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                <title>cyber attack - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>ईरान-इजराइल संघर्ष: हैकर्स ने बनाया इजरायल की 'अकादमी ऑफ द हिब्रू लैंग्वेज' वेबसाइट को निशाना, लिखा विवादित संदेश—''हिब्रू सीखने की कोई ज़रूरत नहीं, नहीं पड़ेगी इसकी आवश्यकता''</title>
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                        <![CDATA[ईरान समर्थक समूह 'हंदाला' ने इजरायल की 'अकादमी ऑफ द हिब्रू लैंग्वेज' को निशाना बनाकर सेंधमारी की है। हमलावरों ने वेबसाइट पर "हिब्रू सीखने की जरूरत नहीं" जैसे संदेश लिखे और पूर्व प्रधानमंत्रियों का डीपफेक वीडियो जारी किया। सुरक्षा फर्म के अनुसार, 12 लाख रिक्वेस्ट प्रति सेकंड की दर से सेवाओं को ठप करने का प्रयास किया गया।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/iran-israel-conflict-hackers-target-israels-academy-of-the-hebrew-language/article-146276"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/iran-cyber-attack.png" alt=""></a><br /><p>तेल अवीव। पश्चिम एशिया में गहराते संघर्ष के बीच बुधवार को ईरान से जुड़े हैकरों ने इजरायल के 'अकादमी ऑफ द हिब्रू लैंग्वेज' की वेबसाइट को निशाना बनाया। रिपोर्ट के अनुसार, हमलावरों ने वेबसाइट के स्वरूप को बदल दिया। साइट खोलने पर अंग्रेजी में एक विचलित करने वाला संदेश दिखाई देने लगा, "अब हिब्रू सीखने की कोई ज़रूरत नहीं है। आपको बहुत जल्द इसकी आवश्यकता नहीं पड़ेगी।"</p>
<p>रिपोर्टों के मुताबिक, यह सेंधमारी फिलिस्तीन समर्थक समूह 'हंदाला' द्वारा की गई है। यह घटना हाल ही में इज़राइल भर में वेबसाइटों और वित्तीय सेवाओं को बाधित करने के उद्देश्य से किए गए एक बड़े साइबर हमले के बाद हुई है। वेबसाइट पर दिख रहा संदेश ईरान से जुड़े हैकर समूह 'हंदाला' के लोगो के साथ दिखाई दिया। हंदाला ने हमले की जिम्मेदारी ली है।</p>
<p>साइबर सुरक्षा फर्म 'इम्परवा' की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस हमले की तीव्रता लगभग 12 लाख रिक्वेस्ट प्रति सेकंड तक पहुँच गई थी, जिसका उद्देश्य सर्वर को ठप करना और ऑनलाइन सेवाओं को बाधित करना था। वेबसाइट हैक करने के अलावा, हंदाला समूह ने कथित तौर पर इंटरनेट पर एक दुष्प्रचार वीडियो भी जारी किया। अरब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस वीडियो में वर्तमान प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट का एक डीपफेक वीडियो दिखाया गया है।</p>
<p>हंदाला को एक फिलिस्तीन समर्थक हैक्टिविस्ट समूह माना जाता है, जो व्यापक रूप से ईरानी हितों के साथ जुड़ा हुआ है। इसका अभियान मुख्य रूप से इज़राइली संगठनों और उनके महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाता है।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Mar 2026 18:43:25 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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                <title>यूरोप में साइबर हमले का कहर : हीथ्रो, ब्रसेल्स, बर्लिन एयरपोर्ट्स ठप, 140 से ज्यादा उड़ानें लेट; कई रद्द</title>
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                        <![CDATA[ लंदन, बर्लिन और ब्रसेल्स के प्रमुख एयरपोर्ट्स शनिवार को साइबर हमले की चपेट में आ गए]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/cyber-attack-havoc-in-europe-heathro-brussels-berlin-airports-stopped/article-127455"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/_4500-px)21.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। लंदन, बर्लिन और ब्रसेल्स के प्रमुख एयरपोर्ट्स शनिवार को साइबर हमले की चपेट में आ गए। इस अटैक के कारण इन एयरपोर्ट्स के चेक-इन और बोर्डिंग सिस्टम ठप हो गए, जिससे यात्रियों और एयरलाइनों दोनों को बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ा।</p>
<p>हीथ्रो एयरपोर्ट से शनिवार दोपहर तक 140 से अधिक उड़ानें लेट हुईं। वहीं ब्रसेल्स में 100 से ज्यादा और बर्लिन में लगभग 60 उड़ानों की समयसारिणी प्रभावित हुई। चेक-इन और बोर्डिंग सिस्टम काम नहीं करने की वजह से यात्रियों को मैन्युअल पद्धति से चेक-इन करना पड़ा। इसके चलते कुछ फ्लाइट्स को रद्द भी करना पड़ा।</p>
<p>ब्रसेल्स एयरपोर्ट के अधिकारियों ने बताया कि शुक्रवार रात को उनके एयरपोर्ट के सिस्टम प्रोवाइडर कंपनी पर साइबर हमला हुआ। इस हमले के कारण एयरपोर्ट की सभी डिजिटल सेवाएं बाधित हो गईं, जिसका असर उड़ानों पर भी पड़ा। अधिकारियों ने कहा कि स्थिति धीरे-धीरे नियंत्रण में लाई जा रही है और यात्रियों से धैर्य रखने का अनुरोध किया गया है।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Sep 2025 18:06:17 +0530</pubDate>
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                <title>डीप फेक: साइबर दुनिया के नए खतरे को कैसे दें मात?</title>
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                        <![CDATA[हाल ही में देश की कुछ मशहूर हस्तियां के डीप फेक का शिकार होने के समाचार, टीवी चैनलों और समाचार पत्रों की सुर्खियां बने, जिससे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के दुरुपयोग का नमूना हमारे सामने आया।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/deep-fake-how-to-defeat-the-new-threat-of-cyber-world/article-69280"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/cyber-attack.jpg" alt=""></a><br /><p>डिजिटल और साइबर जगत में नित नए प्रयोग और अविष्कार हो रहे हैं, नई-नई तकनीकियां हमारे सामने आ रही है, जो हमारे कार्य और जीवन को पहले से और अधिक सुविधाजनक बना रही है। शायद यही वजह है कि हम इन्हें अपनाने में  जल्दबाजी और अपरिपक्वता दिखाते है। जिसके कारण यह तकनीकियां कई बार हमारे लिए बेहद जटिल समस्याएं भी खड़ी कर देती हैं। इसी कंप्यूटर और आभासी दुनिया के क्षेत्र में एक नया नाम है आई अर्थात आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीकी या फिर कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रौद्योगिकी। इस टेक्नोलॉजी के विकसित होने के बाद दुनियाभर के लोगों के लिए बहुत सारी नई सुविधाओं के रास्ते खुले हैं, लेकिन उसके साथ-साथ लोगों की निजता भी खतरे के साए में आ गई है। इसी का एक बेहद ही खतरनाक पहलू डीप फेक के रूप में देखने को मिल रहा है। हाल ही में देश की कुछ मशहूर हस्तियां के डीप फेक का शिकार होने के समाचार, टीवी चैनलों और समाचार पत्रों की सुर्खियां बने, जिससे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के दुरुपयोग का नमूना हमारे सामने आया।<br /><br />क्या आप सचमुच जो देखते हैं उस पर विश्वास कर सकते हैं? डीप फेक (डीप लर्निंग और फेक का चित्रण) सिंथेटिक मीडिया हैं, जिन्हें एक व्यक्ति की समानता को दूसरे की समानता से बदलने के लिए डिजिटल रूप से हेरफेर किया जाता है।  डीप फेक गहरी जनरेटिव विधियों के माध्यम से चेहरे की बनावट में हेरफेर है। डीपफेक दृश्य, वीडियो और ऑडियो सामग्री में हेरफेर करने के लिए मशीन लर्निंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी शक्तिशाली तकनीकों का उपयोग किया जाता है। जो अधिक आसानी से धोखा दे सकते हैं। डीप फेक बनाने के लिए उपयोग की जाने वाली मुख्य मशीन लर्निंग विधियां डीप लर्निंग पर आधारित हैं और इसमें जेनरेटर न्यूरल नेटवर्क आर्किटेक्चर शामिल है। अगर साधारण रूप से समझा जाए तो डीप फेक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल कर फेक यानी फर्जी फोटो, ऑडियो या वीडियो बनाए जा सकते हैं। किसी भी तस्वीर, ऑडियो या वीडियो को फर्जी तैयार के लिए, आई की डीप लर्निंग का इस्तेमाल होता है इसलिए इसे डीप फेक कहा जाता है। डीप फेक को अनुभवी लोगों की प्रशिक्षित आंखें ही वास्तविक वीडियो और डीप फेक  कंटेंट के बीच अंतर पहचान सकती है। डीप फेक एक साइबर हमला कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। डीप फेक का चिंतनीय पहलू इसका खतरनाक स्तर तक दुरुप्रयोग किया जाना है। जैसे बाल यौन शोषण सामग्री, प्रसिद्ध हस्तियों के आपत्तिजनक वीडियो, फर्जी समाचार, धमकाने,  ब्लैक मैलिंग और वित्तीय धोखाधड़ी आदि।<br />डीप फेक के माध्यम से दुष्प्रचार और घृणास्पद भाषण फैलाने में, सामूहिक एजेंडा निर्धारित करने और सूचित निर्णय लेने के माध्यम से राजनीतिक इच्छा व्यक्त करने की क्षमता में हस्तक्षेप करके लोकतांत्रिक प्रणालियों पर कुठाराघात कर, प्रजातांत्रिक तंत्र को हानि पहुंचाना आदि कुछ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की चिंतित करने वाली समस्याएं भी सामने आ रही है। डीप फेक छवियों और वीडियो में विशेष असामान्यताएं हो सकती हैं। मेटाडेटा विश्लेषण: डिजिटल फाइल में मेटाडेटा का उपयोग इसकी उत्पत्ति का पता लगाने और प्रामाणिकता निर्धारित करने के लिए किया जा सकता है। फोरेंसिक विश्लेषण- वीडियो पैटर्न और ऑडियो का फॉरेंसिक विश्लेषण किया जा सकता है। नए वीडियो को नकली या वास्तविक के रूप में वर्गीकृत करने में मददगार साबित हो सकता है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि जैसे-जैसे नकली एआई- जनरेटेड और फेस- स्वैपिंग वीडियो अधिक विश्वसनीय होते जाएंगे, उनकी वैधता का पूरी तरह और सही ढंग से आकलन करना और भी कठिन हो जाएगा। अत: ऐसे में जांच के लिए एक से अधिक तकनीकों का प्रयोग किया जा सकता है। दृश्य और श्रवण संबंधी कलाकृतियां, आवाज मुंह की गति का मिलान ठीक से न होना। यदि आप इसे धीमा करते हैं तो वीडियो बहुत अप्राकृतिक लगता है। छवि धुंधली, छाया की कमी, कृत्रिम प्रकाश व्यवस्था। चेहरे की समरूपता संबंधी विसंगतियां जैसे अप्राकृतिक आंखें, कान, दांत, बाल और त्वचा में कृत्रिमता। वीडियो में आवाज संश्लेषित लगती है। उत्पन्न आवाज की निम्न गुणवत्ता। व्यक्ति के चेहरे के भाव के बीच असंगतता या भावना की कमी। <br /><br />सोशल मीडिया पर सनसनीखेज या विवादास्पद वीडियो या ऑडियो पर आंख मिच कर विश्वास न करें। विश्लेषण करना जरूरी है। ऐसी जानकारी पर विश्वास करने या साझा करने से पहले विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी की अच्छे से जांच करें। साइबर सुरक्षा उपकरणों का उपयोग करें, जो अवैध गतिविधियों का पता लगाने और उन्हें रोकने में मदद कर सकते हैं। यदि आपकी व्यक्तिगत जानकारी का ऑनलाइन उपयोग किया जाता है, तो निगरानी रखने और अलर्ट प्राप्त करने के लिए डिजिटल आइडेंटिटी प्रोटेक्शन जैसी सेवाओं का उपयोग करें। जब भी आप डीप फेक (वीडियोए फोटो या ऑडियो) का सामना करते हैं या डीप फेक का शिकार होते हैं, तो इसकी रिपोर्ट  इंटरनेट अपराध शिकायत केंद्र  और स्थानीय पुलिस के साइबर सेल जैसे अधिकारियों को करें। याद रखें, आप अपनी डिजिटल पहचान और गोपनीयता की रक्षा करने में जितना अधिक सफल होंगे, उतने ही आप साइबर अपराध से सुरक्षित रहेंगे। डिजिटल और साइबर दुनिया के बारे में संक्षिप्त में हम कह सकते है कि सावधानी हटी, दुर्घटना घटी।              </p>
<p>-राजेंद्र कुमार शर्मा<br />(ये लेखक के अपने विचार हैं)</p>]]>
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                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 06 Feb 2024 11:47:10 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur]]>
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                <title>जी 20 की वेबसाइट पर हर एक मिनट में 16 लाख साइबर हमले हुए, सभी नाकाम </title>
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                        <![CDATA[जब से यह वेबसाइट शुरू हुई थी इस पर साइबर हमले शुरू हो गये थे लेकिन जैसे जैसे सम्मेलन की तारीख नजदीक आयी इनकी संख्या बढती चली गयी।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/16-lakh-cyber-attacks-on-g20-website-in-one-minute/article-65879"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/g20-cyber-attack.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। पिछले साल सितम्बर में देश में जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान जी-20 सम्मेलन की वेबसाइट पर हर एक मिनट में 16 लाख साइबर हमले किये गये लेकिन देश की सुरक्षा एजेन्सियों ने इन सभी हमलों को नाकाम कर दिया।</p>
<p>भारतीय साइबर अपराध समन्वय केन्द्र (आई 4 सी) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजेश कुमार ने बुधवार को वार्षिक संवाददाता सम्मेलन में बताया कि देश में गत सितम्बर में अंतर्राष्ट्रीय स्तर के महत्वपूर्ण आयोजन जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान जी-20 की वेबसाइट पर हर एक मिनट में 16 लाख साइबर हमले किये गये। उन्होंने कहा कि भारतीय एजेन्सियों ने इन सभी हमलों को विफल कर दिया। उन्होंने कहा कि जब से यह वेबसाइट शुरू हुई थी इस पर साइबर हमले शुरू हो गये थे लेकिन जैसे जैसे सम्मेलन की तारीख नजदीक आयी इनकी संख्या बढती चली गयी।</p>
<p>उन्होंने कहा कि सम्मेलन के दौरान साइबर हमलों की संख्या प्रति मिनट 16 लाख तक पहुंच गयी हालाकि उन्होंने तकनीकी कारणों का हवाला देकर न कुल हमलों की संख्या बतायी  और न ही यह बताया कि ये हमले कहां से किये गये थे।  </p>
<p>एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि देश में साइबर धोखाधड़ी से संबंधित हमलों की हर रोज 5 हजार शिकायतें दर्ज की जाती हैं। उन्होंने कहा कि इन साइबर हमलों में से करीब 50 प्रतिशत देश से बाहर से होते हैं और इनमें से अधिकतर चीन से संचालित गिरोह द्वारा किये जाते हैं । उन्होंने कहा कि चीन से संबंधित गिरोह कंबोडिया और म्यांमार से भी संचालित किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश में पश्चिम बंगाल, ओड़शिा और असम से फर्जी सिम से संबंधित सबसे अधिक मामले सामने आते हैं। </p>
<p>कुमार ने बताया कि साइबर सुरक्षा एजेन्सियों ने विभिन्न मंत्रालयों और बैंकों के साथ मिलकर सवा चार लाख लोगों के साथ हुई धोखाधड़ी के 1127 करोड़ रूपये बचाये हैं। </p>
<p>साइबर अपराध के श्रेणीवार आंकड़े बताते हुए उन्होंने कहा कि अब तक निवेश धोखाधड़ी के सबसे अधिक 1 लाख 49 हजार मामले दर्ज किये गये। इसके बाद रिण ऐप के जरिये धोखाधड़ी की 85 हजार , कस्टमर केयर से धोखाधड़ी की 43 हजार, खाते से धोखाधड़ी की 35 हजार और सेक्सटार्शन की 19 हजार शिकायतें मिली हैं।  उन्होंने कहा कि दिल्ली में प्रति एक लाख व्यक्तियों में से 755 , हरियाणा में 381, तेलंगाना में 261 , उत्तराखंड में 243 और गुजरात में 226 लोगों के साथ साइबर धोखाधड़ी हुई। विभिन्न कार्रवाईयों में अब तक तीन लाख सिम कार्ड जब्त किये गये, 2810 वेबसाइट और 595 ऐप बंद की गयी , 46 हजार से भी अधिक डिवाइस ब्लाक किये गये। </p>
<p>एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि जब भी किसी के साथ किसी भी तरह की साइबर धोखाधड़ी होती है तो उसे सबसे पहले साइबर हेल्पलाइन 1930 पर फोन कर इसकी शिकायत करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि धोखाधड़ी होने के एक घंटे के अंदर यदि शिकायत हो जाती है तो नुकसान होने की बहुत कम गुंजाइश रहती है। उन्होंने कहा कि अभी पीड़ति व्यक्ति को राशि मिलने  में ज्यादा समय लगता है लेकिन सरकार इसे कम करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि देश में हर व्यक्ति को साइबर सुरक्षा के बारे में जागरूक बनने के लिए प्रशिक्षण लेना चाहिए।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jan 2024 20:49:08 +0530</pubDate>
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                <title>साइबर चुनौती से निपटने और प्रौद्योगिकी जरुरतों के लिए विशेष विंग बनायेगी सेना</title>
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                        <![CDATA[बातचीत के दौरान यह महसूस किया गया कि साइबर आधारित और प्रौद्योगिकी आधारित चुनौतियों को देखते हुए और अत्याधुनिक संचार प्रणाली की जरूरत और उसकी सुरक्षा के लिए जल्द से जल्द से कमान साइबर आपरेशन और स्पोर्ट विंग (सीसीओएसडब्ल्य) संचालित किये जाने की जरूरत है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/army-to-create-special-wing-to-deal-with-cyber-challenges/article-44006"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/शीर्षक-रहित-(630-×-400-px)-की-कॉपी-(1)1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। साइबर और प्रौद्योगिकी आधारित चुनौतियों से निपटने तथा अत्याधुनिक संचार प्रणाली की बढ़ती जरुरत तथा उसे सुरक्षित रखने के लिए सेना ने जल्द से जल्द कमान साइबर आपरेशन और स्पोर्ट विंग (सीसीओएसडब्ल्य) संचालित करने का निर्णय लिया है। </p>
<p>सेना की ओर से गुरूवार को जारी वक्तव्य में कहा गया है कि शीर्ष कमांडरों के हाल ही में संपन्न हुए सम्मेलन में सेना को हर पहलू से मजबूत तथा अत्याधुनिक बनाने के लिए सामरिक , प्रशिक्षण, मानव जन संसाधन और प्रशासनिक दृष्टि से अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लियेे गये। <br /><br />सम्मेलन में शीर्ष कमांडरों ने मौजूदा और उभरती सुरक्षा स्थिति का जायजा लिया और सेना की संचालन तैयारियों की समीक्षा की। सम्मेलन में सेना में किये जा रहे सुधारों , फोर्स स्ट्रक्चङ्क्षरग, आधुनिकीकरण , प्रौद्योगिकी और तीनों सेनाओं के एकीकरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी विस्तार से चर्चा की गयी। इसके अलावा सेना में सुधारों की दिशा में शुरू की गयी महत्वाकांक्षी योजना अग्निपथ पर भी सभी पहलुओं से गहन चर्चा की गयी।</p>
<p>बातचीत के दौरान यह महसूस किया गया कि साइबर आधारित और प्रौद्योगिकी आधारित चुनौतियों को देखते हुए और अत्याधुनिक संचार प्रणाली की जरूरत और उसकी सुरक्षा के लिए जल्द से जल्द से कमान साइबर आपरेशन और स्पोर्ट विंग (सीसीओएसडब्ल्य) संचालित किये जाने की जरूरत है। </p>
<p>इसके अलावा सेना को अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी और उपकरणों से लैस करने के लिए मुख्य निदेशालय और टेस्ट बेड फार्मेशन चिन्हित करने का भी निर्णय लिया गया। तकनीकी क्षेत्र में अधिकारियों की कमी को पूरा करने के लिए तकनीकी एंट्री के जरिये भर्ती किये जाने वाले अधिकारियों के मौजूदा भर्ती मॉडल में अगले वर्ष जनवरी से बदलाव करने का भी निर्णय लिया गया। सिमुलेटर से प्रशिक्षण को बढावा देने के लिए इस वर्ष 791 करोड़ रूपये की लागत से 435 सिमुलेटर खरीदने का भी निर्णय लिया गया। </p>
<p>शहीद सैनिकों के विशेष बच्चों के कल्याण की दिशा में भी कदम उठाते हुए सेना बीमा कोष से उनके गुजारा भत्ते को दोगुना करने का निर्णय लिया गया है।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 27 Apr 2023 15:01:41 +0530</pubDate>
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                <title>नाटो की वेबसाइट पर हुआ साइबर हमला</title>
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                        <![CDATA[डीपीए ने बताया कि इसके लिए दोष विशेष रूप से रूसी हैकर समूह किलनेट पर लगाया गया था। इस दावे की पुष्टि करने वाला कोई सबूत उपलब्ध नहीं कराया गया है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/cyber-%E2%80%8B%E2%80%8Battack-on-nato-website/article-37235"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-02/nato.jpg" alt=""></a><br /><p>मास्को ((एजेंसी))। नाटो की वेबसाइटों पर रविवार को साइबर हमला किया गया। जर्मन समाचार एजेंसी डीपीए ने ब्लाक के प्रवक्ता के हवाले से यह जानकारी दी है। रिपोर्ट के मुताबिक साइबर हमले ने एक साथ कई वेबसाइटों को हैक कर लिया।</p>
<p>ब्लॉक के प्रवक्ता ने कहा कि गठबंधन के साइबर विशेषज्ञ सक्रिय रूप से घटना की जांच कर रहे थे। समाचार एजेंसी का कहना है कि सोशल मीडिया पर सुझाव दिया गया कि नाटो विशेष अभियान मुख्यालय (एनएसएचक्यू) की वेबसाइट पर कथित तौर पर हमले के पीछे रुस समर्थक कार्यकर्ता थे।</p>
<p>डीपीए ने बताया कि इसके लिए दोष विशेष रूप से रूसी हैकर समूह किलनेट पर लगाया गया था। इस दावे की पुष्टि करने वाला कोई सबूत उपलब्ध नहीं कराया गया है।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/world/cyber-%E2%80%8B%E2%80%8Battack-on-nato-website/article-37235</link>
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                <pubDate>Mon, 13 Feb 2023 12:36:49 +0530</pubDate>
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