया द्वारा लाया जाना बताया गया। लेकिन, लैब में यह दोनों ही सांप व अवशेष गायब मिले। </p>
<p><strong>इन सवालों का नहीं मिला संतोषजनक जवाब</strong><br />वन विभाग की टीम ने कोर्डिनेटर डॉ. रंजना से चैकर्ड कीलबैक कहां से लाए, बिना अनुमति के लैब में क्यों रखा, किसकी अनुमति से रखा, सांप की हड्डियां कहां से लाई गई, किस प्रजाति के सांप के थे यह अवशेष, मृत सांपों को प्रिजर्व रखने से पहले वन मंडल को सूचित क्यों नहीं किया, लैब में चैकर्ड कीलबैक सांप रखने का चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन द्वारा जारी किया गया परमिशन लेटर दिखाने सहित कई सवालों के संतोषजनक जवाब नहीं दिए। ऐसे में अब मामले का अनुसंधान शुरू कर आगे की कार्रवाई की जाएगी। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />जांच अधिकारी द्वारा प्रथम दृष्टया संबंधित डिपार्टमेंट पर जुर्म साबित हो रहा है। इनके खिलाफ वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट 1972 के तहत धारा-9, 39, 38 50 व 51 के अंतर्गत दोषी मानते हुए जांच की कार्रवाई की जा रही है। विवि की वाइल्ड लाइफ डिपार्टमेंट के लोगों की भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है। अब रजिस्ट्रार के नाम पत्र लिख आगे की कार्रवाई की जाएगी।<br /><strong>- जयराम पांड्ेय, उप वन संरक्षक वन मंडल कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Oct 2023 15:58:03 +0530</pubDate>
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                <title>33 जिलों से आए 5000 वनकर्मियों ने निकाली रैली</title>
                                    <description><![CDATA[रैली शहीद स्मारक से चलते हुए सिविल लाइन फाटक पहुंची। यहां 7 सदस्य कर्मचारी डेलिगेशन ने मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव को 15 सूत्रीय मांग पत्र दिया। इसके बाद वन मंत्री को मांग पत्र दिया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/5000-forest-workers-from-33-districts-took-out-a-rally/article-36250"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-02/q-21.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। संयुक्त संघर्ष समिति वन विभाग की ओर से आंदोलन के तीसरे चरण में बुधवार को शहीद स्मारक गवर्नमेंट हॉस्टल पर एक दिवसीय धरना दिया। इसमें राजस्थान के सभी 33 जिलों से करीबन 5000 वन कर्मचारियों ने मय वर्दी के विधानसभा की ओर रैली निकलकर घेराव के लिए कूच किया। </p>
<p>रैली शहीद स्मारक से चलते हुए सिविल लाइन फाटक पहुंची। यहां 7 सदस्य कर्मचारी डेलिगेशन ने मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव को 15 सूत्रीय मांग पत्र दिया। इसके बाद वन मंत्री को मांग पत्र दिया। इस दौरान अखिल राजस्थान संयुक्त कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष आयदान सिंह कविया, प्रदेश संयोजक महावीर शर्मा, आल इंडिया फॉरेस्ट आफिसर फेडरेशन के राष्ट्रीय महामंत्री कमल यादव एवं सभी संभागीय अध्यक्ष, जिला अध्यक्ष, कर्मचारियों के साथ उपस्थित रहे। </p>
<p>वन कर्मचारियों की वर्षों से लंबित मांगों में प्रमुख रूप से फील्ड में कार्यरत अधिनस्थ वन कर्मचारियों की पुलिस के सामान ग्रेड वेतन भत्ते एवं वन श्रमिक के कर्मचारियों की पदोन्नति ग्रेड पे एवं वन विभाग में कार्यरत वाहन चालकों को अन्य संभागों की पदोन्नति व वर्दी पत्ता आदि की मांग सरकार व वन विभाग स्तर पर लंबित हैं। आंदोलन का तीसरा चरण संघर्ष समिति के संयोजक महेंद्र सिंह चौधरी, वाहन चालक एवं तकनीकी कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष अजय वीर सिंह, राजस्थान अधीनस्थ वन कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष भूपेन्द्र सिंह जादौन, जोगेन्द्र सिंह, हनुमान गढ़वाल, हनुमान चौधरी, शंकुतला शर्मा, हेतराम गुर्जर आदि के नेतृत्व में संपन्न हुआ। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Feb 2023 11:21:24 +0530</pubDate>
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